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लोग क्या कहेंगे का डर क्यों नहीं निकलता जीवन से? (Stop Caring What Others Think)

Others Think
लोग क्या कहेंगे का डर क्यों नहीं निकलता जीवन से? (Stop Caring What Others Think)

–    अरे, ये क्या पहना है? लोग देखेंगे, तो क्या कहेंगे…?

–    रीना, तुम लड़की होकर इतनी ज़ोर-ज़ोर से हंसती हो, तमीज़ नहीं है क्या, लोग क्या कहेंगे?

–    शांतनु, तुम दिनभर क्लासिकल डांस की प्रैक्टिस में लगे रहते हो, लोग क्या कहेंगे कि शर्माजी का बेटा लड़कियोंवाले काम करता है…

–    गुप्ताजी के दोनों बच्चे डॉक्टरी कर रहे हैं, तुम दोनों को भी इसी फील्ड में जाना होगा, जमकर पढ़ाई करो…

…इस तरह की बातें हम अक्सर सुनते और ख़ुद भी कहते आए हैं, क्योंकि हम समाज में रहते हैं और ऐसे समाज में रहते हैं, जहां दूसरे क्या सोचेंगे, यह बात ज़्यादा मायने रखती है, बजाय इसके कि हम ख़ुद क्या चाहते हैं. हम ‘लोग क्या कहेंगे’ की चिंता में इतने डूबे रहते हैं कि अपने अस्तित्व को ही भूल जाते हैं. कपड़ों से लेकर खान-पान, करियर व शादी-ब्याह जैसे निर्णय भी दूसरे ही हमारे लिए अधिक लेते हैं.

दूसरे इतने अपने क्यों?

–    “रिंकू, तुम्हारी अधिकतर सहेलियों की शादी हो गई है, तुम कब तक कुंआरी रहोगी? अक्सर सोशल गैदरिंग में सब पूछते रहते हैं कि बेटी की शादी कब करोगे… हम क्या जवाब दें उन्हें?”

“मॉम, आप तो जानती हैं कि मैं अभी अपने करियर पर फोकस करना चाहती हूं, शादी के बारे में सोचा भी नहीं… दूसरों का क्या है, वो तो कुछ भी पूछते रहते हैं…” रिंकू ने मम्मी को समझाने की कोशिश की.

–    “मिसेज़ वर्मा बता रही थीं कि उनकी बेटी ने इतनी डिग्रियां ले लीं कि अब उसके लिए उसके स्तर का लड़का ढूंढ़ना मुश्किल हो गया है. सोनल, तू भी पीएचडी शादी के बाद ही करना, क्योंकि ज़्यादा पढ़-लिख  जाओगी,  तो  लड़के  मिलने  मुश्किल हो जाएंगे…”

“लेकिन मम्मी, पढ़ाई करना ग़लत बात थोड़ी है, स़िर्फ शादी को ध्यान में रखते हुए तो हम ज़िंदगी के निर्णय नहीं ले सकते. वैसे भी मैं तो शादी ही नहीं करना चाहती. इसमें दूसरों को क्यों एतराज़ है? ये मेरी ज़िंदगी है, जैसे चाहे, वैसे जीऊंगी…” सोनल ने भी अपनी मम्मी को समझाने की कोशिश की…

शर्माजी के बेटे ने भी घरवालों को समझाने की कोशिश की कि क्लासिकल डांस स़िर्फ लड़कियां ही नहीं, लड़के भी कर सकते हैं और वो इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहता है, लेकिन उसके पैरेंट्स यह समझने को तैयार ही नहीं थे. उन्हें अपने बेटे के सपने पूरे करने में उसका साथ देने की जगह लोक-लाज की फ़िक़्र थी कि लोग क्या कहेंगे… दूसरे उनका मज़ाक उड़ाएंगे… आदि… लेकिन इन सभी पैरेंट्स को इस बात की अधिक चिंता थी कि लोग क्या कहेंगे… बच्चों ने उन्हें समाज से नज़रें मिलाने के काबिल नहीं छोड़ा… दरअसल, हम समाज की और दूसरों की इतनी ज़्यादा परवाह करते हैं कि हमारी ज़िंदगी में हस्तक्षेप करना वो अपना अधिकार समझने लगते हैं. अक्सर हमारे निर्णय दूसरों की सोच को ध्यान में रखते हुए ही होते हैं.

हमारी पहली सोच यह होती है कि रिश्तेदार और आस-पड़ोसवाले इन बातों पर कैसे रिएक्ट करेंगे…

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Office Gossip

इतना डर क्यों लोगों का?

–    हमारी सामाजिक संरचना शुरू से ही ऐसी रही है और इसी संरचना में हम भी

पले-बढ़े हैं, जिससे अंजाने में ही यह डर हमारी सोच का हिस्सा बन जाता है.

–    हर बात को हम अपनी इज़्ज़त और खानदान से जोड़कर देखते हैं, यही वजह है कि अधिकतर निर्णय हम सच जानते हुए भी नहीं ले पाते, क्योंकि हममें इतनी हिम्मत ही नहीं होती.

–    बेटी की सगाई तो कर दी, पर शादी की तैयारियों के बीच यह पता लगा कि जहां शादी होनेवाली है, वो लोग लालची हैं. ऐसे में पैरेंट्स उनकी डिमांड पूरी करने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा देते हैं और यहां तक कि लड़कियां भी सब कुछ जानते हुए निर्णय लेने से कतराती हैं, क्यों? …क्योंकि सगाई टूट गई, तो लोग क्या कहेंगे? समाज में बदनामी हो जाएगी, बेटी को कोई दूसरा लड़का नहीं मिलेगा… आदि… इत्यादि…!

–    इसी डर की वजह से लड़कियां असफल शादियों को भी निभाती हैं, क्योंकि हमारा समाज आज भी तलाक़शुदा महिलाओं को अच्छी नज़र से नहीं देखता.

–    हम पर सोशल प्रेशर इतना ज़्यादा हावी रहता है कि हम उसे ही पैमाना मानते हैं और फिर ज़िंदगी से जुड़े अत्यधिक निजी ़फैसले भी उसी के अनुसार लेते हैं.

–    हमें यह सब सामान्य लगता है, क्योंकि हम शुरू से यही करते व देखते आए हैं. पर दरअसल, यह बेहद ख़तरनाक है.

–    समाज की मानसिकता भी इस डर को और बढ़ाती है. देश में खाप पंचायतों के कई निर्णयों ने भी यह दिखा दिया है कि किस तरह से पुलिस-प्रशासन भी बेबस नज़र आता है सामाजिक दबाव के चलते.

–    इस तरह की घटनाएं आम लोगों के मन में और भी दबाव व डर को बढ़ाती हैं, जिससे उन्हें भी यही लगता है कि हर छोटे-बड़े निर्णयों में समाज की सोच का भी ख़्याल रखना ज़रूरी है.

–    कॉलेजेज़ से लेकर कई नेताओं तक ने लड़कियों के जींस पहनने व मोबाइल फोन रखने को उनके बलात्कार का कारण मानकर इन पर रोक लगाने की बात कई बार कही है.

–    लड़कियों के पहनावे पर कई तरह की बातें अभी भी होती हैं, जबकि हम ख़ुद को एडवांस सोसायटी मानने लगे हैं.

–    ये बातें हमारे मन में भी इतनी हावी हो जाती हैं कि हमें भी लगता है कि बच्चियों को सुरक्षित रखने का बेहतर तरीक़ा यही है कि जो समाज सोचे, वही हम भी करें.

inquisitive

कैसे निकलेगा यह डर?

–    सीधी-सरल बात है कि अपनी सोच बदलिए, समाज की सोच भी बदलती जाएगी.

–    जहां जवाब देना सही लगे, वहां बोलने से हिचकिचाएं नहीं.

–    समाज की सोच के विपरीत बोलना मुश्किल ज़रूर होता है, पर यह नामुमकिन नहीं है.

–    बात जहां सही-ग़लत की हो, तो लोग भले ही कुछ भी सोचें, हमेशा सही रास्ता ही सही होता है.

–    समाज आपकी ज़िंदगी की मुश्किलों को आसान करने कभी नहीं आएगा. वो मात्र दबाव बना सकता है, हमें उनके अनुसार निर्णय लेने के लिए बाध्य करने की कोशिश कर सकता है, हम पर हंस सकता है, हमारी निंदा कर सकता है. लेकिन इन बातों से इतना प्रभावित नहीं होना चाहिए कि अपनी ज़िंदगी से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय भी हम उन्हीं के अनुसार लें.

–    लोग क्या कहेंगे, यह सोचकर हम अपनी या अपने बच्चों की ख़ुशियां, उनके सपनों को छोड़ नहीं सकते, वरना यह डर हमारे बाद हमारे बच्चों के दिलों में भी घर कर जाएगा और यह सिलसिला चलता ही रहेगा.

