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दीपावली में विंड चाइम से लाएं घर में सौभाग्य (Wind Chime For Diwali Decoration)

Wind Chime

दीपावली में विंड चाइम से लाएं घर में सौभाग्य (Wind Chime For Diwali Decoration)

दीपावली (Diwali) में घर की सजावट का सामान ख़रीदते समय अपनी शॉपिंग लिस्ट में विंड चाइम (Wind Chime) को ज़रूर शामिल करें. विंड चाइम से घर की ख़ूबसूरती निखरती है और घर में सौभाग्य भी आता है. हां, विंड चाइम ख़रीदते समय कुछ बातों का ध्यान दीपावली में घर की सजावट का सामान ख़रीदते समय अपनी शॉपिंग लिस्ट में विंड चाइम को ज़रूर शामिल करें. विंड चाइम से घर की ख़ूबसूरती निखरती है और घर में सौभाग्य भी आता है. हां, विंड चाइम ख़रीदते समय कुछ बातों का ध्यान ज़रूर रखें.

* मार्केट में कई तरह की भारी, हल्की, बड़ी, छोटी और रंगीन विंड चाइम्स (पवन घंटियां) उपलब्ध हैं, लेकिन आप जब विंड चाइम चुनें, तो खोखली व पतली नलीवाली विंड चाइम ही चुनें. ये हवा में आसानी से लहराकर मधुर आवाज़ करती हैं. यदि आप घर में 6 या 7 रॉडवाली विंड चाइम लगाएंगे, तो इससे घर में संपन्नता आती है.

* धातु से बनी विंड चाइम हमेशा पश्‍चिम या उत्तर-पश्‍चिम दिशा में लगाएं. ये दिशाएं धातुओं की होती हैं, इसलिए इन दिशाओं में विंड चाइम लगाने से भाग्योदय होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

* आप चाहें तो लकड़ी की बनी विंड चाइम भी ख़रीद सकते हैं. लकड़ी, ख़ासतौर से बांस से बनी विंड चाइम्स ईको फ्रेंडली होने के साथ-साथ घर-गृहस्थी के मामले में शुभ मानी जाती हैं. इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाना शुभ होता है. लकड़ी या बांस की बनी विंड चाइम में भी रॉड की संख्या बहुत मायने रखती है. इसमें रॉड की संख्या तीन या चार हो तो विंड चाइम शुभ फल प्रदान करती है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और हर कार्य निर्बाध रूप से पूरा होता है.

* कांच की बनी विंड चाइम भी घर की शोभा बढ़ा सकती है, लेकिन यह अगर भारी हुई तो मधुर आवाज़ पैदा नहीं करेगी.

* घर में पांच नलियों या पांच घंटियोंवाली विंड चाइम लगाना हर तरह से शुभ माना जाता है. इससे नकारात्मकता समाप्त होती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है. इसके अलावा अलग-अलग उद्देश्यों के लिए 4, 7, 9, 11 नलियोंवाली विंड चाइम्स भी घर के लिए शुभ मानी जाती हैं.

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* अगर आप अपना सोया हुआ भाग्य जगाना चाहते हैं, तो 6 या 8 रॉडवाली विंड चाइम घर में लगाएं. ये आपके भाग्योदय की बाधाओं को दूर करेगी और आपकी सोई हुई किस्मत को जगा देगी. फेंशगुई और वास्तु में इनका काफ़ी महत्व है.

* अगर आप 2 या 9 घंटियों या नलियों वाली विंड चाइम लगाना पसंद करते हैं, तो सिरामिक की बनी विंड चाइम लेकर आएं. ये विंड चाइम मान-प्रतिष्ठा और यश प्रदान करती है. इसे घर की दक्षिण-पश्‍चिम दिशा में लगाना शुभ होता है.

* आपसी रिश्तों की परेशानियों को हल करने के लिए भी विंड चाइम आपके लिए सहायक साबित हो सकती है.

* अपने बच्चों को सकारात्मक और क्रिएटिव बनाने के लिए उनके कमरे में भी विंड चाइम ज़रूर लगाएं. इसकी मधुर आवाज़ माहौल को ख़ुशनुमा बनाए रखती है.

* अगर आप अपना सामाजिक दायरा बढ़ाना चाहते हैं, तो सिल्वर कलर की विंड चाइम को घर की पश्‍चिम दिशा में लगाएं. इसमें अगर 7 रॉड लगे हों, तो यह काफ़ी लाभ प्रदान करेगी.

* नाम और पैसे की चाहत हो, तो घर की  उत्तर-पश्‍चिम दिशा में पीले रंग की 6 रॉड वाली विंड चाइम लगाएं.

* आप चाहें तो अलग-अलग कलरवाली रंग-बिरंगी विंड चाइम भी लगा सकते हैं. ये आपके घर का माहौल ख़ुशनुमा बनाए रखेगी और सकारात्मकता के साथ-साथ उत्साह का भी संचार करेगी.

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होम सेफ्टी के 21 बेस्ट रूल्स (21 Home Safety Best Rules)

आमतौर पर हम सभी घर की साफ़-सफ़ाई व होम डेकोर पर अधिक ध्यान देते हैं, लेकिन इसी के साथ घर की सुरक्षा (Home Security) भी बेहद ज़रूरी है. ऐसे में होम सेफ्टी (Home Safety) से जुड़े विभिन्न पहलुओं को जानकर हम अपने घर को बेहतर तरी़के से सुरक्षित रख सकते हैं.

Home Safety

1.यदि घर की सुरक्षा की बात की जाए, तो सबसे ज़रूरी है घर का बीमा कराना यानी होम इंश्योरेंस करवाएं, जिसमें मकान व घर के सभी सामानों का बीमा कराया जाता है.

2. घर के प्रवेशद्वार पर मेटल डोर लगाएं और ये सभी दरवाज़े अंदर की तरफ़ खुलते हों, इस बात का भी ध्यान रखें.

3. घर की सेफ्टी के लिए यह भी ज़रूरी है कि कभी भी घर की चाबी घर के बाहर गमले या डोरमैट के नीचे या फिर किसी अन्य जगह पर नहीं छुपाएं.

4. प्रवेशद्वार पर बर्गलर अलार्म भी लगाएं. साथ ही इसे इस्तेमाल करने के तरी़के के बारे में अच्छी तरह से समझ लें.

5. किसी भी अजनबी को ज़रूरी पूछताछ के बाद संतुष्ट होने पर ही घर के अंदर आने दें.

6. घर में अगर स्लाइडिंग दरवाज़े-खिड़कियां हैं, तो उसे लॉक करने की भी पर्याप्त व्यवस्था करें. स्लाइडिंग ट्रैक पर स्टील का पोल भी लगवाएं.

7. कई बार चोर घर के पीछे की तऱफ़ से घर में घुसने की कोशिश करते हैं. ऐसे में घर के चारों ओर ऊंची व मज़बूत कॉन्क्रीट की दीवार बनाएं, जिससे कोई भी अजनबी उसे फांदकर घर के अंदर न आ सके.

8. इसके अलावा बाउंड़्री वॉल की दीवारों पर कंटीले तारों की फेंसिंग या तारों में करंट या एलेक्ट्रिफाइड फेंसिंग भी लगा सकते हैं. इसमें एक सेंसर भी होता है. इससे यह पता चल जाता है कि चोर ने किस एरिया में छेड़छाड़ की है.

9.दरवाज़े पर पीप होल के अलावा इमर्ज़ेंसी स्मोक, हीट व फायर अलार्म लगाएं.

10. बच्चों के रूम में लॉकिंग सिस्टम न रखें. यदि रखना ही हो, तो टावर बोल्ट लॉकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करें.

11. गैस का सिलेंडर खुली जगह पर ही रखें. यहां पर बेवजह की ग़ैरज़रूरी चीज़ें न फैलाएं. साथ ही गैस के पाइप को कभी भी किसी वस्तु आदि से ना ढकें. यदि पाइप में कहीं पर क्रैक नज़र आए, तो तुरंत चेंज करवाएं.

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12. होम सेफ्टी के लिए हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक सिक्योरिटी सिस्टम बेहतर विकल्प है. इसमें चोर द्वारा छेड़छाड़ करने पर खिड़की-दरवाज़े में लगे कॉन्टेक सेंसर्स सिक्योरिटी अलार्म को एक्टीवेट कर देते हैं, जो पहले से फीड पुलिस स्टेशन सहित 15 लोगों को मैसेज के द्वारा चोरों की जानकारी दे देता है. इसमें सीसीटीवी कैमरों से उनके चेहरे भी रिकॉर्ड किए जा सकते हैं.

13. एक्सिस कंट्रोल सिस्टम विद इलेक्ट्रो मैग्नेटिक लॉक लगाने से चाबी रखने से छुटकारा मिल जाता है. इस सिस्टम के तहत परिवार के सदस्यों के फिंगर रजिस्टर्ड हो जाते हैं और उन्हीं के अंगूठे को पहचानकर लॉक खुलता है.

14. यदि आप अकेली रहती हैं, तो आप पर्सनल पैनिक बटन लगवा सकते हैं. यह छोटा-सा यंत्र होता है, जिसे हमेशा अपने पास रखा जा सकता है. कोई भी मुसीबत पड़ने पर उसका बटन दबाने से उसमें जिस भी व्यक्ति का नाम व नंबर आपने फीड किया है, वह अलर्ट हो जाता है.

15. लाइट टाइमर भी बेहतरीन ऑप्शन है, जो फिक्स टाइम पर जलती व बंद होती है. इसके अलावा इसे रेडियो से भी जोड़ सकते हैं, जिससे गाने बजने लगते हैं. ऐसे में चोरों को लगेगा कि घर में लोग हैं.

16. किसी भी अजनबी कॉल द्वारा घर पर आकर कोई गोल्ड ज्वेलरी को दुगुना करने या फिर कोई डबल मुना़फेवाली स्कीम बताने के लिए आना चाहे, तो आप उसे बिल्कुल एंटरटेन न करें और न ही घर पर अकेले होने पर बुलाएं.

17. दरवाज़े पर सिक्योरिटी लॉक की जगह डेथ बोल्ट भी लगा सकते हैं. यह भी काफ़ी मज़बूत रहता है.

18. घर के नौकर या मेड या फिर किसी भी अपरिचित व्यक्ति के सामने आलमारी न खोलें. न ही अपनी ज्वेलरी, पैसे या अन्य क़ीमती सामान या फिर पैसों का लेन-देन उनके सामने करें.

19. बच्चे घर में अकेले रहते हों, तो उनकी सुरक्षा के लिए खिड़की और बालकनी पर बनी रेलिंग यानी लोहे की जाली 42 इंच ऊंची बनवाएं. रेलिंग के दो रॉड्स के बीच कम से कम 4 इंच से अधिक का गैप न रखें, वरना खेलते हुए बच्चे का सिर रॉड्स के बीच फंस सकता है.

20. मेन डोर पर सामान्य तालों की बजाय बायोमैट्रिक्स न्यूमैरिक लॉकिंग, प्री टाइम सेटिंग, कार्ड स्वैपिंग लॉक लगा सकते हैं. ये काफ़ी सेफ रहते हैं. इसमें एक छोटी-सी स्क्रीन होती है, उसमें स्कैनर लगा होता है. यह आपके उंगलियों की पहचान करती है और आपसे चार अंकों का पिन कोड मांगता है. यदि कोई इसे खोलने की कोशिश करता है, तो घर के अंदर लगा सायरन बजने लगेगा और आपको पता चल जाएगा. इसी प्रकार का एक लॉक है न्यूमैरिक लॉक. यह मोबाइल में रखे पासवर्ड की तरह होता है, जिसमें आप अपनी पहचान के लिए चार अंकों का कोड डालते हैं.

21. घर में इंट्रूजन अलार्म जैसे हाईटेक उपकरण लगा सकते हैं. आपकी ग़ैरमौजूदगी में यदि कोई घर के अंदर प्रवेश करता है या घर में कुछ असामान्य होता है, तो यह उपकरण उसकी पहचान कर अलार्म बजा देता है. इसमें कुछ फोन नंबर भी फीड कर सकते हैं, जिससे आपको मैसेज भी मिल सकता है.

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इन बातों पर भी ध्यान दें…

* अगर आप कुछ दिनों के लिए घर से बाहर जा रहे हैं, तो पड़ोसियों को घर पर ध्यान रखने के लिए कह जाएं.

* बाथरूम में थर्मोस्टेट लगवाएं और गरम पानी का तापमान हमेशा नियंत्रित रखें. इससे यदि आपकी अनुपस्थिति में बच्चा बाथरूम में पानी से खेलता है, तो कोई दुर्घटना नहीं होगी.

