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वास्तु के अनुसार कैसा हो मुख्यद्वार (Vastu Tips For Home’s Main Door)

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घर के हर कमरे में वास्तु के नियमों का पालन कर के किस तरह सुख, शांति, समृद्धि के साथ-साथ उत्साह, उमंग और उल्लास का माहौल बनाया जा सकता है, आइए, जानते हैं.

प्रवेशद्वार

घर में सुख-शांति, समृद्धि, धन-वैभव व ख़ुशहाली चाहते हैं तो मुख्यद्वार बनवाते समय वास्तु के कुछ नियमों का पालन करें और घर को नकारात्मक ऊर्जा से बचाएं.

* प्रमुख प्रवेश द्वार अत्यंत सुशोभित होना चाहिए. इससे प्रतिष्ठा बढ़ती है.

* प्रमुख प्रवेश द्वार अन्य दरवाज़ों से ऊंचा और बड़ा भी होना चाहिए यानी घर के मुख्यद्वार का आकार हमेशा घर के भीतर बने अन्य दरवाज़ों की तुलना  में बड़ा होना चाहिए. वास्तु के अनुसार 4ु8 का मुख्यद्वार सर्वोत्तम होता है.

* बड़े शहरों में इतना बड़ा मुख्यद्वार बनाना संभव नहीं होता. ऐसे में इसका आकार 3ु7 भी रखा जा सकता है.

* अगर मुख्यद्वार किसी कारण से घर के अन्य दरवाज़ों से छोटा बन गया हो और उसे बदलना संभव न हो, तो उसके आसपास एक ऐसी फोकस लाइट  लगाएं, जिसका प्रकाश मुख्यद्वार और वहां से प्रवेश करने वालों के चेहरों पर पड़े.

* तोरण बांधने से देवी-देवता सारे कार्य निर्विघ्न रूप से सम्पन्न कराकर मंगल प्रदान करते हैं.

* कम्पाउंड वॉल के पूर्व और उत्तर की तरफ़ मेन गेट होने से समृद्धि और ऐश्‍वर्य मिलता है.

* दरवाज़े जहां तक हो अंदर की ओर ही खुलने चाहिए. बाहर खुलने से हर कार्य में बाधा व धीरे-धीरे धनहानि होकर धनाभाव शुरू हो जाता है.

* घर का कोई भी द्वार धरातल से नीचा न हो.

* नैऋत्य और वायव्य कोण में द्वार न बनवाएं.

* द्वार स्वतः खुलने या बन्द होने वाला नहीं होना चाहिए एवं खोलते या बंद करते समय किसी भी प्रकार की आवाज़ नहीं होनी चाहिए.

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* यदि किसी भवन में एक ही मुख्यद्वार बनवाना हो, तो पूर्व अथवा उत्तर दिशा में मुख्यद्वार बनवाएं. इससे शुभ फल मिलेगा.

* यदि घर दक्षिणमुखी या पश्‍चिममुखी है तो उसमें प्रवेशद्वार एक ही बनवाएं. साथ ही द्वार के बाहर गणेशजी की मूर्ति लगाएं.

* कभी भी नैऋत्य कोण में मुख्यद्वार न बनवाएं.

* वास्तु के अनुसार घर का मुख्यद्वार हमेशा दो पल्ले का होना चाहिए.

* घर के प्रवेशद्वार के आसपास किसी तरह का अवरोध नहीं होना चाहिए, जैसे बिजली के खंभे, कोई कांटेदार पौधा आदि.

* मुख्यद्वार के सामने डस्टबिन यानी कचरे का डिब्बा न रखें. साथ ही प्रवेशद्वार के आसपास सफ़ाई का भी पूरा ध्यान रखें.

* मुख्यद्वार के पास तुलसी का पौधा रखें. इससे वास्तु दोष दूर होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती.

* इसके अलावा मुख्यद्वार पर जल से भरा कलश रखने से कई तरह की व्याधि घर के बाहर ही रह जाती है.

* निम्न कोटि के स्थान पर मुख्यद्वार कभी न बनवाएंं, वरना घर में रहनेवाले कई रोगों व परेशानियों के शिकार हो जाते हैं.

* मकान की चौखट या मुख्यद्वार हमेशा लकड़ी का बना होना चाहिए. मकान के भीतर के बाकी दरवाज़ों के फ्रेम लोहे के हो सकते हैं.

* मुख्यद्वार से अंदर प्रवेश करने पर बाईं ओर कुछ भी न रखें. इससे मुख्यद्वार से घर में वायु का प्रवाह सही तरीके से नहीं होगा. अक्सर लोग यहां शू  रैक रखते हैं. ऐसा न करें.

मुख्यद्वार में दिशाओं का महत्व

* यदि घर का मुख्यद्वार उत्तर दिशा में हो तो उस घर में रहनेवालों के पास रुपए-पैसों की कमी कभी नहीं होती. सफलता हमेशा इनके क़दम चूमती है.

* पूर्व दिशा में मुख्यद्वार हो तो नाम, यश, सुख, क़ामयाबी तो मिलती ही है, साथ ही वंशवृद्धि भी होती है.

* अगर मुख्यद्वार दक्षिण दिशा में हो तो यहां रहनेवालों के पास न तो धन-दौलत रहती है और न ही स्वास्थ्य.

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किन दिशाओं का क्या प्रभाव

पूर्व ईशान- सुख-समृद्धि, वंश वृद्धि एवं गृहस्वामी यशस्वी बनेंगे.

पूर्व- ऐश्‍वर्य की प्राप्ति तथा संतान की क़ामयाबी.

पूर्व आग्नेय- पुत्र कष्ट व अग्नि-भय.

दक्षिण आग्नेय- गृहिणी अस्वस्थ एवं भय की शिकार.

दक्षिण- स्त्रियों को मानसिक बीमारियां, आर्थिक तथा शारीरिक तकली़फें.

दक्षिण नैऋत्य- महिलाएं अधिक अस्वस्थ, कर्ज व चरित्रहीनता.

पश्‍चिम नैऋत्य- घर के मुख्य व्यक्ति को कष्ट, दुर्घटना, निराशा तथा पुरुष का चरित्रहीन होना.

पश्‍चिम- धन लाभ, पूजा-पाठ, अध्यात्म के प्रति रुचि एवं पुरुषों की अस्वस्थता.

पश्‍चिम वायव्य- पुरुषों को आर्थिक कष्ट, अकारण शत्रुता, कोर्ट-कचहरी के झगड़े एवं मति भ्रम.

उत्तर वायव्य- महिलाओं का सुख-शान्ति से वंचित होकर घर से बाहर अधिक रहना.

उत्तर- धन लाभ, मान-सम्मान, सुख तथा ख़ुशियों की प्राप्ति.

उत्तर ईशान- सुख-समृद्धि का लाभ, परिवार सुख-सम्पन्न तथा वंश वृद्धि.

वास्तु के मध्य केंद्र- भयंकर आर्थिक एवं मानसिक कष्ट.

किचन अप्लायंसेस की सफ़ाई के ईज़ी ट्रिक्स (Kitchen Appliances Easy Cleaning Tricks)

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आपकी ज़िंदगी आसान बनाने वाले किचन अप्लायंसेस(Kitchen Appliances) की यदि सही तरह से देखभाल व सफ़ाई न की जाए, तो वो जल्दी ख़राब हो सकते हैं. अपने किचन अप्लायंसेस को लॉन्ग लास्टिंग बनाने के लिए कैसे करें उनकी सफ़ाई? आइए, हम बताते हैं.

माइक्रोवेव
खाना गरम करने के साथ ही कम समय में टेस्टी-हेल्दी खाना बनानेवाले माइक्रोवेव की साफ़-सफ़ाई पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत होती है.

यूं करें सफ़ाई
* इस्तेमाल के बाद माइक्रोवेव को अंदर से अच्छी तरह साफ़ कर लें.
* सफ़ाई के लिएमाइक्रोवेव अवन क्लीनर का इस्तेमाल करें.
* डोर का ख़ास ख़्याल रखें, क्योंकि ये माइक्रोवेव के अंदर की एनर्जी को सुरक्षित रखता है.
* माइक्रोवेव की ठीक से सफ़ाई के लिए इसमें रातभर थोड़ा अमोनिया भरकर रखें और सुबह किसी सॉफ्ट कपड़े से पोंछ दें.
* माइक्रोवेव के किनारों की सफ़ाई के लिए एक कप पानी में नींबू का टुकड़ा डालकर ऑन कर दें. भाप बनने के साथ ही किनारों की गंदगी भी पिघल जाएगी, जिसे आसानी से साफ़ किया जा सकता है.

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हैंडल विद केयर
* माइक्रोवेव में हमेशा ऐसे बर्तन का ही इस्तेमाल करें, जिन पर माइक्रोवेव सेफ लिखा हो.
* माइक्रोवेव से सामान बाहर निकालते समय ग्लव्स पहनें या कपड़े से पकड़कर बाहर निकालें.
* माइक्रोवेव में पॉपकॉर्न बनाते समय अवन के पास ही खड़ी रहें. कभी तापमान ज़्यादा होने से अवन के अंदर आग पकड़ने का ख़तरा रहता है.


फ्रिज

फल, सब्ज़ियों और खाने को सुरक्षित रखने वाले फ्रिज को हफ़्ते में कम से कम एक बार अच्छी तरह साफ़ ज़रूर करना चाहिए.

यूं करें सफ़ाई
* फ्रिज की सफ़ाई के लिए बेकिंग सोडा और पानी के मिश्रण का इस्तेमाल करें.
* ऊपर से लेकर नीचे तक सभी शेल्फ और सर्फेस को साबुन वाले पानी से साफ़ करें. साथ ही जार व बोतलों को भी साफ़ करके फ्रिज में रखें.
* साफ़ करने के बाद आधे घंटे के लिए फ्रिज को खुला छोड़ दें. फिर रूई में वेनीला एसेंस लगाकर फ्रिज में रखें और आधे घंटे के लिए बंद कर दें. इससे फ्रिज से आनेवाली दुर्गंध से छुटकारा मिल जाएगा.
* हर 6 महीने में फ्रिज के पिछले हिस्से की सफ़ाई भी ज़रूरी है.

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हैंडल विद केयर
* फ्रिज में गरम खाना न रखें. इससे फ्रिज ख़राब हो सकता है.
* फ्रिज में रखी हुई सब्ज़ियों को 1 हफ़्ते के अंदर ही इस्तेमाल करें.
* फ्रिज को कभी भी गैस चूल्हा, हीटर आदि के पास न रखें और न ही नमी व सीलन वाली जगह पर रखें.
* फ्रिज को हमेशा हवादार जगह पर रखें. फ्रिज और दीवार के बीच 5 इंच की दूरी ज़रूरी है.

 

मिक्सर ग्राइंडर
मिक्सर-ग्राइंडर हर किचन की ख़ास ज़रूरत है, क्योंकि ये आपकी कुकिंग को आसान बनाता है और काफ़ी वक़्त भी बचाता है, इसलिए आपको भी इसकी सफ़ाई का ख़ास ध्यान रखना होगा.

यूं करें सफ़ाई
* कुछ भी पीसने के बाद तुरंत मिक्सर को धो लें.
* ब्लेड निकालकर साबुन के पानी से मिक्सर की अच्छी तरह सफ़ाई करें. मिक्सर को धूप में अच्छी तरह सुखाकर रखें.
* मिक्सर में चिकनाई ज़्यादा होने या फिर कोई चीज़ चिपक जाने पर सूजी या सेंकी हुई ब्रेड डालकर चलाएं, मिक्सर साफ़ हो जाएगा.

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हैंडल विद केयर
* मिक्सर में बहुत ज़्यादा गरम चीज़ न पीसें.
* मिक्सर को लगातार न चलाएं. 15-20 मिनट के बाद थोड़ा ब्रेक दें.
* कुछ भी पीसते समय मिक्सर के ढक्कन के ऊपर हाथ रखें.
* मिक्सर को आधे से ज़्यादा न भरें, वरना मोटर पर ज़्यादा लोड पड़ेगा.
* गीली चीज़ें जैसे चटनी आदि पीसने के बाद थोड़ा पानी डालकर मिक्सर चलाएं इससे ब्लेड के आस-पास चिपका सारा पदार्थ निकल जाएगा.
* मिक्सर यूज़ करने के बाद हमेशा प्लग निकाल दें, वरना लगातार इलेक्ट्रिक सप्लाई होने से मिक्सर की क्षमता पर असर पड़ेगा.

इलेक्ट्रिक केटल
इलेक्ट्रिक केटल का इस्तेमाल करके आप मिनटों में चाय/कॉफी का लुत्फ़ उठा सकती हैं. इलेक्ट्रिक केटल्स के ज़रिए आप गरम-गरम सूप एवं हॉट चॉकलेट का मज़ा भी ले सकती हैं, मगर इस्तेमाल के साथ ही इसकी अच्छी तरह सफ़ाई भी ज़रूरी है.

यूं करें सफ़ाई
* केटल के बाहरी और निचले हिस्से को गीले कपड़े से साफ़ करें.
* केटल को अंदर से साफ़ करने के लिए इसमें थोड़ा-सा डिटर्जेंट व पानी डालें. इसे ग़लती से भी डिशवॉशर में न डालें.
* केटल के अंदर जमी गंदगी साफ़ करने के लिए इसमें पानी और व्हाइट विनेगर समान मात्रा में डालकर गरम करें. अब पूरी तरह ठंडा होने पर पानी फेंक दें. फिर स्पंज से अंदर से अच्छी तरह साफ़ करके केटल को साफ़ कपड़े से पोंछ लें.
* जब केटल का इस्तेमाल नहीं करना हो, तो उसे सुखाकर रख दें.