–    बेहतर होगा अपनी सोच व अपने निर्णयों पर दूसरों को हम इतना हावी न होने दें कि हमारा ख़ुद का अस्तित्व ही न रहे.

–    हमें क्या करना है, कैसे करना है यह हमें ही तय करना है. हां, दूसरों की सहायता ज़रूर ली जा सकती है. अगर कहीं कोई कंफ्यूज़न है तो… लेकिन अंतत: हमें ही रास्ता निकालना है.

– गीता शर्मा

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तैमूर और इनाया का क्यूट रक्षाबंधन… देखें तस्वीरें (Taimur And Morning Inaaya Celebrate Rakshabandhan)

Taimur and Inaaya

तैमूर और इनाया का क्यूट रक्षाबंधन… देखें तस्वीरें ( Taimur And Morning Inaaya Celebrate Rakshabandhan)

तैमूर और इनाया लग रहे हैं बेहद क्यूट और लगें भी क्यूं ना आख़िर वो सेलिब्रेट कर रहे हैं रक्षाबंधन, आप भी देखें तस्वीरें

Saif Ali Khan's Rakshabandhan

Taimur

Taimur

Taimur Rakshabandan

Taimur

मॉमी सोहा के साथ क्यूट इनाया के वायरल पिक्स (Viral Pics: Cute Inaya With Mom Soha Ali Khan)

Cute Inaya With Mom Soha Ali Khan

 

Cute Inaya With Mom Soha Ali Khan

मॉमी सोहा के साथ क्यूट इनाया के वायरल पिक्स (Viral Pics: Cute Inaya With Mom Soha Ali Khan)
क्या आपने देखे हैं इनाया के लेटेस्ट पिक्स? अगर नहीं, तो अब देख लीजिए. जी हां, इनाया भी फेवरेट सेलिब्रिटी किड बन चुकी हैं और उनकी क्यूटनेस के सभी दीवाने हैं, इसीलिए वो जहां भी जाती हैं अपनी मॉम के साथ कैमरे की नज़रों ने नहीं बच पातीं. आप भी देखिए कितनी प्यारी हैं बेबी इनाया…

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हेल्दी रिलेशनशिप के लिए छोड़ें भावनाओं की ‘कंजूसी’ (Express Yourself For A Healthy Relationship)

Healthy Relationship

बच्चों के साथ कुछ पल मौज-मस्ती, बड़ों के साथ बैठकर बोलने-बतियाने की चाहत, पार्टनर के साथ चंद सुकून के पल… ऐसी न जाने कितनी हसरतें हैं, जिन्हें पूरा करने की ख़्वाहिश रखते हैं हम, पर न जाने कहां इतने बिज़ी हैं कि अपनी भावनाओं को अपनों तक पहुंचा ही नहीं पाते. क्या सचमुच इतने बिज़ी हो गए हैं हम या फिर भावनाओं की कंजूसी करने लगे हैं? क्या है भावनाओं की कंजूसी के कारण और कैसे छोड़ें ये कंजूसी आइए जानते हैं.

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क्यों करते हैं हम भावनाओं की कंजूसी?

–  करियर में आगे, और आगे बढ़ने की होड़ लगी है.

– हर कोई अपनी आर्थिक स्थिति को अच्छी से बेहतर और बेहतर से बेहतरीन करने में लगा है.

– ख़ुद को बेस्ट साबित करने में हम सबने अपना सर्वस्व लगा दिया है.

– बिज़ी लाइफस्टाइल और तनाव हमारी सेहत को भी नुक़सान पहुंचा रहा है.

– अपनों से ज़्यादा अपनी भावनाओं को तवज्जो देने लगे हैं.

हम सभी मानते हैं कि हमारी ज़िंदगी बहुत तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही है, सब कुछ बहुत तेज़ी से बीत रहा है, घर चलाने की जद्दोज़ेहद में बहुत कुछ छूट रहा है, पर क्या किसी ने यह सोचा कि अपने और अपनों के लिए दौड़ते-भागते हम उनसे दूर तो नहीं निकल आए? ज़िंदगी जीने की कला कहीं भूलते तो नहीं जा रहे हैं?

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तय करें अपनी प्राथमिकताएं

हर किसी को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और प्राथमिकताओं की फेहरिस्त में परिवार सबसे पहले होना चाहिए. हेल्दी रिलेशनशिप के लिए सबसे ज़रूरी है अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करना. परिवार के सभी सदस्यों में आपसी प्यार-विश्‍वास और अपनापन यही तो हमारे परिवार और जीवन की पूंजी है, इसे प्राथमिकता दें. ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जहां कामयाब लोगों ने इस बात को सबसे ज़्यादा अहमियत देने की बात कही है, तो आप भी ‘फैमिली कम्स फर्स्ट’ के स्लोगन को अपना लें और ज़िंदगी को एक नए नज़रिए से देखने की कोशिश करें.

बड़ों की हंसी कमाएं

पैसे तो हम सभी कमाते हैं, पर अपने परिवार की हंसी कितनी कमाते हैं? कोशिश करें रोज़ाना रात को खाना खाने के बाद कुछ देर अपने पैरेंट्स के साथ बैठें. उनसे बातें करें, उनका हालचाल लें और ऑफिस का कोई फनी क़िस्सा उन्हें सुनाएं या फिर कोई जोक सुनाएं, जिसे सुनकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाए. आपके पैरेंट्स की मुस्कुराहट ही आपकी उस दिन की असली कमाई है.

बच्चे हैं बेस्ट ‘बैटरी चार्जर’

माना कि आप दिनभर के काम के बाद थक गए हैं और आपकी बैटरी डाउन है, पर क्या आप जानते नहीं कि बच्चे बेस्ट चार्जर होते हैं? तो जाइए, बच्चों को गुदगुदाएं, उनके साथ खेलें, उन्हें घुमाकर लाएं और अपने साथ-साथ बच्चों को भी दिन का बेस्ट टाइम दें.

पार्टनर के लिए है शरारतें

पति हो या पत्नी हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर उनकी भावनाओं को समझे. पार्टनर को समय दें, उसके साथ व़क्त बिताएं. पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार-विश्‍वास के साथ-साथ थोड़ी शरारत और थोड़ी छेड़छाड़ भी ज़रूरी है. ये शरारतें ही आपकी रूटीन लाइफ को रोमांटिक बनाती हैं, तो थोड़ी भावनाएं रोमांस में भी ख़र्च करें और अपनी मैरिड लाइफ को मज़ेदार व रोमांटिक बनाएं.

भाई-बहनों पर इंवेस्ट करें प्यार-दुलार

कभी शिकायतें, तो कभी टांग खिंचाई, कभी लड़ाई-झगड़े, तो कभी प्यार-दुलार- भाई-बहनों का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है. अपनी रोज़मर्रा की भागदौड़ में अगर आप एक-दूसरे से दूर हो गए हैं, तो रोज़ाना एक बार फोन पर बात ज़रूर करें. वीकेंड पर मिलें और अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करें. भावनाओं में इंवेस्टमेंट का आपको प्यार-दुलार का अच्छा-ख़ासा रिटर्न मिलेगा, जो आपकी ज़िंदगी में ख़ुशहाली लाएगा.

दोस्तों की यारी पर करें न्योछावर

फैमिली के बाद फ्रेंड्स ही तो हमारे सबसे क़रीब होते हैं. कोई प्रॉब्लम शेयर करनी हो, एंजॉय करना हो या फिर गॉसिप करनी हो, दोस्तों से बेहतर कौन हो सकता है. सोशल मीडिया के इस ज़माने में दोस्तों से कनेक्टेड रहना बहुत आसान है, तो क्यों न अपने बिज़ी रूटीन से थोड़ा व़क्त निकालकर अपने दोस्तों तक अपनी भावनाएं पहुंचाई जाएं.

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कंजूसी छोड़ें, दिल खोलकर लुटाएं भावनाएं

– पैरेंट्स और घर के अन्य बड़ों को जब भी मौक़ा मिले ‘थैंक्यू’ कहना न भूलें. आपको उनकी परवाह है और उनके त्याग और समर्पण का एहसास है, यह उन्हें जताने में कभी कंजूसी न करें.

– बड़ों की तरह छोटों को भी उनके हिस्से का प्यार और दुलार दें. भावनाओं को स़िर्फ खाने-पीने और खिलौनों के ज़रिए ही नहीं, संस्कारों और डांट-डपट के ज़रिए भी ज़ाहिर करें.

– घरवालों को बर्थडे-एनीवर्सरीवाले दिन स्पेशल फील कराएं. उसके साथ दिन बिताकर या उसका मनपसंद खाना खिलाकर भी आप अपनी भावनाएं उस तक पहुंचा सकते हैं.

– कहते हैं ‘टच थेरेपी’ में बहुत ताक़त होती है. यह आपकी पॉज़िटिव फीलिंग्स को सामनेवाले तक बख़ूबी पहुंचाती है, तो फैमिली मेंबर्स को गले लगाना और शाबासी देना जैसी चीज़ें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करें.

