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क्या है सोलह श्रृंगार का हेल्थ कनेक्शन? (Health Connection Of Solah Shringar)

क्या आपको पता है कि आप जो सोलह श्रृंगार (Solah Shringar) करती हैं, वो न स़िर्फ आपकी ख़ूबसूरती में चार चांद लगाते हैं, बल्कि आपकी सेहत (Health) को भी दुरुस्त रखते हैं. जी हां, कौन-कौन-से हैं ये सोलह श्रृंगार और क्या हैं उनके हेल्थ कनेक्शन (Health Connection)? आइए देखते हैं.

Solah Shringar

1. बिंदी

–    भौंहों के बीच में माथे पर महिलाएं जहां बिंदी लगाती हैं, उस स्थान को आज्ञा चक्र कहते हैं. आयुर्वेद के अनुसार यहां बिंदी लगाने से मन शांत रहता है, जिससे तनाव नहीं होता.

–     एक्युप्रेशर के अनुसार, सिरदर्द होने पर यहां थोड़ी देर प्रेस करने से सिरदर्द से राहत मिलती है. जो महिलाएं रोज़ाना बिंदी लगाती हैं, वो एक तरह से सुबह-सुबह इस प्रेशर पॉइंट को मसाज देती हैं, जिससे उन्हें बाकी लोगों के मुक़ाबले सिरदर्द कम होता है.

–     साइनस के दर्द में भी बिंदी आपको राहत दिलाती है. इस जगह पर मसाज करने से नाक के आस-पास ब्लड सर्कुलेशन अच्छी तरह होता है, जिससे साइनस के दर्द और सूजन दोनों में राहत मिलती है.

–     बिंदी लगाते व़क्त महिलाएं अगर थोड़ी देर उसे इधर-उधर ठीक करने में समय लगाती हैं, उससे माथे की मसल्स फ्लेक्सिबल व मज़बूत होती हैं, जो झुर्रियां पड़ने से रोकती हैं.

–     बिंदी के अलावा महिलाएं चंदन, टीका, हल्दी, कुमकुम आदि लगाती हैं, जो काफ़ी उपयोगी साबित होता है. रात को सोने से पहले अगर इस स्थान पर चंदन या हल्दी का टीका लगाएं, तो नींद अच्छी आती है. जिन लोगों को अनिद्रा की समस्या है, उनके लिए यह काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है.

–     माथे और आंखों की नसों का गहरा कनेक्शन होता है. सुप्राट्रोक्लियर नामक नर्व भी यहां से गुज़रती है, जो फ्रंटल नर्व से जुड़ी है. यह आंख की सभी मसल्स से जुड़ी है, इसीलिए यहां मसाज करने से आंखों की रोशनी भी बेहतर होती है और आंखें भी स्वस्थ रहती हैं.

2. सिंदूर

–    सिंदूर के बिना सोलह शृंगार अधूरा माना जाता है.  हल्दी, चूने और पारे से बने सिंदूर में कई औषधीय गुण मौजूद हैं.

–     हल्दी एक बेहतरीन एंटीबायोटिक है, जो कई तरह के इंफेक्शन्स से बचाता है.

–     मरक्यूरी या पारा ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के साथ-साथ महिलाओं की सेक्स ड्राइव को भी बढ़ाता है. यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है. इसके अलावा मस्तिष्क को शांत रखकर यह तनाव से बचाता है.

–     सिंदूर का लाल रंग रक्त और आग का प्रतीक होता है. यह सिर के बीचोंबीच मांग में इसलिए लगाया जाता है, क्योंकि यहां पिट्यूटरी और पीनियल ग्लैंड्स होते हैं, जो सिंदूर लगाने पर सक्रिय हो जाते हैं. इससे शरीर में पॉज़िटिविटी का संचार होता है.

–     यह महिलाओं में एकाग्रता को बढ़ाता है.

3. मांगटीका

–     यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है.

