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तस्वीर तेरी दिल में, जिस दिन से उतरी है
फिरूं तुझे संग ले के नए-नए रंग ले के…
सपनों की महफ़िल में…
जरा इस शायर के पेंटर होने की कल्पना करिए, जो शब्दों से इतनी ख़ूबसूरत तस्वीर बना देता है. उसे कूची और रंग से अपनी बात कहनी हो, तो कैसे कहेगा.
एक शायर पेंटर नहीं होता, जबकि हर पेंटर एक शायर होता है इसमें कोई शक नहीं. बस वह अपनी शायरी किसी और भाषा में कह डालता है.

क्या है पेंटिंग? ख़्वाब, तमन्ना, हकीक़त, दर्द, प्रेम और भी न जाने क्या-क्या. जो कुछ भी दिल और दिमाग़ में है उसे कैनवाॅस पर उतार देने के हुनर का नाम है पेंटिंग.

Kahaniya

इस दुनिया में कौन है, जो सुबह और शाम नहीं देखता. कौन ज़िंदगी में फूल और तितलियों को देखे बिना बड़ा हुआ है. किसे आसमां की लाली और शाम की गोधूलि ने चौंकाया नहीं है. कौन है, जो सितारों के रहस्य नहीं जान लेना चाहता.
चलिए आगे बढ़ते हैं. कब बनाई थी आपने आख़िरी पेंटिंग. अच्छा जाने दीजिए कब देखी आपने पिछली पेंटिंग अपनी ज़िंदगी में. बड़ा अजीब सवाल है, वाक़ई बात तो ठीक है आपकी कि क्या रखा है पेंटिंग में और फ़ुर्सत किसे है आज पेंटिंग देखने की, आर्ट गैलरी जाने की और फिर पेंटिंग बनाने की. वैसे भी ऊपरवाला सब को यह हुनर कहां देता है कि वह जो आड़ी-तिरछी रेखाएं कोरे काग़ज़ पर खींच दे, तो वो बोलने लगें. दिल के जज़्बात कह दें.
कभी सुना है आपने शौक और जुनून के बारे में, ज़रूर सुना होगा. सुना क्या गुज़रे भी होंगे शौक और जुनून से. यह जो शौक है जब इंसान को सोने नहीं देता, तो जुनून बन जाता है.
पहले बात पेंटिंग की फिर कुछ और. मुझे लगता है लास्ट पेंटिंग या तो हमने स्कूल के दिनों में बनाई होगी या फिर बच्चों के होमवर्क में. कौन-सी पेंटिंग देखी अभी अंतिम आपने और जब ध्यान करेंगे, तो याद नहीं आएगा. जबकि हर पल एक नई पेंटिंग से हम लोग रू-ब-रू हो रहे हैं. पेपर में, नेट पर, आसपास ढेर सारे कैनवास के रंग बिखरे पड़े हैं. कौन है जो आज इंटरनेट पर अपने पसंद की सामग्री नहीं देखता और जो कुछ हम देख रहे हैं वे सब कुछ बैकग्राउंड पेंटिंग से भरे पड़े हैं. बस हमारे भीतर देखने का एहसास खो गया है. हम ज़िंदगी के कैनवास में छुपी हुई ढेर सारी अनकही तस्वीरों को देखने से महरूम हो गए हैं, क्योंकि हमारे भीतर एहसास खो गया है.

