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क्या आपके घर में हैं ये हेल्दी इंडोर प्लांट्स? (Healthy Plants That Can Purify Your Indoor Air)

Air Purifying Plants
इंडोर प्लांट्स न स़िर्फ घर की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि वो घर के साथ-साथ घर में रहनेवालों को भी हेल्दी रखते हैं. घर में मौजूद टॉक्सिक हवा को क्लीन (Air Purifying Plants) करनेवाले और बेहतरीन होम रेमेडीज़ के तौर पर काम आनेवाले कुछ ऐसे ही उपयोगी व हेल्दी इंडोर प्लांट्स के बारे में हम बता रहे हैं.

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कितने फ़ायदेमंद हैं इंडोर प्लांट्स?
  • इंडोर प्लांट्स घर में ऑक्सीजन(Air Purifying Plants) की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे हमें ताज़ी हवा मिलती है और हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहता है.
  • एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्वे द्वारा की गई स्टडी में यह बात सामने आई है कि इंडोर प्लांट्स के कारण घर में मॉइश्‍चर का लेवल सामान्य से थोड़ा बेहतर रहता है, जिसके कारण घर में रहनेवालों को ड्राई स्किन, सर्दी-खांसी और गले में खराश जैसी समस्याएं कम होती हैं.
  • इंडोर प्लांट्स हवा को शुद्ध करने का काम करते हैं. इस विषय पर नासा ने कई रिसर्च भी किए हैं, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि इंडोर प्लांट्स हमारे लिए बहुत हेल्दी होते हैं. उनके मुताबिक़ शुद्ध हवा के लिए हर 100 स्न्वेयर फीट में एक इंडोर प्लांट रखना चाहिए.
  • कैंसस स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा की गई स्टडी में यह बात सामने आई है कि सर्जरीवाले मरीज़ों के कमरे में प्लांट रखने से उनके घाव जल्दी भरते हैं, इसलिए अगली बार किसी ऐसे मरीज़ को देखने जा रहे हैं, जिनकी सर्जरी हुई है, तो इंडोर प्लांट(Air Purifying Plants) से बेहतर कोई गिफ्ट नहीं हो सकता.
  • इंडोर प्लांट्स हमारी कार्यक्षमता बढ़ाते हैं. नेचर या पेड़-पौधों के इर्द-गिर्द रहने से हमारी याद्दाश्त बेहतर होती है और फोकस बढ़ता है, जिससे हमारी काम करने की क्षमता बढ़ती है. मिशिगन यूनिवर्सिटी की स्टडी में पाया गया कि इंडोर प्लांट रखने से एकाग्रता 20% तक बढ़ जाती है.
  • इंडोर प्लांट्स सुकूनभरी नींद भी देते हैं. अगर आप भी रातभर करवटें बदलते हैं, तो अपने बेड के पास लैवेंडर और जैसमीन प्लांट्स रखें
  • इसके अलावा ये हमारी मेंटल हेल्थ के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद होते हैं. ये पॉज़िटिविटी का लेवल बढ़ाकर हमें रिलैक्स्ड और सिक्योर फील कराते हैं.
 तुलसी
  • आयुर्वेद और नैचुरोपेथी दोनों में ही तुलसी(Air Purifying Plants) को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. इसके एसेंशियल ऑयल से कई बीमारियां दूर होती हैं. यह हमारी श्‍वसन प्रणाली के लिए बेहतरीन औषधि है. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स स्ट्रेस को कम करने के साथ-साथ डायबिटीज़ और हार्ट प्रॉब्लम्स में भी कारगर साबित होते हैं. आम बुख़ार से लेकर गंभीर बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन में तुलसी का पौधा बहुत फ़ायदेमंद साबित होता है.
  • इसमें मौजूद प्यूरिफाइंग, डिटॉक्सिफाइंग और क्लींज़िंग प्रॉपर्टीज़ के लिए यह हर्बल व कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किया जाता रहा है.
  • यह इम्यूनिटी बूस्टर है. तुलसी के पत्तों को उबालकर उसमें कालीमिर्च पाउडर मिलाकर पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
  • यह तरह-तरह के एलर्जीज़ और इंफेक्शन्स से लड़ता है.
  • यह स्किन डिसऑर्डर, खुजली और दाद का कारगर इलाज है.
  • फाइटो न्यूट्रिएंट्स, एसेंशियल ऑयल, विटामिन ए और सी के गुणों से भरपूर तुलसी के काढ़े से सर्दी-खांसी, बुख़ार, ख़राब गला, सीने में जकड़न, फ्लू आदि में राहत मिलती है.
  • यह बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखता है, इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए काफ़ी लाभदायक सिद्ध होता है.
  • यह शरीर में मौजूद यूरिक एसिड लेवल को कंट्रोल में रखता है, जिससे किडनी स्टोन का ख़तरा नहीं रहता.
  • यह हेपेटाइटिस, मलेरिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू और ट्यूबरकुलोसिस में काफ़ी कारगर सिद्ध होता है.
एलोवीरा
  • न्यूट्रीएंट्स, एक्टिव एंज़ाइम्स, विटामिन्स, मिनरल्स और अमीनो एसिड के गुणों से भरपूर एलोवीरा न स़िर्फ स्किन प्रॉब्लम्स को दूर रखता है, बल्कि अपने आप में हेल्थ रेमेडी है. यह कई हेल्थ प्रॉब्लम्स को दूर करता है.
  • एंटी-इंफ्लेमेटरी(Air Purifying Plants) गुणों से भरपूर एलोवीरा शरीर में मौजूद फ्री रैडिकल्स को दूर करता है, जिससे शारीरिक जलन से राहत मिलती है.
  • गैस्ट्रो के इलाज में एलोवीरा का इस्तेमाल किया जाता है. हार्ट बर्न, सीने में दर्द, निगलने में परेशानी जैसे लक्षणों में राहत दिलाता है.
  • एलोवीरा का जूस गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल प्रॉब्लम्स के लिए ज़िम्मेदार पैथोजेन्स से हमारी सुरक्षा करता है.
  • यह ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखता है, इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ इसे सप्लीमेंट के तौर पर लेते हैं.
  • यह ओरल हेल्थ के लिए बेस्ट रेमेडी माना जाता है. इसमें मौजूद गुणों के कारण यह मसूड़ों को सॉफ्ट बनाता है और मुंह के छालों और घाव के लिए बेहतरीन औषधि है.
  • एलोवीरा का जूस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाता है.
  • एलोवीरा में एंटी ट्यूमर और एंटी कैंसरस प्रॉपर्टीज़ होती हैं, जिससे कैंसर का ख़तरा भी कम होता है.
  •  पाइल्स के इलाज में एलोवीरा काफ़ी कारगर साबित होता है.
  • एजिंग के लक्षणों, सन बर्न और टैन को दूर करता है, स्ट्रेच मार्क्स को घटाकर त्वचा को मॉइश्‍चराइज़ करता है.
  • डैंड्रफ को दूर कर, बालों के हेल्दी ग्रोथ में मदद करता है, जिससे स्काल्प का पीएच बैलेंस बना रहता है और बाल सॉफ्ट व सिल्की बने रहते हैं.

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पुदीना
  • मैग्नीज़, विटामिन ए और सी के गुणों से भरपूर पुदीने(Air Purifying Plants) को दुनिया की सबसे पुरानी औषधि माना गया है.
  •  इसमें मौजूद मेंथॉल की ख़ूबियों के कारण यह माइंड और बॉडी दोनों पर कूलिंग इफेक्ट देता है.
  • पेटदर्द, मितली आदि में पुदीना बेस्ट रेमेडी है. आज भी पेटदर्द होने पर लोग पहले पुदीने की गोली खाते हैं.
  • माइग्रेन, टेंशन या फिर स्टे्रस के कारण होनेवाले सिरदर्द से राहत दिलाता है.
  • इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह की दुर्गंध को दूर कर दांतों व मसूड़ों की समस्याओं से निजात दिलाता है.
  • यह एलर्जी और अस्थमा से राहत दिलाता है.
  • मसल पेन से राहत दिलाने में पुदीना काफ़ी कारगर माना जाता है.
  • यह एकाग्रता को बढ़ाकर याददाश्त को बढ़ाने में मदद करता है.
 लैवेंडर
  • अपनी ख़ुशबू के लिए मशहूर लैवेंडर में कई औषधीय(Air Purifying Plants) गुण भी हैं. यह एक माइल्ड एंटी डिप्रेसेंट होने के साथ-साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स से शरीर की सुरक्षा करता है.
  • यह थकान और तनाव को दूर करने में मदद करता है.
  • अनिद्रा से जूझ रहे लोगों के लिए यह काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है. इसकी चाय भी अनिद्रा की समस्या को दूर करने में मदद करती है.
  • एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्सीडेंट्स के गुणों से भरपूर लैवेंडर शारीरिक जलन को दूर करने के साथ-साथ मसल पेन से भी राहत दिलाता है.
  • स्किन प्रॉब्लम्स में भी लैवेंडर काफ़ी कारगर सिद्ध होता है. ड्राई स्किन को ट्रीट करने के साथ-साथ त्वचा संबंधी गंभीर समस्याएं, जैसे- सोरायसिस और एक्ज़िमा आदि में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है.
  • लैवेंडर एंटी सेप्टिक के गुणों से भरपूर है, तभी तो घाव पर लैवेंडर का पेस्ट लगाने से घाव न स़िर्फ जल्दी भरता है, बल्कि किसी तरह का इंफेक्शन भी नहीं होता.
  • पीएमएस के लक्षणों में राहत दिलाता है. लैवेंडर को अरोमा थेरेपी के ज़रिए पीएमएस के दर्द व परेशानियों से निजात दिलाने में इस्तेमाल किया जाता है.
करीपत्ता
  • खाने के स्वाद को दुगुना करने के अलावा करीपत्ता(Air Purifying Plants) में कई औषधीय गुण भी हैं, इसलिए आपके घर में भी करीपत्ता ज़रूर होना चाहिए.
  • कार्बोहाइडेट्स, फाइबर, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, विटामिन ए, बी, सी, ई के गुणों से भरपूर करीपत्ता हार्ट को बेहतर ढंग से काम करने और इंफेक्शन्स से लड़ने में मददगार साबित होता है.
  • आयरन और फॉलिक एसिड से भरपूर करीपत्ता एनीमिया से बचाता है.
  • ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखकर यह डायबिटीज़ से लड़ने में मदद करता है.
  • यह पाचनशक्ति को बेहतर बनाता है.
  • स्टडी में पाया गया है कि यह बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाकर इसके नुक़सान से हमें बचाता है.
  • इसमें मौजूद विटामिन ए आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद करता है.
  • अगर आपके बाल स़फेद हो रहे हैं, तो खाने में करीपत्ता शामिल करें. यह बालों को स़फेद होने से रोकता है.

