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कैसे करें अपने बच्चे की इम्युनिटी बूस्ट?(How to Boost Your Child’s Immunity)

मौसम बदलने के साथ सर्दी-ज़ुकाम, ख़ासी-बुख़ार और वायरल इंफेक्शन्स बच्चों को अपनी चपेट में ले लेते हैं. उनका
बार-बार बीमार पड़ना इस बात की ओर संकेत करता है कि आपके बच्चे का इम्युनिटी सिस्टम कमज़ोर है. हम यहां पर कुछ ऐसे ही ङ्गइम्युनिटी बूस्टर फूडफ के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें खिलाकर आप अपने बच्चों की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं.

 

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दही:

हाल ही में हुए एक शोध में यह सिद्ध हुआ है कि जो बच्चे दही खाते हैं, उन्हें कान-गले का संक्रमण और सर्दी-ज़ुकाम के होने की संभावना 19% तक कम होती है. दही में गुड बैक्टीरिया होते हैं, जो बच्चों के इम्युनिटी सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाने में मदद करते हैं. गुड बैक्टीरिया (जिन्हें प्रोबायोटिक्स भी कहते हैं) की संख्या बढ़ने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, साथ ही दही खाने से सूजन, संक्रमण और एलर्जी संबंधी समस्याएं भी दूर होती हैं.
कैसे खिलाएं?
– सादा दही खिलाने की बजाय स्मूदी व शेक बनाकर बच्चों को दें. दही में इच्छानुसार कोई भी फल काटकर बच्चोें को खाने के लिए दें.
– दही में शक्कर और रोस्टेड ड्राइफ्रूट्स मिलाकर चॉकलेट सॉस से सजाकर उन्हें खाने के लिए दें.
टिप: रोज़ाना बच्चों को 1 कटोरी दही ज़रूर खिलाएं.

नट्स:

नट्स खाने में जितने स्वादिष्ट होते हैं, उतने ही पौष्टिक भी होते हैं. इनमें सैचुरेटेड फैट्स की मात्रा कम और प्रोटीन व फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं. नट्स में रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ानेवाले ज़िंक, आयरन और विटामिन बी जैसे तत्व ही नहीं होते, बल्कि ऐसे मिनरल्स और विटामिन्स भी होते हैं, जो बच्चों के इम्युनिटी सिस्टम को सपोर्ट भी करते हैं.
कैसे खिलाएं?
– बच्चों को दलिया या सीरियल्स में नट्स डालकर खाने को दें. इसके अलावा स्नैक्स के तौर पर नट्स खा सकते हैं.
– फ्रूट सलाद, वेज स्टर फ्राई, करी आदि में डालकर भी बच्चों को नट्स खिला सकते हैं
टिप: स्नैक्स के तौर पर जंक फूड की बजाय भुने हुए नट्स उन्हें खाने के लिए दें.

बेरीज:

बेरीज़ में ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स और पोषक तत्व होते हैं, जो बच्चों की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. इसलिए उन्हें किसी न किसी रूप में बेरीज़ ज़रूर खिलाएं. बेरीज़ का लाल, नीला और पर्पल कलर इस बात की ओर संकेत करता है कि उनमें
एंथोसायनिन्स की मात्रा बहुत अधिक है. एंथोसायनिन्स बहुत पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो अनेक बीमारियों से बच्चों की
रक्षा करता है. बेरीज़ में विटामिन सी भी प्रचुर मात्रा में होता है, जो इम्युनिटी को मज़बूत बनाने के साथ-साथ बच्चों में संक्रमण के
ज़ोखिम को भी कम करता है.
कैसे खिलाएं?
– ब्रेकफास्ट या हेल्दी स्नैक्स के तौर पर बेरीज़ को दलिया, दही या बेक्रफास्ट सीरियल में मिलाकर खिला सकते हैं.
टिप: चाहें तो बेरीज़ की प्यूरी, स्मूदी (शेक) या जूस बनाकर भी बच्चों को पिला सकते हैं.

