infertility

दुनियाभर में लगभग 8-12 फ़ीसदी जोड़ों को बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी की समस्या का सामना करना पड़ता है. इसमें 40-50 फ़ीसदी बांझपन के मामलों में एक महिला गर्भधारण करने में सक्षम नहीं होती है, तो वो पुरुष बांझपन के कारण होता है. महिला प्रजनन क्षमता के विषय पर व्यापक रूप से चर्चा करने पर यह पाया गया कि एंडोमेट्रियोसिस और पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम (पीसीओएस) जैसी स्थिति महिला बांझपन और जटिलताओं के लिए काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार हैं.
जबकि पुरुष बांझपन की स्थितियों में संक्रमण, हार्मोनल असंतुलन, मोटापा, स्तंभन दोष, प्रतिगामी स्खलन, भारी धातुओं, रसायनों जैसे जोख़िम शामिल हैं. इसके लक्षण प्रदर्शित नहीं होते, इसलिए इन अंतर्निहित स्थितियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. अक्सर गर्भ धारण करने की प्लानिंग करते समय इसका पता चलता है. पुरुष बांझपन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर डॉ. क्षितिज मुर्डिया जो इंदिरा आईवीएफ (आईवीएफ और इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ) के सीईओ हैं, ने महत्वपूर्ण जानकारियां दीं.

पुरुष बांझपन के कारण

जीवनशैली
पुरुषों में बांझपन का एक प्रमुख कारण अस्वस्थ जीवनशैली माना गया है. इसलिए डॉक्टर्स पौष्टिक आहार और नियमित रूप से व्यायाम के साथ-साथ जीवनशैली में संतुलन बनाए रखने की सलाह देते हैं. जीवनशैली में बदलाव लाकर और तनाव घटाकर उन हार्मोन को कम किया जा सकता है, जो शरीर में शुक्राणु उत्पादन को प्रभावित करते हैं.

तनाव
वर्तमान में ऑफिस या बिज़नेस पर अत्याधिक दबाव ने पुरुषों में तनाव के स्तर को बढ़ा दिया है, जो उनके प्रजनन स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है. तनाव का न केवल पुरुषों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर सीधा प्रभाव पड़ता है, बल्कि इसका असर शारीरिक भी होता है. तनाव के कारण वे हार्मोन रिलीज़ हो सकते हैं, जो टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर सकते हैं. साथ ही ग्लूकोकोर्टिकोइड्स जैसे शुक्राणु उत्पादन को भी कम कर सकते हैं.

मादक पदार्थ
अल्कोहल, तंबाकू, धूम्रपान जैसे पदार्थों का सेवन प्रजनन स्वास्थ्य में बाधा डालता है. ये पुरुषों में विभिन्न प्रजनन जटिलताओं के लिए अग्रणी वीर्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं. तंबाकू को कम शुक्राणुओं की संख्या के साथ जोड़ा गया है, क्योंकि यह शुक्राणुजनन को प्रभावित करता है.

विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना
कीटनाशकों, रेडियोधर्मी रसायनों, भारी धातुओं आदि जैसे विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना और पुरुषों में वृषण क्षेत्र का गर्म होना उनकी प्रजनन क्षमता के लिए हानिकारक होता है.
ऐसे मामलों में स्पर्म काउंट और अन्य पहलुओं पर विचार करने के बाद ही सफल गर्भाधान के लिए उपचार और संशोधनों का सुझाव दिया जाता है, जिनमें से सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) भी है.
बांझपन को दूर करने के लिए जीवनशैली में बदलाव करके नियमित व्यायाम, स्वस्थ और संतुलित आहार लेने के साथ-साथ अल्कोहल, तंबाकू जैसे पदार्थों के सेवन से बचकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है. इसके अलावा प्रजनन क्षमता विशेषज्ञ के अनुसार, दवाओं और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी विधियों जैसे कि इंट्राकाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) और आईएमएसआई (इंट्राकाइटोप्लास्मिक मॉर्फोलॉगिक रूप से चयनित शुक्राणु इंजेक्शन) भी पुरुष बांझपन को दूर करने में मददगार हो सकते हैैं.

