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वास्तु टिप्स: मनचाही नौकरी पाने के लिए करें ये वास्तु उपाय (Vastu Tips For Job And Career)

बहुत प्रयास करने के बावजूद क्या आपको नौकरी (Job) नहीं मिल रही है? क्या आपकी नौकरी में स्थायित्व नहीं है? काबिल होते हुए भी क्या आपको मनचाही सैलरी नहीं मिल रही? क्या आपको लंबे समय से प्रमोशन नहीं मिल रहा है? कहीं इसका कारण आपके घर का वास्तु तो नहीं? कहीं आपके घर का वास्तु (Vastu) आपके करियर में रुकावट तो नहीं बन रहा है? कहीं आपने अपने सर्टिफिकेट ग़लत दिशा में तो नहीं रखे हैं? यदि आपको मनचाही नौकरी नहीं मिल रही, तो आपको सबसे पहले अपने घर में क्या परिवर्तन करने चाहिए, घर का वास्तु सुधारने के लिए आपको क्या करना चाहिए, इन सभी बातों के सरल उपाय बता रहे हैं वास्तु एक्सपर्ट व टैरो कार्ड रीडर प्रेम पंजवानी.

Vastu Tips For Job

करियर में सफलता पाने के 10 आसान वास्तु टिप्स

1) करियर की दृष्टि से ऑफिस में हल्के रंगों का चुनाव बेहतर होता है. ऐसे ऑफ़िस में जब व्यक्ति काम करता है, तो वो ख़ुद को हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है. हां, कुछ स्थानों पर गहरे रंग भी अच्छे लगते हैं, लेकिन पूरे ऑफिस के लिए हल्के रंगों का प्रयोग ही करना चाहिए.

2) अच्छे अवसर पाने के लिए ऑफिस या घर में नीली बोतल में मनी प्लांट लगाएं और उसे उत्तर दिशा में रखें.

3) ऑफिस में जहां आप बैठते हैं, वहां आपकी पीठ दीवार की तरफ़ हो तो अच्छा है. अपने काम में क्रिएटिविटी बढ़ाने के लिए उत्तर पूर्व दिशा में मुंह करके काम करें.

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4) ऑफिस में अपने केबिन के लिए सकारात्मक संदेश देती पेंटिंग्स या पोस्टर का चुनाव करें.

5) ऑफस का उत्तर और उत्तर पूर्व कोना हमेशा साफ़-सुथरा रखें. यहां पर किसी तरह की अस्त-व्यस्तता नहीं होनी चाहिए. हो सके तो यहां पर हर रोज़ कोई सुंगधित धूप बत्ती जलाएं.

मनचाही नौकरी पाने के लिए करें ये वास्तु उपाय, देखें वीडियो:

 

6) ऑफिस में समुद्री नमक रखें, जिससे यहां नकारात्मक वाइब्स न हों.

7) यदि ऑफिस में आपके केबिन के साथ ही टॉयलेट अटैच्ड है, तो इस बात का ख़ास ध्यान रखें कि टॉयलेट का दरवाज़ा हमेशा बंद रहे.

8) ऑफिस में आपके अपने बॉस तथा सहकर्मियों के साथ संबंध मधुर बने रहें, इसके लिए ग्रीन एवेंचरिन और साथ में व्हाइट क्वार्टज़ अपनी टेबल पर रखें.

9) यदि आप जॉब की तलाश में हैं और आपको मनचाही नौकरी नहीं मिल रही है, तो अपने घर के उत्तर पूर्व कोने में सकारात्मक व प्रेरणादायक विचारों वाली तस्वीरें लगाएं. इस कोने को हमेशा साफ़-सुथरा रखें. यदि आप इस काम के लिए लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं तो पश्‍चिम दिशा में काम करें.

10) ऑफिस में आपके रिश्ते सभी के साथ लंबे समय तक बने रहें इसके लिए दक्षिण-पश्‍चिम दिशा में फीनिक्स की फोटो या पोस्टर लगाएं. साथ ही इस स्थान पर किसी भी तरह का बेकार सामान न रखें, ख़ासतौर पर बिजली के ख़राब उपकरण इस स्थान पर बिल्कुल न रखें.

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बेबी सिटिंग: प्रेग्नेंसी के बाद करियर के लिए चुनें ये (Best Job Option For You )

बेबी सिटिंग

बेबी सिटिंग

अधिकतर महिलाओं की ज़िंदगी में एक समय ऐसा आता है जब वो अपने बच्चे की ख़ातिर जॉब छोड़ देती हैं. कई बार ऐसा भी होता है कि वो पोस्ट प्रेग्नेंसी नए सिरे से जॉब की शुरुआत नहीं कर पातीं.इस तरह की मनोदशा महिलाओं को आगे जॉब करने से रोकती है. आपके साथ भी अगर कुछ इस तरह की स्थिति है, तो आप अपने अनुसार एक बार फिर से जॉब की शुरुआत कर सकती हैं. ज़रूरी नहीं कि किसी ऑफिस में जाकर आठ घंटे की जॉब करें. घर से भी आप अपने करियर की नई पारी की शुरुआत कर सकती हैं. आप अगर बहुत पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन आज के ज़माने में अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं, तो बेबी सिटिंग आपके लिए बेहतर विकल्प है. बेबी सिटिंग के ज़रिए आप पैसे के साथ बच्चों का भविष्य भी बना सकती हैं. इस तरह से आपका पूरा दिन भी निकल जाएगा और दूसरे पैरेंट्स की मदद भी हो जाएगी. कैसे करें शुरुआत? आइए, जानते हैं.

कैसे करें शुरुआत?
– बेबी सिटिंग शुरू करने के लिए सबसे पहले अपने घर का एक ऐसा कमरा चुनें जो पूरी तरह से सुरक्षित हो.
– घर के बाहर एक छोटा-सा बोर्ड लगाएं, जिससे लोगों को आपके बेबी सिटिंग के बारे में पता चले.
– कुछ ख़ास चीज़ें जैसे, बच्चों के खेलने के लिए खिलौने, सॉफ्ट ट्वॉयज़ आदि रखें.
– खिलौनों के साथ बच्चों को पढ़ाने के लिए जैसे- राइम्स बुक, स्टोरी बुक आदि रखें.
– बच्चों को खाने में पूरी तरह से हेल्दी खाने का मेनू रखें, जिससे बच्चों के पैरेंट्स आप पर भरोसा कर सकें.
– अपने पैरेंट्स से दूर बच्चे पूरा दिन आपके सात होते हैं. ऐसे में उनके मूड का भी ख़्याल आपको रखना होगा. कुछ समय घर के बाहर लॉन में उनके साथ खेलें ताकि उनका फिज़िकल एक्सरसाइज़ भी हो जाए और समय भी पास हो जाए.
– अपना एक अच्छा सा टाइम-टेबल बनाकर बच्चों के पैरेंट्स को दें ताकि उन्हें पता हो कि उनके बच्चों का आप किस तरह ख़्याल रखेंगी.
– शुरुआत में ही बहुत ज़्यादा फीस न रखें.
– बेबी सिटिंग के दौरान बच्चों को यूं ही अकेला छोड़ अपने बच्चों में न लग जाएं. इससे वो बच्चे अकेलापन महसूस करेंगे.
– घर के काम को उससे पहले निपटा लें ताकि थोड़ा समय उन बच्चों को दे पाएं.

बेबी सिटिंग

बचें इन चीज़ों से
– अचानक जॉब छोड़ने के बाद घर वालों पर अपनी फ्रस्टेशन निकालने की कोशिश न करें.
– ज़िंदगी को दोबारा जीने की कोशिश करें.
– सकारात्मक सोचें और खाली समय में काम करना शुरु करें.
– घर के कामों की एक लिस्ट बनाएं. उसके बाद अपना पूरा समय ख़ुद पर दें.
– सपनों को भूलें न. अपने लक्ष्य को हमेशा याद रखें. फुल टाइम जॉब न सही, लेकिन पार्ट टाइम जॉब का ऑप्शन ज़रूर रखें.
एक रिसर्च के अनुसार 35 पार करने के बाद
अधिकतर महिलाएं जॉब नहीं करना चाहतीं. इसके लिए कई बार उनकी कंपनी तो कई बार उनकी पर्सनल लाइफ ज़िम्मेदार होती है.

