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सलमान खान से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक यूं सेलिब्रेट कर रहे हैं रक्षाबंधन (Bollywood Celebrates Rakshabandhan)

रक्षाबंधन (Rakshabandhan) भाई बहन के प्यार और विश्वास का सबसे प्यारा त्योहार है… बॉलीवुड (Bollywood) भी इस त्योहार को काफ़ी दिल से celebrate करता है… आप भी देखिए पिक्चर्स जो सिलेब्रिटीज़ ने सोशल मीडिया पर अपनी बहन के साथ रखी बंधवाते हुए शेयर की

सलमान खान से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक यूं सेलिब्रेट कर रहे हैं रक्षाबंधन (Bollywood Celebrates Rakshabandhan)

सलमान खान अर्पिता से रखी बंधवाते हुए

प्रियंका चोपड़ा अपने भाई के साथ

Priyanka Chopra With Her Brother

सैफ़ अली खान बहन सोहा के साथ

रितिक रोशन अपनी बहन के साथ

 

कार्तिक आर्यन अपनी बहन के साथ

Kartik Aryan with his sister

सारा और इब्राहिम अली खान

Sarah and Ibrahim Ali Khan

भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस से 40% अधिक मौतें… (Domestic Violence In India)

Domestic Violence
भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस से 40% अधिक मौतें… (Domestic Violence In India)

बेटी होना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन हमारी सामाजिक सोच ने इसे भी किसी अपराध से कम नहीं बना रखा है… बेटियों को हर बात पर हिदायतें दी जाती हैं, हर पल उसे एहसास करवाया जाता है कि ये जो भी तुम पहन रही हो, खा रही हो, हंस रही हो, बोल रही हो… सब मेहरबानी है हमारी… घरों में इसी सोच के साथ उसका पालन-पोषण होता है कि एक दिन शादी हो जाएगी और ज़िम्मेदारी ख़त्म… ससुराल में यही जताया जाता है कि इज़्ज़त तभी मिलेगी, जब पैसा लाओगी या हमारे इशारों पर नाचोगी… इन सबके बीच एक औरत पिसती है, घुटती है और दम भी तोड़ देती है… भारत के घरेलू हिंसा व उससे जुड़े मृत्यु के आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं…

वो कहते हैं तुम आज़ाद हो… तुम्हें बोलने की, मुस्कुराने की थोड़ी छूट दे दी है हमने… वो कहते हैं अब तो तुम ख़ुश हो न… तुम्हें आज सखियों के संग बाहर जाने की इजाज़त दे दी है… वो कहते हैं अपनी आज़ादी का नाजायज़ फ़ायदा मत उठाओ… कॉलेज से सीधे घर आ जाओ… वो कहते हैं शर्म औरत का गहना है, ज़ोर से मत हंसो… नज़रें झुकाकर चलो… वो कहते हैं तुमको पराये घर जाना है… जब चली जाओगी, तब वहां कर लेना अपनी मनमानी… ये कहते हैं, मां-बाप ने कुछ सिखाया नहीं, बस मुफ़्त में पल्ले बांध दिया… ये कहते हैं, इतना अनमोल लड़का था और एक दमड़ी इसके बाप ने नहीं दी… ये कहते हैं, यहां रहना है, तो सब कुछ सहना होगा, वरना अपने घर जा… वो कहते हैं, सब कुछ सहकर वहीं रहना होगा, वापस मत आ… ये कहते हैं पैसे ला या फिर मार खा… वो कहते हैं, अपना घर बसा, समाज में नाक मत कटा… और फिर एक दिन… मैं मौन हो गई… सबकी इज़्ज़त बच गई…!

 

घरेलू हिंसा और भारत…
  • भारत में डोमेस्टिक वॉयलेंस व प्रताड़ना के बाद महिलाओं की मृत्यु की लगभग 40% अधिक आशंका रहती है, बजाय अमेरिका जैसे विकसित देश के… यह ख़तरनाक आंकड़ा एक सर्वे का है.
  • वॉशिंगटन में हुए इस सर्वे का ट्रॉमा डाटा बताता है कि भारत में महिलाओं को चोट लगने के तीन प्रमुख कारण हैं- गिरना, ट्रैफिक एक्सिडेंट्स और डोमेस्टिक वॉयलेंस.
  • 60% भारतीय पुरुष यह मानते हैं कि वो अपनी पत्नियों को प्रताड़ित करते हैं.
  • हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देशों में भारत अब पहले स्थान पर पहुंच चुका है. हालांकि इस सर्वे और इसका सैंपल साइज़ विवादों के घेरे में है और अधिकांश भारतीय यह मानते हैं कि यह सही नहीं है…
  • 2011 में भी एक सर्वे हुआ था, जिसमें यूनाइटेड नेशन्स के सदस्य देशों को शामिल किया गया था, उसमें पहले स्थान पर अफगानिस्तान, दूसरे पर कांगो, तीसरे पर पाकिस्तान था और भारत चौथे स्थान पर था.
  • भारतीय सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि 2007 से लेकर 2016 के बीच महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों में 83% इज़ाफ़ा हुआ है.
  • हालांकि हम यहां बात घरेलू हिंसा की कर रहे हैं, लेकिन ये तमाम आंकड़े समाज की सोच और माइंड सेट को दर्शाते हैं.
  • नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़, प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वॉयलेंस एक्ट के पास होने के बाद से (2005) अब तक लगभग दस लाख से अधिक केसेस फाइल किए गए, जिनमें पति की क्रूरता और दहेज मुख्य कारण हैं.
मानसिकता है मुख्य वजह
  • हमारे समाज में पति को परमेश्‍वर मानने की सीख आज भी अधिकांश परिवारों में दी जाती है.
  • पति और उसकी लंबी उम्र से जुड़े तमाम व्रत-उपवास को इतनी गंभीरता से लिया जाता है कि यदि किसी घर में पत्नी इसे न करे, तो यही समझा जाता है कि उसे अपने पति की फ़िक़्र नहीं.
  • इतनी तकलीफ़ सहकर वो घर और दफ़्तर का रोज़मर्रा का काम भी करती हैं और घर आकर पति के आने का इंतज़ार भी करती हैं. उसकी पूजा करने के बाद ही पानी पीती हैं.
  • यहां कहीं भी यह नहीं सिखाया जाता कि शादी से पहले भी और शादी के बाद भी स्त्री-पुरुष का बराबरी का दर्जा है. दोनों का सम्मान ज़रूरी है.
  • किसी भी पुरुष को शायद ही आज तक घरों में यह सीख व शिक्षा दी जाती हो कि आपको हर महिला का सम्मान करना है और शादी से पहले कभी किसी भी दूल्हे को यह नहीं कहा जाता कि अपनी पत्नी का सम्मान करना.
  • ऐसा इसलिए होता है कि दोनों को समान नहीं समझा जाता. ख़ुद महिलाएं भी ऐसा ही सोचती हैं.
  • व्रत-उपवासवाले दिन वो दिनभर भूखी-प्यासी रहकर ख़ुद को गौरवान्वित महसूस करती हैं कि अब उनके पति की उम्र लंबी हो जाएगी.
  • इसे हमारी परंपरा से जोड़कर देखा जाता है, जबकि यह लिंग भेद का बहुत ही क्रूर स्वरूप है.