Dil Ki Baat


क्या है पेंटिंग? पेंटिंग कोई निर्जीव वस्तु नहीं है. काग़ज़ पर उकेरी गई तस्वीरभर नहीं है. एक पेंटिंग ज़िंदगी के किसी लम्हे की तस्वीर है. हमारी भावना और उस वक़्त के मनःस्थिति को कहती कोई कहानी है. जब हम ख़ुद की कहानी ही कहना और समझना न चाहें, तो यह पेंटिंग क्या करेगी.
कभी छोटे बच्चे को कलर और पेपर देकर देखिए और फिर जब वह ख़ुद की उंगलियों और चेहरे को रंगते हुए आपके सामने छोटे से काग़ज़ पर कुछ बना कर ले आए, अपनी कल्पना को दिखाने के लिए कि फिर वो चांद-सूरज हों, पक्षी, पेड़-पौधे, नदी, घर-तालाब या कुछ भी… और आपकी आंखों में झांक कर कहे दादू , कैसी है यह तस्वीर या पूछे पापा कल स्कूल में इसे सबमिट करना है टीचर ने कहा था, तब पूछिए और देखिए उस पेंटिंग को. मेरे लिए पेंटिंग वह काग़ज़ नहीं है, जो आपके हाथ में बच्चे ने सौंपा है. मेरे लिए पेंटिंग वह लम्हा है, जब आप उस पेंटिंग को लेकर ख़ुशी से झूमे और सबको दिखाते फिरे कि मेरे पोते या बेटे ने बनाया है इसे कि किसी बर्थडे पर दिए हुए किसी के हाथ से बनाए कार्ड को आपने सहेजकर रख लिया उम्रभर के लिए, जिसमें किसी ने आड़ी-तिरछी लाइनों में लिख दिया था- हैप्पी बर्थडे पापा…
मेरे लिए पेंटिंग वह है, जब आपने अपनी आंखों से सूरज और चांद देख कर कल्पना में उसे अपने कैनवास पर उतारा और उसमें मनचाहे रंग भरे.

Kahani

ज़िंदगी का एक भी लम्हा ऐसा नहीं है, जो आसपास गुज़र रहे वक़्त को दिल और दिमाग़ के कैनवास पर अपनी स्मृति के मानस पटल पर न उतार रहा हो, जाने-अनजाने ढेर सारे लम्हे आपके हृदय के कैनवास पर रंगे हुए हैं, जिन्हें आप गाहे-बगाहे देर तक ख़ुद के भीतर महसूस करते हैं उनके साथ खड़े होते हैं. समृतियों में उन्हें जीते हैं और अपनी पसंद के अनुसार, अपनी ज़िंदगी की तस्वीर चुन कर किसी को कम, तो किसी को पूरी ज़िंदगी दे देते हैं. हर पल ज़िंदगी का कैनवास बदलता जाता है और इसी तरह, हर लम्हे में ज़िंदगी की तस्वीर. कई बार तो हम ख़ुद या हमारी ज़िंदगी ख़ुद किसी तस्वीर की तरह होती है.
चलिए इस पेंटिंग की कुछ ख़ासियत पर बातें करें.
मुझे न तो पेंटिंग बनानी आती है और न इसकी समझ. बहुत कोशिश की. आर्ट गैलरी गया, लेकिन वह भाषा समझ न सका, जो एक चित्रकार कैनवास पर लिख देता है. मैं बस इतना सोचता हूं कि यह कितनी महान और हृदय के कोने से निकली, कैसी अद्भुत भाषा है कि जिसका एक अक्षर भी मैं नहीं समझ सकता. उस भाषा में कही गई बात करोड़ों में बिकती है. इसे कहने और समझनेवाले लोग कौन हैं. ऐसा क्या कहा, पढ़ा और सुना जाता है, इन रंगों और लकीरों में. जो ये इतनी क़ीमती हो उठती हैं और तब मुझे अपनी अज्ञानता का एहसास होता है.
काश ऊपर वाले ने मुझे रंगों से खेलने, तस्वीर बनाने और जज़्बात को पन्नों पर हूबहू उतार देने का हुनर दिया होता.
तस्वीर तेरी दिल में, जिस दिन से उतरी है
फिरूं तुझे संग ले के नए-नए रंग ले के…
सपनों की महफ़िल में…
जरा इस शायर के पेंटर होने की कल्पना करिए, जो शब्दों से इतनी ख़ूबसूरत तस्वीर बना देता है. उसे कूची और रंग से अपनी बात कहनी हो, तो कैसे कहेगा.
एक शायर पेंटर नहीं होता, जबकि हर पेंटर एक शायर होता है इसमें कोई शक नहीं. बस वह अपनी शायरी किसी और भाषा में कह डालता है.