–     पिट्यूटरी ग्लैंड पर होने के कारण मांगटीका  पॉज़िटिविटी को आकर्षित करता है.

–     आज्ञाचक्र पर होने के कारण यह आपको अपनी भावनाओं को कंट्रोल करने में मदद करता है.

–     यह महिलाओं को एकाग्रचित्त होने में मदद करता है.

4. काजल

–     काजल आंखों की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के साथ-साथ आंखों की रोशनी को भी बढ़ाता है.

–     काजल सूरज की हानिकारक किरणों से आंखों की रक्षा करता है.

–     यह आंखों को हाइड्रेटेड रखता है, जिससे ड्राई आईज़ की समस्या नहीं होती.

–     यह रतौंधी और मोतियाबिंद जैसी आंखों की समस्याओं में काफ़ी कारगर साबित होता है.

–     काजल में मौजूद कपूर आंखों को ठंडक प्रदान करता है. आंखों कोतनाव से भी राहत दिलाता है.

–     काजल में मौजूद घी आंखों के डार्क सर्कल्स को दूर करने में मदद करता है.

–     यह आंखों की थकान, जलन और खुजली को दूर करने में भी काफ़ी मदद करता है.

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Solah Shringar
5. नथ/ नोज़ रिंग

–     ज़्यादातर महिलाएं नथ या नोज़ रिंग बाईं तरफ़ पहनती हैं. दरअसल, ऐसा माना जाता है कि नाक के इस हिस्से में छेद करके नोज़ रिंग या नोज़ पिन पहनने से पीरियड्स के दौरान होनेवाले दर्द से राहत मिलती है.

–     बाईं नासिका की नर्व्स महिलाओं के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन से जुड़ी होती हैं, इसलिए उन्हें डिलीवरी के दौरान होनेवाला लेबर पेन भी कम होता है.

–     यह ब्रेन की वेवलेंथ्स को कंट्रोल करता है, जिससे इनको सम्मोहित करना आसान नहीं होता.

6. झुमके/ ईयररिंग्स

–     ईयररिंग्स या झुमके हमारे शरीर पर एक्युपंक्चर का काम करते हैं.

–     कान की ईयरलोब में कई एक्युप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जिन्हें मसाज करने से दिमाग़ तेज़ होता है और एकाग्रता भी बढ़ती है.

–     दाएं कान से होकर गुज़रनेवाली नर्व किडनी, ब्रेन और सर्विक्स से जुड़ी होती है. यहां सही दबाव बनाया जाए, तो किडनी और ब्लैडर हमेशा हेल्दी रहते हैं.

7. मंगलसूत्र/ हार

–     मंगलसूत्र यानी पवित्र धागे की हिंदू धर्म में बहुत मान्यता है. आयुर्वेद में भी इसका ज़िक्र है कि सोना हेल्दी हार्ट के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद है, इसीलिए मंगलसूत्र सोने के बने होते हैं.

–     हृदय के पास होने के कारण यह उसकी फंक्शनिंग में मदद करता है.

–     मंगलसूत्र पहननेवाली महिलाओं का इम्यून सिस्टम मज़बूत रहता है.

–     यह रक्तसंचार को बेहतर बनाता है, जिससे महिलाएं एनर्जेटिक बनी रहती हैं.

–     साथ ही यह ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करता है.

–     महिलाओं के शरीर में मौजूद सूर्य नाड़ी को उत्तेजित करता है, जिससे उसमें मौजूद ऊर्जा का संचार होता है.

8. मेहंदी

–     यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में भी मदद करती है.

–     हाथों की गहरी मेहंदी न स़िर्फ पिया के प्यार की पहचान है, बल्कि सेहत के लिए भी काफ़ी फ़ायदेमंद है.

–     शादी या किसी फंक्शन के व़क्त महिलाएं काफ़ी स्ट्रेस में और नर्वस रहती हैं, इसलिए ऐसे मौक़ों पर मेहंदी लगाई जाती है, ताकि इसके कूलिंग इफेक्ट से उनकी नर्वसनेस और स्ट्रेस कम हो जाए.