– पैरेंट्स, पार्टनर और बच्चों को दिन में एक बार ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें. अक्सर हमें लगता है कि प्यार तो करते हैं, फिर जताने की क्या ज़रूरत है, पर याद रहे, प्यार का स़िर्फ होना काफ़ी नहीं, प्यार को समय-समय पर ज़ाहिर भी करते रहना ज़रूरी है.

– बच्चों की तरह बड़ों के लिए भी प्ले टाइम बनाएं. घर के बड़ों को उनका फेवरेट इंडोर या आउटडोर गेम्स खेलने के लिए उत्साहित करें और सारा इंतज़ाम ख़ुद करें.

– परिवार के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने का बेस्ट तरीक़ा है कि सब साथ बैठकर खाना खाएं. हर किसी को घर में फैमिली डिनर टाइम बनाना चाहिए और हर किसी को उसके नियम का पालन भी करना चाहिए. यही वो समय होता है, जब पूरा परिवार एक साथ होता है और आप अपनी बात सबके साथ शेयर कर सकते हैं.

– परिवार के किसी सदस्य से अगर मनमुटाव या अनबन हो गई है, तो बैठकर उससे बात करें और अपना नज़रिया और पक्ष उसके सामने रखें. मन में कोई गुबार न रखें. अक्सर न कह पाने के कारण छोटी-छोटी बातें रिश्तों में दरार डाल देती हैं, इसलिए आप ऐसा न होने दें और यहां भी भावनाओं की कंजूसी न करें.

– फैमिली को स्पेशल फील कराने के लिए वीकली फैमिली नाइट रखें. वीकेंड पर या छुट्टी की रात कुछ ख़ास करें. मूवी देखें, नाटक देखने जाएं, अंताक्षरी खेलें या फिर बैठकर गप्पे मारें.

– भावनाओं को खुलकर शेयर करने के लिए मंथली प्लान भी बनाएं. महीने में एक बार परिवार को कहीं घुमाने ले जाएं या फिर कुछ ख़ास करें.

– याद रखें, दूसरों को ख़ुश करने का मौक़ा कभी हाथ से न जाने दें. अगर आपको पता है कि आपके एक फोन कॉल या मैसेज से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ सकती है, तो ऐसा ज़रूर करें.

– दूसरों के साथ-साथ अपने लिए भी भरपूर भावनाएं लुटाएं. ख़ुद को ख़ुश रखने और पैंपर करने का कोई मौक़ा न गंवाएं, क्योंकि ख़ुशियां तभी बांट पाएंगे, जब आप ख़ुद ख़ुश रहेंगे.

– नाते-रिश्तेदारों को भी कभी-कभार याद कर लेंगे, तो वो ख़ुश हो जाएंगे.

– हमसे बहुत-से लोगों को बहुत-सी उम्मीदें होती हैं, सभी तो नहीं, पर कुछ की उम्मीदें तो हम ज़रूर ही पूरी कर सकते हैं.

– अनीता सिंह

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किड्स टूर: टॉप 4 किड्स डेस्टिनेशन्स (Kids Tour: Top 4 Kids’ Destinations)

Kids Destinations

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सालभर की पढ़ाई के बाद बच्चों के लिए अगला दो महीना सुकून भरा रहता है. ऐसे में कभी नानी के घर, तो कभी बुआ के घर जाकर वो अपनी छुट्टी का आनंद उठाते हैं. इस बार की छुट्टी में अपने बच्चों को ऐसी जगहों की सैर कराएं, जिससे उनका फन टाइम बन जाए और भी ख़ास. आज पढ़ाई का बोझ इतना बढ़ गया है कि बच्चों को कुछ और बताने या सिखाने के लिए समय ही नहीं मिलता. स्कूल से कोचिंग क्लास और फिर घर में सेल्फ स्टडी, इसी चक्कर में आज के बच्चों का बचपन बीत रहा है. पैरेंट्स होने के नाते आपकी ये ज़िम्मेदारी बनती है कि बच्चों को अपनी सभ्यता और संस्कृति के बारे में बताएं. तो चलिए इस माह हमारे साथ एक ऐसे ट्रिप पर जो आपके बच्चों का मनोरंजन करने के साथ ही उनका नॉलेज भी बढ़ाएगा.

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प्रकृति की गोद में बसा तेनमला
केरल का तेनमला भारत का पहला प्लान्ड ईको-टूरिज़्म डेस्टिनेशन है. मलयालम में तेनमला का मतलब बहुत ही प्यारा होता है. ‘तेन’ का मतलब हनी और ‘मला’ का मतलब हिल. यानी हनी हिल. ऐसा माना जाता है कि यहां का शहद देश के बाकी इलाकों से बहुत अलग और स्वादिष्ट होता है. घने जंगलों और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से घिरा तेनमला पर प्रकृति मेहरबान है. हरे पहाड़ों से गिरते झरनों का दृश्य बेहद ख़ूबसूरत होता है. तेनमला में बिखरी हरियाली को देखकर ऐसा लगता है जैसे मानों तेनमला को किसी ने हरे रंग से रंग दिया हो. अपने बच्चों को असली भारत और ख़ासतौर पर प्रकृति की अनुपम छटा से रू-ब-रू करवाना चाहते हैं, तो तेनमला ज़रूर घुमाएं.

ज़रूर देखें
सस्पेंशन ब्रिज, पलारुवि वॉटरफॉल, म्यूज़िकल डांसिंग फाउंटेन, बटरफ्लाई सफारी पार्क आदि देखने ज़रूर जाएं.

कैसे पहुंचें?
तेनमला पहुंचने के लिए त्रिवेंद्रम सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट है और शेंकोट्टाह नज़दीकी रेलवे स्टेशन.

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ऐतिहासिक धरोहर दिल्ली
बच्चों का ऐतिहासिक ज्ञान बढ़ाने के लिए उन्हें दिल्ली की सैर ज़रूर कराएं. किस तरह से देश में बदलाव हुए ये दिल्ली की आबो हवा से पता चल जाएगा. यह दुनिया के प्रमुख पर्टन स्थल में से एक है. राजधानी होने के नाते देश के प्रमुख कार्यालय भी दिल्ली में ही हैं. इस शहर का महत्व न केवल इसके अतीत में राजाओं की गद्दी और भव्य महलों के कारण है, बल्कि इसकी संपन्नता और बहुमुखी संस्कृति के कारण भी है.

ज़रूर देखें
दिल्ली घूमने का मतलब है कि पूरे भारत की एक झलक आपको यहां मिल जाएगी. इन जगहों को ज़रूर देखें.
– लाल किला
– कुतुब मिनार
– जामा मस्जिद
– पुराना किला
– संसद भवन
– राष्ट्रपति भवन
– इंडिया गेट
– अक्षरधाम मंदिर
– बिरला मंदिर
– राजघाट आदि

कैसे पहुंचें?
हवाई, रेल और सड़क मार्ग से आप दिल्ली जा सकते हैं. इंदिरा गांधी इंटरनेशनल हवाई अड्डा और नई दिल्ली तथा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के साथ ही हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन यहां का मुख्य रेलवे स्टेशन है.

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एनिमल फ्रेंडली रणथंभौर
1980 में नेशनल पार्क में शामिल किया गया रणथंभौर उत्तर भारत के बड़े नेशनल पार्क में से एक है. स़िर्फ किताबों में ही जानवरों को देखने वाले अपने बच्चों की मुलाक़ात असली जानवरों से ज़रूर कराएं. ये उनके लिए बहुत ख़ास ट्रिप होगी. यहां पर चीता, तेंदुआ, हिरण, हाइना, मगरमच्छ, जंगली सुअर, जंगली बिल्लियां, लोमड़ी, नीलगाय जैसे और भी बहुत से जानवरों से भरा है ये पार्क. जानवरों के अलावा हज़ारों प्रजातियों के पक्षि भी इस पार्क की शोभा बढ़ाते हैं.

ज़रूर देखें
– रणथंभौर किला
– त्रिनेत्र गणेश मंदिर
– पदम तालाब
– जोगी महल
– सर्वल झील
– कचीदा वैली आदि

रणथंभौर से 160 किलोमीटर दूर जयपुर भी जाएं.
बच्चों को जयपुर की कुछ विशेष जगहों की सैर
ज़रूर कराएं. आमेर पैलेस, हवा महल,
जंतर-मंतर, जल महल, सिटी पैलेस,
राज मंदिर सिनेमा हॉल आदि
जगहों पर अपने बच्चों को
ज़रूर ले जाएं.

कैसे पहुंचें?
हवाई, रेल और सड़क मार्ग से आप रणथंभौर जा सकते हैं. सांगानेर हवाई अड्डा सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट और सवाई माधोपुर नज़दीकी रेलवे स्टेशन है.

