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इस समय जब पूरे विश्व में डर और नकारात्मकता छाई हुई है, ऐसे में सकारात्मक जीवन जीने के 10 आसान उपाय आपके बहुत काम आ सकते हैं. इस समय आपके मन में भी आनेवाले कल को लेकर असमंजस और डर की भावना घर कर रही होगी. दिनभर घर में कैद रहना बोझ लग रहा होगा, लेकिन इस समय को यदि हम अच्छे अवसर की तरह देखें, तो हमें कुछ भी नकारात्मक नहीं लगेगा. दरअसल, परिस्थिति चाहे कितनी ही मुश्किल क्यों न हो, यदि हम उस स्थिति से बाहर निकलने की ठान लें, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं. रात चाहे कितनी ही काली, कितनी ही गहरी क्यों न हो, रात के बाद सवेरा होता ही है. इसी तरह जीवन में चाहे कितनी ही तकलीफ क्यों न आए, दुःख के बादल छंट ही जाते हैं और ज़िंदगी खुशियों से मुस्कुराने लगती है. कोरोना के इस कहर में आइए, हम आपको सकारात्मक जीवन जीने के 10 आसान उपाय बताते हैं.

10 Easy Ways To Live A Positive Life

1) ईश्वर को धन्यवाद कहें
सुबह उठकर सबसे पहले मुस्कुराइए और ईश्वर को धन्यवाद कहिए कि उसने आपको इंसान के रूप में इतना सुंदर जीवन दिया है. जब हम ईश्वर को धन्यवाद कहते हैं, तो हमारे मन में अपने जीवन को लेकर संतुष्टि का भाव आता है और हम जीवन को सकारात्मक तरीके से देखने लगते हैं.

2) प्रार्थना करना कभी न भूलें
प्रार्थना करना सकारात्मक जीवन जीने का सबसे आसान तरीका है. प्रार्थना करना हमें नम्र बनाता है, दूसरों का भला सोचना सिखाता है इसलिए ईश्वर की हमेशा प्रार्थना करें. हमें स्कूल में भी इसीलिए पढ़ाई करने से पहले प्रार्थना करने के लिए कहा जाता है.

3) योग और मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाएं
जो लोग रोज़ योग और मेडिटेशन करते हैं, वो हमेशा सकारात्मक रहते हैं. योग और ध्यान हमें जीवन के हर उतार-चढ़ाव में आगे बढ़ना सिखाते हैं और अपने लक्ष्य से कभी भटकने नहीं देते, इसलिए योग और मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाएं और हमेशा सकारात्मक बने रहें.

4) हर हाल में ख़ुद से प्यार करें
आपकी परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, हर हाल में ख़ुद से प्यार करें. जब आप ख़ुद से प्यार करेंगे, तो ही दूसरों को भी प्यार दे सकेंगे. जो लोग ख़ुद से प्यार करते हैं, वो हमेशा खुश रहते हैं और दूसरों को भी ख़ुशी देते हैं.

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10 Easy Ways To Live A Positive Life

5) फिट और हेल्दी रहें
हेल्थ इज़ वेल्थ- ये कहावत आपने ज़रूर सुनी होगी. हम चाहे कितने ही संपन्न क्यों न हों, यदि हम हेल्दी नहीं हैं, तो हम जीवन का लुत्फ़ नहीं उठा सकते. फिट और हेल्दी व्यक्ति हमेशा कॉन्फिडेंट नज़र आता है, इसलिए अपने शरीर का हमेशा ध्यान रखें और हमेशा फिट और हेल्दी बने रहें.

6) अच्छे कपडे पहनें और बनठन के रहें
ये बात सुनकर आपको हंसी आ सकती है, लेकिन आप ये बात आज़माकर देखिए. जब आप बनठन कर रहते हैं तो आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ जाता है. आप कहीं भी जाने, किसी से भी मिलने के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं, लेकिन आपने यदि अच्छे कपड़े नहीं पहने हैं या आप अच्छे नहीं दिख रहे हैं, तो आप लोगों से मिलने से कतराते हैं, आपका कॉन्फिडेंस कम हो जाता है.

7) दोस्तों से मिलें
आप चाहे कितने ही व्यस्त क्यों न हों, कुछ समय अपने दोस्तों के लिए ज़रूर निकालें. दोस्तों से मिलकर आपको ख़ुशी होगी और आपको ज़िंदगी और ख़ूबसूरत लगने लगती है. दोस्तों की तरह ही अपने से कम उम्र के लोगों के साथ समय बिताएं यानी अपने बच्चों के साथ समय बिताएं. बच्चों के साथ आप खुश भी रहेंगे और खुद को युवा भी महसूस करेंगे.

8) अपने शौक के लिए समय निकालें
हमारे शौक हमें कभी बूढ़ा नहीं होने देते, इसलिए अपनी बिज़ी लाइफस्टाइल में भी अपने शौक के लिए ज़रूर समय निकालें. जब आप अपना मनपसंद काम करते हैं, तो आप खुश रहते हैं और आपको ज़िंदगी से शिकायत नहीं रहती.

10 Easy Ways To Live A Positive Life

9) घूमने जाएं
नई जगहों की सैर करने और नए लोगों से मिलने से हम नई-नई चीज़ें सीखते हैं, जिससे जीवन के प्रति हमारी जिज्ञासा बनी रहती है. आपको जब भी समय मिले नई-नई जगहों की सैर ज़रूर करें. ट्रैवल करने से हम ये भी समझ पाते हैं कि हम दूसरों से कितना अच्छा जीवन जी रहे हैं.

10) हमेशा मुस्कुराएं
जो लोग हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते हैं, उन्हें हर कोई पसंद करता है. यदि आप भी चाहते हैं कि सब आपको प्यार करें, तो हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें. आप जो भी काम कर रहे हैं, उसे मन से करें. खुद से प्यार करें, अपने काम से प्यार करें, हमेशा ख़ुश रहें, तभी आप अपनी ज़िंदगी से प्यार कर सकते हैं.

