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हमारा स्वास्थ्य काफ़ी हद तक हमारे पेट और पाचन तंत्र से जुड़ा रहता है, इसलिए हेल्दी रहने के लिए पाचन तंत्र औरमेटाबॉलिज़्म का सही और हेल्दी रहना बेहद ज़रूरी है. कैसे रखें अपने पाचन तंत्र का ख़्याल आइए जाने.

हो सही शुरुआत: जी हां, दिन की शुरुआत सही होगी तो पूरा दिन सही होगा और सेहत भी दुरुस्त रहेगी. सही शुरुआत केलिए हेल्दी और पौष्टिक नाश्ता ज़रूरी है. नाश्ता पौष्टिक होना ज़रूरी है- फल, ड्राई फ़्रूट्स, दलिया, उपमा, पोहा, कॉर्नफ़्लेक्स, दूध, फ़्रूट जूस, अंकुरित अनाज,दालें, अंडा, पराठे, दही आदि. पौष्टिक नाश्ता आपका दिनभर संतुष्ट रखताऔर इससे पाचन तंत्र संतुलित रहता है. ये दिनभर की ऊर्जा प्रदान करता है. एसिडिटी से राहत दिलाता है, क्योंकि अगरआप नाश्ता नहीं करते हैं, तो ऐसिड बनने लगती है, जो काफ़ी तकलीफ़ देती है.

हेल्दी डायजेशन के लिए प्रोबायोटिक्स ज़रूरी है: क्या आप जानते हैं कि बैक्टीरिया भी हेल्दी और अनहेल्दी होते हैं. हेल्दीबैक्टीरिया पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं. हेल्दी बैक्टीरिया आपको प्रोबायोटिक्स सेमिलते हैं. आप प्रोबायोटिक्स के प्राकृतिक स्रोतों को भोजन में शामिल करें. दही, ख़मीर वाले प्रोडक्ट्स, छाछ व रेडीमेडप्रोबायोटिक्स ड्रिंक्स का सेवन करें.

Digestive Health Tips

स्ट्रेस से दूर रहें: स्ट्रेस यानी तनाव पूरे शरीर व ख़ासतौर से पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इससे गैस, ऐसिडिटी, क़ब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है. तनाव के कारण पेट में ब्लड व ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है जिससेपेट में ऐंठन, जलन जैसी समस्या होने लगती है, साथ ही पेट में मैजूद हेल्दी बैक्टीरिया में भी असंतुलन आने लगता है. इसके अलावा तनाव से नींद भी नहीं आती और नींद पूरी ना होने से पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता. 

प्रोटीन रिच फूड खाएं: ये मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाता है. प्रोटीन के लिए आप पनीर, चीज़ व अन्य डेयरी प्रॉडक्ट्स शामिल करसकते हें. इसके अलावा अंडा, चिकन, फिश भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं और ये मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाते हैं.

Digestive Health Food

सेब, केला और पपीता ज़रूर खाएं: सेब में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो पेट के स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं. सेबफाइबर का अच्छा स्रोत भी है और गुड बैक्टीरिया को पनपाने में भी मदद करता है. पपीते में विटामिन ए, बी और सी औरकई तरह के एन्ज़ाइम्स होते हैं, जो खाने को डायजेस्ट करने में मदद करते हैं. रिसर्च बताते हैं कि पपीता खाने सेडायजेस्टिव सिस्टम में सुधार होता है. केले में फाइबर और पेक्टिन भरपूर मात्रा में होता है, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिएबहुत फायदेमंद होता है.

डायट में फाइबर शामिल करें: भोजन में फाइबर जितना ज़्यादा होगा पेट उतना ही स्वस्थ होगा क्योंकि आपको क़ब्ज़ कीसमस्या नहीं होगी. फाइबर कोलोन की कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है और पेट साफ़ रखता है. अपने भोजन में साबूतअनाज, दालें, गाजर, ब्रोकोली, नट्स, छिलके सहित आलू, मकई, बींस व ओट्स को शामिल करें.

अदरक का सेवन करें: अदरक पेट के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. यह पाचन को बेहतर करता है. अदरक के टुकड़ेकरके ऊपर से नींबू का थोड़ा सा रस डालें और भोजन के साथ खाएं. आपका हाज़मा बेहतर होगा. अपच की समस्या नहीं होगी.

Digestive Health Tips

लहसुन मेटाबॉलिज़्म को बूस्ट करता है: लहसुन को भी डायट में शामिल करें. यह ना सिर्फ़ मेटाबॉलिज़्म को बेहतर करता है बल्कि वज़न कम करने में भी सहायक है और हार्ट को भी हेल्दी रखता है.

जीरा भी है बेहद हेल्दी: जीरा आंतों को और गर्भाशय को भी साफ़ रखता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. जीरा भूख भीबढ़ाता है और पेट संबंधी कई समस्याओं से राहत दिलाता है.

ग्रीन टी है मेटाबॉलिज़्म बूस्टर: जी हां, ग्रीन टी ज़रूर लें इससे पाचन बेहतर होता है. यह मेटाबॉलिज़्म बूस्टर मानी जाती हैऔर वज़न भी कम करती है.

Digestive Health Tips

साबूत अनाज और बींस: यह पाचन तंत्र को ठीक रखने में सहायक होते हैं. क़ब्ज़ से बचाते हैं और पेट संबंधी कईसमस्याओं से राहत दिलाते हैं. इसी तरह बींस में भी फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर करता है. बींस से गुड़बैक्टीरिया भी बढ़ते हैं और कब्ज़ की समस्या भी नहीं होती.

हरी पत्तेदार सब्ज़ियां: ये प्रोटीन व आयरन का भी अच्छा सोर्स मानी जाती हैं और विटामिंस से भरपूर होती हैं. साथ ही साथये पेट को व पाचन तंत्र को हेल्दी रखती हैं. ये फाइबर का बेहतर स्रोत होती हैं, इनमें ख़ासतौर से पालक और गोभी में कईपोषक तत्व- फोलेट, विटामिन ए, सी और के होता है. शोध बताते हैं कि हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में एक ख़ास तरह का शुगरहोता है जो आंतों के हेल्दी बैक्टीरिया (गट बैक्टीरिया) के निर्माण को बढ़ाता है.

रसीले व मौसमी फल व ड्राई फ़्रूट्स खाएं: फल पेट को हेल्दी रखते हैं. क़ब्ज़ की समस्या नहीं होने देते. फाइबर से भरपूरहोते हैं. ड्राई फ़्रूट्स भी फाइबर से भरपूर होते हैं और आंतों को हेल्दी रखते हैं. हाल ही के रिसर्च से पता चला है कि प्रूनयानी सूखा आलूबखारा आंतों, मुंह और वजाइना में पाया जानेवाला ख़ास क़िस्म का बैक्टीरिया के निर्माण में सहायकहोता है जिससे पाचन तंत्र भी मज़बूत होता है. इसी तरह से खजूर भी पेट के लिए काफ़ी हेल्दी माना जाता है.

Boost Metabolism

हाईड्रेटेड रहें: पानी ख़ूब पिएं क्योंकि यह ज़हरीले तत्वों को बाहर करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. शरीर मेंपानी व नमी की कमी ना होने पाए. नींबू पानी, नारियल पानी या ताज़ा फल व सब्ज़ी का जूस भी लें. 

एक्टिव रहें, एक्सरसाइज़ व योगा करें: रोज़ाना 30 मिनट एक्सरसाइज़ करें, वॉक करें, एक्टिव रहें. लिफ़्ट की बजायसीढ़ियों का इस्तेमाल करें. योगा भी कर सकते हैं. साइक्लिंग, स्विमिंग भी कर सकते हें. यह रूटीन आपकी मांसपेशियोंको लचीला बनाएगा और पाचन को बेहतर. वरना शारीरिक गतिविधियों की कमी से क़ब्ज़ जैसी समस्या होने लगेगी.

अनहेल्दी चीज़ों से रहें दूर: पाचन तंत्र की हेल्थ के लिए ज़रूरी है कि अनहेल्दी चीज़ों से भी दूरी बनाए रखें. शराब व कैफेनका सेवन कम करें क्योंकि यह भीतर से शरीर को ड्राई करते हैं और डीहाईड्रेट करते हैं. साथ ही ये क़ब्ज़ की समस्या भीपैदा करते हैं. पानी के नाम पर शुगरी ड्रिंक ना पिएं. तला हुआ ज़्यादा ना खाएं. प्रोसेस्ड फूड व शुगर का सेवन कम या नाकरें. मैदा और ज़्यादा मसालेदार भोजन ना करें, क्योंकि ये क़ब्ज़, गैस, एसिडिटी, अपच को बढ़ाकर पाचन को कमज़ोरकरते हैं.

पूर्वा शर्मा

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हेल्दी तो हम सभी रहना चाहते हैं लेकिन कुछ छोटे छोटे सूत्र हैं जिन पर हम ध्यान ही नहीं देते, अगर ये सूत्र और सीक्रेट हमसमझ जाएँ तो हेल्दी रहना आसान हो जाए. 

