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हाई ब्लड प्रेशर से छुटकारा पाने के 5 घरेलू उपाय (5 Best Home Remedies For High Blood Pressure)

हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) से छुटकारा पाने के 5 घरेलू उपाय (Home Remedies) आपको नैचुरल तरीके से हाई ब्लड प्रेशर से छुटकारा दिलाएंगे. हमारे देश में हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों की संख्या लाखों में है और दिन प्रति दिन ये आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं. विभिन्न शोधों से ये बात साबित हो चुकी है कि बदलती जीवन शैली, हाइपरटेंशन, मोटापा, तनाव, आनुवांशिकता आदि कारणों से दिल की बीमारी होती है. ऐसे में डायट पर कंट्रोल रखकर और अपने दिल को बीमारियों से दूर रखकर आप स्वस्थ जीवन जी सकते हैं.

Home Remedies For High Blood Pressure

 

हाई ब्लड प्रेशर से छुटकारा पाने के लिए क्या खाएं?

1) अगर आप दिल की बीमारी से बचना चाहते हैं, तो रोजाना ताज़े फल और सब्ज़ियां खाएं. इनसे आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति होती है और शरीर स्वस्थ रहता है.
2) विटामिन सी, केरोटेनॉइड्स और एंटी ऑक्सिडेंट युक्त फूड, जैसे- गाजर, गोभी आदि दिल की बीमारी से शरीर की रक्षा करते हैं इसलिए इनका नियमित सेवन करें.
3) मछली, सोया प्रोटीन, ओट्स व अन्य हाई फाइबर युक्त फूड आर्ट अटैक जैसी समस्याओं से निपटने में सक्षम हैं इसलिए इनका सेवन करें.
4) दिल की बीमारी से बचने के लिए मल्टीग्रेन ब्रेड, अनाज, सूखे मेवे आदि भी असरदार होते हैं इसलिए इनका सेवन ज़रूर करें.

 

हाई ब्लड प्रेशर से छुटकारा पाने के 5 आसान घरेलू उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

 

हाई ब्लड प्रेशर से बचने के लिए क्या न खाएं?

1) अपने दिल को सुरक्षित रखने के लिए रेड मीट, चिकन स्किन, मलाई युक्त डेयरी प्रॉडक्ट्स, नारियल तेल आदि के सेवन से दूर रहें.
2) ट्रांसफैट और सैच्युरेटेड फैट युक्त आहार से भी परहेज़ करें.
3) ज़रूरत से ज़्यादा शराब का सेवन न करें.
4) किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन न करें.
5) ज़्यादा नमक के सेवन से बचें.

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हार्ट प्रॉब्लम्स से बचने के आसान और असरदार घरेलू उपाय:

1) यदि छाती के बाईं ओर दर्द उठता है, सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है और पसीना आता है, तो दूध में लहसुन पकाकर पीएं. कुछ दिन लगातार ऐसा करने से दर्द से राहत मिलेगी.
2) सुबह-शाम लौकी का सूप पीएं या उसकी सब्ज़ी खाएं. लगातार ऐसा करने से एक महीने में ही लाभ होने लगता है. आप चाहें तो लौकी उबालकर उसमें नमक, धनिया, जीरा, हल्दी व हरा धनिया डालकर भी पका सकते हैं. इससे स्वाद भी मिलेगा और सहेत भी बनी रहेगी.
3) ह्रदय में दर्द होने या दौरा पड़ने पर दो टीस्पून शुद्ध घी में दो ग्राम बेल का रस मिलाकर पीएं. इससे तुरंत आराम मिलेगा.
4) 100 मि.ली ग्राम अदरक के रस में थोड़ा-सा शहद मिलाकर चाटने से भी दिल के दर्द से राहत मिलती है.
5) अनार के 10 मि.ली रस में 10 ग्राम मिश्री डालकर रोज़ाना सुबह पीने से दिल की जकड़न और दर्द दूर हो जाता है.
6) एक तोला अनार के ताज़े पत्ते को 10 तोला पानी में पीस लें. इसे छानकर पी लें. इससे ह्रदय मज़बूत बनता है और हृदय की धड़कन सामान्य हो जाती है.
7) हार्ट पेशंट यदि रोज़ एक ग्लास छाछ पीएं, तो ब्लडवेसल्स पर जमा हुआ फैट आसानी से कम हो जाता है, जिससे तेज़ धड़कन और घबराहट की समस्या दूर हो जाती है.

