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स्वतंत्रता दिवस पर विशेष- फिल्म स्टार्स की नज़र में आज़ादी… (Happy Independence Day- What Freedom Means To Bollywood Actors?)

आज़ादी को लेकर हर किसी की सोच अलग-अलग होती है. इससे फिल्म स्टार्स भी अछूते नहीं हैं. इस बारे में क्या कहते हैं सितारे, आइए जानते हैं.

Happy Independence Day

अमिताभ बच्चन

 

जय हिंद! स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं! आज़ादी का मतलब है हर इंसान को उसका हक़ मिले. हर शख़्स सुख-शांति के साथ ज़िंदगी जी सके और आपसी भाईचारा भी बना रहे.

अनुष्का शर्मा

आर्मी ऑफिसर की बेटी होने के नाते मैंने बेहद क़रीब से फौजियों की ज़िंदगी को देखा है. मैंने सैनिकों की शहादत को देखा है, इसलिए समझ सकती हूं कि आज़ादी कितनी अनमोल होती है. मुझे गर्व है कि मैं हिंदुस्तानी हूं. सभी देशवासियों को आज़ादी की बधाई!

अक्षय कुमार

हम सभी को इस बात का ख़्याल रखना चाहिए कि आजादी हमें यूं ही नहीं मिली है. देश की आर्मी इसके लिए भारी क़ीमत चुकाती है. उन हीरोज़ को मेरा सलाम, जो हमारी रक्षा में तैनात हैं.

सुष्मिता सेन

मेरे लिए आज़ादी हर किसी का शिक्षित होना है. हमारे जीवन में पढ़ाई काफ़ी मायने रखती है, इसलिए सभी का पढ़ा-लिखा होना बेहद ज़रूरी है. मैं बारहवीं तक ही पढ़ी हूं, पर पढ़ाई के महत्व को अच्छी तरह से समझती हूं. तभी तो मैं अपनी बेटियों को भी अच्छी तरह से पढ़ने-लिखने के लिए कहती रहती हूं.

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ऋषि कपूर

देश में हर तरफ़ शांति हो, भाईचारा बढ़े और प्यार की ख़ुशबू फैले यही देशवासियों के लिए तमन्ना है. आज़ादी के इस ख़ास मौके पर सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. वंदेमातरम्! जय हिंद!

कटरीना कैफ़

भारत देश आज़ाद है, पर यहां पर कई बार आप खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते हैं. इसके अलावा कई बार लोगों में समान भाव की कमी भी दिखती है. इसलिए फ्रीडम तब सही लगता है, जब आपको बोलने की आज़ादी मिल सके.

सलमान ख़ान

मेरा यह मानना है कि आज़ादी की सार्थकता तब है, जब लोगों को जीने का हक़ हो, अपने तरी़के से स्वतंत्र रहने का अधिकार हो. साथ ही अपनी बात कहने की आज़ादी हो.

आलिया भट्ट

मैं यही कहना चाहती हूं कि आई लव माय कंट्री.  हमारी आज़ादी सभी देशवासियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. हम अपने घरों में चैन से इसीलिए सो पाते हैं, क्योंकि बॉर्डर पर हमारे जवान हमारी सुरक्षा के लिए जागते हैं. इंडियन आर्मी को सैल्यूट है.

वरुण धवन

आज़ादी का दिन हम सभी इसीलिए एंजॉय कर पाते हैं, क्योंकि सरहद पर हमारे जवान हमारी सुरक्षा के लिए शहीद हो जाते हैं. उनके त्याग व बलिदान को कभी न भूलना. आज़ादी का जश्‍न जमकर मनाना.

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सैफ़ अली ख़ान

फ्रीडम तो इस बात पर निर्भर करती है कि आपको अपने विचारों को शेयर करने, अपनी बात को बेबाक़ तरी़के से रखने की आज़ादी हो. लेकिन आपको ऐसा करने से रोका जाए, तब काहे की आज़ादी!

 

कुछ संदेशे ऐसे भी…

* मेरा दिल भारत का है. देश को स्वतंत्रता दिवस की बधाई! जय हिंद!

– प्रियंका चोपड़ा

* हमारी आज़ादी को बनाए रखने के लिए हमारे सशस्त्र बलों का मैं शुक्रगुज़ार हूं. उनकी सेवा व योगदान की क़ीमत हम कभी भी नहीं चुका सकते.

– अजय देवगन

* दिल से हम उन सभी शख़्स को शुक्रिया कहें, जो हमारी स्वतंत्रता के लिए सरहद पर लड़ते रहते हैं.

– इरफान ख़ान

* स्वतंत्रता दिवस भारत का सबसे बड़ा त्योहार है, जो किसी एक धर्म का नहीं, बल्कि हर धर्म का है.

– कैलाश खेर

* योद्धाओं का जन्म नहीं हुआ, वे भारतीय सेना  में बने हैं. सभी फौजी भाइयों को सलाम. हैप्पी इंडिपेंडेंस डे!

