Hindu Dharma

हमने अपनी नानी-दादी को कहते सुना है कि सिंदूर का गिरना बहुत अशुभ संकेत है इसीलिए वो सिंदूर को बहुत संभालकर रखती थीं. क्या वाकई सिंदूर का गिरना अशुभ होता है? सिंदूर गिरने के शुभ-अशुभ संकेत के बारे में बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो-न्यूमरोलॉजी-वास्तु व फेंगशुई एक्सपर्ट मनीषा कौशिक.

Sindoor

सिंदूर का गिरना अशुभ क्यों माना जाता है?
अगर हम सिंदूर गिरने के बारे में जानने की कोशिश करें, तो मान्यताओं के अनुसार, सिंदूर का गिरना एक अशुभ घटना है और यह पति पर आयु संकट जैसी अशुभता का संकेत होता है. इसी डर से महिलाएं सिंदूर को बहुत संभालकर रखती हैं और उसे कभी ज़मीन पर गिरने नहीं देतीं.

यह भी पढ़ें: शादी के बाद भारतीय महिलाएं मांग में सिंदूर क्यों भरती हैं? जानें मांग में सिंदूर भरने से जुड़ी मान्यताएं (Importance And Significance Of Sindoor: Know Why Indian Married Women Put Sindoor In Their Maang)

क्या वाकई सिंदूर का गिरना अशुभ होता है?
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें, तो सिंदूर के बिखरने से कुछ भी शुभ या अशुभ नहीं होता है, ये महिलाओं का वहम मात्र है. फेरों के समय दुल्हन की मांग में अभिमंत्रित करके ईश्‍वर के आशीर्वाद के रूप में सिंदूर भरा जाता है. ऐसे में शादीशुदा महिलाओं के लिए सिंदूर बहुत ही पवित्र चीज़ हो जाती है और इसके बिखरने से उनका मन दुखी हो जाता है और उनके मन में कई तरह की शंकाएं होने लगती हैं. धार्मिक भावनाओं के कारण महिलाओं का सिंदूर से बहुत जुड़ाव होता है और वो उसे बहुत संभालकर रखती हैं.

अक्सर हम अपने बड़े-बुज़ुर्गों को कहते सुनते हैं कि घर से बाहर निकलते समय दही-चीनी खाकर निकलो. हमारी मां भी परीक्षा के समय, इंटरव्यू देने या विदेश जाते समय हमें दही-चीनी खिलाकर घर से भेजती थीं. क्या वाकई दही-चीनी खाकर घर से निकलने से शुभता आने लगती है, काम में आनेवाली अड़चनें दूर होती हैं और हमारे कार्य अच्छी तरह संपन्न होते हैं?

Curd And Sugar

शुभ काम के लिए दही-चीनी खाकर घर से निकलने के पीछे ये मान्यता है
दही और शक्कर दोनों ही चीज़ें सफ़ेद हैं और दोनों का संबंध चंद्रमा से है. चंद्रमा हमारे मन को नियंत्रित करता है. दही और शक्कर खाने से हमारे मन को ठंडक मिलती है और इससे हमारा पाचनतंत्र शांत रहता है. इसीलिए दही और शक्कर खाकर घर से निकलने को शुभ माना जाता है.

यह भी पढ़ें: पूजा करते समय दीया बुझ जाने को अशुभ क्यों माना जाता है? जानें दीया बुझ जाने के शुभ-अशुभ संकेत (Why The Lamp Extinguished While Worshiping Is Inauspicious)

Curd And Sugar

शुभ काम के लिए दही-चीनी खाकर घर से निकलने के पीछे ये सच्चाई है

  • दही बहुत सारे विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर है.
  • जब भी हम कोई महत्वपूर्ण काम करने निकलते हैं, तो हमारे दिल-दिमाग़ में बहुत हलचल चल रही होती है, जिसका असर हमारी सेहत और पाचनतंत्र पर भी पड़ता है. इससके कारण हमें एसिडिटी की तकलीफ़ हो सकती है. एसिडिटी होने पर हम असहज महसूस करते हैं, जिससे हमारे काम में रुकावट पैदा हो सकती है. ऐसे में दही एक कूलिंग एजेंट का काम करता है और हम जो भी खाते हैं उसे पचाने में सहायता करता है.
  • इसी तरह चीनी यानी शुगर हमारे शुगर लेवल का बैलेंस बनाए रखती है. जब पाचनतंत्र और शुगर लेवर सही रहता है तो हमारे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और हम अपना काम मन लगाकर कर पाते हैं.
    यही वजह है कि हमारे बड़े-बुज़ुर्ग घर से बाहर निकलने से पहले हमें दही-चीनी खिलाते थे.

Know the reason why Dhanteras, Saraswati and Lakshmi are worshiped on Deepawali?