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हवा को शुद्ध करनेवाले प्लांट्स

मनी प्लांट और पीस लीलीमनी प्लांट और पीस लीली: ये दोनों ही इंडोर प्लांट एयर पॉल्यूशन को कंट्रोल करते हैं. घर में ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ाकर घर में रहनेवालों को हेल्दी रखते हैं. हवा में मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड को कम करके हवा को शुद्ध करते हैं.

स्पाइडर प्लांट: यह इंडोर प्लांट हवा में मौजूद ख़तरनाक केमिकल्स से हमें सुरक्षित रखता है. स्पाइडर प्लांट हवा में मौजूद कार्बन मोनॉक्साइड को सोख लेता है, जिससे घर में रहनेवाले लोगों पर इसका साइड इफेक्ट नहीं होता.

स्नेक प्लांट:  इसे मदर-इन-लॉज़ टंग भी कहते हैं. ज़्यादातर लोग इसे अपने बाथरूम और बेडरूम में रखते हैं.  यह हवा को शुद्ध करने के साथ ही ऑक्सीजन सप्लाई भी बढ़ाते हैं. रात को ये कार्बन डाई ऑक्साइड लेकर ऑक्सीजन देते हैं, इसलिए लोग इसे बेडरूम में भी रखते हैं.

गोल्डन फोटोज़: बाकी एयर क्लीनिंग इंडोर प्लांट्स की तरह यह भी हवा में मौजूद जहरीली गैसों, कार्बन मोनॉक्साइड, बेनजेन और फॉर्मलडिहाइड को सोखकर आपको शुद्ध हवा देता है. इसे आप गमले में या हैंगिंग पॉट में लगाकर खिड़की में रख सकते हैं. 

– दिनेश सिंह           

नए घर में शिफ्ट होते समय वास्तु का रखें ख़्याल(Simple Effective Vastu Tips For New House)

अक्सर जब कोई नया घर बनाता है, तो वे उससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी बातों का ख़ास ध्यान रखता है. फिर चाहे वो घर की साज-सज्जा हो या फिर वास्तु-फेंगशुई के अनुसार घर को सुव्यवस्थित ढंग से सजाना हो. इसी सिलसिले में हमें वास्तुशास्त्री राजेंद्र दुबे ने महत्वपूर्ण जानकारियां दीं. आइए, इसके बारे में संक्षेप में जानें.

 

–    आप चाहते हैं कि नए घर में आपका जीवन ख़ुशियोंं से भर जाए, हर परेशानी आपके जीवन से दूर हो जाए, तो नए घर में प्रवेश से पहले वास्तु शांति कराएं यानी वास्तु पूजन कराएं.

– विधिवत् गृह प्रवेश कराएं, वास्तु जप ज़रूर कराएं.

– देवी दुर्गा की लाल फूल, चावल व कुमकुम से पूजा करें. इससे घर में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहेगी.

–    घर में कलर करवाते समय इस बात का ध्यान रखें कि पेंट एक सा हो. शेड एक से अधिक हो सकते हैं, पर शेड्स का तालमेल ठीक होना चाहिए.

–   मछलियों के जोड़े को घर में लटकाना बहुत शुभ व सौभाग्यशाली समझा जाता है. इनके प्रभाव से घर में धन-वैभव बढ़ता है और बिज़नेस में भी विकास होता है. इन्हें गुरुवार या शुक्रवार के दिन घर में टांगना शुभ होता है.

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–    यदि घर का मुख्य द्वार उत्तर, उत्तर-पश्‍चिम या पश्‍चिम में हो, तो उसके ऊपर बाहर की तरफ़ घोड़े की नाल लगा देनी चाहिए.इससे सुरक्षा व सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.

–    फेंगशुई के अनुसार, घर के दरवाज़े में लाल रिबन में बंधे सिक्के लटकाने से घर में धन व समृद्धि आती है.

–    अपने नए घर दरवाज़े के हैंडल में सिक्के लटकाना घर में संपत्ति व सौभाग्य लाने का सबसे सरल उपाय है.

–    हां, इसमें तीन सिक्के ही लगाएं और वो भी दरवाज़े के अंदर की ओर हों, इस बात का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि बाहर सिक्के लगाने से लक्ष्मी दरवाज़े पर ही ठहर जाती हैं.

–    आप तीन पुराने चीनी सिक्कों को लाल रंग के धागे या रिबन में बांधकर अपने घर के दरवाज़े के हैंडल में लटका सकते हैं. इससे घर के सभी सदस्यों को फ़ायदा होता है.

–    वास्तु के अनुसार घर में खिड़कियां होना आवश्यक है. इनसे नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलती है और सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है.

–    खिड़कियां खोलते व बंद करते समय आवाज़ नहीं होनी चाहिए. इसका प्रभाव घर की सुख-शांति पर पड़ता है. इसके कारण परिवार के सदस्यों का ध्यान भंग होता है.

–    खिड़कियां ऊंचे स्थानों पर हों, ताकि शुद्ध हवा आसानी से घर में प्रवेश कर सके व अशुद्ध हवा दूसरी खिड़की से बाहर निकल सके.

–    घर की छत पर कबाड़ा या फालतू सामान न रखें. यदि ज़रूरी हो, तो एक कोने में रखें. बेकार के सामानों से परिवार के सदस्यों के मन-मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है. इससे पितृ दोष भी लगता है.

–   नवरात्रि में घी का अखंड दीपक लगाकर दुर्गा सप्तशती का नौ दिन तक विधिवत् पाठ करने और नौ कन्याओं (दो से दस साल तक की कन्या) को भोजन करवाने से जीवन सुखद व ख़ुशहाल बना रहता है.

–    महामृत्युंजय मंत्र का जप करें. इससे भी काफ़ी लाभ प्राप्त होता है.

–    घर में कम से कम सालभर में दो बारहवन-यज्ञ करवाएं.

–    ध्यान रहे, घर में पूजाघर का निर्माण ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में हो.

–   शुभ कार्यों के लिए हमेशा सोमवार, बुधवार, गुरुवार व शुक्रवार का दिन चुनें.

–    तीन हरे पौधे मिट्टी के बर्तनों में घर के अंदर पूर्व दिशा में रखें.

–    बोनसई व कैक्टस न लगाएं, क्योंकि बोनसई विकास में बाधक व कैक्टस हानिकारक होता है.

–    वास्तु के अनुसार बेडरूम में बाथरूम नहीं होना चाहिए, क्योंकि दोनों की ऊर्जाओं का परस्पर आदान-प्रदान सेहत के लिए अच्छा नहीं होता.

–    बाथरूम घर के नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्‍चिम के मध्य की दिशा) में बनवाना चाहिए. यदि संभव न हो, तो वायव्य कोण में भी बाथरूम बनवा सकते हैं.

–    बाथरूम में पानी का बहाव उत्तर की ओर रखें.

–    गीज़र व अन्य इलेक्ट्रिकल उपकरण बाथरूम के आग्नेय कोण में लगाएं.

– बाथरूम में एक बड़ी खिड़की व एक्ज़ॉस्ट फैन के लिए रोशनदान ज़रूर लगाएं.

– बाथरूम में सदा हल्के रंग की टाइल्स का इस्तेमाल करें. गहरे रंग की टाइल्स न लगाएं.

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  – सावित्री गुप्ता

 

DIY घर पर बनाएं डिज़ाइनर कुंदन दीया (DIY- Easy To Make Designer Kundan Diya)

DIY Designer Kundan Diya

DIY Designer Kundan Diya
सामग्री:
सीडी
ब्लू कुंदन
ग्रीन कुंदन
हाफ पर्ल
जाली वाला कैंडल स्टैंड (जाली वाटी)
गोल्डन लेस
कार्ड पेपर
अडेसिव ग्लू
रबर बेस्ड अडेसिव ग्लू
फैब्रिक ग्लू
कैंची

विधि:
* सबसे पहले सीडी पर अडेसिव ग्लू लगाएं और उस पर कार्ड पेपर चिपकाएं.
* कार्ड पेपर को सीडी के शेप में काट लें.
* सीडी के बीच में रबर बेस्ड अडेसिव ग्लू से जाली वाला कैंडल स्टैंड चिपकाएं.
* जाली वाले कैंडल स्टैंड के पास रबर बेस्ड अडेसिव ग्लू से गोल्डन लेस चिपकाएं.
* लेस के पास फैब्रिक ग्लू से हाफ पर्ल चिपकाएं.
* अब सीडी के किनारे पर फैब्रिक ग्लू से ब्लू कुंदन चिपकाएं.
* फिर ब्लू कुंदन के पास अंदर की तरफ़ ग्रीन कुंदन चिपकाएं.

DIY घर पर बनाएं ख़ूबसूरत एक्रेलिक रंगोली
दीपावली 2017: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 20 अचूक उपाय

इसी तरह आप अलग-अलग कलर कॉम्बिनेशन का प्रयोग करके ख़ूबसूरत डिज़ाइनर कुंदन दीये बना सकते हैं.

घर पर ख़ूबसूरत डिज़ाइनर कुंदन दीया बनाना सीखने के लिए देखें वीडियो:

DIY घर पर बनाएं ख़ूबसूरत एक्रेलिक रंगोली (DIY- Easy To Make Decorative Acrylic Rangoli)

Decorative Acrylic Rangoli


सामग्री:
एक्रेलिक डिज़ाइन पीसेस
गोल्डन कुंदन
सिल्वर कुंदन
ग्रीन कुंदन
गोल्डन बॉल चेन
ग्रीन बॉल चेन
फैब्रिक ग्लू
कैंची
गोल्डन रिंग
हाफ गोल्डन मोती

DIY घर पर बनाएं डिज़ाइनर कुंदन दीया
दीपावली 2017: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 20 अचूक उपाय

 

विधि:
* सबसे पहले एक्रेलिक रंगोली पीस के गोल हिस्से के किनारों पर फैब्रिक ग्लू लगाएं और उस पर ग्रीन कुंदन चिपकाएं.
* इसी तरह किनारे के डिज़ाइन (देखें चित्र) पर फैब्रिक ग्लू से सिल्वर कुंदन चिपकाएं.
* अब ग्रीन कुंदन के पास गोल्डन बॉल चेन चिपकाएं.
* गोल्डन बॉल चेन के पास ग्रीन बॉल चेन चिपकाएं.
* किनारे के डिज़ाइन पर सिल्वर कुंदन के पास गोल्डन बॉल चेन चिपकाएं.
* फिर गोल हिस्से पर ग्रीन बॉल चेन के पास गोल्डन रिंग चिपकाएं.
* अब गोल्डन रिंग के अंदर हाफ गोल्डन मोती चिपकाएं.

