healthy lifestyle

हमारा स्वास्थ्य काफ़ी हद तक हमारे पेट और पाचन तंत्र से जुड़ा रहता है, इसलिए हेल्दी रहने के लिए पाचन तंत्र औरमेटाबॉलिज़्म का सही और हेल्दी रहना बेहद ज़रूरी है. कैसे रखें अपने पाचन तंत्र का ख़्याल आइए जाने.

हो सही शुरुआत: जी हां, दिन की शुरुआत सही होगी तो पूरा दिन सही होगा और सेहत भी दुरुस्त रहेगी. सही शुरुआत केलिए हेल्दी और पौष्टिक नाश्ता ज़रूरी है. नाश्ता पौष्टिक होना ज़रूरी है- फल, ड्राई फ़्रूट्स, दलिया, उपमा, पोहा, कॉर्नफ़्लेक्स, दूध, फ़्रूट जूस, अंकुरित अनाज,दालें, अंडा, पराठे, दही आदि. पौष्टिक नाश्ता आपका दिनभर संतुष्ट रखताऔर इससे पाचन तंत्र संतुलित रहता है. ये दिनभर की ऊर्जा प्रदान करता है. एसिडिटी से राहत दिलाता है, क्योंकि अगरआप नाश्ता नहीं करते हैं, तो ऐसिड बनने लगती है, जो काफ़ी तकलीफ़ देती है.

हेल्दी डायजेशन के लिए प्रोबायोटिक्स ज़रूरी है: क्या आप जानते हैं कि बैक्टीरिया भी हेल्दी और अनहेल्दी होते हैं. हेल्दीबैक्टीरिया पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं. हेल्दी बैक्टीरिया आपको प्रोबायोटिक्स सेमिलते हैं. आप प्रोबायोटिक्स के प्राकृतिक स्रोतों को भोजन में शामिल करें. दही, ख़मीर वाले प्रोडक्ट्स, छाछ व रेडीमेडप्रोबायोटिक्स ड्रिंक्स का सेवन करें.

Digestive Health Tips

स्ट्रेस से दूर रहें: स्ट्रेस यानी तनाव पूरे शरीर व ख़ासतौर से पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इससे गैस, ऐसिडिटी, क़ब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है. तनाव के कारण पेट में ब्लड व ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है जिससेपेट में ऐंठन, जलन जैसी समस्या होने लगती है, साथ ही पेट में मैजूद हेल्दी बैक्टीरिया में भी असंतुलन आने लगता है. इसके अलावा तनाव से नींद भी नहीं आती और नींद पूरी ना होने से पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता. 

प्रोटीन रिच फूड खाएं: ये मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाता है. प्रोटीन के लिए आप पनीर, चीज़ व अन्य डेयरी प्रॉडक्ट्स शामिल करसकते हें. इसके अलावा अंडा, चिकन, फिश भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं और ये मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाते हैं.

Digestive Health Food

सेब, केला और पपीता ज़रूर खाएं: सेब में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो पेट के स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं. सेबफाइबर का अच्छा स्रोत भी है और गुड बैक्टीरिया को पनपाने में भी मदद करता है. पपीते में विटामिन ए, बी और सी औरकई तरह के एन्ज़ाइम्स होते हैं, जो खाने को डायजेस्ट करने में मदद करते हैं. रिसर्च बताते हैं कि पपीता खाने सेडायजेस्टिव सिस्टम में सुधार होता है. केले में फाइबर और पेक्टिन भरपूर मात्रा में होता है, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिएबहुत फायदेमंद होता है.

डायट में फाइबर शामिल करें: भोजन में फाइबर जितना ज़्यादा होगा पेट उतना ही स्वस्थ होगा क्योंकि आपको क़ब्ज़ कीसमस्या नहीं होगी. फाइबर कोलोन की कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है और पेट साफ़ रखता है. अपने भोजन में साबूतअनाज, दालें, गाजर, ब्रोकोली, नट्स, छिलके सहित आलू, मकई, बींस व ओट्स को शामिल करें.

अदरक का सेवन करें: अदरक पेट के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. यह पाचन को बेहतर करता है. अदरक के टुकड़ेकरके ऊपर से नींबू का थोड़ा सा रस डालें और भोजन के साथ खाएं. आपका हाज़मा बेहतर होगा. अपच की समस्या नहीं होगी.

Digestive Health Tips

लहसुन मेटाबॉलिज़्म को बूस्ट करता है: लहसुन को भी डायट में शामिल करें. यह ना सिर्फ़ मेटाबॉलिज़्म को बेहतर करता है बल्कि वज़न कम करने में भी सहायक है और हार्ट को भी हेल्दी रखता है.

जीरा भी है बेहद हेल्दी: जीरा आंतों को और गर्भाशय को भी साफ़ रखता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. जीरा भूख भीबढ़ाता है और पेट संबंधी कई समस्याओं से राहत दिलाता है.

ग्रीन टी है मेटाबॉलिज़्म बूस्टर: जी हां, ग्रीन टी ज़रूर लें इससे पाचन बेहतर होता है. यह मेटाबॉलिज़्म बूस्टर मानी जाती हैऔर वज़न भी कम करती है.

Digestive Health Tips

साबूत अनाज और बींस: यह पाचन तंत्र को ठीक रखने में सहायक होते हैं. क़ब्ज़ से बचाते हैं और पेट संबंधी कईसमस्याओं से राहत दिलाते हैं. इसी तरह बींस में भी फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर करता है. बींस से गुड़बैक्टीरिया भी बढ़ते हैं और कब्ज़ की समस्या भी नहीं होती.

हरी पत्तेदार सब्ज़ियां: ये प्रोटीन व आयरन का भी अच्छा सोर्स मानी जाती हैं और विटामिंस से भरपूर होती हैं. साथ ही साथये पेट को व पाचन तंत्र को हेल्दी रखती हैं. ये फाइबर का बेहतर स्रोत होती हैं, इनमें ख़ासतौर से पालक और गोभी में कईपोषक तत्व- फोलेट, विटामिन ए, सी और के होता है. शोध बताते हैं कि हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में एक ख़ास तरह का शुगरहोता है जो आंतों के हेल्दी बैक्टीरिया (गट बैक्टीरिया) के निर्माण को बढ़ाता है.

रसीले व मौसमी फल व ड्राई फ़्रूट्स खाएं: फल पेट को हेल्दी रखते हैं. क़ब्ज़ की समस्या नहीं होने देते. फाइबर से भरपूरहोते हैं. ड्राई फ़्रूट्स भी फाइबर से भरपूर होते हैं और आंतों को हेल्दी रखते हैं. हाल ही के रिसर्च से पता चला है कि प्रूनयानी सूखा आलूबखारा आंतों, मुंह और वजाइना में पाया जानेवाला ख़ास क़िस्म का बैक्टीरिया के निर्माण में सहायकहोता है जिससे पाचन तंत्र भी मज़बूत होता है. इसी तरह से खजूर भी पेट के लिए काफ़ी हेल्दी माना जाता है.

Boost Metabolism

हाईड्रेटेड रहें: पानी ख़ूब पिएं क्योंकि यह ज़हरीले तत्वों को बाहर करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. शरीर मेंपानी व नमी की कमी ना होने पाए. नींबू पानी, नारियल पानी या ताज़ा फल व सब्ज़ी का जूस भी लें. 

एक्टिव रहें, एक्सरसाइज़ व योगा करें: रोज़ाना 30 मिनट एक्सरसाइज़ करें, वॉक करें, एक्टिव रहें. लिफ़्ट की बजायसीढ़ियों का इस्तेमाल करें. योगा भी कर सकते हैं. साइक्लिंग, स्विमिंग भी कर सकते हें. यह रूटीन आपकी मांसपेशियोंको लचीला बनाएगा और पाचन को बेहतर. वरना शारीरिक गतिविधियों की कमी से क़ब्ज़ जैसी समस्या होने लगेगी.

अनहेल्दी चीज़ों से रहें दूर: पाचन तंत्र की हेल्थ के लिए ज़रूरी है कि अनहेल्दी चीज़ों से भी दूरी बनाए रखें. शराब व कैफेनका सेवन कम करें क्योंकि यह भीतर से शरीर को ड्राई करते हैं और डीहाईड्रेट करते हैं. साथ ही ये क़ब्ज़ की समस्या भीपैदा करते हैं. पानी के नाम पर शुगरी ड्रिंक ना पिएं. तला हुआ ज़्यादा ना खाएं. प्रोसेस्ड फूड व शुगर का सेवन कम या नाकरें. मैदा और ज़्यादा मसालेदार भोजन ना करें, क्योंकि ये क़ब्ज़, गैस, एसिडिटी, अपच को बढ़ाकर पाचन को कमज़ोरकरते हैं.

पूर्वा शर्मा

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हेल्दी तो हम सभी रहना चाहते हैं लेकिन कुछ छोटे छोटे सूत्र हैं जिन पर हम ध्यान ही नहीं देते, अगर ये सूत्र और सीक्रेट हमसमझ जाएँ तो हेल्दी रहना आसान हो जाए. 

