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Rujuta Diwekar

फिटनेस का मतलब वेटलॉस या पतला होना नहीं होता… रुजुता दिवेकर का फिटनेस मंत्र! (Theme- fitness is simple and uncomplicated- The Fitness Project by Rujuta Diwekar)

– फिटनेस बेहद सिंपल है, इसमें आपको क्रांतिकारी डायट प्लान या वर्कआउट्स करने की ज़रूरत ही नहीं.
– दरअसल फिटनेस का मतलब ही लोग ग़लत समझते हैं. फिटनेस का अर्थ पतला हो जाना या वेटलॉस नहीं होता.
– फिटनेस वो होती है, जो आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करती है, उस पर असर डालती है, जैसे- आपका एनर्जी लेवल, नींद की क्वालिटी, पाचन शक्ति आदि.
– रुजुता दिवेकर ने अपने 12 हफ़्तों के फिटनेस प्रोजेक्ट को जब लॉन्च किया था, तो उन्हें बहुत ही ज़्यादा लोगों का समर्थन मिला.
– लोगों को इससे बेहद लाभ भी मिला. उनके इंचेज़ कम हुए और वो अधिक फिट महसूस करने लगे.
पहला हफ़्ता- गाइडलाइन 1- कैसे शुरुआत करें?
– अपने दिन की शुरुआत एक केले से करें या किसी भी फ्रेश फ्रूट से या फिर आप भिगोए हुए बादाम या किशमिश भी ले सकते हैं. चाय-कॉफी से अपना दिन शुरू न करें.
– हां, 10-15 मिनट बाद आप चाय-कॉफी ले सकते हैं.
– यह उठने के 20 मिनट के भीतर ही खा लें और अगर आपको थायरॉइड है, तो गोली लेने के बाद यह मील लें.

यह भी पढ़ें: आर्ट ऑफ ईटिंग राइट: सही खाना और कैलोरीज़ गिनना एक-दूसरे के विपरीत है- रुजुता दिवेकर (Indian Food Wisdom And The Art Of Eating Right By Rujuta Diwekar)

– केला दरअसल उनके लिए सही होता है, जिन्हें या तो पाचन संबंधी समस्या होती है या फिर खाने के बाद कुछ मीठा खाने का मन होता है. बेहतर होगा ताज़ा लोकल वेरायटी का केला लें. हफ़्ते में 2-3 बार ख़रीदें और उन्हें प्लास्टिक बैग की बजाय कपड़े के थैले में लाएं.
– 7-8 भीगी हुई किशमिश केसर के एक या दो स्ट्रैंड के साथ खाएं, यदि आप लो एनर्जी महसूस करते हैं या आपको पीएमएस की बहुत अधिक समस्या है.
– 4-6 भिगोए व छीले हुए बादाम उनके लिए, जिन्हें डायबिटीज़, पीसीओडी, नींद की समस्या, लो फर्टिलिटी है. पीसीओडी की समस्या है, तो पीरियड्स से 10 दिन पहले किशमिशवाले प्लान पर आ जाएं.
– सुबह के इस मील के बाद आप 15-20 मिनट योगा या वर्कआउट कर सकते हैं.
– अगर वर्कआउट नहीं करते, तो इसके बाद एक घंटे के भीतर ही नाश्ता कर सकते हैं.
– सुबह जो पानी पीते हैं, उसे प्लेन ही रखें, उसमें कुछ भी न मिलाएं.
यह पहले हफ़्ते के लिए गाइडलाइन है, उसके बाद हम धीरे-धीरे एक-एक हफ़्तों की गाइडलाइन पर बात करेंगे.

