Khan

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अपनी आनेवाली फिल्म रईस के प्रमोशन में किंग ख़ान जी-जान से जुड़े हैं. देश के अलग-अलग शहरों में शाहरुख़ ख़ान फिल्म का प्रमोशन कर रहे हैं. दिल्ली में अपनी फिल्म का प्रमोशन करते हुए मीडिया से बातचीत के दौरान इस रईस ने टीम इंडिया के कुछ खिलाड़ियों का नामकरण कर दिया. असल में बात ये है कि किंग ख़ान ने अपनी फिल्मों के नाम पर ही इन खिलाड़ियों का नामकरण किया. आइए, आप भी देखिए कि किसको क्या नाम दिया किंग ख़ान ने?

Dhoni-scratcheshead-AFP

टीम इंडिया के बाज़ीगर हैं धोनी
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को किंग ख़ान ने अपनी फिल्म बाज़ीगर का टाइटल दिया है. शाहरुख़ ने धोनी का उपनाम बाज़ीगर रखा. इसका कारण भी बताया किंग ख़ान ने कि आख़िर क्यों उन्होंने धोनी को बाज़ीगर कहा. इस रईस ने कहा कि धोनी एक ऐसा खिलाड़ी है, जो हमेशा ऐसा दांव खेलता है, जिसे कोई सोच भी नहीं सकता. ठीक उसी तरह जैसे उसने 2007 टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में आख़िरी ओवर जोगिंदर शर्मा को दे दिया था. इस ओवर की वजह से ही टीम इंडिया हारी बाज़ी जीत गई थी, इसलिए मैं उसे बाज़ीगर का नाम देना चाहूंगा.

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टीम के कप्तान विराट हैं डॉन
शायद ही किसी को पता था कि रईस के आते ही किंग ख़ान सबका नामकरण करने लगेंगे. वैसे किंग ख़ान ने नामकरण की इस लिस्ट में अगला नाम टीम के कप्तान विराट का चुना. विराट को उन्होंने डॉन कहा. किंग ख़ान ने कहा कि मैदान पर शांत दिखनेवाला विराट असल में शांत नहीं है, सामने वाली टीम के बॉलरों पर दबाव बनाकर रन बनाना और मैच को किसी भी तरह से जीत लेने की कला विराट में ही है. इसलिए मैं उसे डॉन कहूंगा.

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बादशाह हैं रोहित शर्मा
ओपनर रोहित शर्मा की बैटिंग स्टाइल से परदे का बादशाह इतना प्रभावित हुआ कि उसने रोहित को बादशाह की उपाधि दे दी. किंग ख़ान ने कहा कि जिस तरह से ओपनिंग करने रोहित शर्मा मैदान पर उतरता है, ऐसा लगता है कि कोई बादशाह आ रहा हो.

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टीम इंडिया के पहेली हैं अश्विन
किंग ख़ान और रानी मुखर्जी की फिल्म पहेली तो आपको याद ही होगी. किंग ख़ान ने टीम के स्टार गेंदबाज़ आर अश्‍विन को एक ऐसी पहेली बताया, जो दूसरी टीम के बल्लेबाज़ों की समझ से परे हैं. इस रईस ने इसके पीछे ये लॉजिक दी कि मैदान पर शांत रहनेवाले अश्‍विन अगली गेंद से क्या कमाल दिखाएंगे, इसका अंदाज़ा विरोधी खेमे को नहीं रहता.

तो देखा आपने… किस तरह से किंग ख़ान अपनी फिल्म के साथ-साथ दूसरे काम भी कर रहे हैं. इन क्रिकेटर्स को अपना ये नाम शायद ख़ूब पसंद आए. अब जब नाम देने वाला ही बॉलीवुड का बादशाह हो, तो भला किसे ये नाम अच्छा नहीं लगेगा.

श्वेता सिंह 

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क्रिकेट के नवाब मंसूर अली ख़ान पटौदी आज के दिन भोपाल मेें जन्मे थे. भारतीय क्रिकेट में जब तक खेले, बड़ा मुकाम हासिल किया. नवाब के ख़ून में ही क्रिकेट था. क्रिकेट उन्हें अपने पिता से विरासत में मिला. इस ख़ास मौ़के पर आइए, जानते हैं पटौदी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें.

