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रेखा-कंगना की ज़बर्दस्त जुगलबंदी… (Rekha-Kangana Have Major Dance Off At The Award Function)

रेखा (Rekha) ऐसी अदाकारा हैं, जिन्हें अधिकतर अभिनेत्रियां अपना आदर्श मानती हैं. कंगना (Kangana) भी उनमें से एक हैं. दरअसल, रेखाजी में एक ख़ास आकर्षण भी है, जिस कारण वे जहां कहीं भी जाती हैं छा जाती हैं. कुछ ऐसा ही हुआ जब वे कंगना के साथ एक अवॉर्ड फंक्शन में जमकर नाचीं. सभी दोनों की जुगलबंदी को देख दंग रह गए.

Rekha and Kangana

 

 

समारोह की ख़ास बात रही रेखाजी द्वारा दी गई कांजीवरम साड़ी को पहनकर कंगना का फंक्शन में शामिल होना. रेखाजी ने साल 2015 में क्वीन फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड देने के लिए कंगना के घर पर गई थीं. उस समय उन्होंने कंगना को साड़ी भी तोह़फे में दी थी. संयोग की बात है कि दोनों ही कलाकारों ने कांजीवरम साड़ी पहनी थी और बेहद ख़ूबसूरत लग रही थीं.

कंगना को अवॉर्ड देने जब रेखा स्टेज पर आईं, तो उन्होंने कंगना के कहने पर उन्हें कई डांस स्टेप्स भी सिखाएं, ख़ासतौर पर उमराव जान का गाना इन आंखों की मस्ती के… और मि. नटरवलाल का परदेसिया… साथ ही रेखा-कंगना मराठी गानों पर भी बिंदास होकर ख़ूब नाचीं. इन दोनों की जुगलबंदी सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हो रही है.

इस मराठी ज़ी टॉकीज़ अवॉर्ड फंक्शन में कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं. रेखा, कंगना रनौत के अलावा आशा पारेख, जया प्रदा, सरोज ख़ान, सारा अली ख़ान आदि ने भी शिरकत की. आइए, देखें तस्वीरें.

Rekha and Kangana

Rekha with Kangana

 

Rekha and Kangana

 

Rekha and Kangana

Rekha and Kangana

Rekha

Rekha with Kangana

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भावभीनी श्रद्धांजलि: कादर ख़ान नहीं रहे… (Veteran Film Star Kadar Khan Leaves Behind A Versatile Legacy…)

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता बहुमुखी प्रतिभा के धनी कादर ख़ान (Kadar Khan) हमारे बीच नहीं रहे. वे एक नेकदिल इंसान के साथ-साथ एक सच्चे हमदर्द व दोस्त थे. अपने हो या पराए सभी के साथ उनका अपनापन उन्हें बेहद ख़ास बना देता था. हम सभी उन्हें उनकी लाजवाब अभिनय, फिर चाहे वो चरित्र अभिनेता, खलनायक, कॉमेडी ही क्यों न हो के लिए हमेशा याद करते रहेंगे.

Kadar Khan

अभिनय के साथ-साथ उनकी कथा, पटकथा, संवाद की लेखनी भी दमदार थी. उन्होंने मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा के साथ मिलकर कई सुपरहिट फिल्मों की स्क्रिप्ट भी लिखी है. इसमें धर्म वीर, अमर अकबर एंथनी, देश प्रेमी, सुहाग, कुली, गंगा जमुना सरस्वती, मुकद्दर का सिकंदर, लावारिस, कुली नंबर वन, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, कर्मा आदि ख़ास हैं. उन्होंने क़रीब ढाई सौ फिल्मों के संवाद लिखे और तीन सौ से भी अधिक फिल्मों में काम किया.

उनकी कॉमेडी तो इतनी उम्दा थी कि जब भी वे पर्दे पर आते थे दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी. यूं तो उन्होंने अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख ख़ान तक सभी कलाकारों के साथ काम किया, पर गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही. दोनों के कॉमेडी के पंच और सीन्स आज भी लोगों को ख़ूब हंसाते-गुदगुदाते हैं.

आज कादर ख़ान भले ही हमसे दूर चले गए हों, पर उनके संवाद व सशक्त अभिनय हमारे दिलों में सदा ज़िंदा रहेंगे.

ज़िंदगी के सफ़र पर एक नज़र…

* कादर ख़ान का जन्म काबुल में 22 अक्टूबर 1937 को हुआ था.

* उन्होंने अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत दाग़ फिल्म से की थी.

* फिल्म में अभिनय करने से पहले उन्होंने फिल्म जवानी दीवानी के संवाद लिखे थे.

* मेरी आवाज़ सुनो और अंगार फिल्मों के लिए उन्हें बेस्ट डायलॉग के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.

* हिंदी सिनेमा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें साहित्य शिरोमणि पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.

* वे मुंबई के इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर भी रहे थे.

* शक्ति कपूर के साथ उनकी यादगार जोड़ी रही थी. दोनों ने सौ से भी अधिक फिल्मों में साथ काम किया.

* उनकी आख़िरी फिल्म दिमाग़ का दही थी, जो साल 2015 में आई थी.

* अभिनय से रिटायरमेंट लेने के बाद वे मुंबई से कनाडा अपने बेटे सरफराज़ के यहां चले गए.

* 81 वर्षीय कादर ख़ान के अंतिम समय में उनकी पत्नी हिज्रा, उनके बेटे, बहू, नातियां उनके साथ थीं.