अंडा:

विटामिन और प्रोटीन का सबसे बेहतरीन स्रोत है अंडा. यह भी ङ्गसुपर फूडफ की श्रेणी में आता है. एग योक (अंडे के पीले भाग) में ऐसे पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो बच्चों की इम्युनिटी क्षमता को बढ़ाते हैं. एग योक में ज़िंक, सेलेनियम और मिनरल्स भी होते हैं, जो बच्चों के मस्तिष्क का विकास और आंखों की रोशनी को भी तेज़ करते हैं.
कैसे खिलाएं?
– एग पुलाव, एग उपमा, एग पकौड़ा, एग सैंडविच व एग परांठा बनाकर बच्चों को खिला सकते हैं.
टिप: बच्चों को कम से कम 1 अंडा रोज़ाना खिलाएं. एक अंडे में 6 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों को स्ट्रॉन्ग बनाने में मदद करता है.

सालमन:

ओमेगा 3 फैटी एसिड का सबसे उत्तम स्रोत है सालमन. इसमें मौजूद फैट्स बच्चों के मानसिक विकास और इम्युनिटी सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाने में मदद करता है. सालमन में ज़िंक, मिनरल्स और विटामिन डी भी प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो इम्युनिटी सिस्टम को बूस्ट करते हैं.
कैसे खिलाएं?
– सालमन फिश के पकौड़े, टिक्की, कबाब और कटलेट बनाकर बच्चों को खिलाएं.
टिप: बच्चों के इम्युनिटी सिस्टम को मज़बूत बनाने के लिए उन्हें सप्ताह में 2-3 बार सालमन फिश ज़रूर खिलाएं.

लहसुन:

इसमें ऐसे एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो बच्चों की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं. लहसुन में ऐसे पोषक तत्व भी होते हैं, जो इम्युनिटी सेल्स में होनेवाले इंफेक्शन से लड़ने में सहायता करते हैं. यह बच्चों के शरीर में मौजूद सल्फर नामक तत्व को नियंत्रित करता है, ताकि उनके शरीर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स की एक्टिविटीज़
तेज़ हो सके. इसलिए इसे ङ्गइम्युनिटी बूस्टर फूडफ भी कहते हैं.
कैसे खिलाएं:
– दाल-सब्ज़ी के अलावा बच्चों को उनके फेवरेट फूड, जैसे- स्पेगेटी, पास्ता, सूप, गार्लिक ब्रेड, डिप्स-चटनी और ड्रेसिंग में भी लहसुन डालकर खिला सकते हैं.
टिप: कुकिंग करते समय लहसुन को केवल हल्का-सुनहरा होने तक भूनें, नहीं तो लहसुन में स्थित इम्युनिटी बढ़ानेवाले एंटीऑक्सीडेेंट्स नष्ट हो जाते हैं.

टमाटर:

लाल टमाटर में ऐसे पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो बच्चों में फ्री रैडिकल्स से होनेवाले डेमैज को रोकते हैं और उनकी इम्युनिटी क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं. इसमें विटामिन सी और बीटा-कैरोटीन नामक एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होता है, जो इम्युनिटी सिस्टम में होनेवाले संक्रमण से बच्चों की रक्षा करता है.
कैसे खिलाएं?
– दाल-सब्ज़ी के अलावा टोमैटो प्यूरी, सॉस, सूप, सलाद, डिप बनाकर बच्चों को खिलाएं.
टिप: 8 महीने से कम उम्रवाले बच्चों को टमाटर से बनी प्यूरी, डिप आदि न दें. इससे उन्हें रैशेज़ होने की संभावना होती है.

