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हेल्दी रिश्तों को दें ये सुरक्षा कवच (Smart Tips to Protect Your Relationship)

Smart Tips to Protect Your Relationship

हेल्दी रिश्तों को दें ये सुरक्षा कवच (Smart Tips to Protect Your Relationship)

‘अब रिश्तों में वो पहलेवाली मिठास नहीं रही, सब प्रैक्टिकल हो गए हैं…’ आजकल यह जुमला आपको अक्सर सुनने को मिल जाएगा. वैसे तो रिश्ते निभानेवालों पर निर्भर करते हैं, जो बदलती लाइफस्टाइल में भी रिश्तों को निभाने के गुर सीख लेते हैं. लेकिन अगर आपको भी ऐसा ही लगने लगा है कि आपके रिश्ते कमज़ोर होने लगे हैं, तो उन्हें ज़रूरत है सुरक्षा कवच की, जो उन्हें मज़बूती प्रदान करें. तो आइए देखें, क्या हैं वो रिश्तों के सुरक्षा कवच? 

Smart Tips to Protect Your Relationship

 

हेल्दी कम्यूनिकेशन

किसी ने बहुत ख़ूब कहा है कि रिश्तों में बातचीत होती रहनी चाहिए. भले ही लड़ाईझगड़ा हो, पर ख़ामोशी नहीं आनी चाहिए, वरना रिश्तों का दम घुटने लगता है. हेल्दी कम्यूनिकेशन आपके रिश्तों को मज़बूत बनाए रखता है.

हमेशा फेस टु फेस यानी आंखों में आंखें डालकर बात करें. इधरउधर देखते हुए अपनी बात कभी न कहें.

रिश्तों को हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो बातचीत की पहल ख़ुद करें.

बातों के साथ बॉडी लैंग्वेज का भी हमेशा ख़्याल रखें.

आपकी बातों और चेहरे की भावभंगिमाओं में तारतम्य होना चाहिए. ऐसा न हो कि आप कुछ कह रहे हैं और आपका चेहरा कुछ और.

बातचीत करते समय अगर सामनेवाला कुछ कह रहा है, तो उसकी बात काटकर अपनी बात कहने की कोशिश न करें. सामनेवाले को पूरा सुनें, फिर बोलें.

हेल्दी कम्यूनिकेशन के लिए बोलने से ज़्यादा सुनना ज़रूरी है, इसलिए शांति से दूसरे की बात सुनें.

जब दो से ज़्यादा लोग बातचीत कर रहे हों, तो नॉन वर्बल सिग्नल्स का भी ख़्याल रखें.

बात करते समय ऊंची या एग्रेसिव आवाज़ में बात न करें, वरना ऐसा लगेगा कि आप सामनेवाले की बात को दबाने की कोशिश कर रहे हैं.

अक्सर लोग सामनेवाले की बात समझने की बजाय उनसे ख़ुद को समझने की उम्मीद करते हैं. हेल्दी कम्यूनिकेशन के लिए ज़रूरी है कि आप पहले ख़ुद दूसरे को समझें, तभी किसी से उम्मीद करें.

टेक्नोलॉजी का भरपूर फ़ायदा उठाएं. कम्यूनिकेशन के लिए फ्री मैसेजिंग ऐप्स, वीडियो कॉलिंग आदि का इस्तेमाल करें.

याद रहे, अगर 80% कोशिश आप करेंगे, तो 20% पहल वहां से भी होगी. इसलिए हेल्दी रिश्ते के लिए आप क्या कर रहे हैं, इस पर ध्यान दें.

अगर आपने कोई बात ग़लत कह दी हो, तो तुरंत ‘सॉरी’ कह दें. रिश्तों में जितना सहज रहें, उतना अच्छा है.

हेल्दी बाउंड्रीज़

हेल्दी रिश्तों के लिए आज़ादी के साथसाथ हेल्दी बाउंड्रीज़ भी ज़रूरी हैं. रिश्तों की मर्यादा रिश्तों के लिए एक बेहतरीन सुरक्षा कवच का काम करते हैं.

हर रिश्ते में अगर प्राइवेसी का ख़्याल रखा जाए, तो रिश्ते कमज़ोर नहीं होते. एकदूसरे की भावनाओं को समझना ही रिश्ते को मज़बूती प्रदान करता है.

हर रिश्ते की अपनी एक बाउंड्री होती है, जिसे हम पर्सनल स्पेस कहते हैं. घर के हर मेंबर को उसका पर्सनल स्पेस एंजॉय करने का पूरा हक़ है.

रिश्ते कितने ही गहरे क्यों न हों, ठेस लगनेवाली बातें कभी न कहें.

कुछ रिश्तों को हम फॉर ग्रांटेड लेते हैं, पर आप ऐसा न करें. सभी को वही मानसम्मान दें, जिसकी आप ख़ुद के लिए उम्मीद रखते हैं.

रिश्तों में प्यार बढ़ाने के लिए हंसीमज़ाक बहुत ज़रूरी है, पर जानबूझकर मज़ाक उड़ाना आपके रिश्ते को कमज़ोर कर सकता है.

हेल्दी रिश्तों के लिए थोड़ीबहुत शरारतें और टांगखिंचाई चलती है, पर ध्यान रहे कि उससे कोई आहत न हो जाए.

अपने मायके की बुराई से महिलाएं बहुत जल्दी चिढ़ जाती हैं, इसलिए जानबूझकर वहां की कभी बुराई न करें.

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हेल्दी रिलेशनशिप बूस्टर्स

किसी भी रिश्ते की मज़बूती के लिए क्वालिटी टाइम बहुत मायने रखता है. अपने रिश्ते को हेल्दी बनाए रखने के लिए आपको भी अपनी फैमिली के साथ भरपूर क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए. साथ ही ध्यान रखें कुछ और ज़रूरी बातों का.

एकदूसरे से रियलिस्टक यानी वास्तविक अपेक्षाएं रखें. आपके परिवार की आर्थिक स्थिति आपसे बेहतर कौन जान सकता है, इसलिए पैरेंट्स, पार्टनर या फिर भाईबहन से ऐसी अवास्तविक उम्मीदें न पालें.

रिश्तों की मज़बूती फ्लेक्सिबिलिटी पर भी निर्भर करती है, इसलिए अगर घर का कोई सदस्य कुछ नया बदलाव ला रहा है, तो बेवजह विरोध न करें. पहले मामले को समझें, तभी कुछ कहें.

बेहतर रिश्तों के लिए परिवार में सभी से पॉज़िटिव टच बनाए रखें, बातें करें, साथ में किताब पढ़ें, टीवी देखें, जो करना

है करें, पर अपनेअपने मोबाइल में बिज़ी न रहें.

अगर आपके परिवार में किसी को गाने का शौक़ है, तो कभीकभार साथ में अंताक्षरी खेलें.

महीनेदो महीने में मिलकर कहीं घूमने जाएं. आपके साथसाथ आपके रिश्ते भी रिफ्रेश होंगे.

अगर आपके पार्टनर, भाईबहन या फिर मांपिताजी को किसी चीज़ का शौक़ है या वो किसी की मदद करना चाहते हैं, तो उनकी मदद करें.

हफ़्ते में एक दिन फैमिली कुकिंग टाइम बनाएं, जहां घर का हर सदस्य किचन में मदद करेगा. साथ में काम करने

से एकदूसरे के लिए मन में कड़वाहट नहीं आती.

