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मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

 

Monsoon Health Care
मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

गर्मी की तपिश से राहत दिलानेवाली बारिश की फुहारें अपने साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी लेकर आती हैं. सर्दी-ज़ुकाम जैसी आम समस्याओं के अलावा टायफॉइड, हैजा, मलेरिया जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां भी इसी मौसम की देन हैं, लेकिन सही खानपान और कुछ हेल्दी आदतें अपनाकर आप बरसात में होनेवाली बीमारियों से बच सकते हैं.

मॉनसून हेल्थ प्रॉब्लम्स

बारिश का मौसम अपने साथ कई आम व गंभीर बीमारियां भी लेकर आता है, इसलिए ज़रूरी है कि हम पहले से ही उसके लिए सावधान रहें. एटलांटा हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डॉ. फतेह सिंह ने बरसाती बीमारियों से बचाव के बारे में हमें जानकारी दी.

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया 

जहां डेंगू में तेज़ बुख़ार, बहुत ज़्यादा सिरदर्द और जोड़ों में दर्द होता है, वहीं बुख़ार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द और कमज़ोरी आना मलेरिया के लक्षण हैं. चिकनगुनिया के भी लक्षण लगभग यही हैं.

बचाव

–    इससे बचाव का सबसे आसान तरीक़ा यही है कि घर के आसपास कहीं भी पानी का जमाव न होने दें, ताकि मच्छरों को पनपने के लिए जगह न मिले.

–    घर में कबाड़ जमा करके न रखें. जितना हो सके, घर साफ़ रखें.

–    बारिश से पहले घर में पेस्ट कंट्रोल ज़रूर करवाएं.

हैजा

बारिश के मौसम में फैलनेवाली यह एक गंभीर व जानलेवा बीमारी है, जो दूषित भोजन या पानी के कारण होती है. गंदगी और हाइजीन की कमी इस बीमारी को बढ़ावा देती है. उल्टी और पतली दस्त इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हैं.

बचाव

–    सबसे ज़रूरी है कि आप हैजे का टीका लगवाएं, इससे 6 महीनों तक आप सुरक्षित रहेंगे.

–   हाथ धोने के लिए लिक्विड हैंड सोप का ही इस्तेमाल करें.

–   साफ़ और शुद्ध पानी के लिए प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें अथवा पानी उबालकर पीना सबसे बेहतरीन उपाय है.

–    दूध व दूध से बनी चीज़ें, जैसे- आइस्क्रीम, मलाई वगैरह ज़्यादा न खाएं.

–    स्ट्रीट फूड से दूर रहें.

टायफॉइड

बारिश के दौरान होनेवाली यह एक आम बीमारी है. यह भी दूषित पानी व खाने के कारण ही होती है. इसमें सबसे ख़तरनाक बात यह है कि ठीक होने के बावजूद इसका इंफेक्शन मरीज़ के गॉल ब्लैडर में रह जाता है. बुख़ार, पेटदर्द और सिरदर्द इसके लक्षण हैं.

Monsoon Health Tips

बचाव

यह एक संक्रामक बीमारी है, जो बहुत तेज़ी से फैलती है, इसलिए मरीज़ को अलग कमरे में दूसरों से थोड़ा दूर रखें.

–    उबला व साफ़ पानी ही पीएं.

–    डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मरीज़ को लगातार लिक्विड डायट लेते रहना चाहिए.

–    खाना खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह ज़रूर धोएं.

–    होमियोपैथिक ट्रीटमेंट ज़्यादा मददगार होती है.

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डायरिया/ पेट के इंफेक्शन्स

इस मौसम में पेट की बीमारियां, जैसे- डायरिया और गैस्ट्रो सबसे ज़्यादा लोगों को परेशान करती हैं, जो वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण हो सकती हैं. पेट के ज़्यादातर इंफेक्शन्स में उल्टी और दस्त होते हैं, जिसके लिए तुरंत डॉक्टर से मिलना बहुत ज़रूरी है.

बचाव

–    खानपान के साथ-साथ पर्सनल हाइजीन का  भी ख़ास ख़्याल रखें. टॉयलेट के बाद और डायपर बदलने पर हैंडवॉश से हाथ ज़रूर धोएं.

–    बर्तनों और कटिंग बोर्ड को अच्छी तरह साफ़ रखें.

–    ऐसे फल और सब्ज़ियां खाएं, जिनके छिलके निकाल सकते हैं.

–   अगर ट्रैवेल करनेवाले हैं, तो हेपेटाइटिस ए का टीका ज़रूर लगवाएं.

पीलिया

मॉनसून के दौरान लिवर में वायरल इंफेक्शन काफ़ी आम बात है. हेपेटाइटिस के वायरस पानी के ज़रिए तेज़ी से फैलते हैं. यह इंफेक्शन गंभीर हो सकता है, क्योंकि हेपेटाइटिस का कारण पीलिया होता है, जिससे आंखें और यूरिन आदि पीले पड़ जाते हैं.

बचाव

–    हेपेटाइटिस ए और बी का वैक्सीन लें.

–    दूषित खाने और पानी से बचें.

–    हाइजीन का ख़ास ख़्याल रखें.

हेल्थ अलर्ट्स

–    अगर तीन दिन से बुख़ार आ रहा है, तो ख़ुद से दवा खाने की बजाय डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह कोई गंभीर बुख़ार भी हो सकता है.

–   शरीर पर किसी भी तरह के रैशेज़ या फोड़े-फुंसी नज़र आएं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, यह कोई इंफेक्शन भी हो सकता है.

–    अगर आपको अस्थमा या कोई और ब्रीदिंग प्रॉब्लम है, तो ध्यान रखें कि सीलनवाली दीवार से चिपककर न बैठें. घर की दीवारें गीली न रखें, वरना फंगस के कारण आपको तकलीफ़ हो सकती है.

–    अस्थमा और डायबिटीज़ के मरीज़ ज़्यादा तीखा और मसालेदार खाना न खाएं, वरना उन्हें हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं.

–   डायबिटीज़ के मरीज़ नंगे पांव गीली ज़मीन पर न चलें, वरना जर्म्स और बैक्टीरिया से आपको इंफेक्शन हो सकता है.

मॉनसून डायट

मॉनसून में हमारी पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाती है और शारीरिक क्षमता पर भी इसका असर पड़ता है. इस मौसम में खाना ठीक तरी़के से पचता नहीं, जिससे एसिडिटी और गैस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में आपको खानपान का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.

–    बारिश में उबालकर छाना हुआ पानी ही पीएं, वरना दूषित पानी के कारण बीमार पड़ सकते हैं.

–    मॉनसून में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां खाने से बचें, क्योंकि बारिश में उनमें कीड़े लगने लगते हैं, जो आपके खाने के साथ पेट में जा सकते हैं.

–    मसालेदार और तले हुए खाने से अपच, उबकाई आना, वॉटर रिटेंशन आदि की समस्या हो सकती है.

–    रोज़ाना गर्म दाल या सूप ज़रूर पीएं. उसमें हल्दी, लौंग, कालीमिर्च और सौंफ ज़रूर डालें. यह इंफेक्शन से लड़ने में आपकी मदद करेगा.

–    खाने के बाद सौंफ का पानी पीने से गैस और एसिडिटी की समस्या नहीं होती. घर के सभी सदस्यों को खाने के बाद ये पानी दें.

–    उबला व अच्छी तरह पका हुआ खाना मॉनसून में आपकी सेहत की देखभाल करेगा.

–   एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर हर्बल टी और ग्रीन टी इस मौसम में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होती हैं. इसे डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    गाय का दूध पीएं. यह हल्का व सुपाच्य होता है, जिससे आपको इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.

–    खाने में गेहूं के आटे और मैदा की जगह जौ और चने के आटे का इस्तेमाल करें.

–    रोज़ाना अरहर की दाल की बजाय मूंगदाल का इस्तेमाल करें.

–    फ्रेश फ्रूट्स में आप सेब, अनार, मोसंबी और केला खाएं. ड्रायफ्रूट्स को अपने डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    इस मौसम में जितना हो सके, प्रोसेस्ड फूड अवॉइड करें.

–   नॉन वेज के शौक़ीन बरसात में इसका सेवन कम कर दें.

–    अगर आप दही खाना पसंद करते हैं, तो ज़रूर खाएं, पर उसमें नमक या शक्कर मिला लें.

–    इस मौसम में गाय का घी खाना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि वो न स़िर्फ आपकी पाचन क्रिया  को दुरुस्त रखता है, बल्कि रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर आपकी याद्दाश्त को बेहतर बनाता है.

–   कच्ची सब्ज़ियां और सलाद खाने से बचें. अगर घर पर खा रहे हैं, तो सब्ज़ियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें.

हेल्दी लाइफस्टाइल

–   बहुत ज़्यादा भीड़भाड़वाली जगह पर जाना अवॉइड करें, क्योंकि वहां वायरल इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है.

–    फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट पहनें, ताकि मच्छर काट न सकें.

–    जिन्हें एलर्जी और इंफेक्शन्स की समस्या है, वो नीम की पत्तियों को उबालकर उसे नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं.

–    एक्सरसाइज़ इस मौसम में भी उतनी ही ज़रूरी है, जितनी हर मौसम में.

–    हो सके तो शाम को घर पहुंचने पर नहाएं.

अपनाएं ये होम रेमेडीज़

–    सर्दी-खांसी से राहत के लिए एक कप पानी में सोंठ पाउडर उबालकर पीएं, राहत मिलेगी.

–    गले में ख़राश या दर्द है, तो गुनगुने पानी में नमक और हल्दी मिलाकर गरारे करें.

–    सर्दी से नाक बंद हो गई हो, तो गर्म पानी में नीलगिरी तेल कीकुछ बूंदें डालकर भाप लें या फिर रुमाल में उसकी कुछ बूंदें छिड़ककर सूंघें.

–    अगर वायरल फीवर है, तो एक कप पानी में तुलसी और अदरक मिलाकर उबाल लें. आंच से उतारकर शहद मिलाएं और चाय की तरह पीएं.

–    अपच व बदहज़मी से बचने के लिए हर बार खाने से पहले अदरक के एक छोटे से टुकड़े पर सेंधा नमक लगाकर खाएं.

–    रोज़ाना हल्दीवाला दूध न स़िर्फ आपको दूषित पानी के कारण होनेवाली बीमारियों से बचाएगा, बल्कि आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाएगा.

– सुनीता सिंह

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बीमार न होने दें मन को (Take Care Of Your Emotional Health)

सारी हसरतें पूरी नहीं होतीं, कुछ ख़्वाब अधूरे भी रह जाते हैं, ज़िंदगी में सब कुछ मनचाहा ही हो यह ज़रूरी तो नहीं, ज़िंदगी को भी तो कभी मनमानी करने दें… ख़्वाहिशों पर बंदिशें तो नहीं लग सकतीं, लेकिन उनकी पूरी होने की शर्त क्यों? अगर शर्त रखेंगे, तो जी ही नहीं पाएंगे, भावनाओं में बहते जाएंगे और मन से बीमार हो जाएंगे. मन भी तो बहुत कुछ सहेजकर, संजोकर रखता है… जब सब कुछ मनचाहा नहीं होता, तो उसका सीधा असर मन पर ही तो होता है. ऐसे में ज़रूरी है अपने मन की सेहत का ख़्याल रखें और अपने मन को बीमार न पड़ने दें.

