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इन डेली डोज़ेस से बढ़ाएं रिश्तों की इम्यूनिटी (Daily Doses To A Healthy Relationship)

रिश्तों (Relationships) को बेहतर बनाए रखने का कोई लिखा-पढ़ा फॉर्मूला तो नहीं है, क्योंकि हर इंसान और हर किसी की सोच अलग होती है. पर हां, कुछ बातें ज़रूरी होती हैं, जिनसे आपके रिश्ते बेहतर होंगे, उनमें नई उमंग और ऊर्जा जागेगी, जिससे उनकी इम्यूनिटी तो बढ़ेगी ही, साथ ही आप दोनों का प्यार व अपनापन भी बरक़रार रहेगा. तो क्या हैं वो डेली डोज़ेस (Daily Doses), जो आपके रिश्ते को बनाएंगे इम्यून, आइए जानें.

 Relationship Dose
थोड़ी आज़ादी दें

रिश्तों में एक-दूसरे को कंट्रोल करने की कोशिश कभी न करें. इससे घुटन होने लगती है. हमेशा एक-दूसरे को स्पेस दें और इतना विश्‍वास बनाएं कि पार्टनर बिना हिचके सब कुछ शेयर कर सके. हर बात पर टोकना, हर बात पर सवाल या हर बार यह अपेक्षा कि आप जैसा चाहें, पार्टनर वैसा ही करे और आपके अनुसार ही ढले… यह सोच ग़लत है. उसके अलग व्यक्तित्व को मानें और सम्मान दें.

गेम्स न खेलें, मैनुपुलेशन से बचें

बहुत से रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स भी आपको कहते मिलेंगे कि पावर गेम्स खेलें, ऐसा करें, तो पार्टनर कंट्रोल में रहेगा, वैसा करेंगे, तो दिन-रात आपको ही याद करेगा. ऐसा कभी न करें. अगर आप जान-बूझकर पार्टनर को इग्नोर कर रहे हैं, ताकि उनका अटेंशन पा सकें, तो यह ग़लत है. हो सकता है, थोड़े समय के लिए आपको पार्टनर का अटेंशन मिल जाए, लेकिन लंबे समय तक यह करेंगे, तो पार्टनर की दिलचस्पी आप में कम हो जाएगी. रिश्ते में ठंडापन व ग़लतफ़हमियां बढ़ेंगी.

पार्टनर की ख़ुशियों को भी सम्मान दें

भले ही आप एक-दूसरे से कितना ही प्यार करते हों, पर प्यार के साथ एक-दूसरे को सम्मान भी दें और ख़ासतौर से पार्टनर की ख़ुशियों का भी ख़्याल रखें. कभी-कभी अपनी ख़ुशियों को छोड़कर पार्टनर की ख़ुशी के लिए कुछ करने में बुराई नहीं. इससे आपके रिश्ते की इम्यूनिटी ही बढ़ेगी. पार्टनर को भी लगेगा कि आपको उनकी फ़िक्र है और जब उनकी बारी आएगी त्याग या समर्पण की, तो वो भी आपकी ख़ुशियों का ख़्याल रखने से पीछे नहीं हटेंगे. दूसरी तरफ़ पार्टनर की ख़ुशी व उसके सम्मान के लिए नकारात्मक बातों और चीज़ों पर से ध्यान हटाएं. जी हां, यदि पार्टनर की कोई आदत या बात आपको पसंद नहीं, तो बार-बार उसे टोकने या बदलने को कहने की बजाय उसे अवॉइड करें या फिर प्यार से अलग तरह से कहें. यह सोचें कि कोई भी परफेक्ट नहीं होता, आप भी नहीं हैं, तो फिर पार्टनर से इतने परफेक्शन की उम्मीद क्यों? बेहतर होगा पार्टनर की अच्छी आदतों और बातों को तवज्जो दें, उसकी प्रशंसा करें, उसे मोटिवेट करें. ये बातें आपके रिश्ते को इम्यून करेंगी.

मर्यादा तय करें

यह आप दोनों के व आपके रिश्ते के सम्मान को बनाए रखने के लिए भी ज़रूरी है. आप अपने पार्टनर को यह समझाएं कि उनकी किन बातों को आप स्वीकार कर सकते हैं और किन बातों को नहीं. पर यह बात झगड़े के दौरान न कहें. आपस में बैठकर बात करें. आराम से बोलें, आवाज़ का वॉल्यूम कम रखकर बात करें. ग़ुस्से में बात बिगड़ सकती है. एक बार पार्टनर समझ जाएंगे कि उन्हें क्या नहीं करना है, तो वो आगे से ध्यान रखेंगे.

