Hindi Cinema

हिंदी फिल्मों 30 हिट डायलॉग्स भुलाए नहीं भूलते. फिल्में भले पुरानी हों, लेकिन डायलॉग्स आज भी हिट हैं. क्या आपको याद हैं हिंदी फिल्मों के ये 30 हिट डायलॉग्स?

1) मैं तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हूं.

2) अब हम किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहे.

3) क्या इसी दिन के लिए तुझे पाला था?

4) दूर हो जा मेरी नज़रों से!

5) भगवान के लिए मुझे छोड़ दो.

6) एक फूटी कौड़ी भी नहीं दूंगा.

7) क़ानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं.

8) कुत्ते, कमीने… मैं तेरा ख़ून पी जाऊंगा.

9) अपने आप को पुलिस के हवाले कर दो.

10) ठहरो, ये शादी नहीं हो सकती.

11) घर में दो-दो जवान बेटियां हैं.

12) अपने हथियार डाल दो.

13) इसे धक्के मार के निकाल दो.

14) अब तुम्हारी मां हमारे कब्ज़े में है.

15) मालिक मैंने आपका नमक खाया है.

16) बेटा एक बार मुझे मां कह कर पुकारो.

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17) एक-एक को चुन-चुन के मारूंगा.

18) तुम्हें पुलिस ने चारों तरफ़ से घेर लिया है.

19) ये सौदा बहुत महंगा पड़ेगा.

20) ख़ामोश…!!!

21) बेटी तो पराया धन है.

22) क़ानून ज़ज़्बात नहीं सबूत मांगता है.

23) जज साहब, मैंने ख़ून नहीं किया है.

24) भगवान, मैंने आज तक तुमसे कुछ नहीं मांगा.

25) मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती.

26) अजी, सुनती हो भाग्यवान!

27) इस घर के दरवाज़े हमेशा-हमेशा के लिए तुम्हारे लिए बंद हो गए हैं.

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28) मेरे पास मां है!

29) आज खुश तो बहुत होगे तुम!

30) ये पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं!
(सारी फोटोज़ इंटरनेट से ली गई हैं)

राजकुमार राव भले ही नेशनल अवार्ड हासिल कर चुके हों लेकिन उन्हें आज भी वो स्टारडम नहीं मिला जिसके वो हक़दार हैं. लव सेक्स और धोखा जैसी एक्सपेरिमेंटल मूवी से अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत करनेवाले राजकुमार की गिनती मंजे हुए कलाकारों में होती है और हर किरदार पर उनकी वाहवाही भी होती है लेकिन अन्याय यह है कि उन्हें स्टार या सूपर स्टार की नज़र से आज भी नहीं देखा जाता. अलीगढ़, स्त्री, सिटीलाइट्स, न्यूटन जैसी फ़िल्में करने के बाद भी राजकुमार को बॉलीवुड ने अब तक वो नहीं दिया जिसके वो वाक़ई हक़दार हैं.

Underrated Actors In Bollywood

रणदीप हुड्डा अपने अलग अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं और उनके इस अंदाज़ को सभी पसंद करते हैं लेकिन उनका फ़िल्मी सफ़र उन्हें स्टार का दर्जा नहीं दिला पाया. सरबजीत जैसी फ़िल्म करने के बाद भी उन्हें इतना क्रेडिट नाहीं मिला जितना ऐशवर्या को मिला. रणदीप की अदाकारी के क़ायल तो सभी हैं लेकिन बात जब स्टारडम की हो तो उन्हें उनका वो मुक़ाम नहीं मिल पाता जो मिलना चाहिए था. हाइवे जैसी फ़िल्म करने के बाद भी सारी वाहवाही आलिया भट्ट को मिली, हालाँकि रणदीप की भी तारीफ़ ख़ूब हुई लेकिन दबे लफ़्ज़ों में.

randeep hooda

राहुल बोस भले ही हार्डकोर कमर्शियल फ़िल्में नहीं करते लेकिन वो जो करते हैं कमाल करते हैं. अपने काम से उन्होंने यह साबित तो कर दिया कि हुनर की उनमें कोई कमी नहीं लेकिन इंडस्ट्री उन्हें इसके बदले ज़्यादा कुछ ना दे सकी. मिस्टर एंड मिसेज़ अय्यर के अलावा राहुल ने पैरलल सिनेमा में ही ज़्यादा काम किया है लेकिन उनकी चर्चा स्टार के तौर पर कभी नहीं होती.

Rahul Bose

मनोज बाजपेयी ने दूरदर्शन के स्वाभिमान नाम के सीरीयल से अपना करियर शुरू किया था. उसके बाद उन्हें बैंडिट क्वीन में काम मिला. मनोज मंजे हुए कलाकार हैं तभी तो उन्होंने शूल, सत्या, अलीगढ़, अक्स, गैंग्स ओफ वासेपुर जैसी फ़िल्मों में अपनी छाप छोड़ी. उनकी तारीफ़ बहुत होती है लेकिन उन्हें स्टार कलाकार के रूप में आज भी नहीं देखा जाता.

Manoj Bajpayee

अभय देओल के पास ना टैलेंट की कमी है और ना ही गुड लुक्स की लेकिन उन्हें भी इंडस्ट्री से वो नहीं मिला जिसके वो हक़दार थे. रांझना, देव डी, एक चालीस की लास्ट लोकल, ओए लकी लकी ओए… ऐसी कई फ़िल्में हैं जिसमें अभय ने अपने उम्दा अभिनय का लोहा मनवाया, लेकिन वो स्टार नहीं बन पाए.

Abhay Deol

नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी भी अलग तरह के किरदार निभाने के लिए जाने जाते हैं. अपनी हर फ़िल्म में वो खूब तारीफ़ें बटोरते हैं लेकिन स्टार का दर्जा उन्हें भी हासिल नहीं हुआ. माँझी द माउंटन मैन जैसी फ़िल्म करने के बाद भी उन्हें पैरलल सिनेमा के लिए परफ़ेक्ट माना जाना लगा लेकिन उन्होंने कमर्शियल सिनेमा में भी उतना ही बेहतरीन काम किया फिर भी स्टार की नज़र से उन्हें नहीं देखा जाता.

Nawazuddin siddiqui

आयुष्मान खुराना को भले ही कामयाब अभिनेता का दर्जा मिला हो लेकिन वो स्टारडम अब तक नहीं मिला जो शायद बहुत पहले मिल जाना चाहिए था. विकी डोनर, ड्रीमगर्ल, अर्टिकल 15 जैसी फ़िल्मों ने ना सिर्फ़ एक कलाकार के रूप में बल्कि सिंगर के तौर पर भी उन्हें स्थापित कर दिया था पर फिर भी ऐसा लगता है कि जितनी उनमें खूबियाँ हैं उसके अनुसार उन्हें सब कुछ नहीं मिला.

