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क्या है सोलह श्रृंगार का हेल्थ कनेक्शन? (Health Connection Of Solah Shringar)

क्या आपको पता है कि आप जो सोलह श्रृंगार (Solah Shringar) करती हैं, वो न स़िर्फ आपकी ख़ूबसूरती में चार चांद लगाते हैं, बल्कि आपकी सेहत (Health) को भी दुरुस्त रखते हैं. जी हां, कौन-कौन-से हैं ये सोलह श्रृंगार और क्या हैं उनके हेल्थ कनेक्शन (Health Connection)? आइए देखते हैं.

Solah Shringar

1. बिंदी

–    भौंहों के बीच में माथे पर महिलाएं जहां बिंदी लगाती हैं, उस स्थान को आज्ञा चक्र कहते हैं. आयुर्वेद के अनुसार यहां बिंदी लगाने से मन शांत रहता है, जिससे तनाव नहीं होता.

–     एक्युप्रेशर के अनुसार, सिरदर्द होने पर यहां थोड़ी देर प्रेस करने से सिरदर्द से राहत मिलती है. जो महिलाएं रोज़ाना बिंदी लगाती हैं, वो एक तरह से सुबह-सुबह इस प्रेशर पॉइंट को मसाज देती हैं, जिससे उन्हें बाकी लोगों के मुक़ाबले सिरदर्द कम होता है.

–     साइनस के दर्द में भी बिंदी आपको राहत दिलाती है. इस जगह पर मसाज करने से नाक के आस-पास ब्लड सर्कुलेशन अच्छी तरह होता है, जिससे साइनस के दर्द और सूजन दोनों में राहत मिलती है.

–     बिंदी लगाते व़क्त महिलाएं अगर थोड़ी देर उसे इधर-उधर ठीक करने में समय लगाती हैं, उससे माथे की मसल्स फ्लेक्सिबल व मज़बूत होती हैं, जो झुर्रियां पड़ने से रोकती हैं.

–     बिंदी के अलावा महिलाएं चंदन, टीका, हल्दी, कुमकुम आदि लगाती हैं, जो काफ़ी उपयोगी साबित होता है. रात को सोने से पहले अगर इस स्थान पर चंदन या हल्दी का टीका लगाएं, तो नींद अच्छी आती है. जिन लोगों को अनिद्रा की समस्या है, उनके लिए यह काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है.

–     माथे और आंखों की नसों का गहरा कनेक्शन होता है. सुप्राट्रोक्लियर नामक नर्व भी यहां से गुज़रती है, जो फ्रंटल नर्व से जुड़ी है. यह आंख की सभी मसल्स से जुड़ी है, इसीलिए यहां मसाज करने से आंखों की रोशनी भी बेहतर होती है और आंखें भी स्वस्थ रहती हैं.

2. सिंदूर

–    सिंदूर के बिना सोलह शृंगार अधूरा माना जाता है.  हल्दी, चूने और पारे से बने सिंदूर में कई औषधीय गुण मौजूद हैं.

–     हल्दी एक बेहतरीन एंटीबायोटिक है, जो कई तरह के इंफेक्शन्स से बचाता है.

–     मरक्यूरी या पारा ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के साथ-साथ महिलाओं की सेक्स ड्राइव को भी बढ़ाता है. यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है. इसके अलावा मस्तिष्क को शांत रखकर यह तनाव से बचाता है.

–     सिंदूर का लाल रंग रक्त और आग का प्रतीक होता है. यह सिर के बीचोंबीच मांग में इसलिए लगाया जाता है, क्योंकि यहां पिट्यूटरी और पीनियल ग्लैंड्स होते हैं, जो सिंदूर लगाने पर सक्रिय हो जाते हैं. इससे शरीर में पॉज़िटिविटी का संचार होता है.

–     यह महिलाओं में एकाग्रता को बढ़ाता है.

3. मांगटीका

–     यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है.

