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जवानों के साथ हुई बदसलूकी पर भड़के वीरेंद्र सहवाग और गंभीर (CRPF Jawans Assaulted In Kashmir)

Virender Sehwag

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रात-दिन देखे बिना हर समय ड्यूटी पर तैनात रहते हुए हमें हमारे घरों में चैन की नींद देनेवाले जवानों के साथ कश्मीर में कुछ ऐसा हुआ जिसने की देश में हलचल मचा दिया. सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनल और अख़बारों में ये ख़बर चर्चा का विषय बन गई है. सोशल मीडिया पर जवानों का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कुछ कश्मीरी युवक जवानों के साथ मारपीट करते हुए दिख रहे हैं.

इस वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोग अपने व्यूज़ देने लगे. इस वीडियो को देखने के बाद पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी. सहवाग ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इसके प्रति विरोध जताया. वीरू ने कहा कि यह अस्वीकार्य है. हमारे सीआरपीएफ जवानों के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए, इस पर रोक लगनी चाहिए. बदतमीज़ी की हद है.

गौतम गंभीर ने भी एक पोस्ट के ज़रिए कश्मीरी युवकों और उन तमाम लोगों पर ग़ुस्सा ज़ाहिर किया है, जिन्हें आज़ादी चाहिए. गंभीर ने कहा कि भारतीय जवानों को एक चांटा मारने के बदले में 100 जिहादियों का मार देना चाहिए. उन्होंने लिखा कि मेरी सेना के जवानों पर मारे गए एक चांटे के बदले सौ जिहादियों को मार देना चाहिए. भारत विरोधी लोग यह भूल गए हैं कि हमारे झंडे में केसरिया रंग ग़ुस्से का प्रतीक भी है, स़फेद रंग जिहादियों के लिए कफन और हरा रंग आंतक के ख़िलाफ़ नफ़रत को दर्शाता है.

 

 

 

 

 

 

खेलो इंडिया से बदलेगा जम्मू कश्मीर का नक्शा (JK’s maiden Rural Sports Competition under Khelo India scheme commences)

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कश्मीर की वादियों में टेरर का दस्तक तो हमेशा रहता है, लेकिन अब वहां स़िर्फ खेल और खिलाड़ी ही पनपेंगे. केंद्र सरकार की खेलो इंडिया स्कीम से प्रदेश में खिलाड़ियों की संख्या में इज़ाफा होगा. सांबा ज़िले में ये प्रतियोगिता आयोजित की गई. इस प्रतियोगिता का मकसद ख़ासतौर पर गांव की प्रतिभा को नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर लाना है.

आगामी ओलिंपिक खेलों में देश की झोली में ज़्यादा से ज़्यादा पदक आएं, उसके लिए इस तरह की योजना बहुत ही फ़ायदेमंद साबित होगी. इतना ही नहीं घाटी में आमतौर पर बच्चों और युवाओं को ग़लत राह पर आसानी से भटकाया जाता है. इस खेल के वजह से मुमक़िन है कि अब युवाओं का ध्यान खेल की ओर बढ़ेगा. उन्हें इस बात का एहसास होगा कि वो भी दुनिया में प्रसिद्ध हो सकते हैं. उनका भी नाम बाकी खिलाड़ियों की तरह स्टार की तरह लिया जा सकता है.

इस प्रतियोगिता में 2800 से भी ज़्यादा खिलाड़ियों ने भाग लिया. ज़िले के 9 ब्लॉक से खिलाड़ियों ने इसमें हिस्सा लिया. केंद्र सरकार की अनूठी पहल खेलो इंडिया योजना का असर देशवासियों को 2020 और 2024 ओलंपिक में देखने को मिलेगा. देश को पदक दिलवाने वाले खिलाड़ियों को चिह्नित करने की दिशा में जारी यह प्रयास प्रशंसनीय है. उम्मीद है कि अब भविष्य में भाग लेने वाले भारतीय ओलंपिक दल में उन्हीं खिलाड़ियों को जगह दी जाएगी, जो सही मायनों में इसके हकदार हैं.

अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो कोच एवं खिलाड़ी अतुल पंगोत्रा ने राज्य में जम्मू-कश्मीर स्टेट स्पोर्ट्स काउंसिल के प्रत्येक जिलों में ब्लाक स्तर पर वॉलीबाल, कबड्डी, फुटबाल, कुश्ती, बॉक्सिंग सहित अन्य खेलों के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित करने को एक प्रशंसनीय कदम करार दिया. उन्होंने कहा कि जब तक गांवों में छिपी प्रतिभा को निखारने का मौका नहीं मिलेगा, तब तक पदकों में वृद्धि नहीं हो सकती. शहरी युवाओं की अपेक्षा गांवों के युवा में स्टेमिना अधिक होता है, अगर उनका सही मार्गदर्शन किया जाए तो देश के खेल भविष्य के लिए यह एक अच्छी बात होगी.

खेलो इंडिया में जिस तरह से प्रदेश के युवाओं ने हिस्सा लिया उससे तो यही लगता है कि वो भी बदलाव की बयार का हिस्सा बनना चाहते हैं. वो भी चाहते हैं कि जिस तरह से घाटी की निंदा लोग करते हैं, वो बदल जाएगा. लोगों का नज़रिया भी इससे बदलेगा. देश बदलेगा.

श्वेता सिंह