* होम सेफ्टी के लिए घर में डॉगी रखना भी फ़ायदेमंद रहता है.

* घर के कमरों में नीचे की तरफ़ इलेक्ट्रिक प्लग-वायर आदि न लगाएं, क्योंकि छोटे बच्चे खेलते हुए इन्हें छू सकते हैं. इलेक्ट्रिक सॉकेट में उंगली डाल सकते हैं.

* बुज़ुर्गों के लिए सेफ्टी वॉक स्टेप्स बनाएं.

* कभी भी छोटे बच्चों को किचन में अकेला न छोड़ें. वे गैस चूल्हा, सिलेंडर आदि को छेड़ सकते हैं.

* धुएं के लिए स्मोक एंड फायर डिटेक्टर लगाएं.

* होम क्लीनिंग व केमिकल प्रोडक्ट्स को शिशुओं की पहुंच से दूर रखें.

* कमरों के नीचे के रैक में दवाइयां, सिरप आदि न रखें.

* इलेक्ट्रॉनिक सामान बच्चों के पहुंच से दूर रखें. वे इसे लेकर एक्सपेरिमेंट्स कर सकते हैं.

– ऊषा गुप्ता

हर किसी के पास होने चाहिए ये 6 होम मैनेजमेंट ऐप्स (6 Must Have Home Management Apps)

Home Management Apps
घर को मैनेज करना आसान काम नहीं है, लेकिन अब इस काम को आसान और तनावरहित बना दिया है, आपके स्मार्टफोन ने. बस ज़रूरत है तो ऐसे ऐप्स को डाउनलोड करने की, जिनकी सहायता से आप अपने घर की क्लीनिंग, मेंटेनेंस, गार्डनिंग सर्विस से लेकर बजट बनाने और ग्रॉसरी शॉपिंग तक के सारे काम आसानी से कर सकते हैं.

Home Management Apps

आर ग्रॉसरीज़ (Our Groceries)

अब आपको न तो किराने के सामान को याद रखने की ज़रूरत है और न ही किराने के सामान की लिस्ट बनाने के लिए पेन व डायरी ढूंढ़ने की, क्योंकि आपके ग्रॉसरी शॉपिंग के काम को आसान बना दिया है आपके स्मार्टफोन ने. आप अपने स्मार्टफोन में ‘आर ग्रॉसरीज़’ मोबाइल ऐप को डाउनलोड करके अपनी ग्रॉसरी शॉपिंग के काम को आसान कर सकते हैं. इस फ्री ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको किराने का सामान याद रखने की आवश्यकता नहीं है. ग्रॉसरी शॉपिंग के लिए यह बेस्ट ऐप है. इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको किरानेे के जिस सामान की आवश्यकता है, उसकी सूची बनाकर सामान ऑर्डर कर सकते हैं. फिर अगले महीने इस सूची में बदलाव करके आप दोबारा सामान ऑर्डर कर सकते हैं.

कुछ अन्य ग्रॉसरी ऐप्स इस प्रकार से हैं

1. ज़ोपनॉउ (ZopNow)

2. आरामशॉप (AaramShop)

3. गोदरेज नेचर्स बास्केट

(Godrej Nature’s Basket)

4. पेपरटैप (PepperTap)

5. बिगबास्केट (BigBasket)

6. लोकल बनिया (LocalBanya)

मनी मैनेजर ऐप- वॉलनट (Walnut)

यह बेस्ट मनी मैनेजर ऐप है, जो आपके मासिक ख़र्चों को स्वचालित (ऑटोमैटिकली) और सुरक्षित रूप से ट्रैक करता है. इस ऐप को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि आपके ख़र्चे बजट के अंदर हों, बिलों का भुगतान समय पर हो और बचत अधिक से अधिक हो. इस ऐप के ज़रिए आप अपने बैंक अकाउंट से डेबिट हुई रक़म, कैब का भुगतान, हर महीने राशन,

बिजलीपानी, शॉपिंग आदि बिलों के भुगतान के बारे में जान सकते हैं. इस ऐप में जाकर आप कैटेगरी के अनुसार ख़र्चों को बांट सकते हैं, जैसेएंटरटेनमेंट, ग्रॉसरी, हेल्थ, इंवेस्टमेंट आदि. यह ऐप आपको पेंडिंग बिल्स की याद दिलाता है. किसी को ट्रांसफर की गई रक़म और किसी से रिसीव की हुई राशि के बारे में भी जानकारी देता है. दूसरे शब्दों में कहें तो वॉलनट ऐप का उद्देश्य ये बताना है कि आपने अपना पैसा किस तरह से ख़र्च किया है और कितनी अच्छी तरह से आप बचत कर सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि अगर आप फ़िज़ूलख़र्च क़िस्म के हैं, तो यह ऐप आपके लिए बहुत फ़ायदेमंद है.

इसके अलावा और भी मनी मैनेजर ऐप्स हैं:

– मनी व्यू मनी मैनेजर (Money View Money Manager)

क्विकली डेली एक्सपेन्स मैनेजर (Qykly Daily Expense Manager

ईटी मनी (ET Money)

एम ट्रैकर (mTrakr)

टुडूस्टि (Todoist)

अगर आपको काम भूलने की आदत है, तो यह ऐप आपके लिए बहुत ही फ़ायदेमंद है. इस ऐप की ख़ास बात यह है कि अनगिनत लोग प्रोफेशनल कामों के लिए इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब घर के ज़रूरी कामों के लिए भी यह बहुत उपयोगी साबित हो रहा है. इस ऐप में आप अपने सभी महत्वपूर्ण कामों, जैसेग्रॉसरी शॉपिंग, मूवी के टिकट बुकिंग, डॉक्टर के अपॉइंटमेंट्स, बच्चों को एक्टिविटी क्लास में ले जाना जैसे कामों को जोड़ सकते हैं और उनको सिनक्रोनाइज़ भी कर सकते हैं. यह आपकी टुडूलिस्ट को अच्छी तरह से ऑर्गनाइज़ करता है. इस ऐप के द्वारा आप अगले 7 दिन की टुडूलिस्ट एडवांस में बना सकते हैं. यूज़र्स इस ऐप में

अलगअलग प्रोजेक्ट/टास्क के तहत पर्सनल, शॉपिंग, वर्क और अन्य टास्क दर्ज़ कर सकते हैं. आप इस ऐप को अपने फैमिली के हर सदस्य के फोन पर डाउनलोड कर सकते हैं.

एवरनोट (Evernote)

एवरनोट ऐप के ज़रिए आप अपने पर्सनल और प्रोफेशनल प्रोजेक्ट्स को अच्छी तरह से ऑर्गनाइज़ कर सकते हैं. यह एक ऑर्गनाइज़र और प्लानर नोटबुक ऐप है, जिसमें आप अपनी टुडूलिस्ट बना सकते हैं, इमेजेस ऐड कर सकते हैं, कैमरे से डॉक्युमेंट्स को स्कैन करके सेव कर सकते हैं. इस ऐप में आप अपने नोट के कंटेंट को एडिट और शेयर भी कर सकते हैं. इस ऐप के ज़रिए ऐसी रेसिपी, जो आप बनाना चाहते हैं और ऐसे फर्नीचर जो भविष्य में ख़रीदना चाहते हैं, उन्हें आप सेव कर सकते हैं. इनके अलावा आप ऑडियो रिकॉर्डिग्स को भी सेव कर सकते हैं.

कोज़ी फैमिली ऑर्गनाइज़र (Cozi Family Organizer)

अगर आपने स्मार्टफोन पर इस ऐप को डाउनलोड किया है, तो फिर आपको कैलेंडर देखने की ज़रूरत नहीं है. आपको अपने फैमिली मेम्बर्स को भी यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि वे किसी विशेष दिन, जैसेबर्थडे, एनीवर्सरी पर क्या करनेवाले हैं. बस ज़रूरत है, तो इस ऐप को डाउनलोड करने की. और फिर घर के सभी सदस्यों को इसमें ऐड कर दें. उसके बाद प्रत्येक सदस्य को अपना शेड्यूल देखने के लिए अपडेट करें. इसी तरह से जब वे अपना शेड्यूल अपडेट करेंगे, तो आप भी देख सकते हैं. इस तरह से यह ऐप फैमिली के बीच कॉर्डिनेशन को आसान बनाता है. इस ऐप को आप गूगल, ऐप्पल आईकेल और आउटलुक कैलेंडर को ‘कोज़ी’ करके डाउनलोड कर सकते हैं.

चीप होम सर्विस ऐप (CHEEP)

ऑफिस के साथ घर की दोहरी ज़िम्मेदारी एक साथ निभाना महिलाओं के लिए बेहद मुश्किल काम हैउनके इस मुश्किल काम को आसान बनाने में मदद की है चीप होम सर्विस ऐप ने. होम सर्विस ऐप के ज़रिए आप 24*7 अपने घर की क्लीनिंग, पेस्ट कंट्रोल, रेफ्रिजेरेटर रिपेयर, लॉन्डरी सर्विस, एसी इंस्टॉलेशन, हाउसमेड सर्विस, गार्डनिंग सर्विस, ड्राइवर, कारपेंटर, प्लबिंग, इलेक्ट्रिशियन, होम ट्यूटर, मेकअप आर्टिस्ट, पार्टी प्लानर, वास्तु कंसल्टेंट और अन्य बहुत सारी सेवाओं के लिए मदद ले सकते हैं. ये सभी सेवाएं विश्‍वसनीय प्रोफेशनल्स द्वारा दी जाती हैं. इन सेवाओं के लिए आप कॉल और चैट भी कर सकते हैं. यहां तक कि प्रोफेशनल को हायर करने के लिए नेगोशिएट भी कर सकते हैं. प्रोफेशनल्स द्वारा काम पूरा न किए जाने की स्थिति में रिफंड भी मिलता है.

देवांश शर्मा

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क्या आपके घर में हैं ये हेल्दी इंडोर प्लांट्स? (Healthy Plants That Can Purify Your Indoor Air)

Air Purifying Plants
इंडोर प्लांट्स न स़िर्फ घर की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि वो घर के साथ-साथ घर में रहनेवालों को भी हेल्दी रखते हैं. घर में मौजूद टॉक्सिक हवा को क्लीन (Air Purifying Plants) करनेवाले और बेहतरीन होम रेमेडीज़ के तौर पर काम आनेवाले कुछ ऐसे ही उपयोगी व हेल्दी इंडोर प्लांट्स के बारे में हम बता रहे हैं.