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फैशन कम्युनिकेशन में बनाएं करियर (Career In Fashion Communication)

Career In Fashion Communication

Career In Fashion Communication
इन दिनों फैशन वर्ल्ड में फॉरेन और डोमेस्टिक ब्रांड की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. इसलिए कंपनियां लोगों को लुभाने के लिए यूनीक ब्रांड आइडेंटिटीज़ डेवलप करती हैं और इसके लिए वो फैशन कम्युनिकेशन प्रो़फेशनल्स को अप्वॉइंट करते हैं. फैशन कम्युनिकेशन उन लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन है जो फैशन, बिज़नेस, रिटेल मर्चेडाइज़िंग, कम्युनिकेशन फील्ड जर्नलिज़्म, टेलीविज़न, इवेंट मैनेजमेंट आदि में करियर बनाना चाहते हैं.

शैक्षणिक योग्यता
12वीं के बाद आप इस फील्ड में अपनी क़िस्मत आज़मा सकते हैं.

कोर्स के तहत
फैशन कम्युनिकेशन का कोर्स करने वाले स्टूडेंट को बेसिक ऑफ़ डिज़ाइन, टेक्निकल ड्रॉइंग, फैशन स्टडीज़, प्रिंसीपल ऑफ़ मार्केटिंग, फैशन स्टाइल, फैशन जर्नलिज़्म और पोर्टफ़ोलियो डेवलपमेंट के बारे में बताया जाता है.

प्रमुख संस्थान
* नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी, दिल्ली.
* सत्यम फैशन इंस्टीट्यूट, नोएडा.

Career In Fashion Communication

रोजगार की संभावनाएं
* विदेशी और घरेलू कंपनियां बड़े पैमाने पर क़ाबिल और स्मार्ट ़फैशन कम्युनिकेटर को रखती हैं.
* किसी भी अच्छी कंपनी में आसानी से जॉब मिल सकती है.
* रिटेल मर्चेडाइज़िंग, कम्युनिकेशन फील्ड जर्नलिज़्म, टेलीविज़न और इवेंट मैनेजमेंट में आसानी से ट्राई कर सकते हैं.

नौकरी छोड़ते समय भूलकर भी न करें ये 5 ग़लतियां (5 Mistakes never to do when you quit your job)

Resignation Tips

Resignation Tips

ऑफिस के माहौल से दिल और दिमाग़ खराब हो रहा है, चाहकर भी काम करना मुश्किल हो रहा है, मैनेजमेंट से ठीक तरह से कोऑपरेशन नहीं मिल पा रहा है, ये सारी बातें स़िर्फ और स़िर्फ एक ही ओर इशारा करती हैं कि नौकरी छोड़ दिया जाए. इस माहौल में काम कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है. ये बात हम सभी जानते हैं, लेकिन तैश में आकर नौकरी छोड़ते समय कुछ ऐसी ग़लतियां कर जाते हैं, जो उचित नहीं होतीं. आप भी अगर नौकरी छोड़ने की सोच रहे हैं, तो इन 5 ग़लतियों से बचें.

इंस्टेंट रेज़िग्नेशन
इंस्टेंट रेजिग्नेशन का मतलब है कि कई दिन से परेशान होकर आप एक दिन इतने ग़ुस्से में आए कि जॉब छोड़ने का मूड बना लिया और तुरंत ग़ुस्से में आकर रिज़ाइन लेटर टाइप न करें. दिमाग़ में जब भी रिज़ाइन करने की बात उठे, तो सबसे पहले अपने हेड ऑफ डिपार्टमेंट से बात करें. उससे अपनी सारी परेशानी शेयर करें और फिर उसे बताएं कि आप बहुत जल्द इस्तीफा देने वाले हैं. आप अपनी ओर से सारी फॉरमैलिटी पूरी करें. सही तरह से रिज़ाइन न करने पर कंपनी आपके साथ पंगा कर सकती है. हो सकता है कि वो आपको रीलिविंग लेटर देने में आनाकानी करे.

बुरी इमेज
नौकरीपेशा वालों के लिए इंप्रेसिव इमेज यानी अच्छी छवि बनाना बहुत ज़रूरी होता है. भले ही काम थोड़ा कम करें, लेकिन छवि अच्छी ज़रूर होनी चाहिए. नौकरी छोड़ने से पहले आप भी इस बात का ध्यान रखें. किसी से झगड़ा करने, ऑफिस में हंगामा करने की ग़लती न करें. रिज़ाइन करने के बाद नोटिस पीरियड में लोगों से अच्छी तरह से बात करें. इस बात का ध्यान रखिए कि किसी के लिए नहीं, लेकिन आपके लिए ये आगे बहुत काम देगा.

हैंडओवर न करना
अंग्रेज़ी का ये शब्द बहुत कुछ कहता है. जैसे आप किसी अपने कि शादी में जाते हैं, तो वो आपको अपना समझकर पैसे के लेन-देन का काम आपको सौंप देता है. आप पूरे फंक्शन के दौरान अच्छी तरह से उसे निभाते हैं और जब फंक्शन पूरा हो जाता है और वहां से चलने की बेला होती है, तो आप एक-एक हिसाब देते हैं. आपके पास जो पैसा बचा है, उसे आप उस व्यक्ति को हैंडओवर कर देते हैं. ठीक इसी तरह ऑफिस से जाने के पहले ऑफिस का जो भी काम, सामान आपके पास है, उसे हैंडओवर करें.

नो फ्यूचर प्लानिंग
नौकरी छोड़ने का कारण ही मायने नहीं रखता, बल्कि उसके आगे क्या है, वो भी मायने रखता है. इस नौकरी को छोड़ने के बाद आगे आप क्या करना चाहते हैं, किस फर्म में नौकरी करेंगे या नौकरी नहीं करेंगे जैसी बातें आपको पहले ही डिसाइड कर लेनी चाहिए. बिना फ्यूचर प्लानिंग के नौकरी छोड़ने का निर्णय आपके लिए उचित नहीं होगा. कभी भी ये क़दम न उठाएं. इससे आपको भविष्य. में परेशानी हो सकती है.

कंपनी के ख़िलाफ अफवाह
भले ही आप नौकरी छोड़ने की सोच रहे हैं, लोकिन इसका ये बिल्कुल मतलब नहीं कि आप कंपनी के ख़िलाफ़ बातें करें. भले ही कंपनी ने आपके लिए अच्छा न किया हो, लेकिन आप अपने अनुसार काम करें. चुपचाप रिज़ाइन करें. बाहर कंपनी की बुराई करने से कुछ होगा नहीं.

श्वेता सिंह

करियर कोच- एक्सप्लोर करें दूसरों का करियर (Career Coach- explore others career)

Career Coach

career coach

क्या आप भी अपने करियर को लेकर परेशान हैं. समझ नहीं आ रहा है कि किस दिशा में आगे बढ़ें? तो अब टेंशन की टोकरी को अपने सिर से उतार फेंकिए और बनिए करियर कोच. जी हां, इस फील्ड में करियर बनाकर आप न केवल अपना, बल्कि दूसरों का भविष्य भी सुधार सकते हैं. कैसे? आइए, हम बताते हैं.

क्या है ये करियर कोचिंग
आम बोलचाल की भाषा में इसे आप करियर कॉउंसलिंग कह सकते हैं. एक ऐसा कॉउंसलर जो लोगों को आगे बढ़ने की दिशा दिखता है. एक ऐसा टीचर जो आपके ही विकल्पों में से के ऐसा सुझाव देता है, जिससे आपके करियर की गाड़ी आगे बढ़ जाती है. तो आप भी अब इसमें करियर बनाकर बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं.

