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ख़्वाबों के रंग… (Khwabon ke Rang- Home Decor)

आंखों के काजल से खींची है ख़्वाबों की लकीरें… लबों की सुर्ख़ी से रंग भरे हैं दीवारों पर… तेरी यादों के मौसम को सजाया है चिलमन में… और लिख दिया है मुहब्बत दिल की मीनारों पर… 

Home Decor

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आपके घर-आंगन में भी चाहत और मुहब्बत बरसे, लेकिन इसके लिए आपको भी तो कुछ कोशिश करनी होगी, तो क्यों न अपने डेकोर को कुछ न्यू टच दें. अपने बेडरूम को दें नया अंदाज़, नया लुक और भर दें अपने ख़्वाबों के ढेरों रंग.

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  • राइट डेकोर से आप अपने कमरे को दे सकते हैं डिफरेंट व स्टाइलिश लुक.
  •  आपको कूल लुक चाहिए, तो पूरे रूम को सिंगल कलर दें या फिर सिंगल कलर के ही डिफरेंट शेड्स यूज़ करें.
  •  दीवारों के कलर्स हों, बेडशीट्स, कुशन्स, कर्टेन्स या फिर अन्य एक्सेसरीज़- सबको एक ही कलर के डिफरेंट शेड्स दें.
  •  रूम बड़ा भी नज़र आएगा.
  •  आपको रूम का हरेक एलीमेंट और सेग्मेंट अलग दिखाना है, तो हर एक कॉर्नर व दीवार पर आई कैचिंग एक्सेसरीज़
    यूज़ करें.

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  •  छोटी-से-छोटी कोई चीज़ हो या फिर फर्नीचर व कवर्स- सब कुछ डिफरेंट व क्लासी होना चाहिए.
  •  टोन्स आपके बेडरूम को कोज़ी लुक व फील देंगे.
  •  वॉलपेपर्स आजकल हॉट फेवरेट हैं, तो अपने रूम का लुक एंड फील बदलने के लिए इन्हें यूज़ करें.
  •  न स़िर्फ कलर व फर्नीचर, बल्कि टेक्सचर भी बहुत ज़रूरी है डेकोर के लिए. आपके फैब्रिक का टेक्सचर आपके रूम को रिच लुक दे सकता है.
  • कस्टमाइज़्ड बेड पर स्टाइलिश ड्रेप्स आपको सपनों की दुनिया में ले जाएंगे.
  •  आप वॉल्स पर भी कर्टेन्स लगवाकर कुछ डिफरेंट व क्रिएटिव कर सकते हैं.
  •  आप वुडन टच देकर भी कुछ नया कर सकते हैं. ब्राइट कलर और डिफरेंट क्राफ्टिंग से बेडरूम को एक नया ही फील दें.

फोटो सौजन्य: अनीश मोटवानी एसोसिएट्स, साई चेम्बर्स, आर. सी. मार्ग, चेम्बूर (पूर्व), मुंबई- 400071
वेबसाइट: http://www.anishkmotwani.in

– ब्रह्मानंद शर्मा

वर्किंग वाइफ, तो हाउस हसबैंड क्यों नहीं? (Rising Trend Of House Husbands And Their Working Wives)

Rising Trend Of House Husbands

काम के आधार पर लिंग भेद या फिर लिंग के आधार पर काम में अंतर हमारे समाज के लिए कोई नई बात नहीं है. लेकिन इन दिनों जो नई बात हो रही है, वो यह है कि अब पुरुष होममेकर (Rising Trend Of House Husbands) की भूमिका में नज़र आने लगे हैं और महिलाएं ब्रेड अर्नर का रोल निभाने लगी हैं. ज़ाहिर-सी बात है कि हमारा समाज अब तक इतना परिपक्व तो नहीं हुआ है कि स्त्री-पुरुष की इन बदली भूमिकाओं को आसानी से पचा पाए, लेकिन बदलते दौर ने इन बदलावों को जन्म दे ही दिया है, तो इसे स्वीकारने में हर्ज़ ही क्या है?