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Domestic Violence

कहीं न कहीं लिंग भेद से ही उपजती हैं ये समस्याएं…
  • महिलाओं के ख़िलाफ़ जितने भी अत्याचार होते हैं, चाहे दहेजप्रथा हो, भ्रूण हत्या हो, बलात्कार हो या घरेलू हिंसा… इनकी जड़ लिंग भेद ही है.
  • बेटा-बेटी समान नहीं हैं, यह सोच हमारे ख़ून में रच-बस चुकी है. इतनी अधिक कि जब पति अपनी पत्नी पर हाथ उठाता है, तो उसको यही कहा जाता है कि पति-पत्नी में इस तरह की अनबन सामान्य बात है.
  • यदि कोई स्त्री पलटवार करती है, तो उसे इतनी जल्दी समर्थन नहीं मिलता. उसे हिदायतें ही दी जाती हैं कि अपनी शादी को ख़तरे में न डाले.
  • शादी को ही एक स्त्री के जीवन का सबसे अंतिम लक्ष्य माना जाता है. शादी टूट गई, तो जैसे ज़िंदगी में कुछ बचेगा ही नहीं.
शादी एक सामान्य सामाजिक प्रक्रिया मात्र है…
  • यह सोच अब तक नहीं पनपी है कि शादी को हम सामान्य तरी़के से ले पाएं.
  • जिस तरह ज़िंदगी के अन्य निर्णयों में हमसे भूल हो सकती है, तो शादी में क्यों नहीं?
  • अगर ग़लत इंसान से शादी हो गई है और आपको यह बात समय रहते पता चल गई है, तो झिझक किस बात की?
  • अपने इस एक ग़लत निर्णय का बोझ उम्रभर ढोने से बेहतर है ग़लती को सुधार लिया जाए.
  • पैरेंट्स को भी चाहिए कि अगर शादी में बेटी घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है या दहेज के लिए प्रताड़ित की जा रही है, तो जल्दी ही निर्णय लें, वरना बेटी से ही हाथ धोना पड़ेगा.
  • यही नहीं, यदि शादी के समय भी इस बात का आभास हो रहा हो कि आगे चलकर दहेज के लिए बेटी को परेशान किया जा सकता है, तो बारात लौटाने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए.
  • ग़लत लोगों में, ग़लत रिश्ते में बंधने से बेहतर है बिना रिश्ते के रहना. इतना साहस हर बेटी कर सके, यह पैरेंट्स को ही उन्हें सिखाना होगा.
सिर्फ प्रशासन व सरकार से ही अपेक्षा क्यों?
  • हमारी सबसे बड़ी समस्या यही है कि हम हर समस्या का समाधान सरकार से ही चाहते हैं.
  • अगर घर के बाहर कचरा है, तो सरकार ज़िम्मेदार, अगर घर में राशन कम है, तो भी सरकार ज़िम्मेदार है…
  • जिन समस्याओं के लिए हमारी परवरिश, हमारी मानसिकता व सामाजिक परिवेश ज़िम्मेदार हैं. उनके लिए हमें ही प्रयास करने होंगे. ऐसे में हर बात को क़ानून, प्रशासन व सरकार की ज़िम्मेदारी बताकर अपनी ज़िम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेना जायज़ नहीं है.
  • हम अपने घरों में किस तरह से बच्चों का पालन-पोषण करते हैं, हम अपने अधिकारों व स्वाभिमान के लिए किस तरह से लड़ते हैं… ये तमाम बातें बच्चे देखते व सीखते हैं.
  • बेटियों को शादी के लिए तैयार करने व घरेलू काम में परफेक्ट करने के अलावा आर्थिक रूप से भी मज़बूत करने पर ज़ोर दें, ताकि वो अपने हित में फैसले ले सकें.
  • अक्सर लड़कियां आर्थिक आत्मनिर्भरता न होने की वजह से ही नाकाम शादियों में बनी रहती हैं. पति की मार व प्रताड़ना सहती रहती हैं. बेहतर होगा कि हम बेटियों को आत्मनिर्भर बनाएं और बेटों को सही बात सिखाएं.
  • पत्नी किसी की प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं है, सास-ससुर को भी यह समझना चाहिए कि अगर बेटा घरेलू हिंसा कर रहा है, तो बहू का साथ दें.
  • पर अक्सर दहेज की चाह में सास-ससुर ख़ुद उस हिंसा में शामिल हो जाते हैं, पर वो भूल जाते हैं कि उनकी बेटी भी दूसरे घर जाए और उसके साथ ऐसा व्यवहार हो, तो क्या वो बर्दाश्त करेंगे?
  • ख़ैर, किताबी बातों से कुछ नहीं होगा, जब तक कि समाज की सोच नहीं बदलेगी और समाज हमसे ही बनता है, तो सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी होगी.
बेटों को दें शिक्षा…
  • अब वो समय आ चुका है, जब बेटों को हिदायतें और शिक्षा देनी ज़रूरी है.
  • पत्नी का अलग वजूद होता है, वो भी उतनी ही इंसान है, जितनी आप… तो किस हक से उस पर हाथ उठाते हैं?
  • शादी आपको पत्नी को पीटने का लायसेंस नहीं देती.
  • अगर सम्मान कर नहीं सकते, तो सम्मान की चाह क्यों?
  • शादी से पहले हर पैरेंट्स को अपने बेटों को ये बातें सिखानी चाहिए, लेकिन पैरेंट्स तो तभी सिखाएंगे, जब वो ख़ुद इस बात को समझेंगे व इससे सहमत होंगे.
  • पैरेंट्स की सोच ही नहीं बदलेगी, तो बच्चों की सोच किस तरह विकसित होगी?
  • हालांकि कुछ हद तक बदलाव ज़रूर आया, लेकिन आदर्श स्थिति बनने में अभी लंबा समय है, तब तक बेहतर होगा बेटियों को सक्षम बनाएं और बेटों को बेहतर इंसान बनाएं.

– गीता शर्मा

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होली पर विशेष: क्या है होलिकादहन की पूरी कहानी? (Holi Special: Why Do We Celebrate Holi?)

