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ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

Myths About Blood Donation

ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

रक्तदान को जीवनदान कहा जाता है, लेकिन आज भी इसे लेकर लोग बहुत उत्साहित नज़र नहीं आते, कारण- रक्तदान को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां आज भी बनी हुई हैं. क्या हैं वो ग़लतफ़हमियां यह जानना ज़रूरी है, ताकि लोगों के मन से भ्रांतियां दूर हों और रक्तदान को लेकर वो अधिक उत्साहित हों.

1. रक्तदान आपको कमज़ोर बनाता है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने के बाद उनमें कमज़ोरी आ जाएगी और उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाएगी.
लेकिन यह सोच ग़लत है. रक्तदान के बाद कुछ ही दिनों में रेड ब्लड सेल्स यानी लाल रक्त कण सामान्य संख्या में पहुंच जाते हैं. व्हाइट ब्लड सेल्स को थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, लेकिन यदि शरीर को यह सिग्नल मिले कि वो ख़तरे में है, तो यह प्रक्रिया और भी तेज़ हो जाती है.

2. रक्तदान की प्रक्रिया काफ़ी तकलीफ़देह व दर्दनाक होती है.
जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. स़िर्फ सुई चुभनेभर का दर्द ज़रूर होता है, लेकिन रक्तदान के बाद आपके हाथ का वह भाग एक-दो दिन में ही सामान्य हो जाता है, जहां से सुई भीतर जाती है.

3. महिलाओं को ब्लड डोनेशन नहीं करना चाहिए.
अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि महिलाएं मासिक स्राव से गुज़रती हैं, इसलिए उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए. कुछ लोग यह भी मानते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर कम होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से दूर रहना चाहिए, वरना वे अधिक कमज़ोर हो सकती हैं. हक़ीक़त यह है कि रक्तदान का लिंग से कोई लेना-देना नहीं होता. जिस तरह से पुरुषों पर रक्तदान असर करता है, महिलाओं को भी उसी तरह प्रभावित करता है. महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर प्राकृतिक रूप से कम ही होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से कोई कमज़ोरी नहीं होगी. हां, यदि वे गर्भवती हों, स्तनपान करा रही हों, किसी बीमारी या समस्या के चलते वे एनिमिक हों, तो उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए.

4. रक्तदान करनेवाले को जानलेवा इंफेक्शन्स का ख़तरा अधिक होता है.
रक्तदान के समय संक्रमण का डर भी बड़ी वजह है लोगों को रक्तदान से रोकने की. लेकिन रक्तदान के समय नई सुई का ही इस्तेमाल होता है और आप स्वयं भी जागरूक रहेंगे, तो ऐसा कोई ख़तरा नहीं होगा, इसलिए बेझिझक रक्तदान करें.

5. रक्तदान के बाद एक-दो दिन का आराम ज़रूरी होता है.
ऐसा कोई नियम नहीं है और न ही इसकी ज़रूरत है. आप रक्तदान के फ़ौरन बाद ही अपने काम पर लौट सकते हैं, बशर्ते आपने रक्तदान के बाद भरपूर पानी या जूस वगैरह पिया हो, ताकि शरीर में पानी की आपूर्ति हो जाए. हां, रक्तदान के बाद 24 घंटों तक अल्कोहल व तेज़ धूप से बचना चाहिए.

6. अगर आप स्मोक करते हैं, तो आप रक्तदान नहीं कर सकते.
भले ही आप स्मोकर हों, पर आप ब्लड डोनेट कर सकते हैं. हां, ब्लड डोनेशन के बाद तीन घंटे तक स्मोक न करें और डोनेशन से एक दिन पहले शराब का सेवन भी न करें.

7. रक्तदान बहुत ही समय लेनेवाली प्रक्रिया है.
ब्लड डोनेशन में 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लगता है, जिसमें ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया मात्र 10-12 मिनट की ही होती है, लेकिन फॉर्म भरना और डोनेशन के बाद रिफ्रेशमेंट वगैरह मिलाकर 45 मिनट से एक घंटे तक का ही समय लगता है.

8. दुबले-पतले लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
आपका वज़न 50 किलो से अधिक हो और आपकी आयु 18 वर्ष या अधिक हो, तो आप रक्तदान कर सकते हैं.

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Blood Donation Myths

9. उच्च रक्तचापवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. यदि आपका रक्तचाप 180 और 100 है, तो भी आप रक्तदान कर सकते हैं. यह रक्तचाप हालांकि अधिक है, लेकिन यह आपको रक्तदान से नहीं रोक सकता. यहां तक कि रक्तचाप की दवाइयां भी इस प्रक्रिया में अवरोध नहीं बनतीं.

10. डायबिटीज़ से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
अगर आप इंसुलिन जैसे सप्लीमेंट्स लेते हैं, तो ही रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन यदि आप पिल्स लेते हैं और लाइफस्टाइल के ज़रिए डायबिटीज़ नियंत्रित करते हैं, तो आप रक्तदान ज़रूर कर सकते हैं. जिन्हें हृदय रोग हों और जो टाइप 2 डायबिटीज़ की वजह से ब्लड प्रेशर से ग्रसित हों, वे किन्हीं असाधारण परिस्थितियों में रक्तदान न कर पाएं, लेकिन बाक़ी कोई वजह नहीं जो आपको रक्तदान से रोके.

11. रक्तदान के बाद स्पोर्ट्स या फिज़िकल एक्टीविटीज़ नहीं कर सकते.
यह मात्र एक भ्रांति है. रक्तदान के एक घंटे बाद ही आपकी ज़िंदगी पूरी तरह से सामान्य हो जाती है. यदि आप खेल-कूद के शौकीन हैं या किसी स्पोर्ट्स एक्टीविटी में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो जिस दिन ब्लड डोनेट किया, उसी दिन आप हिस्सा ले सकते हैं या मनपसंद खेल खेल सकते हैं.

12. दवा खानेवाला व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकता.
आमतौर पर लोगों की यही धारणा होती है कि यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन सच तो यह है कि अधिकांश दवाएं आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. अगर आप सर्दी-ज़ुकाम की दवा, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स, विटामिन या न्यूट्रिएंट सप्लीमेंट, पेनकिलर, पैरासिटामॉल, एंटैसिड या एंटी एलर्जिक दवाएं ले रहे हैं, तो आप रक्तदान कर सकते हैं. हां, अगर आप एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे हैं, तो आपको कोर्स पूरा होने के बाद 72 घंटे इंतज़ार करना होगा. यदि आप किसी मानसिक समस्या की दवा ले रहे हैं, तो अपने सायकिएट्रिस्ट से पूछकर ही रक्तदान करें.

13. सीज़नल एलर्जी से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
सर्दी-ज़ुकाम जैसी सीज़नल एलर्जी आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. आप बेझिझक रक्तदान कर सकते हैं.

14. बहुत जल्दी-जल्दी रक्तदान नहीं करना चाहिए, वरना शरीर कमज़ोर हो जाएगा.
एक स्वस्थ व्यक्ति साल में चार बार रक्तदान कर सकता है. हर तीन महीने के अंतराल पर आप रक्तदान कर सकते हैं, इसलिए यह भ्रम मन से निकाल दें कि आप कमज़ोर हो जाएंगे.

15. हाई कोलेस्ट्रॉलवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
यदि आप हाई कोलेस्ट्रॉल की दवाएं भी ले रहे हैं, तब भी रक्तदान कर सकते हैं.

16. रक्तदान से मोटापा बढ़ता है.
रक्तदान से वज़न नहीं बढ़ता, लेकिन कुछ लोग रक्तदान के बाद मानसिक तौर पर यह मान लेते हैं कि वो कमज़ोर हो गए और उन्हें अधिक पोषण की ज़रूरत है. ऐसे में वो अधिक खाने लगते हैं और एक्सरसाइज़ या शारीरिक गतिविधियां घटा देते हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ सकता है. तो सीधे तौर पर यह मोटापे से नहीं जुड़ा है.

कौन रक्तदान नहीं कौन रक्तदान नहीं कर सकता?
  • 60 वर्ष से अधिक व 18 वर्ष से कम आयु के लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
  • गर्भवती स्त्रियां.
  • स्तनपान करानेवाली मांएं.
  • अगर आपने व्रत रखा है, तो रक्तदान नहीं कर सकते, क्योंकि रक्तदान से चार घंटे पहले अच्छा भोजन करना बेहतर होता है.
  • अल्कोहल के सेवन के बाद.
  • इंसुलिन लेनेवाले डायबिटीज़ के रोगी.

– गीता शर्मा

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कैंसर से बचाएंगी ये किचन रेमेडीज़ (Cancer Prevention: Best Home Remedies To Lower Your Risk)

Cancer Prevention

कैंसर से बचाएंगी ये किचन रेमेडीज़ (Cancer Prevention: Best Home Remedies To Lower Your Risk)

पूरी दुनिया में ही नहीं, भारत में भी कैंसर (Cancer) के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन हमारे किचन में ही ऐसी बहुत सारी चीज़ें उपलब्ध हैं, जिनका नियमित सेवन कैंसर से लड़ने में सहायता कर सकता है. एक नजर किचन में मौजूद कुछ ऐसी ही एंटी कैंसर चीज़ों पर.

हल्दीः खाने में हल्दी का इस्तेमाल ज़रूर करें. इसमें मौजूद करक्यूमिन तत्व कैंसर से लड़ने में मदद करता है. हल्दी ख़ासकर ब्रेस्ट कैंसर, पेट के कैंसर और त्वचा के कैंसर में ज़्यादा प्रभावी है.

केसरः केसर में क्रोसेटिन नाम का तत्व होता है, जो कैंसर से लड़ने में प्रभावी है. ये ना स़िर्फ कैंसर को स्प्रेड होने से रोकता है, बल्कि ट्यूमर के साइज़ को भी कम करता है.

जीराः जीरा खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही कैंसर से भी बचाता है. इसमें थाइमोक्वीनोन नाम का पदार्थ होता है, जो प्रोस्टेट कैंसर बनानेवाले सेल्स को बढ़ने से रोकता है. लिहाज़ा अगर कैंसर से बचना है और हेल्दी रहना है, तो अपने डेली डायट में जीरा शामिल करें.