Kahani

एक बेहतरीन गाना है हुस्न वाले तेरा जवाब नही… किसी पेंटर को यह बात कहनी हो, तो वह बस एक ख़ूबसूरत तस्वीर उतार देगा काग़ज़ पर, बिना कुछ बोले चुपचाप.
मेरे कुछ दोस्त हैं, जो लाजवाब पेंटिंग करते हैं. पहले हैं पी.आर. बंदोपाध्याय आप एनटीपीसी में महाप्रबंधक हैं. हम लोग एक-दूसरे से कोई तीस साल से परिचत हैं. आपकी पेंटिंग वर्ल्ड क्लास पेंटिंग है, जिसे जब भी उनके घर गया, मैं बस देखता रह गया. एक मेरे साथी हैं, अरोराजी जो कभी-कभी अपनी कलाकृति ग्रुप में भेजते रहते हैं. हम लोगों का साथ तीस वर्षों से भी अधिक का है, लेकिन इन्होंने पेंटिंग कुछ वर्षों पहले ही ग्रुप में शेयर करनी शुरू की है. तीसरे दोस्त हैं, समीरण घोषाल, जो जीआईसी 81 के साथी हैं. आपकी पेंटिंग चमत्कृत करती है. आपकी एक पेंटिंग को मैंने बुक के कवर के रूप में प्रयोग किया है. और अभी मेरे मित्र मोहम्मद जुनैद ने दो दिन पहले यह पेंटिंग भेजी थी ग्रुप में, जिसने मुझे यह सब लिखने को इंस्पायर कर दिया.

Dil Ki Baat

बात पेंटिंग की नहीं थी. बात थी पचपन बरस की उम्र में भी कूची और रंग से कैनवास को रंग देने की. अपने शौक और जुनून में खो जाने की और तभी मैंने पूछा था कि आपने पेंटिंग की है क्या?
वह जो अपना शौक है, जो पैशन है, उसे कर गुज़रने का कोई वक़्त कोई उम्र नहीं है. लाॅकडाउन है, तो क्या कोरोना है तो क्या, ज़िंदगी दर्द से गुज़र रही है, तो क्या? ज़िंदगी के कैनवास पर अपनी तमन्ना के रंग भर दीजिए यह खुद-ब-खुद ख़ूबसूरत हो उठेगी.

मुरली मनोहर श्रीवास्तव


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विजयनगर राज्य के एक गांव में रामैया नाम का व्यक्ति रहता था. गांव के सभी लोग उसे मनहूस मानते थे. उनका मानना था कि अगर सुबह उठकर किसी ने सबसे पहले रामैया का चेहरा देख लिया, तो उसका पूरा दिन ख़राब गुजरता है और पूरे दिन भोजन नसीब नहीं होता. रामैया इस बात से बेहद दुखी और आहत रहता था, क्योंकि कोई उसका सामना नहीं करना चाहता था.

जब यह बात महाराज कृष्णदेव राय तक पहुँची, तो उन्होंने निर्णय लिया कि इसकी वास्तविकता वो खुद जानने की कोशिश करेंगे. इसलिए रामैया को राजमहल बुलाया गया, उसको खाना-पीना खिलाकर महाराज के कक्ष के सामने वाले कक्ष में उसके रहने की व्यवस्था की गई. अगली सुबह महाराज कृष्णदेव रामैया के कक्ष में गए और उसका चेहरा देखा, क्योंकि अब महाराज को देखना था कि उनका दिन कैसा गुज़रता है और क्या वाक़ई रामैया मनहूस है?

इसके बाद महाराज भोजन के लिए बैठ गए लेकिन जैसे ही उन्होंने भोजन की तरफ़ हाथ बढ़ाया उन्हें अचानक किसी आवश्यक मंत्रणा हेतु दरबार में जाना पड़ा, तो वे बिना भोजन करे ही दरबार चले गए. अपना पूरे दिन का काम निपटाकर महाराज कृष्णदेव राय को ज़ोरों की भूख लग आई थी. जब उन्हें भोजन परोसा गया, तो उन्होंने देखा कि उनके भोजन पर मक्खी बैठी हुई है तो उनको खाना छोड़ना पड़ा और अब उनकी भूख भी मर चुकी थी इसलिए वो बिना भोजन किए ही अपने शयन कक्ष चले गए और सो गए.