भारत त्योहारों का देश कहलाता है और ध्यान रहे इन त्योहारों के भीतर भारतीय दर्शन का मर्म छिपा हुआ है. दीपों का त्योहार दीपावली हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है और वह एक दिन का न होकर पांच दिन का त्योहार होता है.
मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के समय अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. धनतेरस इन्हीं आरोग्य के देवता और वैद्य धन्वंतरि के जन्मदिन पर मनाया जाता है, जो कि दीपावली से दो दिन पूर्व आता है.
सही भी है हमारा असली धन, तो हमारा शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास ही है.
भारत सरकार ने भी धनतेरस को ‘राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है.
एक बात जो दिमाग़ में आती है वह यह कि यह त्योहार ‘वाग बरस’ नहीं बल्कि ‘वक बारस’ है.
शब्दकोश वाक्य भाषण और भाषा का अर्थ देता है. पीड़ा के कुछ हिस्से को भाषण के रूप में जाना जाता है. सरस्वती वाणी या भाषा की देवी है. यही वजह है कि सरस्वती को वाग्देवी के नाम से भी जाना जाता है. हमारी वाणी और भाषा को अच्छा रखने और बुद्धि को दूषित किए बिना हमारे आचरण को अच्छा रखने की दृष्टि से दीपावली के दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है.
वाक्य को विकृत करके लोगों ने बाघ को मार डाला और पूरे त्योहार को बाघ बरस के रूप में जाना जाने लगा, लेकिन हमारी हिन्दू संस्कृति और दर्शन का कहना है कि लक्ष्मी की पूजा करने से पहले सरस्वती की पूजा की जानी चाहिए. इसलिए हमारे पूर्वज धनतेरस के अगले दिन लक्ष्मी की पूजा से पहले ‘वास बार’ के दिन मां सरस्वती की पूजा करते हैं.
इस त्योहार का बाघों से कोई लेना देना नहीं है. उस दिन केवल मां सरस्वती की पूजा की जानी चाहिए और उनके चरणों में प्रणाम कर प्रार्थना करनी चाहिए- “हे मां आप हमारे घर लक्ष्मी के रूप में आएं, हमें पवित्रता प्रदान करें और हमारी वाणी में रहें. हमारे दिल साफ़ हैं और हमारे घर साफ़-सुथरे हैं. जहां पहले सरस्वती है, लक्ष्मी भी कल वहीं रहेगी…”

– उषा वधवा

Dhanteras, Saraswati And Lakshmi

यह भी पढ़ें: राशि के अनुसार ऐसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न (How To Pray To Goddess Lakshmi According To Your Zodiac Sign)

हम सब के साथ कभी न कभी ऐसा अवश्य हुआ है कि हम पूजा करने के लिए ज्योत जगाते हैं और किसी कारणवश दीया बुझ जाता है. ऐसा होते ही हम या हमारे आसपास खड़े लोगों के मन में शंका व वहम घर कर जाता है कि न जाने अब क्या अशुभ होगा. क्या सही में ज्योत का बुझ जाना अशुभ संकेत है? शुभ-अशुभ मान्यताओं की सच्चाई बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो-न्यूमरोलॉजी-वास्तु व फेंगशुई एक्सपर्ट मनीषा कौशिक.

Lamp

पूजा करते समय दीया बुझ जाने को अशुभ क्यों माना जाता है?
किसी पूजा-अनुष्ठान में या घर में पूजा करते हुए यदि दीया बुझ जाता है, तो सभी लोग परेशान हो जाते हैं. दीया बुझने को ज़्यादातर लोग अशुभ संकेत मानते हैं. कई लोग ये भी मानते हैं कि भगवान ने पूजा स्वीकार नहीं की. हमारे घर के बड़े दीया बुझने को अशुभ मानते हैं इसलिए हम भी दीया बुझ जाने से घबरा जाते हैं.

यह भी पढ़ें: बच्चों को काला टीका क्यों लगाते हैं, अमृता सिंह ने बेटी सारा अली खान को बुरी नज़र से बचाने के लिए क्यों लगाया काला टीका? (Why Do Indians Put Kaala Teeka On Babies, Why Did Amrita Singh Apply Kaala Teeka To Protect Daughter Sara Ali Khan From Evil Eyes?)

Diwali Lamp

पूजा करते समय दीया बुझ जाए, तो करें ये…
अगर हम ज्योत जलाने की प्रक्रिया को शुरू से देखें, तो वो इस प्रकार होगी- सबसे पहले हम मंदिर में ज्योत के दीये को धोकर साफ़ करते हैं, फिर रूई या कलावा की बत्ती बनाते हैं. कुछ लोग इस बत्ती को बनाने के लिए दो बूंद पानी का इस्तेमाल भी करते हैं. उसके बाद दीये के बीच उस ज्योत को स्टैंड में लगा उसमें घी या तेल डालते हैं. इस प्रक्रिया में दीये को धोते समय ठीक से सुखाया न जाए या दीये के स्टैंड को ठीक से दाफ़ न किया जाए या फिर बत्ती बनाते समय उसमें ज़्यादा पानी लग जाए, तो ज्योत ठीक से नहीं जलेगी. ऐसी स्थिति में दीया बुझ भी सकता है. दीया बुझ जाने को अशुभ मानने की कोई ज़रूरत नहीं है. ईश्‍वर से क्षमा मांगकर आप फिर से दीया जला लें.

मां दुर्गा के विभिन्न रूपों और स्वरूपों के दर्शन करें और आशीर्वाद लें! आप सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएँ!

यह भी पढ़ें: नवरात्रि स्पेशल- तपस्या व त्याग की देवी मां ब्रह्मचारिणी (Navratri Special- Worship Devi Brahmcharini)

नवरात्रि में मां दुर्गा जैसे साक्षात आशीर्वाद देने घर घर चली आती हैं, उनका हर रूप वंदनीय है, पूजनीय है… जानें माता रानी के 9 रूपों को और जी भरकर करें दर्शन और लें उनका आशीष, देखें यह वीडियो!

