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जीवन के हर पल को उत्सव बनाएं (Celebration Of Life)

जीवन के हर पल को उत्सव बनाना इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि हमारे जीवन में अगले पल क्या होने वाला है, ये हम नहीं जानते. न हम अपना अतीत बदल सकते हैं और न ही भविष्य के बारे में जान सकते हैं, इसलिए जो पल हमारे पास है, उसे भरपूर जीएं. जीवन के हर पल को उत्सव बनाएं, सही मायने में सेलिब्रेशन इसे ही कहते हैं. जीवन के हर पल को उत्सव कैसे बनाएं? आइए, हम आपको बताते हैं.

Celebration Of Life

1) ख़ुश रहना सीखें
आपने अपने आसपास कुछ ऐसे लोगों को देखा होगा, जो हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते हैं. उन्हें देखकर लगता है जैसे उनके जीवन में कोई तकलीफ़ नहीं है और उनके लिए हर दिन उत्सव है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो लोग अपने जीवन और अपनी ख़ुशियों से बहुत प्यार करते हैं और ख़ुश रहने की हर मुमक़िन कोशिश करते हैं. जीवन के हर पल को उत्सव बनाने के लिए आप भी ऐसा ही करें.

2) ख़ुशी के मौ़के तलाशें
हम में से अधिकतर लोग ये समझते हैं कि ख़ुशी के मौ़के ही जीवन में ख़ुशियां लाते हैं, जैसे त्योहार, शादी, करियर में तरक्क़ी… लेकिन रोज़मर्रा की ख़ुशी? उसके बारे में हम सोचते ही नहीं हैं. ख़ुशी का कोई मौक़ा नहीं होता, आप चाहें तो हर पल ख़ुश रह सकते हैं और इसके लिए आपको अलग से कुछ करने की ज़रूरत भी नहीं है. आपको बस अपने जीने का नज़रिया बदलना होगा और अपने जीवन में पॉज़िटिविटी बनाए रखनी होगी. अतः त्योहार या किसी ख़ास दिन पर ही नहीं, हर रोज़ ख़ुश रहने की कोशिश करें, इससे जीवन में पॉज़िटिविटी आती है और हम जीवन का भरपूर लुत्फ़ उठा पाते हैं.

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Celebration Of Life

3) ख़ुशी जीवन का असली उत्सव है
सुख-दुख हर किसी के जीवन में लगे रहते हैं. आज सुख है, तो कल दुख भी हो सकता है. यदि हम दुख को अपने जीवन से बड़ा समझेंगे तो कभी ख़ुश नहीं रह पाएंगे, इसलिए दुख कितना बड़ा है इसके बारे में सोचने की बजाय ये सोचें कि इससे कैसे बाहर निकला जाए. जो लोग जीवन के प्रति पॉज़िटिव अप्रोच रखते हैं, वो मुसीबतों के बारे में कम और उनसे निपटने के रास्ते के बारे में ज़्यादा सोचते हैं, इसलिए वो बड़ी से बड़ी मुसीबतों का आसानी से सामना कर पाते हैं. अतः अपने जीवन और ख़ुशी को सबसे ज़्यादा महत्व दें और हमेशा ख़ुश रहें, क्योंकि ख़ुशी ही जीवन का असली उत्सव है.

4) त्योहार आपसे हैं, आप त्योहार से नहीं
यदि हम ख़ुशी को त्योहारों से जोड़कर देखें, तो यहां भी ख़ुशी कम और प्रेशर ज़्यादा नज़र आता है. त्योहारों की तैयारियों को लेकर, ख़ासकर महिलाएं इतना तनाव महसूस करती हैं कि वो त्योहार का आनंद ही नहीं उठा पातीं. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो हर काम परफेक्ट करना चाहती हैं और ऐसा हो नहीं पाता. व़क्त के साथ महिलाओं की ज़िम्मेदारियां बढ़ गई हैं, घर-ऑफिस की दोहरी ज़िम्मेदारियों के चलते वो अपनी मां या सास की तरह त्योहारों की तैयारियां नहीं कर सकतीं. अतः वर्किंग महिलाएं और उनके परिवार के सदस्य इस बात को समझें और मिल-जुलकर त्योहार की तैयारियां करें. परिवार के सभी सदस्य न स़िर्फ रोज़मर्रा के काम, बल्कि त्योहार के समय भी घर की वर्किंग महिलाओं का हाथ बंटाएं. इससे महिलाओं का तनाव कम होगा और वो त्योहार का पूरा लुत्फ़ उठा सकेंगी.