– ऊषा गुप्ता

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Male Infertility

मां बनना हर औरत का सपना होता है, लेकिन आजकल कई महिलाएं मां नहीं बन पा रही हैं. महिलाओं के मां न बन पाने के कारण जानने के लिए हमने बात की इंटीग्रेटिव न्यूट्रीशनिस्ट एंड हेल्थ कोच नेहा रंगलानी से, उन्होंने हमें इसकी वजहें और उपाय कुछ इस तरह बताए:

सबसे पहले अपने शरीर को समझें
इंटीग्रेटिव न्यूट्रीशनिस्ट एंड हेल्थ कोच नेहा रंगलानी के अनुसार, मां बनने की प्लानिंग करने से पहले महिलाओं को अपने शरीर को समझना चाहिए. हमारी बॉडी बहुत स्मार्ट है, वो जानती है कि शरीर के लिए कब और क्या ज़रूरी है. जब कोई महिला मानसिक या शारीरिक स्ट्रेस में होती है, तो उसका शरीर उसे मां नहीं बनने देता, क्योंकि शरीर जानता है कि अभी वो महिला मां बनने के लिए तैयार नहीं है. ये स्ट्रेस शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक, किसी भी तरह का हो सकता है. इस स्ट्रेस के कारण महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं, जिसके कारण वो मां नहीं बन पाती.

लाइफस्टाइल है ज़िम्मेदार
महिलाओं के मां न बन पाने के लिए काफ़ी हद तक उनकी लाइफस्टाइल ज़िम्मेदार है. जंक फूड का अधिक सेवन, ओवर ईटिंग, मोटापा, ज़रूरत से ज़्यादा डायटिंग, अचानक वज़न बढ़ना या बहुत ज़्यादा वज़न घटना, एक्सरसाइज़ बिल्कुल न करना या ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना भी मां बनने में बाधक होते हैं. कई महिलाएं अपने खानपान पर बिल्कुल ध्यान नहीं देतीं, फिर अनाप-शनाप खाकर जब मोटापा बढ़ जाता है, तो क्रैश डायटिंग करना शुरू कर देती हैं. इसी तरह कई महिलाएं या तो बिल्कुल भी एक्सरसाइज़ नहीं करतीं या फिर ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करती हैं. इन सबके चलते शरीर में इतनी तेज़ी हार्मोनल बदलाव होता है कि शरीर का हार्मोनल बैलेंस ही बिगड़ जाता है, इसीलिए मां बनने का मन बनाने से पहले महिलाओं को अपनी लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देना चाहिए.

बढ़ रही है पीसीओएस/पीसीओडी की समस्या
आजकल लड़कियों में बहुत कम उम्र में ही पीसीओएस की समस्या देखी जा रही है. इसका कारण उनका ग़लत खानपान और स्ट्रेस है. पीसीओएस/पीसीओडी के कारण महिलाओं में ओवेल्यूशन नहीं होता, उनके शरीर में एग नहीं बन पाते, उनके पीरियड्स रेग्युलर नहीं होते, जिसके कारण वो मां नहीं बन पाती. पीसीओएस/पीसीओडी की समस्या से बचने के लिए महिलाओं को अपने खानपान और लाइफस्टाइल पर ख़ास ध्यान देना चाहिए.