ऐसे ही सारे डिज़ाइन बना लें.

घर पर ख़ूबसूरत एक्रेलिक रंगोली बनाना सीखने के लिए देखें वीडियो:

नए घर में शिफ़्ट होते समय रखें इन बातों का ख़्याल(Things to Remember When Shifting House)

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घर की शिफ्टिंग किसी सिरदर्द से कम नहीं. एक जगह बसी-बसाई ज़िंदगी को उठाकर नई जगह पर नए सिरे से शुरुआत करना आसान नहीं होता, ख़ासतौर से उन लोगों के लिए जो किराए के घरों में रहते हैं. ऐसे में कुछ बातों को ध्यान में रखकर आप घर की शिफ्टिंग को आसान बना सकते हैं. 

 

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शिफ्ट होने से पहले

 

– नए घर में शिफ्ट होने से पहले मेन डोर का लॉक बदलें, क्योंकि सिक्योरिटी के लिहाज़ से यह बहुत ज़रूरी है.

– सामान शिफ्ट करने से पहले पूरे घर की साफ़-सफ़ाई करवा लें. किराए का घर है, तो मकान मालिक से कहकर पेंटिंग वगैरह करवा लें.

– ख़ुद का घर हो, तो टाइल्स, फर्नीचर आदि का पूरा काम करवा लें, ताकि जाने के बाद कुछ महीनों तक आपको इन कामों के लिए सामान इधर-उधर न करना पड़े. किसी अच्छी पेस्ट कंट्रोल कंपनी से पूरे घर में पेस्ट कंट्रोल कराएं.

– रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए घर के आस-पास की जगहों को अच्छी तरह देख लें, ताकि सारे स्टोर्स, क्लीनिक आदि की जानकारी पहले से हो और ज़रूरत पड़ने पर इधर-उधर भटकना ना पड़े.

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– पुराने घर में मौजूद सभी चीज़ें नए घर में लाने की ज़रूरत नहीं है. पुरानी और ग़ैरज़रूरी चीज़ों को बेच दें या किसी और को दे दें.

– इंटरनेट कनेक्शन के लिए सोसाइटी के सर्विस प्रोवाइडर से बात करके फाइनल कर लें या अपनी सहूलियत के अनुसार किसी अच्छी कंपनी का डोंगल लेकर भी काम चला सकते हैं.

– शिफ्टिंग वाले दिन के लिए बच्चों व पालतू जानवरों के रुकने का इंतज़ाम कर दें, वरना उनके साथ शिफ्टिंग बहुत मुश्किल हो जाती है.

– सभी ज़रूरी जगहों पर अपना नया पता अपडेट करने के लिए एक लिस्ट बना लें, ताकि ज़रूरी पोस्ट या कुरियर पुराने पते पर न जाएं.

– अगर आप किराए के घर में रहते हैं, तो फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स के पैकेजिंग बॉक्सेस संभालकर रखें, ताकि शिफ्ट होते समय पैकिंग करना आसान हो.

– नए घर में जाने से पहले वर्तमान पते की अपने नाम पर जारी सभी सुविधाएं, जैसे- न्यूज़पेपर आदि को बंद करा दें.

– सामान शिफ्ट करने के लिए किसी गाड़ी का इंतज़ाम पहले से ही कर लें, क्योंकि पहले से ही बुकिंग हो, तो ज़रूरत पड़ने पर भागदौड़ नहीं होती.

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पैकिंग

 

– पैकिंग करते व़क्त सबसे पहले एक इमर्जेंसी  सर्वाइवल किट बनाएं. उसमें नए घर की चाबियों का एक सेट, कैंची, सेलोटेप, कुछ रस्सियां, फर्स्ट एड किट आदि रखें.

– ङ्गफर्स्ट बॉक्सफ नाम से एक बॉक्स पैक करें, जिसमें आप सबके लिए एक-एक जोड़ी कपड़े, टॉवेल, पायजामा, चादर, शृंगार के ज़रूरी सामान, टी-बैग्स आदि ज़रूरी चीज़ें रखें.

– सभी चीज़ों को अलग-अलग डिब्बों में पैक करें और उनके ऊपर नाम व जिस रूम में रखना है, वो भी लिख दें, ताकि ढूंढ़ने में आसानी हो.

– पैकिंग के लिए आप प्रोफेशनल मूवर्स हायर कर सकते हैं या ख़ुद भी कर सकते हैं.

– पैकिंग करते समय सबसे पहले किचन के सामानों की लिस्ट बनाकर पैक करें, क्योंकि किचन के छोटे-छोटे सामानों को पैक करने में सबसे ज़्यादा समय लगता है.

– पैकिंग का काम काफ़ी थकानेवाला होता है, इसलिए अपने दोस्तों व रिश्तेदारों की मदद ले सकते हैं.

– कंप्यूटर, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स को अच्छी तरह पैक करें. पैकिंग करने से पहले डाटा का बैकअप ज़रूर ले लें.

– अपने साथ प्लांट्स ले जा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि पौधों के साथ-साथ कीड़े-मकौड़े भी नए घर में शिफ्ट न हो जाएं, इसलिए दवा छिड़ककर ही ले जाएं.

 

शिफ्ट होने के बाद  

 

– नए घर में शिफ्ट होने पर सबसे पहले सभी बॉक्सेस को उनके रूम में रख दें.

– घर के लिए नया फर्नीचर ख़रीदा है, तो उसकी डिलीवरी शिफ्ट होने के 1-2 दिन बाद ही मंगाएं, ताकि बाकी चीज़ों को तब तक एडजस्ट कर दें और बेवजह थकान न हो.

– पिछले घर पर इस तरह का इंतज़ाम कर दें कि आपके लेटर्स और ज़रूरी कुरियर आप तक पहुंच जाएं.

 

अनपैकिंग

 

– पहले ही दिन घर को बेस्ट लुक देने के चक्कर में न पड़ें. धीरे-धीरे चीज़ें एडजस्ट करें.

– सामान को अनपैक करने के लिए सभी डिब्बे एक साथ खोलकर न बैठ जाएं. इससे आप थक जाएंगे और काम भी जल्दी पूरा नहीं होगा.

– अनपैक करके डिब्बों और कार्टन को इकट्ठा जमा न करें, बल्कि उन्हें स्टोर रूम में फोल्ड करके रख दें या फिर बेच दें.

– घर के ज़रूरी पेपर्स की हार्ड कॉपी के साथ-साथ सॉफ्ट कॉपी भी बनाकर सेव करके रख लें, ताकि हार्ड कॉपी के डैमेज होने पर परेशानी न हो.

– अपने नए पड़ोसियों से मिलें व चाय-कॉफी के ज़रिए उनसे मेलजोल बढ़ाएं, क्योंकि समय-बेसमय वो ही आपकी मदद करेंगे.

– अगर किसी सोसाइटी या कॉम्पलेक्स में घर लिया है, तो वहां के कमिटी मेंबर्स को घर पर चाय के लिए ज़रूर बुलाएं.

– हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा करके घर को सजाएं, एक ही दिन में सब करने के चक्कर में न प़ड़ें, वरना बेवजह स्ट्रेस होगा.

– सेटलमेंट को एक ख़ुशहाल प्रोसेस बनाएं और जिंदगी को खुलकर जीएं.

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– शैलेंद्र सिंह  

राशि के अनुसार होम डेकोर (How to Decorate Your Home According to Your Zodiac Sign)

राशि के अनुसार होम डेकोर
आपके जीवन में हमेशा ख़ुशियां शामिल हों, सुख-संपत्ति और स्वास्थ्य प्राप्त हो, इसके लिए ज़रूरी है होम डेकोर करते समय अपनी राशि का भी ध्यान रखें.

मेषराशि के अनुसार होम डेकोर

एनर्जेटिक मेष राशिवालों का रेड पसंदीदा कलर है.

– घर या ऑफिस में रेड या हॉट पिंक का इस्तेमाल इनमें एनर्जी बनाए रखता है.

– इन्हें लाइट्स पसंद हैं. कम लाइट्स में ये डिप्रेशन महसूस करते हैं.

– इस राशिवालों को लाइट कलर्स से बचना चाहिए और डेकोर मेें ब्राइट कलर्स का इस्तेमाल करना चाहिए. रेड रंग का हिंट हर रूम में होना चाहिए, ख़ासकर किचन और डाइनिंग रूम में.

– प्रेरणादायक पंक्तियां, ट्रॉफीज़ या मेमेंटोज़ को ये होम एक्सेसरीज़ के तौर पर इस्तेमाल करना पसंद करते हैं.

– मेष राशिवाले पढ़ने के शौक़ीन होते हैं, इसलिए इन्हें अपने घर में बुकशेल्फ भी बनाना चाहिए.

– इन्हें क्लीन-ऑर्गेनाइज़्ड घर पसंद आता है, तो होम डेकोर भी वे उसी के हिसाब से करवाते हैं.

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वृषभ

– इस राशिवाले लक्ज़री और कंफर्ट चाहते हैं और इसकी झलक इनके होम डेकोर में भी नज़र आती है.

– इन्हें ट्रेडिशनल चीज़ों से लगाव होता है. शायद इसलिए इनके घरों में आपको एंटीक चीज़ों का कलेक्शन मिल जाएगा.

– इन्हें हर ख़ूबसूरत चीज़ आकर्षित करती है, इसलिए चाहे वो आर्ट पीस हो या कोई पेंटिंग- ये डेकोर में इनको शामिल कर लेते हैं.

– पर्शियन रग्स, पेंटिंग्स, लेदर सोफा, आर्टिस्टिक फोटोफ्रेम- इनके घर में आपको ये चीज़ें ज़रूर नज़र आ जाएंगी.

– व्हाइट और ब्लू रंग इस राशिवालों के लिए लकी कलर्स हैं और फेवरेट कलर्स भी. इन्हें डेकोर में शामिल करें.

– घर की दीवारों को यलो, क्रीम या व्हाइट रंग से पेंट करें. इससे पॉज़िटिव एनर्जी बनी रहेगी.

 

मिथुन

-ये सोशल और ज़िंदादिल होते हैं और लोगों से मिलना-जुलना इनको पसंद आता है. इनका घर भी इनके दिल की तरह ही बड़ा होता है.

