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होली पर विशेष: क्या है होलिकादहन की पूरी कहानी? (Holi Special: Why Do We Celebrate Holi?)

Holi Special: Why Do We Celebrate Holi

Holi Special: Why Do We Celebrate Holi

होली (Holi) से संबंधित सबसे पॉप्युलर कथा है हिरण्यकश्यप की बहन होलिका व प्रह्लाद की. क्या है यह कथा और क्यों मनाते हैं हम होली, आइए, जानें-

प्राचीन काल में एक बहुत ही अत्याचारी राक्षसराज था- हिरण्यकश्यप, जिसने तपस्या करके ब्रह्मा से वरदान पा लिया कि संसार का कोई भी जीव, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य उसे नहीं मार सकते. न ही वह रात में मरेगा, न दिन में, न पृथ्वी पर, न आकाश में, न घर में, न बाहर और यहां तक कि कोई शस्त्र भी उसे नहीं मार पाएगा.

ऐसा वरदान पाकर वह और भी ज़्यादा अत्याचारी व निरंकुश हो गया था. लेकिन इसी हिरण्यकश्यप के यहां प्रह्लाद जैसा पवित्र आत्मा व ईश्‍वर में अटूट विश्‍वास करनेवाला पुत्र पैदा हुआ. प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था.

हिरण्यकश्यप को यह बिल्कुल पसंद नहीं था कि उसका पुत्र किसी और को पूजे. उसने प्रह्लाद को आदेश दिया कि वह उसके अतिरिक्त किसी अन्य की स्तुति न करे. प्रह्लाद के न मानने पर हिरण्यकश्यप उसे जान से मारने पर उतारू हो गया और उसने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन वो हर बार प्रभु-कृपा से बचता रहा.

ऐसे में हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने एक सुझाव दिया, होलिका को अग्नि से बचने का वरदान था. यानी उसे एक ऐसा आवरण मिला था, जिससे आग उसे जला नहीं सकती थी. हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रह्लाद को आग में जलाकर मारने की योजना बनाई.

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होलिका बालक प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई. लेकिन भगवान की कृपा से होलिका का वह आवरण भक्त प्रह्लाद को मिल गया और उसको कुछ नहीं हुआ. वहीं होलिका जलकर भस्म हो गई.

इसके बाद हिरण्यकश्यप को मारने के लिए भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में खंभे से निकल कर गोधूली बेला यानी सुबह व शाम के समय का संधिकाल, में दरवाज़े की चौखट पर बैठकर हिरण्यकश्यप को अपने नुकीले नाख़ूनों से उसका पेट फाड़कर उसे मार डालते हैं.
नरसिंह न मनुष्य थे, न जानवर, न वो सुबह का समय था, न शाम का, हिरण्यकश्यप को मारते समय न वो अंदर थे, न बाहर और उनके नाख़ून न अस्त्र थे, न शस्त्र.

उसी समय से होली का त्योहार मनाया जाने लगा यानी एक तरह से यह अच्छाई की बुराई पर जीत का संदेश है. व्यक्ति चाहे कितना ही बलशाली क्यों न हो, यदि वो अत्याचार की सीमाएं पार कर जाता है, तो कितने भी वरदान हों, उसे बचा नहीं सकते. बुराई का अंत निश्‍चित है. इसी तरह हमें भी बुरी शक्तियां ही नहीं, अपने मन में पनप रही सारी नकारात्मक भावनाओं को भी होली की अग्नि में दहन कर देना चाहिए और नेकी के मार्ग पर आगे चलना चाहिए.

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क्यों एनीमिक होती हैं भारतीय महिलाएं? (Anemia: A Common Problem Among Indian Women)

Anemia, Common Problem, Indian Women

Anemia, Common Problem, Indian Women

यूं तो हमारे देश में आर्थिक से लेकर सामाजिक सुधार हो रहे हैं, लेकिन ऐसे में जब इस तरह की ख़बरें सामने आती हैं, तो रुककर सोचने की ज़रूरत पड़ जाती है. यूं तो हमारे देश में आर्थिक से लेकर सामाजिक सुधार हो रहे हैं, लेकिन ऐसे में जब इस तरह की ख़बरें सामने आती हैं, तो रुककर सोचने की ज़रूरत पड़ जाती है. हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है कि भारत में सबसे अधिक एनीमिक महिलाएं हैं. द ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट के इस सर्वे के मुताबिक़ 15 से लेकर 49 साल तक की 51% भारतीय महिलाएं एनीमिक हैं. वे आयरन डेफिशियंसी झेल रही हैं, वे पोषक आहार नहीं ले रहीं… कुल मिलाकर वे स्वस्थ नहीं हैं. यह 2017 की रिपोर्ट है, जबकि वर्ष 2016 तक 48% महिलाएं एनीमिक थीं यानी यह आंकड़ा अब बढ़ गया है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि 15-49 साल की उम्र यानी युवावस्था, रिप्रोडक्शन की एज में इस तरह का कुपोषण, जिसका सीधा असर आनेवाली पीढ़ी पर पड़ता नज़र आएगा. यदि मां स्वस्थ नहीं, तो बच्चा भी स्वस्थ नहीं होगा.

क्या वजह है?

एक्सपर्ट्स की मानें, तो मात्र कुपोषण ही सबसे बड़ी या एकमात्र वजह नहीं है, बल्कि स्वच्छता की कमी भी एक बड़ा कारण है, क्योंकि पूअर हाइजीन पोषण को शरीर में एब्ज़ॉर्ब नहीं होने देती. इसके अलावा जागरूकता की कमी, अशिक्षा और परिवार के सामने ख़ुद को कम महत्व देना यानी पहले परिवार की ख़ुशी, उनका खाना-पीना, ख़ुद के स्वास्थ्य को महत्व नहीं देना भी प्रमुख कारण हैं.

