Kids Care

 

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अक्सर पैरेंट्स प्यार-दुलार में बच्चों को ऐसी चीज़ें मुहैया कराने में लगे रहते हैं, जिनका उनकी सुरक्षा और मनोरंजन से कोई लेना-देना नहीं होता. घर में बच्चों की सुरक्षा का किस तरह से ख़्याल रखें, आइए, इसके बारे में जानते हैं.

 

क्या आपने इस बात की तसल्ली कर ली है कि वो घर जिसे आपने ज़रूरत के हर समान से सजाया है, वह घर के सबसे छोटे सदस्य यानी बच्चे के लिए भी अनुकूल है? या फिर घर में बच्चों की सुरक्षा का भी ख़्याल रखा गया है. इसलिए एक बार घर को बच्चों की नज़र से भी देख लें. कहीं कोई अनजान ख़तरा बच्चों की तरफ़ क़दम तो नहीं बढ़ा रहा? आइए, इन्हीं बातों पर नज़र डालें.

* बच्चों के लिए घर तैयार करने से पहले उनकी तीन बातों को समझना ज़रूरी है- पहला उनका खेलना, दूसरा उनके खाने-पीने, सोने आदि रोज़मर्रा की दिनचर्या और तीसरा चोट व अन्य बीमारियों सेउनकी सुरक्षा.
* कम ऊंचाई और कोनों से गोलाई लिए फर्नीचर को घर में रखना अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करें.
* दीवारों पर नॉन टॉक्सिक पेंट्स लगाएं.
* दरअसल, सोते हुए बच्चों का पलटी मारना, चलना-गिरना स्वाभाविक क्रिया है, इसलिए कमरे में अधिक ऊंचाई का फर्नीचर न रखें. यानी जब बच्चे बहुत छोटे हों, तब कमरे में रखा बेड और सोफा छह इंच से अधिक ऊंचा न रखें, क्योंकि अनजाने में यदि बच्चा पलंग से गिरे भी, तो उसे अधिक चोट न आए.
* परदे की डोरी कई बार छोटे बच्चों के लिए ख़तरा बन जाती है, क्योंकि इससे खेल-खेल में गला घुटने की संभावना रहती है.
* किचन में गैस के क़रीब छोटे स्टूल/कुर्सी न रखें. कभी भी बच्चा इस पर चढ़कर गैस के बटन से छेड़छाड़ कर सकता है.
* यदि बच्चा बहुत छोटा है, तो घर की खिड़कियों में जाली और सीढ़ियों के पास हो सके, तो बेबी गेट लगवाएं.
* ज़मीन पर पानी गिरा हुआ न रहने दें. असावधानीवश बच्चे के फिसलने से चोट लगने या फ्रैक्चर होने का डर रहता है.
* टेबल या स्टैंड फैन न रखें. बच्चा बटन दबाकर फैन ऑन कर सकता है या उसकी उंगलियां पंखे में आ सकती हैं.
* ड्रेसिंग टेबल पर बाहर की तरफ़ क्रीम, पाउडर, सिंदूर आदि न रखें. बच्चा इन्हें मुंह में डाल सकता है, जो कभी-कभी जोख़िमभरा हो सकता है.
* मेनडोर खुला न रखें. बच्चे का हाथ दरवाज़े में आ सकता है या फिर बच्चा घर के बाहर निकलकर सीढ़ियों से नीचे गिर सकता है.
* इलेक्ट्रिक स्विच बोर्ड दीवारों पर नीचे की तरफ़ न लगाएं, बच्चे उनके बटन से खेलते हैं या फिर प्लग के साथ छेड़खानी करते हैं.
* किसी भी प्लग के ऊपर प्लास्टिक का आउटलेट लगाना एक सस्ता तरीक़ा है, पर यह ध्यान रहना चाहिए कि प्लग के यूज़ के बाद कवर को वापस लगा दें.
* यदि बालकनी है, तो रेलिंग में ग्रिल/जाली ज़रूर लगाएं, वरना बच्चे के गिरने का डर रहता है.
* आयरन, टोस्टर आदि ज़मीन पर ऑन करके इधर-उधर न जाएं, अनजाने में बच्चा जल सकता है.
* तमाम चीज़ें तभी आपको सुकून देंगी, जब घर में साफ़-सफ़ाई की उचित व्यवस्था होगी. हाइजीन का अच्छा स्तर बच्चों को कई तरह के इंफेक्शन से बचाता है.
* बाथरूम को हमेशा साफ़-सुथरा रखें.
* मोबाइल फोन, टेबलेट, आई पैड आदि छोटे बच्चों की पहुंच से दूर रखें. वे इनसे छेड़छाड़ करते हुए ख़ुद को नुक़सान पहुंचा सकते हैं.
* छोटे बच्चे किसी भी चीज़ को अपने मुंह में रख लेते हैं और इसका प्रभाव काफ़ी बुरा हो सकता है.
* इस बात का ध्यान रखें कि इस्तेमाल की हुई दवाइयां या ख़तरनाक केमिकल को कूड़े में डालकर उस पर कसकर ढक्कन लगा दें.
* इन्हें किचन या बाथरूम के डस्ट बिन में न डालें, जहां आपका बच्चा आसानी से पहुंच सकता है.

