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पति-पत्नी के रिश्ते में भी ज़रूरी है शिष्टाचार (Etiquette Tips For Happily Married Couples)

मुहब्बत की शबनम का बस एक क़तरा था और प्यास बड़ी… अब चाहत का पूरा समंदर है सामने पर प्यास नहीं… प्यार और विश्‍वास के रिश्ते जितने गहरे होते हैं, उतने ही नाज़ुक भी! ये मुहब्बत, ये रिश्ते और ये चाहतें बनी रहें, इसके लिए ज़रूरी है आपसी सम्मान और संवाद में शालीनता, सहजता और शिष्टता. बेतकल्लुफ़ी को हम भले ही क़रीब होने का इशारा समझें, लेकिन सच तो यह है कि पति-पत्नी के रिश्ते में भी शिष्टाचार ज़रूरी है, वरना रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है.

Etiquette Tips For Couples

सुनने में ये अजीब लगता है कि भला पति-पत्नी के बीच ये शिष्टाचार या मैनर्स जैसी औपचारिकताएं क्यों? लेकिन अगर हम अपने आस-पास नज़र दौड़ाएं, तो यही पाएंगे कि बहुत-से छोटे-मोटे झगड़े, बहुत-सी उलझनें और आपसी मन-मुटाव इसी वजह से होते हैं, क्योंकि हम आपस में अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल करने लगते हैं या फिर इतने बेतकल्लुफ़ हो जाते हैं कि एक-दूसरें को अनजाने में ही अपमानित करने लगते हैं. ऐसे में कुछ बातों का ख़्याल रखा जाए, तो न स़िर्फ आपका रिश्ता गहरा होगा, बल्कि एक-दूसरे के लिए सम्मान और प्यार भी बढ़ेगा.

– एक-दूसरे की बातों पर ध्यान न देना और अक्सर उन्हें ही अनसुना कर देना बैड मैनर माना जाता है. इससे यह संदेश जाता है कि अपने पार्टनर की बातें या उसके विचार आपके लिए ज़्यादा मायने नहीं रखते. इससे बचें.

– हर बात में टोकना भी धीरे-धीरे रिश्तों में तनाव उत्पन्न कर सकता है. अगर आप पार्टनर की किसी बात से असहमत हैं, तो प्यार से भी उसे दर्शाया जा सकता है.

– आपसी बातचीत में शब्दों का चयन भी बहुत मायने रखता है. सॉरी, थैंक्यू और प्लीज़ जैसे मैजिक वर्ड्स का इस्तेमाल न स़िर्फ गुड मैनर्स को दर्शाता है, बल्कि रिश्ते को मज़बूत भी बनाता है.

– अगर घर पर कोई मेहमान या रिश्तेदार हों,  तो उनके सामने आपसी व्यवहार में सहजता और प्यार झलकना चाहिए.

– एक-दूसरे की मदद करना बेहद ज़रूरी है. आपसी काम में जितना संभव हो, एक-दूसरे की मदद करें और अगर पार्टनर का काम कम नहीं कर सकते, तो उसे बढ़ाने की ग़लती तो बिल्कुल न करें.

– ताने देने से बचेें. मज़ाक करना अलग बात है, लेकिन मज़ाक उड़ाने और ताने देने से रिश्ते प्रभावित होते हैं, क्योंकि इससे आत्मसम्मान को ठेस पहुंच सकती है.

– एक-दूसरे के परिवार को लेकर कोई भी ग़लत बात न करें या छींटाकशी न करें. उनका सम्मान करना सीखें, तभी आप दोनों के बीच भी सम्मान बना रहेगा.

– ग़ुस्से में बात करने से बचें. जब भी आप ग़ुस्से में हों, तो कोशिश करें कि पहले ग़ुस्सा शांत हो जाए, फिर –

– जितना हो सके बहस से बचें, लेकिन अगर बहस हो ही जाए तो अशिष्ट या असभ्य भाषा का प्रयोग न करें. न ही रिश्ते ख़त्म करने की धमकी दें. ग़ुस्से में इस्तेमाल किए गए अपशब्दों का असर भावी जीवन पर पड़ सकता है. इससे यह संदेश जाएगा कि कहीं न कहीं मन में यह विचार दबे हैं, जो बाहर आ गए.

– बदले की भावना मन में न रखें. पिछली बातों  का या पहले हुए किसी अपमान का बदला लेने की भावना मन में न पालें. यह भी अशिष्ट व असभ्य व्यवहार में आता है. जहां प्यार और सम्मान होगा, वहां बदले की भावना होनी ही नहीं चाहिए.

– अक्सर शादी के बाद पार्टनर्स टेबल मैनर्स ज़्यादा फॉलो नहीं करते, लेकिन यह भी मैनरिज़्म का हिस्सा है.

– खाते समय आवाज़ न करें. धीरे-धीरे चबा-चबाकर खाएं और मुंह बंद कर के खाएं.