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Celebration Of Life

5) जानें त्योहार का सही अर्थ
हम सभी त्योहार के मौ़के पर घर की साफ़-सफ़ाई करते हैं, घर को और ख़ुद को भी सजाते-संवारते हैं, पूजा-पाठ करते हैं ताकि घर में सुख-शांति-समृद्धि बनी रहे, लेकिन इन सबसे कहीं ज़्यादा ज़रूरी हमारा ख़ुश रहना है. यदि हम मन से ख़ुश नहीं हैं, तो इन सब तैयारियों का कोई मतलब नहीं है. यदि हम मन से ख़ुश हैं, तो हमें दुनिया की हर चीज़ अच्छी लगती है और हर दिन त्योहार लगता है. ख़ुशी को समझना, उसे महसूस करना और उसे दूसरों में बांटना ही सही मायने में त्योहार है.

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सीखें दिवाली सेलिब्रेशन के 10 मॉडर्न अंदाज़ (10 Different Ways To Celebrate Diwali)

दीपावली की तैयारियां ज़ोरों पर हैं. हर कोई अपने घर, ऑफिस, गाड़ी आदि को सजाने में लगा हुआ है. त्योहारों की तैयारी कई चेहरों पर मुस्कान लाती है, तो कइयों के लिए तनाव का कारण भी बन जाती है, ख़ासकर वर्किंग वुमन के लिए. तो कैसे करें त्योहारों की तैयारी कि हर चेहरे पर मुस्कान खिली रहे? इसके लिए हमें त्योहार मनाने के 10 मॉडर्न अंदाज़ सीखने होंगे.

Ways To Celebrate Diwali

सीखें दिवाली सेलिब्रेशन के 10 मॉडर्न अंदाज़
समय के साथ त्योहार मनाने के अंदाज़ भी बदल गए हैं. आज की वर्किंग वुमन त्योहारों की तैयारियां उस तरह नहीं कर पातीं जैसे उनकी मां या नानी-दादी करती थीं और इसके लिए उन्हें कई बार उलाहने भी सुनने पड़ते हैं. घर सजाना, पकवान बनाना, परिवार के लोगों के लिए कपड़े, बच्चों के लिए पटाखे, खिलौने… इन सब में वो अपने लिए टाइम ही नहीं निकाल पातीं, जिससे उनका चिड़चिड़ापन भी बढ़ जाता है. समय के साथ बदलाव ज़रूरी है और ये बदलाव त्योहार मनाने के अंदाज़ में होना चाहिए, नहीं तो त्योहार चेहरे पर ख़ुशी नहीं, तनाव लेकर आ सकते हैं. त्योहार मनाने के मॉडर्न अंदाज़ सीखकर हम त्योहारों का पूरा लुत्फ़ भी उठा सकते हैं और तनाव से भी बच सकते हैं.

1. सीखें टाइम मैनेजमेंट
यदि आप वर्किंग वुमन हैं और घर-ऑफिस के काम के चलते आपके पास समय की कमी है, तो आप त्योहार की तैयारियां थोड़ा पहले शुरू कर दें, जैसे- गिफ़्ट आइटम्स पहले ही ख़रीद लें. आप चाहें तो घर के सदस्यों के कपड़े भी पहले ही ख़रीद सकती हैं. इसी तरह पर्दे, कुशन, बेडशीट आदि भी पहले ख़रीदे जा सकते हैं. इस तरह सही टाइम मैनेजमेंट से आप अपना समय भी बचा सकती हैं और तनाव से दूर भी रह सकती हैं.

2. परिवार की मदद लें
यदि आप हर काम ख़ुद करना चाहेंगी, तो आपका तनाव बढ़ जाएगा, इसलिए त्योहार की तैयारी के लिए बेझिझक अपने परिवार की मदद लें. पति को घर के डेकोरेशन की ज़िम्मेदारी दे दें. उनसे कर्टन, कुशन, बेडशीट आदि बदलने को कहें, लाइटिंग अरेंजमेंट करने को कहें. बच्चों को गिफ़्ट आइटम पैक करने को कहें, डायनिंग टेबल सजाने को कहें, ऐसा करने से बच्चों की क्रिएटिविटी भी बढ़ेगी. सास-ससुर को सामान की लिस्ट बनाने को कहें, ताकि उनकी पसंद का सामान भी आ जाए और आपके काम का बोझ भी हल्का हो जाए. इस तरह पूरा परिवार मिलकर यदि त्योहार की तैयारियां करेगा, तो आपका काम हल्का हो जाएगा और सबके चेहरे पर काम करने की संतुष्टि भी होगी.