Family Health

हम अपने शरीर से बेहद प्यार करते हैं. यही वजह है कि उसे सजाते हैं, संवारते हैं, उसका हर तरह से ख़्याल रखते हैं. जब कभी शरीर में तकलीफ़ हो जाए, तो डॉक्टर के पास भी जाते हैं, एक्स्ट्रा केयर करते हैं. इसी तरह से जब हमारा मन बीमार पड़ता है, तो हम क्या करते हैं? हम में से अधिकांश लोगों का जवाब होगा कि कुछ नहीं, क्योंकि मन भी कभी बीमार पड़ता है?

लेकिन सच तो यही है, जिस तरह तन बीमार पड़ता है, उसी तरह मन भी बीमार पड़ता है. उसे भी उस व़क्त एक्स्ट्रा केयर की ज़रूरत पड़ती है. लेकिन हम शायद समझ ही नहीं पाते कि हमारा मन बीमार हो गया है, इसलिए बेहतर होगा कि अपने मन का भी ख़्याल रखें, उसे बीमार न होने दें और अगर बीमार हो भी जाए, तो मन के डॉक्टर के पास जाकर उसका भी इलाज करवाएं.

क्या हैं मन की बीमारी के लक्षण?

डर और घबराहट: यह एक बड़ा लक्षण है आपके मन की बीमारी का. आपके मन में बेवजह असुरक्षा की भावना आने लगती है. अंजाना डर और घबराहट-सी बनी रहती है. लोगों पर भरोसा कम करने लगते हैं. एक अविश्‍वास की भावना पनपने लगती है.

नाराज़गी, ग़ुस्सा व दोषारोपण: अगर आप अपनी ज़िंदगी की तकलीफ़ों के लिए बार-बार दूसरों पर दोषारोपण करते हैं, नाराज़गी व ग़ुस्सा दिखाते हैं, तो समझ लीजिए कहीं न कहीं कुछ तो गड़बड़ है. आपको अपनी परिस्थितियों की ज़िम्मेदारी ख़ुद लेनी होगी. माना, आपके साथ बुरा हुआ होगा, लेकिन दोषारोपण समाधान नहीं है. हम नकारात्मक परिस्थितियों में भी किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं, यह हम पर निर्भर करता है. ज़िम्मेदारियों से भागना कोई हल नहीं.

अपराधबोध, शर्मिंदगी, पश्‍चाताप: आपने कुछ ग़लतियां की होंगी. ज़ाहिर-सी बात है, ज़िंदगी परफेक्ट नहीं होती, हम सभी ग़लतियों से ही सीखते हैं, लेकिन उसके लिए कब तक अपराधबोध, शर्मिंदगी व पश्‍चाताप की भावना मन में बनाए रखेंगे? आपको ख़ुद को भी माफ़ करना सीखना होगा. आप भगवान नहीं हैं और हो सकता है आपकी वजह से दूसरों को या आपको भी तकलीफ़ों से गुज़रना पड़ा हो, पर कब तक ख़ुद को दोषी मानते रहेंगे? माफ़ी मांग लें और ख़ुद को भी माफ़ कर दें.

चिड़चिड़ापन और नकारात्मकता: नकारात्मक भावनाएं कई कारणों से हो सकती हैं, लेकिन वह आपका स्वभाव ही बन जाए, तो ये मन के बीमार होने का संकेत है. नकारात्मकता ही चिड़चिड़ेपन को बढ़ाती है. पैसा, जॉब, रिश्ते व सामाजिक दबाव कई कारण हैं, जो नकारात्मक भावनाएं पैदा करते हैं, पर आपको ख़ुद यह निर्णय लेना होगा कि किस तरह से नकारात्मकता के कारणों से आप दूर रह सकते हैं.

एडिक्शन: जब मन और भावनाएं कमज़ोर हो जाती हैं, तो हम कई तरह की लतों के शिकार हो जाते हैं. एडिक्शन हमें कुछ पलों की राहत देते हैं और हमें लगता है हमारे सारे दर्द दूर हो गए, लेकिन एडिक्शन्स जब हमें पूरी तरह से अपनी गिरफ़्त में ले लेते हैं, तो मन और तन दोनों पर भारी पड़ जाते हैं. बेहतर होगा अपने ग़मों का इलाज लतों में न ढूंढ़ें.

उदासीनता व थकान: हमेशा थकान व उदासी महसूस करना शरीर के नहीं, मन के बीमार होने का संकेत है. ऊर्जा महसूस न होना, निराशावादी रवैया अपना लेना… इस तरह की भावनाएं यही इशारा करती हैं कि आपको अब मन के डॉक्टर की ज़रूरत है.

डिप्रेशन और आत्महत्या के ख़्याल: किसी भी गतिविधि में मन न लगना, किसी से बात न करना, सामाजिक क्रियाकलापों से दूर होते जाना, खाना कम कर देना, थका-थका महसूस करना जैसे लक्षण गहरे अवसाद की ओर इशारा करते हैं. यही अवसाद आगे चलकर आत्महत्या के ख़्यालों को जन्म देने लगता है. आपको लगने लगता है कि आपकी किसी को ज़रूरत नहीं, आपसे कोई प्यार नहीं करता… और यदि इस दौरान सही इलाज न करवाया जाए, तो आप ख़ुद अपनी जान के दुश्मन तक बन सकते हैं.

भावनात्मक कमज़ोरी: बात-बात पर रो देना, ख़ुद को असहाय व बेचारा महसूस करना मन की बीमारी का गहरा संकेत है. आपको लगता है कि कोई भी आपको प्यार नहीं कर सकता व अपना नहीं सकता. धीरे-धीरे आप लोगों से दूरी बनाने लगते हैं और अपनी ही परिधि में ़कैद हो जाते हैं. अपने मन की बात किसी से शेयर नहीं करते, ख़ुद मन ही मन घुटते रहते हैं.

सामाजिक गतिविधियों से दूर होना: आप पार्टीज़ में जाना बंद कर देते हैं, दोस्तों से मिलना-जुलना, रिश्तेदारों की ब्याह-शादी में न जाना… इस तरह से ख़ुद को आप समाज से काटने लगते हैं, क्योंकि आपको लगता है सभी आपके दुश्मन हैं और आपको कोई अपनाने को तैयार नहीं. ऑफिस पिकनिक हो या सोसायटी का गेट-टुगेदर, आपका मन कहीं नहीं लगता. हो सकता है आपकी सामाजिक व आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी न हो, पर यह कोई समाधान नहीं.

हताश, निराश व नाउम्मीद हो जाना: आपका मस्तिष्क पूरी तरह से बंद होने लगता है और हर तरह के निगेटिव ख़्याल ही आपको घेरे रहते हैं. अगर उम्मीद व आशा की किरण हो भी, तब भी आप प्रयास करने बंद कर देते हैं, क्योंकि आप पूरी तरह हताश, निराश व नाउम्मीद हो जाते हैं. आप पहले ही सोच लेते हैं कि प्रयास करने से भी कुछ नहीं होगा और आप कोशिश ही नहीं करते.

शारीरिक तकली़फें: जब आपका मन बीमार होगा, तो ज़ाहिर है शरीर पर भी उसका असर नज़र आने लगेगा. सिरदर्द, पेट की तकली़फें, मांसपेशियों में दर्द व तनाव इसके प्रमुख लक्षण हैं. लेकिन अक्सर लोग शारीरिक लक्षणों के इलाज पर ध्यान देने लगते हैं, जबकि इनकी जो मुख्य वजह है, मन की बीमारी, उसको नज़रअंदाज़ कर देते हैं. जिससे परेशानी और बढ़ जाती है.

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Family Care
कारण

मन की बीमारी के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक व ख़ुद का व्यक्तित्व भी ज़िम्मेदार हो सकता है.

–     हो सकता है आपकी नौकरी में समस्या हो या आपकी नौकरी चली गई हो और नई नौकरी अनेक प्रयासों के बाद भी न मिल रही हो, तो कई तरह के डर मन में हावी होने लगते हैं. भविष्य की चिंता, आर्थिक तंगी, समाज में तिरस्कार का डर आदि बातें आपको धीरे-धीरे नकारात्मक बनाने लगती हैं.

–     शादी या प्यार जैसा रिश्ता टूटने पर भी बहुत तकलीफ़ होती है. ऐसे में सामान्य बने रहना बेहद मुश्किल भी है, इसीलिए आप समाज से कटने लगते हैं. ख़ुद को एक दायरे में ़कैद कर लेते हैं. एडिक्शन का शिकार हो जाते हैं.

–     कुछ लोगों का व्यक्तित्व ही ऐसा होता है कि वो अन्य लोगों के मुक़ाबले भावनात्मक व मानसिक रूप से कमज़ोर होते हैं. वो किसी भी नकारात्मक अनुभव का शिकार होते हैं, तो जल्द ही मानसिक रूप से बीमार हो जाते हैं.

–     बहुत अधिक ईर्ष्या या द्वेष भी आपके मन को बीमार करता है. किसी की कामयाबी से जलना, किसी की लाइफस्टाइल से ईर्ष्या करना सही नहीं. ख़ुद को पॉज़िटिव बनाएं, न कि एक निगेटिव व्यक्ति.

उपाय

–     अगर आप डर व घबराहट का शिकार हो रहे हैं, तो अपने डर के अनहेल्दी कारणों को पहचानें.

–     अनहेल्दी कारणों को हेल्दी बातों से रिप्लेस करना सीखें.

–     कहीं आप यह तो नहीं सोचने लगे कि यह दुनिया विश्‍वास के लायक ही नहीं. यह सोच ही अपने आप में एक्स्ट्रीम है. अपनी सोच को बदलें.

–     लोगों पर विश्‍वास करना सीखें.

–     पॉज़िटिव लोगों के साथ रहें. उन लोगों के संपर्क में रहें, जो आपकी हमेशा मदद करते हैं. आपको यह महसूस होगा कि सभी लोग एक जैसे नहीं होते.

–     किसी बात को लेकर मन में शंका है, अपराधबोध है, तो बेहतर होगा अपनी शंकाएं बातचीत से दूर कर लें. बातों को मन में रखने से, भीतर ही भीतर कुढ़ने से नकारात्मकता ही बढ़ेगी.

–     माफ़ करना और माफ़ी मांगना सीखें.

–     अपने मन को पहचानें. अपने मन की बीमारी से भागें नहीं, उसका सामना करें और इलाज करवाएं.

–     जब कभी परिस्थितियों से भागने का मन हो, तो अपनी हॉबीज़ में मन लगाएं.

–     स्विमिंग, डान्सिंग, म्यूज़िक, ट्रेकिंग- ये तमाम चीज़ें एक तरह का मेडिटेशन हैं, जो आपको नकारात्मक भावनाओं से बाहर निकालकर पॉज़िटिव बनाने में मदद करती हैं.

–  नए दोस्त बनाएं, उनसे मिलेंगे तो ध्यान निगेटिव बातों से हटेगा.

–     कभी किसी शांत जगह जाकर छुट्टियां बिताएं.

–     मेडिटेशन और योग की शरण लें.

–     रोज़ाना लाइट एक्सरसाइज़ करें.

–     नकारात्मक लोगों से दूरी बनाए रखें.

–     अपने खानपान और इम्यूनिटी पर ख़ासतौर से ध्यान दें.

–     हेल्दी फूड खाएं, ताकि हार्मोंस असंतुलित न हों. हैप्पी हार्मोंस को रिलीज़ करनेवाले फूड खाएं.

–     रिसर्च बताते हैं कि घर में पालतू बिल्ली या कुत्ता रखने से फील गुड हार्मोंस रिलीज़ होते हैं और स्ट्रेस हार्मोंस कार्टिसोल कम होते हैं. ये तरीक़ा भी आज़माया जा सकता है.

