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क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

Vaginal Health
क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

सतर्कता व जागरूकता की कमी के चलते आज भी अधिकांश महिलाएं वेजाइनल हेल्थ को इग्नोर करती हैं. शायद कम ही लोग जानते हैं कि वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन का ख़्याल न रखने की वजह से कई गंभीर यौन रोग व इंफेक्शन का ख़तरा पनप सकता है.
बेहतर होगा कि ऐसे में वेजाइनल हाइजीन का पूरा ख़्याल रखें.

हेल्दी वेजाइना के बेसिक रूल्स
अक्सर महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट की हेल्थ की ज़रूरत का महत्व नहीं समझतीं. शायद इस तरफ़ उनका ध्यान ही नहीं जाता, क्योंकि ये बातें उन्हें बचपन से घर पर भी नहीं सिखाई जातीं. लेकिन अब व़क्त बदल रहा है, ऐसे में वेजाइनल हेल्थ के महत्व को समझना बेहद ज़रूरी है.

वेजाइनल हेल्थ को प्रोटेक्ट करने ईज़ी स्टेप्स

– वेजाइनल पीएच बैलेंस को करें प्रोटेक्ट
यदि सही पीएच बैलेंस बना रहे, तो वो हेल्दी बैक्टीरिया की ग्रोथ को बढ़ाता है. इस वजह से बेहद ज़रूरी है कि वेजाइनल पीएच बैलेंस को प्रोटेक्ट किया जाए.

– हेल्दी वेजाइना के लिए ज़रूरी है हेल्दी डायट
हाइजीन के साथ-साथ वेजाइना की हेल्थ की लिए सही-संतुलित डायट भी बेहद ज़रूरी है.

– करें सेफ सेक्स
अक्सर झिझक के चलते महिलाएं अपने मेल पार्टनर से सेफ सेक्स पर चर्चा तक नहीं करतीं. लेकिन आपकी सेहत आपके हाथ में है. संकोच न करें और पार्टनर से कंडोम यूज़ करने को कहें, क्योंकि यह कई तरह के यौन संक्रमण से आपका बचाव करता है.

– रेग्यूलर चेकअप करवाएं
भारत में अभी भी यह कल्चर डेवलप नहीं हुआ. यही वजह है कि वेजाइनल इंफेक्शन और यहां तक कि कैंसर तक भी सतर्कता की कमी के चलते हो रहे हैं. नियमित चेकअप से आप इन सबसे बच सकती हैं.

– क्या करें अगर इंफेक्शन हो जाए?
इंफेक्शन होने पर सही इलाज व सही केयर करें, ताकि वह बढ़ नहीं और भविष्य में इंफेक्शन न हो इसके लिए भी सतर्कता बरतें.

– सही हो अंडरगार्मेंट सिलेक्शन

कॉटन पैंटीज़ लें. सिंथेटिक से बचें. वेजाइनल भाग ड्राय रखने की कोशिश करें.

– हाइजीन का रखें ख़ास ख़्याल
साफ़-सफ़ाई रखें. टॉयलेट में भी इसका ख़्याल रखें. पब्लिक टॉयलेट्स के इस्तेमाल के व़क्त सावधानी बरतें.

पेल्विक एक्सरसाइज़ से रखें वेजाइना को हेल्दी
स़िर्फ डायट ही नहीं सही एक्सरसाइज़ भी वेजाइनल हेल्थ के लिए ज़रूरी है.

सर्वे- क्यों झिझकती हैं महिलाओं?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज भी बहुत बड़ी संख्या में भारतीय महिलाएं वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन के महत्व को न तो समझती हैं और न ही इस पर खुलकर बात करती हैं. यही वजह है कि वो वेजाइनल प्रॉब्लम्स से दो-चार होती हैं.

जागरूकता की कमी भी एक सबसे बड़ी वजह
हमारा सामाजिक ढांचा इसकी बड़ी वजह है. यहां इन अंगों पर बात तक करने से लोग हिचकते हैं. यहां तक के अपने डॉक्टर्स से भी इस पर बात करने से कतराते हैं..