3. जुटाएं ख़ुशी के पल
त्योहार जीवन में ख़ुशियां लाते हैं, इसलिए त्योहार की तैयारी को बोझ न बनाएं. पूरा परिवार मिलकर त्योहार की तैयारी करे, ताकि सबके चेहरे पर जोश और उत्साह नज़र आए. जब घर के सभी सदस्य काम में जुटे हों, तो बीच में टी ब्रेक लें और सबके लिए अच्छा नाश्ता बनाएं. घर पर नाश्ता बनाने का टाइम न हो, तो बाहर से ऑर्डर करें. इस ब्रेक टाइम में सबके काम की तारीफ़ करें और उन्हें धन्यवाद दें. उनसे कहें कि उनकी वजह से आपके काम का बोझ कितना हल्का हो गया है. आपके मुंह से अपनी तारीफ़ सुनकर आपके घर के सदस्यों को अच्छा लगेगा और वो हर काम ज़्यादा दिलचस्पी से करेंगे.

4. बच्चों को सिखाएं त्योहार का महत्व
कई महिलाएं त्योहार की तैयारियां तो पूरे जोश से करती हैं, लेकिन उन्हें ये नहीं पता होता कि आख़िर वो त्योहार मनाया क्यों जाता है. आप ऐसा न करें. जब आप त्योहार की तैयारी करें, तो उसमें बच्चों को भी शामिल करें और बच्चों को उस त्योहार के बारे में बताएं, उस त्योहार से जुड़ी कहानी सुनाएं. ऐसा करके आप अपने बच्चे को अपनी सभ्यता-संस्कृति से जोड़े रखेंगी.

5. घर के बड़ों से सीखें
बड़े शहरों के छोटे घरों और काम की मजबूरी के चलते अब कई लोग अपने पूरे परिवार के साथ नहीं रह पाते. ऐसे में जब त्योहार नज़दीक आते हैं, तो कई वर्किंग वुमन समझ नहीं पातीं कि वो त्योहार की तैयारियां कैसे करें. कई महिलाओं को उस त्योहार से जुड़ी परंपराएं भी मालूम नहीं होतीं. ऐसे में अपने घर के बड़ों से उस त्योहार के बारे में जानें. उनसे उस त्योहार से जुड़ी परंपराएं सीख लें, ताकि आप वो जानकारी अपने बच्चों को भी दे सकें. आपके घर में किस तरह पूजा होती है, किस तरह का खाना बनता है, कैसे कपड़े पहने जाते हैं, ये सब आपको मालूम होना चाहिए.

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Ways To Celebrate Diwali

6. ऑनलाइन शॉपिंग करें
यदि आपके पास परिवार के साथ मार्केट या मॉल में जाकर शॉपिंग करने का टाइम न हो, तो बेझिझक ऑनलाइन शॉपिंग करें. इसके लिए शाम को परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर उनकी पसंद की चीज़ें सिलेक्ट करें और घर बैठे शॉपिंग का लुत्फ़ उठाएं. ऐसा करने से आपको कुछ समय परिवार के साथ बैठने का मौक़ा भी मिल जाएगा.

7. हर चीज़ घर पर न बनाएं
पहले की तरह अब हर तरह के पकवान घर पर बनाना मुमकिन नहीं. पहले औरतें घर पर रहती थीं, इसलिए घर पर ही कई तरह की चीज़ें बना लेती थीं, आज की वर्किंग वुमन के लिए ऐसा करना संभव नहीं. ऐसे में कुछ चीज़ें घर पर बनाकर और कुछ मार्केट से ख़रीदकर काम को आसान बनाया जा सकता है. आप भी ऐसा करें और अपने काम का बोझ हल्का करें.