– सूरज पंचोली

– ऊषा पन्नालाल गुप्ता

स्वतंत्रता दिवस 2018: पाएं आज़ादी इन आदतों से (Independence Day 2018: Freedom From Unhealthy Habits)

स्वतंत्रता दिवस के ख़ास मौ़के पर देश की आज़ादी के साथ-साथ उन तमाम मुद्दों पर भी बात करना ज़रूरी है, जहां हमें आज़ादी की ज़रूरत है. यदि हम महिलाओं की बात करें, तो महिलाओं को अपनी कुछ आदतों से आज़ादी पाना बहुत ज़रूरी है. उनकी ये आदतें उन्हें आगे बढ़ने से रोकती हैं और उनके व्यक्तित्व के विकास में भी बाधक बनती हैं. हमारे देश की अधिकतर महिलाएं अपनी कुछ आदतों के कारण अपना बहुत नुक़सान करती हैं. ये आदतें बदलकर महिलाएं अपने आप में और अपने परिवार में बहुत बदलाव ला सकती हैं. कौन-कौन-सी हैं ये आदतें? आइए, जानते हैं.

Freedom

अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ करना
हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे को हुए कैंसर की ख़बर ने सभी को चौंका दिया, लेकिन इसकी एक बड़ी वजह सोनाली बेंद्रे की ख़ुद के प्रति लापरवाही भी थी. सोनाली बेंद्रे को कुछ समय से शरीर में दर्द की शिकायत हो रही थी. लेकिन उन्होंने भी आम महिलाओं की तरह ख़ुद के प्रति लापरवाही के चलते इसे नज़रअंदाज़ कर दिया. जब दर्द ज़्यादा बढ़ने लगा और डॉक्टर को दिखाया, तब सोनाली बेंद्रे का कैंसर एडवांस स्टेज तक पहुंच गया था. जब सोनाली बेंद्रे जैसी एक्ट्रेस अपनी सेहत के प्रति इतनी लापरवाह हो सकती हैं, तो आम महिलाओं की स्थिति का बख़ूबी अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
क्या करें?
जिस तरह आप अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य की सेहत का ध्यान रखती हैं, उनकी हर छोटी-बड़ी तकलीफ़ में उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाती हैं, उसी तरह अपनी सेहत का भी ख़ास ध्यान रखें. शरीर में कोई भी असामान्यता या दर्द होने पर तुरंत घरवालों को इसके बारे में बताएं और उनके साथ डॉक्टर के पास जाएं.

अपने शौक़ के लिए समय न निकालना
महिलाएं अपने शौक़ और ख़ुशियों को हमेशा आख़िरी पायदान पर रखती हैं. घर-परिवार की तमाम ज़िम्मेदारियों के बाद यदि टाइम मिला, तो ही वो अपने शौक़ के बारे में सोचती हैं और ऐसा बहुत कम ही हो पाता है. महिलाएं पूरी ज़िंदगी अपने परिवार के लिए खटती रहती हैं, लेकिन उनके शौक़ अक्सर अधूरे रह जाते हैं. इसका असर उनकी पर्सनैलिटी, उनके आत्मविश्‍वास और उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. जब महिलाएं अपने शौक़ पूरे नहीं कर पातीं, तो उसकी खीझ उनके व्यवहार में झलकने लगती है. ऐसी स्थिति में महिलाएं या तो बहुत चिड़चिड़ी या मुखर हो जाती हैं या फिर अपनी भावनाओं को दबाने लगती हैं. ये दोनों ही स्थितियां उनके शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं.
क्या करें?
घर-परिवार, बच्चों की तमाम ज़िम्मेदारियां निभाते हुए अपने लिए भी अलग से व़क्त निकालिए. उस समय आप अपने शौक पूरे कीजिए, जैसे- संगीत, पेंटिंग आदि. ऐसा करने से आप अच्छा महसूस करेंगी और ख़ुश रहने लगेंगी.

घर के कामों के लिए परिवार की मदद न लेना
हमारे देश में घर के काम स़िर्फ महिलाओं के हिस्से ही आते हैं. भले ही वो वर्किंग हों, पति के बराबर कमाती हो, फिर भी घर के काम पुरुष नहीं करते. कई घरों में पुरुष घर के कामों में महिलाओं का हाथ बंटाना भी चाहते हैं, लेकिन महिलाएं ख़ुद उन्हें मना कर देती हैं. उन्हें लगता है कि उनके पति यदि घर का काम करेंगे, तो लोग क्या कहेंगे. ऐसी स्थिति में घर-बाहर दोनों जगहों की ज़िम्मेदारी निभाते हुए महिलाएं इतनी थक जाती हैं कि इससे उनका शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है. उनका व्यवहार रूखा होने लगता है, घर का माहौल बिगड़ जाता है, वो बात-बात पर चिढ़ने लगती हैं.
क्या करें?
आप घर के सभी काम अकेले नहीं कर सकतीं, इसलिए घर के सभी सदस्यों से थोड़ी-थोड़ी मदद लीजिए और अपनी ज़िम्मेदारी कम कीजिए. इस तरह घर का सारा काम भी हो जाएगा और आपके काम का बोझ भी हल्का हो जाएगा.