आइए जानते हैं इन्हीं सीक्रेट सूत्रों को-

  • सकारात्मक रहें और अपना महत्व समझें. 
  • खुद पर ध्यान देना ज़रूरी है इस तथ्य को समझ लें.
  • दूसरों के लिए जीना अच्छी सोच है लेकिन उससे पहले खुद के लिए जीना सीखें.
  • आप हेल्दी रहेंगे तभी तो दूसरों के लिए भी कुछ कर पाएँगे.
  • हाईड्रेटेड रहें ताकि शरीर में पानी व नमी की कमी ना हो. पानी ज़हरीले तत्वों को बाहर करता है और पाचन क्रियाको बेहतर बनाता है.
  • फ़िज़िकली एक्टिव रहें. एक्सरसाइज़ व योगा करें. आप भले ही कितना भी हेल्दी खा लें पर जब तक शरीर कोक्रियाशील नहीं रखेंगे तब तक कहीं न कहीं कोई कमी रह ही जाएगी. 
  • रोज़ाना कम से कम आधा घंटा कसरत करें. जॉगिंग और वॉकिंग करें.
  • लिफ़्ट की बजाए सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. यह रूटीन आपकी मांसपेशियों को लचीला बनाएगा और पाचन कोबेहतर. 
  • ध्यान और योगा भी कर सकते हैं. मेडिटेशन से ब्रेन में हैप्पी हार्मोंस रिलीज़ होते हैं और एक नई ऊर्जा का एहसासहोता है.
  • ध्यान रहे फ़िज़िकल एक्टिविटी की कमी से क़ब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है.
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  • हेल्दी खाना खायें. अपने दिन की शुरुआत पोषण भरे नाश्ते से करें. 
  • भले ही लंच ठीक से ना करें लेकिन नाश्ता अच्छी तरह और हेल्दी करेंगे तो फ़ैट्स से बचेंगे.
  • रिसर्च बताते हैं कि जो लोग नाश्ता करते हैं उनका एनर्जी लेवल अधिक होता है और वो दिनभर ऐक्टिव बने रहते हैं.
  • जंक फूड से बचें. हेल्दी खाना खाएँ. 
  • मंचिंग के लिए भी हेल्दी ऑप्शन पर ध्यान दें. फ़्राइड सनैक्स की बजाए ड्राई फ़्रूट्स, बेक्ड फ़ूड रखें.
  • स्ट्रेस ना लें, क्योंकि तनाव पूरे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इस से गैस, ऐसिडिटी, क़ब्ज़ जैसी समस्या होसकती है.
  • स्ट्रेस के कारण पेट में रक्त व ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है जिससे पेट में ऐंठन, जलन जैसी समस्या होनेलगती है, साथ ही पेट में मैजूद हेल्दी बैक्टीरिया में भी असंतुलन आने लगता है.
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  • शराब व कैफेन का सेवन कम करें क्योंकि यह भीतर से शरीर को ड्राई और डीहाईड्रेट करते हैं.
  • अपने भोजन में साबूत अनाज, गाजर, ब्रोकोली, नट्स, मकई, बींस, ओट्स, दालें व छिलके सहित आलू को शामिलकरें.
  • मौसमी फल खाएँ और अपने खाने में हर रंग की फल-सब्ज़ियाँ शामिल करें.
  • दही व छाछ का सेवन करें, क्योंकि इनमें हेल्दी बैक्टीरिया होते हैं जो पेट और आँतों को स्वस्थ रखते हैं.
  • पनीर का सेवन करें क्योंकि यह वज़न को भी नियंत्रित रखने में कारगर है.
  • हफ़्ते में एक या दो दिन अपनी क्रेविंग्स के लिए रखें. मनपसंद कुछ खाएँ क्योंकि अगर आप बहुत ज़्यादा स्ट्रिक्टडायट करते हो तो बहुत ज़्यादा समय तक उसको फ़ॉलो कर पाना बेहद मुश्किल है.
  • हेल्दी सूप को अपने डायट का हिस्सा बनाएँ. 
  • किचन में मौजूद मसाले भी बहुत हेल्दी होते हैं , काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, इलाइची,धनिया आदि को खाने में शामिल करें.
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  • अगर गले में ख़राश या सिर में दर्द हो तो चटकीभर दालचीनी पाउडर को पानी के साथ लें. यही नहीं दालचीनी वज़नभी कम करती है. इसे सलाद या दही में मिलाकर ले सकते हैं. यह मुँहासों को भी कम करता है. दालचीनी पाउडर कोपानी में मिलाकर पेस्ट तैयार करें और अप्लाई करें.
  • अगर कफ़ की समस्या हो तो सरसों के तेल में लहसुन और सेंधा नमक मिलाकर गुनगुना करें और सीने पर मालिशकरें.
  • वज़न को नियंत्रण में रखें क्योंकि बढ़ता वज़न कई बीमारियों को जन्म देता है. हार्ट से लेकर ब्लड प्रेशर औरडायबिटीज़ तक जैसी समस्याएँ बढ़ते वज़न के कारण हो सकती हैं.
  • वज़न कम करने के लिए छोटे गोल्स सेट करें और धैर्य ना खोएँ.
  • वज़न कम करने में नींबू और शहद बेहद कारगर हैं. गुनगुने पानी में रोज़ सुबह खाली पेट सेवन करें.
  • स्पोर्ट्स, स्विमिंग या डांस क्लास से जुड़ सकते हैं.
  • अपने शौक़ को ज़रूर पूरा करें, उन्हें मरने ना दें, क्योंकि यही शौक़ आपको जीवंत बनाए रखते हैं.
  • पर्सनल हाइजीन से लेकर ओरल हाइजीन तक के महत्व को समझें और उनपर ध्यान भी दें.
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  • हेल्दी सोशल लाइफ़ मेंटेन करें, क्योंकि इससे आपको अकेलापन और डिप्रेशन नहीं होगा. लोगों की मदद करें यहआपको बेहतर महसूस कराएगा.
  • पार्टी करें, दोस्तों से मिलें और रिश्तों में इंवेस्ट करें.
  • धोखा ना दें क्योंकि यह आपमें अपराधबोध की भावना को जन्म देगा और आप भीतर से अनहेल्दी मेहसूस करेंगे.
  • ज़िम्मेदारी लेना सीखें, यह आपमें आत्मविश्वास बढ़ाएगा.
  • नींद पूरी लें, यह आदत आपको कई तरह के तनावों से बचाएगी और साथ ही दिनभर ऊर्जावान रखेगी. साथ ही यहडिप्रेशन जैसी नकारात्मक भावनाओं से भी आपका बचाव करती है.
  • ओवर ईटिंग और ओवर स्लीपिंग से भी बचें, ये आपको अनहेल्दी बनाती हैं.
  • बहुत ज़्यादा टीवी ना देखें, यह आपको आलसी और इनएक्टिव तो बनाएगा ही साथ ही रिसर्च बताते हैं कि ज़्यादाटीवी देखने वालों की लाइफ़ कम होती जाती है.
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  • इसी तरह मोबाइल और बहुत ज़्यादा सोशल साइट्स पर भी ना बने रहें. ये आपके रिश्तों की सेहत के लिएहानिकारक है जिसका असर आपने शरीर पर भी पड़ता है.
  • कुकिंग थेरेपी आज़माएँ. रिसर्च के अनुसार जब आप खुद खाना बनाते हैं तो स्ट्रेस कम होता है, आप बेहतर महसूसकरते हैं, क्रिएटिव बनते हैं और हेल्दी रहते हैं.
  • नए दोस्त बनाएँ और हो सके तो पेट्स रखें. ये आपको खुश और हेल्दी रखने में मदद करते हैं.
  • खुश होने का मौक़ा ना छोड़ें. बड़ी चीज़ों की बजाए छोटी छोटी चीज़ों में ख़ुशियाँ देखें. यह आपको सकारात्मकबनाती है और मन के संतोष को दूर करती हैं.
  • ये तमाम बातें आपको पहले से ही पता होती हैं लेकिन कमी सिर्फ़ जज़्बे की होती है. बेहतर होगा बिना देर किएआज से ही हेल्दी लाइफ़ के इन सीक्रेट और सूत्रोंको अमल में लाया जाए.

सरस्वती शर्मा

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The Fitness Project by Rujuta Diwekar

फिटनेस प्रोजेक्ट: घी खाएं बिना डरे, बिना शंका व अपराधबोध के… रुजुता दिवेकर का फिटनेस मंत्र (Eat Ghee Without Fear, Without Guilt, Without Doubt: The Fitness Project by Rujuta Diwekar)

फिटनेस प्रोजेक्ट की थीम के अंतर्गत हमने आपको पहले हफ्ते की गाइडलाइन्स की जानकारी दी थी. अब आप जानें कि दूसरे हफ्ते में आपको कैसे डायट व फिटनेस को प्लान करना है.
ब्रेकफास्ट-लंच-डिनर में 1 टीस्पून घी का इस्तेमाल ज़रूर करें. बिना किसी डर के, बिना किसी शंका के, बिना किसी झिझक के और बिना अपराधबोध के बेहिचक, बेझिझक देसी घी का इस्तेमाल ज़रूर करें.

दूसरा हफ्ता- गाइडलाइन 2- कैसे शुरुआत करें?

– आप अपना नाश्ता अपनी पहली मील, जिसे आप पहले हफ्ते से फॉलो कर रहे हैं, उसके 20-90 मिनट बाद ले सकते हैं.

– दोपहर में यदि मीठा खाने की इच्छा हो या फिर आलस महसूस हो यानी आपको यह लगे कि आप अपनी क्षमता का मात्र 50% ही इस्तेमाल करके काम कर रहे हैं, तो लंच में एक्स्ट्रा टीस्पून देसी घी का डालें.

– यदि आपको कब्ज़ की समस्या रहती है, पाचन संबंधी समस्या रहती है या अच्छी नींद नहीं आती, तो रात के खाने में भी एक अतिरिक्त टीस्पून घी का इस्तेमाल करें.

घी के इस्तेमाल के अन्य तरीके, ख़ासतौर से सर्दियों में अपने जोड़ों को लचीला व त्वचा को ग्लोइंग इफेक्ट देने के लिए-
– घी में मखाने भूनकर खाएं, मिड मील यानी चाय के साथ लगभग 4 बजे.

– देसी घी में बने गोंद के लड्डू, ख़ासतौर से यदि आप उत्तर भारत या दुनिया में कहीं भी बेहद ठंडी जगहों पर रहते हों, तो मिड मॉर्निंग मील (नाश्ते के 2-3 घंटे बाद) के तौर पर खाएं.

– घी और गुड का सेवन करें, यदि आपको पीएमएस यानी पीरियड्स से पहले की तकलीफ़ होती हो, थकान महसूस होती हो या आपको हीमोग्लोबिन स्तर कम हो तो.

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आमतौर पर पूछे जानेवाले सवाल

मुझे हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर आदि की समस्या हो, तो क्या घी का सेवन किया जा सकता है?
जी बिल्कुल. घी मेटाबॉलिज़्म में लिपिड्स को बढ़ाकर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है. बेहतर होगा पैक्ड बिस्किट्स न खाएं और अल्कोहल बंद करें, न कि घी. घी पूरी तरह सुरक्षित व हेल्दी है.

मुझे डायबिटीज़, पीसीओडी है और मैं ओवरवेट हूं, तो क्या मैं घी ले सकता/सकती हूं?
जी हां, ज़रूर ले सकते हैं, क्योंकि घी में भी एसेंशियल फैटी एसिड का एक प्रकार होता है, जो वज़न और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है.

हम देसी घी में ही खाना बनाता है, इसके बाद भी क्या ऊपर से अतिरिक्त घी डालेन की आवश्यकता है?
यह पूरी तरह आप पर निर्भर है. यह ख़्याल रखें कि आप दिन में 3-6 टीस्पून घी का सेवन करें. घी खाने का स्वाद बढ़ाता है, न कि उसे मास्क करता है.

हम तेल में खाना बनाते हैं, तो क्या हमें ऊपर से घी मिलाना चाहिए?
जी हां, ज़रूर.

क्या स्टोर से ख़रीदा घी ठीक रहेगा या हमें घर पर बनाना चाहिए?
आपको यह ध्यान में रखना होगा कि देसी गाय के दूध से बना घी हो. बड़े ब्रान्ड्स की बजाय छोटी गौशाला या महिला गृह उद्योग जैसी संस्थाओं से लेना श्रेयस्कर है.

अगर देसी गाय का घी उपलब्ध न हो, तो क्या भैंस का घी इस्तेमाल किया जा सकता है?
जी हां, आप कर सकते हैं. यह बड़े ब्रान्ड्स से घी ख़रीदने से कहीं बेहतर होगा.

भारत के बाहर रहनेवालों के लिए क्या विकल्प हैं?
कल्चर्ड व्हाइट ऑर्गैनिक बटर या क्लैरिफाइड बटर, जो हेल्थ फूड स्टोर्स पर मिलता हो. बेहतर होगा कि खुले में स्वतंत्र चरनेवाली या घास खानेवाली गाय के ही डेयरी प्रोडक्ट्स यूज़ करें.

क्या हमें मांसाहार पर भी घी का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि वो तो पहले से ही काफ़ी फैटी होता है.
आपको ज़रूर देसी घी यूज़ करना चाहिए, क्योंकि घी का अनूठा फैटी एसिड स्ट्रक्चर शरीर के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है.

