joint pain

पहले उम्र बढ़ने के बाद जोड़ों का दर्द होता था, लेकिन अब कई लोगों में कम उम्र से ही यह समस्या शुरू हो जाती है, जिसके कारण उठने-बैठने, लंबे समय तक चलने या खड़े रहने से दर्द बढ़ जाता है. ऐसे में जोड़ों के दर्द के 20 घरेलू उपाय आपको दर्द से देंगे तुरंत राहत.

Home Remedies for Joint Pain

जोड़ों के दर्द में अपनाएं ये 20 घरेलू नुस्ख़े

1) अजवायन या नीम के तेल से मालिश करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलेगा.
2) पानी में एक मुट्ठी अजवायन और 1 बड़ा चम्मच नमक डालकर उबालें. उस पर जाली रखकर कपड़ा निचोड़कर तह करके गरम करें और उससे सेंक करें. दर्द दूर हो जाएगा.
3) राई का लेप करने से भी हर तरह का दर्द दूर होता है.
4) अजवायन को पानी में डालकर पका लें और उस पानी की भाप को दर्द वाली जगह पर दें. देखते ही देखते दर्द छूमंतर हो जाएगा.
5) लहसुन की दो कलियां कूटकर तिल के तेल में गरम करें और इससे जोड़ों पर मालिश करें. बहुत लाभ होगा.
6) दर्द से परेशान होने पर कपड़े को गरम करके जोड़ों पर सेंक कर करें. इससे बहुत आराम मिलता है.

Home Remedies for Joint Pain

7) कनेर की पत्ती उबालकर पीस लें और मीठे तेल में मिलाकर लेप करें.
8) लहसुन पीसकर लगाने से बदन के हर अंग का दर्द छूमंतर हो जाता है, लेकिन इसे ज़्यादा देर तक लगाकर न रखें, वरना फफोले पड़ने का डर रहता है.
9) कड़वे तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर उस तेल की मालिश करने से हर तरह के दर्द से छुटकारा मिलता है.
10) विनेगर और जैतून के तेल को मिलाकर मालिश करें.
11) कपड़े में 4-5 नींबू के टुकड़े बांधकर गरम तिल के तेल में थोड़ी देर डुबोएं. फिर उसे घुटनों पर लगाएं.
12) राई को पीसकर घुटनों पर उसका लेप करें. तुरंत आराम मिलेगा.

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Home Remedies for Joint Pain

13) अजवायन को पानी में उबालकर उसकी भाप घुटनों पर लेने से दर्द से राहत मिलेगी.
14) सेंधा नमक को गुनगुने पानी में डालकर नहाएं.
15) दालचीनी पाउडर और शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं. इससे जोड़ों पर मालिश करें.
16) जोड़ों के दर्द में नीम के तेल की मालिश लाभदायक होती है.
17) लहसुन की दो कलियां कूटकर तिल के तेल में गर्म करके जोड़ों पर मालिश करें.
18) सरसों के तेल में अजवायन और लहसुन गरम करके दर्दवाले भाग पर मालिश करें.

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Home Remedies for Joint Pain

19) अमरूद के पत्ते पीसकर दर्द वाले स्थान पर लगाएं. अमरूद के पत्ते पानी में उबालकर इस पानी से सिकाई करने से भी लाभ मिलता है.
20) कांच की बॉटल में आधा लीटर तिल का तेल और 10 ग्राम कपूर मिलाकर धूप में रख दें. जब ये दोनों घुलकर एक हो जाएं, तो इस तेल से मालिश करें. जोड़ों के दर्द से आराम मिलेगा.

चाहे कमरदर्द, पीठदर्द या ज्वाइंट पेन- हमेशा पेनकिलर्स लेने से बेहतर है कि कुछ और तरीका ट्राई करें, इससे दर्द से तो राहत मिलेगी ही, इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होगा.

बैक पेन

  • बैक पेन होने पर सबसे ज़रूरी है कंप्लीट बेड रेस्ट. जितना कम मूवमेंट होगा, आराम उतना ही जल्दी होगा. तो बेहतर होगा कि बैक पेन होने पर दो-तीन दिन बेड रेस्ट करें. साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि बेड थोड़ा फर्म हो.
  • न सीधे सोएं और ना ही पेट के बल. इससे आपके बैक पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ेगा,
  • सोने की बेस्ट पोज़ीशन है करवट लेकर घुटने मोड़कर सोना. अगर ज़रूरी लगे तो एक तकिया सिर के नीचे और एक दोनों घुटनों के बीच रखें.
  • बेड से उठते समय भी थोड़ा केयरफुल रहें. एकदम झटके से और सीधे न उठें. पहले करवट लेकर कुछ सेकंड इसी पोज़ीशन में रहें, फिर धीरे से उठें.
  • बार-बार झुकने से बचें. वज़न उठाने से भी बचें. सीटिंग पोश्‍चर का ख़ास ख़्याल रखें.
  • एक ही पोजीशन में ज्यादा समय तक खड़े होने या बैठने से भी बचें. अगर आप ऑफ़िस में काम करती हैं तो हर 45 मिनट पर ब्रेक लें.
  • दिनभर में दो-तीन बार बर्फ से सेंकें. गर्म पानी से सेंक भी फायदेमंद होता है.
  • किसी मसाज थेरेपिस्ट से मसाज करवाएं. इससे आप काफी रिलैक्स फील करेंगे.
  • फुटवेयर बदलें. कई बार ग़लत फुटवेयर भी बैक पेन की वजह बन जाता है.
  • दर्द ज़्यादा हो, तो डॉक्टर की सलाह पर पेनकिलर लें.
  • फिज़ियोथेरेपिस्ट से मिलकर कुछ एक्सरसाइज़ सीखें और नियमित रूप से ये एक्सरसाइज़ करें. एक्सरसाइज़ से आपको काफी राहत मिलेगी.
    ये होम रेमेडीज़ ट्राई करें
  • नीम की नरम पत्तियों को तोड़कर उसका काढ़ा बना लें. फिर रुई या साफ़ कपड़ा हल्के गरम काढ़े में भिगोकर पीठ के दर्द वाले स्थान पर सेंक करें.
  • 100 ग्राम अजवायन का चूर्ण और 100 ग्राम गुड़ एक साथ मिलाकर रख लें. 5-5 ग्राम यह चुर्ण सुबह-शाम लेने से कमर दर्द दूर होता है.
  • सुबह उठकर खाली पेट लहसुन की दो कलियां खाएं. आप रोज़ लहुसन के तेल मालिश भी कर सकते हैं.

