jyotish shastra

इस साल 5 जून से 5 जुलाई तक एक महीने में तीन ग्रहण पड़ने वाले हैं. ये ग्रहण 5 जून, 21 जून और 5 जुलाई को पड़ेंगे. इस बार एक महीने में तीन ग्रहण पड़ेंगे, जिनमें से दो चंद्र ग्रहण और एक सूर्य ग्रहण हैं. जहां तक भारत में ग्रहण के असर की बात है, 5 जून को और 5 जुलाई को जो चंद्र ग्रहण पड़ेगा, वो देशभर में कहीं दिखाई नहीं देगा, इसीलिए इन दोनों ग्रहण के दौरान सूतक काल और वधू पालन करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन 21 जून 2020 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण साल का सबसे बड़ा ग्रहण है और ये सूर्यग्रहण जरूर इतिहास रचने वाला है, इसलिए इस ग्रहण के बारे में आपको संपूर्ण जानकारी होनी जरूरी है. 21 जून 2020 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण हमारे जीवन पर क्या प्रभाव डालने वाला है, इस ग्रहण से किन राशियों को क्या नुकसान और क्या लाभ होने वाला है, इसके बारे में हमने बात की ज्योतिष शिरोमणि पंडित राजेंद्रजी से. इस साल के सबसे बड़े सूर्यग्रहण के बारे में पंडित राजेंद्रजी हमें इस प्रकार विस्तार से पूरी जानकारी दी.

Solar Eclips

भारत में 21 जून को दिखेगा कंकण (चूड़ामणि) सूर्यग्रहण
कंकण (चूड़ामणि) सूर्यग्रहण 21 जून 2020 को सुबह से दोपहर तक संपूर्ण भारत में खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा. उत्तरी राजस्थान, उत्तरी हरियाणा और उत्तराखंड में इस ग्रहण का परमग्रास 994 प्रतिशत रहेगा. 21 जून 2020 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण भारत के अलावा दक्षिणी-पूर्वी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, अफ्रीका, हिंद महासागर, पूर्वी एशिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, वर्मा, फिलीपीन्स में दिखाई देगा. यह कंकण सूर्यग्रहण रविवार के दिन घटित हो रहा है, अतः इसे चूड़ामणि सूर्यग्रहण कहा जाता है. शास्त्रों में इस ग्रहण में स्नान-दान, जप-पूजा-पाठ आदि कार्यों का विशेष महत्व माना जाता है. पवित्र तालाबों, गंगा, हरिद्वार, प्रयागराज आदि पवित्र तीर्थस्थलों पर स्नानादि से विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है.

सूर्यग्रहण 21 जून 2020 का समय
इस सूर्यग्रहण की अवधि- 5 घंटे 48 मिनट 03 सेकंड रहेगी

पृथ्वी पर इस कंकण सूर्यग्रहण का समय
ग्रहण प्रारंभ – सुबह 9 बजकर 15 मिनट 58 सेकंड
कंकण प्रारंभ- सुबह 10 बजकर 17 मिनट 45 सेकंड
परमग्रास (मध्य)- 12 बजकर 10 मिनट 04 सेकंड
कंकण समाप्त– दोपहर 2 बजकर 2 मिनट 17 सेकंड
ग्रहण समाप्त- 3 बजकर 4 मिनट 01 सेकंड

यह भी पढ़ें: क्या होगा जब शनि देव होंगे वक्री? कब होगा कोरोना वायरस का अंत? क्या भारत बनेगा सुपर पावर? (Shani Vakri 11 May 2020: When Will The Coronavirus End? Will India Become Superpower?)

सूर्यग्रहण 21 जून 2020 का 12 राशियों पर होगा क्या असर?
सूर्यग्रहण 21 जून 2020 का यह ग्रहण मृगशिरा और आर्द्रा नक्षत्र मिथुन राशि में घटित होगा. दो तिथि पर गंड व वृद्धि पर भी होगा. लेकिन 21 जून 2020 को पड़ने वाला सूर्यग्रहण साल का सबसे बड़ा ग्रहण है और इसका हर राशि पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा. आइए, हम आपको बताते हैं कि इस सूर्यग्रहण का किस राशि पर क्या असर होने वाला है.

1) मेष
धन के रास्ते खुलेंगे, लाभ होगा.
2) वृषभ
धन की हानि, पैसे से संबंधित चिंता उत्पन्न होगी.
3) मिथुन
दुर्घटना, चोट, भय, चिंता, कलह में वृद्धि हो सकती है.
4) कर्क
शारीरिक पीड़ा हो सकती है, वाहन से बचें.
5) सिंह
चिंता से राहत मिलेगी, नया कार्य मिलेगा.
6) कन्या
रोग बढ़ सकते हैं, कष्ट बढ़ेंगे.
7) तुला
संतान को कष्ट होगा, चिंता उत्पन्न होगी.
8) वृश्चिक
शत्रु बढ़ सकते हैं, बहस से बचें, धन लाभ होगा.
9) धनु
जीवनसाथी को कष्ट हो सकता है, मानसिक चिंता बढ़ेगी.
10) मकर
गुप्त चिंता उभरेगी, शत्रु काम में बाधा डाल सकते हैं.
11) कुंभ
अधिक खर्च होगा, कार्य में परेशानी हो सकती है.
12) मीन
कार्य बढ़ेंगे, धन वृद्धि होगी, नए मकान के योग हैं.

सूर्यग्रहण 21 जून 2020 के दिन करें ये विशेष उपाय, होगी हर मनोकामना पूरी
सूर्यग्रहण 21 जून 2020 के दिन ये विशेष उपाय करने से आप आनेवाली मुसीबत से बच सकते हैं और अपनी हर मनोकामना पूरी कर सकते हैं. इसके लिए कांसे की कटोरी में घी भरकर उसमें चांदी का सिक्का डालकर अपना मुंह देखकर छायापात्र मंत्र पढ़ें. ग्रहण समाप्ति पर ब्राह्मण को वस्त्र, फल, दक्षिणा दान करें. ये उपाय करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है.

यह भी पढ़ें: ज्योतिष के अनुसार ये करेंगे तो बच सकते हैं कोरोना वायरस के प्रकोप से (When Will Coronavirus End In India And Across Globe? What Astrologers Predict?)

ग्रहण काल में क्या करें – क्या न करें

  • जब ग्रहण प्रारंभ हो रहा हो, उस समय से पहले ही स्नान, जप, संकल्प आदि कर लें. मध्यकाल में होम, देव पूजा, पाठ, ग्रहण मोक्ष समीप होने पर दान तथा पूर्ण मोक्ष होने पर पुनः स्नान करना चाहिए.
  • पका हुआ अन्न, कटी हुई सब्ज़ियां आदि ग्रहण काल में दूषित हो जाते हैं इसलिए ग्रहण काल शुरू होने से पहले ही इनका प्रयोग कर लें. तेल, घी, मक्खन, लस्सी, पनीर, अचार, चटनी, मुरब्बा में कुशा रखने से ये ग्रहण काल में दूषित नहीं होते हैं.

ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं क्या करें – क्या न करें
गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में सब्जी न काटें, पापड़ न सेंकें, गुस्से से बचना चाहिए. गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में सोएं नहीं. गर्भवती महिलाओं के अलावा वृद्ध, रोगी, बच्चे भोजन या दवाई का सेवन कर सकते हैं. इसमें कोई दोष नहीं है.

26 दिसंबर 2019 के सूर्यग्रहण के लिए पंडित राजेंद्र जी ने क्या भविष्यवाणी की थी और इस सूर्यग्रहण का आपकी राशि पर क्या असर होगा, जानने के लिए देखें ये वीडियो:

सूर्यग्रहण 21 जून 2020 का क्या होगा असर?
यह सूर्यग्रहण राहु और मंगल के नक्षत्र में होने के कारण अग्नि से भय, दुर्घटना, प्राकृतिक आपदाएं, राजनेताओं को कष्ट, भूकंप, सूखा जैसी विषम परिस्थितियां देखने को मिल सकती हैं. इसके अलावा आंदोलन, फसल को नुकसान, गायों के दूध में कमी, विश्व के राष्ट्र अध्यक्षों के बीच तनाव की स्थिति देखने को मिल सकती है. कपड़े के व्यापारी, फल-फूल का व्यापार करने वाले, लेखक, शराब पीने वाले लोगों के लिए ये ग्रहण शुभ नहीं है. यमुना के निकट के गांववासियों के लिए भी ये समय शुभ नहीं है.