एज्युकेशनल स्किल
इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए १२वीं पास होना बहुत ज़रूरी है. हो सके तो १२वीं में साइकोलॉजी ज़रूर लें. १२वीं करने के बाद साइकोलॉजी से ग्रेजुएशन करें। इसके बाद गाइडेंस और काउंसलिंग में पीजी डिप्लोमा करें। आगे आप पोस्ट ग्रेजुएट और डॉक्टरेट भी कर सकते हैं.

पर्सनल स्किल
शिक्षा जगत की पूरी जानकारी रखें। कब क्या नया हो रहा है, उसकी पूरी अपडेट रखे.
कम्युनिकेशन स्किल बेहतरीन होनी चाहिए.
पेशेंस का होना बहुत ज़रूरी है.
दूसरों को समझाने की कला आनी चाहिए.
अपनी पर्सनालिटी से लोगों को सम्मोहित करना आना चाहिए.
कॉन्फिडेंस का होना बहुत ज़रूरी है.

सैलरी पैकेज
स्टार्टिंग में आपको १२-१५ हज़ार मिलते हैं. कुछ ही महीनों में ये पैकेज बढ़कर ३५ हो जाता है. इतना ही नहीं अनुभव बढ़ने के साथ-साथ आप अपना ख़ुद का क्लिनिक शुरू करके ज़्यादा से ज़्यादा काम सकते हैं.

करियर ऑप्शन
करियर कोच के ऑप्शन बहुत है. कॉर्पोरेट कंपनी, मल्टी नेशनल कंपनी, इंस्टिट्यूट्स, स्कूल्स आदि जगहों पर आप नौकरी कर सकते हैं.

पैसे से ज़्यादा करियर पर करें फोकस
वैसे तो सभी ये चाहते हैं कि वो ऐसी नौकरी करें, जिसमें बहुत पैसा हो, ये सही भी है, लेकिन इस फील्ड में हमेशा एक बात का ध्यान रखें कि हो सकता है कि आपके पास कोई ऐसा भी स्टूडेंट आये, जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है. ऐसे में आपका फ़र्ज़ बनता है कि आप पैसे की चिंता किए बग़ैर उसका करियर संवारें.

– श्वेता सिंह 

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क्यों ज़रूरी है ईंटर्नशिप (Why internship is necessary?)

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कोई भी नौकरी जॉइन करने से पहले आख़िर क्यों इंटर्नशिप की जाती है? क्या कभी आपने इस बारे में सोचा है? नहीं..? चलिए, हम आपको बताते हैं कि आख़िर क्यों करियर की शुरुआत करने से पहले इंटर्नशिप ज़रूरी होती है.

सोशल स्किल
कॉलेज की लाइफ और नौकरीपेशा जीवन में बहुत अंतर होता है. कॉलेज स्टूडेंट जब नौकरी करना शुरू करते हैं, तो उनमें बहुत-सी चीज़ों की आवश्यकता होती है. सबसे पहले जिस चीज़ की ज़रूरत होती है, वो है सोशल स्किल. सोशल स्किल ही आपको वर्कप्लेस पर कामयाब बनाती है. इंटर्नशिप के दौरान स्टूडेंट बाकी सहकर्मियों के साथ काम करते हुए इसे डेवेलप करते हैं, जो उन्हें आगे बहुत काम आता है. इंटर्नशिप के दौरान वो सीख जाते हैं कि आख़िर ऑफिस के माहौल में ख़ुद को किस तरह एडजस्ट करना है. एक इंटर्न के लिए अच्छी सोशल स्किल काफ़ी काम आती है. ऑफिस के कलीग्स के साथ दोस्ताना व्यवहार रखना, दूसरे लोगों को ऑब्ज़र्व करना, ऑफिस में लोग एक-दूसरे से कैसे बात करते हैं, जैसी बातें सीखने को मिलती हैं.

प्रैक्टिकल नॉलेज
इंटर्नशिप से काफ़ी कुछ सीखने को मिलता है. इसके ज़रिए आपको प्रैक्टिकल नॉलेज मिलता है. ऑफिस में फोन पर किसी से बात कैसे करनी है, पर्सनल फोन आने पर किस तरह हैंडल करना है, कस्टमर से कैसे डील करना है, ऑफिशियल मेल कैसे भेजना है, जैसी प्रैक्टिकल जानकारी इंटर्नशिप के दौरान मिलती है.

टाइमिंग एटीकेट्स
कॉलेज, इंस्टीट्यूट में टाइम की कोई पाबंदी नहीं होती. एक लेक्चर छूट गया, तो दूसरा अटेंड कर लेंगे या दोस्तों से उसके बारे में पूछ लेंगे, लेकिन नौकरी में ऐसा नहीं होता. समय पर आना बहुत ज़रूरी होता है, नहीं तो सैलरी कटने के साथ ही इससे ऑफिस में छवि भी ख़राब होती है. इंटर्नशिप के दौरान आप ऑफिस में सबसे जूनियर होते हैं. हर दिन आपको समय से पहले आना होता है. सीनियर्स का डर आपको समय का पाबंद बना देता है. यही आदत आपको लाइफ में आगे बढ़ने में मदद करती है.

वर्क कंप्लीशन
इंटर्नशिप के दौरान हर दिन सीनियर्स द्वारा मिलने वाले काम को उसी दिन पूरा करना, वो भी परफेक्शन के साथ. ये आदत कॉलेज के दिनों में नहीं होती. नौकरी शुरू करने से पहले इंटर्नशिप से आप किसी भी काम को समय पर पूरा करने की आदत सीख जाते हैं.

कम्युनिकेशन स्किल
नौकरी से पहले इंटर्नशिप करने से बातचीत करने का तरीक़ा आ जाता है. किससे किस तरह बात करनी है, कितनी बात करनी है, किस तरह के शब्दों का प्रयोग करना है आदि. आगे चलकर ये नौकरी में फ़ायदा पहुंचाता है.

– श्वेता सिंह

करें पढ़ाई के साथ कमाई (Earn while learn)

अपने सपनों कोे साकार करने और अपने दम पर कुछ कर दिखाने की ज़िद्द और जज़्बा ही आज की युवा पीढ़ी को पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. ज़मानेे के साथ क़दम से क़दम मिलाकर चलने के लिए आज की युवा पीढ़ी पढ़ाई करते हुए आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें किस क्षेत्र में आगे अपना करियर बनाना है, इसकी शुरुआत वे पढ़ाई के दौरान ही कर देते हैं. पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी करने के क्या नफ़ा-नुक़सान हैं? बता रहे हैं करियर काउंसलर फ़रज़ाद दमानिया.

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सही प्लानिंग
पढ़ाई के साथ नौकरी करने के लिए सबसे ज़रूरी है सही प्लानिंग, तभी आप दोनों काम अच्छी तरह कर सकते हैं. साथ ही किसी एक को दूसरे पर हावी न होने दें. पढ़ाई के बाद बचे हुए समय में ही नौकरी के बारे में सोचें. अच्छा होगा कि पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम जॉब करें, फुल टाइम जॉब के बारे में न सोचें.

टाइम मैनेजमेंट
पढ़ाई के साथ जॉब करने के लिए सबसे ज़रूरी है टाइम मैनेजमेंट. आप अपने टाइम को जितनी कुशलता से बांटेंगे, आपको दोनों कामों में उतनी ही सफलता मिलेगी. अतः पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय निकालकर ही पार्ट टाइम जॉब के लिए अप्लाई करें. अगर आप सुबह कॉलेज जाते हैं, तो दोपहर के बाद का समय नौकरी को दें.

फ्लैक्सिबल जॉब
पढ़ाई के दौरान नौकरी करते समय इस बात का ख़ास ध्यान रखें कि नौकरी के चलते आप पढ़ाई को बोझ न समझने लगें. पढ़ाई आपकी प्राथमिकता है, यह बात आपको हमेशा ध्यान में रखनी होगी. बेहतर होगा कि आप कोई ऐसा फ्लैक्सिबल जॉब चुनें, जिसमें पढ़ाई के हिसाब से देर से जाना या कई बार न जाना संभव हो और इससे आपकी नौकरी पर कोई आंच न आए. इस तरह का फ्लैक्सिबल जॉब आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा.