स्ट्रेस से बचना है ज़रूरी
यदि कोई महिला बहुत ज़्यादा स्ट्रेस में है, तो इससे उसके मां बनने में दिक्कत आ सकती है. ये स्ट्रेस किसी भी तरह का हो सकता है, जैसे- यदि आपका जॉब बहुत स्ट्रेसफुल है, तो आपको मां बनने में तकलीफ़ हो सकती है. यदि पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव चल रहा है, घर में तनाव चल रहा है, तो इससे भी आपकी फर्टिलिटी प्रभावित हो सकती है. कोई बड़ी बीमारी, दवाइयों का अधिक सेवन, भावनात्मक आघात, फाइनांशियल लॉस जैसे कई कारण, जिनसे आपका स्ट्रेस लेवल और हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है, उनके कारण भी फर्टिलिटी में कमी आती है.

सीखें स्ट्रेस से बचने के ट्रिक्स
आजकल लोग बात-बात पर तनावग्रस्त तो हो जाते हैं, लेकिन स्ट्रेस को रिलीज़ करने के लिए कोई प्रयास नहीं करते, ऐसे में तनाव उनके स्वास्थ्य को प्रभावित करने लगता है. यदि आप मां नहीं बन पा रही हैं, तो आपको सबसे पहले अपनी लाइफस्टाइल में सुधार लाना होगा. तनाव से बचने, फिट और हेल्दी रहने के लिए नियमित रूप से योग, मेडिटेशन, एक्सरसाइज़ करना होगा, हेल्दी डायट लेनी होगी, पूरी नींद लेनी होगी. फिर जब आपके शरीर को इस बात की तसल्ली हो जाएगी कि अब आप मां बनने के लिए तैयार हैं, तो आप आसानी से कंसीव कर लेंगी.

सीखें ख़ुद से प्यार करना
कई महिलाओं में कॉन्फिडेंस की इतनी कमी होती है कि वो हर किसी से अपनी तुलना करने लगती हैं और ख़ुद को उससे कमतर समझने लगती हैं. ऐसी महिलाएं ख़ुद को स्वीकार नहीं कर पातीं और आगे चलकर अकेलेपन की शिकार हो जाती हैं. ऐसी महिलाओं को भी मां बनने में दिक्कत होती है इसलिए सबसे पहले ख़ुद से प्यार करना सीखें. इससे आपका शरीर भी पॉज़िटिव रिस्पॉन्ड करेगा और आप मां बन सकेंगी.

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महिलाओं के मां न बन पाने की आम वजहें
महिलाओं के मां न बन पाने की वैसे तो कई वजहें हैं, लेकिन आमतौर पर महिलाओं में बढ़ती इंफर्टिलिटी की ये वजहें हैं-

  • मोटापा सौ रोगों का कारण होता है और इंफर्टिलिटी इनमें से एक है. यदि किसी महिला का वज़न ज़रूरत से ज़्यादा है, तो उसे मां बनने में दिक्कत आ सकती है. ऐसे में वज़न घटाकर गर्भधारण किया जा सकता है.
  • अनियमित पीरियड्स के कारण महिलाएं मां नहीं बन पातीं. अनियमित पीरियड्स की कई वजहें हो सकती हैं, जैसे- पीसीओएस/पीसीओडी, ग़लत खानपान, अनियमित लाइफस्टाइल आदि.
  • पेल्विक ट्यूबरक्लोरसिस के कारण कई महिलाएं मां नहीं बन पातीं. पेल्विक ट्यूबरक्लोरसिस होने पर सबसे पहले इसका इलाज करवाना ज़रूरी है.
  • गर्भाशय में गांठ यानी फाइब्रॉयड होने के कारण कई महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पातीं. ऐसी स्थिति में कई बार सर्जरी करवाने की भी ज़रूरत पड़ती है.
  • गर्भाशय संबंधी समस्याएं जैसे- गर्भाशय में गांठ, कैंसर, टीबी, छोटा गर्भाशय आदि के कारण भी महिलाएं मां नहीं बन पातीं.
  • फैलोपियन ट्यूब का बंद होना भी गर्भ न ठहरने की एक वजह हो सकता है, इसलिए इसकी जांच भी ज़रूरी है.
  • ल्यूकोरिया, डायबीटीज, अनीमिया आदि के कारण भी महिलाओं में इंफर्टिलिटी की समस्या होती है.
  • कई महिलाओं को यौन संबंध बनाते समय दर्द होता है. इस दर्द की कई वजहें हो सकती हैं, जैसे- सेक्स को लेकर डर, पति-पत्नी में बॉन्डिंग कम होना, फोरप्ले की कमी आदि. इन सबके चलते महिलाएं सेक्स लाइफ को एंजॉय नहीं कर पातीं और उनके मां बनने में दिक्कत आती है.
  • डिप्रेशन, अनिद्रा, अकेलेपन की शिकार महिलाओं को इंफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है. ऐसी स्थिति में साइकोलॉजिस्ट से संपर्क किया जा सकता है. उचित काउंसलिंग से कई बार समस्या सुलझ जाती है और कई बार ट्रीटमेंट की भी ज़रूरत पड़ती है.