घुटने में दर्द

Pain Relief Technique
  • भोजन में दालचीनी, जीरा, अदरक और हल्दी का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करें. इससे घुटनों की सूजन और दर्द कम होता है.
  • मेथी दाना, सौंठ और हल्दी बराबर मात्रा में मिला कर तवे या कढ़ाई में भून कर पीस लें. रोजाना एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम भोजन करने के बाद गर्म पानी के साथ लें.
  • सुबह खाली पेट दही के साथ लहसुन की एक कली खाएं.
  • हल्दी चूर्ण, गुड़, मेथी दाना पाउडर और पानी सामान मात्रा में मिलाएं. थोड़ा गर्म करके इनका लेप रात को घुटनों पर लगाएं और पट्टी बांधकर सो जाएं.
  • अलसी के दानों के साथ दो अखरोट की गिरी सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.
  • गेहूं के दाने के आकार का चूना दही या दूध में घोलकर दिन में एक बार खाएं. इसे 90 दिन तक लेने से दर्द में आराम आ जाता है.
  • खाने के एक ग्रास को कम से कम 32 बार चबाकर खाएं. इससे कुछ ही दिनों में घुटनों में साइनोबियल फ्लूइड बनने लगता है, जिससे घुटनों की तकलीफ में आराम आता है.
  • पूरे दिन भर में कम से कम 12 गिलास तक पानी अवश्य पीएं. ध्यान रखें, कम पानी पीने से भी घुटनों में दर्द बढ़ जाता है.
  • भोजन के साथ अंकुरित मेथी का सेवन करें.
  • एक्यूप्रेशर-रिंग को दिन से तीन बार, तीन मिनट तक अनामिका एवं मध्यमा उंगली पर एक्यूप्रेशर करें.
  • सुबह-सुबह दौड़ने की आदत डालें. विशेषज्ञों का दावा है कि दिल की तरह ही हमारे पैरों की सेहत भी दौड़ने से बेहतर होती है. दौड़ने से जहां जोड़ों का दर्द खत्म होता है, वहीं सूजन की समस्या भी दूर होती है. घुटने मजबूत बनते हैं.
  • कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर घुटनों को सेकें. दर्द में आराम मिलेगा.

सिरदर्द हो तो

Pain Relief Technique
  • जैसे ही सिरदर्द महसूस हो तुरंत एक्शन लें. कुछ खा या पी लें. अगर लंबे समय से कंप्यूटर के सामने काम कर रहे हों तो छोटा-सा ब्रेक लेकर टहल आएं. इससे दर्द बढने नहीं पाएगा.
  • अगर स्ट्रेस संबंधी सिरदर्द हो तो 10 मिनट की क्विक नींद ले लें. इससे तुरंत आराम मिलता है.
  • एक गहरी सांस लें. थोड़ी देर रुकें. धीरे-धीरे सांस छोड़ें. अब जम्हाई लें. आप तुरंत रिलैक्स महसूस करेंगे.
  • या फिर ब्रिस्क वॉक करें. इससे आपका शरीर एंडॉर्फिन रिलीज़ करेगी, तो नेचुरल पेनकिलर का काम करता है.
  • बालों में अच्छी तरह कंघी करें. ये हेड मसाज का काम करेगा.
  • बर्फ से सेंकना भी फायदेमंद होगा. माथे पर आईब्रो के ऊपर के भा, कनपटी और सिर के टॉप सेंटर को आइस पैक से सेंकने पर इंस्टेंट रिलीफ मिलता है.
  • अगर माइग्रेन है तो थोड़ी देर लाइट्स ऑफ करके अंधेरे कमरे में आराम करें.
    ये होम रेमेडीज़ ट्राई करें
  • सर्दी-ज़ुकाम के कारण सिरदर्द हो तो साबूत धनिया और मिश्री का काढ़ा बनाकर पीने से आराम मिलेगा.
  • तुलसी के पत्तों को पीसकर लेप करने से सिरदर्द में राहत मिलती है.
  • सुबह-सुबह उठते ही खाली पेट सेब पर नमक लगाकर खाने से सिरदर्द में लाभ होता है.
  • सुबह खाली पेट जलेबियां दूध में डालकर खाने से भी सिरदर्द ठीक हो जाता है.

कान में दर्द हो तो

  • हाथों से कानों को कपिंग करें. इसके लिए हथेली से कप बनाकर कानों के पास कपिंग करें. इससे कानों को गर्माहट मिलेगी और दर्द से राहत मिलेगी.
  • डॉक्टर्स कानदर्द में फौरन राहत के लिए ब्लो ड्रायर से कानों को गर्माहट देने की सलाह भी देते हैं. हां कान के पर्दे में होल हो तो ब्लो ड्रायर का इस्तेमाल न करें.
  • अगर तेज़ हवा से कान बंद हो गए हों, तो दोनों नथुनों को अंगूठे और तर्जनी से पकड़ें. मुंह में हवा भरकर मुंह बंद रखें. तेज़ी से हवा छोड़ें.
  • अगर फ्लाइट में टेकऑफ या लैंडिंग के समय कान में तकलीफ होती हो, तो सबसे आसान तरीका है च्युंगम चबाएं. इसके अलावा ध्यान रखें कि टेकऑफ या लैंडिंग के समय ईयरफोन का इस्तेमाल न करें.
  • सरसों का तेल हल्का गर्म करके डालने से कान का दर्द में आराम मिलता है.
  • प्याज़ का रस गुनगुना करके डालने से दर्द में तुरंत आराम मिलता है.
  • अदरक का रस भी गुनगुना करके डालना काफ़ी कारगर होता है.
  • तुलसी के पत्तों को पीसकर रस निकाल लें. इस रस को हल्की आंच पर रखकर थोड़ा गरम करें और कान में डालें.

जॉइंट पेन

Pain Relief Technique
  • जोड़ों के दर्द के लिए वैसे कोई शॉर्टकट फार्मूला नहीं है. हां आप कुछ बातों को ख़्याल रखकर दर्द से राहत पा सकते हैं.
  • सुबह उठने पर जोड़ों में जकड़न ज़्यादा महसूस होती है. इसके लिए बेड से उठने से पहले ही स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें. हाथों-पैरों को स्ट्रेच करें. जोड़ों को स्ट्रेच करें. कमर के लिए भी स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें. इससे जकड़न से राहत मिलेगी.
  • वो ज़माना गया जब जॉइंट पेन होने पर डॉक्टर्स रेस्ट करने की सलाह देते थे. अब डॉक्टर्स कहते हैं कि ज्वाइंट पेन को कम करने के लिए मूवमेंट बहुत ज़रूरी है. इसलिए एक्टिव रहें.
  • वॉकिंग. जॉगिंग और स्वीमिंग आपकी तकलीफ को कम करेगी.
  • वज़न को मेंटेन रखें. बहुत जल्दी बहुत ज़्यादा वज़न घटाने के चक्कर में क्रैश डायट न करें. इससे ऑस्टियोपोरोसिस का ख़तरा बढ़ जाता है.
  • अपने पोश्‍चर पर ध्यान दें. बैठने-उठने का सही पोश्‍चर पता करें. इससे भी आपकी तकलीफ काफी कम होगी.
  • नमक का सेवन कम कर दें. रोज़ाना 6 ग्राम से ज़्यादा नमक का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • अपने डायट में भरपूर मात्रा में कैल्शियम शामिल करें, जैसे दही, कॉटेज चीज़, लो फैट डेयरी प्रोटक्ट्स, बादाम, साल्मन आदि.
  • रिसर्च से पता चला है कि फिश ऑयल कैप्सूल का सेवन करने से आर्थराइटिस की तकलीफ को 33% कम किया जा सकता है.