* उनके बेटे के अनुसार, कनाडा में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

* फिल्म इंडस्ट्री व अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, स्मृति ईरानी, असरानी, परेश रावल, अनिल कपूर, अक्षय कुमार, अर्जुन कपूर, वरुण धवन, मधुर भंडराकर के साथ-साथ अन्य लोगों ने अपनी भावनाएं व्यक्त की.

* अमिताभ बच्चन ने भावुक होते हुए कहा कि कादर ख़ान बहुमुखी प्रतिभा के धनी व समर्पित कलाकार थे. उनकी लेखनी भी ग़ज़ब की थी. मेरे अधिकतर सफल फिल्में, जैसे- मुकद्दर का सिकंदर, कुली, हम, शहंशाह, मि. नटरवरलाल, सुहाग, अदालत सहित तक़रीबन 21 फिल्मों में अभिनेता, संवाद, पटकथा लेखक के रूप में उन्होंने काम किया था.

* ज़िंदगी का सफ़र हमें कहां से कहां ले जाता है, कई बार इसे हम भी नहीं समझ पाते. तभी तो कादर ख़ान अफगानिस्तान के काबुल में जन्मे, भारत में मुंबई में अपनी अदाकारी-लेखनी का लोहा मनवाया, अंतिम पड़ाव पर परिवार के साथ कनाडा में बिताए.

मेरी सहेली परिवार की ओर से भानभीनी श्रद्धांजलि!

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू: सनी के दम पर भैयाजी सुपरहिट (Movie Revie: Bhaiaji Superhit- Sunny Deol Surprises With A Goofy Flick)

Bhaiaji Superhit Review

इन दिनों सनी देओल की कई सालों से अटकी फिल्में सिलसिलेवार आ रही हैं. पिछले हफ़्ते मौहल्ला अस्सी आई, जो काफ़ी समय से बन रही थी. अब आज भैयाजी सुपरहिट सिनेमा के पर्दे पर आ पाई है. दोनों ही फिल्मों में अभिनय के मामले में सनी देओल ने काबिल-ए-तारीफ़ अभिनय किया है.

भैयाजी अपनी पत्नी सपना के छोड़कर चले जाने से परेशान हैं. वे किसी भी क़ीमत पर अपनी पत्नी को वापस लाना चाहते हैं. इसके लिए फिल्मों में काम करने के लिए मुंबई आना, अभिनय करना, कुछ पुराने दुश्मनों से भिड़ना आदि चलता रहता है. इसमें निर्देशक व लेखक के रूप में अरशद-श्रेयस की जुगलबंदी देखते ही बनती है.

भैयाजी सुपरहिट में भी सनी देओल दबंग के क़िरदार में अपना दबदबा दिखाने में सफल रहे हैं. वे अपनी पत्नी सपना (प्रीति ज़िंटा) को बेइंतहा चाहते हैं और उससे डरते भी हैं. सपना के क़िरदार में प्रीति ने बेहतरीन काम किया है. वे बोलती कम और गोली ज़्यादा चलाती हैं. हमेशा शरारती-चुलबुली अंदाज़ में दिखनेवाली प्रीति एक नए ही अंदाज़ में सपना के रूप में चटक साड़ियों, भरी चूड़ियों में प्रभावशाली पत्नी के ज़बर्दस्त रोल में नज़र आती हैं. लंबे समय बाद प्रीति ज़िंटा को पर्दे पर देखना सुकून की तरह रहा. जब-जब पर्दे पर अरशद और श्रेयस की एंट्री होती है, लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. दोनों ही कलाकारों की कॉमेडी टाइमिंग लाजवाब है. कह सकते हैं कि प्रीति ज़िंटा के अलावा अन्य सभी कलाकारों यानी अमीषा पटेल, अरशद वारसी, श्रेयस तलपड़े, मिथुन चक्रवर्ती, मुकुल देव, जयदीप अहलावत, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, प्रकाश राज, एवलिन शर्मा सभी ने अपनी-अपनी भूमिकाओं को पूरी ईमानदारी से निभाया है.

नीरज पाठक का निर्देशन स्तरीय है. थोड़ी-सी और मेहनत करते तो फिल्म के सभी उम्दा कलाकारों से और भी बढ़िया काम करवा सकते थे. निर्माता चिराग धारीवाल और फौजिया अर्शी के साहस की दाद देनी होगी कि इतने सालों बाद ही सही फिल्म रिलीज़ तो हुई. साजिद-वाजिद, संजीव-दर्शन, जीत गांगुली, राघव सच्चर, अमजद नजीम, फौजिया अर्शी जैसे संगीतकारों का जमावड़ा है, पर एक भी गाना दिलोदिमाग़ पर ठहर नहीं पाता है. सुखविंदर सिंह, असीस कौर, यासेर देसाई के गाए गीत बस थोड़ी-सी राहत भर दे पाते हैं. फिल्म में एक्शन, कॉमेडी के साथ ईमोशंस भी है. भैयाजी सुपरहिट  होगी की नहीं पता नहीं पर भैयाजी तो हमेशा ही हिट हैं.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू: मोहल्ला अस्सी/पीहू- दो ख़ूबसूरत प्रस्तुति- एक व्यंग्यात्मक तो दूसरी में मासूम अदाकारी (Movie Review: Mohalla Assi/Pihu- Remarkable Performances And Thought Provoking Scripts)

 

 Mohalla Assi/Pihu
मोहल्ला अस्सी- धर्म, संस्कृति, राजनीति पर करारा व्यंग्य

एक ओर सनी देओल अलग व दमदार अंदाज़ में नज़र आते हैं मोहल्ला अस्सी में, तो वहीं पीहू में दो साल की बच्ची की मासूम अदाकारी बेहद प्रभावित करती है.