Rising Trend Of House Husbands

भारत में जन्म ले चुका है हाउस हसबैंड्स का ट्रेंड (Rising Trend Of House Husbands)
– हालांकि हमारे देश के लिए यह कॉन्सेप्ट नया है, लेकिन यहां भी यह ट्रेंड आ रहा है.
– पतियों को और पत्नियों को भी इसमें कोई बुराई नज़र नहीं आती कि अगर पत्नी अच्छा कमा रही है, तो पति घर संभालकर कोई दूसरा काम कर सकता है.
– इसे कपल्स स्वीकारने में अब उतना नहीं हिचकिचाते, जितना कुछ वर्ष पूर्व संकोच किया करते थे.
– इसका सबसे बेहतर उदाहरण है मशहूर लेखक चेतन भगत, जो अपने हाउस हसबैंड  के रोल से संतुष्ट थे. उनकी पत्नी अनुषा फुल टाइम जॉब पर हैं और उनका करियर बेहद सफ़ल है. चेतन भगत ने अपने जुड़वां बच्चों की देखभाल के लिए बैंक की अच्छी-ख़ासी नौकरी छोड़कर घर पर रहकर लेखनी पर ध्यान केंद्रित किया.
– इसी तरह से जानीमानी बिज़नेस वुमन इंदिरा नुई के पति राज किशन नुई ने भी अपनी दो बेटियों की देखभाल के लिए अपना फुल टाइम जॉब छोड़कर कंसल्टेंट बनना अधिक पसंद किया.
– केशव जोशी, जो एक हाउस हसबैंड हैं, अपने अनुभव के बारे में बताते हैं, “मैं और मेरी पत्नी राधा दोनों ही वर्किंग थे, लेकिन शादी के 2 साल बाद हमारी बेटी हुई. जॉइंट फैमिली तो थी नहीं, इसलिए परेशानी होने लगी कि बच्ची को कैसे संभाला जाए. मेरी पत्नी सरकारी नौकरी में थी. उसका करियर और सैलेरी भी मुझसे बेहतर थे, ऐसे में उसका नौकरी छोड़ना सही नहीं लगा और हम दोनों ने ही यह निर्णय लिया कि मैं जॉब छोड़कर बेटी को संभालूंगा और आज 15 साल हो गए हैं, हम दोनों को ही अपने निर्णय पर बेहद संतुष्टि और ख़ुशी है कि हमने सही समय पर सही फैसला लिया.
हां, यह अलग बात है कि मुझे आसपास व यहां तक कि रिश्तेदारों से भी बहुत कुछ सुनना पड़ा, जैसे- पत्नी की कमाई खानेवाले पति की घर में व समाज में भी कोई इज़्ज़त नहीं होती… मेरे दोस्तों ने तो यह भी कहा कि पत्नी और बच्ची दोनों ही तुम्हारा सम्मान नहीं करेंगी, उनकी नज़रों में भी एक समय के बाद तुम नाकारा बन जाओगे…  मेरे भाइयों ने कहा था कि पुरुष होकर तुम औरतों की तरह घर पर बैठोगे? बच्ची का नैप्पी बदलोगे? क्या इससे तुम्हारा स्वाभिमान आहत नहीं होगा…लेकिन हमने इन बातों की परवाह नहीं की. न मेरा सो कॉल्ड मेल ईगो हमारे बीच आया और न ही मेरा आत्मसम्मान इससे आहत हुआ, मेरी पत्नी ही नहीं, मेरी बेटी भी गर्व से सबको हमारे एडजेस्टमेंट्स के बारे में बताती है और हमसे बहुत प्यार करती है.”
– हालांकि हर पुरुष केशव जोशी की तरह परिपक्व सोचवाले नहीं होते, लेकिन सकारात्मक बात यह है कि इस तरह के लोग भी हैं हमारे समाज में.