–     पिट्यूटरी ग्लैंड पर होने के कारण मांगटीका  पॉज़िटिविटी को आकर्षित करता है.

–     आज्ञाचक्र पर होने के कारण यह आपको अपनी भावनाओं को कंट्रोल करने में मदद करता है.

–     यह महिलाओं को एकाग्रचित्त होने में मदद करता है.

4. काजल

–     काजल आंखों की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के साथ-साथ आंखों की रोशनी को भी बढ़ाता है.

–     काजल सूरज की हानिकारक किरणों से आंखों की रक्षा करता है.

–     यह आंखों को हाइड्रेटेड रखता है, जिससे ड्राई आईज़ की समस्या नहीं होती.

–     यह रतौंधी और मोतियाबिंद जैसी आंखों की समस्याओं में काफ़ी कारगर साबित होता है.

–     काजल में मौजूद कपूर आंखों को ठंडक प्रदान करता है. आंखों कोतनाव से भी राहत दिलाता है.

–     काजल में मौजूद घी आंखों के डार्क सर्कल्स को दूर करने में मदद करता है.

–     यह आंखों की थकान, जलन और खुजली को दूर करने में भी काफ़ी मदद करता है.

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Solah Shringar
5. नथ/ नोज़ रिंग

–     ज़्यादातर महिलाएं नथ या नोज़ रिंग बाईं तरफ़ पहनती हैं. दरअसल, ऐसा माना जाता है कि नाक के इस हिस्से में छेद करके नोज़ रिंग या नोज़ पिन पहनने से पीरियड्स के दौरान होनेवाले दर्द से राहत मिलती है.

–     बाईं नासिका की नर्व्स महिलाओं के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन से जुड़ी होती हैं, इसलिए उन्हें डिलीवरी के दौरान होनेवाला लेबर पेन भी कम होता है.

–     यह ब्रेन की वेवलेंथ्स को कंट्रोल करता है, जिससे इनको सम्मोहित करना आसान नहीं होता.

6. झुमके/ ईयररिंग्स

–     ईयररिंग्स या झुमके हमारे शरीर पर एक्युपंक्चर का काम करते हैं.

–     कान की ईयरलोब में कई एक्युप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जिन्हें मसाज करने से दिमाग़ तेज़ होता है और एकाग्रता भी बढ़ती है.

–     दाएं कान से होकर गुज़रनेवाली नर्व किडनी, ब्रेन और सर्विक्स से जुड़ी होती है. यहां सही दबाव बनाया जाए, तो किडनी और ब्लैडर हमेशा हेल्दी रहते हैं.

7. मंगलसूत्र/ हार

–     मंगलसूत्र यानी पवित्र धागे की हिंदू धर्म में बहुत मान्यता है. आयुर्वेद में भी इसका ज़िक्र है कि सोना हेल्दी हार्ट के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद है, इसीलिए मंगलसूत्र सोने के बने होते हैं.

–     हृदय के पास होने के कारण यह उसकी फंक्शनिंग में मदद करता है.

–     मंगलसूत्र पहननेवाली महिलाओं का इम्यून सिस्टम मज़बूत रहता है.

–     यह रक्तसंचार को बेहतर बनाता है, जिससे महिलाएं एनर्जेटिक बनी रहती हैं.

–     साथ ही यह ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करता है.

–     महिलाओं के शरीर में मौजूद सूर्य नाड़ी को उत्तेजित करता है, जिससे उसमें मौजूद ऊर्जा का संचार होता है.

8. मेहंदी

–     यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में भी मदद करती है.

–     हाथों की गहरी मेहंदी न स़िर्फ पिया के प्यार की पहचान है, बल्कि सेहत के लिए भी काफ़ी फ़ायदेमंद है.

–     शादी या किसी फंक्शन के व़क्त महिलाएं काफ़ी स्ट्रेस में और नर्वस रहती हैं, इसलिए ऐसे मौक़ों पर मेहंदी लगाई जाती है, ताकि इसके कूलिंग इफेक्ट से उनकी नर्वसनेस और स्ट्रेस कम हो जाए.