महाराज को विश्वास हो गया कि रामैया मनहूस है और उन्होंने क्रोध में आकर उसे फांसी पर चढ़ा देने का आदेश दे दिया. ये जब रामैया को सैनिक फांसी पर लटकाने के लिए ले जा रहे थे तो उनका सामना तेनालीराम से हुआ और उन्होंने पूरा माजरा समझकर रामैया के कान में कुछ कहा.

फांसीगृह पहुंचने के बाद सैनिकों ने रामैया से उसकी अंतिम इच्छा पूछी. रामैया ने कहा कि मैं महाराज को एक संदेश भिजवाना चाहता हूं और फिर एक सैनिक द्वारा वह संदेश महाराज तक पहुंचाया गया.

Tenali Rama Story

इस संदेश को सुनकर महाराज सकते में आ गए क्योंकि संदेश इस प्रकार था- महाराज, सबका मानना है और अब आपको भी विश्वास हो चला है कि सुबह सबसे पहले मेरा चेहरा देखने से किसी को पूरे दिन भोजन नसीब नहीं होता, लेकिन महाराज मेरी अंतिम इच्छा ये है कि मैं पूरी जनता के सामने ये बताना चाहता हूं कि मेरा चेहरा देखने के बाद तो महाराज को सिर्फ़ भोजन नहीं मिला लेकिन मैंने तो सुबह सबसे पहले महाराज आपका मुंह देखा और उसको देखने पर तो मुझे जीवन से ही हाथ धोना पड़ रहा है. बताइए ऐसे में कौन ज़्यादा मनहूस हुआ?

संदेश सुनकर महाराज को अपनी अंधविश्वासी सोच पर शर्म आई और उनको लगा कि यदि ये संदेश जनता के सामने कहा गया तो क्या होगा? उन्होंने सैनिकों से कहकर रामैया को बुलवाया और पूछा कि उसे ऐसा संदेश भेजने का परामर्श किसने दिया था?

रामैया ने तेनालीराम का नाम लिया. महाराज तेनालीराम की बुद्धिमत्ता से बहुत प्रसन्न हुए. उन्होंने रमैया की फांसी की सज़ा निरस्त कर दी और तेनालीराम को पुरुस्कृत किया, क्योंकि उसकी वजह से ही ये अंधविश्वास का पर्दा उनकी आंखों पर से हटा और बेक़सूर रामैया के प्राण भी बच पाए!

सीख: अंधविश्वास से दूर रहना चाहिए वर्ना उसके चलते निर्दोष और बेक़सूर को सज़ा मिलती है!

Photo Courtesy: kidsnstories.com

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इस समय जब पूरे विश्व में डर और नकारात्मकता छाई हुई है, ऐसे में सकारात्मक जीवन जीने के 10 आसान उपाय आपके बहुत काम आ सकते हैं. इस समय आपके मन में भी आनेवाले कल को लेकर असमंजस और डर की भावना घर कर रही होगी. दिनभर घर में कैद रहना बोझ लग रहा होगा, लेकिन इस समय को यदि हम अच्छे अवसर की तरह देखें, तो हमें कुछ भी नकारात्मक नहीं लगेगा. दरअसल, परिस्थिति चाहे कितनी ही मुश्किल क्यों न हो, यदि हम उस स्थिति से बाहर निकलने की ठान लें, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं. रात चाहे कितनी ही काली, कितनी ही गहरी क्यों न हो, रात के बाद सवेरा होता ही है. इसी तरह जीवन में चाहे कितनी ही तकलीफ क्यों न आए, दुःख के बादल छंट ही जाते हैं और ज़िंदगी खुशियों से मुस्कुराने लगती है. कोरोना के इस कहर में आइए, हम आपको सकारात्मक जीवन जीने के 10 आसान उपाय बताते हैं.