सामाजिक व पारिवारिक ढांचा

  •  हमारा समाज आज भी इसी सोच को महत्व देता है कि महिलाओं का परम धर्म है पति, बच्चे व परिवार का ख़्याल रखना.
  •  इस पूरी सोच में, इस पूरे ढांचे में कहीं भी इस बात या इस ख़्याल तक की जगह नहीं रहती कि महिलाओं को अपने बारे में भी सोचना है
  •  उनका स्वास्थ्य भी ज़रूरी है, यह उन्हें सिखाया ही नहीं जाता.
  • यदि वे अपने बारे में सोचें भी तो इसे स्वार्थ से जोड़ दिया जाता है. पति व बच्चों से पहले खाना खा लेनेवाली महिलाओं को ग़ैरज़िम्मेदार व स्वार्थी करार दिया जाता है.
  • बचपन से ही उन्हें यह सीख दी जाती है कि तुम्हारा फ़र्ज़ है परिवार की देख-रेख करना. इस सीख में अपनी देख-रेख या अपना ख़्याल रखने को कहीं भी तवज्जो नहीं दी जाती.
  • यही वजह है कि उनकी अपनी सोच भी इसी तरह की हो जाती है. अगर वे ग़लती से भी अपने बारे में सोच लें, तो उन्हें अपराधबोध होने लगता है.
  • शादी के बाद पति को भी वे बच्चे की तरह ही पालती हैं. उसकी छोटी-छोटी ज़रूरतों का ख़्याल रखने से लेकर हर बात मानना उसका पत्नी धर्म बन जाता है. लेकिन इस बीच वो जाने-अनजाने ख़ुद के स्वास्थ्य को सबसे अधिक नज़रअंदाज़ करती है.
  • वो पुरुष है, तो उसके स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी पत्नी की होती है. उसे पोषक आहार, मनपसंद खाना, उसकी नींद पूरी होना… इस तरह की बातों का ख़्याल रखना ही पत्नी का पहला धर्म है.
  • ऐसे में यदि पत्नी बीमार भी हो जाए, तो उसे इस बात की फ़िक्र नहीं रहती कि वो अस्वस्थ है, बल्कि उसे यह लगता है कि पूरा परिवार उसकी बीमारी के कारण परेशान हो रहा है. न कोई ढंग से खा-पी रहा है, न कोई घर का काम ठीक से हो रहा है.
  • पत्नी यदि अपने विषय में कुछ कहे भी और अगर वो हाउसवाइफ है तब तो उसे अक्सर यह सुनने को मिलता है कि आख़िर सारा दिन घर में पड़ी रहती हो, तुम्हारे पास काम ही क्या है?
  • कुल मिलाकर स्त्री के स्वास्थ्य के महत्व को हमारे यहां सबसे कम महत्व दिया जाता है या फिर कहें कि महत्व दिया ही नहीं जाता.

जागरूकता की कमी और अशिक्षा

  • जागरूकता की कमी की सबसे बड़ी वजह यही है कि बचपन से ही उनका पालन-पोषण इसी तरह से किया जाता है कि महिलाएं ख़ुद भी अपने स्वास्थ्य को महत्व नहीं देतीं.
  • उन्हें यही लगता है कि परिवार व पति की सेवा ही सबसे ज़रूरी है और हां, यदि वे स्वयं गर्भवती हों, तो उन्हें अपने स्वास्थ्य का ख़्याल रखना है, क्योंकि यह आनेवाले बच्चे की सेहत से जुड़ा है.
  • लेकिन यदि वे पहले से ही अस्वस्थ हैं, तो ज़ाहिर है मात्र गर्भावस्था के दौरान अपना ख़्याल रखने से भी सब कुछ ठीक नहीं होगा.
  • गर्भावस्था के दौरान भी आयरन टैबलेट्स या बैलेंस्ड डायट वो नहीं लेतीं.
  • अधिकांश महिलाओं को पोषक आहार के संबंध में जानकारी ही नहीं है और न ही वे इसे महत्व देती हैं.
  • हमेशा से पति व बच्चों की लंबी उम्र व सलामती के लिए उन्हें व्रत-उपवास के बहाने भूखा रहने की सीख दी जाती है.
  • जो महिलाएं शाकाहारी हैं, उन्हें किस तरह से अपने डायट को बैलेंस करना है, इसकी जानकारी भी नहीं होती.
  • बहुत ज़रूरी है कि महिलाओं को जागरूक किया जाए, अपने प्रति संवेदनशील बनाया जाए.
  • इसी तरह से अशिक्षा भी बहुत बड़ी वजह है, क्योंकि कम पढ़ी-लिखी महिलाएं तो जागरूकता से लेकर हाइजीन तक के महत्व को नहीं समझ पातीं.
  • साफ़-सफ़ाई की कमी किस तरह से लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, यह समझना बेहद ज़रूरी है. लोग कई गंभीर रोगों के शिकार हो सकते हैं, जिससे उनके शरीर में पोषक तत्व ग्रहण व शोषित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
  • भोजन को किस तरह से संतुलित व पोषक बनाया जाए, इसकी जानकारी भी अधिकांश लोगों को नहीं होती.

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ग़रीबी भी है एक बड़ी वजह

  • आयरन की कमी के चलते होनेवाले एनीमिया की सबसे बड़ी वजह ग़रीबी व कुपोषण है.
  • ग़रीबी के चलते लोग ठीक से खाने का जुगाड़ ही नहीं कर पाते, तो पोषक आहार दूर की बात है.
  • वहीं उन्हें इन तमाम चीज़ों की जानकारी व महत्व के विषय में भी अंदाज़ा नहीं होता.क्या किया जा सकता है?
  • सरकार की ओर से प्रयास ज़रूर किए जा रहे हैं, लेकिन वो नाकाफ़ी हैं.
  • द ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट में इस ओर भी इशारा किया गया है कि बेहतर होगा भारत ग़रीब व आर्थिक रूप से कमज़ोर यानी लो इनकम देशों से सीखे, क्योंकि वे हमसे बेहतर तरी़के से इस समस्या को सुलझा पाए हैं.
  • ब्राज़ील ने ज़ीरो हंगर स्ट्रैटिजी अपनाई है, जिसमें भोजन का प्रबंधन, छोटे किसानों को मज़बूती प्रदान करना और आय के साधनों को उत्पन्न करने जैसे प्रावधानों पर ज़ोर दिया गया है.
  • ब्राज़ील के अलावा पेरू, घाना, वियतनाम जैसे देशों ने भी कुपोषण को तेज़ी से कम करने में सफलता पाई है.

नेशनल न्यूट्रिशनल एनीमिया प्रोफिलैक्सिस प्रोग्राम (एनएनएपीपी) का रोल?

  • जहां तक भारत की बात है, तो कई ग़रीब देश भी एनीमिया व कुपोषण की समस्या से हमसे बेहतर तरी़के से लड़ने में कारगर सिद्ध हुए हैं, तो हमें उनसे सीखना होगा.
  • भारत में एनीमिया से लड़ने के लिए नेशनल न्यूट्रिशनल एनीमिया प्रोफिलैक्सिस प्रोग्राम (एनएनएपीपी) 1970 से चल रहा है. कुछ वर्ष पहले इस प्रोग्राम के तहत किशोर बच्चों व गर्भवती महिलाओं में आयरन और फोलेट टैबलेट्स बांटने का साप्ताहिक कार्यक्रम शुरू हुआ, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि मात्र दवाएं उन्हें सौंप देना ही कोई विकल्प नहीं है.
  • यह देखना भी ज़रूरी है कि क्या वो ये दवाएं ले रही हैं? एक अन्य सर्वे से पता चला कि बहुत कम महिलाएं ये टैबलेट्स नियमित रूप से लेती हैं.
  • इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि आयरन टैबलेट्स के काफ़ी साइड इफेक्ट्स होते हैं, जैसे- उल्टियां व दस्त और ये गर्भावस्था को और मुश्किल बना देते हैं. यही वजह है कि अधिकतर महिलाएं इन्हें लेना छोड़ देती हैं.
  • जबकि होना यह चाहिए कि उन्हें इन साइड इफेक्ट्स से जूझने का बेहतर तरीक़ा या विकल्प बताना चाहिए.