सकारात्मक जीवन जीने वाले लोग हर हाल में खुश रहते हैं, इसलिए वो ज़िंदगी की हर तकलीफ से आसानी से बाहर निकल जाते हैं. रात चाहे कितनी ही काली, कितनी ही गहरी क्यों न हो, रात के बाद सवेरा होता ही है. इसी तरह जीवन में चाहे कितनी ही तकलीफ क्यों न आए, दुःख के बादल छंट ही जाते हैं और ज़िंदगी खुशियों से मुस्कुराने लगती है. यदि आप भी इसी सोच के साथ जीने लगेंगे, तो आप भी हर हाल में ख़ुश रहेंगे और ज़िंदगी से प्यार करने लगेंगे.

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  • #JantaCurfew: हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने कल जनता कर्फ्यू के तहत देशवासियों को घर पर रहकर एक होकर कोरोना से लड़ने की बात जो कही है, उसी संदर्भ में अभिनेता अनुपम खेर ने भी सभी के लिए प्रेरणादायी संदेश दिया है. उन्होंने सभी को इस जनता कर्फ्यू जो और किसी के लिए नहीं बल्कि जनता द्वारा जनता के लिए ही है को सफल बनाने की अपील की है. यह पूरे दिन का एकांतवास अमृत मंथन जैसा है, जिसमें विष भी निकलेगा.. अमृत भी निकलेगा.. विश्व शुद्धि है.. हम सब को बिल्कुल भी बाहर न निकलकर घर में ही दिनभर रहकर इस नेक कार्य को कामयाब बनाना है. साथ ही सभी को कल रविवार को सुबह सात बजे से लेकर रात नौ बजे तक एकांत में रहने यानी घर पर ही रहने के आव्हान के साथ-साथ कल यानी 22 मार्च को ही शाम 5 बजे पांच मिनट के लिए उन सभी लोगों का धन्‍यवाद करने की गुजारिश भी की है, जो दिन-रात कोरोना से संक्रमित मरीज़ों की सेवा और सुरक्षा में लगे हैं, जैसे- डॉक्टर, नर्स, कर्मचारी, सरकारी विभाग, पुलिस आदि. वे सभी हमारी रक्षा में अपनी जान की परवाह किए बगैर दिन-रात काम कर रहे हैं. हमें तहेदिल से उन सभी को धन्यवाद कहना है.. उनका शुक्रिया अदा करना है.. यह अपने, घर, समाज, देश के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व और पूरी मानव जाति के लिए है. आइए, हम सभी मिलकर विश्व कल्याण के लिए इस जनता कर्फ्यू को सफल बनाएं. सभी अपना और अपनों का ख़याल रखें. इस समय का सदुपयोग करें. ध्यान, प्राणायाम, योग, व्यायाम और आत्मविश्लेषण करें. पौष्टिक, हल्का व शाकाहारी भोजन करें. कुछ मुस्कुराए, कुछ गुनगुनाए.. इस तरह के अनमोल पल बार-बार नहीं आते. हम सभी इसे ख़ास और सार्थक बनाएं. दुनिया के लिए आदर्श व उदाहरण बनें. अनुपम खेर जी के ही शब्दों में सब ठीक हो जाएगा.. मैं एक आशावादी इंसान हूं. मुझे यक़ीन है सब ठीक होगा. ग़म की अंधेरी रात में दिल को बेक़रार ना कर.. सुबह ज़रूर आएगी.. सुबह का इंतज़ार कर …
Anupam kher

10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स (New Year Resolutions) आपकी ज़िंदगी में ख़ुशी और कामयाबी लेकर आएंगे. आप भी इस साल ये 10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स बनाएं और अपनी ज़िंदगी को खुशहाल और कामयाब बनाएं. हमारे अधिकतर न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स इसलिए फेल हो जाते हैं, क्योंकि वो या तो रियलिस्टिक यानी वास्तविक नहीं होते या फिर हम आधे-अधूरे मन से रेज़ोल्यूशन्स बना तो लेते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने का प्रयास ही नहीं करते. नए साल के जोश में हम बड़े-बड़े रेज़ोल्यूशन्स तो बना लेते हैं, लेकिन हफ़्तेभर या महीनेभर में ही हम उन्हें फॉलो करना बंद कर देते हैं. न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स ऐसे होने चाहिए, जो रोज़ हमारा हौसला बढ़ाएं और हमारी ज़िंदगी को दिन-प्रतिदिन बेहतर बनाएं. इस साल आप भी ऐसे ही 10 न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स बनाएं और अपनी ज़िंदगी को खुशहाल और कामयाब बनाएं.

 

1 टाइम मैनेजमेंट
हम समय का स़िर्फ एक बार ही इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि गुज़रा हुआ व़क्त कभी लौटकर नहीं आता यानी हम समय को रीसाइकिल नहीं कर सकते. अतः कभी ये न कहें कि ये काम अगली बार करेंगे. हो सकता है, अगली बार आप व़क्त गंवा चुके हों और गुज़रा हुआ व़क्त आपसे कहे कि अब बहुत देर हो चुकी है. ऑफिस, फैमिली, सोसाइटी, सोशल मीडिया, फ्रेंड्स… सभी को आपका टाइम चाहिए, लेकिन आपके पास सीमित समय है, इसलिए समय का सही इस्तेमाल करें. सही टाइम मैनेजमेंट करनेवाले लोग ही ज़िंदगी की रेस में आगे रहते हैं, इसलिए अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में टाइम मैनेजमेंट को सबसे ऊपर रखें.

2 सीखने का शौक़
कामयाब लोगों की ये सबसे बड़ी निशानी है कि वो हमेशा कुछ न कुछ नया सीखते रहते हैं. जब भी हम कुछ नया सीखते हैं, तो हमारे दिमाग़ की सक्रियता बढ़ जाती है और हम ख़ुद में एक नई ऊर्जा महसूस करते हैं. इसलिए आप भी कुछ न कुछ सीखते रहें. म्यूज़िक, डांस, स्विमिंग, पेंटिंग या फिर अपने जॉब से संबंधित कोई स्किल… जिस चीज़ में आपकी रुचि हो, वो ज़रूर सीखें. सीखने से आप हमेशा दूसरों से एक क़दम आगे रहते हैं, जिससे आपका आत्मविश्‍वास बढ़ता है और आप कामयाबी हासिल कर पाते हैं.

