lakshmi poojan

दीपावली (Diwali) के दिन सुख-सौभाग्य-समृद्धि पाने के लिए घर की साफ़-सफ़ाई, सजावट, जैसे- लाइटिंग, रंगोली आदि कैसी होनी चाहिए? फेस्टिव सीज़न में फेंगशुई (Feng Shui) के मुताबिक घर सजाकर (House Decoration) आप में सुख-समृद्धि कैसे ला सकती हैं? बता रही हैं वास्तु (Vastu), फेंगशुई एवं न्यूमरोलॉजिस्ट कंसल्टेंट दीप्ति एच. अरोरा.

Vastu-Feng Shui Tips For A Prosperous Diwali

सुख-सौभाग्य-समृद्धि पाने के लिए ऐसे करें घर की सजावट
1) घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो इसके लिए सबसे पहले बेकार की चीजों को घर से हटा दें. घर में क्रॉकरी, सजावटी सामान आदि अगर टूट गए हों, तो उन्हें भी तुरंत हटा दें.
2) लाइटिंग कर रही हैं, तो ख़राब हो चुके बल्ब, ट्यूबलाइट आदि को तुरंत बदल दें.
3) पूरे घर को नमक मिले पानी से अच्छी तरह धोएं और फिर सूखे कपड़े से पोंछ लें. फेंगशुई के अनुसार, नमक मिले पानी से घर धोने से नकारात्मक ऊर्जा दूर भाग जाती है.
4) इसके बाद सभी कमरों के बीचोंबीच सुगंधित अगरबत्ती या धूपबत्ती जलाएं और इसे कम-से-कम दो घंटे तक जलने दें. ऐसा करने से घर पवित्र होगा.
5) दीपावली के दिन मुख्य द्वार के आस-पास और सामने वाली जगह की अच्छी तरह सफ़ाई करें. फिर मुख्य द्वार के सामने सिल्वर स्वस्तिक (बाज़ार में उपलब्ध) चिपकाएं. यह नकारात्मक ऊर्जा को रोकने में मददगार है. स्वस्तिक के साथ ही अस्थमंगला चिह्न (बाज़ार में उपलब्ध) भी मुख्य द्वार पर लगाना न भूलें.
6) मुख्य द्वार के सामने या आस-पास की खाली जगह पर रंगोली बनाएं. रंगोली के लिए ख़ासकर सेंधा नमक का इस्तेमाल करें. इससे नकारात्मक ऊर्जा मुख द्वार के भीतर प्रवेश नहीं कर पाएगी.

यह भी पढ़ें: वास्तु के अनुसार धनतेरस पर किस राशिवाले क्या ख़रीदें? (Dhanteras Shopping According To Your Zodiac Sign & Vastu)

7) मुख्य द्वार के ऊपर या आसपास माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा ज़रूर चिपकाएं.
8) मुख्य द्वार की चौखट पर मिट्टी के दीये रखें. साथ ही रंगोली पर भी दीये रखना न भूलें.
9) लक्ष्मी माता के स्वागत के लिए मुख्य द्वार से पूजा घर तक पद चिह्न (बाज़ार में उपलब्ध) इस तरह लगाएं, जैसे माता लक्ष्मी बाहर से भीतर की ओर आ रही हों.
10) गेंदे के फूल और आम के पत्तों से बना तोरण मुख्य द्वार पर लगाएं. गेंदे के फूल और आम के पत्तों से बना तोरण सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.
11) पानी से भरे बाउल में गुलाब की पंखुड़ियां डालकर मुख्य द्वार के पास पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. ऐसा करने से सौभाग्य बढ़ता है और कमरे की रौनक भी दोगुनी हो जाती है.
12) दीपावली के दिन दीया जलाने के लिए शुद्ध घी या सरसों के तेल का इस्तेमाल करें.
13) हर दीये में चार बाती हो. एक बाती लक्ष्मीजी, दूसरी गणेशजी, तीसरी कुबरे और चौथी इंद्र देव के लिए.
14) कम से कम पांच दीये शुद्ध घी से जलाएं. एक दीये को कीचन में, दूसरे को बेडरूम, तीसरे को लिविंग रूम, चौथे को वॉशरूम तथा पांचवे को यदि घर में अन्य कमरा है तो वहां रखें. दीपावली के दिन बाउंड्री वॉल पर दीये जलाना न भूलें.
15) दीपावली के दिन मुख्य द्वार के सामने/आस-पास, पूजा घर और तुलसी के गमले के पास रंगोली ज़रूर बनाएं. रंगोली बनाने के लिए सेंधा नमक का इस्तेमाल ज़रूर करें. यह अत्यंत शुभ होता है.