हमें कैसे पता चलेगा कि हर खाने में कितना और कितनी मात्रा में घी का इस्तेमाल करना है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या खा रहे हैं और यह जानकारी एक परिपेक्ष में सामान्यतौर पर समझ के लिए है. दाल-चावल, खिचड़ी या रोटी-सब्ज़ी में कम घी यूज़ होता है, जबकि पूरन पोली, दाल-बाटी, बाजरा रोटी में अधिक घी की आवश्यकता होती है. यदि किसी तरह का कंफ्यूज़न हो, तो घर की बुज़ुर्ग यानी दादी-नानी से सलाह लें.

घी व उसके इस्तेमाल से संबंधित अधिक जानकारी के लिए इंडियन सुपरफूड्स का घी चैप्टर पढ़ें.

घी के हेल्थ बेनीफिट्स के लिए देखें यह वीडियो

Why you must add Ghee in your meals

The fitness project 2018 – week 2 guideline #RDfitnessproject2018

Posted by Rujuta Diwekar on Tuesday, 9 January 2018

सौजन्य: https://www.rujutadiwekar.com

Rujuta Diwekar

फिटनेस का मतलब वेटलॉस या पतला होना नहीं होता… रुजुता दिवेकर का फिटनेस मंत्र! (Theme- fitness is simple and uncomplicated- The Fitness Project by Rujuta Diwekar)

– फिटनेस बेहद सिंपल है, इसमें आपको क्रांतिकारी डायट प्लान या वर्कआउट्स करने की ज़रूरत ही नहीं.
– दरअसल फिटनेस का मतलब ही लोग ग़लत समझते हैं. फिटनेस का अर्थ पतला हो जाना या वेटलॉस नहीं होता.
– फिटनेस वो होती है, जो आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करती है, उस पर असर डालती है, जैसे- आपका एनर्जी लेवल, नींद की क्वालिटी, पाचन शक्ति आदि.
– रुजुता दिवेकर ने अपने 12 हफ़्तों के फिटनेस प्रोजेक्ट को जब लॉन्च किया था, तो उन्हें बहुत ही ज़्यादा लोगों का समर्थन मिला.
– लोगों को इससे बेहद लाभ भी मिला. उनके इंचेज़ कम हुए और वो अधिक फिट महसूस करने लगे.
पहला हफ़्ता- गाइडलाइन 1- कैसे शुरुआत करें?
– अपने दिन की शुरुआत एक केले से करें या किसी भी फ्रेश फ्रूट से या फिर आप भिगोए हुए बादाम या किशमिश भी ले सकते हैं. चाय-कॉफी से अपना दिन शुरू न करें.
– हां, 10-15 मिनट बाद आप चाय-कॉफी ले सकते हैं.
– यह उठने के 20 मिनट के भीतर ही खा लें और अगर आपको थायरॉइड है, तो गोली लेने के बाद यह मील लें.

यह भी पढ़ें: आर्ट ऑफ ईटिंग राइट: सही खाना और कैलोरीज़ गिनना एक-दूसरे के विपरीत है- रुजुता दिवेकर (Indian Food Wisdom And The Art Of Eating Right By Rujuta Diwekar)

– केला दरअसल उनके लिए सही होता है, जिन्हें या तो पाचन संबंधी समस्या होती है या फिर खाने के बाद कुछ मीठा खाने का मन होता है. बेहतर होगा ताज़ा लोकल वेरायटी का केला लें. हफ़्ते में 2-3 बार ख़रीदें और उन्हें प्लास्टिक बैग की बजाय कपड़े के थैले में लाएं.
– 7-8 भीगी हुई किशमिश केसर के एक या दो स्ट्रैंड के साथ खाएं, यदि आप लो एनर्जी महसूस करते हैं या आपको पीएमएस की बहुत अधिक समस्या है.
– 4-6 भिगोए व छीले हुए बादाम उनके लिए, जिन्हें डायबिटीज़, पीसीओडी, नींद की समस्या, लो फर्टिलिटी है. पीसीओडी की समस्या है, तो पीरियड्स से 10 दिन पहले किशमिशवाले प्लान पर आ जाएं.
– सुबह के इस मील के बाद आप 15-20 मिनट योगा या वर्कआउट कर सकते हैं.
– अगर वर्कआउट नहीं करते, तो इसके बाद एक घंटे के भीतर ही नाश्ता कर सकते हैं.
– सुबह जो पानी पीते हैं, उसे प्लेन ही रखें, उसमें कुछ भी न मिलाएं.
यह पहले हफ़्ते के लिए गाइडलाइन है, उसके बाद हम धीरे-धीरे एक-एक हफ़्तों की गाइडलाइन पर बात करेंगे.

इस फिटनेस प्रोजेक्ट को बेहतर समझने के लिए देखें यह वीडियो

Start your day with banana/ dry fruits

‘The fitness project 2018’ – an open participation public health project – Week 1 guideline#RDfitnessproject2018

Posted by Rujuta Diwekar on Tuesday, 2 January 2018

सौजन्य: https://www.rujutadiwekar.com

Ishi Khosla

जानें क्या है मेटाबॉलिक सिंड्रोम… यूं कम करें पेट के फैट्स- इशी खोसला (About Metabolic Syndrome… How To Reduce Belly Fat- Ishi Khosla)

अक्सर लो अपने पेट की चर्बी से परेशान रहते हैं, डायटिंग, एक्सरसाइज़ करने पर भी उन्हें वो रिज़ल्ट नहीं मिल पाता, जिसकी वो उम्मीद करते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि वो पेट के फैट्स के मूल कारणों को नहीं जान पाते. इस विषय पर अधिक जानते हैं कि इशी खोसला किस तरह से मार्गदर्शन करती हैं. इशी खोसला अपने आप में जाना-माना नाम है. वो प्रैक्टिसिंग क्लिनिकल न्यूट्रिशिनिस्ट, कंसल्टेंट और राइटर हैं. आप भी उनके बताए डायट व हेल्थ प्लान्स फॉलो करें और हमेशा हेल्दी रहें.

पेट के फैट्स की प्रमुख वजहें हैं- हाई ब्लड प्रेशर, गुड फैट्स की कमी, बैड फैट्स की अधिकता, ट्रायग्लिसरॉइड्स की अधिक मात्रा, ब्लड शुगर की अधिकता या फिर वंशानुगत डायबिटीज़- जिसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम या सिंड्रोम एक्स भी कहा जाता है. यह कोई बीमारी नहीं, पर रिस्क फैक्टर्स का कॉम्बीनेशन है.

सवाल यह है कि इन सबके चलते ज़िद्दी फैट्स को कैसे भगाया जाए? हेल्दी ईटिंग, लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज़ और स्ट्रेस मैनेजमेंट से यह किया जा सकता है.

शरीर के वज़न को नियंत्रित रखें: संतुलित खानपान व क्रियाशीलता से यह हो सकता है. साबूत अनाज, नट्स, फ्रूट्स, सब्ज़ियां, दालें और बीजों से अपने डायट को हेल्दी बनाएं. मीठा खाना-पीना व अल्कोहल का सेवन कम कर दें.

गुड कैलोरीज़वाला भोजन लें: फाइबर, गुड कैलोरीज़, प्रोटीन, कॉम्प्लैक्स कार्बोहाइड्रेट को अपने डायट का हिस्सा बनाएं.

हाई कैलोरी फुड से बचें: बहुत ज़्यादा ऑयली, फैटी, फ्राइड फूड न लें. मीठा व स्वीट ड्रिंक्स से बचें. कम पोषण वाले भोजन को अवॉइड करें. नमक कम खाएं. बेहतर होगा पिज़्ज़ा, बर्गर व अन्य जंक फूड से दूर रहें.

स्मार्ट स्नैकिंग करें: स्नैकिंग के लिए बेक्ड व रोस्टेड चीज़ें ख़रीदें. इसके अलावा ड्राय फ्रूट्स, फ्रेश फ्रूट्स आदि लें.

फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं: वॉकिंग करें, जॉग करें. लाइट एक्सरसाइज़ करें. रोज़मर्रा की दिनचर्या में भी लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. ऑफिस में बीच-बीच में जगह से उठकर राउंड लगाकर आएं. इस तरह अपनी फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं. इससे ब्लड शुगर, व प्रेशर के साथ-साथ आपका वज़न भी काफ़ी नियंत्रित रहता है.

स्ट्रेस मैनेज करें: मेडिटेशन, योगा, ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ और पॉज़िटिव सोच बेहतरीन तरी़के हैं अपने स्ट्रेस को मैनेज करने के. स्ट्रेस आए इससे पहले ही यदि इन हेल्दी एक्टिविटीज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लें, तो स्ट्रेस आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता. बहुत से लोग स्ट्रेस ईटिंग भी करते हैं, ऐसे में स्ट्रेस कम होगा, तो आप बेवजह कैलेरीज़ नहीं खाएंगे.

दरअसल ईटिंग हैबिट्स और डायटिंग को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां हैं हम सबके मन में. इसे बेहतर तरी़के से समझने के लिए इस वीडियो को फॉलो करें, पर इसे मेडिकल एडवाइस के तौर पर न लें.

सौजन्य: http://www.theweightmonitor.com/

Rujuta Diwekar
आर्ट ऑफ ईटिंग राइट: सही खाना और कैलोरीज़ गिनना एक-दूसरे के विपरीत है- रुजुता दिवेकर (Indian Food Wisdom And The Art Of Eating Right By Rujuta Diwekar)

वेटलॉस को लेकर बहुत-से मिथ्स हैं. जब तक इन्हें दूर कहीं करेंगे, ग़लतियों करते रहेंगे. इस विषय पर जानीमानी स्पोर्ट्स साइंस और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट रुजुता दिवेकर ने बहुत कुछ बताया और लोगों को सही मार्गदर्शन दिया है. रुजुता दिवेकर न स़िर्फ भारत बल्कि विश्‍व के सबसे अधिक फॉलो किए जानेवाले न्यूट्रिशनिस्ट्स में से एक हैं. वो बेस्ट सेलिंग ऑथर भी हैं और हेल्थ व वेलनेस पर बेहतरीन स्पीकर भी. यही वजह है कि उन्हें एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएनटेरोलॉजी द्वारा न्यूट्रिशन अवॉर्ड से भी नवाज़ा जा चुका है.
जी हां, हम अक्सर डायटिंग और वेटलॉस का मतलब यही समझते हैं कि कैलोरीज़ गिन-गिनकर खाओ और कम खाओ. बहुत-सी चीज़ें न खाओ, जबकि यह सोच ही ग़लत है. सही खाना और सही एक्सरसाइज़ ही आपको सही रिज़ल्ट दे सकते हैं. यही नहीं हर किसी की ज़रूरत व शरीर अलग होता है. अगर कोई डायबिटीज़ या हार्ट पेशेंट है तो उसका खान-पान अलग होगा.