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हैंडल विद केयर
* खाली केटल को कभी गरम न करें.
* इसे किसी खुरदरी चीज़ से न रगड़ें/साफ़ करें.
* केटल में उतना ही पानी भरें, जितनी ज़रूरत हो. इससे बिजली और समय दोनों की बचत होगी.
* इस्तेमाल करने के बाद केटल को खाली कर दें. इसमें पानी भरकर न छोड़ें.
* केटल को महीने में कम से कम एक बार नींबू या विनेगर से साफ़ करें.
* केटल को हमेशा साफ़ रखें. गंदे केटल में पानी गरम होने में ज़्यादा व़क्त लगता है.

टोस्टर
बिज़ी लाइफ में झटपट ब्रेकफास्ट बनाने के लिए टोस्टर बेस्ट ऑप्शन है.

यूं करें सफ़ाई
* ठंडा होने पर ही टोस्टर की सफ़ाई करें.
* इसके बाहरी हिस्से को गीले कपड़े से पोंछें. अंदर की सफ़ाई के लिए क्रम्ब ट्रे को निकालकर साबुन के पानी में धोएं. यदि आपके टोस्टर में क्रम्ब ट्रे नहीं है, तो टोस्टर को उल्टा करके हिलाएं.
* टोस्टर के अंदर फंसे ब्रेड के टुकड़े निकालने के लिए पतले ब्रश का इस्तेमाल करें.

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हैंडल विद केयर
* सफ़ाई करने के पहले इसका प्लग निकालना न भूलें.
* टोस्टर साफ़ करते समय ध्यान रखें कि इसके वायर को नुक़सान न पहुंचे.
* प्लग लगा होने पर टोस्टर को गीला करने की ग़लती न करें. इससे शॉक लग सकता है.

हैंड ब्लेंडर
मथने और फेंटने के काम को और आसान बनाने के लिए किचन में हैंड ब्लेंडर होना ज़रूरी है.

यूं करें सफ़ाई
* हैंड ब्लेंडर के सभी पार्ट्स को अलग कर लें. फिर गुनगुने पानी में थोड़ा-सा डिटर्जेंट डालकर जार और बाकी पार्ट्स (रबड़, कटिंग ब्लेड, लॉकिंग रिंग) की सफ़ाई करें.
* यदि ब्लेंडर में कोई खाद्य पदार्थ चिपक (सूख) गया है, तो बेकिंग सोडा और पानी की समान मात्रा डालकर ब्लेंडर चलाएं. फिर खाली करके सभी पार्ट्स अलग करें और ब्लेंडर को अच्छी तरह साफ़ करें.
* ब्लेंडर के बेस (मोटर) को गीले कपड़े से पोंछ दें. इसे पानी में डुबोने की ग़लती न करें.
* साफ़ करने के बाद ब्लेंडर के सभी पार्ट्स को अच्छी तरह सुखा लें. फिर स्टोर करें या दुबारा यूज़ करें.

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हैंडल विद केयर
* ब्लेड चेंज और सफ़ाई करने के पहले ब्लेंडर को अनप्लग करना न भूलें.
* ब्लेंडर यूज़ करते समय कटिंग एरिया और ब्लेड पॉइंट को हमेशा ख़ुद से दूर रखें, वरना ब्लेंडर आपके कपड़े, ज्वेलरी और उंगली भी खींच सकता है.
* लगातार इस्तेमाल करते रहने से ब्लेड की धार कम हो जाती है, इसलिए हमेशा इसमें धार कराती रहें.

जूसर
अपने पूरे परिवार के लिए फ्रेश और हेल्दी जूस बनाइए स्मार्ट जूसर से और अपना क़ीमती वक़्त भी बचाइए.

यूं करें सफ़ाई
* इस्तेमाल के तुरंत बाद जूसर को धो लें, वरना पल्प आदि इसमें चिपक जाएंगे. धोने के लिए गुनगुने पानी और डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें.
* जूसिंग स्क्रीन में आमतौर पर पल्प चिपक जाते हैं. इसे साफ़ करने के लिए ब्रश का उपयोग करें.
* जूसर के अलग होनेवाले पार्ट्स को आप डिशवॉशर में भी डाल सकती हैं, लेकिन पहले मैन्युअल ज़रूर देख लें.
* यदि आप बहुत ज़्यादा फल व सब्ज़ियों का जूस बनाती हैं, तो जूसर में थोड़ा पानी डालकर चला लें. इससे जूसर में चिपका पल्प आसानी से निकल  जाएगा.

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हैंडल विद केयर
* यदि आप दिन में 1 बार से ज़्यादा जूसर का इस्तेमाल करती हैं, तो हर बार उसके पार्ट्स अलग करके धोने की ज़रूरत नहीं है. बस, उसे पानी से धो लें और आख़िरी बार इस्तेमाल के बाद साबुन वाले पानी/डिटर्जेंट से धोएं.
* फल/सब्ज़ियों के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर जूसर में डालें.
* स्टोर करने से पहले जूसर को अच्छी तरह सुखा लें.

 

डिशवॉशर
माइक्रोवेव और फ्रिज की तरह अब डिशवॉशर भी हर किचन की ज़रूरत बनता जा रहा है. कामकाजी महिलाएं इसे ज़्यादा महत्व दे रही हैं, क्योंकि इसने उनकी ज़िंदगी आसान बना दी है.

यूं करें सफ़ाई
* रोज़ाना इस्तेमाल करने पर इसे अंदर से साफ़ करने की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन हफ़्ते में एक बार यूज़ करने पर इसके अंदर से आनेवाली बदबू दूर करने के लिए इसे ग्लिस्टेन डिशवॉशर क्लीनर और डियोडराइज़र से साफ़ करें.
* बाहर से इसे डिटरजेंट से साफ़ करें.
* छोटे ब्रश की मदद से पहले डिशवॉशर के दरवाज़े की सफ़ाई करें, फिर धीरे-धीरे अंदर की जाली साफ़ करें.
* कई डिशवॉशर में फिल्टर लगे होते हैं. इन्हें समय-समय पर साफ़ करती रहें.
* डिशवॉशर के स्प्रे आर्म के छोटे-छोटे होल्स को ब्रश से साफ़ करें.
* निचले रैक को निकालकर ड्रेन एरिया को अच्छी तरह साफ़ करें और देखें कि कहीं कोई सख़्त चीज़ तो नहीं फंसी है, क्योंकि इससे ड्रेन ब्लॉक हो जाएगा. ब्लॉक होने की स्थिति में पंप को नुक़सान पहुंच सकता है. साथ ही बर्तनों में भी खरोंच लग सकती है.

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हैंडल विद केयर
* हर बार डिशवॉशर का इस्तेमाल करने के बाद फिल्टर को तुरंत साफ़ कर दें. इससे इस्तेमाल करते समय ब्लॉकेज की समस्या नहीं आएगी.
* डिशवॉशर के अंदर से ज़ंग के दाग़ हटाने के लिए रस्ट रिमूवर का इस्तेमाल करें.
* डिशवॉशर से चिकनाई और दुर्गंध दूर करने के लिए उसमें एक कप व्हाइट विनेगर और गरम पानी डालकर चलाएं. इस बात का ध्यान रखें कि विनेगर वाले कप के अलावा उसमें कोई और बर्तन न हो.

 

– कंचन सिंह

होम डेकोर से घर में लाएं पॉज़ीटिव एनर्जी (How to bring positive energy into home Decor)

घर की पॉज़ीटिव व निगेटिव एनर्जी का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है. पॉज़ीटिव एनर्जी जहां हमें ऊर्जावान बनाने के साथ-साथ चुस्त-दुरुस्त बनाए रखती है, वहीं निगेटिव एनर्जी से घर में तनाव का माहौल बना रहता है और वहां रहनेवालों की तबीयत भी ख़राब रहती है. पर कुछ छोटे-छोटे बदलावों से आप घर की निगेटिव एनर्जी को दूर कर पॉज़ीटिव एनर्जी ला सकते हैं.

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बेसिक टिप्स

* पॉज़ीटिव एनर्जी को आकर्षित करने के लिए सबसे ज़रूरी है, घर को साफ़-सुथरा व व्यवस्थित रखना, क्योंकि कबाड़, पुराना सामान और टूटी-फूटी  चीज़ें निगेटिव एनर्जी पैदा करती हैं.

* हर हफ़्ते या 15 दिन में पूरे घर की सफ़ाई करें. घर में धूल-मिट्टी इकट्ठा न होने दें.

* पॉज़ीटिव एनर्जी को फ्लो होने के लिए खाली जगह की ज़रूरत होती है, इसलिए घर में खुली जगह बनाएं, ताकि पॉज़ीटिव एनर्जी ज़्यादा से ज़्यादा घर  में आ सके.

* घर की खिड़कियां खुली रखें, ताकि ताज़ी हवा के साथ-साथ पॉज़ीटिव एनर्जी भी घर में आ सके.

* भले ही आपको पुरानी चीज़ें इकट्ठा करने का शौक़ है, फिर भी ज़रूरत की चीज़ें रखकर ग़ैरज़रूरी पुरानी रद्दी और मैग्ज़ीन को समय-समय पर  निकालते रहें.

* फर्नीचर को री-अरेंज करें. फर्नीचर एक जगह से दूसरी जगह खिसकाने से वहां पर जमा निगेटिव एनर्जी बिखरकर बाहर निकल जाती है.

* घर में इनडोर प्लांट्स और बालकनी में रंग-बिरंगे फूलोंवाले प्लांट्स लगाएं. प्लांट्स घर में कलर, ऑक्सीजन, ताज़ी हवा और पॉज़ीटिव एनर्जी
बढ़ाते हैं.

* घर में टॉक्सिक और केमिकलयुक्त चीज़ों की बजाय इको-फ्रेंडली, नॉन-टॉक्सिक और होममेड सोल्यूशन्स का  इस्तेमाल करें.

* ज़्यादा से ज़्यादा प्राकृतिक चीज़ों का इस्तेमाल करें. कोशिश करें कि ज़्यादातर चीज़ों को रिसाइकल कर इस्तेमाल करें.

* बैम्बू, कॉर्क, हार्डवुड जैसे प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करें. फ्लोरिंग के लिए नेचुरल फाइबर कारपेट बेहतरीन माना जाता है.

* पेंट में मौजूद वोलाटाइल ऑर्गैनिक कम्पाउंड्स (वीओसी) जैसे टॉक्सिक तत्वों के कारण सिरदर्द, एलर्जी और पाचन संबंधी समस्याएं घेर लेती हैं.  इसलिए घर को टॉक्सिन फ्री रखने के लिए लो वीओसी वाले पेन्ट्स, ग्लू, फिनिशेज़ का इस्तेमाल करें.

* लाइटिंग आपके घर की एनर्जी को काफ़ी हद तक प्रभावित करती है. जहां घर में मौजूद सही रोशनी से आप ऊर्जावान महसूस करते हैं, वहीं हल्की या  डिम लाइट आपको डल व डिप्रेस्ड फील कराती है.

* घर में सही लाइटिंग अरेंजमेंट करें. सीएफएल की बजाय एलईडी लाइट्स इस्तेमाल करें. सीएफएल लाइट्स में मौजूद टॉक्सिक तत्व हमारे स्वास्थ्य  और पर्यावरण दोनों के लिए ख़तरनाक साबित हो सकते हैं.

* ख़ुशबू घर में मौजूद निगेटिव एनर्जी को ख़त्म कर पॉज़ीटिव एनर्जी पैदा करती है. इसलिए लैवेंडर, मिंट और नीलगिरी युक्त ख़ुशबूदार कैंडल्स हर  कमरे में जलाएं.

* लिविंग रूम में रोज़ाना ताज़े फूल लगाएं. फूल रंग, ख़ुशबू और पॉज़ीटिव एनर्जी को अट्रैक्ट करते हैं.

* धार्मिक कारणों के अलावा घरों में ख़ुशबूदार अगरबत्ती और धूप जलाने के पीछे पॉज़ीटिव एनर्जी बढ़ाने का ही उद्देश्य होता है.

* घर के हर कमरे में पांचों तत्वों से जुड़े रंग- काला, हरा, लाल, पीला और स़फेद ज़रूर रखें. ये आपकी शारीरिक एनर्जी को बैलेंस करते हैं और घर में  निगेटिव को हटाकर पॉज़ीटिव एनर्जी बैलेंस करते हैं.
* प्रकृति को क़रीब से देखकर हम अपने सारे दुख-दर्द भूल जाते हैं. अपने घर में भी प्रकृति की झलक लाने के लिए नेचर पेंटिंग्स लगाएं.

* मिरर्स एनर्जी को बढ़ाते हैं, इसलिए घर के उन हिस्सों में इन्हें लगाएं, जहां आप ज़्यादा एनर्जी क्रिएट करना चाहते हैं. इन्हें टॉयलेट या डस्टबिन के  सामने न लगाएं, वरना निगेटिव एनर्जी बढ़ेगी.