–     इसके अलावा सही ब्लड सर्कुलेशन में भी यह मदद करती है.

–     तापमान नियंत्रित रहने से महिलाओं को सिरदर्द और बुख़ार की शिकायत नहीं होती.

–     हाथों-पैरों की मेहंदी नर्व्स को शांत रखती है, जिससे महिलाओं को तनाव कम होता है.

–     अपने एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह छोटी-मोटी खरोंच होने या कटने-जलने पर सेप्टिक होने से बचाती है और घाव को जल्दी ठीक होने में मदद करती है.

9. बाजूबंद

–     यह ब्लड सर्कुलेशन में मदद करता है.

–     साथ ही इसे पहनने से शरीर की ऊर्जा बनी रहती है.

–     सोने से बने बाजूबंद से महिलाओं को इसके सभी गुणों का लाभ मिलता है.

10. चूड़ियां/कंगन

–     पुराने ज़माने से ही हमारे देश में कांच की चूड़ियां पहनने का चलन रहा है, हालांकि आज प्लास्टिक, मेटल और भी कई मटेरियल्स की चूड़ियां और कड़े बनने लगे हैं, पर कांच की चूड़ियों के हेल्थ बेनीफिट ज़्यादा हैं.

–     कांच अपने सोखनेवाले गुण के कारण आसपास के माहौल से पॉज़िटिविटी को आकर्षित करके पहननेवाले तक पहुंचाता है.

–     चूड़ियों की आवाज़ से निगेटिव एनर्जी महिलाओं को अधिक प्रभावित नहीं करती.

–     चूड़ियां और कंगन महिलाओं के ब्लड सर्कुलेशन को नियंत्रित रखने में मदद करती हैं.

–     गोलाकार होने के कारण एनर्जी शरीर से बाहर निकल नहीं पाती और टकराकर वापस शरीर में चली आती है, जिससे जल्द थकान नहीं होती.

–     हाथों में लगातार रगड़ते रहने से हड्डियां मज़बूत होती हैं.

–     बाकी धातुओं की तुलना में कांच की चूड़ियों में इमोशनल बैलेंस को बनाए रखने की क्षमता बेहतर होती है.

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Solah Shringar
11. हाथफूल/अंगूठियां

–     रिंग फिंगर की नर्व मस्तिष्क से होकर हृदय तक जाती है, इसलिए अंगूठी इसी उंगली में पहनाई जाती है, ताकि दोनों दिल से जुड़े रहें.

–     रिंग से उंगली में लगातार घर्षण होता है, जो हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में काफ़ी मदद करता है.

–     रिंग्स ब्लड प्यूरिफिकेशन और सर्कुलेशन में भी मदद करती हैं.

–     मध्यमा उंगली में रिंग नहीं पहननी चाहिए, इससे पहननेवाले को निर्णय लेने में दुविधा होती है.

12. करधनी/ कमरबंद

–     यह दुल्हन की ख़ूबसूरती को जितना निखारती है, उतना ही उन्हें फिट भी बनाए रखती है. यही वजह है कि कुछ समाज में महिलाएं रोज़ाना करधनी पहनती हैं.

–     ज़्यादातर करधनी चांदी की होती है, जो अपने औषधीय गुणों के कारण काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होती है.

–     कमर और लोअर एब्डोमन में होने के कारण यह महिलाओं के पीरियड्स को नियमित बनाए रखने में मदद करती है.

–     अपनी पेनकिलर ख़ूबी के कारण चांदी की करधनी पहननेवाली महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होनेवाले दर्द और मरोड़ से राहत मिलती है.

–     करधनी पहननेवाली महिलाओं का बेली फैट नहीं बढ़ता, जिससे वो स्लिम-ट्रिम बनी रहती हैं.