आइए जानते हैं इन्हीं सीक्रेट सूत्रों को-

  • सकारात्मक रहें और अपना महत्व समझें. 
  • खुद पर ध्यान देना ज़रूरी है इस तथ्य को समझ लें.
  • दूसरों के लिए जीना अच्छी सोच है लेकिन उससे पहले खुद के लिए जीना सीखें.
  • आप हेल्दी रहेंगे तभी तो दूसरों के लिए भी कुछ कर पाएँगे.
  • हाईड्रेटेड रहें ताकि शरीर में पानी व नमी की कमी ना हो. पानी ज़हरीले तत्वों को बाहर करता है और पाचन क्रियाको बेहतर बनाता है.
  • फ़िज़िकली एक्टिव रहें. एक्सरसाइज़ व योगा करें. आप भले ही कितना भी हेल्दी खा लें पर जब तक शरीर कोक्रियाशील नहीं रखेंगे तब तक कहीं न कहीं कोई कमी रह ही जाएगी. 
  • रोज़ाना कम से कम आधा घंटा कसरत करें. जॉगिंग और वॉकिंग करें.
  • लिफ़्ट की बजाए सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. यह रूटीन आपकी मांसपेशियों को लचीला बनाएगा और पाचन कोबेहतर. 
  • ध्यान और योगा भी कर सकते हैं. मेडिटेशन से ब्रेन में हैप्पी हार्मोंस रिलीज़ होते हैं और एक नई ऊर्जा का एहसासहोता है.
  • ध्यान रहे फ़िज़िकल एक्टिविटी की कमी से क़ब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है.
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  • हेल्दी खाना खायें. अपने दिन की शुरुआत पोषण भरे नाश्ते से करें. 
  • भले ही लंच ठीक से ना करें लेकिन नाश्ता अच्छी तरह और हेल्दी करेंगे तो फ़ैट्स से बचेंगे.
  • रिसर्च बताते हैं कि जो लोग नाश्ता करते हैं उनका एनर्जी लेवल अधिक होता है और वो दिनभर ऐक्टिव बने रहते हैं.
  • जंक फूड से बचें. हेल्दी खाना खाएँ. 
  • मंचिंग के लिए भी हेल्दी ऑप्शन पर ध्यान दें. फ़्राइड सनैक्स की बजाए ड्राई फ़्रूट्स, बेक्ड फ़ूड रखें.
  • स्ट्रेस ना लें, क्योंकि तनाव पूरे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इस से गैस, ऐसिडिटी, क़ब्ज़ जैसी समस्या होसकती है.
  • स्ट्रेस के कारण पेट में रक्त व ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है जिससे पेट में ऐंठन, जलन जैसी समस्या होनेलगती है, साथ ही पेट में मैजूद हेल्दी बैक्टीरिया में भी असंतुलन आने लगता है.
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  • शराब व कैफेन का सेवन कम करें क्योंकि यह भीतर से शरीर को ड्राई और डीहाईड्रेट करते हैं.
  • अपने भोजन में साबूत अनाज, गाजर, ब्रोकोली, नट्स, मकई, बींस, ओट्स, दालें व छिलके सहित आलू को शामिलकरें.
  • मौसमी फल खाएँ और अपने खाने में हर रंग की फल-सब्ज़ियाँ शामिल करें.
  • दही व छाछ का सेवन करें, क्योंकि इनमें हेल्दी बैक्टीरिया होते हैं जो पेट और आँतों को स्वस्थ रखते हैं.
  • पनीर का सेवन करें क्योंकि यह वज़न को भी नियंत्रित रखने में कारगर है.
  • हफ़्ते में एक या दो दिन अपनी क्रेविंग्स के लिए रखें. मनपसंद कुछ खाएँ क्योंकि अगर आप बहुत ज़्यादा स्ट्रिक्टडायट करते हो तो बहुत ज़्यादा समय तक उसको फ़ॉलो कर पाना बेहद मुश्किल है.
  • हेल्दी सूप को अपने डायट का हिस्सा बनाएँ. 
  • किचन में मौजूद मसाले भी बहुत हेल्दी होते हैं , काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, इलाइची,धनिया आदि को खाने में शामिल करें.
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  • अगर गले में ख़राश या सिर में दर्द हो तो चटकीभर दालचीनी पाउडर को पानी के साथ लें. यही नहीं दालचीनी वज़नभी कम करती है. इसे सलाद या दही में मिलाकर ले सकते हैं. यह मुँहासों को भी कम करता है. दालचीनी पाउडर कोपानी में मिलाकर पेस्ट तैयार करें और अप्लाई करें.
  • अगर कफ़ की समस्या हो तो सरसों के तेल में लहसुन और सेंधा नमक मिलाकर गुनगुना करें और सीने पर मालिशकरें.
  • वज़न को नियंत्रण में रखें क्योंकि बढ़ता वज़न कई बीमारियों को जन्म देता है. हार्ट से लेकर ब्लड प्रेशर औरडायबिटीज़ तक जैसी समस्याएँ बढ़ते वज़न के कारण हो सकती हैं.
  • वज़न कम करने के लिए छोटे गोल्स सेट करें और धैर्य ना खोएँ.
  • वज़न कम करने में नींबू और शहद बेहद कारगर हैं. गुनगुने पानी में रोज़ सुबह खाली पेट सेवन करें.
  • स्पोर्ट्स, स्विमिंग या डांस क्लास से जुड़ सकते हैं.
  • अपने शौक़ को ज़रूर पूरा करें, उन्हें मरने ना दें, क्योंकि यही शौक़ आपको जीवंत बनाए रखते हैं.
  • पर्सनल हाइजीन से लेकर ओरल हाइजीन तक के महत्व को समझें और उनपर ध्यान भी दें.
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  • हेल्दी सोशल लाइफ़ मेंटेन करें, क्योंकि इससे आपको अकेलापन और डिप्रेशन नहीं होगा. लोगों की मदद करें यहआपको बेहतर महसूस कराएगा.
  • पार्टी करें, दोस्तों से मिलें और रिश्तों में इंवेस्ट करें.
  • धोखा ना दें क्योंकि यह आपमें अपराधबोध की भावना को जन्म देगा और आप भीतर से अनहेल्दी मेहसूस करेंगे.
  • ज़िम्मेदारी लेना सीखें, यह आपमें आत्मविश्वास बढ़ाएगा.
  • नींद पूरी लें, यह आदत आपको कई तरह के तनावों से बचाएगी और साथ ही दिनभर ऊर्जावान रखेगी. साथ ही यहडिप्रेशन जैसी नकारात्मक भावनाओं से भी आपका बचाव करती है.
  • ओवर ईटिंग और ओवर स्लीपिंग से भी बचें, ये आपको अनहेल्दी बनाती हैं.
  • बहुत ज़्यादा टीवी ना देखें, यह आपको आलसी और इनएक्टिव तो बनाएगा ही साथ ही रिसर्च बताते हैं कि ज़्यादाटीवी देखने वालों की लाइफ़ कम होती जाती है.
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  • इसी तरह मोबाइल और बहुत ज़्यादा सोशल साइट्स पर भी ना बने रहें. ये आपके रिश्तों की सेहत के लिएहानिकारक है जिसका असर आपने शरीर पर भी पड़ता है.
  • कुकिंग थेरेपी आज़माएँ. रिसर्च के अनुसार जब आप खुद खाना बनाते हैं तो स्ट्रेस कम होता है, आप बेहतर महसूसकरते हैं, क्रिएटिव बनते हैं और हेल्दी रहते हैं.
  • नए दोस्त बनाएँ और हो सके तो पेट्स रखें. ये आपको खुश और हेल्दी रखने में मदद करते हैं.
  • खुश होने का मौक़ा ना छोड़ें. बड़ी चीज़ों की बजाए छोटी छोटी चीज़ों में ख़ुशियाँ देखें. यह आपको सकारात्मकबनाती है और मन के संतोष को दूर करती हैं.
  • ये तमाम बातें आपको पहले से ही पता होती हैं लेकिन कमी सिर्फ़ जज़्बे की होती है. बेहतर होगा बिना देर किएआज से ही हेल्दी लाइफ़ के इन सीक्रेट और सूत्रोंको अमल में लाया जाए.

सरस्वती शर्मा

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आपका फिटनेस लक्ष्य जो भी हो, आप इसे आयुर्वेद तरीक़े से प्राप्त कर सकते हैं. सुनने में अच्छा लग रहा है? निश्चित रूप से, यह हो सकता है. करोना के कारण महामारी से उपजी शहरी जीवनशैली संबंधी बीमारियों ने हमें आयुर्वेद के लिए प्रेरित किया ही है. आयुर्वेद के गुणों व लाभों का उपयोग हम ख़ुद को सेहतमंद और चुस्त-दुरुस्त रखने में कर सकते हैं.
आयुर्वेद की प्राचीन स्वास्थ्य प्रणाली जीवन, दीर्घायु और आपके समग्र कल्याण पर केंद्रित है- यह शारीरिक, मानसिक या आध्यात्मिक हो. आत्म-चिकित्सा के विज्ञान के रूप में, आयुर्वेद विभिन्न आहार, जीवनशैली, मालिश और औषधीय जड़ी-बूटियों को शामिल करता है, जो आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. इस सन्दर्भ में डॉ. दीपेश महेंद्र वाघमारे, जो मिलेनियम हर्बल केयर के चिकित्सा सलाहकार कार्यकारी हैं, ने कई उपयोगी बातें बताई. जानते हैं कि आयुर्वेद फिट रहने में कैसे मदद करता है.