* घर में बाथरूम और टॉयलेट में सबसे ज़्यादा निगेटिव एनर्जी रहती है, इसलिए इन्हें हमेशा साफ़ रखने के साथ ही इनके दरवाज़े बंद रखें, ताकि  निगेटिव एनर्जी घर के बाकी हिस्सों में फैल न सके.

* घर का माहौल सौहार्दपूर्ण बनाए रखें, क्योंकि तनाव, झगड़े और अपशब्दों से निगेटिव एनर्जी पनपती और बढ़ती है.

* घर में रोज़ाना मंत्रों का उच्चारण घर में पॉज़ीटिव एनर्जी को बढ़ाता है.

* मेडिटेशन से घर में पावरफुल पॉज़ीटिव वाइब्रेशन्स बढ़ती हैं. मेडिटेशन के कई घंटों बाद भी उस स्थान पर पॉज़ीटिव एनर्जी बरकरार रहती है.

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रंगों से लाएं पॉज़ीटिव एनर्जी आप रंगों के ज़रिए भी अपने घर में पॉज़ीटिव एनर्जी ला सकते हैं.

सफ़ेद: यह रंग स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए बेहद आसानी से पॉज़ीटिव एनर्जी अट्रैक्ट करता है. स़फेद रंग को पेंट के रूप में दीवारों पर या होम एक्सेसरीज़ में इस्तेमाल कर सकते हैं.

लाल: यह रंग पॉज़ीटिव एनर्जी के साथ-साथ सौभाग्य और सफलता को भी आकर्षित करता है, इसलिए दरवाज़े पर लाल फूलोंवाला कोई प्लांट लगाएं या फिर लाल तोरण या डोरमैट लगाएं. पेंट करना है, तो इसे आप लिविंग रूम, डाइनिंग रूम, किचन, जिम आदि में इस्तेमाल कर सकते हैं. यह बहुत पावरफुल कलर है, इसलिए इसे बेडरूम में इस्तेमाल न करें. अगर आपको एनीमिया है या फिर आप थके हुए या लो फील करते हैं, तो अपने कमरे में किसी हल्के रंग के साथ इसका प्रयोग करें.

ऑरेंज: इसे ऑप्टिमिस्टिक ऑरेंज भी कहते हैं, क्योंकि यह रंग घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. यह उत्साह-उमंग, प्रसन्नता और
उत्पादकता का प्रतीक है. ऑरेंज लाल और पीले रंग का मिश्रण है, इसलिए इन दोनों रंगों के गुण मौजूद होते हैं. यह आपको उत्साही व ज़िंदादिल बनाता है. आपके लिविंग रूम और बच्चों के प्ले ज़ोन के लिए यह एकदम सही चुनाव है.

पर्पल: घर के किसी कमरे में शांत व सुकूनभरा माहौल लाने के लिए आप पर्पल रंग का इस्तेमाल कर सकते हैं. बेडरूम या मेडिटेशन रूम में यह रंग आपको शांति का एहसास कराता है. पर्पल के लाइट शेड्स लैवेंडर या वॉयलेट कलर्स से दीवारों को पेंट करें.

पिंक: यह रंग शांति, स्थिरता और निश्‍चिंतता का प्रतीक है. इतना ही नहीं, यह आपके माहौल में पॉज़ीटिव एनर्जी का संचार भी करता है. अगर आपको सोने में तकलीफ़ होती है, तो अपने बेडरूम को पिंक के लाइट शेड कलर से पेंट करें.

पीला: यह रंग सभी क्रियाओं का सेंटर माना जाता है, क्योंकि सूरज ब्रह्मांड का सेंटर और पॉज़ीटिव एनर्जी का सबसे बड़ा स्रोत है. इसके अलावा यह मूड लिफ्टिंग कलर भी माना जाता है. वैसे तो यह सभी कमरों के लिए बेहतरीन है, पर ज़्यादातर लोग इसे लिविंग रूम में लगाते हैं, ताकि वहां का माहौल हमेशा ख़ुशगवार रहे.

हरा: हरे रंग में हीलिंग पावर है. यह आपके स्ट्रेस को कम करने में भी आपकी मदद करता है. इसकी रेस्टफुल और बैलेंसिंग क्वालिटीज़ इसे लिविंग रूम और बेडरूम के लिए पॉप्युलर बनाती हैं.

नीला: यह निगेटिव इमोशन्स को कम करके आपको स्ट्रेस और टेंशन से बचाता है. अगर आपको बहुत ज़्यादा मूड स्विंग्स होते हैं, तो सभी दीवारों पर ब्लू न लगाएं. वैसे तो यह सभी कमरों के लिए उपयुक्त है, इसलिए इसे आप अपने किसी भी पसंदीदा कमरे में लगा सकते हैं.

एनर्जी बूस्टर टिप्स

* घर की निगेटिव एनर्जी को दूरकर पॉज़ीटिव एनर्जी लाने के लिए समुद्री नमक को एक बाउल में रखें या फिर एक बाल्टी पानी में 4-5 टेबलस्पून  नमक डालकर घर में पोंछा लगाएं.

* घंटी की आवाज़ निगेटिव एनर्जी को घर से दूरकर पॉज़ीटिव एनर्जी और वाइब्रेशन्स बढ़ाती है, जिससे घर में रहनेवालों का मूड हमेशा अच्छा
रहता है.

* निगेटिव एनर्जी के कारण भी अक्सर लोगों को सुकून की नींद नहीं आती. ऐसे में रात को सोते व़क्त एसेंशियल ऑयल युक्त कैंडल्स जलाएं. सुकूनभरी  नींद के साथ-साथ आपकी सुबह भी ख़ुशगवार होगी.

* म्यूज़िक में बहुत पॉज़ीटिव एनर्जी होती है, इसलिए दिन में 2-3 बार म्यूज़िकल सीडी प्ले करें और घर में पॉज़ीटिव एनर्जी बढ़ाएं.

– सुनीता सिंह

वास्तु में दिशाओं का महत्व (Directions in architectural significance)

architectural significance

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वास्तु से जीवन में ख़ुशहाली लाने के लिए सबसे पहले दिशाओं का ज्ञान बेहद ज़रूरी है. दिशाओं के अनुसार ही घर का इंटीरियर डिज़ाइन कराएं, इससे काफ़ी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

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उत्तर दिशा
इस दिशा में भूमि तुलनात्मक रूप से नीची होनी चाहिए तथा बालकनी भी इसी दिशा में हो, तो बेहतर है. इसी तरह ज़्यादा से ज़्यादा दरवाज़े और खिड़कियां इसी दिशा में होने चाहिए. बरामदा, पोर्टिको, वॉश बेसिन आदि भी इसी दिशा में होने चाहिए. उत्तर में वास्तुदोष हो तो धन हानि या करियर में बाधाएं आती हैं. ऐसी स्थिति में घर में बुध यंत्र रखें, बुधवार को व्रत रखें और दीवारों पर हल्का रंग करवाएं.

उत्तर-पूर्व दिशा
इस दिशा को ईशान भी कहते हैं. इस दिशा में ज़्यादातर स्थान खुला होना चाहिए. पढ़ाई का कमरा, पूजास्थल, बोरिंग एवं स्विमिंग पूल आदि इसी दिशा में होने चाहिए. घर का मुख्य द्वार भी यदि इसी दिशा में हो तो बेहद शुभ माना जाता है. ईशान में वास्तुदोष हो तो द्वार पर रुद्र तोरण लगाएं, शिव उपासना करें तथा सोमवार का व्रत रखें.

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पूर्व दिशा
इस दिशा में खुला स्थान तथा प्रवेश द्वार हो, तो गृहस्वामी को लंबी उम्र, मान-सम्मान तथा संतान सुख मिलता है. इस दिशा में भूमि नीची होनी चाहिए. बरामदा, दरवाज़े, खिड़कियां बालकनी, पोर्टिको, वॉश बेसिन आदि इस दिशा में बनाए जा सकते हैैं. बच्चे भी इसी दिशा की तरफ मुंह करके पढ़ें तो विद्यालाभ होता है. पूर्व में वास्तु दोष हो तो सूर्य यंत्र की स्थापना करें, सूर्य को अर्घ्य दें, सूर्य की उपासना करें तथा पूर्वी दरवाज़े पर मंगलकारी तोरण लगाएं.

 

दक्षिण-पूर्व दिशा
इसे आग्नेय भी कहते हैं. इस दिशा में अग्नि से संबंधित कार्य करने चाहिए. किचन, ट्रांसफ़ॉर्मर, जनरेटर, बॉयलर आदि इसी दिशा में होने चाहिए. इसके अलावा नौकर का कमरा, टॉयलेट आदि भी इस दिशा में बनाए जा सकते हैं. इस दिशा में वास्तुदोष हो तो प्रवेश द्वार पर मंगलकारी यंत्र लगाएं, गणेश जी की पूजा करें, हरे रंग के गणपति दरवाज़े के अंदर-बाहर स्थापित करें.

 

 

दक्षिण दिशा
इस दिशा में खुलापन, किसी भी प्रकार के गड्ढे अथवा शौचालय आदि बिल्कुल भी नहीं होने चाहिए. यदि इस दिशा में भवन ऊंचा और भारी हो तो गृहस्वामी को सुखी, समृद्ध और निरोगी रखता है. इस दिशा में उत्तर की ओर मुख करके तिजोरी रखने से धन की बढ़ोत्तरी होती है. दक्षिण दिशा में यदि वास्तुदोष हो तो घर में या दरवाज़े पर मंगल यंत्र स्थापित करें, मंगलकारी तोरण या सूंड वाले गणपति दरवाज़े के बाहर स्थापित करें. हनुमान या भैरव की उपासना करें.

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उत्तर-पश्चिम दिशा
इसे वायव्य भी कह सकते हैं. इस दिशा में गोशाला, बेडरूम, गैरेज आदि बनाए जा सकते हैं. नौकर का कमरा भी इसी दिशा में होना चाहिए. वायव्य में यदि वास्तु दोष हो तो दरवाज़े के अंदर-बाहर श्‍वेत गणपति तथा श्री यंत्र की स्थापना करें. घर में चंद्र यंत्र लगाएं.

दक्षिण-पश्चिम दिशा
इस दिशा को नैऋत्य दिशा भी कहते हैं. परिवार के मुखिया का कमरा इसी दिशा में होना चाहिए, लेकिन भूलकर भी नौकर के रहने के लिए यह स्थान न चुनें. मशीनें, कैश कांउटर आदि इस दिशा में रखे जा सकते हैं. इस दिशा में खुलापन, जैसे- खिड़की, दरवाज़े आदि बिल्कुल नहीं होने चाहिए. नैऋत्य में वास्तुदोष हो तो घर में राहु यंत्र स्थापित करके पूजा करें, प्रवेश द्वार पर भूरे रंग के गणपति स्थापित करें.

पश्चिम दिशा
इस दिशा में भवन व भूमि तुलनात्मक रूप से ऊंची हो तो घर के लोगों को सफलता और कीर्ति मिलती है. भोजन कक्ष, टॉयलेट आदि इस दिशा में होने चाहिए. पश्चिम में वास्तुदोष हो तो घर में वरुण यंत्र की स्थापना करें तथा शनिवार का व्रत रखें.

 

स्मार्ट होम मैनेजमेंट आइडियाज़ (Smart Home Management Ideas)

Home Management

घर के हर कोने को साफ़ और व्यवस्थित रखना चाहती हैं, तो अपनाएं ये स्मार्ट होम मैनेजमेंट ट्रिक्स और कहलाएं स्मार्ट होम मैनेजर. Home Management 

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लिविंग रूम
* सबसे पहले तो लिविंग रूम को फर्नीचर और एंटीक चीज़ों से भरने की ग़लती न करें. जितना ज़रूरी है, उतने ही फर्नीचर और डेकोरेटिव पीसेस रखें.  इससे मैनेज करना आसान हो जाता है.

* सोफा कवर या पर्दे थोड़े डार्क कलर के सिलेक्ट करें. ये जल्दी गंदे नहीं लगते.

* अगर लाइट कलर इस्तेमाल कर रही हैं, तो बेहतर होगा कि सोफा कवर, पर्दे, कुशन कवर्स आदि के एक से ज़्यादा पेयर रखें, ताकि इसकी क्लीनिंग  आसान हो जाए.

* कई सारे फोटोफ्रेम्स की बजाय सारे फोटो का कोलाज बनाकर एक-दो फ्रेम लगाएं. इससे लिविंग रूम को क्लीन लुक मिलेगा.

* सोफे के पीछे की जगह को स्मार्टली यूज़ करें. एक्स्ट्रा ब्लैंकेट, कुशन्स, डेकोरेटिव आइटम्स को बक्से में भरकर सोफे के पीछे रख दें. एक्स्ट्रा बुक्स  को भी आप ट्रंक में भरकर यहां रख सकती हैं.

* अपना एंटरटेनमेंट कॉर्नर एक बार चेक करें. डीवीडी या सीडी का कलेक्शन चेक करें. जो मूवी आप देख चुके हैं और जिसका कलेक्शन आपको नहीं  रखना है, उसे हटा दें. गैरज़रूरी चीज़ों को घर में न रखें. इससे घर मैनेज करना आसान हो जाएगा और समय की भी बचत होगी.

* हर डेकोरेटिव आइटम या पीस को ये सोचकर सहेजती न जाएं कि इतने पैसे ख़र्च किए थे या अब कहां मिलेंगी ऐसी चीज़ें. इससे आपका घर एंटीक चीज़ों का स्टोर बन जाएगा और आपके लिए उन्हें मैनेज करना भी मुश्किल हो जाएगा. अगर नई चीज़ें घर में लाती हैं, तो पुरानी चीज़ों को हटाना ही पड़ेगा.