Healthy Habits

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छोटी-छोटी बात के लिए पति पर निर्भर रहना
भारतीय महिलाएं अपने पति पर इस कदर निर्भर रहती हैं कि बैंक से लेकर, बच्चों के स्कूल, घर के सामान तक ख़रीदने जैसे कामों के लिए पति का ही इंतज़ार करती हैं. पढ़ी-लिखी वर्किंग महिलाएं ऑफिस में तो सारे काम कर लेती हैं, लेकिन घर के लिए कोई भी ़फैसला लेते समय उन्हें पति की सहायता चाहिए होती है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हमारे देश में हमेशा से सारे अधिकार पुरुषों को ही दिए गए हैं, ऐसे में महिलाएं कहीं न कहीं ये मान लेती हैं कि किचन के बाहर के काम उनके बस की बात नहीं है. ख़ासकर पेपरवर्क के मामले में महिलाएं हमेशा पति पर ही निर्भर रहती हैं.
क्या करें?
आपका छोटे-छोटे कामों के लिए पति पर निर्भर रहना ठीक नहीं है, इससे आपके पति को चिढ़ हो सकती है. जो काम आप पति के बिना कर सकती हैं, उन्हें करने की शुरुआत करें. इससे आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और आपके पति को राहत महसूस होगी.

अपने खानपान पर ध्यान न देना
हमारे देश की अधिकतर महिलाएं एनीमिया की शिकार पाई जाती हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है महिलाओं का अपने खानपान पर ध्यान न देना. गरीब घर की महिलाएं ही नहीं, अमीर परिवार की महिलाएं भी एनीमिया से ग्रस्त पाई जाती हैं. हमारे देश में महिलाओं को ये बचपन से सिखाया जाता है कि उन्हें पूरे परिवार को खिलाने के बाद ही भोजन करना चाहिए, तभी वो कुशल गृहिणी कहलाई जाएंगी. माता-पिता भी बेटे के खानपान पर बेटी से ज़्यादा ध्यान देते हैं. अपनी मां को ऐसा करते देख बेटी भी अपनी सेहत के प्रति लापरवाह हो जाती है. अगर परिवार को खाना खिलाने के बाद भोजन नहीं बचा, तो महिलाएं अपने लिए और बनाने की बजाय भूखी ही रह जाती हैं. पूरे परिवार को महिलाएं दूध, फल, मेवे आदि नियम से खिलाती हैं, लेकिन अपने लिए ऐसा नियम नहीं बनाती हैं.
क्या करें?
जब तक पति ऑफिस से घर नहीं आ जाते, तब तक भोजन न करना समझदारी नहीं है. इससे एक तो आपको एसिडिटी की शिकायत हो जाएगी और आपकी भूख भी मर जाएगी. संपन्न होते हुए भी कुपोषण का शिकार होना स़िर्फ लापरवाही है. आप हैं तो सबकुछ है, आपके बीमार होने से पूरा परिवार बिखर जाता है, इसलिए आपका स्वस्थ रहना बहुत ज़रूरी है. जिस तरह आप अपने परिवार का ध्यान रखती हैं, उसी तरह अपनी सेहत का भी ध्यान रखें.

मन की बात न कहना
महिलाएं घर में सभी को ख़ुश रखने के चक्कर में अक्सर अपनी ख़ुशियों को अनदेखा कर देती हैं. यदि उन्हें किसी की कोई बात बुरी लगती है, तो वो उसे मन में ही रखती हैं. उन्हें लगता है कि पलटकर जवाब देने से घर का माहौल बिगड़ जाएगा, सबकी ख़ुशी के लिए चुप रहना ही सही है. हर बात मन में रखने से कई महिलाओं को डिप्रेशन की शिकायत होने लगती है, उनका आत्मविश्‍वास कम होने लगता है, वो अपने में ही सिमट जाती हैं.
क्या करें?
मन की बात मन में रखने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और रिश्तों में भी दूरियां आने लगती हैं. किसी की कोई बात बुरी लगने पर आप उसे जवाब भले ही न दें, लेकिन आपके मन में गांठ रह ही जाती है और आप फिर उस इंसान से पहले जैसी आत्मीयता से व्यवहार नहीं कर पातीं. अत: परिवार में किसी की कोई बात बुरी लगे, तो उसे मन में न रखें, बल्कि उस व्यक्ति से उस बारे में बात करें. ऐसा करने से आपका मन हल्का हो जाएगा और उस व्यक्ति को भी पता चल जाएगा कि उसकी कौन-सी बात आपको बुरी लग सकती है. वो फिर आपसे कभी ऐसी बात नहीं करेगा.

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शर्म-हिचक हो सकती है जानलेवा
महिलाएं अक्सर वेजाइनल प्रॉब्लम्स, ब्रेस्ट प्रॉब्लम्स आदि के बारे में बात करने से हिचकिचाती हैं, जिसके चलते समस्या गंभीर हो जाती है. महिलाओं की शर्म और हिचक उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है इसलिए सेहत के मामले में कभी भी शर्म ना करें और शरीर के किसी भी हिस्से में तकलीफ़ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

– कमला बडोनी

क्या होता है जब आप बच्चों को ज़रूरत से ज़्यादा आज़ादी देते हैं, देखें वीडियो:

गणतंत्र दिवस पर बदलें इतिहास: पूछें ख़ुद से 50 सवाल (Republic Day 2018: 50 Important Questions To Ask Yourself)

Important Questions, To Ask Yourself

हमारा देश साफ़-सुथरा नहीं है, फलां सुविधा तो इस देश में मिल ही नहीं सकती, अभी हमारे देश को वहां तक पहुंचने में सालों लगेंगे, यहां के सिस्टम का तो भगवान ही मालिक है… ये जुमला हमने-आपने कई बार बोला होगा. दूसरों पर दोष मढ़ना आसान है, पर ज़रा ये सोचिए कि हमने अपने देश के लिए क्या किया है? इस गणतंत्र दिवस पर ख़ुद से पूछें 50 सवाल और बदलें अपने देश का इतिहास.