3 फिटनेस रेज़ोल्यूशन
हेल्दी बॉडी हेल्दी माइंड यूं ही नहीं कहा जाता. जब आप फिट और हेल्दी होते हैं, तो आप अच्छा महसूस करते हैं और इसकी ख़ुशी आपके चेहरे और व्यवहार में भी साफ़ नज़र आती है. यही वजह है कि फिट और हेल्दी लोग हमेशा अपने आसपास पॉज़ीटिविटी बनाए रखते हैं और ऐसे लोगों को हमेशा कॉम्प्लीमेंट्स मिलते हैं. जब आपको ये मालूम होता है कि आप दूसरों से फिट और हेल्दी हैं, तो आपका कॉन्फिडेंस अपने आप बढ़ जाता है और आप अपना हर काम पूरे आत्मविश्‍वास से करने लगते हैं, जिससे आपकी कामयाबी बढ़ती जाती है. आप भी फिट और हेल्दी बने रहने का रेज़ोल्यूशन बनाएं और योग, ध्यान, एक्सरसाइज़, हेल्दी डायट आदि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें.

4 मी टाइम
आज की इस भागदौड़भरी ज़िंदगी में किसी के पास व़क्त नहीं है. हम कमा तो बहुत रहे हैं, हमारे पास भौतिक सुख-सुविधाएं भी भरपूर हैं, लेकिन अपने लिए ही व़क्त नहीं है. ऐसी सुविधाओं का क्या लाभ जो ख़ुद आपके काम न आएं, इसलिए आज से ही अपने लिए थोड़ा व़क्त ज़रूर निकालें. इस मी टाइम में वो सब करें, जिससे आपको ख़ुशी मिलती है. यक़ीन मानिए, आपका ये मी टाइम आपके लिए टॉनिक का काम करेगा और आपको एक नई ऊर्जा से भर देगा. फिर आप अपना हर काम और अच्छी तरह कर पाएंगे.

5 आत्मनिर्भरता
कॉन्फिडेंस यानी आत्मविश्‍वास की कमी उन लोगों में होती है, जो दूसरों पर आश्रित रहते हैं. इसलिए कोशिश करें कि आप अपने किसी भी काम के लिए दूसरों पर आश्रित न रहें. जो लोग अपने काम ख़ुद करते हैं, वो कहीं भी बड़ी आसानी से एडजस्ट हो जाते हैं और उन्हें कभी किसी बात का डर नहीं लगता. इसकी शुरुआत आप अपने रोज़ के काम ख़ुद करके कर सकते हैं. जब आप अपने काम ख़ुद करने लगेंगे, तो आपका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और आप फिर अपने हर ़फैसले ख़ुद लेना सीख जाएंगे.

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New Year Resolutions

6 क्रोध पर काबू
क्रोध से अक्सर नुक़सान ही होता है अपना भी और दूसरों का भी. इसलिए क्रोध से बचें. हम क्रोध से बच तो नहीं सकते, लेकिन अपने क्रोध पर काबू ज़रूर पा सकते हैं. कई लोग क्रोध में ऐसे ़फैसले ले लेते हैं, जिनका पछतावा उन्हें उम्रभर होता है. आप ऐसा न करें. इसलिए अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में इस बात को भी ज़रूर शामिल करें कि आप क्रोध नहीं करेंगे और क्रोध में कोई ़फैसला नहीं लेंगे.

7 डिजिटल ब्रेक
टेक्नोलॉजी के साथ चलना ज़रूरी है, लेकिन ख़ुद को इतना डिजिटल बना देना भी सही नहीं कि टेक्नोलॉजी आप पर हावी हो जाए. आजकल ख़ासकर यंगस्टर्स दिनभर मोबाइल में बिज़ी रहते हैं, जिसके कारण उनकी पढ़ाई, हेल्थ यहां तक कि नींद भी प्रभावित होती है. सोशल मीडिया में तो वो हर जगह होते हैं, लेकिन अपने घर-परिवार के साथ व़क्त बिताना उन्हें बोरिंग लगता है. ऐसी स्थिति से बचने के लिए डिजिटल ब्रेक बहुत ज़रूरी है. नए साल में ये नियम बना लें कि आप डिजिटल वर्ल्ड में रहेंगे ज़रूर, लेकिन उतना ही, जितना आपके लिए
ज़रूरी है.

8 डर को डराएं
डरना एक स्वाभाविक क्रिया है. हम सभी को किसी न किसी चीज़ से डर ज़रूर लगता है, लेकिन कई बार ये डर हम पर इस क़दर हावी हो जाता है कि इससे हमारी दिनचर्या प्रभावित होने लगती है. कई लोगों का डर उन पर इस क़दर हावी हो जाता है कि वो अंधविश्‍वास की हद तक पहुंच जाता है. यदि आपके मन में भी कोई ऐसा डर है, जो आपकी ज़िंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो उससे बाहर निकलने की कोशिश करें. यदि आप ख़ुद अपने डर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तो अपने परिवार या एक्सपर्ट्स की मदद लें.

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9 बुरी आदतों से बचें
कई बार हम अपनी आदतों के इस कदर अधीन हो जाते हैं कि हमारी आदतें हमारी ज़िंदगी से बड़ी हो जाती हैं, ख़ासकर नशे की आदत. यदि आप में भी है कोई ऐसी बुरी आदत, जो आपके कंट्रोल से बाहर हो रही है, तो उससे बाहर निकलने का संकल्प लें. किसी चीज़ की आदत हो जाना और उस आदत को बदलना दोनों हमारे हाथ में होता है. यदि हम ठान लें, तो कोई भी आदत हम पर हावी नहीं हो सकती. अपने न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन्स में बुरी आदतों को बाय-बाय कहने का रेज़ोल्यूशन भी ज़रूर बनाएं.