घर के सभी मेंबर्स मिलकर कोई कॉमेडी शो देखें. इससे घर का माहौल भी हल्काफुल्का रहता है.

रिश्तों में औपचारिकता पूरी करने के लिए कुछ न करें, जो भी करें पूरे दिल से करें, जैसेअगर किसी मामले में बड़ों की राय ले रहे हैं, तो सोचसमझकर उसे अमल में भी लाएं, वरना उन्हें लगेगा कि आपने स़िर्फ औपचारिकता के लिए पूछा था.

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हेल्दी लव लैंग्वेजेज़

ये आपके रिश्ते के लिए ऑक्सीजन का काम करते हैं. प्यार और अपनेपन के बिना कोई रिश्ता फलफूल नहीं सकता. यह आपके रिश्ते का एक महत्वपूर्ण कवच है, जो उसे मुरझाने से बचाता है.

परिवार में रोज़ाना एकदूसरे से ये तीन लाइनें कहेंआई लव यू, आई नीड यू, आई रिस्पेक्ट यूये चंद लाइनें आपके रिश्ते में ईगो और निगेटिविटी को हावी नहीं होने देतीं.

चाहे पार्टनर्स हों या फिर दूर रह रहे बच्चे या पैरेंट्स, रोज़ाना 2 मिनट फॉर्मूला अपनाएं. हर रोज़ 2 मिनट फोन पर बात करें और इस दौरान कोई दूसरा काम न करें, बल्कि स़िर्फ उसकी सुनें और अपनी कहें.

थैंक्यू’ और ‘सॉरी’ जैसे मैजिकल शब्द लव लैंग्वेज का हिस्सा हैं. अगर कोई आपके लिए कुछ भी ख़ास करता है, तो उसे थैंक्यू कहने में बिल्कुल कंजूसी न करें.

सरप्राइज़ेस सभी को अच्छे लगते हैं. कभीकभार बिना किसी ओकेज़न के ही एक ख़ूबसूरत गिफ्ट अगर किसी को मिले, तो वो बेशक ख़ुश हो जाएगा.

रिश्ते में सच्चाई और ईमानदारी जितनी ज़रूरी है, उतनी ही ज़रूरी है केयरिंग. यह लव लैंग्वेज आपके अपनों को आपके प्यार से रूरू कराती है.

एकदूसरे के लिए अपनी भावनाओं का ज़िक्र करें. ऐसा ज़्यादातर पैरेंट्स करते हैं कि बच्चों को भले ही कितना प्यार क्यों न करें, कभी उनसे बताते नहीं. माना प्यार बोलकर जताया नहीं जाता, पर कभीकभी यह सुनना अच्छा लगता है.

जब भी मौक़ा मिले, अपने पैरेंट्स को यह बताने से कभी न चूकें कि उन्होंने आपके लिए बहुत कुछ किया है. आज आपकी ख़ुशहाली का सारा श्रेय उन्हीं को जाता है.

अगर किसी की तबियत ख़राब है, तो उसकी दवा ख़त्म होने से पहले दवा लाकर रखना, कोई खाने का शौक़ीन है, तो उसकी फेवरेट डिश लेकर जाना, संगीत के शौक़ीनों के लिए फेवरेट सिंगर का कलेक्शन देना, जैसी छोटीछोटी बातें आपके रिश्ते को ख़ुशहाल बनाती हैं.

रिश्तों को मज़बूत बनाए रखने के लिए मेंटेनेंस की भी ज़रूरत पड़ती है. अपने प्यार, विश्‍वास और अपनेपन से रिश्तों को मेंटेन करते रहें.

सुनीता सिंह

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बेहतर रिश्तों के लिए करें इन हार्मोंस को कंट्रोल (Balance Your Hormones For Healthy Relationship)

Balance Your Hormones, For Healthy Relationship

हमारे शरीर में हार्मोंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पुरुषों व महिलाओं में ऐसे कई हार्मोंस पाए जाते हैं, जिनका प्रभाव उनकी सेहत के साथसाथ रिश्तों पर भी पड़ता है, इसलिए इसे कंट्रोल में रखना बेहद ज़रूरी है. आइए, इसके बारे में संक्षेप मेें जानते हैंएस्ट्रोजेन, प्रोजेस्टेरॉन, टेस्टोस्टेरॉन, थायरॉइड, कार्टिसोल, इंसुलिन आदि हार्मोंस हमारे शरीर में मौजूद कोशिकाओं व ग्रन्थियों से निकलनेवाले केमिकल्स हैं, जो शरीर के दूसरे हिस्से में मौजूद कोशिकाओं या ग्रंथियों को प्रभावित करते हैं. हेल्थियंस की लाइफस्टाइल मैनेजमेंट कंसल्टेंट डॉ. स्नेहल सिंह ने इसके बारे में हमें विस्तृत जानकारी दी.

Balance Your Hormones, For Healthy Relationship

हमारे शरीर में कुल 230 तरह के हार्मोंस होते हैं, जो शरीर में अलगअलग कार्यों को संतुलित करते हैं. ये एक केमिकल मैसेंजर की तरह एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक सिग्नल पहुंचाते हैं, लेकिन एक ग़लत मैसेज हार्मोंस को असंतुलित कर सकता है, इसलिए इस पर ध्यान देना ज़रूरी है. इनका सीधा असर हमारे मेटाबॉलिज़्म, इम्यून सिस्टम, रिप्रोडक्टिव सिस्टम, शरीर के विकास, मूड आदि पर पड़ता है. डॉ. स्नेहल के अनुसार, हार्मोंस असंतुलन से रिश्तों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. आजकल की भागतीदौड़ती ज़िंदगी में विभिन्न बीमारियों ने हर किसी की ज़िंदगी को प्रभावित किया है. ऐसे में भागदौड़, तनाव, थकान व खानपान के साथसाथ हार्मोंस भी रोज़मर्रा की दिनचर्या व रिश्तों को प्रभावित करते हैं.

हार्मोंस और रिश्ते

हार्मोंस की कार्यशैली या इसकी प्रणाली जटिल होती है. जब यह संतुलन में रहते हैं, तो सब कुछ अच्छा रहता है और चीज़ें जैसे चमत्कारी तौर पर काम करती हैं, लेकिन हार्मोंस असंतुलन उतना ही प्रतिकूल प्रभाव डालता है. असंतुलन से अजीब मूड स्विंग्स होते हैं. स़िर्फ स्त्रियों में ही नहीं, पुरुष भी हार्मोंस असंतुलन से प्रभावित होते हैं, जो सेक्सुअल लाइफ को भी प्रभावित करते हैं.

हार्मोनल संतुलन पीरियड के पहले के सिंड्रोम, बाद के डिप्रेशन, मेनोपॉज़ या एंड्रोपॉज़ को मैनेज करने के लिए ही नहीं, बल्कि बेहतर रिश्तों के लिए भी आवश्यक है. रिश्तों को प्रभावित करनेवाले मुख्य हार्मोंस में ऑक्सीटोसिन, टेस्टोस्टेरोन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन शामिल हैं.

ऑक्सीटॉसिन

ऑक्सीटॉसिन, जिसे आमतौर पर लव हार्मोन कहा जाता है, आपको प्यार का एहसास देता है, जिसके चलते आप रिश्तों में बेहतर कनेक्टिविटी महसूस करते हैं. व्यक्ति को ख़ुशी और संतुष्टि का एहसास करानेवाला यह फीलगुड हार्मोन है. अपर्याप्त ऑक्सीटॉसिन नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिसके चलते चिड़चिड़ापन, अलगाव की भावना, अनिद्रा और असंतुष्ट सेक्स लाइफ आदि समस्याएं होने लगती हैं. सामान्य ऑक्सीटॉसिन का स्तर रिश्तों में ख़ुशियां देता है, जो बेहतर रिश्तों के लिए अच्छा है.