अपनी ग़लती मानें

ग़लती किसी से भी हो सकती है. अगर आपकी ग़लती पकड़ी गई है या न भी पकड़ी गई हो, तो भी जहां आपको महसूस हो कि आप ग़लत हैं, उसे स्वीकार लें. बेवजह का ईगो रिश्तों को ख़त्म कर देता है. सॉरी बोलने में कोई छोटा नहीं हो जाता.

दिन की शुरुआत सकारात्मकता से करें

आपकी पॉज़िटिविटी पार्टनर को भी बढ़ावा देगी. सुबह-सुबह हड़बड़ाहट में ग़ुस्सा करने से काम नहीं संभलेगा. बेहतर होगा कि उन क्षणों को भी सकारात्मकता से स्वीकारें और धैर्य से मुस्कुराते हुए काम करें. इससे आप दोनों का ही मूड दिनभर रिफ्रेश रहेगा.

पार्टनर को इग्नोर न करें

भले ही आपके रिश्ते को कितना ही समय हो गया हो, पर इग्नोरेंस किसी को भी बर्दाश्त नहीं होगा. काम के बीच पार्टनर को न भूल जाएं. बीच-बीच में कॉल या मैसेज करके हालचाल या हल्की-फुल्की बातचीत करें. रोमांटिक बातें करें, छेड़छाड़ करें. यह डेली डोज़ आपको कनेक्टेड रखेगा.

सरप्राइज़ दें

यह ज़रूरी नहीं कि स्पेशल ओकेज़न पर ही सरप्राइज़ प्लान किया जाए, बल्कि सरप्राइज़ प्लान करके आप उस दिन को स्पेशल बना सकते हैं और अपने पार्टनर को स्पेशल फील करा सकते हैं. आप कोई गिफ्ट ले जाएं, जो आपका पार्टनर बहुत समय से लेना चाह रहा हो या आप मूवी टिकट्स ले आएं, डिनर प्लान करें… आप अपनी क्रिएटिविटी के अनुसार कोई भी सरप्राइज़ प्लान कर सकते हैं. उन बातों को याद करें या उनकी चर्चा करें, जो आपको एक-दूसरे में अच्छी लगती हैं: पुरानी या कोई नई याद, कुछ खट्टी-मीठी बातें, अपनी पहली मुलाक़ात या शादी का अल्बम… इनमें से कोई भी चीज़ आपके रिश्ते को इंस्टेंट फ्रेशनेस देती है. रिश्ते की इम्यूनिटी के लिए बहुत ज़रूरी है कि प्यारभरे ये डोज़ भी समय-समय पर एक-दूसरे को आप देते रहें.

माफ़ करना सीखें

पार्टनर की ग़लतियों पर बार-बार उसे शर्मिंदगी महसूस कराना रिश्ते को कमज़ोर करता है. बेहतर होगा पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ा जाए. माफ़ करना सीखें. हर किसी से ग़लती हो सकती है, ऐसे में माफ़ करने से ही रिश्ते बेहतर होते हैं, ग़लतियों को याद करके या याद दिलाकर रिश्तों को इम्यून नहीं किया जा सकता.

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Couple Goals
पार्टनर की पसंद को महत्व दें

कुछ चीज़ें जो आपके लिए उन्हें अच्छी लगती हों, वो करें, जैसे- उनकी पसंद का कलर पहनें, उनकी पसंद का टीवी प्रोग्राम उनके साथ देखें या उनकी पसंद का खाना बनाएं.

कुछ चीज़ें साथ-साथ प्लान करें

एक साथ वॉक पर जाएं, जॉगिंग करें या स्विमिंग, डांस क्लास आदि जॉइन करें. इससे साथ में क्वालिटी टाइम बिता सकेंगे और उन पलों को ज़्यादा एंजॉय कर सकेंगे. आप किचन में भी मिलकर कुछ स्पेशल बना सकते हैं.

