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माही ने दिवाली के दिन बड़ी ही प्यारी तस्वीरें शेयर की हैं और वो हैं उनके तीनों बच्चों की- ख़ुशी, राजवीर और तारा की! तीनों दिवाली के अटायर में बेहद प्यारे लग रहे हैं और माही ने खूबसूरत कैप्शन भी दिया है कि मेरी दिवाली बेहद ख़ास है क्योंकि तुम सब मेरी ज़िंदगी के दिये हो जो हमेशा रोशनी और ख़ुशियाँ बिखेरते हो!

Mahhi Vij And Jay Bhanushali

ग़ौरतलब है कि जो लोग नहीं जानते कि माही और जय ने अपने केयरटेकर के दोनों बच्चों- ख़ुशी और राजवीर को अडॉप्ट किया है. वो ना सिर्फ़ इनकी पढ़ाई-लिखाई की ज़िम्मेदारी उठाते हैं बल्कि पूरी तरह उनकी देखभाल भी करते हैं. उनके जन्मदिन सेलिब्रेट करते हैं, छुट्टियाँ मनाते हैं. तीनों को साथ देखना बड़ा ही सुखद अनुभव है.

हालाँकि कई बार सोशल मीडिया पर माही और जय को लोग टार्गेट करते हैं कि वो ख़ुशी और राजवीर का ठीक से ख़याल नहीं रखते. इस इलज़ाम पर जय ने काफ़ी फटकार भी लगाई थी. जय ने कहा था कि क्या आप लोगों ने किसी बच्चे को अडॉप्ट किया है या किसी परिवार की कभी मदद की है. आप लोगों को अंदाज़ा तक नहीं कि कोरोना जैसी महामारी के बीच सबको सुरक्षित रखने की हमारी ज़िम्मेदारी है. मेरे दोनों गोद लिए बच्चे और उनके माता पिता हमारे साथ ही रहते हैं और इसीलिए आप चौबीसों घंटे मुझे जज नहीं कर सकते. इस तरह की बातें करने से पहले ज़रा सोच लिया करें.

Mahhi Vij And Jay Bhanushali

माही और जय ने 2017 में इन बच्चों को गोद लिया था और अब तारा भी इनके साथ है तो दोनों पैरेंट्स की ख़ुशी तिगुनी हो गई. दिवाली में देखें इनकी प्यारी तस्वीरें.

Mahhi Vij And Jay Bhanushali Kids
Mahhi Vij And Jay Bhanushali Kids
Mahhi Vij And Jay Bhanushali Kids
Mahhi Vij And Jay Bhanushali Kids

लोग भले ही कुछ भी कहें लेकिन इन बच्चों को साथ देखकर ऐसा कभी नहीं लगता कि इनके साथ कोई भेदभाव होता है. जय खुद ख़ुशी और राजवीर के साथ बैठकर उनका होमवर्क कारते हैं और सभी आपस में काफ़ी फन एक्टिविटीज़ करते रहते हैं. दोनों बच्चे भी तारा से काफ़ी प्यार करते हैं.

Mahhi Vij And Jay Bhanushali Kids
Mahhi Vij And Jay Bhanushali Kids
Mahhi Vij And Jay Bhanushali Kids
Mahhi Vij And Jay Bhanushali Kids

Photo courtesy: All Photos- Instagram

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इस लॉकडाउन में सबसे ज़्यादा एंजॉय बच्चे कर रहे हैं. यह हम नहीं कह रहे रोज़ सोशल मीडिया पर बच्चों के प्यारे व मस्तीभरे वीडियो बयां कर रहे हैं. सिलेब्रिटी हो या आम लोग हर कोई घर बैठे अपने बच्चों के साथ हर पल को भरपूर जी लेना चाहता है. करणवीर बोहरा तो अपनी दोनों बेटियां बेला और वियना के साथ एक-से-एक मज़ेदार वीडियो बनाते रहते हैं. आज उन्होंने अपनी शादी की सालगिरह भी दोनों बेटियों के साथ डांस करते हुए मनाई. इसमें करण जौहर भी पीछे नहीं है. वे भी अपने दोनों बच्चों यश व रूही के साथ जाने कितने फनी वीडियो बना चुके हैं. 

नील नितिन मुकेश की दुलारी बेटी नुरवी के नटखट व शरारत, तो उनके पापा नील ख़ूब एंजॉय करते हैं. सबसे मज़ेदार वाक़या तो वो रहा जब परिवार रामायण सीरियल देख रहा था, तब नील ने टीवी स्क्रीन पर सीता की तरफ़ इशारा करके बेटी से पूछा वो कौन है. तब बेटी ने प्यारे अंदाज़ में कहा सीता… इससे पता चलता है कि बड़े ही नहीं बच्चों को भी रामायण कितना पसंद है.
करीना कपूर व सैफ अली ख़ान के लाडले तैमूर तो वैसे भी सिलेब्रिटी बन गए है. कभी वे अपने पेंटिंग का हुनर दिखाते, तो कभी पापा के साथ बागवानी करते…
आयुष्मान खुराना ने तो अपनी बेटी वरुष्का का जन्मदिन ही अनोखे तरीक़े से मनाया. घर के सभी वेस्ट पेपर और चीज़ों को रीसाइकल करके उन्होंने बर्थडे का डेकोरेशन किया. उनके अनुसार क्वारंटाइन ने हम सभी को बहुत कुछ सिखाया है. बेटी ने भी रंग भरकर, काग़ज़ों से सजावट करके अपने जन्मदिन जन्मदिन का अलग ढंग से आनंद लिया.
शिल्पा शेट्टी के बेटे वियान भी इन दिनों को खेल खेल में मस्ती, एक्सरसाइज, डांस, पढ़ाई सब कुछ करके हर तरह का लुत्फ़ उठा रहे हैं.
टिस्का चोपड़ा तो अपनी बेटी तारा के साथ अपना बचपन ही जी उठीं. मां के अलग-अलग देशों में परवरिश, दुनियाभर घूमना तारा को रोमांचित कर गया. मां-बेटी दोनों ने इन लम्हों को ख़ूब एंजॉय किया.
कुणाल खेमू और सोहा की बेटी इनाया तो पेरेंट्स के साथ कभी मटर छिलते, मस्ती करते, स्टोरी बुक पढ़ते… हर एक पल को यादगार बना रही हैं.