यह भी पढ़ें: लक्ष्मीजी को करें प्रसन्न: पहनें रंग राशि के अनुसार (Your Lucky Colour For Diwali)

 

धन-संपत्ति पाने के 10 फेंगशुई टिप्स जानने के लिए देखें वीडियो:

लक्ष्मी पूजन (Lakshmi Pooja 2018) विधि और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय यदि आपको मालूम हैं, तो आप पर मां लक्ष्मी की कृपा अवश्य होगी. दीपावली पांच दिनों का पर्व है- धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजन एवं भाई दूज. यूं तो ये पांचों दिन शुभ और लाभकारी माने जाते हैं, लेकिन कहा जाता है कि लक्ष्मी पूजन के दिन किया गया कोई भी कार्य शुभ एवं शीघ्र फलदायी होता है. इससे लक्ष्मी यानी धन-दौलत से जुड़ी मनोकामना भी जल्दी और आसानी से पूरी होती है, लेकिन इसके लिए आपको सही विधि की जानकारी होनी ज़रूरी है. दीपावली में दीये जलाने, मिठाइयां और तोह़फे बांटने से लेकर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा-उपासना करने का भी रिवाज़ है. मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लोग तन-मन-धन से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन ऐसा करते समय वो पूजा-प्रार्थना के कई नियम भूल जाते हैं. मां लक्ष्मी स़िर्फ पूजा-पाठ कर लेने से प्रसन्न नहीं होती, इसके लिए आपको और क्या करना होगा? आइए, हम आपको बताते हैं.

Lakshmi Pooja 2018

 

लक्ष्मी-पूजन का समय व मुहूर्त (Lakshmi Pooja Time)
दीपावली में लक्ष्मी-पूजन का विशेष महत्व है. धन-वैभव की देवी लक्ष्मीजी को प्रसन्न करने के लिए क्या है सही समय व मुहूर्त? बता रहे हैं ज्योतिष व वास्तु एक्सपर्ट पंडित राजेंद्र जी.

कहते हैं, यदि वृषभ लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा की जाए, तो वो स्थिर रूप से आपके घर में वास करती है इसलिए वृषभ काल में मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है.

टाइम: 18.30 से 20.30
समय 1 घंटा 59 मिनट

प्रदोष काल: 17.58 से 20.32
वृषभ काल: 18.30 से 20.30

इसी तरह लक्ष्मी पूजन में सिंह लग्न का भी विशेष महत्व है. इस लग्न में लक्ष्मी पूजन करने से भी मां लक्ष्मी स्थिर रूप से घर में वास करती है.

महानिष्ठा काल: 23.56 से 24.47
सिम्हा काल: रात 12.56 से 3.4

जो लोग ऊपर दिए समय में पूजा नहीं कर सकते, वे इस समय पर भी लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं:

सुबह: 6.45 से 9.34
सुबह: 10.58.12.22
दोपहर: 15.10 से 17.59
शाम: 19.35 से 21.31

Lakshmi Pooja 2018

लक्ष्मी-पूजन की विधि
लक्ष्मी-पूजन यदि विधि-विधान से किया जाए, तो शुभफल की प्राप्ति होती है. लक्ष्मी-पूजन के समय निम्न बातों का ध्यान अवश्य रखें:

1) सबसे पहले अक्षत (चावल) से कमल या स्वस्तिक का चित्र (रंगोली) बनाकर उस पर लक्ष्मीजी की प्रतिमा रखें.
2) लक्ष्मीजी के पास ही कलश में कुबेर और अन्य देवताओं की प्रतिमा रखें.
3) घर की उत्तर-पूर्व दिशा में लक्ष्मीजी की फोटो या मूर्ति रखना शुभ माना जाता है. साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि पूजा करते समय आपका मुंह उत्तर दिशा में हो.
4) देशी घी का दीपक, धूप बत्ती और अगरबत्ती जलाकर पूजा की शुरुआत करें.
5) सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा करें.
6) गणेश पूजन के बाद नवग्रह पूजें.
7) इसके बाद माता लक्ष्मी का आवाहन करें.
8) माता लक्ष्मी की मूर्ति को पंचामृत (गंगा जल, दूध, दही, घी और शहद से बना) से स्नान करवाएं.
9) इसके पश्‍चात लक्ष्मी जी की मूर्ति को गंगा जल से भरे बर्तन में डुबोकर साफ़-सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें.
10) लक्ष्मी मां की मूर्ति को स्थापित करें और तिलक लगाकर फूल चढ़ाएं.
11) लक्ष्मी माता को वस्त्र (कपड़े) और शृंगार की सामग्री जैसे- चूड़ी, सिंदूर आदि भी चढ़ाएं.
12) फिर धूप-दीप दिखाते हुए लक्ष्मी कथा का वाचन करें.
13) लक्ष्मी माता को भोग चढ़ाएं और उन्हें दक्षिणा दें.
14) श्रद्धाभाव से लक्ष्मी मां की आरती करें.
15)आख़िर में एक बार फिर माता लक्ष्मी को पुष्प अर्पण करते हुए हाथ जोड़कर उनसे प्रार्थना करें.