* पटौदी के नाम सबसे युवा कप्तान होने का रिकॉर्ड है.

* महज़ 21 साल की उम्र में वो भारतीय टीम के कप्तान बन गए थे.

* भारत की ओर से वो 46 टेस्ट मैच खेले, जिसमें से 40 में वो कप्तान थे.

* जब पटौदी अपना 11वां जन्मदिन मना रहे थे, उसी दिन उनके पिता की मृत्यु हो गई थी.

* 1967 में पटौदी की कप्तानी में भारत ने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ एशिया के बाहर अपना पहला टेस्ट मैच जीता था.

* 1 जुलाई 1961 को एक कार एक्सीडेंट में नवाब पटौदी की राइट आंख ख़राब हो गई.

* आंख ख़राब होने के बाद अपना पहला मैच खेलते हुए पटौदी ने अपनी टीम के लिए सबसे ज़्यादा 70 रन बनाए थे.

* उन्हें टाइगर के नाम से भी बुलाया जाता था.

श्वेता सिंह 

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आमिर की फिल्म दंगल बॉक्स ऑफिस पर कमाई करने के साथ-साथ दर्शकों का प्यार भी जीत रही है, लेकिन कोई है, जो इस फिल्म से बहुत निराश है. ग़ुस्सा इस क़दर है कि वो आमिर स्टारर इस फिल्म को कोर्ट में भी घसीट सकता है. आख़िर कौन है वो और क्यों दंगल को असली अखाड़े में खींचना चाहता है.

दंगल वालों ने चीटिंग की!
जी हां, वो कोई और नहीं, बल्कि गीता फोगट के रियल लाइफ कोच प्याराराम सोंधी हैं. दंगल देखने के बाद सोंधी आमिर ख़ान समेत फिल्म के बाकी मेकर्स से काफ़ी नाराज़ दिखे. सोंधी का कहना है कि फिल्म की शूटिंग पर गए थे, लेकिन इस तरह के किसी सीन की बात मेकर्स ने नहीं की. इस तरह से फिल्म में दिखाए गए कई सीन पूरी तरह से ग़लत हैं.

आख़िर किस सीन को लेकर भड़के सोंधी?
दरअसल, फिल्म के एक सीन में गीता फाइनल खेलने जाती हैं, तो कोच गीता के पिता महावीर फोगट को कमरे में बंद करवा देते हैं. कोच नहीं चाहते थे कि गीता की सफलता का श्रेय उनके पिता को मिले. सोंधी की माने, तो ऐसा कुछ भी नहीं था. फोगट परिवार से उनका रिश्ता बहुत अच्छा है और इस तरह की बात नहीं थी. ऐसा फिल्म को और रोचक बनाने के लिए दिखाया गया है. इसी तरह फिल्म के एक सीन में गीता फोगट के कोच के रूप में प्रमोद कदम को दिखाया गया है, जबकि सोंधी की माने, तो उस समय वो ही फोगट के कोच थे.

फोगट फैमिली क्या कहती है?
अगर बात फोगट सिस्टर्स और फैमिली की की जाए, तो उनका कहना अलग है. वो तो फिल्म देखने के बाद ही कहने लगे थे कि फिल्म का 99% भाग उनकी रियल लाइफ से जुड़ा है. उनकी ज़िंदगी में जो हुआ, वही दिखाया गया है.

हालांकि सोंधी की इस बात पर अभी आमिर ख़ान और फोगट फैमिली को ओर से कोई रिऐक्शन नहीं आया है. सोंधी फिल्म से इस क़दर नाराज़ हैं कि वो लीगल ऐक्शन लेने के बारे में भी सोच रहे हैं. वैसे हमें नहीं पता कि इस पूरे मामले की सच्चाई क्या है, लेकिन इतना तो ज़रूर है कि फिल्म के एक अन्य सीन को लेकर भी विवाद चल रहा था, जिसमें गीता फोगट के फाइनल फाइट को फिल्म में संघर्षपूर्ण बताया गया है, जबकि असल में वो शानदार तरी़के से जीत दर्ज करते हुए गोल्ड मेडल जीती थीं.

श्वेता सिंह