hygiene

प्री टीन यानी 9-12 साल की उम्र में बच्चों का शारीरिक विकास होने लगता है, ऐसे में उन्हें बॉडी हाइजीन का ख़ास ख़्याल रखने की ज़रूरत है, लेकिन अक्सर देखा गया है कि इस उम्र में बच्चे शरीर की साफ़-सफ़ाई के प्रति लापरवाही बरतने लगते हैं. अतः उन्हें जागरूक बनाने की ज़िम्मेदारी आपकी है.

Personal Hygiene Tips

प्यूबिक एरिया की सफाई
एक्सपर्ट्स प्यूबिक एरिया के बालों को काटना ज़रूरी बताते हैं. इस एरिया को साफ़ करने के लिए बच्चे लूफा का इस्तेमाल कर सकते हैं. लड़कियां दिन में 2-3 बार गर्म या ठंडे पानी से प्यूबिक एरिया की सफ़ाई कर सकती हैं. अगर आपकी बेटी को पीरियड्स शुरू हो चुके हैं तो उसे व्हाइट डिस्चार्ज भी होता होगा. ऐसे में हाइजीन का ख़ास ध्यान रखना चाहिए. अपनी लाडली से दिन में दो बार अंडरवेयर चेंज करने को कहें. पीरियड्स के समय भी दो बार नैपकीन बदलनी ज़रूरी है. लड़कों को भी नहाते समय साबुन या एंटीसेप्टिक्स से प्यूबिक एरिया की सफ़ाई करनी चाहिए.

अंडर आर्म्स की सफाई
बॉडी हाइजीन को बनाए रखने के लिए अंडरआर्म्स के बालों को काटना ज़रूरी है, लेकिन इस उम्र में अपनी बेटी को वैक्सिंग और हेअर रिमूविंग क्रीम के इस्तेमाल से रोकें, क्योंकि इससे आपकी लाडली की त्वचा का रंग गहरा हो सकता है. साथ ही वैंक्सिंग के दौरान स्किन खिंचने से त्वचा में जलन और इं़फेक्शन की शिकायत हो सकती है. इसलिए बेहतर होगा कि उसके लिए आप बाज़ार से किड्स फ्रेंडली रेज़र या सेविंग क्रीम ले आएं. प्री टीन बच्चों को एंटी पर्सपीरैंट्स (दुर्गंधनाशक) से भी दूर रखें इसकी जगह डियोड्रेंट का इस्तेमाल करने के लिए कह सकती हैं. बाज़ार में ख़ासतौर से बच्चों के लिए 100 प्रतिशत एल्कोहल फ्री डियो मिलते हैं, लेकिन इसमें भी थोड़ी मात्रा में ट्राइक्लोज़न केमिकल होता है. दरअसल, ट्राइक्लोज़न बैक्टीरिया और फंगस को दूर रखता है लेकिन इसके ज़्यादा इस्तेमाल से शरीर के सीक्रेट हार्मोन्स को नुक़सान पहुंच सकता है. इसलिए विशेषज्ञ हाइजीन के लिए साफ़-सफ़ाई को ही सबसे कारगर तरीक़ा मानते हैं. वैसे आप अपने बच्चे को ख़ुशबूदार वेट वाइप्स दे सकती हैं. इसके अलावा फ्रेश फील के लिए टैलकम पाउडर भी यूज़ कर सकती है बशर्ते कि बच्चे को इससे इरिटेशन न हो.

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Personal Hygiene Tips

सिखाएं नहाने का सही तरीका
बॉडी हाइजीन का पहला स्टेप है नियमित स्नान. अपने बच्चे को रोज़ाना दिन में कम-से-कम एक बार अच्छी तरह नहाने के लिए कहें. इसके अलावा जब भी वो खेलकर या कहीं बाहर से आए, तो उसे हाथ-पैर धोने को कहें. इस उम्र में शरीर की साफ़-सफाई पर ध्यान नहीं देने से तन की दुर्गंध की समस्या बढ़ जाती है. अंडरआर्म्स और प्युबिक एरिया में बालों की मौजूदगी भी तन की दुर्गंध के लिए ज़िम्मेदार है. दरअसल, प्युबर्टी की शुरुआत होते ही आर्मपिट्स और जेनिटल एरिया में मौजूद एपोक्राइन ग्लैंड्स के एक्टिव होने से इन जगहों पर तेल का स्राव होने लगता है, जिससे दुर्गंध फैलाने वाले बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. अतः इन जगहों की सफ़ाई पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत है. आप बच्चे के लिए कोई भी फैमिली सोप इस्तेमाल कर सकती हैं. उसकी गंदी कोहनियों और घुटने पर नींबू रगड़ें. एक्सपर्ट्स हफ़्ते में 2-3 बार लूफा के इस्तेमाल की भी सलाह देते हैं.