हाउस हसबैंड्स की चुनौतियां
– हम पुरुषों को डोमिनेटिंग रोल में देखते आए हैं और इस सोच के साथ पले-बड़े होते हैं कि महिलाओं का काम होता है घर संभालना.
– ऐसे में यदि पति कमाने नहीं जाता, तो उसे नाकारे का तमगा पहना दिया जाता है.
– भले ही पति-पत्नी के रिश्ते इससे प्रभावित न हों, लेकिन दूसरों को ज़रूर आपत्ति होती है.
– कई तरह के ताने उन्हें सुनने पड़ते हैं. बार-बार यह एहसास कराया जाता है कि वो पत्नी की कमाई पर जी रहे हैं और उनकी कोई इज़्ज़त नहीं.
– यहां तक कि ख़ुद पुरुषों की यह मानसिकता होती है कि अगर वो पत्नी से कम कमाते हैं, तो वो रिश्तों में अपनी भूमिका को कमतर समझते हैं, जिससे उनका ईगो हर्ट होता है. क्योंकि उनकी परवरिश ही इसी तरह से होती है, तो उनकी मानसिकता इस बदलाव को आसानी से स्वीकार नहीं सकती.
– हम अक्सर पुरुष दर्ज़ी और शेफ को तो आसानी से स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन यदि पति घर में इस तरह के या कोई भी घरेलू काम करते नज़र आते हैं, तो उनसे कहा जाता है कि ‘क्या औरतोंवाले काम कर रहे हो…’
– औरतोंवाले काम और मर्दोंवाले काम- स्त्री-पुरुष के बीच काम का बंटवारा लिंग के आधार पर हमने ही किया है और सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि यदि स्त्रियां पुरुषों के वर्चस्व वाले कार्यक्षेत्र में प्रवेश करती हैं, तो उनकी सराहना की जाती है, लेकिन यदि पुरुष महिलाओं के काम समझे जानेवाले कार्यों में हाथ आज़माते हैं, तो उन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता है, उनकी आलोचना भी की जाती है और ताने भी दिए जाते हैं.
– यह हमारे समाज के दोहरे मानदंड ही हैं, जो पुरषों को हमेशा एक स्तर ऊपर का दर्जा देता आया है और स्त्रियों को कमतर समझता आया है. यही वजह है कि पुरुषों से जुड़े कामों को भी उच्च दर्जे का माना जाता है और स्त्रियों से जुड़े काम और ख़ासतौर से घरेलू कामों को निम्न दर्जे का समझा जाता है.
– यही नहीं, ख़ुद स्त्रियां भी ऐसी ही सोच रखती हैं. वर्किंग वुमेन हाउस वाइफ को अपने से निम्न समझती हैं और ख़ुद हाउस वाइफ भी यही सोच रखती हैं कि हम तो स़िर्फ घरेलू काम करती हैं, जिसमें कोई बड़ी या महान बात नहीं.
– जबकि हर काम में मेहनत और लगन की ज़रूरत होती है, चाहे वो घर का काम हो या बाहर का. लेकिन ये सोच जब तक नहीं बदलेगी हाउस हसबैंड का कॉन्सेप्ट तब तक हमारे समाज में सफल नहीं हो पाएगा.

क्या पुरुष हो सकते हैं बेहतर होम मेकर?
– व़क्त की ज़रूरत ही है कि अब रोल्स बदलने लगे हैं और आज की जनरेशन अपने ईगो व परंपरागत दायरों से बाहर निकलकर सोचने लगी है.
– पुरुष अब एडजेस्ट करने लगे हैं, यही वजह है कि बच्चों को संभालने से लेकर घर तक संभालने में उन्हें हिचक नहीं.
– “मेरी मॉम बचपन से ही मुझसे और मेरे भाई से घर के काम में हेल्प लेती थीं. हमारी कोई बहन नहीं थी, ऐसे में हम दोनों भाइयों के मन में कभी भी काम को लेकर लिंग भेद की बात आई ही नहीं.” यह कहना है 29 वर्षीय विपुल सिंह का. विपुल ने अपना अनुभव हमारे साथ बांटा, “मेरी शादी को 2 साल हो गए हैं. एक बेटी है और मेरी वाइफ वर्किंग नहीं है, लेकिन बावजूद इसके मैं घर के कामों में उसकी मदद करता हूं. मुझे लगता है कि वह भी दिनभर बच्ची की देखभाल व घर के कामों से थक जाती होगी, तो मैं उसे कभी अपने हाथों से परांठे बनाकर खिलाता हूं, तो कभी उसकी फेवरेट डिश तैयार करता हूं. मुझे रिश्तेदारों से यह सुनने को मिलता है कि तुम्हारी वाइफ तो वर्किंग भी नहीं है, फिर भी तुम उसकी हेल्प क्यों करते हो? लेकिन मेरी यह सोच नहीं है. मैं जब अपनी मॉम की हेल्प करता था, तब भी अपनी ज़िम्मेदारी समझ के करता था और आज भी अपनी ज़िम्मेदारी समझ के ही करता हूं.”

