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रियो पर एक नज़र…

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साक्षी-सिंधु की अविस्मरणीय उपलब्धियों के लिए 28 वां ओलिंपिक सदा याद किया जाएगा. ब्राजील की राजधानी रियो में 28वें ओलिंपिक का समापन शानदार ढंग से किया गया. साथ ही इस देश ने यह भी दिखा दिया कि तमाम उतार-चढ़ाव, समस्याओं व दिक़्क़तों के बावजूद उसने इस खेल महाकुंभ की बेहतरीन तरी़के से मेजबानी की.

 

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इस ओलिंपिक में कई कीर्तिमान बने, तो कई भ्रम टूटे भी. एक नज़र शिखर व सिफ़र तक के सफ़र पर…

जमैका के स्प्रिंटर उसेन बोल्ट ने अपने 21 साल के सफ़र को गोल्डन ट्रिपल-ट्रिपल यानी लगातार दो ओलिंपिक्स में तिकड़ी मेडल हासिल करके बाय-बाय कहा.
अमेरिकी स्विमर माइकल फेल्प्स ने 28 मेडल्स, जिसमें 23 गोल्ड हैं, के साथ अपने करियर को विराम दिया.
जहां साउथ अफ्रीका के वायडे वान नीकर्क ने 400 मीटर दौड़ में 17 साल से चला आ रहा माइकल जॉनसन का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा, वहीं
इथियोपियाई की अलमाज अयाना ने दस हज़ार मीटर दौड़ 29.17.45 सेकंड में पूरा करके चुनच्या वांग का 23 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त किया.

भारत की सराहनीय कोशिशें…

भारत की साक्षी मलिक रेसलिंग में, तो बैडमिंटन में पी. वी. सिंधु रियो की शाइनिंग स्टार रहीं. इनके अलावा ऐसे कई खिलाड़ी भी रहे, जिन्होंने मेडल नहीं जीता, पर उनका प्रदर्शन लाजवाब रहा.

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अदिती अशोक- 18 साल की अदिती ने विमिंस गोल्फ में एक नई आशा जगाई है.

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दीपा करमाकर- जिमनास्टिक्स में क्वॉलिफाई किया और फाइनल में भी पहुंचीं.

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अभिनव ब्रिंदा- राइफल इवेंट में महज 0.5 के अंतर से मेडल चूके, पर अपना बेस्ट दिया.

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आर्चर अतनु दास- प्री क्वॉर्टर से आगे नहीं बढ़ पाए, पर अपने शानदार प्रदर्शन से अपनी पहचान बनाई.

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ललिता बाबर- 32 साल बाद ओलिंपिक्स ट्रैक इवेंट के फाइनल में पहुंचनेवाली पहली भारतीय महिला होने का गौरव हासिल किया.

– ऊषा गुप्ता