हिंदी साहित्यकार काशीनाथ सिंह की काशी का अस्सी पर आधारित मोहल्ला अस्सी फिल्म धर्म, राजनीति, आस्था, परंपरा आदि के माननेवाले को बहुत पसंद आएगी. भारतीय सोच पर भी करारा व्यंग्य किया गया है. वैसे भी जो मज़ा बनारस में वो न पेरिस में है, न फारस में… इसी चरितार्थ करती है फिल्म. निर्माता विनय तिवारी की यह फिल्म चाणक्य सीरियल व पिंजर मूवी फेम डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी  के बेहतरीन निर्देशन के कारण बेहद आकर्षक व ख़ास बन गई है. बनारस के निवासी, गंगा नदी, घाट, गली-मोहल्ले, वहां के तौर-तरी़के, लोगों की विचारधारा, राजनीति का प्रभाव, धर्म, कर्मकांड सभी का ख़ूबसूरत चित्रण किया गया है.

कहानी बनारस के मोहल्ला अस्सी की है, जहां पर धर्मराज पांडे यानी सनी देओल ब्राह्मणों की बस्ती में अपनी पत्नी साक्षी तंवर और बच्चों के साथ रहते हैं. वे जजमानों की कुंडली बनाते हैं और संस्कृत भी पढ़ाते हैं. अपने धर्म व उससे जुड़ी अन्य बातों को लेकर वे इतने सख़्त रहते हैं कि अपने मोहल्ले में विदेशी सैलानियों को किराए पर घर रहने के लिए नहीं देते और न ही अन्य लोगों को ऐसा करने देते हैं. उनका मानना है कि विदेशियों के खानपान व आचरण के सब गंदा व अपवित्र हो रहा है. लेकिन हालात करवट बदलते हैं और उन्हें आख़िरकार न चाहते हुए वो सब करना पड़ता है, जिसके वे सख़्त ख़िलाफ़ थे. फिल्म में पप्पू चाय की दुकान भी है, जो किसी संसद से कम नहीं. जहां पर वहां के लोग हर मुद्दे पर गरमागरम बहस करते हैं, फिर चाहे वो राजनीति का हो या फिर कुछ और.

सनी देओल अपनी भाव-भंगिमाएं व प्रभावशाली संवाद अदाएगी से बेहद प्रभावित करते हैं. उनका बख़ूबी साथ देते हैं साक्षी तंवर, रवि किशन, सौरभ शुक्ला, राजेंद्र गुप्ता, मिथलेश चतुर्वेदी, मुकेश तिवारी, सीमा आज़मी, अखिलेंद्र मिश्रा आदि. अमोद भट्ट का संगीत स्तरीय है. विजय कुमार अरोड़ा की सिनेमाटोग्राफी क़ाबिल-ए-तारीफ़ है.

Mohalla Assi/Pihu

Pihu

 

पीहू- नन्हीं बच्ची का कमाल

निर्देशक विनोद कापड़ी की मेहनत, लगन और धैर्य की झलकियां बख़ूबी देखने मिलती है पीहू फिल्म में. आख़िरकार उन्होंने दो साल की बच्ची से कमाल का अभिनय करवाया है. कथा-पटकथा पर भी उन्होंने ख़ूब मेहनत की है. निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर, रोनी स्क्रूवाला व शिल्पा जिंदल बधाई के पात्र हैं, जो उन्होंने विनोदजी और फिल्म पर अपना विश्‍वास जताया. बकौल विनोदजी यह सच्ची घटना पर आधारित है और इस पर फिल्म बनाना उनके लिए किसी चुनौती से कम न था.

फिल्म की जान है पीहू यानी मायरा विश्‍वकर्मा. उस नन्हीं-सी बच्ची ने अपने बाल सुलभ हरकतों, शरारतों, मस्ती, सादगी, भोलेपन से हर किसी का दिल जीत लेती है.

कहानी बस इतनी है कि पीहू की मां (प्रेरणा विश्‍वकर्मा) का देहांत हो चुका है और उनकी बॉडी के साथ वो मासूम बच्ची घंटों घर के कमरे में अकेले व़क्त बिताती है. उसे नहीं पता कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं है, वो मासूम उनसे बात करती है, घर में इधर-उधर घूमती है, भूख लगने पर गैस जलाकर रोटी भी सेंकने की कोशिश करती है, घर को अस्त-व्यस्त, उल्टा-पुल्टा कर देती है. सीन दर सीन उत्सुकता, डर, घबराहट, बेचैनी भी बढ़ती जाती है. कम बजट में विनोदजी ने लाजवाब फिल्म बनाई है.

– ऊषा गुप्ता

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शहंशाह अमिताभ बच्चन जन्मदिन मुबारक हो!… (Happy Birthday Amitabh Bachchan: The Legend Turns 76)

Amitabh Bachchan Birthday

आज युग पुरुष अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) 75 साल के हो गए हैं, मानो एक युग बीत गया हो उनके अभिनय को देखते, गाते, हंसते-मुस्कुराते. उम्दा कलाकार, बेजोड़ अभिनय, लाजवाब एक्शन… उनका हर रूप, हर रंग, हर अदा बेमिसाल…

सात हिंदुस्तानी से जो सफ़र शुरू हुआ, वो आज भी बरकरार है. कितने दशक सतत काम करते रहे… हर युवा के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं वे. उनकी ख़ूबसूरत फिल्में, सशक्त अभिनय, बहुमुखी भूमिकाएं सदा हमारा मनोरंजन करने के साथ-साथ प्रेरणा भी देती हैं कि हम सदा कर्मठ बने रहें…

वैसे कौन बनेगा करोड़पति टीवी शो के ज़रिए आज भी वे उतने ही जवां, हरफनमौला परफॉर्मेंस को अंजाम दे रहे हैं और करोड़ों दिलों पर राज़ कर रहे हैं. वे यूं ही ताउम्र अभिनय करते रहें, यही दुआ और शुभकामनाएं!

मेरी सहेली परिवार की तरफ़ से उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई!

एबी जर्नी…

* अमिताभ बच्चन का जन्म इलाहाबाद में 11 अक्टूबर को हुआ था.

* उनके पिता हरिवंश राय बच्चन हिंदी के जाने-माने लेखक थे और मां तेजी बच्चन भी बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं.

* पहले उनका नाम इंकलाब रखा गया था, पर बाद में अमिताभ रखा गया, जिसका मतलब ऐसा प्रकाश जो कभी नहीं बुझेगा.

* बहुत कम लोग जानते हैं कि अमिताभ बच्चनजी का सरनेम श्रीवास्तव है, पर चूंकि उनके पिता कवि हरिवंश रायजी उपनाम बच्चन लगाते थे, उन्होंने भी अपने नाम के साथ यही उपनाम रहने दिया.

* अमितजी ने दो बार एमए किया था. इलाहाबाद और नैनीताल में अपनी शिक्षा पूरी की.

* करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने कोलकता की एक शिपिंग कंपनी में जॉब भी किया था.

* 3 जून 1973 को अपनी साथी कलाकार जया भादुड़ी के साथ उन्होंने विवाह किया. उनके दो बच्चे अभिषेक और श्‍वेता हैं.

* अपनी पहली ही फिल्म सात हिंदुस्तानी के लिए उन्हें न्यूकमर का नेशनल अवॉर्ड मिला था.

* आनंद फिल्म में उनके बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए उन्होंने बेस्ट सर्पोेंटिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था.

* फिल्मी करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने परवाना फिल्म में खलनायक की भी भूमिका निभाई थी.

* वे अपने संघर्ष के दिनों में कई सालों तक हास्य कलाकार महमूद के घर भी रहे थे.

* ज़ंजीर फिल्म उनके करियर का टर्निंग प्याइंट रहा. यही से उनके एंग्री यंग मैन का क़िरदार मशहूर हुआ.

* इसी दौर में उनके अभिमान और नमक हराम फिल्म को काफ़ी पसंद किया गया. राजेश खन्ना और रेखा के साथ की नमक हराम के लिए तो उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट सर्पोंटिंग एक्टर का अवॉर्ड भी मिला.

* फिर चुपके-चुपके, दीवार, शोले, अमर अकबर एंथोनी, कभी-कभी फिल्मों से जो कामयाबी का सिलसिला चल पड़ा, वो अब तक बरकरार है.

* रेखा के साथ की फिल्म मि. नटवरलाल के गाने मेरे पास आओ मेरे दोस्तों एक क़िस्सा सुनाऊ… गाने से उन्होंने पहली बार फिल्मों में अपनी आवाज़ दी. इसके लिए उन्हें पुरस्कार भी मिला.

* साल 1982 में कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान लगे चोट और गंभीर स्थिति होने, फैन्स व लोगों के प्यार, दुआओं के सिलसिले ने यह साबित कर दिया कि अमिताभ बच्चन कितने बड़े स्टार बन गए थे और दर्शकों के लिए उनके दिल में किस कदर प्यार है.

* साथ ही फिल्म के निर्देशक मनमोहन देसाई पर भी इसका ऐसा असर हुआ कि उन्होंने फिल्म का अंत बदल दिया. उनका कहना था कि यह महान शख़्स मौत को जीतकर वापस आया है, तो भला मैं फिल्म में ऐसे कैसे दिखा सकता था. आज भी कुली फिल्म के उस फाइट सीन में जिसमें अमिताभ बच्चन घायल हुए थे, फिल्म देखते समय पॉज़ करके नीचे इसके बारे में कैप्शन दिखाया जाता है.

* उन्हें राजनीति में भी न चाहते हुए दोस्ती की ख़ातिर आना पड़ा, पर आख़िरकार इसे उन्होंने अलविदा कह दिया.

* राजनीति, फिल्म से जुड़े तमाम विवादों के चलते उन्होंने काफ़ी लंबे समय तक मीडिया से भी दूरी बनाए रखी.

* शहंशाह से उनकी ज़बर्दस्त दूसरी इनिंग शुरू हुई. फिर हम, अग्निपथ फिल्मों की सफलता ने उन्हें फिर से स्थापित किया. अग्निपथ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.

* एबीसीएल के बैनर तले उन्होंने कई फिल्में भी बनाई.

* साल 2000 में टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति उनके करियर का मील का पत्थर साबित हुई. इस शो के ज़रिए अमितजी को लोगों का भरपूर प्यार, सराहना, मान-सम्मान मिला. जो अब तक बरकरार है.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू- अंधाधुन: रहस्य-रोमांच की धुन में दर्शक गुम… (Movie Review- Andhadhun: A Rollercoaster Of Thrills And Mystery)

बदलापुर, जॉनी गद्दार के बाद एक बार फिर श्रीराम राघवन ने साबित कर दिया कि थ्रिलर-सस्पेंस मूवी बनाने में उन्हें महारात हासिल है. अंधाधुन फिल्म की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, परत-दर-परत आश्‍चर्य, रोमांच, रहस्य, बेचैनी भी बढ़ती चली जाती है. बहुत दिनों बाद सशक्त कथा-पटकथा और निर्देशन का संगम देखने को मिला. फ्रेंच शॉर्ट फिल्म द पियानो ट्यूनर पर आधारित फिल्म की जान है आयुष्मान खुराना और तब्बू.

Andhadhun

 

आयुष्मान ने एक नेत्रहीन संगीतकार के रूप में ग़ज़ब का अभिनय किया है. राधिका आप्टे ने उनका बख़ूबी साथ निभाया है.

किस तरह राधिका व आयुष्मान मिलते हैं, फिर राधिका उन्हें अपने पिता के पब में पियानो प्लेयर का जॉब दिलवा देती हैं. कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब तब्बू के पति तब्बू को सरप्राइज़ देने जाते हैं और उनका मर्डर हो जाता है. फिर तब्बू और उनका प्रेमी लाश को ठिकाने लगाने में अचानक घर पहुंचे अंधे आयुष्मान की भी मदद लेते हैं. फिर शुरू होता है- लालच, धोखा, फरेब का मायाजाल और इससे जुड़ा हर कलाकार उसमें फंसता चला जाता है.

बहुत दिनों बाद ग्रे शेड में तब्बू ने बेहद प्रभावशाली अभिनय किया है. उनकी भूमिका डर, चिढ़, घबराहट, ग़ुस्सा सब कुछ पैदा करती है. आयुष्मान का क़िरदार पूरी फिल्म में रहस्य से भरपूर रहता है. कभी लगता है कि ऐसा हो सकता है, तो कभी लगता है नहीं यह ठीक नहीं है. साथी कलाकारों में अनिल धवन, जाकिर हुसैन, अश्‍विनी कालसेकर ने भी बेहतरीन अभिनय किया है. अमित त्रिवेदी, रफ़्तार, गिरीश नकोड का संगीत यूं तो अधिक बांधे नहीं रखता, पर कहानी को फ्लो में भी ले जाता है.

Andhadhun
लवयात्री

प्यार के सफ़र में न जाने कितने मंज़र मिले..

कुछ दर्द से बंधे, कुछ दिल से मिले…

कुछ ऐसा ही महसूस होता है लवयात्री को देखकर. अब यह दर्शकों पर ही निर्भर है कि वे क्या सोचते हैं. सलमान ख़ान के बैनर तले बनी लवयात्री प्यार करनेवालों को पसंद आ जाए, इतना ही बहुत है. हीरो आयुष शर्मा की नवरात्री में हीरोइन वारिना हुसैन से मुलाक़ात, दोस्ती, प्यार, फिर घरवालों का विरोध… वही आम-सी कहानी. संगीत और कुछ सीन्स अच्छे बन पड़े हैं. आयुष-वारिना की यह पहली फिल्म है, पर दोनों ही ख़ास प्रभावित नहीं कर पाए. रोनित रॉय, राम कपूर ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू- सुई धागा+पटाखा- देसी टच कंप्लीट इंटरटेंमेंट (Movie Review- Sui Dhaga+Patakha: Entertaining With A Dose Of Desi)

इन दिनों देसी अंदाज़ के साथ संदेश व मनोरंजन से भरपूर कई फिल्में बन रही हैं. इसी फेहरिस्त में सुई धागा भी है. अनुष्का शर्मा और वरुण धवन अभिनीत यह फिल्म एक आम इंसान की सीधी-सादी ज़िंदगी और स्व रोज़गार को लेकर संघर्ष को बड़ी ख़ूबसूरती से उकेरती है. मेड इन इंडिया के थीम के साथ भी फिल्म न्याय करती है.

ui Dhaga and Patakha

यशराज बैनर तले मनीष शर्मा द्वारा निर्मित व लिखित यह फिल्म सेल्फ एम्प्लॉयमेंट के प्रति जागरूकता भी पैदा करती है. अनुष्का एवं वरुण ने बेहतरीन अभिनय किया है. दोनों की सादगी, संघर्ष, आपसी प्रेम, देसी लुक व अंदाज़ दिल को छू जाती है. वरुण के पिता के रूप में रघुवीर यादव और मां की भूमिका में आभा परमार ने ग़ज़ब की एक्टिंग की है.

अनु मलिक व एंड्रिया गुएरा का संगीत माहौल व मन को ख़ुशनुमा बना देता है. चाव लगा, खटर-पटर, तू ही अहम्, सब बढ़िया है… गीत कर्णप्रिय हैं. पापोन व रोन्किनी गुप्ता की सुमधुर आवाज़ इसे और भी शानदार बना देती है. सुई धागा मेड इन इंडिया, वाकई में बढ़िया सिनेमा का अनुसरण करती है.

Sui Dhaga and Patakha
पटाखा

विशाल भारद्वाज को चरण सिंह पथिक की कहानी दो बहनें इस कदर पसंद आई कि उन्होंने इस पर पटाखा बना डाली. फिल्म की पटकथा, संगीत, निर्देशन- सभी की ज़िम्मेदारी विशालजी ने ख़ुद ही संभाली है.

टीवा स्टार राधिका मदान इसके ज़रिए फिल्मी दुनिया में प्रवेश कर रही हैं. बड़ी बहन चंपा उ़र्फ बड़की के रूप में उन्होंने अपनी पहली ही फिल्म में ज़बर्दस्त अभिनय किया है. उनका साथ दंगल फेम सान्या मल्होत्रा ने गेंदा कुमारी के रूप में बख़ूबी निभाया है. दो बहनें बचपन से लेकर बड़े होने तक अक्सर लड़ाई-झगड़े करती रहती हैं. उनकी लड़ाई को बढ़ाने और उसमें आग में घी का काम करता है उनका पड़ोसी सुनील ग्रोवर. दोनों बेटियों के पिता के रूप मेंं विजय राज ने कमाल की परफॉर्मेंस दी है. सानंद वर्मा ने उनका अच्छा साथ दिया है.

निर्माताओं की टीम यानी रेखा विशाल भारद्वाज, इशान सक्सेना, अजय कपूर, धीरज वाधवान ने दर्शकों को एक अच्छी फिल्म परोसी है. गुलज़ार साहब के गीत फिल्म को और भी ख़ूबसूरत बना देते हैं. रेखा-विशाल भारद्वाज, सुनिधि चाहौन की आवाज़ की जादूगरी फिल्म को बांधे रखती है.

दोनों ही फिल्में शुद्ध देसी अंदाज़ और मनोरंजन से भरपूर है.

– ऊषा गुप्ता

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दिव्या दत्ता/सपना चौधरी- लाजवाब अदाकारा जिन्होंने इंडस्ट्री में बनाई अपनी अलग पहचान… (Divya Dutta & Sapna Choudhary: Actresses Who Carved A Niche In The Industry)

आज दिव्या दत्ता (Divya Dutta) और सपना चौधरी (Sapna Choudhary) का जन्मदिन (Birthday) है. दोनों ही कलाकारों ने मनोरंजन की दुनिया में अपने बलबूते पर अपनी ख़ास पहचान बनाई है. आइए, दोनों के ज़िंदगी से जुड़े अनछुए पहलुओं के बारे में जानते हैं.

 

Divya Dutta & Sapna Choudhary

दिव्या दत्ता

* दिव्या दत्ता लुधियाना के पंजाबी हिंदू परिवार से हैं.

* उनकी मां डॉ. नलिनी दत्ता गर्वमेंट ऑफिसर थीं. वे अपनी मां के बेहद क़रीब थीं. उन पर उन्होंने मम्मी एंड मां नामक किताब भी लिखी थी.

* जब वे सात साल की थीं, तब उनके पिता का देहांत हो गया था.

* साल 2016 में ऑपरेशन के कारण हुई मेडिकल प्रॉब्लम्स के चलते उनकी मां का देहांत हो गया था.

* बकौल दिव्या उनकी मां बचपन से हमेशा उनके साथ रहीं, इसलिए उनका यूं अचानक चले जाना सदमे से कम न था.

* इस कारण वे डिप्रेशन का शिकार हो गईं. फिर उन्होंने अपना इलाज करवाया.

* इरादा फिल्म के लिए वे राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी हैं.

* वीर-ज़ारा, भाग मिल्खा भाग, बदलापुर फिल्मों से उन्हें ख़ास पहचान मिली.

* उन्होंने द वर्ल्ड्स बेस्ट बॉयफ्रेंड नामक किताब भी लिखी है.

* हिंदी के अलावा उन्होंने कई बेहतरीन पंजाबी फिल्में भी की हैं.

* फिल्म गिप्पी के सिंगल मदर की भूमिका के लिए उन्हें अपनी मां से प्रेरणा मिली थी, क्योंकि उनकी मां ने बचपन में ही पिता के देहांत के बाद सिंगल पैरेंट के रूप में उनकी और उनके भाई की परवरिश की थी.

* दिव्या को बचपन से ही एक्टिंग का शौक़ था. मुंबई आने से पहले उन्होंने मॉडलिंग व विज्ञापन भी किए थे.

* साल 1994 में फिल्म इश्क़ में जीना इश्क़ में मरना से उन्होंने अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत की थी.

* सलमान ख़ान के साथ वीरगति भी की थी, पर फिल्म चल न पाई.

* धीरे-धीरे दिव्या ने सहायक अभिनेत्री के रूप में काम करना शुरू किया, जिसमें वे सफल रहीं.

* द लास्ट ईयर मूवी से उन्होंने अपना इंटरनेशनल फिल्मी करियर शुरू की. इसमें उनके साथ अमिताभ बच्चन, प्रीति जिंटा, अर्जुन रामपाल थे.

* भाग मिल्खा भाग में मिल्खा सिंह की बहन ईश्री कौर की भूमिका में उन्होंने अपनी ज़बर्दस्त छाप छोड़ी. इसके लिए उन्हें आईफा का बेस्ट सर्पोटिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड भी मिला.

* पंजाबी फिल्म शहीद-ए-मोहब्बत बूटा सिंह से उन्होंने पंजाबी फिल्मी करियर का आगाज़ किया. फिर तो सिलसिला-सा चल पड़ा.

* ख़बरों की माने तो लेफ्टिनेंट कमांडर संदीप शेरिगल से उनके रिश्ते को लेकर सुगबुगाहट होती रही है, पर यह कितना सच है, यह तो वे दोनों ही बेहतर जान सकते हैं.

Divya Dutta & Sapna Choudhary

सपना चौधरी

बहुत कम समय में सपना ने इंटरटेनमेंट वर्ल्ड में अपनी एक अलग पहचान बना ली है. बिग बॉस के पिछले सीज़न में तो वे और भी अधिक लाइमलाइट में आ गई थीं. इस भोजपुरी बिजली को उनके आइटम सॉन्ग के लिए भी लोगों ने ख़ूब पसंद किया. उनके परिवार ने उनका जन्मदिन ख़ूब धूमधाम से मनाया.

* सिंगर व डांसर के रूप में सपना ने बहुत से ज़बर्दस्त स्टेज शोज़ किए हैं.

* रोहतक में जन्मी डांसिंग क्वीन सपना के नाच-गाने का दर्शक ख़ूब लुत्फ़ उठाते हैं. इसी के बलबूते पर उन्होंने भोजपुरी, पंजाबी फिल्मों में अपने जलवे बिखेरे हैं.