Ayushman Khurana

के के मेनन ने अलग तरह का सिनेमा ज़रूर किया है लेकिन उनका हुनर बहुत ज़्यादा है. गुलाल, लाइफ इन ऐ मेट्रो जैसी फ़िल्मों के अलावा उन्होंने गुजराती, मराठी, तेलुगु और तमिल फ़िल्में भी की हैं और स्टेज व टीवी पर भी वो उतने ही एक्टिव हैं. लेकिन इतना सब होने के बाद भी इंडस्ट्री ने उन्हें बदले में देने में कंजूसी ही की.

Kk menon

आशुतोष राणा एक समय में सबके फेवरेट थे. उन्होंने भी स्वाभिमान धारावाहिक से अपना सफ़र शुरू किया और बड़े पर्दे पर अपना जोहार भी खूब दिखाया. दुश्मन का वो सिरफिरा पोस्ट मैन हो या फिर संघर्ष का वो डरावना अवतार आशुतोष ने हर भूमिका के साथ न्याय किया लेकिन इंडस्ट्री ने उनके साथ अन्याय किया इसीलिए देखते ही देखते इतना उम्दा कलाकार लगभग ग़ायब सा हो गया.

Ashutosh Rana

अक्षय खन्ना ने कम ही फ़िल्में की हैं लेकिन हमराज़, दिल चाहता है, ताल, हंगामा और गांधी माय फादर जैसी फ़िल्मों में उन्होंने अपने अभिनय से सबको जता दिया कि वो किसी से कम नाहीं लेकिन इंडस्ट्री उनके हुनर को वो सम्मान नहीं दे सकी जो उन्हें मिलना चाहिए था.

Akshay Khanna

इरफ़ान खान भले ही हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनकी बेजोड़ कलाकारी ने सबको मंत्र मुग्ध किया हुआ है. इंडस्ट्री के मोस्ट टैलेंटेड अभिनेताओं में इरफ़ान का नाम सबसे ऊपर रहा है लेकिन उन्हें भी वो स्टारडम कभी नहीं मिला जिसका सपना हर कलाकार करता है. सलाम बॉम्बे, पान सिंह तोमर, मक़बूल, अंग्रेज़ी मीडियम, लंच बॉक्स जैसी फ़िल्मों के अलावा इरफ़ान ने ब्रिटिश व अमेरिकन सिनेमा में भी काम किया है. उन्हें नेशनल अवार्ड के अलावा पद्मश्री से भी नवाज़ा जा चुका है.

Irrfan Khan

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या ने सबको जहां चौंका दिया वहीं कई सवाल इस इंडस्ट्री के लिए भी खड़े कर दिए. धोनी, पीके, काई पो चे, छिछोरे जैसी फ़िल्मों के ज़रिए उन्होंने यह साबित कर दिया था कि वो यहां लम्बी पारी खेलने आए हैं लेकिन उन्हें भी कुछ ना कुछ तो साल रहा था इसीलिए वो स्टारडम नहीं मिला जिसके वो हक़दार थे.

Sushant Singh Rajput

सोनम कपूर (Sonam Kapoor) कम फिल्में करती हैं, पर जो भी करती हैं दिलचस्प होती हैं, जैसे द ज़ोया फैक्टर. इसके व उनकी पर्सनल लाइफ से जुड़ी बातों के बारे में जानते हैं.

Sonam Kapoor

* मुझे ख़ुशी है कि अनुजा चौहान के उपन्यास पर आधारित अभिषेक शर्मा द्वारा निर्देशित मेरी फिल्म द ज़ोया फैक्टर को लोगों ने पसंद किया. जब इस फिल्म के लिए सचिन तेंदुलकर ने ट्वीट किया, तब भी मुझे बेहद ख़ुशी हुई थी. इस तरह की फिल्म करने का एक अलग ही मज़ा है.

* फिल्म इंडस्ट्री में हमेशा से ही पुरुषों का बोलबाला रहा है. यहां तक कि महिला निर्देशक भी एक्टर को ध्यान में रखकर पुरुष प्रधान फिल्में ही अधिक करती हैं, जबकि उन्हें महिला प्रधान फिल्मों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, फिर चाहे वो फराह ख़ान हों या ज़ोया अख़्तर. नायिका प्रधान फिल्में बहुत कम ही बनती हैं. बॉलीवुड में हीरोइन को अपनी पहचान बनाने के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है.

* हीरोज़ भी महिला प्रधान फिल्मों में काम नहीं करना चाहते. मेरी कई फिल्में, जो नायिका प्रधान थीं, के लिए हीरोज़ ढूंढ़ने में मुश्किलें आईं.

* मेरा यह मानना है कि अपने बेस्ट फ्रेंड से शादी करना हमेशा अच्छा रहता है. मेरे और पति आनंद के बीच ग़ज़ब की ट्यूनिंग है, ऐसा हमारी दोस्ती के कारण है. हम एक-दूसरे के विचारों व मूल्यों का पूरा सम्मान करते हैं.

Sonam Kapoor

* मैं जब उठती हूं, तब आनंद बिस्तर पर नहीं होते. दरअसल, उन्हें सुबह जल्दी उठने की आदत है और वे रात में 10 बजे तक सो भी जाते हैं. जबकि मैं थोड़ा देरी से सोती हूं. वैसे हम दोनों को लेट नाइट पार्टीज़ पसंद नहीं, तो हम रात में कहीं बाहर भी नहीं जाते हैं.

* आनंद बहुत अच्छे जीवनसाथी हैं. वे शांत स्वभाव के हैं. मुझे पूरा स्पेस भी देते हैं. मेरा यह मानना है कि शादी के बाद हमें एक और नया परिवार मिलता है. तब हमारी ख़ुशियां, ज़िम्मेदारियां व प्राथमिकताएं भी बदल जाती हैं. हम दोनों के साथ भी ऐसा ही हुआ, पर हम दोनों ने आपने दोनों परिवारों के साथ अच्छा बैलेंस बनाकर रखा है. हम ख़ुश हैं और हर लम्हे को एंजॉय करते हैं.

Sonam KapoorSonam Kapoor Sonam Kapoor Sonam Kapoor

सोनमनामा…

* सोनम के सना, जिराफ व सोंज निक नेम्स हैं.

* हिंदी व अंग्रेज़ी के अलावा उन्हें पंजाबी, मराठी व उर्दू भाषा की अच्छी जानकारी है.