–     इसके अलावा सही ब्लड सर्कुलेशन में भी यह मदद करती है.

–     तापमान नियंत्रित रहने से महिलाओं को सिरदर्द और बुख़ार की शिकायत नहीं होती.

–     हाथों-पैरों की मेहंदी नर्व्स को शांत रखती है, जिससे महिलाओं को तनाव कम होता है.

–     अपने एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह छोटी-मोटी खरोंच होने या कटने-जलने पर सेप्टिक होने से बचाती है और घाव को जल्दी ठीक होने में मदद करती है.

9. बाजूबंद

–     यह ब्लड सर्कुलेशन में मदद करता है.

–     साथ ही इसे पहनने से शरीर की ऊर्जा बनी रहती है.

–     सोने से बने बाजूबंद से महिलाओं को इसके सभी गुणों का लाभ मिलता है.

10. चूड़ियां/कंगन

–     पुराने ज़माने से ही हमारे देश में कांच की चूड़ियां पहनने का चलन रहा है, हालांकि आज प्लास्टिक, मेटल और भी कई मटेरियल्स की चूड़ियां और कड़े बनने लगे हैं, पर कांच की चूड़ियों के हेल्थ बेनीफिट ज़्यादा हैं.

–     कांच अपने सोखनेवाले गुण के कारण आसपास के माहौल से पॉज़िटिविटी को आकर्षित करके पहननेवाले तक पहुंचाता है.

–     चूड़ियों की आवाज़ से निगेटिव एनर्जी महिलाओं को अधिक प्रभावित नहीं करती.

–     चूड़ियां और कंगन महिलाओं के ब्लड सर्कुलेशन को नियंत्रित रखने में मदद करती हैं.

–     गोलाकार होने के कारण एनर्जी शरीर से बाहर निकल नहीं पाती और टकराकर वापस शरीर में चली आती है, जिससे जल्द थकान नहीं होती.

–     हाथों में लगातार रगड़ते रहने से हड्डियां मज़बूत होती हैं.

–     बाकी धातुओं की तुलना में कांच की चूड़ियों में इमोशनल बैलेंस को बनाए रखने की क्षमता बेहतर होती है.

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Solah Shringar
11. हाथफूल/अंगूठियां

–     रिंग फिंगर की नर्व मस्तिष्क से होकर हृदय तक जाती है, इसलिए अंगूठी इसी उंगली में पहनाई जाती है, ताकि दोनों दिल से जुड़े रहें.

–     रिंग से उंगली में लगातार घर्षण होता है, जो हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में काफ़ी मदद करता है.

–     रिंग्स ब्लड प्यूरिफिकेशन और सर्कुलेशन में भी मदद करती हैं.

–     मध्यमा उंगली में रिंग नहीं पहननी चाहिए, इससे पहननेवाले को निर्णय लेने में दुविधा होती है.

12. करधनी/ कमरबंद

–     यह दुल्हन की ख़ूबसूरती को जितना निखारती है, उतना ही उन्हें फिट भी बनाए रखती है. यही वजह है कि कुछ समाज में महिलाएं रोज़ाना करधनी पहनती हैं.

–     ज़्यादातर करधनी चांदी की होती है, जो अपने औषधीय गुणों के कारण काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होती है.

–     कमर और लोअर एब्डोमन में होने के कारण यह महिलाओं के पीरियड्स को नियमित बनाए रखने में मदद करती है.

–     अपनी पेनकिलर ख़ूबी के कारण चांदी की करधनी पहननेवाली महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होनेवाले दर्द और मरोड़ से राहत मिलती है.

–     करधनी पहननेवाली महिलाओं का बेली फैट नहीं बढ़ता, जिससे वो स्लिम-ट्रिम बनी रहती हैं.

–     इतना ही नहीं, यह शरीर में फैट्स को बढ़ने से भी रोकती है.