– मिथुन राशिवाले काफ़ी क्रिएटिव होते हैं और घर सजाते वक़्त भी ये क्रिएटिविटी का इस्तेमाल करते हैं. इनके होम डेकोर में आपको ओल्ड और मॉडर्न दोनों का परफेक्ट ब्लेंड नज़र आएगा.

– इस राशिवालों को बदलाव पसंद है, घर की सजावट में भी ये बदलाव करते रहते हैं.

– लाइट ग्रीन, लाइट ब्लू, ऑरेंज और रेड कलर का इस्तेमाल करना चाहिए. ये इनके लिए लकी कलर्स हैं.

– वायव्य (उत्तर-पश्‍चिम) कोण में हल्का फर्नीचर रखें. इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहेगी.


कर्क

– कर्क राशिवाले क्रिएटिव और रोमांटिक होते हैं. इन्हें रिश्तों से गहरा जुड़ाव होता है, इसलिए इनके लिए डेकोरेशन से ज़्यादा ज़रूरी है घर में कोज़ी और अपनापन.

– चूंकि ये फैमिली से ज़्यादा जुड़ाववाले होते हैं, इसलिए इनके घर में फैमिली फोटोज़, कोलाज, एलबम आदि को ख़ास जगह दी जाती है.

– एंटीक चीज़ें इन्हें पसंद हैं, फिर चाहे वो एंटीक फर्नीचर हो, आर्ट पीस या होम एक्सेसरीज़- ये डेकोर में इसका ख़ूबसूरती से इस्तेमाल करते हैं.

– सिल्वर, लाइट ब्लू और व्हाइट इस राशि के लिए लकी कलर है. इनका इस्तेमाल इनको शांति और सुकून देगा.

– ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में पानी से भरा बर्तन या बहते पानी की तस्वीर ज़रूर लगाएं.

सिंह

– रॉयल, क्लासिक और एलीगेंस- सिंह राशिवालों की ख़ूबियां हैं और ये उनके होम डेकोर में भी नज़र आती हैं.

– सिंह राशिवालों को नेचर से ख़ास लगाव होता है, इसलिए ये होम डेकोर में इनडोर प्लांट्स को ख़ास जगह देते हैं.

– ये क्लीन इंटीरियर सिलेक्ट करते हैं. बड़े-बड़े फर्नीचर इन्हें अच्छे नहीं लगते. क्लासी, मॉडर्न और कंफर्टेबल यही इनका डेकोर मंत्र होता है.

– इन्हें बोल्ड कलर्स पसंद हैं. डीप रेड, टरकॉइज़, प्लम कलर्स का इस्तेमाल ये ज़्यादा करते हैं, जो इनके होम डेकोर को रॉयल अंदाज़ देते हैं.

– लिविंग रूम के डेकोर पर ये ख़ासतौर से ध्यान देते हैं, क्योंकि यहां समय बिताना इन्हें पसंद होता है.

– व्हाइट, सिल्वर और गोल्ड इनके लिए लकी कलर्स हैं. कुशन कवर्स, परदे या बेडशीट में इनका इस्तेमाल जीवन में सुख-समृद्धि लाएगा.

 

कन्या

– इस राशिवाले परफेक्शनिस्ट होते हैं. होम डेकोर में भी इन्हें सब कुछ परफेक्ट ही चाहिए. ये कभी संतुष्ट भी नहीं होते, इसलिए डेकोर में ये बदलाव लाते रहते हैं.

– इन्हें क्लीन डेकोर पसंद है. थोड़ा भी क्लटर इन्हें पसंद नहीं आता.

– कन्या राशिवालों के घर में प्रवेश करते ही एक अलग ही शांति और सुकून का एहसास होता है.

– सिंपल और बेसिक यही इनका होम डेकोर मंत्र है. होम एक्सेसरीज़ के तौर पर ये कुछ ही चीज़ें यूज़ करते हैं, मसलन- कलरफुल कुशन्स, फ्लावर वास.

– लाइट ग्रीन, ब्लू, यलो और ऑरेंज इनके लिए लकी कलर्स हैं.

– तुलसी का पौधा लगाएं, हमेशा स्वस्थ रहेंगे.र्ीं नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्‍चिम) में कोई हैवी फर्नीचर रखें या अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाएं, तो हमेशा ख़ुशहाली बनी रहेगी.

 

तुला

– इस राशिवाले आर्ट और क्राफ्ट लवर होते हैं और अपने होम डेकोर को भी डिज़ाइनर लुक देना पसंद करते हैं.

इनके डेकोर में आपको परफेक्ट बैलेंस नज़र आएगा. कहीं कुछ भी ज़्यादा या लाउड नहीं. बस, जितने की ज़रूरत है, वही ख़ूबसूरती से अरेंज किया हुआ.

– इन्हें लाइट व कूल कलर पैलेट पसंद आता है. क्रीम, व्हाइट, पिंक, लाइट ब्लू इनके लिए परफेक्ट कलर सिलेक्शन है.

– कलाप्रेमी होने के कारण आपको इनके घर होम थिएटर, स्टाइलिश आउटफिट से भरा वॉर्डरोब और किताबों का कलेक्शन मिलेगा.

– हां, ये कभी-कभी बहुत ज़्यादा हैवी फर्नीचर सिलेक्ट करने की ग़लती कर बैठते हैं, जिससे इन्हें बचना चाहिए.

 

वृश्‍चिक

– वृश्‍चिक राशिवाले लोग बेहद प्राइवेट क़िस्म के होते हैं. इनके लिए घर यानी पर्सनल स्पेस, जिसमें बहुत ज़्यादा बाहरी लोगों की दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं.

– इसी वजह से इनके घर पर आपको वेल्वेट जैसे हैवी फैब्रिकवाले परदे ही मिलेंगे.

– इन्हें अपनी पर्सनल लाइफ इतनी पसंद है कि ये बेडरूम को लिविंग रूम से एकदम डिटैच्ड यानी अलग-थलग रखते हैं.

– इनके होम डेकोर में पावर की झलक मिलती है, चाहे फिर वो फर्नीचर सिलेक्शन हो, फनिर्ंशिंग या होम एक्सेसरीज़.

– ये क्वालिटी से कभी समझौता नहीं करते. हाई क्वालिटी फर्नीचर, पेंटिंग- इनका सिलेक्शन बेहद ख़ास होता है.

– वृश्‍चिक राशिवालों को पानी बेहद पसंद है. बीच के किनारे घर बनाना इनका सपना होता है. अगर आप ऐसा नहीं कर सकते, तो फिश एक्वेरियम घर में रखें.

– रेड, लाइट यलो और ऑरेंज इनके फेवरेट कलर्स हैं और इन्हें अपने डेकोर में शामिल करना वो नहीं भूलते.

धनु

– इस राशिवालों को ओपन स्पेस बहुत पसंद है, इसलिए बालकनी या टैरेस वाला घर ही इन्हें अच्छा लगता है.

– ऑरेंज, हॉट पिंक, यलो जैसे ब्राइट कलर्स को डेकोर में शामिल करें.

– इस राशिवालों को एथनिक लुक पसंद है. ब्रोकेड के कुशन कवर्स, डिफरेंट प्रिंट्स के कर्टन और बेडशीट्स का कलेक्शन इनके पास होता है.

– कंफर्टेबल सोफा, परफेक्ट लाइटिंग अरेंजमेंट और एक बड़ा-सा डाइनिंग टेबल- ये सारी चीज़ें इनके घर में आपको नज़र आ ही जाएंगी.

 

मकर

– मकर राशिवाले बेहद अनुशासित होते हैं.

– होम डेकोर में सिंप्लिसिटी ही इनका फॉर्मूला है. ये कम से कम फर्नीचर और होम एक्सेसरीज़ ही इस्तेमाल करना पसंद करते हैं.

– डेकोर में कंफर्टेबल स्टाइल इनकी पहली चॉइस होती है.

– इन्हें कल्चर और ट्रेडिशन से भी प्यार होता है, इसलिए ये एंटीक चीज़ों को डेकोर में शामिल करना पसंद करते हैं.

– डार्क ब्लू, ग्रीन, ब्राउन और ब्लैक कलर इनके फेवरेट और लकी कलर्स हैं. सुख-समृद्धि के लिए इन्हें डेकोर में शामिल करें.

– घर के दक्षिण कोण में वॉयलेट रंग का इस्तेमाल इनको फाइनेंशियली मज़बूत बनाएगा.

 

कुंभ

– मॉडर्न और फ्यूचरिस्टिक- इनके होम डेकोर में इनकी पर्सनैलिटी की झलक मिलती है.

– कंटेम्परेरी और एंटीक फर्निशिंग, लेदर सोफा इन्हें ख़ास पसंद आते हैं.

– ब्लू, वॉयलेट, इंडिगो आदि इनके फेवरेट कलर्स हैं, जिसका इस्तेमाल ये होम डेकोर में भी करते हैं.

– नेचुरल लाइट्स इन्हें एनर्जेटिक फील कराती है, इसलिए ये विंडोज़ बड़े ही सिलेक्ट करते हैं.

 

मीन

– प्रकृति प्रेमी मीन राशिवाले लोगों को ऐसे ही घर की तलाश होती है, जहां से कुदरत का ख़ूबसूरत नज़ारा दिखता हो.

– स्टाइल की अच्छी समझ होती है मीन राशिवालों को और ये क्रिएटिव भी होते हैं. स्टाइल और किएटिविटी का ये कॉम्बीनेशन इनके होम डेकोर को ख़ूबसूरत अंदाज़ देता है.

– यलो, क्रीम और गोल्डन शेड्स इनके होम डेकोर में आपको ज़रूर नज़र आएंगे, क्योंकि ये इनके फेवरेट कलर्स हैं.

– इन्हें अपने घर के ईशान कोण में पानी भरकर रखना चाहिए. इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है.

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 श्रेया तिवारी

होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स(Top Home Decor Myths And Facts)

होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स

हर साल घर का रेनोवेशन कराना आसान नहीं है. लेकिन यदि घर की सजावट में थोड़ा-सा बदलाव किया जाए, तो घर को न्यू लुक ज़रूर दिया जा सकता है. पर अधिकतर लोगों के मन में होम डेकोर व डिज़ाइन्स को लेकर कई मिथ्स होते हैं, जिसके कारण वे डेकोर संबंधी सही निर्णय नहीं ले पाते. जाने ऐसे ही कुछ मिथ्स की हक़ीक़त.

होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स

मिथ: छोटे कमरे में छोटा फर्नीचर रखें.
यह केवल एक अवधारणा है. छोटे कमरे में छोटा फर्नीचर रखने से बेशक वह कम जगह घेरते हैं, लेकिन ऐसा करने से आपको स्वीट होमवाली फीलिंग नहीं आएगी. यदि आप अपने छोटेे कमरे को बड़ा लुक देना चाहते हैं, तो 1-2 ब़ड़े फर्नीचर, जैसे बड़ी चेयर/सेटी भी रख सकते हैं.