दालचीनीः आयरन और कैल्शियम से भरपूर दालचीनी शरीर में ट्यूमर के साइज़ को कम करने में मदद करती है. हर रोज़ अपने दिन की शुरुआत दालचीनी की चाय से करें और सोने से पहले शहद और दालचीनी के साथ एक ग्लास दूध का सेवन करें. इससे आप कैंसर से सुरक्षित रहेंगे.

ऑरिगेनोः ऑरिगेनो का इस्तेमाल स़िर्फ पिज़्ज़ा, पास्ता की टॉपिंग के रूप में ही नहीं होता, बल्कि ये प्रोस्टेट कैंसर के ख़िलाफ़ भी एक सशक्त एजेंट का काम करता है.

Cancer Prevention

अदरक: औषधीय गुणों से भरपूर अदरक के सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम होता है, मेटाबॉलिज़्म बढ़ता है और कैंसर सेल्स भी ख़त्म होते हैं. अदरक का अर्क कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी से होनेवाली परेशानी को भी कम कर सकता है. ये अन्य कई बीमारियों से भी बचाता है.

तुलसीः तुलसी की पत्तियों में यूजेनॉल नामक तत्व होता है, जो कैंसर से सुरक्षा देता है. इस तत्व का इस्तेमाल एंटी कैंसर दवाएं बनाने के लिए भी किया जाता है.

नारियल तेलः रोज़ खाली पेट एक चम्मच नारियल तेल का सेवन करने से कैंसर से बचाव होता है. इसमें मौजूद लॉरिक एसिड कैंसर की कोशिकाओं को ख़त्म करने में सहायक होता है.

लहसुन और प्याज़ः लहसुन और प्याज़ में मौजूद सल्फर कंपाउंड बड़ी आंत, बे्रस्ट कैंसर, लिवर और प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं को मार देते हैं. यह इंसुलिन के प्रोडक्शन को कम करके शरीर में ट्यूमर नहीं बनने देते.

एंटी कैंसर सब्ज़ियां: फूलगोभी और ब्रोकोली कैंसर की कोशिकाओं को मारती हैं और ट्यूमर को बढ़ने से रोकती हैं. ये लिवर, प्रोस्टेट, मूत्राशय और पेट के कैंसर के ख़तरे को कम करती हैं.

फलियां और दाल: दाल और फलियां प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत होने के साथ ही फाइबर और फोलेट से भरपूर होती हैं, जो पैंक्रियाज़ के कैंसर के ख़तरे को कम कर सकती हैं.

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इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

Thyroid Causes

इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

समय के साथ-साथ हमारी जीवनशैली बदल रही है, खानपान बदल रहा है, काम करने के तरी़के बदल रहे हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि इन बदलावों को हमारे मन के साथ-साथ हमारा तन भी स्वीकार करे. कई बार हमें इस बात का बिल्कुल एहसास नहीं होता है कि सामान्य से लगनेवाले ये छोटे-छोटेे बदलाव किसी गंभीर बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं. ऐसी ही एक हेल्थ प्रॉब्लम (Health Problem) है थायरॉइड (Thyroid), जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं.

क्या है थायरॉइड?

हम में से अधिकतर लोगों को यह बात मालूम नहीं होगी कि थायरॉइड किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह एक ग्रंथि का नाम है, जो गर्दन में सांस की नली के ऊपर और वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में तितली के आकार में बनी होती है. यह ग्रंथि थायरॉक्सिन नामक हार्मोन का उत्पादन करती है. हम जो भी खाते हैं, उसे यह हार्मोन ऊर्जा में बदलता है. जब यह ग्रंथि ठीक तरह से काम नहीं करती है, तो शरीर में अनेक समस्याएं होने लगती हैं.

पहचानें थायरॉइड के लक्षणों को?

एनर्जी का स्तर बदलना

थायरॉइड की समस्या होने पर शरीर में ऊर्जा का स्तर बदलता रहता है. ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) में मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है या फिर उसमें अनियमित बदलाव होता रहता है, जिसके कारण अधिक भूख लगना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसी समस्याएं होती हैं. इसी तरह से अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) में शरीर में ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है, जिसकी वजह से अधिक थकान, एकाग्रता में कमी, घबराहट और याद्दाश्त में कमी आने लगती है.

वज़न का घटना-बढ़ना

ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) ग्रंथि की समस्या होने पर मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है, जिसके कारण व्यक्ति की भूख बढ़ जाती है. वह ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाने लगता है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा खाने पर भी उसका वज़न घटने लगता है. वहीं दूसरी ओर अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) होने पर मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिसके कारण भूख कम लगती है और कम खाना खाने पर भी वज़न लगातार बढ़ता रहता है.

आंतों की समस्या

ओवरएक्टिव थायरॉइड और अंडरएक्टिव थायरॉइड दोनों के कारण आंतों में  भी गड़बड़ी की समस्या हो सकती है. ये दोनों ही भोजन पचाने और मल-मूत्र के विसर्जन करने की क्रियाओं में मुख्य भूमिका निभाते हैं. अंडरएक्टिव थायरॉइड होने पर व्यक्ति कब्ज़ और डायरिया से परेशान रहता है.

गले में सूजन

सर्दी-जुक़ाम के कारण गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन आने लगता है, लेकिन इन लक्षणों की अनदेखी बिल्कुल न करें. कई बार सिंपल से दिखनेवाले ये लक्षण थायरॉइड के भी हो सकते हैं, क्योंकि थायरॉइड होने पर भी गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन के साथ-साथ गले में सूजन आती है. अगर गले में सूजन हो, तो इसकी अनदेखी करने की बजाय थायरॉइड टेस्ट कराएं.

मांसपेशियों में दर्द

शारीरिक मेहनत और वर्कआउट करने के बाद बॉडी पेन होना आम बात है. लेकिन ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी मांसपेशियों में दर्द होता है. कई बार मांसपेशियों में दर्द के साथ-साथ कमज़ोरी, थकान, कमर व जोड़ों में दर्द और सूजन भी आती है.

अनिद्रा की समस्या

थायरॉइड के प्रमुख लक्षणों में अनिद्रा भी एक लक्षण है. थायरॉइड ग्रंथि का असर व्यक्ति की नींद पर भी पड़ता है, जैसे- रात को नींद नहीं आना, बेचैनी, सोते समय अधिक पसीना आना आदि. नींद न आने के कारण कई बार चक्कर भी आने लगते हैं.

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बालों का झड़ना और त्वचा का ड्राई होना  

हाइपरथायरॉइडिज़्म से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा धीरे-धीरे ड्राई होने लगती है. त्वचा के ऊपर की कोशिकाएं (सेल्स) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिसके कारण त्वचा में रूखापन आने लगता है. थायरॉइड के कारण त्वचा में रूखेपन के अलावा बालों की भी कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं, जैसे- बालों का झड़ना, रूखापन आदि.

तनाव में रहना

दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद थकान होना लाज़िमी है, लेकिन अगर आपको ज़रूरत से ज़्यादा ही थकान महसूस हो, तो इसकी वजह थायरॉइड भी हो सकती है. शुरुआत में इस बात का एहसास नहीं होता है कि थकान किस वजह से है, लेकिन जब थायरॉइड ग्रंथि ओवरएक्टिव हो जाती है, तो यह ग्रंथि शरीर में ज़रूरत से बहुत अधिक मात्रा में थायरॉइड हार्मोंस का निर्माण करने लगती है, जिसके कारण तनाव व बेचैनी होने लगती है.

पीरियड्स की अनियमितता

अधिकतर महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना आम बात है, लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं होता है कि अंडरएक्टिव और ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी पीरियड्स अनियमित होते हैं. इसके लक्षणों में लगातार बदलाव होने पर महिलाएं इस बात से परेशान रहती हैं. जब महिलाओं को हाइपरथायरॉइडिज़्म (ओवरएक्टिव थायरॉइड) की समस्या होती है, तो उन्हें सामान्य से अधिक रक्तस्राव होता है और जब महिलाएं हाइपोथायरॉइडिज़्म (अंडरएक्टिव थायरॉइड) से ग्रस्त होती हैं, तब उन्हें रक्तस्राव बहुत कम होता है या फिर होता ही नहीं है.

डिप्रेशन

अवसाद होने की एक वजह थायरॉइड भी हो सकती है, क्योंकि अवसाद में अधिक नींद आना या अनिद्रा की समस्या होती है. यदि व्यक्तिअंडरएक्टिव थायरॉइड से ग्रस्त है, तो मूड स्विंग होना, आलस, काम में मन न लगना जैसी समस्याएं होती हैं.

थायरॉइड को नियंत्रित करने के लिए क्या खाएं?

थायरॉइड के मरीज़ अगर उपचार के साथ-साथ अपने खानपान पर ध्यान दें, तो बहुत हद तक इसे नियंत्रित किया जा सकता है. उन्हें अपनी डायट में इन चीज़ों को शामिल करना चाहिए, जैसे-

मशरूम: इसमें सेलेनियम अधिक मात्रा में होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करता है.

अंडा: थायरॉइड के रोगियों को अपनी डायट में अंडा ज़रूर शामिल करना चाहिए. इसमें भी सेलेनियम होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करने के साथ कमज़ोरी को भी दूर करता है.

नट्स: वैसे तो नट्स सभी को खाने चाहिए, लेकिन थायरॉइड के मरीज़ों को नट्स ज़रूर खाना चाहिए. नट्स में ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो थायरॉइड के कारण होनेवाले हार्ट अटैक के ख़तरे को कम करते हैं.

दही: इसे खाने से इम्यूनिटी लेवल बढ़ता है और थायरॉइड भी नियंत्रित रहता है.

मेथी: इसमें ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो थायरॉक्सिन नामक हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.

   – पूनम शर्मा

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सुकूनभरी गहरी नींद के लिए अपनाएं ये स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks To Sleep Better At Night)

Tricks To Sleep Better At Night

सुकूनभरी गहरी नींद के लिए अपनाएं ये स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks To Sleep Better At Night)

अगर आप भी बिस्तर पर पहुंचकर देर रात तक करवटें बदलते रहते हैं या फिर रात को बार-बार आपकी नींद (Sleep) खुल जाती है, तो इन छोटे-छोटे स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks) से आपकी यह समस्या (Problem) दूर हो जाएगी.