हम कितने तैयार हैं हाउस हसबैंड के कॉन्सेप्ट के लिए?
– यह सच है कि समाज की सोच अब धीरे-धीरे बदल रही है, लेकिन फिर भी अधिकतर पुरुष व स्त्रियां भी इस बात को नहीं पचा पातीं कि पुरुष घरेलू काम करें.
– सभी पुरुषों की सोच उतनी खुली व परिपक्व भी नहीं होती कि पत्नी के अच्छे करियर की ख़ातिर अपने सामान्य करियर को छोड़कर घर संभालें और पत्नी की मदद करें.
– अक्सर ऐसे उदाहरण हम देखते हैं, जहां महज़ पुरुष अपने अहंकार की वजह से पत्नी की अच्छी कमाई व करियर को पचा नहीं पाते और इसके चलते रिश्ता टूटने तक की भी नौबत आ जाती है.
– ऐसे में हाउस हसबैंड का ट्रेंड भारतीय समाज को अपनाने में लंबा समय लगेगा.

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वास्तु शास्त्र के नियम (Rules of vastu)

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आपके घर में ख़ुशियां ही ख़ुशियां हों, इसके लिए प्यार और समझदारी के साथ-साथ घर को वास्तुशास्त्र के अनुसार सजाना भी ज़रूरी है. घर का वास्तु करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

* उत्तर दिशा में दक्षिण दिशा से ज़्यादा खुली जगह छोड़नी चाहिए. इसी तरह पूर्व में पश्‍चिम से ज़्यादा खुली जगह छोड़नी चाहिए.

* मकान की ऊंचाई दक्षिण और पश्‍चिम में ज़्यादा होनी चाहिए. मकान की सबसे ऊपरी मंज़िल उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व कोण में होनी चाहिए.

* उत्तर और पूर्व में बरामदा होना चाहिए व उस ओर की ज़मीन सामान्य ज़मीन से निचले स्तर पर होनी चाहिए. इसी तरह दूसरी छत भी अन्य हिस्से  से निचले स्तर पर होनी चाहिए.

* छत हमेशा उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व की ओर होनी चाहिए. दक्षिण और पश्‍चिम में नहीं होनी चाहिए.

* मकान की चारदीवारी उत्तर और पूर्व में नीची और पश्‍चिम व दक्षिण में ऊंची होनी चाहिए.

* कार पार्किंग, नौकरों के लिए कमरा, आउटहाउस आदि दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्‍चिम कोण में होने चाहिए. उनके कमरों की दीवारों से उत्तर और पूर्व  की दीवार जुड़नी नहीं चाहिए और उनकी ऊंचाई प्रमुख भवन से छोटी होनी चाहिए.

* पोर्च, पोर्टिको या बालकनी उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होनी चाहिए. सुख, समृद्वि व स्वास्थ्य के लिए यह लाभदायक है.

* बेडरूम में बेड के लिए आदर्श स्थिति कमरे का मध्य स्थान माना गया है या फिर दक्षिण-पश्‍चिम कोना. बेड को उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार से दूर  रखना चाहिए. दक्षिण या पश्‍चिम की दीवार से सटाकर रखा जा सकता है.

* मकान का ज़्यादा खुला हिस्सा पूर्व और उत्तर में होना चाहिए.

* रसोई में फ्रिज, मिक्सर और भारी सामान दक्षिण और पश्‍चिम दीवार से सटाकर रखें.