* यदि आपने लिविंग रूम में लोटस पॉन्ड, वास आदि रखे हैं, तो उसकी क्लीनिंग का ख़ास ख़्याल रखें. उसका पानी रोज़ाना बदलती रहें, ताकि  बीमारियां न पनपने पाएं.

* क़िताबों को शीशे की आलमारी में रखें. इससे क़िताबों को ढूंढ़ना आसान हो जाएगा. हां समय-समय पर इनकी सफ़ाई करना न भूलें.

* यह सोचकर सफ़ाई को टालती न रहें कि इकट्ठे ही सफ़ाई करेंगी. हर 15 दिन में सफ़ाई करती रहें. इससे जहां आपका घर हेल्दी बना रहेगा, वहीं क्लीन  भी लगेगा.

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किचन मैनेजमेंट

* जो चीज़ें अक्सर इस्तेमाल में आती हैं, उन्हें एक ही जगह रखें, ताकि उन्हें ढूंढ़ने में समय बर्बाद न हो.

* क्रॉकरी को भी उसके यूज़ के हिसाब से अरेंज करें. रोज़ाना या अक्सर यूज़ होनेवाली क्रॉकरी निचले शेल्फ में रखें और कभी-कभार होनेवाली क्रॉकरी  को ऊपर के शेल्फ में रखें.

* गैस के पास ही कुकिंग रेंज सेट करें जैसे कि मसालों, नमक, शक्कर के जार, कुकिंग पैन, कड़ाही आदि को गैस के पास के शेल्फ में ही रखें, ताकि  इस्तेमाल में आसानी हो.

* किचन में हर समय शॉपिंग लिस्ट लगाकर रखें. जैसे ही कोई चीज़ आउट ऑफ स्टॉक होती है, फ़ौरन उसे लिस्ट में शामिल कर लें. इससे आपको पता  रहेगा कि किचन में क्या चीज़ें नहीं हैं और अंतिम समय में होनेवाली भागदौड़ से आप बच जाएंगे.

* कई महिलाओं की आदत होती है कि कोई भी प्लास्टिक कंटेनर खाली होता है, तो उसे किचन में यूज़ करने लगती हैं. इससे किचन अन ऑर्गनाइज़्ड  तो लगता ही है, मेसी भी लगने लगता है. इसलिए बेहतर होगा कि प्लास्टिक कंटेनर्स का मोह छोड़ें और जितनी ज़रूरत हो, उतने ही कंटेनर्स रखें.

* फ्रिज को गैरज़रूरी चीज़ों का स्टोरेज युनिट न बनाएं. ख़राब हो चुकी सब्ज़ियों, बासी चीज़ों को रोज़ाना हटाती रहें. इससे फ्रिज आसानी से मेंटेन तो  होगा ही, आपके हेल्थ के लिए भी ये ज़रूरी है.

* किचन में साफ़-सफ़ाई का ख़ास ख़्याल रखें. एग्ज़ॉस्ट फैन ज़रूर लगवाएं. इससे किचन में धूल-मिट्टी कम जमती है और किचन क्लीन रहता है.

* किचन प्लेटफॉर्म के पास एक प्लास्टिक बैग टांगकर रखें और कुछ भी काटने के बाद कचरा उसमें ही डालें. ऐसा करने से किचन साफ़-सुथरा रहेगा.  साथ ही नैपकिन्स भी ज़रूर रखें. हाथ पोंछने के लिए सूखे तौलिए या हो सके तो डिस्पोज़ेबल पेपर नैपकिन का इस्तेमाल करें.

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बेडरूम

* बेडरूम के ड्रॉवर्स का इस्तेमाल अक्सर हम ग़ैरज़रूरी चीज़ों को स्टोर करने के लिए करते हैं और जब उन चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है, तो उन्हें ढूंढ़ने में  पूरा बेडरूम ही तहस-नहस कर देते हैं. इसलिए ऐसा करने से बचें. हर चीज़ के लिए एक जगह निर्धारित करें और उसे इस्तेमाल के बाद वहीं रखें.  इससे  आपका बेडरूम तो ऑर्गनाइज़ रहेगा ही, आपके समय की भी बचत होगी.

* बेड स़िर्फ सोने के लिए नहीं होते. इसके नीचे-ऊपर और आसपास की जगह को आप स्टोरेज के लिए स्मार्ट्ली यूज़ कर सकते हैं. लेकिन इसका ये  मतलब नहीं कि आप कहीं भी कुछ भी रख दें.

* इसके लिए आप कलरफुल स्टोरेज ट्रे और प्लास्टिक बिन लेकर आएं और इसमें सामान रखें. इसे आप बेड के नीचे या साइड में अच्छी तरह अरेंज  कर सकती हैं. इन ट्रे और प्लास्टिक बिन्स को समय-समय पर क्लीन करती रहें.

* बेडरूम के हर फर्नीचर यहां तक कि नाइट टेबल का सिलेक्शन करते समय भी स्टोरेज को ध्यान में रखें.

* छोटे घरों में ड्रेसिंग टेबल भी अक्सर बेडरूम में ही रखा जाता है. कॉस्मेटिक्स के लिए कलरफुल ट्रे यूज़ करें. ज्वेलरी और
एक्सेसरीज़ के लिए हैंगिंग ऑर्गेनाइज़र का इस्तेमाल करें. इसमें कई पॉकेट्स बने होते हैं और इसमें आपके ईयरिंग्स, ज्वेलरी, वॉचेस आदि अच्छे से  अरेंज हो जाते हैं.

* हर सुबह उठने के बाद नियम बनाएं कि पांच मिनट बेडरूम ऑर्गनाइज़ करने के लिए देंगे. सारे बेडशीट, पिलो, रजाई वगैरह फोल्ड करके रखें. कोई  चीज़ ग़ैरज़रूरी लगे, तो उसे हटा दें. इससे आपका बेडरूम हमेशा मैनेज रहेगा.

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वॉर्डरोब मैनेजमेंट

* हर सीज़न के बाद अपना वॉर्डरोब चेक करें. उसमें से जो भी कपड़े अगले सीज़न में इस्तेमाल में न आनेवाले हों, उन्हें वॉर्डरोब से हटा दें.

* जिन कपड़ों के बारे में तय नहीं कर पा रहे हैं कि पहनेंगे या  नहीं, उन्हें भी वॉर्डरोब से बाहर निकाल दें.
* इसी तरह जब भी नए कपड़े, खिलौने, बुक्स आदि ख़रीदें,  तो पुरानी और अनुपयोगी चीज़ों को निकाल दें. इससे  ग़ैरज़रूरी चीज़ों से घर भरा नहीं रहेगा और मैनेज करना भी  आसान हो जाएगा.

* हर सीज़न के कपड़े अलग-अलग रखें और एक सीज़न के  ख़त्म होते ही वो कपड़े अच्छी तरह से क्लीन करके पैक  करके रख दें, ताकि अगले सीज़न में आसानी से यूज़ कर  सकें. इससे आपका वॉर्डरोब क्लीन और मैनेजेबल हो  जाएगा.

* एक जैसे कपड़े, जैसे- शर्ट, सूट, वेस्टर्न वेयर, इंडियन वेयर, पार्टी वेयर आदि को वॉर्डरोब के एक हिस्से में रखें. इससे ज़रूरत पड़ने पर आपको पूरा वॉर्डरोब ढूंढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

* हैवी सूट्स, साड़ियां, बच्चों के हैवी कपड़े, जेंट्स सूट, जो कभी-कभार ही पहने जाते हैं, उन्हें सूटकेस में रख दें.

* कई पॉकेट वाले हैंगिंग प्लास्टिक बैग्स को भी वॉर्डरोब में लटका कर रख दें. इसमें आप ज्वेलरी, कॉस्मेटिक्स, एक्सेसरीज़ आदि रख सकती हैं.

* स्टोरेज स्पेस बढ़ाने के लिए ड्रॉवर्स बनवाएं. इनमें कपड़े मैनेज करना भी आसान होता है.

* कपड़ों को हमेशा आयरन करके ही वॉर्डरोब में रखें. इससे जहां वॉर्डरोब आर्गनाइज़्ड रहेगा, वहीं कपड़े भी अच्छी कंडीशन में रहेंगे.

* अच्छी क्वालिटी के हैंगर्स ख़रीदें और इन पर ही कपड़े रखें. इससे कपड़ों पर सिलवटें नहीं पड़ेंगी और उनमें जंग लगने की संभावना भी नहीं रहेगी.

 
कुछ काम की बातें

* ऐसी कोई चीज़, जो अच्छी कंडीशन में हो, पर आपके काम न आती हो, उसे फेंकने से अच्छा है किसी को दान कर दें.

* बिज़नेस या विज़िटिंग कार्ड्स को मैनेज करना मुश्किल होता है, इसलिए बेहतर होगा कि उसे फोन में सेव कर लें या डिजिटल कॉन्टैक्ट लिस्ट
बना लें.

* ज़रूरी पेपर्स और बिल्स को यहां-वहां रखने की बजाय उसे फाइल करने की आदत डालें. इससे उनके खोने का डर नहीं रहेगा और ज़रूरत पड़ने पर वो  आसानी से मिल भी जाएंगे.

घर को क्लीन लुक देने के लिए टूटी-फूटी, ख़राब हो चुकी और ग़ैरज़रूरी चीज़ों को तुरंत हटा दें, जैसे-

* एक्सपायर हो चुके फूड आइटम्स

* शॉपिंग, रेस्टोरेंट के बिल्स, जो ज़रूरी न हों

* टूटे हुए बेकार के इलेक्ट्रॉनिक या किचन अप्लायंसेस, गेम्स आदि

* पुराने कॉस्मेटिक्स, ज्वेलरी

* बच्चों के पुराने खिलौने

* ग़ैरज़रूरी कपड़े या अन्य सामान

कैसे बनाएं घर को बैक्टीरिया फ्री? ( How to create a bacteria-free home?)

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घर की सफ़ाई तो हम रोज़ाना करते हैं, पर क्या हमारा घर रोज़ाना जर्म फ्री हो पाता है. अच्छी सफ़ाई के बावजूद हम पूरे विश्‍वास से नहीं कह सकते कि हमारा घर 100% बैक्टीरिया फ्री है, क्योंकि घर में ऐसे कई बैक्टीरिया स्पॉट्स होते हैं, जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं. अगर हमें इनकी जानकारी हो, तो यक़ीनन हम अपने घर को बैक्टीरिया फ्री व हेल्दी बना सकते हैं.

किचन

हमेशा खाने-पीने की चीज़ों के कारण किचन में कीटाणुओं, जीवाणुओं और कीड़ों-मकोड़ों की संभावना सबसे ज़्यादा बनी रहती है.

बर्तन धोनेवाला स्पॉन्ज और किचन क्लॉथ: अगर इन्हें सही तरी़के से साफ़ व स्टोर न किया जाए, तो इनमें पनपते फंगस और असंख्य जीवाणु बर्तनों के ज़रिए हमारे शरीर में पहुंचकर हमें काफ़ी नुक़सान पहुंचा सकते हैं.
हेल्थ टिप: हर बार इस्तेमाल के बाद इसे सूखने के लिए रख दें. यह जितनी ज़्यादा देर गीला रहेगा, कीटाणु उतनी ही तेज़ी से फैलेंगे. स्पॉन्ज को आप माइक्रोवेव में रखकर सैनेटाइज़ कर सकते हैं.

कटिंग बोर्ड: रिसर्च की मानें, तो किचन के कटिंग बोर्ड पर किसी टॉयलेट सीट की तुलना में 20 गुना ज़्यादा कीटाणु होते हैं. इसलिए इसकी सफ़ाई पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत होती है.
हेल्थ टिप: फल-सब्ज़ियों और बाकी की सामग्री के लिए एक और मीट, चिकन, फिश आदि नॉन वेज के लिए अलग-अलग कटिंग बोर्ड रखें, ताकि क्रॉस कंटैमिनेशन न हो. नियमित रूप से एंटी बैक्टीरियल क्लीनर से क्लीन करें.

काउंटर्स: किचन काउंटर्स पर हमेशा कुछ न कुछ खाने का सामान गिरता रहता है, जिसके कारण फूड बैक्टीरिया और कीड़े-मकोड़े तेज़ी से बढ़ते हैं, जो अस्थमा व एलर्जी का कारण हो सकते हैं.
हेल्थ टिप: काउंटर को रोज़ाना साबुन से धोने के बाद पानी में 1 टीस्पून क्लोरीन ब्लीच डालकर साफ़ करें. कैबिनेट में मौजूद कंटेनर्स को अच्छी तरह से बंद करके रखें.

बर्तन रखने की ट्रॉली: भले ही बर्तनों को कितना भी चमका दें, लेकिन अगर बर्तन रखनेवाली जगह साफ़ व हाइजीनिक नहीं है, तो बर्तनों पर उनका सीधा असर पड़ेगा, जो हमारी हेल्थ को प्रभावित कर सकता है.
हेल्थ टिप: नियमित रूप से बर्तन रखनेवाली ट्रॉली को साफ़ व हाइजीनिक रखें. खाने के तुरंत बाद बर्तनों को धो-पोंछकर रख दें, सिंक में यूं ही पड़े न रहने दें.