–    सोने से एक घंटे पहले कमरे में मौजूद सभी ब्लू लाइट्स को बंद कर दें. दरअसल जब रात को हम सोने जाते हैं, तो हमारे शरीर से मेलाटोनिन नामक हार्मोन का स्राव होता है, जो हमें सुकूनभरी नींद देता है, लेकिन मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, आईपैड और वीडियोगेम से निकलनेवाली ब्लू लाइट के कारण मेलाटोनिन का स्राव तुरंत बंद हो जाता है.

–    दोपहर के बाद कैफीन न लें. कैफीन आपकी नींद को प्रभावित करता है, क्योंकि उसे पचने में चार से छह घंटे का समय लगता है. अगर गहरी नींद चाहते हैं, तो शाम को चाय या कॉफी पीना छोड़ दें.

–    दिन में आधे घंटे से ज़्यादा की नींद आपके रात की नींद को डिस्टर्ब करती है. दरअसल, दिन में ज़्यादा देर तक सोने से हमारा बॉडी क्लॉक डिस्टर्ब हो जाता है, इसलिए रात की नींद ख़राब होती है. अगर दिन में नींद लेने की आदत है, तो स़िर्फ आधे घंटे का पावर नैप लें.

–    आपका बिस्तर भी आपकी नींद में बाधा डाल सकता है. अगर बेडशीट, गद्दे और तकियों की क्वालिटी ख़राब हो गई हो, तो वो भी आपको ठीक से सोने नहीं देंगे.

–    स्टडी में यह बात साबित हो चुकी है कि जो लोग रोज़ाना एक्सरसाइज़ करते हैं, उन्हें बाकी लोगों के मुक़ाबले अच्छी नींद आती है. इसलिए कोशिश करें कि कम से कम हफ़्ते में पांच दिन फिज़िकल एक्टिविटीज़ करें.

–    आप चाहें, तो अच्छी नींद के लिए एरोमा थेरेपी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. तकिये पर लैवेंडर एसेंशियल ऑयल स्प्रे करें. इससे नींद काफ़ी अच्छी आती है.

–    दिनभर का तनाव भी आपके मस्तिष्क को अशांत किए रहता है, जिसके कारण आप चाहकर भी सुकून से सो नहीं पाते. इसके लिए सुबह-शाम जब भी समय मिले थोड़ी देर मेडिटेशन करें. ध्यान मस्तिष्क को शांत करता है, जिससे आप गहरी नींद सो पाते हैं.

–    सोने से एक घंटे पहले ही बेडरूम की लाइट मद्धिम कर दें. इससे बॉडी को सिग्नल मिलता है कि सोने का व़क्त करीब आ रहा है.

–   बेड पर जाने से पहले पार्क या खुले में वॉक करें. पेड़-पौधे और खुली हवा आपके शरीर को रिलैक्स कर देते हैं, जिससे आप अच्छी तरह सो पाते हैं.

–    सोने से दस मिनट पहले गुनगुने पानी में पैरों को डुबोकर रखें. पैर गर्म रहने पर नींद जल्दी और अच्छी आती है.

–    गुनगुने सरसों के तेल से पैरों के तलवों में मालिश करें.

–    सोने से पहले गुड़ खाना भी फ़ायदेमंद होता है.

–    गुनगुना मीठा दूध पीने से भी अच्छी नींद आती है.

–    सोते समय नाभि में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालें.

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सेहत पर भारी पड़ता वर्कलोड… (The Effects Of Workload On Your Health)

Effects Of Workload

सेहत पर भारी पड़ता वर्कलोड… (The Effects Of Workload On Your Health)

कैसे हैंडल करें वर्कप्रेशर (Work Pressure) का स्ट्रेस (Stress)? अक्सर हम लोगों के मुंह से यह सुनते हैं कि बहुत बिज़ी हूं, वर्कलोड बहुत ज़्यादा है… यही हाल हमारा ख़ुद का भी है. न नींद पूरी होती है, न समय पर खाना… प्रोफेशनल लाइफ में बढ़ता कॉम्पटीशन, सबसे बेहतर करने का दबाव इस कदर बढ़ता जा रहा है कि हमारी सेहत बिगड़ रही है.

–   कम उम्र में ही हाई ब्लड प्रेशर.

–    बढ़ती हार्ट डिसीज़.

–   टाइप 2 डायबिटीज़.

–   ओबेसिटी यानी मोटापा.

–   सिरदर्द, कमरदर्द, गर्दन में अकड़न.

–    तनाव, डिप्रेशन, अवसाद.

–    अल्कोहल, स्मोकिंग की लत.

–   मन व शरीर में भारीपन आदि… ये तमाम शिकायतें हमारे बढ़ते वर्कलोड की देन हैं.

ज़ाहिर है पैसे कमाना ज़रूरी है. ऑफिस में अपने काम को ईमानदारी से करना भी अच्छी बात है, लेकिन काम का प्रेशर इतना भी न बढ़ जाए कि आप ज़िंदगी जीना ही भूल जाएं.

क्या आप पर भी है वर्कलोड?

यह जानने के लिए इन लक्षणों पर ध्यान दें…

रिलैक्सेशन के लिए आप अल्कोहल की शरण में ज़्यादा जाने लगे हैं: रिसर्च बताते हैं कि हफ़्ते में 40 घंटे से अधिक काम करने पर आपके शराब के सेवन की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. आप इतने थक जाते हैं कि रिस्की अमाउंट में अल्कोहल का सेवन करने लगते हैं. वीकेंड में आप बहुत ज़्यादा शराब पी लेते हैं या जिस दिन आपका मूड ख़राब होता है, तो भी आप शराब की शरण में जाते हैं.

यह ट्राई करें: घर लौटते समय लैपटॉप, कंप्यूटर या फोन को न देखें, बल्कि अपने फेवरेट गाने सुनें या ऑडियो बुक भी अच्छा आइडिया है.

आपके काम की क्वालिटी व प्रोडक्टिविटी कम हो रही है: अगर आपका काम समय पर नहीं हो पा रहा, तो इसका मतलब है कि आपकी प्रोडक्टिविटी कम हो रही है. आपने काम करने के घंटे बढ़ा दिए हैं, पर इसका यह अर्थ नहीं कि आप ज़्यादा काम कर रहे हैं. स्टैनफोर्ड रिसर्च पेपर में पाया गया है कि जो लोग 70 घंटे प्रति हफ़्ता काम करते हैं, वो अपने उन साथियों के मुक़ाबले अधिक काम नहीं कर रहे होते, जो 56 घंटे प्रति हफ़्ता काम करते हैं, क्योंकि हम हर रोज़, हर मिनट काम नहीं कर सकते. यह प्रकृति के ख़िलाफ़ है और असंभव भी है.

यह ट्राई करें: टु डू लिस्ट तैयार करें और मल्टी टास्किंग अवॉइड करें. बेहतर होगा कि काम में भी प्राथमिकताएं तय करें. जो काम सबसे ज़रूरी है, वह पहले करें. टाइम मैनेजमेंट करें, टाइम टेबल बनाएं. इससे आप व्यवस्थित रहेंगे और कम प्रेशर महसूस करेंगे.

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आपकी नींद पूरी नहीं हो रही और दिन में थकान महसूस होती है: काम के बढ़ते बोझ के चलते नींद डिस्टर्ब होने लगती है. मन-मस्तिष्क शांत नहीं रहता, जिससे नींद न आने की समस्या व मानसिक तनाव बढ़ता जाता है. नींद पूरी न होने से अगले दिन ऑफिस में भी थकान महसूस होती है और आप काम पर भी फोकस नहीं कर पाते. इन तमाम वजहों से आपको टाइप 2 डायबिटीज़ व हार्ट डिसीज़ होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं.

यह ट्राई करें: ख़ुद को ब्रेक दें. काम के बीच-बीच में उठकर वॉक पर जाएं. थोड़ा स्ट्रेचिंग करें. इससे नींद व थकान दूर होगी और स्ट्रेस नहीं होगा.

डिप्रेशन महसूस होने लगा है: ज़्यादा काम करने से आपकी मेंटल हेल्थ ख़राब हो सकती है. एक स्टडी में पाया गया है कि जो लोग रोज़ाना 11 घंटे काम करते हैं, वो डिप्रेशन से अधिक जूझ रहे होते हैं, बजाय उन लोगों के जो 7-8 घंटे काम करते हैं.

यह ट्राई करें: आप मेडिटेशन ट्राई करें. यह मानसिक तनाव को दूर करके रिफ्रेश करता है.

आप ही नहीं, आपका दिल भी अधिक काम कर रहा होता है: वर्कलोड स़िर्फ आप पर ही असर नहीं डालता, बल्कि आपके अंगों को भी प्रभावित करता है. आप भले ही यह नोटिस नहीं कर पाते, लेकिन वर्क स्ट्रेस कॉर्टिसोल नाम का हार्मोन रिलीज़ करता है, जो हृदय पर असर डालता है. यह स्ट्रोक, कोरोनरी आर्टरी डिसीज़, टाइप 2 डायबिटीज़ और कैंसर तक को जन्म दे सकता है.

यह ट्राई करें: ज़्यादा देर तक बैठे रहने की बजाय स्टैंड अप मीटिंग्स करें, कॉफी ब्रेक में, लंच में भी डेस्क की बजाय साथियों के साथ खड़े होकर खाना खाएं. टी ब्रेक लें और फोन पर भी खड़े-खड़े या घूमते हुए बात करें.

आपकी गर्दन व कमर में दर्द रहने लगा है: ऑक्यूपेशनल एंड एनवायर्नमेंटल मेडिसिन जरनल ने अपनी स्टडी में यह पाया है कि लोग जितना अधिक काम करते हैं, उनकी कमर में दर्द होने का रिस्क उतना ही बढ़ जाता है. महिलाओं में यह दर्द गर्दन में अधिक होता है, जबकि पुरुषों में लोअर बैक पेन होता है. यह स्ट्रेस का लक्षण है, जो मसल टेंशन की वजह से होता है.

यह ट्राई करें: बेहतर होगा आप थेरेपिस्ट की मदद लें, अपनी तकलीफ़ों व स्ट्रेस के बारे में बात करके आप बेहतर महसूस करेंगे.