यह भी पढ़ें: वास्तु के अनुसार धनतेरस पर किस राशिवाले क्या ख़रीदें? (Dhanteras Shopping According To Your Zodiac Sign & Vastu)

 

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 12 उपाय (12 Best Ways To Please Goddess Lakshmi)

1) पूजाघर में देशी घी का दिया जलाएं.
2) लक्ष्मीजी के चरणों में कमल के फूल ज़रूर चढ़ाएं.
3) लक्ष्मीजी को नैवेद्य, बताशे आदि चढ़ाएं. फिर परिवार, रिश्तेदार, दोस्तों को उसे प्रसाद के रूप में बांट दें.
4) दीपावली में देवी-देवताओं की पूजा के लिए तांबे, पीतल, चांदी या स्टील के बर्तनों का प्रयोग करें.
5) लक्ष्मीजी स्वच्छता और सौंदर्य दोनों बहुत पसंद हैं इसलिए लक्ष्मी-पूजन के समय स्वच्छता का ख़ास ध्यान रखें और अपने घर तथा पूजन स्थल को ख़ूब सजाएं.
6) मुख्यद्वार से लेकर पूजास्थल तक लक्ष्मीजी के पदचिह्न बनाएं. आप चाहें तो रेडीमेड फुटप्रिंट स्टिकर्स भी लगा सकती हैं.
7) घर के मुख्यद्वार को तोरण, रंगोली, दीये आदि जितना सजा सकें सजाएं.
8) ऐसी मान्यता है कि जिस घर में भी धन-वैभव की देवी लक्ष्मी की प्रतिमा की पूजा की जाती है, लक्ष्मीजी वहां वास करती हैं. अत: लक्ष्मीजी की पूजा में कोई कमी न रहने दें.
9) घर की चौखट या आंगन में दिया जलाते समय हर एक दीये में चार बत्तियां लगाएं. ये चार बत्तियां मां लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और इंद्र के प्रतीक माने जाते हैं.
10) दीवावली की पूरी रात घर के दक्षिण-पूर्व कोने में घी का दीया जलाए रखें, इसे बुझने न दें.
11) दीपावली की पूजा में लाल रंग का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये रंग शुभ माना जाता है. लाल रंग का प्रयोग न कर सकें, तो आप पिंक कलर का भी इस्तेमाल कर सकती हैं.
12) आप ख़ुद भी पूजा के समय ब्राइट कलर के कपड़े पहनें, क्योंकि रंग जीवन में ख़ुशियां लाते हैं.

यह भी पढ़ें: चरणामृत और पंचामृत में क्या अंतर है? (What Is The Difference Between Charanamrit And Panchamrit)

 

लक्ष्मी पूजन विधि और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के यूं तो कई उपाय हैं, लेकिन राशि के अनुसार यदि लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के उपाय किए जाएं, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है. राशि के अनुसार कैसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न? बता रहे हैं पं.राजेंद्र दुबे जी.

Goddess Lakshmi

1) मेष राशि
गणेशजी को बूंदी के लड्डू चढ़ाएं. रंगीन कंबल या गर्म कपड़े दान करें. कुत्तों को इमरती खिलाएं. नैऋत्य कोण में सरसों का दीपक रातभर जलाएं.

2) वृषभ राशि
हनुमानजी को गुड़-चना चढ़ाएं. बच्चों को रेवड़ियां बांटें. दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाएं.

3) मिथुन राशि
पानी वाला नारियल तथा बादाम दुर्गाजी को या काली मंदिर में (रात्रि में) दक्षिणा सहित चढ़ाएं. पक्षियों को दाना चुगाएं. घर के बड़े-बुज़ुर्गों को वस्त्रादि भेंट करें. घर के नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

4) कर्क राशि
हनुमानजी को बेसन के लड्डू चढ़ाएं. काली उड़द दान करें. तेल लगी रोटी कुत्तों को खिलाएं. पश्‍चिम दिशा में घी का दीपक जलाएं.

5) सिंह राशि
सप्त अनाज दान करें. उड़द का सामान बांटें. घर के नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

6) कन्या राशि
शनि मंदिर में तेल का दीपक लगाकर तेल दान करें. गरीबों को भोजन दान करें. नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक जलाएं.