Children Of Celebrities
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I got the best trainer in the business 💪🏼

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बच्चे कब देखते ही देखते बड़े हो जाते हैं पता ही नहीं चलता, किंग खान की ये गुड़िया अब जवान हो गई है और बेहद खूबसूरत भी. आप भी देखें सुहाना की ये Instagram पिक्स

Suhana Khan Drop-Dead Gorgeous
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Suhana Khan
Suhana Khan Cute
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Suhana Khan Hot
Suhana Khan Gorgeous in black dress
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खिलौनों की एक ख़ूबसूरत दुनिया होती है. ऐसे में टेडी बियर से तो बच्चे, सितारे, स्टार किड्स के साथ-साथ प्रेम दीवानों का ख़ास लगाव रहा है. वेलेंटाइन वीक का चौथा दिन टेडी डे के रूप में मनाया जाता है. इस दिन लव बर्ड्स ख़ासतौर पर एक-दूसरे को टेडी देकर प्यार में बचपना, मासूमियत व चुलबुलेपन को बढ़ाते हैं.

Happy Teddy Day

हिंदी फिल्मों में टेडी से जुड़े न जाने कितने सीन्स, मोहब्बत के इज़हार, दीवानगी, पागलपन देखने को मिलते रहे हैं. मैंने प्यार किया फिल्म का वो सीन भला कोई कैसे भूल सकता है, जब भाग्यश्री प्यार से टेडी को लिए हुए हैं सलमान ख़ान से दोस्ती व प्यार का साथ एंजॉय करती हैं.

Happy Teddy Day

शाहरुख ख़ान की कुछ कुछ होता है में तो शाहरुख अपनी बेटी के लिए टेडी बियर की लाइन लगा देते हैं. अक्सर फिल्मों में प्रेम प्रदर्शन के लिए टेडी का ख़ूब इस्तेमाल हुआ है. ऋतिक रोशन और ईशा देओल की फिल्म ना तुम जानो ना हम में भी टेडी से जुड़े कई ख़ूबसूरत दृश्य देखने को मिलते हैं, ख़ासकर फिल्म का क्लाइमैक्स.

Happy Teddy Day

जाह्नवी कपूर ने अपनी बहन ख़ुशी को टेडी बियर के साथ मिस करते हुए पिक्चर शेयर किए थे, जो फैन्स के बीच ख़ूब वायरल हुए. एक बार सलमान ख़ान हॉलीवुड स्टार जैकी चेन से यूनिसेफ के टेडी के साथ ही मेल-मिलाप करते नज़र आए. यानी बचपन, प्यार, दोस्ती के साथ-साथ टेडी सद्भावना, आपसी जुड़ाव व अर्थपूर्ण संदेश का भी प्रतीक रहा है.

Happy Teddy Day

छोटे पर्दे के सितारे भी अपना टेडी प्रेम दर्शाते रहे हैं. कई सीरियल्स में इससे जुड़े ख़ूबसूरत माहौल मिल ही जाते हैं. तस्वीरों के ज़रिए भी टीवी स्टार्स ने अपने टेडी लव को एक्सप्रेस करते रहे हैं.

Happy Teddy Day

फिल्में, सितारों के साथ-साथ सेलिब्रेटीज़ के बच्चों में भी टेडी को लेकर काफ़ी आकर्षण रहा है. सोहा अली ख़ान और कुणाल खेमू की बिटिया रानी इनाया तो टेडी के पीछे क्रेज़ी है. अक्सर इस लिटिल डॉल की टेडी के साथ मासूम अदाओं वाले फोटोज़ देखे जा सकते हैं.

टेडी को लेकर शायरी, कविताएं, गाने, चुटकुलों की ख़ूब धूम रही है. जिन्हें सुनकर व देखकर आप भी जहां मुस्कुरा देंगे, वहीं रोमानी भी हो जाएंगे.

टेडी बियर से जुड़ा दिलचस्प क़िस्सा

टेडी बियर खिलौने से जुड़ा हुआ एक वाकया आप सभी के साथ शेयर करने की इच्छा हो रही है कि कैसे इसका नाम पड़ा और इसकी कहानी क्या है. दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट का निकनेम टेडी था और उनके नाम पर यही टेडी बियर मशहूर हुआ. कहानी कुछ यूं है कि साल 1902 में थियोडोर रूजवेल्ट मिसिसिपी में शिकार के लिए गए. उसी दरमियान उनके सहायक ने एक ब्लैक कलर के बियर (भालू) को पेड़ से बांधकर उनके शिकार के लिए पेश किया, लेकिन थियोडोर ने ऐसा करने से मना कर दिया. उनके अनुसार ऐसा करना ठीक नहीं और यह शिकार के नियमों के विरुद्ध भी है. उनकी यह भलमनसाहत चारों तरफ़ फैल गई. तब कलाकार क्लिफोर्ड बेरीमैन, जो पॉलिटिक्स से जुड़े कार्टून बनाते थे. इसे लेकर एक कार्टून बनाया, जिससे मॉरिस मिचटॉम व उनकी पत्नी रोज़ इस कदर प्रभावित हुए कि उन्होंने टेडी बियर स्टफ्ड टॉयज़ बनाने का ़फैसला कर किया. इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति रूजवेल्ट से आज्ञा भी ली और इस खिलौने को उनका नाम देकर दुनियाभर में मशहूर कर दिया. आज टेडी बियर विश्‍वभर में बेहद डिमांड में रहनेवाले खिलौनों में से एक है.

सभी प्यार करनेवालों को यह प्यारभरा सप्ताह मुबारक हो. हैप्पी वेलेंटाइन डे इन एडवांस, तो हैप्पी टेडी डे की ढेर सारी बधाइयां!…

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Psychology Of Relationships

रिश्तों का मनोविज्ञान (The Psychology Of Relationships)

मेरी बेटी की उम्र 28 साल है. वो नौकरी करती है. पिछले कुछ समय से उसकी शादी की बात चल रही है. कई रिश्ते भी आए, पर उसे कोई पसंद ही नहीं आता. पता नहीं उसके मन में क्या चल रहा है. उससे पूछती हूं, तो कहती है कि सही समय पर, सही लड़का मिल जाएगा, तब कर लूंगी शादी. जल्दबाज़ी में ग़लत निर्णय नहीं लेना चाहती. लेकिन लोग बातें करते हैं, जिससे मैं बहुत परेशान रहती हूं.