– खाते वक़्त गंभीर या विवादास्पद मुद्दे पर बात करने से बचें.

– लाइट और अच्छे मूड में खाना खाएं. फ़ोन या पेपर पढ़ते हुए खाना न खाएं.

– फ़ोन मैनर्स का भी ख़्याल रखें. बेवजह एक-दूसरे के मैसेज या मेल्स चेक न करें.

– फ़ोन पर ज़ोर-ज़ोर से बातें न करें.

– अगर पार्टनर के नाम पर कोई लेटर, कुरियर, पार्सल या गिफ़्ट आया है, तो उसे ख़ुद खोलना  ग़लत है. आप अपने पार्टनर के आने का इंतज़ार करें. बिना बताए किसी का पैकट खोलना  शिष्टाचार में नहीं आता.

– समय की पाबंदी भी गुड मैनर्स में आती है. पार्टनर्स आपस में एक-दूसरे को इंतज़ार करवाते वक़्त यह नहीं सोचते कि इसका क्या असर पड़ेगा. लेकिन हर किसी के समय और इंतज़ार की क़ीमत होती है, यह समझना ज़रूरी है.

– स्पेस ज़रूर दें. किसी भी रिश्ते में स्पेस बहुत ज़रूरी है और यह भी मैनर्स का ही हिस्सा है.

– आपस में शेयरिंग और केयरिंग की भावना भी ज़रूरी है. एक-दूसरे को सपोर्ट करें, आपस में कंपीट न करें. कई कपल्स ये भूल जाते हैं कि वो सहभागी और साथी हैं, न कि प्रतियोगी या प्रतिद्वंद्वी. ऐसे में एक-दूसरे की तरक़्क़ी पर वे ख़ुश होने की बजाय ईर्ष्या की भावना मन में पैदा कर लेते हैं.

– किसी एक की क़ामयाबी दूसरे की भी सफलता है, उसे बधाई दें और सेलिब‘ेट करें.

– एक-दूसरे की तारीफ़ ज़रूर करें और समय-समय पर सरप्राइज़ेस भी दें.

– गीता शर्मा

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कितने दानी हैं आप? (The Benefits Of Charity)

कर्ण, राजा हरिश्‍चंद्र, दधीचि… भारत में ऐसे कई दानी हुए जिन्होंने दुनिया के सामने दान की मिसाल कायम की. हमारे देश में आज भी कई अवसरों पर दान देने की प्रथा है. लेकिन हम क्या सही मायने में दान करते हैं?

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बच्चे का जन्मदिन, शादी-ब्याह, प्रमोशन, माता-पिता की बरसी, पित्र पक्ष… दान करने के हमारे पास कई मौके होते हैं. कई बार तो हम बिना वजह भी दान करते हैं, लेकिन हर बार क्या हमें दान करने की ख़ुशी और संतुष्टि मिल पाती है? नहीं, क्योंकि हर बार हम निस्वार्थ भाव से दान नहीं करते. ज़्यादातर मौक़ों पर हम अपनी ख़ुशी के लिए नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ और झूठी शान बघारने के लिए दान करते हैं. ऐसे दान से हमें वाहवाही भले ही मिल जाए, लेकिन आत्मिक संतुष्टि नहीं मिलती.

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क्या है दान का सही अर्थ?
यूं ही नहीं कहा जाता कि एक हाथ से दान करो, तो दूसरे हाथ को पता नहीं चलना चाहिए यानी निस्वार्थ भाव से बिना किसी प्रदर्शन के किया गया दान ही सही मायने में दान कहलाता है. उदाहरण के लिए- यदि कोई गरीब बच्चा पढ़ाई में बहुत तेज़ है, लेकिन पैसे के अभाव में वो आगे पढ़ाई नहीं कर पा रहा है. ऐसी स्थिति में यदि आप चुपचाप उसकी मदद करते हैं, तो आपका ये दान उस बच्चे का भविष्य तो संवारेगा ही, साथ ही आपको भी बहुत संतुष्टि देगा. इसी तरह शारीरिक रूप से असक्षम, बुज़ुर्ग, अनाथ-असहाय, ज़रूरतमंद आदि लोगों के लिए किया गया कोई भी काम दान की श्रेणी में आता है और सही मायने में दान कहलाता है.

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इस दान का कोई महत्व नहीं
यदि आप किसी दबाव या दिखावे के लिए दान करते हैं, तो आपके दान का कोई मतलब नहीं. जैसे-
* ईश्‍वर के डर से किया गया दान.
* खोखली मान्यताओं के नाम पर किया गया दान.
* झूठी शान बघारने के लिए.
* मनोकामना पूरी होने के लालच में.
* दौलत का प्रदर्शन करने के लिए.