डस्टबिन: बैक्टीरिया के पनपने और फैलने के लिए सबसे आम जगह है, लेकिन अगर ध्यान दिया जाए, तो इसे कीटाणुमुक्त रख सकते हैं.
हेल्थ टिप: डस्टबिन में हमेशा ब्लैक पॉलीथिन डालकर रखें. हर हफ़्ते डस्टबिन को साबुन के पानी से धोएं.

बाथरूम

बाथरूम मेें मौजूद नमी बैक्टीरिया को पनपने में काफ़ी मदद करती है, यही कारण है कि हमें बाथरूम को हमेशा सूखा रखने की कोशिश करनी चाहिए.

टॉयलेट हैंडल: टॉयलेट का हैंडल फ्लश करते व़क्त हमें यह ध्यान ही नहीं रहता कि इस हैंडल पर भी वायरस हो सकते हैं. दरअसल, बच्चों में डायरिया का एक बड़ा कारण रोटावायरस होता है, जो ज़्यादातर टॉयलेट हैंडल पर पाया जाता है.
हेल्थ टिप: टॉयलेट साफ़ करते समय इसे अनदेखा न करें. साबुन के अलावा एंटी बैक्टीरियल क्लीनर का इस्तेमाल भी करें.

फ्लोर से सीलिंग तक: हमेशा नमी होने के कारण बाथरूम में फंगस बहुत तेज़ी से फैलता है. इसके कारण आंख व नाक से पानी आने के साथ-साथ सांस संबंधी कई परेशानियां हो सकती हैं.
हेल्थ टिप: बाथरूम में हमेशा पानी भरकर न रखें. नहाने के तुरंत बाद बाल्टी को उल्टा करके रख दें और बाथटब को पोंछकर साफ़ कर दें. यदि शावर कर्टन्स का इस्तेमाल करते हैं, तो हर 15 दिन में इसे साफ़ करें.

सोप व टूथब्रश होल्डर: गीले साबुन और गीले टूथब्रश बैक्टीरिया को बहुत तेज़ी से आकर्षित करते हैं. कॉकरोच आपके टूथब्रश को जीवाणुओं से भर सकता है और अनजाने ही आप ओरल प्रॉब्लम्स के शिकार हो सकते हैं.
हेल्थ टिप: टूथब्रश पर कैप लगाकर और साबुन का झाग धोकर रखें, ताकि वह जल्दी सूख जाए. एक ही साबुन अगर एक से ज़्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं, तो हमेशा साबुन धोकर इस्तेमाल करें. सोप व टूथब्रश होल्डर नियमित रूप से साफ़ करें.

बेडरूम

बेडशीट्स और तकियों में डस्ट माइट्स और एलर्जेंस को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिलता है, जिसके कारण लोगों को अक्सर सर्दी-ज़ुकाम, बदनदर्द और सांस संबंधी समस्याएं होती ही रहती हैं.

तकिया: इसके बिना हम सुकून की नींद सो भी नहीं सकते, पर हो सकता है कि इसमें मौजूद डस्ट माइट्स और जर्म्स
आपसे आपका सुकून छीन लें. पुराने तकियों में इनकी भरमार होती है, जिन पर हमारा ध्यान बमुश्किल जाता है.
हेल्थ टिप: तकिये के कवर को हर 15 दिन में गर्म पानी में धोएं. हर दो साल में तकिया बदलते रहें.

बेडशीट्स, चादर और गद्दे: हम रोज़ाना 7-8 घंटे इनमें गुज़ारते हैं, अगर ये ख़ुद ही बीमार हों, तो भला हम कैसे स्वस्थ रह सकते हैं. डस्ट माइट्स और एलर्जेन्स चादर व गद्दों को अपना घर बनाकर हमें बीमार कर सकते हैं.
हेल्थ टिप: चादर और गद्दे के कवर को हर 15 दिन में एक बार गर्म पानी में धोएं. गद्दों को समय-समय पर धूप में डालें, ताकि डस्ट माइट्स ख़त्म हो जाएं.

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घर का बाकी हिस्सा

दरवाज़े के हैंडल: दरवाज़े के हैंडल में स्टैफ नामक बैक्टीरिया पाया जाता है, जो हमारे मुंह, आंख और घाव में पहुंचकर नुक़सान पहुंचाता है.
हेल्थ टिप: किसी एंटी-बैक्टीरियल क्लीनर से इसे रोज़ाना साफ़ करें.

दीवारें: दीवारों पर जमी धूल-मिट्टी में पनपते डस्ट माइट्स जहां हमारी सेहत को नुक़सान पहुंचा सकते हैं, वहीं दीवारों पर लगा पेंट भी नुक़सानदेह हो सकता है. कुछ पेंट्स में वोलाटाइल ऑर्गेनाइक कंपाउंड्स (वीओसी) होते हैं, जो इंडोर एयर पॉल्यूशन का कारण बनते हैं और कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी पैदा कर सकते हैं.
हेल्थ टिप: घर के लिए लो वीओसी पेंट्स, मिल्क पेंट व व्हाइट वॉश चुनें. इस बात का भी ध्यान रखें कि पेंट में लेड न हो. नियमित रूप से दीवारों के जाले और धूल-मिट्टी को झाड़कर साफ़ करें.

कार्पेट व रग्स: इनमें डस्ट माइट्स व एलर्जेन्स बहुत तेज़ी से फैलते हैं, जो एलर्जी फैलाने के लिए काफ़ी हैं. कार्पेट्स को अगर नियमित रूप से साफ़ नहीं किया गया, तो नमी के कारण इसमें फंगस लगने लगता है.
हेल्थ टिप: समय-समय पर कार्पेट निकालकर थोड़ी देर उल्टा करके धूप में रखें, ताकि किसी तरह के बैक्टीरिया या फंगस न पैदा हों.

शू रैक: अक्सर लोग इसे अनदेखा कर देते है, जबकि बाहर से हमारे जूते-चप्पलों के साथ आई गंदगी व बैक्टीरिया हमारे घर में घुस आते हैं. इसमें चिपके बैक्टीरिया घर में फैलकर हमें बीमार बना सकते हैं.
हेल्थ टिप: हो सके, तो शू रैक को घर से बाहर ही रखें. समय-समय पर जूते-चप्पलों को निकालकर शू रैक साफ़ करें और कीटनाशक भी स्प्रे करवाएं.

हेल्दी होम टिप्स
* घर में वेंटिलेशन का ख़ास ख़्याल रखें. खिड़कियां खुली रखें, ताकि ताज़ी हवा व सूरज की रोशनी घर में आती रहे.
* घर के जिन हिस्सों में सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती, वहां बहुत तेज़ी से कीटाणु फैलते हैं. इसलिए सुबह के व़क्त खिड़कियां खोल दें, ताकि सूरज की      रोशनी घर  में आ सके.
* अपने किचन व बाथरूम को कीटाणुओं से मुक्त करने के लिए नीम व लैवेंडर ऑयल का इस्तेमाल करें.
* नियमित रूप से किचन के सिंक और ड्रेन में 1/4 कप विनेगर डालें, ताकि वे कीटाणु मुक्त रहें.
* खाना बनाते व़क्त किचन में एक्ज़ॉस्ट फैन ऑन रखें, ताकि सारा धुंआ तुरंत निकल जाए.
* घर के किसी भी हिस्से को दो हफ़्ते से ज़्यादा अनदेखा न करें, वरना यह नुक़सानदेह हो सकता है.
* समय-समय पर घर में पेस्ट कंट्रोल करवाएं.
* हर रोज़ फ्लोर क्लीनर से पोंछा लगाएं.
* एक स्प्रे बॉटल में 1 कप फिल्टर वॉटर, 5 बूंदें ऑरेंज एसेंशियल ऑयल, 3 बूंदें लैवेंडर एसेंशियल ऑयल, 2 बूंदें नीलगिरी एसेंशियल ऑयल और 2  बूंदें टी ट्री ऑयल मिलाकर नेचुरल एंटी बैक्टीरियल स्प्रे बनाकर रख लें, आवश्यकतानुसार इस्तेमाल करें.
* एक स्प्रे बॉटल लें. आधे बॉटल में विनेगर भरें और आधे बॉटल में पानी भरकर एंटी बैक्टीरियल क्लीनर की तरह इस्तेमाल करें.

 

– अनुश्री

वास्तु के अनुसार कैसी होनी चाहिए सीढ़ियां?

आपके घर की सीढ़ियां आपकी क़ामयाबी की सीढ़ियां भी बन सकती हैं. बस, सीढ़ियां बनवाते समय वास्तु के कुछ नियमों का पालन करें और आप क़ामयाबी की ऊंचाइयों को छू सकते हैं.

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* मकान की सीढ़ियां पूर्व से पश्‍चिम या उत्तर से दक्षिण की ओर जाने वाली होनी चाहिए.
* बड़े मकानों में सीढ़ी का पूरा हिस्सा मकान के दक्षिण या दक्षिण-पश्‍चिम हिस्से में होना चाहिए. मकान के उत्तर-पूर्व कोने में तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए.
* कई ऐसे घरों में जहां दो मंज़िला मकान होता है, वहां अक्सर यह देखने में आता है कि लोग ऊपर का घर किराए पर दे देते हैं और नीचे की मंज़िल में स्वयं रहते हैं और वहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ी घर के सामने ही बना देते हैं, यह एकदम ग़लत है. ऐसे में मकान मालिक को आर्थिक तकलीफ़ से गुज़रना पड़ता है, जबकि उसका किराएदार फ़ायदे में रहता है.
* हमेशा मकान के दक्षिण या पश्‍चिम हिस्से में ही सीढ़ियां बनाएं. साथ ही इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए कि सीढ़ियां उत्तर से दक्षिण की ओर तथा पूर्व से पश्‍चिम की ओर जाती हों और जब पहली मंज़िल की ओर निकलती हों तो हमारा मुख उत्तर-पश्‍चिम या दक्षिण-पूर्व में होना चाहिए.
* जहां तक हो सके, अंदरूनी या बाहरी सीढ़ियां उत्तर या पूर्वी दीवार से जुड़ी हुई नहीं होनी चाहिए. उनके बीच कम-से-कम तीन इंच का अंतर होना चाहिए. यदि आपके घर के भीतर सीढ़ियां बनी हुई हों तो ध्यान रखें कि वह आपके लिए लाभदायी कोण में हों अन्यथा परिवार में अनबन रहती है.
* ग़लत स्थान पर ग़लत ढंग से ग़लत नियमों के आधार पर यदि सीढ़ियों का निर्माण होता है, तो पागलपन, विवाद, नीलामी, आयकर के छापे, बीमारी एवं निर्धनता का प्रवेश शनै:-शनै: होने लगता है.

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ध्यान रखें
* भवनों में सीढ़ियां वास्तु के अनुरूप बनाएं.
* सीढ़ियों का द्वार पूर्व व दक्षिण दिशा में होना चाहिए.
* सीढ़ियां घुमावदार निर्मित करानी हों तो घुमाव सदैव पूर्व से दक्षिण, दक्षिण से पश्‍चिम, पश्‍चिम से उत्तर और उत्तर से पूर्व दिशा में हों.
* सीढ़ियों में घुमाव चाहे कितने भी हों, संख्या विषम ही रहे यानी 5,11,17,23 आदि संख्या में सीढ़ियां हों. सीढ़ियों के शुरू और अंत में द्वार बनाना चाहिए.
* उतरते समय सीढ़ियों की समाप्ति पर हमारा मुंह पूर्व वा उत्तर की ओर होना चाहिए.

जब ख़रीदना हो घर ( When Buying house)

Buying house

Buying house

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बढ़ती महंगाई के साथ प्रॉपर्टी के रेट्स भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में घर ख़रीदते समय जल्दबाज़ी में लिया गया कोई भी ़फैसला आपको भारी पड़ सकता है. घर ख़रीदते समय किन बातों का रखें ख़ास ख़्याल? आइए, जानते हैं.

पहला घर देखकर उसके दीवाने न हो जाएं
ङ्गफर्स्ट इंप्रेशन इज़ द लास्ट इंप्रेशनफ अगर आप मन में ऐसी सोच रखकर घर ख़रीदने जा रहे हैं, तो आप ग़लत साबित हो सकते हैं. ये ज़रूरी नहीं कि पहली नज़र में जो मकान आपके मन को भा जाए, वो आपके लिए वाक़ई ड्रीम होम साबित हो. हो सकता है, रात के समय रोशनी से जगमगाते ख़ूबसूरत मकान में सुबह सूरज की एक किरण भी न पहुंचती हो. ये भी हो सकता है कि जो घर अंदर से बिल्कुल चकाचक, साफ़-सुथरा नज़र आ रहा है, वो बाहर से पपड़ीनुमा दीवारों से घिरा हो या घर में लीकेज आदि की समस्या हो. अतः एक बार देखकर उसी घर को ख़रीदने की न ठान लें. घर को दो-चार बार और देखें, फिर निर्णय लें.