मसल क्रैम्प आ जाए तो

Pain Relief Technique
  • सबसे आसान तरीका है विपरीत दिशा में स्ट्रेच करें. पैरों के पंजों को स्ट्रेच करें. इससे दर्द में राहत मिलेगी.
  • जहां दर्द है. वहां मसाज करें. वहां हल्के-हल्के मूवमेंट करें.
  • एक हाथ के अंगूठे और तर्जनी से ऊपरी होंठ के एक कॉर्नर पर ज़ोर से चिकोटी काटें. स्किन को हल्का-सा खींचें. ये तरीका भी ज़रूर आजमाएं. दर्द में आराम मिलेगा.
  • नियमित रूप से स्ट्रेचिंग और मसाज आपको मसल क्रैम्प से बचाएगा.
  • रात को सोते समय पैरों के नीचे तकिया रखें. इससे आप रात में अचानक होनेवाले मसल क्रैम्प से बच सकते हैं.

आंखों में तकलीफ होने पर

  • अगर घंटों काम करके आंखें थक गई हों और आंखों में दर्द हो, तो हर आधे घंटे में आंखों को रेस्ट दें.
  • साथ ही कुछ आई एक्सरसाइज़ ट्राई करें. कुछ देर तक दूर डिस्टेंस पर रखी किसी चीज़ को देखें.
  • आंखों पर तीन-चार बार पानी के छींटें मारें. या कोई कूलिंग आई ड्रॉप यूज़ करें. इससे आंखों को तुरंत आराम मिलेगा.
  • साथ में सिरदर्द भी हो, तो एक बार चश्मे का नंबर भी चेक करा लें. चश्मे की फीटिंग सही न हो, तो भी कई बार आंखों को तकलीफ होती है.

एड़ियों में दर्द

Pain Relief Technique
  • सबसे पहले सही फूटवेयर का चुनाव करें. एड़ियों में दर्द का अर्थ है कि आपके चलने की स्टाइल में दोष है या फिर आपको फूटवेयर सही नहीं है. हाई हील या अकंफ़र्टेबल चप्पलों से बचें.
  • ये करें- किसी समतल जगह पर खड़े हो जाएं. एड़ियों पर प्रेशर दें. 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें. दिन में पांच बार ये एक्सरसाइज़ करें.
  • पैरों को बारी-बारी से पहले गर्म और ठंडे पानी में डुबोएं.

अगर आंख में कुछ चला जाए

  • पलकों को जल्दी-जल्दी झपकाएं. इससे छोटा-मोटा कचरा निकल जाएगा.
  • साफ कॉटन या रूमाल का एक कॉर्नर को हल्का-सा गीला करके आंखें पोंछें.
  • अगर पलक झपकाने से कचरा नहीं निकलता है, तो ऊपरी पलकों को हल्का-सा खींचते हुए निचली पलकों के पास ले आएं. इससे आंसू आएगा, लेकिन कचरा निकल जाएगा.
  • एक छोटे बाउल में पानी लें, इसमें पलकों को झपकाने की कोशिश करें.
  • अगर कोई केमिकल या सोप आंखों में चला गया है, तो आंखों पर पानी के छींटें मारें.
  • अगर फिर भी तकलीफ कम न हो या आंखों का कचरा न निकल पाए, तो फौरन डॉक्टर के पास जाएं. इस दौरान आंखें बंद रखें, ताकि आंखों का मूवमेंट कम हो और आपकी आंखों को नुकसान न पहुंचे.
  • अगर आंख पर बॉल या किसी और चीज़ से चोट लग गई हो तो

हम सभी हमेशा जवां रहना चाहते हैं, लेकिन आजकल की दौड़भाग भरी तनाव की ज़िंदगी में कम उम्र में ही हमारी बॉडी शिकायत करने लगती है और हमारे शरीर पर भी बढ़ती उम्र के संकेत तेज़ी से दिखाई देने लगते हैं. लेकिन आप अपने बॉडी क्लॉक को रोककर उसे उल्टा घुमा सकते हैं और अपनी उम्र से 10 साल छोटे नज़र आ सकते हैं.

Fitness

फिटनेस

फिटनेस के लिए हर किसी को, हर उम्र में मेहनत करनी ही चाहिए. यदि आप फिट नहीं हैं, तो आपको कई शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं. आप कितने फिट हैं और फिट रहने के लिए आपको क्या करना चाहिए, आइए हम आपको बताते हैं.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    यदि आप आसानी से 3 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़ जाते हैं और आपकी सांस हल्की-सी फूलने या तेज़ चलने लगती है, तो यह एकदम सामान्य बात है. ऐसा अक्सर हम सबके साथ होता है. सांसों का फूलना हमारे वजन और लाइफ स्टाइल पर निर्भर होता है.
  • असामान्य
    यदि 3 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़ने में आपको एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है, सांस लेने में परेशानी हो रही है, सिरदर्द हो रहा है तो यह चिंता की बात है. इसी तरह आपको यदि 2 मंजिल तक सीढ़ियां उतरने में भी मुश्किल हो रही है, तो यह भी चिंता की बात है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    30 की उम्र में कार्डियोवास्कुलर एक्सरसाइज़ करना बहुत फायदेमंद होता है. इससे मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है जो उम्र बढ़ने की क्रिया को धीमा कर देती है. 40 की उम्र में रेजीस्टेंस एक्सरसाइज़ करना शुरू कर देना चाहिए. इसके साथ-साथ स्केवट्स और प्रेसअप भी करें. इससे हड्डियां मजबूत होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव होता है.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    इस उम्र में जोड़ों में जकड़न होने लगती है. जिससे पहले की तरह तेज़ी से उठना-बैठना, चलना-फिरना नहीं हो पाता जो कि एक सामान्य लक्षण है.
  • असामान्य
    यदि आपको व्यायाम करने या मेहनत के काम करने के बाद चक्कर आने लगते हैं तो यह चिंता की बात है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    रोजाना वॉक करने जाएं. इससे सेहत ठीक रहती है, क्योंकि ताजी हवा आपकी सांसों में जाती है. इसके अलावा टहलने से जोड़ों में लचीलापन बना रहता है और पेट की चर्बी कम होती है. साथ ही ऑस्टियोआर्थराइटिस (जोड़ों का दर्द, जकड़न) से बचाव होता है. यदि आप ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित हैं तो वॉक करने से इसकी तीव्रता कम होती है.
Fitness Tips