– शिल्पा शुक्ला, उत्तर प्रदेश.

आज की जनरेशन शादी देर से ही करती है. उनकी प्राथमिकताएं अब बदल गई हैं. एक तरह से शादी की उम्र क़रीब 30 साल हो गई है. बच्चे पढ़-लिखकर कुछ बनकर ही शादी करने की सोचते हैं. अपनी बेटी का साथ दीजिए और धीरज रखिए. सही समय पर सब ठीक होगा. लोग क्या कहते हैं, उस पर ज़्यादा ध्यान न दें. यह आपकी बेटी की ज़िंदगी का सवाल है. अपनी बेटी पर भरोसा रखें. वो सही समय आने पर सही निर्णय ले लेगी. उसके कारण ज़्यादा परेशान होकर अपनी सेहत और घर का माहौल ख़राब न करें.

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मेरे पिताजी ने वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया है. अब वे सारा दिन घर पर रहते हैं, लेकिन वो बहुत चिड़चिड़े से हो गए हैं. बात-बात पर बहस और ग़ुस्सा करते हैं. ज़िद्दी हो गए हैं, जिससे घर का माहौल ख़राब रहने लगा है. समझ में नहीं आता कि उन्हें कैसे हैंडल करें, क्योंकि वो बड़े हैं, तो उन्हें कुछ कह भी नहीं सकते.

– राकेश सिन्हा, पटना.

आप उनके मन की स्थिति समझने की कोशिश करें. हो सकता है, उन्हें भी दिनभर घर पर बैठे रहना अच्छा न लगता हो या यह भी हो सकता है कि उन्हें कोई और परेशानी हो, जो वे आप लोगों से कह न पा रहे हों. थोड़ा धीरज से काम लें. उनका विश्‍वास जीतें. उनसे प्यार से पेश आएं. उन्हें
सुबह-शाम वॉक पर ले जाएं. सोशल एक्टिविटीज़, योगा इत्यादि के लिए प्रोत्साहित करें. उन्हें घर के काम की भी ज़िम्मेदारी दें. घर के महत्वपूर्ण निर्णयों में उन्हें शामिल करें. उनकी राय को महत्व दें. उन्हें महसूस न होने दें कि अब वो काम पर नहीं जाते या कुछ करते नहीं हैं. आप सब का प्यार, सम्मान और सहानुभूति उन्हें शांत रहकर कुछ और करने के लिए प्रोत्साहित करेगी.

मेरी बेटी की उम्र 14 साल है. स्कूल जाती है. आजकल उसका स्वभाव कुछ अलग-सा हो गया है. हर समय मोबाइल पर लगी रहती है. कोई बात सुनती नहीं है. पैरेंट्स तो जैसे उसके दुश्मन हैं. डर लगता है, कहीं कोई ग़लत राह न पकड़ ले.
– कोमल सिंह, पानीपत.

इस उम्र में बच्चों का यह व्यवहार स्वाभाविक है. उन्हें परिजनों से ज़्यादा उनके दोस्त अच्छे लगते हैं. उन्हें लगता है पैरेंट्स की सोच पुरानी व दकियानूसी है. बच्चों की ख़ुशी का उन्हें ख़्याल नहीं है… आदि. बेहतर होगा आप भी उनके साथ दोस्तों की तरह पेश आएं. उनके साथ समय बिताएं, उनकी एक्टिविटीज़ में सकारात्मक तौर पर शामिल हों. हंसी-मज़ाक करें. हर बात पर टोकना या लेक्चर देना उन्हें पसंद नहीं आएगा. उनका विश्‍वास जीतें. लेकिन साथ ही उन पर नज़र भी रखें, उनके फ्रेंड सर्कल की जानकारी रखें, पर उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश न करें. घर का हल्का-फुल्का दोस्ताना माहौल उन्हें घर से और आपसे बांधे रखेगा.

Zeenat Jahan

ज़ीनत जहान
एडवांस लाइफ कोच व
सायकोलॉजिकल काउंसलर

[email protected]

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हम एक शब्द हैं वह पूरी भाषा है

बस यही मां की परिभाषा है…

Mother’s Day Quotes

मैं रोया परदेस में भीगा मां का प्यार

दुख ने दुख से बातें की बिन चिट्ठी बिन तार

तू फिरश्तों की दुआ है मां

तू धरती पर खुदा है मां

कल अपने आपको देखा था मां की आंखों में

ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है…

घर में झीने रिश्ते मैंने लाखों बार उधड़ते देखे

चुपके-चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा

ज़िंदगी की पहली टीचर, पहली फ्रेंड मां

ज़िंदगी भी मां क्योंकि ज़िंदगी देनेवाली भी मां

जब-जब मैंने काग़ज़ पर लिखा मां-पिता का नाम

कलम अदब से कह उठी हो गए चारों धाम

संवेदना, भावना, एहसास है मां

जीवन के फूलों में ख़ुशबू का आभास है मां

मुर्गे की आवाज़ से खुलती घर की कुंडी जैसी मां

बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी मां

चलती फिरती हुई आंखों से अज़ां देखी है

मैंन जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकान आई

मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से मां आई

मैंने मां की हथेली पर एक छोटा तिल देखा

और मां से कहा- ये दौलत का तिल है

मां ने अपने दोनों हाथों से मेरा चेहरा थामा और कहा-

देखो मेरे दोनों हाथों में कितनी दौलत है…

जब भी कोई रिश्ता उधड़े करती है तुरपाई मां

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे गरम-गरम रजाई मां

इस दुनिया में मुझे उससे बहुत प्यार मिला है

मां के रूप में मुझे भगवान का अवतार मिला है

मैं तन पर लादे फिरता दुसाले रेशमी

लेकिन तेरी गोदी की गर्माहट कहीं मिलती नहीं मां

ये जो सख़्त रास्तों पे भी आसान सफ़र लगता है

ये मुझको मां की दुआओं का असर लगता है

एक मुद्दत हुई मेरी मां नहीं सोयी मैंने एक बार कहा था कि मुझे अंधेरे से डर लगता है…