समझें प्रॉपर्टी की भाषा
फलां व्यक्ति ने कह दिया कि वो मकान 1000 स्क्वायर फीट है या बिल्डर द्वार मिली बुकलेट पर साफ़ लिखा है कि प्रत्येक मकान 1200 स्क्वायर फीट है, तो इसका मतलब ये नहीं है कि आप उन पर विश्‍वास कर लें, बल्कि ख़ुद प्रॉपर्टी एरिया के बारे में जानने की कोशिश करें. प्रॉपर्टी एडवोकेट योगेश शर्मा के अनुसार, ङ्गङ्घअधिकांशतः प्रॉपर्टी एरिया को तीन नामों से जाना जाता है सुपर बिल्ट अप, जम्बो बिल्ट अप व कारपेट एरिया. ऐसे मकान जिसमें लिफ्ट, पैसेज आदि का समावेश किया जाता है उसे सुपर बिल्ट अप एरिया कहते हैं और जिसमें स्विमिंग पुल से लेकर क्लब, जिम व गार्डन तक की जगह शामिल की जाती है, उसे जम्बो बिल्ट अप एरिया कहा जाता है और कारपेट एरिया चहारदीवारी के बीच की जगह को कहते हैं. अतः सही प्रॉपर्टी का चुनाव करने के लिए तीनों के फ़र्क़ को जानें, क्योंकि बिल्डर्स सामान्यतः सुपर या जम्बो बिल्ट अप एरिया का ज़िक्र करते हैं, जिसे अक्सर लोग कारपेट एरिया समझकर ख़रीद लेते हैं.

बजट तय कर लें
आप पहले घर देखेंगे, उसे पसंद करेंगे और उसके बाद पैसों का इंतज़ाम करेंगे, इस सोच के साथ घर ख़रीदना आपको भारी पड़ सकता है. मकान देखने या ख़रदीने से पहले अपना बजट तय कर लें. इसके लिए सबसे पहले ब्रोकर से नहीं, बैंक मैनेजर से मिलें और इस बात की जानकारी लें कि आपकी सैलरी पर कितना होम लोन मिल सकता है और कितनी राशि आप अपनी जमापूंजी से लगा सकते हैं. होम लोन के साथ-साथ स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन एवं ब्रोकेज की रक़म भी बजट में ज़रूर जोड़ें. और हां, इंटीरियर डिज़ाइनिंग की राशि भी, क्योंकि नए घर में लोगों की तारी़फें बटोरने के लिए इंटीरियर डेकोरेशन तो करना ही होगा. अतः बजट निश्‍चित होने के पश्‍चात ही घर ख़रीदने जाएं.

प्रॉपर्टी के काग़ज़ात दोस्तों के भरोसे न छोड़ें
ब्रोकर आपका बहुत अच्छा दोस्त है या आपका जिगरी दोस्त लीगल-इल्लीगल प्रॉपर्टी की अच्छी समझ रखता है, इसलिए उनके भरोसे प्रॉपर्टी से जुड़े सारे पेपर वर्क छोड़ने की ग़लती न करें. काग़ज़ात की सही जांच-परख के लिए प्रोफेशनल लीगल एडवाइज़र की सहायता लें, जो प्रॉपर्टी के साथ ही प्रॉपर्टी लॉ की भी समझ रखता हो और जिसकी मदद से आप लीगली स्ट्रॉन्ग एग्रीमेंट साइन कर सकें. प्रॉपर्टी एडवोकेट योगेश शर्मा कहते हैं, ङ्गङ्घयदि आप रिसेल प्रॉपर्टी ख़रीद रहे हैं तो शेयर सर्टिफिकेट, होम लोन ड्यूज़ सर्टिफिकेट, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी), चैन एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन, ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी), सोसायटी एसेसमेंट टैक्स रिसिप्ट आदि काग़ज़ात मौजूदा मालिक के पास हैं या नहीं, यह ज़रूर चेक करें.

आंख मूंदकर भरोसा न करें
चाहे ब्रोकर आपका दोस्त हो या बिल्डर आपका रिश्तेदार, घर ख़रीदते वक़्त किसी पर भी आंख मूंदकर विश्‍वास करने की ग़लती न करें. प्रॉपर्टी एरिया, डॉक्यूमेंट्स आदि से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी जानकारी अपने पास रखें. कपड़ों-गहनों की तरह आप महज कुछ वर्षों के लिए मकान नहीं ख़रीद रहे, बल्कि ताउम्र रहने के लिए मकान की ख़रीददारी कर रहे हैं. अतः दूसरों पर भरोसा न करें और अच्छी तरह सोचने-समझने के बाद ही घर ख़रीदें.

पूछें प्रॉपर्टी से जुड़े सवाल
घर ख़रीदते समय न स़िर्फ मकान के बारे में पूरी जानकारी रखें, बल्कि बिल्डर्स से जुड़े सवाल भी ज़रूर पूछें. फिर चाहे बिल्डर कितना भी मशहूर क्यों न हो. प्रॉपर्टी एडवोकेट योगेश शर्मा के अनुसार, ङ्गङ्घयदि आप सीधे बिल्डर से प्रॉपर्टी ख़रीद रहे हैं, तो पता कर लें कि बिल्डर के पास टाइटल सर्टिफिकेट है या नहीं, राइट टु डेवलेपमेंट के तहत वो बिल्डिंग बना सकता है या नहीं, उसके पास ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) है या नहीं आदि. यदि प्रॉपर्टी अंडरकंस्ट्रक्शन है तो तय समय पर पजेशन न मिलने पर बिल्डर द्वारा कम्पन्सेशन कॉस्ट कितना होगा आदि.फफ

लोकैलिटी चेक लें
फ्लैट ख़रीदते समय लोकैलिटी यानी मुहल्ले/इलाके (जहां फ्लैट मौजूद है) का भी ख़ास ध्यान रखें. ख़ासकर तब जब आपके साथ बच्चे भी हों, क्योंकि बच्चों की परवरिश पर लोकैलिटी का बहुत प्रभाव पड़ता है. साथ ही ये भी ध्यान में रखें कि फ्लैट से स्टेशन, बस स्टॉप आदि कितनी दूरी पर है? बस, ऑटो, टैक्सी आदि की सुविधा है या नहीं? देर-सबेर आसपास की सड़कें आवाजाही के लिए सुरक्षित हैं या नहीं, दुकान आदि कितनी दूरी पर है?

सोसायटी मेंटेनेंस के बारे में पता करें
मकान ख़रीदते समय प्रॉपर्टी एरिया, स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन एवं ब्रोकेज की रक़म तक ही सीमित न रहें, बल्कि मकान ख़रीदने के बाद पैसों से जुड़ा कौन-कौन-सा मसला सिर उठा सकता है, इसकी भी पूरी जानकारी रखें यानी मेंटेनेंस, एनओसी आदि. एडवोकेट योगेश शर्मा के अनुसार, ङ्गङ्घयदि आप रिसेल फ्लैट ख़रीदने जा रहे हैं, तो ड्यूज़ (बकाया राशि) से संबंधित पूरी जानकारी अवश्य रखें, जैसे- पूर्व मालिक ने मेंटेनेंस भरा है या नहीं, प्रॉपर्टी टैक्स चुकता किया है या नहीं या फिर पानी बिल, लाइट बिल बकाया तो नहीं है आदि.फफ यदि आप ड्यूज़ की जानकारी को नज़रअंदाज़ करेंगे, तो हो सकता है, सारे ड्यूज़ आपको ही भरने पड़ें.

पार्किंग स्पेस न भूलें
मेट्रो सीटीज़ में पार्किंग को लेकर काफ़ी मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं. कुछ जगहों पर पार्किंग के लिए मंथली पे करना पड़ता है, तो कुछ बिल्डर्स फ्लैट ख़रीदते वक़्त ही पार्किंग के पैसे भी ले लेते हैं. अतः अपनी गाड़ी की सुरक्षा के लिए पार्किंग से जुड़े मसले भी ज़रूर जानें, जैसे- वहां पार्किंग की सुविधा है या नहीं? पार्किंग चार्जेस क्या हैं?

घर वो जगह है, जहां हम दुनिया-जहान से दूर बेहद निजी और सुकून के पल बिताते हैं. अतः अपने सपनों का आशियाना सजाते समय हर तरह से तसल्ली कर लें, ताकि उस घर में आप अपनी पूरी ज़िंदगी सुकून से गुज़ार सकें.

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स्मार्ट स्पेस सेविंग फर्नीचर

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प्रॉपर्टी की आसमान छूती क़ीमतों के कारण बड़ा और आलिशान मकान ख़रीदना हर किसी के बस की बात नहीं है. शहरों में अक्सर छोटे घरों में ही लोगों को गुज़ारा करना पड़ता है. ऐसे में छोटे से घर में फर्नीचर सिलेक्ट करना बहुत मुश्किल हो जाता है. आपकी परेशानी दूर करने के लिए हम बता रहे हैं कुछ स्मार्ट आइडियाज़, जिससे आप अपने ड्रीम होम को दे सकती हैं अट्रैक्टिव लुक.

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सोफा कम बॉक्स बेड
अपने किसी दोस्त या कलीग के घर में लग्ज़ीरियस सोफा देखकर यदि आप भी उसे अपने स्मॉल साइज़ लिविंग रूम में लाने की सोच रही हैं, तो ऐसी ग़लती न करें. छोटे कमरे में बड़ा फर्नीचर रखने से कमरा भरा-भरा दिखेगा. एल शेप सोफा आपके कमरे को पूरी तरह से कवर कर लेगा और कमरे में बिल्कुल जगह नहीं बचेगी.

स्मार्ट आइडिया
बड़ा सोफा रखने की बजाय आप सोफा कम बॉक्स बेड का सिलेक्शन करें. दिन में ये सोफा का काम करेगा और रात में इसे आप बेड की तरह यूज़ कर सकती हैं. इतना ही नहीं, बॉक्स होने के कारण आप इसमें सामान भी रख सकती हैं.

 

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वॉल बेड
बड़े शहरों, ख़ासकर मेट्रो सिटीज़ में फ्लैट के कमरे इतने छोटे होते हैं कि किंगसाइज़ बेड रखने के बाद बेडरूम में जगह ही नहीं बचती. भले ही किंग साइज़ बेड पर सोने में आनंद आता है, लेकिन ये पूरे कमरे को कवर कर लेता है, जिससे कमरे में स़िर्फ बेड ही बेड दिखाई देगा.

स्मार्ट आइडिया
आप चाहें तो न्यू ट्रेंड को फॉलो करते हुए बेडरूम के लिए वॉल बेड ले सकती हैं. इससे जब आपको सोना हो, तो बेड नीचे कर लें, वरना इसे वॉल पर फिट कर दें.

 

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डायनिंग टेबल एंड चेयर्स
आजकल डायनिंग रूम की जगह डायनिंग एरिया मिलने लगा है. हॉल में एक किनारे पर जगह होती है, जहां लोग डायनिंग टेबल रख देते हैं. मेहमानों के आने के बाद डायनिंग चेयर्स को कभी टेबल के ऊपर तो कभी किसी तरह से एडजस्ट करना पड़ता है.

स्मार्ट आइडिया
मार्केट में ऐसे डायनिंग टेबल मिलने लगे हैं, जो काम ख़त्म होने के बाद आपस में जुड़ जाते हैं. इससे न स़िर्फ टेबल की जगह बचती है, बल्कि इसमें आप डायनिंग संबंधी सामान भी रख सकती हैं.

 

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फोल्ड डाउन टेबल
लिविंग रूम में ही बड़ा-सा स्टडी टेबल रखने की मजबूरी कमरे के लुक को बिगाड़ देती है. इससे कमरा भरा लगने के साथ ही बदसूरत भी लगने लगता है. किसी के आ जाने पर आप समझ नहीं पाते कि इस स्टडी टेबल का क्या किया जाए.

स्मार्ट आइडिया
अपने पुराने स्टडी टेबल को हटाइए और घर ले आइए फोल्ड डाउन टेबल. ये दीवार में फिट होता है. जब यूज़ करना हो, तो इसे लगाइए. ये दीवार पर कुछ इस तरह फिट हो जाता है कि लगता है मानों कोई पेंटिंग हो.

 

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स्टेयर ड्रॉवर्स
फैमिली बड़ी होने के कारण क्या आपके घर में भी कई अलमारी और वॉर्डरोब हैं, जो जगह घेरे हुए हैं. आपको सामान रखने के लिए घर में अलग से ड्रॉवर बनवाने और ख़र्च करने की ज़रूरत नहीं है. आप उसी जगह को सही तरह से एडजस्ट करके यूज़ कर सकती हैं.

स्मार्ट आइडिया
घर में बनी सीढ़ियों का यूज़ भी आप सामान रखने के लिए कर सकती हैं. सीढ़ियों के नीचे ड्रॉवर बनवाएं. ये एक्स्ट्रा जगह भी नहीं लेंगे और इनमें आप आसानी से सामान भी रख सकेंगी. इतना ही नहीं, इससे आपको अलग से शू रैक रखने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी.

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आयर्निंग बोर्ड मिरर
घर में बड़ा-सा ड्रेसिंग टेबल रखकर बेडरूम के साइज़ को कम करने की भूल न करें. इससे कमरा और छोटा लगेगा. साथ ही कपड़ों को प्रेस करने के लिए जगह घेरता आयर्निंग बोर्ड भी घर का लुक बिगाड़ देता है.

स्मार्ट आइडिया
आप चाहें तो इन दोनों को क्लब कर सकती हैं. जी हां, आयर्निंग बोर्ड मिरर से आप दोनों काम कर सकती हैं.