Important Questions, To Ask Yourself

* सामाजिक व्यवहार से संबंधित सवाल
हम समाज को दोष तो आसानी से देते हैं, लेकिन हमने समाज के लिए क्या किया है, ये कभी नहीं सोचते. कैसा हो हमारा सामाजिक व्यवहार? आइए, मिलकर सोचते हैं.

1) एक्सीडेंट होने पर लोग दुर्घटनाग्रस्तों की मदद क्यों नहीं करते?
क्योंकि दूसरे का एक्सीडेंट होने पर हमें अपना ज़रूरी काम ़ज़्यादा महत्वपूर्ण लगता है और पुलिस के पचड़े में पड़ने से आसान दिखता है दुर्घटनाग्रस्तों को वहीं पड़ा छोड़ आगे बढ़ जाना.

2) हर जगह ट्रैफ़िक जाम ही क्यों होता रहता है?
क्योंकि हम और हमारे पड़ोसी भले ही एक ऑफ़िस में काम करते हों, पर अपनी-अपनी कार ले कर जाने में ही शान समझते हैं. कार पूलिंग कर के जाने से हमारी नाक नीची हो जाती है और पब्लिक कन्वेंस सिस्टम (सार्वजनिक यातायात प्रणाली) का उपयोग कर के ऑफ़िस जाना तो हमारी साहबी पर सबसे बड़ा दाग़ है.

3) हमारे देश में ओेल्ड एज होम की संख्या क्यों बढ़ रही है?
क्योंकि हम ख़ुद अपने माता-पिता की ज़िम्मेदारी को बोझ की तरह निभाते हैं.

4) सड़क पर इतने भिखारी क्यों नज़र आते हैं?
क्योंकि हमने ही धर्म के नाम पर उन्हें बिना कोई काम किए पैसे कमाने का बढ़ावा दिया है.

5) हम जागरूक ग्राहक क्यों नहीं बन पाते?
क्योंकि कोई भी सामान ख़रीदते समय वैट से बचने के लिए हम दुकानदारों से बिल नहीं लेते. अतः जब कभी ख़राब सामान ले लेते हैं तो कं़ज़्यूमर फोरम में जाने तक का साहस नहीं जुटा पाते.

6) हमारे यहां लोग क़ानून क्यों तोड़ते हैं?
क्योंकि कभी-न-कभी किसी-न-किसी कारण के चलते हमने भी क़ानून तोड़ा है, फिर चाहे वह ट्रैफ़िक रूल्स (यातायात के नियम) ही क्यों न हों?

7) थोड़ी-सी बारिश से लगभग हर मेट्रो में बाढ़ जैसी स्थिति क्यों हो जाती है?
क्योंकि अपने साथ कपड़े का बैग लेकर चलना हमारी शान के ख़िलाफ़ है. हर कोई यही सोचता है कि अगर सब्ज़ी वाले ने दो प्लास्टिक की थैलियों में मुझे सामान दे दिया तो इसमें क्या हर्ज़ है? पर इन्हीं थैलियों की वजह से शहरों की नालियों में पानी की निकासी नहीं हो पाती और ज़रा सी बारिश हुई नहीं कि बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है.

8) किसी भी क्षेत्र में सुधार आख़िर आता क्यों नहीं?
क्योंकि हमें आदत पड़ गई है सिस्टम की ग़लतियों को चलता है के नज़रिए से देखने की. हम सुधार लाने की पहल नहीं करना चाहते.

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* पैरेंटिंग (बच्चों की परवरिश) से जुड़े सवाल
कहते हैं, बच्चे अपने पैरेंट्स की परछाईं होते हैं, फिर हमारे बच्चे वैसे क्यों नहीं बन पाते, जैसा हम चाहते हैं? आइए, ख़ुद से पूछें बच्चों की परवरिश से जुड़े सवाल.

9) बच्चे इतने डिमांडिंग क्यों हैं? उन्हें पैसे की क़ीमत क्यों नहीं है?
क्योंकि हमने उन्हें मनी मैनेजमेंट नहीं सिखाया और उनकी हर सही-ग़लत मांग तुरंत पूरी की है.

10) बच्चे अपने धर्म, रीति-रिवाज़ों के बारे जानना क्यों ज़रूरी नहीं समझते?
क्योंकि हमने कभी उन्हें इस बारे में कुछ बताया ही नहीं. कार्टून चैनल लगाने के बजाय कभी उनके साथ बैठकर उन्हें अपने रीति-रिवाज़ों की जानकारी दी ही नहीं है, बल्कि हम में से कइयों को ख़ुद भी इसकी जानकारी नहीं है.

11) आजकल बच्चों के सोने-जागने, खाने-पीने का कोई टाइम-टेबल क्यों नहीं है?
क्योंकि हमने बचपन से ही उनका फिक्स रूटीन रखा ही नहीं है, बल्कि हम ख़ुद भी रूटीन लाइफ़ नहीं जीते.

12) बच्चे पलट कर जवाब क्यों देते हैं?
क्योंकि पहली बार ऐसा करते समय हमने उन्हें नहीं रोका था.

13) बच्चे हर छोटी-बड़ी बात पर लड़ते क्यों रहते हैं?
क्योंकि बचपन से उन्होंने हमें भी इसी तरह लड़ते-झगड़ते देखा है.