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पानी की दुनिया अंडमान एंड निकोबार
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह अपने साफ़, शांत और सुंदर समुद्र तटों के लिए जाना जाता है. प्रदूषण से दूर कुछ दिन अपने बच्चों को यहां ज़रूर घुमाने ले जाएं. स्कूबा डाइविंग के ज़रिए पानी के अंदर के जीव-जंतुओं और पौधों को देखने का मौक़ा मिलता है. इसके साथ ही यहां के जंगलों में तरह-तरह के पक्षि और सुंदर फूल देखने को मिलते हैं.

ज़रूर देखें
– सेल्युलर जेल
– माउंट हैरियट
– रोज़ एंड स्मिथ आइलैंड
– रंगत द्वीप
– मायाबंदर
– मत्स्य संग्रहालय
– वन संग्रहालय
– महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क
– सीपीघाट पार्क
– जॉगर्स पार्क
– मधुबन

कैसे पहुंचें?
कोलकाता, भुवनेश्‍वर और चेन्नई से आप पोर्टब्लेयर के वीर सावरकर एयरपोर्ट के लिए सीधी उड़ान भर सकते हैं. चेन्नई, कोलकाता और विशाखापत्तनम से पोर्टब्लेयर के लिए समुद्री जहाज़ जाती है. समुद्री यात्रा में 50 से 60 घंटे लगते हैं.

पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या है हार्मोनल इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव? (How Good Is Hormonal Intrauterine Contraceptive (IUCD)?)

Hormonal Intrauterine Contraceptive

मेरा 2 साल का एक बच्चा है और फ़िलहाल मैं दूसरा बच्चा नहीं चाहती, इसलिए हार्मोनल इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव (IUCD) इंसर्ट करवाया है. डॉक्टर के मुताबिक़ हैवी ब्लीडिंग के मामले में यह एक उचित गर्भनिरोधक है. पर अगर यह एक अच्छा गर्भनिरोधक है, तो सभी महिलाएं इसका इस्तेमाल क्यों नहीं करतीं?

– समीरा यादव, कानपुर.

इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (IUCD) काफ़ी लोकप्रिय गर्भनिरोधक है. प्रोजेस्टेरॉन हार्मोंसयुक्त यह डिवाइस हैवी ब्लीडिंग वाली महिलाओं को दिया जाता है. यह एक स्पेशल डिवाइस है, क्योंकि इसके टी शेप प्लास्टिक फ्रेम के साथ हार्मोंस भी होते हैं. आप 5 साल तक इसका इस्तेमाल कर सकती हैं. दरअसल, महंगा होने के कारण यह बहुत लोकप्रिय नहीं हुआ है.

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Hormonal Intrauterine Contraceptive

मेरी नौंवें महीने की प्रेग्नेंसी के शुरुआती चेकअप के बाद डॉक्टर ने तुरंत अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी. टेस्ट के बाद उन्होंने बताया कि मुझे ओलिगोहाइड्रामिनियॉस है और मुझे सीज़ेरियन डिलीवरी ही करवानी होगी. यह क्या है?

– ख्याति झा, रायपुर.

गर्भाशय में बच्चा पानी की थैली के भीतर रहता है, जिसे एम्नियॉटिक फ्लूइड कहते हैं. अल्ट्रासाउंड के ज़रिए उसकी जांच की जाती है. ओलिगोहाइड्रामिनियॉस इसी की कमी की अवस्था है. आम भाषा में कहें, तो गर्भाशय में पानी की कमी है. इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे पानी की थैली में दरार पड़ना, बच्चे की किडनी में एब्नॉर्मिलिटी के कारण यूरिन कम होना, जीन डिफेक्ट, मां को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ आदि. पानी की कमी के कारण बच्चे को सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है. यही कारण है कि आपके डॉक्टर ने सीज़ेरियन डिलीवरी की सलाह दी है.

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क्या आप पहचानती हैं प्रेग्नेंसी के ये शुरुआती लक्षण?

– जिस प्रकार हर महिला अलग होती है, उसी प्रकार उसकी प्रेग्नेंसी के लक्षण भी अलग होते हैं. यहां तक कि एक ही महिला की  दो प्रेग्नेंसीज़ के लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं. ज़रूरी नहीं जैसा वो पहली प्रेग्नेंसी में महसूस कर रही थी, वैसा भी दूसरी बार भी करे.

– पीरियड्स मिस होना इसका सबसे बड़ा लक्षण है, हांलाकि पीरियड्स मिस होने के पहले ही बहुत-सी

– कॉन्सेप्शन के बाद महिलाओं को हल्की-सी ब्लीडिंग होती है और पेट में मरोड़ भी होता है.

– शरीर में हो रहे बदलावों के कारण ब्रेस्ट हैवी लगने लगते हैं.

– थकान प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षणों में से एक है.

– ज़्यादातर महिलाओं को सुबह-सुबह चक्कर आते हैं.

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डॉ. राजश्री कुमार
डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]  

 

 

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महत्वपूर्ण हैं परवरिश के शुरुआती दस वर्ष (parenting- initial ten years are important)

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बच्चों की परवरिश में शुरुआती वर्ष बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. जन्म के साथ ही व्यवहार व संस्कारों के प्रति माता-पिता यदि सचेत रहें और कोशिश करें कि बच्चे बड़े-बुज़ुर्गों की छत्रछाया में अच्छे संस्कार, अच्छा व्यवहार व अच्छी आदतों का पालन करना सीखें, तो इसमें कोई दो राय नहीं कि आगे चलकर वे एक बेहतर इंसान बनेंगे.

 

चाइल्ड सायकोलॉजिस्ट व एक्सपर्ट्स की राय में शुरुआत के वर्षों में शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक विकास की प्रक्रिया तीव्र होती है. बच्चा जो कुछ भी इन वर्षों में देखता, सुनता या समझता है, उसका प्रभाव आजीवन बना रहता है. वैसे भी व्यक्ति के निजी स्वभाव में कुछ जन्मजात प्रवृत्तियां शामिल होती हैं और कुछ वातावरण का प्रभाव होता है. बच्चों को समझने के लिए इन दोनों पर ध्यान देना ज़रूरी है, अन्यथा हम अपने ही बच्चों को अनजाने में हानि पहुंचा सकते हैं, जिसका नकारात्मक प्रभाव उनके भविष्य को ग़लत मोड़ दे सकता है.

कई बार बच्चों के ग़लत व्यवहार के कारण माता-पिता परेशान भी होते हैं और शर्मिन्दा भी, किंतु यदि बच्चों के व्यवहार पर ग़ौर किया जाए, तो निश्‍चय ही बच्चे के क्रोध, चिड़चिड़ेपन या मिसबिहेव करने के पीछे कोई ऐसा कारण सामने आएगा, जिसे या तो हम समझ ही नहीं पाए हैं या अनदेखा कर बैठे हैं. ये कारण बहुत ही मामूली और मासूम से हो सकते हैं, जैसे –

भूख- ज़रूरी नहीं है कि भूख स़िर्फ खाना खाने की हो. कभी-कभी किसी विशेष आहार की कमी या अधिकता के कारण भी बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है और परेशान कर सकता है, ताकि वो आपका ध्यान आकर्षित कर सके. भूख के अलावा प्यास के कारण भी बच्चों का ध्यान भटकता है और उनकी एकाग्रता टूटने लगती है.

थकान- स्कूल से लौटने पर उन्हें खिला-पिलाकर या तो हम चाहते हैं कि बच्चा होमवर्क करने बैठ जाए या खेलने जाए, जबकि बच्चा अगर थका है, तो हो सकता है कि वो स़िर्फ बैठना या बात करना चाहता हो. एक के बाद एक एक्टिविटी भी बच्चे को थका देती है. हर समय पैरेंट्स के मन मुताबिक कुछ न कुछ करते रहने से भी बच्चे ऊब जाते हैं और पलटकर जवाब देना या काम को टालना शुरू कर देते हैं.

निराशा- किसी बात से दुखी-निराश होने पर भी बच्चे का व्यवहार प्रतिकूल होने लगता है. शरीर में कहीं दर्द या मानसिक डर, पैरेंट्स से दूर होना, पैरेंट्स का किया हुआ वादा तोड़ना, उनकी ज़रूरतों को न समझना, ज़रूरत के समय पैरेंट्स का साथ न मिल पाना आदि बातें बच्चों को निराश करती हैं.

उपेक्षा- छोटे भाई-बहन के कारण, मेहमानों के कारण, किसी नए उपकरण के कारण या अन्य किसी भी वजह से यदि आप व्यस्त हो जाते हैं, तो बच्चा उपेक्षित महसूस करता है अथवा उसके किसी क्रिएशन पर आपका ध्यान न गया हो या जब वो आपसे कुछ शेयर करना चाहता हो और आप व्यस्त हों, वो आपके साथ बैठना चाहता हो और आप फोन पर बातें करने में बिज़ी हों, तो वो ख़ुद को उपेक्षित महसूस करता है. अक्सर देखा गया है कि जब मां फोन पर बात करती है, तो उस समय बच्चा मां का अटेंशन पाने के लिए कुछ ऐसा कर बैठता है कि वो बात नहीं कर पाती है. बच्चे हर समय माता-पिता का ध्यान ख़ुद पर चाहते हैं. न मिलने पर वो निगेटिव बिहेवियर करने लगते हैं, ताकि आप किसी भी तरह रिएक्ट करें और उसे आपका अटेंशन मिले.