आपके रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं: अगर आपके पास रिश्तों के लिए समय होता भी है, तो स्ट्रेस और थकान के कारण आप में वो ऊर्जा नहीं होती कि कुछ बेहतर समय अपनों के साथ बिता सकें. आप डिप्रेशन में या चिढ़े हुए रहते हैं.

यह ट्राई करें: अपने काम के बीच में ही नॉन वर्क एक्टिविटीज़ के लिए भी समय निकालें. टाइम टेबल बनाएं- फ्रेंड्स के साथ गेट-टुगेदर रखें, मूवी जाएं, म्यूज़िक सुनें, एक्सरसाइज़, लॉन्ग ड्राइव या जो भी आपको अच्छा लगे, उसके लिए टाइम निकालें.

– गीता शर्मा

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मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

 

Monsoon Health Care
मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

गर्मी की तपिश से राहत दिलानेवाली बारिश की फुहारें अपने साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी लेकर आती हैं. सर्दी-ज़ुकाम जैसी आम समस्याओं के अलावा टायफॉइड, हैजा, मलेरिया जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां भी इसी मौसम की देन हैं, लेकिन सही खानपान और कुछ हेल्दी आदतें अपनाकर आप बरसात में होनेवाली बीमारियों से बच सकते हैं.

मॉनसून हेल्थ प्रॉब्लम्स

बारिश का मौसम अपने साथ कई आम व गंभीर बीमारियां भी लेकर आता है, इसलिए ज़रूरी है कि हम पहले से ही उसके लिए सावधान रहें. एटलांटा हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डॉ. फतेह सिंह ने बरसाती बीमारियों से बचाव के बारे में हमें जानकारी दी.

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया 

जहां डेंगू में तेज़ बुख़ार, बहुत ज़्यादा सिरदर्द और जोड़ों में दर्द होता है, वहीं बुख़ार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द और कमज़ोरी आना मलेरिया के लक्षण हैं. चिकनगुनिया के भी लक्षण लगभग यही हैं.

बचाव

–    इससे बचाव का सबसे आसान तरीक़ा यही है कि घर के आसपास कहीं भी पानी का जमाव न होने दें, ताकि मच्छरों को पनपने के लिए जगह न मिले.

–    घर में कबाड़ जमा करके न रखें. जितना हो सके, घर साफ़ रखें.

–    बारिश से पहले घर में पेस्ट कंट्रोल ज़रूर करवाएं.

हैजा

बारिश के मौसम में फैलनेवाली यह एक गंभीर व जानलेवा बीमारी है, जो दूषित भोजन या पानी के कारण होती है. गंदगी और हाइजीन की कमी इस बीमारी को बढ़ावा देती है. उल्टी और पतली दस्त इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हैं.

बचाव

–    सबसे ज़रूरी है कि आप हैजे का टीका लगवाएं, इससे 6 महीनों तक आप सुरक्षित रहेंगे.

–   हाथ धोने के लिए लिक्विड हैंड सोप का ही इस्तेमाल करें.

–   साफ़ और शुद्ध पानी के लिए प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें अथवा पानी उबालकर पीना सबसे बेहतरीन उपाय है.

–    दूध व दूध से बनी चीज़ें, जैसे- आइस्क्रीम, मलाई वगैरह ज़्यादा न खाएं.

–    स्ट्रीट फूड से दूर रहें.

टायफॉइड

बारिश के दौरान होनेवाली यह एक आम बीमारी है. यह भी दूषित पानी व खाने के कारण ही होती है. इसमें सबसे ख़तरनाक बात यह है कि ठीक होने के बावजूद इसका इंफेक्शन मरीज़ के गॉल ब्लैडर में रह जाता है. बुख़ार, पेटदर्द और सिरदर्द इसके लक्षण हैं.

Monsoon Health Tips

बचाव

यह एक संक्रामक बीमारी है, जो बहुत तेज़ी से फैलती है, इसलिए मरीज़ को अलग कमरे में दूसरों से थोड़ा दूर रखें.

–    उबला व साफ़ पानी ही पीएं.

–    डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मरीज़ को लगातार लिक्विड डायट लेते रहना चाहिए.

–    खाना खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह ज़रूर धोएं.

–    होमियोपैथिक ट्रीटमेंट ज़्यादा मददगार होती है.

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डायरिया/ पेट के इंफेक्शन्स

इस मौसम में पेट की बीमारियां, जैसे- डायरिया और गैस्ट्रो सबसे ज़्यादा लोगों को परेशान करती हैं, जो वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण हो सकती हैं. पेट के ज़्यादातर इंफेक्शन्स में उल्टी और दस्त होते हैं, जिसके लिए तुरंत डॉक्टर से मिलना बहुत ज़रूरी है.

बचाव

–    खानपान के साथ-साथ पर्सनल हाइजीन का  भी ख़ास ख़्याल रखें. टॉयलेट के बाद और डायपर बदलने पर हैंडवॉश से हाथ ज़रूर धोएं.

–    बर्तनों और कटिंग बोर्ड को अच्छी तरह साफ़ रखें.

–    ऐसे फल और सब्ज़ियां खाएं, जिनके छिलके निकाल सकते हैं.

–   अगर ट्रैवेल करनेवाले हैं, तो हेपेटाइटिस ए का टीका ज़रूर लगवाएं.

पीलिया

मॉनसून के दौरान लिवर में वायरल इंफेक्शन काफ़ी आम बात है. हेपेटाइटिस के वायरस पानी के ज़रिए तेज़ी से फैलते हैं. यह इंफेक्शन गंभीर हो सकता है, क्योंकि हेपेटाइटिस का कारण पीलिया होता है, जिससे आंखें और यूरिन आदि पीले पड़ जाते हैं.

बचाव

–    हेपेटाइटिस ए और बी का वैक्सीन लें.

–    दूषित खाने और पानी से बचें.

–    हाइजीन का ख़ास ख़्याल रखें.

हेल्थ अलर्ट्स

–    अगर तीन दिन से बुख़ार आ रहा है, तो ख़ुद से दवा खाने की बजाय डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह कोई गंभीर बुख़ार भी हो सकता है.

–   शरीर पर किसी भी तरह के रैशेज़ या फोड़े-फुंसी नज़र आएं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, यह कोई इंफेक्शन भी हो सकता है.

–    अगर आपको अस्थमा या कोई और ब्रीदिंग प्रॉब्लम है, तो ध्यान रखें कि सीलनवाली दीवार से चिपककर न बैठें. घर की दीवारें गीली न रखें, वरना फंगस के कारण आपको तकलीफ़ हो सकती है.

–    अस्थमा और डायबिटीज़ के मरीज़ ज़्यादा तीखा और मसालेदार खाना न खाएं, वरना उन्हें हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं.

–   डायबिटीज़ के मरीज़ नंगे पांव गीली ज़मीन पर न चलें, वरना जर्म्स और बैक्टीरिया से आपको इंफेक्शन हो सकता है.

मॉनसून डायट

मॉनसून में हमारी पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाती है और शारीरिक क्षमता पर भी इसका असर पड़ता है. इस मौसम में खाना ठीक तरी़के से पचता नहीं, जिससे एसिडिटी और गैस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में आपको खानपान का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.

–    बारिश में उबालकर छाना हुआ पानी ही पीएं, वरना दूषित पानी के कारण बीमार पड़ सकते हैं.

–    मॉनसून में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां खाने से बचें, क्योंकि बारिश में उनमें कीड़े लगने लगते हैं, जो आपके खाने के साथ पेट में जा सकते हैं.

–    मसालेदार और तले हुए खाने से अपच, उबकाई आना, वॉटर रिटेंशन आदि की समस्या हो सकती है.

–    रोज़ाना गर्म दाल या सूप ज़रूर पीएं. उसमें हल्दी, लौंग, कालीमिर्च और सौंफ ज़रूर डालें. यह इंफेक्शन से लड़ने में आपकी मदद करेगा.

–    खाने के बाद सौंफ का पानी पीने से गैस और एसिडिटी की समस्या नहीं होती. घर के सभी सदस्यों को खाने के बाद ये पानी दें.

–    उबला व अच्छी तरह पका हुआ खाना मॉनसून में आपकी सेहत की देखभाल करेगा.

–   एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर हर्बल टी और ग्रीन टी इस मौसम में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होती हैं. इसे डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    गाय का दूध पीएं. यह हल्का व सुपाच्य होता है, जिससे आपको इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.

–    खाने में गेहूं के आटे और मैदा की जगह जौ और चने के आटे का इस्तेमाल करें.

–    रोज़ाना अरहर की दाल की बजाय मूंगदाल का इस्तेमाल करें.

–    फ्रेश फ्रूट्स में आप सेब, अनार, मोसंबी और केला खाएं. ड्रायफ्रूट्स को अपने डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    इस मौसम में जितना हो सके, प्रोसेस्ड फूड अवॉइड करें.

–   नॉन वेज के शौक़ीन बरसात में इसका सेवन कम कर दें.

–    अगर आप दही खाना पसंद करते हैं, तो ज़रूर खाएं, पर उसमें नमक या शक्कर मिला लें.

–    इस मौसम में गाय का घी खाना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि वो न स़िर्फ आपकी पाचन क्रिया  को दुरुस्त रखता है, बल्कि रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर आपकी याद्दाश्त को बेहतर बनाता है.

–   कच्ची सब्ज़ियां और सलाद खाने से बचें. अगर घर पर खा रहे हैं, तो सब्ज़ियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें.

हेल्दी लाइफस्टाइल

–   बहुत ज़्यादा भीड़भाड़वाली जगह पर जाना अवॉइड करें, क्योंकि वहां वायरल इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है.

–    फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट पहनें, ताकि मच्छर काट न सकें.

–    जिन्हें एलर्जी और इंफेक्शन्स की समस्या है, वो नीम की पत्तियों को उबालकर उसे नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं.

–    एक्सरसाइज़ इस मौसम में भी उतनी ही ज़रूरी है, जितनी हर मौसम में.

–    हो सके तो शाम को घर पहुंचने पर नहाएं.

अपनाएं ये होम रेमेडीज़

–    सर्दी-खांसी से राहत के लिए एक कप पानी में सोंठ पाउडर उबालकर पीएं, राहत मिलेगी.

–    गले में ख़राश या दर्द है, तो गुनगुने पानी में नमक और हल्दी मिलाकर गरारे करें.