जोड़ों का दर्द

जोड़ों का दर्द एक आम समस्या है और ये तकलीफ अब कम उम्र के लोगों को भी होने लगी है. जोड़ों का दर्द से बचने और इससे छुटकारा पाने के लिए आपको अपना बॉडी क्लॉक इस तरह टर्न करना चाहिए.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    इस उम्र में ज़्यादातर लोगों को जोड़ों में लगातार दर्द रहता है या रह रहकर दर्द होता है, साथ ही ज़्यादा काम करने या एक्टिविटी करने से ये दर्द बढ़ जाता है.
  • असामान्य
    आराम करने पर भी दर्द होता है और चलने-फिरने या हिलने-डुलने से भी दर्द होता है. सारी शारीरिक क्रियाएं बंद करने के बाद भी दर्द होता ही रहता है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    अपने वजन को कंट्रोल में रखें. उसे बढ़ने ना दें. याद रखें आपका 1 किलो बढ़ा हुआ वजन जोड़ों पर 4 गुना भार बढ़ा देता है. बैठे रहने की बजाय रोज़ के कामकाज और शारीरिक गतिविधियां करते रहें. एक ही दिन घंटों जिम में पसीना बहाने की बजाय रोजाना थोड़ी-थोड़ी नियमित एक्सरसाइज़ करें या हप्ते में 4-5 दिन जिम जाएं. यदि जोड़ों में बहुत दर्द है, तो डॉक्टर से संपर्क करें.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    जोड़ों में पीड़ा या दर्द होना, जोड़ों से आवाज़ आना सामान्य बात है.
  • असामान्य
    जोड़ों में तेज़ दर्द, लंबे समय तक दर्द, चेतनाशून्यता या पिन चुभोने जैसा दर्द होता है. कई बार दर्द इतना बढ़ जाता है कि इसे दूर करने के लिए अक्सर पेनकिलर लेना पड़ता है.
  • टर्न करें बॉडी क्लॉक
    जोड़ों के लिए वजन कम करना बहुत फायदेमंद है. वजन कम होने से जोड़ों को ज़्यादा भार नहीं उठाना पड़ता. ऐसी डायट फॉलो करें जिससे वजन कम हो सके. बढ़ती उम्र में लंबे समय तक एक्सरसाइज़ करना ठीक नहीं, इसलिए रोजाना लगातार 30 मिनट एक्सरसाइज़ करने की बजाय 30 मिनट के समय को 3-4 भागों में बांट लें, यानी दिन में 3 बार 10-10 मिनट एक्सरसाइज़ करें.

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Fitness Tips

याददाश्त

उम्र के साथ कई लोगों की याददाश्त तेज़ी से कम होने लगती है, कई लोगों को अल्ज़ाइमर जैसी समस्या भी हो जाती है. उम्र के साथ याददाश्त कम होना कब सामान्य है और कब नहीं, आइए जानते हैं.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    हम सबकी भूलने की आदत होती है, जैसे बाज़ार जाने पर किसी चीज़ को खरीदना भूल जाना, फोन नंबर्स का भूलना, बातचीत करते समय जगह या व्यक्ति का नाम भूलना आदि. यदि आप काफी व्यस्त रहते हैं तो यह समस्या और भी बढ़ जाती है.
  • असामान्य
    अपना पता भूलना, चीज़ों को भूलना, ख़ुद को भी भूल जाना चिंता का विषय है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    अपने स्ट्रेस/तनाव को कम करने की कोशिश करें. ऐसे लोगों के साथ रहें जो खुश रहते हैं और आपको भी उनके साथ रहने से ख़ुशी मिलती है. नियमित रूप से योग, ध्यान और एक्सरसाइज़ करें.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    हम देखते हैं कि बुजुर्गों को रोज़मर्रा की चीज़ें भी याद रखना मुश्किल हो जाता है. 70 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते बातचीत करते समय चीज़ों, व्यक्तियों या जगहों के नाम ज़ुबान पर नहीं आते. इन्हें याद करने के लिए ख़ुद को बहुत एकाग्र (कान्सन्ट्रेट) करना पड़ता है.
  • असामान्य
    बुजुर्ग कई बार अपने आपको भूल जाते हैं. अपना नाम, कहां रह रहे हैं? उन्हें कुछ भी याद नहीं रहता. कई बार रिश्तेदारों को भी पहचान नहीं पाते.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    खुद को मन और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए हेल्दी डायट लें. मानसिक रूप से सक्रिय रहें. आसान व्यायाम, योग और ध्यान करें. यदि भूलने की बीमारी ज्यादा बढ़ गई है, तो डॉक्टर से संपर्क करें.
Health Care Tips

सुनने की क्षमता

बढ़ती उम्र के साथ-साथ सुनने की क्षमता भी कम होने लगती है. कई बार ये समस्या इतनी बढ़ जाती है कि इसका ट्रीटमेंट जरूरी हो जाता है. आप अपनी सुनने की क्षमता को ऐसे बढ़ा सकते हैं.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    सुनने में कोई प्रॉब्लम नहीं होती. अलग से कोई लक्षण भी नहीं दिखाई देते.
  • असामान्य
    इसमें कई लक्षण दिखाई देते हैं. कानों में अक्सर भिनभिनाने की आवाज़ या घंटियों की आवाज़ सुनाई देती है. ये लोग दोस्तों या परिवार के सदस्यों से बात करने की अपेक्षा टीवी या रेडियो का वॉल्युम बढ़ा कर सुनते हैं. इन्हें एक बार में लोगों द्वारा कही गई बातें ठीक से सुनाई नहीं देतीं, इसलिए ये उन्हें अपनी बात फिर से कहने के लिए कहते हैं. इन लक्षणों से ज़ाहिर होता है कि सुनने की क्षमता का धीरे-धीरे कम हो रही है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    सुनने की क्षमता को बचाए रखने के लिए शोरगुल वाले स्थानों पर न जाएं. आई पॉड, मोबाइल या साउंड सिस्टम का वॉल्युम ज़्यादा ना बढ़ाएं, ये कानों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है. सुनने की क्षमता बहुत कम हो गई है, तो डॉक्टर को दिखाएं.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    उम्र बढ़ने के साथ-साथ सुनने की क्षमता कम होती जाती है. बैकग्राउंड म्यूजिक वाली जगहों पर, जैसे पब्स, रेस्टोरेंट या किसी कार्यक्रम में आपसी बातचीत ठीक से सुनाई नहीं देती.
  • असामान्य
    अच्छी तरह न सुन पाने का जीवन और लाइफ स्टाइल पर गहरा प्रभाव पड़ता है. इससे व्यक्ति सोशल फंक्शन्स में जाने से कतराने लगता है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    यदि सुनने में बहुत ज़्यादा अड़चन आ रही है, तो हियरिंग टेस्ट करवाएं. डॉक्टर की सलाह के अनुसार हियरिंग ऐड्स (कान की मशीन) लगवाएं. इससे आपको सारी समस्याओं से निज़ात मिल जाएगी.
Health Care Tips