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8. अपने लिए व़क्त निकालें
त्योहार की तैयारियों में ख़ुद को इतना भी न उलझा लें कि आपके पास अपने लिए टाइम ही न बचे. त्योहार में आपका ख़ूबसूरत दिखना भी उतना ही ज़रूरी है, जितना घर के अन्य काम. अत: अपने लिए अलग से व़क्त निकालें और इस समय में ब्यूटी ट्रीटमेंट लें या अपने लिए शॉपिंग करें. ऐसा करके आप अच्छा महसूस करेंगी और त्योहार की तैयारी ख़ुशी-ख़ुशी करेंगी.

9. अपनों से मिलने का प्लान बनाएं
त्योहार की असली ख़ुशी अपनों के साथ ही होती है, इसलिए इस ख़ास मौ़के पर अपनों से मिलने का प्लान बनाएं. यदि आप अपने घर से दूर किसी दूसरे शहर में रहते हैं, तो त्योहार पर घर जाने का प्लान बनाएं. यदि आप अपने घर नहीं जा सकते, तो दोस्तों को घर बुलाएं या उनके घर जाएं. यदि काम की व्यस्तता के चलते ऐसा करना भी मुमकिन न हो, तो कुछ समय के लिए फोन या वीडियो कॉल करके उनके साथ व़क्त बिताएं.

10. डिनर के लिए बाहर जाएं
त्योहार का ये मतलब नहीं है कि खाना घर पर ही बने. यदि आप बिज़ी हैं और आपके पास घर पर खाना बनाने का टाइम नहीं है या ऑफिस में अचानक कोई ऐसा काम आ गया, जिसके कारण आप अच्छा डिनर नहीं बना पा रही हैं, तो ऐसे में त्योहार का उत्साह कम करने की बजाय पूरा परिवार मिलकर बाहर डिनर के लिए जाएं. ऐसा करने से आपकी थकान भी मिट जाएगी और आपका परिवार अच्छा डिनर भी कर पाएगा.

– वंशज विनय

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शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं! (Happy Sharad Purnima!)

* शरद पूर्णिमा अश्‍विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है.
* इसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं.
* ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूरे सालभर में इसी पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है, जिससे चंद्रमा की हीलिंग प्रॉपर्टी भी बढ़ जाती है.
* हिंदुओं द्वारा इसी दिन कोजागर व्रत, जिसे कौमुदी व्रत भी कहते हैं, रखा जाता है.
* इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के संग महारास रचाया था.

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* शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा धरती के बेहद क़रीब होने के कारण उसके प्रकाश में मौजूद रासायनिक तत्व सीधे धरती पर गिरते हैं.
* इस दिन रात्रि को मां लक्ष्मी देखती हैं कि कौन जाग रहा है और जो मां की भक्ति में लीन होकर जागरण करते हैं, उन्हें वे धन-वैभव से भरपूर कर देती हैं.
* इसलिए इस दिन रात को मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें प्रिय चावल के खीर का भोग लगाया जाता है.
* मान्यता अनुसार, शरद पूर्णिमा में चंद्रमा द्वारा अमृत किरणों की बरसात होती है, इसलिए चांदनी रात में चावल की खीर बनाकर रखने और खाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है. साथ ही इससे कई तरह की बीमारियों भी दूर होती हैं.

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गुरुपूर्णिमा की शुभकामनाएं! (Wish You All Happy Gurupurnima)

Gurupurnima

गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्‍वरः

गुरुः साक्षात परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः

* आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा कहते हैं. इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है.

* इस दिन गुरुओं की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.

* इसी दिन संस्कृत के प्रकांड विद्वान और चारों वेदों व महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है. वेदों की रचना के कारण उन्हें वेद व्यास भी कहा जाता है.

* गु का अर्थ अंधकार और रु का अर्थ प्रकाश. गुरु यानी अंधकार से प्रकाश की ओर ले जानेवाला.

* धर्मग्रंथों के अनुसार, इस दिन जो शिष्य अपने गुरु का आशीर्वाद पा लेता है, उसका जीवन सफल हो जाता है.

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* देशभर में गुरुपूर्णिमा बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. प्राचीनकाल में गुरुकुल में शिष्य इस दिन गुरु की पूजा करते थे और उन्हें अपने सामर्थ्य अनुसार भेंट देते थे.

* आज भी स्कूल-कॉलेज, संगीत, कला से जुड़े विद्यार्थी अपने गुरुओं को इस दिन सम्मानित करते हैं.

* मंदिरों में भी पूजा-पाठ होता है. पवित्र नदियों मेंं स्नान किया जाता है. भंडारे-मेले आदि लगते हैं.