आपको ऊर्जावान बनाए रखता है…
क्या आप दिनभर के काम के बाद सुस्त महसूस करते हैं? क्या आपको सुबह उठने और जिम की क्लास या अपने योग सत्रों को पूरा करने के लिए उत्साह की कमी महसूस होती है? ऐसी स्तिथि में कॉफी या स्टेरॉयड इसका समाधान नहीं है. आपके शरीर को सुस्ती दूर करने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की आवश्यकता होती है. अश्वगंधा, ब्राह्मी और तुलसी जैसी जड़ी-बूटियां आपके शरीर के शारीरिक और मानसिक तनाव में लचीलापन बढ़ाकर आपकी ऊर्जा बढ़ा सकती हैं. यह दिनभर अच्छा महसूस करने में भी मदद करती हैं. ऊर्जावान बने रहने के लिए इन जड़ी-बूटियों के गर्म काढ़े से अपने दिन की शुरुआत करें.

बेहतर शारीरिक क्षमता
अगर आप बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़ कर रहे हैं, तो आपके स्टैमिना भी तेजी से कम होता है. मनोवैज्ञानिक तनाव और शारीरिक गतिविधि को पारस्परिक रूप से संबंधित माना जाता है. ध्यान रहे कि स्टैमिना की कमी भी एक तनावग्रस्त दिमाग़ का परिणाम है. अश्वगंधा, ब्राह्मी और शतावरी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां शक्ति को बढ़ाने और मांसपेशियों को ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ानेे में मदद करती हैं. यह आपको मानसिक रूप से भी आराम देती हैं.
अपने दैनिक आहार में धनिया के बीज, दालचीनी, जीरा और नट्स जैसे बादाम के साथ मसाले मिलाएं. सभी सही और पर्याप्त अनुपात में मिश्रित होते हैं, जो शरीर को ऊर्जावान बनाते हैं.

मेटाबॉलिज्म में वृद्धि
यदि आपके पास एक सेलुलर मेटाबॉलिज्म है, तो आपके फिटनेस के सबसे तेज़ परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं. गुडूची (टीनोस्पोरा कॉर्डिफ़ोलिया) जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां आपके आंत-स्वास्थ्य को ठीक करने में मदद करती हैं. यह आंतों में अच्छी आंत माइक्रोबायोम को बढ़ाती है, जो एक लघु-श्रृंखला फैटी एसिड का उत्पादन करती है और शरीर में वसा के भंडार को विनियमित करने में मदद करती है. सामान्य सीमा के भीतर रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने में सहायता करती है.
दालचीनी जैसे मसाले आपके शरीर में वसा कोशिकाओं के निर्माण को रोकने में मदद कर सकते हैं, जबकि हल्दी या हल्दी में मौजूद करक्यूमिन वसा कोशिकाओं को प्रभावी ढंग से जलाने और शरीर के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है.
अपने नियमित आहार में काली मिर्च को शामिल करने से आपके मेटाबॉलिज्म को इसके थर्मोजेनिक प्रभाव होते हैं. एक ग्लास जीरे के पानी के साथ लेनेे सेे मदद मिल सकती है. एक ग्लास पानी में एक चम्मच जीरा उबालें. इसे सुबह लेना अधिक फायदेमंद है.

स्वस्थ शरीर
प्राचीन आयुर्वेदाचार्यों ने ‘Balaardh’ की अवधारणा की वकालत की. इसका मतलब है कि किसी भी तरह के कठोर अभ्यास के लिए शरीर की पूरी शक्ति का केवल 50% भाग का उपयोग होता है. आधुनिक फिटनेस विशेषज्ञ भी जोरदार व्यायाम सत्रों के बीच 24 घंटे के आराम की सलाह देते हैं, ताकि शरीर को पूरी तरह से ठीक हो सके.
तिल के बीज के तेल के साथ एक अभ्यंग (आत्म-मालिश) जोड़ों, मांसपेशियों और ऊतकों में दर्द से राहत के लिए एक पारंपरिक प्रक्रिया है.
हल्दी और अदरक जैसी जड़ी-बूटियां सूजन को कम करने में मदद करती हैं.
अश्वगंधा और बाला मांसपेशियों को मज़बूत बनाने और पोषण करने में जादुई हैं.
प्रोटीन से भरपूर फलियों को शामिल करने से आपकी मांसपेशियां मज़बूत होती हैं.
बादाम, खजूर, केसर और घी आपको पर्याप्त रूप से फिर से जीवंत करते हैं. इससे कठिन और कठोर वर्कआउट सत्रों से तेजी से उबरने में मदद कर सकते हैं.

लचीलापन
फिटनेस में हड्डी और जोड़ों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा. क्रीक्स और दर्द कम उम्र से ही आपके गति में बाधा उत्पन्न करने लगते हैं, मुख्यतः अस्वस्थ जीवनशैली के कारण महिलाओं को तीस की उम्र से ही ध्यान रखना चाहिए. आयुर्वेद कई जड़ी-बूटियों की सलाह देता है, जो पारंपरिक रूप से हड्डी की ताकत, जोड़ों के लचीलेपन में सुधार और दर्द को कम करने के लिए उपयोग किए जाते हैं.
हडजोड, सलाई गुग्गुल, अश्वगंधा और बाला जैसी जड़ी-बूटियां हड्डी की कोशिका के होमियोस्टेसिस को बहाल करने, हड्डी में सुधार और सूजन को कम करने में लाभदायक है.
दशमूल (10 जड़ी-बूटियों की जड़ें) तेल भी जोड़ों और मांसपेशियों की कठोरता को कम करने में सहायक है. इससे लचीलेपन में भी सुधार होता है.

अच्छी नींद
अच्छी नींद हमेशा ही शरीर के लिए महत्वपूर्ण है. जब आपका शरीर ख़ुद को ठीक करने और उसकी मरम्मत करने में सक्षम हो, तो आपकी फिटनेस व्यवस्था को अच्छी नींद के साथ संतुलित करना चाहिए, ताकि आप अगले दिन एक बार फिर से मैट हिट करने के लिए दौड़ें.
ब्राह्मी, शंखपुष्पी, सर्पगंधा, वचा और अश्वगंधा ऐसी आवश्यक जड़ी-बूटियां हैं, जो आपके नर्वस सिस्टम को आराम देती हैं, मानसिक थकान से राहत दिलाती हैं और आपके दिमाग़ पर शांत प्रभाव डालती हैं. आयुर्वेद स्वास्थ्य की अवधारणा का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए एक प्राचीन लेकिन अत्यंत प्रासंगिक प्रणाली है, सही लक्ष्य निर्धारित करें और सभी फिट रहें.

– ऊषा गुप्ता

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अधिकांश महिलाओं के लिए पीरियड्स एक बेहद दर्दनाक अनुभव होता है, उन्हें इतना दर्द होता है कि पीरियड्स को लेकर मन में डर बैठ जाता है. इससे छुटकारा पाने के लिए वो अक्सर पेनकिलर का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन दर्दनिवारक दवाओं के अपने साइडइफेक्ट होते हैं इसलिए बेहतर होगा कि घरेलू उपायों को जाना और अपनाया जाए तो बेहद सरल होने के साथ साथ कारगर भी हैं.

पपीते का सेवन: पपीते की तासीर गर्म मानी जाती है और अक्सर दर्द की वजह होती है खुलकर फ्लो का ना होना, ऐसे में पपीता खायें क्योंकि इससे खुलकर फ्लो होता है और दर्द में आराम आता है. यही नहीं पपीता पेट के लिए भी काफ़ी अच्छा माना जाता है और पाचन को सही रखता है.

अदरक और काली मिर्च: अदरक को पानी में उबाल कर चाय की तरह पिएँ. अदरक के टुकड़े करके पानी में डालकर चाय बना लें, चाहें तो काली मिर्च भी मिला लें या फिर अदरक के टुकड़े करके उन्हें चबाकर खाएँ. यह पाचन को भी बेहतर करता है.
अजवायन: यह भी पेट के लिए बेहद फ़ायदेमंद है. इसकी भी तासीर गर्म होती है और यह गैस की समस्या से निजात दिलाने में कारगर है. अक्सर माहवारी के समय गैस की समस्या बढ़ जाती है जो दर्द की एक वजह होती है.

तुलसी की पत्तियाँ: चाय में इसे डालें क्योंकि इसमें दर्दनिवारक तत्व होते हैं जो काफ़ी तहाए पहुँचाते हैं.