Holi Special: Why Do We Celebrate Holi

Holi Special: Why Do We Celebrate Holi

होली (Holi) से संबंधित सबसे पॉप्युलर कथा है हिरण्यकश्यप की बहन होलिका व प्रह्लाद की. क्या है यह कथा और क्यों मनाते हैं हम होली, आइए, जानें-

प्राचीन काल में एक बहुत ही अत्याचारी राक्षसराज था- हिरण्यकश्यप, जिसने तपस्या करके ब्रह्मा से वरदान पा लिया कि संसार का कोई भी जीव, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य उसे नहीं मार सकते. न ही वह रात में मरेगा, न दिन में, न पृथ्वी पर, न आकाश में, न घर में, न बाहर और यहां तक कि कोई शस्त्र भी उसे नहीं मार पाएगा.

ऐसा वरदान पाकर वह और भी ज़्यादा अत्याचारी व निरंकुश हो गया था. लेकिन इसी हिरण्यकश्यप के यहां प्रह्लाद जैसा पवित्र आत्मा व ईश्‍वर में अटूट विश्‍वास करनेवाला पुत्र पैदा हुआ. प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था.

हिरण्यकश्यप को यह बिल्कुल पसंद नहीं था कि उसका पुत्र किसी और को पूजे. उसने प्रह्लाद को आदेश दिया कि वह उसके अतिरिक्त किसी अन्य की स्तुति न करे. प्रह्लाद के न मानने पर हिरण्यकश्यप उसे जान से मारने पर उतारू हो गया और उसने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन वो हर बार प्रभु-कृपा से बचता रहा.

ऐसे में हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने एक सुझाव दिया, होलिका को अग्नि से बचने का वरदान था. यानी उसे एक ऐसा आवरण मिला था, जिससे आग उसे जला नहीं सकती थी. हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रह्लाद को आग में जलाकर मारने की योजना बनाई.

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होलिका बालक प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई. लेकिन भगवान की कृपा से होलिका का वह आवरण भक्त प्रह्लाद को मिल गया और उसको कुछ नहीं हुआ. वहीं होलिका जलकर भस्म हो गई.

इसके बाद हिरण्यकश्यप को मारने के लिए भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में खंभे से निकल कर गोधूली बेला यानी सुबह व शाम के समय का संधिकाल, में दरवाज़े की चौखट पर बैठकर हिरण्यकश्यप को अपने नुकीले नाख़ूनों से उसका पेट फाड़कर उसे मार डालते हैं.
नरसिंह न मनुष्य थे, न जानवर, न वो सुबह का समय था, न शाम का, हिरण्यकश्यप को मारते समय न वो अंदर थे, न बाहर और उनके नाख़ून न अस्त्र थे, न शस्त्र.

उसी समय से होली का त्योहार मनाया जाने लगा यानी एक तरह से यह अच्छाई की बुराई पर जीत का संदेश है. व्यक्ति चाहे कितना ही बलशाली क्यों न हो, यदि वो अत्याचार की सीमाएं पार कर जाता है, तो कितने भी वरदान हों, उसे बचा नहीं सकते. बुराई का अंत निश्‍चित है. इसी तरह हमें भी बुरी शक्तियां ही नहीं, अपने मन में पनप रही सारी नकारात्मक भावनाओं को भी होली की अग्नि में दहन कर देना चाहिए और नेकी के मार्ग पर आगे चलना चाहिए.

बर्थडे स्पेशल: कोमल मन और अटल इरादे… जानें अटलजी की ये दिलचस्प बातें… (Birthday Special: Happy Birthday Atal Bihari Vajpayee)

Happy Birthday, Atal Bihari Vajpayee

 Happy Birthday, Atal Bihari Vajpayee

 

बर्थडे स्पेशल: कोमल मन और अटल इरादे… जानें अटलजी  की ये दिलचस्प बातें… (Birthday Special: Happy Birthday Atal Bihari Vajpayee)
मन से कवि और कर्म से राजनेता, जी हां, यही पहचान है अटल बिहारी वाजपेयी की. अटलजी उन चंद राजनेताओं में से एक हैं, जिन्हें अपनी पार्टी के साथ-साथ विपक्षी दल भी उतना ही प्यार करते रहे हैं. उनका क़द इतना बड़ा है कि हर कोई उन्हें अदब और सम्मान की नज़र से देखता है.
– अटलजी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था.
– उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक कवि और स्कूल मास्टर के तौर पर की थी.
– आगे चलकर वो पत्रकारिता से जुड़े और फिर राजनीति में इस सितारे का आगमन हुआ.
– 1939 में वो स्वयंसेवक की तरह आरएसएस में शामिल हुए.
– वो भारत के प्रधानमंत्री भी बने और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने काफ़ी सराहनीय काम किए.
– अटलजी और उनके पिताजी ने एक साथ लॉ की पढ़ाई की, यहां तक कि उन्होंने होस्टल का रूम भी शेयर किया.
– 1957 में उन्होंने अपना पहला लोकसभा इलेक्शन यूपी की दो सीटों से लड़ा, जहां मथुरा में उन्हें हार मिली और बलरामपुर से जीत.
– उनकी वाकशक्ति यानी बोलने की कला व तर्कशक्ति से जवाहरलाल नेहरू भी इतने प्रभावित थे कि उन्होंने बहुत पहले ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि एक दिन अटलजी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे.
– 1977 में वो मोरारजी देसाई मिनिस्ट्री में एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर बने थे और जब वो ऑफिस पहुंचे, तो देखा उनके कैबिन से पंडित नेहरू की तस्वीर गायब थी. इस पर उन्होंने कहा कि उनकी तस्वीर उन्हें वापस चाहिए.
– हिंदी भाषा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान व पहचान दिलाने का श्रेय अटलजी को ही जाता है, UN में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया और वो यूनाइटेड नेशन में हिंदी में भाषण देनेवाले पहले शख़्स बने.
– वो तीन बार भारत के प्रधामंत्री बने- पहली बार 16 मई 1996 को 13 दिनों के लिए, दूसरी बार 19 मार्च 1998 को 13 महीनों के लिए और फिर तीसरी बार 13 अक्टूबर 1999 को पूरे 5 साल के लिए.
– मेरी सहेली की ओर से अटलजी को जन्मदिन की शुभकामनाएं.
Happy Birthday, Atal Bihari Vajpayee
– अटलजी की कविता, जो अक्सर वो गुनगुनाते हैं…
1 गीत नहीं गाता हूँ
बेनकाब चेहरे हैं,
दाग बड़े गहरे हैं,
टूटता तिलस्म, आज सच से भय खाता हूँ ।
गीत नही गाता हूँ ।
लगी कुछ ऐसी नज़र,
बिखरा शीशे सा शहर,
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूँ ।
गीत नहीं गाता हूँ ।
पीठ मे छुरी सा चाँद,
राहु गया रेखा फाँद,
मुक्ति के क्षणों में बार-बार बँध जाता हूँ ।
गीत नहीं गाता हूँ

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2 मेरे प्रभु!
मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना,
ग़ैरों को गले न लगा सकूं,
इतनी रुखाई कभी मत देना.