बच्चे को ज़रूर सिखाएं ये बातें (Important Things You Must Teach Your Child)

 

हर पैरेंट्स (Parents) की चाह रहती है कि उनका बच्चा (Child) समझदार, आज्ञाकारी, ज़िम्मेदार व स्मार्ट बने. इसी वजह से वे उसे हर वो चीज़ बताने व सिखाने की कोशिश करते हैं, जो उसके लिए ज़रूरी होती है. फिर चाहे वो प्रेशर हैंडल करना हो, हाइजीन हो या फिर सिविक सेंस ही क्यों न हो.

 

Child Learning

बच्चे कैसे सीखते हैं, कौन-सी चीज़ उन्हें अधिक प्रेरित करती है? इसका कोई निश्‍चित मापदंड नहीं है, पर पैरेंट्स व बड़ों के मार्गदर्शन व प्रोत्साहन से वे बहुत कुछ सीखते हैं. इस संदर्भ में फोर्टिस के एसएल रहेजा हॉस्पिटल की पीडियाट्रिशियन व नियोनैटोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉ. अस्मिता महाजन ने उपयोगी जानकारियां दीं.

सेल्फ कंट्रोल

इन दिनों बच्चों में सहनशीलता की कमी आती जा रही है और इसका असर उनकी पर्सनैलिटी पर भी पड़ रहा है. ऐसे में धैर्य रखना, सब्र करना आदि के लिए सेल्फ कंट्रोल ज़रूरी है.

* सायकोलॉजिस्ट के अनुसार, जो बच्चे पढ़ने में अच्छे नहीं होते या फिर कमज़ोर होते हैं, वे सोशली एक्टिव भी कम होते हैं. ऐसे बच्चों को सेल्फ कंट्रोल यानी आत्म केंद्रित होना सिखाना आसान नहीं होता.

* बच्चों को सहनशीलता का पाठ बचपन से ही पढ़ाना चाहिए, जैसे- यदि वो किसी चीज़ की ज़िद करें, तो यह ज़रूरी नहीं कि आप उसे तुरंत पूरी कर दें. उन्हें धैर्य रखने के फ़ायदे बताएं. उन्हें समझाएं कि यह चीज़ सही व़क्त आने पर ज़रूर मिलेगी.

* सेल्फ कंट्रोल के लिए बच्चों को ध्यान यानी मेडिटेशन सिखाएं.

* यदि पैरेंट्स भी बच्चे के साथ मेडिटेशन करें, तो बच्चों को प्रोत्साहन मिलेगा.

* मेडिटेशन करने से रिलैक्स होने के साथ-साथ बच्चों में पॉज़िटिवनेस भी बढ़ती है.

परिस्थितियों के अनुसार ना कहना

बच्चे मासूम होते हैं और इस उम्र में उनके लिए सही-ग़लत की पहचान करना भी आसान नहीं होता. ऐसे में उनकी सुरक्षा का बेहतरीन उपाय यह है कि वे ना कहना सीखें. किन परिस्थितियों में बच्चे ना कहें, इस बारे में पैरेंट्स उन्हें समय-समय पर बताते रहें.

* यदि कोई अजनबी उन्हें छूने की कोशिश करे, तो उसे मना करें या उससे दूर हट जाएं.

* बच्चों को गुड टच व बैड टच के बारे में अच्छी तरह समझाएं. साथ ही उन्हें बेसिक सेक्स एजुकेशन भी दें.

* बच्चों को समझाएं कि अकेले होने पर कोई परिचित, पड़ोसी खिलौने, चॉकलेट या कोई तोह़फे आदि देने की कोशिश करे, तो मना कर दें.

* स्कूल, क्लास आदि में आपको पहुंचने में देरी हो रही हो और उसी समय कोई अजनबी बच्चे को घर पहुंचाने के लिए लिफ्ट दे, तो उसे ना कहें.