चेहरे की देखभाल
इस उम्र के बच्चे अक्सर अपने पैरेंट्स की क्रीम और फेसवॉश आदि इस्तेमाल करने लगते हैं. यदि आपके फेसवॉश में हार्मफुल ग्रैन्यूल नहीं है, तो इसे इस्तेमाल करने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन उसमें अगर ग्रैन्यूल है तो इससे बच्चे को एक्ने की समस्या हो सकती है. ऐसे में विशेषज्ञ प्रोएक्टिव और क्लीअरसील जैसी एक्ने क्रीम लगाने की सलाह देते हैं. अगर क्रीम लगाने के दो हफ़्ते बाद भी एक्ने ठीक नहीं होता, तो डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह लें. प्री टीन बच्चों को सनस्क्रीन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए लेकिन आपका बच्चा यदि ज्यादा देर तक धूप के संपर्क में रहता है, तो उसे एसपीएफ 15-20 युक्त सनस्क्रीन लगाने के लिए कहें.

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Personal Hygiene Tips

बालों की देखभाल
क्या आपकी लाडली रोज़ाना शैंपू करती है? और बार-बार ब्रांड बदलती रहती है? अगर हां, तो ज़रा उसके बालों पर गौर करें कहीं वो रूख और बेजान तो नहीं हो गए? अपनी लाडली के बालों की देखभाल के लिए कंडीशनर युक्त अच्छी क्वालिटी का शैंपू रखें. इस बात का ध्यान रखें कि वो बार-बार शैंपू न बदलें. साथ ही हेयर फॉल कंट्रोल, डैमेज कंट्रोल और एंटी डैंड्रफ जैसे स्पेशलाइज़्ड शैंंपू का हफ़्ते में एक बार से ज़्यादा इस्तेमाल न करें, क्योंकि ये बालों की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता. इसके अलावा किड्स शैंपू भी प्री टीन बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है. डर्मेटोलॉजिस्ट प्री टीन बच्चों के हेल्दी हेयर के लिए ऑयल मसाज की सलाह देते हैं. इससे स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, लेकिन तेल लगाने के आधे घंटे बाद हेयर वॉश करना ज़रूरी है. क्योंकि तेल लगे बालों के साथ सोने से माथे पर पिंपल्स निकल सकते हैं.

पैरों की देखभाल
ज़्यादा देर तक जूते पहने की वजह से बच्चे के पैरों से अजीब-सी गंध आने लगती है. इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि बच्चा अच्छी तरह पैर सूखने के बाद टैलकम पाउडर लगाकर ही जूता पहनें. साथ ही उसे हमेशा कॉटन के मोजे ही दें. इसके बाद भी अगर पैरों से बदबू आए, तो हफ़्ते में 2-3 बार जूते में कोई एंटी-फंगल पाउडर छिड़कें और जब बच्चा घर पर हो तो उसे जूते न पहनने दें.

होठों की देखभाल
कुछ बच्चे होंठों को हमेशा चाटते या चबाते रहते हैं जिससे उनके होंठ फट जाते हैं. ऐसे में जब वो घर पर हो तो उनके होंठों पर घी लगाएं. आप उसे ख़ुशबू रहित लिप बाम या पेट्रोलियम जेली भी दे सकती हैं, जिसे वो ज़रूरत के मुताबिक इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा फॉलिक एसिड, विटामिन बी, जिंक और आयरन की कमी भी होठों के आसपास की त्वचा को ड्राई बना देती है. इसलिए खाने में इन पोषक तत्वों का ध्यान रखें, लेकिन आपके बच्चे के होंठ अगर हमेशा ड्राई रहते हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह लें.

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Hygiene Tips

नाखूनों की देखभाल
आजकल छोटे बच्चे भी बड़ों की देखा-देखी नाखून बढ़ाने लगे हैं. अगर आपका बच्चा भी ऐसा करता है, तो उसे ऐसा करने से रोकें क्योंकि बड़े नाखूनों में जमी गंदगी खाने के साथ उसके शरीर में जा सकती है. इसलिए समय-समय पर उसे नाखून काटने के लिए कहती रहें. उसे नाखून सीधा (स्ट्रेट) काटना सिखाएं फिर उसे नेल फाइल या एमरी बोर्ड की मदद से राउंड करने के लिए कहें. नाखूनों को एक ही दिशा में काटना चाहिए वरना वो टूट जाएंगे. नहाने के बाद हाथों के साथ ही नाखून व आस-पास की त्वचा पर भी मॉइश्‍चराइजर लगाना ज़रूरी है. इं़फेक्शन के ख़तरे को कम करने के लिए नाखून के आसपास की कटी-फटी त्वचा को काटकर अलग कर दें.

दातों की देखभाल
इस उम्र में बच्चे स्नैक्स और जंक फूड ज़्यादा खाने लगते हैं. अतः दांतों की सफ़ाई पर बहुत ध्यान देने की ज़रूरत है. उन्हें कम से कम दो बार और यदि संभव हो तो हर बार खाने के बाद ब्रश करने के लिए कहें. बच्चे को फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट दें. साथ ही हर 6 महीने में उसका डेंटल चेकअप करवाएं. ऐसा करने से कैविटी की समस्या शुरू होने से पहले ही रोकी जा सकती है. साथ ही अगर स्वस्थ दातों के लिए आपके बच्चे को एक्स्ट्रा फ्लोराइड या कुछ पोषक तत्वों की ज़रूरत होगी, तो डॉक्टर आपको बता देगा. साथ ही अगर आपके बच्चे के दांत टेढ़े-मेढ़े हैं, तो उसे ठीक करवाने का भी ये सही समय है.