–     इतना ही नहीं, यह शरीर में फैट्स को बढ़ने से भी रोकती है.

13. पायल

–     आपने शायद ही इस ओर ध्यान दिया होगा कि चांदी की पायल पेनकिलर का भी काम कर सकती है. जी हां, चांदी शरीर में ऊर्जा के संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

–    पैरों में होने के कारण चलने-फिरने पर होनेवाली पैरों की थकान को दूर करके यह दर्दनिवारक का काम करती है.

–    चांदी में एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज़ होती हैं, जो कोल्ड और फ्लू के वायरस से बचाती है. साथ ही इसके कारण घाव तेज़ी से भरते हैं.

–     यह जोड़ों के दर्द से भी काफ़ी राहत दिलाती है.

–     यह त्वचा में लचीलेपन को भी बढ़ाती है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं कम होती हैं.

14. बिछिया/ टो रिंग

–     शादी के व़क्त पैर की तर्जनी में बिछिया पहनना भी एक रस्म है. दरअसल, बिछिया इसी उंगली में इसलिए पहनी जाती है, क्योंकि इसकी नसें सीधे गर्भाशय से जुड़ी होती हैं.

–     बिछिया पहनने से इस उंगली में जो घर्षण होता है, उससे पीरियड्स नियमित रहते हैं. यूं कहें, तो पीरियड्स नियमित रखने का यह एक नेचुरल तरीक़ा है.

–     दोनों पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनने से फर्टिलिटी और रिप्रोडक्टिव हेल्थ बैलेंस रहती है.

–     बिछिया गर्भाशय को भी स्वस्थ रखती है, ताकि महिलाओं को गर्भधारण में कोई समस्या न आए.

–     आयुर्वेद भी इस बात पर ज़ोर देता है कि महिलाओं को पैर में चांदी की बिछिया पहननी चाहिए, ताकि उनमें पॉज़िटिव एनर्जी का संचार होता रहे.

15. परफ्यूम

–    इसकी ख़ुशबू दिनभर फ्रेश फील कराती है, जिससे आप नर्वस फील नहीं करतीं.

–     ख़ुशबू मूड को बेहतर बनाने में भी मदद करती है, जिससे महिलाओं का कॉन्फिडेंस बना रहता है.

–     मूड बेहतर रहने से तनाव व डिप्रेशन नहीं आता, जो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी काफ़ी फ़ायदेमंद है.

16. गजरा/हेयर एक्सेसरीज़

–     गजरा या फूल लगाने से महिलाएं फ्रेश फील करती हैं.

–     फूलों की ख़ुशबू से उनका मूड अच्छा रहता है.

–     जैसमीन के गजरे को सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है.

–     गजरे की ख़ुशबू पार्टनर को आकर्षित करती है.

–     सोने-चांदी की हेयर एक्सेसरीज़ अपने गुणों के कारण महिलाओं को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं.

– सुनीता सिंह

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जानें हिंदू मैरिज एक्ट… समय के साथ क्या-क्या बदला? (Hindu Marriage Act: Recent Changes You Must Know)

Hindu Marriage Act Changes

साल 1955 में हमारे देश के जो हालात थे, आज स्थिति उससे बिल्कुल अलग है. आज लड़कियां भी उच्च शिक्षा प्राप्त करके सफलता के नित नए आयाम छू रही हैं, ऐसे में हमारा क़ानून भला बदलाव से अछूता कैसे रह सकता है. जब-जब महिलाओं ने अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाई, तब-तब क़ानून में महत्वपूर्ण बदलाव हुए. पिछले 63 सालों में कितना बदला हमारा हिंदू विवाह क़ानून? आइए जानते हैं.

Hindu Marriage Act Changes

कितना जानते हैं आप हिंदू मैरिज एक्ट के बारे में?

हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 में बनाया गया था. इस क़ानून के तहत सभी हिंदुओं, सिख, जैन और बौद्धों के शादी, तलाक़ और मेंटेनेंस के मामले सुलझाए जाते हैं.