यह भी पढ़े: मदर्स गाइड- बच्चों के आम रोगों में उपयोगी घरेलू नुस्ख़े (Mother’s Guide- Home Remedies For Children’s Common Illnesses)

हाइजीन बेहद ज़रूरी

* बच्चों को समझाएं कि साफ़-सफ़ाई से रहने से हम हेल्दी रहते हैं और हमारा आत्मविश्‍वास भी बढ़ता है. उन्हें हाइजीन से जुड़ी हेल्दी हैबिट्स के बारे में बताएं.

* रोज़ नहाना, साफ़-सुथरा रहना, खाने से पहले हाथ धोना, टॉयलेट हाइजीन, छींकते-खांसते समय नाक-मुंह पर रुमाल रखना आदि हाइजीन से जुड़ी बेसिक बातें बच्चों को बचपन से ही सिखानी चाहिए.

* ओरल हाइजीन भी ज़रूरी है. इसके लिए सुबह और रात में ब्रश करना, दांतों व जीभ को अच्छी तरह से क्लीन करना सिखाएं, ताकि सांसों की बदबू व दांतों को ख़राब होने से बचाया जा सके.

* हाथ-पैर के नाख़ून को साफ़ रखने और हफ़्ते में एक बार नाख़ून काटने को कहें.

* कुछ बच्चों को दांत से नाख़ून काटने की आदत होती है. उन्हें समझाएं कि दांतों से नाख़ून काटने से मैल व रोगाणु पेट में जाकर उन्हें बीमार बना सकते हैं.

* बच्चों को बताएं कि नहाते समय नाक और अपने प्राइवेट पार्ट्स को भी क्लीन करें.

* बच्चों को बताएं अगर वे हाइजीन का ख़्याल रखेंगे, तो उनका इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग होगा और वे बीमार नहीं पड़ेंगे.

* स्कूल से आने, खेलकर आने आदि के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोएं.

* खाना खाने के पहले और बाद में हाथ ज़रूर धोएं.

* फलों आदि को खाने से पहले उन्हें साफ़ पानी से धोकर खाएं.

* छोटे बच्चों के लिए 8-10 घंटे की नींद बहुत ज़रूरी है. स्लीप हाइजीन में उन आदतों को शामिल किया जाता है, जो बच्चों को गहरी नींद सोने में सहायता करें. अगर बच्चे पूरी नींद नहीं लेंगे, तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होगा.

* बच्चों के सोने व उठने का एक नियत समय बना दें, ताकि बचपन से ही उनका इंटरनल क्लॉक सेट हो जाए.

लाइफ व रिलेशनशिप मैनेजमेंट

लाइफ मैनेजमेंट और रिलेशनशिप मैनेजमेंट दोनों का ही एक-दूसरे से कनेक्शन है. यदि आपकी ज़िंदगी ख़ुशहाल व सुव्यवस्थित रहेगी, तो यक़ीनन आपके रिश्ते भी मधुर व मज़बूत होंगे.

* बच्चों को अनुशासित रहना और हर काम समय पर करने की सीख बचपन से ही दें.

* बच्चों को अपनी सभी चीज़ें, फिर चाहे वो स्कूल बैग, क़िताबें, खिलौने, अन्य ज़रूरी चीज़ें ही क्यों न हों, व्यवस्थित तरी़के से रखना सिखाएं.

* छोटे बच्चे यानी 4-5 साल के बच्चों को अपने कपड़े सिलेक्ट करना, मम्मी-पापा की चीज़ों को पहचानना सिखाएं. इससे उनका कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ता है.

* उनमें बचपन से ही शेयरिंग की आदत डालें.

* रिश्तेदारों के यहां जाएं, तो उनके साथ विनम्रता से पेश आएं. काम में उन्हें सहयोग दें.

* बच्चों को दूसरों की ज़रूरतों को समझना सिखाना भी ज़रूरी है.