यह भी पढ़ें: नवरात्रि स्पेशल: 10 सरल उपाय नवरात्र में पूरी करते हैं मनचाही मुराद (Navratri Special: 10 Special Tips For Navratri Puja)

अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) के पीछे बहुत सारी मान्यताएं और बहुत सारी कहानियां भी जुड़ी हैं. इसे भगवान परशुराम जन्मदिन यानी परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के अलावा विष्णु के अवतार नर व नारायण के अवतरित होने की मान्यता भी इसी दिन से जुड़ी है. यह भी मान्यता है कि त्रेता युग का आरंभ इसी तिथि से हुआ था. मान्यता के अनुसार इस तिथि को उपवास रखने, दान करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है यानी इस दिन व्रत रखने वाले को कभी भी किसी चीज़ का अभाव नहीं होता, उसके भंडार हमेशा भरे रहते हैं. चूंकि इस व्रत का फल कभी कम न होने वाला, कभी न घटने वाला, कभी नष्ट न होने वाला होता है, इसलिए इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है. अक्षय तृतीया 2020 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मान्यताओं से जुड़ी सभी जानकारी दे रहे हैं पंडित राजेंद्रजी.

Akshaya Tritiya 2020

अक्षय तृतीया 26 अप्रैल 2020: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मान्यताएं

अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त – 05:48 से 12:19
सोना खरीदने का शुभ समय – 05:48 से 13:22
तृतीया तिथि प्रारंभ – 11:51 (25 अप्रैल 2020)
तृतीया तिथि समाप्ति – 13:22 (26 अप्रैल 2020)

अक्षय तृतीया से जुड़ी मान्यताएं

  • माना जाता है कि जो लोग इस दिन अपने सौभाग्य को दूसरों के साथ बांटते हैं, उन्हें ईश्वर की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है. इस दिन दिए गए दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है. सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना से इस दिन शिव-पार्वती और नर-नारायण की पूजा का विधान है.
  • अक्षय तृतीया के दिन दान को श्रेष्ठ माना गया है. चूंकि वैशाख मास में सूर्य की तेज धूप और गर्मी चारों ओर रहती है और यह आकुलता को बढ़ाती है, तो इस तिथि पर शीतल जल, कलश, चावल, चना, दूध, दही आदि खाद्य पदार्थों सहित वस्त्राभूषणों का दान अक्षय व अमिट पुण्यकारी होता है.

यह भी पढ़ें: बच्चों को काला टीका क्यों लगाते हैं, अमृता सिंह ने बेटी सारा अली खान को बुरी नज़र से बचाने के लिए क्यों लगाया काला टीका? (Why Do Indians Put Kaala Teeka On Babies, Why Did Amrita Singh Apply Kaala Teeka To Protect Daughter Sara Ali Khan From Evil Eyes?)

Akshaya Tritiya 2020

अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर जानें मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय

1) लग्न राशि के ‘स्वामी ग्रह’ को करें प्रसन्न
प्रत्येक जातक की एक चन्द्र राशि होती है और इसी तरह कुंडली में जन्म के समय से संबंधित एक लग्न राशि भी होती है. जातक के गुण व व्यवहार को लग्न राशि काफी हद तक प्रभावित करती है. यदि किसी के कार्य नहीं बन पा रहे हैं या आर्थिक रूप से तकलीफ में हैं, तो अपनी लग्न राशि के ‘स्वामी ग्रह’ के अनुकूल रंग की कोई वस्तु अपने साथ जरूर रखें या स्वामी ग्रह के रंग से संबंधित कोई एक छोटा कपड़ा अपने साथ जरूर रखें.

2) अलमारी रखें उचित स्थान पर
धन की अलमारी उत्तर दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार पर अगर लगी हो, तो यह धनवृद्धि में लाभदायक साबित हो सकती है.

3) मुख्य द्वार पर दीपक लगाएं
प्रात: सुबह लक्ष्मीजी का पूजन घर में प्रतिदिन किया जाना चाहिए और सायंकाल घर के मुख्य द्वार पर दाईं ओर एक घी का दीया जरूर जलाना चाहिए. इन दोनों कार्यों से धन की देवी लक्ष्मीजी प्रसन्न होकर व्यक्ति के पास ही रहती हैं.

4) घर के मुख्य द्वार पर गणेशजी का स्वरूप
गणेश भगवान के स्वरूप को घर के मुख्य द्वार पर लगाने से घर में धन संबंधित सभी समस्याओं का अंत होता है और घर में नकारात्मक शक्तियों का भी उदय नहीं हो पाता है.

5) घर में तुलसीजी का पौधा लगाएं
तुलसीजी की सेवा करने से धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है. तुलसी के पौधे पर नियमित रूप से दीपक लगाने और पूजन से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.

6) गोमाता को चारा खिलाएं
नित्य सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर गोमाता को हरा चारा या आटे का भोग लगाने से भी लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं.

यह भी पढ़ें: घर में लाल चींटियों का आना देता है ये शुभ-अशुभ संकेत (Astrology: What Happens When There Are Red Ants In The House)

Akshaya Tritiya 2020

अक्षय तृतीया पर करें 14 तरह के दान, देखें जीवन में चमत्कार

चूंकि तृतीया मां गौरी की तिथि है, इसलिए इस दिन गृहस्थ जीवन में सुख-शांति की कामना से की गई प्रार्थना तुरंत स्वीकार होती है. गृहस्थ जीवन को खुशहाल रखने के लिए इस दिन उनकी पूजा की जानी चाहिए.