* उन्हें लिखना-पढ़ना, शॉपिंग, वीडियो गेम, बास्केट बॉल व स्न्वॉश खेलने का बहुत शौक है.

* शास्त्रीय संगीत, कत्थक व लेटिन डांस का भी उन्होंने बाक़ायदा प्रशिक्षण लिया है.

* जेब ख़र्च के लिए सोनम ने वेट्रेस के रूप में नौकरी भी की है.

* मोटापे के लिए आलोचना करने पर उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ रिश्ता तोड़ दिया था.

* उन्होंने सिंगापुर में थिएटर व आर्ट की पढ़ाई की है.

* ब्लैक फिल्म में संजय लीला भंसाली के असिस्टेंट डायरेक्टर से करियर की शुरुआत की.

* अपनी पहली फिल्म सांवरिया के लिए सोनम ने दो साल में 35 किलो वज़न कम किया था.

* स्टाइल आयकॉन सोनम की मां सुनीता कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर हैं, साथ ही वे मॉडल भी रह चुकी हैं.

* जल्द ही सोनम को पॉलिटिक्स करते हुए भी देखा जाएगा. दरअसल, सोनम का इरादा राजनीति में आने का है.

ऊषा गुप्ता

Sonam Kapoor

यह भी पढ़ेआयुष्मान खुराना- मां के सामने उस फैन ने स्पर्म की डिमांड की. (Ayushmann Khurrana- That Fan Demanded Sperm In Front Of My Mother)

विकी डोनर से लेकर ड्रीम गर्ल तक आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) ने अलग-अलग क़िरदारों में बेहतरीन अदाकारी से हर किसी को प्रभावित किया. वे युवाओं के रोल मॉडल बनते जा रहे हैं. गीत-संगीत, गायकी के साथ अपने प्रभावशाली अभिनय से उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बना ली है. बधाई हो, अंधाधुन, आर्टिकल 15, ड्रीम गर्ल, शुभ मंगल ज़्यादा सावधान, बाला फिल्मों की कामयाबी ने उन्हें शिखर पर ला दिया है. आज उनका जन्मदिन है, मेरी सहेली की तरफ़ से ढेर सारी शुभकामनाएं! इस मौक़े पर उनसे ही उनकी कुछ कही-अनकही दास्तान सुनते हैं.

Ayushmann Khurrana

* ड्रीम गर्ल में मेरी अदाकारी पर भले ही सब फ़िदा हों, पर मैं बचपन से ही नाच-गाना करते हुए होंठों को हिलाना, अभिनय करना जैसी नौटंकी-ड्रामा करता रहा हूं. इन्हीं सबके कारण एक बार तो मां ने मुझे फ्रॉक तक पहना दिया था.

* एक बार एक गे कास्टिंग डायरेक्टर ने मेरा ऑडिशन लिया और मुझसे मेरा प्राइवेट पार्ट दिखाने को कहा. मुझे यह सुनकर अजीब लगा. मैंने हंसते हुए कहा कि क्या बात कर रहे हो? क्या तुम सीरियस हो? मैं तुम्हें ऑडिशन दूंगा, लेकिन जो तुम कह रहे हो, वह नहीं करूंगा.

* पहली ही फिल्म विकी डोनर बेहद सफल रही, पर एक्ट्रेस यामी गौतम को किए गए एक किस के कारण मेरी शादीशुदा ज़िंदगी में तूफ़ान आ गया. मेरी पत्नी ताहिरा नहीं चाहती थीं कि मैं ऑनस्क्रीन किसी एक्ट्रेस को किस करूं. तब हमारे बीच कई बार अनबन व टकराव भी हुए. मुझे इससे उबरने में क़रीब तीन साल लग गए.

* एक और दिलचस्प वाकया विकी डोनर के समय का ही है. मैं अपनी मां के साथ मॉल में था. तब एक लड़की, जो मेरी फैन थी, ने मुझसे मेरे स्पर्म की डिमांड की. इस पर जहां मां चौंक गईं, वहीं मैंने शरारत में कहा कि मां साथ हैं, वरना दे देता.

* मैं स्कूलिंग तक बॉयज़ स्कूल में पढ़ा था. फिर ताहिरा से ट्यूशन के दौरान मुलाक़ात, फिर प्यार हो गया. वो स्कूल के प्रिंसिपल की बेटी थी. वो बाद में हमारे थिएटर ग्रुप मंचतंत्र से भी जुड़ी. मैंने ताहिरा के साथ मिलकर अपने फिल्मी सफ़र पर एक किताब भी लिखी है.

* गाने का बचपन से ही बेहद शौक रहा है. फिल्मों में विकी डोनर से जो गाने की शुरुआत हुई, वो अब तक बरक़रार है.

Ayushmann KhurranaAyushmann KhurranaAyushmann KhurranaAyushmann Khurrana

ज़िंदगी का सफ़र…

* चंडीगढ़ के आयुष्मान को बचपन से क्रिकेट का बहुत शौक रहा है. घर-बाहर, टूर्नामेंट आदि में वे ख़ूब क्रिकेट खेला करते थे.

* साइकिल चलाना, मार्केट्स में घूमना-फिरना, वेफर्स आदि खाना उन्हें ख़ूब पसंद है.

* उनके पिता पी. खुराना ज्योतिष विशेषज्ञ हैं. एस्ट्रोलॉजी में रुचि होने के कारण अपनी सरकारी नौकरी छोड़ वे पूरी तरह से इससे जुड़ गए. विदेशों से भी उनके क्लाइंट आते हैं. उन्होंने आयुष्मान को भी कई उपयोगी उपाय बताए, जिससे उन्हें करियर में आगे बढ़ने में मदद मिली.

* उनके पिता ढोलक व हार्मोनियम भी बजाया करते थे और घर में संगीतमय माहौल रहता था. इसी से प्रेरित हो आयुष्मान का संगीत के प्रति रुझान बढ़ा. उनकी मां पूनम गृहिणी हैं.

* अपने आगाज़ ग्रुप के एक नाटक के लिए आयुष्मान ने अपने सिर के बाल मुंडवा लिए थे.

* एक थी राजकुमारी टीवी सीरियल में उन्होंने नकारात्मक क़िरदार भी निभाया था.

* टीनएज में ही वी चैनल के लिए पॉप स्टार्स शो किए.

* कॉलेज में मास कॉम की पढ़ाई करते हुए टीवी रियालटी शो रोडीज़ सीज़न 2 जीता.

* बिग एफएम में आरजे फिर वीजे भी रहे और एंकरिंग तक की.