भारत में गर्भवती स्त्रियां गंभीर रूप से कुपोषण की शिकार हैं- सर्वे

  • न स़िर्फ गर्भावस्था में, बल्कि भारतीय स्त्रियां हर वर्ग में कम स्वस्थ पाई गईं. उनका व उनके बच्चों का स्वास्थ्य व वज़न अन्य ग़रीब देशों की स्त्रियों व बच्चों के मुक़ाबले कम पाया गया. भारत में किशोरावस्था में लड़कियों के एनीमिक होने के पीछे प्रमुख वजह यहां की यह संस्कृति बताई गई, जिसमें लिंग के आधार पर हर स्तर पर भेदभाव किया जाता है.
  • बेटे को पोषक आहार देना और बेटी के स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ करना हमारे परिवारों में देखा जाता है. स़िर्फ ग़रीब तबके में ही नहीं, पढ़े-लिखे व खाते-पीते घरों में भी इस तरह का लिंग भेद काफ़ी पाया जाता है.
  • पोषण की कमी के कारण होनेवाला एनीमिया यानी आयरन और फॉलिक एसिड की कमी से जो एनीमिया होता है, वह परोक्ष या अपरोक्ष रूप से गर्भावस्था के दौरान लगभग 20% मृत्यु के लिए ज़िम्मेदार होता है.
  • दवाओं के साथ-साथ पोषक आहार किस तरह से इस समस्या को कम कर सकता है, कौन-कौन से आहार के ज़रिए पोषण पाया जा सकता है, इस तरह की जानकारी भी महिलाओं व उनके परिजनों को भी देनी आवश्यक है.

 – गीता शर्मा

 

बर्थडे स्पेशल: कोमल मन और अटल इरादे… जानें अटलजी की ये दिलचस्प बातें… (Birthday Special: Happy Birthday Atal Bihari Vajpayee)

Happy Birthday, Atal Bihari Vajpayee

 Happy Birthday, Atal Bihari Vajpayee

 

बर्थडे स्पेशल: कोमल मन और अटल इरादे… जानें अटलजी  की ये दिलचस्प बातें… (Birthday Special: Happy Birthday Atal Bihari Vajpayee)
मन से कवि और कर्म से राजनेता, जी हां, यही पहचान है अटल बिहारी वाजपेयी की. अटलजी उन चंद राजनेताओं में से एक हैं, जिन्हें अपनी पार्टी के साथ-साथ विपक्षी दल भी उतना ही प्यार करते रहे हैं. उनका क़द इतना बड़ा है कि हर कोई उन्हें अदब और सम्मान की नज़र से देखता है.
– अटलजी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था.
– उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक कवि और स्कूल मास्टर के तौर पर की थी.
– आगे चलकर वो पत्रकारिता से जुड़े और फिर राजनीति में इस सितारे का आगमन हुआ.
– 1939 में वो स्वयंसेवक की तरह आरएसएस में शामिल हुए.
– वो भारत के प्रधानमंत्री भी बने और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने काफ़ी सराहनीय काम किए.
– अटलजी और उनके पिताजी ने एक साथ लॉ की पढ़ाई की, यहां तक कि उन्होंने होस्टल का रूम भी शेयर किया.
– 1957 में उन्होंने अपना पहला लोकसभा इलेक्शन यूपी की दो सीटों से लड़ा, जहां मथुरा में उन्हें हार मिली और बलरामपुर से जीत.
– उनकी वाकशक्ति यानी बोलने की कला व तर्कशक्ति से जवाहरलाल नेहरू भी इतने प्रभावित थे कि उन्होंने बहुत पहले ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि एक दिन अटलजी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे.
– 1977 में वो मोरारजी देसाई मिनिस्ट्री में एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर बने थे और जब वो ऑफिस पहुंचे, तो देखा उनके कैबिन से पंडित नेहरू की तस्वीर गायब थी. इस पर उन्होंने कहा कि उनकी तस्वीर उन्हें वापस चाहिए.
– हिंदी भाषा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान व पहचान दिलाने का श्रेय अटलजी को ही जाता है, UN में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया और वो यूनाइटेड नेशन में हिंदी में भाषण देनेवाले पहले शख़्स बने.
– वो तीन बार भारत के प्रधामंत्री बने- पहली बार 16 मई 1996 को 13 दिनों के लिए, दूसरी बार 19 मार्च 1998 को 13 महीनों के लिए और फिर तीसरी बार 13 अक्टूबर 1999 को पूरे 5 साल के लिए.
– मेरी सहेली की ओर से अटलजी को जन्मदिन की शुभकामनाएं.
Happy Birthday, Atal Bihari Vajpayee
– अटलजी की कविता, जो अक्सर वो गुनगुनाते हैं…
1 गीत नहीं गाता हूँ
बेनकाब चेहरे हैं,
दाग बड़े गहरे हैं,
टूटता तिलस्म, आज सच से भय खाता हूँ ।
गीत नही गाता हूँ ।
लगी कुछ ऐसी नज़र,
बिखरा शीशे सा शहर,
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूँ ।
गीत नहीं गाता हूँ ।
पीठ मे छुरी सा चाँद,
राहु गया रेखा फाँद,
मुक्ति के क्षणों में बार-बार बँध जाता हूँ ।
गीत नहीं गाता हूँ

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2 मेरे प्रभु!
मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना,
ग़ैरों को गले न लगा सकूं,
इतनी रुखाई कभी मत देना.