टेस्टोस्टेरॉन

टेस्टोस्टेरॉन पुरुषों में मर्दानगी (मैस्कूलिनिटी की ज़रूरत पूरी करता है, जिससे वे रिलेशनशिप एंजॉय करते हैं. कम टेस्टोस्टेरॉन का स्तर मूड की समस्याएं, चिड़चिड़ापन और ईगो को जन्म देता है. ये नकारात्मक भावनाएं निजी संबंधों को प्रभावित करती हैं. बढ़ती उम्र, तनाव, पुरानी बीमारियां और हार्मोंस की समस्याएं पुरुषों में कम टेस्टोस्टेरॉन का कारण बन सकती हैं. यह सेक्सुअल रिलेशन और प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करते हैं.

एस्ट्रोजेन

युवावस्था में महिलाओं में एस्ट्रोजेन का स्तर बढ़ जाता है, जो उनके विकास, यौन गतिविधि और फर्टिलिटी को प्रभावित करता है, जबकि मेनोपॉज़ के दौरान इसका स्तर घटता है. एस्ट्रोजेन का स्तर सामान्य होने पर महिलाओं में सेक्स की इच्छा जागती है और वे अपने साथी के साथ अच्छे संबंधों का आनंद ले सकती हैं, लेकिन जब एस्ट्रोजेन का स्तर कम होता है, तो इससे योनि में सूखापन और सेक्स ड्राइव में कमी आती है. ऐसे में उनको चिड़चिड़ापन होता है. दूसरी तरफ़ कुछ महिलाओं में एस्ट्रोजेन का स्तर अधिक होता है, जिससे रिश्ते और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, सिरदर्द, थकान आदि शिकायतें होती हैं, जिसका उनके रिश्तों पर ख़राब असर होता है.

प्रोजेस्टेरॉन

प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन का स्तर गर्भावस्था और मातृत्व के शुरुआती दिनों में सबसे अच्छा होता है. यह गर्भवती महिलाओं में अन्य संबंधों की तुलना में बच्चे की देखभाल करने की इच्छा को अधिक बढ़ाता है. इसके कारण बच्चे के जन्म के आरंभिक कुछ वर्षों के दौरान कपल्स में यौन आकर्षण कम हो जाता है.

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यूं रखें हार्मोंस को नियंत्रित…

ओमेगा 3 फैटी एसिड हार्मोंस को बैलेंस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

ओमेगा 3 फैटी एसिड फिश, अलसी के बीज, अखरोट, सोयाबीन, टोफू, ऑलिव ऑयल आदि में मिलता है. यदि आप चाहें, तो डॉक्टर की सलाह पर ओमेगा 3 की गोलियां भी ले सकती हैं.

विटामिन डी पिट्यूटरी ग्लैंड को प्रभावित करता है. इसकी कमी से पैराथायरॉइड हार्मोंस असंतुलित होने लगता है. रोज़ाना कम से कम 20 से 30 मिनट तक एक्सरसाइज़ करें, जिससे हार्मोंस को संतुलित होने में मदद मिलेगी.

इसके अलावा नियमित रूप से योग, प्राणायाम, जॉगिंग, स्विमिंग भी कर सकती हैं.

एक्स्ट्रा वर्जिन कोकोनट ऑयल नेचुरल तरी़के से हाइपोथायरॉइडिज़्म को संतुलित करता है. साथ ही ब्लड शुगर ठीक करने के साथ वज़न को भी संतुलित रखता है. इसे 2-3 टीस्पून नियमित रूप से लेना चाहिए.

एक टीस्पून मेथीदाना एक कप गरम पानी में 20 मिनट के लिए भिगोकर रखें, फिर छानकर दिनभर में तीन बार पीएं. यदि मेथीदाना की तासीर गरम होने के कारण आपको सूट न करे, तो इसकी जगह सौंफ ले सकते हैं.

तुलसी बॉडी के कार्टिसोल के लेवल को ठीक करता है. इसका लेवल बढ़ने पर थायरॉइड, ओवरीज़ व अग्नाशय प्रभावित होते हैं. इसके अलावा मूड भी स्विंग होता रहता है, जिसे संतुलित करने के लिए तुलसी की पत्तियों का सेवन सबसे बेहतरीन उपाय है.

इसके अलावा आप तुलसी को उबालकर दिनभर में तीन कप पी सकते हैं.

अश्‍वगंधा भी हार्मोंस को संतुलित करता है. साथ ही थकान व तनाव भी मिटाता है. डॉक्टर की सलाह पर ही इसे लें. वैसे कुछ दिनों तक 300 एमजी अश्‍वगंधा ले सकते हैं.

हार्मोंस को संतुलित रखने का सबसे बेहतर उपाय यही है कि संतुलित भोजन करें, वज़न पर नियंत्रण रखें और बेवजह का तनाव न लें.

अपने भोजन में फल, अंकुरित अनाज, हरी सब्ज़ियां, दालें आदि नियमित रूप से लें.

भरपूर नींद लें. ख़ुश रहें. बेवजह किसी बात को दिल में न रखें. तनमन जितना हल्का रहेगा, शरीर उतना ही संतुलित व फिट रहेगा.

न्यूट्रीशियस फूड हार्मोंस को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

जंक व ऑयली फूड, स्टेरॉयड व अधिक एंटीबायोटिक्स न लें.

ज़्यादा चाय, कॉफी, अल्कोहल और चॉकलेट आदि कैफीन मिली हुई चीज़ें खाने से बचें.

पनीर, दूध से बनी और मीट जैसी फैटवाली चीज़ें कम लें.

दवाइयों के अलावा योग व प्राणायाम द्वारा भी हार्मोंस को नियंत्रण में रख सकते हैं. इसके लिए अनुलोमविलोम प्राणायाम, उज्जयी प्राणायाम, भस्त्रिका प्राणायाम, शवासन, कपालभाति, कटिचक्रासन, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, धनुरासन, मंडूकासन, पश्‍चिमोत्तान आसन आदि करें.

पुरुष हार्मोंस को कंट्रोल करने के लिए अश्‍वगंधा चूर्ण 1 चम्मच रात में खाना खाने के आधा घंटे बाद दूध और मिश्री में ले सकते हैं.

इसके अलावा वे सर्दियों में अश्‍वगंधारिष्ट और अमृतारिष्ट 3-3 चम्मच भोजन के बाद दिन में दो बार एक कप गुनगुने दूध के साथ ले सकते हैं.

महिलाएं यदि अशोकारिष्ट 2-2 चम्मच दिन में दो बार लें, तो पीरियड नियमित रहते हैं.

साल में तीन महीने अशोकारिष्ट व दशमूलारिष्ट 3-3 चम्मच पानी के साथ भोजन के दो घंटे बाद दिन में दो बार लें, पर ध्यान रहे, इसे प्रेग्नेंसी में न लें.

