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कब लें इंश्योरेंस? (When Is The Right Time To Take A Insurance?)

Insurance

अपनी ज़िंदगी को सिक्योर करने के लिए लोग समय-समय पर अपने हिसाब से सेविंग करते हैं, ताकि उन्हें किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े. अपनों के सुरक्षित भविष्य के लिए लोग कई तरह के इंश्योरेंस प्लान लेते हैं. जीवन के किस मोड़ पर आपको इंश्योरेंस की ज़्यादा ज़रूरत होती है? आइए हम आपको बताते हैं.

शादी के समय

Wedding Insurance
समय के साथ प्राथमिकताएं बदल गई है, इसलिए दोनों पार्टनर का वर्किंग होना ज़रूरी है. दोनों के वर्किंग होने के बाद भी घर को सामान्य रूप से चलाना और लाइफ को एंजॉय करना आजकल मुशिकल होता जा रहा है. शादी के बाद भले ही आपका पार्टनर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है, लेकिन भविष्य के लिए अनिश्‍चित होता है. अत: शादी के बाद अपने और अपने पार्टनर के सुरक्षित भविष्य के लिए शादी के बाद अच्छी इंश्योरेंस पॉलिसी लें. इससे अपा दोनों का कल सुरक्षित रहेगा और टेंशन फ्री होकर आप अपनी लाइफ एंजॉय कर सकेंगे.

पैरेंट्स बनने पर

Child Insurance
शादी होने के बाद भी कपल्स को अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास नहीं होता. इसका कारण है दोनों का वर्किंग होना. लेकिन जब आप पैरेंट्स बन जाते हैं, तो ज़िम्मेदारियां और भी बड़ जाती हैं. भविष्य में आपके बच्चे को कोई तकलीफ़ न हो, इसलिए ऐसी पॉलिसी ले, जो उसके भविष्य के लिए बेहतर हो.

पैरेंट्स के रिटायरमेंट पर

Retirement Insurance
आप अपने पैरेंट्स की वजह से यहां तक पहुंचे हैं. इसलिए उनके रिटायरमेंट के बाद उनकी ज़िम्मेदारी भी आप पर आ जाती है. ऐसे में आपका बोझ बढ़ सकता है. अत: बेहतर होगा कि आप कोई एडिशनल इंश्योरेंस लें, जिससे आपको मदद मिल सके.

जब लेना हो बड़ा लोन
पैसों की कमी के कारण लोगों को हर सामान ईएम आई पर लेने पर लेना पड़ता है. ऐसे में अगर कल को आपकी जॉब चली जाए, तो भारी-भरकम लोन की किश्त भरना आपके परिवार के लिए संभव नहीं है. अत: समझदारी इसी में है कि लोन अमाउंट के बराबर ही काई इंश्योरेंस कवर लें, ताकि भविष्य में आपके अपनों को कोई तकलीफ न हो.

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नया व्यवसाय शुरू करने पर

New Business Insurance
यदि आप अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको पैसे की ज़रूरत पड़ेगी. ऐसे में फायनेशियली स्ट्रॉन्ग न होने पर आपको कई तरह की दिक्कतें आती है. इस समय पर कोई ऐसी पॉलिसी लें, जो आपके बिजनेस के लिए भी मददगार साबित हो.

बच्चों की हायर स्टडीज़ के लिए

पैरेंट्स बनने के बाद बच्चों के लिए कोई पॉलिसी लेना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है उनकी आगे की पढ़ाई के लिए भी प्लानिंग करना. इसकी तैयारी पहले से ही कर लें. अपनी आय का कुछ हिस्सा ऐसी पॉलिसी में लगाएं, जो आपके बच्चे की हायर स्टडीज़ में सहायक हो

जब आप हो सिंगल पैरेंट

Single Parent Insurance
सिंगल पैरेंटिंग किसी चुनौती से कम नहीं है. पार्टनर के न रहने पर बच्चे के प्रति आपकी ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है. ऐसे में उन्हें भावनात्मक सहयोग के साथ ही आर्थिक मज़बूती भी आपको ही देनी पड़ती है. एक अच्छी पॉलिसी आपको सुखी रख सकती है, इसलिए बिना देर किए अपने बच्चे की ज़रूरत के अनुसार कोई पॉलिसी लें.