14) बच्चे बड़ों का आदर क्यों नहीं करते?
क्योंकि उन्होंने हमें भी अपने बड़ों के साथ ऐसा ही सुलूक करते देखा है.

15) टीनएजर्स के इतने रोड एक्सीडेंट क्यों होते हैं?
क्योंकि हम ख़ुद अपने बच्चे के 16 साल के होने से पहले ही उसे एक बाइक या कार दिला देते हैं. और तो और बच्चे आरटीओ की लाइन में लग के लाइसेंस भी नहीं बनवाते, क्योंकि हमारी सोच है कि जब बच्चे को इतनी महंगी गाड़ी दे रहे हैं, तो कुछ पैसे और ख़र्च कर के लाइसेंस भी बनवा देंगे.

16) बच्चे इतना झूठ क्यों बोलने लगे हैं?
क्योंकि बच्चे जो देखते हैं, वही सीखते हैं. हम न जाने कितनी बार बच्चों के सामने झूठ बोलते हैं. इसका कुछ असर तो उन पर आएगा ही.

17) बच्चे इतने हिंसक क्यों हो रहे हैं?
क्योंकि मीडिया के ज़रिए बच्चों को हम ही तो दिखा रहे हैं हिंसक ख़बरें. बजाय उनके टैलेंट को निखारने वाले कार्यक्रम दिखाने के हम उनके टैलेंट को भी बेचने का सामान बना रहे हैं. हम उन्हें सिखा रहे हैं कि इस दुनिया में तुम्हें स़िर्फ जीतना है, इसके लिए चाहे कुछ भी क्यों न करना पड़े.

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* स्वास्थ्य संबंधी सवाल
स्वास्थ्य या फिटनेस को लेकर हमारी मानसिकता ऐसी है कि जब तक कोई रोग न घेर लें, हम अपने स्वास्थ्य के प्रति ध्यान ही नहीं देते. आइए, ख़ुद से पूछें सेहत से जुड़े सवाल.

18) मोटापा हमारे देश की समस्या क्यों बनता जा रहा है?
क्योंकि हमारे खाने में फास्ट ़फूड, जंक फूड आदि का इस्तेमाल तो बढ़ा है, लेकिन एक्सरसाइज़ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की शुरुआत हम अब तक नहीं कर सके हैं. यहां तक कि अपने रोज़मर्रा के काम भी हम ख़ुद नहीं करते.

19) हमारे देश में एचआईवी पीड़ितों की संख्या बढ़ती क्यों जा रही है?
क्योंकि यह जानते हुए भी कि यौन संबंध सुरक्षित ढंग से बनाए जाने चाहिए, हम कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल करने में कोताही बरतते हैं. और तो और अपनी आनेवाली पीढ़ी को सेक्स एज्युकेशन देने की बात सोचना भी हमें गवारा नहीं.

20) आज भी हमारे देश में मेडिकल सुविधा गांवों तक क्यों नहीं पहुंच पायी?
क्योंकि हम अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन उसके डॉक्टर बनने के बाद यही चाहते हैं कि वह शहर में अपना नर्सिंगहोम खोल कर हमारे पास ही रहे. हमने उनके मन में समाज सेवा की भावना डाली ही नहीं है.

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* राष्ट्र प्रेम से संबंधित सवाल
जो देश हमारी मातृभूमि है, जिस देश से हमारी पहचान है, उसे देश से हमें कितना प्यार है? ये सवाल भी ख़ुद से पूछना ज़रूरी है.

21) बड़े-बुज़ुर्ग ये क्यों कहते हैं कि हम में राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना नहीं है?
क्योंकि हम किसी स्कूल, कॉलेज के पास से गुज़र रहे हों और हमें राष्ट्रगीत सुनाई देता है तो भी हम 53 सेकेंड्स का समय नहीं निकाल पाते, ताकि अपने राष्ट्रगीत को सम्मान दे सकें. 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन देश के प्रति प्रेम दर्शाने के लिए हम प्लास्टिक के राष्ट्र ध्वज ख़रीद तो लेते हैं, लेकिन उसी शाम उन्हें सड़क पर या कचरे के डिब्बों में फेंक देते हैं.

22) हमारी ऐतिहासिक विरासतें स्ताहाल क्यों हैं?
क्योंकि हम उनकी दीवारों पर अपना नाम अंकित करना नहीं भूलते. साथ ही उन्हें देखते समय जो कुछ भी खा रहे हों, उसके छिलके या रैपर वहीं छोड़ आते हैं.

23) बच्चों में देश प्रेम की भावना क्यों नहीं है?
क्योंकि हम देश के विकास में अपनी भागीदारी सही ढंग से नहीं निभा रहे हैं. हम बच्चे को बड़ा हो कर डॉक्टर, इंजीनियर, आर्किटेक्ट तो बनाना चाहते हैं, लेकिन उसमें देश के प्रति लगाव की भावना डालना भूल जाते हैं.

24) हमारी राष्ट्र भाषा को सम्मान क्यों नहीं मिलता?
क्योंकि हमें ख़ुद राष्ट्र भाषा में बात करने में शर्म और आत्मग्लानि का अनुभव होता है. हम अपने बच्चों को फलों और सब्ज़ियों के नाम पहले हिंदी में सिखाने के बजाय इंग्लिश में सिखाते हैं.