इस फिटनेस प्रोजेक्ट को बेहतर समझने के लिए देखें यह वीडियो

Start your day with banana/ dry fruits

‘The fitness project 2018’ – an open participation public health project – Week 1 guideline#RDfitnessproject2018

Posted by Rujuta Diwekar on Tuesday, 2 January 2018

सौजन्य: https://www.rujutadiwekar.com

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Ishi Khosla

जानें क्या है मेटाबॉलिक सिंड्रोम… यूं कम करें पेट के फैट्स- इशी खोसला (About Metabolic Syndrome… How To Reduce Belly Fat- Ishi Khosla)

अक्सर लो अपने पेट की चर्बी से परेशान रहते हैं, डायटिंग, एक्सरसाइज़ करने पर भी उन्हें वो रिज़ल्ट नहीं मिल पाता, जिसकी वो उम्मीद करते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि वो पेट के फैट्स के मूल कारणों को नहीं जान पाते. इस विषय पर अधिक जानते हैं कि इशी खोसला किस तरह से मार्गदर्शन करती हैं. इशी खोसला अपने आप में जाना-माना नाम है. वो प्रैक्टिसिंग क्लिनिकल न्यूट्रिशिनिस्ट, कंसल्टेंट और राइटर हैं. आप भी उनके बताए डायट व हेल्थ प्लान्स फॉलो करें और हमेशा हेल्दी रहें.

पेट के फैट्स की प्रमुख वजहें हैं- हाई ब्लड प्रेशर, गुड फैट्स की कमी, बैड फैट्स की अधिकता, ट्रायग्लिसरॉइड्स की अधिक मात्रा, ब्लड शुगर की अधिकता या फिर वंशानुगत डायबिटीज़- जिसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम या सिंड्रोम एक्स भी कहा जाता है. यह कोई बीमारी नहीं, पर रिस्क फैक्टर्स का कॉम्बीनेशन है.

सवाल यह है कि इन सबके चलते ज़िद्दी फैट्स को कैसे भगाया जाए? हेल्दी ईटिंग, लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज़ और स्ट्रेस मैनेजमेंट से यह किया जा सकता है.

शरीर के वज़न को नियंत्रित रखें: संतुलित खानपान व क्रियाशीलता से यह हो सकता है. साबूत अनाज, नट्स, फ्रूट्स, सब्ज़ियां, दालें और बीजों से अपने डायट को हेल्दी बनाएं. मीठा खाना-पीना व अल्कोहल का सेवन कम कर दें.

गुड कैलोरीज़वाला भोजन लें: फाइबर, गुड कैलोरीज़, प्रोटीन, कॉम्प्लैक्स कार्बोहाइड्रेट को अपने डायट का हिस्सा बनाएं.

हाई कैलोरी फुड से बचें: बहुत ज़्यादा ऑयली, फैटी, फ्राइड फूड न लें. मीठा व स्वीट ड्रिंक्स से बचें. कम पोषण वाले भोजन को अवॉइड करें. नमक कम खाएं. बेहतर होगा पिज़्ज़ा, बर्गर व अन्य जंक फूड से दूर रहें.

स्मार्ट स्नैकिंग करें: स्नैकिंग के लिए बेक्ड व रोस्टेड चीज़ें ख़रीदें. इसके अलावा ड्राय फ्रूट्स, फ्रेश फ्रूट्स आदि लें.

फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं: वॉकिंग करें, जॉग करें. लाइट एक्सरसाइज़ करें. रोज़मर्रा की दिनचर्या में भी लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. ऑफिस में बीच-बीच में जगह से उठकर राउंड लगाकर आएं. इस तरह अपनी फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं. इससे ब्लड शुगर, व प्रेशर के साथ-साथ आपका वज़न भी काफ़ी नियंत्रित रहता है.

स्ट्रेस मैनेज करें: मेडिटेशन, योगा, ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ और पॉज़िटिव सोच बेहतरीन तरी़के हैं अपने स्ट्रेस को मैनेज करने के. स्ट्रेस आए इससे पहले ही यदि इन हेल्दी एक्टिविटीज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लें, तो स्ट्रेस आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता. बहुत से लोग स्ट्रेस ईटिंग भी करते हैं, ऐसे में स्ट्रेस कम होगा, तो आप बेवजह कैलेरीज़ नहीं खाएंगे.

दरअसल ईटिंग हैबिट्स और डायटिंग को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां हैं हम सबके मन में. इसे बेहतर तरी़के से समझने के लिए इस वीडियो को फॉलो करें, पर इसे मेडिकल एडवाइस के तौर पर न लें.

सौजन्य: http://www.theweightmonitor.com/

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वैवाहिक जीवन की सफलता बहुत हद तक आपकी सेक्स लाइफ (Better Sex Life) पर निर्भर करती है. सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के चक्कर में पार्टनर इस तरह की ग़लतियां कर बैठते हैं, जिनका उन्हें अनुमान ही नहीं होता. हालांकि ये ग़लतियां नहीं, कुछ बुरी आदतें होती हैं, जिनका सेक्स लाइफ पर बुरा प्रभाव पड़ता है. आइए जानें, ऐसी ही कुछ बुरी आदतें और उनके समाधान के बारे में, जो आपकी सेक्स लाइफ पर बुरा असर डालती हैं.

Better Sex Life

एक्सरसाइज़ न करना: एक्सरसाइज़ केवल कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को हेल्दी बनाए रखने के लिए ही नहीं, बल्कि इरेक्शन और कामेच्छा को बढ़ाने के लिए भी बहुत ज़रूरी है. फीमेल सेक्सुअल बीमारियों के एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक्सरसाइज़ करने से न केवल वे फिट रहती हैं, बल्कि सेक्स हार्मोन (एंडोर्फिन)  में वृद्धि होती है, जिसके कारण वे अच्छा महसूस करती हैं.

कैसे बदलें इस आदत को? अपनी व्यस्त दिनचर्या में से एक्सरसाइज़ के लिए कम-से-कम 30 मिनट का समय ज़रूर निकालें.

  • अच्छी सेक्स लाइफ के लिए ऐरोबिक्स भी बेस्ट एक्सरसाइज़ है. एक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि ऐरोबिक्स करने से इरेक्टाइल डिसफंक्शन होने की संभावना 30% कम हो जाती है.
  • चाहें तो योग की बजाय सप्ताह में कम-से-कम 3 बार 30 मिनट तक स्विमिंग या वॉकिंग भी कर सकते हैं.

अधिक तनाव लेना: शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्तर पर भी तनाव साइलेंट किलर का काम करता है. तनाव बढ़ने पर कार्टिसोल और एड्रेनालिन के स्तर में वृद्धि होती है, जिसका असर सेक्स हार्मोन पर पड़ता है.

कैसे बदलें इस आदत को? स्ट्रेस मैनेजमेंट टेकनीक्स, जैसे- योग, प्राणायाम-कपालभाति, अनुलोम-विलोम आदि करें.

  • लाफ्टर थेरेपी के द्वारा भी तनाव कम किया जा सकता है.
  • ख़ुद को व्यस्त रखने के लिए चाहें तो कोई हॉबी क्लासेस भी जॉइन कर सकते हैं.
  • घर और ऑफिस के कामों को निबटाने के लिए टाइम मैनेजमेंट टेकनीक अपनाएं.
  • यदि घर और ऑफिस की किसी समस्या के कारण तनाव बढ़ रहा है, तो पार्टनर के साथ शेयर करके समस्या का समाधान निकालें.
  • यदि तनाव का असर सेक्सुअल लाइफ पर हावी हो रहा हो, तो कपल तुरंत किसी मनोचिकित्सक से मिलें.

यह भी पढ़ें: 7 स्मार्ट ट्रिक्स से सुपरचार्ज करें अपनी सेक्स लाइफ 

यह भी पढ़ें: सेक्स से जुड़े टॉप 12 मिथ्सः जानें हक़ीकत क्या है

पार्टनर की इच्छाओं को अनदेखा करना: सेक्सोलॉजिस्ट के अनुसार, अधिकतर दंपतियों को यह शिकायत रहती है कि सेक्स (Better Sex Life) के दौरान पार्टनर यह जानने की कोशिश ही नहीं करते हैं कि दूसरा पार्टनर उनसे क्या चाहता है, क्या अपेक्षा रखता है, जिसके कारण न केवल सेक्स लाइफ में दूरियां बढ़ने लगती हैं, बल्कि वैवाहिक जीवन में समस्याएं आने लगती हैं.

कैसे बदलें इस आदत को? पार्टनर को चाहिए फोरप्ले के दौरान उनकी इच्छाएं पूछें.

  • पार्टनर का मज़ाक उड़ाने की बजाय उसकी भावनाओं का सम्मान करें.
  • सेक्स लाइफ को एंजॉय करने के लिए नए-नए एक्सपेरिमेंट करें.
  • रिलैक्स मूड व रिलैक्स बॉडी के साथ बेडरूम में जाएं. ख़राब मूड और अधिक थकान के कारण कपल्स सेक्स लाइफ को एंजॉय नहीं कर पाएंगे.
  • बेडरूम का माहौल रोमांटिक बनाएं.
  • छोटे-छोटे झगड़े को बेडरूम में लेकर न जाएं. इन छोटे-छोटे झगड़ों से भी सेक्स लाइफ पर बुरा असर पड़ता है.
  • सेक्सुअल प्रॉब्लम होने पर पार्टनर के साथ ज़बर्दस्ती करने की बजाय उसकी भावनाओं को समझें.

सेक्सुअल कम्युनिकेशन न करना: वैवाहिक जीवन की सफलता का एक अहम् पहलू है, सेक्सुअल कम्युनिकेशन. संकोची व शर्मीले स्वभाववाली महिलाएं और पुरुष अक्सर सेक्स कम्युनिकेशन करने से कतराते हैं या असहज महसूस करते हैं, जिसके कारण उनकी सेक्स लाइफ ख़राब हो सकती है.

कैसे बदलें इस आदत? सेक्सुअल कम्युनिकेशन करते समय सभ्य भाषा का इस्तेमाल करें.

  • बातचीत के दौरान अपनी भावनाओं को पार्टनर के साथ शेयर करें.
  • पार्टनर को बताएं कि उनके साथ सेक्सुअल कम्युनिकेशन करके आप कैसा फील करते हैं.
  • बिना रोक-टोक पार्टनर की बातों को सुनें.
  • सेक्सुअल कम्युनिकेशन करते समय पार्टनर न तो एक-दूसरे को कोई सलाह देने की कोशिश करें और न ही आलोचना करें.
  • एक-दूसरे के संपर्क में रहें. दिन में कम-से-कम एक बार तो फोन पर बातचीत ज़रूर करें.
  • आपसी मनमुटाव होने पर भी बातचीत करना न छोड़ें.
  • सेक्सुअल प्रॉब्लम होने पर संकोच या शर्माने की बजाय पार्टनर से बात करें.

पर्याप्त नींद न लेना: थकान, देर रात तक सोना और नींद पूरी न होना आदि ऐसी बुरी आदतें हैं, जिनका असर भी सेक्स लाइफ पर पड़ता है.

कैसे बदलें इस आदत को? रात के समय हैवी डिनर न करें.

  • सोने से 2 घंटे पहले डिनर करें.
  • डिनर में प्रोटीन बेस्ड फूड न खाएं, क्योंकि प्रोटीन बेस्ड फूड को डायजेस्ट होने में अधिक समय लगता है.
  • सोने से पहले कॉफी, धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन न करें.
  • मोबाइल, टीवी, लैपटॉप आदि को बेड से दूर रखें.
  • कमरे का तापमान मॉडरेट रखें, ताकि अच्छी नींद आए.
  • कमरे की सारी लाइट्स ऑफ करें और लाइट म्यूज़िक सुनें.
  • माहौल को रोमांटिक बनाने के लिए एरोमैटिक कैंडल्स और लाइट्स जलाएं.

कैफीन व रिफाइंडयुक्त चीज़ें खाना: अधिक मात्रा में कैफीन और रिफाइंडयुक्त खाद्य पदार्थों को खाने से कामेच्छा में कमी आती है और सेक्सुअल परफॉर्मेंस प्रभावित होती है.

कैसे बदलें इस आदत को? ऐसी डायट लें, जो माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और एंटी ऑक्सीडेंट्स लिबिडो (इमोशनल सेक्सुअल डिज़ायर्स) को बढ़ाती हों.

  • इसके अलावा अपने डायट में गाजर, पालक, ऑस्टर और मिल्क प्रोडक्ट्स को शामिल करें.
  • रात के समय कैफीन व रिफांइड फूड खाने से बचें.
  • अच्छी सेक्स लाइफ के लिए सेक्स बूस्टर फूड का सेवन करें.
  • अपने डायट में ज़िंक व आयोडीन अधिक मात्रा में लें.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

यह भी पढ़ें: 7 स्मार्ट ट्रिक्स से सुपरचार्ज करें अपनी सेक्स लाइफ

Healthy sugar

Natural Substitutes for Sugar

अक्सर लोग ख़ुशी के मौके पर कहते हैं कि कुछ मीठा हो जाए. लेकिन अगर आप मीठी खाने की सोच रहे हैं, तो सतर्क हो जाएं. शक्कर सेहत के लिए किसी मीठे ज़हर से कम नहीं है. लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर शक्कर न खाएं तो फिर अपनी शुगर क्रेविंग्स को कैसे कंट्रोल करें. कौन से दूसरे विकल्प हैं शक्कर. चलिए, आपकी इस मुश्किल को हल करते हैं और जानते हैं चीनी के हेल्दी विकल्प (Natural Substitutes for Sugar).

 

खजूर
* खजूर एक नेचुरल स्वीटनर है और इसे न्यूट्रिशन का पावरहाउस माना जाता है.
* इसे आप शक्कर की जगह आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें पोटैशियम, विटामिन बी6 व कैल्शियम होता है
* यह शुगर क्रेविंग्स आसानी से कम कर देता है. इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में होती है, जिससे एनर्जी मिलती है.
* इसे खाना खाने के बाद मीठे के तौर पर भी खाया जा सकता है.
* इसे ब्राउन शुगर का अच्छा सब्सिट्यूट माना जाता है.
* मिल्क शेक, दही, बेकिंग, शुगर फ्री खीर, केक, पुडिंग आदि में चीनी की जगह खीर का इस्तेमाल किया जा सकता है.

Natural Substitutes for Sugar

गुड़
* गन्ने से बना गुड़ चीनी से बेहतर है, क्योंकि चीनी की तरह इसे कई रिफाइनिंग प्रोसेस से होकर नहीं गुज़रना पड़ता है और इसमें मौजूद मिनरल्स  बरकरार रहते हैं.
* गुड मीठी तो होती ही है, साथ ही यह शरीर की सफ़ाई भी करती है
* गुड़ से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है. चाय में शक्कर की जगह गुड़ का इस्तेमाल फ़ायदेमंद होता है.
* गुड में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और फाइबर इसे एक स्वास्थ्यवर्धक स्वीटनर बनाता है.

Natural Substitutes for Sugar

शहद
* इसमें फ्लेवोनॉइड होता है. इसके अलावा यह एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल व एंटीफंगल गुणों से भरपूर होता है.
* यह दूसरे नेचुरल स्वीटनर से ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है. इसमें फ्रक्टोज़
* चाय, दूध, नींबू पानी आदि में चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है.
* चीनी खाने से वज़न बढ़ जाता है, जबकि शहद न केवल वज़न को कंट्रोल करता है, बल्कि इसे बढ़ने से भी रोकता है.

Natural Substitutes for Sugar

गन्ने का जूस
* शक्कर से बेहतर है गन्ने का जूस, क्योंकि इसे शक्कर की तरह रिफाइनिंग प्रोसेस से होकर नहीं गुज़रना पड़ता है. इसकी वजह से इसमें मौजूद  पोषक तत्व, जैसे- विटामिन बी,सी, कैल्शियम आयरन और मैगनीज़ इसमें बरकरार रहते हैं.
* गर्मियों के मौसम में गन्ने का एक ग्लास जूस आपको स्फूर्ति देगा.