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बच्चों के पर्सनल हाइजीन के लिए एक्सपर्ट एडवाइस

  • जब आपकी बेटी का साइज़ 30 हो, तो वो ब्रा पहन सकती है, लेकिन जब उसे 32 ए कप साइज़ की जरूरत पड़े, तो स्पोर्ट के लिए उसे रेग्युलर ब्रा का इस्तेमाल करना चाहिए.
  • खेलते समय अपने बेटी को एक्स्ट्रा कंफ़र्ट के लिए स्पोर्टस ब्रा लाकर दें.
  • किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचाने के लिए उसके साथ अपना मेकअप, हेयरब्रश या कंघी शेयर न करें.
  • जब आपकी लाडली नेलपॉलिश यूज़ करने लगे, तो नेल पेंट उतारने के लिए उसे एसिटोन फ्री रिमूवर लाकर दें.
  • अगर आपकी बेटी आर्टिफ़िशियल इयररिंग्स पहनना चाहती है, तो आप ख़ुद उसे पहनाएं ताकि आपको पता चल सके कि वो बहुत टाइट तो नहीं है. रात को सोने से पहले उसके इयररिंग्स ध्यान से निकाल दें.
  • अपने बेटे को मूस और हेयर स्प्रे के इस्तेमाल से रोकें. अगर वो इनका इस्तेमाल करता है तो कुछ घंटों के अंदर ही बालों को शैंपू करने के लिए कहें.

जब आप हंसते-मुस्कुराते हैं, तो दुनिया को अपनेपन का एक ख़ूबसूरत संदेश देते हैं. इसमें आपके दांत ख़ासतौर साथ देते हैं. ऐसे में दो कारणों से इनका ख़्याल रखना बहुत ज़रूरी हो जाता है, एक सेहत और दूसरा व्यक्तित्व. इसके लिए मुंह की सफ़ाई, जिसे हम ओरल हाइजीन कहते हैं, बेहद ज़रूरी है. अगर आपके मुंह से दुर्गंध आती है या आपके दांत गंदे हैं, तो कोई भी व्यक्ति या महिला आपके नज़दीक आने या आपसे बात करने से कतराने लगेगा और उसके मन में आपके प्रति नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे आपके सामाजिक जीवन पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा. ऐसा ना हो, इसलिए डॉ. सबा कलीम (डेंटिस्ट) हमें महत्वपूर्ण जानकारियां दे रही हैं. आइए उनसे जानते हैं कि कैसे अपने दांतों और मसूड़ों का ख़्याल रखें.

रोज़ाना ब्रश करना

  • जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे दांतों को रोज़ाना दो बार ब्रश करना ज़रूरी है, क्योंकि यह हमारे दांतों को साफ़ करता है और बैक्टीरिया फ्री रखता है. * सुबह के समय हमारे मुंह में बैक्टीरिया की संख्या सबसे ज़्यादा होती है, इसलिए हमें सुबह ब्रश अवश्य करना चाहिए.
  • रात को सोने से पहले भी हमें ब्रश ज़रूर करना चाहिए.
  • आमतौर पर लोगों को ब्रश करने का सही तरीक़ा नहीं मालूम होता है, जिसके कारण उनकी दांतों की सफ़ाई सही तरीक़े से नहीं हो पाती.
  • ज़्यादा हार्ड ब्रश इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, इससे दांतों की लेयर घीस जाती है और दांतों में सेंसटिविटी की प्रॉब्लम हो जाती है और मसूड़ों की भी बीमारी हो जाती है.
  • हमें हमेशा सॉफ्ट ब्रश इस्तेमाल करना चाहिए.
  • ब्रश को हमेशा छोटे सर्कुलर मोशन में दांतों पर आगे-पीछे और ऊपर की तरफ़ हल्के हाथों से घुमाना चाहिए.

एक बार रोज़ाना फ्लॉस करें

  • ब्रश करने के बाद भी हमारे दांतों के वह हिस्से जहां हमारा ब्रश नहीं पहुंच पाता है या दांतों के बीच की जगह, जहां भोजन की छोटे कण जमा हो जाते हैं, उन जगहों पर हमें फ्लॉस का उपयोग करना चाहिए.
  • यह हमारे दांतों को साफ़ करने के अलावा मुंह से दुर्गंध जैसी समस्याओं को भी दूर करता है.

माउथवॉश इस्तेमाल करें

  • माउथवॉश ब्रश करने के आधे घंटे बाद इस्तेमाल करने से सही रिजल्ट आता है.
  • यह हमारे दांतों के साथ-साथ मसूड़ों की समस्या, जीभ और मसूड़ों की दुर्गंध जैसी समस्याओं को दूर करता है.
  • माउथवॉश से 30 सेकंड तक मुंह में गार्गिल यानी गरारे करें. ऐसा दिन में दो बार करें.