स़िर्फ पार्टनर के लिए टाइम निकालें

आज काम जल्दी हो गया, इसलिए जल्दी घर आ गया/गई, आज आउटडोर मीटिंग कैंसल हो गई, तो समय से पहले घर पहुंच गए… इन कारणों के अलावा एक दिन ऐसा करें कि हाफ डे लें स़िर्फ अपने पार्टनर के लिए और उसे कहें कि तुम्हारी याद आ रही थी, इसलिए हाफ डे लेकर आ गया. अगर दोनों वर्किंग हैं, तो पार्टनर के साथ प्लान करें. लीव लेकर पूरा दिन घर पर अकेले एक-दूसरे के साथ बिताएं.

शॉर्ट हॉलीडेज़ प्लान करें

लंबी छुट्टी पर जाना संभव नहीं, कोई बात नहीं. वीकेंड पर एक-दो दिन की अतिरिक्त छुट्टियां लेकर आसपास ही कहीं रिज़ॉर्ट में जाएं. यह आपके रिश्ते को नई ताज़गी व ऊर्जा देगी.

बहुत सारे सवाल न करें

बात-बात पर सवाल या टोकना किसी को भी पसंद नहीं आता, ऐसे में यदि आपके मन में कुछ आशंकाएं हैं भी, तो समय आने पर उनका जवाब मांगें. एक साथ रोज़ाना ढेर सारे सवाल पार्टनर को आपसे दूर ले जाएंगे. उन्हें लगेगा कि आपको उन पर भरोसा ही नहीं है.

पार्टनर के परिवारवालों को भी सम्मान दें

अपने पैरेंट्स के लिए हम जो सम्मान चाहते हैं, वही सम्मान पार्टनर के पैरेंट्स को भी दें. इससे आप दोनों की बॉन्डिंग और बेहतर होगी. हमेशा घरवालों की शिकायत करने से बचें. अगर कोई समस्या है भी, तो आराम से बैठकर सुलझाने की कोशिश करें.

सेक्स लाइफ को रिफ्रेश करें

सेक्स को रूटीन न बनने दें. यह शादीशुदा ज़िंदगी का महत्वपूर्ण अंग है. इसे नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है. अपनी सेक्स लाइफ में ताज़गी बनाए रखने के लिए कुछ न कुछ नया ट्राई करते रहें. चाहें, तो जगह चेंज करके देखें, नई पोज़ीशन्स ट्राई करें. एक-दूसरे को हॉट मसाज दें. रूम का लुक चेंज करें.

हर बात को शिकायत के अंदाज़ में न कहें

किसी की भी लाइफ परफेक्ट नहीं होती, लेकिन छोटी-छोटी चीज़ों में ख़ुशियां ढूंढ़ी जा सकती हैं. आपके पास भले ही बड़ी गाड़ी न हो, पर प्यार करनेवाला पार्टनर तो है. हर चीज़ का सकारात्मक पहलू देखें और

बात-बात पर शिकायत न करें. न ही रोना रोते रहें कि मेरे पास ये नहीं है, मुझे ज़िंदगी में कुछ नहीं मिला… आदि.

इमोशनल ब्लैकमेलिंग से बचें

सेक्स के समय शर्त रखना या बच्चों के नाम पर इमोशनल ब्लैकमेल करना बंद कर दें. इससे भले ही पार्टनर उस व़क्त आपकी बात मान लेगा, लेकिन उसकी नज़रों में आपका सम्मान कम होता जाएगा और वो आपसे दूर जाने लगेगा. रिश्ते की इम्यूनिटी के लिए इस ग़लती को फ़ौरन सुधार लें.

– विजयलक्ष्मी

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टॉप 30 Amazing इम्यूनिटी बूस्टर फूड(30 power foods that boost immunity)

immunity booster food

क्या आप अक्सर सर्दी-ज़ुकाम की शिकार हो जाती हैं या आपको इंफेक्शन बहुत जल्दी हो जाता है? इन सबका कारण कमज़ोर इम्यून सिस्टम है, जिसकी वजह से आप जल्दी बीमार हो जाती हैं. डायट से कैसे सुधारें इम्यून सिस्टम?

immunity booster food

इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरोधक प्रणाली दुरुस्त न हो, तो हम बहुत जल्द बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं. इम्यून सिस्टम के कमज़ोर होने का सबसे बड़ा कारण है डायट में न्यूट्रीएंट्स की कमी. तो आइए जानते हैं, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में, ताकि इन्हें अपनी रोज़मर्रा की डायट में शामिल कर आप हमेशा सेहतमंद बने रहें.