–     सबसे पहले तो शादी के समय लड़की की उम्र 18 और लड़के की 21 साल होनी चाहिए. कुछ समय पहले जनहित याचिका के तहत एक वकील ने लड़के की उम्र भी 18 साल करने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने सिरे से ख़ारिज कर दिया.

–     हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कोई शादीशुदा व्यक्ति पहली पत्नी के जीवित रहते, उससे तलाक़ लिए बिना दूसरी शादी नहीं कर सकता. अगर ऐसा होता है, तो उसे सात साल की जेल और जुर्माना दोनों हो सकता है. कुछ लोगों ने इसका तोड़ निकालने के लिए धर्म बदलकर शादी करनी शुरू की, जिसके ख़िलाफ़ 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने ़फैसला सुनाया कि यह क़ानूनन जुर्म है, जिसके लिए उस व्यक्ति को सज़ा हो सकती है.

–     गोवा के फैमिली लॉ के कोड ऑफ यूसेजेस एंड कस्टम्स में गैर-ईसाई हिंदू व्यक्ति को एक से ज़्यादा शादियां करने की छूट है, बशर्ते 25 साल की उम्र तक उसकी पत्नी मां न बनी हो और 30 साल की उम्र तक उन्हें कोई बेटा न हो.

–     इसके तहत शादी के लिए किसी ख़ास रस्म का ज़िक्र नहीं किया गया है. लड़के या लड़की किसी के भी रीति-रिवाज़ों के आधार पर शादी की जा सकती है.

–     शादी के बाद पति-पत्नी दोनों को ही वैवाहिक अधिकार (सेक्सुअल रिलेशन के अधिकार) मिलते हैं. क़ानूनन शादी तभी संपन्न मानी जाती है, जब उनके बीच शारीरिक संबंध बनते हैं. अगर कोई पार्टनर दूसरे को इस अधिकार से महरूम रखता है, तो दूसरा पार्टनर कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकता है. कोर्ट ऐसी शादी को अमान्य या निरस्त कर सकता है.

–     इसके तहत शादी का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, ताकि शादी के बाद होनेवाली लीगल डॉक्यूमेंटेशन में कोई अड़चन न आए, लेकिन आज भी बहुत से लोग मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बनवाते, जिसके कारण कुछ लोग उसका ग़लत फ़ायदा भी उठाते हैं.

–     हिंदू मैरिज एक्ट में शादी को पवित्र बंधन माना गया है, लेकिन अगर दोनों की शादी में समस्या आ रही है, तो वो तलाक़ ले सकते हैं. तलाक़ के आधार- व्यभिचार, धर्मांतरण, मानसिक विकार, कुष्ठ रोग, नपुंसकता, सांसारिक कर्त्तव्यों को त्याग देना, सात सालों से लापता, जुडीशियल सेपरेशन (कोर्ट द्वारा अलग रहने की इजाज़त), किसी भी तरह के शारीरिक संबंध नहीं बनाना और निष्ठुरता या क्रूरता हैं. पिछले कुछ सालों में मानसिक क्रूरता (मेंटल क्रुएल्टी) के आधार पर तलाक़ के मामलों में बढ़ोतरी हुई है.

–   क़ानून ने महिलाओं को परमानेंट एलीमनी और मेंटेनेंस का अधिकार दिया है, लेकिन वो ऐसी महिलाएं हैं, जो ख़ुद अपना भरण-पोषण नहीं कर सकतीं. कामकाजी महिलाओं को मेंटेनेंस का अधिकार नहीं था, लेकिन 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम् ़फैसला दिया कि पति से अलग रहनेवाली कामकाजी महिलाएं भी मेंटेनेंस की हक़दार होंगी.