अनुशासन
पढ़ाई के साथ आर्थिक रूप से सक्षम होने के लिए आपको अपनी दिनचर्या से जुड़ी कुछ चीज़ों का त्याग करना होगा. उदाहरण के तौर पर, आप यदि प्रतिदिन 2 घंटे टीवी देखते हैं या बाहर दोस्तों के साथ घूमने जाते हैं, तो आपको इन पर रोक लगानी होगी. पार्ट टाइम जॉब करने पर भी आपको अपना डेली रूटीन अनुशासित रखना होगा.

पढ़ाई के साथ जॉब के फ़ायदे
करियर काउंसलर फ़रज़ाद दमानिया के अनुसार, ङ्गङ्घपढ़ाई के साथ नौकरी करना काफ़ी हद तक फ़ायदेमंद होता है. आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर पढ़ाई के लिए ख़र्च होने वाले पैसे के लिए हमें किसी दूसरे के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ता. इतना ही ही पढ़ाई के साथ नौकरी करने से पढ़ाई पर कोई बुरा असर पड़ता है, बल्कि इससे भविष्य में स्टूडेंट्स को फ़ायदा ही मिलता है. नहीं, पढ़ाई के दौरान नौकरी करने पर बच्चे बहुत जल्दी अपनी ज़िम्मेदारियां उठाना सीख जाते हैं.फफ पढ़ाई के साथ काम करने के निम्न फ़ायदे हैंः

आर्थिक मज़बूती
पढ़ाई के साथ जॉब करना एक अच्छा विकल्प है. इससे स्टूडेंट्स को आर्थिक मज़बूती मिलती है. पैरेंट्स से जेब ख़र्च लेने की बजाय बच्चे आत्मनिर्भर होकर अपना जेब ख़र्च उठा सकते हैं. बड़े शहरों में पार्ट टाइम जॉब के कई विकल्प मौजूद हैं. इससे स्टूडेंट्स अपना ख़र्च उठाने के साथ ही परिवार की मदद भी कर पाते हैं.

आत्मविश्वास
कम उम्र में पढ़ाई के साथ नौकरी करने से स्टूडेंट्स का आत्म-विश्‍वास बढ़ता है. जिस उम्र में उनके दोस्त/सहेलियां दूसरों से बात तक करने से झिझकते हैं, उस उम्र में नौकरी करके वे कई लोगों के संपर्क में आते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है. आगे की पढ़ाई को लेकर भी वे उतने ही उत्साहित होते हैं.

अनुभव
पढ़ाई के दौरान नौकरी करने से छात्र ऑफिस में काम करने के तौर-तरी़के सीख जाते हैं. पढ़ाई और नौकरी करते हुए वे ज़्यादा काम करने के आदी हो जाते हैं और ज़्यादा से ज़्यादा काम करना चाहते हैं. पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी ढूंढ़ते वक़्त उन्हें कोई परेशानी नहीं होती.

दमदार सीवी
पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम नौकरी करके वर्क एक्सपीरिएंस बढ़ता है. पढ़ाई पूरी करते-करते आपके सीवी में दो से तीन साल तक का वर्क एक्सपीरिएंस जुड़ जाता है, जिससे आगे नौकरी के लिए इंटरव्यू देते समय सामने वाले पर आप अच्छी छाप छोड़ने में सफल होते हैं.

पढ़ाई के साथ जॉब के नुक़सान
पढ़ाई के साथ जॉब करते समय यदि दोनों में सही तालमेल न हो, तो फ़ायदे के साथ-साथ कुछ नुक़सान भी हो सकते हैं. पढ़ाई के दौरान जॉब करने से निम्न नुक़सान हो सकते हैंः

पढ़ाई पर बुरा असर
पढ़ाई और जॉब के बीच सही संतुलन न बिठाने पर कुछ समय बाद पढ़ाई में रुचि कम होने लगती है. थोड़े-से पैसों का लालच पढ़ाई पर हावी होने लगता है, जिसके चलते कई बार बच्चे अपनी पढ़ाई बीच में ही रोक देते हैं. ऐसे में कई बार अच्छी पढ़ाई करने वाले छात्र भी भटक जाते हैं.

ग़लत संगत
कॉलेज कैंपस के बाहर जब हम नौकरी करने के लिए जाते हैं, तो उस दौरान हम कई लोगों के संपर्क में आते हैं. उनमें से कुछ अच्छे तो कुछ बुरे भी होते हैं. ऐसे में कई बार छात्र बुरे लोगों के संपर्क में आकर ग़लत राह पर चल पड़ते हैं, जिससे न तो वे नौकरी कर पाते हैं और न ही पढ़ाई पर ध्यान दे पाते हैं.

ओवरकॉन्फिडेंस
कॉलेज के दौरान पार्ट टाइम जॉब करने पर कई छात्र ख़ुद को अपनी उम्र से ज़्यादा बड़े और समझदार समझने लगते हैं. कम उम्र में पैसा कमाने की होड़ में वे पढ़ाई को नज़रअंदाज़ करने लगते हैं, जिसके चलते वे आगे नहीं बढ़ पाते और ज़िंदगीभर उसी दायरे में सिमट कर रह जाते हैं.

पढ़ाई के दौरान कौन-सी जॉब है बेहतर?
कॉलेज की पढ़ाई के दौरान युवाओं के मन में अक्सर ये सवाल उठता है कि किस क्षेत्र में क़िस्मत आज़माएं कि आगे चलकर परेशानी न हो. आइए, हम आपको बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान कौन-सी जॉब आपके लिए बेहतर साबित हो सकती है?

* आप अपनी क्वॉलिफिकेशन और इंटरेस्ट के हिसाब से जॉब कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, आप यदि मैनेजमेंट और कॉमर्स की पढ़ाई कर रहे हैं, तो मार्केटिंग, सेल्स, फायनेंस और अकाउंट में काम कर सकते हैं.

* अगर तकनीकी क्षेत्र में पढ़ाई कर रहे हैं, तो टेक्निकल असिस्टेंट, कंप्यूटर प्रोग्रामर या ग्राफिक डिज़ाइनिंग में क़िस्मत आज़मा सकते हैं.

* इसी तरह आगे चलकर आप यदि टीचर बनना चाहते हैं, तो क्लासेस या फिर घर पर ट्यूशन लेकर पार्ट टाइम जॉब करके अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं.

क्या है युवा पीढ़ी की राय?
पढ़ाई के साथ काम करने को लेकर नई पीढ़ी में ख़ासा उत्साह देखने को मिलता है. कुछ युवा मजबूरी में, तो कुछ शौक़िया तौर पर पढ़ाई के साथ काम करते हैं.
मुंबई की कृतिका सिंह कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही एक कॉल सेंटर में काम कर रही हैं. कृतिका कहती हैं, ”पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम जॉब करने में मुझे कोई परेशानी नहीं होती. हां, एग्ज़ाम के दौरान मैं एक महीने का ब्रेक ले लेती हूं.”

कृतिका की ही तरह चेन्नई के सौरभ कृष्णमूर्ति कहते हैं, ”पढ़ाई और नौकरी दोनों साथ-साथ करना आसान नहीं है, लेकिन मुझे काम करना अच्छा लगता है. मैं आगे चलकर बैंक से जुड़ा काम करना चाहता हूं इसलिए उसकी प्रैक्टिस मैंने अभी से शुरू कर दी है. इसके लिए मैं पार्ट टाइम जॉब करता हूं.”

दिल्ली की प्रज्ञा जायसवाल बीकॉम फर्स्ट ईयर की छात्रा हैं और पढ़ाई के साथ शॉपिंग मॉल में कैशियर के तौर पर पार्ट टाइम जॉब भी करती हैं. प्रज्ञा के अनुसार, ”जॉब और पढ़ाई दोनों को एक साथ मैनेज करना आसान नहीं है, लेकिन पढ़ाई के साथ काम करने से एक ओर जहां हम अपनी फैमिली को आर्थिक रूप से मज़बूती देते हैं, वहीं दूसरी ओर हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता है. इससे आगे चलकर हमें फुल टाइम जॉब करने में मदद मिलती है.”