* बच्चों को हर रोज़ रात को सोने से पहले कुछ अच्छी बातें बताएं या फिर पढ़कर सुनाएं. इससे उनमें अच्छी आदतें विकसित होती हैं.

यह भी पढ़े: खेल-खेल में बच्चों से करवाएं एक्सरसाइज़ और ख़ुद भी रहें फिट (Indulge In Fitness With Your Children And Get In Shape)

Child Care

सिविक सेंस

* जब कभी आप बस या ट्रेन में सफ़र कर रहे हों, तो इस दौरान कोई प्रेग्नेंट वुमन या बुज़ुर्ग खड़े हों, तो उसे अपनी सीट दें और फिर अपने बच्चों को भी बताएं कि आपने उसकी मदद क्यों की है. इससे बच्चों को दूसरों की मदद करने की प्रेरणा मिलेगी.

* बच्चे को विनम्रता से बात करना सिखाएं और जब भी आप किसी से कुछ मांगें, तो ध्यान रहे कि ‘प्लीज़’ कहकर ही बात करें.

* बच्चे को सिखाएं कि देश की सार्वजनिक संपत्ति, जैसे- सड़क, ट्रेन, गार्डन आदि को गंदा न करें और कूड़ा-कचरा डस्टबिन में ही फेंकें.

* पौधे लगाएं. लोगों को पेड़ों को काटने से रोकें.

* बच्चे को ईमानदार और सच के रास्ते पर चलना सिखाएं.

* बच्चे को संविधान के नियमों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र गान का आदर करना सिखाएं.

* बतौर ज़िम्मेदार अभिभावक बच्चे को समझाएं कि ख़ुद को साफ़-सुथरा रखने के साथ-साथ अपने घर, पास-पड़ोस, सोसाइटी, स्कूल, खेल का मैदान आदि को भी साफ़ रखना चाहिए.

आमतौर पर हर बच्चा अपनी क्षमता व रुचि के अनुसार सीखता है, लेकिन हमें भी बच्चों को सीखने के लिए निरंतर प्रेरित करते रहना चाहिए.

ऊषा पन्नालाल गुप्ता

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide

 

कैसे बनाएं बाथरूम को हाइजीनिक? (How to maintain bathroom hygiene)

How to maintain bathroom hygiene

How to maintain bathroom hygiene

घर के बाकी हिस्सों की तरह ही बाथरूम का साफ़-सुथरा वो जर्म फ्री (How to maintain bathroom hygiene) होना ज़रूरी है. बाथरूम की सफ़ाई के लिए ट्राई करें ये आसान क्लीनिंग टिप्स.

– बाथरूम व टॉयलेट में कीटाणु फैलने की संभावना बहुत अधिक होती है, अत: इनकी नियमित सफ़ाई ज़रूरी है. टॉयलेट बाउल को डिसइंफेक्टेड क्लीनर से साफ़ करें. टॉयलेट ब्रश को इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह से धोकर किसी साफ़ और सूखे स्थान पर रखें.

– बाथरूम शॉवर, सिंक इत्यादि को भी इस्तेमाल करने के बाद धो दें. शॉवर के अंदर भी जर्म्स पनपने के चांसेस होते हैं. अत: यदि आप उसका इस्तेमाल नहीं कर रही हैं, तो भी समय-समय पर उसे थोड़ी देर के लिए चलाती रहें.

– टूथब्रश को इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह धो कर सूखे स्थान पर रखें. इसे हर तीन महीने में बदलती रहें.

– गीले तौलिए में भी बैक्टीरिया पनपने की संभावना होती है. अत: टॉवल को हर दूसरे दिन धोएं. बीमार व्यक्ति के लिए अलग से टॉवल रखें. अपना टॉवल किसी के साथ शेयर न करें और एक बार इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह से सूखने के बाद ही दुबारा इसका इस्तेमाल करें.