सब्ज़ियां

सब्ज़ियां खाने से कोलेस्ट्रॉल व हृदय रोग की संभावना कम होती है. इनसे शरीर को विटामिन व मिनरल्स मिलते हैं, जिनसे इम्यून सिस्टम तंदुरुस्त रहता है.
मेथी
– रोज़ाना मेथी खाने से एनीमिया से राहत मिलती है.
– मेथी डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी लाभदायक है.
– डिलीवरी (प्रसव) के बाद इसे खाने से मां को अच्छा दूध आता है.
पालक
– इसमें आयरन, कैल्शियम काफ़ी मात्रा में होता है, जो एनीमिया में लाभदायक है.
– पालक व अन्य हरी सब्ज़ियों में विटामिन, मिनरल, फॉलिक एसिड व फाइबर्स होते हैं.
गाजर
– गाजर विटामिन ए, कैरोटिनाइड और एंटी ऑक्सीडेंट का स्रोत है.
– गाजर के सेवन से लंग कैंसर की संभावना कम होती है.
– विटामिन ए आंखों के लिए अच्छा होता है एवं मोतियाबिंद की संभावना को भी कम करता है.
टमाटर
– टमाटर का नियमित सेवन दिल की बीमारी में आराम पहुंचाता है.
– कोलेस्ट्रॉल हाई हो, तो नियमित रूप से टमाटर का जूस पीएं.
– टमाटर एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल) का लेवल कम करने में भी सहायक होता है.
– इसमें लाइकोपेन होता है, जो शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज़ कर देता है, जिससे फ्री रेडिकल्स हमारे शरीर को नुक़सान नहीं पहुंचा पाते.
– इसके नियमित सेवन से त्वचा पर पड़ने वाली झुर्रियों से लेकर हार्ट अटैक जैसी संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का ख़तरा कम हो जाता है.

फल

ये एंटी-ऑक्सीडेंट के भंडार होते हैं. इन्हें रोज़ खाया जाना चाहिए.
सेब
– सेब विटामिन सी व पोटैशियम का अच्छा स्रोत है.
– यदि 1 या 2 सेब रोज़ खाए जाएं, तो एनर्जी लेवल में बढ़ोतरी होती है.
– इससे इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग होता है और ब्लडप्रेशर भी कम होता है.
संतरा
– यह विटामिन ङ्गसीफ का स्रोत है.
– संतरा कैंसर से बचाव, ब्लड सर्कुलेशन (रक्तसंचार) बढ़ाने, घावों को जल्दी भरने मेें भी सहायक है.
अंगूर
– हरे व काले दोनों तरह के अंगूरों में एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं.
– ये नसों को संकीर्ण और कड़ा होने से बचाते हैं.
– अंगूर में पाए जाने वाले इलॉजिक एसिड में एंटी कैंसर गुण भी होते हैं.
– इसमें एन्थोसाएनिन्स की मात्रा अधिक होती है.
– ये शरीर में मौजूद ख़राब एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को नष्ट करता है और ख़ून के थक्के नहीं जमने देता.
बेरीज़
– सभी बेरीज़, जैसे- स्ट्रॅाबेरी, ब्लूबेरी, केनबेरी आदि विटामिन एवं फाइटोकेमिकल्स के अच्छे स्रोत हैं.
– फाइटोकेमिकल्स ऐसे पदार्थ हैं, जो बीमारियों से बचाते हैं.
– स्ट्रॉबेरी में एंटी कैंसर गुण भी होते हैं.
– इसे खाने से कमज़ोरी और डिप्रेशन दूर होता है.
केला
– इसे ङ्गइंस्टेंट एनर्जी बूस्टरफ कहना सही होगा, क्योंकि इसे खाने पर तुरंत एनर्जी मिलती है.
– इसमें 3 प्रकार की प्राकृतिक शर्करा होती है- ग्लूकोज़, सूक्रोज़ और फ्रक्टोज़.
– इसमें पाए जानेवाले हाई फाइबर कब्ज़ दूर करने में सहायक होते हैं.
– इसके अलावा केले का सेेवन अल्सर, एनीमिया, ब्लडप्रेशर, डिप्रेशन आदि में भी उपयोगी होता है.
नाशपाती
– यह पेक्टीन फाइबर व पोटैशियम का स्रोत है.
– पेक्टीन कोलेस्ट्रॉल कम करता है, शरीर को टॉक्सीन से मुक्त रखता है.
– इसमें सोडियम, फॉस्फोरस, कॉपर, विटामिन ए, सी भी होता है. यह व्हाइट सेल्स को इंफेक्शन से लड़ने के लिए उत्तेजित करता है और फ्री रेडिकल्स से होनेवाले नुक़सान से बचाता है.
तरबूज़
– इसमें प्रचुर मात्रा में लाइकोपेन पाया जाता है.
– ये प्रोस्टेट कैंसर के ख़तरे को कम करता है.
आड़ू
– इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइट्रेट विटामिन सी, ए और फाइबर होते हैं.
– मेनोपॉज़ के बाद की समस्याओं से बचने के लिए रोज़ 2 पीचेज़ खाना लाभदायक है, क्योंकि इसमें पाया जानेवाला ङ्गबोरोनफ एस्ट्रोजन हार्मोन लेवल को बढ़ाता है.
आंवला
– आंवले में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो इम्यून सिस्टम को बहुत मज़बूत बनाता है.
– रोज़ सुबह आंवले का रस और शहद मिलाकर खाया जाए, तो अनेक बीमारियों से बचाव होता है.