शनि वक्री, गुरु वक्री, बुध वक्री, शुक्र वक्री
चार ग्रहों का वक्री होना, दो नक्षत्र पर ग्रहण, दो तिथियों पर ग्रहण, कुल मिलाकर 21 जून का ग्रहण जरूर कोई इतिहास बनाकर जाएगा. जनता सचेत रहे, जप, हवन, पूजा, ध्यान, सत्संग को प्राथमिकता दे, तो स्थिति ठीक हो सकती है. ईश्वर सबका कल्याण करें, सबकी रक्षा करें.
– कमला बडोनी

यह भी पढ़ें: कोरोनावायरस से बचने के लिए करें ये घरेलू उपाय (10 Home Remedies To Avoid Coronavirus)

अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) के पीछे बहुत सारी मान्यताएं और बहुत सारी कहानियां भी जुड़ी हैं. इसे भगवान परशुराम जन्मदिन यानी परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के अलावा विष्णु के अवतार नर व नारायण के अवतरित होने की मान्यता भी इसी दिन से जुड़ी है. यह भी मान्यता है कि त्रेता युग का आरंभ इसी तिथि से हुआ था. मान्यता के अनुसार इस तिथि को उपवास रखने, दान करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है यानी इस दिन व्रत रखने वाले को कभी भी किसी चीज़ का अभाव नहीं होता, उसके भंडार हमेशा भरे रहते हैं. चूंकि इस व्रत का फल कभी कम न होने वाला, कभी न घटने वाला, कभी नष्ट न होने वाला होता है, इसलिए इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है. अक्षय तृतीया 2020 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मान्यताओं से जुड़ी सभी जानकारी दे रहे हैं पंडित राजेंद्रजी.

Akshaya Tritiya 2020

अक्षय तृतीया 26 अप्रैल 2020: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मान्यताएं

अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त – 05:48 से 12:19
सोना खरीदने का शुभ समय – 05:48 से 13:22
तृतीया तिथि प्रारंभ – 11:51 (25 अप्रैल 2020)
तृतीया तिथि समाप्ति – 13:22 (26 अप्रैल 2020)

अक्षय तृतीया से जुड़ी मान्यताएं

  • माना जाता है कि जो लोग इस दिन अपने सौभाग्य को दूसरों के साथ बांटते हैं, उन्हें ईश्वर की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है. इस दिन दिए गए दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है. सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना से इस दिन शिव-पार्वती और नर-नारायण की पूजा का विधान है.
  • अक्षय तृतीया के दिन दान को श्रेष्ठ माना गया है. चूंकि वैशाख मास में सूर्य की तेज धूप और गर्मी चारों ओर रहती है और यह आकुलता को बढ़ाती है, तो इस तिथि पर शीतल जल, कलश, चावल, चना, दूध, दही आदि खाद्य पदार्थों सहित वस्त्राभूषणों का दान अक्षय व अमिट पुण्यकारी होता है.

यह भी पढ़ें: बच्चों को काला टीका क्यों लगाते हैं, अमृता सिंह ने बेटी सारा अली खान को बुरी नज़र से बचाने के लिए क्यों लगाया काला टीका? (Why Do Indians Put Kaala Teeka On Babies, Why Did Amrita Singh Apply Kaala Teeka To Protect Daughter Sara Ali Khan From Evil Eyes?)

Akshaya Tritiya 2020

अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर जानें मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय

1) लग्न राशि के ‘स्वामी ग्रह’ को करें प्रसन्न
प्रत्येक जातक की एक चन्द्र राशि होती है और इसी तरह कुंडली में जन्म के समय से संबंधित एक लग्न राशि भी होती है. जातक के गुण व व्यवहार को लग्न राशि काफी हद तक प्रभावित करती है. यदि किसी के कार्य नहीं बन पा रहे हैं या आर्थिक रूप से तकलीफ में हैं, तो अपनी लग्न राशि के ‘स्वामी ग्रह’ के अनुकूल रंग की कोई वस्तु अपने साथ जरूर रखें या स्वामी ग्रह के रंग से संबंधित कोई एक छोटा कपड़ा अपने साथ जरूर रखें.

2) अलमारी रखें उचित स्थान पर
धन की अलमारी उत्तर दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार पर अगर लगी हो, तो यह धनवृद्धि में लाभदायक साबित हो सकती है.

3) मुख्य द्वार पर दीपक लगाएं
प्रात: सुबह लक्ष्मीजी का पूजन घर में प्रतिदिन किया जाना चाहिए और सायंकाल घर के मुख्य द्वार पर दाईं ओर एक घी का दीया जरूर जलाना चाहिए. इन दोनों कार्यों से धन की देवी लक्ष्मीजी प्रसन्न होकर व्यक्ति के पास ही रहती हैं.

4) घर के मुख्य द्वार पर गणेशजी का स्वरूप
गणेश भगवान के स्वरूप को घर के मुख्य द्वार पर लगाने से घर में धन संबंधित सभी समस्याओं का अंत होता है और घर में नकारात्मक शक्तियों का भी उदय नहीं हो पाता है.

5) घर में तुलसीजी का पौधा लगाएं
तुलसीजी की सेवा करने से धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है. तुलसी के पौधे पर नियमित रूप से दीपक लगाने और पूजन से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.

6) गोमाता को चारा खिलाएं
नित्य सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर गोमाता को हरा चारा या आटे का भोग लगाने से भी लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं.

यह भी पढ़ें: घर में लाल चींटियों का आना देता है ये शुभ-अशुभ संकेत (Astrology: What Happens When There Are Red Ants In The House)

Akshaya Tritiya 2020

अक्षय तृतीया पर करें 14 तरह के दान, देखें जीवन में चमत्कार

चूंकि तृतीया मां गौरी की तिथि है, इसलिए इस दिन गृहस्थ जीवन में सुख-शांति की कामना से की गई प्रार्थना तुरंत स्वीकार होती है. गृहस्थ जीवन को खुशहाल रखने के लिए इस दिन उनकी पूजा की जानी चाहिए.

अक्षय तृतीया के दिन ये 14 दान हैं महत्वपूर्ण
1) गौ,
2) भूमि
3) तिल
4) स्वर्ण
5) घी
6) वस्त्र
7) धान्य
8) गुड़
9) चांदी
10) नमक
11) शहद
12) मटकी
13) खरबूजा
14) कन्या

अधिकतर लोग छोटे बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए उनके माथे पर, कान के पीछे, हथेली या तलवो पर कला टीका लगाते हैं. क्या वाकई बुरी नज़र लगती है? क्या वाकई बुरी नज़र होती है? कुछ समय पहले सारा अली खान अपने भाई इब्राहिम अली खान के साथ एक प्रमुख पत्रिका के लिए शूट कर रही थी. शूटिंग के समय सारा अली खान और उनके भाई इब्राहिम अली खान के साथ उनकी मां अमृता सिंह भी मौजूद थीं. सारा अली खान और उनके भाई इब्राहिम अली खान ने शूटिंग के लिए सफ़ेद रंग के बहुत ही खूबसूरत कपड़े पहने थे. सारा अली खान सफ़ेद कपड़ों में बहुत खूबसूरत लग रही थी, ऐसे में मां अमृता सिंह ने अपनी बेटी सारा अली खान को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका लगाया था. सारा अली खान, इब्राहिम अली खान और उनकी मां अमृता सिंह की ये फोटो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई थी. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या वाकई बुरी नज़र लगती है? बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका क्यों लगाते हैं? बुरी नज़र से बचने के लिए काला टीका लगाने की मान्यता और सच्चाई के बारे में विस्तार से बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो एक्सपर्ट व न्यूमरोलॉजिस्ट मनीषा कौशिक.

Amrita Singh Sara Ali Khan Ibrahim Ali Khan

बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका लगाने के पीछे ये मान्यता है
आपने अक्सर ये महसूस किया होगा कि जब हम किसी व्यक्ति से मिलते हैं, तो उससे मिलते या बात करते समय हम या तो अच्छा महसूस करते है या कुछ भी महसूस नहीं कर पाते या फिर बहुत बुरा महसूस करने लगते हैं. जिन लोगों से मिलकर हमारा मन खिन्न हो जाता है या हम भारीपन महसूस करने लगते हैं, जिन लोगों को हमारी सफलता से ईर्ष्या होती है, ऐसे लोगों से मिलकर होने वाली खिन्नता और भारीपन को हमारे बुज़ुर्गों ने नज़र लगना कहा है. काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को अपने अंदर समा लेता है, जिससे हम नकारात्मकता से बचे रहते हैं. नकारात्मक ऊर्जा को हमसे दूर रखने के लिए ही हमारे बड़े-बुज़ुर्ग हमें काला टीका या काला धागा बांधने की सलाह देते हैं.