अक्षय तृतीया के दिन ये 14 दान हैं महत्वपूर्ण
1) गौ,
2) भूमि
3) तिल
4) स्वर्ण
5) घी
6) वस्त्र
7) धान्य
8) गुड़
9) चांदी
10) नमक
11) शहद
12) मटकी
13) खरबूजा
14) कन्या

अधिकतर लोग छोटे बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए उनके माथे पर, कान के पीछे, हथेली या तलवो पर कला टीका लगाते हैं. क्या वाकई बुरी नज़र लगती है? क्या वाकई बुरी नज़र होती है? कुछ समय पहले सारा अली खान अपने भाई इब्राहिम अली खान के साथ एक प्रमुख पत्रिका के लिए शूट कर रही थी. शूटिंग के समय सारा अली खान और उनके भाई इब्राहिम अली खान के साथ उनकी मां अमृता सिंह भी मौजूद थीं. सारा अली खान और उनके भाई इब्राहिम अली खान ने शूटिंग के लिए सफ़ेद रंग के बहुत ही खूबसूरत कपड़े पहने थे. सारा अली खान सफ़ेद कपड़ों में बहुत खूबसूरत लग रही थी, ऐसे में मां अमृता सिंह ने अपनी बेटी सारा अली खान को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका लगाया था. सारा अली खान, इब्राहिम अली खान और उनकी मां अमृता सिंह की ये फोटो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई थी. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या वाकई बुरी नज़र लगती है? बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका क्यों लगाते हैं? बुरी नज़र से बचने के लिए काला टीका लगाने की मान्यता और सच्चाई के बारे में विस्तार से बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो एक्सपर्ट व न्यूमरोलॉजिस्ट मनीषा कौशिक.

Amrita Singh Sara Ali Khan Ibrahim Ali Khan

बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका लगाने के पीछे ये मान्यता है
आपने अक्सर ये महसूस किया होगा कि जब हम किसी व्यक्ति से मिलते हैं, तो उससे मिलते या बात करते समय हम या तो अच्छा महसूस करते है या कुछ भी महसूस नहीं कर पाते या फिर बहुत बुरा महसूस करने लगते हैं. जिन लोगों से मिलकर हमारा मन खिन्न हो जाता है या हम भारीपन महसूस करने लगते हैं, जिन लोगों को हमारी सफलता से ईर्ष्या होती है, ऐसे लोगों से मिलकर होने वाली खिन्नता और भारीपन को हमारे बुज़ुर्गों ने नज़र लगना कहा है. काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को अपने अंदर समा लेता है, जिससे हम नकारात्मकता से बचे रहते हैं. नकारात्मक ऊर्जा को हमसे दूर रखने के लिए ही हमारे बड़े-बुज़ुर्ग हमें काला टीका या काला धागा बांधने की सलाह देते हैं.

आप भी देखिए सारा अली खान, इब्राहिम अली खान और उनकी मां अमृता सिंह की ये फोटो, जो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई थी.

यह भी पढ़ें: सपने में सिक्के देखने से क्या होता है? जानें सपने में सिक्के दिखने के शुभ-अशुभ संकेत (Dream Analysis: Seeing Coins In Dream)

बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका लगाने के पीछे ये सच्चाई है
संसार में हर वस्तु व हर व्यक्ति के इर्दगिर्द एक ऊर्जा होती है और जितनी तेज़ी से नकारात्मक ऊर्जा फैलती है, उससे कम तेज़ी से सकारात्मक ऊर्जा फैलती है. जब भी हम किसी व्यक्ति के संपर्क में आते हैं, तो उसकी ऊर्जा हमें प्रभावित करने लगती है. अगर व्यक्ति से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है, तो वह ऊर्जा हमारे ऊपर भी भारी मात्रा में हावी होने लगती है. ऐसे लोग हमारी ऊर्जा को नकारात्मकता से प्रभावित कर हमारी ऊर्जा को तो नष्ट करते ही हैं, साथ ही हमारे प्रति बुरे विचार भी रखते हैं. ऐसे ही लोगों की बुरी नज़र हमें लगती है. इसी तरह जब हमें किसी से मिलकर अच्छा लगता है, तो ज़ाहिर-सी बात है कि वो व्यक्ति मन में हमारे लिए अच्छे विचार रखता है. ऐसे लोगों से मिलनेवाली तरंगें हमें अच्छा व मज़बूत बनाती हैं.

यह भी पढ़ें: दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके क्यों नहीं सोना चाहिए? (Sleeping Positions: What Is The Best Direction And Position To Sleep In?)

श्रद्धा और सजगता, दोनों एक दूसरे के विरोधाभासी लगते हैं। जब तुम पूर्णतः जागरूक होते हो तो अक्सर श्रद्धा नहीं रहती और तुम व्याकुल एवं असुरक्षित महसूस करते हो। जब तुम किसी पर पूर्ण विश्वास कर के चलते हो अर्थात श्रद्धा से चलते हो, तब मन पूर्ण रूप से शांत एवं सुरक्षित महसूस करता है और विश्राम में रहता है। पर, तब तुम जागरूक नहीं रहते!