जीरा: यह गर्भाशय को साफ़ करता है. इसमें दर्दनिवारक गुण भी हैं. जीरे की चाय बनाकर पिएं, पानी में भी उबालकर इसे पी सकती हैं या यूं ही चटकीभर जीरा चबा चबा कर खाएँ. इससे काफ़ी आराम मिलेगा.

Menstrual Cramps

मेथी: रात को एक कप पानी में एक टीस्पून मेथीदाना भिगो दें और अगले दिन इस पानी क सेवन करें.

गर्म पानी से सिकाई: एक बोतल में गर्म पानी भरकर उससे सिकाई करें काफ़ी आराम मिलेगा. यह पारंपरिक उपाय काफ़ी लोग अपनाते हैं, क्योंकि यह सबसे आसान और कारगर भी है.

तिल का तेल: इससे पेडू में यानी पेट के निचले भाग में हल्के हाथों से मालिश करें. यह गर्माहट और आराम देगा.
एक्सरसाइज़: शोध बताते हैं कि एरोबिक्स से पेन में काफ़ी राहत मिलती है. जो महिलाएँ लगातार दो महीनों तक हफ़्ते में तीन बार आधे घंटे एरोबिक्स करती हैं उन्हें पीरियड्स में दर्द बेहद कम होने लगता है. अगर एरोबिक्स नहीं करना चाहतीं तो सिर्फ़ नंगे पैर ज़मीन पर या घास पर चलें इससे भी दर्द में आराम मिलता है. अगर आप नियमित रूप से योग करती हैं तो भी पेन में आराम मिलेगा और आप ऐसे योगा पोज़ भी ट्राई कर सकती हैं जो इस दर्द में आराम दिलाते हैं.

मेडिटेशन: सांस लेने की तकनीक आपको काफ़ी निजात दिला सकती है. यह मांसपेशियों को रिलैक्स करती है और इसे रिलैक्सेशन टेकनीक ही कहा जाता है. यह रक्त संचार बेहतर करके मस्तिष्क को सुकून का एहसास कराती हैं, दर्द पैदा करनेवाले हार्मोन्स को कम करके राहत का आभास कराती है.
नमक का सेवन कम करें और पानी खूब पिएं: पीरियड्स आने से कुछ दिन पहले से नमक खाना या तो बंद कर दें या कम करें, मसालेदार भोजन, तला-भुना भी ना खाएँ और फ़र्क़ देखें. इस तरह का खाना वॉटर रिटेंशन को बढ़ाता है जिससे गैस, अपच, भारीपन होता है और दर्द का एहसास ज़्यादा होता है. साथ ही पानी खूब पिएँ ताकी डीहाईड्रेट ना हों.

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पीरियड्स को आज भी शर्मिंदगी का विषय माना जाता है! यही वजह है कि बहुत सी महिलाएँ आज भी काफ़ी तकलीफ़ में रहती हैं. इसी के चलते टाटा ट्रस्ट्स ने पहल की मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोग्राम की. यह शुरुआत द टाटा वाटर मिशन के तहत हुई और इसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.

भारत के कई राज्यों के गाँवों में फेज़ वाइज़ इसको लेकर सर्वे किए गए. राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, उत्तराखंड, झारखंड, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के गाँवों को भी इसमें शामिल किया गया.

Menstruation Stigma

आज भी कई महिलाएँ पैड्स की जगह कपड़ा ही यूज़ करती हैं जो काफ़ी अनहाइजिनिक होता है और कई तरह के इंफ़ेक्शन्स का डर बना रहता है.

सर्वे में पाया गया कि

  • 70% महिलाओं को यह भी पता नहीं होता कि उन्हें पीरियड्स क्यों होते हैं.
  • 92% महिलाओं को लगता है कि वाइट डिसचार्ज उनके शरीर के लिए हानिकारक होता है.
  • 40% महिलाओं को लगता है कि पीरियड्स के बारे में बात करने में कोई बुराई नहीं.
  • लेकिन उनमें से मात्र 10.25% ने ही इसको लेकर अपनी मां से बात की.
  • 55% महिलाएँ पीरियड्स के दौरान किचन में नहीं जातीं.
  • कई महिलाओं को 9km पैदल चलकर जाना पड़ता है पीरियड्स से जुड़ा सामान लाने के लिए.
  • 20% महिलाएँ पीरियड्स के दौरान टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं करतीं.
Menstrual Hygiene

इन तथ्यों के आधार पे टाटा वाटर मिशन ने मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोग्राम बनाया जिसमें किशोरों को जागरुक करने का काम किया गया. महिलाओं से बात की, लड़कों और पुरुषों से भी बात की गई. इस अभियान के तहत इन बातों पे ध्यान दिया गया-

  • स्कूल में व समाज में भी किशोरियों व महिलाओं से बात करके एजुकेट किया गया, उनको ट्रेनिंग व सैनिटाइज़ेशन सेशंस दिए गए.
  • समाज में पुरुषों व स्कूल में भी किशोरों से बात करके उन्हें पीरियड्स के बारे में जागरूक किया गया और इस बात का एहसास कराया गया कि उनका सहयोग कितना ज़रूरी है और यह सहयोग किस तरह से मदद कर सकता है.
  • महिलाओं को ईको फ़्रेंडली प्रोडक्ट्स मिल पाएं इसके लिए सप्लाई चेन की व्यवस्था की गई, साथ ही स्थानीय लोगों व महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित किया गया इस तरह के प्रोडक्ट्स का निर्माण स्थानीय स्तर पर ही हो पाए.
  • सैनिटरी वेस्ट को सुरक्षित तरीक़े से डिसपोज़ किया जा सके इसके प्रबंध से जुड़ी बातों की व्यवस्था भी की गई.
Menstrual Hygiene

पिछले तीन सालों से यह प्रयास चल रहा है और इसका असर व प्रभाव भी नज़र आया. कई महिलायें व बच्चियां इससे लाभान्वित हुईं, लेकिन लॉकडाउन के चलते इस क्रम में बदलाव व रुकावट निश्चित तौर पे आई है जिससे जो महिलायें व बच्चियाँ पैड्स यूज़ करने लगी थीं वो फिर से कपड़े के इस्तेमाल को मजबूर हो गईं.

Menstrual Hygiene

काम बंद है तो पैड्स भी उन्हें उपलब्ध नहीं. इसी के चलते उन्हें अब इस दिशा में जागरुक किया का रहा है कि कपड़े को हाइजिनिक तरीक़े से कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्हें खुद अपना कपड़े का पैड बनाने की दिशा में भी आत्मनिर्भर किया जा रहा है.

Menstrual Hygiene

सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को भी इस काम में आत्म निर्भर बनाया गया जिससे वो भी उधोग की शुरुआत कर सकें और इसी वजह से उत्तर प्रदेश में 1500 कपड़े के पैड्स बनाए व बेचे गए. यही नहीं लगभग 20,000 से अधिक महिलाओं को खुद घर में इस तरह के क्लोथ पैड्स बनाने की ट्रेनिंग भी दी गई.

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The Fitness Project by Rujuta Diwekar

फिटनेस प्रोजेक्ट: घी खाएं बिना डरे, बिना शंका व अपराधबोध के… रुजुता दिवेकर का फिटनेस मंत्र (Eat Ghee Without Fear, Without Guilt, Without Doubt: The Fitness Project by Rujuta Diwekar)

फिटनेस प्रोजेक्ट की थीम के अंतर्गत हमने आपको पहले हफ्ते की गाइडलाइन्स की जानकारी दी थी. अब आप जानें कि दूसरे हफ्ते में आपको कैसे डायट व फिटनेस को प्लान करना है.
ब्रेकफास्ट-लंच-डिनर में 1 टीस्पून घी का इस्तेमाल ज़रूर करें. बिना किसी डर के, बिना किसी शंका के, बिना किसी झिझक के और बिना अपराधबोध के बेहिचक, बेझिझक देसी घी का इस्तेमाल ज़रूर करें.

दूसरा हफ्ता- गाइडलाइन 2- कैसे शुरुआत करें?

– आप अपना नाश्ता अपनी पहली मील, जिसे आप पहले हफ्ते से फॉलो कर रहे हैं, उसके 20-90 मिनट बाद ले सकते हैं.

– दोपहर में यदि मीठा खाने की इच्छा हो या फिर आलस महसूस हो यानी आपको यह लगे कि आप अपनी क्षमता का मात्र 50% ही इस्तेमाल करके काम कर रहे हैं, तो लंच में एक्स्ट्रा टीस्पून देसी घी का डालें.

– यदि आपको कब्ज़ की समस्या रहती है, पाचन संबंधी समस्या रहती है या अच्छी नींद नहीं आती, तो रात के खाने में भी एक अतिरिक्त टीस्पून घी का इस्तेमाल करें.

घी के इस्तेमाल के अन्य तरीके, ख़ासतौर से सर्दियों में अपने जोड़ों को लचीला व त्वचा को ग्लोइंग इफेक्ट देने के लिए-
– घी में मखाने भूनकर खाएं, मिड मील यानी चाय के साथ लगभग 4 बजे.