रंग-बिरंगी सब्ज़ियां:

लाल-पीली-हरी शिमला मिर्च, गाजर, आलू, फूलगोभी और पत्तागोभी आदि सब्ज़ियों में कलरफुल कंपोनेंट केरोटेनाइड्स (जैसे- बीटा कैरोटीन) नामक एंटीऑक्सीडेंट्स होता है, जो बच्चों की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. गाजर में विटामिन्स ए, बी, सी और जी, पोटैशियम और सोडियम बहुत अधिक मात्रा में होते हैं, जो बच्चों की ग्लोइंग स्किन, आंखों की रोशनी, पाचन तंत्र और दांतों के लिए फ़ायदेमंद होते हैं. इसी तरह से लाल शिमला मिर्च में बीटा कैरोटीन और विटामिन सी बहुत अधिक मात्रा में होता है, जो बच्चों की आंख और त्वचा को हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है.
कैसे खिलाएं?
– कलरफुल वेजीटेबल्स से सैंडविच, परांठा, रोल्स, कबाब, टिक्की आदि बनाकर बच्चों को खिला सकते हैं.
टिप: कलरफुल वेजीटेबल्स में मौज़ूद बीटा कैरोटीन बच्चों में बार-बार होनेवाले कोल्ड एंड फ्लू से उनकी रक्षा करता है.

हरी पत्तेदार सब्ज़ियां:

पालक, मेथी, बथुआ आदि हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में आयरन प्रचुर मात्रा में होता है, जो बच्चों के इम्युनिटी सिस्टम को मज़बूत बनाने में मदद करता है. आयरन में मौजूद तत्व शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स और एंडीबॉडीज़ के उत्पादन का काम करते हैं. जिन बच्चों में आयरन की कमी होती हैं, उन्हें बार-बार कोल्ड और फ्लू होने की संभावना होती है. हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में बीटा-कैरोटीन सहित ऐसे अनेक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो बच्चों के इम्युनिटी सिस्टम को हेल्दी बनाए रखने के साथ-साथ अन्य बीमारियों से भी उनका बचाव करते हैं.
कैसे खिलाएं?
– सब्ज़ी व परांठे के अलावा हरी पत्तेदार सब्ज़ियों से बने हेल्दी स्नैक्स, चीला, डोसा और पूरी भी बच्चों को खिला
सकते हैं.
टिप: हरी सब्ज़ियों में मौज़ूद पोषक तत्व इम्युनिटी सेल्स को नियंत्रित करके पाचन तंत्र को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं.

ब्रोकोली:

इसे सुपर फूड भी कहते हैैं. ब्रोकोली में ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीइनफ्लेमेट्री और डिटॉक्सिफाइंग कंपोनेंट होते हैं, जो इम्युनिटी सिस्टम को मज़बूत बनाने में मदद करते हैं. इसमें उपस्थित मिनरल्स और विटामिन्स ए, सी व ई बच्चों की शारीरिक क्षमता को ब़ढ़ाने में सहायता करते हैं.
कैसे खिलाएं?
– पास्ता, सूप और डिप के साथ बच्चों को ब्रोकोली खिला सकते हैं. इसके अलावा उबली हुई ब्रोकोली में चीज़ डालकर अवन में सुनहरा होने तक बेक करें. फिर उन्हें खाने के लिए दें.
टिप: कुकिंग करते समय ब्रोकोली को बहुत देर तक पकाना नहीं चाहिए. अधिक देर तक पकाने से इसमें मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं.

बीन्स:

काबुली चना और दालें: बीन्स और दालों में फाइबर और अघुलनशील स्टार्च प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो पेट को स्ट्रॉन्ग बनानेवाले गुड बैक्टीरिया का निर्माण करते हैं, जिससे पाचन तंत्र और इम्युनिटी सिस्टम मज़बूत होता है.
कैसे खिलाएं?
– दाल-बीन्स आदि से कबाब, टिक्की, रोल्स और पकौड़े बनाकर बच्चों
को खिलाएं.
टिप: दालों में प्रोटीन बहुत अधिक मात्रा में होता है, जो बच्चों के शरीर में ऊतकों के निर्माण में मदद करता है.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

टॉप 30 Amazing इम्यूनिटी बूस्टर फूड(30 power foods that boost immunity)

immunity booster food

क्या आप अक्सर सर्दी-ज़ुकाम की शिकार हो जाती हैं या आपको इंफेक्शन बहुत जल्दी हो जाता है? इन सबका कारण कमज़ोर इम्यून सिस्टम है, जिसकी वजह से आप जल्दी बीमार हो जाती हैं. डायट से कैसे सुधारें इम्यून सिस्टम?

immunity booster food

इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरोधक प्रणाली दुरुस्त न हो, तो हम बहुत जल्द बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं. इम्यून सिस्टम के कमज़ोर होने का सबसे बड़ा कारण है डायट में न्यूट्रीएंट्स की कमी. तो आइए जानते हैं, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में, ताकि इन्हें अपनी रोज़मर्रा की डायट में शामिल कर आप हमेशा सेहतमंद बने रहें.