आप भी देखिए सारा अली खान, इब्राहिम अली खान और उनकी मां अमृता सिंह की ये फोटो, जो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई थी.

यह भी पढ़ें: सपने में सिक्के देखने से क्या होता है? जानें सपने में सिक्के दिखने के शुभ-अशुभ संकेत (Dream Analysis: Seeing Coins In Dream)

बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला टीका लगाने के पीछे ये सच्चाई है
संसार में हर वस्तु व हर व्यक्ति के इर्दगिर्द एक ऊर्जा होती है और जितनी तेज़ी से नकारात्मक ऊर्जा फैलती है, उससे कम तेज़ी से सकारात्मक ऊर्जा फैलती है. जब भी हम किसी व्यक्ति के संपर्क में आते हैं, तो उसकी ऊर्जा हमें प्रभावित करने लगती है. अगर व्यक्ति से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है, तो वह ऊर्जा हमारे ऊपर भी भारी मात्रा में हावी होने लगती है. ऐसे लोग हमारी ऊर्जा को नकारात्मकता से प्रभावित कर हमारी ऊर्जा को तो नष्ट करते ही हैं, साथ ही हमारे प्रति बुरे विचार भी रखते हैं. ऐसे ही लोगों की बुरी नज़र हमें लगती है. इसी तरह जब हमें किसी से मिलकर अच्छा लगता है, तो ज़ाहिर-सी बात है कि वो व्यक्ति मन में हमारे लिए अच्छे विचार रखता है. ऐसे लोगों से मिलनेवाली तरंगें हमें अच्छा व मज़बूत बनाती हैं.

यह भी पढ़ें: दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके क्यों नहीं सोना चाहिए? (Sleeping Positions: What Is The Best Direction And Position To Sleep In?)

घर में लाल चींटियों (Red Ants) का आना अशुभ माना जाता है इसलिए हम सब घर में लाल चींटियां देखकर उन पर आटा या हल्दी डालकर उन्हें भगा देते हैं. क्या वाकई घर में लाल चींटियों का आना अशुभ होता है? घर में लाल चींटियां आने से क्या होता है, इसके बारे में बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो एक्सपर्ट व न्यूमरोलॉजिस्ट मनीषा कौशिक.

Red ants

आपने भी अपने घर में कभी न कभी लाल चींटियों को देखा ही होगा. जब बात बारिश के मौसम की आती है तो हम अक्सर अपने इर्दगिर्द घर के कोनो में, दरवाज़ों के किनारे, रसोई घर में इत्यादि जगहों पर चींटियों को पाते हैं. ऐसे में घर में चींटियों को देखते ही हम उन पर हल्दी या आता डालकर उन्हें भगा देते हैं. परन्तु क्या हम कभी यह सोचते हैं कि अचानक चींटियों का झुण्ड हमारे घर में क्यों आने लग गया है? अक्सर मौसम बदलते ही हम अपने घर में चींटियों का झुण्ड देखते हैं. परन्तु बेमौसम अचानक और बार-बार चींटियों का घर में या ऑफिस में दिखना क्या हमें कुछ इशारा करता है? क्या है चींटियों के आने की सच्चाई? घर में सामान्यतः दो प्रकार की चींटियां पाई जाती हैं- एक लाल चींटियां और दूसरी काली चींटियां.

घर में लाल चीटियों के आने से क्या होता है?
ऐसी मान्यता है कि चीटियों का संबंध हमारे ग्रहों में से शनि और राहु से होता है. चीटियों को शुभ-अशुभ मानने से जुड़ी एक कथा भी है. चींटी को श्रीहरि विष्णु का प्रतीक माना जाता है. ये तो हम सभी जानते हैं कि प्रह्लाद को मारने हेतु विभिन्न प्रकारों से सताया गया था. एक बार हिरण्यकश्यप ने कहा कि यदि हरि पर इतना विश्वास है, तो इस दहकते लोहे के खंबे से लिपटकर दिखाओ. ऐसे में प्रह्लाद ने जब अपने आराध्य श्री विष्णु को चींटी के रूप में उस लौह स्तंभ पर घूमते देखा, तो खुशी-खुशी उससे लिपट गए. तपता हुआ लौह स्तंभ शीतल हो गया. ऐसी मान्यता है कि चींटी रूपी नारायण को भोजन कराने से राहु एवं शनि के कोपों का शमन होता है. कई लोग ऐसा भी मानते हैं कि घर में लाल चीटियों का आना अशुभ होता है. साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि चीटियों को आटा डालने से कर्ज़ से मुक्ति मिलती है.

यह भी पढ़ें: सपने में सिक्के देखने से क्या होता है? जानें सपने में सिक्के दिखने के शुभ-अशुभ संकेत (Dream Analysis: Seeing Coins In Dream)

Red ants

घर में लाल चीटियों के आने से होता है ये
एस्ट्रो-टैरो एक्सपर्ट व न्यूमरोलॉजिस्ट मनीषा कौशिक के अनुसार, किसी भी जीव को शुभ-अशुभ से जोड़ना गलत है. लाल चींटियों को अशुभ मानने के पीछे ये वजह हो सकती है कि लाल चींटियों के काटने से बहुत तेज़ दर्द तो होता है और सूजन भी आ जाती है. चींटियां ज़्यादातर खाने की चीज़ों के आसपास ही आती हैं. पुराने ज़माने में लोगों की रसोइयां साधारण होती थीं. रसोई के बर्तन आदि खुले ही रहते थे. ऐसे में नमी के कारण चींटियां रसोई में और खाने की चीज़ों पर आ जाती थीं. काली चींटियां तो अपना भोजन लेकर बिलों में चली जाती थीं, लेकिन लाल चींटियां खाद्य पदार्थों को खराब करने के साथ ही तेज़ काटती भी थीं. लाल चींटियों के काटने के कारण ही उन्हें अशुभ संकेत से जोड़कर देखा जाता है.

यह भी पढ़ें: सपने में दांत टूटना देखने से क्या होता है? (Dream Analysis: Teeth Falling Out In Your Dream)

सपने में सिक्के देखने से क्या होता है? क्या आप जानते हैं सपने में सिक्के दिखने के शुभ-अशुभ संकेत? सपनों की दुनिया जितनी खूबसूरत है, उतनी ही निराली भी है. हम सपने में खुद को या हम से जुड़े लोगो को बहुत कुछ करते या बहुत-सी परिस्तिथियों में देखते हैं. हम अपने आप को या खुद से जुड़े लोगो को असंभव स्थितियों में देखते हैं, असंभव चीज़ें देखते हैं या कुछ ऐसा देखते हैं, जो असल ज़िंदगी में बिल्कुल भी साध्य ना हो. लेकिन इन परिस्थितियों व वस्तुओं को सपने में देखना हमारे जीवन पर काफी प्रभाव डालता है. सपने में सिक्के देखने से क्या होता है, इसके बारे में बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो-न्यूमरोलॉजी-वास्तु व फेंगशुई एक्सपर्ट मनीषा कौशिक.

Seeing Coins In Dream

सपने में सिक्के देखने से क्या होता है?
कुछ सपने ऐसे होते हैं जो हमें ख़ुशी देते हैं, हमें सचेत करते हैं या हमें हमारे भविष्य के बारे में आगाह करते हैं. सपनों की दुनिया बहुत ही प्रभावशाली है, ये हमें हमारे आतंरिक विश्‍वास व क्षमताओं से रू-ब-रू कराकर हमें सतर्क करते हैं. सपने मानसिक चिंताओं से हमारा ध्यान भंग करने और हमारे मन के भय को खत्म करने में भी सहायक होते हैं.