Gurudev Sri Sri Ravi Shankar

श्रद्धा तीन प्रकार की होती है

1) तामसिक श्रद्धा 
तामसिक श्रद्धा आलस्य से उत्त्पन्न होती है। जैसे, जब तुम कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते हो, या आलस्यवश कोई काम नहीं करना चाहते, तब तुम कहते हो कि, ‘कोई बात नहीं, भगवान सब ठीक कर देंगे।’ (सब हंसते हैं।)

2) राजसिक श्रद्धा
जब तुम इच्छा और तृष्णा के तीव्र वेग के कारण श्रद्धा का सहारा लेते हो, तब इच्छापूर्ति की तीव्र पिपासा ही तुम्हारी श्रद्धा को जीवित रखती है। ये राजसिक श्रद्धा है।

3) सात्विक श्रद्धा
ऐसा विश्वास, ऐसी श्रद्धा जो निष्कपट हो, भोलापन लिए हो और जो हमारी चेतना की पूर्णता से उत्पन्न हुई हो, वह सात्विक श्रद्धा है।

 

श्रद्धा से यदि इच्छा पूरी न हो तो क्या करें? जानने के लिए देखें गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का ये वीडियो:

 

श्रद्धा एवं जागरूकता मनुष्य को ज्ञानी बनाते हैं
श्रद्धा एवं जागरूकता भले ही एक दूसरे के विरोधाभासी लगते हों, परन्तु वे एक दूसरे के पूरक है| श्रद्धा के बिना तुम्हारा आंतरिक विकास संभव नहीं है। और, बिना सजगता के तुम कुछ भी भली-भांति समझ नहीं पाओगे। श्रद्धा तुम्हे आनंद के मार्ग पर ले जाती है और सजगता तुम्हें व्याकुल रखती है।

जहां विश्वास ( श्रद्धा) नहीं है वहां भय रहता है, और जब जागरूकता कि कमी हो तो न तो तुम कुछ ठीक से समझ पाओगे और न ही उसे ठीक से व्यक्त कर पाओगे। अतः दोनों का मिश्रण अत्यंत आवश्यक है।

ज्ञान में स्थित होकर सजग रहने से तनाव विहीनता आती है, श्रद्धा आती है और आनंद आता है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है श्रद्धा से उत्पन्न मूर्खता (राजसिक श्रद्धा) के तत्वों अर्थात आलस्य को मिटाना एवं जागरूकता से उत्पन्न भय और व्याकुलता को भी मिटाना। यह एक अनोखा एवं अतुल्य मिश्रण है। अगर तुम्हारे अन्दर श्रद्धा एवं जागरूकता एक साथ दोनों ही हैं तो तुम सही मायनों में एक ज्ञानी बन जाओगे।

 

श्रद्धा एवं जागरूकता को सही मायने में समझने के लिए देखें गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का ये वीडियो:

 

शादी की रस्मों में सोलह शृंगार का विशेष महत्व है. शादी के दिन जब दुल्हन सोलह शृंगार करती है, तो उसकी ख़ूबसूरती और भी निखर जाती है. महिलाओं के जीवन में सोलह शृंगार का महत्व स़िर्फ सजने-संवरने के लिए नहीं है, इसके पीछे कई वैज्ञानिक तथ्य भी छुपे हैं. सोलह शृंगार का महिलाओं के स्वास्थ्य और सौभाग्य से गहरा संबंध है. आख़िर क्या है सोलह शृंगार का वैज्ञानिक महत्व, बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो-न्यूमरोलॉजी-वास्तु व फेंगशुई एक्सपर्ट मनीषा कौशिक.

Solah Shringar

1) शादी का जोड़ा
दुल्हन के लिए शादी का जोड़ा चुनते समय सुंदर और चमकदार रंगों को प्राथमिकता दी जाती है, जैसे- लाल, पीला, गुलाबी आदि. दुल्हन के लिए लाल रंग का शादी का जोड़ा शुभ व महत्वपूर्ण माना जाता है. लाल रंग प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है.
धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लाल रंग शुभ, मंगल व सौभाग्य का प्रतीक है, इसीलिए शुभ कार्यों में लाल रंग का सिंदूर, कुमकुम, शादी का जोड़ा आदि का प्रयोग किया जाता है.
वैज्ञानिक मान्यता
विज्ञान के अनुसार, लाल रंग शक्तिशाली व प्रभावशाली है, इसके उपयोग से एकाग्रता बनी रहती है. लाल रंग आपकी भावनाओं को नियंत्रित कर आपको स्थिरता देता है.

2) गजरा
गजरा एक ख़ूबसूरत व प्राकृतिक शृंगार है. गजरा चमेली के सुंगंधित फूलों से बनाया जाता है और इसे महिलाएं बालों में सजाती हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, गजरा दुल्हन को धैर्य व ताज़गी देता है. शादी के समय दुल्हन के मन में कई तरह के विचार आते हैं, गजरा उन्हीं विचारों से उसे दूर रखता है और ताज़गी देता है.
वैज्ञानिक मान्यता
विज्ञान के अनुसार, चमेली के फूलों की महक हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है. चमेली की ख़ुशबू तनाव को दूर करने में सबसे ज़्यादा सहायक होती है.

3) बिंदी
बिंदी दोनों भौहों के बीच माथे पर लगाया जानेवाला लाल कुमकुम का चक्र होता है, जो महिला के शृंगार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
धार्मिक मान्यता
बिंदी को त्रिनेत्र का प्रतीक माना गया है. दो नेत्रों को सूर्य व चंद्रमा माना गया है, जो वर्तमान व भूतकाल देखते हैं तथा बिंदी त्रिनेत्र के प्रतीक के रूप में भविष्य में आनेवाले संकेतों की ओर इशारा करती है.
वैज्ञानिक मान्यता
विज्ञान के अनुसार, बिंदी लगाने से महिला का आज्ञा चक्र सक्रिय हो जाता है. यह महिला को आध्यात्मिक बने रहने में तथा आध्यात्मिक ऊर्जा को बनाए रखने में सहायक होता है. बिंदी आज्ञा चक्र को संतुलित कर दुल्हन को ऊर्जावान बनाए रखने में सहायक होती है.