सब्ज़ियां

सब्ज़ियां खाने से कोलेस्ट्रॉल व हृदय रोग की संभावना कम होती है. इनसे शरीर को विटामिन व मिनरल्स मिलते हैं, जिनसे इम्यून सिस्टम तंदुरुस्त रहता है.
मेथी
– रोज़ाना मेथी खाने से एनीमिया से राहत मिलती है.
– मेथी डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी लाभदायक है.
– डिलीवरी (प्रसव) के बाद इसे खाने से मां को अच्छा दूध आता है.
पालक
– इसमें आयरन, कैल्शियम काफ़ी मात्रा में होता है, जो एनीमिया में लाभदायक है.
– पालक व अन्य हरी सब्ज़ियों में विटामिन, मिनरल, फॉलिक एसिड व फाइबर्स होते हैं.
गाजर
– गाजर विटामिन ए, कैरोटिनाइड और एंटी ऑक्सीडेंट का स्रोत है.
– गाजर के सेवन से लंग कैंसर की संभावना कम होती है.
– विटामिन ए आंखों के लिए अच्छा होता है एवं मोतियाबिंद की संभावना को भी कम करता है.
टमाटर
– टमाटर का नियमित सेवन दिल की बीमारी में आराम पहुंचाता है.
– कोलेस्ट्रॉल हाई हो, तो नियमित रूप से टमाटर का जूस पीएं.
– टमाटर एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल) का लेवल कम करने में भी सहायक होता है.
– इसमें लाइकोपेन होता है, जो शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज़ कर देता है, जिससे फ्री रेडिकल्स हमारे शरीर को नुक़सान नहीं पहुंचा पाते.
– इसके नियमित सेवन से त्वचा पर पड़ने वाली झुर्रियों से लेकर हार्ट अटैक जैसी संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का ख़तरा कम हो जाता है.

