home cleaning

बदलते मौसम में ही नहीं बल्कि हमेशा ही होम हाइजीन बेहद ज़रूरी होती है ताकि घर रहे सुरक्षित और कीटाणु मुक्त औरहम रहें हेल्दी. यहां हम होम हाइजीन के वो आसान टिप्स बता रहे हैं जो पता तो हम सबको होते हैं लेकिन कभी लापरवाहीके चलते तो कभी समय ना होने का बहाना करके हम उन्हें नज़रअंदाज़ करते रहते हैं. बेहतर होगा आप इन्हें अपनाकरसुरक्षित रहें और घर को हेल्दी रखें.

  • सबसे पहले डोर हाइजीन ज़रूरी है. घर के बाहर डोर मैट ज़रूर रखें वो भी अच्छी क्वालिटी का. 
  • उसे समय समय पर क्लीन करें. 
  • डोरबेल को सैनिटाइज़ करें नियमित रूप से क्योंकि उसे कई तरह के लोग छूते हैं और उनके ज़रिए कीटाणु घर में याहमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं.
  • दरवाज़े को भी क्लीन करें. एंटीबैक्टीरियल स्प्रे से दरवाज़े को साफ़ करें. 
  • घर में नियमित रूप से डस्टिंग करें, ताकि धूल मिट्टी ना जम पाए और आपको हेल्दी माहौल मिले.
  • सीलिंग और दीवारों को साफ़ रखें ताकि मकड़ी जाले ना बना पाए.
  • पंखों की सफ़ाई भी उतनी ही ज़रूरी है.
  • एसी की सर्विसिंग भी नियमित रूप से करवाएँ.
  • सोफ़ा कवर और बेडशीट्स भी समय समय पर धोएँ क्योंकि उनमें भी कीटाणु पनप कर आपको बीमार कर सकते हैं.
  • तकिए के कवर की भी सफ़ाई करें. इन सबको क्लीन करें. अगर वैक्यूम क्लीनर नहीं हो तो झाड़पोंछकर बिछाएँ बिस्तर.
Smart Home Hygiene Tips
  • इसी तरह से फ़र्नीचर और बाक़ी के समनों की भी डस्टिंग करें.
  • घर में बर्तन या बाल्टी में पानी भरकर ना रखें, जमा पानी में मछर-मक्खी पनप कर कई बीमारी दे सकते हैं.
  • बाथरूम को भी गीला ना रखें. नहाने के बाद उसे सूखा कर दें.
  • बाल्टी और मग प्लास्टिक के होते हैं उन्हें नियमित रूप से बदलते रहें और उन्हें साफ़ भी करते रहें.
  • नल और बेसिन को भी साफ़ करते रहें. बेसिन में फिनाइल की गोलियाँ डालकर रखें.
  • टूथब्रश एरिया को भी साफ़ करते रहें. वहाँ की सफ़ाई को भी लोग नज़रअंदाज़ करते हैं.
  • परदों की सफ़ाई का भी ख़्याल रखें. 
  • खिड़कियाँ खुली रखें ताकि सूरज की रोशनी व ताज़ा हवा आ सके.
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  • सूरज की रोशनी से भी कीटाणु मरते हैं और ताज़ा हवा आपको फ्रेश फील देती है.
  • किचन की सफ़ाई का भी पूरा ध्यान रखें क्योंकि यह सबसे महत्वपूर्ण जगह होती है.
  • खाना बनाने से पहले बरतों को धोकर इस्तेमाल करें क्योंकि रात को कोकरोच बरतनों पर घूमकर उनमें संक्रमणछोड़ सकते हैं और आपको बीमार कर सकते हैं.
  • सब्ज़ियों को धोकर बनाएँ.
  • कटिंग बोर्ड को साफ़ रखें. नॉनवेज के लिए अलग से बर्तन व कटिंग बोर्ड रखें.
  • फ्रिज को समय समय पर साफ़ करें और उसमें सामान ठूँसकर ना भरें. अक्सर लोग ऐसा करते हैं और सालों तकफ्रिज की सफ़ाई तक नहीं करते.
  • किचन में एग्ज़ॉस्ट फैन ज़रूर होना चाहिए. सही वेंटिलेशन हेल्दी कुकिंग के लिए ज़रूरी है.
  • किचन सिंक की सफ़ाई भी उतनी ही ज़रूरी है. सिंक में खाने के कण जमा ना होने दें.
  • बाथरूम और टॉयलेट को भी नियमित रूप से साफ़ करें. सिर्फ़ साबुन-पानी से धोकर चमकाना ही ज़रूरी नहीं बल्किडिसइंफ़ेक्ट करना भी बेहद ज़रूरी है.
  • तौलिए भी साफ़ रखें. उन्हें भी नियमित रूप से धोएँ.
  • अलमारी को समय समय पर साफ़ करें और उसमें फिनाइल की गोलियाँ रखें.
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  • फर्नीचर के पीछे और नीचे भी काफ़ी कचरा जमा हो जाता है इसलिए ज़रूरी है कि उन्हें हटाकर वहाँ की सफ़ाई कीजाए.
  • शूरैक की सफ़ाई को अक्सर लोग नज़रअंदाज़ करते हैं लेकिन वहाँ भी काफ़ी कीटाणु पनपते हैं इसलिए उसकाध्यान रखें.
  • खिड़कियों के आसपास भी मकड़ी के जाले बन जाते हैं इसलिए वहाँ की सफ़ाई को भूलें नहीं.
  • बालकोनी को स्टोर रूम ना बना दें. उसे क्लीन रखें और ध्यान रहे कि वहाँ से मछर-मक्खी अंदर ना आएँ इसलिएज़रूरी उपाय करें.
  • अगर किसी रूम की दीवार में सीलन आती है तो इसे फ़ौरन ठीक करवाएँ क्योंकि इससे सांस की बीमारी हो सकतीहै और जिनको अस्थमा है उनकी तकलीफ़ बढ़ सकती है.
  • दरवाज़ों में या किसी भी चीज़ पर ज़ंग लगा हो तो उसके उपाय करें क्योंकि यह ख़तरनाक हो सकता है.
  • मेटल्स की नियमित सफ़ाई करते रहें और घर में मेटल क्लीनर रखें.
  • इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि हर जगह के कलीनिंग प्रोडक्ट्स आपके पास होने चाहिए, चाहे फ्लोर हो, किचनहो, बाथरूम, डिशवाश सोप, हैंडवाश, फिनाइल, फिनाइल और कपूर की गोलियाँ आदि.
  • पोछा और किचन का नैपकिन भी क्लीन रखें, इन्हें समय समय पर बदलते भी रहें.
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  • स्टोर व कंटेनर्स हो सके तो प्लास्टिक का यूज़ ना करें और अगर करें तो उन्हें नियमित रूप से बदलते रहें.
  • यही नियम फ्रिज की बोतलों पर भी लागू होता है.
  • बहुत सारा सामान एक जगह डम्प करके ना रखें. सामान और कमरा जितना व्यवस्थित होगा उतना ही आसान होगाउन्हें साफ़ रखना.
  • कलीनिंग का एक नियम बना लें और उसी के अनुसार काम करें.
  • रात के जूठे बर्तन सुबह के लिए ना रखें. बेहतर होगा उन्हें तभी धो लें वर्ना उनमें कोकरोच, मच्छर, चींटियाँ औरमक्खी आ सकते हैं.
  • घर को इन सभी से मुक्त रखने के ज़रूरी उपाय करें.