 

मिथ: घर के हर कमरे की सीलिंग पर व्हाइट पेंट कराना चाहिए.
घर को सजाने का यह तरीक़ा अब पुराना हो गया है. हर कमरे की सीलिंग पर व्हाइट कलर कराना बोरियत का एहसास कराता है. सीलिंग कमरे के 1/6 हिस्से को दर्शाता है. इसलिए इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. सीलिंग की टाइप और ऊंचाई को ध्यान में रखकर कमरे को क्रिएटिव लुक दिया जा सकता है. जैसे- दीवारोें को डार्क कलर से और सीलिंग पर लाइट कलर करके कमरे को स्पेशियस और ब्राइट लुक दिया जा सकता है.
– सीलिंग और दीवारों पर एक ही कलर का पेंट करके कमरे का लुक बदल सकते हैं, चाहें तो मोल्डिंग से सीलिंग लाइन भी बनवा सकते हैं.
– बड़े कमरे में डार्क कलर की सीलिंग कमरे को स्मॉल लुक देती है.
– कैबिनेट, फर्नीचर, कारपेट आदि के कलर से मैच करती हुई सीलिंग भी रखी जा सकती है.

 

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मिथ: छोटे कमरों में केवल व्हाइट या पेल जैसे न्यूट्रल कलर का चुनाव करें.
आजकल मार्केट में न्यूट्रल कलरवाले शेड कार्ड्स मिलते हैं, जिनमें न्यूट्रल कलर के अनेक शेड्स दिए रहते हैं. आप उनमें से अपने फेवरेट कलर का चुनाव कर सकते है. चाहें तो न्यूट्रल कलर में दूसरे कलर्स को मिक्स-मैच करके कमरे को स्पेशियस लुक दे सकते हैं. इसके अलावा कमरे का साइज़, फर्नीचर का साइज़, फर्नीचार अरेंजमेंट और वॉल कलर से भी आप छोटे कमरे का बड़ा लुक दे सकते हैं.

 

मिथ: न्यूट्रल कलर से नीरसता/बोरियत महसूस होती है.
ऐसा नहीं है. लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए अब पेंट बनानेवाली कंपनियां न्यू कलर स्कीम्स निकालने लगी हैं, जिसमें अनगिनत शेड्स दिए रहते हैं. इन शेड्स में से आप अपनी पसंद के कलर का चुनाव कर सकते हैं. यदि आप न्यूट्रल या मोनोक्रोमेटिक कलर का चुनाव कर रहे हैं, तो 2-3 कलर को मिलाकर नए कलर को चुनें.

 

मिथ: फर्नीचर, वॉल कलर, फैब्रिक्स आदि सभी मैचिंग होने चाहिए.
यदि सभी चीज़ें मैचिंग की होंगी, तो घर का डेकोर आपको बोरियत का एहसास कराएगा. फर्नीचर और वॉल कलर से मैच करते हुए डेकोरेटिव आइटम्स को लगाना ग़लत नहीं है, बस आसान-सा उपाय है घर को सजाने का, लेकिन पहले से डिज़ाइन की गई जगहों पर मैचिंग का फर्नीचर आदि लगाने की बजाय एंटीक आइटम्स (स्टैचू, बड़े वास आदि) का प्रयोग करें, जिससे कमरे का लुक अलग लगे. मैचिंग की तुलना में आप के द्वारा किया गया यह एक्सपेरिमेंट घर को क्लासी लुक देता है. मैचिंग का ट्रेंड अब पुराना हो गया है, विशेष रूप से फर्नीचर के मामले में.

होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स

मिथ: बेज कलर फर्नीचर, रग्स, एक्सेसरीज़ आदि के साथ आसानी से मैच हो जाता है.
यह पूरी तरह से सही नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेज भले ही न्यूट्रल (सॉफ्ट) कलर है और आसानी से अन्य एक्सेसरीज़ से मैच भी हो जाता है, लेकिन ऐसा करने से घर में डल फीलिंग आती है. इसलिए बेज कलर का चुनाव अन्य एक्सेसरीज़ से मिक्स और मैच करते हुए करेंगे, तो घर को न्यू व स्टाइलिश लुक दे सकते हैं. इसके अलावा यदि आप घर की दीवारों पर न्यूट्रल कलर कराने की सोच रहे हैं, तो बेज कलर को छोड़कर अन्य न्यूट्रल कलर भी ट्राई करें. आजकल मार्केट में बेज के
साथ-साथ अन्य बहुत सारे न्यूट्रल शेड्स उपलब्ध हैं, जिनसे आप अपने घर के डेकोर को नया लुक दे सकते हैं.

 

मिथ: पैटर्न (कलर और शेप) और प्रिंट्स (लैपर्ड, जेब्रा, स्पॉटेड एंड स्ट्राइप्स, ज्यामैट्रिकल) को एक साथ मैच न करें.
ज़्यादातर लोगों को यह भ्रम होता है कि पैटर्न और कलर्स को एक साथ मैच नहीं करना चाहिए. लेकिन इस भ्रम को
थोड़ी-सी क्रिएटिविटी के द्वारा तोड़ा जा सकता है. जैसे- कलर स्कीम और मेन पैटर्न को ध्यान में रखते हुए स्ट्राइप्स, स्क्वेयर और स्मॉल प्रिंट्स का सिलेक्शन कर सकते हैं. इसी तरह से यदि फैब्रिक का चुनाव कर रहे हैं, तो सॉलिड कलरवाले टैक्स्चर और स्क्वेयर पैटर्न का चुनाव करें.

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मिथ: डेकोर और डिज़ाइनिंग के बारे में इंटीरियर डिज़ाइनर द्वारा बताए गए रूल्स को फॉलो करें.

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. एक्सपर्ट्स द्वारा बताए गए डेकोर और डिज़ाइनिंग संबंधी सारे पुराने नियमों में बदलाव लाएं. यदि आप अपने घर का डेकोर बदल रहे हैं, तो सबसे ज़रूरी बात है आपका पर्सनल टेस्ट और स्टाइल, जो आपकी पर्सनैलिटी को प्रतिबिम्बित करता है. डेकोर और डिज़ाइनिंग का पहला नियम यह है कि आपको घर का लुक किस तरह का चाहिए- क्लासिक या मॉडर्न? आपका फेवरेट कलर कौन-सा है? आपको किस तरह का आर्ट वर्क पसंद है? आदि. दूसरे शब्दों में कहें तो, घर का स्टाइल और डेकोर आपकी पसंद का होना चाहिए, न कि अन्य लोगों की.

 

मिथ: घर का डेकोर बदलते समय लेटेस्ट ट्रेंड को फॉलो करें.
एक्सपर्ट के अनुसार, घर का डेकोर इस तरह का होना चाहिए, जो आपको वॉर्म फील कराए. यदि आप अपने घर को कंटेम्प्रेरी लुक देना चाहते हैं, तो लेटेस्ट ट्रेंड को फॉलो करें. वैसे भी ट्रेंड समय-समय पर बदलते रहते हैं. अच्छा यही होगा कि आप अपने घर को क्लासी लुक दें. क्लासी लुक को फॉलो करते हुए आप अपने घर पर ट्रेंडी सामान/चीज़ों को रख सकते हैं, कुछ समय बाद आप उन्हें आसानी से बदल या हटा सकते हैं.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

कितना हेल्दी है आपका स्वीट होम(How Healthy Is Your Sweet Home?)

How Healthy Is Your Sweet Home

घर में रहनेवालों की अच्छी सेहत के लिए घर का साफ़-सुथरा व हाइजीनिक होना बेहद ज़रूरी है. घर में कुछ ऐसे जर्म्स स्पॉट्स होते हैं, जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं और इस अनदेखी की क़ीमत हमें अपनी सेहत को नुकसान पहुंचाकर चुकानी पड़ती है. तमाम इंफेक्शन्स और एलर्जी के कारण बननेवाले इन जर्म्स और बैक्टीरियाज़ को ख़त्म करें और घर के साथ-साथ घरवालों को भी हेल्दी रखें. 

How Healthy Is Your Sweet Home
हेल्दी किचन 

जर्म्स हॉट स्पॉट

– किचन सिंक और नलश

– किचन का कपड़ा और बर्तन धोने का स्पॉन्ज

– किचन काउंटर और कटिंग बोर्ड 

– फ्रिज के भीतर के रैक्स

– डस्टबिन

– किचन के सिंक में रोज़ाना एक बार गरम पानी डालें, ताकि सिंक में काई ना लगे और न ही पाइप में कचरा फंसे. साथ ही सिंक में रातभर जूठे बर्तन न रखें.

– बहुत-से लोग बर्तन धोने के बाद गीला स्पॉन्ज उसी तरह रख देते हैं, जिससे उनमें बैक्टीरिया पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है. हर बार बर्तन धोने के बाद स्पॉन्ज को अच्छी तरह धोकर व पानी निचोड़कर रखें. रात को उसे ऐसी जगह रखें, जिससे वो सूख जाए. 

– किचन काउंटर को रोज़ाना साबुन-पानी से धोने के बाद 1 टीस्पून क्लोरीन ब्लीच डालकर साफ़ करें.

– बर्तन रखने की ट्रॉली या बर्तन रखने की जगह का भी साफ़-सुथरा व हाइजीनिक रहना बहुत ज़रूरी है, वरना भले ही आपने बर्तन कितनी ही अच्छी तरह क्यों न धोए हों, वहां पहुंचते ही वो संक्रमित हो सकते हैं.  

– वेज और नॉन वेज के लिए अलग-अलग कटिंग बोर्ड और चाकू का इस्तेमाल करें. साथ ही हर रोज़ इन्हें अच्छी तरह साफ़ करें.

– किचन काउंटर पर कहीं भी कुछ भी खाने की चीज़ गिरे, तो उसे तुरंत साफ़ करें, वरना चींटी, मक्खी और कॉकरोच आ सकते हैं.

– किचन में इस्तेमाल होनेवाले कपड़े को भी हमेशा साफ़ व सूखा रखें.    

– गर्म पानी में बेकिंग सोडा मिलाकर फ्रिज को साफ़ करें. ऐसा हर हफ़्ते करें, ताकि फ्रिज में रखी चीज़ें भी सुरक्षित रहें.  

– किचन में कभी भी डस्टबिन खुला न छोड़ें. उसे हमेशा ढंककर रखें. साथ ही हर हफ़्ते डस्टबिन को साफ़ करें और धूप में सुखाएं. डस्टबिन में हमेशा डस्टबिन बैग डालकर रखें.