क्या है सही खाना और सही डायट प्लान?
– लोकल फूड खाएं. आप जहां रहते हैं, वहां के वातावरण व लाइफस्टाइल के हिसाब से खाना आपको अधिक सूट करता है. भारत में रहकर यदि आप विदेशी फल व सब्ज़ियां खाएंगे, तो आपको उतना लाभ नहीं मिलेगा, जितना भारतीय फल व सब्ज़ियां खाने से मिलेगा.
– मौसमी चीज़ें खाएं. मौसमी फल व सब्ज़ियां खाने से हिचकें नहीं.
– अपने हाथों से बनाकर हेल्दी खाना खाएं.
– अपनी ज़रूरतों व आसपास के वातावरण के अनुसार अपना डायट प्लान बनाएं.
– हर किसी का शरीर अलग होता है, क्योंकि उनके रहन-सहन का तरीक़ा, उनका स्ट्रेस लेवल, उनकी ईटिंग हैबिट्स, डायट पैटर्न आदि भी अलग होता है.
– ऐसे में उनके सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सही डायट प्लान और एक्सरसाइज़ प्लान सिलेक्ट करना ज़रूरी है.
– आपको एक्सपर्ट बता पाएंगे कि आपके लिए क्या सही है.
– बिना सोचे-समझे खाना कम कर देने से फ़ायदे की जगह नुक़सान हो सकता है. हो सकता है सही पोषण न मिलने पर कमज़ोरी आ जाए. बेतहर होगा पूरी सजगता व सही जानकारी के आधार पर ही डायट व एक्सरसाइज़ करें.

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कैलोरीज़ नहीं, प्राण गिनें…
जहां एक तरफ़ वेस्टर्न कल्चर ने हमें कैलोरीज़ गिनना सिखाया है, वहीं हमारी सांस्कृतिक धरोहर ने हमें प्राणों यानी प्राणिक वैल्यू का महत्व बताया है. पेड़, पौधों और फसलों को प्राण कहां से मिलता है- हवा, पानी, सूर्य और मिट्टी में जो पोषक तत्व हैं उससे. जब उन्हें यह सही मात्रा में नहीं मिलेगा, तो ज़ाहिर है वो बीमार होंगे. ठीक इसी तरह हमें भी यदि ज़रूरी तत्व सही मात्रा में नहीं मिलेंगे, तो हम भी बीमार होंगे. प्राण क्या है? वो जीने का तत्व यानी जीने की ऊर्जा है. लेकिन यह ऊर्जा पश्‍चिम के शब्द एनर्जी से बिल्कुल अलग है. उनके लिए एनर्जी कैलोरीज़ होती हैं, जिन्हें गिनना ज़रूरी है, जबकि प्राण वो जीवनी शक्ति है, जो आपको संतुलित ऊर्जावान, ताज़ा व हल्का महसूस कराती है. इस वीडियो से आप इसे बेहतर तरी़के से समझ सकते हैं और हेल्दी लाइफ की ओर बढ़ सकते हैं.

सौजन्य: https://www.rujutadiwekar.com

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Health Problems

किस हेल्थ प्रॉब्लम में क्या खाएं, क्या न खाएं? (Health Problems Associated With Foods)

रोज़मर्रा की व्यस्त जीवनशैली में हम अक्सर कुछ न कुछ ऐसा खा लेते हैं, जो संतुलित तो बिल्कुल नहीं होता, लेकिन उसे खाने से कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या (Health Problems) ज़रूर खड़ी हो जाती है. न चाहते हुए डॉक्टर के पास जाना ही पड़ता है. यदि आप डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि किस बीमारी में क्या खाएं और क्या न खाएं?

डायबिटीज़

क्या खाएं?

–    हरी सब्ज़ियां, सोया, मूंग, काला चना, ब्राउन राइस, राजमा और अंडे का  स़फेदवाला भाग- ये लो ग्लाइसेमिक इंडेक्सवाली चीज़ें होती हैं, जो शरीर में जाकर धीरे-धीरे ग्लूकोज़ में बदलती हैं.

–    प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीज़ें खाएं, जैसे- लोबिया और स्प्राउट्स आदि.

–    फलों में चेरी, स्ट्रॉबेरी, सेब, संतरा, अनार, पपीता आदि और सब्ज़ियों में करेला, लौकी, तोरई, कद्दू, खीरा, टमाटर आदि खाएं.

–    रोज़ाना एक मुट्ठी मिक्स ड्रायफ्रूट्स ज़रूर खाएं.

–    करेला, लौकी, टमाटर, ऐलोवीरा का जूस डायबिटीज़ में बहुत फ़ायदेमंद होता है.

क्या न खाएं?

–    गुड़, शक्कर, शहद, चॉकलेट, केक, पेस्ट्री आदि मीठी चीज़ें न खाएं.

–    मैदा, सूजी, स़फेद चावल, स़फेद ब्रेड, नूडल्स, पिज़्ज़ा, बिस्किट्स न खाएं. ये हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्सवाली चीज़ें होती हैं, जो शरीर में जाकर जल्दी-जल्दी ग्लूकोज़ में परिवर्तित होती हैं.

–    तली हुई चीज़ें, मक्के का आटा, पैक्ड फूड बिल्कुल न लें.

–    आम, चीकू, केला, अंगूर, अनन्नास में ज़्यादा शक्कर होता है, इसलिए इन्हें न खाएं.

–    स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर सब्ज़ियां- आलू, अरवी, जिमीकंद, कटहल, शकरकंद, चुकंदर न खाएं, क्योंकि इनमें ग्लूकोज़ अधिक होता है.

हार्ट अटैक

क्या खाएं?

–    हरी सब्ज़ियां, दालें, स्ट्रॉबेरी, संतरा, केला, सीताफल- इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम होता है.

–    सूप, सलाद, खट्टे फल, आड़ू, सोया, नींबू पानी, काला चना, लोबिया खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है.

–    ओमेगा3 से भरपूर- बादाम, अलसी, फिश ऑयल और अखरोट ज़रूर लें.

क्या न खाएं?

–    हाई फैट डायट (मक्खन, घी, मलाई आदि) में सैचुरेटेड फैट होता है, इसलिए इनका सेवन कम करें.

–    खाने में नमक की मात्रा कम रखें. टेबल सॉल्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें.

–    अजीनोमोटो, बेकिंग पाउडर, सॉस, अचार, पैक्ड फूड, बेकरी फूड न खाएं.

अस्थमा

क्या खाएं?

–    नींबू, कीवी, आंवला, ब्रोकोली, टमाटर, शिमला मिर्च में विटामिन सी अधिक होता है.

–    डायट में जौ और चोकर सहित गेहूं के आटे की रोटियां, दलिया, मूंग दाल ज़रूर लें.

–    चेरी, खुबानी, शकरकंद, हरी मिर्च, गाजर में बीटा कैरोटिन होता है, इन्हें ज़रूर खाएं.

–    प्रोटीन, विटामिन बी और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे- दाल, सोयाबीन, अंडा, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां आदि खाएं.

–    भिगोई हुई मूंगफली अस्थमा में बहुत फ़ायदेमंद होती है.

क्या न खाएं?

–    तला हुआ भोजन, जंक फूड, पैक्ड फूड, बासी खाना, मक्खन न लें.

–    तली हुई मूंंगफली बिल्कुल न खाएं.

–    डेयरी प्रोडक्ट्स, खट्टी व ठंडी चीज़ें न खाएं.

–    केला, पका हुआ चुकंदर, कटहल, लोबिया आदि न लें.

कब्ज़

क्या खाएं?

–    कब्ज़ होने पर बिना नमक और बटरवाले पॉपकॉर्न खाएं. कम कैलोरीवाले इस फूड आइटम में फाइबर बहुत अधिक होता है.

–    आलूबुखारे में फाइबर के साथ-साथ सोर्बिटोल (विशेष तरह का कार्बोहाइड्रेट) होता है, जो कब्ज़ से राहत दिलाता है.

–    सब्ज़ियों की तुलना में बीन्स में दोगुना फाइबर होता है. बीन्स को सब्ज़ी के तौर पर ही नहीं, सूप, पास्ता और पुलाव में भी डालकर खा सकते हैं.

–    खुबानी, अंजीर, खजूर और किशमिश में फाइबर अधिक मात्रा में होते हैं, जो कब्ज़ दूर करते हैं.

–    ब्रोकोली, साबूत अनाज, होल गे्रन ब्रेड, पका हुआ केला, फल और फाइबरयुक्त चीज़ें विशेष रूप से खानी चाहिए.

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क्या न खाएं?

–    पनीर, आइस्क्रीम आदि डेयरी प्रोडक्ट्स दूध से बने होते हैं और दूध कब्ज़ बढ़ाता है.

–    फैट बढ़ानेवाले स्नैक्स, विशेष रूप से पोटैटो वेफर्स, फे्रंचफ्राइज कब्ज़ की समस्या और बढ़ा सकते हैं.

–    बेकरी प्रोडक्ट्स, जैसे- कुकीज़, पेस्ट्री और केक न खाएं, क्योंकि इनमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं.

–    कच्चा केला, प्याज़, मूली, रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड (व्हाइट राइस, व्हाइट ब्रेड, व्हाइट पास्ता आदि) से कब्ज़ बढ़ता है.

–    उड़द दाल, अरवी, बैंगन, मसूर, मैदा से बनी चीज़ें, ठंडा व बासी खाना न खाएं.

डायरिया

क्या खाएं?

–    केला, दही-चावल, मूंग दाल खिचड़ी, धुली मसूर या मूंग दाल का सूप, लौकी का रायता जैसी हल्की चीज़ें खाएं.

–    ककड़ी, खीरा, तरबूज़, खरबूजा आदि वॉटरी फ्रूट्स ज़्यादा लें.

–    पपीता, बेल का मुरब्बा, मीठा सेब, अनार आदि फलों का सेवन करें.

–    नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, लस्सी, गन्ने का रस या फलों का जूस पीएं.

–    दही में केला मिलाकर नाश्ते, दोपहर और शाम को खाने से डायरिया में आराम मिलता है.

क्या न खाएं?

–    आलू, इमली, बैंगन, अरवी, ब्रोकोली, प्याज़, बीन्स, पत्तागोभी, अचार न खाएं.

–    तला, मसालेदार, बासी और गरिष्ठ भोजन खाने से बचें.

–    बिना ढकी हुई या बहुत देर से काटकर रखी हुई चीज़ें न खाएं.

–   सड़क के किनारे खड़े हॉकर्स या

शादी-पार्टी में पहले से कटा हुआ फ्रूट चाट-सलाद न खाएं.

सर्दी-ज़ुकाम

क्या खाएं?

–    सेब, चीकू, पपीता, अंजीर, शहतूत, अनार, कीवी, अंगूर आदि विटामिन सी से भरपूर फल व सब्ज़ियां खाएं.

–    सब्ज़ियों में पालक, चुकंदर, ब्रोकोली, लाल शिमला मिर्च, मशरूम, शलगम और गाजर ज़रूर खाएं.

–    गुड़ की तासीर गरम होती है, इसलिए गुड़ से बनी हुई चीज़ें खाएं.

क्या न खाएं?

–    यदि आपको सर्दी-ज़ुकाम जल्दी-जल्दी होता है, तो दही, पनीर, चीज़ कम खाएं. ये चीज़ें कफ़बढ़ाती हैं. सर्दी-ज़ुकाम सीज़नल प्रॉब्लम है, तो रात को दही न खाएं.