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मां बनने की प्लानिंग करने से पहले इन बातों पर ध्यान दें-

  • अपनी लाइफस्टाइल पर ख़ास ध्यान दें. स्ट्रेस से बचने की कोशिश करें. जंक फूड से परहेज करें.
  • बहुत जल्दी मोटे या पतले होने की कोशिश न करें, इससे मां बनने में परेशानी हो सकती है.
  • सिगरेट-शराब से दूर रहें.
  • देर रात तक जागना, पूरी नींद न लेना मां बनने में बाधक हो सकता है, इसलिए जल्दी सोने और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें.
  • मिलावट वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से मां बनने में दिक्कत आ सकती है इसलिए अपने भोजन पर ख़ास ध्यान दें.
  • हरी सब्ज़ियां, ताज़े फल, फ्रूट जूस, ड्राइफ्रूट्स, स्प्राउट्स, सलाद आदि का सेवन फर्टिलिटी के फ़ायदेमंद है, इनका सेवन नियमित रूप से करें.
  • यदि आपको कारण समझ नहीं आ रहा है, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें, ज़रूरत हो तो काउंसलर की मदद लें.
    – कमला बडोनी

तलाक़ (Divorce) एक संवेदनशील मुद्दा है. क़ानून में तलाक़ लेने के लिए कई कारणों को विस्तारपूर्वक दिया गया है, पर आज भी बहुत से लोगों में इंफर्टिलिटी (Infertility) और इंपोटेंसी (Impotence) को लेकर ग़लतफ़हमी है. वो इन्हें एक ही प्रॉब्लम (Problem) समझने की भूल करते हैं और बेवजह रिश्तों को तोड़ने की कोशिश की जाती है. पर ये दोनों ही दो अलग चीज़ें हैं. आइए देखें, क्या है इंफर्टिलिटी और इंपोटेंसी में फ़र्क़ और इस आधार पर तलाक़ के बारे में क्या कहता है हमारे देश का क़ानून?

Infertility Problems

रिया और रजत की शादी को 10 साल हो गए थे. रिया की ओवरीज़ में सिस्ट था, जिसके कारण वो मां नहीं बन सकती थी. रजत बच्चा गोद नहीं लेना चाहता था, जिसके कारण हर रोज़ उनके घर में प्रॉब्लम्स होने लगीं. इनसे छुटकारा पाने के लिए दोनों ने तलाक़ ले लिया. तलाक़ के बाद रजत ने दूसरी शादी की और अब उसके 2 बच्चे हैं. रजत के लिए ये सब इतना आसान नहीं होता, अगर रिया ने उसे तलाक़ नहीं दिया होता. रिया ने रोज़ की परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए ऐसा किया, लेकिन अगर वो चाहती, तो रजत को तलाक़ न देती और कोर्ट भी उसे तलाक़ नहीं दिला पाता, क्योंकि हमारे देश में इंफर्टिलिटी को तलाक़ का आधार बनाया ही नहीं जा सकता.