10 देना सीखें
प्रकृति का ये नियम है कि हम जो बोते हैं, वही पाते हैं. इसलिए देना सीखें, तभी आप मनचाही चीज़ पा सकेंगे. ज्ञान, ख़ुशी, अपनापन ये सब ऐसी चीज़ें हैं, जिन्हें आप जितना बांटेंगे, ये उतनी ही बढ़ेंगी. अपेक्षा करनेवालों की तुलना में उन लोगों को हमेशा ज़्यादा मिलता है, जो देना जानते हैं, इसलिए आप भी देना सीखें. अपने आसपास हमेशा ख़ुशियां बांटें, ताकि आपको भी बदले में ख़ुशियां ही मिलें.
– कमला बडोनी

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Akbar Birbal Ki Khaniya
सौजन्य: lets-inspire.com

अकबर-बीरबल कथा: पूर्णिमा का चांद (Akbar-Birbal Story: poornima Ka Chand)

एक बार बीरबल फारस देश के राजा के निमंत्रण पर उनके देश गए हुए थे. उनके सम्मान दावत का आयोजन किया गयाथा और अनेक उपहार दिए गए थे. अपने देश लौटने की पूर्व संध्या पर एक अमीर व्यक्ति ने पूछा कि वह कैसे अपने राजाकी फारस के राजा से तुलना करेंगे?

बीरबल ने कहा, “आपके राजा पूर्णिमा के चांद जैसे हैं. हालांकि हमारे राजा दूज के चंद्रमा के समान हैं.”

यह सुन फारसी बहुत खुश थे, लेकिन जब बीरबल घर गए, तो उन्होंने पाया कि सम्राट अकबर बहुत गुस्से में थे.

अकबर ने गुस्से में कहातुम अपने राजा को कैसे कमजोर बता सकते हो.”  तुम एक गद्दार हो !” बीरबल ने कहा, “नहीं, महाराज मैंने आपको कमज़ोर नहीं बताया है.

दरसल, पूर्णिमा का चांद कम हो जाता है और गायब हो जाता है, जबकि दूज के चांद में शक्ति बढ़ती है.

मैं वास्तव में दुनिया को बताता हूं कि दिन प्रतिदिन आपकी शक्ति बढ़ रही है, जबकि फारस के राजा का पतन हो रहा है.”

अकबर ने बीरबल की बुद्धिमत्ता का फिर लोहा माना. उनकी बात का असली अर्थ समझकर संतोष व्यक्त किया औरबीरबल का गर्मजोशी से स्वागत किया.

सीख: शब्दों से खेलकर कैसे गूढ़ अर्थ में अपनी बात भी कही जा सकती है और समानेवाले को नाराज़ भी नहीं किया गयायह कला सीखना ज़रूरी है.

Kids Stories

Image Credit: moralstories.org

अकबर-बीरबल की कहानी: सोने के सिक्के (Akbar-Birbal Tale: Gold Coins)

बीरबल की तेज़ बुद्धि के जितने अकबर कायल थे, उतना ही उनसे ईर्ष्या रखनेवाले लोग भी थे. इसी कड़ी में थे अकबर के एक रिश्तेदार भी. उनको बीरबल से बहुत ईर्ष्या थी, उन्होंने एक बार बादशाह अकबर से कहा- क्यों न बीरबल को हटाकर उसकी जगह मुझे नियुक्त किया जाए, क्योंकि मैं बीरबल की तुलना में अधिक सक्षम हूं.

इससे पहले कि बादशाह फैसला ले पाते, बीरबल को इस बात की भनक पड़ गई. बीरबल ने तुरंत ही इस्तीफा दे दिया और बादशाह अकबर के रिश्तेदार को बीरबल की जगह नियुक्त कर दिया गया.

बादशाह ने नए मंत्री परीक्षा लेनी चाही. बादशाह ने उसे 300 सोने के सिक्के दिए और कहा- इन सिक्कों को इस तरह खर्च करो कि 100 सिक्के मुझे इस जीवन में ही मिलें, 100 सिक्के दूसरी दुनिया में मिलें और आखिरी 100 सिक्के न यहां मिलें और न वहां मिलें.

बादशाह की इस पहेली ने मंत्री को असमंजस की स्थिति में डाल दिया. उसकी रातों की नींद हराम हो गई. यह देख मंत्री की पत्नी ने कहा आप परेशान क्यों हैं? मंत्री ने राजा की पहेली वाली बात बताई और कहा कि उनकी इस पहेली ने दुविधा में फंसा दिया है.

मंत्री की पत्नी ने उनको सुझाव दिया कि क्यों न बीरबल से सलाह ली जाए. पत्नी की बात सुनकर वह बीरबल के पास पहुंच गया. बीरबल ने सारा किस्सा सुना तो कहा कि तुम मुझे यह सोने के सिक्के दे दो, बाकी मैं सब संभाल लूंगा.

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बीरबल सोने के सिक्कों से भरी थैली लेकर शहर की गलियों में घूमने लगे. वहां उनकी नज़र एक अमीर व्यापारी पर पड़ी,ल जो अपने बेटे की शादी का जश्‍न मना रहा था. बीरबल ने 100 सोने के सिक्के निकालकर उस व्यापारी को दे दिए और कहा- बादशाह अकबर ने तुम्हारे बेटे की शादी की शुभकामनाएं और आशीर्वाद स्वरूप यह 100 सोने के सिक्के भेंट दिए हैं.

यह सुनकर व्यापारी को बड़ा ही गर्व महसूस हुआ कि राजा ने इतना महंगा उपहार उन्हें दिया है. उस व्यापारी ने बीरबल को सम्मानित किया और उन्हें राजा के लिए उपहार स्वरूप बड़ी संख्या में महंगे उपहार और सोने के सिक्कों से भरा हुआ थैला थमा दिया.

अगले दिन बीरबल शहर के ऐसे क्षेत्र में गए जहां गरीब लोग रहते थे. उन्होंने 100 सोने के सिक्कों से भोजन और कपड़े खरीदे और उन्हें बादशाह अकबर के नाम पर गरीबों में बांट दिया.

जब बीरबल वापस आए, तो उन्होंने संगीत और नृत्य का एक कार्यक्रम आयोजित किया जहां उन्होंने 100 सोने के सिक्के खर्च कर दिए.

अगले दिन बीरबल बादशाह अकबर के दरबार में पहुंचे और घोषणा कर दी कि उसने वह काम किया है जो उनके दामाद नहीं कर पाए. अकबर यह जानना चाहते थे कि बीरबल ने यह सब कैसे किया.