–    फ्राइड फूड, मसालेदार खाना, ठंडी चीज़ें, व्हाइट ब्रेड, पास्ता, नूडल्स न खाएं.

कफ़

क्या खाएं?

–    जिन चीज़ों की तासीर गरम हो, वे अधिक खाएं, जैसे- गरम सूप, गरम चाय आदि.

–    सिट्रस फल, अनन्नास, अनार, सेब, मौसंबी, बेरीज़, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, सोयाबीन, फलियां ज़्यादा से ज़्यादा खाएं.

–    तुलसी, सोंठ, शहद और अदरक का सेवन अधिक करना चाहिए.

क्या न खाएं?

–    दूध, बटर, पनीर, फैट बढ़ानेवाले फूड और नॉनवेेज फूड कम खाएं.

–    ठंडी चीज़ें खाने से कफ़ बढ़ता है, इसलिए उन्हें अवॉइड करें.

– देवांश शर्मा

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Fitness Special
मॉनसून में फिटनेस के लिए इंडोर एक्टिविटीज़ (Fitness Special: Indoor Activities For Monsoon)

ख़ुद को फिट रखना आपका पैशन है, लेकिन बारिश की वजह से आप जिम नहीं जा पा रहे हैं. कोई बात नहीं, इंडोर एक्टिविटीज़ करके भी आप फिट रह सकते हैं. ट्रेडमिल, स्किपिंग, सूर्य नमस्कार, ऐरोबिक्स आदि बहुत सारी इंडोर एक्टिविटीज़ हैं, जिनके लिए किसी इक्विपमेंट की ज़रूरत नहीं होती और न ही जिम जाने की.

सूर्य नमस्कार
यह अपने आप में कंप्लीट एक्सरसाइज़ है. सूर्य नमस्कार करने के बाद अन्य वर्कआउट करने की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि इसमें इतने सारे स्टेप्स होते हैं, जिनसे पूरी बॉडी स्ट्रेच होती है और बॉडी भी शेप में रहती है. यदि आप भी मॉनसून में फिट एंड फाइन रहना चाहते हैं, तो प्रतिदिन कम से कम 20 बार सूर्य नमस्कार करें. धीरे-धीरे अपने स्टैमिना के अनुसार सूर्य नमस्कार का समय बढ़ाएं.

ब्रिस्क वॉक
मॉनसून में अगर वर्कआउट करने का मूड नहीं है, तो कोई बात नहीं. कान में ईयर फोन लगाकर म्यूज़िक सुनते हुए आप घर के अंदर ही 15-20 मिनट की ब्रिस्क वॉक कर सकते हैं.

स्किपिंग
मॉनसून में स्किपिंग करके भी आप फिट रह सकते हैं. फिटनेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि रोज़ाना 20 मिनट स्किपिंग करने से 700 कैलोरीज़ बर्न होती है. हड्डियां व जोड़ मज़बूत होते हैं और मांसपेशियां लचीली बनती हैं.

पुशअप्स एंड प्लैंक्स
पुशअप और प्लैंक्स करने के लिए किसी इक्विपमेंट की ज़रूरत नहीं होती. इसे करने से पीठ, पेट और पैर मज़बूत होते हैं, साथ ही फिज़िकल स्टैमिना बढ़ता है. मॉनसून में अगर फिट रहना चाहते हैं, तो प्रतिदिन कम से कम 20 पुशअप एंड प्लैंक्स करें. धीरे-धीरे अपने स्टैमिना के अनुसार बढ़ाते जाएं.

ट्रेडमिल
मॉनसून वर्कआउट के बारे में सोचते ही सबसे पहला नाम ट्रेडमिल का आता है. ट्रेडमिल पर रोज़ाना 15 मिनट से 45 मिनट तक चल सकते हैं. इसके अलावा ट्रेडमिल पर आप ब्रिस्क वॉक और जॉगिंग भी कर सकते हैं.

इंडोर साइकिलिंग
पार्क जैसी खुली हवादार जगह पर साइकिलिंग करने का मज़ा ही अलग है, लेकिन बारिश में साइकिलिंग करना थोड़ा ख़तरनाक हो सकता है, पर परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. टे्रडमिल की तरह इंडोर साइकिलिंग करके भी आप मॉनसून में एक्टिव रह सकते हैं.

होम कार्डियो वर्कआउट
जिम जाने का मूड नहीं, तो होम कार्डियो वर्कआउट करें. इस वर्कआउट की शुरुआत क्विक वॉर्मअप सेशन से करें, फिर जंपिंग जैक, डंबल्स, बाईसेप्स कर्ल, ट्राईसेप्स कर्ल, स्कवैट्स और माउंटेन क्लाइंबर भी ट्राई कर सकते हैं. इन एक्सरसाइज़ को प्रतिदिन 30 मिनट करने से बांहें और पैर मज़बूत होते हैं.

डांस
इंडोर मॉनसून वर्कआउट को एंजॉय करने का बेस्ट तरीक़ा है डांस. वर्कआउट के लिए ऐसे सॉन्ग का सिलेक्शन करें, जो हाई एनर्जीवाले हों. इन हाई एनर्जीवाले सॉन्ग पर आप सोलो डांस भी कर सकते हैं और पार्टनर के साथ भी. डांस करने से एक्स्ट्रा कैलोरीज़ बर्न होती है और मांसपेशियां भी स्ट्रेच होती हैं.

ऐरोबिक्स
ऐरोबिक्स करने का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि आप जिम गए बिना अपना वज़न कम कर सकते हैं और अपने को फिट रख सकते हैं. इस इंडोर एक्टिविटी को करने से मसल्स टोन्ड होती हैं और आप ख़ुद को भी एक्टिव महसूस करते हैं.

योगा
बारिश के कारण अगर जिम नहीं जा पा रहे हैं, तो आप योगा करके ख़ुद को फिट रख सकते हैं. क्या आप जानते हैं कि रोज़ाना 45 मिनट योगा करने से 700 कैलोरीज़ बर्न होती हैं. इसे करने से बॉडी में फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है, इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है और श्‍वसन तंत्र में होनेवाली समस्याएं दूर होती हैं, जो मॉनसून में होना आम बात है.

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Indoor Fitness

हाउसहोल्ड एक्टिविटीज़
मॉनसून में हाउसहोल्ड एक्टिविटीज़ करके आप एक्टिव रह सकते हैं. शेल्फ्स और अलमारियां साफ़ करें, मशीन की जगह हाथों से कपड़े धोएं, पोछा लगाएं आदि. इन एक्टिविटीज़ से आप फिट भी रहेंगे और धीरे-धीरे आपका घर भी क्लीन हो जाएगा.

सीढ़ियां चढ़ना-उतरना
बारिश के मौसम में वॉकिंग या जॉगिंग करना संभव नहीं है, तो रोज़ाना 20 मिनट तक सीढ़ियां चढ़ें और उतरें. इस मौसम में एक्स्ट्रा कैलोरीज़ बर्न करने के लिए यह बेस्ट वर्कआउट है. फिटनेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आप रोज़ाना 15 मिनट भी सीढ़ियां चढ़ते-उतरते हैं, तो आपका 80% तक वर्कआउट होता है. यह ट्रेडमिल पर चलने जैसा ही वर्कआउट है. अगर आपके पास ट्रेडमिल नहीं है, तो ख़रीदने की बजाय सीढ़ियां चढ़ें-उतरें. सीढ़ियां चढ़ने व उतरने से न केवल मांसपेशियां लचीली होती हैं, बल्कि मेटाबॉलिक रेट भी बढ़ता है.

स्पोर्ट्स
अगर आपके घर के आसपास कोई क्लब हाउस या जिम है, तो वहां जाकर इंडोर गेम्स भी खेल सकते हैं, जैसे- बैडमिंटन, टेबल टेनिस, स्न्वैश आदि. स्पोर्ट्स बॉडी में एकत्रित फैट्स को कम करने और ख़ुद को एनर्जेटिक रखने का बेस्ट ऑप्शन है.

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Home Fitness

बच्चों के लिए बेस्ट इंडोर एक्टिविटीज़
आर्ट एंड क्राफ्ट: इसमें बच्चों को कलरफुल क्राफ्ट पेपर की मदद से फ्लावर मेकिंग, ग्रीटिंग कॉर्ड आदि बनाना सिखा सकते हैं.
कार्ड और बोर्ड गेम्स: इन गेम्स में बच्चों को फ्रूट्स, वेजीटेबल्स, अल्फाबेट्स, एनीमल कार्ड को अलग-अलग शेप्स और डिज़ाइन में अरेंज करना सिखा सकते हैं.

फन गेम्स: चेस, कैरम, पज़ल्स, लूडो, मैकेनिकल गेम्स आदि.

मूवी टाइम: बच्चों को एनिमेटेड 3डी/4डी मूवी दिखा सकते हैं. उनके मूवी टाइम को फन टाइम बनाने के लिए स्नैक्स का अरेंजमेंट ज़रूर करें.

इंडोर गार्डनिंग: इसमें बच्चे बैंगन, टमाटर, लहसुन, प्याज़ और हरे धनिया को छोटे गमलों में उगा सकते हैं. ये पौधे मॉनसून के लिए परफेक्ट प्लान्ट्स हैं, क्योंकि इन्हें अधिक सनलाइट की आवश्यकता नहीं होती.

स्टोरी टाइम: बच्चों के लिए ऐसा स्टोरी टाइम प्लान करें, जिसे वे एंजॉय कर सकें. बड़े बच्चों को स्टोरी बुक पढ़ने के लिए कहें और छोटे बच्चों को पिक्चर बुक्स और बोर्ड बुक्स दिखाकर स्टोरी सुनाएं.

पार्टी टाइम: बिना किसी कारण के बच्चों और उनके दोस्तों के लिए इनहाउस पार्टी प्लान करें, जैसे- गुड़िया का बर्थडे, उसकी शादी, पप्पी का बर्थडे. डांस और यम्मी स्नैक्स के साथ उनकी पार्टी को सफल बनाएं.

असिस्टेंट बनाएं: बच्चों को कुकिंग, क्लीनिंग, डस्टिंग में मदद करने के लिए प्रेरित करें. रिवॉर्ड के तौर पर उन्हें मूवी दिखाएं, फेवरेट गेम और फेवरेट ट्रीट दें.

कुकिंग एंड बेकिंग: इसमें बच्चों को सलाद, सैंडविच, कपकेक बनाना सिखा सकते हैं.

– पूनम कोठारी

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Monsoon Health Care
मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

गर्मी की तपिश से राहत दिलानेवाली बारिश की फुहारें अपने साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी लेकर आती हैं. सर्दी-ज़ुकाम जैसी आम समस्याओं के अलावा टायफॉइड, हैजा, मलेरिया जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां भी इसी मौसम की देन हैं, लेकिन सही खानपान और कुछ हेल्दी आदतें अपनाकर आप बरसात में होनेवाली बीमारियों से बच सकते हैं.