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विभिन्न स्थितियों में बच्चों को कैसे हैंडल करें?
ग़लत व्यवहार को नज़रअंदाज़ करें- यदि बच्चा तीन वर्ष से कम उम्र का है और उसने आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए रोने की आदत बना ली है, तो उसके रोने पर ध्यान न दें. हां, ज़रूरत इस बात को समझने की भी है कि रोना किस कारण से है. साथ ही शांतिपूर्वक व्यवहार दर्शाने पर प्रशंसा करना न भूलें. धीरे-धीरे बच्चा पॉज़ीटिव व निगेटिव व्यवहार के अंतर को समझने लगता है.

ध्यान हटाएं- जिस चीज़ के लिए बच्चा ज़िद कर रहा है, उससे उसका ध्यान हटाने के लिए किसी दूसरी मज़ेदार वस्तु के प्रति उसे आकर्षित करें या बात ऐसे बदलें कि वो रोना-चिल्लाना भूलकर बहल जाए, लेकिन आजकल ङ्गचिड़िया ले गईफ या ङ्गचंदा मामा लाएगाफ जैसी बातें निरर्थक हैं, क्योंकि बच्चे काफ़ी स्मार्ट हैं.

प्रतिक्रिया बदलें- तीन साल से बड़ी उम्र के बच्चों के लिए उपेक्षा करना या ध्यान हटाने जैसी क्रियाएं बेमानी हो जाती हैं. बेहतर होगा, उनसे बात करें. उनकी बात बिना रोक-टोक के सुनें और फिर अपनी प्रतिक्रिया उसके अनुरूप बदलें. सही-ग़लत के अंतर को समझाएं. हां, बात करते समय सही शब्दों के चुनाव व सही तरीक़ा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें.

सलाह दें- किसी बड़े-बुज़ुर्ग के पास जाकर शिकायत करने के बाद कभी-कभी बच्चे अच्छा महसूस करते हैं और उनसे समाधान भी चाहते हैं, लेकिन कई बार पैरेंट्स की प्रतिक्रिया विपरीत होती है, जैसे- ङ्गक्या बार-बार शिकायत करने आ जाते हो, आपस में निबट लो.फ ऐसा न कहें, क्योंकि वो आपसे सलाह व समाधान चाहते हैं.

शेयर करना सिखाएं- शेयर करना एक महत्वपूर्ण सामाजिक गुण है. इस गुण के साथ बच्चे छोटे-बड़े, भाई-बहन व दोस्तों के साथ गेम्स या अपने खिलौनों को शेयर करके एंजॉय कर सकते हैं. ऐसी बातों के लिए उन्हें प्रोत्साहित करें और उनकी प्रशंसा भी करें.

हट जाना सिखाएं- जब बच्चों के बीच झगड़ा बढ़ता हुआ लगे, तो उन्हें बताएं कि ऐसी स्थिति में वहां से चुपचाप हट जाना झगड़े को शांत करने का एक अच्छा तरीक़ा है. बुलीज़ के साथ डील करने का सबसे अच्छा तरीक़ा यही है. सामने रहकर तर्क-वितर्क करने से बेहतर है, वहां से
चले जाना.

पिटाई न करें- इस विषय पर दो राय हो सकती है. कुछ पैरेंट्स को लगता है कि सुधारने या अनुशासित करने के लिए पिटाई ज़रूरी है, क्योंकि ये पिटाई उनके भले के लिए ही तो होती है, लेकिन मुख्य बात तो ये है कि पिटाई करके आप बच्चे को मारना सिखा रहे हैं. वो अपने ही छोटे भाई-बहनों या दोस्तों पर हाथ उठाने में झिझकेगा नहीं. साथ ही हिंसा व क्रोध को भी ग़लत नहीं समझेगा.

धैर्य रखें- यदि मेहमानों के सामने या सार्वजनिक स्थानों पर बच्चा मिसबिहेव करने लगे, तो शांत रहें. धैर्य से काम लें. उसे समझाने की कोशिश करें, फिर भी वो न माने, तो वहां से बच्चे को हटा दें. किसी भी स्थिति में चिल्लाना या मार-पीट उचित नहीं.

सम्मान दें- बच्चों के साथ हमेशा बड़ों जैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए. बच्चे भी चाहते हैं कि उनसे अच्छी तरह बात की जाए, उन्हें महत्वपूर्ण समझा जाए, इसलिए उनसे संबंधित बातों में उनकी राय ली जा सकती है.

– प्रसून भार्गव

किड्स डेस्टिनेशन: चलें ज़ू की सैर पर (Kids’ destination: fantastic trip of zoo)

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मॉल और अर्बन लाइफ स्टाइल से दूर बच्चों को कुछ और घुमाना और दिखाना चाहते हैं, तो उन्हें नेचर के क़रीब ले जाएं. टीवी और बुक में दिखने वाले जानवरों और पंछियों से उनकी मुलाक़ात कराएं. मॉडर्न लाइफ स्टाइल को फॉलो करते-करते हम प्रकृति और उसकी बनाई तमाम ख़ूबसूरत चीज़ों से महरूम होते जा रहे हैं. ऐसे में आने वाली पीढ़ी का नेचर के प्रति लगाव कम होता जा रहा है. कहीं आपके बच्चों के साथ भी कुछ ऐसा ही तो नहीं हो रहा. फैमिली ट्रिप को और भी मज़ेदार बनाने के लिए करें दुनिया के कुछ चुनिंदा ज़ू की सैर.

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मैसूर ज़ू

मैसूर ज़ू देश का सबसे पुराना और प्रसिद्ध ज़ू है. 157 एकड़ में बना ये ज़ू मैसूर पैलेस के पास ही स्थित है. 1892 में यह बनकर तैयार हुआ. पहले इसे पैलेस ज़ू भी कहते थे. राजा चामाराजेंद्र ने इसे बनवाया. इसलिए इसे चामाराजेंद्र ज़ूलोजिकल गार्डन भी कहते हैं. शुरुआत में स़िर्फ रॉयल फैमिली के लोग ही इस ज़ू में जाते थे, लेकिन 1902 में इसे आम लोगों के लिए खोला गया. झूले पर बैठकर आराम फरमाता गोरिल्ला, अफ्रिकन एलिफैंट, ज़ेब्रा, जिराफ आदि के साथ हज़ारों जीव-जंतुओं, पंछियों से ये ज़ू भरा है. ज़ू के अंदर जगह-जगह बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई हैं. हैंडिकैप लोगों के लिए व्हील चेयर की भी व्यवस्था है. बच्चों के खेलने के लिए ज़ू के अंदर सुंदर पार्क भी है. इसके साथ ही रेस्ट रूम, कैफेटेरिया आदि की भी व्यवस्था है.

कैसे जाएं?
फ्लाइट, ट्रेन, बस, कार के माध्यम से आप मैसूर पहुंच सकते हैं. मैसूर रेल्वे स्टेशन से मैसूर ज़ू की दूरी स़िर्फ 3 किलोमीटर है.

मैसूर ज़ू में संडे और दूसरे नेशनल हॉलिडे
पर पैलेस बैंड ऑर्केस्ट्रा के माध्यम से
पर्यटकों का मनोरंजन किया जाता
है. इस बैंड के माध्यम से भारतीय
संस्कृति और सभ्यता की एक
झलक भी पर्यटकों को
दिखायी जाता है.

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नेहरू ज़ूलोजिकल पार्क

हैदराबाद में मीर आलम टैंक के पास स्थित नेहरू ज़ूलोजिकल पार्क 26 अक्टूबर 1959 को बनकर तैयार हुआ. 6 अक्टूबर 1963 को इसे आम लोगों के लिए खोला गया. 380 एकड़ में बने इस ज़ू को हैदराबाद ज़ू के नाम से भी जाना जाता है. पक्षियों की 100 से भी ज़्यादा प्रजातियां और 1100 जानवरों से भरा ये ज़ू पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. ज़ू के अंदर सफारी ट्रिप भी सैलानियों को ख़ूब भाती है.

कैसे जाएं?
प्लेन, ट्रेन, बस के माध्यम से आप हैदराबाद पहुंच सकते हैं. उसके बाद वहां के लोकल वेहिकल से आप ज़ू तक पहुंच सकते हैं.

ज़ू का पूरा लुत्फ़ उठाने के लिए टॉय ट्रेन, सफारी ट्रिप,
चिल्ड्रेन पार्क, जुरासिक
पार्क, बटरफ्लाई पार्क,
अक्वेरियम, म्यूज़ियम, बोटिंक आदि की
व्यवस्था भी है.