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कितने फ़ायदेमंद हैं इंडोर प्लांट्स?
  • इंडोर प्लांट्स घर में ऑक्सीजन(Air Purifying Plants) की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे हमें ताज़ी हवा मिलती है और हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहता है.
  • एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्वे द्वारा की गई स्टडी में यह बात सामने आई है कि इंडोर प्लांट्स के कारण घर में मॉइश्‍चर का लेवल सामान्य से थोड़ा बेहतर रहता है, जिसके कारण घर में रहनेवालों को ड्राई स्किन, सर्दी-खांसी और गले में खराश जैसी समस्याएं कम होती हैं.
  • इंडोर प्लांट्स हवा को शुद्ध करने का काम करते हैं. इस विषय पर नासा ने कई रिसर्च भी किए हैं, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि इंडोर प्लांट्स हमारे लिए बहुत हेल्दी होते हैं. उनके मुताबिक़ शुद्ध हवा के लिए हर 100 स्न्वेयर फीट में एक इंडोर प्लांट रखना चाहिए.
  • कैंसस स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा की गई स्टडी में यह बात सामने आई है कि सर्जरीवाले मरीज़ों के कमरे में प्लांट रखने से उनके घाव जल्दी भरते हैं, इसलिए अगली बार किसी ऐसे मरीज़ को देखने जा रहे हैं, जिनकी सर्जरी हुई है, तो इंडोर प्लांट(Air Purifying Plants) से बेहतर कोई गिफ्ट नहीं हो सकता.
  • इंडोर प्लांट्स हमारी कार्यक्षमता बढ़ाते हैं. नेचर या पेड़-पौधों के इर्द-गिर्द रहने से हमारी याद्दाश्त बेहतर होती है और फोकस बढ़ता है, जिससे हमारी काम करने की क्षमता बढ़ती है. मिशिगन यूनिवर्सिटी की स्टडी में पाया गया कि इंडोर प्लांट रखने से एकाग्रता 20% तक बढ़ जाती है.
  • इंडोर प्लांट्स सुकूनभरी नींद भी देते हैं. अगर आप भी रातभर करवटें बदलते हैं, तो अपने बेड के पास लैवेंडर और जैसमीन प्लांट्स रखें
  • इसके अलावा ये हमारी मेंटल हेल्थ के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद होते हैं. ये पॉज़िटिविटी का लेवल बढ़ाकर हमें रिलैक्स्ड और सिक्योर फील कराते हैं.
 तुलसी
  • आयुर्वेद और नैचुरोपेथी दोनों में ही तुलसी(Air Purifying Plants) को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. इसके एसेंशियल ऑयल से कई बीमारियां दूर होती हैं. यह हमारी श्‍वसन प्रणाली के लिए बेहतरीन औषधि है. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स स्ट्रेस को कम करने के साथ-साथ डायबिटीज़ और हार्ट प्रॉब्लम्स में भी कारगर साबित होते हैं. आम बुख़ार से लेकर गंभीर बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन में तुलसी का पौधा बहुत फ़ायदेमंद साबित होता है.
  • इसमें मौजूद प्यूरिफाइंग, डिटॉक्सिफाइंग और क्लींज़िंग प्रॉपर्टीज़ के लिए यह हर्बल व कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किया जाता रहा है.
  • यह इम्यूनिटी बूस्टर है. तुलसी के पत्तों को उबालकर उसमें कालीमिर्च पाउडर मिलाकर पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
  • यह तरह-तरह के एलर्जीज़ और इंफेक्शन्स से लड़ता है.
  • यह स्किन डिसऑर्डर, खुजली और दाद का कारगर इलाज है.
  • फाइटो न्यूट्रिएंट्स, एसेंशियल ऑयल, विटामिन ए और सी के गुणों से भरपूर तुलसी के काढ़े से सर्दी-खांसी, बुख़ार, ख़राब गला, सीने में जकड़न, फ्लू आदि में राहत मिलती है.
  • यह बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखता है, इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए काफ़ी लाभदायक सिद्ध होता है.
  • यह शरीर में मौजूद यूरिक एसिड लेवल को कंट्रोल में रखता है, जिससे किडनी स्टोन का ख़तरा नहीं रहता.
  • यह हेपेटाइटिस, मलेरिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू और ट्यूबरकुलोसिस में काफ़ी कारगर सिद्ध होता है.
एलोवीरा
  • न्यूट्रीएंट्स, एक्टिव एंज़ाइम्स, विटामिन्स, मिनरल्स और अमीनो एसिड के गुणों से भरपूर एलोवीरा न स़िर्फ स्किन प्रॉब्लम्स को दूर रखता है, बल्कि अपने आप में हेल्थ रेमेडी है. यह कई हेल्थ प्रॉब्लम्स को दूर करता है.
  • एंटी-इंफ्लेमेटरी(Air Purifying Plants) गुणों से भरपूर एलोवीरा शरीर में मौजूद फ्री रैडिकल्स को दूर करता है, जिससे शारीरिक जलन से राहत मिलती है.
  • गैस्ट्रो के इलाज में एलोवीरा का इस्तेमाल किया जाता है. हार्ट बर्न, सीने में दर्द, निगलने में परेशानी जैसे लक्षणों में राहत दिलाता है.
  • एलोवीरा का जूस गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल प्रॉब्लम्स के लिए ज़िम्मेदार पैथोजेन्स से हमारी सुरक्षा करता है.
  • यह ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखता है, इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ इसे सप्लीमेंट के तौर पर लेते हैं.
  • यह ओरल हेल्थ के लिए बेस्ट रेमेडी माना जाता है. इसमें मौजूद गुणों के कारण यह मसूड़ों को सॉफ्ट बनाता है और मुंह के छालों और घाव के लिए बेहतरीन औषधि है.
  • एलोवीरा का जूस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाता है.
  • एलोवीरा में एंटी ट्यूमर और एंटी कैंसरस प्रॉपर्टीज़ होती हैं, जिससे कैंसर का ख़तरा भी कम होता है.
  •  पाइल्स के इलाज में एलोवीरा काफ़ी कारगर साबित होता है.
  • एजिंग के लक्षणों, सन बर्न और टैन को दूर करता है, स्ट्रेच मार्क्स को घटाकर त्वचा को मॉइश्‍चराइज़ करता है.
  • डैंड्रफ को दूर कर, बालों के हेल्दी ग्रोथ में मदद करता है, जिससे स्काल्प का पीएच बैलेंस बना रहता है और बाल सॉफ्ट व सिल्की बने रहते हैं.

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पुदीना
  • मैग्नीज़, विटामिन ए और सी के गुणों से भरपूर पुदीने(Air Purifying Plants) को दुनिया की सबसे पुरानी औषधि माना गया है.
  •  इसमें मौजूद मेंथॉल की ख़ूबियों के कारण यह माइंड और बॉडी दोनों पर कूलिंग इफेक्ट देता है.
  • पेटदर्द, मितली आदि में पुदीना बेस्ट रेमेडी है. आज भी पेटदर्द होने पर लोग पहले पुदीने की गोली खाते हैं.
  • माइग्रेन, टेंशन या फिर स्टे्रस के कारण होनेवाले सिरदर्द से राहत दिलाता है.
  • इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह की दुर्गंध को दूर कर दांतों व मसूड़ों की समस्याओं से निजात दिलाता है.
  • यह एलर्जी और अस्थमा से राहत दिलाता है.
  • मसल पेन से राहत दिलाने में पुदीना काफ़ी कारगर माना जाता है.
  • यह एकाग्रता को बढ़ाकर याददाश्त को बढ़ाने में मदद करता है.
 लैवेंडर
  • अपनी ख़ुशबू के लिए मशहूर लैवेंडर में कई औषधीय(Air Purifying Plants) गुण भी हैं. यह एक माइल्ड एंटी डिप्रेसेंट होने के साथ-साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स से शरीर की सुरक्षा करता है.
  • यह थकान और तनाव को दूर करने में मदद करता है.
  • अनिद्रा से जूझ रहे लोगों के लिए यह काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है. इसकी चाय भी अनिद्रा की समस्या को दूर करने में मदद करती है.
  • एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी ऑक्सीडेंट्स के गुणों से भरपूर लैवेंडर शारीरिक जलन को दूर करने के साथ-साथ मसल पेन से भी राहत दिलाता है.
  • स्किन प्रॉब्लम्स में भी लैवेंडर काफ़ी कारगर सिद्ध होता है. ड्राई स्किन को ट्रीट करने के साथ-साथ त्वचा संबंधी गंभीर समस्याएं, जैसे- सोरायसिस और एक्ज़िमा आदि में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होता है.
  • लैवेंडर एंटी सेप्टिक के गुणों से भरपूर है, तभी तो घाव पर लैवेंडर का पेस्ट लगाने से घाव न स़िर्फ जल्दी भरता है, बल्कि किसी तरह का इंफेक्शन भी नहीं होता.
  • पीएमएस के लक्षणों में राहत दिलाता है. लैवेंडर को अरोमा थेरेपी के ज़रिए पीएमएस के दर्द व परेशानियों से निजात दिलाने में इस्तेमाल किया जाता है.
करीपत्ता
  • खाने के स्वाद को दुगुना करने के अलावा करीपत्ता(Air Purifying Plants) में कई औषधीय गुण भी हैं, इसलिए आपके घर में भी करीपत्ता ज़रूर होना चाहिए.
  • कार्बोहाइडेट्स, फाइबर, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, विटामिन ए, बी, सी, ई के गुणों से भरपूर करीपत्ता हार्ट को बेहतर ढंग से काम करने और इंफेक्शन्स से लड़ने में मददगार साबित होता है.
  • आयरन और फॉलिक एसिड से भरपूर करीपत्ता एनीमिया से बचाता है.
  • ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखकर यह डायबिटीज़ से लड़ने में मदद करता है.
  • यह पाचनशक्ति को बेहतर बनाता है.
  • स्टडी में पाया गया है कि यह बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाकर इसके नुक़सान से हमें बचाता है.
  • इसमें मौजूद विटामिन ए आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद करता है.
  • अगर आपके बाल स़फेद हो रहे हैं, तो खाने में करीपत्ता शामिल करें. यह बालों को स़फेद होने से रोकता है.

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हवा को शुद्ध करनेवाले प्लांट्स

मनी प्लांट और पीस लीलीमनी प्लांट और पीस लीली: ये दोनों ही इंडोर प्लांट एयर पॉल्यूशन को कंट्रोल करते हैं. घर में ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ाकर घर में रहनेवालों को हेल्दी रखते हैं. हवा में मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड को कम करके हवा को शुद्ध करते हैं.

स्पाइडर प्लांट: यह इंडोर प्लांट हवा में मौजूद ख़तरनाक केमिकल्स से हमें सुरक्षित रखता है. स्पाइडर प्लांट हवा में मौजूद कार्बन मोनॉक्साइड को सोख लेता है, जिससे घर में रहनेवाले लोगों पर इसका साइड इफेक्ट नहीं होता.

स्नेक प्लांट:  इसे मदर-इन-लॉज़ टंग भी कहते हैं. ज़्यादातर लोग इसे अपने बाथरूम और बेडरूम में रखते हैं.  यह हवा को शुद्ध करने के साथ ही ऑक्सीजन सप्लाई भी बढ़ाते हैं. रात को ये कार्बन डाई ऑक्साइड लेकर ऑक्सीजन देते हैं, इसलिए लोग इसे बेडरूम में भी रखते हैं.

गोल्डन फोटोज़: बाकी एयर क्लीनिंग इंडोर प्लांट्स की तरह यह भी हवा में मौजूद जहरीली गैसों, कार्बन मोनॉक्साइड, बेनजेन और फॉर्मलडिहाइड को सोखकर आपको शुद्ध हवा देता है. इसे आप गमले में या हैंगिंग पॉट में लगाकर खिड़की में रख सकते हैं. 

– दिनेश सिंह           

राशि के अनुसार होम डेकोर (How to Decorate Your Home According to Your Zodiac Sign)

राशि के अनुसार होम डेकोर
आपके जीवन में हमेशा ख़ुशियां शामिल हों, सुख-संपत्ति और स्वास्थ्य प्राप्त हो, इसके लिए ज़रूरी है होम डेकोर करते समय अपनी राशि का भी ध्यान रखें.

मेषराशि के अनुसार होम डेकोर

एनर्जेटिक मेष राशिवालों का रेड पसंदीदा कलर है.

– घर या ऑफिस में रेड या हॉट पिंक का इस्तेमाल इनमें एनर्जी बनाए रखता है.

– इन्हें लाइट्स पसंद हैं. कम लाइट्स में ये डिप्रेशन महसूस करते हैं.

– इस राशिवालों को लाइट कलर्स से बचना चाहिए और डेकोर मेें ब्राइट कलर्स का इस्तेमाल करना चाहिए. रेड रंग का हिंट हर रूम में होना चाहिए, ख़ासकर किचन और डाइनिंग रूम में.

– प्रेरणादायक पंक्तियां, ट्रॉफीज़ या मेमेंटोज़ को ये होम एक्सेसरीज़ के तौर पर इस्तेमाल करना पसंद करते हैं.

– मेष राशिवाले पढ़ने के शौक़ीन होते हैं, इसलिए इन्हें अपने घर में बुकशेल्फ भी बनाना चाहिए.

– इन्हें क्लीन-ऑर्गेनाइज़्ड घर पसंद आता है, तो होम डेकोर भी वे उसी के हिसाब से करवाते हैं.

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वृषभ

– इस राशिवाले लक्ज़री और कंफर्ट चाहते हैं और इसकी झलक इनके होम डेकोर में भी नज़र आती है.

– इन्हें ट्रेडिशनल चीज़ों से लगाव होता है. शायद इसलिए इनके घरों में आपको एंटीक चीज़ों का कलेक्शन मिल जाएगा.

– इन्हें हर ख़ूबसूरत चीज़ आकर्षित करती है, इसलिए चाहे वो आर्ट पीस हो या कोई पेंटिंग- ये डेकोर में इनको शामिल कर लेते हैं.

– पर्शियन रग्स, पेंटिंग्स, लेदर सोफा, आर्टिस्टिक फोटोफ्रेम- इनके घर में आपको ये चीज़ें ज़रूर नज़र आ जाएंगी.

– व्हाइट और ब्लू रंग इस राशिवालों के लिए लकी कलर्स हैं और फेवरेट कलर्स भी. इन्हें डेकोर में शामिल करें.

– घर की दीवारों को यलो, क्रीम या व्हाइट रंग से पेंट करें. इससे पॉज़िटिव एनर्जी बनी रहेगी.