–     बेहतर होगा कि अपने मन की बात अपनों से शेयर करें. अगर ऐसा संभव न हो, तो बिना देर किए एक्सपर्ट के पास जाएं. फूड, जो बना देते हैं आपका मूड

–     डार्क चॉकलेट मूड ठीक करके डिप्रेशन दूर करता है. यह एंडॉर्फिन हार्मोंस के स्तर को बढ़ाता है और इसमें मौजूद कई अन्य तत्व भी फील गुड के एहसास को बढ़ानेवाले हार्मोंस को बढ़ाकर डिप्रेशन दूर करते हैं.

–     कार्बोहाइड्रेट्स सेरोटोनिन हार्मोंस के स्तर को बढ़ाते हैं और आपके मूड को बेहतर बनाकर हैप्पी हार्मोंस को रिलीज़ करते हैं.

–     विटामिन बी बेहद ज़रूरी है हैप्पी हार्मोंस के रिलीज़ के लिए. शोध बताते हैं कि विटामिन बी6 की कमी से चिड़चिड़ापन, भूलने की समस्या, हाइपरएक्टिव हो जाना जैसी समस्याएं होती हैं. विटामिन बी12 भी ब्रेन बूस्टिंग तत्व है. आप विटामिन बी के लिए अपने डायट में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां शामिल करें.

–     गाजर, दही, फिश, ड्रायफ्रूट्स, दालचीनी, अदरक, लहसुन, कालीमिर्च, जीरा, करीपत्ता आदि में भी हार्मोंस को संतुलित रखने के गुण होते हैं. इन सभी को अपने डेली डायट में शामिल करें.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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अनहेल्दी लाइफस्टाइल कहीं आपको बीमार तो नहीं बना रही है? (Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick?)

Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick

Unhealthy Lifestyle

अनहेल्दी लाइफस्टाइल (Unhealthy Lifestyle) कहीं आपको बीमार (Sick) तो नहीं बना रही है?

ब्रेकफास्ट न करना

इस बारे में डायटीशियन्स व न्यूट्रीशनिस्टस का कहना है कि ब्रेकफास्ट न करने से वज़न बढ़ना, हदय रोग, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होना, एनर्जी लेवल कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं, उनमें बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जल्दी बढ़ता है और रोज़ाना नाश्ता करनेवाले लोगों की तुलना में उन्हें डायबिटीज़ होने की संभावना भी अधिक होती है. जो लोग डायटिंग के नाम पर ब्रेकफास्ट नहीं करते, उन्हें विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना चाहिए. ब्रेकफास्ट न करने पर दिनभर थकान महसूस होती है, एकाग्रता में कमी आने के साथ-साथ कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है.

खाना चबाकर न खाना

अधिकतर लोगों में खाना अच्छी तरह से चबाकर न खाने की बुरी आदत होती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है कि खाने को अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाया जाए, लेकिन जो लोग खाने को पूरी तरह से चबाकर नहीं खाते हैं, उनका पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम नहीं करता. पाचन तंत्र के सही ढंग से काम न करने के कारण उन्हें कब्ज़, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा कॉफी पीना

प्रतिदिन कॉफी पीने के बहुत फ़ायदे होते हैं. कॉफी में ऐसे अनेक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हमारी याददाश्त को बढ़ाते हैं, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा कॉफी का सेवन सेहत को हानि पहुंचाता है. औसतन एक व्यक्ति के लिए दो से चार कप कॉफी पीना सामान्य है, लेकिन चार से अधिक कप कॉफी पीने से एंज़ायटी, इंसोम्निया (अनिद्रा) और शरीर में कंपकंपी होने लगती है, जिसके कारण सिरदर्द, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा कॉफी में मौजूद कैफीन नामक तत्व बोन मास डेंसिटी को कम करता है. अधिक मात्रा में कॉफी पीने से हड्डियां कमज़ोर होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है.

ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना

सही एक्सरसाइज़ आपको फिट और फ्रेश होने का एहसास कराती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना भी आपको बीमार बना देता है. जी हां, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से घुटनों को नुक़सान पहुंचता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा होता है. अधिक एक्सरसाइज़ करने से थकान महसूस होती है. कई बार मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है. एक शोध के अनुसार, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना ब़ढ़ जाती है.

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भारी बैग कैरी करना

हैवी बैग्स उठाने से क्रॉनिक बैक पेन, कंधे और गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं. हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 5.5 किलोग्राम से लेकर 7 किलोग्राम तक का भारी बैग उठाने से गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द शुरू होने लगता है, इसलिए बैग ख़रीदते समय ऐसा बैग ख़रीदें, जिसमें हैवी मटेरियल का इस्तेमाल न किया गया हो. हैवी मटेरियलवाले बैग में सामान भरने के कारण बैग और भी भारी हो जाता है और गर्दन व कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है, जिसके कारण गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द होने लगता है. इसके अलावा पतली स्ट्राइप्सवाले बैग से भी ब्लड सर्कुलेशन रुकने का ख़तरा होता है.

हाई हील पहनना

अधिकतर महिलाएं हाई हील को फैशन एक्सेसरीज़ के तौर पर अपने वॉर्डरोब में ज़रूर रखती है, यह जानते हुए भी कि हाई हील सेहत को नुक़सान पहुंचाती है. हाई हील पहनने से स़िर्फ पैरों में ही दर्द नहीं होता, बल्कि शरीर के अन्य भागों में भी तकली़फें बढ़ जाती हैं. एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% महिलाएं हाई हील पहनती हैं, जिनमें से 90% महिलाओं को कंधे, पीठ, घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या होती है. हाई हील पहनने से सबसे ज़्यादा दबाव पैरों पर पड़ता है, जिसके कारण बॉडी पोश्‍चर बिगड़ने लगता है. हाई हील का असर स्पाइन पर भी पड़ता है, जिससे पीठ और पिंडलियों में दर्द बढ़ने लगता है.

रात को सोने से पहले ब्रश न करना

ज़्यादातर लोग रात को सोने से पहले ब्रश करने से कतराते हैं. उनकी यह आदत न केवल उनके स्वस्थ दांतों के लिए हानिकारक है, बल्कि उनके हेल्दी रिलेशिपशिप में भी दूरी का कारण बनती है.

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के डेंटिस्ट किमबर्ली हाम्स के अनुसार, दांतों की अच्छी सेहत के लिए दिन में दो बार ब्रश ज़रूर करना चाहिए. क्योंकि दिनभर खाते रहने के कारण दांतों पर प्लाक की परत जम जाती है, जिसके कारण दांतों में छिपे बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं. इसलिए जब भी आप खाना खाते हैं, तो ये बैक्टीरिया एसिड का उत्पादन करना शुरू कर देते हैं, जिससे दांतों में सड़न और सांसों में दुर्गंध की समस्या होने लगती है. इन समस्याओं से बचने के लिए दिन में 2 बार ब्रश करना ज़रूरी है.

पूरी नींद न लेना

स्लीप नामक पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग 6 घंटे या 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो उन्हें कार्डियोेवैस्कुलर डिसीज़, जैसे- दिल की बीमारी, लो ब्लड प्रेशर, तनाव, अवसाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं. नींद पूरी न होने के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे खाना पचने में मुश्किल होती है. इनके अलावा एकाग्रता में भी कमी आने लगती है.

यूरिन रोकना

यूरिन रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, यह जानते हुए भी लोगों में यूरिन रोकने की बुरी आदत होती है. यूरिन के ज़रिए शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. अगर थोड़ा-सा भी यूरिन शरीर में रह जाता है, तो संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है. 2-3 घंटे से अधिक समय तक यूरिन रोकने से किडनी स्टोन और ब्लैडर में सूजन की समस्या हो सकती है. बहुत देर तक यूरिन रोकने से यूटीआई (यूरिन ट्रैक्ट इंफेक्शन) की समस्या हो सकती है, जिसके कारण यूरिनरी ट्रैक में दर्द और यूरिन के साथ-साथ खून भी आने लगता है.

– अभिषेक शर्मा

फेंगशुई के 7 लकी चार्म आपकी लव लाइफ को बनाएंगे हेल्दी और हैप्पी (Fengshui 7 lucky charm for happy & healthy love life)

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सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए रिश्ते की नींव का मज़बूत होना ज़रूरी है. इससे आपसी प्रेम के साथ-साथ पति-पत्नी के बीच विश्‍वास भी गहरा होता है. आप अपने दाम्पत्य जीवन की नींव को कैसे मज़बूत बना सकते हैं? आइए, जानते हैं.

 

जीवनसाथी के साथ तस्वीर

मकान की दक्षिण-पश्‍चिम दीवार पर जीवनसाथी के साथ अपनी मुस्कुराती हुई तस्वीर लगाएं. इससे पति-पत्नी के बीच प्रेम संबंध और भी गहरा होता है और रिश्ते को मज़बूती मिलती है.

स्मार्ट टिप
मगर इस बात का ध्यान रखें कि तस्वीर में आप दोनों एकसाथ हों, दोनों की अलग-अलग तस्वीर लगाने की भूल न करें.

प्रेमी परिंदों की पेंटिंग

अगर आप अपनी तस्वीर लगाना नहीं चाहते हैं, तो मकान की दक्षिण-पश्‍चिम दीवार पर दो प्रेमी परिंदों की पेंटिंग भी लगा सकती हैं. इससे पति-पत्नी के बीच म्युचुअल अंडरस्टैंडिंग बढ़ती है. ऐसी पेंटिंग न्यूली मैरिड कपल के लिए ज़्यादा असरदार और लाभदायक होती है. आप चाहें तो न्यूली मैरिड कपल को ये तस्वीर गिफ्ट भी कर सकते हैं.

स्मार्ट टिप
इस बात का विशेष ध्यान रखें कि प्रेमी परिंदे पिंजड़े में कैद न हों. दोनों खुले आसामां में या किसी डाली पर एकसाथ हों.

डांसिंग डॉलफिन की तस्वीर

दाम्पत्य जीवन की ख़ुशहाली के लिए डॉलफिन फिश भी शुभ मानी जाती है, ख़ासकर डांसिंग डॉलफिन यानी नाचती हुई डॉलफिन फिश की तस्वीर. प्रेमी परिदों की तरह डॉलफिन फिश की तस्वीर भी जोड़ी में लगाएं, परंतु इसे दक्षिण-पश्‍चिम दिशा में नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाएं.
स्मार्ट टिप
स़िर्फ एक या दो अलग-अलग डॉलफिन की तस्वीर को एकसाथ न लगाएं और ये भी ध्यान रहे कि डॉलफिन डांस करती हों.

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फ्रेश रेड फ्लावर्स

न स़िर्फ लाल रंग, बल्कि फूल भी प्रेम का प्रतीक माने जाते हैं. इसलिए इनकी मौजूदगी से पति-पत्नी के रिश्ते और भी मज़बूत होते हैं. आपसी प्रेम बढ़ाने के लिए ताज़े लाल रंग के
फूल मकान के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें. ऐसा करने से प्रेम के साथ-साथ रिश्तों में गरमाहट भी बनी रहेगी.

स्मार्ट टिप
कांटे वाले फूल न रखें और जब फूल मुरझा जाएं, तो उन्हें हटा दें. मुरझाए हुए फूल नकारात्मक ऊर्जा के संचार में सहायक होते हैं.

ब्राइट लाइट बल्ब

ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी के लिए यदि आपके घर के सामने गार्डन है, तो गार्डन के दक्षिण-पश्‍चिम दिशा में खंभे पर ब्राइट शेड के छोटे-छोटे लाइट्स लगाएं. शीघ्र परिणाम के लिए यलो शेड का लाइट भी चुन सकती हैं.