13. पायल

–     आपने शायद ही इस ओर ध्यान दिया होगा कि चांदी की पायल पेनकिलर का भी काम कर सकती है. जी हां, चांदी शरीर में ऊर्जा के संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

–    पैरों में होने के कारण चलने-फिरने पर होनेवाली पैरों की थकान को दूर करके यह दर्दनिवारक का काम करती है.

–    चांदी में एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज़ होती हैं, जो कोल्ड और फ्लू के वायरस से बचाती है. साथ ही इसके कारण घाव तेज़ी से भरते हैं.

–     यह जोड़ों के दर्द से भी काफ़ी राहत दिलाती है.

–     यह त्वचा में लचीलेपन को भी बढ़ाती है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं कम होती हैं.

14. बिछिया/ टो रिंग

–     शादी के व़क्त पैर की तर्जनी में बिछिया पहनना भी एक रस्म है. दरअसल, बिछिया इसी उंगली में इसलिए पहनी जाती है, क्योंकि इसकी नसें सीधे गर्भाशय से जुड़ी होती हैं.

–     बिछिया पहनने से इस उंगली में जो घर्षण होता है, उससे पीरियड्स नियमित रहते हैं. यूं कहें, तो पीरियड्स नियमित रखने का यह एक नेचुरल तरीक़ा है.

–     दोनों पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनने से फर्टिलिटी और रिप्रोडक्टिव हेल्थ बैलेंस रहती है.

–     बिछिया गर्भाशय को भी स्वस्थ रखती है, ताकि महिलाओं को गर्भधारण में कोई समस्या न आए.

–     आयुर्वेद भी इस बात पर ज़ोर देता है कि महिलाओं को पैर में चांदी की बिछिया पहननी चाहिए, ताकि उनमें पॉज़िटिव एनर्जी का संचार होता रहे.

15. परफ्यूम

–    इसकी ख़ुशबू दिनभर फ्रेश फील कराती है, जिससे आप नर्वस फील नहीं करतीं.

–     ख़ुशबू मूड को बेहतर बनाने में भी मदद करती है, जिससे महिलाओं का कॉन्फिडेंस बना रहता है.

–     मूड बेहतर रहने से तनाव व डिप्रेशन नहीं आता, जो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी काफ़ी फ़ायदेमंद है.

16. गजरा/हेयर एक्सेसरीज़

–     गजरा या फूल लगाने से महिलाएं फ्रेश फील करती हैं.

–     फूलों की ख़ुशबू से उनका मूड अच्छा रहता है.

–     जैसमीन के गजरे को सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है.

–     गजरे की ख़ुशबू पार्टनर को आकर्षित करती है.

–     सोने-चांदी की हेयर एक्सेसरीज़ अपने गुणों के कारण महिलाओं को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं.

– सुनीता सिंह

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सेक्सुअल हैरेसमेंट से बचने के लिए अपनाएं ये सेफ्टी गाइडलाइन्स (Safety Guidelines For Sexual Harassment)

पूरे देश में सेक्सुअल हैरेसमेंट (Sexual Harassment) के ख़िलाफ़ मुहिम चल पड़ी है. ऐसे में यह जानना बेहद ज़रूरी है कि घर, बाहर या फिर वर्कप्लेस पर अपनी सेफ्टी को लेकर महिलाएं कितनी सतर्क और जागरूक हैं? क्या उन्हें क़ानून की सही जानकारी है? अपने साथ-साथ बच्चों की सेफ्टी के प्रति भी कितनी जागरूक हैं वो? इन्हीं विषयों पर महिलाओं को जागरूक करने के लिए हम लेकर आए हैं सेक्सुअल हैरेसमेंट से बचाव के बेस्ट सेफ्टी टिप्स (Best Safety Tips) और गाइडलाइन्स.

Sexual Harassment

क्या है सेक्सुअल हैरेसमेंट?