 

मिथुन

-ये सोशल और ज़िंदादिल होते हैं और लोगों से मिलना-जुलना इनको पसंद आता है. इनका घर भी इनके दिल की तरह ही बड़ा होता है.

– मिथुन राशिवाले काफ़ी क्रिएटिव होते हैं और घर सजाते वक़्त भी ये क्रिएटिविटी का इस्तेमाल करते हैं. इनके होम डेकोर में आपको ओल्ड और मॉडर्न दोनों का परफेक्ट ब्लेंड नज़र आएगा.

– इस राशिवालों को बदलाव पसंद है, घर की सजावट में भी ये बदलाव करते रहते हैं.

– लाइट ग्रीन, लाइट ब्लू, ऑरेंज और रेड कलर का इस्तेमाल करना चाहिए. ये इनके लिए लकी कलर्स हैं.

– वायव्य (उत्तर-पश्‍चिम) कोण में हल्का फर्नीचर रखें. इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहेगी.


कर्क

– कर्क राशिवाले क्रिएटिव और रोमांटिक होते हैं. इन्हें रिश्तों से गहरा जुड़ाव होता है, इसलिए इनके लिए डेकोरेशन से ज़्यादा ज़रूरी है घर में कोज़ी और अपनापन.

– चूंकि ये फैमिली से ज़्यादा जुड़ाववाले होते हैं, इसलिए इनके घर में फैमिली फोटोज़, कोलाज, एलबम आदि को ख़ास जगह दी जाती है.

– एंटीक चीज़ें इन्हें पसंद हैं, फिर चाहे वो एंटीक फर्नीचर हो, आर्ट पीस या होम एक्सेसरीज़- ये डेकोर में इसका ख़ूबसूरती से इस्तेमाल करते हैं.

– सिल्वर, लाइट ब्लू और व्हाइट इस राशि के लिए लकी कलर है. इनका इस्तेमाल इनको शांति और सुकून देगा.

– ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में पानी से भरा बर्तन या बहते पानी की तस्वीर ज़रूर लगाएं.

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सिंह

– रॉयल, क्लासिक और एलीगेंस- सिंह राशिवालों की ख़ूबियां हैं और ये उनके होम डेकोर में भी नज़र आती हैं.

– सिंह राशिवालों को नेचर से ख़ास लगाव होता है, इसलिए ये होम डेकोर में इनडोर प्लांट्स को ख़ास जगह देते हैं.

– ये क्लीन इंटीरियर सिलेक्ट करते हैं. बड़े-बड़े फर्नीचर इन्हें अच्छे नहीं लगते. क्लासी, मॉडर्न और कंफर्टेबल यही इनका डेकोर मंत्र होता है.

– इन्हें बोल्ड कलर्स पसंद हैं. डीप रेड, टरकॉइज़, प्लम कलर्स का इस्तेमाल ये ज़्यादा करते हैं, जो इनके होम डेकोर को रॉयल अंदाज़ देते हैं.

– लिविंग रूम के डेकोर पर ये ख़ासतौर से ध्यान देते हैं, क्योंकि यहां समय बिताना इन्हें पसंद होता है.

– व्हाइट, सिल्वर और गोल्ड इनके लिए लकी कलर्स हैं. कुशन कवर्स, परदे या बेडशीट में इनका इस्तेमाल जीवन में सुख-समृद्धि लाएगा.

 

कन्या

– इस राशिवाले परफेक्शनिस्ट होते हैं. होम डेकोर में भी इन्हें सब कुछ परफेक्ट ही चाहिए. ये कभी संतुष्ट भी नहीं होते, इसलिए डेकोर में ये बदलाव लाते रहते हैं.

– इन्हें क्लीन डेकोर पसंद है. थोड़ा भी क्लटर इन्हें पसंद नहीं आता.

– कन्या राशिवालों के घर में प्रवेश करते ही एक अलग ही शांति और सुकून का एहसास होता है.

– सिंपल और बेसिक यही इनका होम डेकोर मंत्र है. होम एक्सेसरीज़ के तौर पर ये कुछ ही चीज़ें यूज़ करते हैं, मसलन- कलरफुल कुशन्स, फ्लावर वास.

– लाइट ग्रीन, ब्लू, यलो और ऑरेंज इनके लिए लकी कलर्स हैं.

– तुलसी का पौधा लगाएं, हमेशा स्वस्थ रहेंगे.र्ीं नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्‍चिम) में कोई हैवी फर्नीचर रखें या अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाएं, तो हमेशा ख़ुशहाली बनी रहेगी.

 

तुला

– इस राशिवाले आर्ट और क्राफ्ट लवर होते हैं और अपने होम डेकोर को भी डिज़ाइनर लुक देना पसंद करते हैं.

इनके डेकोर में आपको परफेक्ट बैलेंस नज़र आएगा. कहीं कुछ भी ज़्यादा या लाउड नहीं. बस, जितने की ज़रूरत है, वही ख़ूबसूरती से अरेंज किया हुआ.

– इन्हें लाइट व कूल कलर पैलेट पसंद आता है. क्रीम, व्हाइट, पिंक, लाइट ब्लू इनके लिए परफेक्ट कलर सिलेक्शन है.

– कलाप्रेमी होने के कारण आपको इनके घर होम थिएटर, स्टाइलिश आउटफिट से भरा वॉर्डरोब और किताबों का कलेक्शन मिलेगा.

– हां, ये कभी-कभी बहुत ज़्यादा हैवी फर्नीचर सिलेक्ट करने की ग़लती कर बैठते हैं, जिससे इन्हें बचना चाहिए.

 

वृश्‍चिक

– वृश्‍चिक राशिवाले लोग बेहद प्राइवेट क़िस्म के होते हैं. इनके लिए घर यानी पर्सनल स्पेस, जिसमें बहुत ज़्यादा बाहरी लोगों की दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं.

– इसी वजह से इनके घर पर आपको वेल्वेट जैसे हैवी फैब्रिकवाले परदे ही मिलेंगे.

– इन्हें अपनी पर्सनल लाइफ इतनी पसंद है कि ये बेडरूम को लिविंग रूम से एकदम डिटैच्ड यानी अलग-थलग रखते हैं.

– इनके होम डेकोर में पावर की झलक मिलती है, चाहे फिर वो फर्नीचर सिलेक्शन हो, फनिर्ंशिंग या होम एक्सेसरीज़.

– ये क्वालिटी से कभी समझौता नहीं करते. हाई क्वालिटी फर्नीचर, पेंटिंग- इनका सिलेक्शन बेहद ख़ास होता है.

– वृश्‍चिक राशिवालों को पानी बेहद पसंद है. बीच के किनारे घर बनाना इनका सपना होता है. अगर आप ऐसा नहीं कर सकते, तो फिश एक्वेरियम घर में रखें.

– रेड, लाइट यलो और ऑरेंज इनके फेवरेट कलर्स हैं और इन्हें अपने डेकोर में शामिल करना वो नहीं भूलते.

धनु

– इस राशिवालों को ओपन स्पेस बहुत पसंद है, इसलिए बालकनी या टैरेस वाला घर ही इन्हें अच्छा लगता है.

– ऑरेंज, हॉट पिंक, यलो जैसे ब्राइट कलर्स को डेकोर में शामिल करें.

– इस राशिवालों को एथनिक लुक पसंद है. ब्रोकेड के कुशन कवर्स, डिफरेंट प्रिंट्स के कर्टन और बेडशीट्स का कलेक्शन इनके पास होता है.

– कंफर्टेबल सोफा, परफेक्ट लाइटिंग अरेंजमेंट और एक बड़ा-सा डाइनिंग टेबल- ये सारी चीज़ें इनके घर में आपको नज़र आ ही जाएंगी.

 

मकर

– मकर राशिवाले बेहद अनुशासित होते हैं.

– होम डेकोर में सिंप्लिसिटी ही इनका फॉर्मूला है. ये कम से कम फर्नीचर और होम एक्सेसरीज़ ही इस्तेमाल करना पसंद करते हैं.

– डेकोर में कंफर्टेबल स्टाइल इनकी पहली चॉइस होती है.

– इन्हें कल्चर और ट्रेडिशन से भी प्यार होता है, इसलिए ये एंटीक चीज़ों को डेकोर में शामिल करना पसंद करते हैं.

– डार्क ब्लू, ग्रीन, ब्राउन और ब्लैक कलर इनके फेवरेट और लकी कलर्स हैं. सुख-समृद्धि के लिए इन्हें डेकोर में शामिल करें.

– घर के दक्षिण कोण में वॉयलेट रंग का इस्तेमाल इनको फाइनेंशियली मज़बूत बनाएगा.

 

कुंभ

– मॉडर्न और फ्यूचरिस्टिक- इनके होम डेकोर में इनकी पर्सनैलिटी की झलक मिलती है.

– कंटेम्परेरी और एंटीक फर्निशिंग, लेदर सोफा इन्हें ख़ास पसंद आते हैं.

– ब्लू, वॉयलेट, इंडिगो आदि इनके फेवरेट कलर्स हैं, जिसका इस्तेमाल ये होम डेकोर में भी करते हैं.

– नेचुरल लाइट्स इन्हें एनर्जेटिक फील कराती है, इसलिए ये विंडोज़ बड़े ही सिलेक्ट करते हैं.

 

मीन

– प्रकृति प्रेमी मीन राशिवाले लोगों को ऐसे ही घर की तलाश होती है, जहां से कुदरत का ख़ूबसूरत नज़ारा दिखता हो.

– स्टाइल की अच्छी समझ होती है मीन राशिवालों को और ये क्रिएटिव भी होते हैं. स्टाइल और किएटिविटी का ये कॉम्बीनेशन इनके होम डेकोर को ख़ूबसूरत अंदाज़ देता है.

– यलो, क्रीम और गोल्डन शेड्स इनके होम डेकोर में आपको ज़रूर नज़र आएंगे, क्योंकि ये इनके फेवरेट कलर्स हैं.

– इन्हें अपने घर के ईशान कोण में पानी भरकर रखना चाहिए. इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है.

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 श्रेया तिवारी

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होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स(Top Home Decor Myths And Facts)

होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स

हर साल घर का रेनोवेशन कराना आसान नहीं है. लेकिन यदि घर की सजावट में थोड़ा-सा बदलाव किया जाए, तो घर को न्यू लुक ज़रूर दिया जा सकता है. पर अधिकतर लोगों के मन में होम डेकोर व डिज़ाइन्स को लेकर कई मिथ्स होते हैं, जिसके कारण वे डेकोर संबंधी सही निर्णय नहीं ले पाते. जाने ऐसे ही कुछ मिथ्स की हक़ीक़त.

होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स

मिथ: छोटे कमरे में छोटा फर्नीचर रखें.
यह केवल एक अवधारणा है. छोटे कमरे में छोटा फर्नीचर रखने से बेशक वह कम जगह घेरते हैं, लेकिन ऐसा करने से आपको स्वीट होमवाली फीलिंग नहीं आएगी. यदि आप अपने छोटेे कमरे को बड़ा लुक देना चाहते हैं, तो 1-2 ब़ड़े फर्नीचर, जैसे बड़ी चेयर/सेटी भी रख सकते हैं.

 

मिथ: घर के हर कमरे की सीलिंग पर व्हाइट पेंट कराना चाहिए.
घर को सजाने का यह तरीक़ा अब पुराना हो गया है. हर कमरे की सीलिंग पर व्हाइट कलर कराना बोरियत का एहसास कराता है. सीलिंग कमरे के 1/6 हिस्से को दर्शाता है. इसलिए इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. सीलिंग की टाइप और ऊंचाई को ध्यान में रखकर कमरे को क्रिएटिव लुक दिया जा सकता है. जैसे- दीवारोें को डार्क कलर से और सीलिंग पर लाइट कलर करके कमरे को स्पेशियस और ब्राइट लुक दिया जा सकता है.
– सीलिंग और दीवारों पर एक ही कलर का पेंट करके कमरे का लुक बदल सकते हैं, चाहें तो मोल्डिंग से सीलिंग लाइन भी बनवा सकते हैं.
– बड़े कमरे में डार्क कलर की सीलिंग कमरे को स्मॉल लुक देती है.
– कैबिनेट, फर्नीचर, कारपेट आदि के कलर से मैच करती हुई सीलिंग भी रखी जा सकती है.