स्मार्ट टिप्स
पढ़ाई के दौरान पार्ट टाइम जॉब या एंटर्नशिप करें.

* पैसा कमाने के नज़रिए से नहीं, बल्कि सीखने के लिए जॉब करें.

* पढ़ाई और नौकरी दोनों में सही तालमेल बिठाएं.

* पैसे की लालच में पढ़ाई को दरकिनार न करें.

* पढ़ाई और जॉब का बहुत ज़्यादा दबाव न झेलें.

* काम के साथ सेहत पर भी ध्यान दें.

* ओवरकॉन्फिडेंस से बचें.

* गर्मी की छुट्टियों में पार्ट टाइम जॉब करें.

* अनुशासित होकर अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही पढ़ाई और जॉब करें.

* समय का सदुपयोग करें.

– श्वेता सिंह

टैटू मेकर- यूनीक प्रोफेशन

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अगर आप भी फैशन की दुनिया में अपना नाम कमाना चाहते हैं और कुछ हटकर करना चाहते हैं, तो टैटू मेकिंग आपके लिए बेस्ट करियर हो सकता है. कैसे बनें टैटू मेकर? बता रही हैं करियर काउंसलर मालिनी शाह.

क्या है टैटू मेकिंग?
बॉडी पर तरह-तरह की कलाकृतियां बनाना ही टैटू कहलाता है. पुराने ज़माने में भारतीय गोदना का बहुत प्रचलन था, लेकिन समय के साथ वो बदलता गया और आज टैटू के रूप में विश्‍व विख़्यात हो चुका है. आजकल बड़ी तेज़ी से लोगों में टैटू बनवाने का क्रेज़ बढ़ रहा है.

कहां से करें कोर्स?
टैटू मेकिंग का कोर्स किसी कॉलेज/इंस्टीट्यूट में नहीं सिखाया जाता, अगर आप इसमें करियर बनाना चाहते हैं, तो-

  • किसी प्रोफेशनल के अंडर ही टैटू सीखना शुरू करें.
  • आजकल कई पार्लर भी टैटू मेकिंग सिखाते हैं, लेकिन अच्छे से पूछताछ करने के बाद ही किसी क्लास को ज्वाइन करें.
  • अनुभवी ट्रेनर से ही टैटू मेकिंग सीखें.
  • मेट्रो सिटीज़ में कई प्राइवेट क्लासेस भी टैटू मेकिंग का कोर्स कराते हैं.

योग्यता
टैटू मेकर बनने के लिए किसी तरह की प्रोफेशनल डिग्री की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन प्राथमिक ज्ञान होना ज़रूरी है. एक अच्छा टैटू मेकर बनने के लिए ये चीज़ें ज़रूरी है.

  • आर्टिस्ट होना ज़रूरी एक टैटू मेकर के लिए बहुत ज़रूरी है कि वो पहले एक बेहतरीन कलाकार हो. टैटू बनाना एक कला है, अतः एक कलाकार ही इसकी बारिक़ियों को समझ सकता है.
  • क्रिएटिव आर्टिस्ट के साथ-साथ क्रिएटिव होना भी बहुत ज़रूरी है. इस फिल्ड में अगर टॉप पर पहुंचना है, तो हर पल कुछ नया करना होगा ताकि लोग आपकी कला से प्रभावित हो सकें.
  • टैटू के प्रति लगाव किसी भी विधा में आगे बढ़ने के लिए उसके प्रति लगाव होना बहुत ज़रूरी है. जब तक आपका अपने प्रोफेशन के प्रति रुझान नहीं बढ़ेगा तब तक आप अपना सौ प्रतिशत नहीं दे पाएंगे.
  • संयम और लगन टैटू मेकिंग आसान नहीं है. साधारण से लेकर कई जटिल डिज़ाइन भी बनाने पड़ते हैं जिसमें काफ़ी समय और मेहनत लगती है. ऐसे में इस कला को सीखने के लिए संयम और लगन की बहुत आवश्यकता है.
  • सकारात्मक सोच दूसरे कोर्स की तरह टैटू मेकिंग की ट्रेनिंग आसान नहीं. आसानी से इसकी क्लासेस नहीं मिलती. इसके लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ती है.
  • एक अच्छे ट्रेनर की तलाश करनी पड़ती है. बहुत जल्दी निराश होने वालों के लिए ये क्षेत्र नहीं है.
  • क्विक लर्नर टैटू मेकिंग के लिए क्विक लर्नर (जल्दी सीखने की क़ाबिलियत) होना बहुत ज़रूरी है. ये एक ऐसा क्षेत्र है जहां हर पल कुछ नया होता रहता है. ऐसे में अगर आप क्विक लर्नर नहीं हैं तो आप दूसरों से पीछे रह जाएंगे.

स्कोप
टैटू मेकिंग का काम शुरू करने के लिए आप छोटे या बड़े पैमाने पर शुरू कर सकते हैं. इसे शुरू करने के लिए किसी तरह की बाध्यता नहीं होती. कैसे आप टैटू मेकिंग का काम शुरू कर सकते हैं? आइए, जानते हैं.

  • घर से शुरू करें टैटू मेकिंग का काम सीखने के बाद आप अपने बिज़नेस की शुरुआत घर से ही कर सकते हैं. शुरुआती दौर में आप छोटे-छोटे पैम्पलेट और दोस्तों की मदद से इसकी शुरुआत कर सकते हैं.
  • मॉल्स बड़े-बड़े मॉल्स से भी आप टैटू मेकिंग का काम शुरू कर सकते हैं. ये एक अच्छी शुरुआत हो सकती है.
  • स्टूडियो बड़े लेवल पर टैटू मेकिंग का काम शुरू करने के लिए आप किसी स्टूडियो से जुड़ सकते हैं. पहले ट्रेनी के तौर पर फिर अपना ख़ुद का स्टूडियो भी शुरू कर   सकते हैं.
  • टैटू पार्लर मेट्रो सिटीज़ में बड़े-बड़े टैटू पार्लर भी होते हैं. किसी भी अच्छे पार्लर से आप अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं.

टैटू के प्रकार
किसी भी ट्रेनर से टैटू सीखते व़क्त इस बात का ध्यान रखें कि आपको सभी प्रकार के टैटू बनाना वहां सिखाया जाए.
आइए,जानते हैं टैटू के प्रकार के बारे में.

  • एब्सट्रैक्शन टैटू
  • नेचुरलिस्टिक टैटू
  •  सिम्प्लिफिकेशन टैटू
  • कॉम्प्लेक्स टैटू

भारत में प्रचलित ख़ास टैटू
दुनिया के हर देश का अपना कुछ स्टाइल होता है. भारत में किस तरह के टैटू का प्रचलन अधिक है? आइए जानते हैं.

  • इंडियन गॉड्स टैटू
  • पैरेंटल ब्लेसिंग टैटू
  • मेहंदी टैटू
  • पिकॉक फीदर टैटू
  • फेस ऑफ द सन टैटू
  • एनिमल टैटू
  • फ्लावर टैटू
  • बर्ड टैटू
  • नेम टैटू
  • ज़ॉडिक साइन टैटू

– श्वेता सिंह 

जब महिलाएं लें रिटायरमेंट

finance

 

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गाड़ी के दो चक्के जो निरंतर घूमते रहते हैं, जिससे गाड़ी की रफ़्तार बनी रहती है, पर एक समय आता है, जब गाड़ी थक जाती है और चक्के घूमना बंद कर देते हैं. अचानक सब कुछ थम-सा जाता है. ना कहीं जाने की जल्दी और ना ही कहीं से घर लौटने की ख़ुशी. ऐसा ही कुछ होता है, जब आप रिटायर्ड या सेवानिवृत होती हैं. जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं, उन स्त्रियों की, जो एक लंबी अवधि की नौकरी के बाद रिटायर हो जाती हैं.