घर पर ही बनाएँ फ्लोर क्लीनर, जानें ईज़ी रेसिपी

  • एक लीटर पानी में कपूर की गोलियाँ डालें, उसमें ३-४ चम्मच नमक और एक चम्मच विनेगर मिला लें. इसको स्टोरकर लें. जब भी इस्तेमाल करना हो एक ढक्कन क्लीनर को बाल्टी के पानी में मिला लें.
  • दो कप गर्म पानी में आधा-आधा कप वाईट वीनेगर और रबिंग अलकोहोल मिला लें. इसमें ३-४ बूँदें लिक्विड डिशसोप की मिलाकर यूज़ करें.
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  • गर्म पानी में ओलिव ऑयल और नींबू का रस मिलाकर भी क्लीनर बनाया जा सकता है.
  • नींबू का रस और विनेगर को भी पानी में मिक्स करके क्लीनर बनाया जा सकता है.
  • सबसे सिंपल है कि पोछा लगाते वक़्त बाल्टी में एक दो चम्मच नमक मिला लें. यह भी क्लीनर का काम करता है.
  • गर्म पानी में बेकिंग सोडा और विनेगर मिला लें, चाहें तो लिक्विड डिश सोप भी मिक्स कर लें.
  • आधा कप ब्लीच पानी में मिलाकर डिसइंफेक्टेंट तैयार किया जा सकता है.
  • गर्म पानी में विनेगर मिलाकर भी क्लीनर तैयार किया जा सकता है. 
  • इन क्लीनर्स में चाहें तो अपनी पसंद का एसेंशियल ऑयल भी मिक्स कर सकते हैं.