विविध धर्मों के विविध क़ानून

हमारा देश विविध धर्मों और संस्कृतियों का देश है. हर धर्म में तलाक़ के लिए अपने क़ानून हैं. जहां हिंदुओं, जैन, बौद्ध और सिख के लिए द हिंदू मैरिज एक्ट 1955 है, वहीं मुसलमानों के लिए द डिज़ोल्यूशन ऑफ मुस्लिम मैरिज एक्ट 1939, ईसाइयों के लिए द इंडियन डिवोर्स एक्ट 1869 और पारसियों के लिए द पारसी मैरिज और डिवोर्स एक्ट है, तो सिविल मैरिजेस के लिए स्पेशल मैरिज एक्ट है. सभी के अपने-अपने नियम हैं, पर इंफर्टिलिटी और इंपोटेंसी (नपुंसकता) पर सभी के अलग-अलग क़ानून हैं.

क्या हैं तलाक़ के आधार?

यहां हम द हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के बारे में जानने की कोशिश करेंगे. इस एक्ट के सेक्शन 13 में तलाक़ के कारणों के बारे में विस्तारपूर्वक दिया गया है, जो इस प्रकार हैं-

–     व्यभिचार, धर्मांतरण, मानसिक विकार, कुष्ठ रोग, नपुंसकता, सांसारिक कर्त्तव्यों को त्याग देना, 7 सालों से लापता, जुडीशियल सेपरेशन (कोर्ट द्वारा अलग रहने की इजाज़त), किसी भी तरह के शारीरिक संबंध नहीं और क्रूरता या निष्ठुरता. क़ानून में कहीं भी इंफर्टिलिटी को तलाक़ का कारण नहीं बताया गया है.

क्या है लोगों की सोच?

आज भी ज़्यादातर लोगों को लगता है कि इंफर्टिलिटी और इंपोटेंसी एक ही चीज़ है. नपुंसकता को बांझपन से जोड़ देते हैं, जबकि ऐसा है नहीं. अगर किसी व्यक्ति के बच्चे नहीं हो रहे, तो लोग उसे नपुंसक यानी इंपोटेंट समझने लगते हैं, जबकि बच्चे न होने का कारण इंफर्टिलिटी भी हो सकती है.

इंफर्टिलिटी और इंपोटेंसी में अंतर?

इंफर्टिलिटी यानी बांझपन, जबकि इंपोटेंसी का अर्थ नपुंसकता है. यहां आपको बता दें कि पुरुषों में भी बांझपन हो सकता है और महिलाएं भी इंपोटेंट हो सकती हैं. इंपोटेंट व्यक्ति अपने पार्टनर को सेक्सुअल संतुष्टि नहीं दे पाता, जबकि बांझपन में ऐसा नहीं है. बांझ व्यक्ति की सेक्सुअल लाइफ संतुष्टिपूर्ण हो सकती है, उन्हें समस्या स़िर्फ बच्चे पैदा करने में हो सकती है.

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Infertility Problems
इंफर्टिलिटी नहीं बन सकती तलाक़ का कारण

कोर्ट के सामने ऐसे कई मामले आते हैं, जहां कपल्स बच्चा पैदा न होने को क्रुएल्टी बताकर तलाक़ की मांग करते हैं, जबकि हमारे देश का क़ानून कहता है कि अगर पति-पत्नी के बीच सेक्सुअल रिलेशनशिप है और दोनों ही एक-दूसरे को संतुष्ट करने में समर्थ हैं, तो विवाद का कोई मुद्दा ही नहीं, क्योंकि क़ानूनन शादी का अर्थ एक-दूसरे को सेक्सुअल संतुष्टि देना है. अगर पति-पत्नी में शारीरिक संबंध बने, तो इसका अर्थ है शादी संपूर्ण हुई. लेकिन अगर उसमें कोई कमी रह जाती है, तो आप तलाक़ ले सकते हैं. वहीं बच्चे न होना किसी का दुर्भाग्य हो सकता है, लेकिन इसके लिए किसी को दोषी ठहराकर उसे उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता.