मॉनसून हेल्थ प्रॉब्लम्स

बारिश का मौसम अपने साथ कई आम व गंभीर बीमारियां भी लेकर आता है, इसलिए ज़रूरी है कि हम पहले से ही उसके लिए सावधान रहें. एटलांटा हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डॉ. फतेह सिंह ने बरसाती बीमारियों से बचाव के बारे में हमें जानकारी दी.

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया 

जहां डेंगू में तेज़ बुख़ार, बहुत ज़्यादा सिरदर्द और जोड़ों में दर्द होता है, वहीं बुख़ार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द और कमज़ोरी आना मलेरिया के लक्षण हैं. चिकनगुनिया के भी लक्षण लगभग यही हैं.

बचाव

–    इससे बचाव का सबसे आसान तरीक़ा यही है कि घर के आसपास कहीं भी पानी का जमाव न होने दें, ताकि मच्छरों को पनपने के लिए जगह न मिले.

–    घर में कबाड़ जमा करके न रखें. जितना हो सके, घर साफ़ रखें.

–    बारिश से पहले घर में पेस्ट कंट्रोल ज़रूर करवाएं.

हैजा

बारिश के मौसम में फैलनेवाली यह एक गंभीर व जानलेवा बीमारी है, जो दूषित भोजन या पानी के कारण होती है. गंदगी और हाइजीन की कमी इस बीमारी को बढ़ावा देती है. उल्टी और पतली दस्त इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हैं.

बचाव

–    सबसे ज़रूरी है कि आप हैजे का टीका लगवाएं, इससे 6 महीनों तक आप सुरक्षित रहेंगे.

–   हाथ धोने के लिए लिक्विड हैंड सोप का ही इस्तेमाल करें.

–   साफ़ और शुद्ध पानी के लिए प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें अथवा पानी उबालकर पीना सबसे बेहतरीन उपाय है.

–    दूध व दूध से बनी चीज़ें, जैसे- आइस्क्रीम, मलाई वगैरह ज़्यादा न खाएं.

–    स्ट्रीट फूड से दूर रहें.

टायफॉइड

बारिश के दौरान होनेवाली यह एक आम बीमारी है. यह भी दूषित पानी व खाने के कारण ही होती है. इसमें सबसे ख़तरनाक बात यह है कि ठीक होने के बावजूद इसका इंफेक्शन मरीज़ के गॉल ब्लैडर में रह जाता है. बुख़ार, पेटदर्द और सिरदर्द इसके लक्षण हैं.

Monsoon Health Tips

बचाव

यह एक संक्रामक बीमारी है, जो बहुत तेज़ी से फैलती है, इसलिए मरीज़ को अलग कमरे में दूसरों से थोड़ा दूर रखें.

–    उबला व साफ़ पानी ही पीएं.

–    डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मरीज़ को लगातार लिक्विड डायट लेते रहना चाहिए.

–    खाना खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह ज़रूर धोएं.

–    होमियोपैथिक ट्रीटमेंट ज़्यादा मददगार होती है.

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डायरिया/ पेट के इंफेक्शन्स

इस मौसम में पेट की बीमारियां, जैसे- डायरिया और गैस्ट्रो सबसे ज़्यादा लोगों को परेशान करती हैं, जो वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण हो सकती हैं. पेट के ज़्यादातर इंफेक्शन्स में उल्टी और दस्त होते हैं, जिसके लिए तुरंत डॉक्टर से मिलना बहुत ज़रूरी है.

बचाव

–    खानपान के साथ-साथ पर्सनल हाइजीन का  भी ख़ास ख़्याल रखें. टॉयलेट के बाद और डायपर बदलने पर हैंडवॉश से हाथ ज़रूर धोएं.

–    बर्तनों और कटिंग बोर्ड को अच्छी तरह साफ़ रखें.

–    ऐसे फल और सब्ज़ियां खाएं, जिनके छिलके निकाल सकते हैं.

–   अगर ट्रैवेल करनेवाले हैं, तो हेपेटाइटिस ए का टीका ज़रूर लगवाएं.

पीलिया

मॉनसून के दौरान लिवर में वायरल इंफेक्शन काफ़ी आम बात है. हेपेटाइटिस के वायरस पानी के ज़रिए तेज़ी से फैलते हैं. यह इंफेक्शन गंभीर हो सकता है, क्योंकि हेपेटाइटिस का कारण पीलिया होता है, जिससे आंखें और यूरिन आदि पीले पड़ जाते हैं.

बचाव

–    हेपेटाइटिस ए और बी का वैक्सीन लें.

–    दूषित खाने और पानी से बचें.

–    हाइजीन का ख़ास ख़्याल रखें.

हेल्थ अलर्ट्स

–    अगर तीन दिन से बुख़ार आ रहा है, तो ख़ुद से दवा खाने की बजाय डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह कोई गंभीर बुख़ार भी हो सकता है.

–   शरीर पर किसी भी तरह के रैशेज़ या फोड़े-फुंसी नज़र आएं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, यह कोई इंफेक्शन भी हो सकता है.

–    अगर आपको अस्थमा या कोई और ब्रीदिंग प्रॉब्लम है, तो ध्यान रखें कि सीलनवाली दीवार से चिपककर न बैठें. घर की दीवारें गीली न रखें, वरना फंगस के कारण आपको तकलीफ़ हो सकती है.

–    अस्थमा और डायबिटीज़ के मरीज़ ज़्यादा तीखा और मसालेदार खाना न खाएं, वरना उन्हें हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं.

–   डायबिटीज़ के मरीज़ नंगे पांव गीली ज़मीन पर न चलें, वरना जर्म्स और बैक्टीरिया से आपको इंफेक्शन हो सकता है.

मॉनसून डायट

मॉनसून में हमारी पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाती है और शारीरिक क्षमता पर भी इसका असर पड़ता है. इस मौसम में खाना ठीक तरी़के से पचता नहीं, जिससे एसिडिटी और गैस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में आपको खानपान का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.

–    बारिश में उबालकर छाना हुआ पानी ही पीएं, वरना दूषित पानी के कारण बीमार पड़ सकते हैं.

–    मॉनसून में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां खाने से बचें, क्योंकि बारिश में उनमें कीड़े लगने लगते हैं, जो आपके खाने के साथ पेट में जा सकते हैं.

–    मसालेदार और तले हुए खाने से अपच, उबकाई आना, वॉटर रिटेंशन आदि की समस्या हो सकती है.

–    रोज़ाना गर्म दाल या सूप ज़रूर पीएं. उसमें हल्दी, लौंग, कालीमिर्च और सौंफ ज़रूर डालें. यह इंफेक्शन से लड़ने में आपकी मदद करेगा.

–    खाने के बाद सौंफ का पानी पीने से गैस और एसिडिटी की समस्या नहीं होती. घर के सभी सदस्यों को खाने के बाद ये पानी दें.

–    उबला व अच्छी तरह पका हुआ खाना मॉनसून में आपकी सेहत की देखभाल करेगा.

–   एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर हर्बल टी और ग्रीन टी इस मौसम में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होती हैं. इसे डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    गाय का दूध पीएं. यह हल्का व सुपाच्य होता है, जिससे आपको इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.

–    खाने में गेहूं के आटे और मैदा की जगह जौ और चने के आटे का इस्तेमाल करें.

–    रोज़ाना अरहर की दाल की बजाय मूंगदाल का इस्तेमाल करें.

–    फ्रेश फ्रूट्स में आप सेब, अनार, मोसंबी और केला खाएं. ड्रायफ्रूट्स को अपने डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    इस मौसम में जितना हो सके, प्रोसेस्ड फूड अवॉइड करें.

–   नॉन वेज के शौक़ीन बरसात में इसका सेवन कम कर दें.

–    अगर आप दही खाना पसंद करते हैं, तो ज़रूर खाएं, पर उसमें नमक या शक्कर मिला लें.

–    इस मौसम में गाय का घी खाना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि वो न स़िर्फ आपकी पाचन क्रिया  को दुरुस्त रखता है, बल्कि रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर आपकी याद्दाश्त को बेहतर बनाता है.

–   कच्ची सब्ज़ियां और सलाद खाने से बचें. अगर घर पर खा रहे हैं, तो सब्ज़ियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें.

हेल्दी लाइफस्टाइल

–   बहुत ज़्यादा भीड़भाड़वाली जगह पर जाना अवॉइड करें, क्योंकि वहां वायरल इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है.

–    फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट पहनें, ताकि मच्छर काट न सकें.

–    जिन्हें एलर्जी और इंफेक्शन्स की समस्या है, वो नीम की पत्तियों को उबालकर उसे नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं.

–    एक्सरसाइज़ इस मौसम में भी उतनी ही ज़रूरी है, जितनी हर मौसम में.

–    हो सके तो शाम को घर पहुंचने पर नहाएं.

अपनाएं ये होम रेमेडीज़

–    सर्दी-खांसी से राहत के लिए एक कप पानी में सोंठ पाउडर उबालकर पीएं, राहत मिलेगी.

–    गले में ख़राश या दर्द है, तो गुनगुने पानी में नमक और हल्दी मिलाकर गरारे करें.

–    सर्दी से नाक बंद हो गई हो, तो गर्म पानी में नीलगिरी तेल कीकुछ बूंदें डालकर भाप लें या फिर रुमाल में उसकी कुछ बूंदें छिड़ककर सूंघें.

–    अगर वायरल फीवर है, तो एक कप पानी में तुलसी और अदरक मिलाकर उबाल लें. आंच से उतारकर शहद मिलाएं और चाय की तरह पीएं.

–    अपच व बदहज़मी से बचने के लिए हर बार खाने से पहले अदरक के एक छोटे से टुकड़े पर सेंधा नमक लगाकर खाएं.

–    रोज़ाना हल्दीवाला दूध न स़िर्फ आपको दूषित पानी के कारण होनेवाली बीमारियों से बचाएगा, बल्कि आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाएगा.

– सुनीता सिंह

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ज़िंदगी फास्ट ट्रैक हो गई है…. यानी तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी, मॉडर्न लाइफस्टाइलतेज़ी से बढ़ रहीं ख़्वाहिशेंइन ख़्वाहिशों के पीछे भागते हमन खाने की फ़िक्रन रिश्तों की चिंता, न सेहत की सुध, न अपनों को खोनेपाने की. नतीजा हम बहुत कुछ हासिल तो कर रहे हैं, लेकिन इसमें काफ़ी कुछ छूटता भी जा रहा है. अपने, रिश्ते, तनमन, शांति, सुकूनसब कुछ. इस सो कॉल्ड मॉडर्न लाइफस्टाइल ने हमारे रिश्तों (How Lifestyle Has Changed Your Relationships) को भी प्रभावित किया है और रिश्तों में दूरियां बढ़ा दी हैं.