10 Easy Ways To Live A Positive Life

1) ईश्वर को धन्यवाद कहें
सुबह उठकर सबसे पहले मुस्कुराइए और ईश्वर को धन्यवाद कहिए कि उसने आपको इंसान के रूप में इतना सुंदर जीवन दिया है. जब हम ईश्वर को धन्यवाद कहते हैं, तो हमारे मन में अपने जीवन को लेकर संतुष्टि का भाव आता है और हम जीवन को सकारात्मक तरीके से देखने लगते हैं.

2) प्रार्थना करना कभी न भूलें
प्रार्थना करना सकारात्मक जीवन जीने का सबसे आसान तरीका है. प्रार्थना करना हमें नम्र बनाता है, दूसरों का भला सोचना सिखाता है इसलिए ईश्वर की हमेशा प्रार्थना करें. हमें स्कूल में भी इसीलिए पढ़ाई करने से पहले प्रार्थना करने के लिए कहा जाता है.

3) योग और मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाएं
जो लोग रोज़ योग और मेडिटेशन करते हैं, वो हमेशा सकारात्मक रहते हैं. योग और ध्यान हमें जीवन के हर उतार-चढ़ाव में आगे बढ़ना सिखाते हैं और अपने लक्ष्य से कभी भटकने नहीं देते, इसलिए योग और मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाएं और हमेशा सकारात्मक बने रहें.

4) हर हाल में ख़ुद से प्यार करें
आपकी परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, हर हाल में ख़ुद से प्यार करें. जब आप ख़ुद से प्यार करेंगे, तो ही दूसरों को भी प्यार दे सकेंगे. जो लोग ख़ुद से प्यार करते हैं, वो हमेशा खुश रहते हैं और दूसरों को भी ख़ुशी देते हैं.

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10 Easy Ways To Live A Positive Life

5) फिट और हेल्दी रहें
हेल्थ इज़ वेल्थ- ये कहावत आपने ज़रूर सुनी होगी. हम चाहे कितने ही संपन्न क्यों न हों, यदि हम हेल्दी नहीं हैं, तो हम जीवन का लुत्फ़ नहीं उठा सकते. फिट और हेल्दी व्यक्ति हमेशा कॉन्फिडेंट नज़र आता है, इसलिए अपने शरीर का हमेशा ध्यान रखें और हमेशा फिट और हेल्दी बने रहें.

6) अच्छे कपडे पहनें और बनठन के रहें
ये बात सुनकर आपको हंसी आ सकती है, लेकिन आप ये बात आज़माकर देखिए. जब आप बनठन कर रहते हैं तो आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ जाता है. आप कहीं भी जाने, किसी से भी मिलने के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं, लेकिन आपने यदि अच्छे कपड़े नहीं पहने हैं या आप अच्छे नहीं दिख रहे हैं, तो आप लोगों से मिलने से कतराते हैं, आपका कॉन्फिडेंस कम हो जाता है.

7) दोस्तों से मिलें
आप चाहे कितने ही व्यस्त क्यों न हों, कुछ समय अपने दोस्तों के लिए ज़रूर निकालें. दोस्तों से मिलकर आपको ख़ुशी होगी और आपको ज़िंदगी और ख़ूबसूरत लगने लगती है. दोस्तों की तरह ही अपने से कम उम्र के लोगों के साथ समय बिताएं यानी अपने बच्चों के साथ समय बिताएं. बच्चों के साथ आप खुश भी रहेंगे और खुद को युवा भी महसूस करेंगे.

8) अपने शौक के लिए समय निकालें
हमारे शौक हमें कभी बूढ़ा नहीं होने देते, इसलिए अपनी बिज़ी लाइफस्टाइल में भी अपने शौक के लिए ज़रूर समय निकालें. जब आप अपना मनपसंद काम करते हैं, तो आप खुश रहते हैं और आपको ज़िंदगी से शिकायत नहीं रहती.