सलाद

सलाद में खाए जानेवाले पदार्थ भी इम्यून सिस्टम दुरुस्त करने में सहायक होते हैं.
खीरा
– यह ठंडी प्रकृति का, डाययूरेटिक (मूत्रवर्द्धक) व त्वचा के लिए फ़ायदेमंद होता है.
– खीरे का ताज़ा रस सीने की जलन, एसिडिटी, एक्ज़िमा, आर्थराइटिस, गेस्ट्राइटिस व अल्सर में भी फ़ायदा
पहुंचाता है.
शतावरी
– इसमें कैलोरीज़ न के बराबर और विटामिन व मिनरल प्रचुर मात्रा में होते हैं, जैसे- विटामिन ए, बी, सी, बी 9 आदि.
– एस्पेरेगस में पाया जानेवाला विटामिन ए त्वचा व बालों के लिए एवं फाइबर आंतों की सफ़ाई के लिए फ़ायदेमंद होता है.
मूली
– इसमें ज़िंक काफ़ी मात्रा में होता है.
– यह मूत्रवर्द्धक होती है.
– इसकी पत्तियों में आयरन, कैल्शियम व विटामिन सी होता है.
बीटरूट
– इसमें आयरन, पोटैशियम व विटामिन सी होता है.
– यह लिवर को डिटॉक्स करता है और इम्यून सिस्टम को तंदुरुस्त रखता है.
नींबू
– इसमें इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाने वाला विटामिन सी व फ्लेवोनॉइड नामक कंपाउंड पाया जाता है.
– इसमें एंटी-कैंसर व एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण भी होते हैं.
– यह त्वचा और मसूड़ों को हेल्दी बनाता है.
हरी धनिया
– इसमें आयरन होता है.
– यह भोजन का स्वाद बढ़ाता है तथा एलर्जी व अपचन से बचाता है.
दही
– दही में ज़िंक होता है, जिसकी कमी से इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाता है.
– इसमें कैल्शियम, विटामिन ई व प्रोटीन होता है.
– दही खाने से मुंह से आनेवाली बदबू कम होती है.
– पाचन नली के हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद मिलती है, जिससे पाचन क्रिया ठीक रहती है.
साथ ही पेट संबंधी सारी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है.
शहद
– इसमें प्राकृतिक शर्करा व कार्बोहाइड्रेट होेता है, जो शरीर में आसानी से अवशोषित हो कर इंस्टेंट एनर्जी देते हैं, जिसका असर लंबे समय तक रहता है. अतः एथलीट व रनर्स अपनी डेली डायट में इसका उपयोग करते हैं.
– यह स्ट्रेस बूस्टर व एंटीसेप्टिक भी है.
पार्सले
– इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी, कैल्शियम, पोटैशियम, मैगनीज़, आयरन होता है.
– यह भी इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखने में सहायक है.
तुलसी
– इसके पत्ते गैस की समस्या, मितली व पेट की समस्या से भी निजात दिलाते हैं.
– हेपेटाइटिस व टाइफ़ाइड से बचने के लिए इसके 5 पत्ते रोज खाएं.
ड्रायफ्रूट्स
– सभी ड्रायफ्रूट्स विटामिन्स, फ़ाइबर, मिनरल आयरन व कैल्शियम के स्रोत हैं.
– ये बहुत हेल्दी होते हैं. इनमें हाई प्रोटीन व फैट होता है.
– ब्रेनफूड बादाम विटामिन ई का स्रोत है, जो त्वचा की झुर्रियां व कोलेस्ट्रॉल कम करता है.
– अखरोट में ओमेगा 3 ़फैटी एसिड होता है, जो आर्थराइटिस कम करता है.