Natural Substitutes for Sugar

फल
* सभी तरह के फलों में भी प्राकृतिक मिठास होती है.
* मिल्क शेक बनाना हो या जूस नेचुरल स्वीटनर होने की वजह से इनमें शक्कर डालने की ज़रूरत नहीं होती है.
* एप्पल खीर के अलावा फलों से अलग-अलग तरह के डेज़र्ट्स भी बनाए जा सकते हैं, जिनमें शक्कर डालने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं होती है.
* अंगूर भी ग्लूकोज़ अच्छा स्रोत माना जाता है.

Natural Substitutes for Sugar

स्टेविया
* यह एक पौधा होता है, जिसकी पत्तियां मीठी होती है. इस पौधे को मीठी पत्तियां भी कहा जाता है.
* इस पौधे की पत्तियों में शक्कर से 300 गुना ज़्यादा मिठास है.
* इसमें कार्ब्स और कैलोरी भी कम होती है.

Natural Substitutes for Sugar

क्यों ख़तरनाक है शक्कर?
* चीनी में कोई पोषक तत्व नहीं होते हैं. चीनी बनाने में रासयनिक प्रक्रिया के दौरान उसमें मौजूद सारे पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं और केवल कैलोरी रह जाती है.
* ज़्यादा शक्कर इम्यून सिस्टम पर असर डालता है.
* चीनी को पचाने में शरीर को काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है.
* एक रिसर्च के मुताबिक़, फ्रक्टोज और ग्लूकोज का ज़्यादा मात्रा में सेवन करने से लिवर पर टॉक्सिक असर होता है.
* ज़्यादा मीठा खाने से मोटापा तो बढ़ता ही है साथ ही टाइप-2 डायबिटीज़ और हाई ब्लडप्रेशर का ख़तरा भी बढ़ जाता है.
* ज़्यादा मीठा दिमाग़ को नुक़सान पहुंचाता है, जिससे याद्दाश्त कमज़ोर हो जाती है.
* यह शरीर में अतिरिक्त इंसुलिन बनाती है, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज का ख़तरा बढ़ जाता है और हार्टअटैक और स्ट्रोक का ख़तरा बढ़ जाता है.

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क्या कहती है रिसर्च?

* वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के दिशा निर्देशों के मुताबिक़, रोज़ाना ली जानेवाली कैलोरी में शक्कर की मात्रा 10 फ़ीसदी से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए और भविष्य में इसे 5 फ़ीसदी तक लाने की कोशिश करनी चाहिए. ध्यान रखें की केवल चीनी ही नहीं, बल्कि रोज़ाना खाए जानेवाले ब्रेड, चावल, आलू, सोड़ा, कूकीज़, केक, फल आदि में भी मिठास होती है.
* अगर पूरे दिन में केवल 25 ग्राम शुगर का सेवन किया जाए तो स्वास्थ्य पर बूरा प्रभाव नहीं पड़ेगा. लेकिन ब्रेड, पैक्ड जूस, प्रोसेस्ड फूड, कोल्ड्रिंक्स आदि में शक्कर काफी होती है. इनका सेवन करते समय ध्यान रखें, ताकि अतिरिक्त चीनी न खा लें.
* डब्ल्यूएचओ के मुताबिक़ डायबिटीज़, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों से बचना है तो शक्कर कम खाएं.
* एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि चीनी या मीठे का सेवन अल्कोहल और धूम्रपान की ही तरह एक नशा है.

चीनी की चेतावनी

कई विशेषज्ञों का मानना है कि जिन प्रोडक्ट्स में चीनी अधिक इस्तेमाल की गई हो, उसके पैकेट या बॉटल पर सिगरेट की पैकेट की तरह चेतावनी लिखी होनी ज़रूरी है कि चीनी की लत भी लगती है और यह स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं.

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