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एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर- क्यों हो जाता है दिल बेइमान? (How extra marital affair affect relationship?)

बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती आकांक्षाएं, उम्मीदें या विश्‍वास की कमज़ोर होती डोर… वजह चाहे जो भी हो, मगर ये सच है कि पिछले एक-डेढ़ दशक से हमारे देश में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के मामले बढ़े हैं. आख़िर क्यों लोगों को अपने घर के बाहर प्यार तलाशना पड़ रहा है, क्यों शादी का रिश्ता कमज़ोर होता जा रहा है? पेश है मेरी सहेली की ख़ास रिपोर्ट.

 

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प्रिंजल और सिद (परिवर्तित नाम) का दो वर्ष पूर्व प्रेम विवाह हुआ था, दोनों ही अपनी शादीशुदा ज़िंदगी से बहुत ख़ुश थे, मगर धीरे-धीरे दोनों के बीच न जाने कब शारीरिक फिर मानसिक दूरियां पनपने लगी. जिसकी वजह से प्रिंजल डिप्रेशन का शिकार हो गई. अपनी नीरस ज़िंदगी से परेशान प्रिंजल जब पति सिद के साथ मनोवैज्ञानिक के पास पहुंची, तो सवाल-जवाब के दौरान उसे पता चला कि उसके पति सिद का उसकी सहेली के साथ अफेयर चल रहा है. बहुत पूछने पर सिद ने सच कुबूल किया, मगर उसके अनुसार एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की वजह ख़ुद प्रिंजल थी, जो बाकी मामलों में तो बहुत अच्छी थी, मगर अपने काम में इस कदर व्यस्त रहती कि वो सिद को समय नहीं दे पाती थी और न ही सेक्स में उसकी ख़ास रुचि थी. दूसरी ओर प्रिंजल की सहेली जो शादीशुदा और स्मार्ट थी, वो भी अपने पति से असंतुष्ट थी, ऐसे में जब उसकी मुलाक़ात सिद से हुई, तो दोनों बहुत जल्दी एक-दूसरे के क़रीब आ गए, मगर सही समय पर मनोवैज्ञानिक से संपर्क करने से सिद और प्रिंजल की शादीशुदा ज़िंदगी बर्बाद होने से बच गई, मगर हर किसी की क़िस्मत इतनी अच्छी नहीं होती. कई मामलों में तो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के कारण कई ज़िंदगियां बर्बाद हो जाती है.

क्या कहते हैं आकड़ें?

* महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर अधिक होते हैं. जहां महिलाओं की संख्या 12% है, वहीं पुरुषों की संख्या 28% है.

* एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में लिप्त ज़्यादातर पुरुष इसके लिए ख़ुद को दोषी नहीं मानते, जबकि महिलाओं के मन में मलाल बना रहता है.

* सेक्स के लिए स़िर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि पुरुषों में नपुंसकता के चलते महिलाएं भी एक्स्ट्रा मैरिटल करने से नहीं हिचकिचातीं.

* शहरों की बात की जाए तो सबसे अधिक एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के मामले मुंबई में समाने आए हैं. राजधानी दिल्ली का नंबर दूसरा है.

* कुछ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर ऐसे भी हैं जो जीवनसाथी की रज़ामंदी से चलते, तो कुछ जीवनसाथी जानकर भी अनजान बने रहते हैं.

दो तरह के होते हैं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स
विशेषज्ञों की मानें तो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर ख़ासकर दो तरह के होते हैं, पहला सेक्सुअल और दूसरा इमोशनल. सेक्सुअल एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में दो ऐसे लोग क़रीब आते हैं, जो अपने-अपने पार्टनर से संतुष्ट नहीं होते और अपनी सेक्सुअल डिज़ायर को पूरा करना चाहते हैं. इमोशनल एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर दो लोग एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़ने के लिए क़रीब आते हैं. रिसर्च के अनुसार, अधिकांशतः महिलाएं इमोशनल अटैचमेंट यानी भावनात्मक ज़ुडाव के चलते एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की ओर क़दम बढ़ाती हैं जबकि पुरुष अक्सर सेक्सुअल डिज़ायर को पूरा करने के लिए.

क्यों बाहर तलाशते हैं प्यार?
आख़िर क्यों आए दिन एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के केसेस बढ़ते जा रहे हैं? आइए, जानने की कोशिश करते हैं.

कमज़ोर होते रिश्ते
प्रोफेसर एवं काउंसलर रश्मि अग्निहोत्री के अनुसार, “वो दिन लद गए जब पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए मरने-जीने को तैयार रहते थे. आज रिश्तों की डोर कमज़ोर हो गई है. जिसे टूटने में पलभर का भी समय नहीं लगता. इसकी सबसे बड़ी वजह है प्यार में कमी. यंगस्टर्स प्यार से ज़्यादा अब अपने कंफर्ट को महत्व देने लगे हैं. वो जीवनसाथी का चुनाव इसलिए नहीं करते, क्योंकि वो उनसे प्यार करते हैं, बल्कि अपनी सहूलियत के लिए ऐसे जीवनसाथी का चुनाव करते हैं, जिनके साथ को नहीं, बल्कि जिनके साथ वो ज़िंदगी को एंजॉय कर सकें. ऐसे में जब रिश्ते की नींव ही कमज़ोर होती है, तो रिश्ता टूटने में देरी नहीं लगती.”

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समय की कमी ने लाई प्यार में कमी
रिसर्च के अनुसार, वर्क प्लेस पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की संभावना अधिक होती है. आज मेट्रो सिटीज़ में अच्छी लाइफस्टाइल के लिए कपल्स ने ख़ुद को इस हद तक बिज़ी कर दिया है कि उनके पास घर-परिवार की छोड़िए, एक-दूसरे के लिए भी समय नहीं है. 8-10 घंटे की जॉब और ट्रैवलिंग में 1-2 घंटे बर्बाद करने के बाद वो इस क़दर थक जाते हैं कि एक-दूसरे से बात करने कि बजाय नींद की आगोश में जाना ज़्यादा पसंद करते हैं. नतीजतन दोनों के बीच दूरियां बढ़ती जाती हैं और पार्टनर की प्यार की कमी की भरपाई के लिए वो बाहर प्यार तलाशने लगते हैं.

ज़रूरत से ज़्यादा प्रैक्टिकल होना
सबसे आगे निकलने की होड़ और बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने युवाओं बहुत कम उम्र में प्रैक्टिकल बना दिया है. प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ वो अब अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में भी प्रैक्टिकल होकर सोचने लगे हैं. एक-दूसरे के इमोशन्स, फिलिंग आदि से उन्हें कोई ख़ास मतलब नहीं होता. ऐसे में ख़ुद को ख़ुश रखने के लिए वो प्रैक्टिकल तरी़के से सोचते हुए एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को ग़लत नहीं समझते.

स्ट्रेस कम करने के लिए भी रखते हैं अफेयर
रिसर्च की मानें तो मेट्रो सिटीज़ में रहने वाले कपल्स हेक्टिक लाइफस्टाइल और स्ट्रेस को कम करने के लिए एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर रखते हैं. इस विषय में मनोवैज्ञानिक निमिषा रस्तोगी कहती हैं “वर्क प्लेस पर होने वाले एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की एक वजह स्ट्रेस भी है, जिससे छुटकारा पाने के लिए कुछ पाटर्नर अपने कलीग के साथ सेक्सुअल रिलेशन बनाते हैं. इससे उन्हें सुख का एहसास होता है और वो ख़ुद को संतुष्ट भी महसूस करते हैं. ऐसे लोग एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को ज़्यादा एंजॉय करते हैं, क्योंकि ऐसे अफेयर्स में पार्टनर के प्रति उन पर किसी तरह की कोई ज़िम्मेदारी नहीं होती है.”

है सबसे बड़ा रुपइया
कई बार पैसों की अधिकता तो कभी पैसों की कमी की वजह से भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर बनते हैं. पार्टनर यदि अपने जीवनसाथी की इच्छाओं को पूरा करने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होता है, तो दूसरा पार्टनर अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए भी किसी दूसरे की ओर आकर्षित होने लगता है, तो कुछ पार्टनर ख़ासकर पुरुष ऐसे भी होते हैं जो पैसों की अधिकता के चलते भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का शौक़ रखते हैं.