bacteria-free

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घर की सफ़ाई तो हम रोज़ाना करते हैं, पर क्या हमारा घर रोज़ाना जर्म फ्री हो पाता है. अच्छी सफ़ाई के बावजूद हम पूरे विश्‍वास से नहीं कह सकते कि हमारा घर 100% बैक्टीरिया फ्री है, क्योंकि घर में ऐसे कई बैक्टीरिया स्पॉट्स होते हैं, जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं. अगर हमें इनकी जानकारी हो, तो यक़ीनन हम अपने घर को बैक्टीरिया फ्री व हेल्दी बना सकते हैं.

किचन

हमेशा खाने-पीने की चीज़ों के कारण किचन में कीटाणुओं, जीवाणुओं और कीड़ों-मकोड़ों की संभावना सबसे ज़्यादा बनी रहती है.

बर्तन धोनेवाला स्पॉन्ज और किचन क्लॉथ: अगर इन्हें सही तरी़के से साफ़ व स्टोर न किया जाए, तो इनमें पनपते फंगस और असंख्य जीवाणु बर्तनों के ज़रिए हमारे शरीर में पहुंचकर हमें काफ़ी नुक़सान पहुंचा सकते हैं.
हेल्थ टिप: हर बार इस्तेमाल के बाद इसे सूखने के लिए रख दें. यह जितनी ज़्यादा देर गीला रहेगा, कीटाणु उतनी ही तेज़ी से फैलेंगे. स्पॉन्ज को आप माइक्रोवेव में रखकर सैनेटाइज़ कर सकते हैं.

कटिंग बोर्ड: रिसर्च की मानें, तो किचन के कटिंग बोर्ड पर किसी टॉयलेट सीट की तुलना में 20 गुना ज़्यादा कीटाणु होते हैं. इसलिए इसकी सफ़ाई पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत होती है.
हेल्थ टिप: फल-सब्ज़ियों और बाकी की सामग्री के लिए एक और मीट, चिकन, फिश आदि नॉन वेज के लिए अलग-अलग कटिंग बोर्ड रखें, ताकि क्रॉस कंटैमिनेशन न हो. नियमित रूप से एंटी बैक्टीरियल क्लीनर से क्लीन करें.

काउंटर्स: किचन काउंटर्स पर हमेशा कुछ न कुछ खाने का सामान गिरता रहता है, जिसके कारण फूड बैक्टीरिया और कीड़े-मकोड़े तेज़ी से बढ़ते हैं, जो अस्थमा व एलर्जी का कारण हो सकते हैं.
हेल्थ टिप: काउंटर को रोज़ाना साबुन से धोने के बाद पानी में 1 टीस्पून क्लोरीन ब्लीच डालकर साफ़ करें. कैबिनेट में मौजूद कंटेनर्स को अच्छी तरह से बंद करके रखें.

बर्तन रखने की ट्रॉली: भले ही बर्तनों को कितना भी चमका दें, लेकिन अगर बर्तन रखनेवाली जगह साफ़ व हाइजीनिक नहीं है, तो बर्तनों पर उनका सीधा असर पड़ेगा, जो हमारी हेल्थ को प्रभावित कर सकता है.
हेल्थ टिप: नियमित रूप से बर्तन रखनेवाली ट्रॉली को साफ़ व हाइजीनिक रखें. खाने के तुरंत बाद बर्तनों को धो-पोंछकर रख दें, सिंक में यूं ही पड़े न रहने दें.