– देसी घी में बने गोंद के लड्डू, ख़ासतौर से यदि आप उत्तर भारत या दुनिया में कहीं भी बेहद ठंडी जगहों पर रहते हों, तो मिड मॉर्निंग मील (नाश्ते के 2-3 घंटे बाद) के तौर पर खाएं.

– घी और गुड का सेवन करें, यदि आपको पीएमएस यानी पीरियड्स से पहले की तकलीफ़ होती हो, थकान महसूस होती हो या आपको हीमोग्लोबिन स्तर कम हो तो.

यह भी पढ़ें: फिटनेस का मतलब वेटलॉस या पतला होना नहीं होता… रुजुता दिवेकर का फिटनेस मंत्र! (Theme- Fitness Is Simple And Uncomplicated- The Fitness Project By Rujuta Diwekar)

आमतौर पर पूछे जानेवाले सवाल

मुझे हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर आदि की समस्या हो, तो क्या घी का सेवन किया जा सकता है?
जी बिल्कुल. घी मेटाबॉलिज़्म में लिपिड्स को बढ़ाकर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है. बेहतर होगा पैक्ड बिस्किट्स न खाएं और अल्कोहल बंद करें, न कि घी. घी पूरी तरह सुरक्षित व हेल्दी है.

मुझे डायबिटीज़, पीसीओडी है और मैं ओवरवेट हूं, तो क्या मैं घी ले सकता/सकती हूं?
जी हां, ज़रूर ले सकते हैं, क्योंकि घी में भी एसेंशियल फैटी एसिड का एक प्रकार होता है, जो वज़न और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है.

हम देसी घी में ही खाना बनाता है, इसके बाद भी क्या ऊपर से अतिरिक्त घी डालेन की आवश्यकता है?
यह पूरी तरह आप पर निर्भर है. यह ख़्याल रखें कि आप दिन में 3-6 टीस्पून घी का सेवन करें. घी खाने का स्वाद बढ़ाता है, न कि उसे मास्क करता है.

हम तेल में खाना बनाते हैं, तो क्या हमें ऊपर से घी मिलाना चाहिए?
जी हां, ज़रूर.

क्या स्टोर से ख़रीदा घी ठीक रहेगा या हमें घर पर बनाना चाहिए?
आपको यह ध्यान में रखना होगा कि देसी गाय के दूध से बना घी हो. बड़े ब्रान्ड्स की बजाय छोटी गौशाला या महिला गृह उद्योग जैसी संस्थाओं से लेना श्रेयस्कर है.

अगर देसी गाय का घी उपलब्ध न हो, तो क्या भैंस का घी इस्तेमाल किया जा सकता है?
जी हां, आप कर सकते हैं. यह बड़े ब्रान्ड्स से घी ख़रीदने से कहीं बेहतर होगा.

भारत के बाहर रहनेवालों के लिए क्या विकल्प हैं?
कल्चर्ड व्हाइट ऑर्गैनिक बटर या क्लैरिफाइड बटर, जो हेल्थ फूड स्टोर्स पर मिलता हो. बेहतर होगा कि खुले में स्वतंत्र चरनेवाली या घास खानेवाली गाय के ही डेयरी प्रोडक्ट्स यूज़ करें.

क्या हमें मांसाहार पर भी घी का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि वो तो पहले से ही काफ़ी फैटी होता है.
आपको ज़रूर देसी घी यूज़ करना चाहिए, क्योंकि घी का अनूठा फैटी एसिड स्ट्रक्चर शरीर के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है.

हमें कैसे पता चलेगा कि हर खाने में कितना और कितनी मात्रा में घी का इस्तेमाल करना है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या खा रहे हैं और यह जानकारी एक परिपेक्ष में सामान्यतौर पर समझ के लिए है. दाल-चावल, खिचड़ी या रोटी-सब्ज़ी में कम घी यूज़ होता है, जबकि पूरन पोली, दाल-बाटी, बाजरा रोटी में अधिक घी की आवश्यकता होती है. यदि किसी तरह का कंफ्यूज़न हो, तो घर की बुज़ुर्ग यानी दादी-नानी से सलाह लें.

घी व उसके इस्तेमाल से संबंधित अधिक जानकारी के लिए इंडियन सुपरफूड्स का घी चैप्टर पढ़ें.

घी के हेल्थ बेनीफिट्स के लिए देखें यह वीडियो

Why you must add Ghee in your meals

The fitness project 2018 – week 2 guideline #RDfitnessproject2018

Posted by Rujuta Diwekar on Tuesday, 9 January 2018

सौजन्य: https://www.rujutadiwekar.com

Rujuta Diwekar

फिटनेस का मतलब वेटलॉस या पतला होना नहीं होता… रुजुता दिवेकर का फिटनेस मंत्र! (Theme- fitness is simple and uncomplicated- The Fitness Project by Rujuta Diwekar)

– फिटनेस बेहद सिंपल है, इसमें आपको क्रांतिकारी डायट प्लान या वर्कआउट्स करने की ज़रूरत ही नहीं.
– दरअसल फिटनेस का मतलब ही लोग ग़लत समझते हैं. फिटनेस का अर्थ पतला हो जाना या वेटलॉस नहीं होता.
– फिटनेस वो होती है, जो आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करती है, उस पर असर डालती है, जैसे- आपका एनर्जी लेवल, नींद की क्वालिटी, पाचन शक्ति आदि.
– रुजुता दिवेकर ने अपने 12 हफ़्तों के फिटनेस प्रोजेक्ट को जब लॉन्च किया था, तो उन्हें बहुत ही ज़्यादा लोगों का समर्थन मिला.
– लोगों को इससे बेहद लाभ भी मिला. उनके इंचेज़ कम हुए और वो अधिक फिट महसूस करने लगे.
पहला हफ़्ता- गाइडलाइन 1- कैसे शुरुआत करें?
– अपने दिन की शुरुआत एक केले से करें या किसी भी फ्रेश फ्रूट से या फिर आप भिगोए हुए बादाम या किशमिश भी ले सकते हैं. चाय-कॉफी से अपना दिन शुरू न करें.
– हां, 10-15 मिनट बाद आप चाय-कॉफी ले सकते हैं.
– यह उठने के 20 मिनट के भीतर ही खा लें और अगर आपको थायरॉइड है, तो गोली लेने के बाद यह मील लें.

यह भी पढ़ें: आर्ट ऑफ ईटिंग राइट: सही खाना और कैलोरीज़ गिनना एक-दूसरे के विपरीत है- रुजुता दिवेकर (Indian Food Wisdom And The Art Of Eating Right By Rujuta Diwekar)

– केला दरअसल उनके लिए सही होता है, जिन्हें या तो पाचन संबंधी समस्या होती है या फिर खाने के बाद कुछ मीठा खाने का मन होता है. बेहतर होगा ताज़ा लोकल वेरायटी का केला लें. हफ़्ते में 2-3 बार ख़रीदें और उन्हें प्लास्टिक बैग की बजाय कपड़े के थैले में लाएं.
– 7-8 भीगी हुई किशमिश केसर के एक या दो स्ट्रैंड के साथ खाएं, यदि आप लो एनर्जी महसूस करते हैं या आपको पीएमएस की बहुत अधिक समस्या है.
– 4-6 भिगोए व छीले हुए बादाम उनके लिए, जिन्हें डायबिटीज़, पीसीओडी, नींद की समस्या, लो फर्टिलिटी है. पीसीओडी की समस्या है, तो पीरियड्स से 10 दिन पहले किशमिशवाले प्लान पर आ जाएं.
– सुबह के इस मील के बाद आप 15-20 मिनट योगा या वर्कआउट कर सकते हैं.
– अगर वर्कआउट नहीं करते, तो इसके बाद एक घंटे के भीतर ही नाश्ता कर सकते हैं.
– सुबह जो पानी पीते हैं, उसे प्लेन ही रखें, उसमें कुछ भी न मिलाएं.
यह पहले हफ़्ते के लिए गाइडलाइन है, उसके बाद हम धीरे-धीरे एक-एक हफ़्तों की गाइडलाइन पर बात करेंगे.

इस फिटनेस प्रोजेक्ट को बेहतर समझने के लिए देखें यह वीडियो

Start your day with banana/ dry fruits

‘The fitness project 2018’ – an open participation public health project – Week 1 guideline#RDfitnessproject2018

Posted by Rujuta Diwekar on Tuesday, 2 January 2018

सौजन्य: https://www.rujutadiwekar.com

Ishi Khosla

जानें क्या है मेटाबॉलिक सिंड्रोम… यूं कम करें पेट के फैट्स- इशी खोसला (About Metabolic Syndrome… How To Reduce Belly Fat- Ishi Khosla)

अक्सर लो अपने पेट की चर्बी से परेशान रहते हैं, डायटिंग, एक्सरसाइज़ करने पर भी उन्हें वो रिज़ल्ट नहीं मिल पाता, जिसकी वो उम्मीद करते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि वो पेट के फैट्स के मूल कारणों को नहीं जान पाते. इस विषय पर अधिक जानते हैं कि इशी खोसला किस तरह से मार्गदर्शन करती हैं. इशी खोसला अपने आप में जाना-माना नाम है. वो प्रैक्टिसिंग क्लिनिकल न्यूट्रिशिनिस्ट, कंसल्टेंट और राइटर हैं. आप भी उनके बताए डायट व हेल्थ प्लान्स फॉलो करें और हमेशा हेल्दी रहें.