ईगो भी है एक वजह
जहां प्यार होता है, वहां अहंकार की कोई जगह नहीं होती, लेकिन आज कपल्स के बीच प्यार के लिए कोई जगह नहीं है, उनकी नज़र में ईगो ही सबसे बड़ा हो जाता है, जिसकी वजह से न वो पार्टनर के आगे कभी झुकते हैं और ना ही कभी आपसी सहमति से रिश्तों की नींव को मज़बूत बनाने की कोशिश करते हैं. नतीजतन अहंकारवश हमसफ़र के आगे झुकने की बजाय वो किसी और से रिश्ता जोड़ना बेहतर समझते हैं.

मीडिया भी है ज़िम्मेदार
मनोवैज्ञानिक निमिषा रस्तोगी कहती हैं, “एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर के लिए बहुत हद तक मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री भी ज़िम्मेदार है. कई ऐसी फिल्में हैं, जो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को बढ़ावा देती हैं. तो कई बार मीडिया भी एक्स्ट्रा मैरिटल के मुद्दे को इस तरह से पेश करता है जैसे एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होना हर एक के लिए आम बात है या सामाजिक तौर पर ग़लत नहीं है.”

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर से बढ़ रहे हैं अपराध
मुंबई की फैमिली कोर्ट के अनुसार, प्रत्येक तीन में से एक तलाक़ की वजह एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर है. एडवोकेट मनोज कुमार पाण्डेय के अनुसार, “एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के चलते न स़िर्फ दिनों दिन तलाक़ के मामलों में इज़ाफा हो रहा है, बल्कि अपराध भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं. कभी प्रेमी को पाने के लिए पत्नियां अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की, तो कभी पैर की बेड़ी बने बच्चों की भी बलि चढ़ा देती हैं, तो वहीं दूसरी तरफ़ अपनी धोखेबाज़ पत्नी को सबक सिखाने के लिए पति भी हत्यारे बन जाते हैं. कुछ पति-पत्नी ऐसे भी हैं, जो जीवनसाथी से धोखा पाने के बाद ख़ुद ही फांसी के फंदे पर चढ़ जाते हैं. ग़ौर फरमाया जाए तो अधिकाशतः एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर महज अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं.”

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का दर्दनाक अंत

पिछले कुछ सालों में एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर के चलते हुए दिल दहलाने वाले वारदातों पर एक नज़र.

* मार्च, 2014 (गुड़गांव) :  44 वर्षीय रजनीश कुमार सिंह को जब इस बात की जानकारी मिली कि उसकी 36 वर्षीया पत्नी श्‍वेता बिंद्रा का किसी ग़ैर  मर्द के साथ अफेयर चल रहा है, तो उसने अपनी पत्नी की चाकू घोंपकर हत्या कर दी.

* अक्टूबर, 2014 (जयपुर) : योगा टीचर दिनेश कुमार ने अपनी 32 वर्षीया पत्नी एवं दो बच्चों की मां कविता कुमावत के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की   ख़बर सुनते ही उस पर अनगिनत बार चाकू से वार करके मौत के घाट उतार दिया.

* नवंबर, 2013 (मुंबई) : 23 वर्षीया पत्नी तृप्ति का कुछ सालों से अफेयर चल रहा है, जब इसकी जानकारी पति जयेश राउत को मिली, तो उसने    सिलिंग फैन से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

* दिसंबर, 2012 (कोलकत्ता) : दो बच्चों की मां निलोफर (29 वर्षीया) का ऑटो रिक्शा चालक के साथ प्रेम संबंध है, ये जानने के बाद निलोफर के बड़े  भाई मेहताब आलम ने आरी से गला रेतकर निलोफर की हत्या कर दी.

एक्स्पर्ट स्पीक

मनोवैज्ञानिक निमिषा रस्तोगी के अनुसार, “एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का अंत तलाक़ है, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. ग़लतियां इंसान से ही होती हैं और हर किसी को सुधरने का एक मौक़ा ज़रूर देना चाहिए. अनजाने में ही सही मगर हो सकता है कि आपकी ओर से भी कुछ ग़लती हुई हो, जिसके चलते आपके पार्टनर किसी दूसरे की तरफ़ आकर्षित हुए हों. ऐसे में न स़िर्फ उन्हें, बल्कि ख़ुद को भी बदलने का मौक़ा दीजिए और सब कुछ भूलाते हुए नई शुरुआत करें.”

प्रोफेसर एवं काउंसलर रश्मि अग्निहोत्री के अनुसार, “एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का एकमात्र हल तलाक़ नहीं है. कपल्स चाहें तो आपसी सहमति से एक नई पारी की शुरुआत कर सकते हैं. बशर्ते जीवनसाथी को अपनी ग़लती का एहसास हो और वो दिल से ख़ुद को गुन्हगार मानते हुए आपके साथ नए सिरे से ज़िंदगी शुरू करना चाहता हो. लोग क्या सोचेंगे, समाज क्या कहेगा? जैसी बातें सोचकर ऐसे रिश्ते में रहने की भूल न करें.”

एडवोकेट मनोज कुमार पाण्डेय के अनुसार, “पिछले कुछ सालों की बात करें, तो तक़रीबन 20% तलाक़ की वजह एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर है, मगर 10% मामले ऐसे भी हैं, जो तलाक से पहले होने वाले मैरिज कॉन्सलिंग से सुलझ भी गए हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आप किसी धोखेबाज़ इंसान के साथ अपनी ज़िंदगी बिताएं.”

मनोवैज्ञानिक डॉ. अंशु कुलकर्णी के अनुसार, “एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का अंत तलाक़ है या नहीं, ये इस बात पर निर्भर करता है कि सामने वाला पार्टनर किस हद तक एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में इंवॉल्व है, अगर उनके मन में गिल्ट है या वो ख़ुद उससे बाहर निकलना चाहता है, तो बेझिझक आप उसे एक मौक़ा दे सकते हैं, मगर वो ख़ुद नहीं चाहता तो ऐसे रिश्ते को आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं. बेहतर है कि आप तलाक़ लेकर अपनी ज़िंदगी अपने तरी़के से जिएं.”

ताकि न आए ऐसी नौबत

किसी ने सच ही कहा है ताली एक हाथ से नहीं बजती, अगर आप दोनों के बीच किसी तीसरे ने जगह ले ली है, तो इसका मतलब स़िर्फ ये नहीं कि आपका पार्टनर ही ग़लत है, हो सकता है कि कमी आपमें भी हो. अपनी शादी को एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर से बचाने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखेंः

* झगड़ा छोटा हो या बड़ा, एक-दूसरे से बातचीत बंद न करें, अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करें और समस्या का हल ढूंढ़ें. वरना आपकी चुप्पी आपके रिश्ते में  दरार डाल सकती है.

* न स़िर्फ शारिरीक संतुष्टि, बल्कि पार्टनर की मानसिक संतुष्टि का भी ख़्याल रखें, कई बार पार्टनर मानसिक सुख और सुकून की आस में भी किसी  तीसरे की ओर क़दम बढ़ाते हैं, ख़ासकर महिलाएं.

* घर या बाहर की अनगिनत ज़िम्मेदारियां भले ही आपके कंधों पर हों, मगर जीवनसाथी को नज़रअंदाज़ करने की ग़लती न करें. आपकी ओर से  ध्यान हटने पर हो सकता है कि उनका ध्यान किसी दूसरे में लग जाए.

* ख़ुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी के लिए स़िर्फ एकसाथ घर में रहना काफ़ी नहीं, पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताना भी ज़रूरी है.

* न स़िर्फ पार्टनर, बल्कि शादी जैसे पवित्र बंधन पर भी विश्‍वास रखें.