10 Easy Ways To Live A Positive Life

9) घूमने जाएं
नई जगहों की सैर करने और नए लोगों से मिलने से हम नई-नई चीज़ें सीखते हैं, जिससे जीवन के प्रति हमारी जिज्ञासा बनी रहती है. आपको जब भी समय मिले नई-नई जगहों की सैर ज़रूर करें. ट्रैवल करने से हम ये भी समझ पाते हैं कि हम दूसरों से कितना अच्छा जीवन जी रहे हैं.

10) हमेशा मुस्कुराएं
जो लोग हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते हैं, उन्हें हर कोई पसंद करता है. यदि आप भी चाहते हैं कि सब आपको प्यार करें, तो हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें. आप जो भी काम कर रहे हैं, उसे मन से करें. खुद से प्यार करें, अपने काम से प्यार करें, हमेशा ख़ुश रहें, तभी आप अपनी ज़िंदगी से प्यार कर सकते हैं.

सकारात्मक जीवन जीने वाले लोग हर हाल में खुश रहते हैं, इसलिए वो ज़िंदगी की हर तकलीफ से आसानी से बाहर निकल जाते हैं. रात चाहे कितनी ही काली, कितनी ही गहरी क्यों न हो, रात के बाद सवेरा होता ही है. इसी तरह जीवन में चाहे कितनी ही तकलीफ क्यों न आए, दुःख के बादल छंट ही जाते हैं और ज़िंदगी खुशियों से मुस्कुराने लगती है. यदि आप भी इसी सोच के साथ जीने लगेंगे, तो आप भी हर हाल में ख़ुश रहेंगे और ज़िंदगी से प्यार करने लगेंगे.

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श्रद्धा और सजगता, दोनों एक दूसरे के विरोधाभासी लगते हैं। जब तुम पूर्णतः जागरूक होते हो तो अक्सर श्रद्धा नहीं रहती और तुम व्याकुल एवं असुरक्षित महसूस करते हो। जब तुम किसी पर पूर्ण विश्वास कर के चलते हो अर्थात श्रद्धा से चलते हो, तब मन पूर्ण रूप से शांत एवं सुरक्षित महसूस करता है और विश्राम में रहता है। पर, तब तुम जागरूक नहीं रहते!

Gurudev Sri Sri Ravi Shankar

श्रद्धा तीन प्रकार की होती है

1) तामसिक श्रद्धा 
तामसिक श्रद्धा आलस्य से उत्त्पन्न होती है। जैसे, जब तुम कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते हो, या आलस्यवश कोई काम नहीं करना चाहते, तब तुम कहते हो कि, ‘कोई बात नहीं, भगवान सब ठीक कर देंगे।’ (सब हंसते हैं।)

2) राजसिक श्रद्धा
जब तुम इच्छा और तृष्णा के तीव्र वेग के कारण श्रद्धा का सहारा लेते हो, तब इच्छापूर्ति की तीव्र पिपासा ही तुम्हारी श्रद्धा को जीवित रखती है। ये राजसिक श्रद्धा है।

3) सात्विक श्रद्धा
ऐसा विश्वास, ऐसी श्रद्धा जो निष्कपट हो, भोलापन लिए हो और जो हमारी चेतना की पूर्णता से उत्पन्न हुई हो, वह सात्विक श्रद्धा है।

 

श्रद्धा से यदि इच्छा पूरी न हो तो क्या करें? जानने के लिए देखें गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का ये वीडियो:

 

श्रद्धा एवं जागरूकता मनुष्य को ज्ञानी बनाते हैं
श्रद्धा एवं जागरूकता भले ही एक दूसरे के विरोधाभासी लगते हों, परन्तु वे एक दूसरे के पूरक है| श्रद्धा के बिना तुम्हारा आंतरिक विकास संभव नहीं है। और, बिना सजगता के तुम कुछ भी भली-भांति समझ नहीं पाओगे। श्रद्धा तुम्हे आनंद के मार्ग पर ले जाती है और सजगता तुम्हें व्याकुल रखती है।