स्मार्ट टिप
डल शेड्स के लाइट्स चुनाव न करें और जब भी लाइट में ख़राबी हो, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं.

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मैडरिन बत्तख की प्रतिमा

मैडरिन बत्तख भी प्रेम का प्रतीक माने जाते हैं. अपने रिश्ते को और भी मज़बूत बनाने के लिए बेडरूम की दक्षिण-पश्मिच दिशा में मैडरिन बत्तख की प्रतिमा रखें. इससे शादी के शुरुआती दिनों वाले प्रेम के लम्हें वापस लौट आएंगे.

स्मार्ट टिप
मैडरिन बत्तख भी जोड़ी में होने चाहिए. इसका ख़ास ख़्याल रखें.

स़फेद घोड़ों की पेंटिंग

तरक्क़ी का प्रतीक माने जाने वाला घोड़ा लव लाइफ के लिए भी लाभदायक होता है. मकान की उत्तर-पश्‍चिम दिशा में
स़फेद रंग के दो घोड़ों की तस्वीर लगाने से पति-पत्नी के रिश्ते को मज़बूती मिलती है और रिश्ते में गरमाहट भी बनी रहती है.

स्मार्ट टिप
घोड़ा स़फेद रंग का हो और तस्वीर में जोड़ी में हो, इस बात का ध्यान रखें.

 

 

कहानी- पासवाले घर की बहू ( Hindi Kahani – Paswale Ghar Ki Bahu )

कॉम्पटिशन ज़रूरी है, लेकिन… (Try To Do Healthy Competition)

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सर्वश्रेष्ठ बनने और सर्वश्रेष्ठ पाने की चाह से ही शायद कॉम्पटिशन शब्द का जन्म हुआ होगा. कॉम्पटिशन सकारात्मक हो तो आपको बहुत आगे ले जा सकती है, लेकिन नकारात्मक प्रतिस्पर्धा आपके साथ-साथ दूसरों को भी नुक़सान पहुंचा सकती है. अतः ऐसी कॉम्पटिशन से बचें, जो आपको ग़लत दिशा में ले जाए. बचपन से ही हम अपने बच्चों का कॉम्पटिशन शब्द से भलीभांति परिचय करा देते हैं. दूसरे बच्चों से उनकी तुलना करके, उनसे आगे निकलने की नसीहतें देकर हम उन्हें कॉम्पटिशन करना सिखा देते हैं, लेकिन ऐसा करते समय हम उन्हें ये बताना अक्सर भूल जाते हैं कि दूसरों से तुलना करने से पहले अपनी क्षमता को पहचानें. आगे बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन दूसरों से प्रेरणा लेकर, उन्हें नुक़सान पहुंचाकर नहीं. अतः किसी से भी प्रतिस्पर्धा करने से पहले उसके नफा-नुक़सान के बारे में अच्छी तरह सोच लें.

अपनी क्षमता को पहचानें
बड़े सपने देखना, उन्नति की राह पर चलना बिल्कुल सही है, लेकिन ऐसा करते समय हमें अपनी क्षमता का ध्यान ज़रूर रखना चाहिए. आप एक एवरेज स्टूडेंट हैं, लेकिन अपने दोस्त की देखादेखी में आप मेडिकल में एडमिशन के सपने देख रहे हैं, तो आपका ये सपना टूट सकता है. अपने सपने को पूरा करने के लिए आपको उस लेवल की पढ़ाई करनी होगी या फिर मेडिकल से संबंधित कोई और विकल्प ढ़ूंढ़ना होगा. करियर का चुनाव दूसरों को देखकर या कॉम्पटिशन के चलते नहीं करना चाहिए. ये जीवन का अहम् ़फैसला है. इसके लिए आपका उस क्षेत्र के लिए सक्षम होना ज़रूरी है.

दूसरों से सीखें
ज़रूरी नहीं कि हम हर बार अपनी ग़लती से ही सीखें, दूसरों की ग़लती से सबक लेकर भी हम वैसी भूल करने से बच सकते हैं. इसी तरह दूसरों को तऱक्की करते देख उनसे ईर्ष्या करने की बजाय हम उनकी तरह बनने की कोशिश कर सकते हैं. इस तरह हेल्दी कॉम्पटिशन से हम न स़िर्फ अपनी ग्रोथ बढ़ा सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं.

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ईर्ष्या से बचें
उसे मुझसे अच्छी जॉब क्यों मिली, उसका घर मुझसे बड़ा क्यों, उसकी कार मेरी कार से महंगी क्यों..? इसे कॉम्पटिशन नहीं ईर्ष्या कहेंगे, इसकी बजाय यदि आप हेल्दी कॉम्पटिशन रखेंगे तो आप भी अच्छी जॉब, घर, गाड़ी आदि पाने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे और अपनी क़ाबीलियत के दम पर वो तमाम चीज़ें हासिल कर लेंगे. अतः किसी से ईर्ष्या करने की बजाय हेल्दी कॉम्पटिशन रखें और तऱक्की पाने के लिए ख़ूब मेहनत करें.

मेहनत से मिलती है मंज़िल
सही समय पर सही दिशा में किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता, लेकिन इसके लिए आपको अपनी क्षमता और लक्ष्य के बारे में अच्छी तरह पता होना चाहिए. दूसरों को देखकर अपनी ज़िंदगी के ़फैसले करना समझदारी नहीं है. हर इंसान के पास एक ऐसा हुनर ज़रूर होता है, जो उसे कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंचा सकता है. हमें बस उस हुनर को पहचानना होता है और उसी दिशा में आगे बढ़ना होता है. अतः अपनी क्षमता को पहचानें और मेहनत से पाएं अपनी मंज़िल.

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हेल्दी लाइफ और लंबी उम्र के लिए घर में रखें ये लकी चार्म (Fengshui lucky charm for healthy and long life)

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कुछआ और बांस का पौधा फेंगशुई का ऐसा लकी चार्म है, जिसे घर में रखकर आप अच्छी सेहत के साथ लंबी उम्र भी पा सकते हैं.

 

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बांस का पौधा

फेंगशुई के अनुसार बांस का पौधा लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है. जिस तरह तेज़ आंधी-तूफान और बरसात में भी बांस अपनी जगह से टस से मस नहीं होता, उसी तरह इसे घर में रखने से यह स्थिर रहकर घर के सदस्यों की रक्षा करता है.

कैसे रखें इसे?
* बांस के एक जोड़ी तने को लाल धागे से बांधकर रखें.
* ध्यान रहे कि बांस के पौधे की लंबाई आठ इंच से अधिक न हो.

कहां रखें?
* इसे मुख्यद्वार के सामनेवाली दीवार पर टांग दें.
* अगर बांस का पौधा न मिले तो इसकी फोटो या पेंटिंग भी लगा सकते हैं. लेकिन इसे मुख्य द्वार के सामनेवाली दीवार पर ही लगाएं.
* आप चाहें तो ऑफिस में भी बांस का पौधा लगा सकते हैं, लेकिन इसकी दिशा में किसी तरह का कोई बदलाव न करें.

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जब बांस का पौधा पीला पड़ जाए, तो इसे फेंककर नया पौधा लगाएं.

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कछुआ

फेंगशुई के अनुसार कछुआ लंबी आयु काप्रतीक माना जाता है. इसकी प्रतिमा घर में रखने से आयु में वृद्धि होती है, साथ ही सुअवसर भी प्राप्त होते हैं.

कैसे करें चुनाव?
बाज़ार में कछुए की कई तरह की प्रतिमाएं मिलती हैं, परंतु धातु से बना कछुआ अधिक सौभाग्यशाली होता है. अतः धातु से बना कछुआ ही ख़रीदें.

कैसे और कहां रखें कछुआ?
* धातु से बने कछुए की प्रतिमा को पानी से भरे बाउल में डाल दें.
* इस बाउल को मकान की उत्तर दिशा में रखें. फेंगशुई के अनुसार कछुए की प्रतिमा रखने के लिए उत्तर दिशा शुभ मानी जाती है.

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यदि मकान की उत्तर दिशा में आपका बेडरूम है, तो कछुए की प्रतिमा को पानी से भरे बाउल में डालकर न रखें. फेंगशुई के अनुसार बेडरूम में पानी रखना अशुभ माना जाता है. अतः स़िर्फ कछुए की प्रतिमा ही रखें.

फेंगशुई के अनुसार, घर में कछुए की प्रतिमा रखने से घर के सदस्यों की आयु लंबी होती है और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है, इसलिए घर या ऑफिस में इसकी मौज़ूदगी लाभदायक मानी जाती है.

10 स्मार्ट हेल्थ रेज़ोल्यूशन्स से नए साल में रहें हेल्दी और फिट (10 New Year Health Resolutions You Must Make To Stay Fit & Healthy)

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नए साल के स्वागत में आप जमकर मस्ती और पार्टी करेंगे, ख़ूब खाएंगे, पीएंगे भी… मगर इन सबमें अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ मत करिएगा, क्योंकि एक पुरानी कहावत है हेल्थ इज़ वेल्थ. ख़ैर छोड़िए अब तक आपने अपनी सेहत के लिए क्या किया और क्या नहीं किया, सोचने की बजाय नए साल में ख़ुद से कुछ वादा करिए और अपनी सेहत को दुरुस्त रखिए. न्यू ईयर में इन हेल्थ रेज़ोल्यूशन्स को अपनी ज़िंदगी में शामिल करिए और पूरे साल बने रहिए फिट एंड फाइन.

 

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1. कूल कहलाने के लिए ड्रिंक न करें
आज की यंग जनरेशन के लिए पार्टी का मतलब ही होता है शराब और जो ड्रिंक नहीं करता, उसे ये आउटडेटेड या कूल नहीं समझते हैं. यदि आप भी अपने फ्रेंड्स ग्रुप में कूल कहलाने के लिए ड्रिंक करते हैं या करने की सोचते हैं, तो ऐसा बिल्कुल न करें. इस बार नए साल का स्वागत दोस्तों के साथ टी पार्टी या जूस पार्टी के साथ करें.

 

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2. रेग्युलर वर्कआउट
आज तो लेट हो गया, कल से करूंगा/करूंगी, अरे यार आज तो आंख ही खुली लेट. कोई बात नहीं कल से कर लूंगी… इस तरह के बहाने अब नहीं चलेंगे. यदि आपको सचमुच अपनी सेहत की चिंता है, तो नए साल में ख़ुद से वादा करें कि रोज़ाना बिना किसी बहाने के आप एक्सरसाइज़ करेंगे. हफ़्ते में कम से कम 5 दिन डेली सुबह आधे घंटे तक चलना, दौड़ना या साइकलिंग जैसी एक्सरसाइज़ कर सकते हैं.

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3. स्ट्रेस को कहें गुड बाय
जिस तरह आपने पुराने साल को अलविदा कर दिया, उसी तरह नए साल में अपने तनाव को भी बाय-बाय कह दीजिए. माना कि काम थोड़ा मुश्किल है, मगर नामुमक़िन तो नहीं. स्ट्रेस के कारणों का पता लगाकर उन्हें जल्द से जल्द दूर करने की कोशिश करें, क्योंकि स्ट्रेस आपकी सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन है.

 

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4. दूसरों को ख़ुश करने के लिए न खाएं
दोस्तों/रिश्तेदारों के साथ कहीं बाहर जाने पर अक्सर ऐसा होता है कि मन न होने पर भी बस उन्होंने कहने पर या उनका दिल रखने के लिए हम जंकफूड या कोई ऐसी चीज़ खा लेते हैं, जो हमारी सेहत के लिए ठीक नहीं होता. यदि आप डायटिंग पर हैं, तो हाई कैलोरी फूड ऑफर करने पर प्यार से अपने दोस्त/रिश्तेदार को मना कर दें. कहीं ऐसा न हो कि उनका दिल रखने के चक्कर में आपके दिल की सेहत बिगड़ जाए.