डस्टबिन: बैक्टीरिया के पनपने और फैलने के लिए सबसे आम जगह है, लेकिन अगर ध्यान दिया जाए, तो इसे कीटाणुमुक्त रख सकते हैं.
हेल्थ टिप: डस्टबिन में हमेशा ब्लैक पॉलीथिन डालकर रखें. हर हफ़्ते डस्टबिन को साबुन के पानी से धोएं.

बाथरूम

बाथरूम मेें मौजूद नमी बैक्टीरिया को पनपने में काफ़ी मदद करती है, यही कारण है कि हमें बाथरूम को हमेशा सूखा रखने की कोशिश करनी चाहिए.

टॉयलेट हैंडल: टॉयलेट का हैंडल फ्लश करते व़क्त हमें यह ध्यान ही नहीं रहता कि इस हैंडल पर भी वायरस हो सकते हैं. दरअसल, बच्चों में डायरिया का एक बड़ा कारण रोटावायरस होता है, जो ज़्यादातर टॉयलेट हैंडल पर पाया जाता है.
हेल्थ टिप: टॉयलेट साफ़ करते समय इसे अनदेखा न करें. साबुन के अलावा एंटी बैक्टीरियल क्लीनर का इस्तेमाल भी करें.

फ्लोर से सीलिंग तक: हमेशा नमी होने के कारण बाथरूम में फंगस बहुत तेज़ी से फैलता है. इसके कारण आंख व नाक से पानी आने के साथ-साथ सांस संबंधी कई परेशानियां हो सकती हैं.
हेल्थ टिप: बाथरूम में हमेशा पानी भरकर न रखें. नहाने के तुरंत बाद बाल्टी को उल्टा करके रख दें और बाथटब को पोंछकर साफ़ कर दें. यदि शावर कर्टन्स का इस्तेमाल करते हैं, तो हर 15 दिन में इसे साफ़ करें.

सोप व टूथब्रश होल्डर: गीले साबुन और गीले टूथब्रश बैक्टीरिया को बहुत तेज़ी से आकर्षित करते हैं. कॉकरोच आपके टूथब्रश को जीवाणुओं से भर सकता है और अनजाने ही आप ओरल प्रॉब्लम्स के शिकार हो सकते हैं.
हेल्थ टिप: टूथब्रश पर कैप लगाकर और साबुन का झाग धोकर रखें, ताकि वह जल्दी सूख जाए. एक ही साबुन अगर एक से ज़्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं, तो हमेशा साबुन धोकर इस्तेमाल करें. सोप व टूथब्रश होल्डर नियमित रूप से साफ़ करें.

बेडरूम

बेडशीट्स और तकियों में डस्ट माइट्स और एलर्जेंस को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिलता है, जिसके कारण लोगों को अक्सर सर्दी-ज़ुकाम, बदनदर्द और सांस संबंधी समस्याएं होती ही रहती हैं.

तकिया: इसके बिना हम सुकून की नींद सो भी नहीं सकते, पर हो सकता है कि इसमें मौजूद डस्ट माइट्स और जर्म्स
आपसे आपका सुकून छीन लें. पुराने तकियों में इनकी भरमार होती है, जिन पर हमारा ध्यान बमुश्किल जाता है.
हेल्थ टिप: तकिये के कवर को हर 15 दिन में गर्म पानी में धोएं. हर दो साल में तकिया बदलते रहें.

बेडशीट्स, चादर और गद्दे: हम रोज़ाना 7-8 घंटे इनमें गुज़ारते हैं, अगर ये ख़ुद ही बीमार हों, तो भला हम कैसे स्वस्थ रह सकते हैं. डस्ट माइट्स और एलर्जेन्स चादर व गद्दों को अपना घर बनाकर हमें बीमार कर सकते हैं.
हेल्थ टिप: चादर और गद्दे के कवर को हर 15 दिन में एक बार गर्म पानी में धोएं. गद्दों को समय-समय पर धूप में डालें, ताकि डस्ट माइट्स ख़त्म हो जाएं.

