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पुरुषों को इन 10 मामलों में दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं (Men do not like Interference in These 10 Things)

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पुरुषों को अपनी सोच, पसंद, शौक़ या फिर उनके बनाए हुए सिद्धांत आदि को बदलना या उसमें दख़लअंदाज़ी करना बिल्कुल भी पसंद नहीं है. वैसे तो ये फेहरिस्त काफ़ी लंबी है, फिर भी हमने ऐसे 10 मामलों को बताने की कोशिश की है, जिनमें दख़लअंदाज़ी पुरुषों को कतई गवारा नहीं.

Men do not like Interference

1. ख़र्च संबंधी मामले- रुपए-पैसों के मामले में हमेशा पुरुष अपनी आमदनी को अपने हिसाब से ख़र्च करते हैं और सही भी मानते हैं. वो सही हैं या ग़लत इस पर किसी भी प्रकार की राय ख़ासकर पत्नियों की सलाह या टिप्पणी उन्हें कतई पसंद नहीं और हिसाब-किताब के बारे में पूछताछ उनके अहम् को चोट पहुंचाती है. साथ ही वे और ़ज़्यादा सीक्रेटिव हो जाते हैं.

2. ड्राइविंग सेंस- पुरुष घर का मुखिया है, इसलिए वो चाहता है कि घर-बाहर के हर मामले में उसका निर्णय सर्वमान्य होना चाहिए. ड्राइविंग सीट पर बैठने के साथ भी यही नज़रिया बना रहता है. इस विषय पर चलती कार में या आगे-पीछे कोई सलाह दे या उनकी क़ाबिलियत पर शंका या प्रश्‍न उठाए उन्हें पसंद नहीं. पुरुष को हमेशा अपनी ड्राइविंग सेंस पर ़ज़्यादा नाज़ होता है कि उनकी ड्राइविंग बेहतर व सुरक्षात्मक है.

3. सुपरमैन छवि- पुरुष हमेशा से स्वयं को महान व सुपरमैन समझते हैं. उनके मन में बसी उनकी इस छवि को कभी ठेस न पहुंचाएं, ये उनका अति संवेदनशील एरिया है. घर में शांति चाहिए, तो जैसा है, उसे उसी रूप में स्वीकारें. इस छवि में फेरबदल करने की कोशिश महंगी पड़ सकती है. यदि करना ही चाहती हैं, तो पहले अनुकूल माहौल तैयार करें. तारीफ़ के दो-चार शब्द कहें, फिर बड़े प्यार से मुद्दे पर आएं.

4. दूसरों से तुलना- अपने पति महोदय की तुलना भूलकर भी किसी और के साथ न करें, ख़ासकर अपने पिता, भाई, जीजा, पड़ोसी या मित्रों से. ऐसी तुलना उन्हें कभी भी अच्छी नहीं लगेगी, बल्कि मामला बिगड़ सकता है. मायकेवालों से की गई तुलना, तो निश्‍चित रूप से उनका मूड बिगाड़ेगी. आपकी और आपके मायकेवालों की अनगिनत कमज़ोरियां बढ़-चढ़कर सामने आ जाएंगी और आप उस पल को कोसेंगी, जब तुलना के शब्द मुंह से निकले थे.

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5. सेक्स अपील- ये भी एक ऐसा एरिया है, जहां स़िर्फ और स़िर्फ उनकी अपनी सोच मायने रखती है. बड़े तो बड़े टीनएजर्स को भी इस विषय में अपनी मां या बहन अथवा गर्लफ्रेंड की सलाह या राय नहीं चाहिए. उन्हें अपनी सेक्स अपील पर पूरा भरोसा है. वो जानते हैं कि उनकी किस अदा पर लोग दीवाने होते हैं और कौन-से अंदाज़ पर बात बन जाती है.

6. प्रिय आदतें- पुरुष को अपनी हर आदत से प्यार होता है. चाहे आदत बेमतलब लंबी-लंबी हांकने की हो या फिर चापलूसी करने की. पब्लिक में दांत या नाक कुरेदने की अनहाइजिनिक आदत हो या फिर सोशल एटीकेट तथा मैनर्स में कमी. इस बारे में चर्चा करना या टोकना अपनी शामत बुलाना है. दख़लअंदाज़ी या सुधारने की कोशिश महंगी पड़ सकती है. उनका मूड तो उखड़ेगा ही आप भी अपसेट होंगी और मामला वहीं
का वहीं.