– हर छह महीने पर किचन में पेस्ट कंट्रोल कराएं.

– किचन में अच्छी ख़ुशबू के लिए विनेगर या फिर लेमन एक्सट्रैक्ट छिड़कें. 

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हेल्दी बाथरूम/टॉयलेट

जर्म्स हॉट स्पॉट

– टॉयलेट सीट, फ्लश हैंडल

– सिंक, शावर, नल

-गीले कोने

– बाथरूम और टॉयलेट दोनों ही ऐसी जगहें हैं, जो गीली रहती हैं, जिसके कारण बैक्टीरिया और जर्म्स के पनपने के लिए परफेक्ट जगह हैं, इसलिए जितना हो सके, इन्हें सूखा रखने की कोशिश करें.

– बाल्टी या टब में पानी भरकर न रखें, बल्कि इस्तेमाल के बाद बाल्टी को उल्टी करके रख दें, ताकि बाल्टी भी सूख जाए और वो जगह भी.

– बाथरूम में एक्ज़ॉस्ट फैन ज़रूर लगवाएं, ताकि सारा मॉइश्‍चर बाहर निकल जाए.

– हफ़्ते में एक बार बाथरूम का फ्लोर और टाइल्स किसी एंटी-बैक्टीरियल क्लीनर से साफ़ करें.

– बाथरूम साफ़ करने का बेस्ट टाइम गरम पानी से नहाने या फिर शावर लेने के बाद होता है, क्योंकि उस समय पूरे बाथरूम में मॉइश्‍चर रहता है, जिससे सफ़ाई करने में मदद मिल जाती है.

– नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल सोल्यूशन बनाएं- 2 कप पानी में 1/4 कप लिक्विड सोप और 1 टेबलस्पून नीलगिरी का तेल मिलाकर स्प्रे बॉटल में भरकर रखें. सफ़ाई के लिए इस स्प्रे का इस्तेमाल करें.

– बाथरूम और टॉयलेट की सफ़ाई गरम पानी से करें, ताकि जर्म्स ख़त्म हो जाएं.

– हमेशा टॉयलेट सीट को ढंककर ही फ्लश करें, ताकि पानी के छींटें चारों तरफ़ न फैलें. –

– हफ़्ते में एक बार ब्लीच को पानी में घोलकर भी आप टॉयलेट या बाथरूम साफ़ कर सकते हैं.

– बाथरूम-टॉयलेट में ऊपर की तरफ़ क्लोज़ काउंटर्स बनवाएं, ताकि आपका सामान बैक्टीरिया और मॉइश्‍चर फ्री रहे.

– फ्लश टैंक, नलों और दरवाज़े के हैंडल को अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं, जिससे बहुत-से बैक्टीरिया हमारे हाथों में चिपककर घर के दूसरे हिस्सों में पहुंच जाते हैं, जो इंफेक्शन फैलाने के लिए काफ़ी हैं.

– टॉयलेट और बाथरूम के बाहर एंटी-बैक्टीरियल हैंड सोप हमेशा रखें.

– टॉयलेट और बाथरूम में बहुत ज़्यादा हार्श केमिकल्स के इस्तेमाल से बचें.

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हेल्दी लिविंग रूम और बेडरूम

जर्म्स हॉट स्पॉट

– टीवी रिमोट कंट्रोल

–  स्विच बोर्ड

– टेलीफोन हैंडल

– ज़्यादातर लोग टीवी रिमोट कंट्रोल, स्विच बोर्ड और टेलीफोन हैंडल के धूल-मिट्टी और जर्म्स को अनदेखा करते हैं, जो लगातार संपर्क में रहने की वजह से इंफेक्शन का कारण बनते हैं.

– बेडरूम और लिविंग रूम के परदे बेडशीट्स, तकिए के कवर्स के साथ-साथ सोफे के कवर्स भी महीने में एक बार ज़रूर साफ़ करें.

– गीले कार्पेट और रग्स में डस्ट माइट्स और जर्म्स हो सकते हैं, इसलिए समय-समय पर इन्हें निकालकर धूप में सुखाएं, ताकि फंगस भी न लगे.

– घर में सूरज की रोशनी आने से बैक्टीरिया या जर्म्स नहीं होते, इसलिए सुबह-शाम घर की खिड़कियां व दरवाज़े खुले रखें.

– घर हेल्दी बना रहे, इसलिए सबसे ज़रूरी है, सही वेंटिलेशन की सुविधा. घर में जितना ज़्यादा ताज़ी हवा का आवागमन होगा, घर के लोग उतने ही हेल्दी व स्वस्थ रहेंगे.

– शू रैक भी ऐसी ही एक जगह है, जहां जूते-चप्पल के ज़रिए जर्म्स और बैक्टीरिया घर में दाख़िल होते हैं, इसलिए जूते-चप्पलों के साथ-साथ शू रैक को भी हर 10-15 दिन में एक बार क्लीन ज़रूर करें और उसमें फिनायल की गोलियां डालें, ताकि कॉकरोच उसे अपना घर न बना सकें.

 अगर घर में हों छोटे बच्चे तो…

बच्चों को ज़मीन पर खेलना कितना पसंद है, यह तो हर कोई जानता है, पर क्या यह जानती हैं कि आपकी ज़मीन कितना हाइजीनिक है? नहीं, तो इन बातों का ध्यान रखें-

– रोज़ाना एंटी-बैक्टीरियल क्लीनिंग प्रोडक्ट्स से घर का फर्श साफ़ करें.

– सुबह-शाम घर में झाड़ू लगाएं और जहां बच्चे खेलते हैं, उसे हमेशा जर्म फ्री रखें.

– बच्चे अक्सर खेलते हुए कोई भी सामान उठाकर मुंह में डाल लेते हैं, इसलिए उनकी पहुंच तक की सभी चीज़ों को ख़ासतौर से हाइजीनिक रखें.

– बच्चों के खेलने के लिए देने से पहले खिलौनों और खिलौनों की टोकरी को एंटी-बैक्टीरियल लिक्विड से साफ़ करें.

– आजकल के बच्चों के आकर्षण का केंद्र मोबाइल फोन होते हैं. छोटे बच्चों को मोबाइल फोन देने से पहले किसी साफ़ कपड़े से उसे साफ़ कर दें, क्योंकि बच्चे फोन को तुरंत मुंह में डालते हैं.

– बाथरूम में बाल्टी में पानी भरकर न रखें और न ही भीगे डोरमैट्स रखें, वरना बच्चों के फिसलकर गिरने का डर बना रहता है

 

– अनीता सिंह

40+ क्विक होम क्लीनिंग टिप्स(40+ Quick Home Cleaning Tips)

आज पूरे देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है, धीरे-धीरे लोग इसके प्रति जागरूक भी हो रहे हैं. लेकिन उतनी तादाद में नहीं, जितने होने चाहिए. इस अभियान की सफलता तभी सिद्ध होगी, जब हम स्वच्छता की शुरुआत अपने घर से करेंगे. हम यहां पर बता रहे हैं कुछ क्विक होम क्लीनिंग टिप्स के बारे में…

 

– बेडरूम, लिविंग रूम, किचन व बाथरूम के शेल्फ्स और कैबिनेट्स को साफ़ करने से पहले सारा सामान निकाल लें.

– शेल्फ्स और कैबिनेट्स को अंदर-बाहर और ऊपर-नीचे शैंपू/डिटर्जेंट मिले पानी से साफ़ करें और हैंडल को टूथब्रश से क्लीन करें.

– उनके कोनों व हैंडल को टूथब्रश की मदद से साफ़ करें.

– सामान रखते समय एक्सपायर्ड और ग़ैरज़रूरी चीज़ों को हटा दें.

– मैट्रेस और सोफे की सुरक्षा के लिए वॉशेबल मैट्रेस पैड और सोफे कवर का इस्तेमाल करें.

– मैट्रेस, सोफा, काउच में जमी धूल-मिट्टी को निकालने के लिए उन्हें 20-25 दिन में एक बार वैक्यूम क्लीनर से साफ़ करें.

– कुशन व रग्स को 15 दिन में एक बार और कार्पेट को महीने में एक बार वैक्यूम क्लीनर से साफ़ करें.

– बेड व काउच के नीचे की जगह और अन्य कोनों (जहां पर रेग्युलर सफ़ाई नहीं होती) को 15 दिन में एक बार ज़रूर साफ़ करें.

– परदों पर जमी धूल-मिट्टी को वैक्यूम क्लीनर से निकालें. फिर धोएं. ऐसा करने से परदे को धोने में कम मेहनत और समय लगेगा.

– बच्चों के सॉफ्ट टॉयज़ को कपड़ेवाले बैग में भरकर वॉशिंग मशीन में धोएं.

– यदि आपके घर में सीढ़ियां हैं, तो सफ़ाई की शुरुआत वहीं से करें. सीढ़ियों की सफ़ाई होममेड फ्लोर क्लीनर से करें.

– फ्रिज, माइक्रोवेव आदि में पड़े दाग़-धब्बों को निकालते समय उन्हें ज़ोर-ज़ोर से रगड़ें नहीं, बल्कि गीले स्पॉन्ज से निकालें.

– इलेक्ट्रॉनिक सामान का इस्तेमाल करने के बाद तुरंत साफ़ न करें, बल्कि स्क्रीन को डार्क व ठंडा होने दें. तब स्क्रीन पर पड़े दाग़ क्लीयर दिखाई देते हैं.

– इलेक्ट्रॉनिक सामान को माइक्रो फाइबर क्लॉथ या लो-लिंट वाइप्स से क्लीन करें.

– डायरेक्ट स्क्रीन को गीले कपड़े से पोंछने की बजाय रेडीमेड सोल्यूशन से साफ़ करें.किचन

– गैस पर जमी चिकनाई और दाग़-धब्बों को माइल्ड क्लीनर से साफ़ करें.

– बर्नर और नॉब को गरम पानी में थोड़ा-सा डिटर्जेंट डालकर टूथब्रश से साफ़ करें. पूरी तरह से सूखने के बाद ही लगाएं.

– सिंक पर जमी चिकनाई, भोजन और पानी के धब्बों को निकालने के लिए उसमें बेकिंग सोडा डालकर 3-4 मिनट तक रखें. स्पॉन्ज से रगड़कर साफ़ करें.

– गुनगुने पानी में थोड़ा-सा व्हाइट विनेगर मिलाकर सिंक को साफ़ करें. सिंक पर पड़े धब्बों को मिटाने के लिए यह बेस्ट होममेड क्लीनर है.