* इस दिन व्यासजी के ग्रंथों का अध्ययन-मनन करना चाहिए.

* गुरुपूर्णिमा के दिन गुरु (शिक्षक) ही नहीं, बल्कि अपने माता-पिता, बड़े-बुज़ुर्गों का भी आशीर्वाद लेना चाहिए.

नवरात्रि स्पेशल- सिद्धियां प्रदान करनेवाली मां सिद्धिदात्री (Navratri Special- Devi Siddhidatri)

Navratri Devi maa Siddhidatri

Navratri Devi maa Siddhidatri

या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

नवरात्रि के नौंवे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-आराधना का विधान है.
चार भुजाओंवाली देवी सिद्धिदात्री सिंह पर सवार श्‍वेत वस्त्र धारण कर कमल पुष्प पर विराजमान है.
शास्त्रों के अनुसार, अणिमा, महिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, गरिमा व वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं.
मां अपने भक्तों को ये सभी सिद्धियां प्रदान करती हैं, इसलिए इन्हें सिद्धिदात्री देवी के रूप में पूजा जाता है.
नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखनेवालों को नौ कन्याओं को नौ देवियों के रूप में पूजना चाहिए.
साथ ही इन सभी को भोग, दान-दक्षिणा आदि देने से दुर्गा मां प्रसन्न होती हैं.
पूजा के बाद आरती व क्षमा प्रार्थना करें.
हवन में चढ़ाया गया प्रसाद सभी को श्रद्धापूर्वक बांटें.
हवन की अग्नि ठंडी हो जाने पर जल में विसर्जित कर दें.
यदि चाहें, तो भक्तों में भी बांट सकते हैं.
मान्यता अनुसार, इस भस्म से बीमारी, चिंता-परेशानी, ग्रह दोष आदि दूर होते हैं.

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बीज मंत्र

ऊँ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नम:

ध्यान

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥

स्वर्णावर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शख, चक्र, गदा, पदम, धरां सिद्धीदात्री भजेम्॥

पटाम्बर, परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥

प्रफुल्ल वदना पल्लवाधरां कातं कपोला पीनपयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

स्तोत्र

कंचनाभा शखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो।
स्मेरमुखी शिवपत्नी सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥

पटाम्बर परिधानां नानालंकारं भूषिता।
नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोअस्तुते॥

परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥

विश्वकर्ती, विश्वभती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्व वार्चिता विश्वातीता सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥

भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।
भव सागर तारिणी सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥

धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनी।
मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥

कवच

ओंकारपातु शीर्षो मां ऐं बीजं मां हृदयो।
हीं बीजं सदापातु नभो, गुहो च पादयो॥
ललाट कर्णो श्रीं बीजपातु क्लीं बीजं मां नेत्र घ्राणो।
कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै मां सर्व वदनो॥

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नवरात्रि स्पेशल- महागौरी की उपासना (Navratri Special- Devi Mahagauri)

Navratri Devi Maa Mahagauri Puja

 

Navratri Devi Maa Mahagauri Puja

श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

 

मां की श्रद्धापूर्वक पूजा, ध्यान-आराधना करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं.

जिस तरह सप्तमी में मां की पूजा की थी, उसी तरह अष्टमी में भी मां की पूजा करें.
अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए मां को चुनरी भेंट करती हैं.

ध्यान

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥

पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥

पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥

प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥

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स्तोत्र

सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥

सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥

त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

कवच

ओंकारः पातु शीर्षो मां, हीं बीजं मां, हृदयो।
क्लीं बीजं सदापातु नभो गृहो च पादयो॥

ललाटं कर्णो हुं बीजं पातु महागौरी मां नेत्रं घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा मा सर्ववदनो॥

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नवरात्रि स्पेशल- शुभंकारी मां कालरात्रि (Navratri Special- Devi Kalratri)

Navratri Devi Maa Kalratri

या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

दुर्गा पूजा के सातवें दिन देवी कालरात्रि की पूजा-आराधना का विधान है.
यूं तो मां कालरात्रि का विकराल रूप है, पर सदा शुभ फल देनेवाली होने के कारण इन्हें शुभंकारी कहा जाता है.
मां कालरात्रि को व्यापक रूप से देवी- महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, चामुंडा, चंडी, दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है.
इनके द्वारा राक्षस, भूत-पिशाच व नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है.