मुझे अपनी दुनिया, अपनी कायनात को एक लफ़्ज़ में बयां करनी हो, तो वो लफ़्ज़ है मां

सहनशीलता पत्थर-सी और दिल मोम-सा

ना जाने किस मिट्टी की बनी है मां

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं

मां से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊं

हालात बुरे थे मगर अमीर बनाकर रखती थी

हम गरीब थे, ये बस हमारी मां जानती थी

मांगने पर जहां पूरी हर मन्नत होती है

मां के पैरों में ही तो वो जन्नत होती है

गिन लेती है दिन बगैर मेरे गुज़ारे है कितने

भला कैसे कह दूं मां अनपढ़ है मेरी…

घर में ही होता है मेरा तीरथ

जब नज़र मुझे मां आती है

स्याही ख़त्म हो गई मां लिखते-लिखते

उसके प्यार की दास्तान इतनी लंबी थी…

– ऊषा मूरत गुप्ता

Others Think
लोग क्या कहेंगे का डर क्यों नहीं निकलता जीवन से? (Stop Caring What Others Think)

–    अरे, ये क्या पहना है? लोग देखेंगे, तो क्या कहेंगे…?

–    रीना, तुम लड़की होकर इतनी ज़ोर-ज़ोर से हंसती हो, तमीज़ नहीं है क्या, लोग क्या कहेंगे?

–    शांतनु, तुम दिनभर क्लासिकल डांस की प्रैक्टिस में लगे रहते हो, लोग क्या कहेंगे कि शर्माजी का बेटा लड़कियोंवाले काम करता है…

–    गुप्ताजी के दोनों बच्चे डॉक्टरी कर रहे हैं, तुम दोनों को भी इसी फील्ड में जाना होगा, जमकर पढ़ाई करो…

…इस तरह की बातें हम अक्सर सुनते और ख़ुद भी कहते आए हैं, क्योंकि हम समाज में रहते हैं और ऐसे समाज में रहते हैं, जहां दूसरे क्या सोचेंगे, यह बात ज़्यादा मायने रखती है, बजाय इसके कि हम ख़ुद क्या चाहते हैं. हम ‘लोग क्या कहेंगे’ की चिंता में इतने डूबे रहते हैं कि अपने अस्तित्व को ही भूल जाते हैं. कपड़ों से लेकर खान-पान, करियर व शादी-ब्याह जैसे निर्णय भी दूसरे ही हमारे लिए अधिक लेते हैं.

दूसरे इतने अपने क्यों?

–    “रिंकू, तुम्हारी अधिकतर सहेलियों की शादी हो गई है, तुम कब तक कुंआरी रहोगी? अक्सर सोशल गैदरिंग में सब पूछते रहते हैं कि बेटी की शादी कब करोगे… हम क्या जवाब दें उन्हें?”

“मॉम, आप तो जानती हैं कि मैं अभी अपने करियर पर फोकस करना चाहती हूं, शादी के बारे में सोचा भी नहीं… दूसरों का क्या है, वो तो कुछ भी पूछते रहते हैं…” रिंकू ने मम्मी को समझाने की कोशिश की.

–    “मिसेज़ वर्मा बता रही थीं कि उनकी बेटी ने इतनी डिग्रियां ले लीं कि अब उसके लिए उसके स्तर का लड़का ढूंढ़ना मुश्किल हो गया है. सोनल, तू भी पीएचडी शादी के बाद ही करना, क्योंकि ज़्यादा पढ़-लिख  जाओगी,  तो  लड़के  मिलने  मुश्किल हो जाएंगे…”

“लेकिन मम्मी, पढ़ाई करना ग़लत बात थोड़ी है, स़िर्फ शादी को ध्यान में रखते हुए तो हम ज़िंदगी के निर्णय नहीं ले सकते. वैसे भी मैं तो शादी ही नहीं करना चाहती. इसमें दूसरों को क्यों एतराज़ है? ये मेरी ज़िंदगी है, जैसे चाहे, वैसे जीऊंगी…” सोनल ने भी अपनी मम्मी को समझाने की कोशिश की…

शर्माजी के बेटे ने भी घरवालों को समझाने की कोशिश की कि क्लासिकल डांस स़िर्फ लड़कियां ही नहीं, लड़के भी कर सकते हैं और वो इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहता है, लेकिन उसके पैरेंट्स यह समझने को तैयार ही नहीं थे. उन्हें अपने बेटे के सपने पूरे करने में उसका साथ देने की जगह लोक-लाज की फ़िक़्र थी कि लोग क्या कहेंगे… दूसरे उनका मज़ाक उड़ाएंगे… आदि… लेकिन इन सभी पैरेंट्स को इस बात की अधिक चिंता थी कि लोग क्या कहेंगे… बच्चों ने उन्हें समाज से नज़रें मिलाने के काबिल नहीं छोड़ा… दरअसल, हम समाज की और दूसरों की इतनी ज़्यादा परवाह करते हैं कि हमारी ज़िंदगी में हस्तक्षेप करना वो अपना अधिकार समझने लगते हैं. अक्सर हमारे निर्णय दूसरों की सोच को ध्यान में रखते हुए ही होते हैं.

हमारी पहली सोच यह होती है कि रिश्तेदार और आस-पड़ोसवाले इन बातों पर कैसे रिएक्ट करेंगे…

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Office Gossip

इतना डर क्यों लोगों का?

–    हमारी सामाजिक संरचना शुरू से ही ऐसी रही है और इसी संरचना में हम भी

पले-बढ़े हैं, जिससे अंजाने में ही यह डर हमारी सोच का हिस्सा बन जाता है.

–    हर बात को हम अपनी इज़्ज़त और खानदान से जोड़कर देखते हैं, यही वजह है कि अधिकतर निर्णय हम सच जानते हुए भी नहीं ले पाते, क्योंकि हममें इतनी हिम्मत ही नहीं होती.

–    बेटी की सगाई तो कर दी, पर शादी की तैयारियों के बीच यह पता लगा कि जहां शादी होनेवाली है, वो लोग लालची हैं. ऐसे में पैरेंट्स उनकी डिमांड पूरी करने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा देते हैं और यहां तक कि लड़कियां भी सब कुछ जानते हुए निर्णय लेने से कतराती हैं, क्यों? …क्योंकि सगाई टूट गई, तो लोग क्या कहेंगे? समाज में बदनामी हो जाएगी, बेटी को कोई दूसरा लड़का नहीं मिलेगा… आदि… इत्यादि…!