जहां विश्वास ( श्रद्धा) नहीं है वहां भय रहता है, और जब जागरूकता कि कमी हो तो न तो तुम कुछ ठीक से समझ पाओगे और न ही उसे ठीक से व्यक्त कर पाओगे। अतः दोनों का मिश्रण अत्यंत आवश्यक है।

ज्ञान में स्थित होकर सजग रहने से तनाव विहीनता आती है, श्रद्धा आती है और आनंद आता है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है श्रद्धा से उत्पन्न मूर्खता (राजसिक श्रद्धा) के तत्वों अर्थात आलस्य को मिटाना एवं जागरूकता से उत्पन्न भय और व्याकुलता को भी मिटाना। यह एक अनोखा एवं अतुल्य मिश्रण है। अगर तुम्हारे अन्दर श्रद्धा एवं जागरूकता एक साथ दोनों ही हैं तो तुम सही मायनों में एक ज्ञानी बन जाओगे।

 

श्रद्धा एवं जागरूकता को सही मायने में समझने के लिए देखें गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का ये वीडियो:

 

Akbar Birbal Ki Khaniya
सौजन्य: lets-inspire.com

अकबर-बीरबल कथा: पूर्णिमा का चांद (Akbar-Birbal Story: poornima Ka Chand)

एक बार बीरबल फारस देश के राजा के निमंत्रण पर उनके देश गए हुए थे. उनके सम्मान दावत का आयोजन किया गयाथा और अनेक उपहार दिए गए थे. अपने देश लौटने की पूर्व संध्या पर एक अमीर व्यक्ति ने पूछा कि वह कैसे अपने राजाकी फारस के राजा से तुलना करेंगे?

बीरबल ने कहा, “आपके राजा पूर्णिमा के चांद जैसे हैं. हालांकि हमारे राजा दूज के चंद्रमा के समान हैं.”

यह सुन फारसी बहुत खुश थे, लेकिन जब बीरबल घर गए, तो उन्होंने पाया कि सम्राट अकबर बहुत गुस्से में थे.

अकबर ने गुस्से में कहातुम अपने राजा को कैसे कमजोर बता सकते हो.”  तुम एक गद्दार हो !” बीरबल ने कहा, “नहीं, महाराज मैंने आपको कमज़ोर नहीं बताया है.

दरसल, पूर्णिमा का चांद कम हो जाता है और गायब हो जाता है, जबकि दूज के चांद में शक्ति बढ़ती है.

मैं वास्तव में दुनिया को बताता हूं कि दिन प्रतिदिन आपकी शक्ति बढ़ रही है, जबकि फारस के राजा का पतन हो रहा है.”

अकबर ने बीरबल की बुद्धिमत्ता का फिर लोहा माना. उनकी बात का असली अर्थ समझकर संतोष व्यक्त किया औरबीरबल का गर्मजोशी से स्वागत किया.

सीख: शब्दों से खेलकर कैसे गूढ़ अर्थ में अपनी बात भी कही जा सकती है और समानेवाले को नाराज़ भी नहीं किया गयायह कला सीखना ज़रूरी है.

कंप्लीट ग्रोथ के लिए ऑल-राउंडर होना ज़रूरी है, लेकिन नंबर वन कहलाने के लिए एक्सपर्ट बनना ज़रूरी है और ये कोई नामुमकिन काम नहीं है. आप भी ऐसा कर सकते हैं.

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हम कई क़ामयाब लोगों से प्रभावित होते हैं और मन ही मन सोचते हैं काश, मैं भी ऐसा कर पाता/पाती, लेकिन सोचने भर से क्या होगा? क्या आपने कभी क़ामयाबी के शिखर तक पहुंचने का सपना देखा है, उस तक पहुंचने की कोशिश की है? नहीं..? तो अभी भी देर नहीं हुई है.

लक्ष्य निर्धारित करेंः सफलता पाने के लिए सबसे पहले लक्ष्य निर्धारित करें. आप किस क्षेत्र में क़ामयाबी पाना चाहते हैं, इस बारे में आपको एक प्रतिशत भी संदेह नहीं होना चाहिए. कोई आपसे नींद में भी पूछे कि आपको क्या हासिल करना है, तो आपको अपना लक्ष्य पता होना चाहिए.

महारत हासिल करेंः हर इंसान में कोई न कोई ख़ूबी ज़रूर होती है, हमें बस, उस ख़ूबी को पहचानना होता है. आप में वो कौन-सी बात है, जो दूसरों से ख़ास है, उसे अपनी ताक़त बनाइए. अपनी किसी एक ख़ूबी में इतनी महारत हासिल कर लीजिए कि आप उसके एक्सपर्ट बन जाएं. वो काम आप जैसा कोई न कर पाए, फिर आपको क़ामयाबी के शिखर तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकेगा.

समर्पित हो जाएंः अपने लक्ष्य के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हो जाएं और अपने काम से प्यार करें. जब आप ऐसा करेंगे तो आपको दिन-रात, सुबह-शाम का एहसास तक नहीं होगा और आप हर समय ख़ुशी-ख़ुशी अपना काम करते रहेंगे.

जी तोड़ मेहनत करेंः मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता. किसी भी क़ामयाब व्यक्ति के जीवन पर नज़र डालिए, उसने वहां तक पहुंचने के लिए आम लोगों से कई गुना ज़्यादा मेहनत की होती है. नंबर वन कहलाने के लिए आपको दूसरों से ज़्यादा मेहनत करनी ही होगी.

अपना कर्त्तव्य न भूलेंः हालात चाहे कितने ही विपरीत क्यों न हों, अपना कर्त्तव्य कभी न भूलें. लोग क्या कर रहे हैं इससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी है आप क्या सोचते हैं. लालच या असमंजस की स्थिति में लोगों की नहीं, अपने मन की सुनें. तभी आप दूसरों से अलग बन सकेंगे. आपकी राह में लालच के कई मौ़के आएंगे, लेकिन छोटे लालच पर नहीं, बड़े लक्ष्य पर नज़र रखें.

आत्मविश्‍वास बनाए रखेंः क़ामयाबी की राह में कई मोड़ ऐसे भी आएंगे जो आपको कमज़ोर बना सकते हैं, ऐसे में ख़ुद पर विश्‍वास ही आपको आगे बढ़ने में मदद करेगा. अतः परिस्थिति चाहे कितनी ही विपरीत क्यों न हो, अपना आत्मविश्‍वास कभी डगमगाने न दें.

सीखने की लगनः एकसपर्ट वही बनते हैं जो हमेशा सीखने के लिए तत्पर रहते हैं. हम सब जीवन के आख़िरी पड़ाव तक कुछ न कुछ सीखते रहते हैं इसलिए सीखने का कोई भी मौक़ा हाथ से जाने न दें. आप जितना सीखेंगे, उतने पारंगत होते चले जाएंगे.

दूसरों का सम्मान करेंः सम्मान उन्हें ही मिलता है जो दूसरों को सम्मान देना जानते हैं. आप चाहे कितने ही परेशान क्यों न हों, अपना ग़ुस्सा किसी और पर कभी न उतारें. छोटे-बड़े सभी का सम्मान करें, तभी आप सही मायने में क़ामयाब कहलाएंगे.

टीम स्पिरिट बनाए रखेंः आप अकेले बहुत दूर तक नहीं चल सकते. किसी भी काम को अंजाम देने के लिए आपको लोगों की ज़रूरत पड़ेगी ही. इसके लिए टीम स्पिरिट के साथ आगे बढ़ें.

मुस्कुराते रहेंः हंसते-मुस्कुराते सरल लोग सभी को पसंद आते हैं और क़ामयाबी उन्हें ही मिलती है जो लोकप्रिय होते हैं. लोग आपसे मिलकर अच्छा महसूस करें, इसके लिए अपना उत्साह कभी कम न होने दें और हमेशा मुस्कुराते रहें.

– कमला बडोनी

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