* पार्टनर पर हावी न हों. जीवनसाथी को उनके मन मुताबिक जीने दें. कई मामलों में पार्टनर का डॉमिनेटिंग होना भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की वजह  होता है.

फैक्ट फाइल

* रिसर्च के अनुसार, ऐसी महिलाएं जिनके पति कई महीनों या वर्षों के लिए घर-देश से दूर रहते हैं, वो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की ओर जल्दी आकर्षित होती हैं.

* रिसर्च के अनुसार, पत्नी की प्रेग्नेंसी के चलते सेक्सुअल डिज़ायर पूरी न होने से पुरुषों के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की संभावना बढ़ जाती है.

– कंचन सिंह

वर्किंग वाइफ, तो हाउस हसबैंड क्यों नहीं? (Rising Trend Of House Husbands And Their Working Wives)

Rising Trend Of House Husbands

काम के आधार पर लिंग भेद या फिर लिंग के आधार पर काम में अंतर हमारे समाज के लिए कोई नई बात नहीं है. लेकिन इन दिनों जो नई बात हो रही है, वो यह है कि अब पुरुष होममेकर (Rising Trend Of House Husbands) की भूमिका में नज़र आने लगे हैं और महिलाएं ब्रेड अर्नर का रोल निभाने लगी हैं. ज़ाहिर-सी बात है कि हमारा समाज अब तक इतना परिपक्व तो नहीं हुआ है कि स्त्री-पुरुष की इन बदली भूमिकाओं को आसानी से पचा पाए, लेकिन बदलते दौर ने इन बदलावों को जन्म दे ही दिया है, तो इसे स्वीकारने में हर्ज़ ही क्या है?

Rising Trend Of House Husbands

भारत में जन्म ले चुका है हाउस हसबैंड्स का ट्रेंड (Rising Trend Of House Husbands)
– हालांकि हमारे देश के लिए यह कॉन्सेप्ट नया है, लेकिन यहां भी यह ट्रेंड आ रहा है.
– पतियों को और पत्नियों को भी इसमें कोई बुराई नज़र नहीं आती कि अगर पत्नी अच्छा कमा रही है, तो पति घर संभालकर कोई दूसरा काम कर सकता है.
– इसे कपल्स स्वीकारने में अब उतना नहीं हिचकिचाते, जितना कुछ वर्ष पूर्व संकोच किया करते थे.
– इसका सबसे बेहतर उदाहरण है मशहूर लेखक चेतन भगत, जो अपने हाउस हसबैंड  के रोल से संतुष्ट थे. उनकी पत्नी अनुषा फुल टाइम जॉब पर हैं और उनका करियर बेहद सफ़ल है. चेतन भगत ने अपने जुड़वां बच्चों की देखभाल के लिए बैंक की अच्छी-ख़ासी नौकरी छोड़कर घर पर रहकर लेखनी पर ध्यान केंद्रित किया.
– इसी तरह से जानीमानी बिज़नेस वुमन इंदिरा नुई के पति राज किशन नुई ने भी अपनी दो बेटियों की देखभाल के लिए अपना फुल टाइम जॉब छोड़कर कंसल्टेंट बनना अधिक पसंद किया.
– केशव जोशी, जो एक हाउस हसबैंड हैं, अपने अनुभव के बारे में बताते हैं, “मैं और मेरी पत्नी राधा दोनों ही वर्किंग थे, लेकिन शादी के 2 साल बाद हमारी बेटी हुई. जॉइंट फैमिली तो थी नहीं, इसलिए परेशानी होने लगी कि बच्ची को कैसे संभाला जाए. मेरी पत्नी सरकारी नौकरी में थी. उसका करियर और सैलेरी भी मुझसे बेहतर थे, ऐसे में उसका नौकरी छोड़ना सही नहीं लगा और हम दोनों ने ही यह निर्णय लिया कि मैं जॉब छोड़कर बेटी को संभालूंगा और आज 15 साल हो गए हैं, हम दोनों को ही अपने निर्णय पर बेहद संतुष्टि और ख़ुशी है कि हमने सही समय पर सही फैसला लिया.
हां, यह अलग बात है कि मुझे आसपास व यहां तक कि रिश्तेदारों से भी बहुत कुछ सुनना पड़ा, जैसे- पत्नी की कमाई खानेवाले पति की घर में व समाज में भी कोई इज़्ज़त नहीं होती… मेरे दोस्तों ने तो यह भी कहा कि पत्नी और बच्ची दोनों ही तुम्हारा सम्मान नहीं करेंगी, उनकी नज़रों में भी एक समय के बाद तुम नाकारा बन जाओगे…  मेरे भाइयों ने कहा था कि पुरुष होकर तुम औरतों की तरह घर पर बैठोगे? बच्ची का नैप्पी बदलोगे? क्या इससे तुम्हारा स्वाभिमान आहत नहीं होगा…लेकिन हमने इन बातों की परवाह नहीं की. न मेरा सो कॉल्ड मेल ईगो हमारे बीच आया और न ही मेरा आत्मसम्मान इससे आहत हुआ, मेरी पत्नी ही नहीं, मेरी बेटी भी गर्व से सबको हमारे एडजेस्टमेंट्स के बारे में बताती है और हमसे बहुत प्यार करती है.”
– हालांकि हर पुरुष केशव जोशी की तरह परिपक्व सोचवाले नहीं होते, लेकिन सकारात्मक बात यह है कि इस तरह के लोग भी हैं हमारे समाज में.

हाउस हसबैंड्स की चुनौतियां
– हम पुरुषों को डोमिनेटिंग रोल में देखते आए हैं और इस सोच के साथ पले-बड़े होते हैं कि महिलाओं का काम होता है घर संभालना.
– ऐसे में यदि पति कमाने नहीं जाता, तो उसे नाकारे का तमगा पहना दिया जाता है.
– भले ही पति-पत्नी के रिश्ते इससे प्रभावित न हों, लेकिन दूसरों को ज़रूर आपत्ति होती है.
– कई तरह के ताने उन्हें सुनने पड़ते हैं. बार-बार यह एहसास कराया जाता है कि वो पत्नी की कमाई पर जी रहे हैं और उनकी कोई इज़्ज़त नहीं.
– यहां तक कि ख़ुद पुरुषों की यह मानसिकता होती है कि अगर वो पत्नी से कम कमाते हैं, तो वो रिश्तों में अपनी भूमिका को कमतर समझते हैं, जिससे उनका ईगो हर्ट होता है. क्योंकि उनकी परवरिश ही इसी तरह से होती है, तो उनकी मानसिकता इस बदलाव को आसानी से स्वीकार नहीं सकती.
– हम अक्सर पुरुष दर्ज़ी और शेफ को तो आसानी से स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन यदि पति घर में इस तरह के या कोई भी घरेलू काम करते नज़र आते हैं, तो उनसे कहा जाता है कि ‘क्या औरतोंवाले काम कर रहे हो…’
– औरतोंवाले काम और मर्दोंवाले काम- स्त्री-पुरुष के बीच काम का बंटवारा लिंग के आधार पर हमने ही किया है और सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि यदि स्त्रियां पुरुषों के वर्चस्व वाले कार्यक्षेत्र में प्रवेश करती हैं, तो उनकी सराहना की जाती है, लेकिन यदि पुरुष महिलाओं के काम समझे जानेवाले कार्यों में हाथ आज़माते हैं, तो उन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता है, उनकी आलोचना भी की जाती है और ताने भी दिए जाते हैं.
– यह हमारे समाज के दोहरे मानदंड ही हैं, जो पुरषों को हमेशा एक स्तर ऊपर का दर्जा देता आया है और स्त्रियों को कमतर समझता आया है. यही वजह है कि पुरुषों से जुड़े कामों को भी उच्च दर्जे का माना जाता है और स्त्रियों से जुड़े काम और ख़ासतौर से घरेलू कामों को निम्न दर्जे का समझा जाता है.
– यही नहीं, ख़ुद स्त्रियां भी ऐसी ही सोच रखती हैं. वर्किंग वुमेन हाउस वाइफ को अपने से निम्न समझती हैं और ख़ुद हाउस वाइफ भी यही सोच रखती हैं कि हम तो स़िर्फ घरेलू काम करती हैं, जिसमें कोई बड़ी या महान बात नहीं.
– जबकि हर काम में मेहनत और लगन की ज़रूरत होती है, चाहे वो घर का काम हो या बाहर का. लेकिन ये सोच जब तक नहीं बदलेगी हाउस हसबैंड का कॉन्सेप्ट तब तक हमारे समाज में सफल नहीं हो पाएगा.