फ्लोराइड का इस्तेमाल करें

  • फ्लोराइड फ्लोरिंन से बनता है. यह मिट्टी का एक तत्व है. यह हमारे दांतों को सड़ने से बचाता है.
  • यह पीने के पानी में पाया जाता है तथा टूथपेस्ट में भी मौजूद होता है.

धूम्रपान और तंबाकू का सेवन न करें

  • धूम्रपान और तंबाकू हमारे सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक है. यह हमारे फेफड़ों को नुक़सान पहुंचाता है और साथ ही दांतों और मसूड़ों के लिए भी बेहद हानिकारक है.
  • यह हमारे मसूड़ों में हीलिंग यानी घाव के भरने की प्रक्रिया को धीमा और कमज़ोर करता है.
  • जीभ, मुंह के अंदरूनी हिस्से और दांतों को पीला करता है.
  • ज़्यादा धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से मुंह के कैंसर होने का ख़तरा ज़्यादा रहता है.

पानी प्रचुर मात्रा में पीएं

  • पानी हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पेय पदार्थ है.
  • पानी पीने से शरीर के साथ-साथ हमारे दांत और मसूड़ों को भी साफ़ रखने में मदद मिलती है.
  • यह हमारे दांतों के बीच फंसे भोजन के छोटे कणों को साफ़ करता है.

फल-सब्ज़ी का सेवन अवश्य करें

  • फल-सब्ज़ी हमारे दांतों को साफ़ रखने तथा मसूड़ों और दांतों को न्यूट्रिशन पहुंचाने में मदद करता है, जैसे- सेब, गाजर, अजवाइन और पत्तेदार सब्ज़ियां इत्यादि.
  • बहुत से फल और सब्ज़ी हैं, जो विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं. वह हमारी मसूड़ों और ओरल टिश्यू को सही रखती हैं.
  • साथ ही बैक्टीरियल इंफेक्शन से भी हमारे दांत और मसूड़ों को बचाती हैं.
Tips For Healthy Teeth


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आज पूरे विश्व में एक ही नाम की दहशत है और वो है कोरोना, पूरी दुनिया तेज़ी से इसकी चपेट में आ गई और अभी तक इसकी कोई दवा या वैक्सीन भी नहीं बनी है. यही वजह है कि सभी लोग डरे हुए हैं और उसको लेकर तरह-तरह की बातें और अफ़वाहें भी ज़ोरों पर हैं.

कोरोना से बचने और लड़ने के लिए बहुत ज़रूरी है कि आप भी सतर्क रहें, सावधान रहें. इसके लिए ज़रूरी है कि इस बीमारी की सही जानकारी आपके पास हो.

COVID 19: What You Need To Know)
  • सबसे पहले यह समझ लें कि कोरोना का मतलब मौत नहीं.
  • इस संक्रमण से जूझ रहे लोग बड़ी तादाद में ठीक हुए हैं.
  • इससे संक्रमित लोगों में से मात्र 1-2.5 फ़ीसदी लोग ही मौत का शिकार हुए हैं.
  • इसे इतना गंभीर इसलिए माना जा रहा है कि यह फैलता बहुत तेज़ी से है और एक संक्रमित व्यक्ति कई लोगों में संक्रमण फैला सकता है.
  • जिस तेज़ी से ये फैलता है उतने संसाधन हमारे देश में नहीं हैं.
  • हालाँकि यह सच है कि इसकी कोई दवा या वैक्सीन अब तक नहीं बनी, लेकिन इसके हल्के लक्षणों को सही दवाओं के साथ ठीक किया जा सकता है.
  • सिर्फ़ गम्भीर लक्षणों वाले लोगों को ही ख़तरा होता है.
  • जिनका इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो, बुज़ुर्ग और बच्चे, मधुमेह, हृदय रोग से पीड़ित लोगों को इससे अधिक ख़तरा होता है.
  • लोगों में यह कन्फ़्यूज़न होता है कि टेस्ट कब और किन परिस्थितियों में कराना चाहिए. आप यह जान लें कि एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर आपका सामान्य फ़्लू के लक्षण हैं तो एहतियात के तौर पर अन्य लोगों से खुद को अलग करें, कुछ दिन आराम करें, हेल्दी डायट लें, लिक्विड लें. अगर लक्षण ठीक हो गए तो डरने की बात नहीं.
  • हां, अगर आपको सांस लेने में तकलीफ़ हो, तेज़ बुख़ार और सूखी खांसी हो तो टेस्ट फ़ौरन करवाना चाहिए.
  • बहुत ज़रूरी है कि अपनी ट्रैवल हिस्ट्री प्रशासन से ना छिपायें.
  • अगर आप बाहर से आयें हैं तो सेफ़्टी के तौर पर खुद को आइसोलेट कर लें, १४ दिनों तक किसी से भी ना मिलें-जुलें, भले ही आपको लक्षण हों या ना हों.
  • यह ना सिर्फ़ आपके परिवार के लिए बल्कि समाज और देश की सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है.
  • वैसे भी पूरे देश में लॉकडाउन है, कोरोना से बचने का सबसे कारगर तरीक़ा है बचाव! प्रशासन की बात सुनें, घर पर बैठें.
  • अब तक 199 देश इसकी चपेट में आ चुके हैं और अमेरिका व अति विकसित युरपीयन देश भी इसके गंभीर नतीजे भुगत रहे हैं.
  • इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उन्होंने इस रोग को पहले गंभीरता से नहीं लिया और अब उनके लिए यह आउट ऑफ कंट्रोल हो चुका है.
  • हमारे देश में सरकार और प्रशासन की सतर्कता ने अब तक इसे कंट्रोल में रखा हुआ है लेकिन उनकी यह मेहनत तभी सफल हो पाएगी जब हम इसे हल्के में ना लें और घर पर रहें.
  • ज़रूरी सामान के लिए पैनिक ना करें, सभी चीजें उपलब्ध हैं, बेवजह स्टोर ना करें.
  • जब भी कोई सामान लेकर आयें तो उसे अच्छी तरह साफ़ कर लें, दूध के पैकेट को डिटर्जेंट से धोयें, फल, सब्ज़ियाँ अच्छी तरह से धोयें, खुद अपने हाथ साबुन से २०-३० सेकंड तक धोयें या सैनीटाइज़र का प्रयोग करें.
  • छींक-खांसी आने पर रूमाल का इस्तेमाल करें.
  • आपकी सतर्कता ही आपका सुरक्षा कवच है.
  • कोरोना की चेन तोड़ने में मददगार बनें, बेवजह बाहर ना निकलें. जितने संसाधनों से काम चल रहा है काम चलायें. योग और एक्सरसाइज़ करें, Ac का प्रयोग कम करें, पंखे का अधिक इस्तेमाल करें.
  • अपनी ज़िम्मेदारी समझें, ज़िम्मेदार नागरिक बनें.