मेडिकल इंश्योरेंस लें

Health Insurance
जीवन अनिश्‍चितकालीन होता है, इसलिए अपने परिवार को सुरक्षित बनाए रखने के लिए मेडिकल इंश्योरेंस ज़रूर लें. कुछ अनहोनी पर आपकी सैलरी प्रभावित नहीं होगी और जीवन सुचारू रूप से चलता रहेगा.

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कितना जानते हैं आप ‘नॉमिनी’ के बारे में? (Why You Must Appoint A Nominee?)

Why You Must Appoint A Nominee

जब भी हम बैंक में सेविंग्स अकाउंट खोलते हैं, म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हैं, प्रॉपर्टी/शेयर्स ख़रीदते हैं या फिर जीवन बीमा करवाते हैं, तो हर बार हमें ‘नॉमिनी’ अपॉइंट करना होता है. ज़्यादातर लोगों को यही ग़लतफ़हमी है कि उसकी मृत्यु के बाद सारी रक़म नॉमिनी को मिल जाएगी, जबकि ऐसा है नहीं. नॉमिनी स़िर्फ आपके पैसों का केयरटेकर होता है, न कि मालिक. तो क्यों ज़रूरी है नॉमिनी बनाना और क्या हैं उसके अधिकार, आइए जानते हैं.

Why You Must Appoint A Nominee

कौन है नॉमिनी?

क़ानूनन नॉमिनी वह व्यक्ति है, जो आपकी मृत्यु के बाद कंपनी से मिली रक़म को आपके क़ानूनी वारिसों तक पहुंचाता है. वह क़ानूनन उस रक़म का मालिक नहीं होता, स़िर्फ एक ट्रस्ट होता है. सरल शब्दों में कहें, तो नॉमिनी एक केयरटेकर की तरह होता है, जो हमारे न रहने पर हमारी जमा-पूंजी को हमारे अपनों तक पहुंचाता है.

– अगर आपके अकाउंट के जॉइंट होल्डर्स हैं या फिर आपने वसीयत बनाई है, तो वसीयत के मुताबिक़ सारी जमा-पूंजी आपके क़ानूनी वारिस में बांट दी जाएगी. पर अगर आपने अपने क़ानूनी वारिस को ही अपना नॉमिनी बनाया है, तो उसके लिए चीज़ें आसान हो जाती हैं.

– मान लीजिए कि आपने अपनी पत्नी को सब जगह नॉमिनी बनाया है और वह आपकी क़ानूनी वारिस भी है, पर आपकी मृत्यु के बाद सब कुछ उसी को नहीं मिलेगा, जो भी आपकी जमा-पूंजी होगी, वह आपकी पत्नी और बच्चों में बराबर बंटेगी, लेकिन अगर आपने अपनी वसीयत में यह लिख दिया है कि मेरी पत्नी को फलां-फलां हिस्सा मिलेगा, तो क़ानूनन बाध्य हो जाता है, जिस पर आपके बच्चे क्लेम नहीं कर सकते.

क्या है नॉमिनी का रोल व अधिकार? 

नॉमिनी का अहम् रोल उस व्यक्ति की मृत्यु के बाद ही शुरू होता है. इंश्योरेंस कंपनी से इंश्योरेंस के पैसे निकालना बहुत ही पेचीदा होता है. कई क़ानूनी दस्तावेज़ों के बावजूद कई बार पैसा लंबे समय तक अटका रहता है, ऐसे में नॉमिनी के रहने से यह प्रक्रिया आसान हो जाती है. नॉमिनी बनाए ही इसीलिए जाते हैं, ताकि आपके न रहने पर आपके अपनों को इन क़ानूनी झंझटों का सामना न करना पड़े.

किसे और कैसे करें अपॉइंट?

आप अपने परिवार के किसी सदस्य, दोस्त या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को नॉमिनी अपॉइंट कर सकते हैं. जब भी आप प्रॉपर्टी, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड्स, स्टॉक्स, बैंक डिपॉज़िट्स आदि में इन्वेस्ट करते हैं, तो आपको एप्लीकेशन के साथ-साथ एक और फॉर्म दिया जाता है, जहां आप अपने नॉमिनी के बारे में जानकारी देते हैं. कहीं-कहीं इसके लिए 1 या 2 गवाहों की ज़रूरत भी पड़ती है.

कहां-कहां बनाते हैं नॉमिनी?

जीवन बीमा: पॉलिसी होल्डर अपने माता/पिता, पति/पत्नी या फिर बच्चों को नॉमिनी बनाते हैं, तो  वो अपने आप बेनीफीशियल नॉमिनी बन जाते हैं. इसलिए जीवन बीमा में हमेशा अपने क़ानूनी वारिस को ही नॉमिनी बनाएं. इसमें आप एक से ज़्यादा नॉमिनी अपॉइंट कर सकते हैं.