ऐसे समझें सपनों के संकेत
आपके द्वारा देखे गए स्वप्न, चाहे वो शुभ फलदायी हों या अशुभ फलदायी, उनके द्वारा दिए गए संकेत को अवश्य समझें. विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सामान्य सपने अमूमन हम सभी देखते हैं, जैसे- ऊंचाई से गिरना, तेज़ दौड़ना, दांत टूटना, सिक्के देना या सिक्के मिलना आदि. इस तरह के सपने मनुष्य लगभग एक समान परिस्तिथियों से गुज़रते हुए देखता है. आइए, हम आपको कुछ ऐसे सपनों के बारे में बताते हैं, जिन्हें देखकर मनुष्य खुश तो होता है, लेकिन ये नहीं समझ पाता कि ऐसे सपने देखना शुभ है या अशुभ. कई लोग अपने सपने के बारे में बताते हैं कि उन्होंने सपने में सिक्के देखे, सपने में सिक्के दिए या फिर सपने में सिक्के लिए. दरअसल, सिक्कों से जुड़े सपने, जो कई अलग-अलग परिस्तिथियों में देखे जाते हैं, उनका अर्थ भी परिस्तिथियों के अनुसार अलग-अलग होता है.

यह भी पढ़ें: जानें सोलह श्रृंगार के पीछे छिपे वैज्ञानिक तथ्य (Scientific Reasons Behind Solah Shringar)

 

कौन-से सिक्के देखने से क्या होता है?
आपने अपने सपने में किस धातु का सिक्का देखा है और उसका क्या अर्थ होता है? आइए, हम आपको बताते हैं:

1) सपने में चांदी के सिक्के देखना
अगर आपको सपने में चांदी के सिक्के दिखाई दें, तो ये चन्द्रमा को दर्शाता है. ऐसा सपना हमारे सहजबोध (इंट्यूशन) की तरफ इशारा करता है, जैसे- आप यदि किसी ऐसी अवस्था में हैं, जहां आप ये निश्‍चय नहीं कर पा रहे हैं कि ये करना सही होगा या वो करना. ऐसी स्थिति में आपको अपने सहजबोध (इंट्यूशन) की सुननी चाहिए.सपने में चांदी के सिक्के आपकी उलझन का उत्तर दर्शाते हैं.

2) सपने में सोने के सिक्के देखना
यदि आपको सपने में सोने के सिक्के दिखाई देते हैं, तो निराश ना हों. सपने में सोने के सिक्के दिखने का सीधा संबंध सूर्य से है. सूर्य सबसे अधिक ऊर्जावान है और सूर्य हमारे अंदर के उत्साह, जोश और उमंग की तरफ इशारा करता है. अगर आप किसी ऐसी परिस्तिथि में हैं, जहां आप ये निर्णय नहीं ले पा रहे हैं कि आपको यह कार्य करना चाहिए या नहीं, तो आप खुश हो जाइए. यह सपना आपको यही बता रहा है कि आप जो कार्य करने जा रहे हैं, वो आपके लिए बहुत ही शुभ और फलदायी होगा.

यह भी पढ़ें: दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके क्यों नहीं सोना चाहिए? (Sleeping Positions: What Is The Best Direction And Position To Sleep In?)

 

3) सपने में तांबे के सिक्के देखना
तांबे के सिक्के ग्रह मंगल से संबंध रखते हैं. सपने में तांबे के सिक्के दिखने का मतलब है, उभारना, इलाज (हीलिंग). यदि आप सपने में खुद को किसी से तांबे के सिक्के लेते हुए देखते हैं, तो ये सपना आपके स्वास्थ्य की तरफ इशारा करता है. यह सपना यह बताता है कि आप जिस समस्या या बीमारी से जूझ रहे थे, अब आप उससे बाहर आ जाएंगे. साथ ही आने वाले समय में आपका स्वास्थ्य बेहतर होगा.

4) सपने में मुद्रा (करेंसी) के सिक्के देखना
यदि आप सपने में मुद्रा (करेंसी) से जुड़े सिक्के देखते हैं यानी अपने देश की करेंसी के सिक्के देखते हैं, तो यह आपके आने वाले खर्चे या आने वाले मुनाफे की और संकेत करता है. यदि आपको सपने में कोई ये सिक्के दे, तो इसका मतलब है कि आपको आने वाले समय में कुछ न कुछ मुनाफा अवश्य ही होगा. इसी तरह यदि सपने में आप ये सिक्के किसी को देते हुए दिखते हैं, तो इसका अर्थ यह है कि आने वाले समय में आपको जो बड़ी आर्थिक हानि होने वाली थी, वो थोड़े से नुकसान से ख़त्म हो जाएगी. यानी आपका बड़ा घटा छोटे घाटे में टल जाएगा.

जानें जल्दी अमीर बनने के वास्तु टिप्स, देखें ये वीडियो:

26 दिसंबर 2019 के सूर्यग्रहण यानी इस साल के आखिरी सूर्यग्रहण का आपकी राशि पर क्या असर होगा, ये आप भी ज़रूर जानना चाहते होंगे. ग्रहण का प्रभाव हर राशि पर अलग-अलग पड़ता है इसलिए हर राशि के लोगों को इसके लिए उपाय भी अलग-अलग करने होते हैं. सभी बारह राशियों पर सूर्यग्रहण का क्या असर होगा और ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए उन्हें क्या उपाय करने होंगे ये बता रहे हैं ज्योतिष व वास्तु एक्सपर्ट पंडित राजेंद्र जी.

Surya Grahan Solar Eclipse

* 26 दिसंबर 2019 का सूर्यग्रहण धनु राशि में पड़ रहा है इसलिए धनु राशि वालों को ग्रहण काल में बहुत संभलकर रहना होगा.

* 26 दिसंबर 2019 का सूर्यग्रहण सुबह 8 बजे से 10.50 तक रहेगा यानी ग्रहणकाल 3 घंटे 12 मिनट का होगा. सूतक 25 दिसंबर की रात 8.17 बजे से शुरू हो जाएगा.

यह भी पढ़ें: राशि के अनुसार चुनें करियर और पाएं सफलता (Astrology: The Best Career For Your Zodiac Sign)

 

* सूतक काल से ग्रहण काल तक भोजन करना, पानी पीना, शौच आदि वर्जित माना जाता है. हां, गर्भवती महिलाएं, बीमार और बुजुर्ग लोग, छोटे बच्चों के लिए ये नियम नहीं हैं.

* ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए खाना, पानी, घी, पनीर, गीली चीज़ों में कुशा डाल दें.

* इस सूर्यग्रहण में सात राशियां ज्यादा प्रभावित होंगी.

* ग्रहण काल में सही उपाय कर के ग्रहण के प्रभाव से बचा जा सकता है.

यह भी पढ़ें: अपनी राशि के अनुसार कौन सा रत्न पहनें जिससे हो भाग्योदय (Zodiac Birthstones: Gemstones You Should Wear According To Your Zodiac Sign)

 

* इस ग्रहण काल में देश में आपदाएं आ सकती हैं.

* यह सूर्यग्रहण देश की राजनीति में भी उथल-पुथल ला सकता है.

सभी बारह राशियों पर 26 दिसंबर 2019 के सूर्यग्रहण का क्या असर होगा और ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए उन्हें क्या उपाय करने होंगे, जानने के लिए देखें ये वीडियो:

शादी की रस्मों में सोलह शृंगार का विशेष महत्व है. शादी के दिन जब दुल्हन सोलह शृंगार करती है, तो उसकी ख़ूबसूरती और भी निखर जाती है. महिलाओं के जीवन में सोलह शृंगार का महत्व स़िर्फ सजने-संवरने के लिए नहीं है, इसके पीछे कई वैज्ञानिक तथ्य भी छुपे हैं. सोलह शृंगार का महिलाओं के स्वास्थ्य और सौभाग्य से गहरा संबंध है. आख़िर क्या है सोलह शृंगार का वैज्ञानिक महत्व, बता रही हैं एस्ट्रो-टैरो-न्यूमरोलॉजी-वास्तु व फेंगशुई एक्सपर्ट मनीषा कौशिक.

Solah Shringar

1) शादी का जोड़ा
दुल्हन के लिए शादी का जोड़ा चुनते समय सुंदर और चमकदार रंगों को प्राथमिकता दी जाती है, जैसे- लाल, पीला, गुलाबी आदि. दुल्हन के लिए लाल रंग का शादी का जोड़ा शुभ व महत्वपूर्ण माना जाता है. लाल रंग प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है.
धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लाल रंग शुभ, मंगल व सौभाग्य का प्रतीक है, इसीलिए शुभ कार्यों में लाल रंग का सिंदूर, कुमकुम, शादी का जोड़ा आदि का प्रयोग किया जाता है.
वैज्ञानिक मान्यता
विज्ञान के अनुसार, लाल रंग शक्तिशाली व प्रभावशाली है, इसके उपयोग से एकाग्रता बनी रहती है. लाल रंग आपकी भावनाओं को नियंत्रित कर आपको स्थिरता देता है.