–    इसी डर की वजह से लड़कियां असफल शादियों को भी निभाती हैं, क्योंकि हमारा समाज आज भी तलाक़शुदा महिलाओं को अच्छी नज़र से नहीं देखता.

–    हम पर सोशल प्रेशर इतना ज़्यादा हावी रहता है कि हम उसे ही पैमाना मानते हैं और फिर ज़िंदगी से जुड़े अत्यधिक निजी ़फैसले भी उसी के अनुसार लेते हैं.

–    हमें यह सब सामान्य लगता है, क्योंकि हम शुरू से यही करते व देखते आए हैं. पर दरअसल, यह बेहद ख़तरनाक है.

–    समाज की मानसिकता भी इस डर को और बढ़ाती है. देश में खाप पंचायतों के कई निर्णयों ने भी यह दिखा दिया है कि किस तरह से पुलिस-प्रशासन भी बेबस नज़र आता है सामाजिक दबाव के चलते.

–    इस तरह की घटनाएं आम लोगों के मन में और भी दबाव व डर को बढ़ाती हैं, जिससे उन्हें भी यही लगता है कि हर छोटे-बड़े निर्णयों में समाज की सोच का भी ख़्याल रखना ज़रूरी है.

–    कॉलेजेज़ से लेकर कई नेताओं तक ने लड़कियों के जींस पहनने व मोबाइल फोन रखने को उनके बलात्कार का कारण मानकर इन पर रोक लगाने की बात कई बार कही है.

–    लड़कियों के पहनावे पर कई तरह की बातें अभी भी होती हैं, जबकि हम ख़ुद को एडवांस सोसायटी मानने लगे हैं.

–    ये बातें हमारे मन में भी इतनी हावी हो जाती हैं कि हमें भी लगता है कि बच्चियों को सुरक्षित रखने का बेहतर तरीक़ा यही है कि जो समाज सोचे, वही हम भी करें.

inquisitive

कैसे निकलेगा यह डर?

–    सीधी-सरल बात है कि अपनी सोच बदलिए, समाज की सोच भी बदलती जाएगी.

–    जहां जवाब देना सही लगे, वहां बोलने से हिचकिचाएं नहीं.

–    समाज की सोच के विपरीत बोलना मुश्किल ज़रूर होता है, पर यह नामुमकिन नहीं है.

–    बात जहां सही-ग़लत की हो, तो लोग भले ही कुछ भी सोचें, हमेशा सही रास्ता ही सही होता है.

–    समाज आपकी ज़िंदगी की मुश्किलों को आसान करने कभी नहीं आएगा. वो मात्र दबाव बना सकता है, हमें उनके अनुसार निर्णय लेने के लिए बाध्य करने की कोशिश कर सकता है, हम पर हंस सकता है, हमारी निंदा कर सकता है. लेकिन इन बातों से इतना प्रभावित नहीं होना चाहिए कि अपनी ज़िंदगी से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय भी हम उन्हीं के अनुसार लें.

–    लोग क्या कहेंगे, यह सोचकर हम अपनी या अपने बच्चों की ख़ुशियां, उनके सपनों को छोड़ नहीं सकते, वरना यह डर हमारे बाद हमारे बच्चों के दिलों में भी घर कर जाएगा और यह सिलसिला चलता ही रहेगा.

–    बेहतर होगा अपनी सोच व अपने निर्णयों पर दूसरों को हम इतना हावी न होने दें कि हमारा ख़ुद का अस्तित्व ही न रहे.

–    हमें क्या करना है, कैसे करना है यह हमें ही तय करना है. हां, दूसरों की सहायता ज़रूर ली जा सकती है. अगर कहीं कोई कंफ्यूज़न है तो… लेकिन अंतत: हमें ही रास्ता निकालना है.

– गीता शर्मा

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Taimur and Inaaya

तैमूर और इनाया का क्यूट रक्षाबंधन… देखें तस्वीरें ( Taimur And Morning Inaaya Celebrate Rakshabandhan)

तैमूर और इनाया लग रहे हैं बेहद क्यूट और लगें भी क्यूं ना आख़िर वो सेलिब्रेट कर रहे हैं रक्षाबंधन, आप भी देखें तस्वीरें

Saif Ali Khan's Rakshabandhan

Taimur

Taimur

Taimur Rakshabandan

Taimur

 

Cute Inaya With Mom Soha Ali Khan

मॉमी सोहा के साथ क्यूट इनाया के वायरल पिक्स (Viral Pics: Cute Inaya With Mom Soha Ali Khan)
क्या आपने देखे हैं इनाया के लेटेस्ट पिक्स? अगर नहीं, तो अब देख लीजिए. जी हां, इनाया भी फेवरेट सेलिब्रिटी किड बन चुकी हैं और उनकी क्यूटनेस के सभी दीवाने हैं, इसीलिए वो जहां भी जाती हैं अपनी मॉम के साथ कैमरे की नज़रों ने नहीं बच पातीं. आप भी देखिए कितनी प्यारी हैं बेबी इनाया…

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बच्चों के साथ कुछ पल मौज-मस्ती, बड़ों के साथ बैठकर बोलने-बतियाने की चाहत, पार्टनर के साथ चंद सुकून के पल… ऐसी न जाने कितनी हसरतें हैं, जिन्हें पूरा करने की ख़्वाहिश रखते हैं हम, पर न जाने कहां इतने बिज़ी हैं कि अपनी भावनाओं को अपनों तक पहुंचा ही नहीं पाते. क्या सचमुच इतने बिज़ी हो गए हैं हम या फिर भावनाओं की कंजूसी करने लगे हैं? क्या है भावनाओं की कंजूसी के कारण और कैसे छोड़ें ये कंजूसी आइए जानते हैं.

Healthy Relationship

क्यों करते हैं हम भावनाओं की कंजूसी?

–  करियर में आगे, और आगे बढ़ने की होड़ लगी है.

– हर कोई अपनी आर्थिक स्थिति को अच्छी से बेहतर और बेहतर से बेहतरीन करने में लगा है.

– ख़ुद को बेस्ट साबित करने में हम सबने अपना सर्वस्व लगा दिया है.

– बिज़ी लाइफस्टाइल और तनाव हमारी सेहत को भी नुक़सान पहुंचा रहा है.

– अपनों से ज़्यादा अपनी भावनाओं को तवज्जो देने लगे हैं.

