hindi shayari

लॉकडाउन पर विशेष

सब प्रतीक्षारत हैं
बैठे हैं
वक़्त की नब्ज़ थामे
कि कब समय सामान्य हो
और रुके हुए लम्हे चल पड़ें

राहों को प्रतीक्षा है
पदचापों की, घंटियों की, होर्न्स की
एक अनवरत चलते आवागमन की
जो उनकी धड़कन हैं
उनके होने का प्रमाण
उन्हें प्रतीक्षा है यात्रियों की
जिन्हें वो मंज़िल तक पहुंचा सकें
अपने होने को सार्थक बना सकें

घरों को प्रतीक्षा है
हलचल की
हंसी, ठिठोली, कहकहों की
दहलीज़ की
लक्ष्मण-रेखा लांघ कर
कोई भीतर आ सके
बाहर जा सके
उन्हें प्रतीक्षा है अपनों की
ख़ुशियों के उस सन्दूक के खुलने की
जिसकी चाभी अपनों के
पास है
ख़ुशियों का वो सन्दूक
अब न जाने कब खुले

रसोईघरों को प्रतीक्षा है
उनमें पसरी हुई ख़ामोशी के टूटने की
चाय का पानी उबले
कप खनकें
बर्तन सजें
पकवान बनें
अतिथि आएं
अतिथि देवो भव:
अब ये देवता न जाने कब आ पाएं
सब प्रतीक्षारत हैं

प्रार्थनाघरों, स्कूलों, दफ़्तरों
क्रीडांगनों को प्रतीक्षा है
कि उनके प्रांगण और दर-ओ-दीवार
फिर से एक बार ज़िंदगी से भर जाएं
हर आंख लगी है
उस तरफ़
जिधर से आएगा
एक झोंका
हवा का
सकारात्मकता का
ईश कृपा का
और बदल जाएगी पूरी की पूरी दुनिया…

Archana jauhari
अर्चना जौहरी

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Kavay

बहुत कम लोग जानते हैं कि मशहूर अदाकारा मीना कुमारी को शायरी का भी शौक़ था. शायरी का ये शौक़ ही उन्हें गुलजार के करीब ले गया था. मीना कुमारी के शायराना अंदाज़ और अदाकारी पर गुलजार बहुत फिदा थे. फ़ुर्सत के लम्हों में दोनों शेर-ओ-शायरी पर बातें किया करते थे. फिर एक दिन मीना कुमारी अपनी तमाम निजी डायरियां गुलज़ार को सौंपकर दुनिया से रुख़सत हो गईं. मीना कुमारी की जाने के बाद उनकी लिखी नज़्मों और ग़ज़लों को गुलज़ार ने एक नया कलेवर देकर ‘मीना कुमारी की शायरी’ नामक किताब प्रकाशित करवाई. आप भी पढ़िए मशहूर अदाकारा मीना कुमारी की चुनिंदा शायरी.

Actress Meena Kumari

मशहूर अदाकारा मीना कुमारी की चुनिंदा शायरी
आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता
जब ज़ुल्फ़ की कालक में घुल जाए कोई राही
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता

चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा
दिल मिला है कहाँ कहाँ तन्हा
बुझ गई आस छुप गया तारा
थरथराता रहा धुआँ तन्हा

यूँ तेरी रहगुज़र से दीवाना-वार गुज़रे
काँधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुज़रे
बैठे हैं रास्ते में दिल का खंडर सजा कर
शायद इसी तरफ़ से इक दिन बहार गुज़रे

बरसात मुबारक हो, ये साथ मुबारक हो
हर दिन रहे सलोना, हर रात मुबारक हो
सँवलाई हुई शामों को, हर सुब्ह मुबारक हो
हिचकी हो या सिसकी हो, हर नग़्मा मुबारक हो

रूह का चेहरा किताबी होगा
जिस्म का रंग उन्नाबी होगा
शरबती रंग से लिक्खो आँखें
और एहसास शराबी होगा

तेरे क़दमों की आहट को ये दिल है ढूँडता हर दम
हर इक आवाज़ पर इक थरथराहट होती जाती

हँसी थमी है इन आँखों में यूँ नमी की तरह
चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह

कहीं कहीं कोई तारा कहीं कहीं जुगनू
जो मेरी रात थी वो आप का सवेरा है

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