–     बच्चों की कस्टडी को लेकर भी नियम बनाए गए हैं. तलाक़ के बाद अगर बच्चा छोटा है, तो मां को ही उसकी कस्टडी मिलती है. बड़े बच्चों के लिए कोर्ट मामले को दोनों की आर्थिक स्थिति व परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ़फैसला करता है.

किन स्थितियों में शादी हो सकती है अमान्य?

हिंदू मैरिज एक्ट में ऐसा भी प्रावधान है कि कुछ स्थितियों में आप अपनी शादी को कोर्ट से अमान्य घोषित करा सकते हैं. ऐसे में आप तलाक़शुदा नहीं कहे जाएंगे, बल्कि ऐसा माना जाएगा कि आपकी शादी हुई ही नहीं थी.

–   अगर शादी के व़क्त लड़की किसी और पुरुष से प्रेग्नेंट हो, तो ऐसी सूरत में शादी अमान्य हो सकती है. कुछ साल पहले ऐसा एक मामला सुर्ख़ियों में आया था. उस केस में लड़की शादी के व़क्त प्रेग्नेंट थी. शादी के बाद जब उसके पति को इसका शक हुआ, तो उन्होंने सोनोग्राफी करवाई, तो पता चला कि लड़की प्रेग्नेंट है. उसके पति ने तुरंत फैमिली कोर्ट में शादी को अमान्य करने की याचिका दाख़िल की. इस मामले में आपको यह ध्यान रखना होगा कि शादी के एक साल के भीतर मामला दाख़िल करना होगा.

–     अगर नपुंसकता के कारण पति-पत्नी का रिश्ता नहीं बन पाया, तो शादी क़ानूनन पूरी नहीं मानी जाएगी और ऐसे में व्यक्ति को हक़ है कि वो शादी को अमान्य करा सके. ऐसे में आपको तलाक़ लेने की ज़रूरत नहीं, बल्कि शादी को अमान्य करा सकते हैं.

–    अगर शादी के बाद आपको पता चले कि शादी के व़क्त ही आपके पार्टनर की मानसिक स्थिति सही नहीं थी और यह बात आपसे छुपाई गई, तो आप ऐसी स्थिति में अपनी शादी को अमान्य करा सकते हैं.

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Hindu Marriage Act Changes
विवाह विधेयक क़ानून, 2010

हिंदू मैरिज एक्ट और स्पेशल मैरिज एक्ट में कुछ बदलाव करने के उद्देश्य से साल 2010 में यह विधेयक लाया गया था. इस विधेयक में महिलाओं के ह़क़ में कई बदलाव किए गए हैं. 2013 में यह विधेयक राज्यसभा में पारित हुआ, पर लोकसभा में पारित न हो सका. इसमें प्रस्तावित कुछ बदलावों के बारे में आइए आपको बताते हैं.

–    इसमें पत्नी को यह अधिकार दिया गया है कि वो इस आधार पर अपने पति से तलाक़ ले सकती है कि अब उनकी शादी इस मुक़ाम पर पहुंच गई है कि उसे बरक़रार रखना नामुमकिन है, इसलिए वो तलाक़ चाहती है.

–     अगर पति ‘शादी पूरी तरह से टूट गई है और बरक़रार नहीं रह सकती,’ इस आधार पर तलाक़ लेना चाहता है, तो पत्नी इसका विरोध कर सकती है, पर पति के पास यह अधिकार नहीं है.

–     पत्नी को पति की चल-अचल संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा. साथ ही उसे पति की रिहायशी संपत्ति यानी घर आदि में हिस्सा मिलेगा.

–     पति-पत्नी द्वारा गोद लिए बच्चों को सगे बच्चों के समान प्रॉपर्टी में अधिकार मिलेगा.

–     आपसी सहमति से तलाक़ के लिए याचिका दायर करने के बाद कोई पक्ष क़ानूनी कार्यवाही से पीछे नहीं हट सकता.