* आध्यात्मिक इतने कि जब कभी दुखी या तनाव में रहते हैं, तो श्रीमद् भगवदगीता पढ़ने लगते हैं.

* आयुष्मान बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. कॉन्वेंट में पढ़ने के बावजूद उनकी हिंदी में बेहद रुचि है. वे हिंदी में अच्छी कविताएं व ब्लॉग लिखते हैं. उनका जन्मदिन आज हिंदी दिवस (14 सितंबर) को होता है. इसलिए वे स्कूल के दिनों से ही हिंदी के वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते रहते थे.

ऊषा गुप्ता

Ayushmann Khurrana

यह भी पढ़ेअक्षय कुमार- हमें नहीं भूलना चाहिए कि पैरेंट्स भी बूढ़े हो रहे हैं… (Akshay Kumar- We Should Not Forget That Parents Are Getting Old Too…)

हिंदी (Hindi) हमारी आन-बान-शान है. देश की आज़ादी से लेकर आपसी लगाव और एकता में भी हिंदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. दिलों को जोड़ने में हिंदी फिल्मों (Hindi Films) का भी बहुत योगदान रहा है. देश-विदेश यानी एक तरह से पूरी दुनिया को हिंदी फिल्मों ने एक सूत्र में बांधा है.

Hindi Diwas Special

हमारे हिंदी फिल्मों के सितारों को विश्‍वभर में प्यार-अपनापन मिला है. फिर चाहे वो अमिताभ बच्चन हो, रितिक रोशन, अक्षय कुमार, शाहरुख, आमिर, सलमान ही क्यों न हो. फिल्मों ने भी हिंदी के प्रचार-प्रसार में अहम् भूमिका निभाई है. हिंदी की सरलता, चुटीली शैली और हास्य व्यंग्य ने भी सभी का ख़ूब मनोरंजन किया है. आइए, ऐसे ही कुछ फिल्मों पर एक नज़र डालते हैं…

Hindi Diwas Special

* अमिताभ-जया बच्चन, धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, ओमप्रकाश अभिनीत ‘चुपके-चुपके’ फिल्म आज भी हिंदी के मज़ेदार प्रयोग के कारण सभी को ख़ूब हंसाती है. फिल्म में धर्मेंद का शुद्ध हिंदी वार्तालाप सुन हर कोई हंसी से लोटपोट हो जाता है. साथ ही ओमप्रकाशजी की प्रतिक्रियाएं सोने पे सुहागा का काम करती हैं.

Hindi Diwas Special

* अमोल पालेकर-उत्पल दत्त की हास-परिहास से भरपूर ‘गोलमाल’ ने हर दौर में दर्शकों को हंसने के मौक़े दिए हैं. इसमें भी अन्य साथी कलाकारों ओमप्रकाश, बिंदिया गोस्वामी, दीना पाठक, युनुस परवेज ने भी भरपूर साथ दिया. फिल्म में हिंदी के महत्व के साथ-साथ इसकी उपेक्षा की ओर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया गया.

Hindi Diwas Special

* अक्षय कुमार की ‘नमस्ते लंदन’ में तो भारत देश के महत्व, हिंदी पर गौरव, हिंदी भाषा, हमारी संस्कृति, सभ्यता को बेहतरीन ढंग से महिमामंडित किया गया. फिल्म के एक दृश्य में तो अक्षय कुमार भारत की आन, परिवेश, महत्व की अपनी हिंदी में कही गई बात को लंदन में अंग्रेज़ों को कैटरीना कैफ के ज़रिए अंग्रेज़ी में जतला कर उन्हें करारा जवाब देते हैं.

Hindi Medium

* हिदी मीडियम फिल्म ने तो हिंदी के प्रति हमारे सौतेले व्यवहार पर ही हास्य के रूप में ही सही सशक्त व्यंग्य किया है. इसमें इरफान ख़ान व सबा कमर ने उम्दा अभिनय के ज़रिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया.

Hindi Diwas Special

साल १९१८ में महात्मा गांधीजी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने पर ज़ोर दिया था. उन्होंने इसे जनमानस की भाषा भी कहा था. आख़िरकार फिर १४ सितंबर, १९४९ के दिन हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिल. तब से हर साल यह दिन ‘हिंदी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.

हिंदी है हम!..

– ऊषा गुप्ता 

प्रभास व श्रद्धा कपूर की साहो फिल्म आज भारतभर में तीन हज़ार स्क्रिन के साथ रिलीज़ हो गई है. इसके पहले कल यह यूईए में रिलीज़ हुई थी, जहां पर इसे दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला. सुजीत द्वारा लिखित व निर्देशित क़रीब पौने तीन घंटे की साहो मारधाड़, रहस्य-रोमांच, एक्शन, लव-रोमांस के साथ भरपूर मनोरंजन करती है. सभी की जिज्ञासा दूर करते हुए ये बता दे कि साहो का अर्थ है ‘जय हो’ यानी ‘ऑल हेल’ (सभी का स्वागत है).

Saaho

यूवी क्रिएशंस व टी-सीरीज़ द्वारा निर्मित साहो की कहानी कई बार देखी गई आम-सी है. एक शख़्स यानी एक्टर प्रभास शहर के लोगों की जान बचाने के लिए ढेरों हथियारों से लैस खलनायकों से अकेला लड़ता है. वह हर क़दम पर उनका डटकर मुक़ाबला करता है. प्रभास का एक्शन, स्टंट, फाइटिंग सीन काबिल-ए-तारीफ़ है. इसमें कई बार उसकी मदद पुलिस के रोल में श्रद्धा कपूर भी करती हैं. ज़बर्दस्त एक्शन के साथ कुछ सस्पेंस भी है, जिसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी. पुलिसवाली के क़िरदार में श्रद्धा कपूर ने कई लाजवाब एक्शन व फाइट सीन किए हैं. वे दुश्मनों से लड़ने में प्रभास का भरपूर साथ देती हैं. फाइटिंग के सीन के अलावा गानों में वे बेहद हॉट व दिलकश लगी हैं. इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रभास व श्रद्धा कपूर की केमेस्ट्री लाजवाब है.

Saaho

साहो में वीएफएक्स का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है. फिल्मों में खलनायकों की भरमार है और सभी लोग दो लाख करोड़ रुपए ढूंढ़ रहे हैं.