How Lifestyle Has Changed Your Relationships

प्राथमिकता बदल गईः पहले ज़िंदगी की पहली ज़रूरत हुआ करती थी अपनी और अपनों की ख़ुशी, परिवार के साथ ख़ुशियों के पल. सुबह की चाय और डिनर पूरा परिवार एक साथ करता था, फेवरेट टीवी शोज़ भी पूरा परिवार एक साथ ही देखता था. इच्छाएं सीमित थीं और ख़्वाहिशें गिनती की. लेकिन अब कामयाब ज़िंदगी की चाहत और अधिक पैसा कमाने की चाह आज की लाइफस्टाइल की ज़रूरत बन गई है. अब न अपनों के लिए टाइम है और न ही इस बात की चिंता है किसी को कि परिवार के साथ टाइम बिताना भी ज़रूरी है. सुखसुविधाओं से घर भरा है, बस ख़ुशियां, अपनापन और रिश्तों से प्यार गायब हो गया है.
कम्यूनिकेशन गैपः रिश्तों में ख़ामोशी बढ़ रही है, सूनापन फैल रहा है. अपनापन सिमट रहा है. बिज़ी लाइफ, सुबह से शाम तक की भागदौड़, स्ट्रेसतनाव ने रिश्तों को भी ख़ामोश कर दिया है. मोबाइल और सोशल मीडिया पर घंटों चैटिंग करने को आज की लाइफस्टाइल की ज़रूरत माननेवाले परिवार के बीच रहकर भी उनसे बातचीत करना ज़रूरी नहीं समझते. रिश्तों में ये ख़ामोशी रिश्तों के लिए साइलेंट किलर की तरह साबित हो रही है.
नो टाइम फॉर सेक्सः बदलती लाइफस्टाइल का सबसे ज़्यादा असर सेक्स लाइफ पर पड़ा है. मॉडर्न लाइफस्टाइल यानी सारी सुविधाएं, ऐशोआराम, बिज़ी लाइफ, लेट नाइट तक काम करनाइन सबके बीच लोग भूलते ही जा रहे हैं कि वैवाहिक जीवन में सेक्स कितना महत्वपूर्ण है. नतीजा रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं. वैवाहिक जीवन के बाहर प्यार की तलाश बढ़ी है, एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर बढ़ रहे हैं.
कम होता कमिटमेंटः लाइफस्टाइल ने रिश्तों में कमिटमेंट की ज़रूरत को भी ख़त्म कर दिया है. हर हाल में रिश्ते सहेजने और निभाने की बात अब पुरानी हो चुकी है. एडजस्टमेंट अब लोग एक हद तक ही करना चाहते हैं. और अगर एडजस्ट नहीं हो पाया, तो अलग हो जाना बेहतर समझते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है महिलाओं का इंडिपेंडेंट और फाइनेंशियली व सोशली स्ट्रॉन्ग होना. दूसरे, सोशल साइट्स पर माउस की एक क्लिक पर कई लोग स्क्रीन पर प्रेज़ेंट हो जाते हैं, जिनसे घंटों चैट करना उन्हें स्ट्रेसफ्री करता है. ऐसे में तनावपूर्ण रिश्ते में रहने से बेहतर वे ऑनलाइन रिश्ता जोड़ना अधिक पसंद करते हैं.
रिश्तों में भी बढ़ा है स्ट्रेसः इस फास्ट ट्रैक ज़िंदगी ने स्ट्रेस इतना ज़्यादा बढ़ा दिया है कि ये स्ट्रेस रिश्तों में भी नज़र आने लगा है. लोग अपने लिए ख़ुशियां, फाइनेंशियल सिक्योरिटी, कामयाबी जुटाने में इतने मशगूल हैं कि रिश्तों की फ़िक्र ही नहीं उन्हें और ये सब पाने की चाह ने उन्हें स्ट्रेस्ड बना दिया है. और ये स्ट्रेस, ग़ुस्सा, चिड़चिड़ापन उनके रिश्तों में भी नज़र आने लगा है.
सोशल रिलेशन भी बदल गए हैंः मॉडर्न लाइफस्टाइल ने सोशल रिलेशनशिप को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. सुकून से बैठकर अपनों से बात करना अब लोगों को समय की बर्बादी लगती है. चाहे हालचाल पूछना हो या बर्थडेएनिवर्सरी विश करना हो, किसी को इनवाइट करना हो या उनके बारे में और कुछ जानना हो, सब कुछ लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर निपटा देते हैं. उनका कहना है, जो काम घर बैठे फोन पर हो जाता है, उसके लिए मिलने जाना समय बर्बाद करना है. इसी तरह सोशल मीडिया ने उन्हें इतना बिज़ी कर दिया है कि न वो रिश्तेदारदोस्तों के घर आतेजाते हैं, न किसी सोशल फंक्शन का हिस्सा बनते हैं.
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How Lifestyle Has Changed Your Relationships
नो टाइम फॉर किड्सः बच्चे जीने के मक़सद होते हैं. पतिपत्नी के रिश्ते की कड़ी होते हैं. लेकिन करियर बनाने और भविष्य को सुरक्षित करने के चक्कर में आज कपल्स के पास इतना समय ही नहीं होता कि वो बच्चा प्लान करें. सारी सुविधाएं जुटाने और पैसा कमाने में वे इतने मशगूल हैं कि बच्चे की ज़िम्मेदारी उठाने का ख़्याल ही नहीं आता उन्हें. और जब तक ख़्याल आता है, तब तक कई बार देरी हो चुकी होती है और फिर शुरू होता है एकदूसरे को दोष देने का सिलसिला, जिससे रिश्तों में कड़वाहट भी बढ़ती है.
फाइनेंशियल प्रेशर का असर रिश्तों पर भीः मॉडर्न लाइफस्टाइल ने बेतहाशा ज़रूरतें बढ़ा दी हैं और इन ज़रूरतों ने फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ाया है. न चाहते हुए भी कई बार ये फाइनेंशियल प्रेशर रिश्तों के बीच तनाव उत्पन्न करता है. कौन कितना ख़र्च उठाएगा, किसका ख़र्च ज़्यादा है, जैसे मुद्दे कई बार विवाद का कारण बन जाते हैं.
स्पेस और आज़ादी की चाहः आजकल किसी को भी अपनी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं. सबको अपनाअपना स्पेस और आज़ादी चाहिए. आज़ादी बोलने की, ज़िंदगी जीने की, उन्मुक्त रहने की, हम चाहते हैं कि हमसे कोई सवाल न करे. हम अपने ़फैसले ख़ुद लें. लेकिन स्पेस की ये चाहत हमें रिश्तों के प्रति बेपरवाह बना दे रही है. इस सो कॉल्ड स्पेस के नाम पर रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं. ये दूरियां रिश्तों को कैसे और कब ख़त्म करने लगती हैं, हमें एहसास भी नहीं होता. माना कि बारबार रोकटोक, हर बात में दख़लअंदाज़ी न अब लोग बर्दाश्त करेंगे, न ही ये ठीक भी है, लेकिन स्पेस का इतना ओवरडोज़ भी न हो जाए कि आपको लगने लगे कि आपको उनकी कोई परवाह ही नहीं या आपको उनकी किसी बात से फ़र्क ही नहीं पड़ता.
अपने लिए जीना हो गया है ज़रूरीः पहले हम अपना हर व्यवहार, हर बात लोगों को ध्यान में रखकर करते थे कि लोग क्या कहेंगे, अगर हम फें्रड्स के साथ लेट नाइट मूवी देखने गए, तो लोगों को बातें करने का मौक़ा मिल जाएगा. लेकिन अब लोग इन बातों की परवाह किए बिना अपने लिए, अपनी ख़ुशियों के लिए जीना सीख रहे हैं. दोस्तों के साथ पार्टी करना, कलीग के साथ मूवी देखना, पड़ोसियों या रिश्तेदारों को भले ही पसंद न आए, लेकिन अगर ख़ुद को इसमें ख़ुशी मिलती है, तो लोगों की परवाह किए बिना लोग अपने लिए इनमें ख़ुशी तलाश लेते हैं.

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How Lifestyle Has Changed Your Relationships

ये भी बदला है

समय बदल गया है. लोग रिश्तों को लेकर भी प्रैक्टिकल हो गए हैं. अब लोग सोचते हैं कि जिनसे काम हो, उन्हीं से रिश्ते जोड़े रखो.

बिना मतलब के, बिना काम के रिश्ते रखना, तो अब बेव़कूफ़ी समझी जाती है.

रिश्ते निभाने का समय और इच्छा दोनों ही नहीं रहीं अब लोगों के पास. अब अपना समय लोग उन्हीं चीज़ों पर ख़र्च करते हैं, जिससे फ़ायदा हो.

बड़े शहरों में वर्क कल्चर ऐसा हो गया है कि वीकेंड में ही अपने लिए समय मिलता है, जिसे लोग अपने कलीग्स या फ्रेंड्स के साथ ही एंजॉय करना चाहते हैं.

डिजिटल वर्ल्ड ने हमें बहुत ज़्यादा ओपन स्पेस दे दिया है, जहां हम अपने रिश्तों से दूर हो गए हैं और डिजिटल रिश्तों में ज़्यादा बिज़ी हो गए हैं.

डिजिटल इफेक्ट रिश्तों पर इतना होने लगा है कि एक ही कमरे में बैठकर भी लोग मोबाइल में बिज़ी रहते हैं.

प्रतिभा तिवारी

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रात की ये 10 आदतें बना सकती हैं आपको मोटा (10 Nighttime Habits That Make You Fat)

क्या आप मोटापा कम करने के लिए जिम में पसीना बहा रहे हैं या फिर डायटिंग के नाम पर अपने शरीर को टार्चर कर रहे हैं, फिर भी आपका मोटापा कम नहीं हो रहा है, तो एक नज़र अपनी लाइफस्टाइल संबंधी आदतों पर डालिए. जी हां, आपके मोटापे का एक अन्य और महत्वपूर्ण कारण है रात की   ग़लत आदतें, जो आपके मोटापे को कम नहीं होने देती हैं. आइए जानें, कैसे?

1 क्या आप हैवी डिनर करते हैं?

क्या आप जानते हैं कि आपकी इस आदत से आपका मोटापा बढ़ सकता है? आपकी यह आदत आपको अपने फिटनेस गोल से भटका सकती है? अगर फिट रहना चाहते हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत बदल डालिए. सुबह के समय हम अधिक एक्टिव रहते हैं. शाम होने पर थकावट के कारण शरीर का एनर्जी लेवल कम होने लगता है, जिसके कारण शरीर को कम कैलोरी की आवश्यकता होती है. पर हैवी डिनर करने से पाचन तंत्र पर अनावश्यक लोड बढ़ने लगता है, जिसके कारण अतिरिक्त कैलोरी अतिरिक्त फैट में बदलने लगती है और धीरे-धीरे मोटापा बढ़ने लगता है.

2 क्या आप टीवी देखते हुए खाना खाते हैं?

अधिकतर लोगों को टीवी के सामने बैठकर भोजन करना अच्छा लगता है. यह जानते हुए कि उनकी इस आदत से न स़िर्फ ओवरईटिंग होती है, बल्कि मोटापा भी बढ़ता है. अमेरिकन जनरल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन (2013) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, खाने के प्रति जागरूक न होने पर आप ज़रूरत से ज़्यादा खा सकते हैं और आपको पता भी नहीं चलेगा. अगर अपना ध्यान खाने पर केन्द्रित करके खाते हैं, तो आप निश्‍चित तौर पर कम खाएंगे. यदि टीवी देखते हुए खाते हैं, तो आप खाने के स्वाद को दिमाग़ी तौर पर महसूस नहीं कर पाएंगे और ओवरइंटिंग कर लेंगे.