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बर्लिन ज़ूलोजिकल गार्डन

यूरोप के बेहतरीन और सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाले में से ये एक है. यहां पर सालभर पर्यटकों की भीड़ रहती है. 1844 में बना ये जर्मनी का पहला ज़ू है. 84 एकड़ में फैले इस ज़ू में 20 हज़ार से ज़्यादा जानवर आपको देखने को मिलेंगे. तरह-तरह के पक्षी, मछलियां आदि यहां के मुख्य आकर्षण के केंद्र हैं. खुले आसमान के नीचे अपनी फैमिली के साथ आराम फरमाते जानवरों को देखना आपके बच्चों के लिए किसी आश्‍चर्य से कम नहीं होगा.

कैसे जाएं?
मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता आदि जगहों से आप सीधे जर्मनी के लिए उड़ान भर सकते हैं. जर्मनी पहुंचने के बाद बर्लिन ज़ूलोजिकल गार्डन ज़ू रेल्वे स्टेशन से आप वहां के प्राइवेट वेहिकल से ज़ू तक पहुंच सकते हैं.

जिस दिन ज़ू का प्लान बनाएं उस दिन किसी
और जगह घूमने का प्लान न बनाएं. ज़ू
के खुलने के समय से देर शाम तक
बच्चों के साथ यहां पर
समय बिताएं.

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टोरंटो ज़ू

कनाडा के सबसे बड़े शहर टोरंटो में स्थित टोरंटो ज़ू दुनिया के बड़े ज़ू में से एक है. 5000 से ज़्यादा जानवर और पक्षियों की 500 से ज़्यादा प्रजातियां इस ज़ू के मुख्य आकर्षण हैं. 15 अगस्त 1974 को इसे कनाडा वासियों के लिए खोला गया. दुनियाभर के सैलानी यहां पर दुनियाभर के जानवरों, पक्षियों और दूसरे जीवों को देखने आते हैं. टोरंटो ज़ू की सबसे बड़ी ख़ासियत ये है कि यहां पर पूरी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए पशु-पक्षी पर्यटकों को देखने को मिलते हैं.

कैसे जाएं?
मुंबई, चेन्नई, दिल्ली, बैंग्लोर जैसे महानगरों से आप फ्लाइट के माध्यम से टोरंटो पहुंच सकते हैं. टोरंटो पहुंचने के बाद आप वहां के लोकल वेहिकल से ज़ू तक पहुंच सकते हैं.

टोरंटो ज़ू सात अलग-अलग भागों में बटा है. इंडो-मलया, अफ्रिका,
कनेडियन डोमेन, अमेरिकाज़, ऑस्ट्रेले़शिया, यूरेशिया, टुंड्रा-ट्रेक
और डिस्कवरी ज़ोन. हर भाग में उस जगह के जानवर और
पेड़-पौधों को पर्यटक देख सकते हैं. ये नज़ारा आपको
दुनिया के किसी और ज़ू में नहीं मिलेगा.

स्मार्ट टिप्स
– ज़ू घूमते समय जल्दबाज़ी में न रहें, लेकिन एक ही जगह बहुत ज़्यादा समय भी न बिताएं.
– ज़ू में घूसते ही बोर्ड पर लिखे निर्देश को ज़रूर पढ़ें. उसके बाद ही अपनी यात्रा शुरू करें. इससे आप ज़ू के नियम से भलीभांति परिचित हो जाएंगे.
– धूप से बचने के लिए हैट और गॉगल्स ले जाना न भूलें. कपड़े और जूतों का सही चुनाव करें.
– अपने पास हेल्दी स्नैक्स और पीने के लिए पानी, जूस आदि ज़रूर रखें.
– ज़ू के हर एक क्षण को ़कैद करने के लिए कैमरा ज़रूर ले जाएं.
– ज़ू जाने से पहले निर्धारित कर लें कि आपको क्या देखना है.
– जल्दबाज़ीं में फोटोग्राफी करने की बजाय स्पेशल मोमेंट का इंतज़ार करें.
– जानवरों को देखते समय उसके बारे में जो लिखा है, वो अपने बच्चों को पढ़कर ज़रूर सुनाएं. बच्चों को अकेला न छोड़ें.
– किसी भी जानवर को देखने के लिए जितनी दूरी निर्धारित की गई है, उसका पालन करें. इससे किसी भी तरह की दुर्घटना से आप दूर रहेंगे. ज़ू के किसी भी जानवर या दूसरे जीवों से छेड़छाड़ न करें.
– अपनी पूरी ट्रिप को टुकड़ों में बांटे. समय-समय पर ब्रेक लें. इससे थकान भी मिट जाएगी और आप पूरे ज़ू का लुत्फ़ भी उठा सकेंगे.

– श्वेता सिंह 

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किड्स कॉर्नर- कुछ इस अंदाज़ में सजाएं बच्चों का कमरा (Smart Decor Ideas for kids room)

Decor Ideas for kids room
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पूरे आशियाने को सजाना आसान काम है, लेकिन जब बात बच्चों के कमरे की आती है, तो मुश्किल बढ़ जाती है. क्या करें, कौन-सी चीज़ कहां रखें, फर्नीचर कैसा हो जैसी बातें सोचकर आप भी परेशान हो जाती होंगी. आपकी इसी परेशानी को दूर करने के लिए हम बता रहे हैं बच्चों का कमरा सजाने के आसान उपाय.

 

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कैसा हो वॉल डेकोरेशन?

बच्चों का कमरा सजाने में पहली चुनौती होती है वॉल डेकोरेशन यानी आपके लाड़ले/लाड़ली के कमरे की दीवारें कैसी हों. आप यदि बेटी के कमरे की दीवारों के बारे में सोच रही हैं, तो बेहतर होगा कि पिंक कलर का चुनाव करें. आमतौर पर लड़कियों को पिंक कलर ज़्यादा पसंद आता है. लड़कों के लिए ब्लू कलर बेस्ट हैं, क्योंकि उन्हें ब्लू कलर ज़्यादा पसंद आता है.

* सबसे पहले दीवारों को ब्लू या पिंक कलर से अच्छी तरह कलर करवाएं.

* पेंट करवाने के बाद तरह-तरह के वॉल पेपर्स से आप दीवारों को अट्रैक्टिव बना सकती हैं.

* कमरे की ऊपरी छत पर चांद-सितारे या इसी तरह के दूसरे वॉल पेपर का प्रयोग करें.

* कमरे की एक दीवार पर बटरफ्लाई, ट्री, बर्ड्स, जिराफ जैसी आकृतियों वाला वॉल पेपर लगाएं.

* किसी एक दीवार पर बच्चे की पसंद की सीनरी या बच्चे की कुछ स्पेशल फोटोग्राफ्स लगाएं.

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कैसा हो बेड?

दीवारों के बाद बारी आती है बेड की. बच्चों के कमरे के लिए बेड का चुनाव करते समय इन बातों का ध्यान रखेंः

* कार, बार्बी डॉल जैसे डिज़ाइन के बेड मार्केट में मिलते हैं. बच्चों के लिए इस तरह के बेड का चुनाव करें. ये आकर्षक दिखते हैं.

* किंग साइज़ बेड की बजाय सिंगल बेड का चुनाव करें. इससे कमरे में बच्चे के लिए ज़्यादा जगह बचेगी.

* ऐसा बेड चुनें जिसमें स्टोरेज की सुविधा हो. इससे बच्चे के कई सामान उसमें आसानी से आ जाएंगे और कमरा बिखरा हुआ नहीं रहेगा.

* एक कमरे में दो बेड रखने की बजाय डबल फ्लोर वाला बेड चुनें. ये कम जगह घेरता है और कमरे को अट्रैक्टिव लुक भी देता है.

* बेड ख़रीदते समय इस बात का भी ध्यान रखें कि उसके किनारे नुकीले न हों. इससे बच्चों को चोट लग सकती है.

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कैसा हो स्टडी टेबल और चेयर?

बच्चे के कमरे में स्पेस का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि कमरा भरा-भरा होने पर बच्चे चिढ़ जाते हैं. अतः बेड की तरह ही स्टडी टेबल और चेयर का चुनाव करते समय भी इस बात का ध्यान रखें कि वो ज़्यादा जगह न घेरे.

* बच्चों की उम्र के अनुसार ही उनके स्टडी चेयर और टेबल का चुनाव करें.

* स्टडी चेयर और टेबल सिंपल हो, तो ज़्यादा अच्छा रहता है. आप चाहें तो डिज़ाइनर स्टडी चेयर और टेबल का चुनाव भी कर सकती हैं.

* स्टडी चेयर और टेबल ऐसा चुनें जिसमें स्टोरेज की व्यवस्था हो. इससे बच्चों की क़िताबें आदि बिखरी हुई नहीं रहेंगी.

* अटैच्ड स्टडी चेयर और टेबल भी अच्छा विकल्प हो सकता है. ये जगह भी कम घेरता है.