क्या है रिटायरमेंट ब्लूज़?
जब आप काम करती हैं, तो अक्सर ही यह कहती हैं कि मैं तो इस काम से तंग आ गई हूं, पता नहीं कब इससे छुट्टी मिलेगी, पर क्या अब आपको ऐसा लगता है कि आपको यही छुट्टी चाहिए थी? कहीं रिटायरमेंट ने आपको अकेला तो नहीं कर दिया है? ऐसे कई सवाल आपके ज़ेहन में भी आते होंगे. तो आइए जानें, आपके रिटायरमेंट ब्लूज़ को. जब आप रिटायर होती हैं, तो अचानक आपको लगता है कि-

  •  आपकी पहचान खो गई है या आपके अस्तित्व को कोई ख़तरा है.
  •  अचानक आपको अपने ओहदे से जुड़े मान-सम्मान में कमी नज़र आने लगती है.
  •  जिस स्वतंत्रता को आप इतने सालों से पाना चाहती थीं, वह अचानक सज़ा लगने लगती है.
  • अचानक आपको लगता है कि आपसे कोई बात नहीं करना चाहता और आपके साथ कोई खाना नहीं खाना चाहता.
  • आप अपने आपको अकेली और अनुपयोगी पाती हैं.

अगर आप भी ऐसा ही महसूस कर रही हैं, तो चिंता की कोई बात नहीं है. हर रिटायर होती स्त्री ऐसी ही कशमकश में होती है. इसे ट्रांज़िशन पीरियड कहा जाता है, मतलब आप इस समय अपने जीवन के बहुत बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रही होती हैं. ऐसा नहीं है कि स़िर्फ स्त्रियां ही इससे गुज़रती हैं, पुरुष भी इस कठिन समय का सामना करते हैं, पर यह समय स्त्रियों के लिए अधिक संवेदनशील इसलिए हो जाता है, क्योंकि उम्र का यह वही पड़ाव है, जिसमें वे मेनोपॉज़ से भी जूझ रही होती हैं. मानसिक और शारीरिक दोनों ही आक्षेपों में यह समय काफ़ी नाज़ुक और कठिन होता है.

मनोवैज्ञानिक डॉ. केहाली बताती हैं कि चाहे कोई स्त्री ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ले या फिर अपनी सेवाएं पूरी करने के बाद रिटायर हो, ङ्गएंप्टीनेस सिंड्रोमम दोनों ही जगहों पर देखने को मिलता है. इसका मतलब है, अचानक अकेलेपन का एहसास होना. ऐसा लगता है, जैसे अब किसी को आपकी ज़रूरत नहीं है. मेनोपॉज़ के समय वैसे ही हार्मोंस काफ़ी डिस्टर्ब हो जाते हैं. इस अवस्था को डिप्रेशन तो नहीं कहा जा सकता, पर हां, यह डिप्रेशन के काफ़ी क़रीब है.

श्रीमती जोशी बताती हैं कि मेरे रिटायरमेंट को 5 साल पूरे होनेवाले हैं, फ़िलहाल तो सब ठीक है, पर जब मैं नई-नई रिटायर हुई थी, तब घर बहुत खाली-खाली लगता था. मैं घर के रूटीन को पूरी तरह से भूल गई थी. उम्र के 55वें वसंत में मैंने टीचिंग प्रोफेशन से रिटायरमेंट लिया था. सुबह तड़के उठ जाती थी, पर फिर याद आता था कि उठकर क्या करूं, अब कहीं जाना तो नहीं है. अपने उस रूटीन को तोड़कर नए रूटीन में ढलने के लिए मुझे पूरा एक साल लग गया. पर अब मैंने अपने खालीपन का इलाज ढूंढ़ लिया है, अब मैं घर पर ट्यूशन पढ़ाती हूं.

जिन शुरुआती दिनों की बात श्रीमती जोशी कर रही हैं, वह उनका ङ्गट्रांज़िशन पीरियडफ है. इस समय सबसे ज़रूरी है, समय के बहाव के साथ बहना. अपने साथ किसी तरह की ज़बर्दस्ती ना करें. ख़ुद को समय दें. धीरे-धीरे आप ख़ुद ही नई परिस्थिति में ढल जाएंगी.
श्रीमती लिमये की सरकारी नौकरी थी. वो कहती हैं कि रिटायरमेंट मुझे कभी भी मुश्किल नहीं लगा. मैं बहुत सकारात्मक सोचवाली महिला हूं. मुझे लगता है कि सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आपके सोचने का तरीक़ा कैसा है. मैंने पहले ही अपना रिटायरमेंट प्लान किया हुआ था, इसलिए मेरे लिए यह बदलाव कोई अचानक आया हुआ बदलाव नहीं था. मैंने पहले ही तय कर लिया था कि मुझे रिटायरमेंट के बाद अपने दिन कैसे बिताने हैं. मैंने जो भी अपनी नौकरी से सीखा, उसे रिटायरमेंट के बाद अपने निजी जीवन में उपयोग में लाया. मेरे दोनों ही बच्चों की शादियां हो चुकी हैं. मेरा दिन हमउम्र सहेलियों के साथ घूमने और भजन-कीर्तन में कटता है. मैं बहुत आध्यात्मिक हूं और अध्यात्म ही मुझे जीवन की हर कठनाई से लड़ने की शक्ति देता है.

रिटायरमेंट के लिए क्या है ज़रूरी?

  • श्रीमती लिमये ने अपने रिटायरमेंट को आसान बनाया और अब जीवन को सुकून से जी रही हैं. ऐसे ही जीवन के हर मोड़ पर प्लानिंग बहुत ज़रूरी है.
  •  आज जीवनशैली और सामाजिक संरचना में काफ़ी बदलाव आए हैं, तो उस हिसाब से हमें भी अपनी सोच को
    बदलना होगा.
  •  आज हो सकता है कि आपके रिटायरमेंट के बाद आपके बच्चे या नाती-पोतेे आपको समय ना दे पाएं, या फिर वे आपके साथ भी ना रह पाएं, तो उसमें उनको दोष ना दें, क्योंकि हो सकता है कि वाकई उनके पास समय का अभाव हो.
  •  डॉ. केहाली बताती हैं कि यह हमेशा ध्यान में रखें कि आप अपने जीवन में जो भी क़दम उठाती हैं, वह आप स़िर्फ अपने लिए उठा रही हैं, दूसरों के लिए अपने जीवन के निर्णय ना लें. तात्पर्य यह है कि अगर आप को अपनी नौकरी छोड़नी है, तो अपने लिए छोड़िए, यह मत कहिए कि आपने नौकरी बच्चों के लिए या फिर पति के लिए या फिर घर के लिए छोड़ी है, क्योंकि आपको ऐसा लगता है कि बच्चों को आपकी ज़रूरत है, पर हो सकता है कि ऐसा ना हो.
  •  दूसरी मुख्य बात यह है कि हमेशा ध्यान रखें कि एक आत्मनिर्भर मां अपने बच्चों को भी आत्मनिर्भर ही बनाएगी, तो सेवानिवृत्ति के बाद यह सोचना कि बच्चे हर छोटी बात के लिए आप पर निर्भर होंगे, यह ग़लत है. बदलाव आपके जीवन में आया है,
    दूसरों के नहीं.
  • ख़ुद को समय दीजिए, अपनी सोच को सकारात्मक रखिए.

कैसे लड़ें रिटायरमेंट ब्लूज़ से?

  •  रिटायरमेंट के कुछ समय पहले से ख़ुद को उसके लिए तैयार करें.
  •  रिटायरमेंट को अपने जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत बनाएं. यह अंत नहीं है.
  •  कल बिताए हुए समय के लिए अपने आज को दांव पर ना लगाएं अर्थात् अपने अस्तित्व को अपने काम से जोड़कर ना रखें.
    ऑफिस के बाहर भी अपना सामाजिक सर्कल रखें. ऑफिस के अलावा भी अपने मित्र बनाएं.
  • रिटायरमेंट के बाद भी अपने आपको किसी ना किसी काम में व्यस्त रखें, जैसे- बच्चों को पढ़ाना, संगीत या ऐसी ही किसी हॉबी में ख़ुद का समय व्यतीत करना.
  •  अपने अकेलेपन के लिए किसी और को दोषी ना ठहराएं. इसकी जगह दूसरों की व्यस्तताओं को समझने का प्रयत्न करें.
    ख़ुद को किसी एनजीओ या संस्था से जोड़ें. हमउम्र लोगों के साथ समय व्यतीत करें.