ऊषा गुप्ता

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न भूलें रिश्तों की मर्यादा (Set Healthy Boundaries For Happy Relationship)

Set Healthy Boundaries For Happy Relationship

हेल्दी रिश्ते की शुरुआत ही मानसम्मान और मर्यादा से होती है. किसी व्यक्ति का सलीके से किया गया व्यवहार ही हमें उसकी ओर आकर्षित करता है. जब तक रिश्ते (Set Healthy Boundaries For Happy Relationship) में मानमर्यादा बनी रहती है, तब तक रिश्ते मज़बूत व हेल्दी बने रहते हैं, लेकिन जब हम अपनी हद पार करने लगते हैं, तो रिश्तों में दरार आने लगती है. अगर आपके रिश्ते में आ गई है खटास, तो देखें कि कहीं आपने अपने रिश्तों की मर्यादा तो नहीं लांघी?

Set Healthy Boundaries For Happy Relationship

क्या है रिश्तों की मर्यादा?

सायकोथेरेपिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी कहती हैं कि रिश्तों में बाउंड्रीज़ का मतलब किसी को कंट्रोल करना या बंदिशें लगाना नहीं, बल्कि ख़ुद को व अपने रिश्ते को सुरक्षित रखने के लिए एक दायरा बनाना है. दूसरे शब्दों में कहें, तो हर रिश्ते का मानसम्मान बनाए रखना ही मर्यादा है और अपने आप को मयार्दित रखना ही हर रिश्ते की कामयाबी का मूलमंत्र है.

क्यों ज़रूरी है रिश्तों में मर्यादा?

रिश्तों में बाउंड्रीज़, लक्ष्मणरेखा, मर्यादा या हद जो भी कह लें, रिश्ते की गरिमा को बनाए रखने के लिए ज़रूरी होती है.

इससे रिश्तों में प्यार व सम्मान बना रहता है.

परिवार के सभी लोग जब अपनीअपनी मर्यादा का ख़्याल रखते हैं, तो घर में सौहार्द का माहौल बना रहता है.

जब दूसरे आपकी इच्छाओं और पर्सनल स्पेस का ख़्याल रखते हैं, तो आप भी उनकी पर्सनल स्पेस का ख़्याल रखते हैं.

किसी के आत्मसम्मान को चोट नहीं पहुंचती.

कोई बेवजह दूसरों की सोच का शिकार नहीं होता.

रिश्तों में ग़लतफ़हमियां पैदा नहीं होतीं.

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तीन तरह की होती हैं रिश्तों की बाउंड्रीज़

फिज़िकल बाउंड्री: किसी से बात करते समय एक सेफ डिस्टेंस बनाए रखना ही फिज़िकल बाउंड्री है. कुछ लोग आदतन दूसरों को छूकर बात करते हैं, जो हर किसी को पसंद नहीं आता. ऐसे लोगों से बात करने से लोग कतराते हैं. कपल्स को भी बड़ों के सामने इस बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि उससे बड़े असहज हो जाएं.

अगर कोई आपका बहुत क़रीबी भी है, फिर भी बात करते व़क्त फिज़िकली बहुत ज़्यादा क्लोज़ न जाएं.

हर किसी के साथ एक सेफ डिस्टेंस मेंटेन करें.

अगर आपको भी दूसरों को छूकर बात करने की आदत है, तो उसे सुधार लें.

इमोशनल बाउंड्री: हर रिश्ते का एक इमोशनल लेवल होता है. किसी भी रिश्ते में इतनी मर्यादा रखें कि वो आप पर इमोशनली हावी न हो सके.

अगर किसी की कही कोई बात आपको परेशान कर रही है, तो इसका मतलब है कि आपने उस व्यक्ति को इमोशनली ख़ुद पर बहुत ज़्यादा हावी कर लिया है.

हर कोई हर किसी के बारे में कुछ न कुछ कहता रहता है, इसलिए आपको उसके बारे में इतना नहीं सोचना चाहिए.

मज़ाक बनाने और गॉसिप के लिए लोग अक्सर उनको टारगेट करते हैं, जो इमोशनली कमज़ोर होते हैं. आपको अपनी इमोशनल बाउंड्री ख़ुद बनानी होगी.

पतिपत्नी को भी एकदूसरे की इस बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए.

डिजिटल बाउंड्री: आजकल की डिजिटल लाइफ में डिजिटल बाउंड्री का सम्मान बहुत ज़रूरी हो गया है. अगर आप सोशल मीडिया पर हर बार बिना पूछे किसी को टैग करते हैं, चेक इन में उसे मेंशन करते हैं, तो ध्यान रखें कि आप उसकी डिजिटल बाउंड्री क्रॉस कर रहे हैं.

बिना किसी की मर्ज़ी के उसके मोबाइल में तांकझांक करना, इस मर्यादा को भंग करता है.

घरवाले या रिश्तेदार अपने मोबाइल में क्या रखते हैं, क्या देखते हैं यह जानने के लिए उनका मोबाइल चेक करना ग़लत है.

जो लोग अपनी फोटो डालकर अपने 20 दोस्तों को टैग कर देते हैं या भगवान की फोटो डालकर 50 लोगों को टैग कर देते हैं, डिजिटल बाउंड्री क्रॉस करनेवाले ऐसे दोस्तों को लोग अक्सर ब्लॉक कर देते हैं.

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पार्टनर्स परखें अपने रिश्ते की मर्यादा

हर रिश्ते की तरह पतिपत्नी के रिश्ते में भी मर्यादा बहुत मायने रखती है. जब पार्टनर्स एकदूसरे को फॉर ग्रांटेड लेने लगते हैं या एकदूसरे की भावनाओं को नज़रअंदाज़ करके स़िर्फ अपनी इच्छाओं की पूर्ति शुरू कर देते हैं, तब रिश्ते बिखरने लगते हैं, इसलिए ज़रूरी है कि हर कपल अपने रिश्ते को इस कसौटी पर परखे

क्या आप अपनी बात खुलकर व ईमानदारी के साथ पार्टनर से शेयर कर पाते हैं?

क्या आप एकदूसरे की बात सुनते हैं?

एकदूसरे की भावनाओं को सम्मान देते हैं?

एकदूसरे से प्यार व सम्मान से बात करते हैं?

क्या एकदूसरे को स्पेस देते हैं?

अपने पार्टनर की हॉबीज़, करियर और इच्छाओं का ख़्याल रखते हैं?

जीवन में आगे बढ़ने के लिए एकदूसरे को सपोर्ट करते हैं?

चाहे जो हो जाए, रिश्ते की मर्यादा का ख़्याल रखते हैं?

कुछ भी हो जाए, पार्टनर से अपशब्द या बुरा व्यवहार नहीं करते?

अगर ऊपर दिए गए ज़्यादातर सवालों के जवाब हांहैं, तो आपका रिश्ता हेल्दी है, लेकिन अगर आपका स्कोर कम है, तो आपको अपने रिश्ते की ओर ध्यान देने की ज़रूरत है.

काउंसलिंग सायकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं कि ज़रूरी नहीं कि हर बार रिश्तों में दरार या खटास का कारण मर्यादा का भंग होना ही हो, क्योंकि जो आपके लिए मर्यादा है, ज़रूरी नहीं सामनेवाले के लिए भी वही मर्यादा हो. दरअसल, हर किसी के लिए इसके मायने

अलगअलग होते हैं. अलगअलग परिवेश में पलेबढ़े होने के कारण पार्टनर्स के लिए भी इसके मायने अलग होते हैं, लेकिन कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखकर आप भी अपने रिश्ते की एलओसी को बनाए रख सकते हैं.

हैप्पी रिलेशनशिप टिप्स

पतिपत्नी के रिश्ते की मर्यादा की डोर उन दोनों के हाथ में होती है. अगर आप भी मर्यादा की इन लकीरों का पालन करें, तो आपका रिश्ता भी हमेशा मज़बूत बना रहेगा.