क्या पुरुष हो सकते हैं बेहतर होम मेकर?
– व़क्त की ज़रूरत ही है कि अब रोल्स बदलने लगे हैं और आज की जनरेशन अपने ईगो व परंपरागत दायरों से बाहर निकलकर सोचने लगी है.
– पुरुष अब एडजेस्ट करने लगे हैं, यही वजह है कि बच्चों को संभालने से लेकर घर तक संभालने में उन्हें हिचक नहीं.
– “मेरी मॉम बचपन से ही मुझसे और मेरे भाई से घर के काम में हेल्प लेती थीं. हमारी कोई बहन नहीं थी, ऐसे में हम दोनों भाइयों के मन में कभी भी काम को लेकर लिंग भेद की बात आई ही नहीं.” यह कहना है 29 वर्षीय विपुल सिंह का. विपुल ने अपना अनुभव हमारे साथ बांटा, “मेरी शादी को 2 साल हो गए हैं. एक बेटी है और मेरी वाइफ वर्किंग नहीं है, लेकिन बावजूद इसके मैं घर के कामों में उसकी मदद करता हूं. मुझे लगता है कि वह भी दिनभर बच्ची की देखभाल व घर के कामों से थक जाती होगी, तो मैं उसे कभी अपने हाथों से परांठे बनाकर खिलाता हूं, तो कभी उसकी फेवरेट डिश तैयार करता हूं. मुझे रिश्तेदारों से यह सुनने को मिलता है कि तुम्हारी वाइफ तो वर्किंग भी नहीं है, फिर भी तुम उसकी हेल्प क्यों करते हो? लेकिन मेरी यह सोच नहीं है. मैं जब अपनी मॉम की हेल्प करता था, तब भी अपनी ज़िम्मेदारी समझ के करता था और आज भी अपनी ज़िम्मेदारी समझ के ही करता हूं.”

हम कितने तैयार हैं हाउस हसबैंड के कॉन्सेप्ट के लिए?
– यह सच है कि समाज की सोच अब धीरे-धीरे बदल रही है, लेकिन फिर भी अधिकतर पुरुष व स्त्रियां भी इस बात को नहीं पचा पातीं कि पुरुष घरेलू काम करें.
– सभी पुरुषों की सोच उतनी खुली व परिपक्व भी नहीं होती कि पत्नी के अच्छे करियर की ख़ातिर अपने सामान्य करियर को छोड़कर घर संभालें और पत्नी की मदद करें.
– अक्सर ऐसे उदाहरण हम देखते हैं, जहां महज़ पुरुष अपने अहंकार की वजह से पत्नी की अच्छी कमाई व करियर को पचा नहीं पाते और इसके चलते रिश्ता टूटने तक की भी नौबत आ जाती है.
– ऐसे में हाउस हसबैंड का ट्रेंड भारतीय समाज को अपनाने में लंबा समय लगेगा.

पति-पत्नी की खट्टी-मीठी शिकायतें (Managing Relationship Complains With Humor)

Managing Relationship

पति-पत्नी का ख़ूबसूरत रिश्ता. जुड़ जाता है ज़िंदगीभर का साथ और हर सुख-दुख में साथ निभाने के वादे, लेकिन हर संभव व मुमकिन कोशिश के बावजूद इनके बीच छोटी-छोटी तक़रारें और तू-तू-मैं-मैं हो ही जाती है. तो चलिए, जानते हैं, पति-पत्नी की खट्टी-मीठी शिकायतें. 

Managing Relationship
पत्नियों की आम शिकायतें
  • मूड तो सुबह इनके आलस्य से ही उखड़ जाता है. चाय गरम कीजिए, उठने में इतना आलस्य कि ठंडी हो जाती है. चाय के साथ पेपर भी चाहिए. फिर चाय ठंडी हो जाती है और फिर एक कप गरम प्याली के लिए आप अपने सब काम छोड़कर चाय बनाते रहिए. सुनते रहिए, जल्दी करो लेट हो रहा हूं.
  • ऑफ़िस जानेवाले पतियों को मोजे, घड़ी, रुमाल जैसी चीज़ों के लिए भी पत्नी की मदद चाहिए.
  • बहुत बुरा लगता है, जब शाम को आकर पूछते हैं, क्या करती रही दिनभर? मैं तो सुबह ही निकल गया था. पलंग पर पड़ा गीला तौलिया सुखाना, आलमारी लगाना, खाना बनाना, कपड़े धोना, घर के अनेक काम क्या कोई और कर जाता है.
  • ऑफ़िस में काम ये करें. जी हुज़ूरी हम बजाएं. ज़रा मेरी डायरी से एक नंबर देना, ज़रा अमुक फाइल से फलां एड्रेस देना और अगर फ़ोन उठाने में देर हो गई, तो कहां गई थी? किसके साथ बिज़ी थी? जैसे हज़ार सवाल.
  • अपने माता-पिता के आदर्श बेटे ये कहलाते हैं. पर शादी के बाद इनका फ़र्ज़ इतना रह जाता है कि पत्नी से पूछते रहें- अम्मा-बाबूजी ने खाना खा लिया? उन्हें दवा दे दी, डॉक्टर से बात कर ली, उनका चश्मा ठीक करवा दिया आदि-आदि.
  • घर आते ही पति महोदय टीवी का रिमोट हाथ में ले लेते हैं और पत्नी को भी बड़े प्यार से पास बैठा लेते हैं. अब ये चैनल बदलते रहेंगे और आप इनका चेहरा देखती रहिए. जिस मिनट आपने कुछ देखना शुरू किया कि प्रोग्राम को बकवास कहकर चैनल बदल दिया जाएगा.
  • ये बीवी में अपनी मां की परछाईं क्यों ढूंढ़ते हैं. खाना आप बनाइए, लेकिन तारीफ़ में मां पुराण व मां के भोजन की गाथा. यहीं से शुरू होती है हमारी व्यथा कथा. कोई इन्हें समझाए, बच्चे नहीं हो, जो बात-बात पर मां… मां… पुकारते रहते हो.
  • बड़ी हंसी आती है, जब ख़ुद को सुपरमैन व महान समझते हैं और पत्नी को महामूर्ख.
  • इनके द्वारा किया गया हर पर्सनल ख़र्च ज़रूरी भी है और सही भी और पत्नी का हर पर्सनल ख़र्च फ़िज़ूलख़र्च. गाड़ी का सीट कवर ज़रूरी है, लेकिन पत्नी का मैचिंग सैंडल व्यर्थ का ख़र्च. इनका जवाब होता है कि कौन देखता है पैरों की सैंडल? तो क्या गाड़ी का कवर आता-जाता व्यक्ति झांक-झांककर देखता है.
  • स्टीयरिंग व्हील पर बैठकर ख़ुद को किसी महाराजा से कम नहीं समझते (जबकि ड्राइवर सीट पर बैठे हैं). जगह ढूंढ़ने में चार चक्कर भी लग जाएं, तो कोई बात नहीं, लेकिन पत्नी के कारण एक भी चक्कर ज़्यादा लग गया, तो तुरंत पेट्रोल के बढ़ते दाम याद दिलाने लगते हैं.
  • अपनी स्मार्टनेस को लेकर ग़लतफ़हमी का शिकार रहते हैं. सोचते हैं कि पड़ोसी की बीवी इन पर फ़िदा है. भले ही तोंद बड़ी हो और सिर के बाल नदारद हों.
  • बाप रे बाप! यदि किसी टूटी चीज़ को रिपेयर करने के मूड में आ जाएं, तो बस आप बार-बार खाना गरम कीजिए और इंतज़ार कीजिए. रिपेयर हो गई, तो कॉलर ऊंचा, वरना हर नाक़ामी की जड़ बीवी तो है ही.
  • शादी से पहले सभ्य, सुसंस्कृत या शेयरिंग-केयरिंग वाले होते हैं, लेकिन शादी के बाद तो बस, पति के अधिकार ही याद रह जाते हैं. मैं ज़रा ज़्यादा ही बड़ा हो जाता है.
  • बर्थडे या ख़ास दिन भूल जाना इनकी आदत में शुमार है. यदि पत्नी ने नाराज़गी ज़ाहिर कर दी, तो मनाना तो दूर, काम का ऐसा बहाना बनाते हैं कि बेचारी पत्नी अपराधबोध से घिर जाती है.
  • बीवी का मायका तभी तक अच्छा लगता है, जब तक साली हंसी-मज़ाक करे, ख़ातिर होती रहे. यदि पत्नी मायके में अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों या भाई-बहनों के बीच ज़्यादा एंजॉय करने लगे, तो मूड ऑफ होते देर नहीं लगती.
  • बीवी से उम्मीद करते हैं कि वो अपना ईमेल आईडी, पासवर्ड, बैंक स्टेटमेंट इन्हें बताए, लेकिन इनके मोबाइल के मैसेज पत्नी पढ़ ले, तो रास नहीं आता.
  • पत्नी से आशा रखते हैं कि वो शादी से पहले का अपना हर सीक्रेट शेयर करे, लेकिन अपने वर्तमान सीक्रेट्स की भी हवा नहीं लगने देते हैं.
  • तर्क में यदि पत्नी सही नज़र आती है, तो भी हार मानना गवारा नहीं. सुनने को मिलता है, चार पैसे क्या कमाने लगीं, बात-बात पर बहस करने लगी हो.
  • अपनी गर्लफ्रेंड्स के क़िस्से बड़ी शान से सुनाते हैं, लेकिन बीवी पड़ोसी या दोस्त की भी बात करे, तो शक की निगाह से देखते हैं.
  • यदि बच्चे कुछ अच्छा करते हैं, तो बड़ी शान से कहते हैं कि ङ्गमेरा बेटा/बेटी हैफ और यदि कुछ ग़लत कर बैठें तो तुम्हारी ट्रेनिंग है.