न छुपाएं तथ्यों को

लीगल एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ इंफर्टिलिटी तलाक़ का कारण नहीं बन सकती, लेकिन अगर कोई पति कोर्ट में यह साबित कर दे कि उसकी पत्नी शादी से पहले ही मां नहीं बन सकती थी और यह बात उससे छुपाई गई, तो तथ्यों को छुपाने के लिए पति को पत्नी से तलाक़ मिल सकता है.

बदलती लाइफस्टाइल में बदलते शादी के मायने

बहुत से लोग इंफर्टिलिटी को लेकर यह तर्क देते हैं कि उनका पार्टनर उन्हें उनका वारिस या अंश नहीं दे सकता, ऐसे में शादी को बनाए रखने का क्या फ़ायदा? यहां हम एक सवाल पूछना चाहते हैं कि क्या शादी का अर्थ केवल बच्चे पैदा करना है. अगर ऐसा होता, तो आज बहुत से बेऔलाद लोग एक साथ न होते. माना कि पुराने ज़माने में शादी का एकमात्र उद्देश्य परिवार व वंश को आगे बढ़ाना हुआ करता था, पर अब ऐसा नहीं है. बदलती लाइफस्टाइल में ऐसे बहुत से शादीशुदा जोड़े हैं, जो बच्चा नहीं चाहते. डबल इन्कम नो किड्स (डिंक्स) समय के साथ लोगों की ज़रूरतें भी बदली हैं.

मुस्लिम पर्सनल लॉ और इंफर्टिलिटी

भले ही हिंदू मैरिज एक्ट में इंफर्टिलिटी को तलाक़ लेने की वजह नहीं बनाया जा सकता, लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ इससे परे है. यहां इंफर्टिलिटी तलाक़ का एक बड़ा कारण बन सकती है, बशर्ते पति उस आधार पर तलाक़ लेना चाहे तो. साथ ही यह पति की दूसरी शादी के लिए भी एक बड़ा कारण बन सकता है. हालांकि दूसरी शादी के लिए उसे पहली पत्नी की इजाज़त लेनी पड़ती है, जो महज़ एक औपचारिकता होती है. लीगल एक्सपर्ट की मानें, तो मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत पति कभी भी किसी भी कारण को वजह बनाकर अपनी पत्नी से तलाक़ ले सकता है और ट्रिपल तलाक़ इसका एक जीता जागता नमूना है. हालांकि कुछ मुस्लिम महिलाओं ने ट्रिपल तलाक़ के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है, पर जब तक सभी महिलाएं अपने हक़ के लिए आवाज़ नहीं उठाएंगी, तब तक उनके अधिकारों का यूं ही उल्लंघन होता रहेगा.

इंफर्टिलिटी के लिए ताने देना है क्रूरता

साल 2013 में मुंबई के फैमिली कोर्ट ने 52 वर्षीया महिला की तलाक़ की अर्जी पर विचार करते हुए उसे उसके पति से तलाक़ दिलाया, जहां पति पत्नी को बांझ होने के ताने देता था. इस मामले में पति-पत्नी दोनों ही बच्चे न होने के लिए एक-दूसरे को दोषी मानते थे. पति पत्नी को एक छोटे से स्टोर रूम में रखता था और उसके साथ बहुत बुरा व्यवहार भी किया जाता था. वह अपनी पत्नी को बच्चों के फोटोज़ दिखाकर ताने देता था, जो किसी भी महिला के लिए बहुत बड़ा मेंटल हरासमेंट है. कोर्ट ने कहा कि इस तरह किसी महिला को उसकी इंफर्टिलिटी के लिए ताने देना क्रुएल्टी (क्रूरता) है और इसके लिए उसे माफ़ नहीं किया जा सकता. इस मामले में सबसे चौंकानेवाला तथ्य जो सामने आया, वो यह कि जब दोनों का फर्टिलिटी टेस्ट कराया गया, तो डॉक्टर ने सर्टिफाई किया कि दोनों ही पैरेंट्स बन सकते हैं. इसके बाद कोर्ट ने पत्नी की अर्जी को मंज़ूर करते हुए उसे तलाक़ दे दिया.

