IOA

Suresh Kalmadi
आख़िरकार … को खेल मंत्रालय के आगे झुकना ही पड़ा. सुरेश कलमाड़ी और चौटाला को आजीवन आईओए का अध्यक्ष बनाने के फैसले पर उसने यू टर्न ले लिया है और दोनों के नाम की चर्चा को अब रद्द कर दिया. आईओए ने अपने अध्यक्ष एन रामचंद्रन के देश से बाहर होने के कारण जवाब देने के लिये 15 दिन का समय मांगा था.

हम आपको बता दें कि भ्रष्टाचार के आरोपी सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला की नियुक्तियों से नाराज़ खेल मंत्रालय ने भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) की मान्यता रद्द कर दी थी. मंत्रालय ने दोनों दागी नेताओं को आईओए का आजीवन मानद अध्यक्ष चुने जाने पार कारण बताओ नोटिस जारी कर आईओए से जवाब तलब किया था. अपनी मान्यता रद्द किए जाने के डर से आईओए ने यू टर्न लेते हुए ये फैसला लिया.

ग़ौरतलब है कि आईओए के इस निर्णय से आईओए के अंदर भी बवाल मचने लगा था. हर तरफ़ से दबाव के कारण ही लगता है कि आईओए ने अपना ़फैसला बदल लिया.

 

27goel

भ्रष्टाचार के आरोपी सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला की नियुक्तियों से नाराज़ खेल मंत्रालय ने शुक्रवार को भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) की मान्यता रद्द कर दी. मंत्रालय ने दोनों दागी नेताओं को आईओए का आजीवन मानद अध्यक्ष चुने जाने पार कारण बताओ नोटिस जारी कर आईओए से जवाब तलब किया था, लेकिन आईओए से मिले जवाब से असंतुष्टि जाहिर करते हुए मंत्रालय ने संघ की मान्यता रद्द कर दी.

इस निलंबन के साथ ही आईओए को राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति (एनओसी) के तौर पर सरकार से मिलने वाले विशेषाधिकार एवं सुविधाएं हासिल नहीं कर
सकेगा. इस फैसले से आईओए को सरकार से मिलने वाली वित्तीय मदद के अलावा अन्य मदद भी बंद हो जाएंगी. खेल मंत्री विजय गोयल ने एक बयान जारी कर कहा, सरकार ने आईओए की मान्यता तब तक के लिए रद्द कर दी है जब तक वह सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला को आजीवन मानद अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले को वापस नहीं ले लेता.

हालांकि खेल मंत्रालय ने ये भी कहा कि सरकार ओलिंपिक कार्यक्रम का बेहद सम्मान करती है और खेल की स्वायत्तता को बचाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वह आईओए द्वारा नियमों के उल्लंघन पर चुप्पी नहीं साध सकती. बयान में कहा गया है, इसलिए यह फैसला लिया गया है कि आईओए को सरकार द्वारा दी गई मान्यता तब तक रद्द करते हैं जब तक आईओए इसको लेकर जरूरी कदम नहीं उठाता.

Suresh Kalmadi
क्या कोई संघ देश और सरकार से ऊपर हो सकता है? आपका उत्तर भी शायद नहीं होगा, लेकिन ये इंडिया है. यहां कुछ भी हो सकता है. सरकार को ख़बर भी नहीं लगती और तमाम संघ अपना काम कर जाते हैं. कुछ ऐसे निर्णय भी ले लेते हैं, जिन पर किसी को अंदेशा भी नहीं होता. खेल की दुनिया में कुछ ऐसा हुआ, जिसने देश ही दुनिया में देश के प्रशासन पर सवाल उठा दिया. आख़िर क्या हुआ ऐसा? आइए, जानते हैं.

किस बिना पर कलमाड़ी को सौंपा यह पद?
भारतीय ओलिंपिक संघ (आईओए) ने चेन्नई में अपनी वार्षिक आम सभा में राष्ट्रमंडल खेल 2010 के दागी कलमाड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे एक अन्य पूर्व अध्यक्ष चौटाला को आजीवन अध्यक्ष बनाने का फैसला कर लिया. ऐसा करते ही उसके ़फैसले पर चारों ओर से सवाल उठने लगा है. जैसे ही उसने यह घोषणा की खेल मंत्री विजय गोयल ने दागी सुरेश कलमाड़ी और अभय सिंह चौटाला को आजीवन अध्यक्ष बनाने के लिये भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को आड़े हाथों लिया. हम आपको बता दें कि 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में घोटाला करने के आरोप में कलमाड़ी को 10 महीने तक जेल की सज़ा भी काटनी पड़ी थी. ऐसे में इतने साल के भीतर फिर से उसी दागी को फिर से आजीवन अध्यक्ष बनाने का ़फैसला कहां तक उचित है?

क्या खेल एसोसिएशन बड़ा है खेल मंत्रालय से?
भारत में इस तरह के फैसले न केवल देश के भीतर, बल्कि देश के बाहर भी देश की छवि धूमिल करते हैं. इस तरह के ़फैसलों के बाद सरकार, खेल मंत्रालय पर एक तरह का सवालिया निशान लग जाता है.

श्वेता सिंह