हंसीमज़ाक और शरारतें करें, पर दूसरों के सामने अपने पार्टनर का कभी मज़ाक न बनाएं.

मायके में या ससुराल में कभी भी पार्टनर को ताना न मारें.

अगर किसी ने आपसे पार्टनर की शिकायत की है, तो सबके सामने दोषी ठहराने की बजाय अकेले में बात कर सच्चाई जानने की कोशिश करें.

अगर आपको कोई ग़लतफ़हमी हो गई है, तो बैठकर बात करें, न कि कठघरे में खड़ा करें.

अगर पार्टनर से उम्मीद करते हैं कि वो अपनी सारी बातें शेयर करे, तो आपको भी उनसे कुछ नहीं छिपाना चाहिए.

पार्टनर अपनी इच्छाएं कभी न थोपें, चाहे वो पहननेओढ़ने या खानेपीने के मामले में ही क्यों न हों.

 रिश्ते में बहुत ज़्यादा जकड़न घुटन का कारण बनने लगती है, इसलिए पार्टनर को पर्याप्त स्पेस भी दें.

जब पतिपत्नी एकदूसरे का सम्मान करते हैं, तो बाकी लोग भी उनके रिश्ते को सम्मान की नज़र से देखते हैं.

किसी भी परिस्थिति में पार्टनर की बात को सुनने का धैर्य रखें. बिना पूरी बात सुने, कभी भी रिएक्ट न करें.

आप दोनों को ही अपनेअपने रिश्ते की मज़बूती के लिए प्यार, विश्‍वास और समर्पण को बनाए रखना होगा.

याद रखें कि प्यार का मतलब बंधन नहीं आज़ादी होता है, इसलिए अपने पार्टनर की प्राइवेसी का हमेशा ख़्याल रखें.

मर्यादा से जुड़ी ये सारी बातें अन्य रिश्तों में भी लागू होती हैं, चाहे वो भाईबहन हो, देवरभाभी, जीजासाली, मांबेटे या पितापुत्री.

अनीता सिंह

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सेक्स से जुड़े मिथ्स कहीं कमज़ोर न कर दें आपके रिश्ते को (Sex Myths Can Ruin Your Relationship)

Sex Myths

हमारे देश में सेक्स को लेकर आज भी संकोच, ग़लतफ़हमियों, भ्रांतियों की भरमार है. कई बार सेक्स से जुड़े मिथ्स के कारण पति-पत्नी के रिश्तों में दूरियां तक आ जाती हैं. साथ ही यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो रिश्ते कमज़ोर पड़ने लगते हैं और कई बार तलाक़ तक की नौबत आ जाती है. इसी विषय पर हमने सेक्सोलॉजिस्ट व मैरिज काउंसलर डॉ. राजीव आनंद से बात की.

Sex Myths

–  अक्सर लोग सेक्स से जुड़ी फैंटेसी व कल्पनाओं पर अधिक ध्यान देते हैं, जबकि ज़रूरत है इससे जुड़े हेल्दी व साइंटिफिक पहलुओं पर ग़ौर करने की.

– अधिकतर पुरुष पढ़ी-देखी हुई बातें, किताबें, फिल्में आदि में दिखाई गई अतिशयोक्ति को देख-सुन, उसी को सच समझने लगते हैं.

– उन्हें यह समझना होगा कि जो कुछ भी दिखाया जाता है, उसमें सच्चाई कम और सनसनी पैदा करनेवाली बातें व तथ्य अधिक होते हैं.

– ऐसी उपलब्ध सामग्री के कारण ही पार्टनर के मन में ग़लत धारणाएं विकसित होने लगती हैं और वे दिखाई गई चीज़ों से अपनी ज़िंदगी व अनुभव की तुलना करने लगते हैं.

– कपल्स साइज़ (ब्रेस्ट/पेनिस), सेक्स की अवधि(सेक्सुअल रिलेशन) आदि को लेकर कई तरह के मिथ्स को सच मानने लगते हैं व ग़लत अपेक्षाओं के शिकार हो जाते हैं.

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– अक्सर पुरुष यह सोचते हैं कि पेनिस का साइज़ बड़ा होने से वे अपने पार्टनर को अधिक संतुष्ट कर सकते हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. यहां पर कपल्स का मानसिक व शारीरिक जुड़ाव अधिक महत्व रखता है.

– इसलिए सच्चाई को जानना या समझना ज़रूरी है. सेक्स में साइज़ से अधिक आपसी नज़दीकियां, प्यार, इंटीमेट पल शेयर करना अधिक ज़रूरी है, जो प्यार के हर पल को ख़ूबसूरत व यादगार बनाने में मददगार होता है.

– लेकिन सेक्स से जुड़े तमाम मिथ्स के कारण लोग ग़लत बातों में दिलचस्पी लेने लग जाते हैं.

– दुनियाभर में सेक्स से जुड़ा बिज़नेस, जैसे- ब्रेस्ट साइज़ बढ़ाने के लिए मेडिसिन, पोर्न किताबें-फिल्में, चीज़ें, टॉयज़ आदि का मल्टी मिलियन डॉलर का कारोबार फैला हुआ है. इसी के चलते कंपनियां बहुत-सी ऐसी बातों का प्रचार-प्रसार भी करती हैं, जिनका हक़ीक़त से कोई लेना-देना नहीं रहता.

– लेकिन इन्हीं सबसे प्रभावित हो पुरुष अपने पार्टनर से ग़लत अपेक्षाएं व व्यवहार करने लगते हैं, ख़ासतौर से पति के लिए पत्नी उनकी इच्छाओं को पूरी करनेवाली ऑब्जेक्ट बनकर रह जाती है.

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– पत्नी का पति को ख़ुश करना व संतुष्ट करना परम कर्त्तव्य बन जाता है और जब वह ऐसा नहीं कर पाती है, तब वह पति के रिजेक्शन का शिकार हो जाती है.

– भ्रांतियां ग़लत अपेक्षाओं को जन्म देती हैं… ग़लत अपेक्षाएं असफलताएं पैदा करती हैं… असफलताओं से निराशा पनपने लगती है… और निराशा दुख का नेतृत्व करने लगती हैं… तब अंत में डिप्रेशन… तलाक़ तक स्थिति पहुंच जाती है. इसलिए इन सबसे बचने के लिए ज़रूरी है कि हम मिथ्स की बजाय पार्टनर पर विश्‍वास करें.

– पुरुषों के बीच यह मिथ भी ख़ूब मशहूर है कि कंडोम के इस्तेमाल से सेक्स एंजॉय नहीं कर पाते हैं. जबकि अक्सर सही ढंग से कंडोम का इस्तेमाल न करने की वजह ऐसा होता है. इसलिए इस तरह की ग़लतफहमियों से परे होकर अपने वैवाहिक जीवन को सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करें.

– मन में कोई भी भ्रांति, ग़लतफ़हमी हो, तो उस पर खुलकर बात करें. सवालों को मन में ना रखें, पार्टनर से बातचीत करें, क्योंकि मिथ पर विश्‍वास कर हम ख़ुद ही दुख क्रिएट करते हैं. तो क्यों न पार्टनर पर विश्‍वास कर सुख की दुनिया बसाई जाए.

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– कई बार तो ऐसा भी होता है कि पति फर्स्ट नाइट पर पति अपनी पत्नी से खुलकर वर्जिनिटी के बारे में बात नहीं कर पाते और जीवनभर मन ही मन आशंकित रहते हैं.