 

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5. रेग्युलर मेडिकल चेकअप भी है ज़रूरी
आमतौर पर लोग, ख़ासकर महिलाएं कोई गंभीर बीमारी होने पर ही डॉक्टर के पास जाती हैं और मेडिकल चेकअप करवाती हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए. एक ख़ास उम्र के बाद रेग्युलर मेडिकल चेकअप ज़रूरी होता है, ताकि किसी तरह की बीमारी होने पर शुरुआती स्टेज पर ही उसका इलाज किया जा सके. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि स्वस्थ इंसान को भी 30 की उम्र के बाद साल में एक बार चेकअप ज़रूर करना चाहिए, तो नए साल पर ख़ुद से वादा करिए कि अपनी सेहत के प्रति किसी तरह की लापरवाही नहीं करेंगे.

 

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6. न भूलें पानी पीना
अक्सर ऑफिस में या घर पर भी काम में बिज़ी रहने पर लोग पानी पीना भूल जाते हैं, ये लापरवाही सेहत के लिए अच्छी नहीं है. पानी न स़िर्फ शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है, बल्कि त्वचा को भी निखारता है. अतः रोज़ाना बिना भूले ख़ूब पानी पीएं. आमतौर पर एक दिन में 8 ग्लास पानी पीने की सलाह दी जाती है.

 

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7. करें वेट कंट्रोल
आज की फास्ट ट्रैक जनरेशन में फास्टफूड के बढ़ते चलन के कारण ओबेसिटी की समस्या बढ़ रही है. मेट्रो सिटीज़ में चाइल्ड ओबेसिटी भी बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है. हेल्दी रहने के लिए उम्र और लंबाई के हिसाब से वज़न होना ज़रूरी है. बढ़ता वज़न ढेर सारी बीमारियों को न्योता देता है, इसलिए वज़न नियंत्रित रखने की कोशिश करें. बच्चों की डायट का भी ध्यान रखें. बच्चे मोटे अच्छे लगते हैं वाली सोच दिमाग़ से निकाल दें और उनके वज़न पर भी नज़र रखें.

 

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8. बेस्ट है योग
वज़न कम करने से लेकर कमर दर्द और टमी फैट कम करने के लिए योग बेस्ट ऑप्शन है. अपनी ज़रूरत के मुताबिक आप एक्पर्ट्स से योगासन सीखकर हफ़्ते में कम से कम 5 दिन रोज़ाना योग करें. एक्सपर्ट की सलाह इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि योग हमेशा सही तरी़के से करने पर ही फ़ायदेमंद होता है. साथ ही यदि आपको किसी तरह की कोई बीमारी है, तो भी आप हर तरह का योगासन नहीं ट्राई कर सकते, इसलिए नए साल में योग स्टार्ट करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह ज़रूर लें. ये आपको मेंटली और फिज़ीकली दोनों तरह से फिट रखेगा.

 

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9. सोने का समय निश्‍चित करें
हो सकता है बेड पर जाते ही तुरंत आपको नींद न आए, लेकिन आप डेली बेड पर जाने का समय तो निश्‍चित कर ही सकते हैं. ऐसा करने से धीरे-धीरे आपको टाइम पर सोने की आदत हो जाएगी और सुबह आप बिल्कुल फ्रेश फील करेंगे. हेल्दी लाइफ के लिए नींद पूरी होना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इस समय न स़िर्फ आपका शरीर, बल्कि दिमाग़ भी रेस्ट करता है, तो न्यू ईयर में अपना सोने का रूटीन तय कर लें.

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10. ब्लड डोनेट करें
आपका ब्लड किसी ज़रूरतमंद की जान बचा सकता है, यही सोचकर साल में कम से कम दो बार ब्लड डोनेट ज़रूर करें. कुछ लोगों को लगता है कि ब्लड डोनेट करने से उन्हें कमज़ोरी हो सकती है, ये बात बिल्कुल ग़लत है. यदि आप हेल्दी और फिट हैं, तो इसका आपकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

– कंचन सिंह

मनाएं सेफ और हेल्दी दिवाली (Have A Safe And Healthy Diwali)

ख़ुशियों के रंग बिखरे रहें, रोशनी के दिए जलते रहें… हर शाम दिवाली हो हर दिल में, कुछ इस तरह से हम मिलते रहें…

दिवाली का मतलब हम सभी के लिए होता है ढेर सारी ख़ुशियां, उत्सव और जश्‍न. लेकिन इन ख़ुशियों को सेलिब्रेट करने के जोश में हम यह भूल जाते हैं कि सेलिब्रेशन का मतलब स़िर्फ शोर-शराबा और हुड़दंग ही नहीं होता. सेलिब्रेशन जहां तक हो सके सेफ हो, ताकि आपकी ख़ुशियों को नज़र न लगे. किस तरह से मनाएं सेफ और हेल्दी दिवाली यह हमें ही तय करना होगा.

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हेल्थ को इग्नोर न करें
– यह सच है कि दीवाली ख़ुशियों का त्योहार है, ऐसे में खाने-पीने का हिसाब-क़िताब हम आमतौर पर नहीं रखते और इसके चलते बहुत ज़्यादा मिठाई और तली हुई चीज़ें खा लेते हैं. ऐसा बिल्कुल भी न करें.
– मिठाई व तली चीज़ें सेहत को नुक़सान पहुंचाती हैं. इसके अलावा इस सीज़न में नक़ली मिठाइयों का बाज़ार गर्म रहता है, जो गंभीर

नुक़सान पहुंचाती हैं
– खोवे के मिठाइयां और सिल्वर फॉइल चढ़ी मिठाइयां न खाएं. सिल्वर फॉइल की जगह अक्सर एल्युमिनियम का प्रयोग होता है, जो शरीर और ख़ासतौर से मस्तिष्क पर बहुत बुरा असर डालता है. बेहतर होगा घर पर ही मिठाई तैयार करें.
– जिन मिठाइयों में केमिकल प्रिज़र्वेटिव्स डाले जाते हैं, उनसे भी बचें, क्योंकि ये आपके लिवर, व किडनी को डैमेज कर सकती हैं. इनसे अस्थमा अटैक और कैंसर का ख़तरा भी हो सकता है.
– दिवाली के दौरान वायु प्रदूषण ख़तरनाक स्तर तक बढ़ जाता है. बहुत अधिक धुएं वाले पटाखे न चलाएं. इससे सांस की बीमारी हो सकती है. जिन लोगों को सांस संबंधी समस्या है, उन्हें इस दौरान तकलीफ़ काफ़ी बढ़ जाती है. इसलिए सामाजिक तौर पर भी हमें इस बात का ख़्याल रखना चाहिए कि हम इस प्रदूषण को बढ़ने न दें.
– न स़िर्फ वायु बल्कि ध्वनि प्रदूषण भी काफ़ी बढ़ जाता है, जिससे कान व मस्तिष्क संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.
– बेहतर होगा कि पटाखे फोड़ते व़क्त ईयर प्लग्स पहनें, क्योंकि इनसे निकलनेवाली तेज़ आवाज़ आपके कानों को नुक़सान पहुंचा सकती है.

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सेफ्टी है सबसे ज़रूरी
– पटाखे और फुलझड़ियां बच्चों को बहुत अट्रैक्ट करते हैं, लेकिन ये उतने ही ख़तरनाक साबित हो सकते हैं.
– बच्चों को कभी भी ख़तरनाक बम-पटाखे न दें.
– हल्के-फुल्के पटाखे चलाते समय भी यह ध्यान रखें कि आप उनके साथ हों.
– ढीले-ढाले कपड़े पहनकर पटाखे न चलाएं.
– सिंथेटिक व जल्दी आग पकड़नेवाले कपड़े न पहनें.
– दीयों को ऐसी जगह रखें, जहां वे किसी को नुक़सान न पहुंचा पाएं.
– कभी भी रोड़ साइड व भीड़भाड़ वाली जगह में पटाखे न फोड़ें. इससे आपके साथ-साथ दूसरों को भी नुक़सान हो सकता है. साथ ही आगज़नी आदि की घटनाएं भी हो सकती हैं.
– जहां इलेक्ट्रिक तार हों, गैस सिलेंडर या कोई भी आग पकड़नेवाले सामान हों, वहां पटाखे न चलाएं.
– बहुत ज़्यादा पटाखे न फोड़ें, इससे कचरा फैलता है और अगले दिन आप इसका नज़रा सड़कों पर देख सकते हैं.
– तेज़ टिमटिमाती रौशनी मन को तो लुभाती है, लेकिन दिवाली के दौरान पावर कंज़म्शन बहुत अधिक बढ़ जाता है, जिससे हमारा ही नुक़सान होता है.
– बेहतर होगा ईको फ्रेंडली दिवाली मनाएं. मिट्टी के दीयों का प्रयोग करें.
– बच्चे पटाखों की ज़िद छोड़ नहीं पाते, ऐसे में बेहतर होगा उन्हें ईको फ्रेंडली पटाखे लाकर दें. इनमें शोर व धुआं कम होता, क्योंकि ये रिसाइकल्ड पेपर्स से बने होते हैं.
– किसी को गिफ्ट भी दें, तो बेहतर होगा ड्राइ फ्रूट्स, फ्रेश फ्रूट्स व लो कैलोरी स्वीट्स ही दें.
– दीवाली के दिन चैरिटी करके उत्सव मनाएं.  ग़रीब बच्चों को या किसी आश्रम में जाकर उनके बीच ख़ुशियां बांटें. इससे बच्चे शुरुआत से ही आपको ऐसा करते देख इसे ही जीवन में अपनाएंगे.
– अगले दिन पटाखों के बिखरे कचरे की सफ़ाई के लिए ख़ुद को व अपने आसपास के लोगों को प्रोत्साहित करें.

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इस साल पटाखों को कहें ‘ना’
– सबसे पहले तो यह जान लें कि दिवाली रोशनी का पर्व है, शोर का नहीं.
– पटाखों से न स़िर्फ हमें, बल्कि पशु-पक्षियों को भी तकलीफ़ होती है.
– इस बात की तरफ़ शायद कम ही लोगों का ध्यान जाता है कि पटाखा बनाने के काम में अधकतर बच्चे यानी बालमज़दूर ही लगे होते हैं, जो बेहद ख़राब वातावरण में काम करते हैं. पटाखे ख़रीदकर आप एक तरह से बाल मज़दूरी को ही बढ़ावा दे रहे हैं.
– पटाखों से बेहद ज़हरीली गैस रिलीज़ होती है, जैसे- सल्फर डायऑक्साइड और नाइट्रोजन डायऑक्साइड, जो वातावरण व सेहत दोनों ही के लिए बेहद ख़तरनाक होती हैं.
– सबसे अंत में, पटाखे ख़तरनाक होने के साथ-साथ बेहद महंगे होते हैं, उन्हें जलाकर आप एक तरह से अपने ख़ून-पसीने की गाढ़ी कमाई ही फूंक रहे होते हैं. उन पैसों को किसी अच्छे काम में लगाएं, जिससे किसी और का थोड़ा भला हो सके और आपके मन को भी संतोष मिले.

– गीता शर्मा

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कितनी हेल्दी है आपकी सेक्स लाइफ ? (How Healthy Is Your Sex Life?)