छह महीने का इंतज़ार ख़त्म

इस बीच सितंबर, 2017 में हिंदू मैरिज एक्ट में एक और अहम् बदलाव आया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से तलाक़ लेने के लिए लोगों को 6 महीने का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा. कोर्ट के मुताबिक़ अगर दोनों के बीच समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है और बच्चों की कस्टडी का ़फैसला भी हो गया है, तो उन्हें छह महीने के कूलिंग ऑफ पीरियड को पूरा करने की मजबूरी नहीं है. इससे दोबारा वो जल्दी अपना घर बसा सकते हैं.

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Hindu Marriage Act Changes  
 स्पेशल मैरिज एक्ट से जुड़ी 10 ज़रूरी बातें

यह क़ानून ख़ासतौर से अंतर्जातीय विवाह कर रहे लोगों की रक्षा के लिए बनाया गया है. इसके तहत अपनी शादी रजिस्टर कराने के लिए आपको कोई धार्मिक रीति-रिवाज़ निभाने नहीं पड़ते.

  1. इस एक्ट के तहत अंतर्जातीय और अलग-अलग धर्म के लोग विवाह कर सकते हैं.
  2. इसके तहत हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन या बौद्ध धर्म के लोग विवाह कर सकते हैं.
  3. शादी के लिए आपको 30 दिन पहले नोटिस देना पड़ता है. दूल्हा या दुल्हन दोनों में से कोई एक अपने इलाके के रजिस्ट्रार ऑफिस में नोटिस जमा कर सकता है.
  4. इसके तहत स़िर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीय भी विवाह रजिस्टर करा सकते हैं.
  5. हिंदू मैरिज एक्ट की तरह इसमें भी कुछ नियम व शर्तें हैं, जैसे-

–     लड़के की उम्र कम से कम 21 साल और लड़की 18 साल होनी चाहिए.

–     दोनों कुंआरे हों या फिर शादीशुदा न हों यानी कोई पति-पत्नी न हों.

–     शादी के व़क्त मानसिक स्थिति अच्छी होनी चाहिए.

–     दोनों ही पक्ष प्रोहिबिटेड रिलेशनशिप की कैटेगरी में न आते हों. प्रोहिबिटेड रिलेशनशिप यानी भाई-बहन न हों, न ही सौतेले भाई-बहन हों. आपको बता दें कि सपिंडवाले भी इसके तहत शादी नहीं कर सकते. सपिंड यानी मां की तरफ़ से तीन पीढ़ी और पिता की तरफ़ से पांच पीढ़ी तक में शादी निषिद्ध मानी जाती है.

  1. 30 दिनों के लिए शादी का नोटिस रजिस्ट्रार ऑफिस के नोटिस बोर्ड पर लगाया जाता है. अगर किसी को इस शादी से आपत्ति हो, तो वो अपनी आपत्ति ज़ाहिर कर सकता है.
  2. अगर कोई आपत्ति आती है, तो रजिस्ट्रार को उसे 30 दिनों के भीतर सुलझाना होता है, लेकिन अगर कोई आपत्ति नहीं आती, तो नियत तारीख़ को तीन गवाहों की उपस्थिति में शादी संपन्न कराई जाती है.
  3. हर किसी के लिए यह जानना ज़रूरी है कि इसके तहत शादी करनेवालों के प्रॉपर्टी सक्सेशन के मामले इंडियन सक्सेशन एक्ट के तहत सुलझाए जाते हैं.
  1. यहां यह जानना भी बेहद ज़रूरी है कि आप शादी के एक साल के भीतर तलाक़ के लिए अप्लाई नहीं कर सकते. लेकिन अगर आप साबित कर सकें कि शादी बहुत बुरे हालात से गुज़र रही है, तो कोर्ट आवेदन पर अमल कर सकता है.
  2. इस एक्ट में दोबारा शादी का प्रावधान भी शामिल किया गया है, लेकिन शर्त यही है कि पहली शादी टूट चुकी हो और मामले में दोबारा अपील की गुंजाइश न बची हो.

– अनीता सिंह

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