– ऊषा गुप्ता

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क्या आपको लगता है कि सुबह के 9 बजे तक घर का काम निपटाते-निपटाते आप मैराथॉन दौड़ आई हैं. आजकल की व्यस्त ज़िंदगी में जहां बच्चों की परवरिश मुश्किल होती जा रही है, उससे भी ज़्यादा मुश्किल होता है एक मां के लिए दिनचर्या को नियंत्रित कर पाना. सूरज उगने से पहले पूरे परिवार के लिए खाना बनाना, बच्चों का टिफिन तैयार करना, उन्हें स्कूल के लिए तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं होता. एक नौकरीपेशा मां के लिए ये काम और भी मुश्किल होता है. आपकी मुश्किल को आसान बनाने के लिए सुषमा विश्‍वकर्मा बता रही हैं कुछ कारगर टिप्स.

अक्सर मम्मियों को बातें करते देखा जाता है कि किस तरह उन्हें रात से ही सुबह की चिंता रहती है कि वो समय से उठ पाएंगी या नहीं, टिफिन तैयार कर पाएंगी या नहीं, कहीं आज बच्चे को स्कूल जाने में देर न हो जाए आदि. हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ आसान तरी़के, जिससे आपकी हर सुबह होगी सुकून भरी और ख़ुशहाल नींद हो पूरी बच्चों को हैंडल करना आसान काम नहीं है. सुबह के समय तो सारा काम एक तरफ़ और बच्चा एक तरफ़. आप अगर चाहती हैं कि आपका बच्चा समय पर उठे और नखरे न करे, तो उसके लिए आपको उसे जल्दी सोने की आदत सिखानी होगी. रात में जल्दी सोने पर सुबह वह समय पर उठ जाएगा. उसकी नींद पूरी हो जाएगी और वह आपको परेशान नहीं करेगा.
रात में ही करें तैयारी सुबह के नाश्ते और बच्चों के टिफिन की तैयारी रात में ही कर लें. जो सब्ज़ी सुबह बनानी है, उसे रात में काटकर रखें आटा गूंध लें. यूनिफॉर्म रात में ही तैयार करके रखें, ताकि सुबह उठने के बाद आपको यूनिफॉर्म रेडी करने का टेंशन न रहे. शूज़, वॉटर बॉटल, बैग, टिफिन, सब जगह पर रखें, जिससे आपको सुबह उठकर इन चीज़ों को ढूंढ़ना न पड़े. रात में की गई ये तैयारी सुबह आपके क़ीमती समय को बचाने में मदद करेगी.

जल्दी उठें

बच्चों के रूटीन के साथ-साथ आप अपना भी एक रूटीन बनाएं. बच्चों के उठने से पहले का अलार्म लगाएं, ताकि उनके उठने से पहले आप सभी ज़रूरी काम निपटा लें. इत्मिनान से एक कप चाय पी लें और दिन की शुरुआत बेहतर तरी़के से कर पाएं. सुबह जल्दी उठने से आप टेंशन फ्री रहेंगी और आपका पूरा दिन अच्छा बीतेगा.

वर्कलिस्ट बनाएं

अपने हर काम की लिस्ट तैयार करें. बच्चे को क्या-क्या काम करना है, रात में उसे एक पेपर पर लिखकर बच्चे के कमरे में चिपका दें. इससे सुबह बच्चा उस लिस्ट को फॉलो करके आधा काम ख़ुद ही कर लेगा और बचा हुआ काम आप कर सकती हैं. उदाहरण के लिए ब्रश करना है, नहाना है, यूनिफॉर्म पहननी है, बालों में कंघी करनी है, नाश्ता करना है, जूते पहनने हैं, अपना बैग तैयार करना है, लंचबॉक्स लेना है, पानी की बोतल लेनी है आदि. इन कामों की एक लिस्ट बनाएं और बच्चे को समझाएं. बच्चे को बताएं कि हर दिन सुबह उठकर उसे ये सारे काम ख़ुद करने हैं. हो सकता है, एक-दो दिन बच्चा काम करने में कुछ भूल जाए, लेकिन यक़ीन मानिए, कुछ दिनों बाद उसकी दिनचर्या सेट हो जाएगी.