फल

ये एंटी-ऑक्सीडेंट के भंडार होते हैं. इन्हें रोज़ खाया जाना चाहिए.
सेब
– सेब विटामिन सी व पोटैशियम का अच्छा स्रोत है.
– यदि 1 या 2 सेब रोज़ खाए जाएं, तो एनर्जी लेवल में बढ़ोतरी होती है.
– इससे इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग होता है और ब्लडप्रेशर भी कम होता है.
संतरा
– यह विटामिन ङ्गसीफ का स्रोत है.
– संतरा कैंसर से बचाव, ब्लड सर्कुलेशन (रक्तसंचार) बढ़ाने, घावों को जल्दी भरने मेें भी सहायक है.
अंगूर
– हरे व काले दोनों तरह के अंगूरों में एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं.
– ये नसों को संकीर्ण और कड़ा होने से बचाते हैं.
– अंगूर में पाए जाने वाले इलॉजिक एसिड में एंटी कैंसर गुण भी होते हैं.
– इसमें एन्थोसाएनिन्स की मात्रा अधिक होती है.
– ये शरीर में मौजूद ख़राब एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को नष्ट करता है और ख़ून के थक्के नहीं जमने देता.
बेरीज़
– सभी बेरीज़, जैसे- स्ट्रॅाबेरी, ब्लूबेरी, केनबेरी आदि विटामिन एवं फाइटोकेमिकल्स के अच्छे स्रोत हैं.
– फाइटोकेमिकल्स ऐसे पदार्थ हैं, जो बीमारियों से बचाते हैं.
– स्ट्रॉबेरी में एंटी कैंसर गुण भी होते हैं.
– इसे खाने से कमज़ोरी और डिप्रेशन दूर होता है.
केला
– इसे ङ्गइंस्टेंट एनर्जी बूस्टरफ कहना सही होगा, क्योंकि इसे खाने पर तुरंत एनर्जी मिलती है.
– इसमें 3 प्रकार की प्राकृतिक शर्करा होती है- ग्लूकोज़, सूक्रोज़ और फ्रक्टोज़.
– इसमें पाए जानेवाले हाई फाइबर कब्ज़ दूर करने में सहायक होते हैं.
– इसके अलावा केले का सेेवन अल्सर, एनीमिया, ब्लडप्रेशर, डिप्रेशन आदि में भी उपयोगी होता है.
नाशपाती
– यह पेक्टीन फाइबर व पोटैशियम का स्रोत है.
– पेक्टीन कोलेस्ट्रॉल कम करता है, शरीर को टॉक्सीन से मुक्त रखता है.
– इसमें सोडियम, फॉस्फोरस, कॉपर, विटामिन ए, सी भी होता है. यह व्हाइट सेल्स को इंफेक्शन से लड़ने के लिए उत्तेजित करता है और फ्री रेडिकल्स से होनेवाले नुक़सान से बचाता है.
तरबूज़
– इसमें प्रचुर मात्रा में लाइकोपेन पाया जाता है.
– ये प्रोस्टेट कैंसर के ख़तरे को कम करता है.
आड़ू
– इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइट्रेट विटामिन सी, ए और फाइबर होते हैं.
– मेनोपॉज़ के बाद की समस्याओं से बचने के लिए रोज़ 2 पीचेज़ खाना लाभदायक है, क्योंकि इसमें पाया जानेवाला ङ्गबोरोनफ एस्ट्रोजन हार्मोन लेवल को बढ़ाता है.
आंवला
– आंवले में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो इम्यून सिस्टम को बहुत मज़बूत बनाता है.
– रोज़ सुबह आंवले का रस और शहद मिलाकर खाया जाए, तो अनेक बीमारियों से बचाव होता है.

सलाद

सलाद में खाए जानेवाले पदार्थ भी इम्यून सिस्टम दुरुस्त करने में सहायक होते हैं.
खीरा
– यह ठंडी प्रकृति का, डाययूरेटिक (मूत्रवर्द्धक) व त्वचा के लिए फ़ायदेमंद होता है.
– खीरे का ताज़ा रस सीने की जलन, एसिडिटी, एक्ज़िमा, आर्थराइटिस, गेस्ट्राइटिस व अल्सर में भी फ़ायदा
पहुंचाता है.
शतावरी
– इसमें कैलोरीज़ न के बराबर और विटामिन व मिनरल प्रचुर मात्रा में होते हैं, जैसे- विटामिन ए, बी, सी, बी 9 आदि.
– एस्पेरेगस में पाया जानेवाला विटामिन ए त्वचा व बालों के लिए एवं फाइबर आंतों की सफ़ाई के लिए फ़ायदेमंद होता है.
मूली
– इसमें ज़िंक काफ़ी मात्रा में होता है.
– यह मूत्रवर्द्धक होती है.
– इसकी पत्तियों में आयरन, कैल्शियम व विटामिन सी होता है.
बीटरूट
– इसमें आयरन, पोटैशियम व विटामिन सी होता है.
– यह लिवर को डिटॉक्स करता है और इम्यून सिस्टम को तंदुरुस्त रखता है.
नींबू
– इसमें इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाने वाला विटामिन सी व फ्लेवोनॉइड नामक कंपाउंड पाया जाता है.
– इसमें एंटी-कैंसर व एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण भी होते हैं.
– यह त्वचा और मसूड़ों को हेल्दी बनाता है.
हरी धनिया
– इसमें आयरन होता है.
– यह भोजन का स्वाद बढ़ाता है तथा एलर्जी व अपचन से बचाता है.
दही
– दही में ज़िंक होता है, जिसकी कमी से इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाता है.
– इसमें कैल्शियम, विटामिन ई व प्रोटीन होता है.
– दही खाने से मुंह से आनेवाली बदबू कम होती है.
– पाचन नली के हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद मिलती है, जिससे पाचन क्रिया ठीक रहती है.
साथ ही पेट संबंधी सारी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है.
शहद
– इसमें प्राकृतिक शर्करा व कार्बोहाइड्रेट होेता है, जो शरीर में आसानी से अवशोषित हो कर इंस्टेंट एनर्जी देते हैं, जिसका असर लंबे समय तक रहता है. अतः एथलीट व रनर्स अपनी डेली डायट में इसका उपयोग करते हैं.
– यह स्ट्रेस बूस्टर व एंटीसेप्टिक भी है.
पार्सले
– इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी, कैल्शियम, पोटैशियम, मैगनीज़, आयरन होता है.
– यह भी इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखने में सहायक है.
तुलसी
– इसके पत्ते गैस की समस्या, मितली व पेट की समस्या से भी निजात दिलाते हैं.
– हेपेटाइटिस व टाइफ़ाइड से बचने के लिए इसके 5 पत्ते रोज खाएं.
ड्रायफ्रूट्स
– सभी ड्रायफ्रूट्स विटामिन्स, फ़ाइबर, मिनरल आयरन व कैल्शियम के स्रोत हैं.
– ये बहुत हेल्दी होते हैं. इनमें हाई प्रोटीन व फैट होता है.
– ब्रेनफूड बादाम विटामिन ई का स्रोत है, जो त्वचा की झुर्रियां व कोलेस्ट्रॉल कम करता है.
– अखरोट में ओमेगा 3 ़फैटी एसिड होता है, जो आर्थराइटिस कम करता है.