* मकान के सभी दर्पण उत्तर या पूर्व की दीवार पर होने चाहिए. दक्षिण और पश्‍चिम की दीवार पर दर्पण नहीं लगाना चाहिए. टॉयलेट के वॉश बेसिन  भी उत्तर या पूर्वी दीवार पर लगाना चाहिए.

* पहली मंज़िल पर दरवाज़े और खिड़कियां ग्राउंड फ्लोर से कम या ज़्यादा होनी चाहिए, एक समान नहीं होनी चाहिए. संभव हो, तो अपना मकान  बनवाते समय अपनी जन्मपत्रिका के अनुसार प्रवेशद्वार बनवाएं, परंतु इतना ज़रूर ध्यान रखें कि प्रवेशद्वार मकान के किसी भी कोण में न हो.

* द़फ़्तर या अध्ययन कक्ष में टेबल को दक्षिण या पश्‍चिम दिशा में रखें, जिससे उसमें बैठनेवाले का मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे.

* मकान के उत्तर-पूर्व कोण में कचरा बिल्कुल न डालें. उस जगह को साफ़-सुथरा रखें.

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* प्रमुख बैठक के कमरे में सोफा आदि बैठने का फ़र्नीचर पश्‍चिम या दक्षिण दिशा में रखना चाहिए. मकान मालिकों को पूर्व या उत्तर दिशा में मुख  करके बैठना चाहिए.

* तिजोरी इस तरह रखनी चाहिए कि उसकी पीठ दक्षिण दिशा में हो अर्थात् खोलते समय तिजोरी का मुंह उत्तर में और हमारा मुंह दक्षिण में होना  चाहिए.

* मकान के पश्‍चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्‍चिम भाग में वज़नी सामान रखा जाना चाहिए.

* डाइनिंग रूम में भोजन करते समय पूर्व या पश्‍चिम की ओर मुख करके भोजन करें.

* हमेशा दक्षिण या पूर्व में सिर रखकर ही सोना चाहिए.

* सोलार हीटर मकान के दक्षिण-पूर्व में रखना चाहिए. मकान पर स्थित पानी की टंकी हमेशा दक्षिण-पश्‍चिम कोने में होनी चाहिए. सीढ़ी और ल़िफ़्ट  पश्‍चिम, दक्षिण दिशा में होनी चाहिए.

* बरसाती पानी की निकासी पश्‍चिम से पूर्व, दक्षिण से उत्तर और अंत में मकान के उत्तर-पूर्व कोने से होनी चाहिए.

* यदि आपके घर में लाल फूल उगते हों तो वे बाहर से दिखाई नहीं देेने चाहिए.

* बगीचे में यदि पत्थर की मूर्ति या पत्थर सजाकर बगीचा बनाया गया हो तो उसे दक्षिण-पश्‍चिम कोने में बनाना चाहिए. यह कोना भारी सामान  रखने के लिए उपयुक्त है.

* दो कमरों के दरवाज़े एकदम आमने-सामने नहीं होने चाहिए.

* चौकोर या आयताकार प्लॉट सर्वश्रेष्ठ है, किंतु बहुत ज़्यादा लंबी आयताकार जगह उचित नहीं है.

* पूर्व या उत्तर दिशा की ओर ऊंची दीवार या अन्य कोई निर्माण नहीं करना चाहिए. ये वास्तु के नियमों का उल्लंघन होगा.

* पूजा स्थान के लिए घर का उत्तर-पूर्व कोना या ईशान कोण सर्वोत्तम स्थान है. मूर्ति का मुंह पूर्व या पश्‍चिम की दिशा में होना चाहिए.

* रसोई के लिए सर्वोत्तम स्थान पूर्व-दक्षिण कोना यानी अग्नि कोण माना गया है.

* भवन का मध्य भाग खुला रहने देें, अथवा अन्य कमरों में आने-जाने के रास्ते की तरह इस्तेमाल करें, क्योंकि इसे ब्रह्मस्थान माना गया है.

* उत्तर-पूर्व दिशा में बाथरूम कभी भी नहीं होना चाहिए, विशेषकर टॉयलेट. जिस फ्लैट में भी ऐसा है, वहां के लोग कभी भी प्रगति व समृद्धि प्राप्त नहीं  कर पाते हैं.