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तैमूर चल पड़े हैं पटौदी अपना फर्स्ट बर्थडे सेलिब्रेट करने… (Papa Saif & Mommy Kareena Leave With Taimur For First Birthday At Pataudi Palace)

Taimur, First Birthday, Pataudi Palace

Taimur, First Birthday, Pataudi Palace
छोटे नवाब का बर्थडे बस आने ही वाला है, ऐसे में सभी एक्साइटेड हैं, क्योंकि छोटे नवाब हैं सबके फेवरेट. यही वजह है कि मीडिया क्यूट तैमूर का एक भी पिक्चर मिस नहीं करना चाहता, तो यहां हम लाए हैं तैमूर की लेटेस्ट पिक, जहां वो मॉमी करीना और पापा सैफ के साथ एयरपार्ट पर क्लिक हुए. ये सभी पटौदी जा रहे हैं, क्योंकि तैमूर का फर्स्ट बर्थडे होगा बेहद ख़ास…

Taimur, First Birthday, Pataudi Palace

Taimur, First Birthday, Pataudi Palace

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भारत की मानुषी छिल्लर बनीं मिस वर्ल्ड 2017 (India’s Manushi Chhillar Wins Miss World 2017)

India, Manushi Chhillar, Wins Miss World 2017

India, Manushi Chhillar, Wins Miss World 2017

  • भारत की मानुषी छिल्लर (Manushi Chhillar) ने जीत लिया है मिस वर्ल्ड 2017 (Miss World 2017) का ख़िताब और एक बार फिर दुनिया ने मान लिया कि भारत है टैलेंट और खूबसूरती के संगम का सबसे बेहतरीन स्रोत…
  • चीन में आयोजित मिस वर्ल्ड पेजेंट में भारत की सुंदरी मानुषी ने ये टाइटल जीतकर देश का सर गर्व से ऊंचा कर दिया.
  • मिस वर्ल्ड 2017 ब्यूटी पेजेंट में कुल 118 हसीनाओं ने हिस्सा लिया था, जिसमें मानुषी ने बाज़ी मार ली.
  • उन्हें ढेरों शुभकामनाएं.

India, Manushi Chhillar, Wins Miss World 2017

 

  • मानुषी मेडिकल की स्टूडेंट हैं और हरियाणा के सोनीपत की रहनेवाली हैं.
  • फाइनल राउंड में मानुषी से जूरी ने ट्रिकी सवाल पूछा था कि किस प्रोफेशन में सबसे ज़्यादा वेतन मिलना चाहिए , जसका जवाब मानुषी ने बड़ी ही समझदारी से दिया कि मां को सबसे अधिक सम्मान मिलना चाहिए… मां को सैलरी या कैश की ज़रुरत नहीं, उन्हें सम्मान और प्यार मिलना चाहिए.
  • कांटेस्ट में दूसरे और तीसरे स्थान पर रही क्रमशः मिस मैक्सिको और मिस इंग्लैंड.

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लेडी लक के बहाने महिलाओं को निशाना बनाना कितना सही? (Targeting Women In Name Of Lady Luck)

Targeting Women, In Name Of Lady Luck
मैं ख़्वाब नहीं, हक़ीक़त हूं… मैं ख़्वाहिश नहीं, एक मुकम्मल जहां हूं… किसी की बेटी, बहन या अर्द्धांगिनी बनने से पहले मैं अपने आप में संपूर्ण आसमान हूं, क्योंकि मैं एक व्यक्ति हूं, व्यक्तित्व हूं और मेरा भी अस्तित्व है… मुझमें संवेदनाएं हैं, भावनाएं हैं, जो यह साबित करती हैं कि मैं भी इंसान हूं… 

Targeting Women In Name Of Lady Luck

जी हां, एक स्त्री को हम पहले स्त्री और बाद में इंसान के रूप में देखते हैं या फिर यह भी हो सकता है कि हम उसे स़िर्फ और स़िर्फ एक स्त्री ही समझते हैं… उसके अलग अस्तित्व को, उसके अलग व्यक्तित्व को शायद ही हम देख-समझ पाते हैं. यही वजह है कि उसे हम एक शगुन समझने लगते हैं. कभी उसे अपना लकी चार्म बना लेते हैं, तो कभी उसे शापित घोषित करके अपनी असफलताओं को उस पर थोपने का प्रयास करते हैं…

…बहू के क़दम कितने शुभ हैं, घर में आते ही बेटे की तऱक्क़ी हो गई… बेटी नहीं, लक्ष्मी हुई है, इसके पैदा होते ही बिज़नेस कितना तेज़ी से बढ़ने लगा है… अक्सर इस तरह के जुमले हम अपने समाज में सुनते भी हैं और ख़ुद कहते भी हैं… ठीक इसके विपरीत जब कभी कोई दुखद घटना या दुर्घटना हो जाती है, तो भी हम कुछ इस तरह की बातें कहते-सुनते हैं… इस लड़की के क़दम ही शुभ नहीं हैं, पैदा होते ही यह सब हो गया या फिर ससुराल में नई बहू के आने पर यदि कोई दुर्घटना हो जाती है, तब भी इसी तरह की बातें कहने-सुनने को मिलती हैं. कुल मिलाकर बात यही है कि हर घटना को किसी स्त्री के शुभ-अशुभ क़दमों से जोड़कर देखा जाता है और आज हम इसी की चर्चा करेंगे कि यह कहां तक जायज़ है?

– अगर किसी सेलिब्रिटी की लाइफ में कोई लड़की आती है, तो उसकी हर कामयाबी या नाकामयाबी को उस लड़की से जोड़कर देखा जाने लगता है. ऐसे कई उदाहरण हमने देखे हैं, फिर चाहे वो क्रिकेटर हो या कोई एक्टर, उनकी परफॉर्मेंस को हम उस लड़की को पैमाना बनाकर जज करने लगते हैं.

– यहां तक कि हम ख़ुद भी बहुत ही सूक्ष्म स्तर पर यह सब करते हैं, चाहे जान-बूझकर न करें,  लेकिन यह हमारी मानसिकता बन चुकी है.  श्र हम ख़ुद भी बहुत गर्व महसूस करते हैं, जब हमारा कोई अपना हमारे लिए यह कहे कि तुम मेरे लिए बहुत लकी हो…

– लेडी लक की अक्सर बहुत बातें की जाती हैं और इसे हम सकारात्मक तरी़के से ही लेते हैं, लेकिन ग़ौर करनेवाली बात यह है कि हर सुखद व दुखद घटना को किसी स्त्री के लकी या अनलकी होने से जोड़ना सही है?

– कर्म और भाग्य सबके अपने ही होते हैं, किसी दूसरे को अपने कर्मों या अपने भाग्य के लिए ज़िम्मेदार बताना कितना सही है?

– 42 वर्षीया सुनीता शर्मा (बदला हुआ नाम) ने इस संदर्भ में अपने अनुभव शेयर किए, “मेरी जब शादी हुई थी, तो मेरे पति और ससुरजी का बिज़नेस काफ़ी आगे बढ़ने लगा था. मुझे याद है कि हर बात पर मेरे पति और यहां तक कि मेरी सास भी कहती थीं कि सुनीता इस घर के लिए बहुत लकी है. मेरे पति की जब भी कोई बड़ी बिज़नेस डील फाइनल होती थी, तो घर आकर मुझे ही उसका श्रेय देते थे कि तुम जब से ज़िंदगी में आई हो, सब कुछ अच्छा हो रहा है. कितनी लकी हो तुम मेरे लिए… उस व़क्त मैं ख़ुद को बहुत ही ख़ुशनसीब समझती थी कि इतना प्यार करनेवाला पति और ससुराल मिला है. फिर कुछ सालों बाद मुझे बेटा हुआ, सब कुछ पहले जैसा ही था, बिज़नेस के उतार-चढ़ाव भी वैसे ही थे, कभी अच्छा, तो कभी कम अच्छा होता रहता था. फिर बेटे के जन्म के 3 साल बाद मुझे बेटी हुई. हम सब बहुत ख़ुश थे कि फैमिली कंप्लीट हो गई.

