Jagjit Singh

अपनी मर्ज़ी से कहां अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं…

निदा फ़ाज़ली की इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह ने अपनी मधुर आवाज़ से और भी ख़ूबसूरत और आकर्षक बना दिया था. सच है कि कई बार ज़िंदगी के सफ़र में ना चाहते हुए भी हमें अनजाने रास्तों से गुज़रना पड़ता ही है.
आज जगजीत सिंहजी की पुण्यतिथि है. उन्हें गए नौ साल बीत चुके, पर लगता है जैसे कल की ही बात हो. इस अवसर पर उनसे जुड़ी कुछ कही-अनकही बातों को जानते हैं. साथ ही दिलों को मदहोश कर देनेवाले उनकी ग़ज़लों को भी देखते-सुनते हैं.
जगजीत सिंह का पूरा नाम जगमोहन सिंह धीमन था. वे राजस्थान के गंगाशहर के रहनेवाले थे. उनके पिता चाहते थे कि वे इंजीनियर या आईएएस ऑफिसर बने, लेकिन जगजीत दिल से संगीत के दीवाने थे. वे गाना चाहते थे. अपनी आवाज़ को एक मुक़ाम देना चाहते थे. उनकी पढ़ाई की किताबों से अधिक तो उनकी संगीत के साजो-सामान रहते थे.
पिता की इच्छा का मान रखते हुए वे जालंधर पढ़ाई के लिए गए. उन दिनों वे जालंधर के रेडियो और अपने कॉलेज में भी गाया करते थे. लेकिन सिंगर बनने की चाह दिनोंदिन बढ़ती गई. उनका यह सोचना था कि वह अपने घर गए, तो कभी उनके पिता उन्हें गायक नहीं बनने देंगे, इसलिए वे मुंबई आ गए.
यहां पर काफ़ी संघर्ष करना पड़ा. खाने के लिए उन्होंने होटलों में गाना शुरू किया, ताकि भरपेट भोजन मिल सके. फिर पार्टियों-इवेंट आदि में ग़ज़ल और गाना गाने लगे. उन्होंने ऐड में जिंगल के लिए भी अपनी आवाज़ दी, जिसे लोगों ने काफ़ी पसंद भी किया. ऐसे छोटे-मोटे काम करते रहे और आगे बढ़ते रहे.
उसी दरमियान उनकी मुलाक़ात अजीज मर्चेंट से हुई, जो गुजराती फिल्मों में संगीतकार थे. उन्होंने जगजीत सिंह को एक ऑफर दिया कि उनके लिए बढ़िया काम है. उन्हें ख़ुशी हुई कि फिल्मों में गाने का मौक़ा मिलेगा. लेकिन जब निर्माता से मिलना हुआ, तो उन्होंने फिल्म के हीरो का ऑफर किया. जगजीतजी गाने में अपना करियर बनाना चाहते थे. उन्होंने कहा कि वे यह नहीं कर सकते.
70 के दशक में लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार जैसे गायकों का बोलबाला था. तब जगजीत सिंह ने सोचा कि ऐसे तो वे अपने पैर नहीं जमा पाएंगे. तब उन्होंने और चित्रा सिंह ने मिलकर ग़ज़ल सिंगिंग में आगे बढ़ने का निर्णय लिया. उन्होंने अपना पहला एल्बम ‘द अनफॉरगेटेबल’ रिलीज़ किया. यह एल्बम लोगों को इतना पसंद आया कि सुपर-डुपर हिट हो गया. फिर उसके बाद तो जगजीत-चित्रा के एल्बम की सीरीज़ निकलने लगी. लोगों को ख़ूब पसंद आने लगे.70 के दशक के सबसे मशहूर ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह आज हमारे बीच नहीं हैं… लेकिन उनकी मखमली आवाज़ का जादू सदा रहेगा. गाने और ग़ज़लों को उनकी आवाज़ और भी उम्दा व ख़ूबसूरत बना देती हैं. आज उनकी पुण्यतिथि पर उनकी बेहतरीन गीत-संगीत के कलेक्शन को सुनते-देखते हैं…

Jagjit Singh

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8 फरवरी 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में जन्में जगजीत सिंह नें क़रीब 4 दशकों तक लोगों को अपनी मखमली आवाज़ से मंत्रमुग्ध किया. बेहद साधारण परिवार में जन्में जगजीत सिंह को ग़ज़ल की दुनिया में ख़ुद को स्थापित करने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन अपनी जादुई मखमली आवाज़ की बदौलत उन्होंने ग़ज़ल गायिकी में वो मुक़ाम हासिल कर लिया कि उन्हें ग़ज़ल सम्राट की उपाधी दे दी गई. अपने करियर के शुरुआती दौर में जगजीत सिंह को विज्ञापन फिल्मों के लिए जिंगल गाने का अवसर मिला था. इसी दौरान उनकी मुलाकात चित्रा दत्ता से हुई. 1969 में जगजीत सिंह ने चित्रा से शादी कर ली. इसके बाद जगजीत-चित्रा की जोड़ी ने कई एलबमों में अपनी खनकती आवाज़ का जादू दिखाया.

साल 2003 में जगजीत सिंह को भारत सरकार की ओर से पद्मभूषण से सम्मानित किया गया. 10 अक्टूबर 2011 को इस दुनिया को अलविदा कहने वाले इस महान फनकार के सुपरहिट गानों की लिस्ट बहुत लंबी है. आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर आप भी सुनिए उनके कुछ दिल को छू लेने वाले नग़में.

 

https://youtu.be/G6Jpco8kKds

https://youtu.be/h0EJCdC1OeQ
मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से जगजीत साहब को उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर नमन!

15 साल बाद फिर आ गया है दिल को छू लेने वाला गाना. तुम बिन की सिक्वल तुम बिन 2  में जगजीत सिंह के गाए कोई फरियाद… गाने को रिक्रिएट किया गया है. इस गाने में जगजीत सिंह की गाई गई लाइन्स के अलावा रेखा भारद्वाज की क्लासिकल आवाज़ को भी शामिल किया गया है, जो इस गाने में गज़ब का नयापन लेकर आ रही हैं. शाहरुख खान ने भी अपने टि्वटर अकाउंट पर इस गाने को शेयर करते हुए इस फिल्म के निर्देशक अनुभव सिन्हा के लिए लिखा है, ”तुम बिन 2 सॉन्ग, ब्यूटीफुल सॉन्ग, ब्यूटीफुल पीपल”

आप भी देखें ये गाना.