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Vaginal Health
क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

सतर्कता व जागरूकता की कमी के चलते आज भी अधिकांश महिलाएं वेजाइनल हेल्थ को इग्नोर करती हैं. शायद कम ही लोग जानते हैं कि वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन का ख़्याल न रखने की वजह से कई गंभीर यौन रोग व इंफेक्शन का ख़तरा पनप सकता है.
बेहतर होगा कि ऐसे में वेजाइनल हाइजीन का पूरा ख़्याल रखें.

हेल्दी वेजाइना के बेसिक रूल्स
अक्सर महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट की हेल्थ की ज़रूरत का महत्व नहीं समझतीं. शायद इस तरफ़ उनका ध्यान ही नहीं जाता, क्योंकि ये बातें उन्हें बचपन से घर पर भी नहीं सिखाई जातीं. लेकिन अब व़क्त बदल रहा है, ऐसे में वेजाइनल हेल्थ के महत्व को समझना बेहद ज़रूरी है.

वेजाइनल हेल्थ को प्रोटेक्ट करने ईज़ी स्टेप्स

– वेजाइनल पीएच बैलेंस को करें प्रोटेक्ट
यदि सही पीएच बैलेंस बना रहे, तो वो हेल्दी बैक्टीरिया की ग्रोथ को बढ़ाता है. इस वजह से बेहद ज़रूरी है कि वेजाइनल पीएच बैलेंस को प्रोटेक्ट किया जाए.

– हेल्दी वेजाइना के लिए ज़रूरी है हेल्दी डायट
हाइजीन के साथ-साथ वेजाइना की हेल्थ की लिए सही-संतुलित डायट भी बेहद ज़रूरी है.

– करें सेफ सेक्स
अक्सर झिझक के चलते महिलाएं अपने मेल पार्टनर से सेफ सेक्स पर चर्चा तक नहीं करतीं. लेकिन आपकी सेहत आपके हाथ में है. संकोच न करें और पार्टनर से कंडोम यूज़ करने को कहें, क्योंकि यह कई तरह के यौन संक्रमण से आपका बचाव करता है.

– रेग्यूलर चेकअप करवाएं
भारत में अभी भी यह कल्चर डेवलप नहीं हुआ. यही वजह है कि वेजाइनल इंफेक्शन और यहां तक कि कैंसर तक भी सतर्कता की कमी के चलते हो रहे हैं. नियमित चेकअप से आप इन सबसे बच सकती हैं.

– क्या करें अगर इंफेक्शन हो जाए?
इंफेक्शन होने पर सही इलाज व सही केयर करें, ताकि वह बढ़ नहीं और भविष्य में इंफेक्शन न हो इसके लिए भी सतर्कता बरतें.

– सही हो अंडरगार्मेंट सिलेक्शन

कॉटन पैंटीज़ लें. सिंथेटिक से बचें. वेजाइनल भाग ड्राय रखने की कोशिश करें.

– हाइजीन का रखें ख़ास ख़्याल
साफ़-सफ़ाई रखें. टॉयलेट में भी इसका ख़्याल रखें. पब्लिक टॉयलेट्स के इस्तेमाल के व़क्त सावधानी बरतें.

पेल्विक एक्सरसाइज़ से रखें वेजाइना को हेल्दी
स़िर्फ डायट ही नहीं सही एक्सरसाइज़ भी वेजाइनल हेल्थ के लिए ज़रूरी है.