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Managing Relationship
सुनते हैं, पतियोंकी शिकायतें
  • बहाना बनाना और बेवकूफ़ बनाना कोई इनसे सीखे. हमारे रिश्तेदारों के आने की ख़बर से कब और कहां दर्द हो जाएगा अथवा कौन-सा बाहरी काम निकल आएगा, ब्रह्मा भी नहीं समझ सकते हैं.
  • इनकी नैगिंग और नकारात्मक सोच या बात काटने की आदत अच्छे-भले पति को भी नकारा साबित कर सकती है.
  • अपनी ख़ूबसूरती और मोटे-पतले की चिंता में दिनभर व्यस्त रहेंगी और पति को भी बोर करेंगी. घर में हमेशा डायटिंग चलती है, जबकि किसी पार्टी में मज़े से चाट-पकौड़ियां उड़ाई जाती हैं.
  • इंतज़ार कराना इनकी ख़ास ख़ूबी है. पार्टी में जाने के लिए पति तैयार बैठा इंतज़ार करता है, मैडम तय ही नहीं कर पाती हैं कि किस ड्रेस में ज़्यादा ख़ूबसूरत और पतली दिखेंगी. फ़िलहाल सामने आकर पूछें कि कैसी लग रही हूं? तो ङ्गबहुत सुंदरफ ही कहना पड़ता है, वरना इंतज़ार की घड़ियां और बढ़ जाएंगी.
  • दिनभर दुनियाभर की चकल्लस होती रहेगी, लेकिन पति के पास बैठते ही बात घूम-फिरकर पैसों पर क्यों आ जाती है, समझना मुश्किल है.
  • दूसरों की देखा-देखी नकल करना, इनका प्रिय शौक़ होता है. दूसरों का फ़र्नीचर, ज्वेलरी व कपड़े सब पसंद आते हैं. यहां तक कि सास-ननद और पति भी दूसरे के ज़्यादा अच्छे लगते हैं.
  • ख़ुद को सर्वगुणसंपन्न समझने की ग़लतफ़हमी सात फेरों के साथ ही पाल लेती हैं, तभी तो पति को सुधारने का बीड़ा उठा लेती हैं.
  • पड़ोसी या अपनी कलीग से पति की तुलना करना इनकी दिनचर्या में शामिल है. कुछ कहो, तो बाल की खाल निकालकर रख देती हैं.
  • इनका मूड बदलते देर नहीं लगती है. कल तक मिसेज़ चतुर्वेदी बहुत अच्छी पड़ोसन थी, लेकिन यदि पति ने भी उनकी प्रशंसा में दो शब्द जोड़ दिए, तो पड़ोसन से मेल-मिलाप औपचारिक हो जाता है. साथ ही पति को भी सख़्त हिदायत कि उनकी बात न करें.
  • महिलाओं की छठी इंद्रिय की खोज जिस किसी ने भी की, उसे दाद देनी पड़ेगी. यदि पति से कोई भूल या ग़लती हो जाए और वो पत्नी को बताए, तो रिएक्शन होगा, मुझे पहले ही पता था कि तुम कुछ ऐसा ही करोगे.
  • इनका मायका पुराण या पापा चाहते हैं, भैया कहते हैं सुन-सुनकर कान पक जाते हैं. यह ज़िंदगी का सबसे बोरिंग अध्याय है.
  • ऑफ़िस जाते समय बड़े प्यार से पूछेंगी, डिनर में क्या खाओगे? यदि आपने उत्साहपूर्वक पिज़्ज़ा या आलू परांठे की इच्छा ज़ाहिर कर दी, तो आपका वज़न और उनकी कैलोरीज़ गिना-गिनाकर पेट भर देंगी. बनेगा वही, जो इनकी सुविधा के अनुसार होगा. तो फिर पूछती ही क्यों हैं?
  • इनकी जासूसी और तर्क के आगे तो बड़े-बड़े जासूस भी गच्चा खा जाएं. कहां, किसके साथ, क्यों, कब का जवाब देते समय सावधान रहना पड़ता है या फिर बगलवाले शर्माजी तो समय से घर आ गए थे, आपको क्यों देर हुई? रास्ता तो एक ही है… जैसे प्रश्‍नों के लिए तैयार रहना पड़ता है.
  • इनकी शॉपिंग और विंडो शॉपिंग मेनिया से भगवान ही बचाए. ना कहना भी ख़तरे से खाली नहीं और हां कहना भर मुसीबत है. 10-15 रुपए के लिए दुकानदार से झिक-झिक करेंगी, ना माने तो दुकान से निकल लेंगी. शरमा-शरमी में हमें भी दुकानदारों से नज़रें चुराते हुए पीछे-पीछे निकलना पड़ता है.
  • कपड़े कितने भी हों, लेकिन जब कहीं जाना हो, तो क्या पहनूं? और बहुत समय से आपने कुछ दिलाया नहीं का रोना पतियों को सुनना ही पड़ता है.
  • जाने कहां-कहां से रेसिपीज़ बटोरकर पति पर आज़माना इनका बड़ा प्यारा-सा ख़तरनाक शौक़ है और फिर उम्मीद यह कि पति तारीफ़ भी करे.
  • बात मनवाने का इनका बड़ा ही प्रभावशाली अस्त्र है आंसू, जो हमेशा गंगा-जमुना की तरह आंखों में भरे ही रहते हैं.
  • चीज़ों को यथास्थान रखने और सफ़ाई करने का भूत चौबीसों घंटे इनके सिर पर सवार रहता है. पति द्वारा सामान बिखेरने पर ताने-उलाहनों का दौर चल पड़ता है, लेकिन यदि भाई कमरे में सामान फैलाकर छोड़ दे, तो बड़े दुलार से कहेंगी, भैया का बचपना अभी भी गया नहीं.
  • जन्मदिन या सालगिरह भूल जाने पर इतनी इमोशनल क्यों हो जाती हैं? हर साल तो आती है, यदि भूल गए, तो कौन-सा पहाड़ टूट पड़ा?
  • इनकी कमाई पॉकेटमनी और हमारी कमाई घर ख़र्च के लिए है. यदि कम पड़ती है, तो हमारे हर शौक़ पर टीका-टिप्पणी शुरू हो जाती है.