 

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मिथ: छोटे कमरों में केवल व्हाइट या पेल जैसे न्यूट्रल कलर का चुनाव करें.
आजकल मार्केट में न्यूट्रल कलरवाले शेड कार्ड्स मिलते हैं, जिनमें न्यूट्रल कलर के अनेक शेड्स दिए रहते हैं. आप उनमें से अपने फेवरेट कलर का चुनाव कर सकते है. चाहें तो न्यूट्रल कलर में दूसरे कलर्स को मिक्स-मैच करके कमरे को स्पेशियस लुक दे सकते हैं. इसके अलावा कमरे का साइज़, फर्नीचर का साइज़, फर्नीचार अरेंजमेंट और वॉल कलर से भी आप छोटे कमरे का बड़ा लुक दे सकते हैं.

 

मिथ: न्यूट्रल कलर से नीरसता/बोरियत महसूस होती है.
ऐसा नहीं है. लोगों की पसंद को ध्यान में रखते हुए अब पेंट बनानेवाली कंपनियां न्यू कलर स्कीम्स निकालने लगी हैं, जिसमें अनगिनत शेड्स दिए रहते हैं. इन शेड्स में से आप अपनी पसंद के कलर का चुनाव कर सकते हैं. यदि आप न्यूट्रल या मोनोक्रोमेटिक कलर का चुनाव कर रहे हैं, तो 2-3 कलर को मिलाकर नए कलर को चुनें.

 

मिथ: फर्नीचर, वॉल कलर, फैब्रिक्स आदि सभी मैचिंग होने चाहिए.
यदि सभी चीज़ें मैचिंग की होंगी, तो घर का डेकोर आपको बोरियत का एहसास कराएगा. फर्नीचर और वॉल कलर से मैच करते हुए डेकोरेटिव आइटम्स को लगाना ग़लत नहीं है, बस आसान-सा उपाय है घर को सजाने का, लेकिन पहले से डिज़ाइन की गई जगहों पर मैचिंग का फर्नीचर आदि लगाने की बजाय एंटीक आइटम्स (स्टैचू, बड़े वास आदि) का प्रयोग करें, जिससे कमरे का लुक अलग लगे. मैचिंग की तुलना में आप के द्वारा किया गया यह एक्सपेरिमेंट घर को क्लासी लुक देता है. मैचिंग का ट्रेंड अब पुराना हो गया है, विशेष रूप से फर्नीचर के मामले में.

होम डेकोर से संबंधित मिथ्स एंड फैक्ट्स

मिथ: बेज कलर फर्नीचर, रग्स, एक्सेसरीज़ आदि के साथ आसानी से मैच हो जाता है.
यह पूरी तरह से सही नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेज भले ही न्यूट्रल (सॉफ्ट) कलर है और आसानी से अन्य एक्सेसरीज़ से मैच भी हो जाता है, लेकिन ऐसा करने से घर में डल फीलिंग आती है. इसलिए बेज कलर का चुनाव अन्य एक्सेसरीज़ से मिक्स और मैच करते हुए करेंगे, तो घर को न्यू व स्टाइलिश लुक दे सकते हैं. इसके अलावा यदि आप घर की दीवारों पर न्यूट्रल कलर कराने की सोच रहे हैं, तो बेज कलर को छोड़कर अन्य न्यूट्रल कलर भी ट्राई करें. आजकल मार्केट में बेज के
साथ-साथ अन्य बहुत सारे न्यूट्रल शेड्स उपलब्ध हैं, जिनसे आप अपने घर के डेकोर को नया लुक दे सकते हैं.

 

मिथ: पैटर्न (कलर और शेप) और प्रिंट्स (लैपर्ड, जेब्रा, स्पॉटेड एंड स्ट्राइप्स, ज्यामैट्रिकल) को एक साथ मैच न करें.
ज़्यादातर लोगों को यह भ्रम होता है कि पैटर्न और कलर्स को एक साथ मैच नहीं करना चाहिए. लेकिन इस भ्रम को
थोड़ी-सी क्रिएटिविटी के द्वारा तोड़ा जा सकता है. जैसे- कलर स्कीम और मेन पैटर्न को ध्यान में रखते हुए स्ट्राइप्स, स्क्वेयर और स्मॉल प्रिंट्स का सिलेक्शन कर सकते हैं. इसी तरह से यदि फैब्रिक का चुनाव कर रहे हैं, तो सॉलिड कलरवाले टैक्स्चर और स्क्वेयर पैटर्न का चुनाव करें.

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मिथ: डेकोर और डिज़ाइनिंग के बारे में इंटीरियर डिज़ाइनर द्वारा बताए गए रूल्स को फॉलो करें.

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. एक्सपर्ट्स द्वारा बताए गए डेकोर और डिज़ाइनिंग संबंधी सारे पुराने नियमों में बदलाव लाएं. यदि आप अपने घर का डेकोर बदल रहे हैं, तो सबसे ज़रूरी बात है आपका पर्सनल टेस्ट और स्टाइल, जो आपकी पर्सनैलिटी को प्रतिबिम्बित करता है. डेकोर और डिज़ाइनिंग का पहला नियम यह है कि आपको घर का लुक किस तरह का चाहिए- क्लासिक या मॉडर्न? आपका फेवरेट कलर कौन-सा है? आपको किस तरह का आर्ट वर्क पसंद है? आदि. दूसरे शब्दों में कहें तो, घर का स्टाइल और डेकोर आपकी पसंद का होना चाहिए, न कि अन्य लोगों की.

 

मिथ: घर का डेकोर बदलते समय लेटेस्ट ट्रेंड को फॉलो करें.
एक्सपर्ट के अनुसार, घर का डेकोर इस तरह का होना चाहिए, जो आपको वॉर्म फील कराए. यदि आप अपने घर को कंटेम्प्रेरी लुक देना चाहते हैं, तो लेटेस्ट ट्रेंड को फॉलो करें. वैसे भी ट्रेंड समय-समय पर बदलते रहते हैं. अच्छा यही होगा कि आप अपने घर को क्लासी लुक दें. क्लासी लुक को फॉलो करते हुए आप अपने घर पर ट्रेंडी सामान/चीज़ों को रख सकते हैं, कुछ समय बाद आप उन्हें आसानी से बदल या हटा सकते हैं.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

करियर में कामयाबी के लिए इफेक्टिव वास्तु ट्रिक्स(Effective Vastu Tips For Success In Carrier)

वास्तु शास्त्र के सिद्धांत न केवल घर की विभिन्न जगहों पर, बल्कि ऑफिस या दुकान की बनावट, साज-सज्जा और उठने-बैठने या कार्य करने की स्थिति पर भी लागू होते हैं. इसके इस्तेमाल से अगर व्यापार-व्यवसाय में मनोवांछित सफलता मिल सकती है, तो किसी भी तरह के लेन-देन संबंधी कार्य के लिए बैठने की दिशा या जगह  गतिशीलता को प्रभावित कर सकती है. 


क्या है वास्तु कनेक्शन?

 

* वास्तु शास्त्र के अनुसार पृथ्वी का चुंबकीय उत्तर क्षेत्र कुबेर का स्थान बताया गया है, जो धनागमन या धन की वृद्धि के लिए शुभ होता है.

* इस क्षेत्र में किया गया कोई भी कारोबार, चाहे वह व्यापारिक बैठकें हों, पैसे या आवश्यक दस्तावेज़ के लेन-देन का काम हो या फिर किसी तरह का बड़ा सौदा तय करना हो, तो उत्तर की ओर मुख रखने पर काफ़ी लाभ मिलता है और प्रोफेशन में आशानुरूप सफलता मिलती है.

* इसके पीछे वास्तु के दिए गए वैज्ञानिक कारण के अनुसार उत्तर की ओर सक्रिय चुंबकीय तरंगें मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय बना देती हैं और इस दिशा में प्रवाहित होनेवाली शुद्ध वायु से पर्याप्त ऑक्सीजन मिलता है. इनसे मस्तिष्क की सक्रियता और याद्दाश्त बढ़ जाती है

.* यही बातें आंतरिक शक्ति की तरह व्यापारिक उन्नति और कार्यों को सफल बनाने में मदद करती हैं.

* कारोबारियों या ऑफिस में काम करने वालों को चाहिए कि वे अपना ज़्यादातर काम उत्तर की ओर मुख करके ही करें.

* अगर कैश बॉक्स और दूसरे महत्वपूर्ण काग़ज़ात या चेक बुक आदि अपने दाहिने ओर रखें, तो यह उनकी कार्य क्षमता को बढ़ा देता है.

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वास्तु टिप्स

 

1. ऑफिस में आपके बैठने की जगह के पीछे की दीवार यदि आपके काफ़ी क़रीब है, आपकी पीठ और दीवार के बीच जगह नाममात्र की है, तो इससे आपको एक सकारात्मकता या अदृश्य समर्थन का एहसास होगा.

2. आप जहां बैठते हों, उसके पीछे की दीवार पर पहाड़ों के दृश्य वाले पोस्टर लगाएं. इनसे दीवार से मिलने वाला अदृश्य समर्थन और अधिक प्रभावशाली हो जाएगा.

3. ऑफिस में आपके सामने की खुली जगह का अर्थ आगे बढ़ने, नए विचार बनने और खुलेपन के एहसास से है. इस कारण आपके बैठने की जगह के सामने का स्थान खुला-खुला होना चाहिए.

4. किसी कॉन्फ्रेंस रूम में हो रही मीटिंग के दौरान आपको दक्षिण-पश्‍चिम दिशा की ओर बैठना चाहिए तथा आपकी सीट रूम के प्रवेश द्वार से दूर होनी चाहिए.

5. ऑफिस में इस्तेमाल किए जानेवाले फर्नीचर रेक्टेंगल या चौकोराकार (स्न्वेयर) के होने चाहिए. यदि ये स्न्वेयर हों, तो और भी अच्छा है. ये फर्नीचर लकड़ी के हों, तो और भी बेहतर परिणाम मिल सकता है.

6. यदि आपका ऑफिस पूर्व में है, तो ग्लास टॉप टेबल का उपयोग करना अच्छा होगा.

7. ध्यान रहे कि आपके बैठने की कुर्सी के पीछे की ऊंचाई अधिक हो, जिससे आप अपनी पीठ अच्छी तरह टिका सकें. यह प्रतिकात्मक सहयोग के साथ-साथ स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से भी अच्छा होगा.

8. यदि आपके ऑफिस में अनुपयुक्त या टूटे हुए फर्नीचर हैं, तो इन्हें तुरंत बदल दें या इनकी तुरंत मरम्मत करवा लें.

9. यदि ऑफिस में किसी भी तरह के पानी का लीकेज हो, जैसे- रखे गए पानी के जार में लीकेज या बेसिन के नल से बूंदें टपकती रहती हों, तो इसे तुरंत ठीक करवा लें, क्योंकि पानी का रिसाव धनहानि को दर्शाता है.

10. बिज़नेस के दौरान की जानेवाली सभी गतिविधियां पूर्व या उत्तर दिशा की ओर की जानी चाहिए. धन की प्राप्ति के लिए उत्तर दिशा काफ़ी अच्छी और उपयुक्त है.

11. अपने कार्यालय या दुकान के दक्षिण-पूर्व दिशा में कारोबार या कामकाज के सहयोग के लिए कमरे में रखे जाने वाले पौधे गमले में लगाकर रखें. ये नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित कर आपको तरोताज़ा बनाए रखेंगे.

12. आप अपने ऑफिस में दक्षिण-पूर्व में लैंप रख सकते हैं. काम के दौरान लैंप को जलाकर रखने से सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होगी. साथ ही धन लाभ भी होगा.

13. ऑफिस की पूर्व दिशा में ताज़ा फूलों को जगह दें. गुलदस्ते में लगे रंग-बिरंगे फूल आपकी मन:स्थिति को संतुलित और प्रफुल्लित बनाए रखेंगे.

14. इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, जैसे- कंप्यूटर, दूसरी मशीनें, हीटर, एयर कंडिशनर, प्रिंटर, फोटोकॉपी की मशीन आदि ऑफिस में होते ही हैं, लेकिन उनसे निकलने वाली गर्मी और आवाज़ों को नियंत्रित करना आवश्यक है. आप वास्तु के ज़रिए ऐसा कर सकते हैं. कोशिश  करें कि इन्हें दक्षिण-पूर्व दिशा में रखा जाए.

15. अपनी योग्यता, कार्यशैली या फिर प्रोफेशन के अनुरूप वास्तु के उपायों को अपनाएं. इसके अनुसार यदि आप एक कलाकार, विद्यार्थी, लेखक, कारोबारी या फिर राजनेता हैं, तो अपना कमरा इसके अनुरूप बनाए रखें, ताकि कार्य के प्रति सहजता का एहसास कर सकें.

16. यदि आप किसी कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं या आपका अपना कारोबार है, तो अपने दफ़्तर का कमरा दक्षिण-पूर्व की ओर रखें. उसमें बैठते समय आपका चेहरा उत्तर की ओर होना चाहिए.