बीरबल ने सिलसिलेवार पूरी बात व घटना बताई और कहा कि जो धन मैंने व्यापारी को उसके बेटे की शादी में दिया था वह वापस आप तक पहुंच गया और जो धन मैंने गरीबों में बांटा, वह धन आपको दूसरी दुनिया में जाकर मिलेगा और जो धन मैंने नृत्य और संगीत में खर्च कर दिया, वह आपको ना यहां मिलेगा और न वहां मिलेगा.

यह सुनकर अकबर के दामाद को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और बीरबल को अपना स्थान वापस मिल गया.

सीख: नेक कार्य व दान में खर्च किया गया धन ईश्‍वर के आशीर्वाद में परिवर्तित हो जाता है और उसका फल हमें ज़रूर मिलता है, जबकि ऐशो-आराम या गलत उद्देश्यों कार्यों में खर्च हुआ पैसा किसी काम का नहीं होता.

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Panchtantra Ki Kahani

Image Credit: KWStoryTime.com

पंचतंत्र की कहानी: चूहा और संन्यासी (The Hermit And The Mouse)

बहुत समय पहले की बात है. एक गांव में एक संन्यासी रहता था. वह संन्यासी एकांत में गांव के एक मंदिर में रहता था और लोगों की सेवा करता था. भिक्षा मांगकर जो कुछ भी उसे मिलता, वह उसे उन लोगों को दान कर देता, जो मंदिर के रख-रखाव व साफ़-सफ़ाई करने में उसका सहयोग करते थे.

उस मंदिर में एक शैतान चूहा भी रहता था. वह चूहा अक्सर उस संन्यासी का रखा हुआ अन्न खा जाता था. संन्यासी ने चूहे को कई भगाने की कई कोशिशें कीं, लेकिन वह चकमा देकर छिप जाता.

संन्यासी ने उस चूहे को पकड़ने की भी काफी कोशिश की, लेकिन वह हर बार असफल रहता. एकदिन परेशान होकर संन्यासी अपने एक मित्र के पास गया.

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उसके मित्र ने उसे एक योजना बताई कि चूहे ने मंदिर में अपना कहीं बिल बना रखा होगा और वह वहां अपना सारा खाना जमा करता होगा. अगर उसके बिल तक पहुंचकर सारा खाना निकाल लिया जाए, तो चूहा खुद ही कमज़ोर होकर मर जायेगा.

अब संन्यासी और उसके मित्र ने बिल को खोजना शुरू कर दिया और बहुत ढूंढ़ने के बाद अंत में उनको बिल मिल ही गया जिसमें चूहे ने खूब सारा अन्न चुराकर इकठ्ठा कर रखा था. उन्होंने बिल खोदकर सारा अन्न बाहर निकाल लिया.

अब चूहे को खाना नहीं मिला तो वह कमज़ोर हो गया और संन्यासी ने अपनी छड़ी से कमज़ोर चूहे पर हमला किया. चूहा डरकर तुरंत भाग खड़ा हुआ और फिर कभी मंदिर में नहीं आया.

सीख: अपने शत्रु को परास्त है तो पहले उसकी शक्तियों पर हमला करो. शक्तियां खत्म तो शत्रु स्वयं कमज़ोर पड़ जायेगा.

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गुस्सा (Anger) आना सामान्य व्यवहार है, लेकिन जब किसी को बात-बात पर गुस्सा आए तो ये सामान्य बात नहीं है. गुस्सैल लोगों से सब दूर ही रहना चाहते हैं, क्योंकि ऐसे लोग गुस्से में कुछ भी बोल देते हैं, जिससे माहौल बिगड़ जाता है. गुस्सैल लोग दूसरों का कम और अपना नुकसान ज़्यादा करते हैं. यदि आपको भी बात-बात पर गुस्सा आता है, तो आपको गुस्से को काबू करने के ये 5 उपाय ज़रूर जानने चाहिए.

Anger Management

 

 

 

 

 

गुस्सैल लोगों को होते हैं ये 5 नुकसान
1) आपका गुस्सा सबसे पहले आपके स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है. गुस्से से तनाव बढ़ता है और तनाव से कई स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं. अत: गुस्सैल स्वभाव के लोगों को अपने स्वास्थ्य का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.
2) गुस्से के कारण आपकी छवि ख़राब हो सकती है. लोग आप पर विश्‍वास कम करते हैं, क्योंकि उन्हें हमेशा इस बात का डर लगा रहता है कि गुस्से में कहीं आप बना बनाया काम न बिगाड़ दें.
3) गुस्से के कारण आप अपनों को खो सकते हैं. गुस्से में आपको समझ नहीं आता कि आप क्या कह रहे हैं, लेकिन ऐसा करके आप कई बार अपनों का दिल दुखाते हैं, जिससे वो आपसे दूर होते चले जाते हैं.
4) अपने गुस्सैल स्वभाव के कारण आप अपने अच्छे दोस्त भी खो सकते हैं.
5) यदि आपको बात-बात पर गुस्सा आता है और आप गुस्से में किसी को कुछ भी बोल देते हैं, तो लोग आपसे बात करने से कतराने लगते हैं. ऐसे में आप अपना सम्मान खो सकते हैं और अकेलेपन के शिकार भी हो सकते हैं.

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गुस्से से बचने के 5 कारगर उपाय
1) आवेश में आकर कुछ भी बोलने से पहले सोचें कि क्या आपको ऐसा करने की ज़रूरत है. ऐसा करके आप कई ग़लतियों से बच सकते हैं. यदि गुस्से पर काबू नहीं कर पा रहे हैं तो मन ही मन दस से लेकर एक तक उल्टी गिनती गिनें. ऐसा करने से आपका ध्यान बंट जाएगा और आपका गुस्सा शांत हो जाएगा.
2) नियमित रूप से योग व मेडिटेशन करें, ऐसा करने से आप अपने गुस्से पर नियंत्रण कर पाएंगे. साथ ही सात्विक भोजन करें, ऐसा भोजन करने से गुस्सा कम आता है.
3) हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें, इससे आप अच्छा महसूस करेंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.
4) ख़ुद को काम में व्यस्त रखें, इससे आप जल्दी थक जाएंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.
5) अपने शौक के लिए समय निकालें. जब आप अपना मनपसंद काम करेंगे, तो आप ख़ुश रहेंगे और आपको गुस्सा कम आएगा.