25) हमारे यहां जाति-प्रांत को लेकर विवाद क्यों पनपते हैं?
क्योंकि हम स्वार्थी हैं, जहां अपने भले की बात दिखी, वहां हो लेते हैं. कभी भारतीय, कभी हिंदू, सिख, ईसाई, मुस्लिम, कभी उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र या बंगाल, जिसके भी चोले में हमारी भलाई मिल जाए, ओढ़ लेते हैं. भारतीय नागरिक बन कर सबके हित की बात सोचना हमने छोड़ दिया है.

26) हमारे देश में सिक्कों की कमी क्यों है?
क्योंकि हम ही राजमुद्रा का अपमान करते हैं, कभी सिक्के चुनवाते हैं, कभी पानी में फेंकते हैं. और तो और जहां चाटुकारिता ज़रूरी हो, वहां नोटों की माला पहना कर दूसरों का सम्मान भी कर देते हैं.

27) विदेशों में भारत की छवि बहुत अच्छी क्यों नहीं है?
क्योंकि हमारे युवा जो विदेशों में नौकरी करने जाते हैं, वे ख़ुद अपने देश की ख़ामियां गिनाते नहीं थकते. वे यह नहीं सोचते कि कोई भी देश वहां के नागरिकों से बनता है और अपने देश की बुराई कर के आप दूसरों को यही बताते हैं कि आप ख़ुद बुरे हैं.

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Important Questions, To Ask Yourself

* राजनीति संबंधी सवाल
हमारे देश की राजनीति के कौन-से सवाल अक्सर हमारे जेहन में आते हैं, चलिए उनका भी ज़िक्र कर लें.

28) हमारे यहां हर काम धीमा ही क्यों होता है?
क्योंकि हम ख़ुद भी अपने कामों को समय पर ख़त्म करने की आदत नहीं डालते.

29) हमारे यहां इतना भ्रष्टाचार क्यों है?
क्योंकि दूसरों का कोई छोटा-बड़ा काम निपटाने पर हम ख़ुद भी उसके द्वारा दिया गया ग़िफ़्ट स्वीकारने से परहेज नहीं करते.

30) क्यों हमारे नेता देश के विकास पर ध्यान देने से ़ज़्यादा राजनीति पर ध्यान देते हैं?
क्योंकि जिस दिन वोटिंग होती है, उस दिन बजाय वोट डालने का दावित्व निभाने के हम घर पर बैठे चाय की चुस्कियों के साथ छुट्टी का मज़ा लेते हैं. एलीजिबल कैंडिडेट (योग्य उम्मीदवार) के चुनाव मेें हमारा कोई योगदान नहीं होता और राष्ट्रीय हित के मुद्दों से ़ज़्यादा हम धार्मिक हित के मुद्दों पर रिएक्ट करते हैं.

31) हमारे यहां इतने बंद क्यों होते हैं?
क्योंकि हमसे जुड़े सवालों को हल करने के दौरान भी हम आराम करने की सोचते हैं देश की नहीं, अन्यथा काली पट्टियां पहन कर काम करने का विकल्प भी तो मौजूद है.

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* सफ़ाई संबंधी सवाल
सफ़ाई हमारे देश का एक बड़ा मुद्दा है, इतना बड़ा मुद्दा कि प्रधानमंत्री जी को देश के नाम संदेश में सफाई का जिक्र करना पड़ता है. सफ़ाई के बारे में हमारे मन में क्या सवाल है? आइए, ये भी जान लेते हैं.

32) हमारे देश में सार्वजनिक शौचालय साफ़ क्यों नहीं रहते?
क्योंकि उनके इस्तेमाल के बाद थोड़ा-सा पानी डाल कर उन्हें साफ़ रखने में हम लापरवाही करते हैं. टॉयलेट एटीकेट्स हम स़िर्फ अपने घर में ही निभाना चाहते हैं, बाहर नहीं.

33) हमारे रेलवे स्टेशन इतने गंदे क्यों रहते हैं?
क्योंकि मूंगफली, केले, बिस्किट, नमकीन खा कर उनके छिलके और रैपर यहां-वहां हम ही तो फेंकते हैं. यही नहीं, ट्रेनों में साफ़ लिखा होता है कि गाड़ी स्टेशन पर खड़ी हो तो टॉयलेट का इस्तेमाल न करें, पर हम इस नियम का पालन भी नहीं करते.

34) हमारी ट्रेनें इतनी गंदी क्यों रहती हैं?
क्योंकि पान-गुटखा खाकर थूक के निशान ट्रेन में हम ही छोड़ आते हैं. माना कि ट्रेन के टॉयलेट की दीवार पर अश्‍लील टिप्पणियां हमने नहीं लिखीं, पर हम उन्हें मिटाने की कोशिश भी तो नहीं करते.

35) हर तरफ धूल-मिट्टी या पॉल्यूशन ही क्यों नज़र आता है?
क्योंकि ज़रूरत से ज़्यादा तकनीकों का इस्तेमाल कर के हमने ही इन्हें बढ़ावा दिया है.

36) सड़क पर इतनी गंदगी क्यों नज़र आती है?
क्योंकि सड़क पर थूकते या कचरा फेंकते समय हम ये भूल जाते हैं कि कल फिर इसी रास्ते से होकर गुज़रना है.