17. ऑफिस के उत्तर-पूर्व हिस्से को हमेशा साफ़-सुथरा बनाए रखें. कोशिश करें कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह के अनावश्यक सामान न हों और इसमें हमेशा खुलेपन का एहसास हो. इसी तरह से कमरे के बीच का स्थान खुला होना चाहिए, ताकि आराम से आवाजाही हो सके.

18. यदि आप निर्माण संबंधी कार्य करते हैं, तो उत्पादन की नियमितता बनाए रखने के लिए इस कार्य का क्षेत्र दक्षिण-पश्‍चिम में बनाया जाना चाहिए.

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19. दफ़्तर की खिड़कियां और दरवाज़े हमेशा साफ़ और चमकते रहने चाहिए.

20. ऑफिस के कमरे में या टेबल के पूर्वोत्तर में पानी के फव्वारे का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

21. कार्यालय के केबिन में वास्तु शास्त्र के अनुरूप लगाया गया दर्पण भी पैसे के आगमन में वॄिद्ध कर सकता है या फिर आपके करियर को चमका सकता है.

22. ऑफिस की पैंट्री दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होनी चाहिए

.23. क़ानूनी कार्य के लिए पूर्व या पश्‍चिम का भाग उपयुक्त होता है.

24. ऑफिस के अकाउंट विभाग को उत्तर दिशा में बनाया जाना चाहिए. इसी तरह कैशियर को भी इसी हिस्से में बैठाया जाना चाहिए.

25. शोरूम या दुकान का कैश बॉक्स हमेशा दक्षिण और पश्‍चिम की दीवार के सहारे होना उपयुक्त होता है.

26. दुकान में बिक्री के सामानों को रखने के लिए शेल्फ, आलमारियां, शोकेस और कैश काउंटर दक्षिण दिशा में होने चाहिए.

27. दुकान के ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा में मंदिर या इष्टदेव की तस्वीर लगाएं. इसके अतिरिक्त दूसरे हिस्से में पीने का पानी रखें.

28. वास्तु शास्त्र के अनुसार कार्यालय या कार्यस्थल या फिर दुकान आदि में लगाए जाने वाले बिजली या संचार साधनों के उपकरणों के स्विच बोर्ड दक्षिण-पूर्व हिस्से में लगाया जाना चाहिए.

 

क्या न करें?

 

करियर, ऑफिस के कामकाज या फिर व्यक्तिगत पेशे में सहजता और गतिशीलता बनाए रखने के लिए निम्नलिखित कार्य न करें, ये वास्तु शास्त्र के नियमों का उल्लंघन करते हैं-

– बीम के नीचे कभी न बैठें. अपना साधारण से साधारण काम भी इससे अलग होकर निपटाएं.

– कार्यालय या कार्यस्थल के प्रवेश द्वार की ओर अपनी पीठ रखते हुए बैठने से बचें.

– अपने बैठने के स्थान के पीछे बहते पानी के दृश्योंवाली तस्वीरें कभी न लगाएं. इससे आपको समर्थन में कमी का एहसास होगा और काम के दौरान बहुत जल्द नकारात्मकता का एहसास होने लगेगा.

– अपने पैरों को क्रॉस करते हुए कभी न बैठें.

– ऑफिस के कमरे में गोलाकार, अंडाकार या अनियमित आकार के फर्नीचर का उपयोग करने से बचें.

– जिन जगहों का इस्तेमाल कम होता हो या जहां नकारात्मकता का एहसास हो, उस जगह अपने ज़रूरी काम न करें.

– ऑफिस में भीड़भाड़ वाली जगह पर काम करने से बचें.श्र ऑफिस में किसी भी तरह के शोर या मशीनी आवाज़ों से बचें.

– धातु या प्लास्टिक के फर्नीचर का इस्तेमाल कम से कम करें. इसी तरह से जो भी फर्नीचर उपयोग में लाया जा रहा हो, उनमें नुकीलापन व तेज़ धार नहीं होनी चाहिए.

– ऑफिस की दीवारों पर या अपने डेस्क पर नकारात्मक या मन को अवसाद, उत्तेजना, आक्रोश से भर देनेवाली तस्वीरें न लगाएं.

– ऑफिस में अंधेरा नहीं होना चाहिए. पर्याप्त रोशनी का होना आवश्यक है.

– यदि कोई अपने घर से ही ऑफिस चलाता हो, तो ऑफिस का स्थान मुख्य शयनकक्ष से सटा हुआ नहीं होना चाहिए.

– ऑफिस के लिए पानी संबंधी इंतज़ाम दक्षिण दिशा में नहीं करना चाहिए, इससे कामकाज को नुक़सान पहुंच सकता है.

 

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40+ क्विक होम क्लीनिंग टिप्स(40+ Quick Home Cleaning Tips)

आज पूरे देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है, धीरे-धीरे लोग इसके प्रति जागरूक भी हो रहे हैं. लेकिन उतनी तादाद में नहीं, जितने होने चाहिए. इस अभियान की सफलता तभी सिद्ध होगी, जब हम स्वच्छता की शुरुआत अपने घर से करेंगे. हम यहां पर बता रहे हैं कुछ क्विक होम क्लीनिंग टिप्स के बारे में…

 

– बेडरूम, लिविंग रूम, किचन व बाथरूम के शेल्फ्स और कैबिनेट्स को साफ़ करने से पहले सारा सामान निकाल लें.

– शेल्फ्स और कैबिनेट्स को अंदर-बाहर और ऊपर-नीचे शैंपू/डिटर्जेंट मिले पानी से साफ़ करें और हैंडल को टूथब्रश से क्लीन करें.

– उनके कोनों व हैंडल को टूथब्रश की मदद से साफ़ करें.

– सामान रखते समय एक्सपायर्ड और ग़ैरज़रूरी चीज़ों को हटा दें.

– मैट्रेस और सोफे की सुरक्षा के लिए वॉशेबल मैट्रेस पैड और सोफे कवर का इस्तेमाल करें.

– मैट्रेस, सोफा, काउच में जमी धूल-मिट्टी को निकालने के लिए उन्हें 20-25 दिन में एक बार वैक्यूम क्लीनर से साफ़ करें.

– कुशन व रग्स को 15 दिन में एक बार और कार्पेट को महीने में एक बार वैक्यूम क्लीनर से साफ़ करें.

– बेड व काउच के नीचे की जगह और अन्य कोनों (जहां पर रेग्युलर सफ़ाई नहीं होती) को 15 दिन में एक बार ज़रूर साफ़ करें.

– परदों पर जमी धूल-मिट्टी को वैक्यूम क्लीनर से निकालें. फिर धोएं. ऐसा करने से परदे को धोने में कम मेहनत और समय लगेगा.

– बच्चों के सॉफ्ट टॉयज़ को कपड़ेवाले बैग में भरकर वॉशिंग मशीन में धोएं.

– यदि आपके घर में सीढ़ियां हैं, तो सफ़ाई की शुरुआत वहीं से करें. सीढ़ियों की सफ़ाई होममेड फ्लोर क्लीनर से करें.

– फ्रिज, माइक्रोवेव आदि में पड़े दाग़-धब्बों को निकालते समय उन्हें ज़ोर-ज़ोर से रगड़ें नहीं, बल्कि गीले स्पॉन्ज से निकालें.

– इलेक्ट्रॉनिक सामान का इस्तेमाल करने के बाद तुरंत साफ़ न करें, बल्कि स्क्रीन को डार्क व ठंडा होने दें. तब स्क्रीन पर पड़े दाग़ क्लीयर दिखाई देते हैं.

– इलेक्ट्रॉनिक सामान को माइक्रो फाइबर क्लॉथ या लो-लिंट वाइप्स से क्लीन करें.

– डायरेक्ट स्क्रीन को गीले कपड़े से पोंछने की बजाय रेडीमेड सोल्यूशन से साफ़ करें.किचन

– गैस पर जमी चिकनाई और दाग़-धब्बों को माइल्ड क्लीनर से साफ़ करें.

– बर्नर और नॉब को गरम पानी में थोड़ा-सा डिटर्जेंट डालकर टूथब्रश से साफ़ करें. पूरी तरह से सूखने के बाद ही लगाएं.

– सिंक पर जमी चिकनाई, भोजन और पानी के धब्बों को निकालने के लिए उसमें बेकिंग सोडा डालकर 3-4 मिनट तक रखें. स्पॉन्ज से रगड़कर साफ़ करें.

– गुनगुने पानी में थोड़ा-सा व्हाइट विनेगर मिलाकर सिंक को साफ़ करें. सिंक पर पड़े धब्बों को मिटाने के लिए यह बेस्ट होममेड क्लीनर है.

– किचन की चिमनी, एग्ज़ॉस्ट फैन और स्विच बोर्ड को साफ़ करने से पहले अनप्लग करें.

– उन्हें शैंपू मिले पानी में भिगोए हुए स्पॉन्ज से साफ़ करें. पूरी तरह से सूखने के बाद ही लगाएं.श्र बर्तन धोनेवाले स्क्रबर/स्पॉन्ज को 15-20 दिन में बदल लें. हाइजीन के उद्देश्य से भी सबसे अधिक बैक्टीरिया उसमें ही पनपते हैं. इसलिए काम ख़त्म होने के बाद इसे सूखने के लिए रखें.

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बाथरूम

– टाइल्स, वॉश बेसिन, बाथटब और टॉयलेट पॉट को साफ़ करने के लिए अच्छी क्वालिटीवाले क्लीनर और ब्रश का प्रयोग करें. आजकल बाज़ार में अच्छी क्वालिटीवाले ख़ुशबूदार क्लीनर भी मिलते हैं.

– इनके आसपास के किनारों को क्लीनर और ब्रश से अच्छी तरह से साफ़ करें.

– नल और शॉवर पर जमी धूल-मिट्टी को डिटर्जेंट/शैंपू मिले पानी या विनेगर मिले पानी से साफ़ करके कपड़े से पोंछें.

– एग्ज़ॉस्ट फैन और लाइट के स्विच को अनप्लग करके क्लीन करें.

फ्रिज

– फ्रिज को साफ़ करने से 3-4 घंटे पहले अनप्लग करें. रूम टेंपरेचर पर आने के बाद ही साफ़ करें.

– बासी खाने की दुर्गंध और दाग़-धब्बों को दूर करने के लिए होममेड केमिकल फ्री क्लीनर और माइक्रो फाइबर क्लॉथ का इस्तेमाल करें.

– होममेड क्लीनर बनाने के लिए 1 लीटर पानी में आधा कप विनेगर मिलाएं. चाहें तो पानी में नींबू का रस मिलाकर भी लेमन-वॉटर क्लीनर बना सकते हैं.

– फ्रीज़र, शेल्फ्स, ड्रॉअर्स, रैक्स और कंटेनर्स को उपरोक्त क्लीनर्स से साफ़ करें. यदि ये शेल्फ्स आदि कांच के हैं, तो ठंडे पानी से धोएं और फाइबर के हैं, तो गरम पानी से साफ़ करें.

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माइक्रोवेव

– सफ़ाई करने के लिए होममेड क्लीनर या फिर रेडीमेड माइल्ड क्लीनर का प्रयोग करें.

– होममेड क्लीनर बनाने के लिए आधा लीटर पानी में 1 कप सोडा बाई कार्बोनेट मिलाकर पतला घोल बनाएं.

– इस क्लीनर से अवन को साफ़ करके 4-5 घंटे तक ऐसा ही रहने दें. बाद में गीले माइक्रो फाइबर क्लॉथ से पोंछ लें.

– 3 ग्लास पानी में 1 नींबू का रस और 1 टीस्पून बेकिंग सोडा मिलाकर घोल बनाएं. इससे माइक्रोवेव को साफ़ करें.

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– माइक्रोवेव की सफ़ाई के लिए स्टीम प्रोसेस सबसे अच्छा तरीक़ा है. स्टीम प्रोसेस के लिए पानी से भरे माइक्रोसेफ बाउल में 1 नींबू का रस डालकर माइक्रोवेव ऑन करें. 2-3 मिनट बाद माइक्रोवेव को बंद करके 20 मिनट तक ऐसे ही रहने दें. बाद में माइक्रो फाइबर कपड़े से पोंछ लें.

– माइक्रोसेेफ बाउल में 2 कप पानी और थोड़ी-सी पुदीने की पत्तियां डालकर अधिकतम तापमान में 10-15 मिनट तक रखें. बाद में माइक्रोवेव को बंद करके 1 घंटे तक ऐसे ही रहने दें.