बैंक अकाउंट: बैंक डिपॉज़िट अकाउंट या फिर लॉकर अकाउंट के लिए भी अपने किसी क़रीबी को नॉमिनी बना सकते हैं. यहां पर एक छूट है कि आप अपने किसी भरोसेमंद दोस्त को भी अपना नॉमिनी बना सकते हैं, ज़रूरी नहीं कि वो आपका क़ानूनी वारिस ही हो. लेकिन आप किसी एक व्यक्ति को ही नॉमिनी बना सकते हैं. यहां मल्टीपल नॉमिनी का ऑप्शन नहीं है. अगर जॉइंट अकाउंट हो, तो दूसरे होल्डर को अमाउंट मिलेगा और उसके ना रहने पर नॉमिनी को.

फिक्स्ड डिपॉज़िट: एफडी में इन्वेस्ट करते समय भी आपको किसी को नॉमिनी बनाना पड़ता है. यहां भी केवल किसी एक व्यक्ति को ही नॉमिनी बनाया जा सकता है.

डीमैट अकाउंट: शेयर्स और सिक्योरिटीज़ के इन्वेस्टमेंट डीमैट अकाउंट के ज़रिए किए जाते हैं. इसके लिए आप मल्टीपल नॉमिनी नियुक्त कर सकते हैं. यहां नॉमिनी स़िर्फ केयरटेकर नहीं, बल्कि मालिक होता है. उसे क़ानूनी वारिस को शेयर्स ट्रांसफर नहीं करने होते.

म्यूचुअल फंड: यहां आप तीन लोगों को अपना नॉमिनी बना सकते हैं. आप चाहें तो उनके लिए शेयर्स भी बांट सकते हैं. उदाहरण के लिए आप अपनी पत्नी और दो बच्चों को नॉमिनी बना सकते हैं. पत्नी को 50% और बच्चों को 25-25% शेयर्स दे सकते हैं.

प्रॉपर्टी: प्रॉपर्टी के मामले में वसीयत और सक्सेशन लॉ काम करते हैं, नॉमिनी की कोई ख़ास भूमिका नहीं होती. पर हां, अगर आप किसी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं, तो आपको नॉमिनी नियुक्त करना ज़रूरी होता है, क्योंकि सोसाइटी में आप किसी एक फ्लैट में रहते हैं, जो एक बड़ी यूनिट है. इसलिए यहां नॉमिनी बनाना ज़रूरी हो जाता है.

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नॉमिनी से जुड़े 5 ज़रूरी सवाल-जवाब

नॉमिनी अपॉइंट करते समय आपके ज़ेहन में भी कई सवाल आएंगे, इसलिए ज़रूरी है कि पहले उन सभी सवालों को सुलझा लें.

1. क्या नाबालिग नॉमिनी बन सकता है?

जी हां, 18 साल से कम उम्रवाले को भी नॉमिनी बनाया जा सकता है, लेकिन उसके साथ आपको कोई गार्जियन भी अपॉइंट करना पड़ेगा. उदाहरण के लिए आप अपने बच्चे को अपना नॉमिनी बनाकर पत्नी को गार्जियन बना सकते हैं. और चूंकि दोनों ही आपके क़ानूनी वारिस हैं, तो आपके जाने के बाद कोई क़ानूनी समस्या भी नहीं आएगी.

2. क्या एक से ज़्यादा नॉमिनी हो सकते हैं?

आप चाहें, तो एक से ज़्यादा लोगों को अपना नॉमिनी बना सकते हैं और अगर चाहें तो उनके लिए शेयर्स भी बांट सकते हैं.

3. क्या नॉमिनी बदल सकते हैं?

आप जब चाहें, जितनी बार चाहें नॉमिनी बदल सकते हैं. इसके लिए आपको स़िर्फ एक फॉर्म भरकर देना होगा और आपका नॉमिनी बदल जाएगा. यह पूरी तरह आपका अधिकार है.

4. नॉमिनी बनाने पर भी क्या वसीयत बनानी ज़रूरी है?