अपने ख़्वाबों को जीने के लिए जुनून की हद तक जाना ज़रूरी है- बॉक्सर स्वीटी बूरा (Exclusive Interview: World Number 2 Boxer Sweety Boora)

Interview Boxer Sweety Boora

एक ख़ूबसूरत ख़्याल जब पनपता है, तो उसे हक़ीक़त का रूप लेते देखना बेहद सुखद होता है… लेकिन इस सुखद एहसास को जीने की बड़ी क़ीमत भी चुकानी पड़ती है, क्योंकि कोई भी मुक़ाम इतनी आसानी से हासिल नहीं होता और कोई भी ख़्याल हक़ीक़त में इतनी सरलता से तब्दील नहीं होता… इसमें व़क्त तो लगता ही है, साथ ही ज़रूरत होती है बुलंद हौसलों की, जिसमें कठिन संघर्षों का दौर से भी गुज़रना पड़ता है और कई सामाजिक बंदिशों को भी तोड़ना पड़ता है… एक ऐसा ही मुक़ाम हासिल किया है वर्ल्ड नंबर 2 बॉक्सर स्वीटी बूरा ने. अपने नाम ही की तरह बेहद स्वीट और इरादों में बेहद टफ स्वीटी क्या कहती हैं अपने सपनों और संघर्षों के बारे में, उन्हीं से जानते हैं-

Interview Boxer Sweety Boora

बॉक्सिंग, जिसे आज भी हमारे समाज में मर्दों का खेल ही माना जाता है, आपकी इसमें रुचि कैसे जागी?
स्पोर्ट्स में मुझे बचपन से ही दिलचस्पी थी. मैं पहले कबड्डी खेला करती थी. स्टेट के लिए सिलेक्ट भी हुई थी, पर फिर भी कहीं न कहीं यह एक टीम गेम था और मेरे पापा हमेशा मुझे कहते थे कि तुझे इंडिविज़ुअल गेम पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि मैं जब भी कुछ ग़लत होते देखती थी, तो भले ही ज़ुबान से कुछ न बोलूं, पर अपने पंचेस को रोक नहीं पाती थी. शायद मेरे पापा ने मेरी इस प्रतिभा को पहचान लिया था, इसलिए मैंने बॉक्सिंग शुरू कर दी और 2009 से मैं बॉक्सिंग ही कर रही हूं.

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Interview Boxer Sweety Boora

फैमिली का सपोर्ट कितना मिला, क्योंकि बॉक्सिंग एक ख़तरनाक खेल माना जाता है.
फैमिली का पूरा सपोर्ट रहा. मेरे मम्मी-पापा ने तो हर क़दम पर मेरा साथ दिया. उनके सपोर्ट के बिना कुछ भी करना सम्भव नहीं था. हालांकि आस-पास के लोग व रिश्तेदार ताने भी देते थे कि लड़की बिगड़ जाएगी, लेकिन पापा ने कभी उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया. उनका कहना था कि बिगड़ना होगा, तो कहीं भी बिगड़ सकता है कोई, इसके लिए किसी के हुनर को दबाना बेहद ग़लत है. इसी तरह मम्मी ने कभी कोई रोक-टोक नहीं की. ये उनका ही विश्वास था, जिसने मुझे इस मुक़ाम तक पहुँचाया. मेरे पेरेंट्स ने मुझे कभी भी ये महसूस नहीं होने दिया कि मैं  लड़की हूँ और मुझे लड़कों की तरह सपने देखने का हक़ नहीं या मुझे ज़्यादा छूट मिली तो मैं बिगड़ जाऊँगी.
वैसे भी बिगड़ने की परिभाषा क्या है? क्या लड़की होकर स्पोर्ट्स में दिलचस्पी रखना बिगड़ जाना होता है? लड़कों को सारी छूट देना और लड़कियों पर तमाम पाबंदियां लगाना न बिगड़ने की गारंटी देता है? लोगों को सोच बदलनी चाहिए और बदल भी रही है, अब तो बहुत फ़र्क़ आ गया है, लेकिन फिर भी लड़कियों के लिए संघर्ष थोड़ा बढ़ जाता है. मेरे मम्मी-पापा का साथ था मुझे, तभी मैं यहां तक पहुंच पाई.

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Interview Boxer Sweety Boora

बॉक्सिंग में और बॉक्सिंग का फ्यूचर कैसा है? ख़ासतौर से लड़कियों की अगर बात की जाए.
फ्यूचर तो अच्छा ही है, लेकिन और अच्छा हो सकता है, जिसके लिए सबको मेहनत करनी होगी. लड़कियां हमेशा मेडल्स लाती हैं, बेहतर प्रदर्शन करती हैं, लेकिन उन्हें उतनी लाइमलाइट नहीं मिलती, जितना लड़कों को.
आप मेरी ही बात कर लो, मैं वर्ल्ड नंबर 2 हूं, लेकिन मुझे कितने लोग जानते हैं? आज तक मुझे कोई स्पॉन्सर तक नहीं मिला.
लड़कियों को आज भी उतना सीरियसली नहीं लिया जाता, लेकिन कहते हैं न, उम्मीद पर दुनिया कायम है, तो मैं पॉज़िटिव हूं, क्योंकि बदलाव हो रहे हैं. अब तक लड़कियों की स़िर्फ 3 वेज कैटेगरी ही थी, फेड्रेशन भी सस्पेंडेड थी. पर यदि लड़कियों की भी लीग शुरू होगी, तो लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी. उन्हें बढ़ावा मिलेगा, सुविधाएं बढ़ेंगे, एक्सपोज़र बढ़ेगा.
वरना तो मैरी कॉम जैसी इतनी बड़ी बॉक्सर को भी अपनी पहचान बनाने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा था. 5 बार वर्ल्ड चैंपियन बनना अपने आप में एक मिसाल है, लेकिन उन्हें भी काफ़ी मश़क्क़त करनी पड़ी थी.