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तुम्हारे लबों को छूने की चाहत में न जाने कितने अरमान पिघल जाएंगे… तुम्हारे दामन में सिमटने की ख़्वाहिश में न जाने कितने ही चांद जल जाएंगे… मखमली रातें जब आती हैं चंद अरमानों की चिलमन में… बुझते चराग़ जल उठते हैं, शमा को छूने की हसरत में…

बात जब प्यार-मुहब्बत की होती है, तो माहौल रूमानी हो ही जाता है, लेकिन न जाने कब ये रोमांस धीरे-धीरे ज़िंदगी की उलझनों में खो जाता है और कब आपकी मुहब्बत बस एक रूटीन बनकर रह जाती है, पता ही नहीं चलता. ऐसे में बेहतर है कि आप ख़ुद यह जानें व समझें कि आपकी रिलेशनशिप व ख़ासतौर से सेक्स लाइफ कितनी हेल्दी है.
यहां हम कुछ बेसिक पॉइंट्स पर बात करेंगे, जिनकेआधार पर आप यह डिसाइड कर सकते हैं कि आपका बेडरूम बिहेवियर कैसा है और आपकी सेक्स लाइफ कितनी हेल्दी है.

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अपनी बॉडी को लेकर कितना अच्छा महसूस करते हैं: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में 18 से 49 वर्ष की महिलाओं पर हुए शोध के मुताबिक, जिन महिलाओं को अपनी बॉडी इमेज पर सर्वाधिक स्कोर मिला, उनकी सेक्स लाइफ काफ़ी अच्छी थी. दरअसल, अपने शरीर व बॉडी फैट्स को लेकर महिलाएं काफ़ी कॉन्शियस रहती हैं, यही वजह है कि अगर उनके पेट या थाईज़ के आसपास फैट्स बढ़ता है, तो सेक्स के दौरान उनका ध्यान वहीं रहता है. इस वजह से वो सेक्स में पूरी तरह से इन्वॉल्व नहीं हो पातीं, जिसका असर ऑर्गेज़्म पर भी पड़ता है.
टिप: नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें. इससे अपनी बॉडी इमेज के प्रति सकारात्मकता बढ़ती है और आत्मविश्‍वास में भी इज़ाफा होता है, जिससे सेक्स लाइफ बेहतर बनती है.

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आप यह कहने से हिचकते नहीं कि आपको सेक्स में क्या चाहिए: हेल्दी सेक्स का अर्थ है अपनी परफेक्ट रेसिपी का पता लगाना. आप अपने पार्टनर से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वो आपके मन की बात बिना कहे ही पढ़ ले. ऐसे में आप दोनों को ही इतना ओपन होना चाहिए कि सेक्स में अपनी चाहत के बारे में खुलकर कह सकें.
टिप: अगर आप सामने से बात करने से हिचकते हैं, तो अपने पार्टनर को मैसेज करके अपनी सेक्सुअल फैंटेसीज़ के बारे में बता सकते हैं.

क्या आप सेक्स शेड्यूल करते हैं: अक्सर सेक्स को लेकर हमारी यही सोच होती है कि यह तो नेचुरल है, प्लान नहीं किया जा सकता. जब फीलिंग हो, तब करना चाहिए. लेकिन अगर आप सेक्स का भी टाइम टेबल बनाते हैं, तो आपकी सेक्स लाइफ हेल्दी होगी. आप अपने शेड्यूल के हिसाब से सब कुछ करेंगे, जिससे आपका मूड बेहतर होगा.
टिप: जिस दिन शेड्यूल किया है, उस दिन बच्चों को समय पर सुला दें. सारे काम समय से पहले निपटा दें, लाइट फूड खाएं. सेक्सी ड्रेस पहनकर साथ में रोमांटिक मूवी देखें.

सेक्स को काउंट न करें: आप हफ़्ते में या महीने में कितनी बार सेक्स करते हैं, यह गिनना हेल्दी नहीं. मन में यह बात आना कि आप कम या ज़्यादा सेक्स कर रहे हैं, आप पर प्रेशर डालता है. शोध में यह पाया गया है कि जिनको कहा गया कि आप अधिक सेक्स करें, वो अपनी सेक्स लाइफ से उतने ख़ुश नहीं थे, जितने वो कपल्स, जिन्हें नॉर्मल रहने को कहा गया था.
टिप: रोमांटिक डेट्स प्लान करें और कुछ नया ट्राई करें, इससे आपकी सेक्स लाइफ बेहतर बनेगी.

आप कैसा महसूस करते हैं: सेक्स के बाद क्या आप ख़ुद को अपने पार्टनर के और भी क़रीब महसूस करते हैं? क्या आपका मूड पहले सेबेहतर होता है और क्या आप अधिक पॉज़िटिव सोचते हैं? अगर हां, तो आपकी सेक्स लाइफ काफ़ी अच्छी और हेल्दी है.
टिप: सेक्स कितनी बार किया जाए यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सेक्स किस तरह से आपको बेहतर महसूस करवाता है यह ज़रूरी है. तो अगली बार ख़ुद से यही सवाल करें कि किस तरह से आप सेक्स के बाद बेहतर महसूस करते हैं.

सेक्स के लिए मना करते हैं: कभी-कभी ऐसा भी होता है कि आपके पार्टनर का मूड हो और आपका नहीं… ऐसे में आप क्या करते हैं? कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि पार्टनर की ख़ुशी के लिए आपको मना नहीं करना चाहिए, लेकिन दूसरी ओर यह भी सच है कि अगर आप अक्सर ऐसा करते हैं, तो सेक्स आपके लिए मात्र एक रूटीन बनकर रह जाएगा. इसलिए कभी-कभी मना करना भी हेल्दी होता है.
टिप: यहां यह ज़रूर ध्यान में रखें कि मूड न होने पर अगर आप अपने पार्टनर को मना करते हैं, तो कभी-कभी सेक्स में पहल भी करें, ताकि आपके पार्टनर को यह महसूस हो कि आप उन्हें पसंद करते हैं और वो आपको अट्रैक्ट करते हैं.

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आप जानते हैं कि कब और क्या बदलाव करने हैं: अक्सर एक समय के बाद कपल्स को सेक्स एक रूटीन ही लगने लगता है, ऐसे में यदि आप जानते हैं कि सेक्स को बोरियत से बचाने के लिए कब और क्या बदलाव करने हैं, तो आपकी सेक्स लाइफ काफ़ी हेल्दी है.
टिप: सेक्स को बोरिंग होने से बचाने के लिए सेक्स की जगह बदलें, कमरे का डेकोर भी बदल सकते हैं, रूटीन से हटकर कुछ करें, सेक्सीआउटफिट पहनें, ताकि आपकी सेक्स लाइफ में नई ताज़गी आए.

आप अपने पार्टनर के साथ ख़ुश हैं: सोशल साइंस रिसर्च के अनुसार यह बहुत ही सिंपल, लेकिन बेसिक बात है कि अगर आप अपने पार्टनर के साथ ख़ुश हैं, तो आपकी सेक्स लाइफ भी हेल्दी होगी.
टिप: पार्टनर की कंपनी एंजॉय करें. रोमांटिक बातें, कभी-कभार सेक्स को लेकर बहस भी करें, एक-दूसरे के लिए अट्रैक्टिव व फिट नज़र आने की कोशिश करें.

सेक्सी बातें करते हैं: सामने या सेक्स के समय ही नहीं, जब एक-दूसरे से दूर होते हैं, ऑफिस या कहीं और तो क्या सेक्सी मैसेज भेजते हैं? या फोन पर फ्लर्ट करते हैं? अगर हां, तो आप राइट ट्रैक पर हैं. जरनल ऑफ इंटिग्रेटेड सोशल साइंसेस के अनुसार ये तमाम छोटी-छोटी बातें आपकी सेक्स लाइफ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, क्योंकि यही बातें आप को फिज़िकली और रोमांटिकली क़रीब लाती हैं.
टिप: कभी भी मौक़ा देखकर अपने पार्टनर के कानों में धीरे से आई लव यू या कोई भी रोमांटिक बात कहें, फिर देखें असर. इस तरह के सरप्राइज़ेस आपकी सेक्स लाइफ को फे्रश बनाए रखेंगे.

रियलिस्टिक अप्रोच रखते हैं: सेक्स लाइफ को लेकर आप जितना प्रैक्टिकल और मैच्योर अप्रोच रखेंगे, उतनी ही हेल्दी आपकी सेक्स लाइफ होगी. यह ज़रूरी नहीं कि सेक्स हर बार बहुत ही ज़्यादा इंटेंस और पैशनेट हो. उसमें आनेवाले उतार-चढ़ाव व बदलावों को जितना जल्दी आप स्वीकार कर लेंगे, उतना ही अच्छा होगा.
टिप: सेक्सुअल होने के कोई बंधे-बंधाए नियम नहीं हैं, उसमें कुछ भी सही या कुछ भी ग़लत नहीं होता. आप और आपका पार्टनर जब इस हद तक मैच्योर और ओपन हो जाएंगे कि आपको कब सेक्स की ज़रूरत है और कब नहीं, तब आपकी सेक्स लाइफ परफेक्ट और हेल्दी हो जाएगी.

– योगिनी भारद्वाज

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रिश्तों को बेहतर बनाएं हेल्दी हैबिट्स से (Make relationships better by healthy habits)

Make relationships healthy

रिश्तों की मिठास एक तरफ़ जहां पति-पत्नी के व्यक्तित्व को संवारती है, वहीं दूसरी तरफ़ जब रिश्ते (Make relationships healthy) में कड़वाहट आने लगती है, तो ऐसा लगने लगता है कि जीवन का संतुलन बिगड़ गया है. इससे फिज़िकली तो स्त्री-पुरुष आहत होते ही हैं, कई बार मानसिक संतुलन भी बिगड़ जाता है. ऐसे में उन्हें डिप्रेशन घेर लेता है. कई बार पार्टनर की ग़लत आदतें या व्यवहार इसके लिए ज़िम्मेदार होता है. इसलिए रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए ज़रूरी है हेल्दी हैबिट्स अपनाना. हेल्दी हैबिट्स का मतलब सेहत से नहीं है, बल्कि हमारी बेसिक हैबिट्स से है.

Make relationships healthy

ईगो न रखें

– तुमने ऐसा क्यों किया, मुझसे पूछा क्यों नहीं, क्या मेरी कोई वैल्यू नहीं है या तुम मुझे इस क़ाबिल नहीं समझते, असल में तुम्हें तो मुझसे प्यार ही नहीं है आदि जैसे सवाल जब हम अपने साथी से करते हैं, तो इसकी वजह होता है हमारा ईगो.

– ईगो को पाले रखना धीरे-धीरे हमारी आदत बन जाती है.

– हेल्दी रिलेशन(Make relationships healthy) में इसकी कोई जगह नहीं होती है.

– ईगो को दूर फेंक दें और रिश्ते को बेहतर बनाएं.

अपने साथी का सम्मान करें

– यदि आप एक हेल्दी मैरिड लाइफ चाहते हैं, तो आपको अपने पार्टनर को यह एहसास कराना होगा कि वह आपके समान ही महत्वपूर्ण है. ऐसे में कोई भी ज़रूरी निर्णय लेते समय उनकी भी राय ज़रूर लें.

– यदि आप अपने जीवनसाथी से ऐसा व्यवहार करते हैं कि उनकी सलाह से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता या हमेशा अंतिम निर्णय आपका ही होगा, तो निश्‍चित रूप से आपके शादीशुदा जीवन में असंतुलन पैदा होगा.

– जीवनसाथी के विचारों को भी उतनी ही गंभीरता से लें, जितना आप स्वयं के विचारों को लेते हैं.

– जीवनसाथी की बात सुनने के लिए समय निकालें और उन्हें एहसास कराएं कि आप उनकी परवाह करते हैं.