–    सर्दी से नाक बंद हो गई हो, तो गर्म पानी में नीलगिरी तेल कीकुछ बूंदें डालकर भाप लें या फिर रुमाल में उसकी कुछ बूंदें छिड़ककर सूंघें.

–    अगर वायरल फीवर है, तो एक कप पानी में तुलसी और अदरक मिलाकर उबाल लें. आंच से उतारकर शहद मिलाएं और चाय की तरह पीएं.

–    अपच व बदहज़मी से बचने के लिए हर बार खाने से पहले अदरक के एक छोटे से टुकड़े पर सेंधा नमक लगाकर खाएं.

–    रोज़ाना हल्दीवाला दूध न स़िर्फ आपको दूषित पानी के कारण होनेवाली बीमारियों से बचाएगा, बल्कि आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाएगा.

– सुनीता सिंह

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बीमार न होने दें मन को (Take Care Of Your Emotional Health)

सारी हसरतें पूरी नहीं होतीं, कुछ ख़्वाब अधूरे भी रह जाते हैं, ज़िंदगी में सब कुछ मनचाहा ही हो यह ज़रूरी तो नहीं, ज़िंदगी को भी तो कभी मनमानी करने दें… ख़्वाहिशों पर बंदिशें तो नहीं लग सकतीं, लेकिन उनकी पूरी होने की शर्त क्यों? अगर शर्त रखेंगे, तो जी ही नहीं पाएंगे, भावनाओं में बहते जाएंगे और मन से बीमार हो जाएंगे. मन भी तो बहुत कुछ सहेजकर, संजोकर रखता है… जब सब कुछ मनचाहा नहीं होता, तो उसका सीधा असर मन पर ही तो होता है. ऐसे में ज़रूरी है अपने मन की सेहत का ख़्याल रखें और अपने मन को बीमार न पड़ने दें.

Family Health

हम अपने शरीर से बेहद प्यार करते हैं. यही वजह है कि उसे सजाते हैं, संवारते हैं, उसका हर तरह से ख़्याल रखते हैं. जब कभी शरीर में तकलीफ़ हो जाए, तो डॉक्टर के पास भी जाते हैं, एक्स्ट्रा केयर करते हैं. इसी तरह से जब हमारा मन बीमार पड़ता है, तो हम क्या करते हैं? हम में से अधिकांश लोगों का जवाब होगा कि कुछ नहीं, क्योंकि मन भी कभी बीमार पड़ता है?

लेकिन सच तो यही है, जिस तरह तन बीमार पड़ता है, उसी तरह मन भी बीमार पड़ता है. उसे भी उस व़क्त एक्स्ट्रा केयर की ज़रूरत पड़ती है. लेकिन हम शायद समझ ही नहीं पाते कि हमारा मन बीमार हो गया है, इसलिए बेहतर होगा कि अपने मन का भी ख़्याल रखें, उसे बीमार न होने दें और अगर बीमार हो भी जाए, तो मन के डॉक्टर के पास जाकर उसका भी इलाज करवाएं.

क्या हैं मन की बीमारी के लक्षण?

डर और घबराहट: यह एक बड़ा लक्षण है आपके मन की बीमारी का. आपके मन में बेवजह असुरक्षा की भावना आने लगती है. अंजाना डर और घबराहट-सी बनी रहती है. लोगों पर भरोसा कम करने लगते हैं. एक अविश्‍वास की भावना पनपने लगती है.

नाराज़गी, ग़ुस्सा व दोषारोपण: अगर आप अपनी ज़िंदगी की तकलीफ़ों के लिए बार-बार दूसरों पर दोषारोपण करते हैं, नाराज़गी व ग़ुस्सा दिखाते हैं, तो समझ लीजिए कहीं न कहीं कुछ तो गड़बड़ है. आपको अपनी परिस्थितियों की ज़िम्मेदारी ख़ुद लेनी होगी. माना, आपके साथ बुरा हुआ होगा, लेकिन दोषारोपण समाधान नहीं है. हम नकारात्मक परिस्थितियों में भी किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं, यह हम पर निर्भर करता है. ज़िम्मेदारियों से भागना कोई हल नहीं.

अपराधबोध, शर्मिंदगी, पश्‍चाताप: आपने कुछ ग़लतियां की होंगी. ज़ाहिर-सी बात है, ज़िंदगी परफेक्ट नहीं होती, हम सभी ग़लतियों से ही सीखते हैं, लेकिन उसके लिए कब तक अपराधबोध, शर्मिंदगी व पश्‍चाताप की भावना मन में बनाए रखेंगे? आपको ख़ुद को भी माफ़ करना सीखना होगा. आप भगवान नहीं हैं और हो सकता है आपकी वजह से दूसरों को या आपको भी तकलीफ़ों से गुज़रना पड़ा हो, पर कब तक ख़ुद को दोषी मानते रहेंगे? माफ़ी मांग लें और ख़ुद को भी माफ़ कर दें.

चिड़चिड़ापन और नकारात्मकता: नकारात्मक भावनाएं कई कारणों से हो सकती हैं, लेकिन वह आपका स्वभाव ही बन जाए, तो ये मन के बीमार होने का संकेत है. नकारात्मकता ही चिड़चिड़ेपन को बढ़ाती है. पैसा, जॉब, रिश्ते व सामाजिक दबाव कई कारण हैं, जो नकारात्मक भावनाएं पैदा करते हैं, पर आपको ख़ुद यह निर्णय लेना होगा कि किस तरह से नकारात्मकता के कारणों से आप दूर रह सकते हैं.

एडिक्शन: जब मन और भावनाएं कमज़ोर हो जाती हैं, तो हम कई तरह की लतों के शिकार हो जाते हैं. एडिक्शन हमें कुछ पलों की राहत देते हैं और हमें लगता है हमारे सारे दर्द दूर हो गए, लेकिन एडिक्शन्स जब हमें पूरी तरह से अपनी गिरफ़्त में ले लेते हैं, तो मन और तन दोनों पर भारी पड़ जाते हैं. बेहतर होगा अपने ग़मों का इलाज लतों में न ढूंढ़ें.

उदासीनता व थकान: हमेशा थकान व उदासी महसूस करना शरीर के नहीं, मन के बीमार होने का संकेत है. ऊर्जा महसूस न होना, निराशावादी रवैया अपना लेना… इस तरह की भावनाएं यही इशारा करती हैं कि आपको अब मन के डॉक्टर की ज़रूरत है.

डिप्रेशन और आत्महत्या के ख़्याल: किसी भी गतिविधि में मन न लगना, किसी से बात न करना, सामाजिक क्रियाकलापों से दूर होते जाना, खाना कम कर देना, थका-थका महसूस करना जैसे लक्षण गहरे अवसाद की ओर इशारा करते हैं. यही अवसाद आगे चलकर आत्महत्या के ख़्यालों को जन्म देने लगता है. आपको लगने लगता है कि आपकी किसी को ज़रूरत नहीं, आपसे कोई प्यार नहीं करता… और यदि इस दौरान सही इलाज न करवाया जाए, तो आप ख़ुद अपनी जान के दुश्मन तक बन सकते हैं.

भावनात्मक कमज़ोरी: बात-बात पर रो देना, ख़ुद को असहाय व बेचारा महसूस करना मन की बीमारी का गहरा संकेत है. आपको लगता है कि कोई भी आपको प्यार नहीं कर सकता व अपना नहीं सकता. धीरे-धीरे आप लोगों से दूरी बनाने लगते हैं और अपनी ही परिधि में ़कैद हो जाते हैं. अपने मन की बात किसी से शेयर नहीं करते, ख़ुद मन ही मन घुटते रहते हैं.

सामाजिक गतिविधियों से दूर होना: आप पार्टीज़ में जाना बंद कर देते हैं, दोस्तों से मिलना-जुलना, रिश्तेदारों की ब्याह-शादी में न जाना… इस तरह से ख़ुद को आप समाज से काटने लगते हैं, क्योंकि आपको लगता है सभी आपके दुश्मन हैं और आपको कोई अपनाने को तैयार नहीं. ऑफिस पिकनिक हो या सोसायटी का गेट-टुगेदर, आपका मन कहीं नहीं लगता. हो सकता है आपकी सामाजिक व आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी न हो, पर यह कोई समाधान नहीं.

हताश, निराश व नाउम्मीद हो जाना: आपका मस्तिष्क पूरी तरह से बंद होने लगता है और हर तरह के निगेटिव ख़्याल ही आपको घेरे रहते हैं. अगर उम्मीद व आशा की किरण हो भी, तब भी आप प्रयास करने बंद कर देते हैं, क्योंकि आप पूरी तरह हताश, निराश व नाउम्मीद हो जाते हैं. आप पहले ही सोच लेते हैं कि प्रयास करने से भी कुछ नहीं होगा और आप कोशिश ही नहीं करते.

शारीरिक तकली़फें: जब आपका मन बीमार होगा, तो ज़ाहिर है शरीर पर भी उसका असर नज़र आने लगेगा. सिरदर्द, पेट की तकली़फें, मांसपेशियों में दर्द व तनाव इसके प्रमुख लक्षण हैं. लेकिन अक्सर लोग शारीरिक लक्षणों के इलाज पर ध्यान देने लगते हैं, जबकि इनकी जो मुख्य वजह है, मन की बीमारी, उसको नज़रअंदाज़ कर देते हैं. जिससे परेशानी और बढ़ जाती है.

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Family Care
कारण

मन की बीमारी के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक व ख़ुद का व्यक्तित्व भी ज़िम्मेदार हो सकता है.

–     हो सकता है आपकी नौकरी में समस्या हो या आपकी नौकरी चली गई हो और नई नौकरी अनेक प्रयासों के बाद भी न मिल रही हो, तो कई तरह के डर मन में हावी होने लगते हैं. भविष्य की चिंता, आर्थिक तंगी, समाज में तिरस्कार का डर आदि बातें आपको धीरे-धीरे नकारात्मक बनाने लगती हैं.

–     शादी या प्यार जैसा रिश्ता टूटने पर भी बहुत तकलीफ़ होती है. ऐसे में सामान्य बने रहना बेहद मुश्किल भी है, इसीलिए आप समाज से कटने लगते हैं. ख़ुद को एक दायरे में ़कैद कर लेते हैं. एडिक्शन का शिकार हो जाते हैं.