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयन्करि

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मां का वर्ण काला और बाल बिखरे हुए हैं.
गले में विद्युत की तरह चमकनेवाली माला है.
इनके तीन नेत्र हैं.
चार भुजाओंवाली मां के हाथों में लोहे का
कांटा व खड्ग है और दो हाथ वरमुद्रा व अभयमुद्रा के रूप में हैं.
इनके श्‍वास से अग्नि निकलती है और वाहन गर्दभ (गधा) है.
मां के हाथों में कटा हुआ सिर है, जिससे रक्त टपकता रहता है.
मां का यह रूप रिद्धि-सिद्धि प्रदान करनेवाला है.
शास्त्रों के अनुसार, दैत्यों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए मां दुर्गा ने अपने तेज से देवी कालरात्रि को उत्पन्न किया था.
इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है, साथ ही दुश्मनों का भी विनाश होता है.
मां कालरात्रि की पूजा करने से समस्त सिद्धियों की प्राप्ति होती रहती है.
देवी को गुड़ प्रिय है, इसलिए इन्हें भोग में गुड़ अर्पित करें और बाद में ब्राह्मण को दान कर दें.
इस दिन तरह-तरह के मिष्ठान देवी को अर्पित किए जाते हैं.
नवरात्र का यह दिन तंत्र-मंत्र के लिए उपयुक्त माना जाता है.
इस दिन तांत्रिकों द्वारा देवी को मदिरा का भोग भी लगाया जाता है.
सप्तमी की रात्रि को सिद्धियों की रात भी कहा जाता है.
देवी कालरात्रि को यंत्र-तंत्र-मंत्र की देवी भी कहा जाता है.
इनकी उपासना करने से मनुष्य भयमुक्त हो जाता है.
देवी की पूजा के बाद शिव व ब्रह्माजी की पूजा भी ज़रूर करनी चाहिए.
साथ ही नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का भी पाठ करें.

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ध्यान

करालवंदना धोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिं करालिंका दिव्यां विद्युतमाला विभूषिताम॥

दिव्यं लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयं वरदां चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम॥

महामेघ प्रभां श्यामां तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥

सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवं सचियन्तयेत् कालरात्रिं सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥

स्तोत्र

हीं कालरात्रि श्री कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥

कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥

क्लीं हीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

कवच

ऊँ क्लीं मे हृदयं पातु पादौ श्रीकालरात्रि।
ललाटे सततं पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥

रसनां पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशंकरभामिनी॥

वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।
तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥

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नवरात्रि स्पेशल- फलदायिनी मां कात्यायनी (Navratri Special- Devi Katyayani)

Navratri Devi Maa Katyayani

Navratri Devi Maa Katyayani

 

चन्द्रहासोज्जवलकरा थाईलवरवाहना
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है.
मां कात्यायनी फलदायिनी मानी गई हैं.
हाथ में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर उपरोक्त मंत्रोच्चार करना चाहिए.
यदि देवी कात्यायनी की पूरी निष्ठा और भक्ति भाव से पूजा करते हैं, तो अर्थ व मोक्ष की प्राप्ति होती है.
चार भुजाधारी मां कात्यायनी सिंह पर सवार हैं.
इनके एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल है.
अन्य दोनों हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं.
शास्त्रों के अनुसार, कात्यायन ऋषि के घर देवी ने पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा.
इसी रूप में देवी ने महिषासुर दानव का वध किया था, इसलिए मां कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है.
मां कात्यायनी ने महिषासुर से युद्ध के समय अपनी थकान को दूर करने के लिए शहदयुक्त पान का सेवन किया था, इसलिए मां कात्यायनी के पूजन में शहदयुक्त पान ज़रूर चढ़ाना चाहिए.
इस दिन लाल रंग विशेष रूप से शुभ माना जाता है, इसलिए लाल रंग का वस्त्र धारण करें.
मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना करने से जीवन की सारी परेशानियां व बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं.
यदि किसी कन्या के शादी में अड़चनें व परेशानियां आ रही हो, तो उसे मां कात्यायनी का व्रत व पूजन करना चाहिए.
विद्यार्थियों को मां कात्यायनी की विशेष रूप से पूजा-उपासना करनी चाहिए. इससे शिक्षा के क्षेत्र में सफलता अवश्य प्राप्त होती है.