पार्टनर की बात सुनें

– अपने साथी की बात सुनना एक हेल्दी हैबिट है.

– जब आपका पार्टनर अपनी दिनचर्या के बारे में बात कर रहा हो, तो कुछ और न सोचते रहें.

– उस समय इस बात का इंतज़ार न करें कि कब वो अपनी बात ख़त्म करे, ताकि आप वो कह सकें, जो आप कहना चाहते हैं.

– पार्टनर को सचमुच सुनने का प्रयास करें और वो आपको जो बता रहा है, उसे भी रिस्पेक्ट दें.

– जब आप बातचीत कर रहे हों, तो मोबाइल को दूर रख दें.

– कभी-कभी एक मुश्किलभरे दिन के बाद आपके पार्टनर को स़िर्फ किसी सुननेवाले की ज़रूरत होती है.

हंसने में दें पार्टनर का साथ

– इससे आपका रिश्ता और भी मज़बूत होगा.

– पार्टनर के हंसने में उसका साथ दें.

– नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी के सायकोलॉजिस्ट लाउरा कुर्ट्ज ने पहली बार एक रिसर्च से रिश्तों में हंसी की भूमिका को जानने की कोशिश की है.

– कुर्ट्ज की स्टडी के अनुसार, रिश्ते की बेहतरी में एकल हंसी की बजाय साझा हंसी कहीं अधिक फ़ायदेमंद है.

– यदि आपका पार्टनर हंस रहा हो और उसके साथ आप भी हंसते हों, तो इससे वह संबंधों के बारे में बेहतर महसूस करता है.

– रिसर्चर्स ने पाया कि एक साथ हंसनेवाले कपल्स एक-दूसरे के प्रति अधिक समर्पित रहते हैं और अधिक संतुष्ट महसूस करते हैं.

– जबकि पार्टनर की हंसी में खुलकर साथ नहीं देनेवाले जोड़ों के मामले में ऐसा नहीं होता.

– नए रिसर्च से साबित हुआ है कि पार्टनर के साथ हंसना रिश्तों की गहराई व अपनापन बढ़ाने के लिए एक कारगर टॉनिक है.

Make relationships healthy

आई लव यू कहना ना भूलें

– ऐसा कभी भी ना सोचें कि आपको ‘आई लव यू’ कहने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि आपके साथी को पहले से पता होना चाहिए कि आप क्या महसूस करते हैं.

– दिन में कम-से-कम एक या दो बार अपने पार्टनर से यह कहने की कोशिश करें कि आप उससे कितना प्यार करते हैं.

– अपने पार्टनर को यह समझाने का समय निकालें कि वो सचमुच आपके लिए कितना मायने रखता/रखती है.

ओपिनियन न देना

– यदि आपका पार्टनर हमेशा आपकी हां में हां मिलाता है और अपनी बात नहीं रखता है, तो यह हेल्दी हैबिट नहीं है.

– एक ही बात पर दोनों का अपना ओपिनियन यानी राय रखना ज़रूरी है.

– हर बात पर दोनों का एक ही पक्ष होना अच्छी बात है, पर केवल एक की ही हुकूमत चलना रिश्ते में बढ़ती दूरियों का प्रतीक है.

– लेकिन हर बात में बहस करना भी ठीक नहीं है और केवल इसलिए कि आपकी बात सुनी जाए, बेवजह साथी की बात काटने की हैबिट से बचें.

फ्लर्ट करें

– आपका विवाह हुए कितना ही समय क्यों न हो गया हो, पार्टनर के साथ फ्लर्ट करें.

– उसे यह याद दिलाते रहें कि आपको वह अभी भी बहुत अट्रैक्टिव लगता है और उसमें अभी भी आकर्षण है.

– फ्लर्ट करने का अपना एक अलग ही एहसास होता है और फ्लर्टिंग से कुछ हेल्दी फ़ायदे भी होने लगें, तो इसका मज़ा दोगुना हो जाता है.

– मनोवैज्ञानिक रीमा सहगल का मानना है कि फ्लर्टिंग एक ऐसा टूल है, जिससे आप दूसरों को अपने बारे में अच्छा महसूस करवा सकते हैं.

– यही नहीं, फ्लर्टिंग से आपकी सेक्स लाइफ रिवाइव होती है.

– बेहतरीन रिलेशनशिप के लिए लिखी गई क़िताब के लेखक स्यू ऑस्टर कहते हैं, “फ्लर्टिंग से न स़िर्फ किसी इंसान को अच्छा महसूस होता है, बल्कि उसका स्ट्रेस भी कम होता है. ज़ाहिर है, आजकल की बिज़ी व तनावभरी ज़िंदगी में इस तरह की स्ट्रेस भगानेवाली चीज़ों की बेहद ज़रूरत है.”

– मैरिड कपल जब एक-दूसरे के साथ फ्लर्टिंग करते हैं, तो उनकी बोरिंग हो चुकी मैरिड लाइफ को ख़ुशगवार बनाने में मदद मिलती है.

साथ खाना बनाएं

– दांपत्य जीवन में पति-पत्नी एक ही गाड़ी के दो ऐसे पहिए होते हैं, जिसमें अगर एक भी नीरस हो, तो जीवन की मिठास कम होती जाती है.

– इसलिए अपनी व्यस्त ज़िंदगी में से कुछ लम्हे एक-दूसरे के लिए चुराएं.

– इसके लिए कभी-कभी किचन में पार्टनर के साथ मिलकर खाना बनाएं.

– खाना बनाते समय बीच-बीच में थोड़ी-सी शरारत करते रहें, जैसे- कभी अचानक साथी की गर्दन पर प्यारभरा किस करना या फिर कभी उन्हें अचानक पीछे से जाकर छू लेना.

– इसके बाद किचन में बहुत सारे प्यार के साथ जो कुछ भी पकेगा, उसे साथ बैठकर खाने का मज़ा ही कुछ और होगा.

कुछ रोमांचक करें

– किसी भी रिश्ते को लंबे समय तक बरक़रार रखने के लिए यह ज़रूरी है कि उसमें नीरसता न आने दी जाए.

– इसके लिए ज़रूरी है कि समय-समय पर रिश्तोें में रोमांच लाया जाए.

– कभी-कभी अचानक बाहर जाने का प्लान बनाएं.

– अचानक से आप ऑफिस से घर जल्दी पहुंचकर न स़िर्फ अपने साथी को चौंका सकते हैं, बल्कि बाहर घूमने की प्लानिंग कर पार्टनर को ख़ुश कर सकते हैं.

– बोरियत को दूर कर बातचीत को दिलचस्प बनाएं, जिससे आपका साथी आपकी बातों में रुचि ले व उत्साह से बातचीत में अपनी भागीदारी भी दिखाए.

– कोई रोमांटिक मूवी देखने की प्लानिंग करें.

– संबंधों को रोमांटिक बनाने के लिए कभी कैंडल लाइट डिनर भी कर सकते हैं.

पर्सनल हाइजीन का रखें ख़्याल

– रिश्ते को अगर बेहतर बनाना चाहते हैं, तो पर्सनल हाइजीन की हैबिट को अपनाना बहुत ज़रूरी है, ख़ासकर सेक्स संबंधों में.

– हो सकता है हाइजीन का ख़्याल न रखने की वजह से साथी आपके पास आने से कतराए या अपना प्यार ठीक से आपसे व्यक्त न कर पाए.

– सुमन बाजपेयी

वज़न घटाने के 25 ईज़ी टिप्स (How to Lose Weight Fast – Quick & Easy Weight Loss Tips)

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क्या आप डायटिंग करने में द़िक्क़त महसूस करते हैं? क्या कैलोरी का हिसाब रखना आपको पसंद नहीं? तो आप स़िर्फ यहां दिए गए टिप्स (Easy Weight Loss Tips) आज़माएं और देखें कैसे बिना अधिक मेहनत-मश़क्क़त के कई किलो वज़न आसानी से घटा सकते हैं.

1. पानी पीएं:
अगर आपको भूख लग रही है, तो पहले पानी पीजिए. इससे आपका पेट भरा हुआ लगेगा और आप कम खाएंगे.

2. किसी चीज़ से परहेज़ ना करें:
यदि आप ख़ुद से कहेंगे, “मुझे चॉकलेट को हाथ भी नहीं लगाना है!” तो आपके दिलो-दिमाग़ में चॉकलेट का ही ख़्याल आता रहेगा और आप ज़रूरत से भी ज़्यादा खा बैठेंगे. इससे बेहतर है कि एक छोटा-सा टुकड़ा खाकर अपने टेस्ट बड्स को शांत करें.

3. पैकेज्ड फूड का लेबल ज़रूर पढ़ें:
जब भी आप पैकेज्ड फूड ख़रीदें, तो पहले उसमें प्रयोग किए गए पदार्थों को लेबल में पढ़ लें और यह सुनिश्‍चित कर लें कि उनकी फैट और कार्बोहाइड्रेट्स आदि की मात्रा आपकी ज़रूरत के अनुसार हो.

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4. तल्लीनता के साथ भोजन करें:
भोजन हमेशा धीरे-धीरे चबाकर पूरी एकाग्रता के साथ करना चाहिए, जबकि बहुत से लोग टीवी देखते हुए खाना खाते हैं, जिससे उनका ध्यान भोजन पर नहीं रहता और बेख़्याली में वो ज़्यादा खा लेते हैं.

5. भूखे पेट न सोएं:
देर रात की भूख को शांत करने के लिए कुछ भी फैटी या ऑयली खाने की बजाय बादाम, अखरोट जैसे हाई प्रोटीन नट्स लें.

6. व्यायाम करें:
व्यायाम आपके शरीर के मेटाबॉलिक रेट को दुगुना कर सकता है. हफ़्ते में
कम-से-कम तीन दिन आधे घंटे तक व्यायाम करना आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकता है.

7. अधिक फैटयुक्त भोजन से परहेज़ करें:
बाहर का खाना या फास्टफूड देखकर ख़ुद को रोकना मुश्किल हो जाता है, पर याद रहे कि ये फैटयुक्त होते हैं, इसलिए आपको स्वयं पर नियंत्रण रखना होगा. खाने में अधिक व बैड फैट को पहचानें और उससे बचने की पूरी कोशिश करें.

8. ग्रीन टी का प्रयोग करें:
रोज़ाना ग्रीन टी के सेवन से आप हर रोज़ लगभग 40 प्रतिशत अधिक कैलोरी बर्न कर सकते हैं. तो फिर देर किस बात की, आज ही ग्रीन टी को अपने डेली रूटीन में शामिल करें.

9. फाइबर से भरपूर पदार्थ लें:
भोजन में मसूर, मटर, पत्तागोभी, ब्रोकोली, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, मशरूम, ब्राउन ब्रेड आदि को शामिल करें. यह चबाने तथा हज़म होने में अधिक समय लेते हैं, जिससे आपका पेट अधिक समय तक भरा हुआ महसूस होता है.

10. भोजन का समय सुनिश्‍चित रखें:
प्रतिदिन भोजन करने का समय सुनिश्‍चित कर लें. इससे आपके शरीर को उस निश्‍चित समय पर भोजन की आदत पड़ जाएगी और आप असमय कुछ भी खाने से बच जाएंगे.

11. खाने के नए नियम बनाएं:
खाने का अपना वर्तमान नियम नोट करें, जैसे कि चाय के साथ बिस्किट लेना, नाश्ते में परांठे खाना आदि और फिर उसमें हेल्दी बदलाव करें. आप चाहें, तो नाश्ते में दलिया, ओट्स, नट्स जैसी पोषक चीज़ों को शामिल कर सकते हैं.