मेरे पति भी अक्सर कहते कि तुम्हारी ही तरह देखना, हमारी बेटी भी हमारे लिए बहुत लकी होगी. मैं ख़ुश हो जाती थी उनकी बातें सुनकर, लेकिन बिटिया के जन्म के कुछ समय बाद ही उनको बिज़नेस में नुक़सान हुआ, तो मेरी सास ने कहना शुरू कर दिया कि जब से गुड़िया का जन्म हुआ है, बिज़नेस आगे बढ़ ही नहीं रहा… मेरे पति भी बीच-बीच में कुछ ऐसी ही बातें करते, तब जाकर मुझे यह महसूस हुआ कि हम कितनी आसानी से किसी लड़की को अपने लिए शुभ-अशुभ घोषित कर देते हैं और यहां तक कि मैं ख़ुद को भी इसके लिए ज़िम्मेदार मानती हूं. जब पहली बार मुझे अपने लिए यह सुनने को मिला था, उसी व़क्त मुझे टोकना चाहिए था, ताकि इस तरह की सोच को पनपने से रोका जा सके.

मैंने अपने घरवालों को प्यार से समझाया, उनसे बात की, उन्हें महसूस करवाया कि इस तरह किसी भी लड़की को लकी या अनलकी कहना ग़लत है. वो लोग समझदार थे, सो समझ गए. कुछ समय बाद हमारा बिज़नेस फिर चल पड़ा, तो यह तो ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव लगे रहते हैं, इसके लिए किसी की बेटी-बहू को ज़िम्मेदार ठहराना बहुत ही ग़लत है. समाज को अपनी धारणा बदलनी चाहिए.”

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Targeting Women In Name Of Lady Luck

– भले ही हमें यह बात छोटी-सी या ग़ैरज़रूरी लगे, लेकिन अब यह ज़रूरी हो गया है कि हम इस तरह की मानसिकता से बाहर निकलें कि जब कोई क्रिकेटर यदि आउट ऑफ फॉर्म हो, तो उसके लिए पूरा समाज उसकी सेलिब्रिटी गर्लफ्रेंड को दोषी ठहराने लगे. उस पर तरह-तरह के ताने-तंज कसे जाने लगें या उस पर हल्की बातें, अपशब्द, सस्ते जोक्स बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाने लगें.

– हम ख़ुद भी इस कुचक्र का हिस्सा बन जाते हैं और इस तरह की बातें सर्कुलेट करते हैं. न्यूज़ में अपनी स्टोरी की टीआरपी बढ़ाने के लिए चटखारे ले-लेकर लोगों के रिएक्शन्स दिखाते हैं, लेकिन इन सबके बीच हम भूल जाते हैं कि जिसके लिए यह सब कहा जा रहा है, उसके मनोबल पर इसका क्या असर होता होगा…?

– किसी को भी किसी के लिए शुभ-अशुभ कहनेवाले भला हम कौन होते हैं? और क्यों किसी लेडी लक के बहाने हर बार एक स्त्री को निशाना बनाया जाता है?

– दरअसल, इन सबके पीछे भी हमारी वही मानसिकता है, जिसमें पुरुषों के अहं को तुष्ट करने की परंपरा चली आ रही है.

– हम भले ही ऊपरी तौर पर इसे अंधविश्‍वास कहें, लेकिन कहीं न कहीं यह हमारी छोटी मानसिकता को ही दर्शाता है.

– इस तरह के अंधविश्‍वास किस तरह से रिश्तों व समाज के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं यह समझना ज़रूरी है.

– किसी स्त्री के अस्तित्व पर ही आप प्रश्‍नचिह्न लगा देते हैं और फिर आप इसी सोच के साथ जीने भी लगते हैं. हर घटना को उसके साथ जोड़कर देखने लगते हैं… क्या यह जायज़ है?

– क्या कभी ऐसा देखा या सुना गया है कि किसी पुरुष को इस तरह से लकी-अनलकी के पैमाने पर तोला गया हो?

– चाहे आम ज़िंदगी हो या फिर सेलिब्रिटीज़, किसी भी पुरुष को इन सबसे नहीं गुज़रना पड़ता, आख़िर क्यों?

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Targeting Women In Name Of Lady Luck

– घूम-फिरकर हम फिर वहीं आ रहे हैं कि लेडी लक के बहाने क्यों महिलाओं को ही निशाना बनाया जाता है? और यह कब तक चलता रहेगा?

– सवाल कई हैं, जवाब एक ही- जब तक हमारे समाज की सोच नहीं बदलेगी और इस सोच को बदलने में अब भी सदियां लगेंगी. एक पैमाना ऐसी भी न जाने कितनी घटनाएं आज भी समय-समय पर प्रकाश में आती हैं, जहां किसी महिला को डायन या अपशगुनि घोषित करके प्रताड़ित या समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है. कभी किसी पेड़ से बांधकर, कभी मुंह काला करके, तो कभी निर्वस्त्र करके गांवभर में घुमाया जाता है… हालांकि पहले के मुकाबले अब ऐसी घटनाएं कम ज़रूर हो गई हैं, लेकिन पूरी तरह से बंद नहीं हुई हैं. ये और इस तरह की तमाम घटनाएं महिलाओं के प्रति हमारी उसी सोच को उजागर करती हैं, जहां उन्हें शुभ-अशुभ के तराज़ू में तोला जाता है.

– गीता शर्मा

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एशिया कप: भारतीय महिला हॉकी टीम ने फाइनल में चीन को हराकर दर्ज की जीत (Magical Moment: India beat China to win women’s hockey Asia Cup)

India beat China to win women’s hockey Asia Cup

 

India beat China to win women’s hockey Asia Cup

एशिया कप में भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में चीन को 5-4 से हराकर जीत दर्ज कर ली है. इसके साथ ही भारतीय टीम ने विश्व कप 2018 के लिए क्वॉलिफाइ भी कर लिया है. मैच का निर्धारित समय खत्म होने पर दोनों टीमें 1-1 से बराबर थीं… इस मुकाबले का फैसला शूटआउट से हुआ.
भारतीय महिला टीम का यह दूसरा एशिया कप खिताब है। इससे पहले भारत ने 2004 में इस प्रतिष्ठित खिताब को अपने नाम किया था जब उसने जापान को 1-0 से मात दी थी.
राष्ट्रपति, पीएम ने भी टीम को जीत पर बधाई दी.