इंफर्टिलिटी को समझें एक मेडिकल कंडीशन

बच्चे पैदा न कर पाना एक मेडिकल कंडीशन है, जिसके लिए किसी के मान-सम्मान को चोट पहुंचाना ग़लत है. जैसे हर व्यक्ति की बॉडी टाइप अलग-अलग होती है, ठीक वैसे ही बच्चे पैदा करने की क्षमता भी अलग-अलग होती है. महिलाओं को समझना चाहिए कि यह एक मेडिकल कंडीशन है, जिसके लिए ख़ुद को कोसना या अपने कर्मों को दोष देना ग़लत है. एक औरत के लिए मां बनना बड़े गर्व की बात है, लेकिन उस गर्व को अपने आत्मसम्मान को चोटिल न करने दें. अपने अस्तित्व को बच्चे के वजूद से जोड़कर देखना छोड़ दें.

– अनीता सिंह

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अभी मेरी उम्र 26 साल है, पर जब मैं 22 साल की थी, तब मुझे पेट का ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) हो गया था, जिसके लिए 9 महीनों तक इलाज भी चला. हालांकि उसके बाद डॉक्टर ने कह दिया था कि अब और इलाज की ज़रूरत नहीं है. पर अब मेरी शादी होनेवाली है. क्या यह मेरी फर्टिलिटी को प्रभावित करेगा? कृपया, मार्गदर्शन करें. 
– अन्नपूर्णा शर्मा, कोलकाता.

पेट का टीबी आपके फैलोपियन ट्यूब्स को प्रभावित कर सकता है. चूंकि अभी आपकी शादी नहीं हुई है, तो आप अपनी फर्टिलिटी के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए अभी रुक सकती हैं. कंसीव करने के लिए दोनों ही पार्टनर्स का 50-50% योगदान होता है. आप अपनी फर्टिलिटी को लेकर इतनी परेशान न हों. अगर आपकी ट्यूब्स डैमेज भी हो गई हों, तो भी आईवीएफ के ज़रिए उम्मीद बनी रहती है.

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मैं 37 वर्षीया महिला हूं. मेरे लैप्रोस्कोपी ऑपरेशन के बाद पता चला है कि मुझे एंडोमिट्रियोसिस है. डॉक्टर ने 3-4 महीने तक हर महीने इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी है. मैं जल्द से जल्द कंसीव करना चाहती हूं. क्या इससे मेरी फर्टिलिटी प्रभावित होगी? 
– करिश्मा वाघेल, पटना.

एंडोमिट्रियोसिस वह अवस्था है, जिसमें गर्भाशय के अंदर बढ़नेवाले एंडोमिट्रियम टिश्यूज़ गर्भाशय के ऊपर बढ़ने लगते हैं, जिसके कारण हर महीने पीरियड्स के दौरान काफ़ी दर्द होता है. इसके कारण हर महीने होनेवाला ओव्यूलेशन भी प्रभावित होता है. आपकी बातों से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि आपका एंडोमिट्रियोसिस किस स्टेज पर है. आजकल की लेटेस्ट रिप्रोडक्टिव टेकनीक्स के ज़माने में एंडोमिट्रियोसिस के गंभीर मामलों में भी आईवीएफ से मदद मिल रही है. इस बारे में आप किसी फर्टिलिटी एक्सपर्ट से बात करें.

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डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

 

 

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