– ऐसे में यह ज़रूरी है कि आप पार्टनर से खुलकर बात करें. सेक्स को लेकर कोई भी दुविधा या परेशानी हो, तो पार्टनर से कहें. स्थिति अधिक गंभीर हो जाए, तो सेक्सोजॉलिस्ट या फिर मैरिज काउंसलर की मदद लेने से भी न हिचकें.

Sex Myths

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– आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल के चलते पुरुष के साथ-साथ महिलाएं भी सेक्स के बारे में न केवल खुलकर बात करती हैं, बल्कि अपनी पसंद-नापसंद भी पार्टनर को बताती हैं. माना इससे कपल्स की सेक्स लाइफ अच्छी और एंजॉयमेंट से भरपूर हो जाती है, लेकिन यदि पुरुष पार्टनर संकीर्ण विचारों का हो या फिर इन बातों को ग़लत ढंग से ले, तो ऐसे में रिश्तों में तनाव आते देर नहीं लगती. इस तरह की परिस्थितियों से बचने के लिए बेहतर होगा कि पत्नियां पति के स्वभाव व सोच को अच्छी तरह से समझें. फिर धीरे-धीरे परिस्थितियों के अनुसार पहल करें. कोई भी बदलाव तुरंत नहीं आता, उसके लिए धैर्य, अपनापन व सूझबूझ की बेहद ज़रूरत होती है.

– पुरुषों के बीच सेक्स को लेकर और भी ऐसी कई भ्रांतियां हैं, जिनके कारण वैवाहिक जीवन प्रभावित होने लगता है, जैसे-

– कई पुरुषों का मानना है कि जिस लड़की के पेट का निचला हिस्सा निकला हुआ होता है, वो वर्जिन नहीं होती…

– सेक्स से लड़कियों के कूल्हे बड़े हो जाते हैं…

– पहली बार सेक्सुअल रिलेशन होने पर ब्लड निकलना ज़रूरी है, ये लड़की के वर्जिन होने का प्रमाण है.

– जिन महिलाओं ने शादी के पहले सेक्स किया होता है, उनके स्तन ढीले पड़ जाते हैं…

– जो महिला मास्टरबेशन करती है, वो मां नहीं बन सकती…

ऐसी तमाम बातें हर पल पुरुषों को अपने पार्टनर को लेकर सशंकित करती रहती हैैं. इसलिए यह ज़रूरी हो जाता है कि कपल्स हर पहलू पर खुलकर बात करें. रिश्ते में पारदर्शिता रिश्तों को मज़बूत बनाने का काम करती हैं. यह न भूलें कि आप दोनों का ज़िंदगीभर का साथ है, इसलिए जो भी परेशानी, ग़लतफ़हमियां, भ्रांतियां, शंकाएं हों, पार्टनर से ज़रूर कहें. उन्हें अपनी अपेक्षाएं और इच्छाओं से भी रू-ब-रू कराएं, ताकि दोनों ख़ुशहाल सेक्सुअल लाइफ एंजॉय कर सकें. अक्सर न कहने और मन ही मन कुढ़ते रहने के कारण भी रिश्ते कमज़ोर पड़ने लगते हैं. अतः ऐसा न करें.

डिफरेंट स्ट्रोक्स

– एक रिसर्च के अनुसार, जिन्हें इज़ैक्युलेशन (शीघ्रपतन) की शिकायत है, वे यदि सेक्स करने के दो घंटे पहले मास्टरबेशन (हस्तमैथुन) करें, तो यह समस्या दूर हो सकती है.

– पहली बार सेक्स कर रहे हैं, तो डरे नहीं, बल्कि खुले दिमाग़ से पार्टनर को सहयोग दें.

– एक रिसर्च के अनुसार, 14 % पुरुष हर सात मिनट में सेक्स के बारे में सोचते हैं, पर इसका यह मतलब नहीं है कि वे हमेशा सेक्स करने के लिए तैयार रहते हैं.

– ऊषा गुप्ता

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हेल्दी रिलेशनशिप के लिए छोड़ें भावनाओं की ‘कंजूसी’ (Express Yourself For A Healthy Relationship)

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बच्चों के साथ कुछ पल मौज-मस्ती, बड़ों के साथ बैठकर बोलने-बतियाने की चाहत, पार्टनर के साथ चंद सुकून के पल… ऐसी न जाने कितनी हसरतें हैं, जिन्हें पूरा करने की ख़्वाहिश रखते हैं हम, पर न जाने कहां इतने बिज़ी हैं कि अपनी भावनाओं को अपनों तक पहुंचा ही नहीं पाते. क्या सचमुच इतने बिज़ी हो गए हैं हम या फिर भावनाओं की कंजूसी करने लगे हैं? क्या है भावनाओं की कंजूसी के कारण और कैसे छोड़ें ये कंजूसी आइए जानते हैं.

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क्यों करते हैं हम भावनाओं की कंजूसी?

–  करियर में आगे, और आगे बढ़ने की होड़ लगी है.

– हर कोई अपनी आर्थिक स्थिति को अच्छी से बेहतर और बेहतर से बेहतरीन करने में लगा है.

– ख़ुद को बेस्ट साबित करने में हम सबने अपना सर्वस्व लगा दिया है.

– बिज़ी लाइफस्टाइल और तनाव हमारी सेहत को भी नुक़सान पहुंचा रहा है.

– अपनों से ज़्यादा अपनी भावनाओं को तवज्जो देने लगे हैं.

हम सभी मानते हैं कि हमारी ज़िंदगी बहुत तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही है, सब कुछ बहुत तेज़ी से बीत रहा है, घर चलाने की जद्दोज़ेहद में बहुत कुछ छूट रहा है, पर क्या किसी ने यह सोचा कि अपने और अपनों के लिए दौड़ते-भागते हम उनसे दूर तो नहीं निकल आए? ज़िंदगी जीने की कला कहीं भूलते तो नहीं जा रहे हैं?

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तय करें अपनी प्राथमिकताएं

हर किसी को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और प्राथमिकताओं की फेहरिस्त में परिवार सबसे पहले होना चाहिए. हेल्दी रिलेशनशिप के लिए सबसे ज़रूरी है अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करना. परिवार के सभी सदस्यों में आपसी प्यार-विश्‍वास और अपनापन यही तो हमारे परिवार और जीवन की पूंजी है, इसे प्राथमिकता दें. ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जहां कामयाब लोगों ने इस बात को सबसे ज़्यादा अहमियत देने की बात कही है, तो आप भी ‘फैमिली कम्स फर्स्ट’ के स्लोगन को अपना लें और ज़िंदगी को एक नए नज़रिए से देखने की कोशिश करें.

बड़ों की हंसी कमाएं

पैसे तो हम सभी कमाते हैं, पर अपने परिवार की हंसी कितनी कमाते हैं? कोशिश करें रोज़ाना रात को खाना खाने के बाद कुछ देर अपने पैरेंट्स के साथ बैठें. उनसे बातें करें, उनका हालचाल लें और ऑफिस का कोई फनी क़िस्सा उन्हें सुनाएं या फिर कोई जोक सुनाएं, जिसे सुनकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाए. आपके पैरेंट्स की मुस्कुराहट ही आपकी उस दिन की असली कमाई है.