हम सभी मानते हैं कि हमारी ज़िंदगी बहुत तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही है, सब कुछ बहुत तेज़ी से बीत रहा है, घर चलाने की जद्दोज़ेहद में बहुत कुछ छूट रहा है, पर क्या किसी ने यह सोचा कि अपने और अपनों के लिए दौड़ते-भागते हम उनसे दूर तो नहीं निकल आए? ज़िंदगी जीने की कला कहीं भूलते तो नहीं जा रहे हैं?

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तय करें अपनी प्राथमिकताएं

हर किसी को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और प्राथमिकताओं की फेहरिस्त में परिवार सबसे पहले होना चाहिए. हेल्दी रिलेशनशिप के लिए सबसे ज़रूरी है अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करना. परिवार के सभी सदस्यों में आपसी प्यार-विश्‍वास और अपनापन यही तो हमारे परिवार और जीवन की पूंजी है, इसे प्राथमिकता दें. ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जहां कामयाब लोगों ने इस बात को सबसे ज़्यादा अहमियत देने की बात कही है, तो आप भी ‘फैमिली कम्स फर्स्ट’ के स्लोगन को अपना लें और ज़िंदगी को एक नए नज़रिए से देखने की कोशिश करें.

बड़ों की हंसी कमाएं

पैसे तो हम सभी कमाते हैं, पर अपने परिवार की हंसी कितनी कमाते हैं? कोशिश करें रोज़ाना रात को खाना खाने के बाद कुछ देर अपने पैरेंट्स के साथ बैठें. उनसे बातें करें, उनका हालचाल लें और ऑफिस का कोई फनी क़िस्सा उन्हें सुनाएं या फिर कोई जोक सुनाएं, जिसे सुनकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाए. आपके पैरेंट्स की मुस्कुराहट ही आपकी उस दिन की असली कमाई है.

बच्चे हैं बेस्ट ‘बैटरी चार्जर’

माना कि आप दिनभर के काम के बाद थक गए हैं और आपकी बैटरी डाउन है, पर क्या आप जानते नहीं कि बच्चे बेस्ट चार्जर होते हैं? तो जाइए, बच्चों को गुदगुदाएं, उनके साथ खेलें, उन्हें घुमाकर लाएं और अपने साथ-साथ बच्चों को भी दिन का बेस्ट टाइम दें.

पार्टनर के लिए है शरारतें

पति हो या पत्नी हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर उनकी भावनाओं को समझे. पार्टनर को समय दें, उसके साथ व़क्त बिताएं. पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार-विश्‍वास के साथ-साथ थोड़ी शरारत और थोड़ी छेड़छाड़ भी ज़रूरी है. ये शरारतें ही आपकी रूटीन लाइफ को रोमांटिक बनाती हैं, तो थोड़ी भावनाएं रोमांस में भी ख़र्च करें और अपनी मैरिड लाइफ को मज़ेदार व रोमांटिक बनाएं.

भाई-बहनों पर इंवेस्ट करें प्यार-दुलार

कभी शिकायतें, तो कभी टांग खिंचाई, कभी लड़ाई-झगड़े, तो कभी प्यार-दुलार- भाई-बहनों का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है. अपनी रोज़मर्रा की भागदौड़ में अगर आप एक-दूसरे से दूर हो गए हैं, तो रोज़ाना एक बार फोन पर बात ज़रूर करें. वीकेंड पर मिलें और अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करें. भावनाओं में इंवेस्टमेंट का आपको प्यार-दुलार का अच्छा-ख़ासा रिटर्न मिलेगा, जो आपकी ज़िंदगी में ख़ुशहाली लाएगा.

दोस्तों की यारी पर करें न्योछावर

फैमिली के बाद फ्रेंड्स ही तो हमारे सबसे क़रीब होते हैं. कोई प्रॉब्लम शेयर करनी हो, एंजॉय करना हो या फिर गॉसिप करनी हो, दोस्तों से बेहतर कौन हो सकता है. सोशल मीडिया के इस ज़माने में दोस्तों से कनेक्टेड रहना बहुत आसान है, तो क्यों न अपने बिज़ी रूटीन से थोड़ा व़क्त निकालकर अपने दोस्तों तक अपनी भावनाएं पहुंचाई जाएं.

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Healthy Relationship

कंजूसी छोड़ें, दिल खोलकर लुटाएं भावनाएं

– पैरेंट्स और घर के अन्य बड़ों को जब भी मौक़ा मिले ‘थैंक्यू’ कहना न भूलें. आपको उनकी परवाह है और उनके त्याग और समर्पण का एहसास है, यह उन्हें जताने में कभी कंजूसी न करें.

– बड़ों की तरह छोटों को भी उनके हिस्से का प्यार और दुलार दें. भावनाओं को स़िर्फ खाने-पीने और खिलौनों के ज़रिए ही नहीं, संस्कारों और डांट-डपट के ज़रिए भी ज़ाहिर करें.

– घरवालों को बर्थडे-एनीवर्सरीवाले दिन स्पेशल फील कराएं. उसके साथ दिन बिताकर या उसका मनपसंद खाना खिलाकर भी आप अपनी भावनाएं उस तक पहुंचा सकते हैं.

– कहते हैं ‘टच थेरेपी’ में बहुत ताक़त होती है. यह आपकी पॉज़िटिव फीलिंग्स को सामनेवाले तक बख़ूबी पहुंचाती है, तो फैमिली मेंबर्स को गले लगाना और शाबासी देना जैसी चीज़ें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करें.

– पैरेंट्स, पार्टनर और बच्चों को दिन में एक बार ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें. अक्सर हमें लगता है कि प्यार तो करते हैं, फिर जताने की क्या ज़रूरत है, पर याद रहे, प्यार का स़िर्फ होना काफ़ी नहीं, प्यार को समय-समय पर ज़ाहिर भी करते रहना ज़रूरी है.

– बच्चों की तरह बड़ों के लिए भी प्ले टाइम बनाएं. घर के बड़ों को उनका फेवरेट इंडोर या आउटडोर गेम्स खेलने के लिए उत्साहित करें और सारा इंतज़ाम ख़ुद करें.