पेट के फैट्स की प्रमुख वजहें हैं- हाई ब्लड प्रेशर, गुड फैट्स की कमी, बैड फैट्स की अधिकता, ट्रायग्लिसरॉइड्स की अधिक मात्रा, ब्लड शुगर की अधिकता या फिर वंशानुगत डायबिटीज़- जिसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम या सिंड्रोम एक्स भी कहा जाता है. यह कोई बीमारी नहीं, पर रिस्क फैक्टर्स का कॉम्बीनेशन है.

सवाल यह है कि इन सबके चलते ज़िद्दी फैट्स को कैसे भगाया जाए? हेल्दी ईटिंग, लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज़ और स्ट्रेस मैनेजमेंट से यह किया जा सकता है.

शरीर के वज़न को नियंत्रित रखें: संतुलित खानपान व क्रियाशीलता से यह हो सकता है. साबूत अनाज, नट्स, फ्रूट्स, सब्ज़ियां, दालें और बीजों से अपने डायट को हेल्दी बनाएं. मीठा खाना-पीना व अल्कोहल का सेवन कम कर दें.

गुड कैलोरीज़वाला भोजन लें: फाइबर, गुड कैलोरीज़, प्रोटीन, कॉम्प्लैक्स कार्बोहाइड्रेट को अपने डायट का हिस्सा बनाएं.

हाई कैलोरी फुड से बचें: बहुत ज़्यादा ऑयली, फैटी, फ्राइड फूड न लें. मीठा व स्वीट ड्रिंक्स से बचें. कम पोषण वाले भोजन को अवॉइड करें. नमक कम खाएं. बेहतर होगा पिज़्ज़ा, बर्गर व अन्य जंक फूड से दूर रहें.

स्मार्ट स्नैकिंग करें: स्नैकिंग के लिए बेक्ड व रोस्टेड चीज़ें ख़रीदें. इसके अलावा ड्राय फ्रूट्स, फ्रेश फ्रूट्स आदि लें.

फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं: वॉकिंग करें, जॉग करें. लाइट एक्सरसाइज़ करें. रोज़मर्रा की दिनचर्या में भी लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. ऑफिस में बीच-बीच में जगह से उठकर राउंड लगाकर आएं. इस तरह अपनी फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं. इससे ब्लड शुगर, व प्रेशर के साथ-साथ आपका वज़न भी काफ़ी नियंत्रित रहता है.

स्ट्रेस मैनेज करें: मेडिटेशन, योगा, ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ और पॉज़िटिव सोच बेहतरीन तरी़के हैं अपने स्ट्रेस को मैनेज करने के. स्ट्रेस आए इससे पहले ही यदि इन हेल्दी एक्टिविटीज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लें, तो स्ट्रेस आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता. बहुत से लोग स्ट्रेस ईटिंग भी करते हैं, ऐसे में स्ट्रेस कम होगा, तो आप बेवजह कैलेरीज़ नहीं खाएंगे.

दरअसल ईटिंग हैबिट्स और डायटिंग को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां हैं हम सबके मन में. इसे बेहतर तरी़के से समझने के लिए इस वीडियो को फॉलो करें, पर इसे मेडिकल एडवाइस के तौर पर न लें.

सौजन्य: http://www.theweightmonitor.com/

Myths About Blood Donation

ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

रक्तदान को जीवनदान कहा जाता है, लेकिन आज भी इसे लेकर लोग बहुत उत्साहित नज़र नहीं आते, कारण- रक्तदान को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां आज भी बनी हुई हैं. क्या हैं वो ग़लतफ़हमियां यह जानना ज़रूरी है, ताकि लोगों के मन से भ्रांतियां दूर हों और रक्तदान को लेकर वो अधिक उत्साहित हों.

1. रक्तदान आपको कमज़ोर बनाता है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने के बाद उनमें कमज़ोरी आ जाएगी और उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाएगी.
लेकिन यह सोच ग़लत है. रक्तदान के बाद कुछ ही दिनों में रेड ब्लड सेल्स यानी लाल रक्त कण सामान्य संख्या में पहुंच जाते हैं. व्हाइट ब्लड सेल्स को थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, लेकिन यदि शरीर को यह सिग्नल मिले कि वो ख़तरे में है, तो यह प्रक्रिया और भी तेज़ हो जाती है.

2. रक्तदान की प्रक्रिया काफ़ी तकलीफ़देह व दर्दनाक होती है.
जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. स़िर्फ सुई चुभनेभर का दर्द ज़रूर होता है, लेकिन रक्तदान के बाद आपके हाथ का वह भाग एक-दो दिन में ही सामान्य हो जाता है, जहां से सुई भीतर जाती है.

3. महिलाओं को ब्लड डोनेशन नहीं करना चाहिए.
अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि महिलाएं मासिक स्राव से गुज़रती हैं, इसलिए उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए. कुछ लोग यह भी मानते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर कम होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से दूर रहना चाहिए, वरना वे अधिक कमज़ोर हो सकती हैं. हक़ीक़त यह है कि रक्तदान का लिंग से कोई लेना-देना नहीं होता. जिस तरह से पुरुषों पर रक्तदान असर करता है, महिलाओं को भी उसी तरह प्रभावित करता है. महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर प्राकृतिक रूप से कम ही होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से कोई कमज़ोरी नहीं होगी. हां, यदि वे गर्भवती हों, स्तनपान करा रही हों, किसी बीमारी या समस्या के चलते वे एनिमिक हों, तो उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए.

4. रक्तदान करनेवाले को जानलेवा इंफेक्शन्स का ख़तरा अधिक होता है.
रक्तदान के समय संक्रमण का डर भी बड़ी वजह है लोगों को रक्तदान से रोकने की. लेकिन रक्तदान के समय नई सुई का ही इस्तेमाल होता है और आप स्वयं भी जागरूक रहेंगे, तो ऐसा कोई ख़तरा नहीं होगा, इसलिए बेझिझक रक्तदान करें.

5. रक्तदान के बाद एक-दो दिन का आराम ज़रूरी होता है.
ऐसा कोई नियम नहीं है और न ही इसकी ज़रूरत है. आप रक्तदान के फ़ौरन बाद ही अपने काम पर लौट सकते हैं, बशर्ते आपने रक्तदान के बाद भरपूर पानी या जूस वगैरह पिया हो, ताकि शरीर में पानी की आपूर्ति हो जाए. हां, रक्तदान के बाद 24 घंटों तक अल्कोहल व तेज़ धूप से बचना चाहिए.

6. अगर आप स्मोक करते हैं, तो आप रक्तदान नहीं कर सकते.
भले ही आप स्मोकर हों, पर आप ब्लड डोनेट कर सकते हैं. हां, ब्लड डोनेशन के बाद तीन घंटे तक स्मोक न करें और डोनेशन से एक दिन पहले शराब का सेवन भी न करें.

7. रक्तदान बहुत ही समय लेनेवाली प्रक्रिया है.
ब्लड डोनेशन में 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लगता है, जिसमें ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया मात्र 10-12 मिनट की ही होती है, लेकिन फॉर्म भरना और डोनेशन के बाद रिफ्रेशमेंट वगैरह मिलाकर 45 मिनट से एक घंटे तक का ही समय लगता है.

8. दुबले-पतले लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
आपका वज़न 50 किलो से अधिक हो और आपकी आयु 18 वर्ष या अधिक हो, तो आप रक्तदान कर सकते हैं.

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Blood Donation Myths

9. उच्च रक्तचापवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. यदि आपका रक्तचाप 180 और 100 है, तो भी आप रक्तदान कर सकते हैं. यह रक्तचाप हालांकि अधिक है, लेकिन यह आपको रक्तदान से नहीं रोक सकता. यहां तक कि रक्तचाप की दवाइयां भी इस प्रक्रिया में अवरोध नहीं बनतीं.

10. डायबिटीज़ से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
अगर आप इंसुलिन जैसे सप्लीमेंट्स लेते हैं, तो ही रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन यदि आप पिल्स लेते हैं और लाइफस्टाइल के ज़रिए डायबिटीज़ नियंत्रित करते हैं, तो आप रक्तदान ज़रूर कर सकते हैं. जिन्हें हृदय रोग हों और जो टाइप 2 डायबिटीज़ की वजह से ब्लड प्रेशर से ग्रसित हों, वे किन्हीं असाधारण परिस्थितियों में रक्तदान न कर पाएं, लेकिन बाक़ी कोई वजह नहीं जो आपको रक्तदान से रोके.

11. रक्तदान के बाद स्पोर्ट्स या फिज़िकल एक्टीविटीज़ नहीं कर सकते.
यह मात्र एक भ्रांति है. रक्तदान के एक घंटे बाद ही आपकी ज़िंदगी पूरी तरह से सामान्य हो जाती है. यदि आप खेल-कूद के शौकीन हैं या किसी स्पोर्ट्स एक्टीविटी में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो जिस दिन ब्लड डोनेट किया, उसी दिन आप हिस्सा ले सकते हैं या मनपसंद खेल खेल सकते हैं.