अनाज

विभिन्न अनाजों में मौजूद उपयोगी पदार्थ भी इम्यून सिस्टम बढ़ाते हैं, जिससे हम बने रहते हैं सेहतमंद.
दालें (सभी तरह की)
– इनमें सभी आवश्यक एमीनो एसिड्स होते हैं.
– इनमें 20-25% प्रोटीन होता है, जो गेहूं में पाए जाने वाले प्रोटीन से दुगुना और चावल के प्रोटीन से तिगुना होता है.
सोयाबीन
– इसमें ओमेगा 3 व ओमेगा 6 फैटी एसिड्स होते हैं, जो हेल्थ के लिए अच्छे हैं.
– मेनोपॉज़ व ऑस्टियोपोरोसिस में इसका उपयोग बहुत फ़ायदा पहुंचाता है.
बीन्स
– बीन्स में विटामिन बी व पोटैशियम होता है.
– ये कोलेस्ट्रॉल कम करने, ब्लड शुगर नियंत्रित करने और ब्लडप्रेशर, कैंसर व मोटापे का रिस्क कम करने में
सहायक हैं.
ओट्स (जई)
– इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, सिलिकॉन, विटामिन बी व ई होते हैं. नाश्ते में इनका सेवन सेहतमंद होता है.
ये पाचन में भी मदद करते हैं.
– कोलेस्ट्रॉल कम करने व डायबिटीज़ के लिए फ़ायदेमंद हैं.
फ्लेक्स सीड्स (अलसी)
– फ्लेक्स सीड्स में ओमेगा 3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होता है, अतः इसके सेवन से हृदय रोग, कैंसर, आर्थराइटिस जैसी बीमारियों से बचाव होता है.
– इसमें मैगनीज़, फ़ॉलिक एसिड, कॉपर, फ़ॉस्फ़ोरस व विटामिन बी 6 होता है.
– यदि रोज़ इसका सेवन किया जाए तो सोरायसिस, ऑस्टियोपोरोसिस, डायबिटीज़ व एलर्जी में फ़ायदा
होता है.
तिल
– इसमें विटामिन ए, बी, ई के अलावा कैल्शियम, कॉपर, फ़ॉस्फ़ोरस, मैगनीज़, पोटैशियम व ज़िंक भी होता है.
पॉपी सीड्स (खसखस)
– यह गर्भवती व दूध पिलाने वाली मांओं के लिए बहुत फ़ायदेमंद है.
– इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस होता है.
– यह शरीर के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है.

 

10 गुड फूड, 10 बैड फूड (10 Good Food 10 Bad Food)

स्टीम रूम के 10 रूल्स! (10 Rules of the Steam Room)

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स्टीम (Steam Room) लेना हर मौसम में फ़ायदेमंद रहता है. इससे शरीर की थकान मिटती है, विषैले तत्व पसीने के ज़रिए बाहर निकल जाते हैं और रोम छिद्र खुल जाते हैं, इम्युनिटी बढ़ाता है. लेकिन स्टीम लेने से पहले और बाद में कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है, ताकि आप इसका सही फ़ायदा उठा सकें. चलिए, आपको बताते हैं, स्टीम रूम के कुछ रूल्स.

रूल नंबर 1 – कम खाएं

– जब भी स्टीम बाथ लेने की सोचें, तो उससे एक या दो घंटे पहले बहुत ज़्यादा या मुख्य आहार
न खाएं.
– स्टीम लेते व़क्त रक्त के संचार में परिवर्तन होता रहता है, जिससे खाना पचने में द़िक्क़त हो
सकती है.
– कई बार पेट में असहज ऐंठन भी हो सकती है.