सर्वे- क्यों झिझकती हैं महिलाओं?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज भी बहुत बड़ी संख्या में भारतीय महिलाएं वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन के महत्व को न तो समझती हैं और न ही इस पर खुलकर बात करती हैं. यही वजह है कि वो वेजाइनल प्रॉब्लम्स से दो-चार होती हैं.

जागरूकता की कमी भी एक सबसे बड़ी वजह
हमारा सामाजिक ढांचा इसकी बड़ी वजह है. यहां इन अंगों पर बात तक करने से लोग हिचकते हैं. यहां तक के अपने डॉक्टर्स से भी इस पर बात करने से कतराते हैं..

 

हर पैरेंट्स (Parents) की चाह रहती है कि उनका बच्चा (Child) समझदार, आज्ञाकारी, ज़िम्मेदार व स्मार्ट बने. इसी वजह से वे उसे हर वो चीज़ बताने व सिखाने की कोशिश करते हैं, जो उसके लिए ज़रूरी होती है. फिर चाहे वो प्रेशर हैंडल करना हो, हाइजीन हो या फिर सिविक सेंस ही क्यों न हो.

 

Child Learning

बच्चे कैसे सीखते हैं, कौन-सी चीज़ उन्हें अधिक प्रेरित करती है? इसका कोई निश्‍चित मापदंड नहीं है, पर पैरेंट्स व बड़ों के मार्गदर्शन व प्रोत्साहन से वे बहुत कुछ सीखते हैं. इस संदर्भ में फोर्टिस के एसएल रहेजा हॉस्पिटल की पीडियाट्रिशियन व नियोनैटोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉ. अस्मिता महाजन ने उपयोगी जानकारियां दीं.

सेल्फ कंट्रोल

इन दिनों बच्चों में सहनशीलता की कमी आती जा रही है और इसका असर उनकी पर्सनैलिटी पर भी पड़ रहा है. ऐसे में धैर्य रखना, सब्र करना आदि के लिए सेल्फ कंट्रोल ज़रूरी है.

* सायकोलॉजिस्ट के अनुसार, जो बच्चे पढ़ने में अच्छे नहीं होते या फिर कमज़ोर होते हैं, वे सोशली एक्टिव भी कम होते हैं. ऐसे बच्चों को सेल्फ कंट्रोल यानी आत्म केंद्रित होना सिखाना आसान नहीं होता.

* बच्चों को सहनशीलता का पाठ बचपन से ही पढ़ाना चाहिए, जैसे- यदि वो किसी चीज़ की ज़िद करें, तो यह ज़रूरी नहीं कि आप उसे तुरंत पूरी कर दें. उन्हें धैर्य रखने के फ़ायदे बताएं. उन्हें समझाएं कि यह चीज़ सही व़क्त आने पर ज़रूर मिलेगी.

* सेल्फ कंट्रोल के लिए बच्चों को ध्यान यानी मेडिटेशन सिखाएं.

* यदि पैरेंट्स भी बच्चे के साथ मेडिटेशन करें, तो बच्चों को प्रोत्साहन मिलेगा.

* मेडिटेशन करने से रिलैक्स होने के साथ-साथ बच्चों में पॉज़िटिवनेस भी बढ़ती है.

परिस्थितियों के अनुसार ना कहना

बच्चे मासूम होते हैं और इस उम्र में उनके लिए सही-ग़लत की पहचान करना भी आसान नहीं होता. ऐसे में उनकी सुरक्षा का बेहतरीन उपाय यह है कि वे ना कहना सीखें. किन परिस्थितियों में बच्चे ना कहें, इस बारे में पैरेंट्स उन्हें समय-समय पर बताते रहें.

* यदि कोई अजनबी उन्हें छूने की कोशिश करे, तो उसे मना करें या उससे दूर हट जाएं.

* बच्चों को गुड टच व बैड टच के बारे में अच्छी तरह समझाएं. साथ ही उन्हें बेसिक सेक्स एजुकेशन भी दें.

* बच्चों को समझाएं कि अकेले होने पर कोई परिचित, पड़ोसी खिलौने, चॉकलेट या कोई तोह़फे आदि देने की कोशिश करे, तो मना कर दें.

* स्कूल, क्लास आदि में आपको पहुंचने में देरी हो रही हो और उसी समय कोई अजनबी बच्चे को घर पहुंचाने के लिए लिफ्ट दे, तो उसे ना कहें.

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हाइजीन बेहद ज़रूरी

* बच्चों को समझाएं कि साफ़-सफ़ाई से रहने से हम हेल्दी रहते हैं और हमारा आत्मविश्‍वास भी बढ़ता है. उन्हें हाइजीन से जुड़ी हेल्दी हैबिट्स के बारे में बताएं.

* रोज़ नहाना, साफ़-सुथरा रहना, खाने से पहले हाथ धोना, टॉयलेट हाइजीन, छींकते-खांसते समय नाक-मुंह पर रुमाल रखना आदि हाइजीन से जुड़ी बेसिक बातें बच्चों को बचपन से ही सिखानी चाहिए.

* ओरल हाइजीन भी ज़रूरी है. इसके लिए सुबह और रात में ब्रश करना, दांतों व जीभ को अच्छी तरह से क्लीन करना सिखाएं, ताकि सांसों की बदबू व दांतों को ख़राब होने से बचाया जा सके.