बिल्कुल. नॉमिनी सिर्फ़ आपकी संपत्ति का रखवाला है, लेकिन उसका मालिक वही होता है, जिसको आपने अपनी वसीयत में अधिकार दिया है. मान लीजिए कि आपने अपनी जीवन बीमा में मां को नॉमिनी बनाया, तो आपके न रहने पर मां को बीमा की सारी रक़म मिलेगी, पर वो उन्हें आपकी पत्नी और बच्चों के साथ बांटनी होगी और अगर आपने अपनी वसीयत में वो रक़म मां के नाम लिखी है, तो उस पर स़िर्फ मां का अधिकार होगा, इसलिए नॉमिनी के साथ-साथ वसीयत बनानी भी बहुत ज़रूरी है.

5. वसीयत न होने पर नॉमिनी संपत्ति किसे देगा?

ऐसे भी कई मामले सामने आते हैं, जहां नॉमिनी तो बना दिया जाता है, पर व्यक्ति की कोई वसीयत नहीं होती, ऐसे में उस संपत्ति का बंटवारा इंडियन सक्सेशन लॉ, हिंदू लॉ और मोहम्मडन लॉ के अनुसार किया जाता है.

जानें अपने रेलवे इंश्योरेंस नॉमिनी को भी 

– हमारे देश में एक बहुत बड़ा तबका रेलवे से सफ़र करता है, पर यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि रेलवे किसी भी तरह के हादसे के व़क्त लोगों को इंश्योरेंस देता है.

– आईआरसीटीसी की वेबसाइट से जब आप टिकट बुक करते हैं, तो अंत में इंश्योरेंस का एक कॉलम होता है, जिसे बहुत से लोग अनदेखा कर देते हैं. इंश्योरेंस पर टिक करने से आपके खाते से महज़ 95 पैसे इंश्योरेंस में जाते हैं, पर आपको 10 लाख तक का इंश्योरेंस कवर मिलता है.

– यहां भी आपको नॉमिनी सिलेक्ट करना ज़रूरी होता है.

– आईआरसीटीसी की तरफ़ से आपको नॉमिनेशन के लिए मैसेज भी आता है, जिसके लिंक पर जाकर आपको अपना नॉमिनी नियुक्त करना होता है.

– हालांकि यह सुविधा 5 साल से छोटे बच्चों और विदेशी पर्यटकों के लिए नहीं है.

– अगर हादसे में व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, तो 10 लाख रुपए, परमानेंट या पार्शियल डिसेबिलिटी के लिए 7.5 लाख और हॉस्पिटलाइज़ेशन के लिए 2 लाख का कवर मिलता है.

– सबसे ज़रूरी बात नॉमिनी को हादसे के 4 महीने के भीतर इंश्योरेंस क्लेम करना होता है.

– अनीता सिंह

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जब लें पॉलिसी ध्यान रखें इन बातों का (Keep these things in mind while taking policy)

Life Insurance

Life Insurance
आपके जाने के बाद भी आपके परिवार को जीवन में किसी दूसरे के सामने हाथ न फैलाना हो और वो एक सही तरह का जीवन जी सकें इसके लिए आप कई तरह के इंश्योरेंस करवाते हैं. ख़ुद के बाद अगर किसी पर सही भरोसा करते हैं, तो वो है बीमा. हर व्यक्ति अपनों की चाह और सुखी जीवन के लिए कई तरह की बीमा योजना करता है, लेकिन कई बार सही तरह से उसकी पूरी जानकारी न होने पर आगे चलकर परेशानी हो सकती है. बीमा से जुड़ी कुछ ज़रूरी बातों का विशेष ध्यान रखें.

इंश्योरेंस कंपनी के बारे में जानें
किसी भी कंपनी में इन्वेस्ट करने से पहले उस कंपनी के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा कर लें. कई बार ऐसा होता है कि इंश्योरेंस मेच्यौर होने पर भी कंपनी इंश्योरेंस का अमाउंट देने पर कई तरह से परेशान करती है. ऐसे में आपके जाने के बाद आपकी फैमिली को कई तरह से परेशान होना पड़ सकता है. इस परेशानी से बचने के लिए पॉलिसी लेने से पहले अच्छी तरह बीमा कंपनी, उसके इतिहास, पॉलिसियों, नियमों आदि के बारे में सही तरह से जांच-पड़ताल कर लें.

सही राशि के बारे में जानें
इंश्योरेंस करवाते समय अपनी इनकम का ध्यान ज़रूर रखें. आपकी आय में से कितना हिस्सा आप बीमा में ख़र्च कर सकते हैं, उसके अनुसार ही पॉलिसी ख़रीदें. बिना सोचे-समझे भारी-भरकम पॉलिसी आपके बजट को बिगाड़ सकती है. अपने घर के बाकी ख़र्च और आने वाली तमाम योजनाओं के बारे में पूरी तरह से जानने के बाद ही एक सही पॉलिसी पर ख़र्च करें.