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पेंटिंग कम ज्वेलरी स्टोरेज
आमतौैर पर महिलाओं को ज्वेलरी का बहुत शौक़ होता है. उनके पास ज्वेलरी का अच्छा-खासा कलेक्शन होता है. ऐसे में ज्वेलरी को वो कभी दरवाज़े के पीछे, तो कभी वॉल हैंगिंग पर लटका देती हैं, जिससे कमरे का लुक बिगड़ जाता है. आप ऐसी ग़लती न करें. ज्वेलरी रखने के लिए दीवार पर पेंटिंग कम ज्वेलरी स्टोरेज बनवाएं. इससे सारी ज्वेलरी सुरक्षित रहेगी और बेडरूम/लिविंग रूम का लुक भी बदल जाएगा.

 

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बुक चेयर
पूरे घर में बुक्स बिखरी रहती हैं और उन्हें रखने के लिए अलग से बुक शेल्फ बनवाने की जगह नहीं है, तो आज ही घर ले आइए बुक चेयर और एक्स्ट्रा जगह बचाइए.

 

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विंडो ब्लाइंड्स
अगर आपके घर में कपड़े सुखाने की जगह नहीं है, तो आप अपने विंडो ब्लाइंड्स को यूज़ कर सकती हैं. इससे घर में कपड़े सुखाने के लिए एक्स्ट्रा जगह भी नहीं लगेगी और कपड़े सूख भी जाएंगे.

– श्वेता सिंह

कंप्लीट लोन गाइड ( Complete Loan Guide)

Loan Guide

Loan Guide

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अगर लोन लेने की सोच रहे हैं, तो ज़रूरी है बैंक से लोन संबंधी सभी ज़रूरी जानकारियां हासिल कर लें. लोन की ईएमआई, इंटरेस्ट रेट, प्रक्रिया आदि पहलुओं पर गौर कर लें, ताकि सही निर्णय ले सकें.

लोन संबंधी जनरल टिप्स

कोई भी लोन लेने से पहले मार्केट की पूरी रिसर्च कर लें, जैसे- बैंक की ब्याज दर, लोन की अवधि, किन-किन डॉक्यूमेंट्स की ज़रूरत होगी? महिलाओं के लिए कोई विशेष ऑफर हैं? इत्यादि.

  • लोन ऐसी संपत्ति के लिए लें, जिसे भविष्य में बेचने पर मुनाफ़ा मिले.
  • अपनी वार्षिक आय के 5 गुना से ज़्यादा लोन न लें.
  • लोन लेने में किसी तरह की जल्दबाज़ी न करें. सभी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त करने के बाद ही कोई निर्णय लें.
  •  डॉक्यूमेंट्स की सभी फोटोकॉपीज़ को अटेस्ट कराकर तैयार रखें.
  •  लोन संबंधी डॉक्यूमेंट्स जमा करते समय बैंक एग्ज़ीक्यूटिव को घर-कार आदि के ओरिजनल पेपर्स न दें.
  •  लोन के दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने से पहले सभी ज़रूरी सूचनाओं को अच्छी तरह पढ़ व समझ लें. किसी तरह का संदेह होने पर बैंक एग्ज़ीक्यूटिव से संपर्क करें.
  • यदि आप किसी चार्जेस या फी के संबंध में कोई चेक इश्यू कर रहे हैं, तो बैंक के नाम से चेक इश्यू करें, न कि एग्ज़ीक्यूटिव के नाम पर.
  • डॉक्यूमेंट्स जमा करने के बाद, यदि आपका लोन लेने का निर्णय बदलता है, तो तुरंत बैंक को सूचित करें.
  • एक अवधि के बाद यदि लोन के स्वीकृत और अस्वीकृत होने की सूचना बैंक से नहीं मिलती है, तो तुरंत संबंधित अधिकारी से संपर्क करें.
  •  कोई भी लोन लेने के लिए एक साथ एक से अधिक बैंकों में अप्लाई न करें.
  •  लोन लेने से पहले अपने क्रेडिट कार्ड के सभी बिलों का भुगतान कुछ महीने पहले ही कर दें.
  • लोन की राशि अधिक होने पर बैंक को गारंटर का प्रूफ देना होता है.

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होम लोन

* वित्तीय संस्थान या बैंक प्रॉपर्टी/घर की क़ीमत के 80% वैल्यू तक ही लोन
देते हैं.

* अधिकांश बैंकों में होम लोन को चुकाने की अवधि 20 साल तक की है, पर कुछ बैंकों ने इस अवधि को बढ़ाकर 30 साल तक भी कर दिया है.

* लोन की अवधि बढ़ने से ईएमआई की रक़म तो कम होती है, पर अतिरिक्त ब्याज की राशि भरने का नुक़सान भी होता है. इसलिए अपने ख़र्चों व बचत को ध्यान में रखकर लोन की अवधि का चुनाव करें.

* बैंक अपने क्लाइंट को आकर्षित करने के लिए कम ब्याज दर और स्पेशल स्कीम्स के साथ होम लोन की सुविधा उपलब्ध कराते हैं, इसलिए होम लोन लेने से पहले अनुबंध पर लिखे सभी नियम व शर्तों को अच्छी तरह पढ़ व समझ लें.

* विशेष स्कीम्स के बारे में किसी तरह का संदेह होने पर बैंक के लोन संबंधी अधिकारी से संपर्क करें.

* डील फाइनल होने से पहले बैंक के अधिकारी से एडमिनिस्ट्रेशन चार्जेस, सर्विस चार्जेस/प्रोसेसिंग फी के बारे में सारी जानकारियां प्राप्त कर लें.

* अपनी वर्तमान नौकरी व आय को ध्यान में रखकर होम लोन की ईएमआई की राशि तय करें. ईएमआई का भुगतान समय पर न करने पर पेनाल्टी भी
भरनी पड़ेगी.

* लोन एग्रीमेंट की सारी कार्यवाही पूरी करने के बाद और हस्ताक्षर करने से पहले एग्रीमेंट को अच्छी तरह से पढ़ लें, फिर हस्ताक्षर करें.

* होम लोन वेतनभोगी और व्यवसाय करनेवाले किसी भी व्यक्ति को मिल सकता है. यदि आप वेतनभोगी हैं, तो लोन लेने के लिए पहचान पत्र (ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर पहचान पत्र, पैन कार्ड या पासपोर्ट- इनमें से किसी एक की
फोटोकॉपी), इन्कम डॉक्यूमेंट्स (पिछले 2 महीने की सैलरी स्लिप, फॉर्म 16 (अगर मासिक वेतन 20 हज़ार रुपए से अधिक है तो), पिछले 3 महीने के बैंक स्टेटमेंट, कंपनी/कार्यालय का पहचान पत्र बैंक में जमा कराने होते हैं.

* जबकि व्यवसाय करनेवाले व्यक्ति को होम लोन लेने के लिए पहचान पत्र, रेसिडेंस प्रूफ और इन्कम डॉक्यूमेंट्स (सेविंग और करंट एकाउंट के पिछले 6 महीने की बैंक स्टेटमेंट, पिछले 2 साल की बैलेंस शीट और प्रॉफिट-एंड-लॉस एकाउंट की कॉपी, पिछले 2 साल की इन्कम टैक्स रिटर्न की कॉपी, कॉन्ट्रैक्ट की डिटेल्स आदि) जमा कराने होते हैं.

पर्सनल लोन

* हर बैंक के पर्सनल लोन की ब्याज दर अलग-अलग होती है. इसलिए अनेक बैंकों से ब्याज दर के अलावा प्री-पेमेंट चार्जेस, डॉक्यूमेंट्स, एग्रीमेंट के नियम व शर्तों के बारे में सारी जानकारियां हासिल करें.

* पर्सनल लोन की ब्याज दर अन्य लोन की तुलना में अधिक होती है, इसलिए लोन लेते व़क्त उसकी समय-सीमा और ईएमआई सोच-समझकर तय करें.

* लोन की अवधि कम से कम रखें. यदि लोन की अवधि अधिक होगी, तो ब्याज भी अधिक देना पड़ेगा.

* डॉक्यूमेंट्स के तौर पर पहचान पत्र, रेसिडेंस प्रूफ, सैलरी स्लिप, फॉर्म 16, पिछले 2 महीने के बैंक स्टेटमेंट की फोटोकॉपी की आवश्यकता होती है.

* यदि आप सेल्फ एंप्लॉइड हैं, तो पिछले 2 साल की बैलेंस शीट, प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट और एग्रीमेंट की ज़रूरत होती है.

* लोन को चुकाने की अवधि अमूमन 1-5 साल तक की होती है. किसी वजह से ईएमआई न भर पाने या निर्धारित अवधि तक लोन का भुगतान न कर पाने, जैसे विषयों पर पहले से ही सारी जानकारी प्राप्त कर लें.

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कार लोन

कार की क़ीमत तय होेने के बाद ही लोन के लिए अप्लाई करें.

  • कार लोन को चुकाने की अवधि 5-7 साल तक होती है. इसलिए अपनी आय को ध्यान में रखकर कार की ईएमआई तय करें.
  • लोन अप्लाई करने से पहले कार एजेंसी से बैंक की विश्‍वसनीयता और साख के बारे में पूछताछ कर लें. फिर लोन की कार्यवाही शुरू करें.
  • बैंक कार की लागत का केवल 90% तक ही लोन देते हैं. एक्सेसरीज़ का ख़र्च स्वयं वहन करना पड़ता है.
  •  दस्तावेज़ के तौर पर बैंक में आईडी प्रूफ, रेसिडेंस प्रूफ, इन्कम डॉक्यूमेंट्स और कार के पेपर्स (परफॉर्मा इंवॉइस, फॉर्म 20, आरसी आदि) जमा कराने होते हैं.
  • बैंक में लोन संबंधी दस्तावेज़ों को जमा कराने से पहले कार की इंवॉइस डिटेल्स अच्छी तरह से चेक कर लें.
  • लोन लेते समय इंश्योरेंस कवर नोट और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) बैंक के फेवर में ही लें.
  • किसी भी व्यक्ति को नक़द भुगतान करने की बजाय बैंक के नाम से क्रॉस्ड या पोस्ट डेटेड चेक दें.
  • ऋण से जुड़ी सभी कार्यवाही पूरी होने के बाद बैंक से एनओसी लेना न भूलें.
  • सभी नियमों व शर्तों को पढ़ने के बाद ही दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करें और उसकी फाइनल रसीद लेकर कार डीलर के पास जमा कराएं.

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एजुकेशन लोन

* एजुकेशन लोन लेने के लिए ऑनलाइन अप्लाई करना चाहिए. इससे बैंक और लोन होल्डर के बीच रिकॉर्ड मेंटेन रहता है.

* दस्तावेज़ के तौर पर बर्थ सर्टिफिकेट, आईडी प्रूफ, रेसिडेंस प्रूफ, एजुकेशन प्रूफ (जो कोर्स करने जा रहे हैं, उसके एंटेरेंस टेस्ट की मार्कशीट या ऑफर लेटर), पैरेंट्स का आईडी प्रूफ, सैलरी स्लिप, फॉर्म 16 आदि बैंक में जमा कराने पड़ते हैं.

* यदि पढ़ाई के लिए विदेश जा रहे हैं, तो इन डॉक्यूमेंट्स के साथ पासपोर्ट और वीज़ा की कॉपी भी जमा करानी होती है.

* एजुकेशन लोन की ब्याज दर अनेक कारणों पर निर्भर करती है. अधिकतर बैंकों में ब्याज दर 10-15% तक होती है. फिर भी लोन लेने से पहले 3-4 बैंकों से ब्याज दर सहित अन्य जानकारियां ज़रूर प्राप्त करें.

* एजुकेशन लोन का भुगतान कोर्स ख़त्म होने की अवधि के बाद सामान्यतया 7 साल तक करना होता है.

* लोन की राशि 4 लाख रुपए तक की होती है, जिसमें बैंक को किसी गारंटर या सिक्योरिटी की आवश्यकता नहीं होती.

* 4 लाख से साढ़े सात लाख तक के एजुकेशन लोन के लिए बैंक को गारंटर की आवश्यकता होती है.

* साढ़े सात लाख रुपए से अधिक लोन लेने पर बैंक में सिक्योरिटी, जैसे- फिक्स्ड डिपॉज़िट, घर, एलआईसी की रसीद या गोल्ड आदि जमा कराना होता है.

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टॉप 10 डेकोर ब्लंडर्स

Decor tips,Decor blunders

Decorating Mistakes

अपने ख़्वाबों के आशियाने को ख़ूबसूरती से सजाना चाहती हैं तो इन 10 होम डेकोर ब्लंडर्स से बचें और अपने होम डेकोर को दें परफेक्ट टच.

Decorating Mistakes

1 सही प्लान का अभाव
सबसे पहली ग़लती है बिना प्लान किए ही घर को सजाने की तैयारी शुरू करना. ऐसा कई बार होता है जब बिना घर की ज़रूरत जाने ही लोग उसमें बदलाव करना शुरू कर देते हैं. उदाहरण के लिए फिर्नीचर ख़रीदना, वॉल पेंटिंग, कर्टन शॉपिंग आदि.

क्या करें?
घर का मेकओवर करने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले पूरे घर का मुआयना कर लें. कहां कौन-सी चीज़ फिट आएगी, सोफा कितना बड़ा चाहिए, डायनिंग टेबल की साइज़ और डिज़ाइन आपके घर के अनुसार कैसा होना चाहिए? आदि पहले ही प्लान कर लें. इसके बाद ही शुरुआत करें.