– प्रसून भार्गव

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10 बातें जो पति को कभी न बताएं (10 things you should never tell to your husband)

Things never to tell to your husband

पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार और विश्‍वास निहायत ज़रूरी होता है, लेकिन ऐसी कई बातें (Things never to tell to your husband) होती हैं, जिन्हेें न कहना ही उचित होता है. पर्सनल टच काउंसलिंग सेंटर की सायकोलॉजिकल काउंसलर डॉ. रीटा खार  से बातचीत के आधार पर प्रस्तुत हैं वे बातें, जो पति को कभी नहीं बतानी चाहिए.

Things never to tell to your husband

1. पति को अपनी पर्सनल सेविंग के बारे में कभी भी न बताएं. वे आपकी इमर्जेन्सी में काम आने वाले बचत के पैसे होते हैं. पुरुषों की प्रवृत्ति भी कुछ हद तक फ़िजूलख़र्ची की होती है. ऐसे में उन्हें अपने बचत के पैसों के बारे में न बताना ही ठीक रहता है.

2. शादी से पहले या फिर अतीत में कभी आपका कोई अ़फेयर रहा हो तो उसके बारे में पति को कतई न बताएं. पति पज़ेसिव और शक्की मिज़ाज के होते हैं. वे इस तरह की बातें बिल्कुल बर्दाश्त
नहीं करते. साथ ही यदि पुरुष मित्र को आप बहुत पसंद भी करती हों तो पति को न कहें, न ही उसका अधिक नाम लें. इससे भविष्य में कई समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं.

3. पार्टी, फंक्शन, रिश्तेदारों के बीच, दोस्तों के साथ रहने पर उनके सामने पति की कमियों और बुरी आदतों का रोना रोने न लग जाएं. बहुत कम पति होते हैं, जो इन सब बातों को सहज ढंग से लेते हैं. लेकिन इससे जहां पति के मान-सम्मान को ठेस पहुंचती है, वहीं पति तनाव और हीनभावना के शिकार भी होते हैं.

4. अपने मायके और ससुराल के किसी व्यक्ति विशेष ख़ासकर ननद, देवर, बहन आदि की बुराई उनके सामने न करें. इससे कभी-कभी बात का बतंगड़ बन सकता है.

5. मुझे आप पर विश्‍वास नहीं रहा- इस तरह की बातें पति से न बोलें. पति-पत्नी का रिश्ता ही विश्‍वास की नींव पर टिका होता है. कहीं ऐसा न हो कि आपकी यह सोच रिश्तों में दरार पैदा कर दे.

6.पति को यह कभी न क़हें कि आप उन्हें पसंद नहीं करतीं या उनसे नफ़रत करती हैं. अक्सर पत्नियां झगड़ा होने या किसी भी तरह का वाद-विवाद होने पर पति को इस तरह के उलाहने देकर कोसती हैं. आपका इस तरह से कहना उन्हें आहत कर सकता है.

7. यदि आप पति से अधिक सुंदर हैं या फिर आपकी बेमेल जोड़ी है तो इस बात का गुरूर न करें. शादी-ब्याह और रिश्ते संजोग से बनते हैं. बात-बात पर आपका पति को नीचा दिखाना और अपनी ख़ूबसूरती का बखान करना उन्हें दुखी कर देगा. इससे वे डिप्रेशन के भी शिकार हो सकते हैं.

8. यदि आप कामकाजी हैं तो यक़ीनन ऑफ़िस में आपको तरह-तरह के लोगों को रोज़ाना हैंडल करना पड़ता होगा, अतः बेहतर होगा कि घर-ऑफ़िस को अलग-अलग रखें. न घर की बातें ऑफ़िस में, न ऑफ़िस की घर में, क्योंकि पति आपकी ऑफ़िस की समस्या को उतना समझ तो पाएंगे नहीं, बल्कि आपकी परेशानी से वे भी परेशान हो उठेंगे.

9. अपने उच्च पद और तनख़्वाह (यदि पति से अधिक) का पति पर रौब न जमाएं. हर इंसान का अपना कैलिबर होता है. आपका यह व्यवहार उन्हें कुंठित कर सकता है.

10. हमारे मायके में तो ऐसा नहीं होता था… अक्सर पतियों को अपनी पत्नियों से इस तरह के जुमले सुनने  को मिलते हैं. पत्नियां ससुराल के रीति-रिवाज़, क्रियाकलापों आदि की तुलना अपने मायके से करती रहती हैं, जिससे शायद हर पति पीड़ित रहता है. अधिकतर पति कहते नहीं, लेकिन ये सभी बातें उनके मन में चुभती ज़रूर हैं. अतः बेहतर होगा कि इस तरह की बातों से बचें.

– ऊषा गुप्ता

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वास्तु दोष मिटाएं, पति-पत्नी में प्यार बढ़ाएं (Vastu Tips For Happy Married Life)

दांपत्य जीवन (Married Life) में ऐसा होता है कि कभी-कभी जीवनसाथी (Life Partner) से विचार नहीं मिलते, छोटी-छोटी बात पर अनबन हो जाती है और तनाव भी बना रहता है. इसका कारण घर का वास्तु दोष हो सकता है. इस दोष से छुटकारा पाने के लिए आपको घर की सजावट वास्तु (Vastu) के अनुसार करनी चाहिए.

 

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सुखी वैवाहिक जीवन के लिए वास्तु
घर के दोष मिटाने और पति-पत्नी में प्यार बनाए रखने के लिए कुछ वास्तु टिप्स.

जानें कुछ वास्तु दोष

* बेडरूम (Bedroom) में 2-3 या अधिक औरतों वाली तस्वीर लगाना.

* बेडरूम में मंदिर बनवाना या रखना.

* बेडरूम में ही ऑफ़िस, स्टडी रूम या टीवी रूम बना लेना.

* दो बेड जोड़कर सोना.

* सोते समय सिर के ऊपर बीम होना.

दोष निवारण उपाय

* पत्नी को पति के बाईं तरफ़ ही सोना चाहिए.

* शादी की एलबम व अन्य तस्वीरें समय-समय पर देखते रहें. अपने फ़ोटोग्राफ़्स को उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व में लगाएं.

* बेड के अंदर बर्तन, क़िताबें, टूटा सामान, ख़राब इलेक्ट्रॉनिक सामान, दवाइयां इत्यादि न रखें.

* दहाड़ते हुए जानवरों की व लड़ाई वाली पेंटिंग बेडरूम में नहीं होनी चाहिए.

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प्यार की डोर को और मज़बूत बनाएं
सफल गृहस्थ जीवन, आपसी प्रेम और विश्‍वास को बनाए रखने के लिए अपनाएं कुछ आसान उपाय-

* दक्षिण-पश्‍चिम खंड में हमेशा पृथ्वी या अग्नि से जुड़े रंगों का ही प्रयोग करें. परदे, कुशन, खिड़कियों आदि में इनका उपयोग ठीक रहता है.

* जीवनसाथी को जो बात पसंद न हो, वह रात में न करें.

* गुलाबी रंग रोमांस को दर्शाता है. अगर यह आपको ज़्यादा भड़कीला लगे, तो हल्का गुलाबी रंग करवा लें.

* प्रेम को बढ़ाने के लिए घर के दक्षिण-पश्‍चिम भाग में कांच या सिरामिक पॉट में छोटे-छोटे पत्थर या क्रिस्टल्स डालकर लाल रंग की दो मोमबत्तियां  जलाएं. इससे सकारात्मक ऊर्जा फैलेगी.

* यदि आपको लगे कि आपका प्यार छिन रहा है, तो अपने कमरे में शंख या सीपी अवश्य रखें. इससे आपका प्यार आपसे दूर नहीं जा पाएगा.