देखने की क्षमता

बढ़ती उम्र का असर हमारी आंखों पर भी पड़ता है और हमारी देखने की क्षमता कम होने लगती है. अपनी देखने की क्षमता को आप इस तरह बेहतर बना सकते हैं.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    30 की उम्र में आंखों की दृष्टि को लगभग स्थिरता प्राप्त हो जाती है और वे हेल्दी होती हैं. 38 से 48 की उम्र के बीच दृष्टि में काफी परिवर्तन आने लगते हैं और आपको चीज़ों को देखने के लिए उन्हें पास या दूर रखना पड़ता है. यही वेकअप कॉल है कि अब आपकी उम्र बढ़ रही है.
  • असामान्य
    चश्मा लगाने पर भी धुंधला दिखना, आंखें लाल होना, आंखों में दर्द होना असामान्य बात है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    40 वर्ष की उम्र तक पहुंचते ही आंखों के डॉक्टर के पास जाएं. आंखों का पूरा चेकअप करवाएं, जिसमें आंखों के नंबर की जांच के अलावा मोतियाबिंद और ग्लूकोमा का भी चेकअप हो. मायोपिया (दूरदृष्टि) को लेसर सर्जरी द्वारा कम किया जाता है, जिससे चश्मा पहनने की आवश्यकता नहीं होती. आजकल बाइफोकल की जगह प्रोग्रेसिव ग्लासेस आ गए हैं, इनसे उम्र का पता नहीं चलता.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    इस उम्र में फ्लोट्रस आना, जिसमें लगता है कि नज़रों को मक्खियां क्रॉस कर रही हैं. कई बार आंखें ड्राई लगने लगती हैं. यही समय है जब आंखों की जांच करवाई जानी चाहिए. इस उम्र में डॉक्टर की सलाह का सख़्ती से पालन करें.
  • असामान्य
    लाइट के फ्लैशेस दिखना, आंखों का लाल होना, आंखों में चुभन, सीधी लाइन का लहराती हुई दिखना गंभीर लक्षण है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    समय-समय पर आंखों का चेकअप करवाते रहें. ऐसा करने से यदि रेटिना की फटन हो रही हो, डार्क स्पॉट हो या अन्य कोई बीमारी हो, तो पकड़ में आ जाती है. इनका समय रहते इलाज करवाने से आंखों की रोशनी बनी रहती है. ड्राई आईज और लाल आंखों के लिए डॉक्टर की सलाह पर आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें.
Health Care Tips

दांतों की समस्या

उम्र बढ़ने के साथ-साथ दांत भी कमज़ोर होने लगते हैं और दांतों की कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं. बढ़ती उम्र में आप अपने दांतों को इस तरह मजबूत बनाए रख सकते हैं.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    कभी-कभार दांतों से ख़ून आना, दांतों में सड़न की शुरुआत, दांतों के इनेमल का कम होना, माइल्ड सेंसिविटी और दांतों का पीला/मलिन पड़ना सामान्य लक्षण हैं.
  • असामान्य
    दांत टूटना, दांतों का हिलना, दांतों में सड़न, मसूड़ों का फूलना या अपनी जगह से सरक जाना, दांतों का घिस जाना और ठंडी या गर्म चीज़ें खाने से दांतों में तेज़ झनझनाहट होना यानी सेंसिविटी होना असामान्य लक्षण हैं.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    दांतों में सड़न की शुरुआत होते ही डेंटिस्ट के पास जाकर दांत साफ करवाएं एवं फिलिंग करवाएं. दांतों की अच्छी तरह देखभाल के लिए दिन में 2 बार ब्रश करें. फ्लॉसिंग (दांतों के बीच की गंदगी निकालने के लिए) एवं नियमित माउथवॉश करें.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    कभी-कभार दांतों की पुरानी फिलिंग का निकाल जाना, मसूढ़ों का अपनी जगह से सरक जाना, इनेमल का नष्ट होना और इससे सेंसिटिविटी का बहुत बढ़ जाना, दांतों का मलीन होना आदि.
  • असामान्य
    दांतों की फिलिंग का नियमित रूप से टूटना या बाहर निकलना, मसूढ़ों में सूजन, ख़ून निकलना, मसूढ़ों का सरकना, जबड़ों के ज्वॉइंट्स में दर्द होना आदि.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    दांतों में फिलिंग करवाएं. सड़े हुए दांत को बचाने के लिए रुट कनाल ट्रीटमेंट करवाएं और उस पर कैप या क्राउन बिठाएं, ताकि फिलिंग बाहर ना निकल सके. सेंसिटिविटी हो तो डॉक्टर की सलाह से सॉफ्ट ब्रश और सेंसिटिविटी टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें. फ्लोराइड माउथवॉश से रिन्स करें.

योग से 10 तरह के दर्द से छुटकारा पाने के लिए के लिए आपको कौन-से योगासन करने चाहिए? इंटरनेशनल योगा डे (International Yoga Day) के ख़ास मौके पर हम आपको बता रहे हैं योग से १० तरह के दर्द से छुटकारा पाने का आसान उपाय.

International Yoga Day

* घुटने के दर्द के लिए 4 योगासन (Top 4 Yoga Poses For Knee Pain)
1) नी रोटेशन-उत्तानासन
2) नी स्ट्रेचिंग-सुलभ उत्तानासन
3) अर्ध तितली आसन-गुल्फ घूर्णन
4) अर्ध कपोत आसन-नी स्ट्रेचिंग

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर बैक पेन (Top 4 Yoga Poses For Back Pain
1) मार्जरासन
2) पूर्व भुजंगासन
3) शलभासन
4) पवनमुक्तासन

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर स्पॉन्डिलाइसिस (Top 4 Yoga Poses For Spondylosis)
1) हैंड इन हैंड आउट ब्रीदिंग
2) प्रसरित चक्रासन
3) शोल्डर रोटेशन
4) एलिफेंट ईयर
5) स्विमिंग स्ट्रोक

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर सर्वाइकल प्रॉब्लम्स (Top 4 Yoga Poses for Cervical Problems)
1) सुखासन-साइड स्ट्रेच
2) दत्त मुद्रा
3) सुलभ वक्रासन
4) सिंह मुद्रा

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर अर्थराइटिस (Top 4 Yoga Poses for Arthritis)
1) गतियामत मेरु वक्रासन
2) चक्कीचालन क्रिया
3) पवनमुक्तासन क्रिया
4) वीरासन-शोल्डर स्ट्रेच

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर मसल्स क्रैम्प (Top 4 Yoga Poses for Muscle Cramps)
1) गटियामत-ताड़ासन-उत्तानासन क्रिया
2) पवनमुक्तासन क्रिया
3) अधोमुख श्‍वानासन-स्ट्रेच
4) पूर्ण तितली आसन