7. लाइफ़स्टाइल- अपने रहन-सहन के बारे में भी उनकी अपनी सोच है. आपकी दख़लअंदाज़ी बिल्कुल नहीं चाहिए. बाथरूम में बैठकर बुक पढ़ना पसंद है या हर दो घंटे में चाय चाहिए. देर रात तक कंप्यूटर पर बैठें या बेड-टी बेड पर ही लें. ऑफ़िस में जींस पहनकर जाएं या पैंट के साथ चप्पल पहनें- ये सब उनका अपना लाइफ़स्टाइल है. इसमें वो कंफ़र्टेबल हैं. उन्हें सुकून मिलता है, तो किसी की दख़लअंदाज़ी क्यों पसंद आएगी और क्यों किसी की सलाह मानें? अगर बदलने की कोशिश करना चाहें, तो धैर्य और प्यार को अपना हथियार बनाइए.

8. प्यारे मित्र- यदि इनके चहेते मित्रों के बारे में आपने कुछ भी निगेटिव कह दिया, तो मुश्किल में पड़ सकती हैं. भले ही आपकी छठी इंद्रिय मित्रों की क़ाबिलियत या चरित्र पर शंका का संकेत दे रही हो. भले ही आपको लग रहा है कि वो मतलबी व चमचे हैं, लेकिन याद रखिए संगी-साथियों की आलोचना से पुरुष का मूड बिगड़ सकता है, तो कमेंट न करना ही बेहतर है.

9. मातृभक्ति- हर बेटे की दृष्टि में उसकी मां सर्वगुण संपन्न, सीधी-सादी, अच्छी व धर्मपरायण महिला है. अपनी मां और बहन के विषय में पुरुष बहुत संवेदनशील होते हैं. उनके बारे में किए गए कमेंट्स आपके आपसी संबंधों में कड़वाहट पैदा कर सकते हैं. रिश्तों की मधुरता व सलामती के लिए उनकी भावनाओं को समझिए और अपना मलाल अपने तक ही रखिए, वरना तू-तू मैं-मैं होने में देर
नहीं लगेगी.

10. मोबाइल, मेल, डायरी- किसी भी पुरुष को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं कि उसके मैसेज, मेल या डायरी कोई उसकी अनुमति के बिना पढ़े. भले ही कोई ऐसी-वैसी सीक्रेट न भी हो. यदि आपने पढ़ ही लिया है, तो प्लीज़ उस पर कमेंट करके उनके पर्सनल क्षेत्र में दख़लअंदाज़ी न करें, वरना आपकी शांत ख़ुशहाल ज़िंदगी को अशांत होते समय नहीं लगेगा.

– प्रसून भार्गव

 

पुरुषों को इन 5 मामलों में दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं (Men Hate Interference In These 5 Matters)

1. आदत- शायद ही कोई पुरुष हो, जिसे अपनी आदत को लेकर किसी भी तरह का कमेंट सुनना या भाषणबाज़ी व उपदेश सुनना पसंद आता हो. इस मामले में अधिकतर पुरुषों का एक ही जवाब रहता है कि ‘ऐसा ही हूं मैं’… यानी आप इसे अपना लो या फिर हंसते-रोते झेलो. आदत में बहुत कुछ हो सकता है, जैसे- खानपान की आदत, मज़ाक करने की आदत, बेवजह ग़ुस्सा हो जाना या फिर शॉर्ट टेंपर, शंकालु प्रवृत्ति, छोटी-छोटी बातों को तूल देना, बिना बात लड़ाई-झगड़ा करना, ओवर प्रोटेक्टिव होना, केयरिंग, साफ़-सफ़ाई को अनदेखा करना, दोस्तों के साथ व़क्त-बे़क्त घूमना आदि.
एक्सपर्ट सलाह- ऐसा नहीं है कि उनको अपनी ग़लत आदतों से होनेवाले फ़ायदे-नुक़सान का पता नहीं होता है, उन्हें सब मालूम होता है, बस मेल ईगो और आलस के चलते वे अपनी आदतें नहीं बदलते. इनकी बुरी आदतें बदलने का एक ही तरीका है धैर्य और समझदारी से काम लें.