– किचन की चिमनी, एग्ज़ॉस्ट फैन और स्विच बोर्ड को साफ़ करने से पहले अनप्लग करें.

– उन्हें शैंपू मिले पानी में भिगोए हुए स्पॉन्ज से साफ़ करें. पूरी तरह से सूखने के बाद ही लगाएं.श्र बर्तन धोनेवाले स्क्रबर/स्पॉन्ज को 15-20 दिन में बदल लें. हाइजीन के उद्देश्य से भी सबसे अधिक बैक्टीरिया उसमें ही पनपते हैं. इसलिए काम ख़त्म होने के बाद इसे सूखने के लिए रखें.

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बाथरूम

– टाइल्स, वॉश बेसिन, बाथटब और टॉयलेट पॉट को साफ़ करने के लिए अच्छी क्वालिटीवाले क्लीनर और ब्रश का प्रयोग करें. आजकल बाज़ार में अच्छी क्वालिटीवाले ख़ुशबूदार क्लीनर भी मिलते हैं.

– इनके आसपास के किनारों को क्लीनर और ब्रश से अच्छी तरह से साफ़ करें.

– नल और शॉवर पर जमी धूल-मिट्टी को डिटर्जेंट/शैंपू मिले पानी या विनेगर मिले पानी से साफ़ करके कपड़े से पोंछें.

– एग्ज़ॉस्ट फैन और लाइट के स्विच को अनप्लग करके क्लीन करें.

फ्रिज

– फ्रिज को साफ़ करने से 3-4 घंटे पहले अनप्लग करें. रूम टेंपरेचर पर आने के बाद ही साफ़ करें.

– बासी खाने की दुर्गंध और दाग़-धब्बों को दूर करने के लिए होममेड केमिकल फ्री क्लीनर और माइक्रो फाइबर क्लॉथ का इस्तेमाल करें.

– होममेड क्लीनर बनाने के लिए 1 लीटर पानी में आधा कप विनेगर मिलाएं. चाहें तो पानी में नींबू का रस मिलाकर भी लेमन-वॉटर क्लीनर बना सकते हैं.

– फ्रीज़र, शेल्फ्स, ड्रॉअर्स, रैक्स और कंटेनर्स को उपरोक्त क्लीनर्स से साफ़ करें. यदि ये शेल्फ्स आदि कांच के हैं, तो ठंडे पानी से धोएं और फाइबर के हैं, तो गरम पानी से साफ़ करें.

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माइक्रोवेव

– सफ़ाई करने के लिए होममेड क्लीनर या फिर रेडीमेड माइल्ड क्लीनर का प्रयोग करें.

– होममेड क्लीनर बनाने के लिए आधा लीटर पानी में 1 कप सोडा बाई कार्बोनेट मिलाकर पतला घोल बनाएं.

– इस क्लीनर से अवन को साफ़ करके 4-5 घंटे तक ऐसा ही रहने दें. बाद में गीले माइक्रो फाइबर क्लॉथ से पोंछ लें.

– 3 ग्लास पानी में 1 नींबू का रस और 1 टीस्पून बेकिंग सोडा मिलाकर घोल बनाएं. इससे माइक्रोवेव को साफ़ करें.

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– माइक्रोवेव की सफ़ाई के लिए स्टीम प्रोसेस सबसे अच्छा तरीक़ा है. स्टीम प्रोसेस के लिए पानी से भरे माइक्रोसेफ बाउल में 1 नींबू का रस डालकर माइक्रोवेव ऑन करें. 2-3 मिनट बाद माइक्रोवेव को बंद करके 20 मिनट तक ऐसे ही रहने दें. बाद में माइक्रो फाइबर कपड़े से पोंछ लें.

– माइक्रोसेेफ बाउल में 2 कप पानी और थोड़ी-सी पुदीने की पत्तियां डालकर अधिकतम तापमान में 10-15 मिनट तक रखें. बाद में माइक्रोवेव को बंद करके 1 घंटे तक ऐसे ही रहने दें.

– माइक्रोवेव को साफ़ करने के बाद 1 घंटे तक खुला रखें, ताकि खाने और क्लीनर की गंध निकल जाए.

 

वॉशिंग मशीन

– मशीन की ट्यूब में कपड़े धोते समय मिट्टी के कण फंस जाते हैं,  इसलिए महीने में एक बार मशीन को बिना कपड़े के गरम पानी में 2 कप नींबू का रस और 1 कप व्हाइट विनेगर डालकर चलाएं.

– मशीन के पाइप में जमा गंदगी और अंदरूनी हिस्से की सफ़ाई हर तीन महीने में करें.

– यदि सफ़ाई के लिए रेडीमेड क्लीनर का प्रयोग कर रहे हैं, तो ऐसे क्लीनर का इस्तेमाल करें, जिनमें स्ट्रॉन्ग केमिकल न हों.

– अंदर-बाहर से मशीन की सफ़ाई करने के बाद उसे 1-2 घंटे तक खुला छोड़ दें, ताकि उसके अंदर की नमी पूरी तरह से सूख जाए.

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रेनोवेशन मिस्टेक्स और उनसे बचने के ईज़ी टिप्स(Renovation Mistakes And Easy Tips To Avoid Them)

अक्सर लोग घर को रेनोवेट कराते समय छोटी-छोटी ग़लतियां कर बैठते हैं, जिसका ख़ामियाज़ा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है. हम यहां पर ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण ग़लतियों के बारे में बता रहे हैं, जिससे बचकर आप अपने घर को परफेक्टली रेनोवेट करा सकते हैं.

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न्यूयॉर्क बेस्ड एक इंटीरियर कंपनी द्वारा हाल ही में किए गए एक सर्वे के अनुसार, लगभग 85% लोगों को घर ख़रीदने से ज़्यादा तनावपूर्ण काम घर का रेनोवेशन कराना लगता है. इस तनाव का कारण है- बजट की कमी, मटेरियल ख़रीदना और सही कॉन्ट्रैक्टर का चुनाव न करना आदि. यदि आप भी अपने घर को तनावरहित होकर रेनोवेट कराने की सोच रहे हैं, तो यहां पर बताई महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखें.
– बिना बजट प्लान किए घर के रेनोवेशन का काम शुरू करने की ग़लती कभी न करें.
– रेनोवेशन के लिए बजट बनाने से पहले आर्किटेक्चर, इंटीरियर डिज़ाइनर और कॉन्ट्रैक्टर से मिलकर बजट का आइडिया ले लें.
– बजट का लेखा-जोखा करते समय कॉन्ट्रैक्टर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन आदि की फीस, मटेरियल का ख़र्च आदि अनुमानित ख़र्चों की लिस्ट बनाएं.
– इस बजट के अलावा एक एमर्जेंसी रिज़र्व फंड बनाएं. उसका उपयोग तभी करें, जब आपको उसकी बहुत ज़्यादा जरूरत हो.
– मास्टर प्लान बनाए बिना घर का रेनोवेशन आरंभ करने की भूल न करें.
– मास्टर प्लान बनाते समय कॉन्ट्रैक्टर को पहले से ही अपनी रिक्वायरमेंट बता दें.
– मास्टर प्लान के अनुसार काम शुरू होने के बाद बार-बार बदलाव न करवाएं.
– बार-बार आर्किटेक्चरल चेंजेस (तोड़-फोड़) करने से मटेरियल का नुक़सान तो होगा ही, आपका बजट भी बिगड़ेगा. इसलिए आर्किटेक्चर या कॉन्ट्रैक्टर के साथ मिलकर पहले ही मास्टर प्लान फाइनल करें.
– रेनोवेशन का काम आरंभ करने से पहले 2-3 कॉन्ट्रैक्टर्स से मिलकर अनुमानित बजट का आइडिया ज़रूर लें.
– कॉन्ट्रैक्ट फाइनल करने से पहले सारी डिटेल्स- हार्डवेयर, केबिनेट्स, फ्लोरिंग व उनका मेहनताना आदि टर्म्स और कंडीशन्स को लिखित में लें.
– रेनोवेशन के लिए ऐसे एक्सपर्ट व प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्टर का चुनाव करें, जो आपको डेकोर स्टाइल, डिज़ाइन और काम पूरा होने की अनुमानित अवधि के बारे में विस्तार से बताए और वित्तीय हानि होने से भी बचाए.
– रेनोवेशन के दौरान मटेरियल की क्वालिटी के साथ समझौता करने की ग़लती न करें.
– बजट को नियंत्रित रखने के लिए केबिनेट्स के हैंडल्स, लाइटिंग, स्विच आदि एक्सेसरीज़ रिटेलर से ख़रीदने की बजाय होलसेल मार्केट से ही ख़रीदें.
– रेनोवेशन कराते समय अपनी पसंद को ध्यान में रखते हुए कलरफुल ग्लास, टाइल डिज़ाइन आदि सामान पर अधिक ख़र्च न करें.
– कॉन्ट्रैक्टर को पूरा पेमेंट करने से पहले सारे घर का रेनोवेशन, फिक्स्चर्स और फिनिशिंग को अच्छी तरह से चेक करें.

किचन रेनोवेशन मिस्टेक्स

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– किचन में रेनोवेशन कराते समय सिंक, फ्रिज और गैस को एक ही दिशा में रखने की ग़लती न करें, बल्कि उन्हें ट्रायंगल शेप में रखने की व्यवस्था करें.
– किचन में लीकेज से बचने के लिए सिंक को पानी की पाइपलाइन के क़रीब और सही तरी़़के से लगवाएं.
– पाइपलाइन की फिटिंगवाली जगह को कवर करना न भूलें.

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– किचन अप्लायसेंस और बर्तनों के रखने के लिए जहां तक हो सके, अधिक से अधिक स्टोरेज बनाएं.
– किचन को रेनोवेट करते समय काउंटर टॉप/स्लैब पर पर्याप्त खुली जगह छोड़ें, ताकि काम करते समय किसी तरह की परेशानी न हो.
– सही वेंटिलेशन न होने के कारण किचन में काम करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. अत: किचन को रेनोवेट कराते समय किचन चिमनी/एग्ज़ॉस्ट फैन लगाना न भूलें.
– लाइटिंग की भी उचित व सही व्यवस्था करें.