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर साइटिका (Top 4 Yoga Poses for Sciatica)
1) उत्थित एकपादासन
2) सेतुबंधासन
3) पवनमुक्तासन-हिप स्ट्रेच
4) अर्ध शलभासन-शलभासन

 

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर हैप्पी पीरियड्स (Top 4 Yoga Poses For Period Problems)
1) उपविष्ट कोणासन
2) जानुशिरासन
3) पश्‍चिमोत्तानासन
4) बद्धकोणासन
5) प्रसरित पादोत्तानासन

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर माइग्रेन (Top 4 Yoga Poses for Migraine)
1) उत्तानासन
2) प्रसरित पादोत्तानासन
3) अधोमुख वीरासन
4) अधोमुख स्वस्तिकासन

* टॉप 4 योगा पोज़ेज़ फॉर वेरीकोज़ वेन्स (Top 4 Yoga Poses for Varicose Veins)
वेरीकोज़ वेन्स की समस्या में भी कई लोगों को दर्द होता है, ऐसे में ये 4 योगा पोज़ेज़ आपको दर्द से राहत दिलाएंगे:
1) सुलभ जानुशिरासन
2) उत्थित एकपादासन
3) विपरीत कर्णी मुद्रा
4) सपोर्टेड विपरीत कर्णी मुद्रा

 

 

सर्दी का सुहाना मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आता है, ख़ासकर जोड़ों का दर्द, क्योंकि सर्दियों में जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ जाती है. ठंड के मौसम में जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए आज़माएं ये घरेलू उपाय (Home Remedies for Joint Pain).


* अजवायन या नीम के तेल से मालिश करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलेगा.
* पानी में एक मुट्ठी अजवायन और 1 बड़ा चम्मच नमक डालकर उबालें. उस पर जाली रखकर कपड़ा निचोड़कर तह करके गरम करें और उससे सेंक करें. दर्द दूर हो जाएगा.
* राई का लेप करने से भी हर तरह का दर्द दूर होता है.
* अजवायन को पानी में डालकर पका लें और उस पानी की भाप को दर्द वाली जगह पर दें. देखते ही देखते दर्द छूमंतर हो जाएगा.
* लहसुन की दो कलियां कूटकर तिल के तेल में गरम करें और इससे जोड़ों पर मालिश करें. बहुत लाभ होगा.
* दर्द से परेशान होने पर कपड़े को गरम करके जोड़ों पर सेंक कर करें. इससे बहुत आराम मिलता है.
* कनेर की पत्ती उबालकर पीस लें और मीठे तेल में मिलाकर लेप करें.


* लहसुन पीसकर लगाने से बदन के हर अंग का दर्द छूमंतर हो जाता है, लेकिन इसे ज़्यादा देर तक लगाकर न रखें, वरना फफोले पड़ने का डर रहता है.
* कड़वे तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर उस तेल की मालिश करने से हर तरह के दर्द से छुटकारा मिलता है.
* विनेगर और जैतून के तेल को मिलाकर मालिश करें.
* कपड़े में 4-5 नींबू के टुकड़े बांधकर गरम तिल के तेल में थोड़ी देर डुबोएं. फिर उसे घुटनों पर लगाएं.
* राई को पीसकर घुटनों पर उसका लेप करें. तुरंत आराम मिलेगा.
* अजवायन को पानी में उबालकर उसकी भाप घुटनों पर लेने से दर्द से राहत मिलेगी.
* सेंधा नमक को गुनगुने पानी में डालकर नहाएं.
* दालचीनी पाउडर और शहद मिलाकर पेस्ट बनाएं. इससे जोड़ों पर मालिश करें.
* जोड़ों के दर्द में नीम के तेल की मालिश लाभदायक होती है.
* लहसुन की दो कलियां कूटकर तिल के तेल में गर्म करके जोड़ों पर मालिश करें.
* सरसों के तेल में अजवायन और लहसुन गरम करके दर्दवाले भाग पर मालिश करें.
* अमरूद के पत्ते पीसकर दर्द वाले स्थान पर लगाएं. अमरूद के पत्ते पानी में उबालकर इस पानी से सिकाई करने से भी लाभ मिलता है.
* कांच की बॉटल में आधा लीटर तिल का तेल और 10 ग्राम कपूर मिलाकर धूप में रख दें. जब ये दोनों घुलकर एक हो जाएं, तो इस तेल से मालिश करें. जोड़ों के दर्द से आराम मिलेगा.

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पीठदर्द और जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने का घरेलू उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

 

ज्वाइंट पेन (Joint pain) या नी पेन से परेशान हैं तो ट्राई करें ये ईज़ी व इफेक्टिव होम रेमेडीज़ (Home Remedies) और पाएं दर्द से फौरन छुटकारा.

 

Home Remedies for Joint pain

घुटनों का दर्द

 

अगर घुटनों में दर्द उठे, तो हमारा उठना- बैठना और चलना सब कुछ मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कुछ घरेलू उपाय आपको ज़रूर आराम देंगे.
विनेगर: इसके अम्लीय गुणों के कारण यह घुटनों के जोड़ों पर जमा होनेवाले टॉक्सिन को कम करता है और जोड़ों के ल्यूब्रिकेंट को बरक़रार रखता है.
– दो टीस्पून एप्पल साइडर विनेगर को दो कप पानी में मिलाकर रखें. थोड़े-थोड़े समय के अंतराल पर इस मिश्रण का एक-एक घूंट दिनभर पीते रहें.
– पानी में 2 कप विनेगर मिलाकर स्नान करें.
– विनेगर और जैतून के तेल को मिलाकर मालिश करें.
हल्दीः हल्दी में कुरक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है, जो एंटी ऑक्सिडेंट होने के साथ-साथ दर्दनिवारक भी होता है. हाल ही में नेशनल सेंटर फॉर कांप्लीमेंटरी एंड ऑल्टरनेटिव मेडिसीन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हल्दी गठिया रोग होने से रोकती है, जो घुटनों के दर्द का मुख्य कारण है.
– आधा टीस्पून पिसी हुई अदरक और हल्दी को पानी में 10 मिनट तक उबालें और फिर पानी छान लें. इस पानी में शहद मिलाकर पीएं.
– एक ग्लास पानी में हल्दी को उबालकर पीएं.
नींबूः नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड हमारे शरीर में यूरिक एसिड को बढ़ने नहीं देता, जिससे गठिया का ख़तरा काफ़ी कम हो जाता है.
– एक कपड़े में 4-5 नींबू के टुकड़े बांधकर, उसे गर्म तिल के तेल में थोड़ी देर डुबोकर रखें, फिर उस तेल को घुटनों पर लगाएं.