– परिवार के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने का बेस्ट तरीक़ा है कि सब साथ बैठकर खाना खाएं. हर किसी को घर में फैमिली डिनर टाइम बनाना चाहिए और हर किसी को उसके नियम का पालन भी करना चाहिए. यही वो समय होता है, जब पूरा परिवार एक साथ होता है और आप अपनी बात सबके साथ शेयर कर सकते हैं.

– परिवार के किसी सदस्य से अगर मनमुटाव या अनबन हो गई है, तो बैठकर उससे बात करें और अपना नज़रिया और पक्ष उसके सामने रखें. मन में कोई गुबार न रखें. अक्सर न कह पाने के कारण छोटी-छोटी बातें रिश्तों में दरार डाल देती हैं, इसलिए आप ऐसा न होने दें और यहां भी भावनाओं की कंजूसी न करें.

– फैमिली को स्पेशल फील कराने के लिए वीकली फैमिली नाइट रखें. वीकेंड पर या छुट्टी की रात कुछ ख़ास करें. मूवी देखें, नाटक देखने जाएं, अंताक्षरी खेलें या फिर बैठकर गप्पे मारें.

– भावनाओं को खुलकर शेयर करने के लिए मंथली प्लान भी बनाएं. महीने में एक बार परिवार को कहीं घुमाने ले जाएं या फिर कुछ ख़ास करें.

– याद रखें, दूसरों को ख़ुश करने का मौक़ा कभी हाथ से न जाने दें. अगर आपको पता है कि आपके एक फोन कॉल या मैसेज से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ सकती है, तो ऐसा ज़रूर करें.

– दूसरों के साथ-साथ अपने लिए भी भरपूर भावनाएं लुटाएं. ख़ुद को ख़ुश रखने और पैंपर करने का कोई मौक़ा न गंवाएं, क्योंकि ख़ुशियां तभी बांट पाएंगे, जब आप ख़ुद ख़ुश रहेंगे.

– नाते-रिश्तेदारों को भी कभी-कभार याद कर लेंगे, तो वो ख़ुश हो जाएंगे.

– हमसे बहुत-से लोगों को बहुत-सी उम्मीदें होती हैं, सभी तो नहीं, पर कुछ की उम्मीदें तो हम ज़रूर ही पूरी कर सकते हैं.

– अनीता सिंह

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सालभर की पढ़ाई के बाद बच्चों के लिए अगला दो महीना सुकून भरा रहता है. ऐसे में कभी नानी के घर, तो कभी बुआ के घर जाकर वो अपनी छुट्टी का आनंद उठाते हैं. इस बार की छुट्टी में अपने बच्चों को ऐसी जगहों की सैर कराएं, जिससे उनका फन टाइम बन जाए और भी ख़ास. आज पढ़ाई का बोझ इतना बढ़ गया है कि बच्चों को कुछ और बताने या सिखाने के लिए समय ही नहीं मिलता. स्कूल से कोचिंग क्लास और फिर घर में सेल्फ स्टडी, इसी चक्कर में आज के बच्चों का बचपन बीत रहा है. पैरेंट्स होने के नाते आपकी ये ज़िम्मेदारी बनती है कि बच्चों को अपनी सभ्यता और संस्कृति के बारे में बताएं. तो चलिए इस माह हमारे साथ एक ऐसे ट्रिप पर जो आपके बच्चों का मनोरंजन करने के साथ ही उनका नॉलेज भी बढ़ाएगा.

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प्रकृति की गोद में बसा तेनमला
केरल का तेनमला भारत का पहला प्लान्ड ईको-टूरिज़्म डेस्टिनेशन है. मलयालम में तेनमला का मतलब बहुत ही प्यारा होता है. ‘तेन’ का मतलब हनी और ‘मला’ का मतलब हिल. यानी हनी हिल. ऐसा माना जाता है कि यहां का शहद देश के बाकी इलाकों से बहुत अलग और स्वादिष्ट होता है. घने जंगलों और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से घिरा तेनमला पर प्रकृति मेहरबान है. हरे पहाड़ों से गिरते झरनों का दृश्य बेहद ख़ूबसूरत होता है. तेनमला में बिखरी हरियाली को देखकर ऐसा लगता है जैसे मानों तेनमला को किसी ने हरे रंग से रंग दिया हो. अपने बच्चों को असली भारत और ख़ासतौर पर प्रकृति की अनुपम छटा से रू-ब-रू करवाना चाहते हैं, तो तेनमला ज़रूर घुमाएं.

ज़रूर देखें
सस्पेंशन ब्रिज, पलारुवि वॉटरफॉल, म्यूज़िकल डांसिंग फाउंटेन, बटरफ्लाई सफारी पार्क आदि देखने ज़रूर जाएं.

कैसे पहुंचें?
तेनमला पहुंचने के लिए त्रिवेंद्रम सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट है और शेंकोट्टाह नज़दीकी रेलवे स्टेशन.

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ऐतिहासिक धरोहर दिल्ली
बच्चों का ऐतिहासिक ज्ञान बढ़ाने के लिए उन्हें दिल्ली की सैर ज़रूर कराएं. किस तरह से देश में बदलाव हुए ये दिल्ली की आबो हवा से पता चल जाएगा. यह दुनिया के प्रमुख पर्टन स्थल में से एक है. राजधानी होने के नाते देश के प्रमुख कार्यालय भी दिल्ली में ही हैं. इस शहर का महत्व न केवल इसके अतीत में राजाओं की गद्दी और भव्य महलों के कारण है, बल्कि इसकी संपन्नता और बहुमुखी संस्कृति के कारण भी है.

ज़रूर देखें
दिल्ली घूमने का मतलब है कि पूरे भारत की एक झलक आपको यहां मिल जाएगी. इन जगहों को ज़रूर देखें.
– लाल किला
– कुतुब मिनार
– जामा मस्जिद
– पुराना किला
– संसद भवन
– राष्ट्रपति भवन
– इंडिया गेट
– अक्षरधाम मंदिर
– बिरला मंदिर
– राजघाट आदि

कैसे पहुंचें?
हवाई, रेल और सड़क मार्ग से आप दिल्ली जा सकते हैं. इंदिरा गांधी इंटरनेशनल हवाई अड्डा और नई दिल्ली तथा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के साथ ही हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन यहां का मुख्य रेलवे स्टेशन है.