* हाथ-पैर के नाख़ून को साफ़ रखने और हफ़्ते में एक बार नाख़ून काटने को कहें.

* कुछ बच्चों को दांत से नाख़ून काटने की आदत होती है. उन्हें समझाएं कि दांतों से नाख़ून काटने से मैल व रोगाणु पेट में जाकर उन्हें बीमार बना सकते हैं.

* बच्चों को बताएं कि नहाते समय नाक और अपने प्राइवेट पार्ट्स को भी क्लीन करें.

* बच्चों को बताएं अगर वे हाइजीन का ख़्याल रखेंगे, तो उनका इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग होगा और वे बीमार नहीं पड़ेंगे.

* स्कूल से आने, खेलकर आने आदि के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोएं.

* खाना खाने के पहले और बाद में हाथ ज़रूर धोएं.

* फलों आदि को खाने से पहले उन्हें साफ़ पानी से धोकर खाएं.

* छोटे बच्चों के लिए 8-10 घंटे की नींद बहुत ज़रूरी है. स्लीप हाइजीन में उन आदतों को शामिल किया जाता है, जो बच्चों को गहरी नींद सोने में सहायता करें. अगर बच्चे पूरी नींद नहीं लेंगे, तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होगा.

* बच्चों के सोने व उठने का एक नियत समय बना दें, ताकि बचपन से ही उनका इंटरनल क्लॉक सेट हो जाए.

लाइफ व रिलेशनशिप मैनेजमेंट

लाइफ मैनेजमेंट और रिलेशनशिप मैनेजमेंट दोनों का ही एक-दूसरे से कनेक्शन है. यदि आपकी ज़िंदगी ख़ुशहाल व सुव्यवस्थित रहेगी, तो यक़ीनन आपके रिश्ते भी मधुर व मज़बूत होंगे.

* बच्चों को अनुशासित रहना और हर काम समय पर करने की सीख बचपन से ही दें.

* बच्चों को अपनी सभी चीज़ें, फिर चाहे वो स्कूल बैग, क़िताबें, खिलौने, अन्य ज़रूरी चीज़ें ही क्यों न हों, व्यवस्थित तरी़के से रखना सिखाएं.

* छोटे बच्चे यानी 4-5 साल के बच्चों को अपने कपड़े सिलेक्ट करना, मम्मी-पापा की चीज़ों को पहचानना सिखाएं. इससे उनका कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ता है.

* उनमें बचपन से ही शेयरिंग की आदत डालें.

* रिश्तेदारों के यहां जाएं, तो उनके साथ विनम्रता से पेश आएं. काम में उन्हें सहयोग दें.

* बच्चों को दूसरों की ज़रूरतों को समझना सिखाना भी ज़रूरी है.

* बच्चों को हर रोज़ रात को सोने से पहले कुछ अच्छी बातें बताएं या फिर पढ़कर सुनाएं. इससे उनमें अच्छी आदतें विकसित होती हैं.

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Child Care

सिविक सेंस

* जब कभी आप बस या ट्रेन में सफ़र कर रहे हों, तो इस दौरान कोई प्रेग्नेंट वुमन या बुज़ुर्ग खड़े हों, तो उसे अपनी सीट दें और फिर अपने बच्चों को भी बताएं कि आपने उसकी मदद क्यों की है. इससे बच्चों को दूसरों की मदद करने की प्रेरणा मिलेगी.

* बच्चे को विनम्रता से बात करना सिखाएं और जब भी आप किसी से कुछ मांगें, तो ध्यान रहे कि ‘प्लीज़’ कहकर ही बात करें.

* बच्चे को सिखाएं कि देश की सार्वजनिक संपत्ति, जैसे- सड़क, ट्रेन, गार्डन आदि को गंदा न करें और कूड़ा-कचरा डस्टबिन में ही फेंकें.

* पौधे लगाएं. लोगों को पेड़ों को काटने से रोकें.

* बच्चे को ईमानदार और सच के रास्ते पर चलना सिखाएं.

* बच्चे को संविधान के नियमों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र गान का आदर करना सिखाएं.

* बतौर ज़िम्मेदार अभिभावक बच्चे को समझाएं कि ख़ुद को साफ़-सुथरा रखने के साथ-साथ अपने घर, पास-पड़ोस, सोसाइटी, स्कूल, खेल का मैदान आदि को भी साफ़ रखना चाहिए.

आमतौर पर हर बच्चा अपनी क्षमता व रुचि के अनुसार सीखता है, लेकिन हमें भी बच्चों को सीखने के लिए निरंतर प्रेरित करते रहना चाहिए.

ऊषा पन्नालाल गुप्ता

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide

 

How to maintain bathroom hygiene

घर के बाकी हिस्सों की तरह ही बाथरूम का साफ़-सुथरा वो जर्म फ्री (How to maintain bathroom hygiene) होना ज़रूरी है. बाथरूम की सफ़ाई के लिए ट्राई करें ये आसान क्लीनिंग टिप्स.