–     कुछ लोगों का व्यक्तित्व ही ऐसा होता है कि वो अन्य लोगों के मुक़ाबले भावनात्मक व मानसिक रूप से कमज़ोर होते हैं. वो किसी भी नकारात्मक अनुभव का शिकार होते हैं, तो जल्द ही मानसिक रूप से बीमार हो जाते हैं.

–     बहुत अधिक ईर्ष्या या द्वेष भी आपके मन को बीमार करता है. किसी की कामयाबी से जलना, किसी की लाइफस्टाइल से ईर्ष्या करना सही नहीं. ख़ुद को पॉज़िटिव बनाएं, न कि एक निगेटिव व्यक्ति.

उपाय

–     अगर आप डर व घबराहट का शिकार हो रहे हैं, तो अपने डर के अनहेल्दी कारणों को पहचानें.

–     अनहेल्दी कारणों को हेल्दी बातों से रिप्लेस करना सीखें.

–     कहीं आप यह तो नहीं सोचने लगे कि यह दुनिया विश्‍वास के लायक ही नहीं. यह सोच ही अपने आप में एक्स्ट्रीम है. अपनी सोच को बदलें.

–     लोगों पर विश्‍वास करना सीखें.

–     पॉज़िटिव लोगों के साथ रहें. उन लोगों के संपर्क में रहें, जो आपकी हमेशा मदद करते हैं. आपको यह महसूस होगा कि सभी लोग एक जैसे नहीं होते.

–     किसी बात को लेकर मन में शंका है, अपराधबोध है, तो बेहतर होगा अपनी शंकाएं बातचीत से दूर कर लें. बातों को मन में रखने से, भीतर ही भीतर कुढ़ने से नकारात्मकता ही बढ़ेगी.

–     माफ़ करना और माफ़ी मांगना सीखें.

–     अपने मन को पहचानें. अपने मन की बीमारी से भागें नहीं, उसका सामना करें और इलाज करवाएं.

–     जब कभी परिस्थितियों से भागने का मन हो, तो अपनी हॉबीज़ में मन लगाएं.

–     स्विमिंग, डान्सिंग, म्यूज़िक, ट्रेकिंग- ये तमाम चीज़ें एक तरह का मेडिटेशन हैं, जो आपको नकारात्मक भावनाओं से बाहर निकालकर पॉज़िटिव बनाने में मदद करती हैं.

–  नए दोस्त बनाएं, उनसे मिलेंगे तो ध्यान निगेटिव बातों से हटेगा.

–     कभी किसी शांत जगह जाकर छुट्टियां बिताएं.

–     मेडिटेशन और योग की शरण लें.

–     रोज़ाना लाइट एक्सरसाइज़ करें.

–     नकारात्मक लोगों से दूरी बनाए रखें.

–     अपने खानपान और इम्यूनिटी पर ख़ासतौर से ध्यान दें.

–     हेल्दी फूड खाएं, ताकि हार्मोंस असंतुलित न हों. हैप्पी हार्मोंस को रिलीज़ करनेवाले फूड खाएं.

–     रिसर्च बताते हैं कि घर में पालतू बिल्ली या कुत्ता रखने से फील गुड हार्मोंस रिलीज़ होते हैं और स्ट्रेस हार्मोंस कार्टिसोल कम होते हैं. ये तरीक़ा भी आज़माया जा सकता है.

–     बेहतर होगा कि अपने मन की बात अपनों से शेयर करें. अगर ऐसा संभव न हो, तो बिना देर किए एक्सपर्ट के पास जाएं. फूड, जो बना देते हैं आपका मूड

–     डार्क चॉकलेट मूड ठीक करके डिप्रेशन दूर करता है. यह एंडॉर्फिन हार्मोंस के स्तर को बढ़ाता है और इसमें मौजूद कई अन्य तत्व भी फील गुड के एहसास को बढ़ानेवाले हार्मोंस को बढ़ाकर डिप्रेशन दूर करते हैं.

–     कार्बोहाइड्रेट्स सेरोटोनिन हार्मोंस के स्तर को बढ़ाते हैं और आपके मूड को बेहतर बनाकर हैप्पी हार्मोंस को रिलीज़ करते हैं.

–     विटामिन बी बेहद ज़रूरी है हैप्पी हार्मोंस के रिलीज़ के लिए. शोध बताते हैं कि विटामिन बी6 की कमी से चिड़चिड़ापन, भूलने की समस्या, हाइपरएक्टिव हो जाना जैसी समस्याएं होती हैं. विटामिन बी12 भी ब्रेन बूस्टिंग तत्व है. आप विटामिन बी के लिए अपने डायट में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां शामिल करें.

–     गाजर, दही, फिश, ड्रायफ्रूट्स, दालचीनी, अदरक, लहसुन, कालीमिर्च, जीरा, करीपत्ता आदि में भी हार्मोंस को संतुलित रखने के गुण होते हैं. इन सभी को अपने डेली डायट में शामिल करें.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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अनहेल्दी लाइफस्टाइल कहीं आपको बीमार तो नहीं बना रही है? (Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick?)

Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick

Unhealthy Lifestyle

अनहेल्दी लाइफस्टाइल (Unhealthy Lifestyle) कहीं आपको बीमार (Sick) तो नहीं बना रही है?

ब्रेकफास्ट न करना

इस बारे में डायटीशियन्स व न्यूट्रीशनिस्टस का कहना है कि ब्रेकफास्ट न करने से वज़न बढ़ना, हदय रोग, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होना, एनर्जी लेवल कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं, उनमें बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जल्दी बढ़ता है और रोज़ाना नाश्ता करनेवाले लोगों की तुलना में उन्हें डायबिटीज़ होने की संभावना भी अधिक होती है. जो लोग डायटिंग के नाम पर ब्रेकफास्ट नहीं करते, उन्हें विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना चाहिए. ब्रेकफास्ट न करने पर दिनभर थकान महसूस होती है, एकाग्रता में कमी आने के साथ-साथ कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है.

खाना चबाकर न खाना

अधिकतर लोगों में खाना अच्छी तरह से चबाकर न खाने की बुरी आदत होती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है कि खाने को अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाया जाए, लेकिन जो लोग खाने को पूरी तरह से चबाकर नहीं खाते हैं, उनका पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम नहीं करता. पाचन तंत्र के सही ढंग से काम न करने के कारण उन्हें कब्ज़, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा कॉफी पीना

प्रतिदिन कॉफी पीने के बहुत फ़ायदे होते हैं. कॉफी में ऐसे अनेक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हमारी याददाश्त को बढ़ाते हैं, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा कॉफी का सेवन सेहत को हानि पहुंचाता है. औसतन एक व्यक्ति के लिए दो से चार कप कॉफी पीना सामान्य है, लेकिन चार से अधिक कप कॉफी पीने से एंज़ायटी, इंसोम्निया (अनिद्रा) और शरीर में कंपकंपी होने लगती है, जिसके कारण सिरदर्द, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा कॉफी में मौजूद कैफीन नामक तत्व बोन मास डेंसिटी को कम करता है. अधिक मात्रा में कॉफी पीने से हड्डियां कमज़ोर होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है.

ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना

सही एक्सरसाइज़ आपको फिट और फ्रेश होने का एहसास कराती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना भी आपको बीमार बना देता है. जी हां, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से घुटनों को नुक़सान पहुंचता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा होता है. अधिक एक्सरसाइज़ करने से थकान महसूस होती है. कई बार मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है. एक शोध के अनुसार, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना ब़ढ़ जाती है.

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भारी बैग कैरी करना

हैवी बैग्स उठाने से क्रॉनिक बैक पेन, कंधे और गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं. हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 5.5 किलोग्राम से लेकर 7 किलोग्राम तक का भारी बैग उठाने से गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द शुरू होने लगता है, इसलिए बैग ख़रीदते समय ऐसा बैग ख़रीदें, जिसमें हैवी मटेरियल का इस्तेमाल न किया गया हो. हैवी मटेरियलवाले बैग में सामान भरने के कारण बैग और भी भारी हो जाता है और गर्दन व कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है, जिसके कारण गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द होने लगता है. इसके अलावा पतली स्ट्राइप्सवाले बैग से भी ब्लड सर्कुलेशन रुकने का ख़तरा होता है.

हाई हील पहनना

अधिकतर महिलाएं हाई हील को फैशन एक्सेसरीज़ के तौर पर अपने वॉर्डरोब में ज़रूर रखती है, यह जानते हुए भी कि हाई हील सेहत को नुक़सान पहुंचाती है. हाई हील पहनने से स़िर्फ पैरों में ही दर्द नहीं होता, बल्कि शरीर के अन्य भागों में भी तकली़फें बढ़ जाती हैं. एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% महिलाएं हाई हील पहनती हैं, जिनमें से 90% महिलाओं को कंधे, पीठ, घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या होती है. हाई हील पहनने से सबसे ज़्यादा दबाव पैरों पर पड़ता है, जिसके कारण बॉडी पोश्‍चर बिगड़ने लगता है. हाई हील का असर स्पाइन पर भी पड़ता है, जिससे पीठ और पिंडलियों में दर्द बढ़ने लगता है.

रात को सोने से पहले ब्रश न करना

ज़्यादातर लोग रात को सोने से पहले ब्रश करने से कतराते हैं. उनकी यह आदत न केवल उनके स्वस्थ दांतों के लिए हानिकारक है, बल्कि उनके हेल्दी रिलेशिपशिप में भी दूरी का कारण बनती है.

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के डेंटिस्ट किमबर्ली हाम्स के अनुसार, दांतों की अच्छी सेहत के लिए दिन में दो बार ब्रश ज़रूर करना चाहिए. क्योंकि दिनभर खाते रहने के कारण दांतों पर प्लाक की परत जम जाती है, जिसके कारण दांतों में छिपे बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं. इसलिए जब भी आप खाना खाते हैं, तो ये बैक्टीरिया एसिड का उत्पादन करना शुरू कर देते हैं, जिससे दांतों में सड़न और सांसों में दुर्गंध की समस्या होने लगती है. इन समस्याओं से बचने के लिए दिन में 2 बार ब्रश करना ज़रूरी है.