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Interview Boxer Sweety Boora

आप स्पोर्ट्सपर्सन हैं, तो फिटनेस को किस तरह से कनेक्ट करेंगी और कंपेयर करेंगी अन्य देशों के खिलाड़ियों की भी अगर बात करें तो?
विदेशी खिलाड़ियों के मूवमेंट्स अच्छे होते हैं, वो देखने में फिट लगते हैं, जबकि हमारा स्टेमिना उनसे बेहतर होता है.
उनका शेड्यूल हमसे बहुत अलग होता है. आजकल गेम से लेकर फिटनेस तक हर चीज़ टेक्नीकल हो गई है. अब हर प्लेयर टेक्नीक समझता है या समझना चाहता है और उस टेक्नीक को इंप्लीमेंट करने के लिए फिटनेस बेहद ज़रूरी है.
हमारे यहां खाने-पीने से लेकर फिटनेस ट्रेनिंग तक में जानकारी की बहुत कमी है. हमें ख़ुद पता नहीं होता कि क्या खाना सही है, कैसी ट्रेनिंग ज़रूरी है, जबकि विदेशों खिलाड़ियों को पूरी जानकारी रहती है. बस, यही फ़र्क़ है, वरना हम फिटनेस लेवल हमारा भी उतना ही होता है.

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आप क्या ख़ास करती हैं फिट रहने के लिए?
जैसाकि मैंने पहले भी बताया कि हमारा स्टेमिना ज़्यादा होता है, हम मेहनत भी ज़्यादा करते हैं, बस डायट का गायडेंस मिल जाए, तो और बेहतर हो सकता है फिटनेस का स्तर, जिससे रिज़ल्ट और बेहतर होंगे.
मेरी समस्या यह है कि मैं डायट सही नहीं लेती हूं. जितनी ज़रूरी है उससे कम डायट लेती हूं, लेकिन अभी मैंने शेड्यूल टाइट किया है. डायटिशियन के निर्देशानुसार खाती हूं. स्पीड ट्रेनिंग, फिटनेस ट्रेनिंग, पावर ट्रेनिंग सब करती हूं. दिन में 3 बार ट्रेनिंग होती है. सुबह 6.30, फिर 11 बजे और 4.30 बजे.
किसी भी फील्ड में आगे बढ़ने के लिए मेहनत बहुत ज़रूरी है. कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है और अपने सपनों को पूरा करने के लिए जुनून की हद तक जाना पड़ता है.

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Interview Boxer Sweety Boora

फ्री टाइम में क्या करना पसंद है?
मैं भजन सुनती हूं. जी हां, आपको अजीब लगेगा, लेकिन भजन से मुझे मानसिक शांति मिलती है.
मैं ड्रॉइंग भी करती हूं और कविताएं भी लिखती हूं. क्रिएटिविटी आपको फोक्स्ड रखने में मदद करती है.
जहां तक मेरी हॉबीज़ की बात है, तो वैंपायर डायरीज़ देखती हूं, जो मुझे बेहद पसंद है.

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एक खिलाड़ी के लिए शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मेंटल फिटनेस भी उतनी ही ज़रूरी होती है, तो आप स्ट्रेस फ्री रहने के लिए क्या करती हैं?
जब भी अपसेट हो जाती हूं, तो अकेले में ज़ोर-ज़ोर से भजन गाती हूं. इससे मेरा सारा तनाव छू मंतर हो जाता है.

आगे की क्या प्लानिंग है?
एशियन चैंयपियनशिप है, कॉमनवेल्थ गेम्स होंगे, तो उनकी तैयारियों में जुटी हूं, बहुत मेहनत कर रही हूं, ताकि देश के लिए मेडल्स ला सकूं.

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Interview Boxer Sweety Boora

अपने फैंस को कुछ कहना चाहेंगी?
यही कहूंगी कि चाहे जो भी फील्ड हो, मंज़िल पर नज़र रखो, मेहनत करो. जो भी करो, मन से करो. लोग भले ही मज़ाक उड़ाएं, उन पर ध्यान मत दो. मेरा भी उड़ाते थे, मेरे पापा का भी, लेकिन अब वही लोग बहुत प्यार और सम्मान से पेश आते हैं. अपने जुनून को जीयो, कायम रखो, सफलता अपने आप मिलेगी.

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– गीता शर्मा

रक्षाबंधन के लिए 25+ स्मार्ट गिफ्ट आइडियाज़ ( 25+ Unique Gift Ideas For Rakshabandhan)

Unique Gift Ideas For Rakshabandhan

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स्मार्ट गिफ्ट आइडियाज़ (Smart Gift Ideas)

राखी का त्योहार जोश और उत्साह भी लाता है. ऐसे में जहां परिवार में सेलिब्रेशन का माहौल रहता है, वहीं बहनें भाइयों की सलामती की दुआएं तो मांगती ही हैं, साथ ही यह भी ज़रूर एक्पेक्ट करती हैं कि उनका भाई उनके लिए बहुत ही स्पेशल गिफ्ट लाएगा. ऐसे में भाइयों को बहुत सोचना पड़ता है कि आख़िर ऐसा क्या गिफ्ट दें बहनों को, जो उन्हें स्पेशल फील करवाए, तो यहां हम आपकी परेशानी कम कर सकते हैं. इन गिफ्ट आइडियाज़ के ज़रिए आप भी अपनी बहन के लिए ले सकते हैं प्यारा सा गिफ्ट.

– बात अगर गिफ्ट की करें, तो बहुत-सी वेरायटी आपके पास है. आप कोई ऐसी चीज़ गिफ्ट करें, जो वो लंबे समय से ख़रीदने की सोच रही हो, चाहे वो कोई बुक हो, कोई एक्सेसरी हो या कोई ड्रेस.

– साथ ही में आप चॉकलेट्स या उसकी फेवरेट मिठाई के साथ लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चांदी का सिक्का या फिर गोल्ड पेंडेंट भी दे सकते हैं, क्योंकि इसे शुभ माना जाता है. यह एक ऐसा गिफ्ट होगा, जो सभी को पसंद आएगा.

– आप पूजा की थाली या पूजन सामग्री से जुड़ी कोई चीज़ गिफ्ट कर सकते हैं, जैसे- लक्ष्मीजी या गणेशजी की इमेज प्रिंट का कार्ड होल्डर, नोटबुक, कुशन कवर, न्यू ईयर कैलेंडर, वॉल डेकोरेटिव पीस या फिर टी शर्ट आदि.

– अगर आपकी बहन पढ़ने की शौकीन है, तो आप लेटेस्ट बुक या उसके मनपसंद लेखक की क़िताबों का सेट भी गिफ्ट कर सकते हैं या डिक्शनरी भी गिफ्ट की जा सकती है.

– आप गिफ्ट हैंपर्स भी दे सकते हैं, जो अपने आप में कंप्लीट होता है.

– गिफ्ट वाउचर्स भी ग्रेट आइडिया है. यह लोगों को काफ़ी पसंद भी आता है और वो अपना मनचाहा गिफ्ट ले सकते हैं.

– स्वीट्स, फ्रूट्स और ड्राय फ्रूट्स हैंपर्स भी अच्छा ऑप्शन है. साथ में बुके व ग्रीटिंग भी
दे सकते हैं.