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ध्यान

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥
स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥

स्तोत्र

कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।
सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥

कवच

कात्यायनी मुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी॥

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नवरात्रि स्पेशल- समस्त इच्छाओं को पूर्ण करनेवाली स्कन्दमाता (Navratri Special- Devi Skandmata)

Navratri Devi Skandmata worship pujan

Navratri Devi Skandmata worship pujan

 

दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै
ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

नवरात्रि के पांचवें दिन अंबे मां के पांचवें स्वरूप स्कन्दमाता की
पूजा-आराधना की जाती है.
मां अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं.
मां को माहेश्‍वरी व गौरी के नाम से भी जाना जाता है.
महादेव शिव की वामिनी यानी पत्नी होने के कारण माहेश्‍वरी भी कहलाती हैं.
अपने गौर वर्ण के कारण गौरी के रूप में पूजी जाती है.
मां को अपने पुत्र स्कन्द (कार्तिकेय) से अत्यधिक प्रेम होने के कारण पुत्र के नाम से कहलाना पसंद करती हैं, इसलिए इन्हें स्कन्दमाता कहा जाता है.
अपने भक्तों के प्रति इनका वात्सल्य रूप प्रसिद्ध है.
कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्यासना भी कहते हैं.
स्कन्दमाता अपने इस स्वरूप में स्कन्द के बालरूप को अपनी गोद में लेकर विराजमान रहती हैं.
इनकी चार भुजाएं हैं. दाईं ओर कमल का फूल व बाईं तरफ़ वरदमुद्रा है.
इनका वाहन सिंह है.

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सिंहासनगता नित्यं पद्याश्रितकरद्वया
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी

संतान की कामना करनेवाले भक्तगण इनकी विशेष रूप से पूजा करते हैं.
वे इस दिन लाल वस्त्र में लाल फूल, सुहाग की वस्तुएं- सिंदूर, लाल चूड़ी, महावर, लाल बिंदी, फल, चावल आदि बांधकर मां की गोद भरनी करते हैं.

ध्यान
वंदे वांछित कामार्थे चंद्रार्धकृतशेखराम्
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कंदमाता यशस्वनीम्
धवलवर्णा विशुद्ध चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्
अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्
प्रफु्रल्ल वंदना पल्लवांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्
कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्
कवच
ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मघरापरा। हृदयं पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥
श्री हीं हुं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा। सर्वांग में सदा पातु स्कन्धमाता पुत्रप्रदा॥
वाणंवपणमृते हुं फ्ट बीज समन्विता। उत्तरस्या तथाग्नेव वारुणे नैॠतेअवतु॥
इन्द्राणां भैरवी चैवासितांगी च संहारिणी। सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥

 

यदि आप कफ़, वात, पित्त जैसी बीमारियों से ग्रस्त हैं, तो आपको स्कंदमाता की विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए.
मां को अलसी चढ़ाकर प्रसाद में रूप में ग्रहण करना चाहिए.
केले का भोग लगाना चाहिए, क्योंकि केला मां को प्रिय है.

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नवरात्रि स्पेशल- आदिदेवी कूष्मांडा (Navratri Special- Devi Kushmanda)

Navratri Devi Kushmanda worship

Navratri Devi Kushmanda worship

या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

देवी कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त है,
इसलिए इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है.
जिस तरह से ब्रह्माचारिणी व चंद्रघंटा देवी
की पूजा-अर्चना की जाती है,
उसी तरह से कूष्मांडा देवी की पूजा का विधान है.
इनकी पूजा करने से आयु, यश व आरोग्य की प्राप्ति होती है.

ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्.
सिंहरूढा अष्टभुजा कुष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्.
कमण्डलु चाप, बाण, पदमसुधाकलश चक्र गदा जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीया कृदुहगस्या नानालंकार भूषिताम्.
मंजीर हार केयूर किंकिण रत्नकुण्डल मण्डिताम्.
प्रफुल्ल वदनां नारू चिकुकां कांत कपोलां तुंग कूचाम्.
कोलांगी स्मेरमुखीं क्षीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम् ॥

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स्त्रोत मंत्र

दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्.
जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्.
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुंदरी त्वंहि दु:ख शोक निवारिणाम्.
परमानंदमयी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

 