2) गजरा
गजरा एक ख़ूबसूरत व प्राकृतिक शृंगार है. गजरा चमेली के सुंगंधित फूलों से बनाया जाता है और इसे महिलाएं बालों में सजाती हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, गजरा दुल्हन को धैर्य व ताज़गी देता है. शादी के समय दुल्हन के मन में कई तरह के विचार आते हैं, गजरा उन्हीं विचारों से उसे दूर रखता है और ताज़गी देता है.
वैज्ञानिक मान्यता
विज्ञान के अनुसार, चमेली के फूलों की महक हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है. चमेली की ख़ुशबू तनाव को दूर करने में सबसे ज़्यादा सहायक होती है.

3) बिंदी
बिंदी दोनों भौहों के बीच माथे पर लगाया जानेवाला लाल कुमकुम का चक्र होता है, जो महिला के शृंगार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
धार्मिक मान्यता
बिंदी को त्रिनेत्र का प्रतीक माना गया है. दो नेत्रों को सूर्य व चंद्रमा माना गया है, जो वर्तमान व भूतकाल देखते हैं तथा बिंदी त्रिनेत्र के प्रतीक के रूप में भविष्य में आनेवाले संकेतों की ओर इशारा करती है.
वैज्ञानिक मान्यता
विज्ञान के अनुसार, बिंदी लगाने से महिला का आज्ञा चक्र सक्रिय हो जाता है. यह महिला को आध्यात्मिक बने रहने में तथा आध्यात्मिक ऊर्जा को बनाए रखने में सहायक होता है. बिंदी आज्ञा चक्र को संतुलित कर दुल्हन को ऊर्जावान बनाए रखने में सहायक होती है.

4) सिंदूर
सिंदूर महिलाओं के सौभाग्यवती होने का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है. यह सबसे पहले शादी के समय दूल्हे के द्वारा दुल्हन की मांग में भरा जाता है. उसके बाद सौभाग्यवती महिला हर समय इसे अपनी मांग में सजाए रखती है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, सौभाग्यवती महिला अपने पति की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर भरती है. लाल सिंदूर महिला के सहस्रचक्र को सक्रिय रखता है. यह महिला के मस्तिष्क को एकाग्र कर उसे सही सूझबूझ देता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, सिंदूर महिलाओं के रक्तचाप को नियंत्रित करता है. सिंदूर महिला के शारीरिक तापमान को नियंत्रित कर उसे ठंडक देता है और शांत रखता है.

ये भी पढ़ें: विवाहित महिलाएं मंगलसूत्र क्यों पहनती हैं? (Why Do Indian Married Women Wear Mangalsutra)

Solah Shringar

5) काजल
काजल आंखों में लगाई जानेवाली काले रंग की स्याही को कहते हैं. काजल महिला की आंखों व रूप को निखारता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, काजल लगाने से स्त्री पर किसी की बुरी नज़र का कुप्रभाव नहीं पड़ता. काजल से आंखों से संबंधित कई रोगों से बचाव होता है. काजल से भरी आंखें स्त्री के हृदय के प्यार व कोमलता को दर्शाती हैं.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, काजल आंखों को ठंडक देता है. आंखों में काजल लगाने से नुक़सानदायक सूर्य की किरणों व धूल-मिट्टी से आंखों का बचाव होता है.

6) मेहंदी
मेहंदी लगाने का शौक लगभग सभी महिलाओं को होता है. लड़की कुंआरी हो या शादीशुदा हर महिला मेहंदी लगाने के मौ़के तलाशती रहती है. सोलह शृंगार में मेहंदी महत्वपूर्ण मानी गई है.
धार्मिक मान्यता
मानयताओं के अनुसार, मेहंदी का गहरा रंग पति-पत्नी के बीच के गहरे प्रेम से संबंध रखता है. मेहंदी का रंग जितना लाल और गहरा होता है, पति-पत्नी के बीच प्रेम उतना ही गहरा होता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार मेहंदी दुल्हन को तनाव से दूर रहने में सहायता करती है. मेहंदी की ठंडक और ख़ुशबू दुल्हन को ख़ुश व ऊर्जावान बनाए रखती है.

7) चूड़ियां
चूड़ियां हर सुहागन का सबसे महत्वपूर्ण शृंगार हैं. महिलाओं के लिए कांच, लाक, सोने, चांदी की चूड़ियां सबसे महत्वपूर्ण मानी गई हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, चूड़ियां पति-पत्नी के भाग्य और संपन्नता की प्रतीक हैं. यह भी मान्यता है कि महिलाओं को पति की लंबी उम्र व अच्छे स्वास्थ्य के लिए हमेशा चूड़ी पहनने की सलाह दी जाती है. चूड़ियों का सीधा संबंध चंद्रमा से भी माना जाता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, चूड़ियों से उत्पन्न होनेवाली ध्वनि महिलाओं की हड्डियों को मज़बूत करने में सहायक होती है. महिलाओं के रक्त के परिसंचरण में भी चूड़ियां सहायक होती हैं.

8) मंगलसूत्र
मंगलसूत्र एक ऐसा सूत्र है, जो शादी के समय वर द्वारा वधू के गले में बांधा जाता है और उसके बाद जब तक महिला सौभाग्यवती रहती है, तब तक वह निरंतर मंगलसूत्र पहनती है. मंगलसूत्र पति-पत्नी को ज़िंदगीभर एकसूत्र में बांधे रखता है.
धार्मिक मान्यता
ऐसी मान्यता है कि मंगलसूत्र सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित कर महिला के दिमाग़ और मन को शांत रखता है. मंगलसूत्र जितना लंबा होगा और हृदय के पास होगा वह उतना ही फ़ायदेमंद होगा. मंगलसूत्र के काले मोती महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मज़बूत करते हैं.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलसूत्र सोने से निर्मित होता है और सोना शरीर में बल व ओज बढ़ानेवाली धातु है, इसलिए मंगलसूत्र शारीरिक ऊर्जा का क्षय होने से रोकता है.

ये भी पढ़ें: चूड़ियां पहनने के 5 धार्मिक और वैज्ञानिक लाभ (Why Do Indian Women Wear Bangles-Science Behind Indian Ornaments)

Solah Shringar

9) कर्णफूल/ईयररिंग्स
कर्णफूल यानी ईयररिंग्स-झुमके, कुंडल, गोल, लंंबे आदि आकार व डिज़ाइन में पाए जाते हैं. आमतौर पर महिलाएं सोने, चांदी, कुंदन आदि धातु से बने ईयररिंग्स पहनती हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, कर्णफूल यानी ईयररिंग्स महिला के स्वास्थ्य से सीधा संबंध रखते हैं. ये महिला के चेहरे की ख़ूबसूरती को निखारते हैं. इसके बिना महिला का शृंगार अधूरा रहता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार हमारे कर्णपाली (ईयरलोब) पर बहुत से एक्यूपंक्चर व एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जिन पर सही दबाव दिया जाए, तो माहवारी के दिनों में होनेवाले दर्द से राहत मिलती है. ईयररिंग्स उन्हीं प्रेशर पॉइंट्स पर दबाव डालते हैं. साथ ही ये किडनी और मूत्राशय (ब्लैडर) को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं.

10) बाजूबंद
ये बाजू के ऊपरी हिस्से में पहना जाता है. बाजूबंद सोने, चांदी, कुंदन या अन्य मूल्यवान धातु या पत्थर से बना होता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, बाजूबंद महिलाओं के शरीर में ताक़त बनाए रखने व पूरे शरीर में उसका संचार करने में सहायक होता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, बाजूबंद बाजू पर सही मात्रा में दबाव डालकर रक्तसंचार बढ़ाने में सहायता करता है.

11) कमरबंद
कमरबंद धातु व अलग-अलग तरह के मूल्यवान पत्थरों से मिलकर बना होता है. कमरबंद नाभि के ऊपरी हिस्से में बांधा जाता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, महिला के लिए कमरबंद बहुत आवश्यक है. चांदी का कमरबंद महिलाओं के लिए शुभ माना जाता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी का कमरबंद पहनने से महिलाओं को माहवारी तथा गर्भावस्था में होनेवाले सभी तरह के दर्द से राहत मिलती है. चांदी का कमरबंद पहनने से महिलाओं में मोटापा भी नहीं बढ़ता.