– कोई टूर स्पॉन्सर करके भी गिफ्ट दिया जा सकता है.

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– हैंड मेड कोई चीज़ उपहार में दे सकते हैं. यह बहुत ही पर्सनल भी लगेगा और दिल को छू लेनेवाला गिफ्ट होगा.

– कुछ यादगार पुरानी तस्वीरों को फ्रेम करवाकर गिफ्ट करें.

– अगर आपकी बहन डायट पर है और वो हेल्थ कॉन्शियस है, तो आप शुगर फ्री चॉकलेट्स व मिठाइयां गिफ्ट कर सकते हैं. इसके गिफ्ट हैंपर्स की काफ़ी वेरायटी उपलब्ध है.

– फ्लोटिंग या एरोमैटिक कैंडल सेट्स भी दे सकते हैं.

– आप गिफ्ट के तौर पर अपनी बहन के नाम पर एक रकम फिक्स डिपॉज़िट करवा दें. इससे सेविंग्स की सेविंग्स हो जाएगी और यह बेहतरीन गिफ्ट होगा.

– आजकल पर्सनलाइज़्ड गिफ्ट्स भी काफ़ी पसंद किए जाते हैं. इसमें आप अपनी बहन की तस्वीरें या मनपसंद फोटो किसी गिफ्ट आइटम पर प्रिंट करवाकर गिफ्ट दे सकते हैं, जैसे- कॉफी मग्स, बिज़नेस कार्ड होल्डर, नोट बुक्स, टी शर्ट्स, फोटोफ्रेम्स या कैलेंडर को भी पर्सनलाइज़ कर सकते हैं.

– हैंडमेड गिफ्ट्स में आप ज्वेलरी बॉक्स भी डिज़ाइन कर सकते हैं. वुडन या गत्ते के पुराने बॉक्स को पेंट करके, मिरर, सीक्वेंस, लेस और ग्लिटर पेपर से डेकोरेट करके ज्वेलरी बॉक्स बनाएं.

– हैंडमेड वास या पेन होल्डर भी इसी तरह से बनाकर गिफ्ट किया जा सकता है.

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– बेडशीट्स भी प्रिंट करवाकर दी जा सकती हैं. यह आइडिया भी लोगों को काफ़ी पसंद आता है.

– वुडन फ्रेम को भी कलर्स से पेंट करके एथनिक झरोखा बनाकर विंडो फ्रेम या वॉल डेकोरेटिव पीस के तौर पर गिफ्ट कर सकते हैं. यह बहुत ही क्लासी लगता है.

– अगर बहन को कुकिंग का शौक है, तो होम अप्लायन्सेस भी गिफ्ट कर सकते हैं, जैसे- कॉफी मेकर, हैंड ब्लेंडर या सैंडविच मेकर्स, डिनर सेट आदि.

– आप रक्षाबंधन के भाई-बहन के मैसेजेस के मग्स या कुशन कवर्स विद कोट्स भी गिफ्ट कर सकते हैं यानी उन पर कुछ कहावतें, जोक्स, दिलचस्प या दार्शनिक बातें छपी हों.

– मोबाइल या लैपटॉप एक्सेसरीज़ भी बहुत अच्छा गिफ्ट आइडिया है. आजकल कलरफुल ईयरफोन्स, मोबाइल व लैपटॉप कवर्स, स्लीव्स और जैकेट्स आते हैं. इनमें भी बीडेड और बहुत ही एथनिक कवर्स आते हैं, जो फेस्टिवल के समय गिफ्ट किए जा सकते हैं.

– पेन सेट, पर्स या वॉलेट्स भी गिफ्ट करना अच्छा ऑप्शन है.

– होम डेकोर एक्सेसरी, लैंप्स या लैनटर्न्स भी अच्छा गिफ्ट आइडिया है. फेस्टिवल सीज़न में तो यह और भी अच्छा लगेगा.

– बीडेड और कलरफुल रंगोली और तोरण की भी बहुत बड़ी वेरायटी इन दिनों आपको मिल जाएगी. यह भी गिफ्ट के लिए अच्छा ऑप्शन है.

– हैंड मेड चॉकलेट्स, केक और मिठाइयां भी पसंद आएंगी. इसमें उसे पर्सनल टच महसूस होगा. आप सरप्राइज़ के तौर पर उसे बताए बगैर उसके लिए इसे तैयार करें.

– परफ्यूम, ग्रूमिंग या कॉस्मेटिक्स से जुड़ी चीज़ें भी गिफ्ट की जा सकती हैं.

– अपने हाथों से पेंट या एंब्रायडरी की हुई पेंटिग, बैग या कोई ड्रेस भी दे सकते हैं.

– फेस्टिवल के दौरान कई कॉम्बो ऑफर्स भी मिलते हैं, जैसे- एक पर एक फ्री या फिर ड्राय फ्रूट्स, चॉकलेट्स या मिठाइयों के हैंपर्स भी ऑफर्स में आते हैं, जो बड़ों और बच्चों दोनों को बहुत भाते हैं.

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बर्थ एनीवर्सरी: जेमिनी के रंगों को गूगल ने भी सजाया! ( Jamini Roy: Google Placed An Image As Doodle To Honour His Work On His Birth Anniversary)

Jamini Roy

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बर्थ एनीवर्सरी: जेमिनी के रंगों को गूगल ने भी सजाया! (Jamini Roy: Google Placed An Image As Doodle To Honour His Work On His Birth Anniversary)

  • कुछ ख़ास ही होते हैं वो लोग जिनकी भावनाओं के रंग जब कल्पना में सजकर ब्रश का आकार लेकर कैनवास पर उतर आते हैं, तो उनकी हर कृति नायाब ही बनती हैं.
  • ऐसे ही एक शख़्स रहे हैं जेमिनी रॉय, जो अपनी उत्कृष्ट पेंटिंग्स व लेखन के लिए भी काफ़ी मशहूर रह चुके हैं.
  • 11 अप्रैल 1887 को बंगाल में जन्मे जेमिनी 1954 में पद्म भूषण से नवाज़े जा चुके हैं और उनकी मज़बूत शख़्सियत का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी बर्थ एनीवर्सरी पर गूगल (Google) ने भी अपने डूडल (Doodle) को उनकी यादों के रंगों से सजाकर उन्हें समर्पित किया है.
  • जेमिनी की ख़ासियत यह रही कि उन्होंने भारतीय संस्कृति व परंपराओं को अपनी पेंटिंग में जगह दी.