जब तब का फॉर्मूला अपनाएं

सुनकर अजीब लगता है, लेकिन ये जब तब का फॉर्मूला बहुत कारगर सिद्ध हो सकता है, अगर आप अच्छी तरह इसे फॉलो करें. आप पता करें कि सुबह आपके बच्चे को क्या काम करने में मज़ा आता है? जैसे- अगर आपके बच्चे को नहाना पसंद है, तो उसे आप अपनी लिस्ट में सबसे पहले शामिल करें. फिर उससे कहें कि जब आप ब्रश कर लेंगे तब आपको नहाना है. अगर बच्चे को ब्रेकफास्ट करना पसंद है, तो उससे कहें कि आप जल्दी से ये काम कर लो फिर आपको ब्रेकफास्ट मिलेगा. इससे वो भी ख़ुशी-ख़ुशी और जल्दी-जल्दी काम करेगा. डॉ. नताशा नितिन साटम ने भी जब तब का फॉर्मूला अपनाया है. उनकी बेटी को गार्डन में खेलना बहुत पसंद है, इसीलिए जब वो अपनी बेटी को सुबह उठाती हैं, तो उसे गार्डन में चलने की बात कहती हैं. इससे उनकी बेटी ख़ुश हो जाती है और सारे काम जल्दी-जल्दी कर लेती है. इस जब तक की प्रक्रिया से उनकी सुबह टेंशन में नहीं, बल्कि ख़ुशी-ख़ुशी बीतती है.

कूल मॉम बनें

आज के बच्चे हमारे भी गुरु होते हैं. ऐसे में उनके साथ अगर शांति से पेश नहीं आया जाए, तो वो ग़लत तरह से ब्लैकमेल करते हैं. वैसे भी एक कहावत है कि जल्दबाज़ी में हर काम बिगड़ जाता है. सुबह-सुबह जल्दबाज़ी में काम करना, बच्चे पर चिल्लाना, ज़बर्दस्ती उसके हाथ में दूध का ग्लास पकड़ाना, उसे जल्दी-जल्दी नाश्ता खिलाना आदि बच्चे पर बुरा असर डालता है. इससे बच्चे को ऐसा लगने लगता है कि इन कामों की वजह से आपको टेंशन होती है. इसके कारण बहुत जल्द बच्चा इसके विपरीत काम करने लगता है. कई बार स्कूल जाने से भी आनाकानी करता है.

मॉम टाइम

सुबह के समय बच्चे को आपका साथ ज़्यादा चाहिए होता है. वो चाहता है कि आप उसे दुलारते और प्यार करते हुए गोद में लेकर जगाएं, उसे प्यार से सहलाएं, पप्पियां लें. जब बच्चे की सुबह इस तरह से होती है, तो उसका पूरा दिन बहुत अच्छा गुज़रता है. अतः सुबह किचन से ही ज़ोर से चिल्लाकर बच्चे को जगाने की कोशिश न करें. घर के किसी दूसरे मेंबर से भी जगाने को न कहें. ख़ुद ही स़िर्फ 5 मिनट बच्चे को दें.

वीकेंड को बनाएं स्पेशल

हफ़्ते के 5-6 दिन बच्चे के साथ-साथ आपकी दिनचर्या भी एक-सी रहती है. ऐसे में सप्ताह के आख़िरी दिन यानी छुट्टी को दिलचस्प बनाने की पूरी कोशिश करें. इस एक दिन बच्चे के साथ-साथ आप भी देर तक सोएं. सबकी पसंद का खाना बनाएं. छुट्टी के दिन काम की लिस्ट को फॉलो न करें. बच्चे का जो मन करे, उसे करने दें. शाम को उसे मार्केट ले जाएं. थोड़ी आउटिंग करें.

स्मार्ट टिप्स
बच्चों के स्कूल जाने के बाद कुछ मिनट के लिए रिलैक्स करें. इसके लिए आप अपना फेवरेट म्यूज़िक सुनें.
अगर सुबह के समय को आप अच्छी तरह मैनेज नहीं कर पा रही हैं और आपकी पड़ोसन इसमें परफेक्ट है, तो आप भी उसकी तरह काम करने की कोशिश करें.
होम केयर या पैरेंटिंग की जानकारी हासिल करने के लिए अच्छी मैगज़ीन पढ़ें या टीवी शो देखें.
जॉइंट फैमिली है, तो सासू मां से कुछ हेल्प लें. आमतौर पर बच्चे अपनी दादी से ज़्यादा जुड़े होते हैं. ऐसे में वो उनसे ही तैयार होना, खाना खाना आदि पसंद करते हैं.