– माइक्रोवेव को साफ़ करने के बाद 1 घंटे तक खुला रखें, ताकि खाने और क्लीनर की गंध निकल जाए.

 

वॉशिंग मशीन

– मशीन की ट्यूब में कपड़े धोते समय मिट्टी के कण फंस जाते हैं,  इसलिए महीने में एक बार मशीन को बिना कपड़े के गरम पानी में 2 कप नींबू का रस और 1 कप व्हाइट विनेगर डालकर चलाएं.

– मशीन के पाइप में जमा गंदगी और अंदरूनी हिस्से की सफ़ाई हर तीन महीने में करें.

– यदि सफ़ाई के लिए रेडीमेड क्लीनर का प्रयोग कर रहे हैं, तो ऐसे क्लीनर का इस्तेमाल करें, जिनमें स्ट्रॉन्ग केमिकल न हों.

– अंदर-बाहर से मशीन की सफ़ाई करने के बाद उसे 1-2 घंटे तक खुला छोड़ दें, ताकि उसके अंदर की नमी पूरी तरह से सूख जाए.

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रेनोवेशन मिस्टेक्स और उनसे बचने के ईज़ी टिप्स(Renovation Mistakes And Easy Tips To Avoid Them)

अक्सर लोग घर को रेनोवेट कराते समय छोटी-छोटी ग़लतियां कर बैठते हैं, जिसका ख़ामियाज़ा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है. हम यहां पर ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण ग़लतियों के बारे में बता रहे हैं, जिससे बचकर आप अपने घर को परफेक्टली रेनोवेट करा सकते हैं.

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न्यूयॉर्क बेस्ड एक इंटीरियर कंपनी द्वारा हाल ही में किए गए एक सर्वे के अनुसार, लगभग 85% लोगों को घर ख़रीदने से ज़्यादा तनावपूर्ण काम घर का रेनोवेशन कराना लगता है. इस तनाव का कारण है- बजट की कमी, मटेरियल ख़रीदना और सही कॉन्ट्रैक्टर का चुनाव न करना आदि. यदि आप भी अपने घर को तनावरहित होकर रेनोवेट कराने की सोच रहे हैं, तो यहां पर बताई महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखें.
– बिना बजट प्लान किए घर के रेनोवेशन का काम शुरू करने की ग़लती कभी न करें.
– रेनोवेशन के लिए बजट बनाने से पहले आर्किटेक्चर, इंटीरियर डिज़ाइनर और कॉन्ट्रैक्टर से मिलकर बजट का आइडिया ले लें.
– बजट का लेखा-जोखा करते समय कॉन्ट्रैक्टर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन आदि की फीस, मटेरियल का ख़र्च आदि अनुमानित ख़र्चों की लिस्ट बनाएं.
– इस बजट के अलावा एक एमर्जेंसी रिज़र्व फंड बनाएं. उसका उपयोग तभी करें, जब आपको उसकी बहुत ज़्यादा जरूरत हो.
– मास्टर प्लान बनाए बिना घर का रेनोवेशन आरंभ करने की भूल न करें.
– मास्टर प्लान बनाते समय कॉन्ट्रैक्टर को पहले से ही अपनी रिक्वायरमेंट बता दें.
– मास्टर प्लान के अनुसार काम शुरू होने के बाद बार-बार बदलाव न करवाएं.
– बार-बार आर्किटेक्चरल चेंजेस (तोड़-फोड़) करने से मटेरियल का नुक़सान तो होगा ही, आपका बजट भी बिगड़ेगा. इसलिए आर्किटेक्चर या कॉन्ट्रैक्टर के साथ मिलकर पहले ही मास्टर प्लान फाइनल करें.
– रेनोवेशन का काम आरंभ करने से पहले 2-3 कॉन्ट्रैक्टर्स से मिलकर अनुमानित बजट का आइडिया ज़रूर लें.
– कॉन्ट्रैक्ट फाइनल करने से पहले सारी डिटेल्स- हार्डवेयर, केबिनेट्स, फ्लोरिंग व उनका मेहनताना आदि टर्म्स और कंडीशन्स को लिखित में लें.
– रेनोवेशन के लिए ऐसे एक्सपर्ट व प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्टर का चुनाव करें, जो आपको डेकोर स्टाइल, डिज़ाइन और काम पूरा होने की अनुमानित अवधि के बारे में विस्तार से बताए और वित्तीय हानि होने से भी बचाए.
– रेनोवेशन के दौरान मटेरियल की क्वालिटी के साथ समझौता करने की ग़लती न करें.
– बजट को नियंत्रित रखने के लिए केबिनेट्स के हैंडल्स, लाइटिंग, स्विच आदि एक्सेसरीज़ रिटेलर से ख़रीदने की बजाय होलसेल मार्केट से ही ख़रीदें.
– रेनोवेशन कराते समय अपनी पसंद को ध्यान में रखते हुए कलरफुल ग्लास, टाइल डिज़ाइन आदि सामान पर अधिक ख़र्च न करें.
– कॉन्ट्रैक्टर को पूरा पेमेंट करने से पहले सारे घर का रेनोवेशन, फिक्स्चर्स और फिनिशिंग को अच्छी तरह से चेक करें.

किचन रेनोवेशन मिस्टेक्स

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– किचन में रेनोवेशन कराते समय सिंक, फ्रिज और गैस को एक ही दिशा में रखने की ग़लती न करें, बल्कि उन्हें ट्रायंगल शेप में रखने की व्यवस्था करें.
– किचन में लीकेज से बचने के लिए सिंक को पानी की पाइपलाइन के क़रीब और सही तरी़़के से लगवाएं.
– पाइपलाइन की फिटिंगवाली जगह को कवर करना न भूलें.

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– किचन अप्लायसेंस और बर्तनों के रखने के लिए जहां तक हो सके, अधिक से अधिक स्टोरेज बनाएं.
– किचन को रेनोवेट करते समय काउंटर टॉप/स्लैब पर पर्याप्त खुली जगह छोड़ें, ताकि काम करते समय किसी तरह की परेशानी न हो.
– सही वेंटिलेशन न होने के कारण किचन में काम करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. अत: किचन को रेनोवेट कराते समय किचन चिमनी/एग्ज़ॉस्ट फैन लगाना न भूलें.
– लाइटिंग की भी उचित व सही व्यवस्था करें.

बाथरूम रेनोवेशन मिस्टेक्स

– बाथरूम में बाथरूम फैन/एग्ज़ॉस्ट फैन को नज़रअंदाज़ करने की ग़लती न करें. सही वेंटिलेशन न होने के कारण फ्लोर पर नमी जमी रहती है, जिसके कारण पेंट भी ख़राब होता है.
– तोड़-फोड़ शुरू करने से पहले बाथरूम में लीकेज चेक करना न भूलें. कई बार बजट व मटेरियल की कमी के कारण लीकेज की तरफ़ हमारा ध्यान नहीं जाता.
– टे्रंडी व ब्रांडेड बाथरूम फिटिंग्स व फिक्स्चर्स (वॉश बेसिन, शावर, टॉयलेट पॉट और टैप्स आदि) ख़रीदने के चक्कर में बजट बिगाड़ने की भूल न करें.
– रेनोवेशन कराते समय वायरिंग केसाथ-साथ पुरानी लाइट्स भी बदलें. इसके लिए एनर्जी सेविंग लाइट्स बेस्ट ऑप्शन हैं.
– बाथरूम के लिए ऐसी फ्लोरिंग का चुनाव करें, जो ड्यूरेबल और वॉटर रेज़िस्टेंट हो.
– छोटी, लेकिन अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे घर का रेनोवेशन कराने के चक्कर में हम अक्सर
छोटी-छोटी चीज़ों को चेक करना भूल जाते हैं, जैसे- लाइट, नल, शावर और पानी की फिटिंग आदि. इसलिए कॉन्ट्रैक्टर के घर से निकलने से पहले पूरे घर की फिटिंग व फिक्स्चर्स ज़रूर चेक करें. तभी कॉन्ट्रैक्टर को फाइनल भुगतान करें.

– अभिषेक शर्मा

होम डेकोरः चेयर सिलेक्शन ट्रिक्स(Home Decor: Chair Selection Tricks)

Chair Selection Tricks
यूं ही जब कभी ख़्यालों में तुम उतर आती हो, आंगन में बिखर जाते हैं फूल और तुम धड़कनों में चली आती हो… बैठकर सोचा करते हैं अक्सर तुम्हें और याद आ जाती हैं वो मुलाक़ातें हमें… जब तुम और मैं यूं ही रू-ब-रू बैठकर ़फुर्सत के लम्हों को जिया करते थे… लब ख़ामोश होते थे और तुम्हारी आंखों से हम जाम पीया करते थे… क्या फिर से लौटेगा वो दौर, वो सुहाना मंज़र… जब हम-तुम बैठेंगे यूं ही और सामने होगा ख़्वाबों का समंदर…

 

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चेयर सिलेक्शन ट्रिक्स

 चेयर्स स़िर्फ बैठने या आराम फ़रमाने के लिए ही नहीं होतीं, बल्कि इन्हें अगर इंटेलिजेंटली यूज़ किया जाए, तो ये आपके डेकोर को ब्यूटीफुल लुक दे सकती हैं.
* डिफरेंट स्टाइल की चेयर्स, उनके कवर्स के कलर्स, उनके स्टैंड की डिफरेंट शेप से आप अपने डेकोर को मॉडर्न टच दे सकते हैं.
* डिफरेंट शेप की चेयर को आप कॉर्नर पीस की तरह भी यूज़ कर सकते हैं. इससे आपके रूम का कोना तो हाइलाइट होगा ही, साथ ही चेयर की शेप भी अट्रैक्शन का कारण बनेगी.

 

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* रॉयल लुक के लिए एंटीक चेयर यूज़ करें. बड़े आकार की, नक्काशी की हुई और रॉयल टच लिए हुए सिंगल चेयर पूरे रूम को रॉयल लुक देने के लिए काफ़ी है. आप चाहें, तो अपनी ज़रूरत के हिसाब से चेयर्स की संख्या चूज़ कर सकते हैं.
* चेयर्स में सबसे ज़रूरी होता है उनका बैक. कंफर्टेबल होने के साथ-साथ वो अट्रैक्टिव भी होना चाहिए.
* ओपन बैक चेयर लाइट व मॉडर्न फील देता है, जबकि सॉलिड बैक स्ट्रेंथ और प्रेज़ेंस का एहसास कराता है.
* चेयर के कवर्स, कुशन्स और स्लिप कवर्स के कलर व फैब्रिक से भी डेकोर को अलग बनाया जा सकता है.
* अगर आपको कोई कलर बेहद पसंद है और आप उसे अपने डेकोर का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो वॉल्स या पेंट कलर बदलने की बजाय उस कलर को चेयर के कुशंस के लिए सिलेक्ट कर लें.

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* सीटिंग अरेंजमेंट को मॉडर्न लुक देने के लिए मॉडर्न स्टाइल की वुडन चेयर्स को शामिल करें.
* डायनिंग चेयर्स सिलेक्ट करते समय भी इस बात का ध्यान रखें कि वो आपके डेकोर को कॉम्प्लीमेंट करे.