2. दोस्त- पुरुषों को, ख़ासकर पतियों को पत्नियों का उनके दोस्तों के मामले में दख़लअंदाज़ी करना बिल्कुल पसंद नहीं आता. ‘आपका वो दोस्त सही नहीं है…’ ‘आप अपने उस दोस्त से अधिक मेल-जोल न रखें…’ पत्नियों की इस तरह की बातें पतियों को नागवार गुज़रती हैं. दरअसल, पुरुष ही नहीं, स्त्रियों की ज़िंदगी में भी उनके दोस्तों के लिए ख़ास जगह होती है. कुछ दोस्त तो इतने ख़ास व राज़दार होते हैं कि पैरेंट्स, पत्नी या फिर पति भी उनकी जगह नहीं ले सकते. इसलिए कोई भी पुरुष अपने अज़ीज़ दोस्तों को लेकर दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं करता.
एक्सपर्ट सलाह- बचपन से लेकर बड़े होने तक पुरुषों के जीवन में उनके दोस्त बेहद अहम् भूमिका निभाते हैं. वे उनसे अपने कई अनकहे दुख-दर्द, इच्छाएं व ख़्वाबों को शेयर करते हैं, जो वे पैरेंट्स या अपनों से नहीं कह पाते. इसलिए वाजिब-सी बात है कि ऐसे हमदर्द को लेकर दख़लअंदाज़ी उन्हें रास नहीं आएगी. अतः जहां तक हो सके, इस मैटर को स्मार्टली हैंडल करने की कोशिश करें, पर बेवजह अधिक तूल न दें.

3. लुक्स- पुरुषों के लुक्स को लेकर बातें करना, राय देना या फिर कमेंट करना उन्हें आहत कर जाता है. उनकी सोच के अनुसार तन से ज़्यादा उनके मन को तवज्जो दिया जाना चाहिए. वैसे भी व़क्त के साथ चेहरा-स्वभाव आदि बदलता रहता है. करियर, नौकरी, घर-परिवार की ज़िम्मेदारी कई बार पुरुषों को व़क्त से पहले उम्रदराज़ बना देती है.
एक्सपर्ट सलाह- लुक्स बेहद सेंसिटिव पहलू है. इसे लेकर दख़लअंदाज़ी या कमेंट स्त्रियों को तो बुरा लगता ही है, पर पुरुष भी इससे अछूते नहीं है. वे अपने लुक्स से अधिक अपनी बुद्धिमानी, समझदारी और हिम्मत को अधिक महत्व देते हैं. इसलिए उनके साथ डील करते समय अतिरिक्त ध्यान देने की ज़रूरत होती है.

4. आलोचना- पुरुषों का एक वर्ग ऐसा भी है, जिन्हें लगता है कि आलोचना करने का
कॉपीराइट उनके पास ही है. यदि भूले से भी पत्नी, प्रेमिका या फिर किसी और ने ही किसी बात को लेकर उनकी आलोचना कर दी, उनके काम पर कमेंट किया, तो इस तरह की दख़लअंदाज़ी उन्हें बर्दाश्त नहीं होती. कमेंट करने पर उनके ईगो व भावनाओं को चोट पहुंचती है. उस पर ग़लती से कमेंट्स पैरेंट्स या फिर घर की आर्थिक स्थिति को लेकर हो जाए, तो मूड और माहौल को बिगड़ते देर नहीं लगती.
एक्सपर्ट सलाह- मेल डॉमिनेटिंग सोसाइटी होने के कारण लड़कों की परवरिश ही कुछ ऐसी होती है कि वे कह तो बहुत कुछ सकते हैं, पर सुन नहीं सकते. उस पर आलोचना, तो कतई नहीं बर्दाश्त कर सकते. अतः यह ज़रूरी है कि उनसे तोल-मोल कर बोलें.

5. शौक़- हर व्यक्ति के अपने कुछ शौक़ होते हैं. पार्टनर या फिर किसी और का उनकी हॉबीज़ को लेकर दख़ल देना और यह कहना कि यह ठीक नहीं, इसे बदल दो, कुछ और करो, क्या यह ज़रूरी है कि तुम इस तरह के शौक़ पालो… इस तरह की बातें पुरुषों के मन में उस शख़्स को लेकर चिढ़ पैदा कर देती हैं. कोई भी पुरुष अपने शौक़ के साथ समझौता करना पसंद नहीं करता. उनके अनुसार, यही तो उनके ज़िंदगी को मस्ती में जीने का सबसे बड़ा ज़रिया है व आप उसी पर आरी चलाएंगे, तो कैसा लगेगा?
एक्सपर्ट सलाह- कहते हैं, एक मुकम्मल ज़िंदगी जीने के लिए कुछ मज़ेदार, तो कुछ अजीबो-गरीब शौक़ का होना बेहद ज़रूरी है. पुरुष वर्ग में शायद ही कोई हो, जो अपने शौक़ से समझौता करता हो. इसलिए बेहतरी इसी में है कि इसमें दख़लअंदाज़ी न की जाए, क्योंकि वे तो नहीं बदलेंगे, पर इसे लेकर मनमुटाव ज़रूर हो जाएगा.

– ऊषा गुप्ता

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