12) मांगटीका
मांगटीका दुल्हन को मांग में पहनाया जानेवाला ज़ेवर है. यह सोने, चांदी, कुंदन, जरकन, हीरे, मोती आदि से बनाया जाता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, मांगटीका महिला के यश व सौभाग्य का प्रतीक है. मांगटीका यह दर्शाता है कि महिला को अपने से जुड़े लोगों का हमेशा आदर करना है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार मांगटीका महिलाओं के शारीरिक तापमान को नियंत्रित करता है, जिससे उनकी सूझबूझ व निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है.

ये भी पढ़ें: बॉलीवुड सेलिब्रिटीज़ का रत्न प्रेम: क्या रत्न चमकाते हैं इनकी क़िस्मत? (10 Bollywood Celebrities And Their Lucky Astrological Gemstones)

Solah Shringar

13) अंगूठी
शादी की सबसे पहली रस्म अंगूठी से ही शुरू की जाती है, जिसमें लड़का-लड़की एक दूसरे को अंगूठी पहनाकर सगाई की रस्म पूरी करते हैं.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, अंगूठी पति-पत्नी के प्रेम की प्रतीक होती है, इसे पहनने से पति-पत्नी के हृदय में एक-दूसरे के लिए सदैव प्रेम बना रहता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, अनामिका उंगली की नसें सीधे हृदय व दिमाग़ से जुड़ी होती हैं, इन पर प्रेशर पड़ने से दिल व दिमाग़ स्वस्थ रहता है.

14) पायल
पैरों में पहनी जानेवाली पायल चांदी की ही सबसे उत्तम व शुभ मानी जाती है. पायल कभी भी सोने की नहीं होनी चाहिए. शादी के समय मामा द्वारा दुल्हन के पैरों में पायल पहनाई जाती है या ससुराल से देवर की तरफ़ से यह तोहफ़ा अपनी भाभी के लिए भेजा जाता है.
धार्मिक मान्यता
मान्यताओं के अनुसार, महिला के पैरों में पायल संपन्नता की प्रतीक होती है. घर की बहू को घर की लक्ष्मी माना गया है, इसी कारण घर में संपन्नता बनाए रखने के लिए महिला को पायल पहनाई जाती है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी की पायल महिला को जोड़ों व हड्डियों के दर्द से राहत देती है. साथ ही पायल के घुंघरू से उत्पन्न होनेवाली ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा घर से दूर रहती है.

15) बिछिया
हर वैवाहिक महिला पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनती है. बिछिया भी चांदी की ही सबसे शुभ मानी गई है.
धार्मिक मान्यता
महिलाओं के लिए पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनना शुभ व आवश्यक माना गया है. ऐसी मान्यता है कि बिछिया पहनने से महिलाओं का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और घर में संपन्नता बनी रहती है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं के पैरों की उंगलियों की नसें उनके गर्भाशय से जुड़ी होती हैं, बिछिया पहनने से उन्हें गर्भावस्था व गर्भाशय से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलती है. बिछिया पहनने से महिलाओं का ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है.

16) इत्र
सुगंध ख़ासकर गुलाब के फूल की सुगंध सीधे रूप से प्रेम से संबंध रखती है. सुगंध को प्रेम का प्रतीक माना गया है और यह पति-पत्नी को एक दूसरे की ओर आकर्षित करती है.
धार्मिक मान्यता
सौभाग्यवती महिला के लिए गुलाब की सुगंध सबसे उत्तम मानी जाती है. गुलाब प्रेम का प्रतीक है, इसलिए गुलाब का इत्र लगाने से पति हमेशा पत्नी की ओर आकर्षित रहता है.
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, इत्र मानसिक तनाव दूरकर तरोताज़ा रखता है. गुलाब की सुगंध दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करती है. इत्र को नर्व पॉइंट्स पर लगाना चाहिए.
– कमला बडोनी

भारत में पितृपक्ष का बड़ा महत्व है. हमारे देश में पूर्णिमा से अमावस्या तक 15 तिथियां पितरों के निमित श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. इस दौरान सभी लोग अपने पितरों का स्मरण करते हुए श्राध्द कर्म करते हैं. जो पूर्वज हमें छोड़कर चले गए हैं, उनका आभार प्रकट करने के लिए और उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए पितृपक्ष के दौरान उन्हें तर्पण दिया जाता है. ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष में यमराज इन्हें कुछ समय के लिए मुक्त कर देते हैं, ताकि ये धरती पर जाकर अपने वंशजों से तर्पण ग्रहण कर सकें. पितृपक्ष शुरू हो गया है इसलिए पितृपक्ष से जुड़ी कुछ ज़रूरी बातें हम सभी को मालूम होनी चाहिए.

Pitru Paksha 2019

* पितृपक्ष के दौरान सभी लोग अपने पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण, हवन और अन्नदान करते हैं. यदि आपको अपने पितरों के श्राध्द की तिथि मालूम नहीं है, तो अपने ब्राह्मण से इसकी जानकारी ले लें. यदि आपको अपने पितरों की मृत्यु के दिन की सही जानकारी नहीं है तो आप सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनका श्राध्द कर सकते हैं.

* पितरों को तर्पण देने के लिए दाएं कंधे पर जनेऊ रखकर काले तिल मिश्रित जल से दक्षिण की तरफ मुंह करके तर्पण किया जाता है. ब्राह्मण के निर्देशानुसार तर्पण की सभी क्रियाएं की जाती हैं. फिर ब्राह्मण को फल-मिष्ठान खिलाकर दक्षिणा दी जाती है.

यह भी पढ़ें: चरणामृत और पंचामृत में क्या अंतर है? (What Is The Difference Between Charanamrit And Panchamrit)

* श्राध्द के भोजन में दूध, चावल, घी आदि से बनी तरह-तरह की चीज़ें बनाई जाती हैं. श्राध्द के भोजन में लहसुन, प्याज़, बैगन, उड़द, मसूर, चना आदि का प्रयोग नहीं किया जाता है. इस भोजन को कौवे, गाय, कुत्ते को खिलाया जाता है. फिर सभी परिजन साथ मिलकर ये भोजन ग्रहण करते हैं.

* श्राध्द के दिन शराब-धूम्रपान आदि से दूर रहना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. पूरी श्रद्धा से अपने पूर्वजों का स्मरण करना चाहिए.

यह भी पढ़ें: कीर्तन और आरती में ताली क्यों बजाते हैं? (Spiritual And Health Benefits Of Clapping While Aarti And Kirtan)

हस्तरेखा विज्ञान (Palmistry) से हम अपने व्यवहार, भविष्य, करियर, लव लाइफ आदि के बारे में आसानी से जान सकते हैं. हस्तरेखा विज्ञान की सबसे बड़ी ख़ासियत ये है कि इसके लिए हमें किसी और के पास जाने की ज़रूरत नहीं है. यदि हमें हस्तरेखा विज्ञान की समझ है तो हम अपना भविष्य खुद ही जान सकते हैं. यदि आप अपनी पर्सनैलिटी और लव लाइफ के बारे में जानना चाहते हैं, तो ज्योतिष व वास्तु एक्सपर्ट पंडित राजेन्द्र जी आपको सिखा रहे हैं हस्तरेखा विज्ञान. रोजेन्द्र जी आपको अपने हाथ की रेखा देखना सिखा रहे हैं, जिससे आप अपने हाथ की रेखा देखकर अपनी पर्सनैलिटी और लव लाइफ के बारे में आसानी से जान सकते हैं.

Palmistry

यदि आपकी हार्ट लाइन यानी दिल की रेखा छोटी है तो क्या होता है, यदि हार्ट लाइन बड़ी है तो क्या होता है, यदि हार्ट लाइन पर स्टार, बिंदु, त्रिकोण के निशान हैं तो क्या होता है, आपकी लव मैरिज होगी या अरेंज, आपकी शादीशुदा ज़िंदगी कैसी होगी, आपका दिल कितना स्वस्थ रहेगा, आप दूसरों की भावनाओं का कितना ख़्याल रखते हैं… आपकी हार्ट लाइन से जुड़े ऐसे कई सवालों के गूढ़ रहस्य बता रहे हैं ज्योतिष व वास्तु एक्सपर्ट पंडित राजेन्द्र जी.