* सूट तेरा पतला 2 अलबम में उनका तेरी अंखिंया का यों काजल… को लोगों ने इतना अधिक पसंद किया था कि इसे सत्ताइस करोड़ लोगों ने देखा था.

* नानू की जानू में अभय देओल के साथ तेरे ठुमके… पर तो हर कोई फिदा हो गया था. वीरे दी वेडिंग में भी उनका ग़ज़ब का डांस था.

* भोजपुरी फिल्म बैरी कंगना 2 के मेरे सामने आ के… भी ख़ूब पसंद किया गया.

* पंजाबी की जग्गा जियुंदा में उनकी बिल्लौरी अंख सॉन्ग का ऐसा जादू चला कि अब तक पैतालीस लाख से भी अधिक बार देखा जा सुका है.

* उनके हरियाणवी गाने इंग्लिश मीडियम का नशा दर्शकों के सिर इस कदर चढ़ा कि इसे यूट्यूब पर बारह करोड़ से अधिक व्यूज़ मिले थे.

* अब वे हिंदी फिल्मों में भी दोस्ती के साइड इफेक्ट्स से अपने करियर की शुरुआत कर रही हैं. इसमें उनके साथ विक्रांत आनंद, जुबैर ख़ान, अंजू जाधव भी हैं.

दिव्या दत्ता और सपना चौधरी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई!

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मूवी रिव्यू- दो बेहतरीन विषयों पर बनी सार्थक फिल्म: बत्ती गुल मीटर चालू/मंटो (Meaningful Cinema: Both The Movies Will Stir Your Thoughts)

आमतौर पर लोग फिल्में (Movies) मनोरंजन (Entertainment) के लिए देखना पसंद करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे विषय भी होते हैं, जिनके बारे में जानना-समझना भी ज़रूरी होता है.

Meaningful Movies

बत्ती गुल मीटर चालू

बिजली विभाग की ग़लती और भ्रष्टाचार के चलते किस तरह एक आम इंसान को परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसे ही फिल्म में मुख्य रूप से दिखाया गया है. यह उत्तराखंड के टिहरी जिले में रहनेवाले तीन मित्रों- शाहिद, श्रद्धा और दिव्येंदु की कहानी है. दिव्येंदु के प्रिंटिंग प्रेस का हमेशा बेहिसाब बिजली का बिल आता रहता है. वो इससे बेहद परेशान है. कई बार बिजली विभाग के चक्कर लगाने के बावजूद न ही न्याय मिल पाता है और न ही सुनवाई होती है. आख़िरकार तंग आकर वो आत्महत्या कर लेता है. शाहिद दोस्त की मौत से सकते में आ जाता है और उसे न्याय दिलाने की ठानता है और तब शुरू होती है क़ानूनी लड़ाई व संघर्ष. चूंकि फिल्म में शाहिद कपूर वकील बने हुए है, तो वे पूरा ज़ोर लगा देते हैं अपने दोस्त को इंसाफ़ दिलाने के लिए.

श्रद्धा कपूर फैशन डिज़ाइनर हैं. दो दोस्तों के बीच में फंसी एक प्रेमिका, पर उन तीनों की बॉन्डिंग देखने काबिल है. यामी गौतम एडवोकेट की छोटी भूमिका में अपना प्रभाव छोड़ती हैं. कोर्ट के सीन्स दिलचस्प हैं. शाहिद कपूर, श्रद्धा कपूर, यामी गौतम, दिव्येंदु शर्मा सभी कलाकारों ने सहज और उम्दा अभिनय किया है. श्रीनारायण सिंह टॉयलेट- एक प्रेम कथा के बाद एक बार फिर गंभीर विषय पर सटीक प्रहार करते हैं. अनु मलिक व रोचक कोहली का संगीत और संचित-परंपरा के गीत सुमधुर हैं. अंशुमन महाले की सिनेमैटोेग्राफी लाजवाब है. निर्माताओं की टीम भूषण कुमार, कृष्ण कुमार व निशांत पिट्टी ने सार्थक विषय को पर्दे पर लाने की एक ईमानदार कोशिश की है.

मंटो

जब कभी किसी विवादित शख़्स पर फिल्म बनती है, तब हर कोई उसे अपने नज़रिए से तौलने की कोशिश करने लगता है. मंटो भी इससे जुदा नहीं है. निर्देशक नंदिता दास ने फिराक फिल्म के बाद मंटो के ज़रिए अपने निर्देशन को और भी निखारा है. उस पर मंटो की भूमिका में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का बेमिसाल अभिनय मानो सोने पे सुहागा. मंटो की पत्नी के रूप में रसिका दुग्गल ने भी ग़ज़ब की एक्टिंग की है. वैसे फिल्म में कुछ कमियां हैं, जो मंटो को जानने व समझनेवालों को निराश करेगी.

सआदत हसन मंटो की लेखनी हमेशा विवादों के घेरे में रही, विशेषकर ठंडा गोश्त, खोल दो, टोबा टेक सिंह. उन पर उनकी लेखनी में अश्‍लीलता का भरपूर इस्तेमाल करने का आरोप ज़िंदगीभर रहा, फिर चाहे वो आज़ादी के पहले की बात हो या फिर देश आज़ाद होने पर उनका लाहौर में बस जाना हो. इसी कारण उन पर तमाम तरह के इल्ज़ामात, कोर्ट-कचहरी, अभावभरी ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव का दौर सिलसिलेवार चलता रहा. रेसुल पुक्कुटी का संगीत ठीक-ठाक है. साथी कलाकारों में ऋषि कपूर, जावेद अख़्तर, इला अरुण, ताहिर राज भसीन व राजश्री देशपांडे ने अपने छोटे पर महत्वपूर्ण भूमिकाओं के साथ न्याय किया है. निर्माता विक्रांत बत्रा और अजित अंधारे ने मंटो के ज़रिए लोगों तक उनकी शख़्सियत से रू-ब-रू कराने की अच्छी कोशिश की है.