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जानिए कितना जवां है आपका दिल? (How young is your heart?)

हमारा दिल (Heart) एक दिन में 1,15, 000 बार धड़कता है. इसलिए अपने दिल का अच्छे तरी़के से ख़्याल रखना और उसे स्वस्थ (Healthy) रखना बहुत ज़रूरी है.हम सभी वज़न नियंत्रित करने और मोटापा घटाने के बारे में बात करते रहते हैं, लेकिन क्या हमें स्वस्थ, जंवा और चुस्त रखने के लिए स़िर्फ इतना पर्याप्त है?

आजकल की तनावयुक्त व्यस्त जीवनशैली लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है. यही वजह है कि जहां पहले के समय में हृदय संबंधी समस्याएं उम्रदराज़ लोगों को हुआ करती थीं, वहीं अब ये युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही हैं. हालांकि तनाव को ख़त्म करना हमारे लिए बहुत मुश्क़िल है, लेकिन हम सक्रिय जीवनशैली अपनाने और सेहतमंद भोजन ग्रहण करने की कोशिश कर सकते हैं. हृदय के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी है, क्योंकि यह हमें जिंदा रखने के लिए बहुत मेहनत करता है.

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फैट है ज़रूरी
फैट यानी वसा हमारे भोजन का अहम् हिस्सा है. यह हमारे खाने को स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ हमें संतुष्टि प्रदान करने में भी प्रमुख भूमिका निभाता है. इसलिए यह ज़रूरी है कि स्वस्थ रहने के लिए गुड फैट और बैड फैट के अंतर को सही तरी़के से समझा जाए. द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने सेहतमंद रहने के लिए खान-पान में बैड (सैचुरेटेड) फैट को गुड (अनसैचुरेटेड) फैट से रिप्लेस करने की सलाह दी है. अच्छी सेहत के लिए हमें मोनोसैचुरेटेड या पॉलीसैचुरेटेड फैट ग्रहण करना चाहिए. अतः सैचुरेटेड या ट्रान्सफैट की जगह पर मोनोसैचुरेटेड व पॉलीसैचुरेटेड युक्त खाद्य पदार्थ ग्रहण करें. पॉलीसैचुरेटेड फैट रक्त में बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है, जिसके कारण दिल संबंधी बीमारियां और स्ट्रोक का ख़तरा कम होता है. इसके अलावा ये बॉडी सेल्स बनने व विकसित होने के लिए पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं. खाने के लिए ऐसे तेल का प्रयोग करें, जिसमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम हो. इसके लिए आप कॉर्न, ग्रैपसीड, ऑलिव, मूंगफली, तिल, सोयाबीन या सनफ्लावर ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं.