यह भी पढ़ें: सीखें हस्तरेखा विज्ञान: जीवन रेखा से जानें अपने जीवन के रहस्य (Learn Palmistry: How Your Life Line Can Predict Your Life)

 

अपनी हथेली में हृदय रेखा देखकर जानें अपनी पर्सनैलिटी और लव लाइफ के बारे में, देखें वीडियो:

रत्नों (Gems) का हमारे जीवन से गहरा संबंध होता है, क्योंकि रत्नों का संबंध ग्रहों (Planets) से होता है और हमारा जीवनचक्र हमारे ग्रहों के अनुरूप ही चलता है. ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की स्थिति को देखते हुए व्यक्ति के भविष्य के बारे में पहले ही बता दिया जाता है. इसीलिए अपनी राशि के अनुसार यदि हम सही रत्न धारण करें, तो अपने भविष्य को काफी हद तक सुधार सकते हैं. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार रत्नों में इतनी शक्ति होती है कि रत्न व्यक्ति का भाग्योदय कर सकते हैं, लेकिन आपने यदि ग़लत रत्न पहन लिया, तो आपको इसका भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. यदि आपको रत्नों की सही जानकारी नहीं है, तो रत्न ना पहनें, लेकिन गलत रत्न कभी न पहनें. अपनी राशि के अनुसार कौन सा रत्न पहनें जिससे हो भाग्योदय, आइए जानते हैं.

Zodiac Birthstones

1) मेष राशि
मेष राशि का स्वामी ग्रह मंगल है और मंगल ग्रह का रत्न मूंगा है इसलिए मेष राशि वालों के लिए मूंगा रत्न शुभ होता है. मेष राशि वाले यदि मूंगा रत्न धारण करें, तो इससे उन्हें शारीरिक-मानसिक बल, धन-वैभव, रिश्ते, दोस्त आदि कई सुख मिलते हैं.

मूंगा रत्न की खासियत
मूंगा मंगल ग्रह का रत्न है. मंगल ग्रह को बल प्रदान करने के लिए मूंगा रत्न पहना जाता है. मंगल ग्रह के लिए लाल रंग का मूंगा शुभ माना जाता है इसलिए आपकी राशि यदि मेष है, तो आप लाल रंग का मूंगा धारण कर सकते हैं. मूंगा रत्न को दायें हाथ की कनिष्का या तर्जनी उंगली में मंगलवार को सुबह स्नान करने के बाद पहनें.

2) वृषभ राशि
वृषभ राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है और शुक्र राशि का रत्न हीरा है इसलिए वृषभ राशि वालों को हीरा रत्न धारण करना चाहिए. हीरा रत्न वृषभ राशि वालों की आकर्षण शक्ति को बढ़ाता है. हीरा रत्न वृषभ राशि वालों की स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को भी दूर करता है.

हीरा रत्न की खासियत
हीरा शुक्र ग्रह का रत्न है. हीरा रत्न शुक्र ग्रह को बलवान बनाता है. हीरा रत्न को दायें हाथ की मध्यामा उंगली में शुक्रवार की सुबह स्नान करने के बाद धारण करना शुभ माना जाता है. हीरा बहुत महंगा रत्न है और धन-वैभव का प्रतीक माना जाता है. यदि वृषभ राशि वाले लोग हीरा रत्न धारण करते हैं, तो उन्हें जीवन में सुख-सुविधा, ऐश्‍वर्य, ख़ुशहाली सभी कुछ मिलता है.

3) मिथुन राशि
मिथुन राशि का स्वामी बुध है और बुध ग्रह का रंग हरा है इसलिए मिथुन राशि वालों को हरे रंग का पन्ना रत्न पहनना चाहिए. मिथुन राशि के जातक यदि पन्ना रत्न धारण करते हैं, तो इससे उन्हें अच्छी वाणी, बिज़नेस में मुनाफा, अच्छी सेहत, धन-धान्य तथा अन्य बहुत कुछ प्राप्त होता है.

पन्ना रत्न की खासियत
पन्ना रत्न बुध ग्रह को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है. पन्ना मूल्यवान रत्नों में से एक है. जब आप पन्ना रत्न खरीदने जाते हैं, तो पन्ना रत्न की चमक, वजन, पारदर्शिता आदि को देखते हुए इसका मूल्य तय किया जाता है. पन्ना रत्न को दायें हाथ की अनामिका उंगली में बुधवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना शुभ माना जाता है.

4) कर्क राशि
कर्क राशि का स्वामी ग्रह चंद्र है और ग्रह चंद्र का रत्न मोती है इसलिए कर्क राशि के जातकों को मोती रत्न पहनना चाहिए. कर्क राशि के जातक यदि सफेद मोती रत्न धारण करते हैं, तो इससे उन्हें मानसिक शांति, अच्छा स्वास्थ्य, विभिन्न सुख-सुविधाएं और लंबी आयु प्राप्त होती है.

मोती रत्न की खासियत
मोती रत्न चंद्र ग्रह का रत्न है इसलिए चंद्र ग्रह को बल प्रदान करने के लिए मोती रत्न पहना जाता है. मोती समुद्र से सीप के मुंह से प्राप्त होता है. ज्योतिषशास्त्र में सफेद मोती को सबसे उत्तम माना जाता है. मोती रत्न को दायें हाथ की अनामिका या कनिष्का उंगली में सोमवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है.

यह भी पढ़ें: सीखें हस्तरेखा विज्ञान: जीवन रेखा से जानें अपने जीवन के रहस्य (Learn Palmistry: How Your Life Line Can Predict Your Life)

 

5) सिंह राशि
सिंह राशि का स्वामी ग्रह सूर्य है और सूर्य का रंग लाल है इसलिए सिंह राशि वाले लोगों को माणिक्य रत्न धारण करना चाहिए. सिंह राशि के लोग यदि माणिक्य रत्न पहनते हैं, तो उन्हें बिज़नेस में लाभ, अच्छा स्वास्थ्य, ऊंचा मुकाम और प्रसिद्धि मिलती है.

माणिक्य रत्न की खासियत
माणिक्य रत्न सूर्य ग्रह का रत्न है इसलिए माणिक्य रत्न सूर्य को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है. माणिक्य रत्न को दायें हाथ की कनिष्का उंगली में रविवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है.

6) कन्या राशि
कन्या राशि का स्वामी ग्रह बुध है और इसका रंग हरा है इसलिए कन्या राशि वालों के लिए ग्रीन कलर का पन्ना रत्न शुभ होता है. कन्या राशि वाले लोग यदि पन्ना रत्न धारण करते हैं, तो इससे इन्हें आत्मविश्‍वास, धन-वैभव और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है इसीलिए कन्या राशि वालों को पन्ना रत्न पहनने की सलाह दी जाती है.

पन्ना रत्न की खासियत
पन्ना रत्न बुध ग्रह को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है. पन्ना मूल्यवान रत्नों में से एक है. जब आप पन्ना रत्न खरीदने जाते हैं, तो पन्ना रत्न की चमक, वजन, पारदर्शिता आदि को देखते हुए इसका मूल्य तय किया जाता है. पन्ना रत्न को दायें हाथ की अनामिका उंगली में बुधवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना शुभ माना जाता है.

धन-संपत्ति पाने के 10 फेंगशुई टिप्स जानने के लिए देखें वीडियो:

7) तुला राशि
तुला राशि पर शुक्र ग्रह रूल करता है और शुक्र ग्रह का रत्न हीरा है इसलिए तुला राशि के जातकों को हीरा रत्न पहनना चाहिए. हीरा रत्न वृषभ राशि वालों की आकर्षण शक्ति को बढ़ाता है. हीरा रत्न वृषभ राशि वालों की स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को भी दूर करता है.

हीरा रत्न की खासियत
हीरा शुक्र ग्रह का रत्न है. हीरा रत्न शुक्र ग्रह को बलवान बनाता है. हीरा रत्न को दायें हाथ की मध्यामा उंगली में शुक्रवार की सुबह स्नान करने के बाद धारण करना शुभ माना जाता है. हीरा बहुत महंगा रत्न है और धन-वैभव का प्रतीक माना जाता है. यदि वृषभ राशि वाले लोग हीरा रत्न धारण करते हैं, तो उन्हें जीवन में सुख-सुविधा, ऐश्‍वर्य, ख़ुशहाली सभी कुछ मिलता है.