4) सिंदूर
सिंदूर महिलाओं के सौभाग्यवती होने का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है. यह सबसे पहले शादी के समय दूल्हे के द्वारा दुल्हन की मांग में भरा जाता है. उसके बाद सौभाग्यवती महिला हर समय इसे अपनी मांग में सजाए रखती है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, सौभाग्यवती महिला अपने पति की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर भरती है. लाल सिंदूर महिला के सहस्रचक्र को सक्रिय रखता है. यह महिला के मस्तिष्क को एकाग्र कर उसे सही सूझबूझ देता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, सिंदूर महिलाओं के रक्तचाप को नियंत्रित करता है. सिंदूर महिला के शारीरिक तापमान को नियंत्रित कर उसे ठंडक देता है और शांत रखता है.

ये भी पढ़ें: विवाहित महिलाएं मंगलसूत्र क्यों पहनती हैं? (Why Do Indian Married Women Wear Mangalsutra)

Solah Shringar

5) काजल
काजल आंखों में लगाई जानेवाली काले रंग की स्याही को कहते हैं. काजल महिला की आंखों व रूप को निखारता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, काजल लगाने से स्त्री पर किसी की बुरी नज़र का कुप्रभाव नहीं पड़ता. काजल से आंखों से संबंधित कई रोगों से बचाव होता है. काजल से भरी आंखें स्त्री के हृदय के प्यार व कोमलता को दर्शाती हैं.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, काजल आंखों को ठंडक देता है. आंखों में काजल लगाने से नुक़सानदायक सूर्य की किरणों व धूल-मिट्टी से आंखों का बचाव होता है.

6) मेहंदी
मेहंदी लगाने का शौक लगभग सभी महिलाओं को होता है. लड़की कुंआरी हो या शादीशुदा हर महिला मेहंदी लगाने के मौ़के तलाशती रहती है. सोलह शृंगार में मेहंदी महत्वपूर्ण मानी गई है.
धार्मिक मान्यता
मानयताओं के अनुसार, मेहंदी का गहरा रंग पति-पत्नी के बीच के गहरे प्रेम से संबंध रखता है. मेहंदी का रंग जितना लाल और गहरा होता है, पति-पत्नी के बीच प्रेम उतना ही गहरा होता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार मेहंदी दुल्हन को तनाव से दूर रहने में सहायता करती है. मेहंदी की ठंडक और ख़ुशबू दुल्हन को ख़ुश व ऊर्जावान बनाए रखती है.

7) चूड़ियां
चूड़ियां हर सुहागन का सबसे महत्वपूर्ण शृंगार हैं. महिलाओं के लिए कांच, लाक, सोने, चांदी की चूड़ियां सबसे महत्वपूर्ण मानी गई हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, चूड़ियां पति-पत्नी के भाग्य और संपन्नता की प्रतीक हैं. यह भी मान्यता है कि महिलाओं को पति की लंबी उम्र व अच्छे स्वास्थ्य के लिए हमेशा चूड़ी पहनने की सलाह दी जाती है. चूड़ियों का सीधा संबंध चंद्रमा से भी माना जाता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, चूड़ियों से उत्पन्न होनेवाली ध्वनि महिलाओं की हड्डियों को मज़बूत करने में सहायक होती है. महिलाओं के रक्त के परिसंचरण में भी चूड़ियां सहायक होती हैं.

8) मंगलसूत्र
मंगलसूत्र एक ऐसा सूत्र है, जो शादी के समय वर द्वारा वधू के गले में बांधा जाता है और उसके बाद जब तक महिला सौभाग्यवती रहती है, तब तक वह निरंतर मंगलसूत्र पहनती है. मंगलसूत्र पति-पत्नी को ज़िंदगीभर एकसूत्र में बांधे रखता है.
धार्मिक मान्यता
ऐसी मान्यता है कि मंगलसूत्र सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित कर महिला के दिमाग़ और मन को शांत रखता है. मंगलसूत्र जितना लंबा होगा और हृदय के पास होगा वह उतना ही फ़ायदेमंद होगा. मंगलसूत्र के काले मोती महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मज़बूत करते हैं.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलसूत्र सोने से निर्मित होता है और सोना शरीर में बल व ओज बढ़ानेवाली धातु है, इसलिए मंगलसूत्र शारीरिक ऊर्जा का क्षय होने से रोकता है.

ये भी पढ़ें: चूड़ियां पहनने के 5 धार्मिक और वैज्ञानिक लाभ (Why Do Indian Women Wear Bangles-Science Behind Indian Ornaments)

Solah Shringar

9) कर्णफूल/ईयररिंग्स
कर्णफूल यानी ईयररिंग्स-झुमके, कुंडल, गोल, लंंबे आदि आकार व डिज़ाइन में पाए जाते हैं. आमतौर पर महिलाएं सोने, चांदी, कुंदन आदि धातु से बने ईयररिंग्स पहनती हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, कर्णफूल यानी ईयररिंग्स महिला के स्वास्थ्य से सीधा संबंध रखते हैं. ये महिला के चेहरे की ख़ूबसूरती को निखारते हैं. इसके बिना महिला का शृंगार अधूरा रहता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार हमारे कर्णपाली (ईयरलोब) पर बहुत से एक्यूपंक्चर व एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जिन पर सही दबाव दिया जाए, तो माहवारी के दिनों में होनेवाले दर्द से राहत मिलती है. ईयररिंग्स उन्हीं प्रेशर पॉइंट्स पर दबाव डालते हैं. साथ ही ये किडनी और मूत्राशय (ब्लैडर) को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं.