हिंदी के अलावा तमिल व तेलगू में भी फिल्म रिलीज़ हुई है, पर गौर करनेवाली बात यह है कि यह डब नहीं हुई है, बल्कि इसे तीनों ही भाषाओं में शूट किया गया है. इसी कारण लोगों की पसंद में फ़र्क़ पड़ सकता है, क्योंकि हिंदी फिल्मों के दर्शक व साउथ फिल्मों के ऑडियंस की पसंद में थोड़ा अंतर है. इसलिए यह कहा जा सकता है कि हिंदी फिल्मों के फैन्स को भले ही फिल्म उतनी ग्रेट न लगे, पर दक्षिण भारतीयों के लिए यह प्रभास की स्पेशल फिल्म है. आख़िरकार बाहुबली 2 के बाद इस फिल्म को उन्होंने दो साल दिए हैं. उनकी मेहनत व जुनून फिल्म में दिखती है.

Saaho Reviews

चंकी पांडे विलेन की भूमिका में सभी से बाज़ी मार ले जाते हैं. अन्य कलाकारों में नील नितिन मुकेश, जैकी श्रॉफ, महेश मांजरेकर, टीनू आनंद, एवलिन शर्मा, अरुण विजय, मंदिरा बेदी, मुरली शर्मा सभी ने अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है.

इसके कई संगीतकार है, जिसमें शंकर-एहसान-लोय, गुरु रंधवा, तनिष्क बागची, बादशाह, एम. घिंबरण हैं. सभी ने अपनी तरफ़ से बेस्ट म्यूज़िक दिया है. शंकर महादेवन, बादशाह, नीति मोहन, तुलसी कुमार, हरिचरण, श्‍वेता मोहन, सिद्धार्थ महादेवन द्वारा गाए गीत सुमधुर हैं. इसमें सायको सैंया… बेहद ख़ूबसूरत बन पड़ा है. बेबी वोन्ट यू टेल मी, इन्नी सोनी, ये छोटा नुवुना, बेड बॉय गाने भी पसंद किए जा रहे हैं.

Saaho

क़रीब 350 करोड़ के बजट में बनी साहो दर्शकों को कितनी पसंद आती है, यह तो कुछ दिनों में ही पता चल जाएगा. लेकिन प्रभास के फैन इससे निराश नहीं होंगे. प्रभास का हर एक्शन, रिएक्शन, डायलॉग उन्हें ख़ूब पसंद आएगा.

Saaho

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– ऊषा गुप्ता

रेखा (Rekha) ऐसी अदाकारा हैं, जिन्हें अधिकतर अभिनेत्रियां अपना आदर्श मानती हैं. कंगना (Kangana) भी उनमें से एक हैं. दरअसल, रेखाजी में एक ख़ास आकर्षण भी है, जिस कारण वे जहां कहीं भी जाती हैं छा जाती हैं. कुछ ऐसा ही हुआ जब वे कंगना के साथ एक अवॉर्ड फंक्शन में जमकर नाचीं. सभी दोनों की जुगलबंदी को देख दंग रह गए.

Rekha and Kangana

 

 

समारोह की ख़ास बात रही रेखाजी द्वारा दी गई कांजीवरम साड़ी को पहनकर कंगना का फंक्शन में शामिल होना. रेखाजी ने साल 2015 में क्वीन फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड देने के लिए कंगना के घर पर गई थीं. उस समय उन्होंने कंगना को साड़ी भी तोह़फे में दी थी. संयोग की बात है कि दोनों ही कलाकारों ने कांजीवरम साड़ी पहनी थी और बेहद ख़ूबसूरत लग रही थीं.

कंगना को अवॉर्ड देने जब रेखा स्टेज पर आईं, तो उन्होंने कंगना के कहने पर उन्हें कई डांस स्टेप्स भी सिखाएं, ख़ासतौर पर उमराव जान का गाना इन आंखों की मस्ती के… और मि. नटरवलाल का परदेसिया… साथ ही रेखा-कंगना मराठी गानों पर भी बिंदास होकर ख़ूब नाचीं. इन दोनों की जुगलबंदी सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हो रही है.

इस मराठी ज़ी टॉकीज़ अवॉर्ड फंक्शन में कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं. रेखा, कंगना रनौत के अलावा आशा पारेख, जया प्रदा, सरोज ख़ान, सारा अली ख़ान आदि ने भी शिरकत की. आइए, देखें तस्वीरें.

Rekha and Kangana

Rekha with Kangana

 

Rekha and Kangana

 

Rekha and Kangana

Rekha and Kangana

Rekha

Rekha with Kangana

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हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता बहुमुखी प्रतिभा के धनी कादर ख़ान (Kadar Khan) हमारे बीच नहीं रहे. वे एक नेकदिल इंसान के साथ-साथ एक सच्चे हमदर्द व दोस्त थे. अपने हो या पराए सभी के साथ उनका अपनापन उन्हें बेहद ख़ास बना देता था. हम सभी उन्हें उनकी लाजवाब अभिनय, फिर चाहे वो चरित्र अभिनेता, खलनायक, कॉमेडी ही क्यों न हो के लिए हमेशा याद करते रहेंगे.

Kadar Khan

अभिनय के साथ-साथ उनकी कथा, पटकथा, संवाद की लेखनी भी दमदार थी. उन्होंने मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा के साथ मिलकर कई सुपरहिट फिल्मों की स्क्रिप्ट भी लिखी है. इसमें धर्म वीर, अमर अकबर एंथनी, देश प्रेमी, सुहाग, कुली, गंगा जमुना सरस्वती, मुकद्दर का सिकंदर, लावारिस, कुली नंबर वन, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, कर्मा आदि ख़ास हैं. उन्होंने क़रीब ढाई सौ फिल्मों के संवाद लिखे और तीन सौ से भी अधिक फिल्मों में काम किया.

उनकी कॉमेडी तो इतनी उम्दा थी कि जब भी वे पर्दे पर आते थे दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी. यूं तो उन्होंने अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख ख़ान तक सभी कलाकारों के साथ काम किया, पर गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही. दोनों के कॉमेडी के पंच और सीन्स आज भी लोगों को ख़ूब हंसाते-गुदगुदाते हैं.

आज कादर ख़ान भले ही हमसे दूर चले गए हों, पर उनके संवाद व सशक्त अभिनय हमारे दिलों में सदा ज़िंदा रहेंगे.

ज़िंदगी के सफ़र पर एक नज़र…

* कादर ख़ान का जन्म काबुल में 22 अक्टूबर 1937 को हुआ था.

* उन्होंने अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत दाग़ फिल्म से की थी.

* फिल्म में अभिनय करने से पहले उन्होंने फिल्म जवानी दीवानी के संवाद लिखे थे.

* मेरी आवाज़ सुनो और अंगार फिल्मों के लिए उन्हें बेस्ट डायलॉग के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.