– बाथरूम व टॉयलेट में कीटाणु फैलने की संभावना बहुत अधिक होती है, अत: इनकी नियमित सफ़ाई ज़रूरी है. टॉयलेट बाउल को डिसइंफेक्टेड क्लीनर से साफ़ करें. टॉयलेट ब्रश को इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह से धोकर किसी साफ़ और सूखे स्थान पर रखें.

– बाथरूम शॉवर, सिंक इत्यादि को भी इस्तेमाल करने के बाद धो दें. शॉवर के अंदर भी जर्म्स पनपने के चांसेस होते हैं. अत: यदि आप उसका इस्तेमाल नहीं कर रही हैं, तो भी समय-समय पर उसे थोड़ी देर के लिए चलाती रहें.

– टूथब्रश को इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह धो कर सूखे स्थान पर रखें. इसे हर तीन महीने में बदलती रहें.

– गीले तौलिए में भी बैक्टीरिया पनपने की संभावना होती है. अत: टॉवल को हर दूसरे दिन धोएं. बीमार व्यक्ति के लिए अलग से टॉवल रखें. अपना टॉवल किसी के साथ शेयर न करें और एक बार इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह से सूखने के बाद ही दुबारा इसका इस्तेमाल करें.

– बाथरूम आपके घर का सबसे छोटा कमरा है, फिर भी यही वह जगह है, जहां सबसे ़ज़्यादा टॉक्सिक केमिकल्स और जर्म्स होते हैं. दीवारों से पानी का रिसाव (लीकेज) और सिलिंग पर जमी मिट्टी घातक माइक्रो ऑर्गेऩिज़्म हैं. ये बैक्टीरिया व वायरस को पनपने में मदद करते हैं. इससे निकलने वाले केमिकल्स से अस्थमा व एलर्जी हो सकती है.

– बाथरूम को जहां तक हो सके, सूखा रखने की कोशिश करें. बाथरूम का इस्तेमाल करने के बाद एग्जॉस्ट फैन चलाएं.

– सोप केस यानी साबुनदानी में सबसे ज़्यादा बैक्टीरिया जमा होते हैं. इन्हें गरम पानी व डिटर्जेंट से साफ़ करें और सुखाकर रखें. बाथरूम का दरवाज़ा इस्तेमाल के बाद खोल दें ताकि हवा आती रहे.

– बाथरूम में ऐसी टाइल्स लगाएं, जिनमें फिसलने का डर न रहे. इसके लिए रबर मैट का इस्तेमाल करें.

– एयर फ्रेशनर, सेंटेड कैंडल्स, अगरबत्ती आदि बाथरूम में न रखें, इनसे एयर पॉल्यूशन होता है.

– नल के टैप, रिम को रोज़ाना डिसइंफेक्टेड लिक्विड से साफ़ करें.

– बाथरूम व टॉयलेट के नालों को उबले हुए पानी में 2 टेबलस्पून बेकिंग सोडा डालकर साफ़ करें. नाले में नैपथलीन की गोलियां डालें, इससे कॉकरोच नहीं आते, लेकिन कई लोगों को इन गोलियों से एलर्जी हो सकती है.

– यदि फर्श बहुत गंदा है, तो ब्लीचिंग पाउडर छिड़कें और रगड़कर साफ़ करें.

– खिड़कियां साफ़ करने के लिए पुराने टूथब्रश का इस्तेमाल करें. टूथब्रश को साबुन के घोल में डुबोकर उससे खिड़कियां साफ़ करें.

– 500 मि.ली. सिरके में नींबू का रस और नमक मिलाकर कमोड में डालें. सारी गंदगी साफ़ हो जाएगी और कमोड चमकने लगेगा.

– टॉयलेट सीट साफ़ करने के लिए सीट पर पहले बेकिंग सोडा छिड़कें. फिर सिरके की कुछ बूंदें डालकर 1 घंटे के लिए छोड़ दें. अब पानी की तेज़ धार से सीट साफ़ कर दें. सारे कीटाणु और बदबू दूर हो जाएगी.

– बाथरूम में फ़ालतू का कचरा जमा न करें. शैम्पू व फेसवॉश की खाली बोतल, साबुन का रैपर आदि फेंक दें. सोप केस (साबुनदानी) और ब्रश रखने वाले बास्केट की भी नियमित सफ़ाई करें.

– बाथरूम के बेसिन को साफ़ करने के लिए नींबू काटकर उसमें ढेर सारा नमक लगाएं और इसे बेसिन पर एक बार रगड़ें. 15 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लीजिए, बेसिन चमकने लगेगा.

– शायद ही आपने नल की सफ़ाई पर ध्यान दिया हो. लगातार इस्तेमाल के कारण नल की चमक फीकी पड़ गई है, तो रूई को सिरके में डुबोकर नल को साफ़ करें. हफ़्ते में दो बार ऐसा करने पर नल चमकने लगेगा.

– यदि बाथरूम के टाइल्स पर कोई दाग़ लगा है, तो वहां कटा आलू रगड़ें और 15 मिनट बाद गरम पानी से धो दें.

 

23 ईज़ी फर्नीचर क्लीनिंग सोल्यूशन (23 Easy Furniture Cleaning Solution)