10) बाजूबंद
ये बाजू के ऊपरी हिस्से में पहना जाता है. बाजूबंद सोने, चांदी, कुंदन या अन्य मूल्यवान धातु या पत्थर से बना होता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, बाजूबंद महिलाओं के शरीर में ताक़त बनाए रखने व पूरे शरीर में उसका संचार करने में सहायक होता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, बाजूबंद बाजू पर सही मात्रा में दबाव डालकर रक्तसंचार बढ़ाने में सहायता करता है.

11) कमरबंद
कमरबंद धातु व अलग-अलग तरह के मूल्यवान पत्थरों से मिलकर बना होता है. कमरबंद नाभि के ऊपरी हिस्से में बांधा जाता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, महिला के लिए कमरबंद बहुत आवश्यक है. चांदी का कमरबंद महिलाओं के लिए शुभ माना जाता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी का कमरबंद पहनने से महिलाओं को माहवारी तथा गर्भावस्था में होनेवाले सभी तरह के दर्द से राहत मिलती है. चांदी का कमरबंद पहनने से महिलाओं में मोटापा भी नहीं बढ़ता.

12) मांगटीका
मांगटीका दुल्हन को मांग में पहनाया जानेवाला ज़ेवर है. यह सोने, चांदी, कुंदन, जरकन, हीरे, मोती आदि से बनाया जाता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, मांगटीका महिला के यश व सौभाग्य का प्रतीक है. मांगटीका यह दर्शाता है कि महिला को अपने से जुड़े लोगों का हमेशा आदर करना है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार मांगटीका महिलाओं के शारीरिक तापमान को नियंत्रित करता है, जिससे उनकी सूझबूझ व निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है.

ये भी पढ़ें: बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ का रत्न प्रेम: क्या रत्न चमकाते हैं इनकी क़िस्मत? (10 Bollywood Celebrities And Their Lucky Astrological Gemstones)

Solah Shringar

13) अंगूठी
शादी की सबसे पहली रस्म अंगूठी से ही शुरू की जाती है, जिसमें लड़का-लड़की एक दूसरे को अंगूठी पहनाकर सगाई की रस्म पूरी करते हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, अंगूठी पति-पत्नी के प्रेम की प्रतीक होती है, इसे पहनने से पति-पत्नी के हृदय में एक-दूसरे के लिए सदैव प्रेम बना रहता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, अनामिका उंगली की नसें सीधे हृदय व दिमाग़ से जुड़ी होती हैं, इन पर प्रेशर पड़ने से दिल व दिमाग़ स्वस्थ रहता है.

14) पायल
पैरों में पहनी जानेवाली पायल चांदी की ही सबसे उत्तम व शुभ मानी जाती है. पायल कभी भी सोने की नहीं होनी चाहिए. शादी के समय मामा द्वारा दुल्हन के पैरों में पायल पहनाई जाती है या ससुराल से देवर की तरफ़ से यह तोहफ़ा अपनी भाभी के लिए भेजा जाता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, महिला के पैरों में पायल संपन्नता की प्रतीक होती है. घर की बहू को घर की लक्ष्मी माना गया है, इसी कारण घर में संपन्नता बनाए रखने के लिए महिला को पायल पहनाई जाती है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी की पायल महिला को जोड़ों व हड्डियों के दर्द से राहत देती है. साथ ही पायल के घुंघरू से उत्पन्न होनेवाली ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा घर से दूर रहती है.

15) बिछिया
हर वैवाहिक महिला पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनती है. बिछिया भी चांदी की ही सबसे शुभ मानी गई है.
धार्मिक मान्यता
महिलाओं के लिए पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनना शुभ व आवश्यक माना गया है. ऐसी मान्यता है कि बिछिया पहनने से महिलाओं का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और घर में संपन्नता बनी रहती है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं के पैरों की उंगलियों की नसें उनके गर्भाशय से जुड़ी होती हैं, बिछिया पहनने से उन्हें गर्भावस्था व गर्भाशय से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलती है. बिछिया पहनने से महिलाओं का ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है.

16) इत्र
सुगंध ख़ासकर गुलाब के फूल की सुगंध सीधे रूप से प्रेम से संबंध रखती है. सुगंध को प्रेम का प्रतीक माना गया है और यह पति-पत्नी को एक दूसरे की ओर आकर्षित करती है.
धार्मिक मान्यता
सौभाग्यवती महिला के लिए गुलाब की सुगंध सबसे उत्तम मानी जाती है. गुलाब प्रेम का प्रतीक है, इसलिए गुलाब का इत्र लगाने से पति हमेशा पत्नी की ओर आकर्षित रहता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, इत्र मानसिक तनाव दूरकर तरोताज़ा रखता है. गुलाब की सुगंध दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करती है. इत्र को नर्व पॉइंट्स पर लगाना चाहिए.
– कमला बडोनी

भारत में पितृपक्ष का बड़ा महत्व है. हमारे देश में पूर्णिमा से अमावस्या तक 15 तिथियां पितरों के निमित श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. इस दौरान सभी लोग अपने पितरों का स्मरण करते हुए श्राध्द कर्म करते हैं. जो पूर्वज हमें छोड़कर चले गए हैं, उनका आभार प्रकट करने के लिए और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए पितृपक्ष के दौरान उन्हें तर्पण दिया जाता है. ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष में यमराज इन्हें कुछ समय के लिए मुक्त कर देते हैं, ताकि ये धरती पर जाकर अपने वंशजों से तर्पण ग्रहण कर सकें. पितृपक्ष शुरू हो गया है इसलिए पितृपक्ष से जुड़ी कुछ ज़रूरी बातें हम सभी को मालूम होनी चाहिए.