– ऊषा गुप्ता

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हिंदी दिवस पर विशेष- हिंदी फिल्मों में हिंदी का मिक्सचर… (Hindi Mixed In Hindi Cinema)

हिंदी (Hindi) हमारी आन-बान-शान है. देश की आज़ादी से लेकर आपसी लगाव और एकता में भी हिंदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. दिलों को जोड़ने में हिंदी फिल्मों (Hindi Films) का भी बहुत योगदान रहा है. देश-विदेश यानी एक तरह से पूरी दुनिया को हिंदी फिल्मों ने एक सूत्र में बांधा है. हमारे हिंदी फिल्मों के सितारों को विश्‍वभर में प्यार-अपनापन मिला है. फिर चाहे वो अमिताभ बच्चन हो, रितिक रोशन, शाहरुख, आमिर, सलमान ही क्यों न हो. फिल्मों ने भी हिंदी के प्रचार-प्रसार में अहम् भूमिका निभाई है. हिंदी की सरलता, चुटीली शैली और हास्य व्यंग्य ने भी सभी का ख़ूब मनोरंजन किया है. आइए, ऐसे ही कुछ फिल्मों पर एक नज़र डालते हैं.

Hindi Cinema

 

* अमिताभ-जया बच्चन, धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, ओमप्रकाश अभिनीत चुपके-चुपके फिल्म आज भी हिंदी के मज़ेदार प्रयोग के कारण सभी को ख़ूब हंसाती है. फिल्म में धर्मेंद का शुद्ध हिंदी वार्तालाप सुन हर कोई हंसी से लोटपोट हो जाता है. साथ ही ओमप्रकाशजी की प्रतिक्रियाएं सोने पे सुहागा का काम करती हैं.

* अमोल पालेकर-उत्पल दत्त की हास-परिहास से भरपूर गोलमाल ने हर दौर में दर्शकों को हंसने के मौ़के दिए हैं. इसमें भी अन्य साथी कलाकारों ओमप्रकाश, बिंदिया गोस्वामी, दीना पाठक, युनुस परवेज ने भी भरपूर साथ दिया. फिल्म में हिंदी के  महत्व के साथ-साथ इसकी उपेक्षा की ओर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया गया.

* अक्षय कुमार की नमस्ते लंदन में तो भारत देश के महत्व, हिंदी पर गौरव, हिंदी भाषा, हमारी संस्कृति, सभ्यता को बेहतरीन ढंग से महिमामंडित किया गया. फिल्म के एक दृश्य में तो अक्षय कुमार भारत की आन, परिवेश, महत्व की अपनी हिंदी में कही गई बात को लंदन में अंग्रेज़ों को कैटरीना कैफ के ज़रिए अंग्रेज़ी में जतला कर उन्हें करारा जवाब देते हैं.

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* हिदी मीडियम फिल्म ने तो हिंदी के प्रति हमारे सौतेले व्यवहार पर ही हास्य के रूप में ही सही सशक्त व्यंग्य किया है. इसमें इरफान ख़ान व सबा कमर ने उम्दा अभिनय के ज़रिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया.

1918 में महात्मा गांधीजी ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने पर ज़ोर दिया था. उन्होंने इसे जनमानस की भाषा भी कहा था. आख़िरकार फिर 14 सितंबर, 1949 के दिन हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिल. तब से हर साल यह दिन हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है.

हिंदी है हम!…

क्या आपको याद हैं हिंदी फिल्मों के ये हिट डायलॉग्स? (All Time Hit Dialogues From Hindi Films)

All Time Hit Dialogues From Hindi Films

हिंदी फिल्मों कुछ हिट डायलॉग्स भुलाए नहीं भूलते. फिल्में भले पुरानी हों, लेकिन डायलॉग्स आज भी हिट हैं. क्या आपको याद हैं हिंदी फिल्मों के ये हिट डायलॉग्स?

All Time Hit Dialogues From Hindi Films

 

* मैं तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हूं.
* अब हम किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहे.
* क्या इसी दिन के लिए तुझे पाला था?
* दूर हो जा मेरी नज़रों से!
* भगवान के लिए मुझे छोड़ दो.
* एक फूटी कौड़ी भी नहीं दूंगा.
* क़ानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं.
* कुत्ते, कमीने… मैं तेरा ख़ून पी जाऊंगा.
* अपने आप को पुलिस के हवाले कर दो.
* ठहरो, ये शादी नहीं हो सकती.
* घर में दो-दो जवान बेटियां हैं.
* अपने हथियार डाल दो.
* इसे धक्के मार के निकाल दो.
* अब तुम्हारी मां हमारे कब्ज़े में है.
* मालिक मैंने आपका नमक खाया है.
* बेटा एक बार मुझे मां कह कर पुकारो.

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* एक-एक को चुन-चुन के मारूंगा.
* तुम्हें पुलिस ने चारों तरफ़ से घेर लिया है.
* ये सौदा बहुत महंगा पड़ेगा.
* ख़ामोश!!!
* बेटी तो पराया धन है.
* क़ानून ज़ज़्बात नहीं सबूत मांगता है.
* जज साहब, मैंने ख़ून नहीं किया है.
* भगवान, मैंने आज तक तुमसे कुछ नहीं मांगा.
* मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती.
* अजी, सुनती हो भाग्यवान!
* इस घर के दरवाज़े हमेशा-हमेशा के लिए तुम्हारे लिए बंद हो गए हैं.

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