 

एक्स्ट्रा रेमेडीज़

– राई को पीसकर घुटनों पर उसका लेप करें. तुरंत आराम मिलेगा.
– अजवायन को पानी में उबालकर उसकी भाप घुटनों पर लेने से दर्द से तुरंत राहत मिलती है.
– लहसुन को पीसकर दर्दवाली जगह पर लगाने से तुरंत राहत मिलती है, पर याद रहे, इसे ज़्यादा देर तक न रहने दें, वरना फफोले आ सकते हैं.

 

जोड़ों का दर्द

 

आर्थराइटिस या गठिया में जोड़ों में दर्द और सूजन आ जाती है. इससे छुटकारा पाने के लिए आप कुछ आसान से उपाय अपना सकते हैं.

 

सेंधा नमक: यह मैग्नीशियम का बहुत अच्छा स्रोत है. इससे हमारे शरीर में पीएच का संतुलन बना रहता है.
– आधे कप गुनगुने पानी में सेंधा नमक और नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम 1-1 चम्मच पीएं.
– सेंधा नमक को गुनगुने पानी में डालकर नहाएं.
दालचीनीः दालचीनी में कई दर्दनिवारक गुण होते हैं. इसके साथ ही यह कई शारीरिक समस्याओं से भी राहत
दिलाता है .
– एक चम्मच दालचीनी पाउडर और एक चम्मच शहद को एक कप गर्म पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट लें.
– दालचीनी पाउडर और शहद मिलाकर पेस्ट बना लें. इससे जोड़ों पर मालिश करें.
– इन सभी घरेलू उपायों के साथ यह ज़रूर ध्यान में रखें कि यह सभी दर्द आधुनिक जीवनशैली में व्यायाम की कमी और उठने-बैठने व चलने की ग़लत मुद्राओं के कारण होते हैं, इसलिए व्यायाम ज़रूर करें और स्वस्थ रहें. अगर दर्द ज़्यादा हो, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें.

 

एक्स्ट्रा रेमेडीज़

– गठिया रोग में नीम के तेल की मालिश काफ़ी लाभदायक होती है.
– लहसुन की दो कलियां कूटकर तिल के तेल में डालकर गर्म करें. इससे जोड़ों पर मालिश करें. यह बहुत फ़ायदेमंद
उपाय है.
– 2 टीस्पून एरंडी के तेल में थोड़ी-सी सोंठ मिलाकर काढ़ा बनाएं. रोज़ाना सुबह पीएं, जल्द आराम लगेगा.
– सर्दियों में जब दर्द सताए, तो पानी में 2 टेबलस्पून अजवायन और एक टेबलस्पून नमक मिलाकर उबालें. भगोने के ऊपर जाली रखकर कपड़ा रखें और उसी से सेंक करें. फौरन आराम मिलेगा.
– सरसों के तेल में अजवायन और लहसुन गर्म करके दर्दवाले भाग पर मालिश करें, तुरंत राहत मिलेगी.

सिरदर्द, पेटदर्द, जोड़ों का दर्द या फिर किसी भी तरह के दर्द से छुटकारा पाने के लिए पेनकिलर खाने की बजाय अपने घर में नज़र दौड़ाएं, आपको कई नेचुरल पेनकिलर्स नज़र आ जाएंगे. तो अब दर्द न सहें और नेचुरल पेनकिलर्स से अपने दर्द को करें छूमंतर.

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सिरदर्द
नेचुरल पेनकिलर्स: लौंग का तेल, अदरक, ग्रीन टी, दालचीनी पाउडर, तरबूज़ का रस, शहद, नींबू, सेब, नीलगिरी का तेल.
– सिरदर्द मेें लौंग के तेल में थोड़ा-सा नमक मिलाकर माथे पर लगाएं, तुरंत आराम मिलेगा.
– थोड़ा-सा अदरक कूटकर पानी में उबालकर-छानकर पीएं, दर्द से राहत मिलेगी.
– गर्म पानी में ग्रीन टी के साथ आधे नींबू का रस मिलाकर पीएं.
– 2 टेबलस्पून दालचीनी पाउडर में पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं और माथे व कनपटी पर लगाएं.
– अगर गर्मी के कारण सिरदर्द हो रहा हो, तो एक ग्लास तरबूज़ का रस आपको इससे राहत दिला सकता है.
– जिन्हें कई दिनों से सिरदर्द हो, वो रोज़ाना खाली पेट 1 ग्लास पानी में 1 टीस्पून शहद मिलाकर पीएं.
– कभी-कभी खाली पेट गैस होने के कारण भी सिरदर्द होने लगता है, ऐसे में तुरंत नींबू पानी पीएं.
– अगर सुबह उठते ही आपको सिरदर्द होने लगता है, तो खाली पेट एक सेब पर नमक लगाकर खाएं और ऊपर से गर्म पानी पीएं.
– गर्म पानी में कुछ बूंदें नीलगिरी तेल की डालकर भाप लें.
कमरदर्द
नेचुरल पेनकिलर्स: लहसुन, अदरक, कपूर, नारियल तेल.
– जब कमरदर्द सताए, तब नारियल या सरसों के तेल में 8-10 लहसुन की कलियां गरम करके मालिश करें.
– नारियल के तेल में अदरक का रस मिलाकर मालिश करें या देशी घी में सोंठ पाउडर मिलाकर इसका सेवन करें.
– नारियल के तेल में कपूर मिलाकर गर्म करें और एक कांच की बॉटल में भरकर रख लेेंं. रात को सोने से पहले मसाज करें.
– गर्म या ठंडी पट्टी की सेंक भी कर सकते हैं.

पेटदर्द
नेचुरल पेनकिलर्स: अदरक, खानेवाला सोडा, हींग, नींबू, गर्म पानी, अजवायन, दही.
– पेटदर्द में 2-2 टीस्पून अदरक और तुलसी का रस गुनगुने पानी में मिलाकर पीएं. इसके अलावा पिसी हुई सोंठ में थोड़ा-थोड़ा सेंधा नमक और हींग मिलाकर पीने से भी पेटदर्द से तुरंत राहत मिलती है.
– अदरक के रस को पेट पर लगाने से दर्द में आराम मिलता है.
– गुनगुने पानी में नींबू का रस, थोड़ी-सी अजवायन और काला नमक मिलाकर पीएं.
– अदरक के रस में कैस्टर ऑयल मिलाकर पीएं.
– 1 ग्लास गर्म पानी में 1 टीस्पून खानेवाला सोडा मिलाकर पीएं.
– पेटदर्द में हींग बहुत फ़ायदेमंद होता है. एक चुटकी हींग को गर्म करके दूध के साथ लें.
– पेट और सीने में जलन हो रही हो, तो 1 ग्लास गन्ने के रस में 2-2 टीस्पून अदरक का रस और पुदीने का रस मिलाकर लें.
– अगर पेट ख़राब है, तो दही बहुत फ़ायदेमंद है. यह पेटदर्द को ठीक करके आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है.
– पेट में अचानक दर्द होने पर एक टीस्पून अजवायन फांक लें.