8) वृश्‍चिक राशि
वृश्‍चिक राशि का स्वामी ग्रह मंगल है और मंगल ग्रह का रंग लाल है इसलिए वृश्‍चिक राशि वालों को लाल रंग का मूंगा रत्न पहनना चाहिए. वृश्‍चिक राशि वाले यदि मूंगा रत्न धारण करें, तो इससे उन्हें शारीरिक-मानसिक बल, धन-वैभव, रिश्ते, दोस्त आदि कई सुख मिलते हैं.

मूंगा रत्न की खासियत
मूंगा मंगल ग्रह का रत्न है. मंगल ग्रह को बल प्रदान करने के लिए मूंगा रत्न पहना जाता है. मंगल ग्रह के लिए लाल रंग का मूंगा शुभ माना जाता है इसलिए आपकी राशि यदि मेष है, तो आप लाल रंग का मूंगा धारण कर सकते हैं. मूंगा रत्न को दायें हाथ की कनिष्का या तर्जनी उंगली में मंगलवार को सुबह स्नान करने के बाद पहनें.

यह भी पढ़ें: राशि के अनुसार चुनें नेल पॉलिश और पाएं सफलता (Best Nail Polish Colours For Your Zodiac Sign)

 

9) धनु राशि
धनु राशि का स्वामी ग्रह गुरु है और गुरु का रंग पीला है इसलिए धनु राशि के जातकों को पीला पुखराज रत्न पहनने की सलाह दी जाती है. धनु राशि के जातक यदि पीला पुखराज रत्न पहनते हैं तो इससे इनका मान-सम्मान बढ़ता है, धन-वैभव और विद्या में वृद्धि होती है, स्वास्थ्य और ऊर्जा हमेशा बनी रहती है.

पीला पुखराज रत्न की खासियत
पीला पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है इसलिए गुरु ग्रह को बल प्रदान करने के लिए पीला पुखराज रत्न पहना जाता है. पुखराज रत्न कीमती रत्नों में से एक है. पुखराज रत्न को दायें हाथ की तर्जनी उंगली में गुरुवार के दिन सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए.

10) मकर राशि
मकर राशि का स्वामी ग्रह शनि है और शनि का रंग काला है इसलिए मकर राशि के जातकों को नीलम रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है. मकर राशि के लोग यदि नीलम रत्न धारण करते हैं, तो इससे उन्हें आर्थिक लाभ, स्वास्थ्य लाभ, यश-कीर्ति और आत्मविश्‍वास मिलता है.

नीलम रत्न की खासियत
नीलम रत्न शनि ग्रह का रत्न है इसलिए शनि ग्रह के लिए नीलम रत्न पहना जाता है. ऐसी मान्यत है कि नीलम रत्न यदि आपके लिए शुभ हो, तो वो रातोंरात आपकी ज़िंदगी बदल देता है, लेकिन ये यदि आपके लिए शुभ नहीं है, तो ये नुकसान भी कर सकता है इसलिए नीलम रत्न पहनने से पहले इसकी अच्छी तरह जांच ज़रूर करा लें. नीलम रत्न को दायें हाध की मध्यमा उंगली में शनिवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करें.

मनचाही नौकरी पाने के गुडलक टिप्स जानने के लिए देखें वीडियो:

11) कुंभ राशि
मकर राशि की तरह ही कुंभ राशि का स्वामी ग्रह भी शनि है और शनि का रंग काला है इसलिए कुंभ राशि के जातकों को नीलम रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है. मकर राशि के लोग यदि नीलम रत्न धारण करते हैं, तो इससे उन्हें आर्थिक लाभ, स्वास्थ्य लाभ, यश-कीर्ति और आत्मविश्‍वास मिलता है.

नीलम रत्न की खासियत
नीलम रत्न शनि ग्रह का रत्न है इसलिए शनि ग्रह के लिए नीलम रत्न पहना जाता है. ऐसी मान्यत है कि नीलम रत्न यदि आपके लिए शुभ हो, तो वो रातोंरात आपकी ज़िंदगी बदल देता है, लेकिन ये यदि आपके लिए शुभ नहीं है, तो ये नुकसान भी कर सकता है इसलिए नीलम रत्न पहनने से पहले इसकी अच्छी तरह जांच ज़रूर करा लें. नीलम रत्न को दायें हाध की मध्यमा उंगली में शनिवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है.

12) मीन राशि
मीन राशि के स्वामी ग्रह राहु तथा शनि दोनों हैं.
मीन राशि के जातकों को लंबी उम्र, अच्छी सेहत और यश-कीर्ति बनाए रखने के रखने के लिए गुरु ग्रह का रत्न पीला पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है. इसके साथ ही आप मोती और मूंगा भी धारण कर सकते हैं. आपके लिए कौन-सा रत्न सही है, ये आप अपने ज्योतिष से ज़रूर पूछें.

यह भी पढ़ें: वार्षिक राशिफल 2019: जानें कैसा रहेगा वर्ष 2019 आपके लिए (Yearly Horoscope 2019: Astrology 2019)

क्या आप जानते हैं कि आपकी हथेली का रंग आपके भविष्य और भाग्य के बारे में बहुत कुछ बता देता है. आपकी हथेली का रंग, हथेली की रेखाओं का रंग (Palmistry) आदि देखकर आप ये जान सकते हैं कि आपका भाग्य और भविष्य कैसा है. हथेली का रंग और भविष्य का क्या कनेक्शन है? बता रहे हैं पंडित राजेंद्र जी.

हथेली के रंग से जानें अपना भविष्य जानने के लिए देखें ये वीडियो:

मशहूर ज्योतिष (Jyotish) और वास्तु एक्सपर्ट राजेंद्रजी से जानें कैसा रहेगा यह सप्ताह आपके लिए. इस हफ़्ते ( Weekly Horoscope ) कैसी रहेगी आपकी लवलाइफ (Love Life), आपकी सेहत, आपकी आर्थिक स्थिति और भी बहुत कुछ. इस सबके साथ एक ख़ास गुडलक टिप जो आपके लिए होगा लाभदायक. साथ ही जानें जब पिता पुत्र में न बने तो क्या करें ? के लिए गुडलक टिप्स (Good Luck Tips).

राशि: मेष (Aries)

https://www.youtube.com/watch?v=RsuT7y-XZg4

राशि: वृषभ (Taurus) 

https://www.youtube.com/watch?v=y3gXql4z5X0

राशि: मिथुन (Gemini)

https://www.youtube.com/watch?v=u1zgmZ1DJOU

यह भी पढ़ें: ख़ुशमिज़ाज व बेमिसाल होते हैं अक्टूबर में जन्मे लोग

राशि: कर्क (Cancer)

https://www.youtube.com/watch?v=uYPsZPjNFKI

राशि: सिंह (Leo)

https://www.youtube.com/watch?v=nIlL2XeLvNQ

[amazon_link asins=’B073YXKYWG,B01LXUQ2T4,B06ZZ7VD2F,B071K27G7M’ template=’ProductCarousel’ store=’pbc02-21′ marketplace=’IN’ link_id=’e7054a29-b7d5-11e7-8014-a7e971b72444′]

राशि: कन्या (Virgo) 

https://www.youtube.com/watch?v=Xl8CZSf8Gng&t=9s

राशि: तुला (Libra)

https://www.youtube.com/watch?v=pS17HJbDFOI

राशि: वृश्‍चिक (Scorpio)

https://www.youtube.com/watch?v=1XyeyQEkjU4

यह भी पढ़ें: क्या आप भी 1, 10, 19 और 28 को जन्मे हैं, तो आपका रूलिंग नंबर है- 1 

राशि: धनु (Sagittarius)

https://www.youtube.com/watch?v=Y6puCsTUEmo

राशि: मकर (Capricorn)

https://www.youtube.com/watch?v=YcN96aZNO4k

राशि: कुंभ (Aquarius)

https://www.youtube.com/watch?v=l37H2S2BDDI

यह भी पढ़ें: वेट लॉस टिप ऑफ द डे

राशि: मीन (Pisces)

https://www.youtube.com/watch?v=jB3b2I2VQWk

जब पिता पुत्र में न बने तो क्या करें?

यह भी पढ़ें: क्या आप भी 4, 13, 22 और 31 को जन्में हैं, तो आपका रूलिंग नंबर है 4

[amazon_link asins=’B06XSZVK35,B01N0DQ7EQ,B01DYC8JYY’ template=’ProductCarousel’ store=’pbc02-21′ marketplace=’IN’ link_id=’16abb4a9-b7d8-11e7-b5e7-9bbb16063aba’]