किसी भी तरह के ग़लत इशारे करना, ग़लत व्यवहार या टिप्पणी करना, ज़बर्दस्ती शारीरिक संबंध बनाना या बनाने के लिए कहना, शारीरिक बनावट या कपड़ों पर टिप्पणी करना, कामुक साहित्य दिखाना आदि सेक्सुअल हैरेसमेंट का हिस्सा हैं.

हर महिला को पता हो यह क़ानून

साल 1997 में सुप्रीम कोर्ट ने वर्कप्लेस पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशाखा गाइडलाइन्स के नाम से 13 गाइडलाइन्स जारी की थीं, जिन्हें साल 2013 में क़ानून का रूप दे दिया गया. अब ये गाइडलाइन्स सेक्सुअल हैरेसमेंट ऑफ वुमेन एट वर्कप्लेस एक्ट, 2013 का रूप ले चुकी हैं. इस एक्ट में सेक्सुअल हैरेसमेंट को परिभाषित किया गया है, साथ ही उससे बचाव और उत्पीड़न की स्थिति में होनेवाली कार्रवाई का उल्लेख किया गया है.

– सबसे ज़रूरी बात, जो हर महिला को पता होनी चाहिए, वो यह कि जिस भी संस्थान में 10 या 10 से ज़्यादा कर्मचारी काम करते हैं, वहां एम्प्लॉयर को इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी (आईसीसी) बनाना अनिवार्य है, जिसमें 50% महिलाएं शामिल हों.

–     इसके अलावा हर ज़िले में लोकल कंप्लेंट्स कमिटी हो, ताकि जिन कर्मचारियों के संस्थान में आईसीसी नहीं है, वो यहां शिकायत दर्ज कर सकें.

वर्कप्लेस पर सेफ्टी के लिए क्या करें महिलाएं?

आजकल शायद ही ऐसा कोई घर हो, जहां कोई महिला कामकाजी न हो. घर से बाहर निकलकर काम करने के लिए उपयुक्त माहौल मिले, इसके लिए उन्हें ही सतर्क और जागरूक रहना होगा.

–     अगर आपको लगता है कि आपके वर्कप्लेस पर कुछ पुरुषों के कारण या किसी एक व्यक्ति के कारण आप असहज महसूस कर रही हैं, तो सबसे पहले उसे ख़ुद आगाह करें.

–     अगर वो फिर भी अपनी हरकतों से बाज़ न आए, तो ऑफिस की इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी (आईसीसी) में शिकायत करने से न हिचकिचाएं.

–     अगर ऑफिस में आईसीसी नहीं है, तो मैनेजमेंट में उसकी शिकायत करें या फिर आप लोकल कंप्लेंट्स कमिटी में भी शिकायत कर सकती हैं.

–     अगर मैनेजमेंट उसी की तरफ़दारी करे, तो ऐसी जगह काम करने से बेहतर होगा कि आप कंपनी छोड़ दें.

–     अगर कोई आपको ग़लत मैसेज भेजता है, तो उसका स्क्रीनशॉट लेकर रख लें, ताकि शिकायत करते व़क्त सबूत के तौर पर दे सकें.

–    फोन कॉल्स की रिकॉर्डिंग करके भी आप उस व्यक्ति के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा सकती हैं.

–     अपने ऑफिस रूटीन के बारे में पैरेंट्स या पार्टनर को हमेशा बताकर रखें, ताकि कभी देर-सबेर होने पर वो पूछताछ कर सकें.

–     अपने ऑफिस और सहकर्मियों के मोबाइल नंबर पैरेंट्स या पार्टनर के पास भी सेव करके रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर संपर्क किया जा सके.

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Sexual Harassment
घर से बाहर सेफ्टी का यूं रखें ख़्याल

–     अजनबी लोगों पर किसी भी तरह का भरोसा न करें. ऐसे लोगों के साथ ट्रैवल भी न करें.