बच्चे हैं बेस्ट ‘बैटरी चार्जर’

माना कि आप दिनभर के काम के बाद थक गए हैं और आपकी बैटरी डाउन है, पर क्या आप जानते नहीं कि बच्चे बेस्ट चार्जर होते हैं? तो जाइए, बच्चों को गुदगुदाएं, उनके साथ खेलें, उन्हें घुमाकर लाएं और अपने साथ-साथ बच्चों को भी दिन का बेस्ट टाइम दें.

पार्टनर के लिए है शरारतें

पति हो या पत्नी हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर उनकी भावनाओं को समझे. पार्टनर को समय दें, उसके साथ व़क्त बिताएं. पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार-विश्‍वास के साथ-साथ थोड़ी शरारत और थोड़ी छेड़छाड़ भी ज़रूरी है. ये शरारतें ही आपकी रूटीन लाइफ को रोमांटिक बनाती हैं, तो थोड़ी भावनाएं रोमांस में भी ख़र्च करें और अपनी मैरिड लाइफ को मज़ेदार व रोमांटिक बनाएं.

भाई-बहनों पर इंवेस्ट करें प्यार-दुलार

कभी शिकायतें, तो कभी टांग खिंचाई, कभी लड़ाई-झगड़े, तो कभी प्यार-दुलार- भाई-बहनों का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है. अपनी रोज़मर्रा की भागदौड़ में अगर आप एक-दूसरे से दूर हो गए हैं, तो रोज़ाना एक बार फोन पर बात ज़रूर करें. वीकेंड पर मिलें और अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करें. भावनाओं में इंवेस्टमेंट का आपको प्यार-दुलार का अच्छा-ख़ासा रिटर्न मिलेगा, जो आपकी ज़िंदगी में ख़ुशहाली लाएगा.

दोस्तों की यारी पर करें न्योछावर

फैमिली के बाद फ्रेंड्स ही तो हमारे सबसे क़रीब होते हैं. कोई प्रॉब्लम शेयर करनी हो, एंजॉय करना हो या फिर गॉसिप करनी हो, दोस्तों से बेहतर कौन हो सकता है. सोशल मीडिया के इस ज़माने में दोस्तों से कनेक्टेड रहना बहुत आसान है, तो क्यों न अपने बिज़ी रूटीन से थोड़ा व़क्त निकालकर अपने दोस्तों तक अपनी भावनाएं पहुंचाई जाएं.

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कंजूसी छोड़ें, दिल खोलकर लुटाएं भावनाएं

– पैरेंट्स और घर के अन्य बड़ों को जब भी मौक़ा मिले ‘थैंक्यू’ कहना न भूलें. आपको उनकी परवाह है और उनके त्याग और समर्पण का एहसास है, यह उन्हें जताने में कभी कंजूसी न करें.

– बड़ों की तरह छोटों को भी उनके हिस्से का प्यार और दुलार दें. भावनाओं को स़िर्फ खाने-पीने और खिलौनों के ज़रिए ही नहीं, संस्कारों और डांट-डपट के ज़रिए भी ज़ाहिर करें.

– घरवालों को बर्थडे-एनीवर्सरीवाले दिन स्पेशल फील कराएं. उसके साथ दिन बिताकर या उसका मनपसंद खाना खिलाकर भी आप अपनी भावनाएं उस तक पहुंचा सकते हैं.

– कहते हैं ‘टच थेरेपी’ में बहुत ताक़त होती है. यह आपकी पॉज़िटिव फीलिंग्स को सामनेवाले तक बख़ूबी पहुंचाती है, तो फैमिली मेंबर्स को गले लगाना और शाबासी देना जैसी चीज़ें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करें.

– पैरेंट्स, पार्टनर और बच्चों को दिन में एक बार ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें. अक्सर हमें लगता है कि प्यार तो करते हैं, फिर जताने की क्या ज़रूरत है, पर याद रहे, प्यार का स़िर्फ होना काफ़ी नहीं, प्यार को समय-समय पर ज़ाहिर भी करते रहना ज़रूरी है.

– बच्चों की तरह बड़ों के लिए भी प्ले टाइम बनाएं. घर के बड़ों को उनका फेवरेट इंडोर या आउटडोर गेम्स खेलने के लिए उत्साहित करें और सारा इंतज़ाम ख़ुद करें.

– परिवार के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने का बेस्ट तरीक़ा है कि सब साथ बैठकर खाना खाएं. हर किसी को घर में फैमिली डिनर टाइम बनाना चाहिए और हर किसी को उसके नियम का पालन भी करना चाहिए. यही वो समय होता है, जब पूरा परिवार एक साथ होता है और आप अपनी बात सबके साथ शेयर कर सकते हैं.

– परिवार के किसी सदस्य से अगर मनमुटाव या अनबन हो गई है, तो बैठकर उससे बात करें और अपना नज़रिया और पक्ष उसके सामने रखें. मन में कोई गुबार न रखें. अक्सर न कह पाने के कारण छोटी-छोटी बातें रिश्तों में दरार डाल देती हैं, इसलिए आप ऐसा न होने दें और यहां भी भावनाओं की कंजूसी न करें.

– फैमिली को स्पेशल फील कराने के लिए वीकली फैमिली नाइट रखें. वीकेंड पर या छुट्टी की रात कुछ ख़ास करें. मूवी देखें, नाटक देखने जाएं, अंताक्षरी खेलें या फिर बैठकर गप्पे मारें.

– भावनाओं को खुलकर शेयर करने के लिए मंथली प्लान भी बनाएं. महीने में एक बार परिवार को कहीं घुमाने ले जाएं या फिर कुछ ख़ास करें.

– याद रखें, दूसरों को ख़ुश करने का मौक़ा कभी हाथ से न जाने दें. अगर आपको पता है कि आपके एक फोन कॉल या मैसेज से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ सकती है, तो ऐसा ज़रूर करें.

– दूसरों के साथ-साथ अपने लिए भी भरपूर भावनाएं लुटाएं. ख़ुद को ख़ुश रखने और पैंपर करने का कोई मौक़ा न गंवाएं, क्योंकि ख़ुशियां तभी बांट पाएंगे, जब आप ख़ुद ख़ुश रहेंगे.

– नाते-रिश्तेदारों को भी कभी-कभार याद कर लेंगे, तो वो ख़ुश हो जाएंगे.

– हमसे बहुत-से लोगों को बहुत-सी उम्मीदें होती हैं, सभी तो नहीं, पर कुछ की उम्मीदें तो हम ज़रूर ही पूरी कर सकते हैं.

– अनीता सिंह

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हेल्दी रिश्ते के लिए 7 हेल्दी हैबिट्स (7 Healthy Habits For Healthy Relationship)

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रिश्ते की अच्छी सेहत के लिए स़िर्फ प्यार, विश्‍वास, समर्पण और अंतरंगता ही काफ़ी नहीं, आपकी कुछ आदतें भी रिश्ते की सेहत सुधारने में कारगर साबित हो सकती हैं. यक़ीन नहीं होता, तो आज़माकर देख लीजिए. हेल्दी रिश्ते के लिए कौन-सी आदतें अपनाना है ज़रूरी? आइए, जानते हैं.

 

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आज के दौर में जब शादीशुदा रिश्ते चट मंगनी पट ब्याह वाली कहावत के इतर चट ब्याह पट डिवोर्स की राह पर चल पड़े हैं, ऐसे में रिश्तों की सलामती और मज़बूती के लिए सबसे ज़रूरी है कपल्स का एक साथ समय बिताना, मगर पति-पत्नी दोनों के वर्किंग होने की वजह से अधिकांश कपल्स के पास एक-दूसरे के लिए वीकेंड के अलावा और कभी समय ही नहीं रहता. ये समय की कमी रिश्तों की कड़ी को कमज़ोर बना रही है. ऐसे में ज़रूरी है कि कपल्स थोड़ी स्मार्टनेस दिखाकर एक-दूसरे के साथ ज़्यादा समय बिताने के अन्य विकल्प तलाशें. व़क्त के हिसाब से ख़ुद में थोड़ा बदलाव करके और कुछ आदतों को अपनाकर आप अपने रिश्ते की डोर को कमज़ोर होने से बचा सकते हैं.

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1. साथ करें सुबह की सैर

पूरे दिन तो आपको साथ रहने का समय नहीं मिलने वाला, तो क्यों न सुबह की शुरुआत साथ-साथ करें. माना सुबह उठने के बाद आपके पास ढेरों काम रहते हैं, लेकिन आप यदि सुबह थोड़ा जल्दी उठें और पार्टनर के साथ मॉर्निंग वॉक पर जाएं, तो सुबह की ताज़ी हवा में की गई कुछ देर की चहलक़दमी आपको पूरे दिन फ्रेश रखेगी. सुबह की सैर से जहां सेहत दुरुस्त रहेगी, वहीं मूड फ्रेश रहने से आप अपना काम भी मन लगाकर करेंगी और सुबह-सुबह पार्टनर के साथ बिताए ये कुछ पल आप दोनों को एक-दूसरे के क़रीब लाएंगे.

2. साथ खाना बनाने का है अपना मज़ा

वर्किंग कपल्स दिन में तो अपने-अपने काम में व्यस्त रहने के कारण साथ खाना नहीं खा पाते और रात में भी थके होने की वजह से अक्सर होटल में खा लेते हैं या फिर घर पर ही पार्सल मंगवा लेते हैं. आप ऐसी ग़लती न करें, क्योंकि घर का बना खाना न स़िर्फ सेहत, बल्कि आपके रिश्ते के लिए भी हेल्दी होता है. ऑफिस से आने के बाद दोनों पार्टनर यदि साथ मिलकर खाना बनाते हैं, तो इससे न स़िर्फ एक पार्टनर का बोझ हल्का हो जाता है, बल्कि खाने का स्वाद और रिश्ते की सेहत दोनों अच्छी हो जाती है. यक़ीन न हो, तो इस नुस्ख़े को आज़माकर देख लीजिए.

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3. मिलकर करें प्लानिंग

बात चाहे हॉलिडे प्लान करने की हो, फायनांशियल प्लानिंग या फिर लक्ष्य तक पहुंचने के लिए ख़ुद में बदलाव लाने की, अकेले ये सब करने की बजाय इसमें हमसफ़र को भी शामिल करें. साथ मिलकर प्लानिंग करने से पार्टनर को भी अच्छा महसूस होगा कि आप उन्हें अहमियत देेते हैं और आप दोनों ज़्यादा व़क्त साथ बिता पाएंगे. छुट्टियों आदि की प्लानिंग साथ मिलकर करने से दोनों एक-दूसरे को अपने आइडियाज़ बता सकते हैं, जिससे छुट्टियां मज़ेदार बन सकती हैं.

4. न छुपाएं दिल की बात

यदि आप अपने रिश्ते में किसी बात को लेकर बहुत परेशान हैं या आपको किसी चीज़ की कमी महसूस हो रही है, तो बिना किसी झिझक के पार्टनर से इस बारे में बात करें. अपने रिश्ते की भलाई के लिए हमसफ़र से बात करने में कोई बुराई नहीं है. आपकी समस्या जानने के बाद ही तो वो उसे हल करने के बारे में सोचेंगे. यदि आप कहेंगे ही नहीं, तो पार्टनर को पता कैसे चलेगा. हां, एक बात का ध्यान रखें कि बात करने का ये मतलब कतई नहीं है कि आप हमेशा उनसे हर बात के लिए शिकायत करने लगें.

5. बेड पर साथ जाएं 

आपकी पत्नी रात में डिनर के बाद यदि किचन का काम समेटती रहती है और आप बेडरूम में आराम फरमाते हैं, तो अपनी ये आदत बदल लीजिए. यदि आप किचन में उनकी मदद नहीं कर रहे हैं, तो भी सोने की बजाय अपना कुछ और काम कर लीजिए और पत्नी का काम ख़त्म होने पर साथ ही बिस्तर पर जाएं. ऐसा करने पर उन्हें भी अच्छा लगेगा और आपके रिश्ते की ताज़गी भी बनी रहेगी.

 

 6. कमरे को रखें साफ़-सुथरा

क्या कभी आपने महसूस किया है कि किसी गंदी जगह जाने पर आपको बुरा महसूस होता है और ख़ूबसूरत, साफ़-सुथरी जगह/घर में आने पर आपको सुकून और ख़ुशी का अनुभव होता है. दरअसल, गंदा और अस्त-व्यस्त कमरा न स़िर्फ स्ट्रेस बढ़ाता है, बल्कि इससे निगेटिव एनर्जी निकलती है, जो सेहत और रिश्ते दोनों के लिए अच्छी नहीं है. इसके विपरीत यदि कमरा साफ़-सुथरा व व्यवस्थित है, तो इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और आपको मानसिक शांति मिलेगी. ज़ाहिर है, जब आप रिलैक्स और अच्छा महसूस करेंगे, तो पार्टनर के साथ रिश्ता भी बेहतर बनेगा.

 

7. मैं सही हूं, तुम ग़लत

अधिकांश लोगों की आदत होती है कि वो किसी भी क़ीमत पर झुकने को तैयार नहीं होते. कई बार ख़ुद को सही साबित करने के लिए वो पार्टनर की भावनाओं को ठेस पहुंचाने से भी पीछे नहीं हटते, मगर वो ये भूल जाते हैं कि भले ही बहस करके पार्टनर से जीत जाएं और ख़ुद को सही साबित कर दें, लेकिन असल में तो ये उनकी हार ही है, क्योंकि उन्होंने हमसफ़र का दिल तोड़ा. अतः बेहतर होगा कि कुछ चीज़ों को यूं ही छोड़ दिया जाए, बजाय उन्हें लेकर सही/ग़लत पर बहस करने के, क्योंकि रिश्ते में सही और ग़लत देखने की बजाय भावनाएं ज़्यादा अहमियत रखती हैं.

फैक्ट फाइल

– शिकागो यूनिवर्सिटी द्वारा किए एक अध्ययन के मुताबिक़, यदि एक पार्टनर बहुत ज़्यादा सकारात्मक है, तो ऐसे कपल्स के बीच टकराव अन्य कपल्स की अपेक्षा बहुत कम होता है.

– एक अन्य अध्ययन के अनुसार, ज़्यादातर कपल्स के बीच मनमुटाव व झगड़े की सबसे बड़ी वजह पैसा और संवादहीनता होती है.

– कई सर्वे में ये बात साबित हुई है कि जो कपल्स शादी के रिश्ते के साथ ही अपने दोस्तों के साथ रिश्ता निभाते हैं और अपनी हॉबी के लिए समय निकालते हैं, वो उन कपल्स से ज़्यादा ख़ुश रहते हैं जिनकी लाइफ स़िर्फ पार्टनर के इर्द-गिर्द ही घूमती है.

– अध्ययन बताते हैं कि अपनी ज़िंदगी में नई चीज़ें ट्राई करने वाले कपल्स दूसरे कपल्स से ज़्यादा ख़ुश रहते हैं.

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