Pitru Paksha 2019

* पितृपक्ष के दौरान सभी लोग अपने पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण, हवन और अन्नदान करते हैं. यदि आपको अपने पितरों के श्राध्द की तिथि मालूम नहीं है, तो अपने ब्राह्मण से इसकी जानकारी ले लें. यदि आपको अपने पितरों की मृत्यु के दिन की सही जानकारी नहीं है तो आप सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनका श्राध्द कर सकते हैं.

* पितरों को तर्पण देने के लिए दाएं कंधे पर जनेऊ रखकर काले तिल मिश्रित जल से दक्षिण की तरफ मुंह करके तर्पण किया जाता है. ब्राह्मण के निर्देशानुसार तर्पण की सभी क्रियाएं की जाती हैं. फिर ब्राह्मण को फल-मिष्ठान खिलाकर दक्षिणा दी जाती है.

यह भी पढ़ें: चरणामृत और पंचामृत में क्या अंतर है? (What Is The Difference Between Charanamrit And Panchamrit)

* श्राध्द के भोजन में दूध, चावल, घी आदि से बनी तरह-तरह की चीज़ें बनाई जाती हैं. श्राध्द के भोजन में लहसुन, प्याज़, बैगन, उड़द, मसूर, चना आदि का प्रयोग नहीं किया जाता है. इस भोजन को कौवे, गाय, कुत्ते को खिलाया जाता है. फिर सभी परिजन साथ मिलकर ये भोजन ग्रहण करते हैं.

* श्राध्द के दिन शराब-धूम्रपान आदि से दूर रहना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. पूरी श्रद्धा से अपने पूर्वजों का स्मरण करना चाहिए.

यह भी पढ़ें: कीर्तन और आरती में ताली क्यों बजाते हैं? (Spiritual And Health Benefits Of Clapping While Aarti And Kirtan)

दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके सोना मना क्यों है? ये सवाल अक्सर आपके मन में भी आता होगा. आप अपने मन में कौंध रहे इस सवाल को कई लोगों से पूछते भी होंगे, लेकिन लोगों के पास सही जानकारी न होने के कारण आपको अपने सवाल का जवाब नहीं मिल पाता होगा. यदि हम हमारी धार्मिक मान्यताओं के बारे में रिसर्च करें, तो पाएंगे कि हमारी धार्मिक मान्यताएं वैज्ञानिक आधार पर बनाई गई हैं, ताकि धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए हमें उनका वैज्ञानिक लाभ भी मिल सके. ऐसी ही धार्मिक मान्यताओं में से एक है दक्षिण की तरफ पैर करके न सोना. दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके सोने के लिए मना क्यों किया जाता है? आइए, हम आपको बताते हैं.

sleeping direction

दक्षिण की तरफ पैर करके न सोने के पीछे ये धार्मिक मान्यता है
हमारे बुजुर्ग जब भी किसी नई जगह पर या किसी करीबी के घर सोने जाते हैं, तो सोने से पहले ये ज़रूर देखते हैं कि कहीं उनके पैर दक्षिण दिशा की तरफ़ तो नहीं हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार दक्षिण की तरफ पैर करके कभी नहीं सोना चाहिए. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि हमें यशस्वी बनाने वाले पितरों का संबंध दक्षिण दिशा से है, इसलिए दक्षिण की तरफ़ पैर करके नहीं सोना चाहिए. इससे उनका अपमान होता है, जिससे हमारी यश-कीर्ति बढ़ने में बाधा आती है.

यह भी पढ़ें: कीर्तन और आरती में ताली क्यों बजाते हैं? (Spiritual And Health Benefits Of Clapping While Aarti And Kirtan)

 

सोने की पोजीशन से जुड़ी अन्य धार्मिक मान्यताएं:

1) शास्त्रों के अनुसार, सोने से पहले चित्त शांत रखना चाहिए.

2) सोने से पहले ईश्‍वर का ध्यान करना चाहिए और इस अनमोल जीवन के लिए आभार प्रकट करना चाहिए.

3) शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय ख़ासकर गोधूलि बेला में कभी नहीं सोना चाहिए.

4) भोजन करते ही सो नहीं जाना चाहिए. सोने से दो घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए.

5) रात में जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत डालनी चाहिए, इससे तन और मन दोनों स्वस्थ और निरोगी रहते हैं.

यह भी पढ़ें: चरणामृत और पंचामृत में क्या अंतर है? (What Is The Difference Between Charanamrit And Panchamrit)

 

दक्षिण की तरफ पैर करके न सोने के पीछे ये वैज्ञानिक महत्व है
जब हम उत्तर की तरफ़ सिर करके सोते हैं, तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है. शरीर में मौजूद आयरन दिमाग़ की ओर संचारित होने लगता है. इससे अल्ज़ाइमर व दिमाग़ संबंधी बीमारियां व ब्लडप्रेशर होने की संभावना बढ़ जाती है. इसका एक महत्वपूर्ण आधार यह भी है कि आप अपने पूर्वजों, पितरों व बड़ों को मान-सम्मान दें.