* हिंदी सिनेमा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें साहित्य शिरोमणि पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.

* वे मुंबई के इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर भी रहे थे.

* शक्ति कपूर के साथ उनकी यादगार जोड़ी रही थी. दोनों ने सौ से भी अधिक फिल्मों में साथ काम किया.

* उनकी आख़िरी फिल्म दिमाग़ का दही थी, जो साल 2015 में आई थी.

* अभिनय से रिटायरमेंट लेने के बाद वे मुंबई से कनाडा अपने बेटे सरफराज़ के यहां चले गए.

* 81 वर्षीय कादर ख़ान के अंतिम समय में उनकी पत्नी हिज्रा, उनके बेटे, बहू, नातियां उनके साथ थीं.

* उनके बेटे के अनुसार, कनाडा में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

* फिल्म इंडस्ट्री व अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, स्मृति ईरानी, असरानी, परेश रावल, अनिल कपूर, अक्षय कुमार, अर्जुन कपूर, वरुण धवन, मधुर भंडराकर के साथ-साथ अन्य लोगों ने अपनी भावनाएं व्यक्त की.

* अमिताभ बच्चन ने भावुक होते हुए कहा कि कादर ख़ान बहुमुखी प्रतिभा के धनी व समर्पित कलाकार थे. उनकी लेखनी भी ग़ज़ब की थी. मेरे अधिकतर सफल फिल्में, जैसे- मुकद्दर का सिकंदर, कुली, हम, शहंशाह, मि. नटरवरलाल, सुहाग, अदालत सहित तक़रीबन 21 फिल्मों में अभिनेता, संवाद, पटकथा लेखक के रूप में उन्होंने काम किया था.

* ज़िंदगी का सफ़र हमें कहां से कहां ले जाता है, कई बार इसे हम भी नहीं समझ पाते. तभी तो कादर ख़ान अफगानिस्तान के काबुल में जन्मे, भारत में मुंबई में अपनी अदाकारी-लेखनी का लोहा मनवाया, अंतिम पड़ाव पर परिवार के साथ कनाडा में बिताए.

मेरी सहेली परिवार की ओर से भानभीनी श्रद्धांजलि!

– ऊषा गुप्ता

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Bhaiaji Superhit Review

इन दिनों सनी देओल की कई सालों से अटकी फिल्में सिलसिलेवार आ रही हैं. पिछले हफ़्ते मौहल्ला अस्सी आई, जो काफ़ी समय से बन रही थी. अब आज भैयाजी सुपरहिट सिनेमा के पर्दे पर आ पाई है. दोनों ही फिल्मों में अभिनय के मामले में सनी देओल ने काबिल-ए-तारीफ़ अभिनय किया है.

भैयाजी अपनी पत्नी सपना के छोड़कर चले जाने से परेशान हैं. वे किसी भी क़ीमत पर अपनी पत्नी को वापस लाना चाहते हैं. इसके लिए फिल्मों में काम करने के लिए मुंबई आना, अभिनय करना, कुछ पुराने दुश्मनों से भिड़ना आदि चलता रहता है. इसमें निर्देशक व लेखक के रूप में अरशद-श्रेयस की जुगलबंदी देखते ही बनती है.

भैयाजी सुपरहिट में भी सनी देओल दबंग के क़िरदार में अपना दबदबा दिखाने में सफल रहे हैं. वे अपनी पत्नी सपना (प्रीति ज़िंटा) को बेइंतहा चाहते हैं और उससे डरते भी हैं. सपना के क़िरदार में प्रीति ने बेहतरीन काम किया है. वे बोलती कम और गोली ज़्यादा चलाती हैं. हमेशा शरारती-चुलबुली अंदाज़ में दिखनेवाली प्रीति एक नए ही अंदाज़ में सपना के रूप में चटक साड़ियों, भरी चूड़ियों में प्रभावशाली पत्नी के ज़बर्दस्त रोल में नज़र आती हैं. लंबे समय बाद प्रीति ज़िंटा को पर्दे पर देखना सुकून की तरह रहा. जब-जब पर्दे पर अरशद और श्रेयस की एंट्री होती है, लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. दोनों ही कलाकारों की कॉमेडी टाइमिंग लाजवाब है. कह सकते हैं कि प्रीति ज़िंटा के अलावा अन्य सभी कलाकारों यानी अमीषा पटेल, अरशद वारसी, श्रेयस तलपड़े, मिथुन चक्रवर्ती, मुकुल देव, जयदीप अहलावत, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, प्रकाश राज, एवलिन शर्मा सभी ने अपनी-अपनी भूमिकाओं को पूरी ईमानदारी से निभाया है.

नीरज पाठक का निर्देशन स्तरीय है. थोड़ी-सी और मेहनत करते तो फिल्म के सभी उम्दा कलाकारों से और भी बढ़िया काम करवा सकते थे. निर्माता चिराग धारीवाल और फौजिया अर्शी के साहस की दाद देनी होगी कि इतने सालों बाद ही सही फिल्म रिलीज़ तो हुई. साजिद-वाजिद, संजीव-दर्शन, जीत गांगुली, राघव सच्चर, अमजद नजीम, फौजिया अर्शी जैसे संगीतकारों का जमावड़ा है, पर एक भी गाना दिलोदिमाग़ पर ठहर नहीं पाता है. सुखविंदर सिंह, असीस कौर, यासेर देसाई के गाए गीत बस थोड़ी-सी राहत भर दे पाते हैं. फिल्म में एक्शन, कॉमेडी के साथ ईमोशंस भी है. भैयाजी सुपरहिट  होगी की नहीं पता नहीं पर भैयाजी तो हमेशा ही हिट हैं.

– ऊषा गुप्ता

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 Mohalla Assi/Pihu
मोहल्ला अस्सी- धर्म, संस्कृति, राजनीति पर करारा व्यंग्य

एक ओर सनी देओल अलग व दमदार अंदाज़ में नज़र आते हैं मोहल्ला अस्सी में, तो वहीं पीहू में दो साल की बच्ची की मासूम अदाकारी बेहद प्रभावित करती है.

हिंदी साहित्यकार काशीनाथ सिंह की काशी का अस्सी पर आधारित मोहल्ला अस्सी फिल्म धर्म, राजनीति, आस्था, परंपरा आदि के माननेवाले को बहुत पसंद आएगी. भारतीय सोच पर भी करारा व्यंग्य किया गया है. वैसे भी जो मज़ा बनारस में वो न पेरिस में है, न फारस में… इसी चरितार्थ करती है फिल्म. निर्माता विनय तिवारी की यह फिल्म चाणक्य सीरियल व पिंजर मूवी फेम डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी  के बेहतरीन निर्देशन के कारण बेहद आकर्षक व ख़ास बन गई है. बनारस के निवासी, गंगा नदी, घाट, गली-मोहल्ले, वहां के तौर-तरी़के, लोगों की विचारधारा, राजनीति का प्रभाव, धर्म, कर्मकांड सभी का ख़ूबसूरत चित्रण किया गया है.