* घर के ईशान कोण का बहुत ही महत्व है. यदि इस दिशा में पति-पत्नी साथ बैठकर पूजा करें, तो उनका आपस का अहंकार ख़त्म होकर संबंधों में  मधुरता बढ़ती है.

* पिंक या लैवेंडर रंग के पर्दे या बल्ब कमरे में लगाएं.

* अगर आपको लगता है कि आपके पार्टनर के क़दम बहक रहे हैं और वह किसी के प्रति आकर्षित हो रहा है, तो उसे परिवार में वापस लाने के लिए  सिर के नीचे कौड़ी रखें.

* गुरुवार को केले या पीपल के पेड़ पर दोनों एक साथ जल चढ़ाएं.

* संभव हो तो शुक्रवार को पति-पत्नी एक-दूसरे को परफ़्यूम गिफ़्ट करें.

* शनिवार के दिन आम या अशोक की टहनी बेडरूम में रखने से रिश्तों में मिठास बनी रहती है.

* प्रभु स्मरण करते हुए कमरे की सीलिंग देखते हुए सोएं.

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बेडरूम के लिए वास्तु गाइड ( Architectural Guide to the bedroom)

Architectural Guide

यदि आप वैवाहिक जीवन में ख़ुशी चाहते हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बेडरूम हवादार और शांत हो. कमरे में होनेवाली बातचीत की आवाज़ बाहर न जाने पाए. इससे दांपत्य जीवन में मिठास बढ़ती है. यहां वास्तुशास्त्री डॉ. प्रेम गुप्ता बेडरूम के वास्तु से जुड़ी कई उपयोगी बातों की जानकारी दे रहे हैं. Architectural Guide

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* हर पूर्णिमा के दिन सोने के पानी (कोई भी गोल्ड ज्वेलरी को पानी में डालकर निकाल लें और इस पानी का इस्तेमाल करें) से स्वस्तिक बनाएं.

* बेडरूम घर का सबसे ख़ास हिस्सा होता है. यहां रखी हर चीज़ का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव पड़ता है, जैसे- फोटो, फ्लावर पॉट, पलंग आदि. यहां  पति-पत्नी अपना मुस्कुराता हुआ साथ का फोटो लगा सकते हैं, पर फोटो पैरों की ओर न लगाएं.

* कमरे में रोमांटिक पोज़वाले युगल पक्षी की तस्वीर लगाएं.

* रोमांटिक पोज़वाले सेक्सी क्रिस्टल जोड़े व फोटो से बेडरूम को सजाएं.

* हर अमावस्या को काले तिल उत्तर/पश्‍चिम कोने में रखें.

* रोमांस व प्राइवेसी बनी रहे, इसके लिए ध्यान रहे कि बेडरूम की खिड़की दूसरे कमरे में न खुले.

* चांदी की कटोरी में कपूर रखें.

* आपसी प्यार और बेडरूम की ख़ूबसूरती के लिए मनी प्लांट्स भी लगाए जाते हैं. ये शुक्र के कारक हैं. मनी प्लांट लगाने से पति-पत्नी के संबंध मधुर  होते हैं.

* बेडरूम में हल्की गुलाबी रंग की रोशनी होने से कपल्स में प्रेम बना रहता है.

* शिव रूद्राक्ष गुलाबजल में भिगोकर रखें.

* वास्तु के अनुसार हमेशा दक्षिण या पूर्व दिशा में सिर करके सोएं, ताकि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार आप दीर्घायु और गहरी नींद प्राप्त कर सकें  आरामदायक व भरपूर नींद से दांपत्य जीवन अधिक सुखद बनता है.

* पत्नी पति के बाईं ओर सोए.

* यदि कमरे में ड्रेसिंग टेबल हो, तो इस बात का ख़्याल रखें कि सोते समय आपका प्रतिबिंब आईने पर न पड़ने पाए. यदि ऐसा हो, तो आईने कोढंक दें.

* लव बर्ड, मैंडरीन डक जैसे पक्षी प्रेम के प्रतीक हैं. इनकी छोटी मूर्तियों का जोड़ा कमरे में रखें.

* बेडरूम में हल्की व ख़ूबसूरत लाइट व्यवस्था हो, पर रोशनी सीधी पलंग पर न पड़े.

* वास्तु के अनुसार बेडरूम में बाथरूम नहीं होना चाहिए, क्योंकि दोनों की ऊर्जाओं का परस्पर आदान-प्रदान सेहत के लिए अच्छा नहीं होता.

* फिर भी बेडरूम में बाथरूम रखना चाहते हों, तो नैऋत्य कोण में बनवाएं. यदि ऐसा संभव न हो, तो वायव्य कोण (उत्तर-पश्‍चिम) में भी बाथरूम  बनवाया जा सकता है.

* अगर बेडरूम में बाथरूम है, तो हर पूर्णिमा या शुक्रवार को नमक के पानी से बाथरूम धोएं.

* ऐसे कपल्स, जो संतान सुख पाना चाहते हैं, वे श्रीकृष्ण का बाल रूप दर्शानेवाली फोटो अपने बेडरूम में लगाएं.

* बेड के नीचे मोर पंख रखें.

* बेडरूम में पूजा स्थल बनवाना या देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना वास्तु शास्त्र के अनुसार ठीक नहीं है, फिर भी यदि चाहें,
तो राधा-कृष्ण की तस्वीर बेडरूम में लगा सकते हैं.

* यदि आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और इसी वजह सेे दांपत्य जीवन सुखमय नहीं है, तो सुंदर से बाउल मेें पवित्र क्रिस्टल को चावल के दानों के  साथ मिलाकर रखें.

* क्रिस्टल क्वार्ट्ज़ स्टोन के बने शोपीस पति-पत्नी के प्रेम को बढ़ाते हैं. ये क्रिस्टल गुलाबी रंग के होते हैं और इनसे सकारात्मक ऊर्जा का स्तर बहुत  अच्छा होता है.

* लाल कपड़े की थैली में तांबे व पीतल के सिक्के रखें.

* कभी-कभी बेडरूम की खिड़की से नकारात्मक वस्तुएं दिखाई देती हैं, जैसे- सूखा पेड़, फैक्ट्री की चिमनी से निकलता हुआ धुआं आदि. ऐसे दृश्यों से  बचने के लिए खिड़कियों पर परदा डाल दें.

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ऐसा न करें

* बेडरूम में आईना न लगाएं.

* कमरे में कभी भी टूटा हुआ शीशा नहीं रखें.

* उत्तर दिशा में बेडरूम नहीं होना चाहिए. यदि है, तो मोतियों का बंदनवार लगाएं.

* पलंग दरवाज़े के सामने न हो. यदि हो, तो उत्तर/पश्‍चिम कोने में पिरामिड के नीचे मूंगा रत्न रखें.

* बेडरूम के दरवाज़े को खोलते या बंद करते समय किसी तरह की कोई आवाज़ नहीं होनी चाहिए.

* कैंची, प्रेस और सुई बेड से दूर ही रखें. बेडरूम में पानी की तस्वीर वाली पेंटिंग न लगाएं.

* ख़राब एयर कंडीशनर या पंखा जिसके चलने पर आवाज़ हो, उसे तुरंत ठीक करवा लें. इसके कारण कपल्स के संबंधों में परेशानी पैदा हो सकती है.

* कमरे में रॉट आयरन के बेड न रखें. जहां तक हो सके, लकड़ी का ही बेड रखें. बेडरूम में मकड़ी के जाले भूलकर भी न हों.
भीनी-भीनी ख़ुशबू व रोमांटिक म्यूज़िक

* बेडरूम में सुगंधित कैंडल, रूम फ्रेशनर्स व ऑयल ज़रूर रखें.

* परफ्यूम सिलेक्ट करते समय इस बात का ख़ास ध्यान रखें कि परफ्यूम व डियो जो भी इस्तेमाल करें, वह ऐसा हो जिसकी ख़ुशबू आप दोनों को  पसंद हो.

* मंगलवार को मोगरा व शुक्रवार को गुलाब का इत्र अवश्य छिड़कें.