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क्यों ज़रूरी है दान करना?
दान करने के कई फ़ायदे हैं. दान करने से हम न स़िर्फ दूसरों का भला करते हैं, बल्कि अपने व्यक्तित्व को भी निखारते हैं. दान करने से हम उदार बनते हैं, सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं, मन और विचारों की शुद्धि होती है, मोह और लालच कम होता है… दान के सच्चे सुख को अनुभव करने के लिए बिना किसी स्वार्थ या लालसा के दान करके देखिए. यकीन मानिए, किसी के लिए कुछ करने की ख़ुशी से बढ़कर कोई सुख नहीं.

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सेक्स प्रॉब्लम्स- उनकी बॉडी अब मुझे आकर्षित नहीं करती (Sex Problems- I Am No Longer Attracted To Him)

Sex Problems
Sex Problems

उनकी बॉडी अब मुझे आकर्षित नहीं करती

मुझे लगता है सेक्सुअल डिज़ायर को लेकर मैं एक सामान्य लड़की हूं, लेकिन पिछले दो सालों से मैं अपने पति के प्रति आकर्षण महसूस नहीं कर रही. जबकि वो अच्छे इंसान हैं, लेकिन उनकी बॉडी अब मुझे आकर्षित नहीं करती. क्या यह समस्या दवाओं से ठीक हो सकती है या मुझे काउंसलर की मदद लेनी होगी?

– ईला पारिख, भुज.

आपकी समस्या मैं समझ सकता हूं. बहुत-से लोगों में पार्टनर के प्रति शारीरिक आकर्षण का महत्व इतना नहीं होता, बल्कि आपसी प्यार व सामंजस्य अधिक ज़रूरी होता है और उनका रिश्ता काफ़ी अच्छा भी होता है, क्योंकि रिश्ते की नींव में तो प्यार, केयर व अपनेपन जैसी भावनाएं ही महत्वपूर्ण होती हैं. आपकी समस्या का समाधान काउंसलर के पास ज़रूर होगा, जिससे आप अपनी ज़िंदगी फिर से एंजॉय कर पाएंगी.
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मेरे पति के बड़े भाई मुझसे कई बार सेक्स की ख़्वाहिश ज़ाहिर कर चुके हैं

मैं असमंजस में हूं, क्योंकि मेरे पति के बड़े भाई मुझसे कई बार सेक्स की ख़्वाहिश ज़ाहिर कर चुके हैं. मेरे पति बार-बार टूर या देश से बाहर जाते रहते हैं. मैं उन्हें उस समय काफ़ी मिस करती हूं और सेक्स की चाह होने पर भी अब तक मैंने अपने जेठजी को ख़ुद से दूर ही रखा है. क्या यह सही होगा अगर मैं अपने जेठजी के साथ सेक्स करूं? क्या इससे मेरी शादी व सेक्स लाइफ पर असर पड़ेगा?
– उमा दुबे, गोरखपुर.
बेहतर होगा कि आप अपनी समस्या अपने पति के साथ या काउंसलर से डिसकस करें, ताकि अपनी शादी में आप कुछ बेहतर व हेल्दी सोच सकें. ज़ाहिर है आपके जेठ के अप्रोच पर आप असमंजस में पड़ जाती हैं, क्योंकि शायद आप भी कहीं न कहीं अपनी लालसा को रोक नहीं पा रहीं, लेकिन यह कंफ्यूज़न सही नहीं है. पति के बड़े भाई से ऐसा रिश्ता आपकी शादी को नुक़सान पहुंचाएगा, इसलिए सतर्क रहें.
सेक्स संबंधित अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करेंSex Problems Q&A

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डॉ. राजीव आनंद
सेक्सोलॉजिस्ट
([email protected])

 

नेकदिल अक्षय: कराएंगे अपनी पहली फिल्म के प्रोड्यूसर का इलाज (Akshay Kumar has offered help to the ailing producer of his first film)

cover-_1476880081अक्षय कुमार एक ऐसे अभिनेता हैं, जो अपनी दरियादिली के लिए जाने जाते हैं. इस बार अक्षय ने फिर नेक काम किया है. अक्की ने अपनी पहली फिल्म के निर्माता रवि श्रीवास्तव की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है. रवि श्रीवास्तव आर्थिक तंगी से गुज़र रहे हैं और बेहद बीमार हैं. वो किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं और उन्हें ट्रांसप्लांट की ज़रूरत है. जब अक्षय को ये बात पता चली, तो उन्होंने फ़ौरन मदद करने की सोची. साल 1991 में अक्षय ने द्वारपाल फिल्म साइन की थी, जिसके निर्देशक रवि श्रीवास्तव थे. यह फिल्म किन्हीं कारणों से बन नहीं पाई थी. जिसके बाद अक्षय ने सौगंध फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसे दिलाने में रवि ने ही उनकी मदद की थी. टि्वटर पर बीमार निर्माता से जुड़े एक लेख को शेयर करने वाले एक फॉलोअर के जवाब में अक्षय ने लिखा है, ‘हां सर, मेरी टीम ने उनसे संपर्क किया है, उनका ध्यान रखा गया है.’