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घर का बाकी हिस्सा

दरवाज़े के हैंडल: दरवाज़े के हैंडल में स्टैफ नामक बैक्टीरिया पाया जाता है, जो हमारे मुंह, आंख और घाव में पहुंचकर नुक़सान पहुंचाता है.
हेल्थ टिप: किसी एंटी-बैक्टीरियल क्लीनर से इसे रोज़ाना साफ़ करें.

दीवारें: दीवारों पर जमी धूल-मिट्टी में पनपते डस्ट माइट्स जहां हमारी सेहत को नुक़सान पहुंचा सकते हैं, वहीं दीवारों पर लगा पेंट भी नुक़सानदेह हो सकता है. कुछ पेंट्स में वोलाटाइल ऑर्गेनाइक कंपाउंड्स (वीओसी) होते हैं, जो इंडोर एयर पॉल्यूशन का कारण बनते हैं और कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी पैदा कर सकते हैं.
हेल्थ टिप: घर के लिए लो वीओसी पेंट्स, मिल्क पेंट व व्हाइट वॉश चुनें. इस बात का भी ध्यान रखें कि पेंट में लेड न हो. नियमित रूप से दीवारों के जाले और धूल-मिट्टी को झाड़कर साफ़ करें.

कार्पेट व रग्स: इनमें डस्ट माइट्स व एलर्जेन्स बहुत तेज़ी से फैलते हैं, जो एलर्जी फैलाने के लिए काफ़ी हैं. कार्पेट्स को अगर नियमित रूप से साफ़ नहीं किया गया, तो नमी के कारण इसमें फंगस लगने लगता है.
हेल्थ टिप: समय-समय पर कार्पेट निकालकर थोड़ी देर उल्टा करके धूप में रखें, ताकि किसी तरह के बैक्टीरिया या फंगस न पैदा हों.

शू रैक: अक्सर लोग इसे अनदेखा कर देते है, जबकि बाहर से हमारे जूते-चप्पलों के साथ आई गंदगी व बैक्टीरिया हमारे घर में घुस आते हैं. इसमें चिपके बैक्टीरिया घर में फैलकर हमें बीमार बना सकते हैं.
हेल्थ टिप: हो सके, तो शू रैक को घर से बाहर ही रखें. समय-समय पर जूते-चप्पलों को निकालकर शू रैक साफ़ करें और कीटनाशक भी स्प्रे करवाएं.

हेल्दी होम टिप्स
* घर में वेंटिलेशन का ख़ास ख़्याल रखें. खिड़कियां खुली रखें, ताकि ताज़ी हवा व सूरज की रोशनी घर में आती रहे.
* घर के जिन हिस्सों में सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती, वहां बहुत तेज़ी से कीटाणु फैलते हैं. इसलिए सुबह के व़क्त खिड़कियां खोल दें, ताकि सूरज की      रोशनी घर  में आ सके.
* अपने किचन व बाथरूम को कीटाणुओं से मुक्त करने के लिए नीम व लैवेंडर ऑयल का इस्तेमाल करें.
* नियमित रूप से किचन के सिंक और ड्रेन में 1/4 कप विनेगर डालें, ताकि वे कीटाणु मुक्त रहें.
* खाना बनाते व़क्त किचन में एक्ज़ॉस्ट फैन ऑन रखें, ताकि सारा धुंआ तुरंत निकल जाए.
* घर के किसी भी हिस्से को दो हफ़्ते से ज़्यादा अनदेखा न करें, वरना यह नुक़सानदेह हो सकता है.
* समय-समय पर घर में पेस्ट कंट्रोल करवाएं.
* हर रोज़ फ्लोर क्लीनर से पोंछा लगाएं.
* एक स्प्रे बॉटल में 1 कप फिल्टर वॉटर, 5 बूंदें ऑरेंज एसेंशियल ऑयल, 3 बूंदें लैवेंडर एसेंशियल ऑयल, 2 बूंदें नीलगिरी एसेंशियल ऑयल और 2  बूंदें टी ट्री ऑयल मिलाकर नेचुरल एंटी बैक्टीरियल स्प्रे बनाकर रख लें, आवश्यकतानुसार इस्तेमाल करें.
* एक स्प्रे बॉटल लें. आधे बॉटल में विनेगर भरें और आधे बॉटल में पानी भरकर एंटी बैक्टीरियल क्लीनर की तरह इस्तेमाल करें.

 

– अनुश्री