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  • वो कालीघाट पेंटिंग्स से काफ़ी प्रभावित थे और उन्होंने पश्‍चिम की जगह देश की स्थानीय परंपराओं और जनजातियों को अपनी पेंटिग्स की प्रेरणा बनाया.
  • उन्हें अपनी पेंटिंग्स के लिए कई इनाम मिले और भारत सरकार ने भी उन्हें पद्म भूषण से नवाज़ा.
  • 24 अप्रैल 1972 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन अपने पीछे वो अपनी यादों के कई उत्कृष्ट रंग छोड़ गए थे, जिन्हें देखकर आज भी मन उन रंगों में खोकर मंत्रमुग्ध हो जाता है.
  • उनकी बर्थ एनीवर्सरी पर उन्हें नमन करते हैं.

निशानेबाज़ शाहिद कपूर! फिल्म रंगून के लिए निशानेबाज़ी के चैम्पियन से ली ट्रेनिंग! (Shahid Kapoor trained by shooter Ronak Pandit for ‘Rangoon)

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कमीने और हैदर फिल्म के बाद विशाल भारद्वाज अब शाहिद कपूर के साथ तीसरी फिल्म रंगून कर रहे हैं. विशाल एक बेहतरीन निर्देशक हैं और शाहिद एक अच्छे ऐक्टर, इन दोनों का साथ हमेशा एक अच्छी फिल्म की गारंटी है. शाहिद ने इस फिल्म में बेहतर परफॉर्मेन्स देने के लिए कड़ी मेहनत की हैं.

इस पीरियड ड्रामा में शाहिद एक सैनिक के भुमिका में नज़र आने वाले हैं, जिसके लिए उन्होंने चैम्पियन निशानेबाज़ रौनक पंडित से ट्रेनिंग ली हैं. रौनक पंडित ने 2006 के राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों के 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था. राइफल शूटिंग सिखाते वक़्त रौनक पंडित ने शाहिद को गन कैसे पकड़ना हैं, अपने लक्ष्य पर किस तरह निशाना साधना है ऐसी कई सारी बातें सिखाई.

रौनक पंडित कहते हैं, “निशानेबाज़ी शायद शाहिद कपूर के ब्लड में ही हैं. हमने उन्हें हमारे मलाड और वरली के सेंटर्स में निशानेबाज़ी की ट्रेनिंग दी. लगभग एक हफ़्ते तक शाहिद को ट्रिगर का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग भी दी. ओलिंपिक के लिए जो प्रशिक्षण दिया जाता है, वही प्रक्रिया का इस्तेमाल हमने यहां किया है. ट्रेनिंग के आख़िरी दिन बंदूक और असली गोलियों के साथ हमने वरली के शूटिंग रेंज पर प्रैक्टिस भी की.“

पंडित कहतें हैं,“शाहिद कपूर एक प्रतिभाशाली अभिनेता हैं. मुझे लगा नही था कि वह इतने तेज़ी से निशानेबाज़ी की सारी चालें सीख पाएंगे. उनकी फिटनेस इस मामले में काफ़ी मददगार साबित हुई. उनके साथ काम करना एक अच्छा अनुभव रहा हैं.“

– प्रियंका सिंह

क्या आप जानते हैं, कितना कमाते हैं हमारे क्रिकेटर्स? (Top highest paid Indian cricketers)

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भारतीय क्रिकेट बोर्ड दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है, लेकिन ऐसा पहले नहीं था. हमारे क्रिकेटर्स को पहले बहुत स्ट्रगल करना पड़ा है. विदेशों में उनके लिए नॉर्मल पानी रहता, तो दूसरी टीम के लिए मिनरल वॉटर. इतना ही नहीं, घरेलू मैच के लिए क्रिकेटर्स को ट्रेन और बस से सफ़र करना पड़ता था. वो समय भी कुछ अजीब था, लेकिन आज पूरी तरह से दशा बदल चुकी है. भारतीय क्रिकेट बोर्ड अपने प्लेयर्स को अच्छा पैसा देने के साथ-साथ सुविधाएं भी अच्छी देने लगा है. इसके अलावा क्रिकेटर्स इवेंट, एंडॉर्समेंट जैसे अन्य तरी़के से भी पैसा कमा रहे हैं. तो चलिए देखते हैं कि आज के दौर में कौन क्रिकेटर कितना कमाता है.

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कैप्टन विराट कोहली
टीम इंडिया के हैंडसम प्लेयर और कप्तान विराट कोहली क्रिकेट के मैदान पर धमाल मचाने के साथ ही कमाई के मामले में धमाल मचा रहे हैं. साल 2016 विराट के लिए हर तरह से लकी था. कमाई के मामले में वो धोनी को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ गए. विराट की साल 2016 की कमाई 134.44 करोड़ थी.

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साल 2015 में टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की कमाई सबसे ज़्यादा थी, लेकिन 2016 में विराट ने उन्हें पीछे छोड़ दिया. धोनी की कमाई साल 2016 में 122.48 करोड़ थी.

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रोहित शर्मा
हाल ही में किंग ख़ान द्वारा बादशाह के नाम से पुकारे जानेवाले रोहित शर्मा की कमाई की बादशाहत उतनी नहीं है, लेकिन कम भी नहीं है. रोहित की कुल कमाई 2016 में 24.17 करोड़ थी. वैसे रोहित टीम के स्टार बल्लेबाज़ हैं, क्या पता अगले साल वो कमाई में सबको पीछे छोड़ दें.

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शिखर धवन
टीम इंडिया के गब्बर कमाई के मामले में शिखर पर चढ़ रहे हैं. भले ही वो अपने साथी खिलाड़ी रोहित शर्मा से एक पायदान नीचे हैं, लेकिन अच्छी कमाई कर रहे हैं रोहित. 2016 में शिखर की कुल कमाई थी 17.73 करोड़.

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युवराज सिंह
हाल ही में शादी के बंधन में बंधे टीम इंडिया के इस खिलाड़ी ने जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव देखे और सभी परेशानियों को पीछे छोड़ते हुए दोबारा क्रिकेट में वापसी करते हुए टीम में अपनी जगह बनाई. हाल ही में 150 रनों की पारी खेलनेवाले युवराज की कमाई 2016 में 16 करोड़ थी.

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रविचंद्रन अश्विन
अगली बॉल किस तरह की होगी, इसका अंदाज़ा बल्लेबाज़ को बिल्कुल भी नहीं रहता. अपनी गेंदबाज़ की तरह ही अश्‍विन कमाई में भी आगे बढ़ रहे हैं. मार्केटर्स का ऐसा अनुमान है कि साल 2017 में अश्‍विन की कमाई में बहुच इज़ाफ़ा होगा. वैसे 2016 में अश्‍विन की कुल कमाई थी 15.55 करोड़.