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भूटान के क्यूट प्रिंस बन गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी दुलारे! (Bhutan’s Royal Baby Steals The Show)

Bhutan's Royal Baby in india with narendra modi

Bhutan's Royal Baby in india with narendra modi

भूटान के क्यूट प्रिंस बन गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के भी दुलारे! (Bhutan’s Royal Baby Steals The Show)

भारत के दौरे पर इन दिनों आए हुए हैं भूटान नरेश जग्मे खेसर नामग्याल (jigme khesar namgyel wangchuck). भूटान का यह शाही परिवार मंगलवार को दिल्ली पहुंचा. भारत में उनका भव्य स्वागत हुआ और दोनों देशों के बीच कई विषयों को लेकर गंभीर चर्चा भी हुई. लेकिन इन सबके बीच सबसे अधिक सुर्ख़ियां बटोरीं भूटान के क्यूट से नन्हे प्रिंस ने. जी हां, भूटान नरेश अपने छोटे नरेश जिग्मे नामग्याल और पत्नी के साथ भारत के दौरे पर हैं और इस दौरे में उनके क्यूट प्रिंस ही सारी लाइमलाइट चुरा रहे हैं. उनकी पिक्चर्स इंटरनेट पर वायरल हो चुकी हैं और सबको लुभा रही हैं.

Bhutan's Royal Baby in india with narendra modi
इस नन्हे प्रिंस को देखकर सारी गंभीर चर्चाएं एक तरफ़ रह गईं और सबका ध्यान बस उन्हीं पर आकर टिक गया. उनकी क्यूट हरक़तों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) तक को बहुत इंप्रेस किया. छोटे प्रिंस अपने पापा और मम्मी के साथ जहां भी गए, वहां उन्होंने अपनी मासूम शरारतों से सबको अपनी तरफ आकर्षित कर लिया.

Bhutan's Royal Baby in india with narendra modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रिंस के साथ बात करते और खेलते नज़र आए, उन्होंने प्रिंस को तोहफे दिए जिसमें फुटबॉल और चेस है.
शाही परिवार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मिला, वहां भी प्रिंस को देखकर राष्ट्रपति और उनकी पत्नी बेहद ख़ुश हुए.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी भूटान नरेश से मुलाक़ात की और वो भी छोटे-से प्रिंस से लाड़ लड़ाती नज़र आईं.

आप भी देखिए उनकी वायरेल पिक्चर्स.

Bhutan's Royal Baby in india with narendra modi

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज छोटे प्रिंस से लाड़ लड़ाती हुईं 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ क्यूट प्रिंस 

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भाई दूज के पावन अवसर को यूं करें सेलिब्रेट (Bhai Dooj Celebration)

Bhai Dooj Celebration

Bhai Dooj Celebration

भैया दूज
दिवाली के अंतिम दिनों का पांचवां त्योहार भैया दूज है.
  • भाई दूज के दिन विवाहित या अविवाहित बहनों को प्रात: स्नान आदि से निपटकर भाई के स्वागत की तैयारी करनी चाहिए.
  • इस दिन यम की पूजा या भाई के आवभगत का तरीक़ा अलग होता है. इसके अनुसार बहनों को भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारनी चाहिए और कलावा बांधकर मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन-मिश्री खिलानी चाहिए.
  • इस विधि के संपन्न होने तक दोनों को व्रती रहना चाहिए.
  • बहनों को शाम के समय यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखना चाहिए. इस समय आसमान में चील उड़ती दिखाई देने पर बहुत ही शुभ माना जाता है.
  • इस संदर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं, उसे यमराज ने क़बूल कर लिया है.यह भी पढ़ें: दिवाली स्पेशल: टॉप 5 रंगोली डिज़ाइन्स से करें ख़ुशियों का स्वागत

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क्या करें?
  • भाई को अपनी विवाहिता बहन के घर अवश्य जाना चाहिए.
  • बहन को अपने भाई का आतिथ्य सत्कार करना चाहिए और तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य, जीवन, स्वास्थ्य आदि की कामना करनी चाहिए.
क्या न करें?
  •  भाई को अपने घर बहन के आने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे ही बहन के घर जाना चाहिए.
  • बहन यमदेव की पूजा तक कुछ भी न खाए-पीए.

– मनीषा कौशिक

(वास्तु-फेंगशुई एक्सपर्ट)

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हैप्पी दिवाली! कबड्डी के धाकड़ बॉयज़ का नया अंदाज़! (Diwali Special: Kabaddi Stars In New Avtar)

pro Kabaddi Stars
हैप्पी दिवाली! कबड्डी के धाकड़ बॉयज़ का नया अंदाज़! इनसे पंगा मत लेना!

कबड्डी (Kabaddi) के मैट पर तो हमने इन्हें एक-दूसरे की टांग-खिंचाई करते हुए और पंगा लेते हुए देखा है, लेकिन दिवाली के मौके पर ये सब एक साथ एंजॉय करते नज़र आए. आप भी देखें इन हैंडसम हंक्स का ये सुपर कूल अंदाज़ इन पिक्चर्स के ज़रिए, जिनके कैप्शन्स भी काफ़ी कूल हैं. पुणेरी पल्टन (Puneri Paltan) के कैप्टन दीपक निवास हुड्डा ने लिखा है- डिवाइडेड बाय टीम, यूनाइटेड बाय ब्रदरहुड!

इन सभी प्लेयर्स ने अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स भी अपने फेस्टिवल लुक की तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें ये सभी गेम मोड से बाहर निकलकर लाइट मूड में नज़र आ रहे हैं. तो देखें और मज़ा लें.

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अपने ख़्वाबों को जीने के लिए जुनून की हद तक जाना ज़रूरी है- बॉक्सर स्वीटी बूरा (Exclusive Interview: World Number 2 Boxer Sweety Boora)

Interview Boxer Sweety Boora

एक ख़ूबसूरत ख़्याल जब पनपता है, तो उसे हक़ीक़त का रूप लेते देखना बेहद सुखद होता है… लेकिन इस सुखद एहसास को जीने की बड़ी क़ीमत भी चुकानी पड़ती है, क्योंकि कोई भी मुक़ाम इतनी आसानी से हासिल नहीं होता और कोई भी ख़्याल हक़ीक़त में इतनी सरलता से तब्दील नहीं होता… इसमें व़क्त तो लगता ही है, साथ ही ज़रूरत होती है बुलंद हौसलों की, जिसमें कठिन संघर्षों का दौर से भी गुज़रना पड़ता है और कई सामाजिक बंदिशों को भी तोड़ना पड़ता है… एक ऐसा ही मुक़ाम हासिल किया है वर्ल्ड नंबर 2 बॉक्सर स्वीटी बूरा ने. अपने नाम ही की तरह बेहद स्वीट और इरादों में बेहद टफ स्वीटी क्या कहती हैं अपने सपनों और संघर्षों के बारे में, उन्हीं से जानते हैं-

Interview Boxer Sweety Boora

बॉक्सिंग, जिसे आज भी हमारे समाज में मर्दों का खेल ही माना जाता है, आपकी इसमें रुचि कैसे जागी?
स्पोर्ट्स में मुझे बचपन से ही दिलचस्पी थी. मैं पहले कबड्डी खेला करती थी. स्टेट के लिए सिलेक्ट भी हुई थी, पर फिर भी कहीं न कहीं यह एक टीम गेम था और मेरे पापा हमेशा मुझे कहते थे कि तुझे इंडिविज़ुअल गेम पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि मैं जब भी कुछ ग़लत होते देखती थी, तो भले ही ज़ुबान से कुछ न बोलूं, पर अपने पंचेस को रोक नहीं पाती थी. शायद मेरे पापा ने मेरी इस प्रतिभा को पहचान लिया था, इसलिए मैंने बॉक्सिंग शुरू कर दी और 2009 से मैं बॉक्सिंग ही कर रही हूं.