बाथरूम रेनोवेशन मिस्टेक्स

– बाथरूम में बाथरूम फैन/एग्ज़ॉस्ट फैन को नज़रअंदाज़ करने की ग़लती न करें. सही वेंटिलेशन न होने के कारण फ्लोर पर नमी जमी रहती है, जिसके कारण पेंट भी ख़राब होता है.
– तोड़-फोड़ शुरू करने से पहले बाथरूम में लीकेज चेक करना न भूलें. कई बार बजट व मटेरियल की कमी के कारण लीकेज की तरफ़ हमारा ध्यान नहीं जाता.
– टे्रंडी व ब्रांडेड बाथरूम फिटिंग्स व फिक्स्चर्स (वॉश बेसिन, शावर, टॉयलेट पॉट और टैप्स आदि) ख़रीदने के चक्कर में बजट बिगाड़ने की भूल न करें.
– रेनोवेशन कराते समय वायरिंग केसाथ-साथ पुरानी लाइट्स भी बदलें. इसके लिए एनर्जी सेविंग लाइट्स बेस्ट ऑप्शन हैं.
– बाथरूम के लिए ऐसी फ्लोरिंग का चुनाव करें, जो ड्यूरेबल और वॉटर रेज़िस्टेंट हो.
– छोटी, लेकिन अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे घर का रेनोवेशन कराने के चक्कर में हम अक्सर
छोटी-छोटी चीज़ों को चेक करना भूल जाते हैं, जैसे- लाइट, नल, शावर और पानी की फिटिंग आदि. इसलिए कॉन्ट्रैक्टर के घर से निकलने से पहले पूरे घर की फिटिंग व फिक्स्चर्स ज़रूर चेक करें. तभी कॉन्ट्रैक्टर को फाइनल भुगतान करें.

– अभिषेक शर्मा

किचन के लिए Effective वास्तु टिप्स, जो रखेगा आपको हेल्दी(Super Effective Vastu Tips For Your Kitchen For Healthy Life)

वास्तु टिप्स

अगर किचन का डेकोर करते समय वास्तु शास्त्र के कुछ रूल्स फॉलो किए जाएं तो न सिर्फ आप और आपका परिवार हेल्दी रहेगा. बल्कि आपके परिवार में सुख-समृद्धि भी बनी रहेगी. 

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क्यों ज़रूरी है रसोई का वास्तु?

रसोईघर भोजन निर्माण का केंद्र है और भोजन ही हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का आधार है. अतः यदि रसोईघर सही एवं शुभ दिशा में स्थित हो तथा उसकी संयोजना वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुकूल की गई हो, तो न केवल उसमें खाना बनानेवाला, बल्कि उस भोजन को ग्रहण करनेवाले परिवार के सभी सदस्यों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है.
यदि रसोईघर में हवा और प्रकाश आने की पर्याप्त व्यवस्था हो तथा सामग्री इत्यादि रखने की संयोजना वास्तु के अनुसार हो, तो आपको थकान का अनुभव नहीं होता, मन प्रफुल्लित रहता है, जिसका सूक्ष्म प्रभाव भोजन में प्रविष्ट होकर भोजन करनेवालों को शारीरिक पुष्टि एवं मानसिक संतुष्टि प्रदान करता है. इससे वे निरोगी रहते हैं, मन प्रसन्न रहता है और उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है.

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* घर के प्रत्येक सदस्य को किचन के प्रति एक पवित्र श्रद्धा होनी चाहिए.
* किचन हमेशा स्वच्छ रहना चाहिए, किसी भी परिस्थिति में किचन को अस्त-व्यस्त और अस्वच्छ नहीं रखना चाहिए.
* रात को जूठे बर्तन किचन में नहीं छोड़ने चाहिए.
* गंदगी और कचरा आदि जितनी जल्दी हो सके, सुविधानुसार हटा देना चाहिए.
* मकड़ी के जाले, कॉक्रोच व अन्य जीव-जंतु रसोई में अपना घर न बना लें, इस पर ध्यान देना चाहिए.
* बर्तन व अन्य समस्त उपकरण साफ़ और व्यवस्थित होने चाहिए.
* टूटे-फूटे बर्तन व ऐसे बर्तन जिन्हें देखकर मन प्रसन्न नहीं होता हो, उन्हें हटा देना चाहिए.
* छत, दीवार और फर्श पर कहीं भी दरार या टूट-फूट नहीं रहनी चाहिए.
* चलने पर टाइल्स हिलनी नहीं चाहिए.
* फर्नीचर आदि सुंदर व व्यवस्थित होना चाहिए यानी ड्रॉअर या ट्रॉली आदि खोलने पर किसी भी तरह की कर्कश आवाज़ नहीं आनी चाहिए.
* प्रकाश और हवा का आवागमन बेरोकटोक रहे.
* बासी, अपवित्र, दुर्गंधयुक्त खान-पान नहीं रखना चाहिए.
* पवित्र व प्रसन्न मन से रसोईघर में प्रवेश करना चाहिए. वहां की गई हर गतिविधि मां अन्नपूर्णा की उपासना है.
* देखा जाता है कि घर के ड्रॉइंग रूम के सौंदर्य पर ही विशेष ध्यान दिया जाता है, जबकि उससे भी ज़्यादा ध्यान किचन पर होना चाहिए, ताकि किचन को देखते ही हमारे अंदर आनंद और ऊर्जा का संचार हो.
* रसोईघर में रोना, चीखना-चिल्लाना व हाथापाई भूलकर भी नहीं होनी चाहिए.
* रसोईघर में स्नान करके प्रवेश करना चाहिए.
* यहां नौकर-चाकर या सेवक को नहीं सोना चाहिए.
* संभव हो, तो रसोईघर में भोजन नहीं करना चाहिए.
* रसोईघर में लीकेज नहीं होना चाहिए.
* मटके में कांच के बर्तन या ग्लास आदि नहीं डालने चाहिए.
* यदि आपके यहां भोजन कोई रसोइया बनाता है, तो उसे ख़ुश रखें.
* किचन में फोन आदि पर बात करते समय कभी भी झूठा वादा न करें.

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इन बातों का भी रखें ख़्याल
* किचन हमेशा दक्षिण-पूर्व अर्थात् आग्नेय कोण में होना चाहिए.
* भोजन बनाते समय हमारा मुंह पूर्व में होना चाहिए.
* किचन में चूल्हा दक्षिण-पूर्व में बने प्लेटफॉर्म पर रखना चाहिए. जहां तक संभव हो दक्षिण की तरफ़ होना चाहिए.
* त्योहार, पर्व या विशेष दिनों में, जैसे- जन्मदिन या शादी की वर्षगांठ के दिन रसोई को ख़ास ढंग से सजाना व साफ़-सुथरा रखना चाहिए.
* प्रतिदिन किसी न किसी को निमित्त मानकर दीपक जलाना चाहिए.
* रसोईघर में पूजा घर न बनाएं, लाचारी वश बनाना भी हो, तो विशेष नियमों का पालन करें.
* रसोईघर में सफ़ाई के उपकरण रखने ही हों, तो रसोईघर के उत्तर-पश्‍चिम में रखें, यदि वहां भी संभव न हो, तो दक्षिण-पश्‍चिम में भी रख सकते हैं.
* फूल, सुगंध, संगीत, स्वच्छता व पवित्रता रसोईघर के लिए जुटा पाएं, तो आपके सौभाग्य को बेहद बल मिलता है. आप प्रगति और
उन्नति करेंगे.
* रसोईघर के लिए दक्षिण-पूर्व क्षेत्र का प्रयोग उत्तम है, किंतु जहां सुविधा न हो, वहां विकल्प के रूप में उत्तर-पश्‍चिम क्षेत्र का प्रयोग किया जा सकता है. किंतु उत्तर-पूर्व मध्य व दक्षिण-पश्‍चिम क्षेत्र में किचन नहीं होना चाहिए.

– डॉ. प्रेम गुप्ता

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होम डेकोरः चेयर सिलेक्शन ट्रिक्स(Home Decor: Chair Selection Tricks)

Chair Selection Tricks
यूं ही जब कभी ख़्यालों में तुम उतर आती हो, आंगन में बिखर जाते हैं फूल और तुम धड़कनों में चली आती हो… बैठकर सोचा करते हैं अक्सर तुम्हें और याद आ जाती हैं वो मुलाक़ातें हमें… जब तुम और मैं यूं ही रू-ब-रू बैठकर ़फुर्सत के लम्हों को जिया करते थे… लब ख़ामोश होते थे और तुम्हारी आंखों से हम जाम पीया करते थे… क्या फिर से लौटेगा वो दौर, वो सुहाना मंज़र… जब हम-तुम बैठेंगे यूं ही और सामने होगा ख़्वाबों का समंदर…

 

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चेयर सिलेक्शन ट्रिक्स

 चेयर्स स़िर्फ बैठने या आराम फ़रमाने के लिए ही नहीं होतीं, बल्कि इन्हें अगर इंटेलिजेंटली यूज़ किया जाए, तो ये आपके डेकोर को ब्यूटीफुल लुक दे सकती हैं.
* डिफरेंट स्टाइल की चेयर्स, उनके कवर्स के कलर्स, उनके स्टैंड की डिफरेंट शेप से आप अपने डेकोर को मॉडर्न टच दे सकते हैं.
* डिफरेंट शेप की चेयर को आप कॉर्नर पीस की तरह भी यूज़ कर सकते हैं. इससे आपके रूम का कोना तो हाइलाइट होगा ही, साथ ही चेयर की शेप भी अट्रैक्शन का कारण बनेगी.

 

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* रॉयल लुक के लिए एंटीक चेयर यूज़ करें. बड़े आकार की, नक्काशी की हुई और रॉयल टच लिए हुए सिंगल चेयर पूरे रूम को रॉयल लुक देने के लिए काफ़ी है. आप चाहें, तो अपनी ज़रूरत के हिसाब से चेयर्स की संख्या चूज़ कर सकते हैं.
* चेयर्स में सबसे ज़रूरी होता है उनका बैक. कंफर्टेबल होने के साथ-साथ वो अट्रैक्टिव भी होना चाहिए.
* ओपन बैक चेयर लाइट व मॉडर्न फील देता है, जबकि सॉलिड बैक स्ट्रेंथ और प्रेज़ेंस का एहसास कराता है.
* चेयर के कवर्स, कुशन्स और स्लिप कवर्स के कलर व फैब्रिक से भी डेकोर को अलग बनाया जा सकता है.
* अगर आपको कोई कलर बेहद पसंद है और आप उसे अपने डेकोर का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो वॉल्स या पेंट कलर बदलने की बजाय उस कलर को चेयर के कुशंस के लिए सिलेक्ट कर लें.

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* सीटिंग अरेंजमेंट को मॉडर्न लुक देने के लिए मॉडर्न स्टाइल की वुडन चेयर्स को शामिल करें.
* डायनिंग चेयर्स सिलेक्ट करते समय भी इस बात का ध्यान रखें कि वो आपके डेकोर को कॉम्प्लीमेंट करे.