25+ Top कर्टन आइडियाज़ (25+ Top Curtain Ideas)

Curtain Ideas

वो एक चिलमन तेरी पलकों की, वो एक चिलमन हमारे दरमियान… ख़ूबसूरत दोनों ही हैं और दोनों में ही है नशा… खुलकर सिमट जाती है, जब बहती है हवा… फिर सिमटकर खुल जाती है, जब मदहोश होता है समा… इसमें मुहब्बत भी लिपटी है हमारी और ़कैद हैं कई चाहतों की दास्तान… घर की रौऩकें भी बढ़ाती है ये और इसके रंगों में छिपती हैं कई पर्दानशीं भी… जब भी हटाते हैं इसे, तो आवाज़ ये आती है… परदे में रहने दो… बेपर्दा न करो…

कर्टन टिप्स

 

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1. गर्मियों के लिए शीयर कर्टन्स (फाइन फैब्रिक्स वाले पर्दे, जैसे- लिनेन, लाइट वेट सिल्क फैब्रिक) बेस्ट ऑप्शन हैं. ये ज़्यादा महंगे भी नहीं होते.
2. शीयर कर्टन्स लगाने से घर में वेंटिलेशन बना रहता है, लेकिन बेडरूम और बाथरूम के लिए शीयर कर्टन्स उपयुक्त नहीं हैं, क्योंकि इनमें प्राइवेसी नहीं होती.
3. लेसवाले शीयर कर्टन्स लगाकर आप अपने घर को न्यू व ट्रेंडी लुक दे सकते हैं.
4. वेलवेट, स्यूड आदि थिक फैब्रिकवाले परदे कमरे में तेज़ रोशनी को आने से रोकते हैं और कमरों के तापमान को भी नियंत्रित करते हैं. इसलिए सर्दियों में थिक फैब्रिकवाले कर्टन्स लगाएं.
5. चिक पैटर्न व डिज़ाइनवाले कलरफुल परदे लगाकर लिविंग रूम को मॉडर्न व स्टाइलिश लुक दे सकते हैं.
6. घर को रॉयल लुक देने के लिए कस्टम ड्रेप्स लगाएं. इन ड्रेप्स की क़ीमत फैब्रिक और डिज़ाइन पर निर्भर करती है यानी आप जिस तरह के डिज़ाइन और फैब्रिक का चुनाव करेंगे, क़ीमत उसी के अनुसार होती है.
7. परदे की लंबाई फ्लोर लेवल तक रखें. अधिक लंबे परदे देखने में ख़राब लगते हैं
8. अलग-अलग कमरों के लिए अलग-अलग प्रिंट और डिज़ाइनवाले परदों का चुनाव करें, इससे घर के हर कमरे को अलग व न्यू लुक मिलेगा.
9. छोटे-से घर को स्पेशियस लुक देने के लिए वॉल कलर से मिलते-जुलते कलरवाला परदा लगाएं.
10. इसी तरह छोटे-से कमरे में वर्टिकल स्ट्राइप्स वाले कर्टन्स लगाएं. इससे सीलिंग ऊंचाई पर महसूस होगी और कमरा भी बड़ा दिखेगा.
11.आजकल मार्केट में विभिन्न कलर और स्टाइल वाले रेडी-टू-यूज़ ड्रेप्स पैनल्स मिलते हैं. अपनी पसंद के अनुसार इनका सिलेक्शन करके घर को न्यू लुक दे सकते हैं.
12. बोल्ड कलर्स और डिज़ाइनवाले कंटेम्पे्ररी कर्टन्स लगाकर घर का मेकओवर कर सकते हैं.
13. यदि आप अपने घर को लग्ज़री लुक देना चाहते हैं, तो डायमंड पैटर्नवाले रेमिंगटन कर्टन्स लगाएं. येे घर को ब्यूटीफुल और क्लासिक लुक देते हैं.
14. परदों के लेटेस्ट पैटर्न, डिज़ाइन्स और फैब्रिक के बारे में अधिक जानकारी के लिए होम डिज़ाइन वेबसाइट्स, ब्लॉग्स और मैगज़ीन देखें.

फैब्रिक संबंधी आइडियाज़

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15. परदों का फैब्रिक तीन तरह का होता है- लाइट वेट कर्टन्स (शीयर व कॉटनवाले परदे), मीडियम वेट (ब्रोकेडवाले परदे) और हैवी वेट (वेलवेट, डेनिम, ट्वीड फैब्रिकवाले परदे). इसलिए फैब्रिक का चुनाव अपनी पसंद व बजट के अनुसार करें.
16. फैब्रिक घर के डेकोर और घरवालों के मूड को प्रभावित करता है. जैसे- टे्रडिशनल रूम के लिए थिक फैब्रिक का चुनाव करें, जबकि लिविंग रूम के शीयर व लाइट वेटवाले परदों का चुनाव करें.
17. शीयर कर्टन्स के फैब्रिक बहुत महीन होते हैं, इसलिए परदे ख़रीदते समय फैब्रिक की क्वालिटी का विशेष ध्यान रखें.
18. वेलवेट और हैवी सिल्क टेक्स्चर के परदों को केवल ड्राय क्लीन ही करवाना पड़ता है. जो ख़र्चीला होता है. इससे बचने के लिए ऐसे फैब्रिक का सिलेक्शन न करें.
19. मटेरियल की दृष्टि से ऐसे परदों का चुनाव करें, जो लाइटवेट हों. इन परदों को लगाने से घर में रोशनी भी अधिक आती है और इनको धोने में भी आसानी होती है.
20. मौसम के अनुरूप परदों के फैब्रिक व कलर का चुनाव करें. समय-समय पर परदे बदलते रहने से घर को नया लुक मिलता है.
21. घर को क्रिएटिव लुक देने के लिए पैटर्न फैब्रिकवाले कर्टन्स लगाएं. होम डेकोर के अनुसार इन पैटर्न फैब्रिक का सिलेक्शन करें. पैटर्न फैब्रिक्स, जैसे- फ्लोरल, स्ट्राइप्स और एनीमल प्रिंट आदि. जैसे बच्चों के कमरे में जंगल बेस्ड थीम है, तो एनीमल
प्रिंटवाले कर्टन्स लगाएं.

कलर और पैटर्न संबंधी आइडियाज़

22. परदों का कलर कॉम्बिनेशन घर की फर्निशिंग से मैच करता हुआ होना चाहिए. जैसे वॉल कलर, फर्नीचर आदि.
23. मार्केट में कई ट्रेंडी, ब्राइट व पेस्टल कलर्स के परदे मिलते हैं. इन कलर्स का चुनाव होम डेकोर को ध्यान में रखकर करें.
24. अगर आपके घर में पैटर्न्ड फर्नीचर और बेड है, तो घर में सॉलिड कलरवाले परदे लगाएं.
25. इसी तरह यदि आपके घर में सॉलिड कलर वाला फर्नीचर और बेड है, तो पैटर्न्ड कर्टन्स (फ्लोरल, स्ट्राइप्सवाले परदे) लगाएं.
26. परदों की लंबाई अधिक रखने से सीलिंग भी अधिक ऊंचा लगता है, जबकि परदों का कलर, प्रिंट और पैटर्न इस तरह का होना चाहिए कि कमरा बड़ा और सुंदर दिखे.
27. कलर स्कीम का सिलेक्शन ध्यान से करें. यदि कमरे को बड़ा लुक देना चाहते हैं, तो प्राइमरी कलर्स के परदों का चुनाव करें.
28. यदि कमरे को स्मॉल लुक देना चाहते हैं, तो पेस्टल कलरवाले परदों का चुनाव करें.

– देवांश शर्मा

टॉप वॉलपेपर सिलेक्शन आइडियाज़(Top Wallpaper Selection Ideas)

वॉल डेकोर को नया अंदाज़ देना चाहती हैं तो उसे वॉलपेपर से सजाएं और होम डेकोर को दें डिफरेंट लुक, लेकिन वॉलपेपर सिलेक्शन से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें.

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वॉलपेपर सिलेक्शन टिप्स

– वॉलपेपर ख़रीदते समय अपने बजट का ध्यान रखें, क्योंकि महंगे वॉलपेपर लगाने का लेबर कॉस्ट भी अधिक होगा.
– वॉलपेपर ख़रीदते समय इस बात का ध्यान रखें कि किस रूम के लिए किस टाइप का वॉलपेपर ख़रीदना है.
– किचन के लिए ऐसा वॉलपेपर चुनें, जो इनफ्लेमेबल (ज्वलनशील) न हो.
– किड्स रूम के लिए वॉलपेपर का चुनाव करते समय उनकी पसंद-नापसंद का ध्यान रखें.
– अच्छी क्वालिटीवाला वॉलपेपर ही ख़रीदें, जो टिकाऊ भी हो.
– आप ऐसे वॉलपेपर का चुनाव भी सकते हैं, जो स्क्रैचेज़ और स्टेन रेज़िस्टेंट हो.
– वॉलपेपर के मार्केट रेट की जानकारी प्राप्त करने के बाद एक बार ऑनलाइन रिसर्च ज़रूर करें. इस रिसर्च के दौरान वॉलपेपर के टाइप, मटेरियल, क़ीमत और रिव्यू ज़रूर पढ़ें.

वॉलपेपर के प्रकार

विनायल वॉलपेपर: किचन और बाथरूम की सुरक्षा के लिए विनायल वॉलपेपर सबसे अच्छा विकल्प है, क्योंकि इन वॉलपेपर पर नमी नहीं लगती. इनकी क़ीमत कम होती है और क्लीनिंग व केयर में भी अधिक मेहनत नहीं लगती. ये वॉलपेपर किचन व बाथरूम को शाइनी व स्मूद टच देते हैं.
पीवीएफ (पॉली विनायल फॉम) वॉलपेपर: इस वॉलपेपर को घर के इन्सुलेटेड एरिया में लगाना चाहिए, जैसे- घर के उस एरिया में, जहां पर आपने होम थियेटर सिस्टम इंस्टॉल किया हो. वास्तव में पीवीएफ, साउंड इन्सुलेटर का काम करता है, जिससे बाहरी शोर अंदर सुनाई नहीं देता. इस वॉलपेपर को लगाने का एक दूसरा लाभ यह भी है कि यह कमरे में कूलिंग बनाए रखने में मदद करता है.

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फ्लोक्ड वॉलपेपर (टेक्सटाइल फाइबर से बने वॉलपेपर): सिल्क, कॉटन, वेलवेट और लिनेन से बने इन वॉलपेपर की क़ीमत बहुत अधिक होती है. इन वॉलपेपर को बहुत अधिक केयर और मेंटेनेंस की ज़रूरत होती है. महंगे होने के बाद भी अधिकतर लोग इन वॉलपेपर को अपने घर में लगाते हैं, क्योंकि ये वॉलपेपर कमरे में ङ्गविज़ुअल ब्यूटीफ जैसा लुक क्रिएट करते हैं. अमूमन डाइनिंग व लिविंग रूम में इस तरह के वॉलपेपर लगाए जाते हैं.
फाइबरग्लास वॉलपेपर: कंटेम्प्रेरी टाइपवाले ये वॉलपेपर दिखने में बहुत ही ख़ूबसूरत लगते हैं. ये फायर रेटारडेंट (अग्नि विरोधी) होते हैं. इन्हें घर पर धो भी सकते हैं.
फॉइल वॉलपेपर: घर को ट्रेडिशनल लुक देेने के लिए मेटालिक फॉइल शीट और पेपर से बने वॉलपेपर लगा सकते हैं, लेकिन मेटल शीट से बने होने के कारण इन वॉलपेपर्स को लाइट, स्विच व सॉकेट के आसपास न लगाएं.
उपरोक्त बताए टाइप के अलावा और भी बहुत सारे टाइप के वॉलपेपर बाज़ार में मिलते हैं, जिनका चुनाव आप अपनी पसंद, शौक़, बज़ट और ट्रेंड के अनुसार कर सकते हैं.

वॉलपेपर डिज़ाइनिंग आइडियाज़

 

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– आजकल मार्केट में विभिन्न प्रकार के पैटर्न- क्लासिक पैटर्न, ऐब्सट्रैक्ट पैटर्न, ग्राफिक्स पैटर्न, फ्लोरल पैटर्न, ज्योमैक्ट्रिकल पैटर्न, रेट्रो पैटर्न, थ्रीडी पैटर्न और मेटालिक पैटर्न आदि मिलते हैं. अपनी पसंद, शौक़ और कमरे के अनुसार वॉलपेपर का सिलेक्शन करें.
– अलग-अलग रूम के अलग-अलग थीम वाला वॉलपेपर चुनें.
– वॉल कलर से मैच करते हुए और डल कलरवाले वॉलपेपर का सिलेक्शन न करें.
– छोटे कमरे में बोल्ड कलर और बड़े प्रिंट के वॉलपेपर न लगाएं. इससे कमरा और छोटा लगेगा.
– छोटे कमरे को स्पेशियस लुक देने स्ट्राइप्स पैटर्नवाले वॉलपेपर का चुनाव करें. इससे कमरा स्पेशियस लगता है.
– किचन के लिए सॉलिड विनायल वॉलपेपर अच्छा विकल्प है. यह स्टेन रेज़िस्टेंट होता है, साथ ही रब करने पर जल्दी ख़राब भी नहीं होता.
– किड्स रूम के लिए ब्राइट कलर्स और आकर्षक पैटर्नवाले वॉलपेपर चुनें.
– कमरे की फीचर वॉल के लिए ब्राइट प्रिंट और पैटर्न बेस्ड वॉलपेपर चुनें.
– कमरे को मॉडर्न लुक देने के लिए ब्लैक कलर में क्लासिक पैटर्नवाला वॉलपेपर लगाएं.
– कमरे को बोल्ड लुक देने के लिए डीप रेड कलर के वॉलपेपर का सिलेक्शन करें.
– केवल एक दीवार पर ही नहीं, चाहें तो दो दीवारों पर ही वॉलपेपर लगाएं और बाकी दो दीवारों को पेंट करें. इससे भी डेकोर को न्यू लुक मिलेगा.

– देवांश शर्मा