अगर इन सबके बावजूद आपकी मानसिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आ रहा है, तो एक बार किसी मनोवैज्ञानिक से मिलने में कोई बुराई नहीं है. आपका जीवन आपका अपना है. आपकी अहमियत, आपकी महत्ता किसी नौकरी से जुड़ी नहीं है, बल्कि आपकी सकारात्मक सोच से जुड़ी है, तो अपने पंखों को पूरा खोलिए, जो आज तक कई बंधनों से जकड़े थे और सकारात्मक सोच की हवा में अपने आसमान पर जी भरकर उड़ान भरिए.

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प्लेसमेंट के चक्कर में गुमराह तो नहीं हो रहे आप? (Placement in the affair are not misleading you?)

misleading you

 

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अच्छे करियर की तलाश में अक्सर स्टूडेंट्स इंस्टीट्यूट का चुनाव करते वक़्त उसकी चकाचौंध में ये भूल जाते हैं कि उन्हें आगे करना क्या है? कौन-सी जगह उनके भविष्य निर्माण के लिए सही साबित होगी? कैसे बचें इस तरह के प्रलोभन से और कैसे अपने करियर को सही दिशा दें? जानने के लिए हमने बात की करियर काउंसलर फ़रज़ाद दमानिया से.

अपनी क्षमता को पहचानें
पढ़ाई करते समय अक्सर बच्चों के दिमाग़ में ये बैठ जाता है कि वे बहुत ज़्यादा समझदार और क़ाबिल हैं. उनकी क्षमता बहुत कुछ करने और पाने की है. ऐसे में वे ख़ुद को ग़लत आंकने की भूल कर बैठते हैं और अपनी क्षमता के विपरीत ऐसी जगह दाखिला ले लेते हैं, जहां उन्हें नहीं होना चाहिए. अतः किसी भी तरह के प्रलोभन में पड़ने की बजाय अपनी क्षमता के अनुरूप ही इंस्टीट्यूट का चुनाव करें.

अच्छा कॉलेज या अच्छा कोर्स
सबसे पहले अपने लक्ष्य को जानें कि आपको क्या करना है और उसके लिए सही जगह कौन-सी है? फिर वहीं एडमिशन लेने की सोचें. किसी भी संस्थान में दाखिला लेने से पहले वहां के फैकल्टी मेंबर्स के बारे में सही जानकारी लें. आप जो कोर्स करना चाहते हैं, क्या वो उस संस्थान में दूसरे संस्थान की अपेक्षा बेहतर है? साथ ही पढ़ाई के मामले में उस संस्थान के बारे में पूछताछ करना न भूलें.

पैरेंट्स की सलाह ज़रूर लें
अक्सर 10वीं/12वीं के बाद बच्चे अपनी आगे की पढ़ाई के लिए पैरेंट्स से सलाह लेना ज़रूरी नहीं समझते. उन्हें लगता है कि आज के मार्केट के हिसाब से उनके माता-पिता उन्हें सलाह देने में सक्षम नहीं हैं, जबकि बच्चों की क्षमता को पैरेंट्स अच्छी तरह समझते हैं. उन्हें पता होता है कि उनका बच्चा क्या कर सकता है? ऐसे में आगे की पढ़ाई के लिए अपने पैरेंट्स से सलाह लेने में कभी पीछे न हटें.

अपनी रुचि के अनुसार चुनें विषय
आमतौर पर 12वीं के बाद ही करियर की दिशा निर्धारित होती है. ऐसे में हड़बड़ाहट या फिर किसी तरह के दबाव में आकर विषय का चुनाव न करें. स्वेच्छा से अपनी रुचि के अनुसार आगे की पढ़ाई के लिए विषयों का चुनाव करें. उदाहरण के तौर पर अगर आप साइंस पसंद नहीं करते, तो उस तरह की विधा में आगे जाने के बारे में न सोचें.

प्रोफेशनल काउंसलर की सलाह लें
अगर आप सही निर्णय लेने में असमर्थ हैं, तो जल्दबाज़ी में किसी भी संस्थान में दाख़िला न लें. इस समय आप किसी अच्छे काउंसलर की मदद ले सकते हैं. काउंसलर को अपने बारे में पूरी तरह सही जानकारी दें और सभी इंस्टीट्यूट्स के बारे में भी बताएं. इससे आपकी परेशानी सुलझाने में काउंसलर को मदद मिलेगी.

दोस्त की देखादेखी न करें
करियर काउंसलर फ़रज़ाद दमानिया कहते हैं, ङ्गङ्घकरियर और दोस्ती दोनों को अलग रखें. दोस्तों से दोस्ती वहीं तक रखें जहां तक ज़रूरत है. अब तक आप हर चीज़ अपने दोस्त की तरह लेते थे, लेकिन अब बात आपके करियर की है. जितना सही निर्णय लेंगे भविष्य में आपको उतना ही फ़ायदा होगा. बिना किसी झिझक और शर्म के अपने आगे के करियर का चुनाव करें. कभी भी किसी दोस्त के अनुसार अपना लक्ष्य निर्धारित न करें. इससे भविष्य में आपको हर पल मुंह की खानी पड़ेगी.फफ

इंस्टीट्यूट के बाहरी दिखावे में न आएं
उम्र के इस पड़ाव पर अर्जुन की तरह स़िर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान दें. आपको क्या करना है और कहां से करना है? इसका आभास आपको होना चाहिए. आज सभी इंस्टीट्यूट स्टूडेंट्स को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन देते हैं. दूसरे संगठन की अपेक्षा ज़्यादा से ज़्यादा स्टूडेंट्स की भर्ती को लेकर वो कई बार ऐसे झूठे वादे और दिखावे करते हैं, जिनका पता आपको पढ़ाई के एक या दो साल बाद लगता है. ऐसे में आप पूरी तरह से उनकी जाल में फंस जाते हैं और आपके पास पछतावे के सिवाय और कुछ नहीं रहता. अतः करियर में आगे बढ़ने के लिए ऐसे दिखावे में न पड़ें.

प्लेसमेंट के चक्कर में कभी न पड़ें
अगर आप क़ाबिल हैं तो आपको नौकरी की चिंता कैसी? अगर आप जानते हैं कि आपकी क्षमता कम है, तो फिर प्लेसमेंट के चक्कर में क्यों पड़ते हैं? आज आपने ज़्यादा पैसे देकर प्लेसमेंट के चक्कर में दाख़िला तो ले लिया, लेकिन क्या कभी सोचा है कि जब बाहरी कंपनियां एक क़ाबिल और सक्षम कर्मचारी की ख़ोज में कैंपस सलेक्शन करने आएंगी, तो आपका चुनाव कर पाएंगी? करियर के इस पड़ाव पर ख़ुद को इस भुलावे में न रखें. किसी भी संगठन के प्लेसमेंट ऑफर में पड़कर वहां दाखिला कतई न लें.

ये भी जानें:

  •  उस संगठन के बारे में अच्छी तरह से छानबीन करें.
  • किसी पुराने बैच के स्टूडेंट्स से संपर्क करें और पढ़ाई के बारे में जानने की कोशिश करें.
  •  मार्केट में उस संस्थान की क्या एहमियत है उसको भी जानने की कोशिश करें.
  •  प्लेसमेंट के झांसे में न आएं.
  •  कभी भी अपनी क्षमता को अनदेखा न करें.
  •  संस्था के फैकल्टी मेंबर्स के बारे में पहले से ही जानें.
  •  यूजीसी के तहत वो संस्था रजिस्टर्ड है या नहीं, ये भी जानें.
  •  संस्था के पुराने बच्चे कहां कार्यरत हैं, ये भी जानने की कोशिश करें.
  •  गेस्ट फैकल्टी मेंबर्स की भी जानकारी रखें.
  •  स्टडी आवर्स और छुट्टियों की जानकारी लें.