–     जब भी अकेले हों, सावधान रहें. आपकी बॉडी लैंग्वेज और चाल में भी कॉन्फिडेंस होना चाहिए.

     अगर रात को ऑफिस से निकलने में देरी हो जाती है, तो ट्रैवलिंग के लिए हाई हील्स न पहनें. ऐसे जूते या चप्पल पहनें, जिनमें मुसीबत के व़क्त भाग सकें.

–     अगर रात को ऑफिस या अपनी बिल्डिंग में लिफ्ट में जाना सेफ नहीं लगता, तो सीढ़ियों से जाएं.

–     कभी किसी अनजान से लिफ्ट न लें.

–     अकेले ऑटो या टैक्सी लेने की बजाय शेयरिंग में जाएं, पर अगर आपको ज़रा भी गाड़ी का माहौल संदिग्ध लगे, तो उसमें बिल्कुल न जाएं.

–     ट्रैवलिंग के दौरान किसी अजनबी या सहयात्री से अपना फोन नंबर या कोई और डिटेल शेयर न करें.

–     रास्ते में पैदल चलते हुए म्यूज़िक सुनना है, तो धीमी आवाज़ पर सुनें, ताकि अगल-बगल में हो रही एक्टीविटीज़ के बारे में पता चलता रहे.

–     अगर रात को देर से ट्रैवल करती हैं, तो अपने पर्स में हमेशा पेपर स्प्रे रखें. अगर पेपर स्प्रे नहीं हैं, तो इमर्जेंसी में आप डियो का भी इस्तेमाल कर सकती हैं.

–     दिन हो या रात, अगर कोई आपका पीछा कर रहा है, तो अपना रास्ता बदल दें और फोन करके तुरंत अपनों को सूचित करें.

–     अपने मोबाइल फोन की बैटरी हमेशा चार्ज रखें, ताकि इमर्जेंसी में संपर्क साधने में द़िक्क़त न हो.

–     हो सके तो पर्सनल सेफ्टी से जुड़े कुछ गुर सीख लें.

–     घर के अंदर भी अगर किसी रिश्तेदार की हरकतें आपको आपत्तिजनक लगती हैं, तो तुरंत पैरेंट्स या पार्टनर को बताएं.

सेक्सुअल हैरेसमेंट क़ानून में है बदलाव की ज़रूरत

–    सबसे पहले तो यह क़ानून केवल महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया है, जबकि आजकल पुरुषों के उत्पीड़न की ख़बरें समाचार-पत्रों की सुर्ख़ियां बन रही हैं. इसमें पुरुषों की सुरक्षा को भी शामिल करना चाहिए.

–    सेक्सुअल हैरेसमेंट की परिभाषा को विस्तृत करने की ज़रूरत है, क्योंकि बदलती टेक्नोलॉजी के इस दौर में हैरेसमेंट के कई नए-नए रूप देखने को मिल रहे हैं.

–     आज भी बहुत-से संस्थानों में आईसीसी का गठन नहीं किया गया है, लेकिन उसके बारे में पूछनेवाला कोई नहीं है.

–     सोशल मीडिया आज एक प्लेटफॉर्म की तरह काम कर रहा है, ऐसे में ज़रूरी है कि सरकार की आईटी सेल वहां होनेवाली गतिविधियों पर नज़र रखकर मामले को सही डिपार्टमेंट में पहुंचाए, ताकि मामले की सही जांच हो सके.

–     लोकल कंप्लेंट्स कमिटी के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाई जाए. उसे मज़बूत बनाने के लिए कड़े प्रावधान बनाए जाएं.

–     इसके तहत महिलाओं को छूट दी गई है कि वो कभी भी अपने ख़िलाफ़ होनेवाले अन्याय के लिए आवाज़ उठा सकती हैं. इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन इन मामलों में देरी के कारण अपराध साबित कर पाना पुलिस के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है. इसके लिए भी क़ानून में कोई प्रावधान होना चाहिए.

– अनीता सिंह     

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