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Kids Stories

Kids Story: अमरूद किसका? (Amrood Kiska?)

कुछ बच्चे पार्क में खेल रहे थे. उनमें से दो दोस्त भी थे. खेलते-खेलते उन्हें दूर एक अमरूद का पेड़ नज़र आया. दोनों उस पेड़ के पास गए, तो देखा एक अमरूद लगा हुआ है. दोनों ने सोचा क्यों न इसको तोड़कर खाया जाए. पर दोनों के मन में एक सवाल था कि ये अमरूद कौन खाएगा. ख़ैर दोनों ने मिलकर अमरूद तोड़ लिया.

अब उनमें झगड़ा होने लगा, एक ने कहा कि मैंने यह पेड़ पहले देखा, तो यह अमरूद मेरा, दूसरे का कहना था कि इस अमरूद को मैंने पहले देखा, तो यह मेरा.

Kahani

दोनों का झगड़ा इतना बढ़ गया कि बाकी के बच्चे भी वहां आ गए. सबने पूछा कि क्यों लड़ रहे हो, तो उन्होंने बताया. उन बच्चों में से एक लड़के ने कह कि मैं तुम्हारे झगड़े का निपटारा कर सकता हूं. यह अमरूद मुझे दिखाओ.

 

उन दोनों ने उसे अमरूद दे दिया. वो लड़के मज़े से अमरूद खाने लगा और देखते ही देखते पूरा अमरूद खा गया. बाद में बोला, वाह अमरूद सच में बहुत ही मीठा था और हंसते हुए वहां से चला गया.

Bacho Ki Kahaniya

दोनों दोस्त देखते रह गए और फिर सोचने लगे कि काश, झगड़ा करने की बजाय यह अमरूद दोनों ने आधा-आधा बांट लिया होता, तो आज कोई और इसे नहीं हथिया सकता था.

सीख: इस कहानी से यही सीख मिलती है कि कभी भी छोटी-छोटी बात पर आपस में झगड़ा नहीं करना चाहिए, वरना दूसरे इसका फ़ायदा उठा लेते हैं. जो भी हो आपस में मिल-बांटकर ही फैसला करना चाहिए.

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Tenalirama Stories

तेनालीराम की कहानी: मटके में मुंह (Tenalirama And Pot Mask)

यूं तो महाराज कृष्णदेव राय तेनालीरामा को बेहद पसंद करते थे, पर एक बार महाराज कृष्णदेव किसी बात पर तेनालीराम से नाराज़ हो गए. गुस्से में आकर उन्होंने तेनालीराम से भरी राजसभा में कह दिया कि कल से मुझे दरबार में अपना में अपना मुंह मत दिखाना. उसी समय तेनालीराम दरबार से चला गया. तेनालीरामा से जलनेवाले लोग बेहद ख़ुश हुए.

अगले दिन जब महाराज राजसभा की ओर जा रहे थे, तभी एक चुगलखोर ने उन्हें यह कहकर भड़का दिया कि आपने तेनालीरामा को दरबार में न आने का आदेश दिया था, लेकिन तेनालीराम आपके आदेश के खिलाफ दरबार में उपस्थित है.
यह सुनते ही महाराज आग-बबूला हो गए. चुगलखोर दरबारी आगे बोला- आपने साफ कहा था कि दरबार में आने पर कोड़े पड़ेंगे, इसकी भी उसने कोई परवाह नहीं की. अब तो तेनालीराम आपके हुक्म की भी अवहेलना करने में जुटा है.

राजा दरबार में पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि सिर पर मिट्टी का एक घड़ा ओढ़े तेनालीराम विचित्र प्रकार की हरकतें कर रहा है. घड़े पर चारों ओर जानवरों के मुंह बने थे.

महाराज ने गुस्से में कहा- तेनालीराम! ये क्या बेहुदगी है. तुमने हमारी आज्ञा का उल्लंघन किया हैं. तुमको इसकी सज़ा मिलेगी. दंडस्वरूप कोड़े खाने के तैयार हो जाओ.

तेनालीरामा ने कहा- मैंने कौन-सी आपकी आज्ञा नहीं मानी महाराज? घड़े में मुंह छिपाए हुए तेनालीराम आगे बोला- आपने कहा था कि कल मैं दरबार में अपना मुंह न दिखाऊं तो क्या आपको मेरा मुंह दिख रहा है? हे भगवान! कहीं कुम्हार ने फूटा घड़ा तो नहीं दे दिया?

यह सुनते ही महाराज की हंसी छूट गई. वे बोले- तुम जैसे बुद्धिमान और हाज़िरजवाब से कोई नाराज़ हो ही नहीं सकता. अब इस घड़े को हटाओ और सीधी तरह अपना आसन ग्रहण करो.

तेनालीरामा से महाराज के विशेष प्रेम के चलते बहुत लोग उससे जलते थे, लेकिन तेनालीरामा हर बार अपनी बुद्धिमता से उनको मात दे देता है. इस बार भी यही हुआ.

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Kids Story

Kids Story: कंजूस भेड़िया और शिकारी (The Hunter And The Miser Wolf)

एक जंगल में एक बेहद ही कंजूस भेड़िया रहता था. वो इतना ज़्यादा कंजूस था कि अपने खाने में भी कंजूसी करता था. वो जो भी शिकार करता, उसका मांस कई दिनों तक बचाकर रखता, ताकि बाद में खा सके, जैसे- एक बार उसने हिरण का शिकार किया, तो पहले दिन स़िर्फ उसके कान खाए, अगले दिन कोई दूसरा अंग…

इस तरह वो हमेशा ही कंजूसी करता. इसकी वजह से वो बहुत ही कमज़ोर हो गया था. उसकी मरियल हालत देखकर जंगल के अन्य पशु भी उसका मज़ाक बनाते, पर उस पर कोई असर न होता.