पूरी नींद न लेना

स्लीप नामक पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग 6 घंटे या 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो उन्हें कार्डियोेवैस्कुलर डिसीज़, जैसे- दिल की बीमारी, लो ब्लड प्रेशर, तनाव, अवसाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं. नींद पूरी न होने के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे खाना पचने में मुश्किल होती है. इनके अलावा एकाग्रता में भी कमी आने लगती है.

यूरिन रोकना

यूरिन रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, यह जानते हुए भी लोगों में यूरिन रोकने की बुरी आदत होती है. यूरिन के ज़रिए शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. अगर थोड़ा-सा भी यूरिन शरीर में रह जाता है, तो संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है. 2-3 घंटे से अधिक समय तक यूरिन रोकने से किडनी स्टोन और ब्लैडर में सूजन की समस्या हो सकती है. बहुत देर तक यूरिन रोकने से यूटीआई (यूरिन ट्रैक्ट इंफेक्शन) की समस्या हो सकती है, जिसके कारण यूरिनरी ट्रैक में दर्द और यूरिन के साथ-साथ खून भी आने लगता है.

– अभिषेक शर्मा

फेंगशुई के 7 लकी चार्म आपकी लव लाइफ को बनाएंगे हेल्दी और हैप्पी (Fengshui 7 lucky charm for happy & healthy love life)

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सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए रिश्ते की नींव का मज़बूत होना ज़रूरी है. इससे आपसी प्रेम के साथ-साथ पति-पत्नी के बीच विश्‍वास भी गहरा होता है. आप अपने दाम्पत्य जीवन की नींव को कैसे मज़बूत बना सकते हैं? आइए, जानते हैं.

 

जीवनसाथी के साथ तस्वीर

मकान की दक्षिण-पश्‍चिम दीवार पर जीवनसाथी के साथ अपनी मुस्कुराती हुई तस्वीर लगाएं. इससे पति-पत्नी के बीच प्रेम संबंध और भी गहरा होता है और रिश्ते को मज़बूती मिलती है.

स्मार्ट टिप
मगर इस बात का ध्यान रखें कि तस्वीर में आप दोनों एकसाथ हों, दोनों की अलग-अलग तस्वीर लगाने की भूल न करें.

प्रेमी परिंदों की पेंटिंग

अगर आप अपनी तस्वीर लगाना नहीं चाहते हैं, तो मकान की दक्षिण-पश्‍चिम दीवार पर दो प्रेमी परिंदों की पेंटिंग भी लगा सकती हैं. इससे पति-पत्नी के बीच म्युचुअल अंडरस्टैंडिंग बढ़ती है. ऐसी पेंटिंग न्यूली मैरिड कपल के लिए ज़्यादा असरदार और लाभदायक होती है. आप चाहें तो न्यूली मैरिड कपल को ये तस्वीर गिफ्ट भी कर सकते हैं.

स्मार्ट टिप
इस बात का विशेष ध्यान रखें कि प्रेमी परिंदे पिंजड़े में कैद न हों. दोनों खुले आसामां में या किसी डाली पर एकसाथ हों.

डांसिंग डॉलफिन की तस्वीर

दाम्पत्य जीवन की ख़ुशहाली के लिए डॉलफिन फिश भी शुभ मानी जाती है, ख़ासकर डांसिंग डॉलफिन यानी नाचती हुई डॉलफिन फिश की तस्वीर. प्रेमी परिदों की तरह डॉलफिन फिश की तस्वीर भी जोड़ी में लगाएं, परंतु इसे दक्षिण-पश्‍चिम दिशा में नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाएं.
स्मार्ट टिप
स़िर्फ एक या दो अलग-अलग डॉलफिन की तस्वीर को एकसाथ न लगाएं और ये भी ध्यान रहे कि डॉलफिन डांस करती हों.

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फ्रेश रेड फ्लावर्स

न स़िर्फ लाल रंग, बल्कि फूल भी प्रेम का प्रतीक माने जाते हैं. इसलिए इनकी मौजूदगी से पति-पत्नी के रिश्ते और भी मज़बूत होते हैं. आपसी प्रेम बढ़ाने के लिए ताज़े लाल रंग के
फूल मकान के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें. ऐसा करने से प्रेम के साथ-साथ रिश्तों में गरमाहट भी बनी रहेगी.

स्मार्ट टिप
कांटे वाले फूल न रखें और जब फूल मुरझा जाएं, तो उन्हें हटा दें. मुरझाए हुए फूल नकारात्मक ऊर्जा के संचार में सहायक होते हैं.

ब्राइट लाइट बल्ब

ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी के लिए यदि आपके घर के सामने गार्डन है, तो गार्डन के दक्षिण-पश्‍चिम दिशा में खंभे पर ब्राइट शेड के छोटे-छोटे लाइट्स लगाएं. शीघ्र परिणाम के लिए यलो शेड का लाइट भी चुन सकती हैं.

स्मार्ट टिप
डल शेड्स के लाइट्स चुनाव न करें और जब भी लाइट में ख़राबी हो, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं.

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मैडरिन बत्तख की प्रतिमा

मैडरिन बत्तख भी प्रेम का प्रतीक माने जाते हैं. अपने रिश्ते को और भी मज़बूत बनाने के लिए बेडरूम की दक्षिण-पश्मिच दिशा में मैडरिन बत्तख की प्रतिमा रखें. इससे शादी के शुरुआती दिनों वाले प्रेम के लम्हें वापस लौट आएंगे.

स्मार्ट टिप
मैडरिन बत्तख भी जोड़ी में होने चाहिए. इसका ख़ास ख़्याल रखें.

स़फेद घोड़ों की पेंटिंग

तरक्क़ी का प्रतीक माने जाने वाला घोड़ा लव लाइफ के लिए भी लाभदायक होता है. मकान की उत्तर-पश्‍चिम दिशा में
स़फेद रंग के दो घोड़ों की तस्वीर लगाने से पति-पत्नी के रिश्ते को मज़बूती मिलती है और रिश्ते में गरमाहट भी बनी रहती है.

स्मार्ट टिप
घोड़ा स़फेद रंग का हो और तस्वीर में जोड़ी में हो, इस बात का ध्यान रखें.

 

 

कहानी- पासवाले घर की बहू ( Hindi Kahani – Paswale Ghar Ki Bahu )

कॉम्पटिशन ज़रूरी है, लेकिन… (Try To Do Healthy Competition)

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सर्वश्रेष्ठ बनने और सर्वश्रेष्ठ पाने की चाह से ही शायद कॉम्पटिशन शब्द का जन्म हुआ होगा. कॉम्पटिशन सकारात्मक हो तो आपको बहुत आगे ले जा सकती है, लेकिन नकारात्मक प्रतिस्पर्धा आपके साथ-साथ दूसरों को भी नुक़सान पहुंचा सकती है. अतः ऐसी कॉम्पटिशन से बचें, जो आपको ग़लत दिशा में ले जाए. बचपन से ही हम अपने बच्चों का कॉम्पटिशन शब्द से भलीभांति परिचय करा देते हैं. दूसरे बच्चों से उनकी तुलना करके, उनसे आगे निकलने की नसीहतें देकर हम उन्हें कॉम्पटिशन करना सिखा देते हैं, लेकिन ऐसा करते समय हम उन्हें ये बताना अक्सर भूल जाते हैं कि दूसरों से तुलना करने से पहले अपनी क्षमता को पहचानें. आगे बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन दूसरों से प्रेरणा लेकर, उन्हें नुक़सान पहुंचाकर नहीं. अतः किसी से भी प्रतिस्पर्धा करने से पहले उसके नफा-नुक़सान के बारे में अच्छी तरह सोच लें.

अपनी क्षमता को पहचानें
बड़े सपने देखना, उन्नति की राह पर चलना बिल्कुल सही है, लेकिन ऐसा करते समय हमें अपनी क्षमता का ध्यान ज़रूर रखना चाहिए. आप एक एवरेज स्टूडेंट हैं, लेकिन अपने दोस्त की देखादेखी में आप मेडिकल में एडमिशन के सपने देख रहे हैं, तो आपका ये सपना टूट सकता है. अपने सपने को पूरा करने के लिए आपको उस लेवल की पढ़ाई करनी होगी या फिर मेडिकल से संबंधित कोई और विकल्प ढ़ूंढ़ना होगा. करियर का चुनाव दूसरों को देखकर या कॉम्पटिशन के चलते नहीं करना चाहिए. ये जीवन का अहम् ़फैसला है. इसके लिए आपका उस क्षेत्र के लिए सक्षम होना ज़रूरी है.

दूसरों से सीखें
ज़रूरी नहीं कि हम हर बार अपनी ग़लती से ही सीखें, दूसरों की ग़लती से सबक लेकर भी हम वैसी भूल करने से बच सकते हैं. इसी तरह दूसरों को तऱक्की करते देख उनसे ईर्ष्या करने की बजाय हम उनकी तरह बनने की कोशिश कर सकते हैं. इस तरह हेल्दी कॉम्पटिशन से हम न स़िर्फ अपनी ग्रोथ बढ़ा सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं.

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ईर्ष्या से बचें
उसे मुझसे अच्छी जॉब क्यों मिली, उसका घर मुझसे बड़ा क्यों, उसकी कार मेरी कार से महंगी क्यों..? इसे कॉम्पटिशन नहीं ईर्ष्या कहेंगे, इसकी बजाय यदि आप हेल्दी कॉम्पटिशन रखेंगे तो आप भी अच्छी जॉब, घर, गाड़ी आदि पाने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे और अपनी क़ाबीलियत के दम पर वो तमाम चीज़ें हासिल कर लेंगे. अतः किसी से ईर्ष्या करने की बजाय हेल्दी कॉम्पटिशन रखें और तऱक्की पाने के लिए ख़ूब मेहनत करें.

मेहनत से मिलती है मंज़िल
सही समय पर सही दिशा में किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता, लेकिन इसके लिए आपको अपनी क्षमता और लक्ष्य के बारे में अच्छी तरह पता होना चाहिए. दूसरों को देखकर अपनी ज़िंदगी के ़फैसले करना समझदारी नहीं है. हर इंसान के पास एक ऐसा हुनर ज़रूर होता है, जो उसे कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंचा सकता है. हमें बस उस हुनर को पहचानना होता है और उसी दिशा में आगे बढ़ना होता है. अतः अपनी क्षमता को पहचानें और मेहनत से पाएं अपनी मंज़िल.