* स्टडी चेयर और टेबल ख़रीदते समय बच्चे की उम्र और हाइट का विशेष ध्यान रखें.

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कैसे सिलेक्ट करें कर्टन?

बच्चों के कमरे में वैसे तो कर्टन की कोई ख़ास आवश्यकता नहीं होती, लेकिन बाकी कमरों से तालमेल बिठाने के लिए परदा लगाना ज़रूरी है. बच्चों के कमरे के लिए परदे चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें.

* सिल्क के परदे लगाने से बचें.

* क्रीम, व्हाइट जैसे हल्के रंग के परदों का चुनाव न करें.

* कॉटन के साधारण परदों का चुनाव करें.

* कर्टन एक्सेसरीज़ से बचें. इनकी आवाज़ से बच्चे डिस्टर्ब होते हैं और उसी में उलझे रहते हैं.

* बहुत भारी और एम्ब्रॉयडरी वाले परदे बच्चों के कमरे में न लगाएं. इसमें बच्चों के फंसने और गिरने का डर रहता है.

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क्या न करें?

* बच्चों के कमरे की सजावट करते समय अपनी पसंद उन पर न थोपें, नहीं तो वो बच्चों का कमरा लगने की बजाय किसी बड़े का कमरा लगेगा.

* कमरे को लग्ज़ीरियस लुक देने की ग़लती न करें. बच्चे के व्यवहार से आप पूरी तरह वाक़िफ हैं. अतः उसी के अनुसार कमरे को सजाएं.

* बहुत ज़्यादा एक्सेसरीज़, जैसे- वॉल हैंगिंग्स, डोर हैंगिंग्स आदि न लगाएं. बच्चे इन्हें पसंद नहीं करते.

* कमरे को बहुत ज़्यादा सामान से भरने की ग़लती न करें.

* कमरे में बहुत महंगी चीज़ें न रखें. उदाहरण के लिए- महंगे वॉल पेपर्स, कुर्सी-टेबल आदि.

* कमरे में नुकीले फर्नीचर न रखें.

* कमरे में स्विच बोर्ड बच्चों की पहुंच से ऊपर लगवाएं.

* एसी का रिमोट रखने के लिए होल्डर भी बच्चों की पहुंच से ऊपर लगवाएं.

* बच्चों के कमरे में टीवी और कंप्यूटर लगाने की ग़लती न करें.

* प्रेस, हीटर आदि चीज़ें बच्चों के कमरे में न रखें.

सबसे पहले ये निश्‍चित कर लें कि आपको कमरा किसके लिए सजाना है बेटे या बेटी के लिए, क्योंकि दोनों की पसंद अलग-अलग होती है.

– श्‍वेता सिंह

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जानिए इन बॉलीवुड कपल्स के बच्चों के यूनिक नाम और उनका मतलब ( Know these Bollywood couples Kids unique names & their meaning)

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हाल ही में करीना कपूर और सैफ अली ख़ान का बेटा तैमूर अली ख़ान जन्म के कुछ समय बाद ही सोशल मीडिया पर ख़ूब छाया रहा और उसकी इस पॉप्युलैरिटी का कारण था उसका नाम तैमूर, जिस पर कई लोगों ने आपत्ति भी जताई, मगर इससे स्टार कपल को कोई फर्क़ नहीं पड़ता. आइए, आपको बताते हैं और किन सेलिब्रिटीज़ ने अपने बच्चों का नाम रखा है ज़रा हटकर और क्या है उनके नाम का मतलब.

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करीना कपूर ख़ान-सैफ अली ख़ान
20 दिसंबर को जन्मे करीना कपूर और सैफ अली ख़ान के शहज़ादे तैमूर के नाम पर बवाल इसलिए मचा था, क्योंकि इस नाम का एक मशहूर लुटेरा था. उजबेकिस्तान के तैमूर लंग नामक लुटेरे ने 14वीं शताब्दी में भारत में जमकर लूटपाट की थी. वैसे तैमूर का मतलब होता है आयरन यानी लोहा. शायद करीना-सैफ अपने शहज़ादे को फौलाद जैसा मज़बूत बनाने चाहते हैं, तभी ये नाम चुना है.

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शाहरुख़ ख़ान-गौरी ख़ान
बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख़ के बड़े बेटे का नाम आर्यन है, जिसका मतलब होता है योद्धा, शूरवीर. बेटी सुहाना के नाम का मतलब शायद आप समझ ही गए होंगे चार्मिंग यानी आकर्षक, सुंदर. शाहरुख़ के तीसरे बच्चे का नाम है अबराम. शाहरुख़ अपने बेटे के नाम को लेकर काफ़ी चर्चा में रहे थे. दरअसल, अबराम नाम पैगंबर अब्राहम और राम को मिलाकर बना है. शाहरुख़ ने बेटे के नाम का मतलब समझाते हुए कहा था कि मुझे लगता है कि ये एक धर्मनिरपेक्ष नाम है.

 

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रानी मुखर्जी-आदित्य चोपड़ा
रानी मुखर्जी बेटी को मीडिया से दूर ही रखती हैं, लेकिन हाल ही में उसके पहले बर्थडे पर उन्होंने बेटी आदिरा के साथ अपनी फोटो इंस्टाग्राम पर शेयर की थी. आदिरा नाम आदि+रा को जोड़कर बना है यानी आदित्य का आदि और रानी का रा. अरबी में आदिरा का मतलब होता है मज़बूत.

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शिल्पा शेट्टी-राज कुंद्रा
बॉलीवुड की यमी मम्मी शिल्पा के बेटे का नाम है वियान. वियान का मतलब होता है ज़िंदगी व एनर्जी. शायद शिल्पा उन्हें अपनी तरह ही एनर्जेटिक बनाना चाहती हैं.

 

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ऋतिक रोशन-सुज़ैन ख़ान
इन दोनों स्टार कपल की जोड़ी भले ही टूट गई हो, लेकिन बच्चों कि ख़ातिर ये आज भी साथ एंजॉय करते हैं. हाल ही में दोनों ने बच्चों के साथ हॉलीडे एंजॉय किया. इन दोनों ने अपने बेटे का नाम बहुत सोच-समझकर रखा है. ऋतिक के बड़े बेटे का नाम है रिदान, इसका मतलब होता है बड़े दिल वाल इंसान और छोटे बेटे रिहान के नाम का अर्थ है भगवान के चुने हुए लोग.

 

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करिश्मा कपूर-संजय कपूर
करिश्मा अपने पति से अलग हो चुकी हैं और फिलहाल उनके किसी और को डेट करने की ख़बरें हैं. करिश्मा और संजय ने भी अपने बच्चों के नाम बहुत चुनकर रखें हैं. बेटी समायर के नाम का मतलब है सुंदरता की देवी, जबकि बेटे कियान के नाम का मतलब है भगवान की कृपा.

 

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ऐश्‍वर्या राय बच्चन-अभिषेक बच्चन
यदि कोई सेलिब्रेटी अपनी बेटी को हमेशा साथ लिए दिखी हैं, तो वो हैं ऐश्‍वर्या राय. बेटी के साथ ऐश्‍वर्या की बॉन्डिंग देखकर पता चलता है कि बहुत प्रोटेक्टिव मदर हैं. वैसे बेटी का नाम उन्होंने काफ़ी सोच समझकर अराध्या रखा होगा, क्योंकि अराध्या का मतलब होता है पूजा के योग्य. शायद ऐश चाहती हैं कि लोग उनकी बेटी को न स़िर्फ प्यार करें, बल्कि रिस्पेक्ट भी दें.

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इमरान ख़ान-अवंतिका मलिक
इमरान की प्यारी से बेटी का नाम है इमारा, जिसका मतलब होता है मज़बूत और साहसी. इमारा के साथ अपने माता-पिता दोनों का सरनेम जुड़ा है, उनका पूरा नाम है इमारा मलिक ख़ान.

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अक्षय कुमार-ट्विंकल खन्ना
बॉलीवुड के इन स्टार कपल के बच्चों नाम भी कुछ हटकर है. बेटी का नाम है नितारा, जिसका मतलब होता है अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े होना और बेटे आरव के नाम का मीनिंग है शांतिप्रिय, वैसे आरव चेहरे से भी शांत दिखते हैं.

 

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सुष्मिता सेन
बिना शादी के दो बेटियों को गोद लेने वाली पूर्व मिस यूनिवर्स की बेटियों के नाम भी उन्हीं की तरह यूनीक है. बड़ी बेटी रेनी के नाम का मतलब है पुनर्जन्म (दोबारा जन्म) और छोटी बेटी अलीशा के नाम का जर्मन में मतलब होता है नोबेल.

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काजोल-अजय देवगन
काजोल के बेटे युग के नाम का मतलब तो आप जानते ही होंगे, मगर क्या न्यासा के नाम की मीनिंग पता है? न्यासा का मतलब होता है नई शुरुआत और लक्ष्य.