कई बार तो उसके शिकार का मांस कई दिन तक पड़े रहने के कारण सड़ जाता, जिससे वो उसे खा ही नहीं पाता था. पर फिर भी कंजूसी की आदत वो छोड़ नहीं रहा था.

एक बार जंगल में एक शिकारी आया. उसने एक जंगली सुअर का शिकार करने के लिए तीर मारा, जैसे ही तीर सुअर को लगा, क्रोधित सुअर ने तेज़ी से दौड़ते हुए अपने नुकीले दांत शिकारी के पेट में गड़ा दिए, जिससे सुअर व शिकारी दोनों की ही मौत हो गई. कंजूस भेड़िया यह सब देख रहा था. उसे बड़ी ख़ुशी हुई कि उसके कई दिनों के खाने का बंदोबस्त हो गया. उसने सोचा इस मांस को तो मैं कम से कम दो महीने तक चलाऊंगा.

इसी बीच उसकी नज़र पास पड़े धनुष पर गई. उसने देखा कि धनुष के कोनों पर चमड़े की पट्टी लगी है. उसने सोचा कि क्यों न आज इस पट्टी को खाकर ही काम चला लूं, ताकि मांस बच जाए. कंजूस भेड़िए ने पट्टी को एक तरफ़ से काटा, उसके काटते ही धनुष सीधा हो गया और सीधे उसकी गर्दन को चीरता हुआ बाहर हुआ. वो भेड़िया वहीं मर गया.

सीख: ज़रूरत से ज़्यादा कंजूसी और लालच हमेशा नुकसान ही देती है. किफायती होना अलग होता है, पर कंजूसी होना फ़ायदेमंद नहीं.

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Raja Aur Lekhak

Kids Story: राजा और लेखक (Kids Story: Raja Aur Lekhak)

एक नगर में एक राजा था. एक दिन वो यूं ही टहलने निकला. घूमते-घूमते उसे किताबों का एक बड़ा-सा संग्रहालय नज़र आया. राजा उसमें गया, तो वहां ढेर सारी किताबें देखकर ख़ुश हो गया. राजा को लगा एक ही जगह पर इतनी सारी ज्ञानवर्द्धक किताबें तो बेहद फ़ायदेमंद है. राजा को उन किताबों में से एक किताब बहुत पसंद आई. वो उस किताब को लेकर घर चला आया. किताब पढ़कर राजा उस लेखक से बहुत प्रभावित हुआ, क्योंकि उसमें लेखक ने लिखा था कि किस तरह से उसने अपना सारा जीवन अकेले ही बिता दिया. उस लेखक ने अपने बीवी-बच्चों पर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया और संपूर्ण जीवन समाज में भ्रमण करके बिता दिया.

राजा ने सोचा वो भी अपना पूरा जीवन समाज में भ्रमण करके ही बिताएगा. राजा ने सोचा कि पहले मैं उस लेखक से भी मिल लेता हूं, जिसने ये किताब लिखी है. राजा उस लेखक के गांव जाकर उसके घर गया. वहां जाकर राजा ने देखा कि वो लेखक तो मज़े से अपने बीवी-बच्चों के साथ रह राह है. राजा को बहुत दुख भी हुआ और गुस्सा भी आया कि इसकी किताब पढ़कर मैं समाज भ्रमण के लिए निकल रहा था, पर ये तो मज़े से यहां रह रहा है और किताब में गलत बात लिखी है.

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राजा ने उस किताब को दिखाते हुए लेखक से गुस्से में पूछा कि उसने यह झूठ क्यों लिखा? लेखक ने राजा से कहा कि यह किताब उसने समाज में भटके हुए लोगों को सही राह दिखाने के इरादे से लिखी है. लेखक ने कहा कि मेरा काम है समाज के लोगों का मार्गदर्शन करना, ताकि लोग अपना जीवन सुधार सकें. लेखक ने राजा से अपने साथ बाहर चलने को कहा. वो राजा को एक भाला बनाने वाले के पास ले गया और उसे एक अच्छा सा भाला दिखाने को कहा.

भाला लेकर लेखक ने राजा से कहा कि यह देखिए इस भाले को. राजा ने कहा मैं क्या करूं इसका. लेखक ने कहा कि यह भाला यह दुकान वाला बनाता है, फिर उसने दुकान वाले से कहा कि तुम भाला इतना अच्छा बनाते हो, तो क्या तुम युद्ध में नहीं जा सकते?

भाला बनाने वाले ने हंसते हुए कहा कि यह मेरा काम नहीं है. युद्ध में तो बड़े-बड़े वीर योद्धा जाते हैं, तो मैं कैसे जा सकता हूं, क्योंकि मेरा काम उनके लिए अच्छे से अच्छा भाला बनाने का है, युद्ध लड़ना उनका काम है. उसकी बात सुनकर लेखक ने राजा से कहा कि इसी तरह मेरा काम दूसरों को अपने लेखन के ज़रिए जीने की कला सिखाना है, इसका यह मतलब नहीं कि वह जीवन या वह कला मैं ख़ुद जानता हूं.

लेखक के तर्क से राजा समझ गए कि दरअसल उस किताब में लिखी बातों का क्या अर्थ है. राजा ख़ुश हुआ, लेखक और भाला बनाने वाले को ईनाम देकर वह वापस अपने महल लौट आया, ताकि एक शासक की तरह अपनी जनता का ख़्याल रख सके.

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काम है तो प्रेशर है, प्रेशर है तो तनाव है और तनाव में ग़ुस्सा आना लाज़मी है, लेकिन ग़ुस्सा ज़हिर करने के तरी़के सभी के अलग-अलग होते हैं. क्या ग़ुस्सा आपकी पर्सनल या प्रोफेशनल लाइफ़ को भी प्रभावित कर रहा है? आप अपने ग़ुस्से पर किनता काबू कर पाती हैं? ये क्विज़ हल कीजिए और ख़ुद जान जाइए.