3 रात के समय आप क्या खाते हैं?

मोटापा इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि आप कितना (कम/ज़्यादा) खाते हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि रात के समय आप किस तरह का खाना खाते हैं यानी आपकी फूड चॉइस पर निर्भर करता है. अगर आप रात को क्रीम बेस्ड सूप और ग्रेवी, फ्राइड फूड, डेज़र्ट आदि खाते हैं, तो पचने में थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए रात के समय हाई कैलोरी फूड का सेवन नहीं करना चाहिए.

4 क्या आप डिनर के बाद ब्रश नहीं करते हैं?

डिनर के बाद ब्रश करना बहुत बोरिंग काम है. अपनी इस आदत से आप ख़ुद को न केवल अतिरिक्त स्नैक्स खाने से रोक सकते हैं, बल्कि मोटापा भी कंट्रोल कर सकते हैं. डायटीशियन्स के अनुसार, डिनर के बाद ब्रश करने की आदत से आप पोस्ट डिनर स्नैकिंग से बच सकते हैं. बहुत से लोग डिनर के बाद डेज़र्ट और कैलोरीवाले फूड खाते हैं, चाहे उन्हें भूख न हो तो भी. ब्रश करने के बाद वे ख़ुद को ऐसी चीज़ें खाने से रोक सकते हैं, क्योंकि ब्रशिंग जैसा बोरिंग काम दोबारा नहीं करना चाहते. परिणामस्वरूप मोटापा नहीं बढ़ेगा.

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5 खाने के बाद क्या आप वॉक पर नहीं जाते हैं?

अगर नहीं जाते हैं, तो जाना शुरू करें. एक अध्ययन के अनुसार, अगर आप रात को खाने के बाद वॉक करते हैं या फिर 5 मिनट तक वज्रासन में बैठते हैं, तो निश्‍चित रूप से आपका वज़न नियंत्रित रहेगा. यदि आप अपनी पाचन प्रक्रिया और मेटाबॉलिज़्म में सुधार करना चाहते हैं, तो डिनर के बाद वॉक ज़रूर करें. इससे आपका मोटापा नियंत्रित रहेगा और आपका मूड भी फ्रेश होगा.

6 क्या आप रात को मोबाइल या लैपटॉप पर व्यस्त रहते हैं?

अधिकतर लोगों में यह आदत होती है सोने से पहले मोबाइल-लैपटॉप पर अपने ईमेल चेक करना, अगले दिन की टु डू लिस्ट बनाना, अगले प्रोजेक्ट या असाइनमेंट का ड्राफ्ट तैयार करना आदि, जिसकी वजह से अनावश्यक रूप से तनाव बढ़ता है. अधिक तनाव होने से कार्टिसोल नामक हार्मोन का उत्पादन होता है. इस हार्मोन में ऐसे गुण होते हैं कि तनाव की तीव्रता स्वत: ही बढ़ जाती है, जिसके कारण फैट के स्तर में वृद्धि होने लगती है. इसके अलावा कार्टिसोल मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है, जिसके कारण खाना सही तरह से नहीं पचता है और मोटापा बढ़ने लगता है.

7 क्या आप रात को देर से सोते हैं?

देर रात तक जागने से मंचिंग करने के चांस काफ़ी बढ़ जाते हैं. मंचिंग के दौरान भूख बढ़ानेवाले हार्मोंस (घ्रेलीन- जिसे हंगर हार्मोन भी कहा जाता है) का स्तर बढ़ जाता है और वो स्ट्रेस बढ़ानेवाले हार्मोंस (लेप्टिन) के स्तर को कम करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ते वर्कलोड के कारण अधिकतर लोग रात को देर से खाना खाते हैं, जिससे उनके शरीर का मेटाबॉलिज़्म बिगड़ने लगता है और धीरे-धीरे मोटापा हावी होने लगता है.

8 क्या आप सायकियाट्रिक मेडिसिन लेते हैं

रात को सोने से पहले कुछ लोग एंटीडिप्रेशन और सायकियाट्रिक मेडिसिन लेते हैं, जिससे मोटापा बढ़ता है. अगर आप अपने मोटापे को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो इन दवाओं को अपनी मर्ज़ी से बंद न करें, बल्कि अपने डॉक्टर से बात करके इनके डोज में बदलाव करें. ऐसी कोई एक मेडिसिन नियमित रूप से न खाएं, जिसका कोई साइड इफेक्ट हो.

9 क्या आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं?

पर्याप्त नींद न लेना और आवश्यकता से अधिक नींद लेने से मोटापा बढ़ता है. इसका कारण है कि आपका शरीर कैलोरी को बर्न करने में सक्षम नहीं है. अगर आप 7-8 घंटे से कम सोते हैं या फिर ज़रूरत से ज़्यादा सोते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका मेटाबॉलिज़्म ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है.

हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग केवल 6 घंटे की नींद लेते हैं, उनका वज़न, उन लोगों की तुलना में अधिक होता है, जो 8-10 घंटे की पर्याप्त नींद लेते हैं. जो लोग 6 या 6 से कम घंटे सोते हैं, उनमें मोटापे के लक्षण दिखाई देते हैं. इसके अलावा पूरी नींद न लेने के कारण डायबिटीज़ और इंसोम्निया के होने की संभावना भी बढ़ जाती है.

10 क्या आप कैफीन या अल्कोहल का सेवन करते हैं?

अगर आप रात के व़क्त कैफीन और अल्कोहल का सेवन करते हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत सुधार लें. आपकी यह आदत धीरे-धीेरे आपके बढ़ते वज़न की ओर संकेत करती है. कैफीन और अल्कोहल में बहुत अधिक कैलोरी होती है. इनका सेवन करने से नींद में रुकावट आती है. नींद में बाधा आने के कारण मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है और शरीर में अतिरिक्त फैट जमने लगता है.

रात को जल्दी खाने के फ़ायदे

  • लंच और डिनर के बीच में बहुत अधिक अंतर होने के कारण भूख अधिक लगती है. इस अंतराल को कम करें. टी टाइम में स्नैक्स खाएं.
  • डिनर के दौरान टीवी न देखें, क्योंकि टीवी देखते हुए ओवरईटिंग की संभावना बढ़ जाती है.
  • कोशिश करें कि डिनर रात 9 बजे से पहले कर लें.
  • अगर यह संभव न हो, तो टी टाइम पर लाइट स्नैक्स लें और डिनर में हल्का भोजन करें.
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डिनर अवॉइड न करें. कम से कम सूप, सलाद या फ्रूट्स ज़रूर खाएं.
  • डिनर बैलेंस्ड लेकिन लाइट होगा, तो अगले दिन भी आप फ्रेश महसूस करेंगे.
  • डिनर में लो कार्ब और हाई प्रोटीन फूड लें. इन्हें पचने में अधिक समय लगता है.
  • लगातार कई दिनों तक डिनर में फ्राइड फूड और डेज़र्ट न लें. अगर इन्हें खाने की बहुत अधिक क्रेविंग हो, तो सुबह नाश्ते में लें.
  • डिनर के बाद तुरंत सोने की बजाय 5 मिनट वज्रासन में ज़रूर बैठें.
  • रात के समय चाय, कॉफी और चॉकलेट के सेवन से बचें.
  • इसकी बजाय गरम दूध में इलायची पाउडर डालकर पीएं.

– देवांश शर्मा

रंगों के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती. रंग जीवन में ख़ुशियां, ख़ूबसूरती, उत्साह… और अच्छी सेहत भी लाते हैं. यदि आप हर रंग के फल और सब्ज़ी में मौजूद न्यूट्रीएंट्स और उनके लाभ के बारे में जान लें, तो स्वस्थ रहना कोई मुश्किल काम नहीं है. आपको स्वस्थ और सुंदर बनाए रखने के लिए हमने तैयार किया है ये कलरफुल डायट चार्ट.

7 Colours You Need To Eat

हरा रंग
वैदिक काल से ही हरे पेड़-पौधों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता रहा है, जो हमें स्वस्थ व मज़बूत बनाए रखने में सहायक हैं. हरे रंग के फल व सब्ज़ियों में पाए जाने वाले सल्फोराफिन, आइसोथायोसानेट, इंडोल, ल्यूटीन जैसे न्यूट्रीएंट्स आंखों की रोशनी बढ़ाते हैं, दांत व हड्डियां मज़बूत बनाते हैं. हरी सब्ज़ियों के नियमित सेवन से शरीर में भारी मात्रा में विटामिन ए, बी-कॉम्पलेक्स, सी के साथ ही कैल्शियम की कमी भी पूरी हो जाती है.
क्या खाएं?
हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, पत्तागोभी, ककड़ी, बीन्स, ब्रोकोली, हरी प्याज़, हरी मटर, नाशपती, हरे अंगूर, हरा सेब आदि.

लाल रंग
इस रंग के फल और सब्ज़ियों में लाइकोपेन और एंथोसायनिन पाए जाते हैं, जो याददाश्त बढ़ाने के साथ ही कैंसर होने की संभावना को भी कम करते हैं. साथ ही इनसे शरीर में एनर्जी का स्तर भी बढ़ता है, जिससे हम दिनभर तरोताज़ा रहते हैं.
क्या खाएं?
लाल रंग के फल व सब्ज़ियां, जैसे- टमाटर, चुकंदर, लाल अंगूर, गाजर, स्ट्रॉबेरी, तरबूज, लाल शिमला मिर्च, चेरी, सेब, अनार आदि को अपनी डायट में शामिल करें.

पीला और ऑरेंज रंग
इन रंगों के फल और सब्ज़ियों में मौजूद अल्फा कैरोटीन, बीटा कैरोटीन, विटामिन सी, बायोफ्लैवोनॉइड आदि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं, त्वचा को स्वस्थ व जवां बनाए रखते हैं, फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं, हृदय रोग की संभावना को कम करते हैं और रतौंधी में भी फ़ायदा पहुंचाते हैं.

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क्या खाएं?
संतरा, नींबू, आम, अनन्नास, नाशपती, पीच, पपीता, एप्रिकोट, नारंगी गाजर, पीले टमाटर, पीली शिमला मिर्च, कॉर्न, सरसों, कद्दू, खरबूजा आदि.

स़फेद रंग
इस रंग के फल और सब्ज़ियों में मौजूद एलीसीन, फ्लैवोनॉइड आदि न्यूट्रीएंट्स कॉलेस्ट्रॉल लेवल को कम करते हैं, हृदय को स्वस्थ रखते हैं, कैंसर या ट्यूमर होने की संभावना को कम करते हैं.
क्या खाएं?
केला, मूली, मशरूम, फूलगोभी, आलू, स़फेद प्याज़, लहसुन आदि.

नीला/बैंगनी रंग
इन रंगों के फल व सब्ज़ियों में पाया जाने वाला एंथोसायनिन त्वचा को स्वस्थ और जवां बनाए रखता है, हृदय को मज़बूत बनाता है और कैंसर होने की संभावना को भी कम करता है.
क्या खाएं?
जामुन, करौंदा, आलू बुखारा, पर्पल अंगूर, ब्लैक बेरी, ब्लू बेरी, पर्पल पत्तागोभी, बैंगन आदि.

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