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Interview Boxer Sweety Boora

फैमिली का सपोर्ट कितना मिला, क्योंकि बॉक्सिंग एक ख़तरनाक खेल माना जाता है.
फैमिली का पूरा सपोर्ट रहा. मेरे मम्मी-पापा ने तो हर क़दम पर मेरा साथ दिया. उनके सपोर्ट के बिना कुछ भी करना सम्भव नहीं था. हालांकि आस-पास के लोग व रिश्तेदार ताने भी देते थे कि लड़की बिगड़ जाएगी, लेकिन पापा ने कभी उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया. उनका कहना था कि बिगड़ना होगा, तो कहीं भी बिगड़ सकता है कोई, इसके लिए किसी के हुनर को दबाना बेहद ग़लत है. इसी तरह मम्मी ने कभी कोई रोक-टोक नहीं की. ये उनका ही विश्वास था, जिसने मुझे इस मुक़ाम तक पहुँचाया. मेरे पेरेंट्स ने मुझे कभी भी ये महसूस नहीं होने दिया कि मैं  लड़की हूँ और मुझे लड़कों की तरह सपने देखने का हक़ नहीं या मुझे ज़्यादा छूट मिली तो मैं बिगड़ जाऊँगी.
वैसे भी बिगड़ने की परिभाषा क्या है? क्या लड़की होकर स्पोर्ट्स में दिलचस्पी रखना बिगड़ जाना होता है? लड़कों को सारी छूट देना और लड़कियों पर तमाम पाबंदियां लगाना न बिगड़ने की गारंटी देता है? लोगों को सोच बदलनी चाहिए और बदल भी रही है, अब तो बहुत फ़र्क़ आ गया है, लेकिन फिर भी लड़कियों के लिए संघर्ष थोड़ा बढ़ जाता है. मेरे मम्मी-पापा का साथ था मुझे, तभी मैं यहां तक पहुंच पाई.

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Interview Boxer Sweety Boora

बॉक्सिंग में और बॉक्सिंग का फ्यूचर कैसा है? ख़ासतौर से लड़कियों की अगर बात की जाए.
फ्यूचर तो अच्छा ही है, लेकिन और अच्छा हो सकता है, जिसके लिए सबको मेहनत करनी होगी. लड़कियां हमेशा मेडल्स लाती हैं, बेहतर प्रदर्शन करती हैं, लेकिन उन्हें उतनी लाइमलाइट नहीं मिलती, जितना लड़कों को.
आप मेरी ही बात कर लो, मैं वर्ल्ड नंबर 2 हूं, लेकिन मुझे कितने लोग जानते हैं? आज तक मुझे कोई स्पॉन्सर तक नहीं मिला.
लड़कियों को आज भी उतना सीरियसली नहीं लिया जाता, लेकिन कहते हैं न, उम्मीद पर दुनिया कायम है, तो मैं पॉज़िटिव हूं, क्योंकि बदलाव हो रहे हैं. अब तक लड़कियों की स़िर्फ 3 वेज कैटेगरी ही थी, फेड्रेशन भी सस्पेंडेड थी. पर यदि लड़कियों की भी लीग शुरू होगी, तो लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी. उन्हें बढ़ावा मिलेगा, सुविधाएं बढ़ेंगे, एक्सपोज़र बढ़ेगा.
वरना तो मैरी कॉम जैसी इतनी बड़ी बॉक्सर को भी अपनी पहचान बनाने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा था. 5 बार वर्ल्ड चैंपियन बनना अपने आप में एक मिसाल है, लेकिन उन्हें भी काफ़ी मश़क्क़त करनी पड़ी थी.

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Interview Boxer Sweety Boora

आप स्पोर्ट्सपर्सन हैं, तो फिटनेस को किस तरह से कनेक्ट करेंगी और कंपेयर करेंगी अन्य देशों के खिलाड़ियों की भी अगर बात करें तो?
विदेशी खिलाड़ियों के मूवमेंट्स अच्छे होते हैं, वो देखने में फिट लगते हैं, जबकि हमारा स्टेमिना उनसे बेहतर होता है.
उनका शेड्यूल हमसे बहुत अलग होता है. आजकल गेम से लेकर फिटनेस तक हर चीज़ टेक्नीकल हो गई है. अब हर प्लेयर टेक्नीक समझता है या समझना चाहता है और उस टेक्नीक को इंप्लीमेंट करने के लिए फिटनेस बेहद ज़रूरी है.
हमारे यहां खाने-पीने से लेकर फिटनेस ट्रेनिंग तक में जानकारी की बहुत कमी है. हमें ख़ुद पता नहीं होता कि क्या खाना सही है, कैसी ट्रेनिंग ज़रूरी है, जबकि विदेशों खिलाड़ियों को पूरी जानकारी रहती है. बस, यही फ़र्क़ है, वरना हम फिटनेस लेवल हमारा भी उतना ही होता है.

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Interview Boxer Sweety Boora

आप क्या ख़ास करती हैं फिट रहने के लिए?
जैसाकि मैंने पहले भी बताया कि हमारा स्टेमिना ज़्यादा होता है, हम मेहनत भी ज़्यादा करते हैं, बस डायट का गायडेंस मिल जाए, तो और बेहतर हो सकता है फिटनेस का स्तर, जिससे रिज़ल्ट और बेहतर होंगे.
मेरी समस्या यह है कि मैं डायट सही नहीं लेती हूं. जितनी ज़रूरी है उससे कम डायट लेती हूं, लेकिन अभी मैंने शेड्यूल टाइट किया है. डायटिशियन के निर्देशानुसार खाती हूं. स्पीड ट्रेनिंग, फिटनेस ट्रेनिंग, पावर ट्रेनिंग सब करती हूं. दिन में 3 बार ट्रेनिंग होती है. सुबह 6.30, फिर 11 बजे और 4.30 बजे.
किसी भी फील्ड में आगे बढ़ने के लिए मेहनत बहुत ज़रूरी है. कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है और अपने सपनों को पूरा करने के लिए जुनून की हद तक जाना पड़ता है.