 

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माधुरी दीक्षित-डॉ. श्रीराम नेने
बॉलीवुड की धक-धक गर्ल के बेटों का नाम भी बेहद यूनीक है. बड़े बेटे का नाम है रायन और छोटे का एरिन. रायन का मतलब है स्वर्ग प्राप्ति का मार्ग और एरिन का अर्थ होता है शक्ति का पर्वत.

 

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कोंकणा सेन शर्मा-रनवीर शौरी
कोंकणा जैसे फिल्मों को लेकर चूज़ी हैं वैसे ही शायद बेटे को नाम लेकर भी. तभी तो उनके बेटे का नाम बहुत ख़ास है. उनके बेटे का नाम है हरून, जिसका मतलब है उम्मीद.

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संजय दत्त-मान्यता दत्त
संजय के दोनों बच्चों के नाम बहुत यूनीक हैं. बेटे का नाम है शाहरान है. शाहरान एक पर्शियन शब्द है, जिसका मतलब है शाही योद्धा. बेटी का नाम है इकरा. इकरा एक यहूदी नाम है, जिसका मतलब होता है वर्णन करना या सुनना.

– कंचन सिंह

एक्सक्लूसिव बुनाई डिज़ाइन्स- 5 बेस्ट किड्स स्वेटर डिज़ाइन्स (Exclusive Bunai Designs- 5 best kids swetar designs)

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पुसी कैट

सामग्रीः 200 ग्राम यलो रंग का ऊन, थोड़ा-थोड़ा काला व लाल ऊन, सलाइयां.

विधिः आगे का भागः 70 फं. डालकर 1 फं. सी. 1 उ. की रिब बुनाई में बॉर्डर बुनें. अब सीधी सलाई की बुनाई करें, इससे उल्टी धारियां बन जाएंगी. 3 इंच लंबा बुनने के बाद 9-9 फं. की केबल बुनें. चित्रानुसार बिल्ली बुनें. 9 इंच बुनने के बाद बटनपट्टी बुनें और गोल गला घटाएं.

पीछे का भागः आगे के भाग की तरह बुनें.
कॉलर के फं. उठाकर कॉलर बुनें.

आस्तीनः 36-36 फं. डालकर 11 इंच लंबी आस्तीन बुनें. दोनों आस्तीन में 1-1 बिल्ली बुनें.
स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें. लाल व काले ऊन से बिल्ली की आंखें और मुंह बना लें.

 

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क्यूट बॉय

सामग्रीः 100 ग्राम पीच रंग का ऊन, 100 ग्राम मेहंदी ऊन, सलाइयां.

विधिः आगे-पीछे का भागः आगे-पीछे का भाग एक जैसे ही बुनेंगे. पीच रंग से 70 फं. डालकर 1 फं. सी. 1 उ. की रिब बुनाई में बॉर्डर बुनें. 11-11 फं. में बुनाई डालें. 1 फं. उ., 4 उ. का लूप दोहरा लें, 1 फं. का तिहरा, 4 फं. का दोहरा, 1 फं. उ. बुनें. उल्टी सलाई में सबको खोलकर सीधा बुनें. अब मेहंदी रंग से 4 फं. सी., 3 का 1, 4 सी., 1 जाली, 1 उ., 1 जाली बुनें. 5 बार जाली बुनें. इसी तरह बुनाई डालते हुए बुनें. 14 इंच लंबाई हो जाने पर गोल गला घटाएं. कंधे जोड़कर गले के फं. उठाकर डबलपट्टी बुन लें.

आस्तीनः 36-36 फं. डालकर आगे-पीछे के भाग की तरह बुनें. हर 5 वीं सलाई में दोनों तरफ़ से 1-1 फं. बढ़ाते जाएं. 12 इंच लंबी आस्तीन बुनें.
स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें.

 

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हाय स्वीटी

सामग्रीः 250 ग्राम लाल रंग का ऊन, सलाइयां, चेन.

विधिः आगे का भागः 68 फं. डालकर 2 फं. सीधे, 2 उल्टे की रिब बुनाई में 2 इंच का बॉर्डर बुनें. अब 3-3 उल्टी धारियां बुनें. अब बीच में 4-4 फं. की केबल बुनते हुए बुनें. केबल के बीच में 2 फं. सी., 1 जाली, 1 जोड़ा, 1 जाली, 2 सी. बुनें. उल्टी सलाई पूरी उल्टी बुनें. 4 बार जाली बुनें. 12 इंच लंबाई हो जाने पर 2 सी., 2 उ. का चेक डालते हुए बुनें. 17 इंच लंबाई हो जाने पर हल्का गोल गला घटाएं.

पीछे का भागः आगे के भाग की तरह ही बुनें. चेक डालते समय चेन लगाने के लिए फं. को दो हिस्सों में
बांटकर बुनें.

कंधे जोड़कर गले के फं. उठाएं और 2 फं. सी., 2 उ. की बुनाई करते हुए गले की पट्टी बुनें.
आस्तीनः 36-36 फं. डालकर आगे-पीछे के भाग की तरह बुनें. हर 5वीं. सलाई में दोनों तरफ़ से 1-1 फं. बढ़ाते जाएं. 14 इंच लंबाई हो जाने पर फं. बंद कर दें.
स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें. चेन लगाएं.

 

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कश्मीर की कली

सामग्रीः 400 ग्राम काले रंग का ऊन, थोड़ा-थोड़ा लाल, पीला और मेहंदी ऊन, सलाइयां.

विधिः टॉपः आगे-पीछे का भाग एक जैसे ही बुनेंगे. काले रंग से 75 फं. डालकर उल्टी धारियों का बॉर्डर बुनें. 10 फं. सी., 5 उ., 10 सी. 5 उ. की बुनाई में बुनें. उल्टी सलाई पूरी उल्टी बुनें. इसी तरह पूरे स्वेटर की बुनाई करें. आगे के भाग में 12 इंच लंबाई हो जाने पर गोल गला घटाएं. पीछे के भाग में 12 इंच लंबाई हो जाने पर फं. को दो हिस्सों में बांटकर बुनें, ताकि चेन लगा सकें. कुछ लंबाई 15 इंच हो जाए, तो फं. बंद कर दें. कंधे जोड़कर गले के फं. उठाकर गले की पट्टी बुनें.

आस्तीनः 35-35 फं. डालकर आगे-पीछे के भाग की तरह बुनाई करते हुए 8 इंच लंबी आस्तीन बुनें. काले, लाल, पीले और मेहंदी रंगों के क्रोशिया से फूल बुनकर टांकें.

कैप्रीः दोनों पैरों के लिए 40-40 फं. डालकर सीधी-उल्टी सलाई की बुनाई में बुनें. हर 9वीं सलाई में 1-1 फं. बढ़ाते जाएं. 10 इंच लंबाई हो जाने पर मियानी के लिए 7-7 फं. बढ़ाएं. 5 इंच बाद बॉर्डर बुनें. डोरी डालें.

टोपीः 70 फं. डालकर 2 फं. सी. 2 उ. की बुनाई में पूरी टोपी बुनें. 7 इंच बाद सुई में फं. डालकर बंद कर दें. फूल टांकें.
स्वेटर के सभी भागों को जोड़कर सिल लें.

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रैबिट सूट

सामग्रीः 400 ग्राम ब्लू रंग का ऊन, थोड़ा-सा सफेद ऊन, चेन, सलाइयां.

विधिः आगे-पीछे का भाग एक जैसे ही बुनेंगे. 40-40 फं. डालकर 1 फं. सी. 1 उ. की रिब बुनाई में 3 इंच का बॉर्डर बुनें. अब सीधी-उल्टी सलाई की बुनाई में बुनें. हर 5वीं सलाई 1 फं. सी. 1 उ. की रिब बुनाई में बुनें. हर तीसरी सलाई में दोनों तरफ़ से 1-1 फं. बढ़ाते जाएं. 9 इंच लंबाई हो जाने पर 7-7 फं. एक साथ बढ़ाएं. मियानी बुनने के बाद पीछे व आगे के फं. इस तरह एक साथ बुनें कि किनारे के फं. आगे की तरफ़ आ जाएं, ताकि आगे की तरफ़ चेन लगा सकें. आगे के भाग में स़फेद ऊन से बर्फी की डिज़ाइन बुन लें. 14 इंच लंबाई हो जाने पर गोल गला घटाएं. 10 इंच बाद गले से पहले मुड्ढे के लिए आगे-पीछे का भाग अलग-अलग करके बुनें. कंधे जोड़कर गले के फं. उठाकर टोपी बुन लें. 6 इंच लंबा बुनने के बाद सिर के ऊपर का हिस्सा बुनें. कान बुनकर टांक दें.

आस्तीनः 36-36 फं. डालकर सूट की तरह बुनाई डालते हुए 11 इंच लंबी आस्तीन बुनें. हर 5वीं सलाई में दोनों तरफ़ से 1-1 फं. बढ़ाते जाएं.
सूट के सभी भागों को जोड़कर सिल लें.