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एनिमल फ्रेंडली रणथंभौर
1980 में नेशनल पार्क में शामिल किया गया रणथंभौर उत्तर भारत के बड़े नेशनल पार्क में से एक है. स़िर्फ किताबों में ही जानवरों को देखने वाले अपने बच्चों की मुलाक़ात असली जानवरों से ज़रूर कराएं. ये उनके लिए बहुत ख़ास ट्रिप होगी. यहां पर चीता, तेंदुआ, हिरण, हाइना, मगरमच्छ, जंगली सुअर, जंगली बिल्लियां, लोमड़ी, नीलगाय जैसे और भी बहुत से जानवरों से भरा है ये पार्क. जानवरों के अलावा हज़ारों प्रजातियों के पक्षि भी इस पार्क की शोभा बढ़ाते हैं.

ज़रूर देखें
– रणथंभौर किला
– त्रिनेत्र गणेश मंदिर
– पदम तालाब
– जोगी महल
– सर्वल झील
– कचीदा वैली आदि

रणथंभौर से 160 किलोमीटर दूर जयपुर भी जाएं.
बच्चों को जयपुर की कुछ विशेष जगहों की सैर
ज़रूर कराएं. आमेर पैलेस, हवा महल,
जंतर-मंतर, जल महल, सिटी पैलेस,
राज मंदिर सिनेमा हॉल आदि
जगहों पर अपने बच्चों को
ज़रूर ले जाएं.

कैसे पहुंचें?
हवाई, रेल और सड़क मार्ग से आप रणथंभौर जा सकते हैं. सांगानेर हवाई अड्डा सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट और सवाई माधोपुर नज़दीकी रेलवे स्टेशन है.

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पानी की दुनिया अंडमान एंड निकोबार
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह अपने साफ़, शांत और सुंदर समुद्र तटों के लिए जाना जाता है. प्रदूषण से दूर कुछ दिन अपने बच्चों को यहां ज़रूर घुमाने ले जाएं. स्कूबा डाइविंग के ज़रिए पानी के अंदर के जीव-जंतुओं और पौधों को देखने का मौक़ा मिलता है. इसके साथ ही यहां के जंगलों में तरह-तरह के पक्षि और सुंदर फूल देखने को मिलते हैं.

ज़रूर देखें
– सेल्युलर जेल
– माउंट हैरियट
– रोज़ एंड स्मिथ आइलैंड
– रंगत द्वीप
– मायाबंदर
– मत्स्य संग्रहालय
– वन संग्रहालय
– महात्मा गांधी मरीन नेशनल पार्क
– सीपीघाट पार्क
– जॉगर्स पार्क
– मधुबन

कैसे पहुंचें?
कोलकाता, भुवनेश्‍वर और चेन्नई से आप पोर्टब्लेयर के वीर सावरकर एयरपोर्ट के लिए सीधी उड़ान भर सकते हैं. चेन्नई, कोलकाता और विशाखापत्तनम से पोर्टब्लेयर के लिए समुद्री जहाज़ जाती है. समुद्री यात्रा में 50 से 60 घंटे लगते हैं.

मेरा 2 साल का एक बच्चा है और फ़िलहाल मैं दूसरा बच्चा नहीं चाहती, इसलिए हार्मोनल इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव (IUCD) इंसर्ट करवाया है. डॉक्टर के मुताबिक़ हैवी ब्लीडिंग के मामले में यह एक उचित गर्भनिरोधक है. पर अगर यह एक अच्छा गर्भनिरोधक है, तो सभी महिलाएं इसका इस्तेमाल क्यों नहीं करतीं?

– समीरा यादव, कानपुर.

इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (IUCD) काफ़ी लोकप्रिय गर्भनिरोधक है. प्रोजेस्टेरॉन हार्मोंसयुक्त यह डिवाइस हैवी ब्लीडिंग वाली महिलाओं को दिया जाता है. यह एक स्पेशल डिवाइस है, क्योंकि इसके टी शेप प्लास्टिक फ्रेम के साथ हार्मोंस भी होते हैं. आप 5 साल तक इसका इस्तेमाल कर सकती हैं. दरअसल, महंगा होने के कारण यह बहुत लोकप्रिय नहीं हुआ है.

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Hormonal Intrauterine Contraceptive

मेरी नौंवें महीने की प्रेग्नेंसी के शुरुआती चेकअप के बाद डॉक्टर ने तुरंत अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी. टेस्ट के बाद उन्होंने बताया कि मुझे ओलिगोहाइड्रामिनियॉस है और मुझे सीज़ेरियन डिलीवरी ही करवानी होगी. यह क्या है?

– ख्याति झा, रायपुर.

गर्भाशय में बच्चा पानी की थैली के भीतर रहता है, जिसे एम्नियॉटिक फ्लूइड कहते हैं. अल्ट्रासाउंड के ज़रिए उसकी जांच की जाती है. ओलिगोहाइड्रामिनियॉस इसी की कमी की अवस्था है. आम भाषा में कहें, तो गर्भाशय में पानी की कमी है. इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे पानी की थैली में दरार पड़ना, बच्चे की किडनी में एब्नॉर्मिलिटी के कारण यूरिन कम होना, जीन डिफेक्ट, मां को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ आदि. पानी की कमी के कारण बच्चे को सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है. यही कारण है कि आपके डॉक्टर ने सीज़ेरियन डिलीवरी की सलाह दी है.

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क्या आप पहचानती हैं प्रेग्नेंसी के ये शुरुआती लक्षण?

– जिस प्रकार हर महिला अलग होती है, उसी प्रकार उसकी प्रेग्नेंसी के लक्षण भी अलग होते हैं. यहां तक कि एक ही महिला की  दो प्रेग्नेंसीज़ के लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं. ज़रूरी नहीं जैसा वो पहली प्रेग्नेंसी में महसूस कर रही थी, वैसा भी दूसरी बार भी करे.

– पीरियड्स मिस होना इसका सबसे बड़ा लक्षण है, हांलाकि पीरियड्स मिस होने के पहले ही बहुत-सी

– कॉन्सेप्शन के बाद महिलाओं को हल्की-सी ब्लीडिंग होती है और पेट में मरोड़ भी होता है.

– शरीर में हो रहे बदलावों के कारण ब्रेस्ट हैवी लगने लगते हैं.

– थकान प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षणों में से एक है.

– ज़्यादातर महिलाओं को सुबह-सुबह चक्कर आते हैं.

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डॉ. राजश्री कुमार
डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]  

 

 

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