* पार्टनर का मूड सेक्सी बनाने के लिए रोमांटिक म्यूज़िक लगाएं.

– ऊषा पन्नालाल गुप्ता

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ये उम्मीदें, जो हर पत्नी अपने पति से रखती है (Things wife expect from husband)

wife expect from husband

रिश्ता ताउम्र साथ निभाने का… सुख-दुख में साथ-साथ चलने का… एक-दूसरे से अपेक्षाओं का… जी हां, ऐसा ही होता है पति-पत्नी का रिश्ता, जिसमें जाने कितनी ख़्वाहिशें, ख़्वाब, उम्मीदें होती हैं. इसी फेहरिस्त में एक पत्नी की भी अपने पति से बहुत-सी उम्मीदें (wife expect from husband) रहती हैं. वे क्या हैं? आइए, जानते हैं.

भावनात्मक रूप से हमेशा साथ देंः शादी के अटूट बंधन में बंधने के साथ ही पत्नी सबसे अधिक जिस बात की उम्मीद(wife expect from husband) पति से रखती है, वो है भावनात्मक साथ की. हर छोटी-बड़ी बात पर, सुख-दुख में, विपरीत व कठिन परिस्थितियों में वो पति से आशा करती है कि वो उसे इमोशनल सपोर्ट दें. उनका भावनात्मक साथ पत्नी को परिस्थितियों के तनाव-अवसाद से जल्दी उबार देता है.

रिलेशनशिप अलर्टः कई बार पत्नी को भावनात्मक सहयोग न मिलने के कारण रिश्तों में दूरियां व मतभेद बढ़ने लगते हैं. लेकिन पति का भावनात्मक सहारा पत्नी को ख़ुश रखने में बेहद मददगार होता है.

जन्मदिन-शादी की सालगिरह याद रखेंः हर पत्नी की यह ख़्वाहिश रहती है कि पति महोदय उसके बर्थडे व एनीवर्सरी की तारीख़ ज़रूर याद रखें, क्योंकि पत्नियां इनसे काफ़ी इमोशनली जुड़ी होती हैं. इसके अलावा उन्हें यह जानकर भी बेहद ख़ुशी होती है कि पति को उनके साथ की पहली मुलाक़ात, पहली बार दिया गया तोहफ़ा, बीते हुए यादगार लम्हे शादी के काफ़ी समय बीत जाने के बाद भी आज तक याद हैं.

रिलेशनशिप अलर्टः पत्नी को ख़ास मौक़ों पर सरप्राइज़ देते रहें. इससे रिश्तों में ताउम्र ताज़गी बनी रहती है.

तारीफ़ करेंः कहते हैं, प्रशंसा सुनना महिलाओं की सबसे बड़ी कमज़ोरी होती है, उस पर पत्नी हो, तो मामला और भी संवेदनशील हो जाता है. इसलिए जब कभी पत्नी ने आपके लिए प्यार से लज़ीज़ भोजन बनाया हो, घर-परिवार से जुड़ा उल्लेखनीय कार्य किया हो, किसी भी छोटे-मोटे, पर ख़ास काम को अच्छी तरह से पूरा किया हो, तो उसकी प्रशंसा ज़रूर करें. इससे पत्नी को न केवल ख़ुशी होगी, बल्कि उसका आत्मविश्‍वास भी बढ़ेगा.

रिलेशनशिप अलर्टः सोसायटी में ऐसे लोगों की कमी नहीं, जो बेवजह पत्नी में ग़लतियां ढ़ूंढ़ते रहते हैं और ग़लती न होने पर भी उसके हर कार्य में मीन-मेख निकालते रहते हैं. ऐसा न करें. प्रशंसा-सराहना जहां पत्नी के आत्मविश्‍वास को बढ़ाती है, वहीं वैवाहिक जीवन को भी ख़ुशहाल बनाती है.

शॉपिंग के लिए साथ जाएंः ऐसी शायद ही कोई महिला होगी, जिसे शॉपिंग का शौक़ न हो. एक सर्वे के अनुसार, अधिकतर महिलाएं अपनी टेंशन व परेशानी को दूर करने के लिए शॉपिंग करना अधिक पसंद करती हैं. वैसे भी हर पत्नी की यह इच्छा होती है कि वो पति की पसंद की चीज़ें पहनें, फिर चाहे वो ज्वेलरी हो या ड्रेस.

wife expect from husband

रिलेशनशिप अलर्टः पतियों को शॉपिंग करना कम ही पसंद आता है, पर जब आप अपनी पत्नी के साथ शॉपिंग करते हैं, तो इससे आपसी लगाव और भी बढ़ जाता है.

बिहेवियर को ड्रामा न समझेंः अमूमन कई पतियों की आदत होती है कि वे अपनी पत्नी की स्वाभाविक क्रिया-प्रतिक्रिया, मांगों आदि को ड्रामा बताकर मज़ाक उड़ाते हैं, जबकि पत्नी उम्मीद करती है कि कोई समझे न समझे, पर पति उनकी हर बात-व्यवहार को ज़रूर जानें-समझें.

रिलेशनशिप अलर्टः यदि आप भी इस तरह के पतियों में से हैं, तो संभल जाएं. क्योंकि पति के उपेक्षित व ग़लत व्यवहार से भी पत्नी ग़ुस्सैल व झगड़ालू प्रवृत्ति की बन जाती है. इसलिए पत्नी की बात को अनदेखा करने, उसका मखौल उड़ाने की बजाय शांति व धैर्य से स्थिति को समझने की कोशिश करें.

मायके की आलोचना न करेंः मायका पत्नी का वो ख़ास भावनात्मक पहलू होता है, जिसके बारे में वो कभी भी बात कर सकती है. साथ ही वो आशा करती है कि पतिदेव मायकेवाले की तारीफ़ भले ही न कर सकें, पर आलोचना या व्यंग्य बिल्कुल न करें.

रिलेशनशिप अलर्टः पत्नी के मायकेवालों की उपेक्षा या उलाहना वैवाहिक जीवन को तनावपूर्ण बना सकती है. इसलिए बेहतर यही होगा कि पत्नी को सदा ख़ुश रखने के लिए उसके मायकेवालों की तारीफ़ करें, जैसे- माता-पिता, भाई-बहन या फिर जीजाजी ही क्यों न हों.

प्यार-मनुहार करनाः महिलाओं को प्यार से गले लगाना, रूठना, मान-मनुहार करना बहुत अच्छा लगता है. इससे यह भी पता चलता है कि आप अपने पार्टनर को कितना प्यार करते हैं. पार्टनर को प्यार से गले लगाने पर दोनों एक-दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से भी जुड़ते हैं.

रिलेशनशिप अलर्टः प्यार करना केवल सेक्सुअल रिलेशन ही नहीं होता है, बल्कि पति पत्नी को गले लगाकर, किस करके, लाड़-दुलार दिखाकर भी अपने संबंधों में अधिक मिठास व मज़बूती ला सकते हैं.

कुछ बातें, जो पत्नी पति से छिपाती हैं या नहीं बताना चाहतीं-

* पत्नियां अपने पहले प्यार को शायद ही भूल पाती हैं. उनके मन में वो पहला प्यार, वो एहसास हमेशा रहता है, पर इस बारे में वे अपने पति को कभी नहीं बतातीं.

* पत्नियां हमेशा अपने घर ख़र्च से थोड़ा-बहुत सेविंग करती रहती हैं. उनके इस सीक्रेट मनी से पति अनजान ही रहते हैं और कई बार आर्थिक परेशानियों के समय ये सेविंग्स बहुत काम आती हैं.

* पत्नी अपने पति को कभी भी ये नहीं बताती है कि उसे उन ख़ास पलों (सेक्स) में कैसा लगा. यदि कुछ बताती भी हैं, तो वो पूरा सच नहीं होता है.

* ज़रूरी नहीं कि पत्नी पति की हर बात से सहमत हो. अक्सर मनमुटाव-झगड़े आदि से बचने के लिए पति के निर्णय से असहमत होने के बावजूद पत्नी उनकी हां में हां मिला देती है.

– ऊषा पन्नालाल गुप्ता