37) पब्लिक प्रॉपर्टी हमेशा ख़स्ताहाल क्यों रहती है?
क्योंकि उनका ख़याल रखना हमें अपनी ज़िम्मेदारी नहीं लगती.

38) बीचेज़ (समुद्रतट) इतने गंदे क्यों रहते हैं?
क्योंकि बीच पर पिकनिक के लिए जाते समय गंदगी फैलाते हुए हम ये भूल जाते हैं कि हर कोई यूं ही इन्हें गंदा करता रहा तो इसके परिणाम क्या होंगे.

39) हमारे यहां ई-कचरा क्यों बढ़ रह है?
क्योंकि हम लाइसेंस्ड वर्ज़न वाले सॉ़फ़्टवेयर्स का इस्तेमाल करने के बजाए पायरेटेड सॉ़फ़्टवेयर्स के इस्तेमाल को तरजीह देते हैं और ख़राब होते ही उन्हें फेंक देते हैं. यही नहीं, पायरेटेड सीडी, डीवीडी का इस्तेमाल करना हमें ओरिजनल सीडी और डीवीडी की तुलना में ज़्यादा भाता है.

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* मूलभूत आवश्यकता संबंधी सवाल
प्रगतिशील देश कहे जाने के बावजूद आज भी हमारे देश में लाखों लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. ऐसा क्यों है, ये सवाल मन में उठना भी ज़रूरी है.

40) हमारे देश में लाखों लोग भूखे क्यों सोते हैं?
क्योंकि हम, जिनके पास भोजन के साधन सहज उपलब्ध हैं, रोज़ थोड़ा-न-थोड़ा खाना फेंकते हैं. बजाय इसके वह खाना अपनी सोसायटी के वॉचमैन, मेड सर्वेंट (काम वाली बाई) या अन्य किसी ज़रूरतमंद को भी तो दिया जा सकता है.

41) हमेशा पानी की किल्लत क्यों रहती है?
क्योंकि हम पानी का उचित उपयोग नहीं करते और न ही पानी की फिज़ूलख़र्ची करते समय हमें इसका ख़याल ही आता है कि यूं पानी बहाने से कल पानी के लिए तरसना भी पड़ सकता है.

42) बार-बार बिजली क्यों चली जाती है?
क्योंकि एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते समय हम न तो लाइट ऑफ़ करते हैं और न ही फैन या एसी.

43) हर तरफ कंक्रीट का जंगल ही क्यों नज़र आता है?
क्योंकि हमें अपने आस-पास पेड़ लगाने का ख़याल ही नहीं आता. हमें हरियाली चाहिए, लेकिन इसके लिए अपनी तरफ़ से पहल करना हम ज़रूरी नहीं समझते.

44) हमारे यहां इतनी निरक्षरता क्यों है?
क्योंकि पढ़-लिख लेने के बाद हमने कभी नहीं सोचा कि अपनी इस पढ़ाई का सदुपयोग कर हम अपने बच्चों के अलावा कम-से-कम एक निरक्षर बच्चे को तो साक्षर बनाएंगे.

45) हमारे देश का इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों नहीं सुधरता?
क्योंकि या तो हम इनकम टैक्स भरते ही नहीं या फिर अपनी आय की ग़लत जानकारी दे कर कम टैक्स भरते हैं.

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* परंपरा संबंधी सवाल
आज़ादी के नाम पर हम अपनी परम्पराओं को भूलने लगे हैं. क्या ऐसा करना सही है?

46) हमारे देश में तलाक़ के आंकड़े क्यों बढ़ रहे हैं?
क्योंकि जहां किसी ने हम पर कोई छोटी-सी भी पाबंदी लगाई, हम उससे किनारा करने में देर नहीं लगाते. सहनशीलता तो हम में नाममात्र की भी नहीं रह गई है. अपने पैरों पर खड़े होने के बाद रिश्तों और करियर को हम एक ही तराज़ू में तौलने लगते हैं, बिना यह सोचे कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसके रिश्ते ही उसे कठिन समय में सहारा देने का काम करते हैं.

47) हमारे यहां स्त्री-पुरुष अनुपात में गड़बड़ी क्यों हो रही है?
क्योंकि बेटियों को हम अब भी पराया धन समझते हैं और लड़कों को अपना वारिस. लिंग परीक्षण पर पाबंदी के बाद भी हमारे देश में कन्या भ्रूण हत्या के मामले थम नहीं रहे हैं.

48) हमारे देश की आबादी बढ़ती ही क्यों जा रही है?
क्योंकि दो से कम बच्चे होने के बारे में हम सोचना भी नहीं चाहते और अपनी बात को सही साबित करने के चक्कर में कई तर्क भी दे डालते हैं. इसकी जगह एक बच्चा ख़ुद का और दूसरा बच्चा किसी अनाथालय से गोद लेकर उसकी अपने बच्चे की तरह परवरिश भी तो की जा सकती है. इस तरह हम देश की बढ़ती आबादी रोकने और एक बच्चे का भविष्य सुधारने जैसे दो अच्छे काम एक साथ कर सकेंगे.

49) हमारे यहां शादी करना मंहगा क्यों होता जा रहा है?
क्योंकि अपनी शान का दिखावा करने में हम पीछे नहीं रहना चाहते और शादी में अपनी हैसियत से ़ज़्यादा ख़र्च करते हैं. जबकि शादी का समारोह सादग़ी से निपटा कर यही पैसा वर-वधू के भावी जीवन के लिए इन्वेस्ट किया जा सकता है.