– बाथरूम आपके घर का सबसे छोटा कमरा है, फिर भी यही वह जगह है, जहां सबसे ़ज़्यादा टॉक्सिक केमिकल्स और जर्म्स होते हैं. दीवारों से पानी का रिसाव (लीकेज) और सिलिंग पर जमी मिट्टी घातक माइक्रो ऑर्गेऩिज़्म हैं. ये बैक्टीरिया व वायरस को पनपने में मदद करते हैं. इससे निकलने वाले केमिकल्स से अस्थमा व एलर्जी हो सकती है.

– बाथरूम को जहां तक हो सके, सूखा रखने की कोशिश करें. बाथरूम का इस्तेमाल करने के बाद एग्जॉस्ट फैन चलाएं.

– सोप केस यानी साबुनदानी में सबसे ज़्यादा बैक्टीरिया जमा होते हैं. इन्हें गरम पानी व डिटर्जेंट से साफ़ करें और सुखाकर रखें. बाथरूम का दरवाज़ा इस्तेमाल के बाद खोल दें ताकि हवा आती रहे.

– बाथरूम में ऐसी टाइल्स लगाएं, जिनमें फिसलने का डर न रहे. इसके लिए रबर मैट का इस्तेमाल करें.

– एयर फ्रेशनर, सेंटेड कैंडल्स, अगरबत्ती आदि बाथरूम में न रखें, इनसे एयर पॉल्यूशन होता है.

– नल के टैप, रिम को रोज़ाना डिसइंफेक्टेड लिक्विड से साफ़ करें.

– बाथरूम व टॉयलेट के नालों को उबले हुए पानी में 2 टेबलस्पून बेकिंग सोडा डालकर साफ़ करें. नाले में नैपथलीन की गोलियां डालें, इससे कॉकरोच नहीं आते, लेकिन कई लोगों को इन गोलियों से एलर्जी हो सकती है.

– यदि फर्श बहुत गंदा है, तो ब्लीचिंग पाउडर छिड़कें और रगड़कर साफ़ करें.

– खिड़कियां साफ़ करने के लिए पुराने टूथब्रश का इस्तेमाल करें. टूथब्रश को साबुन के घोल में डुबोकर उससे खिड़कियां साफ़ करें.

– 500 मि.ली. सिरके में नींबू का रस और नमक मिलाकर कमोड में डालें. सारी गंदगी साफ़ हो जाएगी और कमोड चमकने लगेगा.

– टॉयलेट सीट साफ़ करने के लिए सीट पर पहले बेकिंग सोडा छिड़कें. फिर सिरके की कुछ बूंदें डालकर 1 घंटे के लिए छोड़ दें. अब पानी की तेज़ धार से सीट साफ़ कर दें. सारे कीटाणु और बदबू दूर हो जाएगी.

– बाथरूम में फ़ालतू का कचरा जमा न करें. शैम्पू व फेसवॉश की खाली बोतल, साबुन का रैपर आदि फेंक दें. सोप केस (साबुनदानी) और ब्रश रखने वाले बास्केट की भी नियमित सफ़ाई करें.

– बाथरूम के बेसिन को साफ़ करने के लिए नींबू काटकर उसमें ढेर सारा नमक लगाएं और इसे बेसिन पर एक बार रगड़ें. 15 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लीजिए, बेसिन चमकने लगेगा.

– शायद ही आपने नल की सफ़ाई पर ध्यान दिया हो. लगातार इस्तेमाल के कारण नल की चमक फीकी पड़ गई है, तो रूई को सिरके में डुबोकर नल को साफ़ करें. हफ़्ते में दो बार ऐसा करने पर नल चमकने लगेगा.

– यदि बाथरूम के टाइल्स पर कोई दाग़ लगा है, तो वहां कटा आलू रगड़ें और 15 मिनट बाद गरम पानी से धो दें.

 

23 ईज़ी फर्नीचर क्लीनिंग सोल्यूशन (23 Easy Furniture Cleaning Solution)