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मछली है फ़ायदेमंद
मछली प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है. दूसरे मीट प्रॉडक्ट्स की तुलना में इसमें सैचुरेटेड फैट की मात्रा बहुत कम होती है. मछली ओमेगा3 फैटी एसिड का भी बढ़िया स्रोत है. ईपीए और डीएचए जैसे ओमेगा3 फैटी एसिड्स हमारे शरीर के लिए बेहद ज़रूरी हैं, क्योंकि हमारे शरीर में इनका निर्माण नहीं होता, इसलिए इसे खाने के माध्यम से ग्रहण करना ज़रूरी होता है. मार्केल, ट्यूना जैसी मछलियां ओमेगा3 फैटी एसिड की बेहतरीन स्रोत हैं. इसके शाकाहारी स्रोत अलसी, अखरोट और सोयाबीन हैं. ओमेगा3 फैटी एसिड शरीर में सूजन को कम करता है. आपको बता दें कि सूजन यानी इन्फ्लैमेशन के कारण रक्तधमनियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिसके कारण हृदय रोग व स्ट्रोक का ख़तरा बढ़ जाता है. इसके अलावा ये हार्टबीट्स में उतार-चढ़ाव का ख़तरा भी कम करता है और हृदय को सुरक्षित रखता है.
हाल ही में 1,575 वयस्क लोगों पर हुए एक अध्ययन से इस बात की पुष्टि हुई है कि ओमेगा3 फैटी एसिड्स मस्तिष्क के सही तरी़के से काम करने के लिए भी ज़रूरी हैं. अध्ययन के अनुसार, बच्चों के मस्तिष्क के सही विकास के लिए ईपीए और डीएचए आवश्यक है. अध्ययन से इस बात की पुष्टि हुई है कि ओमेगा3 फैटी एसिड्स एकाग्रता बढ़ाने और कठिन कार्य करने की क्षमता बढ़ाने में भी मदद करते हैं. विभिन्न अध्ययनों के आधार पर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च सेंटर हृदय संबंधी बीमारियों से बचने के लिए रोज़ाना 250 एमजी ईपीए और डीएचए ग्रहण करने की सलाह देता है. खान-पान के माध्यम से ओमेगा3 फैटी एसिड ग्रहण करना ज़्यादा बेहतर माना जाता है. हालांकि कोरोनरी हार्ट डिज़ीज़ से पीड़ित लोग स़िर्फ डायट के माध्यम से पर्याप्त ओमेगा3 प्राप्त नहीं कर सकते. ऐसे लोग डॉक्टर की सलाह लेकर सप्लीमेंट ग्रहण कर सकते हैं. इसलिए यह ज़रूरी है कि कोई भी खाद्य पदार्थ ग्रहण करते समय सर्विंग साइज़ के हिसाब से न्यूट्रिशन लेवल जांचें और यह भी देखें कि उसमें सैचुरेटेड फैटी एसिड्स और अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स की मात्रा कितनी है.

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हृदय संबंधी समस्याओं से कैसे बचें?
इसके लिए कम उम्र से ही सेहत का ध्यान रखना ज़रूरी है. कम उम्र में दिल संबंधी बीमारियां होने का प्रमुख कारण तंबाकू का सेवन है, जिसे रोकना बहुत ज़रूरी है. इसके अलावा शारीरिक रूप से सक्रिय रहना आवश्यक है. नॉमर्ल वेट और बीएमआई मेंटेन करना सबसे अहम् है.

खान-पान और जीवनशैली में किस तरह के बदलाव ज़रूरी?
सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैक्ड जूस इत्यादि का सेवन कम से कम करें. हफ़्ते में 1 या 2 से अधिक बार फास्ट फूड या प्रोसेस्ड फूड का सेवन न करें. खाने में फल और हरी सब्ज़ियों की मात्रा बढ़ाने से बहुत फ़ायदा मिलता है. प्रतिदिन मुट्ठीभर नट्स का सेवन करने से कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ बेहतर होता है, क्योंकि नट्स दिल को सेहतमंद रखने के लिए ज़रूरी मिनरल्स और फैटी एसिड्स प्रदान करते हैं. मानसिक तनाव कम करना भी बहुत ज़रूरी है. इसके लिए योग, एक्सरसाइज़ और अन्य मेंटल रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं.

कम उम्र में हार्ट अटैक 
कम उम्र में हार्ट अटैक एक मल्टीनैशनल कंपनी द्वारा किए गए अध्ययन से उपलब्ध डेटा के अनुसार, पश्‍चिमी देशों की तुलना में साउथ एशिया में रहनेवाले लोगों को 10 साल पहले हार्ट अटैक आता है. भारत में कम उम्र में हार्ट अटैक के लिए जेनेटिक फैक्टर्स भी ज़िम्मेदार हैं. असक्रिय जीवनशैली,  तनावपूर्ण काम, धूम्रपान, शक्कर युक्त खाद्य पदार्थ व फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन इसके अन्य प्रमुख कारण हैं.

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