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हेल्दी लाइफ और लंबी उम्र के लिए घर में रखें ये लकी चार्म (Fengshui lucky charm for healthy and long life)

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कुछआ और बांस का पौधा फेंगशुई का ऐसा लकी चार्म है, जिसे घर में रखकर आप अच्छी सेहत के साथ लंबी उम्र भी पा सकते हैं.

 

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बांस का पौधा

फेंगशुई के अनुसार बांस का पौधा लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है. जिस तरह तेज़ आंधी-तूफान और बरसात में भी बांस अपनी जगह से टस से मस नहीं होता, उसी तरह इसे घर में रखने से यह स्थिर रहकर घर के सदस्यों की रक्षा करता है.

कैसे रखें इसे?
* बांस के एक जोड़ी तने को लाल धागे से बांधकर रखें.
* ध्यान रहे कि बांस के पौधे की लंबाई आठ इंच से अधिक न हो.

कहां रखें?
* इसे मुख्यद्वार के सामनेवाली दीवार पर टांग दें.
* अगर बांस का पौधा न मिले तो इसकी फोटो या पेंटिंग भी लगा सकते हैं. लेकिन इसे मुख्य द्वार के सामनेवाली दीवार पर ही लगाएं.
* आप चाहें तो ऑफिस में भी बांस का पौधा लगा सकते हैं, लेकिन इसकी दिशा में किसी तरह का कोई बदलाव न करें.

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जब बांस का पौधा पीला पड़ जाए, तो इसे फेंककर नया पौधा लगाएं.

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कछुआ

फेंगशुई के अनुसार कछुआ लंबी आयु काप्रतीक माना जाता है. इसकी प्रतिमा घर में रखने से आयु में वृद्धि होती है, साथ ही सुअवसर भी प्राप्त होते हैं.

कैसे करें चुनाव?
बाज़ार में कछुए की कई तरह की प्रतिमाएं मिलती हैं, परंतु धातु से बना कछुआ अधिक सौभाग्यशाली होता है. अतः धातु से बना कछुआ ही ख़रीदें.

कैसे और कहां रखें कछुआ?
* धातु से बने कछुए की प्रतिमा को पानी से भरे बाउल में डाल दें.
* इस बाउल को मकान की उत्तर दिशा में रखें. फेंगशुई के अनुसार कछुए की प्रतिमा रखने के लिए उत्तर दिशा शुभ मानी जाती है.

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यदि मकान की उत्तर दिशा में आपका बेडरूम है, तो कछुए की प्रतिमा को पानी से भरे बाउल में डालकर न रखें. फेंगशुई के अनुसार बेडरूम में पानी रखना अशुभ माना जाता है. अतः स़िर्फ कछुए की प्रतिमा ही रखें.

फेंगशुई के अनुसार, घर में कछुए की प्रतिमा रखने से घर के सदस्यों की आयु लंबी होती है और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है, इसलिए घर या ऑफिस में इसकी मौज़ूदगी लाभदायक मानी जाती है.

10 स्मार्ट हेल्थ रेज़ोल्यूशन्स से नए साल में रहें हेल्दी और फिट (10 New Year Health Resolutions You Must Make To Stay Fit & Healthy)

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नए साल के स्वागत में आप जमकर मस्ती और पार्टी करेंगे, ख़ूब खाएंगे, पीएंगे भी… मगर इन सबमें अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ मत करिएगा, क्योंकि एक पुरानी कहावत है हेल्थ इज़ वेल्थ. ख़ैर छोड़िए अब तक आपने अपनी सेहत के लिए क्या किया और क्या नहीं किया, सोचने की बजाय नए साल में ख़ुद से कुछ वादा करिए और अपनी सेहत को दुरुस्त रखिए. न्यू ईयर में इन हेल्थ रेज़ोल्यूशन्स को अपनी ज़िंदगी में शामिल करिए और पूरे साल बने रहिए फिट एंड फाइन.

 

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1. कूल कहलाने के लिए ड्रिंक न करें
आज की यंग जनरेशन के लिए पार्टी का मतलब ही होता है शराब और जो ड्रिंक नहीं करता, उसे ये आउटडेटेड या कूल नहीं समझते हैं. यदि आप भी अपने फ्रेंड्स ग्रुप में कूल कहलाने के लिए ड्रिंक करते हैं या करने की सोचते हैं, तो ऐसा बिल्कुल न करें. इस बार नए साल का स्वागत दोस्तों के साथ टी पार्टी या जूस पार्टी के साथ करें.

 

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2. रेग्युलर वर्कआउट
आज तो लेट हो गया, कल से करूंगा/करूंगी, अरे यार आज तो आंख ही खुली लेट. कोई बात नहीं कल से कर लूंगी… इस तरह के बहाने अब नहीं चलेंगे. यदि आपको सचमुच अपनी सेहत की चिंता है, तो नए साल में ख़ुद से वादा करें कि रोज़ाना बिना किसी बहाने के आप एक्सरसाइज़ करेंगे. हफ़्ते में कम से कम 5 दिन डेली सुबह आधे घंटे तक चलना, दौड़ना या साइकलिंग जैसी एक्सरसाइज़ कर सकते हैं.

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3. स्ट्रेस को कहें गुड बाय
जिस तरह आपने पुराने साल को अलविदा कर दिया, उसी तरह नए साल में अपने तनाव को भी बाय-बाय कह दीजिए. माना कि काम थोड़ा मुश्किल है, मगर नामुमक़िन तो नहीं. स्ट्रेस के कारणों का पता लगाकर उन्हें जल्द से जल्द दूर करने की कोशिश करें, क्योंकि स्ट्रेस आपकी सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन है.

 

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4. दूसरों को ख़ुश करने के लिए न खाएं
दोस्तों/रिश्तेदारों के साथ कहीं बाहर जाने पर अक्सर ऐसा होता है कि मन न होने पर भी बस उन्होंने कहने पर या उनका दिल रखने के लिए हम जंकफूड या कोई ऐसी चीज़ खा लेते हैं, जो हमारी सेहत के लिए ठीक नहीं होता. यदि आप डायटिंग पर हैं, तो हाई कैलोरी फूड ऑफर करने पर प्यार से अपने दोस्त/रिश्तेदार को मना कर दें. कहीं ऐसा न हो कि उनका दिल रखने के चक्कर में आपके दिल की सेहत बिगड़ जाए.

 

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5. रेग्युलर मेडिकल चेकअप भी है ज़रूरी
आमतौर पर लोग, ख़ासकर महिलाएं कोई गंभीर बीमारी होने पर ही डॉक्टर के पास जाती हैं और मेडिकल चेकअप करवाती हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए. एक ख़ास उम्र के बाद रेग्युलर मेडिकल चेकअप ज़रूरी होता है, ताकि किसी तरह की बीमारी होने पर शुरुआती स्टेज पर ही उसका इलाज किया जा सके. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि स्वस्थ इंसान को भी 30 की उम्र के बाद साल में एक बार चेकअप ज़रूर करना चाहिए, तो नए साल पर ख़ुद से वादा करिए कि अपनी सेहत के प्रति किसी तरह की लापरवाही नहीं करेंगे.

 

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6. न भूलें पानी पीना
अक्सर ऑफिस में या घर पर भी काम में बिज़ी रहने पर लोग पानी पीना भूल जाते हैं, ये लापरवाही सेहत के लिए अच्छी नहीं है. पानी न स़िर्फ शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है, बल्कि त्वचा को भी निखारता है. अतः रोज़ाना बिना भूले ख़ूब पानी पीएं. आमतौर पर एक दिन में 8 ग्लास पानी पीने की सलाह दी जाती है.

 

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7. करें वेट कंट्रोल
आज की फास्ट ट्रैक जनरेशन में फास्टफूड के बढ़ते चलन के कारण ओबेसिटी की समस्या बढ़ रही है. मेट्रो सिटीज़ में चाइल्ड ओबेसिटी भी बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है. हेल्दी रहने के लिए उम्र और लंबाई के हिसाब से वज़न होना ज़रूरी है. बढ़ता वज़न ढेर सारी बीमारियों को न्योता देता है, इसलिए वज़न नियंत्रित रखने की कोशिश करें. बच्चों की डायट का भी ध्यान रखें. बच्चे मोटे अच्छे लगते हैं वाली सोच दिमाग़ से निकाल दें और उनके वज़न पर भी नज़र रखें.

 

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8. बेस्ट है योग
वज़न कम करने से लेकर कमर दर्द और टमी फैट कम करने के लिए योग बेस्ट ऑप्शन है. अपनी ज़रूरत के मुताबिक आप एक्पर्ट्स से योगासन सीखकर हफ़्ते में कम से कम 5 दिन रोज़ाना योग करें. एक्सपर्ट की सलाह इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि योग हमेशा सही तरी़के से करने पर ही फ़ायदेमंद होता है. साथ ही यदि आपको किसी तरह की कोई बीमारी है, तो भी आप हर तरह का योगासन नहीं ट्राई कर सकते, इसलिए नए साल में योग स्टार्ट करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह ज़रूर लें. ये आपको मेंटली और फिज़ीकली दोनों तरह से फिट रखेगा.

 

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9. सोने का समय निश्‍चित करें
हो सकता है बेड पर जाते ही तुरंत आपको नींद न आए, लेकिन आप डेली बेड पर जाने का समय तो निश्‍चित कर ही सकते हैं. ऐसा करने से धीरे-धीरे आपको टाइम पर सोने की आदत हो जाएगी और सुबह आप बिल्कुल फ्रेश फील करेंगे. हेल्दी लाइफ के लिए नींद पूरी होना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इस समय न स़िर्फ आपका शरीर, बल्कि दिमाग़ भी रेस्ट करता है, तो न्यू ईयर में अपना सोने का रूटीन तय कर लें.

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10. ब्लड डोनेट करें
आपका ब्लड किसी ज़रूरतमंद की जान बचा सकता है, यही सोचकर साल में कम से कम दो बार ब्लड डोनेट ज़रूर करें. कुछ लोगों को लगता है कि ब्लड डोनेट करने से उन्हें कमज़ोरी हो सकती है, ये बात बिल्कुल ग़लत है. यदि आप हेल्दी और फिट हैं, तो इसका आपकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

– कंचन सिंह