कवच मंत्र

हसरै मे शिर: पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्.
हसलकरीं नेत्रथ, हसरौश्च ललाटकम्॥
कौमारी पातु सर्वगात्रे वाराही उत्तरे तथा.
पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम.
दिग्दिध सर्वत्रैव कूं बीजं सर्वदावतु॥

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नवरात्रि स्पेशल- कल्याणकारी व शांति की प्रतीक देवी चंद्रघंटा (Navratri Special- Devi Chandraghanta)

Navratri Puja Devi Chandraghanta

Navratri Puja Devi Chandraghanta

 

या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा देवी की पूजा की जाती है.
देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है.
इनके मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है,
इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है.
इनके दस हाथ हैं, जो कमल, धनुष-बाण, कमंडल,
त्रिशूल, गदा, खड्ग, अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं.
चंद्रघंटा देवी की सवारी सिंह है.

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पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता

इस दिन सांवली रंगत की महिला को घर बुलाकर पूजा-अर्चना करें.
भोजन में दही-हलवा आदि खिलाएं.
कलश व मंदिर की घंटी भेंट करें.
इनकी आराधना करने से निर्भयता व सौम्यता दोनों ही प्राप्त होती है.
इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की प्रेतबाधा से रक्षा करती है.

                           स्त्रोत मंत्र

ध्यान वन्दे वाच्छित लाभाय चन्द्रर्घकृत शेखराम।
सिंहारूढा दशभुजां चन्द्रघण्टा यशंस्वनीम्घ
कंचनाभां मणिपुर स्थितां तृतीयं दुर्गा त्रिनेत्राम।

खड्ग, गदा, त्रिशूल, चापशंर पद्म कमण्डलु माला वराभीतकराम्घ
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्यां नानालंकार भूषिताम।
मंजीर हार, केयूर, किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्घ
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुग कुचाम।

कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटिं नितम्बनीम्घ
स्तोत्र आपद्धद्धयी त्वंहि आधा शक्तिरू शुभा पराम।
अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यीहम्घ्
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्ट मंत्र स्वरूपणीम।

धनदात्री आनंददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्घ
नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायनीम।
सौभाग्यारोग्य दायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्घ्
कवच रहस्यं श्रणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।

श्री चन्द्रघण्टास्य कवचं सर्वसिद्धि दायकम्घ
बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोद्धरं बिना होमं।
स्नान शौचादिकं नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिकमघ
कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च।

नवरात्रि स्पेशल- तपस्या व त्याग की देवी मां ब्रह्मचारिणी (Navratri Special- Devi Brahmcharini)

Devi Brahmcharini puja

Devi Brahmcharini puja

सिद्धि प्राप्ति के लिए नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की विशेष पूजा की जाती है.

या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप भक्तों व सिद्धों को अनंत फल देनेवाला है.
देवी ब्रह्मचारिणी हिमालय व मैना की पुत्री हैं.
इन्होंने भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी.
इस कठिन तपस्या के कारण ही इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा.
इन्हें त्याग व तपस्या की देवी माना जाता है.
इनके दाहिने हाथ में अक्षमाला और बाएं हाथ में कमंडल है.

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इनकी पूजा-अर्चना करने से हमारे जीवन में तप, संयम, त्याग व सदाचार की वृद्धि होती है.
इनकी पूजा करने से पहले हाथ में एक फूल लेकर यह प्रार्थना करें-

दधाना करपप्राभ्यामक्षमालाकमण्डलू l
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्माचारिण्यनुत्तमा ll

इसके बाद देवी को पंचामृत से स्नान कराकर
फूल, अक्षत, रोली, चंदन, कुमकुम अर्पित करें.
देवी को अरूहूल (लाल रंग का एक विशेष फूल) का फूल विशेष रूप से पसंद है, इसलिए हो सके, तो इसकी माला बनाकर पहनाएं.
मान्यता के अनुसार, इस दिन ऐसी कन्याओं की पूजा व आवभगत की जाती है, जिनका विवाह तय हो गया है, पर अभी शादी नहीं हुई है. इन्हें घर बुलाकर पूजन के बाद भोजन कराकर वस्त्र उपहार स्वरूप दिया जाता है.

देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म स्वरूप है. यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है यानी तपस्या का मूर्तिमान स्वरूप है.
ये कई नाम से प्रसिद्ध हैं, जैसे-
तपश्‍चारणी, अपर्णा, उमा आदि.

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