अनाज

विभिन्न अनाजों में मौजूद उपयोगी पदार्थ भी इम्यून सिस्टम बढ़ाते हैं, जिससे हम बने रहते हैं सेहतमंद.
दालें (सभी तरह की)
– इनमें सभी आवश्यक एमीनो एसिड्स होते हैं.
– इनमें 20-25% प्रोटीन होता है, जो गेहूं में पाए जाने वाले प्रोटीन से दुगुना और चावल के प्रोटीन से तिगुना होता है.
सोयाबीन
– इसमें ओमेगा 3 व ओमेगा 6 फैटी एसिड्स होते हैं, जो हेल्थ के लिए अच्छे हैं.
– मेनोपॉज़ व ऑस्टियोपोरोसिस में इसका उपयोग बहुत फ़ायदा पहुंचाता है.
बीन्स
– बीन्स में विटामिन बी व पोटैशियम होता है.
– ये कोलेस्ट्रॉल कम करने, ब्लड शुगर नियंत्रित करने और ब्लडप्रेशर, कैंसर व मोटापे का रिस्क कम करने में
सहायक हैं.
ओट्स (जई)
– इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, सिलिकॉन, विटामिन बी व ई होते हैं. नाश्ते में इनका सेवन सेहतमंद होता है.
ये पाचन में भी मदद करते हैं.
– कोलेस्ट्रॉल कम करने व डायबिटीज़ के लिए फ़ायदेमंद हैं.
फ्लेक्स सीड्स (अलसी)
– फ्लेक्स सीड्स में ओमेगा 3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होता है, अतः इसके सेवन से हृदय रोग, कैंसर, आर्थराइटिस जैसी बीमारियों से बचाव होता है.
– इसमें मैगनीज़, फ़ॉलिक एसिड, कॉपर, फ़ॉस्फ़ोरस व विटामिन बी 6 होता है.
– यदि रोज़ इसका सेवन किया जाए तो सोरायसिस, ऑस्टियोपोरोसिस, डायबिटीज़ व एलर्जी में फ़ायदा
होता है.
तिल
– इसमें विटामिन ए, बी, ई के अलावा कैल्शियम, कॉपर, फ़ॉस्फ़ोरस, मैगनीज़, पोटैशियम व ज़िंक भी होता है.
पॉपी सीड्स (खसखस)
– यह गर्भवती व दूध पिलाने वाली मांओं के लिए बहुत फ़ायदेमंद है.
– इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस होता है.
– यह शरीर के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है.

 

10 गुड फूड, 10 बैड फूड (10 Good Food 10 Bad Food)