– श्वेता सिंह 

बैंक मित्र बनकर बैंकिंग में बनाएं करियर (Choose A Career As Bank Mitra)

rबैंक मित्र कैसे बनें?

आप चाहे युवा हों या रिटायर्ड एम्प्लाई, यदि आप भी पैसा कमाना चाहते हैं, तो बैंक मित्र की नौकरी आपके लिए बेहतरीन अवसर है. इसमें प्रधानमंत्री जन-धन योजना से जुड़कर यानी बैंक मित्र बनकर आप पैसा कमा सकते हैं. बैंक मित्र यानी बैंकिंग कॉरस्पॉन्डेंट वे लोग होते हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध करवाने का ज़िम्मा दिया गया है. ख़ासतौर पर ये लोग उन जगहों पर कार्य करते हैं, जिन जगहों पर न तो किसी बैंक की शाखा है और न ही कोई एटीएम. ऐसे में येे लोग आम ज़रूरतमंदों तक पहुंचकर प्रधानमंत्री योजना से संबंधित जानकारी से लेकर आपको धन राशि पहुंचाने तक का काम करते हैं. 
आइए, इससे जुड़ी अन्य बातों के बारे में जानें-
  •  बैंक मित्र को न्यूनतम 5000 रुपए तक की फिक्स्ड सैलेरी मिलेगी.
  •  इसके अलावा अकाउंट में लेन-देन पर अलग से कमीशन भी मिलेगा.
  •  बैंक मित्र बनने पर आपके लिए अलग से एक कर्ज़ स्कीम भी तैयार की गई है.
  • इसमें बैंक आपको कंप्यूटर, कार या फिर अन्य वाहन आदि ख़रीदने के लिए सवा लाख तक लोन भी देगा.
  •  इसमें 50 हज़ार उपकरण के लिए, 25 हज़ार कार्यशील पूंजी व अ 50 हज़ार वाहन का कर्ज़ मिलेगा.
  •  इसके लिए उसे 35 महीने से लेकर 60 महीने तक का समय मिलेगा.
  •  कर्ज़ के लिए 18 से लेकर 60 साल तक की उम्र के लोग पात्र होंगे.
  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत बैंक खाता खोलनेवाले बैंक मित्र को सर्विस टैक्स नहीं देना होगा.
  •  सरकार ने जन-धन के खाताधारकों को धनराशि जमा करने या निकासी की सुविधा देनेवाले बैंक मित्रों को सेवा कर के दायरे से मुक्त कर दिया है.
  • जो भी बैंक मित्र किसी भी बैंक की ओर से ग्रामीण क्षेत्र में बैंकिंग सुविधा देंगे, उन्हें इसके लिए सेवा कर नहीं देना होगा.
  •  मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने यह क़दम अधिकाधिक संख्या में लोगों को बैंकिंग से जोड़ने की कोशिशों के तहत उठाया है.
  •  बैंक मित्र आमतौर पर अपने ग्राहकों को खाता खोलने, पैसा जमा करने या निकालने, ई-लाइफ सर्टिफिकेट देने व खाते को आधार नंबर से जोड़ने का काम करते हैं.

कौन-कौन बैंक मित्र बन सकते हैं?

  • दसवीं तक पास होने के साथ-साथ कंप्यूटर की बेसिक नॉलेज हो, तो कोई भी वयस्क बैंक मित्र बन सकता है.
  • इसके अलावा रिटायर्ड हो चुके बैंक एम्प्लाई, शिक्षक, बैंक व सैनिक भी इसे रोज़गार के रूप में अपना सकते हैं.
  • साथ ही केमिस्ट शॉप, किराना शॉप, पेट्रोल पंप, स्वयं सहायता समूह, पीसीओ, कॉमन सर्विस सेंटर आदि भी बैंक मित्र के रूप में काम कर सकते हैं.
  • यदि आप बैंक मित्र बनने के इच्छुक हैं, तो इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने नज़दीकी बैंक की शाखा से संपर्क करें.

बैंक मित्र कैसे बनें?

  • इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करें. आवेदन करने के लिए www.egram.org/apply पर जाकर व ऑनलाइन फॉर्म भरें.
  •  फॉर्म में दिए गए बैंकों में से अपने क्षेत्र में कार्यरत बैंक को चुनें व दी गई जानकारी पढ़ें.
  • ऑनलाइन आवेदन पूरा होने पर आपका आवेदन प्राथमिक वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाएगा.
  • वेरिफिकेशन के अंत में आपको ईमेल से आवेदन का कंफर्मेशन दिया जाएगा.
  • अब आपका आवेदन चुनिंदा बैंक व बीसी (बिज़नेस कॉरस्पॉन्डेंट) को भेजा जाएगा.
  • बीसी आपका रजिस्ट्रेशन प्रोसेस शुरू करेंगे और इस दौरान आपकी चुनी हुई शाखा में आपको डॉक्यूमेंट्स इंट्रोडक्शन के लिए जाना होगा.

बैंक मित्र बनने के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स

कंप्यूटर से एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड करें.

  • आईडी प्रूफ (पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट, इलेक्शन कार्ड).
  • रेसिडेंशियल प्रूफ (इलेक्ट्रिक बिल, टेलीफोन बिल, आधार कार्ड,  इलेक्शन कार्ड).
  • बिज़नेस एड्रेस (इलेक्ट्रिक बिल, टेलीफोन बिल, राशन कार्ड, आधार कार्ड, इलेक्शन कार्ड).
  • एजुकेशन प्रूफ- दसवीं की मार्कशीट.
  • कैरेक्टर सर्टिफिकेट- पुलिस वेरिफिकेशन.
  • पासबुक कॉपी/कैंसल्ड चेक- कमीशन अकाउंट डिटेल्स के लिए पासपोर्ट साइज़ दो फोटो.

क्या-क्या कार्य करने होंगे?

  • प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत बचत और दूसरी सुविधाओं के बारे में लोगों को शिक्षित करना और जागरूकता फैलाना.
  •  सेविंग्स और लोन से संबंधित बातों के बारे में जानकारी और सलाह देना.
  •  ग्राहकों की पहचान करना.
  •  प्राथमिक जानकारी, आंकड़े इकट्ठा करना, फॉर्म को संभालकर रखना.
    लोगों द्वारा दी गई जानकारी को चेक करना.
  •  खातेदार द्वारा दी गई राशि को संभालकर जमा करवाना.
  •  आवेदन और खातों से संबंधित फॉर्म भरना.
  •  राशि का समय पर भुगतान और जमा करने का कार्य करना.
  • किसी की तरफ़ से आया हुआ पैसा सही हाथों तक पहुंचाना और उसकी रसीद बनाने का काम करना.
  • खातों और अन्य सुविधाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध करवाना.

बैंक मित्र बनने के लिए ज़रूरतें

  • कंप्यूटर
  • इंटरनेट कनेक्टिविटी
  • प्रिंटर
  •  कम से कम 100 स्क्वेयर फीट ऑफिस की जगह.

जहां बैंक नागरिकों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान नहीं कर सकते, उन स्थानों पर बैंक मित्र एक एजेंट के रूप में कार्य कर रहा है. आज बैंक मित्र मूल रूप से बैंकों के प्रतिनिधि की तरह काम करता है और प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खाता खोलने में सभी प्रकार की सहायता प्रदान करता है. तेज़ी से तरक़्क़ी की ओर जा रहे देश के विकास में सुदूर इलाकों की बैंकिंग व्यवस्था मील का पत्थर साबित होगी. ऐसे में बैंकों के सेवा केंद्रों के माध्यम से लोगों को बैंक से जोड़ रहे बैंक मित्रों का योगदान सराहनीय है. समाज के निचले वर्ग के लोगों को बैंक से जोड़ने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे बैंक मित्रों का भविष्य काफ़ी उज्ज्वल है. बैंक मित्र न केवल राष्ट्र निर्माण में ख़ास भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि स्वयं के लिए स्व रोज़गार भी पैदा कर रहे हैं.

 

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