रूल नंबर 2 – ज्वेलरी पहनकर न जाएं

– स्टीम रूम में ज्वेलरी पहनकर न जाएं.
– बेहतर होगा कि आप ज्वेलरी घर पर ही छोड़ दें.
– मेटल की चीज़ें आपकी त्वचा से ज़्यादा गर्म हो जाती हैं, जिससे त्वचा जल सकती है.
– कई बार स्टीम लेने से स्किन थोड़ी-सी फूल भी जाती है, ऐसे में टाइट ज्वेलरी और भी टाइट हो सकती है और आपको चोट पहुंच सकती है.
– अगर कॉन्टैक्ट लेंस पहना हो, तो उसे भी निकाल दें, क्योंकि गर्मी का लेंस पर बुरा असर पड़ता है और आंखों में जलन हो सकती है.

रूल नंबर 3 – तौलिया साथ ले जाएं

– स्टीम रूम में कपड़े पहनकर न जाएं.
– बड़ा-सा तौलिया अच्छी तरह से लपेटकर स्टीम रूम में जाएं.
– आपकी कोशिश यही होनी चाहिए कि स्टीम आपके शरीर पर अच्छी तरह लगे.

रूल नंबर 4 – शॉवर लें

– घर से सीधे आकर स्टीम रूम में न चले जाएं.
– 5 से 10 मिनट तक रिलैक्स करें या 10 मिनट तक ट्रेडमिल पर चलें.
– इसके बाद ठंडे पानी का शॉवर लें और फिर स्टीम रूम में जाएं.

रूल नंबर 5 – पानी पीएं

– स्टीम रूम में जाने से पहले और आने के बाद भरपूर पानी पीएं, क्योंकि जब पसीना अधिक निकलता है, तब शरीर में पानी की कमी हो जाती है.
– अल्कोहल या किसी प्रकार की दवाएं, जिससे आपको गर्मी का एहसास हो, वह लेकर स्टीम रूम में न जाएं.

रूल नंबर 6 – खुशबूवाला तेल या परफ्यूम लगाकर न जाएं.

– स्टीम रूम पूरी तरह से बंद होता है. किसी भी तरह की सुंगध या दुर्गंध रूम के अंदर ही रह जाती है और भाप के साथ मिलकर सांस लेने में द़िक्क़त पैदा कर सकती है.
– सुगंधवाला तेल या परफ्यूम लगाने से स्टीम रूम में मौजूद दूसरे लोगों को भी तकलीफ़ हो
सकती है.
– दूसरों की सुविधा का भी ख़्याल रखें.

रूल नंबर 7 – स्टीम ज़्यादा देर तक न लें

– ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि ज़्यादा देर तक स्टीम रूम में रहने से आपको ज़्यादा फ़ायदा होगा.
– एक हेल्दी व्यक्ति को 10 से 15 मिनट से ज़्यादा स्टीम नहीं लेनी चाहिए.
– अपने शरीर के सिग्नल्स को पहचानें. अगर चक्कर, उल्टी, सांस लेने में द़िक्क़त महसूस हो, तो तुरंत बाहर आ जाएं.

रूल नंबर 8 – स्टीम से निकलने पर शरीर का तापमान सामान्य होने दें

– स्टीम से बाहर आने के बाद तुरंत स्नान करने न जाएं.
– स्टीम रूम से बाहर आकर कुछ देर तक इंतज़ार करें. शरीर के तापमान को कमरे के तापमान पर सामान्य होने दें.
– फिर ठंडे या गुनगुने पानी से नहा लें.

रूल नंबर 9 – बीमार हैं, तो बिना डॉक्टरी सलाह से स्टीम न लें.

– अगर ब्लडप्रेशर, अस्थमा, हृदय रोग के मरीज़ हैं तो स्टीम बाथ लेने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह लें.
– प्रेग्नेंट महिलाओं को स्टीम नहीं लेना चाहिए.
– अगर बुख़ार हो तो भी स्टीम बाथ न लें.

रूल नंबर 10 – एक्स्ट्रा कपड़े साथ ले जाएं.

– एक्स्ट्रा कपड़े ज़रूर साथ ले जाएं.
– स्टीम लेने के बाद स्नान करके दोबारा वही कपड़े न पहनें, जिसमें आपने एक्सरसाइज़ की थी.

नोट

अगर आप पहली बार स्टीम ले रहे हैं, तो हफ़्ते में एक या दो बार केवल पांच मिनट के लिए ही स्टीम लें.