कान का दर्द
नेचुरल पेनकिलर्स: लौंग का तेल, प्याज़, तुल सी, लहसुन, नमक, एप्पल साइडर विनेगर, मां का दूध, अदरक, सरसों का तेल.
– कान में दर्द हो, तो लौंग तेल में थोड़ा-सा तिल का तेल मिलाकर कान में डालें, तुरंत आराम मिलेगा.
– कान में दर्द हो, खुजली या त्वचा लाल हो गई हो, तो प्याज़ का रस कान में डालें.
– तुलसी केकुछ पत्तों को पीसकर उसका रस निकालें और 4-5 बूंदें कान में डालें.
– लहसुन की कुछ कलियां, सरसों, नारियल, जैतून या तिल के तेल में गर्म करें और उस तेल की 2 बूंदें कान में डालें. लहसुन की जगह आप अदरक भी ले सकते हैं.
– 1 कप नमक गर्म करके एक कपड़े में बांधकर जिस कान में दर्द हो रहा है, उसे 5-10 मिनट तक सेंकें, तुरंत आराम लगेगा.
– 1 टीस्पून एप्पल साइडर विनेगर में 1 टीस्पून पानी मिलाकर रुई के फाहे में डुबोएं और 5 मिनट के लिए कान में डालें. 5 मिनट बाद रुई
निकालकर कान साफ़ कर लें.
– बड़े या बच्चों को अगर कान में इंफेक्शन के कारण दर्द हो रहा हो, तो मां के दूध की 2-3 बूंदें थोड़ी-थोड़ी देर में कान में डालें.

गले में दर्द
नेचुरल पेनकिलर्स: कच्ची हल्दी, लौंग, नमक, खानेवाला सोडा, शहद.
– गले में दर्द हो, तो कच्ची हल्दी अदरक के साथ समान मात्रा में पीसकर गुड़ मिलाकर खाएं, तुरंत राहत मिलेगी.
– नमक-पानी का गरारा भी नेचुरल पेनकिलर है.
– शहद न स़िर्फ गले की सूजन को कम करता है, बल्कि दर्द का कारण बने टिश्यूज़ की जलन को भी कम करता है. एक कप गर्म पानी में 2-3 टीस्पून शहद मिलाकर पीएं. आप चाहें, तो नींबू का रस भी मिला सकते हैं.
– 1 कप गर्म पानी में 1-1 टेबलस्पून शहद और एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर पीएं.
– 1 ग्लास पानी में डेढ़ टीस्पून खानेवाला सोडा मिलाकर गरारे करें.
– गले में खराश के कारण होनेवाले दर्द से छुटकारा पाने के लिए लौंग चबाकर खाएं.

जोड़ों में दर्द
नेचुरल पेनकिलर्स: लहसुन, अदरक, शहद, दालचीनी पाउडर, हल्दी, मेथीदाना.
– 1 टीस्पून लहसुन के पेस्ट में शहद मिलाकर रोज़ाना दो बार खाने के साथ लें. इसके अलावा लहसुन के पेस्ट को किसी भी तेल में मिलाकर जोड़ों पर लगाने से दर्द
से तुरंत आराम मिलता है.
– जोड़ों में दर्द हो या सूजन या फिर शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हो रहा हो, तो अदरक में 3-4 लहसुन की कलियां और थोड़ा-सा नमक मिलाकर कूट लें. प्रभावित हिस्से पर पेस्ट रखकर प्लास्टिक शीट से ढकें और पट्टी बांध लें. 5-6 घंटे तक
रहने दें.
– आर्थराइटिस के मरीज़ अगर रोज़ाना सुबह खाली पेट शहद में दालचीनी पाउडर मिलाकर चाटें, तो जल्द ही दर्द से छुटकारा मिलता है.
– गर्म दूध में 1-1 टीस्पून हल्दी और शहद मिलाकर पीने से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है.
– मेथीदाना को भूनकर पीस लें. 2 टीस्पून पाउडर में पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं और जोड़ों पर लगाएं. इसके अलावा मेथीदाना को रातभर भिगोकर रखें और सुबह पानी निथारकर दाने चबाकर खा लें.
– पर्याप्त पानी पीएं, यह आपके शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और जोड़ों में किसी तरह का वेस्ट जमा नहीं होने देता.
– कच्चे प्याज़ में मौजूद सल्फर दर्द पैदा करनेवाले एन्ज़ाइम्स को रोक देता है. अपने खाने में कच्चे प्याज़ को ज़रूर शामिल करें.
दांत का दर्द
नेचुरल पेनकिलर्स:हसुन, लौंग का तेल, अदरक, एप्पल साइडर विनेगर, आलू, अमरूद के पत्ते.
– लहसुन के पेस्ट में नमक मिलाकर दांत पर लगाएं या फिर लहसुन की 1-2 कलियां खाएं, आराम मिलेगा.
– दांत में दर्द हो या मसूड़ों की समस्या या फिर मुंह में छाले हो गए हों, बस रूई में थोड़ा-सा लौंग का तेल लगाकर उस जगह पर लगाएं, फास्ट रिलीफ मिलेगा.
– अदरक के रस में सेंधा नमक मिलाकर प्रभावित दांत पर लगाएं, दर्द चला जाएगा या फिर दांतों में अचानक टीस उठ रही हो, तो अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े दांत के नीचे दबाकर रखें.
– रुई के फाहे में एप्पल साइडर विनेगर डुबोकर दांत में दबाकर रखें.
– ताज़े कटे कच्चे आलू के टुकड़े पर नमक लगाकर दांत पर रखें.
– अमरूद के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ले करें.
पीरियड्स का दर्द
नेचुरल पेनकिलर्स: सोंठ, अदरक, शहद, दालचीनी पाउडर, तुलसी, लैवेंडर ऑयल, गर्म पानी.
– पीरियड्स के दौरान होेनेवाले दर्द से निजात पाने के लिए पुराने गुड़ में सोंठ पाउडर मिलाकर काढ़ा बनाकर पीएं.
– 1 ग्लास पानी में अदरक कूटकर डालें. इसे छानकर इसमें शहद और नींबू का रस मिलाएं और पीरियड्स के दौरान दिन में तीन बार यह चाय पीएं.
– पेट में हो रहे मरोड़ को दूर करने के लिए एक कप उबलते हुए पानी में 1 टेबलस्पून तुलसी के पत्ते डालें और ठंडा करके पी लें.
– पीरियड्स के पहले दिन 1 कप गर्म पानी में डेढ़ टीस्पून दालचीनी पाउडर और 1 टेबलस्पून शहद मिलाकर पीएं. दिन में तीन बार ऐसा करें, दर्द में राहत मिलेगी.
– गर्म पानी शरीर में रक्तसंचार को बढ़ा देता है, जिससे दर्द कम हो जाता है, इसलिए इस दौरान गर्म पानी पीएं.

– अनीता सिंह

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