Decorating Mistakes

2 कुशन
हॉल में सोफे पर आराम से बैठने के लिए जहां कुछ कुशन्स की ज़रूरत होती है, वहीं बहुत ज़्यादा कुशन आपके हॉल का लुक बिगाड़ देते हैं. बहुत ज़्यादा कुशन से बैठने की जगह भी बहुत कम बचती है.

क्या करें?
सोफे या फिर बैठक के हिसाब से कुशन का चुनाव करें. सोफे पर कुशन का ढ़ेर लगाने की बजाय जितना ज़रूरी हो उतने कुशन्स ही रखें. घर में अगर सोफे की बजाय नीचे बैठने का सिस्टम है, तो कुशन के साथ गोल वाले पिलो भी रखें. इससे घर का लुक थोड़ा अलग नज़र आता है.

Decorating Mistakes

3 ग़लत फर्नीचर सिलेक्शन
बिना साइज़ का फर्नीचर आपके घर के लुक को बिगाड़ सकता है. हॉल में सोफे की साइज़ अगर आधे कमरे तक फैली हो और शो-केस भी बड़ा हो तो आपका हॉल छोटा और भरा-भरा नज़र आएगा.

क्या करें?
घर में अगर फर्नीचर लाने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले सारे सामान की एक लिस्ट बनाएं. हर कमरे के हिसाब से फर्नीचर का साइज़ और लुक डिसाइड करें. उसके बाद अगर मुमक़िन हो तो किसी प्रोफेशनल या फिर शोरूम (जहां से आप फर्नीचर लाने का प्लान कर रहे हैं) से सलाह लें.

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4 गैरज़रूरी चीज़ें
बिना सोचे-समझे घर की चीज़ों की ख़रीददारी आपके घर और मूड दोनों को बिगाड़ सकती है. कई बार लोग मॉल या फिर बड़ी जगहों पर घूमते व़क्त बिना सोचे ही कुछ भी ख़रीद लेते हैं, जो बाद में वो यूज़लेस हो जाती है.

क्या करें?
कहीं घूमने जाना और वहां से घर के लिए कुछ स्पेशल या एंटीक पीस ख़रीदना सभी को अच्छा लगता है, लेकिन शॉपिंग के नाम पर कुछ भी उठा लाना ठीक नहीं. कुछ भी ख़रीदने से पहले एक बार सोचें कि क्या वाकई आपके होम डेकोर के लिए उस चीज़ की ज़रूरत है. अगर ज़रूरी लगे तभी शॉपिंग करें.

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5 फोटो
अपनों से प्यार करना और उनकी फोटो को लॉबी या हॉल में सजाना कई बार आपके घर के लुक को ख़राब कर सकता है. घर में एंटर होते ही शोकेस पर या फिर टेबल पर एक साथ कई फोटो आपके आशियाने की शोभा बिगाड़ सकते हैं.

क्या करें?
लिविंग रूम में किसी एक वॉल पर एक बड़ी फैमिली फोटो आपके रूम को कंप्लीट लुक दे सकती है. इसलिए बेहतर होगा कि डेकोर में बहुत ज़्यादा फोटो के इस्तेमाल से बचें.

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6 सही लाइटिंग अरेंजमेंट
जिस घर में नेचुरल लाइट कम होती है, ऐसे घरों में दीवारों पर डार्क कलर करने से बचें. ये आपके घर के लुक को ख़राब कर सकता है. इससे कमरा छोटा भी लगता है.

क्या करें?
कमरे में नेचुरल लाइट नहीं है, तो आर्टीफिशियल लाइट लगवाएं. डार्क कलर की बजाय लाइट कलर से कमरे को पेंट करें. इससे कमरा बड़ा और ख़ूबसूरत नज़र आता है.

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7 गिफ्टेड आइटम्स
दादा जी की याद में उनके द्वारा दी गई भारी-भरकम पेंटिग को संजोकर रखना अच्छी बात है, लेकिन घर छोटा होने पर या फिर अगर वो आपके लिविंग रूम के लिए फिट नहीं है, तो उसे दूसरे कमरे में रखें. इमोशनल होने की बजाय प्रैक्टिल बनें. कई बार इस तरह की पुरानी चीज़ों से घर का लुक ख़राब हो जाता है.

क्या करें?
पुरानी चीज़ों को सहेजकर रखना अच्छी बात है, लेकिन बेहतर होगा कि घर के स्पेस के हिसाब से ही चीज़ों का चुनाव करें. ध्यान रखें, जब तक आप पुरानी चीज़ों को छोड़ेंगे नहीं, नई को कैसे अपनाएंगे?

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8 परफेक्शन की कमी
किसी के घर में जाने के बाद अगर हॉल में अलग और बाकी कमरों के पेंट का कलर अलग है, तो समझ लीजिए कि उस घर में आपसी सामंजस्य की कमी है. ऐसे कई घर होते हैं, जहां कारपेट से लेकर वॉल कलर और डेकोर एक्ससरीज़ में विभिन्नता दिखाई पड़ती है. इस तरह से घर की शोभा तो बिगड़ती ही है, साथ में घर के लोगों का स्वभाव भी दूसरों के सामने प्रदर्शित हो जाता है.

क्या करें?
जब भी घर का लुक बदलना हो तो सबसे पहले अपने पार्टनर की राय लें. उसके बाद किसी प्रोफेशनल की मदद से आवश्यकतानुसार डेकोरेशन की तैयारी करें.

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9 बिखरे वायर
टीवी/एलसीडी/एलईडी के पीछे ढेर सारे बिखरे तार आपके लिविंग एरिया का लुक ख़राब कर सकते हैं. यहां-वहां बिखरे वायर से एक ओर जहां ख़तरे का डर रहता है, वहीं दूसरी ओर कमरे की शोभा भी बिगड़ जाती है.

क्या करें?
तारों को स्टैपल गन या वॉल के कलर के मैचिंग कॉर्ड कवर के ज़रिए अच्छी तरह से कवर कर दें.

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10 शैंडेलियर
नया-नया घर और उसे सजाने के लिए सभी तरह की एक्सेसरीज़, सोचकर ही मन ख़ुश हो जाता है. कई लोग अपने सपनों के आशियाने को सजाने के लिए बड़े शैंडेलियर यानी झूमर का चुनाव करते हैं. भले ही वो उनके छोटे-से कमरे के लिए परफेक्ट हो या न हो. हैं. उनकी यह ग़लती उनके लिविंग रूम का लुक ख़राब कर सकती है.

क्या करें?
ऐसा नहीं है कि शैंडेलियर नहीं लगाने से आपका घर अच्छा नहीं दिखेगा. पहले अपने कमरे की ऊंचाई, स्पेस देख लें. उसके बाद ही शैंडेलियर का सिलेक्शन करें.

कितना हेल्दी और सेफ है आपका किचन ?

Kitchen Safety tips

 

किचन में अक्सर कई दुर्घटनाएं होती हैं, जैसे- कटना, जलना, फिसल जाना आदि. अत: किचन में निम्न बातों का ध्यान रखें.

* किचन में एक पोंछने वाला कपड़ा, फर्स्ट एड किट, जिसमें बैंड एड, कटने व जलने की दवा और डेटॉल ज़रूर रखें.

* डोमेस्टिक पॉल्यूशनका दूसरा सबसे बड़ा कारण है कुकिंग. गैस स्टोव से ख़तरनाक नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो-ऑक्साइड आदि गैसें निकलती हैं. इनका स्तर कम करने के लिए वेंटीलेशन अच्छा रखें या एग्ज़ॉस्ट फैन लगाएं. इससे किचन में धूल-मिट्टी कम जमती है. एग्जॉस्ट फैन को दीवार की उस दिशा में लगाएं, जहां से विपरीत दिशा से अच्छी हवा आए. फैन को हर छह महीने में मैनुफेक्चरर के निर्देशानुसार क्लीन करें. यदि बाहरी हवा नहीं है तो किचन में भी सिलिंग फैन लगाएं.

* कभी भी गरम कुकर को खिड़की (पिंडी) के पास न रखें, वरना हो सकता है कुकर की हीट से खिड़की का कांच तड़क जाए.

* गैस का सिलेंडर खुली जगह पर रखें. यहां अन्य किसी चीज़ों का अंबार न लगाएं और गैस की पाइप को किसी चीज़ से ढंकें नहीं, अगर कहीं चीरे या कटने का निशान दिखे तो पाइप तुरंत बदलवाएं.

 

Gas Stove,Kitchen safety

* रात को सोने से पहले गैस सिलेंडर का वॉल्व बंद करें.

* घर से बाहर जाते समय चेक कर लें कि सिलेंडर का वॉल्व बंद है या नहीं.

* यदि गैस की गंध आए तो वॉल्व बंद कर दें. खिड़की खोल दें. इलेक्ट्रिक स्विच बंद कर दें और गैस कंपनी में फ़ोन करें.

* किचन में जिस जगह आप काम करती हैं, वहां फ्लोरसेंट लाइट ज़रूर लगवाएं.

* इस बात का ज़रूर ध्यान रखें कि जहां माइक्रोवेव, कुकिंग रेंज या ओवन रखा हो, उसके कम-से-कम एक तरफ 40 सें.मी. चौड़ी जगह हो.

* खाना बनाने का प्लेटफॉर्म इतनी ऊंचाई पर हो कि आपको ज़्यादा झुक कर भी काम न करना पड़े और न ज़्यादा ऊंचे होकर.

* इसी तरह कबर्ड भी इतनी ऊंचाई पर हों कि आप आसानी से उनमें से सामान निकाल या रख सकें. सिंक के मामले में भी यही नियम लागू होता है.

* कुकिंग रेंज इस तरह सेट करें कि गैस पर रखी चीज़ को आसानी से हिलाया जा सके.

* माइक्रोवेव इस तरह रखा जाना चाहिए कि वह आपके आई लेवल पर हो, अन्यथा गर्म खाना आप पर गिर सकता है.

स्मार्ट टिप्स

* घर में ऐसे उपकरण रखें, जो लॉक हो सकें. मार्केट में चाइल्ड लॉक डिवाइस उपलब्ध हैं. यदि आपके घर में बच्चे हैं तो आपके लिए यह बहुत उपयोगी सिद्ध होगा.

* ऐसी कुकिंग रेंज लें जो ऊपर से ग्लास से बनी हो.

* हमेशा ड्राय पार्ट होल्डर्स का ही इस्तेमाल करें. गीला होल्डर हीट (ऊष्मा) ट्रांसमिट करता है. डिश टॉवेल इतने मोटे नहीं होते कि आपकी सुरक्षा कर सकें.

* इस्तेमाल के बाद टोस्टर को बंद कर दें. यदि स्विच ऑन रह गया तो उपकरण ज़्यादा गरम हो जाएगा या फिर उसमें आग लगने का भी डर हो सकता है. दुर्घटना से बचाव करना है तो इलेक्ट्रिक उपकरण का ध्यान रखें.

* यदि लिक्विड को मिक्सर में ब्लेंड करना है तो ध्यान रखें कि वह गरम न हो. पहले उसे ठंडा कर लें, फिर ब्लेंडर में डालें, वरना ब्लेंड करने के बाद जैसे ही आप जार का ढक्कन खोलेंगी तो हो सकता है वह उड़कर आपके चेहरे पर आ जाए.

* रात को काम ख़त्म करने के बाद किचन की पूरी सफ़ाई करें. झाड़ने-पोंछने के कपड़े (डस्टर) को धोकर रखें. हर हफ़्ते इन्हें उबले हुए साबुन के पानी से धोएं और धूप में सुखाएं. हमेशा डस्टर के दो सेट रखें.

* कभी भी कुकर के पास फ्रिज न रखें, वरना इससे फ्रिज की क्षमता पर फ़र्क पड़ेगा. फ्रिज को रोज़ाना अंदर से पोंछ लें. आइस ट्रे को भरने से पहले सुखा लें. जो खाने का सामान उपयोगी नहीं है, उसे निकाल दें. बचे हुए खाने को एक घंटे के बाद फ्रिज में रख दें.

* सूखे व गीले कचरे को अलग-अलग डस्टबिन में डालें. डस्टबिन को भी रोज़ाना साफ़ करें, ताकि गंदगी के कारण जीवाणु न फैलें.

* टूटने वाले सामान, पेस्टिसाइड्स, डिटर्जेंट, माचिस, लाइटर, चाकू व कांटों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें.

* खाना बनाते समय फिटिंग के कपड़े व एप्रेन पहनें. लूज़ स्लीव या दुपट्टा न पहनें. इनमें आग लगने का डर ज़्यादा रहता है.

Kitchen safety_Dish washing_Kitchen Hygiene.

गुड किचन हैबिट्स
* काम ख़त्म होते ही सिंक, प्लेटफॉर्म और गंदे बर्तन तुरंत साफ़ कर लें.

* गंदे बर्तन सिंक में इकट्ठा करने की बजाय तुरंत साफ़ कर लें. अगर तुरंत साफ़ नहीं करना चाहतीं तो बर्तन को कम-से-कम नल के नीचे रखकर पानी डाल दें, ताकि बाद में उन्हें धोना आसान हो सके.

* सब्ज़ी इत्यादि पेपर पर काटें और बचा हुआ कचरा डस्टबिन में फेंक दें.

* ग्रॉसरी शॉपिंग करके आने के बाद चीज़ें तुरंत जगह पर रख दें. खाली कंटेनर तुरंत हटा दें.