50) लड़कियों के साथ छेड़खानी और बलात्कार की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं?
क्योंकि आज भी ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने में हम पीछे रह जाते हैं. बदनामी के डर से ऐसी 40 फ़ीसदी घटनाओं की तो रिपोर्ट तक नहीं लिखाई जाती.

51) शिक्षित युवाओं वाला यह देश उतनी तेज़ी से आगे क्यों नहीं बढ़ पा रहा, जितनी तेज़ी से उसे बढ़ना चाहिए?
क्योंकि अपने देश की सस्ती पढ़ाई का पूरा फ़ायदा उठाने के बाद मौक़ा मिलते ही यहां के युवा विदेशों में नौकरी करने को प्राथमिकता देते हैं. एनआरआई होना आज भी भारतीयों के लिए किसी स्टेटस सिंबल से कम नहीं.

 

OMG! तिरंगे को दुपट्टा बनाना पड़ा प्रियंका चोपड़ा को भारी, यूज़र्स ने किया ट्रोल (Priyanka Chopra Trolled For Tricolour Scarf)

तिरंगे को दुपट्टा बनाना पड़ा प्रियंका चोपड़ा को भारी

तिरंगे को दुपट्टा बनाना पड़ा प्रियंका चोपड़ा को भारी

15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर प्रियंका चोपड़ा ने भी बाक़ी बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ की तरह सोशल मीडिया पर अपना देशप्रेम दिखाया और अपने फैंस को विश किया. लेकिन प्रियंका का ये अंदाज़ कई लोगों को पसंद नहीं आया. प्रियंका को उनके ड्रेस को लेकर ख़ूब ट्रोल किया गया.

प्रियंका ने बूमरंग वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने सफ़ेद रंग की टी-शर्ट और जीन्स पहन रखी है और गले में तिरंगे के रंग का स्कार्फ लपेटा हुआ है, जिसे वो लहरा रही हैं. इस वीडियो के बाद यूजर्स ने उनकी इस ड्रेस पर कई कमेंट्स किए, किसी ने इसे तिरंगे का अपमान बताया, तो किसी ने तारीफ़ की.

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इसके पहले भी प्रियंका को उनकी ड्रेस के लिए तब ट्रोल किया गया था, जब बर्लिन में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली थीं. उनकी शॉर्ट ड्रेस पर लोगों ने कहा था कि उन्हें ऐसी ड्रेस पहननी चाहिए थी, जिसमें उनके पैर ढंके हों.

फिलहाल प्रियंका अमेरिकन टीवी शो क्वांटिको 3 की शूटिंग के लिए अमेरिका में हैं.

Independence Day #Vibes ??#MyHeartBelongsToIndia #happyindependencedayindia #jaihind

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मोहे रंग दे बसंती… देखें देशभक्ति का जज़्बा जगाने वाले 10 गाने (Top 10 Patriotic Songs)

देशभक्ति के जज़्बे पर फिल्में बनती आई हैं और बनती रहेंगी, ये फिल्में बने भी क्यों न, देश भक्ति का जज़्बा आप में है, हम में हैं और हमारे बॉलीवुड स्टार्स में भी है.

 

मेरी सहेली की तरफ़ से गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं 

आइए, आपको दिखाते हैं देश भक्ति पर बने टॉप 10 गाने (Desh Bhakti Songs).

फिल्म- पूरब और पश्चिम (1970)

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फिल्म- रंग दे बसंती (2006)

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फिल्म- हक़ीकत (1964)

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फिल्म- फूल बने अंगारे (1963)

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फिल्म- नया दौर (1957)

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फिल्म- उपकार (1967)

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फिल्म- लक्ष्य (2004)

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फिल्म- शहीद (1965)

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फिल्म- स्वदेश (2004)

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फिल्म- उपकार (1967)

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देशभक्ति के 10 दमदार डायलॉग्स (Independence Day: Top 10 Patriotic Dialogues)

देशभक्ति के 10 दमदार डायलॉग्स

देशभक्ति के 10 दमदार डायलॉग्स

बॉलीवुड भी फिल्मों के ज़रिए देशभक्ति के जज़्बे को और मज़बूत करता रहा है. कभी एलओसी कारगिल, लक्ष्य, द लेजेंड ऑफ भगत सिंह जैसी सच्ची घटनाओं पर फिल्म बनाकर, तो कभी ए वेडनेस डे, पूरब और पश्चिम, स्वदेश, क्रांतिवीर जैसी फिल्मों में आम हिंदुस्तानी का देशप्रेम दिखाकर. इन फिल्मों को ख़ूब पसंद भी किया जाता रहा है.

स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर आइए, देखते हैं देशभक्ति के जज़्बे को और मज़बूत करने वाले डायलॉग्स.

फिल्म- बॉर्डर

फिल्म- गदर

फिल्म- चक दे

फिल्म- लंदन ड्रीम्स

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फिल्म- रंग दे बसंती

फिल्म- सरफरोश

फिल्म- द लेजेंड ऑफ भगत सिंह

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फिल्म- बेबी

फिल्म- अ वेडनेस डे

फिल्म- क्रांतिवीर

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मोहे रंग दे बसंती… देखें देशभक्ति का जज़्बा जगाने वाले 10 गाने