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Interview Boxer Sweety Boora

फ्री टाइम में क्या करना पसंद है?
मैं भजन सुनती हूं. जी हां, आपको अजीब लगेगा, लेकिन भजन से मुझे मानसिक शांति मिलती है.
मैं ड्रॉइंग भी करती हूं और कविताएं भी लिखती हूं. क्रिएटिविटी आपको फोक्स्ड रखने में मदद करती है.
जहां तक मेरी हॉबीज़ की बात है, तो वैंपायर डायरीज़ देखती हूं, जो मुझे बेहद पसंद है.

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Interview Boxer Sweety Boora

एक खिलाड़ी के लिए शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मेंटल फिटनेस भी उतनी ही ज़रूरी होती है, तो आप स्ट्रेस फ्री रहने के लिए क्या करती हैं?
जब भी अपसेट हो जाती हूं, तो अकेले में ज़ोर-ज़ोर से भजन गाती हूं. इससे मेरा सारा तनाव छू मंतर हो जाता है.

आगे की क्या प्लानिंग है?
एशियन चैंयपियनशिप है, कॉमनवेल्थ गेम्स होंगे, तो उनकी तैयारियों में जुटी हूं, बहुत मेहनत कर रही हूं, ताकि देश के लिए मेडल्स ला सकूं.

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Interview Boxer Sweety Boora

अपने फैंस को कुछ कहना चाहेंगी?
यही कहूंगी कि चाहे जो भी फील्ड हो, मंज़िल पर नज़र रखो, मेहनत करो. जो भी करो, मन से करो. लोग भले ही मज़ाक उड़ाएं, उन पर ध्यान मत दो. मेरा भी उड़ाते थे, मेरे पापा का भी, लेकिन अब वही लोग बहुत प्यार और सम्मान से पेश आते हैं. अपने जुनून को जीयो, कायम रखो, सफलता अपने आप मिलेगी.

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Watch me live now on janta news….

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– गीता शर्मा

जन्मदिन पर विशेष: जानिए नरेंद्र मोदी से जुड़ी ये दिलचस्प बातें! (Happy Birthday: Interesting Facts About Narendra Modi)

जन्मदिन पर विशेष: जानिए नरेंद्र मोदी

 

जन्मदिन पर विशेष: जानिए नरेंद्र मोदी

ख़्वाब तो हम सभी देखते हैं, लेकिन उन्हें शिद्दत के साथ पूरा करने का जज़्बा कम ही लोग दिखा पाते हैं. बेपरवाह होकर स़िर्फ अपने लक्ष्य पर नज़र बनाए रखने की कला भी सभी में नहीं होती, विरोधियों की बातों का जवाब अपने काम से देने में भी हर कोई माहिर नहीं होता… जिस शख़्स में ये तमाम ख़ूबियां होती हैं, फिर वो साधारण कहां रह जाता है? ऐसे ही असाधारण व्यक्तित्व के धनी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हैं, जिनके जन्मदिन पर हम उन्हें सलाम कर रहे हैं.

  • 17 सितंबर 1950 को गुजरात में जन्मे नरेंद्र मोदी आज पूरी दुनिया की आंखों का तारा बन चुके हैं. दुनिया का बड़े से बड़ा शख़्स उनके विचारों, उनकी कूटनीति और उनके काम करने के अंदाज़ का कायल हो चुका है.
  • 2014 के लोकसभा चुनाव में 282 सीटें जीतकर अभूतपूर्व सफलता हासिल करने का करिश्मा इस करिश्माई नेता ने ही किया और आज भारत की दुनिया में जो साख बनी है, उसका श्रेय भी इन्हीं को जाता है. बेबाक, बेधड़क और देशहित में बोल्ड निर्णय लेने का जिगर भी नरेंद्र मोदी के पास ही है यह उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी जैसे निर्णय लेकर साफ़ दिखा दिया है.
आइए उनके जन्मदिन पर उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं-
  • नरेंद्र मोदी हमेशा अपने हस्ताक्षर हिंदी में ही करते हैं, फिर चाहे वो सरकारी दस्तावेज़ हों या कोई और ईवेंट. हिंदी भाषा से उन्हें कितना प्रेम है, यह भी किसी से छिपा नहीं है और वो गर्व के साथ हिंदी का प्रयोग अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर करते हैं.
  • छोटी उम्र में ही नरेंद्र मोदी ने संन्यासी जीवन का अनुभव ले लिया था. कुछ वर्षों तक वो पहाड़ों और जंगलों में संन्यासी के तौर पर रहे.
  • अपने गांव में नदी के किनारे उन्होंने मगरमच्छ से भी लोहा ले लिया था और उससे लड़कर अपने बुलंद हौसले छोटी उम्र में ही दिखा दिए थे.
  • शायद कम ही लोग जानते हैं कि नरेंद्र मोदी पोलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रैजुएट हैं.
  • मोदीजी उन चार लोगों में से एक हैं, जिन्हें ट्विटर पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे फॉलो करते हैं.

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  • मोदीजी टेक्नोलॉजी को बेहद अच्छी तरह समझते हैं और यही वजह है कि उसका इस्तेमाल भी ख़ूब करते हैं. सेल्फी का शौक उन्हें भी है और लोगों के इस क्रेज़ को अच्छे कामों के लिए किस तरह से इस्तेमाल करना है, यह भी वो बख़ूबी जानते हैं. सेल्फी विद डॉटर की सफलता इसी का एक उदाहरण है.
  • सख़्त निर्णय लेनेवाला यह व्यक्ति कवि की कोमल भावनाएं भी रखता है. जी हां, मोदीजी कविताएं भी लिखते हैं.
  • वो कभी छुट्टी नहीं लेते, यहां तक कि 13 वर्षों के गुजरात के मुख्यमंत्री के अपने कार्यकाल में भी उन्होंने कोई छुट्टी नहीं ली थी.

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  • उन्हें फैशन आयकॉन के तौर पर भी लोग फॉलो करते हैं, क्योंकि उनका व्यक्तित्व इतना आकर्षक है कि भले ही वो ख़ुद को फैशन फ्रीक न मानें, लेकिन मीडिया से लेकर आम जनता तक उनके पहनावे पर ख़ासा ध्यान देती है.
  • 2014 के चुनाव से पहले तक उनके मैरिटल स्टेटस के बारे में किसी को नहीं पता था, लेकिन उसके बाद यह बात सामने आई कि टीनएज में ही उनकी शादी हुई थी, लेकिन उन्होंने अपनी पत्नी को आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया और ख़ुद संन्यासी जीवन की ओर अग्रसर हो गए.
  • मेरी सहेली की ओर से उन्हें जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं!