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तुम्हारी तैयारी हो तो वसंत कभी भी आ सकता है – ओशो (If You Are Ready, Spring Can Come Anytime – Osho)

यहां उत्सव मनाया जा रहा है, क्योंकि यहां आनंद घटा है, घट रहा है। यहां धीरे-धीरे लोग आनंद के स्वाद में तल्लीन होते जा रहे हैं. यहां वीणा बजी है, धीरे-धीरे बहरे से
बहरे कानों को भी सुनाई पड़ने लगी है। बीन के बजने पर जैसे सांप नाच उठता है, ऐसे आनंद के भीतर बजने पर तुम भी नाच उठोगे; उसी नाच का नाम उत्सव है।

Osho

उत्सव का अर्थ है: अनुग्रह। उत्सव का अर्थ है: धन्यवाद। उत्सव का अर्थ है: मुझ अपात्र को इतना दिया! इतना जिसकी न मैं कल्पना कर सकता था न कामना! मेरी झोली में पूरा आकाश भर दिया! मेरे हृदय में पूरा अस्तित्व उड़ेल दिया! मेरे इस छोटे से घट में शाश्‍वत अमृत डाल दिया! अब मैं क्या करूं?

उस अपूर्व आनंद की स्थिति में नाचोगे नहीं? गाओगे नहीं? उल्लास, उमंग, उत्साह न जगेगा? हजार-हजार रूपों में जगेगा। उसका नाम उत्सव है। आनंद का अनुभव और फिर
वाणी से उसे कहने का उपाय न मिलने के कारण उत्सव पैदा होता है। उत्सव आनंद की अभिव्यक्ति है- शब्द में नहीं; जीवन में, आचरण में।

जो लोग बाहर से देखते हैं, जो कभी यहां आते भी नहीं, उन्हें तो यही लगता है कि राग-रंग चल रहा है। यहां उत्सव पैदा हुआ है। और स्वभावतः, परमात्मा भी उतरे तुम्हारे
भीतर तो भी तुम्हारा उत्सव तो बहुत कुछ वैसा ही होगा न जैसा जगत का होता है। किसी को धन मिल जाए और नाच उठे और मीरा को कृष्ण मिले और मीरा नाच उठी।
अगर तुम नाच ही देखोगे तो दोनों का नाच एक जैसा ही मालूम होगा, क्योंकि नाच तो देह से प्रकट हो रहा है। लेकिन कारण भिन्न-भिन्न हैं। मीरा इसलिए नाच रही है कि ध्यान मिला, और तुम इसलिए नाच रहे हो कि लॉटरी मिल गई। दोनों के कारण भिन्न हैं।

आनंद फैलाव है, दुख सिकुड़ाव है। तुमने अनुभव भी किया होगा, जब तुम दुखी होते हो तो बिल्कुल सिकुड़ जाते हो। जब तुम दुखी होते हो, तुम द्वार-दरवाजे बंद करके एक कोने में पड़े रहते हो। तुम चाहते हो कोई मिले न, कोई बोले न, कोई देखे न, कोई दिखाई न पड़े। बहुत दुख की अवस्था में आदमी आत्मघात तक कर लेता है। वह भी सिकुड़ने का ही अंतिम उपाय है। ऐसा सिकुड़ जाता है कि अब दोबारा न देखना है रोशनी सूरज की, न देखना है चेहरे लोगों के, न देखना है खिलते गुलाब। जब अपना गुलाब न खिला, जब अपना सूरज न उगा, जब अपने प्राण न जगे, तो अब दुनिया जागती रहे इससे क्या, हम तो सोते हैं!

विराट के साथ एक हो जाना आनंद। लेकिन आनंद को समा तो न सकोगे। आनंद तो उछलेगा। आनंद तो अभिव्यक्त होगा। आनंद तो बजेगा हजार-हजार रागों में। आनंद तो
बरसेगा हजार-हजार रंगों में। वही उत्सव है।

नाचो, गाओ, ध्यान में डूबो… ओशो से जानिए सच्ची ख़ुशी क्या है… देखें ये वीडियो:

आनंद है आत्म-अनुभव। उत्सव है परमात्मा के प्रति धन्यवाद।

जिन कुंजों में श्याम विहंसते राधा का भी ध्यान वहीं है।
नेक अनेक देख छवि मैंने मधुकर व्रत ले झूला डाला,
फूली डाल कदंब बिना ऋतु गलबांही की सरसी माला;
जहां जहां श्यामा रस गर्वित छवि का नवल विधान वहीं है।
जिन कुंजों में श्याम विहंसते राधा का भी ध्यान वहीं है।

और अगर तुम्हारी तैयारी हो तो बिना ऋतु भी कदंब की डाल फूल जाए। और तुम्हारी तैयारी हो तो कभी भी वसंत आने को तैयार है। वसंत द्वार पर खड़ा है। मधुमास तुम्हारी झोली भर देने को आतुर है… फूलों से, तारों से।

और तुम्हें थोड़ी-थोड़ी झलक मिलने लगे श्याम की, सत्य की, या स्वयं की, कि बस तुम्हारे जीवन में झूला डला! कि आया सावन! कि आया गीत गाने का मौसम! कि पैरों में घूंघर बांधने का क्षण! कि ढोलों पर थाप देने का क्षण! कि बजे अब बांसुरी! यह सुनते हो दूर कोयल की कुहू-कुहू! ऐसे ही तुम्हारे प्राणों में भी कोयल छिपी है। तुम्हारे अंतरतम में भी पपीहा है, जो पुकार रहा है-पी कहां! मगर तुम्हारे सिर में इतना शोरगुल है कि उस शोरगुल के कारण तुम सुन नहीं पाते।

आनंद है अनुभव। लेकिन हमारे मन की आदतें तो दुख ही दुख की हैं। शिकायत, निंदा, विरोध, ये हमारी मन की आदतें हैं। इन आदतों से जागो तो आनंद तो अभी घट जाए… इसी क्षण, यहीं! क्योंकि सारा अस्तित्व आनंद से भरपूर है, लबालब है। सिर्फ तुम उसे अपने भीतर लेने को राजी नहीं हो। तुम्हारे द्वार-दरवाजे बंद हैं।

प्रेम आत्मा का भोजन है… ओशो से जानिए प्रेम का सही अर्थ, देखें ये वीडियो:

खोलो द्वार-दरवाजे! ये तुम्हारी सारी इंद्रियां आनंद के द्वार बनें। यह तुम्हारी देह आनंद को झेलने के लिए पात्र बने। यह तुम्हारा मन आनंद को अंगीकार करने के योग्य शांत
बने। ये तुम्हारे प्राण आनंदित होने के योग्य विस्तीर्ण हों। फिर जो होगा वह उत्सव है। फिर तुम भी चांद-तारों के साथ, फूलों के साथ, वृक्षों के साथ, हवाओं के साथ नाच सकोगे। उत्सव आनंद की अभिव्यक्ति है।

उत्सव आमार जाति पुस्तक से /सौजन्य ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन

श्रद्धा एवं जागरूकता मनुष्य को ज्ञानी बनाते हैं – गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर (Faith And Awareness Makes Humans Knowledgeable – Gurudev Sri Sri Ravi Shankar)

श्रद्धा और सजगता, दोनों एक दूसरे के विरोधाभासी लगते हैं। जब तुम पूर्णतः जागरूक होते हो तो अक्सर श्रद्धा नहीं रहती और तुम व्याकुल एवं असुरक्षित महसूस करते हो। जब तुम किसी पर पूर्ण विश्वास कर के चलते हो अर्थात श्रद्धा से चलते हो, तब मन पूर्ण रूप से शांत एवं सुरक्षित महसूस करता है और विश्राम में रहता है। पर, तब तुम जागरूक नहीं रहते!

Gurudev Sri Sri Ravi Shankar

श्रद्धा तीन प्रकार की होती है

1) तामसिक श्रद्धा 
तामसिक श्रद्धा आलस्य से उत्त्पन्न होती है। जैसे, जब तुम कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते हो, या आलस्यवश कोई काम नहीं करना चाहते, तब तुम कहते हो कि, ‘कोई बात नहीं, भगवान सब ठीक कर देंगे।’ (सब हंसते हैं।)

2) राजसिक श्रद्धा
जब तुम इच्छा और तृष्णा के तीव्र वेग के कारण श्रद्धा का सहारा लेते हो, तब इच्छापूर्ति की तीव्र पिपासा ही तुम्हारी श्रद्धा को जीवित रखती है। ये राजसिक श्रद्धा है।

3) सात्विक श्रद्धा
ऐसा विश्वास, ऐसी श्रद्धा जो निष्कपट हो, भोलापन लिए हो और जो हमारी चेतना की पूर्णता से उत्पन्न हुई हो, वह सात्विक श्रद्धा है।

 

श्रद्धा से यदि इच्छा पूरी न हो तो क्या करें? जानने के लिए देखें गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का ये वीडियो:

 

श्रद्धा एवं जागरूकता मनुष्य को ज्ञानी बनाते हैं
श्रद्धा एवं जागरूकता भले ही एक दूसरे के विरोधाभासी लगते हों, परन्तु वे एक दूसरे के पूरक है| श्रद्धा के बिना तुम्हारा आंतरिक विकास संभव नहीं है। और, बिना सजगता के तुम कुछ भी भली-भांति समझ नहीं पाओगे। श्रद्धा तुम्हे आनंद के मार्ग पर ले जाती है और सजगता तुम्हें व्याकुल रखती है।

जहां विश्वास ( श्रद्धा) नहीं है वहां भय रहता है, और जब जागरूकता कि कमी हो तो न तो तुम कुछ ठीक से समझ पाओगे और न ही उसे ठीक से व्यक्त कर पाओगे। अतः दोनों का मिश्रण अत्यंत आवश्यक है।

ज्ञान में स्थित होकर सजग रहने से तनाव विहीनता आती है, श्रद्धा आती है और आनंद आता है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है श्रद्धा से उत्पन्न मूर्खता (राजसिक श्रद्धा) के तत्वों अर्थात आलस्य को मिटाना एवं जागरूकता से उत्पन्न भय और व्याकुलता को भी मिटाना। यह एक अनोखा एवं अतुल्य मिश्रण है। अगर तुम्हारे अन्दर श्रद्धा एवं जागरूकता एक साथ दोनों ही हैं तो तुम सही मायनों में एक ज्ञानी बन जाओगे।

 

श्रद्धा एवं जागरूकता को सही मायने में समझने के लिए देखें गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का ये वीडियो:

 

10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स आपको देंगे ख़ुशी और कामयाबी (10 New Year Resolutions For Happiness And Success)

10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स (New Year Resolutions) आपकी ज़िंदगी में ख़ुशी और कामयाबी लेकर आएंगे. आप भी इस साल ये 10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स बनाएं और अपनी ज़िंदगी को खुशहाल और कामयाब बनाएं. हमारे अधिकतर न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स इसलिए फेल हो जाते हैं, क्योंकि वो या तो रियलिस्टिक यानी वास्तविक नहीं होते या फिर हम आधे-अधूरे मन से रेज़ोल्यूशन्स बना तो लेते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने का प्रयास ही नहीं करते. नए साल के जोश में हम बड़े-बड़े रेज़ोल्यूशन्स तो बना लेते हैं, लेकिन हफ़्तेभर या महीनेभर में ही हम उन्हें फॉलो करना बंद कर देते हैं. न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स ऐसे होने चाहिए, जो रोज़ हमारा हौसला बढ़ाएं और हमारी ज़िंदगी को दिन-प्रतिदिन बेहतर बनाएं. इस साल आप भी ऐसे ही 10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स बनाएं और अपनी ज़िंदगी को खुशहाल और कामयाब बनाएं.

 

1 टाइम मैनेजमेंट
हम समय का स़िर्फ एक बार ही इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि गुज़रा हुआ व़क्त कभी लौटकर नहीं आता यानी हम समय को रीसाइकिल नहीं कर सकते. अतः कभी ये न कहें कि ये काम अगली बार करेंगे. हो सकता है, अगली बार आप व़क्त गंवा चुके हों और गुज़रा हुआ व़क्त आपसे कहे कि अब बहुत देर हो चुकी है. ऑफिस, फैमिली, सोसाइटी, सोशल मीडिया, फ्रेंड्स… सभी को आपका टाइम चाहिए, लेकिन आपके पास सीमित समय है, इसलिए समय का सही इस्तेमाल करें. सही टाइम मैनेजमेंट करनेवाले लोग ही ज़िंदगी की रेस में आगे रहते हैं, इसलिए अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में टाइम मैनेजमेंट को सबसे ऊपर रखें.

2 सीखने का शौक़
कामयाब लोगों की ये सबसे बड़ी निशानी है कि वो हमेशा कुछ न कुछ नया सीखते रहते हैं. जब भी हम कुछ नया सीखते हैं, तो हमारे दिमाग़ की सक्रियता बढ़ जाती है और हम ख़ुद में एक नई ऊर्जा महसूस करते हैं. इसलिए आप भी कुछ न कुछ सीखते रहें. म्यूज़िक, डांस, स्विमिंग, पेंटिंग या फिर अपने जॉब से संबंधित कोई स्किल… जिस चीज़ में आपकी रुचि हो, वो ज़रूर सीखें. सीखने से आप हमेशा दूसरों से एक क़दम आगे रहते हैं, जिससे आपका आत्मविश्‍वास बढ़ता है और आप कामयाबी हासिल कर पाते हैं.

3 फिटनेस रेज़ोल्यूशन
हेल्दी बॉडी हेल्दी माइंड यूं ही नहीं कहा जाता. जब आप फिट और हेल्दी होते हैं, तो आप अच्छा महसूस करते हैं और इसकी ख़ुशी आपके चेहरे और व्यवहार में भी साफ़ नज़र आती है. यही वजह है कि फिट और हेल्दी लोग हमेशा अपने आसपास पॉज़ीटिविटी बनाए रखते हैं और ऐसे लोगों को हमेशा कॉम्प्लीमेंट्स मिलते हैं. जब आपको ये मालूम होता है कि आप दूसरों से फिट और हेल्दी हैं, तो आपका कॉन्फिडेंस अपने आप बढ़ जाता है और आप अपना हर काम पूरे आत्मविश्‍वास से करने लगते हैं, जिससे आपकी कामयाबी बढ़ती जाती है. आप भी फिट और हेल्दी बने रहने का रेज़ोल्यूशन बनाएं और योग, ध्यान, एक्सरसाइज़, हेल्दी डायट आदि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें.

4 मी टाइम
आज की इस भागदौड़भरी ज़िंदगी में किसी के पास व़क्त नहीं है. हम कमा तो बहुत रहे हैं, हमारे पास भौतिक सुख-सुविधाएं भी भरपूर हैं, लेकिन अपने लिए ही व़क्त नहीं है. ऐसी सुविधाओं का क्या लाभ जो ख़ुद आपके काम न आएं, इसलिए आज से ही अपने लिए थोड़ा व़क्त ज़रूर निकालें. इस मी टाइम में वो सब करें, जिससे आपको ख़ुशी मिलती है. यक़ीन मानिए, आपका ये मी टाइम आपके लिए टॉनिक का काम करेगा और आपको एक नई ऊर्जा से भर देगा. फिर आप अपना हर काम और अच्छी तरह कर पाएंगे.

5 आत्मनिर्भरता
कॉन्फिडेंस यानी आत्मविश्‍वास की कमी उन लोगों में होती है, जो दूसरों पर आश्रित रहते हैं. इसलिए कोशिश करें कि आप अपने किसी भी काम के लिए दूसरों पर आश्रित न रहें. जो लोग अपने काम ख़ुद करते हैं, वो कहीं भी बड़ी आसानी से एडजस्ट हो जाते हैं और उन्हें कभी किसी बात का डर नहीं लगता. इसकी शुरुआत आप अपने रोज़ के काम ख़ुद करके कर सकते हैं. जब आप अपने काम ख़ुद करने लगेंगे, तो आपका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और आप फिर अपने हर ़फैसले ख़ुद लेना सीख जाएंगे.

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New Year Resolutions

6 क्रोध पर काबू
क्रोध से अक्सर नुक़सान ही होता है अपना भी और दूसरों का भी. इसलिए क्रोध से बचें. हम क्रोध से बच तो नहीं सकते, लेकिन अपने क्रोध पर काबू ज़रूर पा सकते हैं. कई लोग क्रोध में ऐसे ़फैसले ले लेते हैं, जिनका पछतावा उन्हें उम्रभर होता है. आप ऐसा न करें. इसलिए अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में इस बात को भी ज़रूर शामिल करें कि आप क्रोध नहीं करेंगे और क्रोध में कोई ़फैसला नहीं लेंगे.

7 डिजिटल ब्रेक
टेक्नोलॉजी के साथ चलना ज़रूरी है, लेकिन ख़ुद को इतना डिजिटल बना देना भी सही नहीं कि टेक्नोलॉजी आप पर हावी हो जाए. आजकल ख़ासकर यंगस्टर्स दिनभर मोबाइल में बिज़ी रहते हैं, जिसके कारण उनकी पढ़ाई, हेल्थ यहां तक कि नींद भी प्रभावित होती है. सोशल मीडिया में तो वो हर जगह होते हैं, लेकिन अपने घर-परिवार के साथ व़क्त बिताना उन्हें बोरिंग लगता है. ऐसी स्थिति से बचने के लिए डिजिटल ब्रेक बहुत ज़रूरी है. नए साल में ये नियम बना लें कि आप डिजिटल वर्ल्ड में रहेंगे ज़रूर, लेकिन उतना ही, जितना आपके लिए
ज़रूरी है.

8 डर को डराएं
डरना एक स्वाभाविक क्रिया है. हम सभी को किसी न किसी चीज़ से डर ज़रूर लगता है, लेकिन कई बार ये डर हम पर इस क़दर हावी हो जाता है कि इससे हमारी दिनचर्या प्रभावित होने लगती है. कई लोगों का डर उन पर इस क़दर हावी हो जाता है कि वो अंधविश्‍वास की हद तक पहुंच जाता है. यदि आपके मन में भी कोई ऐसा डर है, जो आपकी ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो उससे बाहर निकलने की कोशिश करें. यदि आप ख़ुद अपने डर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तो अपने परिवार या एक्सपर्ट्स की मदद लें.

न्यूमरोलॉजी से आप अपने लिए बेस्ट करियर कैसे चुन सकते हैं, जानने के लिए देखें वीडियो:

9 बुरी आदतों से बचें
कई बार हम अपनी आदतों के इस कदर अधीन हो जाते हैं कि हमारी आदतें हमारी ज़िंदगी से बड़ी हो जाती हैं, ख़ासकर नशे की आदत. यदि आप में भी है कोई ऐसी बुरी आदत, जो आपके कंट्रोल से बाहर हो रही है, तो उससे बाहर निकलने का संकल्प लें. किसी चीज़ की आदत हो जाना और उस आदत को बदलना दोनों हमारे हाथ में होता है. यदि हम ठान लें, तो कोई भी आदत हम पर हावी नहीं हो सकती. अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में बुरी आदतों को बाय-बाय कहने का रेज़ोल्यूशन भी ज़रूर बनाएं.

10 देना सीखें
प्रकृति का ये नियम है कि हम जो बोते हैं, वही पाते हैं. इसलिए देना सीखें, तभी आप मनचाही चीज़ पा सकेंगे. ज्ञान, ख़ुशी, अपनापन ये सब ऐसी चीज़ें हैं, जिन्हें आप जितना बांटेंगे, ये उतनी ही बढ़ेंगी. अपेक्षा करनेवालों की तुलना में उन लोगों को हमेशा ज़्यादा मिलता है, जो देना जानते हैं, इसलिए आप भी देना सीखें. अपने आसपास हमेशा ख़ुशियां बांटें, ताकि आपको भी बदले में ख़ुशियां ही मिलें.
– कमला बडोनी

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जीवन के हर पल को उत्सव बनाएं (Celebration Of Life)

जीवन के हर पल को उत्सव बनाना इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि हमारे जीवन में अगले पल क्या होने वाला है, ये हम नहीं जानते. न हम अपना अतीत बदल सकते हैं और न ही भविष्य के बारे में जान सकते हैं, इसलिए जो पल हमारे पास है, उसे भरपूर जीएं. जीवन के हर पल को उत्सव बनाएं, सही मायने में सेलिब्रेशन इसे ही कहते हैं. जीवन के हर पल को उत्सव कैसे बनाएं? आइए, हम आपको बताते हैं.

Celebration Of Life

1) ख़ुश रहना सीखें
आपने अपने आसपास कुछ ऐसे लोगों को देखा होगा, जो हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते हैं. उन्हें देखकर लगता है जैसे उनके जीवन में कोई तकलीफ़ नहीं है और उनके लिए हर दिन उत्सव है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो लोग अपने जीवन और अपनी ख़ुशियों से बहुत प्यार करते हैं और ख़ुश रहने की हर मुमक़िन कोशिश करते हैं. जीवन के हर पल को उत्सव बनाने के लिए आप भी ऐसा ही करें.

2) ख़ुशी के मौ़के तलाशें
हम में से अधिकतर लोग ये समझते हैं कि ख़ुशी के मौ़के ही जीवन में ख़ुशियां लाते हैं, जैसे त्योहार, शादी, करियर में तरक्क़ी… लेकिन रोज़मर्रा की ख़ुशी? उसके बारे में हम सोचते ही नहीं हैं. ख़ुशी का कोई मौक़ा नहीं होता, आप चाहें तो हर पल ख़ुश रह सकते हैं और इसके लिए आपको अलग से कुछ करने की ज़रूरत भी नहीं है. आपको बस अपने जीने का नज़रिया बदलना होगा और अपने जीवन में पॉज़िटिविटी बनाए रखनी होगी. अतः त्योहार या किसी ख़ास दिन पर ही नहीं, हर रोज़ ख़ुश रहने की कोशिश करें, इससे जीवन में पॉज़िटिविटी आती है और हम जीवन का भरपूर लुत्फ़ उठा पाते हैं.

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Celebration Of Life

3) ख़ुशी जीवन का असली उत्सव है
सुख-दुख हर किसी के जीवन में लगे रहते हैं. आज सुख है, तो कल दुख भी हो सकता है. यदि हम दुख को अपने जीवन से बड़ा समझेंगे तो कभी ख़ुश नहीं रह पाएंगे, इसलिए दुख कितना बड़ा है इसके बारे में सोचने की बजाय ये सोचें कि इससे कैसे बाहर निकला जाए. जो लोग जीवन के प्रति पॉज़िटिव अप्रोच रखते हैं, वो मुसीबतों के बारे में कम और उनसे निपटने के रास्ते के बारे में ज़्यादा सोचते हैं, इसलिए वो बड़ी से बड़ी मुसीबतों का आसानी से सामना कर पाते हैं. अतः अपने जीवन और ख़ुशी को सबसे ज़्यादा महत्व दें और हमेशा ख़ुश रहें, क्योंकि ख़ुशी ही जीवन का असली उत्सव है.

4) त्योहार आपसे हैं, आप त्योहार से नहीं
यदि हम ख़ुशी को त्योहारों से जोड़कर देखें, तो यहां भी ख़ुशी कम और प्रेशर ज़्यादा नज़र आता है. त्योहारों की तैयारियों को लेकर, ख़ासकर महिलाएं इतना तनाव महसूस करती हैं कि वो त्योहार का आनंद ही नहीं उठा पातीं. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो हर काम परफेक्ट करना चाहती हैं और ऐसा हो नहीं पाता. व़क्त के साथ महिलाओं की ज़िम्मेदारियां बढ़ गई हैं, घर-ऑफिस की दोहरी ज़िम्मेदारियों के चलते वो अपनी मां या सास की तरह त्योहारों की तैयारियां नहीं कर सकतीं. अतः वर्किंग महिलाएं और उनके परिवार के सदस्य इस बात को समझें और मिल-जुलकर त्योहार की तैयारियां करें. परिवार के सभी सदस्य न स़िर्फ रोज़मर्रा के काम, बल्कि त्योहार के समय भी घर की वर्किंग महिलाओं का हाथ बंटाएं. इससे महिलाओं का तनाव कम होगा और वो त्योहार का पूरा लुत्फ़ उठा सकेंगी.

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Celebration Of Life

5) जानें त्योहार का सही अर्थ
हम सभी त्योहार के मौ़के पर घर की साफ़-सफ़ाई करते हैं, घर को और ख़ुद को भी सजाते-संवारते हैं, पूजा-पाठ करते हैं ताकि घर में सुख-शांति-समृद्धि बनी रहे, लेकिन इन सबसे कहीं ज़्यादा ज़रूरी हमारा ख़ुश रहना है. यदि हम मन से ख़ुश नहीं हैं, तो इन सब तैयारियों का कोई मतलब नहीं है. यदि हम मन से ख़ुश हैं, तो हमें दुनिया की हर चीज़ अच्छी लगती है और हर दिन त्योहार लगता है. ख़ुशी को समझना, उसे महसूस करना और उसे दूसरों में बांटना ही सही मायने में त्योहार है.

जल्दी अमीर बनने के लिए करें ये वास्तु उपाय, देखें वीडियो:

 

गुड मॉर्निंग से पहले ख़ुद से पूछें ये 5 सवाल (5 Inspiring And Motivational Thoughts To Start Your Day)

जैसे पृथ्वी के भीतर गुरुत्वाकर्षण की अद्भुत शक्ति होती है, ठीक उसी प्रकार हमारे भीतर भी आकर्षण की महाशक्ति मौजूद होती है. आकर्षण की इस शक्ति का प्रयोग करके हम अपने जीवन को और ख़ुशहाल व सकारात्मक बना सकते हैं और जिसकी शुरुआत हमें हर रोज़ सुबह करनी चाहिए. क्या हैं वे सकारात्मक बातें और सवाल, आइए जानते हैं.

Motivational Thoughts

करें सुबह की शुभ शुरुआत

–   सुबह आंखें खुलने पर एकदम झटके से न उठें.

–   भले ही आप अलार्म की आवाज़ के साथ उठते हैं, फिर भी दो मिनट तक बिस्तर पर यूं ही लेटे रहें.

–   उठते ही कामों की लिस्ट याद करने की बजाय सबसे पहले ईश्‍वर का नाम लेकर उन्हें धन्यवाद दें.

–   अगले एक मिनट में ख़ुद से कुछ सवाल पूछें, ताकि आपका पूरा दिन ऊर्जा और जोश से भरपूर हो.

–   कोशिश करें कि मुस्कुराएं और अपनी मुस्कुराहट को कुछ देर तक बनाए रखें.

–  अगर शरीर में कहीं तकलीफ़ है, तो भी मुस्कुराएं और ख़ुद से कहें कि आप जल्दी ही दर्दमुक्त हो जाएंगे.

पूछें ये 5 जादुई सवाल

हर सुबह हमारा नया जन्म होता है और हर दिन नई उम्मीदें, आशाएं और अवसर लेकर आता है. कभी-कभी ईश्‍वर हमें अपने चमत्कारों से आश्‍चर्यचकित कर देते हैं. जो आपने सोचा भी नहीं होता, वो भी आपको मिल जाता है. ऐसे में यह जादुई एहसास वाकई बहुत ख़ास होता है. तो आइए आपको भी बता दें कि कौन-से हैं वो पांच जादुई सवाल, जो आपको हर दिन पूछने चाहिए.

  1. मैं कैसा महसूस कर रहा/रही हूं?

–   आपके दिन की शुरुआत सेहत से होनी चाहिए, क्योंकि सेहत से बढ़कर कुछ भी नहीं.

– सबसे पहले ख़ुद से पूछें कि मैं कैसा महसूस कर रहा हूं? क्या मेरा शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य दुरुस्त है? मेरे शरीर में कहीं कोई तकलीफ़ तो नहीं? कहीं तनाव का असर मेरी मेंटल हेल्थ पर तो नहीं पड़ रहा?

–   इस बारे में सवाल करने पर आप इस तरफ़ ध्यान देंगे, क्योंकि आज भी बहुत-से लोग इमोशनल और मेंटल हेल्थ को उतनी तवज्जो नहीं देते.

–   अगर आपको कहीं भी ऐसा लग रहा है कि आप कमतर पड़ रहे हैं, तो थोड़ी और कोशिश करें और ख़ुद को ख़ुश व स्वस्थ रखें.

  1. आज का दिन कैसा होगा?

–   दूसरा सवाल ख़ुद से करें कि आज का दिन कैसा होगा. यक़ीनन हर दिन अपने साथ बहुत कुछ नया लेकर आता है.

–   आज का दिन मेरे लिए ढेरों ख़ुशियां लेकर आ रहा है. मैं ख़ुश हूं और दिनभर यह ख़ुशी, जोश और उत्साह बना रहेगा.

–   आज का दिन भी अपने साथ बहुत कुछ अच्छा लेकर आएगा. आज मैं अपने कुछ अधूरे वादे पूरे करने की कोशिश करूंगा.

  1. आज कौन-सी ख़ुशख़बरी मिलेगी?

–   दिनभर ख़ुद को उत्साहित रखने के लिए अपने दिन की शुरुआत इसी सवाल से करें. यक़ीन मानिए इस सवाल के साथ ही आपके चेहरे पर एक बड़ी-सी मुस्कान खिल जाएगी.

–   जो भी आप पाना चाहते हैं, उसकी एक लिस्ट अपनी आंखों के सामने लाएं और सोचें कि इसमें से ही एक ख़ुशख़बरी आज मुझे मिलेगी.

–   आपकी वाइब्स उस ख़ुशख़बरी को लाने के लिए सुबह से ही काम पर लग जाती हैं और जल्द ही आपको वो ख़ुशी नसीब होती है.

  1. क्या झुंझलाने से सब ठीक हो जाएगा?

–   बहुत-से लोग बीते हुए कल की समस्याओं, ईर्ष्या और नफ़रत जैसे नकारात्मक विचारों को ढोकर अगले दिन भी ले आते हैं और नए दिन की शुरुआत भी उसी नकारात्मकता से करते हैं.

–   अब बस दो मिनट के लिए शांत मन से सोचें कि झुंझलाने से क्या समस्या हल हो जाएगी? यक़ीनन जवाब ना में ही होगा. तो फिर ‘रात गई बात गई’ वाला फॉर्मूला अपनाएं और नए दिन की एक बेहतरीन नई शुरुआत करें.

  1. किस बात से मुझे सबसे ज़्यादा ख़ुशी मिलती है?

–  मोटिवेशनल स्पीकर्स की मानें, तो 100 में से 95 लोग इस पहलू की ओर ध्यान ही नहीं देते. माना कि आप अपनों से बहुत प्यार करते हैं और उनकी ख़ुशी के लिए ही सब कुछ करते हैं, पर अपनी ख़ुशी का भी ख़्याल रखें, वरना धीरे-धीरे आपके भीतर हताशा-निराशा घर करने लगेगी.

–   हर सुबह ख़ुद से अपनी ख़ुशियों के बारे में सवाल करें और उन्हें पूरा करने की ईमानदारी से कोशिश करें.

–   कुछ लोगों को लगता है कि ‘चल रहा है ना’ चलने दो, लेकिन ज़िंदगी ख़ुशी-ख़ुशी जीने के लिए है, चलाने के लिए नहीं, इसलिए अपनी ख़ुशियों को ख़ास तवज्जो दें.

–   छोटी-छोटी चीज़ें, जैसे- पानीपूरी खाना, आईस्क्रीम खाना, दोस्त को कॉल करना, किसी से दिल खोलकर बातें करना, झूला झूलना, पेड़ों को छूकर उनसे बातें करना आदि करके भी आप ख़ुश हो सकते हैं.

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Motivational Thoughts

थैंक्यू कहें, ख़ुश रहें

–   रोज़ाना सोकर उठने पर सबसे पहले ईश्‍वर को धन्यवाद दें कि आप ज़िंदा हैं, क्योंकि यही एक चीज़ है, जिसे लोग सबसे ज़्यादा ग्रांटेड लेते हैं. रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हम अक्सर ऐसे उदाहरण देखते हैं, जहां अचानक ही आपके जान-पहचान के लोग यूं ही दुनिया छोड़कर चले जाते हैं, फिर भी हम अपने जीवन को ग्रांटेड लेते हैं.

–   शुक्रिया अदा करें कि आप स्वस्थ हैं, क्योंकि जब आप अस्वस्थ होते हैं, तो जल्द से जल्द ठीक होना चाहते हैं, पर ठीक होते ही अपने शरीर को अनहेल्दी फूड और माइंड को निगेटिव बातों और स्ट्रेस से भर देते हैं और फिर बीमार पड़ जाते हैं, इसलिए ख़ुश हो जाएं कि आप स्वस्थ हैं. आपकी सकारात्मक सोच आपको सकारात्मक ऊर्जा देती हैं, जिससे आप और अच्छा महसूस करते हैं.

–   धन्यवाद दें कि आपके पास नौकरी या व्यवसाय है, जिसके कारण आप स्वाभिमान के साथ अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर पा रहे हैं, वरना बाहर बहुत-से लोग बेरोज़गार घूम रहे हैं, जिसके कारण वो डिप्रेशन का शिकार भी हो रहे हैं.

–   ईश्‍वर को धन्यवाद दें कि आपका परिवार है, दोस्त-रिश्तेदार हैं. आपके चाहनेवाले आपसे प्यार करते हैं, आपकी परवाह करते हैं, आपको स्पेशल फील कराने के लिए कुछ न कुछ करते रहते हैं, जबकि बहुत-से लोग अकेले हैं और अकेलापन उनकी ज़िंदगी को खोखला बना रहा है.

–   मुश्किल समय हमें बहुत कुछ सिखाता है. जब हम सबसे ज़्यादा मुसीबत में होते हैं, तब अपनी बहुत-सी पुरानी ग़लतियां याद आती हैं. बुरे हालात हमें लड़ने की ताक़त देते हैं. हमें सब्र और हिम्मत से काम लेना सिखाते हैं. ईश्‍वर को धन्यवाद दें कि उन्होंने आपको चैंलेंजेस दिए, वरना आप अपनी काबीलियत कभी पहचान ही नहीं पाते.

5 पावरफुल पैकेजेस 

हम आपकी भागदौड़ को अच्छी तरह समझते हैं, इसलिए अगर आपको लगता है कि आप रोज़ाना ये सवाल नहीं पूछ सकते, तो कोई बात नहीं आप हफ़्ते में तीन दिन सवाल के लिए रखें और तीन दिन पावरफुल पैकेजेस के लिए. सुबह सोकर उठने पर ये कहें-
1. मैं बेस्ट हूं.
2. मैं यह कर सकता हूं.
3. ईश्‍वर मेरे साथ हैं.
4. मैं विजेता हूं.
5. आज का दिन मेरा है.

– अनीता सिंह

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दोराहे (क्रॉसरोड्स) पर खड़ी ज़िंदगी को कैसे आगे बढ़ाएं? (Are You At A Crossroads In Your Life? The Secret To Dealing With Crossroads In Life)

हमारी ज़िंदगी (Life) में कई बार ऐसे मौ़के आते हैं, जब हमारे लिए निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है. हम चाहकर भी समझ नहीं पाते कि अब क्या करें. ऐसी स्थिति में दोराहे (Crossroads) पर खड़ी ज़िंदगी को कैसे आगे बढ़ाएं? ज़िंदगी में जब निर्णय लेना मुश्किल हो जाए, तो ऐसी स्थिति से कैसे उबरें, दोराहे पर खड़ी ज़िंदगी को आगे बढ़ाने के कुछ आसान रास्ते बता रही हैं काउंसलिंग सायकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ (Psychologist Dr. Madhavi Seth). डॉ. माधवी के अनुसार, इस स्थिति को सायकोलॉजी में कॉन्फ्लिक्ट कहते हैं. मॉडर्न सोशल सायकोलॉजी के फादर कहे जानेवाले कर्ट लुइन, जो एक सोशल सायकोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने कॉन्फ्लिक्ट थ्योरी पर गहन अध्ययन किया है. कर्ट लुइन का कहना है कि कॉन्फ्लिक्ट हर किसी की ज़िंदगी में होते हैं. आप उनसे बच तो नहीं सकते, लेकिन सही फैसला लेकर या बीच का रास्ता निकालकर आप इन कॉन्फ्लिक्ट्स से बाहर ज़रूर निकल सकते हैं. माधवी सेठ से हमने दोराहे पर खड़ी ज़िंदगी से जुड़ी कुछ स्थितियां शेयर कीं, जिनका हल उन्होंने कुछ इस तरह बताया.

Crossroads In Life

1) समस्या: मेरी शादी को आठ साल हो गए हैं, हमारे दो बच्चे हैं. दो साल पहले तक तो सब ठीक था, लेकिन दो साल से मेरे पति का अपने ऑफिस की कलीग से अफेयर चल रहा है. मेरे पति कहते हैं कि अब वो स़िर्फ उसे ही प्यार करते हैं, उन्हें अब मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं है. वो मुझसे तलाक़ चाहते हैं, लेकिन मैं उन्हें तलाक़ देकर आज़ाद नहीं घूमने देना चाहती. मेरे सास-ससुर मुझे बहुत प्यार करते हैं, लेकिन पति उनकी भी नहीं सुनते. सास-ससुर बच्चों के भविष्य के लिए चुपचाप सब कुछ सहने को कहते हैं, लेकिन मैं ये बात सहन नहीं कर पा रही हूं.
समाधान: आपकी जगह कोई भी महिला होती, तो वह पति का ऐसा व्यवहार सहन नहीं कर पाती. आप इस बारे में पति और सास-ससुर से खुलकर बात करें, उनसे बच्चों के भविष्य के बारे में डिस्कस करें. हो सके तो उस महिला से भी मिलें, जिससे पति का अफेयर चल रहा है. अगर ऐसा करने से स्थितियां सुधरती हैं, तो ठीक है, लेकिन इतना करने के बाद भी यदि आपके पति को आपका और बच्चों का ख़्याल नहीं आता, तो समझ लीजिए कि वो अपने नए रिश्ते में बहुत आगे निकल गए हैं. ऐसे में साथ रहने का कोई मतलब नहीं. आप एक बेवफ़ा इंसान के साथ ऐसे कितने दिनों तक एक छत के नीचे रह सकेंगी. बेहतर होगा कि आप अपने और बच्चों के भविष्य के बारे में सोचें और ज़िंदगी में आगे बढ़ें.

2) समस्या: मेरा बेटा एक रिलेशनशिप में नहीं रहता. वो कहता है कि मैं एक लड़की को बहुत दिनों तक डेट नहीं कर सकता. उसका बार-बार ब्रेकअप होता रहता है और उसे इसका दुख भी नहीं होता.
समाधान: आजकल के युवा रिलेशनशिप मेंटेनेंस की परवाह नहीं करते. ऐसी हरकत को इमोशनल डिनायल भी कह सकते हैं. ऐसे युवा भले ही अपने ब्रेकअप से दुखी हुए हों, लेकिन ये बात दूसरों पर ज़ाहिर नहीं होने देते, हर समय कूल दिखने की कोशिश करते हैं. जो युवा अपने इमोशन को दबा देते हैं, उन्हें ज़ाहिर नहीं करते, आगे चलकर वो डिप्रेशन के शिकार तक हो सकते हैं. कई बार ऐसे लोग आगे चलकर भावनाशून्य भी हो जाते हैं यानी उन पर किसी भी भावना का कोई असर नहीं होता, इसलिए बच्चों को अपनी भावनाएं स्वीकार करना सिखाएं, वरना आगे चलकर उन्हें रिलेशनशिप में बहुत द़िक्क़तें आ सकती हैं.

3) समस्या: मेरी शादी को पांच साल हो गए हैं और हमारा तीन साल का बेटा है. मेरे पति बिना ग़लती के बात-बात पर मुझ पर हाथ उठाते हैं और सास-ससुर भी उनका ही साथ देते हैं. मायके में शिकायत की, तो वो भी कहते हैं कि घर बचाने और बच्चे की ख़ातिर सहन कर लो, वरना तुम्हें कौन पालेगा. लेकिन मुझसे बार-बार ये बेइज़्ज़ती सहन नहीं होती.
समाधान: पति के हाथों बार-बार बिना ग़लती के मार खाना बहुत अपमानजनक है. आप कमाती नहीं हैं, तो इसका ये मतलब नहीं है कि आपकी कोई इज़्ज़त नहीं है. सबसे पहले तो आप स्वावलंबी बनने के लिए कोई काम शुरू कीजिए, इससे आपका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और आपके मन से अपने और बच्चे के भविष्य का डर निकल जाएगा. साथ ही पति और सास-ससुर से इस बारे में बात करें कि आप आगे से ये सब सहन नहीं करेंगी. अपने लिए आपको ख़ुद ही बात करनी होगी, ख़ुद ही आगे आना होगा.

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4) समस्या: हमारा इकलौता बेटा अमेरिका में सेटल हो गया है, उसकी बीवी भी वहीं नौकरी करती है. वो चाहते हैं कि हम वहां उनके साथ रहें, लेकिन वहां हमारा अपना कोई नहीं है. हमारा वहां मन नहीं लगता. बेटे-बहू के बिना हमारा यहां भी मन नहीं लगता. इस तरह ज़िंदगी कैसे कटेगी, समझ नहीं आता.
समाधान: ऐसी स्थिति में पैरेंट्स को समझदारी से काम लेना चाहिए. आप बेटे-बहू का भविष्य ख़राब नहीं कर सकते, इसलिए आपको बीच का रास्ता निकालना चाहिए. ये सच है कि पूरी ज़िंदगी अपने देश में बिताने के बाद विदेश में रहना मुश्किल है, लेकिन अकेले रहना भी तो संभव नहीं. ऐसे में पैरेंट्स को विन-विन सिचुएशन अपनानी चाहिए यानी अपनी सुविधानुसार दोनों जगहों पर रहना चाहिए. आप चाहें तो त्योहारों के समय या सर्दियों में अपने देश में रह सकते हैं और गर्मियों में या फ्री टाइम में बेटे-बहू के साथ विदेश में रह सकते हैं. ऐसा करके आप बिज़ी भी रहेंगे और ख़ुश भी. ज़िद करके आप भी दुखी रहेंगे और आपके बच्चे भी. बच्चों की और अपनी सुविधानुसार समाधान निकाल लीजिए.

5) समस्या: हमारी शादी को एक साल हो गया है. अभी कुछ दिन पहले ही मेरी पत्नी ने मुझे बताया कि शादी से पहले उसका अफेयर था और ब्रेकअप के बाद से उन दोनों ने न कभी एक-दूसरे को फोन किया और न ही कभी एक-दूसरे से मिले. लेकिन पत्नी की पिछली ज़िंदगी का सच जानने के बाद मैं उसके साथ नॉर्मल व्यवहार नहीं कर पा रहा हूं. मुझे लगता है कि वो मन ही मन उसकी तुलना मुझसे करती होगी. मेरे साथ रहते हुए भी उसके ख़्यालों में वो ही रहता होगा. अब मैं अपनी पत्नी के साथ पहले की तरह बेहिचक नहीं रह पा रहा हूं.
समाधान: आप सबसे पहले अपनी पत्नी की जगह ख़ुद को रखकर देखिए. अगर आपके साथ ऐसा हुआ होता, तो आप क्या करते? आपकी पत्नी ने अपनी बीती ज़िंदगी के बारे में आपको ईमानदारी से सब कुछ बताया और अब वो बीती बातों को भूलकर ज़िंदगी में आपके साथ आगे बढ़ चुकी है. फिर आप क्यों उनकी पिछली ज़िंदगी के बारे में सोचकर अपना आज ख़राब कर रहे हैं. आप भी बीती बातों को भूल जाइए और अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बनाइए.

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How To Deal With Crossroads In Life

6) समस्या: मेरे पापा का ऑटोमोबाइल का बिज़नेस है, लेकिन मैं फोटोग्राफी में करियर बनाना चाहता हूं. मेरे पापा ने अपने इस बिज़नेस को खड़ा करने में अपनी पूरी ज़िंदगी लगा दी, अब वो चाहते हैं कि मैं अपना पैशन छोड़कर उनका काम संभालूं, लेकिन मेरा बिज़नेस में ज़रा भी मन नहीं लगता. मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं.
समाधान: जहां तक करियर की बात है, तो ज़िंदगी का ये फैसला हमें ख़ुद ही लेना होता है. कई बार ऐसा भी होता है कि जिस काम को हम अपना पैशन समझते हैं, जब हम उसे करने बैठते हैं, तो समझ आता है कि ये मात्र हमारा शौक था, हम उस काम के लिए बने ही नहीं थे. आपको सबसे पहले अपने पैशन को पहचानना होगा. यदि फोटोग्राफी वाकई आपका पैशन है, तो आप उसके बिना नहीं रह पाएंगे. ऐसे में आप यदि बेमन से अपने पिता का बिज़नेस संभालेंगे, तो शायद उसे उस मुक़ाम तक न पहुंचा सकें, जहां आप अपने मनपसंद करियर को पहुंचा सकते हैं. आपको अपने पापा से इस बारे में बात करनी चाहिए और अपने पैशन के लिए काम करना चाहिए. आपके पापा अपने बिज़नेस को इसलिए इतना आगे बढ़ा पाए, क्योंकि ये उनका पैशन था. इसी तरह आपको अपने पैशन को ही करियर बनाना चाहिए.

7) समस्या: मैं एक हाउसवाइफ हूं. मेरा बचपन एक छोटे शहर में बीता. मेरी शादी मुंबई के लड़के से हुई, इसलिए शादी के बाद मैं यहां आ गई. मेरे पति और ससुराल वालों को लगता है कि मेरा रहन-सहन, बातचीत करने का तरीक़ा उन जैसा नहीं है. मेरे पति मुझे कहीं घुमाने-फिराने, पार्टी वगैरह में नहीं ले जाते. मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता, इससे मेरा कॉन्फिडेंस कम होता जा रहा है.
समाधान: सबसे पहले इस बात पर ध्यान दें कि आपके पति या ससुरालवाले आपके साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं. आपमें वाकई कमी है या वो आपको नीचा दिखाने के लिए ऐसा करते हैं. यदि आप में कमी है, तो आप अपनी पर्सनैलिटी को निखारने की कोशिश करें और यदि वो स़िर्फ आपको नीचा दिखाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो उनसे इस बारे में बात करें और कहें कि आप ये सब सहन नहीं करेंगी.

8) समस्या: मेरी उम्र 30 साल है. मेरी प्रॉब्लम ये है कि मैं अफेयर तो कर लेता हूं, लेकिन जैसे ही बात शादी तक पहुंचती है, तो मैं डर जाता हूं और ब्रेकअप कर लेता हूं. मैं शादी की ज़िम्मेदारी लेने से डरता हूं.
समाधान: ये आपकी अकेले की प्रॉब्लम नहीं है, आजकल अधिकतर युवा कमिटमेंट फोबिया के शिकार हैं. वो अफेयर तो करना चाहते हैं, लेकिन शादी की ज़िम्मेदारी नहीं उठाना चाहते. कई लोग शादी तो कर लेते हैं, लेकिन बच्चे की ज़िम्मेदारी नहीं उठाना चाहते. ये आपको तय करना होगा कि यदि आपको सेटल्ड लाइफ चाहिए, तो आपको उसकी ज़िम्मेदारियां उठाने के लिए भी तैयार रहना होगा.

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9) समस्या: मेरे शादी को पांच साल हो गए हैं. मेरा चार साल का बेटा है. कुछ समय पहले मेरे पति की अचानक एक्सीडेंट में मौत हो गई. अब मेरे ससुराल वाले चाहते हैं कि मैं अपने देवर से शादी कर लूं, लेकिन मेरा मन उसे अपना पति मानने को तैयार ही नहीं है. मैंने कभी अपने देवर को उस नज़र से देखा ही नहीं है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं.
समाधान: आपकी स्थिति में फैसला लेना वाकई मुश्किल होता है. पति को खोने का दर्द, बच्चे के भविष्य की चिंता, अपनी ज़िंदगी की फिक्र… आपके मन में न जाने कितनी उथल-पुथल मच रही होगी. यदि आप अभी फैसला नहीं ले पा रही हैं, तो ख़ुद को थोड़ा और टाइम दीजिए. किसी भी इंसान को अपनी ज़िंदगी में शामिल करने से पहले उसे मन से स्वीकार करना ज़रूरी होता है. यदि आप अपने देवर को पति के रूप में नहीं स्वीकार कर पाएंगी, तो उनके साथ ख़ुश नहीं रह पाएंगी इसलिए अपनी ज़िंदगी का फैसला सोच-समझकर लें, जिसमें आपकी और आपके बच्चे दोनों की ख़ुशी शामिल हो.

– कमला बडोनी

क्या रिश्ते स्वर्ग में बनते हैं? जानने के लिए देखें वीडियो:

मन की बात लिखने से दूर होता है तनाव (Writing About Your Emotions Can Help Reduce Stress)

मन (Mind) की बात लिखने (Writing) से दूर होता है तनाव (Tension) और ये बात बिल्कुल सही है. मन की बात कहने के लिए जब आसपास कोई न हो, तो काग़ज़-कलम को अपना साथी बना लीजिए. ख़ुशी, ग़म, उदासी… अपने मन के हर भाव को काग़ज़ पर उतार दीजिए. मन की बात काग़ज़ पर लिख देने से मन हल्का हो जाता है.

Reducing Stress Tips

डायरी लिखें
सपनों, आकांक्षाओं, उम्मीदों और विचारों का डेरा है मन… और जिस मन पर इतना बोझ हो, उसे कभी-कभी हल्का करना भी ज़रूरी है. मन का बोझ हल्का करने का सबसे आसान तरीक़ा है किसी से बात करना, लेकिन जब आपके पास बात करने के लिए कोई न हो या जो व्यक्ति आपके सामने है उससे आप अपने दिल के राज़ साझा नहीं कर सकते, तो सबसे बेहतर विकल्प है डायरी लिखना. डायरी के पन्नों पर अपने मन के विचार चाहे वो अच्छे हों या बुरे लिख दें. इससे न स़िर्फ आपके दिल का बोझ उतर जाएगा, बल्कि आप बाद में अपने लिखे हुए शब्दों पर विचार करके सही-ग़लत का ़फैसला भी कर सकते हैं. दूसरों के सामने कुछ कहते समय जहां आपको इस बात का ख़्याल रखना पड़ता है कि कहीं वो आपकी बातों का ग़लत मतलब न निकाल ले, वहीं मन की बात लिखते समय ऐसा कोई डर नहीं रहता, जो जी में आए आप वो सब लिख सकते हैं.

लिखी हुई भावनाओं को आप फिर से जी सकते हैं
जब भी आप जीवन में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करें, तो उस पल की ख़ुशी को डायरी के पन्नों पर शब्दों में बयां कर दें. कुछ समय बाद जब आप उन पन्नों को पलटकर देखेंगे, तो उस पल को फिर से जी सकेंगे, अपनी उपलब्धि पर एक बार फिर नाज़ कर सकेंगे. ज़िंदगी की कुछ ऐसी बातें या पल जिन्हें आप जीवनभर याद रखना चाहते हैं, उन्हें संजोए रखने का सबसे अच्छा तरीक़ा है उन्हें लिख लेना.

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मन की बात लिख देने से मन हल्का हो जाता है
किसी बात पर आपका पड़ोसी से झगड़ा हो जाए या ऑफिस में कलीग आपसे उलझ जाए, उस समय संकोचवश आप उससे कुछ नहीं कहते, लेकिन मन ही मन उसे भला-बुरा कहते रहते हैं. ऐसी स्थिति में अपने मन की भड़ास काग़ज़ पर उतार दें. इससे जहां आपका ग़ुस्सा शांत हो जाएगा, वहीं आप उस बात पर फिर से विचार कर पाएंगे कि आख़िर झगड़ा हुआ क्यों? पुनर्विचार से कई बार एहसास होता है कि बेकार की बातों को तूल देकर हम अपना मूड और रिश्ता दोनों ख़राब कर रहे हैं. इस तरह मंथन करने से हमारे मन से नफ़रत की भावना निकल जाती है और मन हल्का हो जाता है.

मन की बात लिखने से बनी रहती है सेहत
किसी के प्रति घृणा और ग़ुस्से के भाव को बहुत दिनों तक मन में दबाए रखने से आप तनाव, अवसाद आदि के शिकार हो सकते हैं. इन भावों को आप दूसरों के सामने व्यक्त भी नहीं कर सकते. ऐसे में इन भावों को लिख देने से तनाव दूर होता है और मन शांत हो जाता है, जिससे सेहत भी बनी रहती है.

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