कहानी बनारस के मोहल्ला अस्सी की है, जहां पर धर्मराज पांडे यानी सनी देओल ब्राह्मणों की बस्ती में अपनी पत्नी साक्षी तंवर और बच्चों के साथ रहते हैं. वे जजमानों की कुंडली बनाते हैं और संस्कृत भी पढ़ाते हैं. अपने धर्म व उससे जुड़ी अन्य बातों को लेकर वे इतने सख़्त रहते हैं कि अपने मोहल्ले में विदेशी सैलानियों को किराए पर घर रहने के लिए नहीं देते और न ही अन्य लोगों को ऐसा करने देते हैं. उनका मानना है कि विदेशियों के खानपान व आचरण के सब गंदा व अपवित्र हो रहा है. लेकिन हालात करवट बदलते हैं और उन्हें आख़िरकार न चाहते हुए वो सब करना पड़ता है, जिसके वे सख़्त ख़िलाफ़ थे. फिल्म में पप्पू चाय की दुकान भी है, जो किसी संसद से कम नहीं. जहां पर वहां के लोग हर मुद्दे पर गरमागरम बहस करते हैं, फिर चाहे वो राजनीति का हो या फिर कुछ और.

सनी देओल अपनी भाव-भंगिमाएं व प्रभावशाली संवाद अदाएगी से बेहद प्रभावित करते हैं. उनका बख़ूबी साथ देते हैं साक्षी तंवर, रवि किशन, सौरभ शुक्ला, राजेंद्र गुप्ता, मिथलेश चतुर्वेदी, मुकेश तिवारी, सीमा आज़मी, अखिलेंद्र मिश्रा आदि. अमोद भट्ट का संगीत स्तरीय है. विजय कुमार अरोड़ा की सिनेमाटोग्राफी क़ाबिल-ए-तारीफ़ है.

Mohalla Assi/Pihu

Pihu

 

पीहू- नन्हीं बच्ची का कमाल

निर्देशक विनोद कापड़ी की मेहनत, लगन और धैर्य की झलकियां बख़ूबी देखने मिलती है पीहू फिल्म में. आख़िरकार उन्होंने दो साल की बच्ची से कमाल का अभिनय करवाया है. कथा-पटकथा पर भी उन्होंने ख़ूब मेहनत की है. निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर, रोनी स्क्रूवाला व शिल्पा जिंदल बधाई के पात्र हैं, जो उन्होंने विनोदजी और फिल्म पर अपना विश्‍वास जताया. बकौल विनोदजी यह सच्ची घटना पर आधारित है और इस पर फिल्म बनाना उनके लिए किसी चुनौती से कम न था.

फिल्म की जान है पीहू यानी मायरा विश्‍वकर्मा. उस नन्हीं-सी बच्ची ने अपने बाल सुलभ हरकतों, शरारतों, मस्ती, सादगी, भोलेपन से हर किसी का दिल जीत लेती है.

कहानी बस इतनी है कि पीहू की मां (प्रेरणा विश्‍वकर्मा) का देहांत हो चुका है और उनकी बॉडी के साथ वो मासूम बच्ची घंटों घर के कमरे में अकेले व़क्त बिताती है. उसे नहीं पता कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं है, वो मासूम उनसे बात करती है, घर में इधर-उधर घूमती है, भूख लगने पर गैस जलाकर रोटी भी सेंकने की कोशिश करती है, घर को अस्त-व्यस्त, उल्टा-पुल्टा कर देती है. सीन दर सीन उत्सुकता, डर, घबराहट, बेचैनी भी बढ़ती जाती है. कम बजट में विनोदजी ने लाजवाब फिल्म बनाई है.

– ऊषा गुप्ता

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Amitabh Bachchan Birthday

आज युग पुरुष अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) 78 साल के हो गए हैं, मानो एक युग बीत गया हो उनके अभिनय को देखते, गाते, हंसते-मुस्कुराते. उम्दा कलाकार, बेजोड़ अभिनय, लाजवाब एक्शन… उनका हर रूप, हर रंग, हर अदा बेमिसाल…

सात हिंदुस्तानी से जो सफ़र शुरू हुआ, वो आज भी बरकरार है. कितने दशक सतत काम करते रहे… हर युवा के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं वे. उनकी ख़ूबसूरत फिल्में, सशक्त अभिनय, बहुमुखी भूमिकाएं सदा हमारा मनोरंजन करने के साथ-साथ प्रेरणा भी देती हैं कि हम सदा कर्मठ बने रहें…

वैसे कौन बनेगा करोड़पति टीवी शो के ज़रिए आज भी वे उतने ही जवां, हरफनमौला परफॉर्मेंस को अंजाम दे रहे हैं और करोड़ों दिलों पर राज़ कर रहे हैं. वे यूं ही ताउम्र अभिनय करते रहें, यही दुआ और शुभकामनाएं!

मेरी सहेली परिवार की तरफ़ से उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई!

एबी जर्नी…

* अमिताभ बच्चन का जन्म इलाहाबाद में 11 अक्टूबर को हुआ था.

* उनके पिता हरिवंश राय बच्चन हिंदी के जाने-माने लेखक थे और मां तेजी बच्चन भी बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं.

* पहले उनका नाम इंकलाब रखा गया था, पर बाद में अमिताभ रखा गया, जिसका मतलब ऐसा प्रकाश जो कभी नहीं बुझेगा.

* बहुत कम लोग जानते हैं कि अमिताभ बच्चनजी का सरनेम श्रीवास्तव है, पर चूंकि उनके पिता कवि हरिवंश रायजी उपनाम बच्चन लगाते थे, उन्होंने भी अपने नाम के साथ यही उपनाम रहने दिया.

* अमितजी ने दो बार एमए किया था. इलाहाबाद और नैनीताल में अपनी शिक्षा पूरी की.

* करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने कोलकता की एक शिपिंग कंपनी में जॉब भी किया था.

* 3 जून 1973 को अपनी साथी कलाकार जया भादुड़ी के साथ उन्होंने विवाह किया. उनके दो बच्चे अभिषेक और श्‍वेता हैं.