12. एक्टिव बने रहें:
रोज़ाना थोड़ी देर टहलने या एक्सरसाइज़ करने से शरीर में एंडॉर्फिन्स नामक हार्मोंस विसर्जित होते हैं, जिससे आप अधिक शांत व प्रफुल्लित महसूस करते हैं और आप हेल्दी खाते हैं.

13. घर के कामों से बनें फिट:
घर के काम आपके शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखते हैं. इससे आप कई गुना कैलोरीज़ बर्न करते हैं, जो आपकी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित होती है.

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14. अच्छी नींद का आनंद लें:
थका हुआ शरीर अधिक ऊर्जा के लिए बार-बार भूख का सिग्नल देता है, जिससे आप ओवरईटिंग करने लगते हैं. यही वजह है कि रोज़ाना 6-8 घंटे की अच्छी नींद लेना ज़रूरी है.

15. अधिक टहलें:
दिन में स़िर्फ आधा घंटा अधिक तेज़ टहलने से आपकी 320 कैलोरीज़ तक बर्न हो सकती हैं.

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16. छोटी प्लेट में भोजन करें:
हमेशा भोजन के लिए छोटी प्लेट लें, क्योंकि बड़ी प्लेट में सामान्य मात्रा में लिया हुआ भोजन कम नज़र आता है, जबकि छोटी प्लेट में वही मात्रा पर्याप्त नज़र आती है.

17. लिफ्ट को नज़रअंदाज़ करें:
सप्ताह में पांच दिन केवल दो मिनट तक सीढ़ियां चढ़ना-उतरना भी एक अच्छा व्यायाम है. यह 30 मिनट तक टहलने जितना लाभदायक होता है, तो कभी-कभी लिफ्ट को ज़रूर नज़रअंदाज़ करें.

18. दोस्तों का ग्रुप बनाएं:
अपना वज़न घटाने, व्यायाम के विषय में चर्चा करने, डायट फॉलो करने आदि के लिए दोस्तों का एक ग्रुप बनाएं. ग्रुप मेंबर्स के रहने से इन चीज़ों को लेकर उत्सुकता बनी रहती है और एक-दूसरे को देखकर प्रोत्साहन भी मिलता है.

19. डायट जर्नल मेंटेन करें:
अपने पास एक डायट जर्नल रखें और उसमें अपनी प्रेरणा के लिए लिखकर रखें कि आप कैसा दिखना चाहते हैं, जैसे- मैं स्लिम-फिट बॉडी में सुंदर दिखना चाहता/चाहती हूं. यह एक शक्तिशाली रिमाइंडर की तरह मानसिक रूप से आप पर असर डालेगा कि आप क्यों वज़न कम करना चाहते हैं.

20. अपेक्षित साइज़ की ड्रेस ख़रीद लें:
आप जैसा दिखना चाहते हैं, उस साइज़ की जींस या ड्रेस ख़रीद लें. इससे आपको वज़न कम करने की प्रेरणा मिलेगी, परंतु अपने आप
पर अधिक दबाव डाले बिना संभावित परिणाम को ही अपना लक्ष्य बनाएं.

21. सब्ज़ियों को प्राथमिकता दें:
यदि आप अपना भोजन ख़ुद परोस रहे हैं, तो पूरे भोजन की मात्रा में चावल या रोटी की मात्रा कम लें और सलाद व उबली सब्ज़ियों की मात्रा अधिक लें. इस तरह आप एक बार के भोजन में लगभग 200 कैलोरीज़ बचा सकते हैं.

22. शांत रहें:
जब भी आप तनाव में होते हैं, तो आपका शरीर शिथिल पड़ जाता है, जिससे आपको बहुत भूख लगती है. तनाव में अक्सर लोग फैटी चीज़ें ज़्यादा खाते हैं, जबकि तनावरहित और शांत रहने से आपका मेटाबॉलिज़्म बेहतर रहता है.

23. जंक फूड से दूर रहें:
जंक फूड न केवल वसा से भरपूर होता है, बल्कि मस्तिष्क की उन कोशिकाओं को भी नष्ट कर देता है, जो वज़न पर नियंत्रण रखती हैं.

24. मन पर नियंत्रण रखें:
यदि आपके किचन में स्नैक्स  के हेल्दी ऑप्शन्स मौजूद हों, तो बाहर से ऑर्डर न करें. आप घर में ही लो-फैट माइक्रोवेव पॉपकार्न, चना-कुरमुरा और स्प्राउट्स खा सकते हैं.

25. कल्पना में भी स्वयं को छरहरा देखें:
आप अपने दिमाग़ में अपनी एक छरहरी आकृति बसा लें, जो या तो आपके अतीत की हो या फिर ऐसी हो, जिसमें आप ख़ुद को जैसा देखना चाहते हैं, वैसी हो. ऐसी कल्पना आपको वज़न कम करने के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हमेशा प्रेरित करेगी.

– अनिल निगम

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ब्यूटी विटामिन्स

विटामिन ए: एंटी एजिंग

हेल्दी स्किन और महत्वपूर्ण स्किन टिश्यू़ूज के रिपेयर और केयर के लिए विटामिन ए बहुत ज़रूरी है. इसकी कमी होने पर त्वचा ड्राई और पपड़ीदार हो जाती है. विटामिन ए को रेटिनॉइड्स नामक कंटेंट के तौर पर भी जाना जाता है. विटामिन ए से भरपूर डायट और रेटिनॉइड्स युक्त नाइट क्रीम व लोशन लगाकर हेल्दी त्वचा पाई जा सकती है.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: ब्रोकोली, ऐवोकैडो, शकरकंद, गाजर, पालक, तरबूज़ और खरबूजा आदि.

ब्यूटी बेनीफिट्स: रोज़ाना विटामिन ए युक्त क्रीम व लोशन लगाने से फाइन लाइन्स और रिंकल्स को कम किया जा सकता है.

– ये क्रीम्स व लोशन दाग़ धब्बों को मिटाकर स्किन को स्मूद बनाते हैं.

– रेटिनॉइड्स बेस्ड क्रीम में मौजूद तत्व दिन में भी सूर्य की तेज़ धूप से होनेवाले नुक़सान से त्वचा की रक्षा करते हैं.

– ये क्रीम्स त्वचा पर तेज़ी से अपना असर दिखाती हैं. इनका असर चार से आठ सप्ताह के अंदर त्वचा पर देखा जा सकता है.

कैसे करें अप्लाई: रोज़ाना रात को सोने से पहले चेहरे पर रेटिनॉइड कंटेंट मिश्रित क्रीम से मसाज करें.

– पहली बार अप्लाई करते समय त्वचा पर बहुत थोड़ी मात्रा में क्रीम लगाएं और क्रीम का रिएक्शन चेक करें.

– पहली बार क्रीम अप्लाई करने पर त्वचा पर रेडनेस हो सकती है या स्किन की लेयर निकल सकती है, लेकिन दूसरे दिन से क्रीम का असर दिखने लगेगा. धीरे-धीरे त्वचा स्मूद होने लगेगी.

विटामिन बी3: रेडनेस

नायसिनअमाइड नामक तत्व को विटामिन बी3 के रूप में जाना जाता है. विटामिन बी3 बेस्ड क्रीम्स, लोशन्स और सीरम्स में नायसिनअमाइड नामक कंटेंट होता है, जो त्वचा की रेडनेस को कम करने और मुंहासों को जल्दी ठीक करने में मदद करता है. विटामिन बी3 त्वचा में हाइड्रेशन के स्तर को बूस्ट करता है, साथ ही त्वचा में सैरेमाइड के प्रोडक्शन और फैटी एसिड की मात्रा में वृद्धि करने में मदद करता है.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: चिकन, टूना, सालमन, मूंगफली, ब्राउन राइस, एस्पेरागस, हरी मटर, जौ, मशरूम, खरबूजा, सनफ्लावर सीड आदि.

ब्यूटी बेनीफिट्स: विटामिन बी3 त्वचा के लिए रक्षात्मक कवच का काम करता है.

– ड्राई और सेंसिटिव स्किन के लिए विटामिन बी3 बहुत फ़ायदेमंद है.

– विटामिन बी3 युक्त क्रीम आदि लगाने से त्वचा में नेचुरल ग्लो आता है और स्किन सॉफ्ट होती है.

– रोज़ाना क्रीम व लोशन से मसाज करने पर त्वचा में कसाव आता है.

कैसे करें अप्लाई: रोज़ाना सुबह और शाम को विटामिन बी3 मिश्रित क्रीम या लोशन से 2 मिनट तक मसाज करें.

विटामिन सी: दाग़-धब्बे

विटामिन सी में स्किन ब्राइटनिंग प्रॉपटीऱ्ज होती हैं, जो दाग़-धब्बों को दूर करने में मदद करता है. यह विटामिन कोलैजन का निर्माण अधिक मात्रा में करता है, जो डैमेज्ड टिश्यूज़ को रिपेयर करने में मदद करता है. विटामिन सी युक्त मॉइश्‍चराइज़र, सीरम और ऑयल लगाने से दाग़-धब्बे दूर होते हैं.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: एवोकैडो, ब्रोकोली, टमाटर, ककड़ी, लाल शिमला मिर्च, मोसंबी, संतरा और स्ट्रॉबेरी.

ब्यूटी बेनीफिट्स: विटामिन सी एजिंग प्रोसेस को धीमा करता है, जिससे स्किन रिंकल फ्री रहती है.

– यह फाइन लाइन्स और ड्राईनेस को दूर करता है.

– विटामिन सी की हीलिंग प्रॉपर्टीज़ डैमेज स्किन को हील करती हैं.

– विटामिन सी टिश्यूज़ की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद करता है.

कैसे करें अप्लाई: त्वचा पर रोज़ सुबह विटामिन सी युक्त क्रीम से 2 मिनट तक मसाज करें.

– घर से बाहर निकलने से पहले विटामिन सी युक्तक्रीम लगाएं. फिर सनस्क्रीन लगाएं.

विटामिन ई: मॉइश्‍चराइज़ेशन

विटामिन ई फ्री रेडिकल्स (त्वचा को हानि पहुंचानेवाले कण) से त्वचा की रक्षा करता है, इसलिए इस विटामिन को त्वचा के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है. विटामिन सी की तरह विटामिन ई भी कोलैजन का अधिक मात्रा में उत्पादन करता है, जो स्किन एजिंग के प्रोसेस को धीमा करता है.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: बादाम, अंडे, सूखे मेवे, हरी सब्ज़ियां, साबूत अनाज, शकरकंद, शलजम, पपीता आदि.

ब्यूटी बेनीफिट्स: नियमित रूप से विटामिन ई युक्तऑयल या लोशन लगाने से झुर्रियों को कम किया जा सकता है.

– विटामिन ई मिश्रित ऑयल लगाने से त्वचा की रेडनेस दूर होती है.

– इस विटामिन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को प्रदूषण और अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से होनेवाले नुक़सान से बचाते हैं.

– विटामिन ई युक्त ऑयल या सीरम ड्राई स्किन को न केवल नमी प्रदान करता है, बल्कि सॉफ्ट और स्मूद भी बनाता है.

– नियमित रूप से विटामिन ई युक्त क्रीम व ऑयल लगाने से स्ट्रेच मार्क्स और दाग़-धब्बे भी दूर होते हैं.

– विटामिन ई बेस्ड क्रीम त्वचा में होनेवाली जलन को कम करने में मदद करती है.

कैसे करें अप्लाई: ड्राई स्किन को मॉइश्‍चराइज़ करने के लिए रोज़ाना नाइट क्रीम से मसाज करें.

– देवांश शर्मा