12. दवा खानेवाला व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकता.
आमतौर पर लोगों की यही धारणा होती है कि यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन सच तो यह है कि अधिकांश दवाएं आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. अगर आप सर्दी-ज़ुकाम की दवा, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स, विटामिन या न्यूट्रिएंट सप्लीमेंट, पेनकिलर, पैरासिटामॉल, एंटैसिड या एंटी एलर्जिक दवाएं ले रहे हैं, तो आप रक्तदान कर सकते हैं. हां, अगर आप एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे हैं, तो आपको कोर्स पूरा होने के बाद 72 घंटे इंतज़ार करना होगा. यदि आप किसी मानसिक समस्या की दवा ले रहे हैं, तो अपने सायकिएट्रिस्ट से पूछकर ही रक्तदान करें.

13. सीज़नल एलर्जी से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
सर्दी-ज़ुकाम जैसी सीज़नल एलर्जी आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. आप बेझिझक रक्तदान कर सकते हैं.

14. बहुत जल्दी-जल्दी रक्तदान नहीं करना चाहिए, वरना शरीर कमज़ोर हो जाएगा.
एक स्वस्थ व्यक्ति साल में चार बार रक्तदान कर सकता है. हर तीन महीने के अंतराल पर आप रक्तदान कर सकते हैं, इसलिए यह भ्रम मन से निकाल दें कि आप कमज़ोर हो जाएंगे.

15. हाई कोलेस्ट्रॉलवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
यदि आप हाई कोलेस्ट्रॉल की दवाएं भी ले रहे हैं, तब भी रक्तदान कर सकते हैं.

16. रक्तदान से मोटापा बढ़ता है.
रक्तदान से वज़न नहीं बढ़ता, लेकिन कुछ लोग रक्तदान के बाद मानसिक तौर पर यह मान लेते हैं कि वो कमज़ोर हो गए और उन्हें अधिक पोषण की ज़रूरत है. ऐसे में वो अधिक खाने लगते हैं और एक्सरसाइज़ या शारीरिक गतिविधियां घटा देते हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ सकता है. तो सीधे तौर पर यह मोटापे से नहीं जुड़ा है.

कौन रक्तदान नहीं कौन रक्तदान नहीं कर सकता?
  • 60 वर्ष से अधिक व 18 वर्ष से कम आयु के लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
  • गर्भवती स्त्रियां.
  • स्तनपान करानेवाली मांएं.
  • अगर आपने व्रत रखा है, तो रक्तदान नहीं कर सकते, क्योंकि रक्तदान से चार घंटे पहले अच्छा भोजन करना बेहतर होता है.
  • अल्कोहल के सेवन के बाद.
  • इंसुलिन लेनेवाले डायबिटीज़ के रोगी.

– गीता शर्मा

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Cancer Prevention

कैंसर से बचाएंगी ये किचन रेमेडीज़ (Cancer Prevention: Best Home Remedies To Lower Your Risk)

पूरी दुनिया में ही नहीं, भारत में भी कैंसर (Cancer) के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन हमारे किचन में ही ऐसी बहुत सारी चीज़ें उपलब्ध हैं, जिनका नियमित सेवन कैंसर से लड़ने में सहायता कर सकता है. एक नजर किचन में मौजूद कुछ ऐसी ही एंटी कैंसर चीज़ों पर.

हल्दीः खाने में हल्दी का इस्तेमाल ज़रूर करें. इसमें मौजूद करक्यूमिन तत्व कैंसर से लड़ने में मदद करता है. हल्दी ख़ासकर ब्रेस्ट कैंसर, पेट के कैंसर और त्वचा के कैंसर में ज़्यादा प्रभावी है.

केसरः केसर में क्रोसेटिन नाम का तत्व होता है, जो कैंसर से लड़ने में प्रभावी है. ये ना स़िर्फ कैंसर को स्प्रेड होने से रोकता है, बल्कि ट्यूमर के साइज़ को भी कम करता है.

जीराः जीरा खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही कैंसर से भी बचाता है. इसमें थाइमोक्वीनोन नाम का पदार्थ होता है, जो प्रोस्टेट कैंसर बनानेवाले सेल्स को बढ़ने से रोकता है. लिहाज़ा अगर कैंसर से बचना है और हेल्दी रहना है, तो अपने डेली डायट में जीरा शामिल करें.

दालचीनीः आयरन और कैल्शियम से भरपूर दालचीनी शरीर में ट्यूमर के साइज़ को कम करने में मदद करती है. हर रोज़ अपने दिन की शुरुआत दालचीनी की चाय से करें और सोने से पहले शहद और दालचीनी के साथ एक ग्लास दूध का सेवन करें. इससे आप कैंसर से सुरक्षित रहेंगे.

ऑरिगेनोः ऑरिगेनो का इस्तेमाल स़िर्फ पिज़्ज़ा, पास्ता की टॉपिंग के रूप में ही नहीं होता, बल्कि ये प्रोस्टेट कैंसर के ख़िलाफ़ भी एक सशक्त एजेंट का काम करता है.

Cancer Prevention

अदरक: औषधीय गुणों से भरपूर अदरक के सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम होता है, मेटाबॉलिज़्म बढ़ता है और कैंसर सेल्स भी ख़त्म होते हैं. अदरक का अर्क कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी से होनेवाली परेशानी को भी कम कर सकता है. ये अन्य कई बीमारियों से भी बचाता है.

तुलसीः तुलसी की पत्तियों में यूजेनॉल नामक तत्व होता है, जो कैंसर से सुरक्षा देता है. इस तत्व का इस्तेमाल एंटी कैंसर दवाएं बनाने के लिए भी किया जाता है.

नारियल तेलः रोज़ खाली पेट एक चम्मच नारियल तेल का सेवन करने से कैंसर से बचाव होता है. इसमें मौजूद लॉरिक एसिड कैंसर की कोशिकाओं को ख़त्म करने में सहायक होता है.

लहसुन और प्याज़ः लहसुन और प्याज़ में मौजूद सल्फर कंपाउंड बड़ी आंत, बे्रस्ट कैंसर, लिवर और प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं को मार देते हैं. यह इंसुलिन के प्रोडक्शन को कम करके शरीर में ट्यूमर नहीं बनने देते.

एंटी कैंसर सब्ज़ियां: फूलगोभी और ब्रोकोली कैंसर की कोशिकाओं को मारती हैं और ट्यूमर को बढ़ने से रोकती हैं. ये लिवर, प्रोस्टेट, मूत्राशय और पेट के कैंसर के ख़तरे को कम करती हैं.

फलियां और दाल: दाल और फलियां प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत होने के साथ ही फाइबर और फोलेट से भरपूर होती हैं, जो पैंक्रियाज़ के कैंसर के ख़तरे को कम कर सकती हैं.

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Thyroid Causes

इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

समय के साथ-साथ हमारी जीवनशैली बदल रही है, खानपान बदल रहा है, काम करने के तरी़के बदल रहे हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि इन बदलावों को हमारे मन के साथ-साथ हमारा तन भी स्वीकार करे. कई बार हमें इस बात का बिल्कुल एहसास नहीं होता है कि सामान्य से लगनेवाले ये छोटे-छोटेे बदलाव किसी गंभीर बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं. ऐसी ही एक हेल्थ प्रॉब्लम (Health Problem) है थायरॉइड (Thyroid), जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं.

क्या है थायरॉइड?

हम में से अधिकतर लोगों को यह बात मालूम नहीं होगी कि थायरॉइड किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह एक ग्रंथि का नाम है, जो गर्दन में सांस की नली के ऊपर और वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में तितली के आकार में बनी होती है. यह ग्रंथि थायरॉक्सिन नामक हार्मोन का उत्पादन करती है. हम जो भी खाते हैं, उसे यह हार्मोन ऊर्जा में बदलता है. जब यह ग्रंथि ठीक तरह से काम नहीं करती है, तो शरीर में अनेक समस्याएं होने लगती हैं.

पहचानें थायरॉइड के लक्षणों को?

एनर्जी का स्तर बदलना

थायरॉइड की समस्या होने पर शरीर में ऊर्जा का स्तर बदलता रहता है. ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) में मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है या फिर उसमें अनियमित बदलाव होता रहता है, जिसके कारण अधिक भूख लगना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसी समस्याएं होती हैं. इसी तरह से अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) में शरीर में ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है, जिसकी वजह से अधिक थकान, एकाग्रता में कमी, घबराहट और याद्दाश्त में कमी आने लगती है.

वज़न का घटना-बढ़ना

ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) ग्रंथि की समस्या होने पर मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है, जिसके कारण व्यक्ति की भूख बढ़ जाती है. वह ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाने लगता है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा खाने पर भी उसका वज़न घटने लगता है. वहीं दूसरी ओर अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) होने पर मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिसके कारण भूख कम लगती है और कम खाना खाने पर भी वज़न लगातार बढ़ता रहता है.

आंतों की समस्या

ओवरएक्टिव थायरॉइड और अंडरएक्टिव थायरॉइड दोनों के कारण आंतों में  भी गड़बड़ी की समस्या हो सकती है. ये दोनों ही भोजन पचाने और मल-मूत्र के विसर्जन करने की क्रियाओं में मुख्य भूमिका निभाते हैं. अंडरएक्टिव थायरॉइड होने पर व्यक्ति कब्ज़ और डायरिया से परेशान रहता है.

गले में सूजन

सर्दी-जुक़ाम के कारण गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन आने लगता है, लेकिन इन लक्षणों की अनदेखी बिल्कुल न करें. कई बार सिंपल से दिखनेवाले ये लक्षण थायरॉइड के भी हो सकते हैं, क्योंकि थायरॉइड होने पर भी गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन के साथ-साथ गले में सूजन आती है. अगर गले में सूजन हो, तो इसकी अनदेखी करने की बजाय थायरॉइड टेस्ट कराएं.

मांसपेशियों में दर्द

शारीरिक मेहनत और वर्कआउट करने के बाद बॉडी पेन होना आम बात है. लेकिन ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी मांसपेशियों में दर्द होता है. कई बार मांसपेशियों में दर्द के साथ-साथ कमज़ोरी, थकान, कमर व जोड़ों में दर्द और सूजन भी आती है.

अनिद्रा की समस्या

थायरॉइड के प्रमुख लक्षणों में अनिद्रा भी एक लक्षण है. थायरॉइड ग्रंथि का असर व्यक्ति की नींद पर भी पड़ता है, जैसे- रात को नींद नहीं आना, बेचैनी, सोते समय अधिक पसीना आना आदि. नींद न आने के कारण कई बार चक्कर भी आने लगते हैं.

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बालों का झड़ना और त्वचा का ड्राई होना  

हाइपरथायरॉइडिज़्म से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा धीरे-धीरे ड्राई होने लगती है. त्वचा के ऊपर की कोशिकाएं (सेल्स) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिसके कारण त्वचा में रूखापन आने लगता है. थायरॉइड के कारण त्वचा में रूखेपन के अलावा बालों की भी कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं, जैसे- बालों का झड़ना, रूखापन आदि.

तनाव में रहना

दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद थकान होना लाज़िमी है, लेकिन अगर आपको ज़रूरत से ज़्यादा ही थकान महसूस हो, तो इसकी वजह थायरॉइड भी हो सकती है. शुरुआत में इस बात का एहसास नहीं होता है कि थकान किस वजह से है, लेकिन जब थायरॉइड ग्रंथि ओवरएक्टिव हो जाती है, तो यह ग्रंथि शरीर में ज़रूरत से बहुत अधिक मात्रा में थायरॉइड हार्मोंस का निर्माण करने लगती है, जिसके कारण तनाव व बेचैनी होने लगती है.

पीरियड्स की अनियमितता

अधिकतर महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना आम बात है, लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं होता है कि अंडरएक्टिव और ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी पीरियड्स अनियमित होते हैं. इसके लक्षणों में लगातार बदलाव होने पर महिलाएं इस बात से परेशान रहती हैं. जब महिलाओं को हाइपरथायरॉइडिज़्म (ओवरएक्टिव थायरॉइड) की समस्या होती है, तो उन्हें सामान्य से अधिक रक्तस्राव होता है और जब महिलाएं हाइपोथायरॉइडिज़्म (अंडरएक्टिव थायरॉइड) से ग्रस्त होती हैं, तब उन्हें रक्तस्राव बहुत कम होता है या फिर होता ही नहीं है.

डिप्रेशन

अवसाद होने की एक वजह थायरॉइड भी हो सकती है, क्योंकि अवसाद में अधिक नींद आना या अनिद्रा की समस्या होती है. यदि व्यक्तिअंडरएक्टिव थायरॉइड से ग्रस्त है, तो मूड स्विंग होना, आलस, काम में मन न लगना जैसी समस्याएं होती हैं.

थायरॉइड को नियंत्रित करने के लिए क्या खाएं?

थायरॉइड के मरीज़ अगर उपचार के साथ-साथ अपने खानपान पर ध्यान दें, तो बहुत हद तक इसे नियंत्रित किया जा सकता है. उन्हें अपनी डायट में इन चीज़ों को शामिल करना चाहिए, जैसे-

मशरूम: इसमें सेलेनियम अधिक मात्रा में होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करता है.

अंडा: थायरॉइड के रोगियों को अपनी डायट में अंडा ज़रूर शामिल करना चाहिए. इसमें भी सेलेनियम होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करने के साथ कमज़ोरी को भी दूर करता है.

नट्स: वैसे तो नट्स सभी को खाने चाहिए, लेकिन थायरॉइड के मरीज़ों को नट्स ज़रूर खाना चाहिए. नट्स में ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो थायरॉइड के कारण होनेवाले हार्ट अटैक के ख़तरे को कम करते हैं.

दही: इसे खाने से इम्यूनिटी लेवल बढ़ता है और थायरॉइड भी नियंत्रित रहता है.

मेथी: इसमें ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो थायरॉक्सिन नामक हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.

   – पूनम शर्मा

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Tricks To Sleep Better At Night

सुकूनभरी गहरी नींद के लिए अपनाएं ये स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks To Sleep Better At Night)

अगर आप भी बिस्तर पर पहुंचकर देर रात तक करवटें बदलते रहते हैं या फिर रात को बार-बार आपकी नींद (Sleep) खुल जाती है, तो इन छोटे-छोटे स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks) से आपकी यह समस्या (Problem) दूर हो जाएगी.

–    सोने से एक घंटे पहले कमरे में मौजूद सभी ब्लू लाइट्स को बंद कर दें. दरअसल जब रात को हम सोने जाते हैं, तो हमारे शरीर से मेलाटोनिन नामक हार्मोन का स्राव होता है, जो हमें सुकूनभरी नींद देता है, लेकिन मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, आईपैड और वीडियोगेम से निकलनेवाली ब्लू लाइट के कारण मेलाटोनिन का स्राव तुरंत बंद हो जाता है.

–    दोपहर के बाद कैफीन न लें. कैफीन आपकी नींद को प्रभावित करता है, क्योंकि उसे पचने में चार से छह घंटे का समय लगता है. अगर गहरी नींद चाहते हैं, तो शाम को चाय या कॉफी पीना छोड़ दें.

–    दिन में आधे घंटे से ज़्यादा की नींद आपके रात की नींद को डिस्टर्ब करती है. दरअसल, दिन में ज़्यादा देर तक सोने से हमारा बॉडी क्लॉक डिस्टर्ब हो जाता है, इसलिए रात की नींद ख़राब होती है. अगर दिन में नींद लेने की आदत है, तो स़िर्फ आधे घंटे का पावर नैप लें.

–    आपका बिस्तर भी आपकी नींद में बाधा डाल सकता है. अगर बेडशीट, गद्दे और तकियों की क्वालिटी ख़राब हो गई हो, तो वो भी आपको ठीक से सोने नहीं देंगे.

–    स्टडी में यह बात साबित हो चुकी है कि जो लोग रोज़ाना एक्सरसाइज़ करते हैं, उन्हें बाकी लोगों के मुक़ाबले अच्छी नींद आती है. इसलिए कोशिश करें कि कम से कम हफ़्ते में पांच दिन फिज़िकल एक्टिविटीज़ करें.

–    आप चाहें, तो अच्छी नींद के लिए एरोमा थेरेपी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. तकिये पर लैवेंडर एसेंशियल ऑयल स्प्रे करें. इससे नींद काफ़ी अच्छी आती है.

–    दिनभर का तनाव भी आपके मस्तिष्क को अशांत किए रहता है, जिसके कारण आप चाहकर भी सुकून से सो नहीं पाते. इसके लिए सुबह-शाम जब भी समय मिले थोड़ी देर मेडिटेशन करें. ध्यान मस्तिष्क को शांत करता है, जिससे आप गहरी नींद सो पाते हैं.

–    सोने से एक घंटे पहले ही बेडरूम की लाइट मद्धिम कर दें. इससे बॉडी को सिग्नल मिलता है कि सोने का व़क्त करीब आ रहा है.

–   बेड पर जाने से पहले पार्क या खुले में वॉक करें. पेड़-पौधे और खुली हवा आपके शरीर को रिलैक्स कर देते हैं, जिससे आप अच्छी तरह सो पाते हैं.

–    सोने से दस मिनट पहले गुनगुने पानी में पैरों को डुबोकर रखें. पैर गर्म रहने पर नींद जल्दी और अच्छी आती है.

–    गुनगुने सरसों के तेल से पैरों के तलवों में मालिश करें.

–    सोने से पहले गुड़ खाना भी फ़ायदेमंद होता है.

–    गुनगुना मीठा दूध पीने से भी अच्छी नींद आती है.

–    सोते समय नाभि में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालें.

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