* अपनी पहली ही फिल्म सात हिंदुस्तानी के लिए उन्हें न्यूकमर का नेशनल अवॉर्ड मिला था.

* आनंद फिल्म में उनके बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए उन्होंने बेस्ट सर्पोेंटिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था.

* फिल्मी करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने परवाना फिल्म में खलनायक की भी भूमिका निभाई थी.

* वे अपने संघर्ष के दिनों में कई सालों तक हास्य कलाकार महमूद के घर भी रहे थे.

* ज़ंजीर फिल्म उनके करियर का टर्निंग प्याइंट रहा. यही से उनके एंग्री यंग मैन का क़िरदार मशहूर हुआ.

* इसी दौर में उनके अभिमान और नमक हराम फिल्म को काफ़ी पसंद किया गया. राजेश खन्ना और रेखा के साथ की नमक हराम के लिए तो उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट सर्पोंटिंग एक्टर का अवॉर्ड भी मिला.

* फिर चुपके-चुपके, दीवार, शोले, अमर अकबर एंथोनी, कभी-कभी फिल्मों से जो कामयाबी का सिलसिला चल पड़ा, वो अब तक बरकरार है.

* रेखा के साथ की फिल्म मि. नटवरलाल के गाने मेरे पास आओ मेरे दोस्तों एक क़िस्सा सुनाऊ… गाने से उन्होंने पहली बार फिल्मों में अपनी आवाज़ दी. इसके लिए उन्हें पुरस्कार भी मिला.

* साल 1982 में कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान लगे चोट और गंभीर स्थिति होने, फैन्स व लोगों के प्यार, दुआओं के सिलसिले ने यह साबित कर दिया कि अमिताभ बच्चन कितने बड़े स्टार बन गए थे और दर्शकों के लिए उनके दिल में किस कदर प्यार है.

* साथ ही फिल्म के निर्देशक मनमोहन देसाई पर भी इसका ऐसा असर हुआ कि उन्होंने फिल्म का अंत बदल दिया. उनका कहना था कि यह महान शख़्स मौत को जीतकर वापस आया है, तो भला मैं फिल्म में ऐसे कैसे दिखा सकता था. आज भी कुली फिल्म के उस फाइट सीन में जिसमें अमिताभ बच्चन घायल हुए थे, फिल्म देखते समय पॉज़ करके नीचे इसके बारे में कैप्शन दिखाया जाता है.

* उन्हें राजनीति में भी न चाहते हुए दोस्ती की ख़ातिर आना पड़ा, पर आख़िरकार इसे उन्होंने अलविदा कह दिया.

* राजनीति, फिल्म से जुड़े तमाम विवादों के चलते उन्होंने काफ़ी लंबे समय तक मीडिया से भी दूरी बनाए रखी.

* शहंशाह से उनकी ज़बर्दस्त दूसरी इनिंग शुरू हुई. फिर हम, अग्निपथ फिल्मों की सफलता ने उन्हें फिर से स्थापित किया. अग्निपथ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.

* एबीसीएल के बैनर तले उन्होंने कई फिल्में भी बनाई.

* साल 2000 में टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति उनके करियर का मील का पत्थर साबित हुई. इस शो के ज़रिए अमितजी को लोगों का भरपूर प्यार, सराहना, मान-सम्मान मिला. जो अब तक बरकरार है.

– ऊषा गुप्ता

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बदलापुर, जॉनी गद्दार के बाद एक बार फिर श्रीराम राघवन ने साबित कर दिया कि थ्रिलर-सस्पेंस मूवी बनाने में उन्हें महारात हासिल है. अंधाधुन फिल्म की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, परत-दर-परत आश्‍चर्य, रोमांच, रहस्य, बेचैनी भी बढ़ती चली जाती है. बहुत दिनों बाद सशक्त कथा-पटकथा और निर्देशन का संगम देखने को मिला. फ्रेंच शॉर्ट फिल्म द पियानो ट्यूनर पर आधारित फिल्म की जान है आयुष्मान खुराना और तब्बू.

Andhadhun

 

आयुष्मान ने एक नेत्रहीन संगीतकार के रूप में ग़ज़ब का अभिनय किया है. राधिका आप्टे ने उनका बख़ूबी साथ निभाया है.

किस तरह राधिका व आयुष्मान मिलते हैं, फिर राधिका उन्हें अपने पिता के पब में पियानो प्लेयर का जॉब दिलवा देती हैं. कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब तब्बू के पति तब्बू को सरप्राइज़ देने जाते हैं और उनका मर्डर हो जाता है. फिर तब्बू और उनका प्रेमी लाश को ठिकाने लगाने में अचानक घर पहुंचे अंधे आयुष्मान की भी मदद लेते हैं. फिर शुरू होता है- लालच, धोखा, फरेब का मायाजाल और इससे जुड़ा हर कलाकार उसमें फंसता चला जाता है.

बहुत दिनों बाद ग्रे शेड में तब्बू ने बेहद प्रभावशाली अभिनय किया है. उनकी भूमिका डर, चिढ़, घबराहट, ग़ुस्सा सब कुछ पैदा करती है. आयुष्मान का क़िरदार पूरी फिल्म में रहस्य से भरपूर रहता है. कभी लगता है कि ऐसा हो सकता है, तो कभी लगता है नहीं यह ठीक नहीं है. साथी कलाकारों में अनिल धवन, जाकिर हुसैन, अश्‍विनी कालसेकर ने भी बेहतरीन अभिनय किया है. अमित त्रिवेदी, रफ़्तार, गिरीश नकोड का संगीत यूं तो अधिक बांधे नहीं रखता, पर कहानी को फ्लो में भी ले जाता है.

Andhadhun
लवयात्री

प्यार के सफ़र में न जाने कितने मंज़र मिले..

कुछ दर्द से बंधे, कुछ दिल से मिले…

कुछ ऐसा ही महसूस होता है लवयात्री को देखकर. अब यह दर्शकों पर ही निर्भर है कि वे क्या सोचते हैं. सलमान ख़ान के बैनर तले बनी लवयात्री प्यार करनेवालों को पसंद आ जाए, इतना ही बहुत है. हीरो आयुष शर्मा की नवरात्री में हीरोइन वारिना हुसैन से मुलाक़ात, दोस्ती, प्यार, फिर घरवालों का विरोध… वही आम-सी कहानी. संगीत और कुछ सीन्स अच्छे बन पड़े हैं. आयुष-वारिना की यह पहली फिल्म है, पर दोनों ही ख़ास प्रभावित नहीं कर पाए. रोनित रॉय, राम कपूर ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.

– ऊषा गुप्ता

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