प्रिमियम का भुगतान
सही कंपनी जानने और पॉलिसी लेने के बाद ही आपकी ज़िम्मेदारी ख़त्म नहीं हो जाती. इससे भी ज़रूरी होता है कि आप पॉलिसी के प्रिमियम के भुगतान की सही जानकारी रखें. मंथली, क्वाटर्ली, हाफ इयर्ली या फिर इयर्ली, आपको जिसमें सुविधा हो उसी तरह के प्रिमियम के भुगतान का चुनाव करें.

अतिरिक्त प्रस्तावों की जानकारी
इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़े अतिरिक्त प्रस्तावों (राइडर्स) और उन पर आने वाली लागत की पड़ताल करें. बीमा कंपनी की ओर से कोई राइडर नहीं है, तो अपनी ओर से अनुरोध करें और देखें कि कंपनी उसे स्वाकार करती है या नहीं.

ज़्यादा पॉलिसी न ख़रीदें
कुछ लोग टैक्स बचाने के चक्कर में कई इंश्योरेंस पॉलिसी ख़रीद लेते हैं. ज़रूरत से ज़्यादा पॉलिसी लेने में कोई समझदारी नहीं है. एक समय में कई पॉलिसी को मैनेज करना आसान नहीं होता. हर पॉलिसी से जुड़ी जानकारी को याद रखना मुश्किल होता है. उदाहरण के लिए किसी पॉलिसी का प्रिमियम कब भरना है और उसकी मेच्यौरिटी कब होगी आदि बातें आपको परेशान कर सकती हैं.

एक्सपर्ट की सलाह
आपकी आय और आवश्यकता के अनुसार आपके लिए कौन-सी पॉलिसी सही होगी? इसकी जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं. अपनी ज़रूरतों को उसे बताकर आप अपनी सुविधानुसार एक अच्छी पॉलिसी का चुनाव कर सकते हैं, जिससे आपका बजट और मूट भी ख़राब न हो और जीवन भी सुरक्षित रहे

एजेंट के बहकावे में न आएं
आपने भी ऐसा महसूस किया होगा कि पॉलिसी लेने की आपकी चाह को जान लेने के बाद कई एजेंट आपके आगे-पीछे घूमने लगते हैं. वो कई तरह के लुभावने प्रस्ताव आपके सामने रखते हैं. आपको रिझाने के लिए वो कई बार आपको फोन करते हैं और पॉलिसी के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर बात करते हैं. एक बार अगर आपने उनसे पॉलिसी ले ली तो बाद में वो आपकी किसी भी बात का सही तरह से जवाब भी नहीं देते. जिस पॉलिसी के बारे में वो आपको समझाते हैं वास्तविकत में वो होती ही नहीं. इस तरह के एजेंट से बचिए और ख़ुद सोच-समझकर ही पॉलिसी लीजिए.

ऑनलाइन ख़रीदने से बचें
आजकल आपके इनबॉक्स में कई तरह की कंपनियां अपनी लुभावनी पॉलिसी के बारे में देती हैं, लेकिन बेहतर होगा कि कभी भी ऑनलाइन पॉलिसी न लें. इंटरनेट का सही उपयोग करें. जिस पॉलिसी के बारे में दिया गया है उसे पहले इंटरनेट पर सर्च करें. उसके बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा करें और जिस कंपनी से आपको पॉलिसी लेनी है उसके कस्टमर केयर में फोन करके उनके एजेंट को घर पर आने को कहें. इससे आप अच्छी तरह से पॉलिसी को समझने में भी सफल होंगे और अपने मन में उठने वाले सवालों के जवाब भी मांग सकेंगे.

ध्यान से पढ़ें दस्तावेज
किसी भी तरह की पॉलिसी लेने से पॉलिसी दस्तावेज को पूरा पढ़ें. जल्दबाज़ी में कभी भी पॉलिसी की जानकारी न पढ़ें. अच्छी तरह से पढ़कर और थोड़ा-सा अतिरिक्त समय देकर आप लंबी अवधि में बड़ा लाभ उठा सकते हैं और बीमा कंपनी के साथ भविष्य में होने वाले किसी विवाद से बच सकते हैं.

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