श्वेता सिंह 

एक नज़र क्रिकेटर्स की हॉट एंड ग्लैमरस वाइफ पर (hot & glamorous wife of Indian cricketers)

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खेल के मैदान पर कमाल दिखानेवाले इंडियन क्रिकेटर्स की पत्नियां भी अपनी ख़ूबसूरती और ग्लैमर के नाते मीडिया में छाई रहती हैं. ऐसा कोई मौक़ा नहीं छोड़तीं वो, जब उन्हें कैमरा नोटिस न करे. तो चलिए आप भी एक नज़र डालिए उन हॉट और ग्लैमरस वाइफ पर और बताइए कि कौन है सबसे ज़्यादा ग्लैमरस.

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ये हैं गीता बसरा. क्रिकेटर हरभजन सिंह की वाइफ. जिस तरह से भज्जी अपनी बॉल से बल्लेबाजों के छक्के छुड़ा देते थे, ठीक उसी तरह उनकी पत्नी गीता भी अपनी हॉट और ग्लैमरस अदा से लोगों के होश उड़ा देती हैं. हाल ही में गीता बसरा मां बनी हैं, लेकिन इससे उनकी ख़ूबसूरती पर कोई फर्क़ नहीं पड़ा है.

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क्रिकेटर युवराज सिंह की पत्नी हेज़ल कीच बेहद प्रिटी और ग्लैमरस हैं. कीच ब्रिटिश मूल की एक्ट्रेस हैं. उनकी ख़ूबसूरती ने ही युवराज को दीवाना बना दिया था. आप भी देखिए हेज़ल की ये अदा.

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सिंपल बॉय दिनेश कार्तिक की ग्लैमरस वाइफ दीपिका पर भी एक नज़र तो डालिए. दीपिका किसी बॉलीवुड की अदाकारा से कम नहीं लगतीं. दीपिका की स्माइल बहुत ही प्यारी है. हम आपको बता दें कि दीपिका स्न्वैश प्लेयर हैं. ख़ूबसूरती के साथ-साथ उनमें ग़ज़ब का टैलेंड भी है.

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स्टूअर्ट बिन्नी की वाइफ मयंती की ख़ूबसूरती और हॉटनेस की चर्चा मीडिया में होती ही रहती है. हम आपको बता दें कि मयंती टीवी पर स्पोर्ट्स की एंकरिंग करती हैं. उनका ड्रेसिंग सेंस और बोलने का तरीक़ा लोगों को खेल के साथ भी बांधे रखता है.

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बेबाकी के लिए मशहूर गौतम गंभीर की वाइफ अपनी ग्लैमरस पर्सनैलिटी की वजह से चर्चा में रहती हैं. जिस तरह से उनके पति गौतम मीडिया में बोल्ड कॉमेंट्स देते रहते हैं, ठीक उसी तरह उनकी पत्नी नताशा अपनी बोल्डनेस की वजह से मीडिया में छाई रहती हैं. आप भी देखें नताशा की ये फोटोज़.

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अब आख़िर में हम आपको बताते हैं उनकी पत्नी के बारे में, जो हमेशा ही क्रिकेट के मैदान पर अपने स्वीटहार्ट का उत्साह बढ़ाती हुई नज़र आती हैं. आंखों में लाइनर और डार्क लिपस्टिक लगाए स्टैंड में बैठी चुलबुली साक्षी पर अनायास ही लोगों का ध्यान चला जाता है. धोनी की वाइफ साक्षी का ग्लैमरस अंदाज़ हर मैच में दर्शकों को देखने को मिलता है. हम आपको बता दें कि साक्षी सोशल मीडिया पर भी बहुत ऐक्टिव रहती हैं और अपनी आकर्षक फोटोज़ डालती रहती हैं. साक्षी एक बच्चे की मां हैं, लेकिन लगती नहीं. आप भी देखें साक्षी सिंह की ये फोटोज़.

श्वेता सिंह 

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Reel vs Real: गीता फोगट की असली कुश्ती, जो दंगल में नहीं दिखी (Reel vs Real: Dangal missed Geeta’s real wrestling)

Geeta Phogat

आमिर ख़ान स्टारर फिल्म दंगल दर्शकों के बीच ख़ूब प्रशंसा बटोर रही है, लेकिन साथ ही फिल्म में गीता फोगट की फाइट को लेकर भी ख़ूब चर्चा हो रही है. ऐसा माना जा रहा है कि रील और रियल फाइट में बहुत अंतर है. लोगों का मानना है कि उस असली मोमेंट को फिल्म में दर्शाने में निर्देशक असफल रहे. हम आपको बता दें कि 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गीता फोगट ने गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने के साथ ही भारत की पहली महिला रेसलर बन गई थी. आप भी देखें गीता फोगट की असली कुश्ती.

Happy Birthday First Indian tennis Icon विजय अमृतराज ( Happy Birthday First Indian tennis Icon Vijay Amritraj)

Vijay Amritraj

Vijay Amritraj

इंडियन टेनिस को दुनिया में पहचान दिलानेवाले विजय अमृतराज को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई! विजय का जन्म 14 दिसंबर 1953 को चेन्नई में मैगी और रॉबर्ट अमृतराज के घर हुआ था. वर्ल्ड टेनिस में इंडिया को रिप्रेज़ेंट करनेवाले विजय पहले भारतीय खिलाड़ी हैं. विजय ने अपने करियर में काफ़ी उपलब्धियां हासिल कीं. 16 सिंगल्स और 13 डबल्स खिताब जीतनेवाले अमृतराज को डेविस कप टूर्नामेंट का हीरो कहा जाता था, क्योंकि उन्होंने डेविस कप में कई विश्‍व प्रसिद्ध दिग्गज खिलाड़ियों को मात दी थी.

टेनिस खेलते हुए विजय वर्ल्ड रैंकिंग में 16वें स्थान तक पहुंचे थे, जो कि भारत के लिए गर्व की बात थी. वैसे भी टेनिस का माहौल तब भारत में अनुकूल नहीं था. उसके लिए कोर्ट, और कोच, दोनों ही मिलना बहुत मुश्किल होता था. ऐसे में देश का नाम दुनिया में रोशन करनेवाले विजय अमृतराज देश के लिए एक बेहतरीन उपलब्धि साबित हुए. विजय अमृतराज देश के दूसरे खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए. अपने खेल के साथ-साथ उन्होंने देश के नवोदित खिलाड़ियों को काफ़ी सहयोग किया.

टेनिस कोर्ट ही नहीं, बल्कि फिल्मों में भी विजय ने क़िस्मत आज़माया. जेम्स बांड फिल्म ऑक्टोपसी और स्टार र्टैक फोर में वो नज़र आए थे. इसके साथ ही विजय अमृतराज एक बेहतरीन कमेंटेटर भी हैं. उनकी कॉमेंट्री दुनिया के दिग्गज कॉमेंटेटरों में से एक है.

– श्वेता सिंह