Tips To Control Anger

1) आपके बच्चे को स्कूल जाने के लिए पहले से ही देर हो रही है, उस पर उसने नाश्ता करते समय यूनिफॉर्म इतनी ख़राब कर दी कि उसे पहन कर स्कूल नहीं जाया जा सकता. ऐसे में आप-

ए) तुरंत यूनिफॉर्म बदलकर उसे स्कूल बस के बजाय ऑटो रिक्शा या अपनी गाड़ी में स्कूल छोड़ देंगी.
बी) बच्चे पर बहुत ग़ुस्सा होंगी और गंदी यूनिफ़ॉर्म में ही उसे स्कूल छोड़ देंगी.
सी) गुस्से में बच्चे को थप्पड़ जड़ देंगी हैं और स्कूल भी नहीं भेजेंगी.

2) आप ऑफ़िस में एक ज़रूरी प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं, तभी कंप्यूटर ख़राब हो गया और आप फाइल सेव भी नहीं कर पाईं. ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगी?

ए) एक कप कॉफ़ी पीएंगी और रिलैक्स होकर दोबारा काम शुरू कर देंगी.
बी) रोने लग जाएंगी.
सी) गुस्से में वहां से चली जाएंगी.

3) आपने अपने एक सहकर्मी के साथ मिलकर बड़ी मेहनत से कोई प्रोजेक्ट पूरा किया, लेकिन उसका पूरा श्रेय स़िर्फ आपके सहकर्मी को ही मिला. ऐसे में आप…

ए) आपके प्रेज़ेंटेशन में कहां कभी रह गई, इस पर विचार करेंगी और अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश करेंगी.
बी) सहकर्मी को भला-बुरा कहकर मन की भड़ास निकालेंगी.
सी) पूरे ऑफ़िस में उसकी चुगली करती फिरेंगी.

4) ऑफ़िस की एक ज़रूरी मीटिंग में आपको व़क़्त पर पहुंचना है, लेकिन ट्रैफिक के कारण आप देर से पहुंचती हैं, ऐसे में आप…

ए) देरी के लिए सॉरी कहकर आगे ऐसा न होने का भरोसा दिलाएंगी.
बी) मीटिंग में पहुंचते ही सिस्टम को कोसने लगेंगी.
सी) फोन करके मीटिंग अटेंड करने से मना कर देंगी.

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5) ग़ुस्से में आपका पक्ष जाने बिना ही आपके पति यदि आपको भला-बुरा कहने लग जाएं तो?

ए) उस व़क़्त तो चुप रहेंगी, लेकिन जब पति शांत हो जाएंगे, तब अपना पक्ष रखकर उन्हें सही स्थिति से अवगत कराएंगी.
बी) रोने लग जाएंगी.
सी) आप भी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लग जाएंगी.

6) आपने बड़े जतन से ख़ास मेहमानों के लिए डिनर पार्टी अरेंज की है, पर उसी व़क़्त थोड़े मेहमान और आ गए. ऐसे में आप क्या करेंगी?

ए) तुरंत और खाने के बंदोबस्त में जुट जाएंगी.
बी) समझ नहीं पाएंगी कि क्या करूं?
सी) बिन बुलाए मेहमानों को मन ही मन कोसेंगी.

7) ऑफ़िस में आपको इतना काम दे दिया गया है जो डेडलाइन पर पूरा नहीं हो सकता. ऐसे में आप क्या करेंगी?

ए) ऑफ़िस टाइम के बाद रुककर काम पूरा करेंगी.
बी) सहकर्मियों से मदद के लिए कहेंगी.
सी) काम करने से मना कर देंगी.

8) यदि आपकी बेस्ट फ्रेंड आपको अपनी बर्थडे पार्टी में बुलाना भूल जाए तो?

ए) आप ख़ुद ही फोन करके उसे याद दिला देंगी.
बी) फोन करके फ्रेंड पर ख़ूब चिल्लाएंगी.
सी) उससे दोस्ती तोड़ देंगी.

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9) इन दिनों काम की अधिकता के कारण आपको लगभग रोज़ ही ऑफ़िस से घर लौटने में देर हो रही है, जो कि सासू मां को बिल्कुल पसंद नहीं. ऐसे में आप…

ए) उन्हें ऑफिस की स्थिति समझाने की कोशिश करेंगी.
बी) उनकी बातों को अनसुना कर देंगी.
सी) उनके साथ झगड़ा करने लग जाएंगी.

10) आपके पति रोज़ देर रात तक इंटरनेट पर सर्फिंग करते रहते हैं, जिससे आप ठीक से सो नहीं पातीं. ऐसे में आप…

ए) पति को समझाएंगी हैं कि इससे आप दोनों की नींद व सेहत पर बुरा असर पड़ेगा.
बी) पति से बात करना बंद कर देंगी.
सी) उनसे रोज़ इस बात पर झगड़ने लग जाएंगी.

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क्या कहता है स्कोर?
यदि आपके अधिकतर जवाब (ए) हैं तो:
आपका स्कोर बेस्ट है. आप ग़ुस्से पर काबू रखना बख़ूबी जानती हैं, जिससे आप ज़िंदगी के छोटे-छोटे तनावों को आसानी से हैंडल कर लेती हैं. आप मुश्किल से मुश्किल स्थिति में भी रास्ता तलाशना और उसे अपने फ़ायदे में बदलाना बख़ूबी जानती हैं. आपके परिवार, सहकर्मी बेशक आप के व्यवहार से संतुष्ट रहते होंगे.

यदि आपके अधिकतर जवाब (बी) हैं तो:
आप ग़ुस्से को ख़ुद पर हावी तो नहीं होने देतीं, लेकिन उसे हैंडल भी नहीं कर पाती हैं. कई बार आप समस्या से भागने का विकल्प भी चुन लेती हैं. ऐसा करना ठीक नहीं, क्योंकि ये समस्या का समाधान नहीं है. आपको अपने ग़ुस्से पर काबू पाने और समस्या को हैंडल करने के लिए थोड़ी कोशिश और करनी होगी.

यदि आपके अधिकतर जवाब (सी) हैं तो:
छोटी-छोटी बातों पर ग़ुस्सा करना, बेवजह तनावग्रस्त हो जाना आपकी आदत में शामिल हो गया है. आपको अपनी आदतों पर कंट्रोल करना होगा, वरना आगे चलकर आपका ग़ुस्सा आपकी सेहत को भी प्रभावित कर सकता है.

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