यह भी पढ़ें: वास्तु के अनुसार धनतेरस पर किस राशिवाले क्या ख़रीदें? (Dhanteras Shopping According To Your Zodiac Sign & Vastu)

7) तुला राशि
पीपल में मीठा जल चढ़ाकर तेल का दीपक लगाएं. रात्रि में घर के पश्‍चिम में घी का दीपक तथा नैऋत्य में तेल का दीपक जलाएं.

8) वृश्‍चिक राशि
रंगीन कंबल दान करें. घर के ब्रह्मस्थल पर घी का दीपक रातभर जलाएं. हनुमानजी को लड्डू का नैवेद्य जलाएं.

9) धनु राशि
गणेशजी को लड्डू चढ़ाएं. गाय को रोटी पर घी तथा गुड़ रखकर खिलाएं. शिवजी को जल में काले तिल मिलाकर चढ़ाएं. घर के नैऋत्य कोण में तेल का दीपक जलाएं.

10) मकर राशि
साबुत मसूर दान करें. घर के बड़ों को भेंट दें. घर की दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाएं.

11) कुंंभ राशि
दुर्गाजी को नारियल चढ़ाएं. पक्षियों को दाना चुगाएं. घर के नैऋत्य कोण में सरसों के तेल का दीपक जलाएं. सुगंधित जल से रुद्राभिषेक करें.

12) मीन राशि
शनि मंदिर में दीपक, तेल तथा काली उड़द दान करें. तेल लगी रोटी कुत्तों को खिलाएं. पश्‍चिम दिशा में घी का दीपक जलाएं.

शुभ फल प्राप्ति के लिए अपनी राशि के अनुसार क्या दान करें, जानने के लिए देखें वीडियो:

दीपावली के त्योहार का जितना धार्मिक महत्व है, उतना ही इस दिन किए गए उपायों का भी महत्व है. पं. राजेंद्र जी बता रहे हैं मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 20 आसान और अचूक उपाय.

Easy Ways To Impress Goddess Lakshmi

1) लक्ष्मी पूजन के ख़ास अवसर पर शुभ मुहूर्त पर पूजा-आराधना, मंत्र जाप, अनुष्ठान आदि करने से मां लक्ष्मी को प्रसन्न होती हैं इसलिए सही समय पर पूजा-प्रार्थना अवश्य करें.
2) इस साल 19 अक्टूबर के दिन लक्ष्मी पूजन है. पूजा-आराधना के लिए हम आपको तीन शुभ मुहूर्त बता रहे हैं, दो स्थिर लग्न हैं, जिनका समय है शाम 7.45 से लेकर 9.44 मिनट (ये वृषभ लग्न है) और रात 2.10 से लेकर 4.18 मिनट (इसे अर्धरात्रि भी कहा जाता है और ये सिंह लग्न है), इनके अलावा तीसरा शुभ मुहूर्त है प्रदोष काल, ये शाम 5.48 से लेकर 7.25 मिनट तक है. इन तीनों में से किसी भी शुभ मुहूर्त पर आप मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर सकते हैं.
3) अपने आसपास के चौराहे पर दिवाली की रात में दीया ज़रूर जलाएं. ऐसा करने से मां लक्ष्मी की प्रसन्न होती हैं.
4) दिवाली की रात एक दीया मंदिर में जाकर भी जलाएं.
5) घर के दरवाज़े और मेन गेट पर दीपक अवश्य जलाएं.
6) दिवाली की रात घर में अखंड दीया जलाएं जो सुबह तक जलता रहे.
7) दिवाली की रात बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीया जलाना भी शुभ माना जाता है. इससे भगवान शिव की कृपा पूरे परिवार पर बनी रहती है.
8) दिवाली की रात किसी मंदिर के किसी भी पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और फिर मुड़कर पीछे न देखें. ऐसा करने से लक्ष्मी जी की कृपा होती है.
9) दीपावली की रात तुलसी के पौधे के नीचे दीया जलाने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है.
10) दिवाली के दिन किसी भी मंदिर में केले का एक पेड़ लगाएं. फिर इस पेड़ की सेवा करते रहें. जैसे-जैसे केले का पेड़ बड़ा होगा आपके घर में भी समृद्धि बढ़ती जाएगी.

लक्ष्मी जी की आरती (Aarti- Lakshmi Ma)

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के अचूक उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

11) दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के बाद लक्ष्मी जी या किसी भी देवी को लौंग अर्पित करें. ये प्रकिया दिवाली के बाद भी सतत चलने दें. ऐसा करने से आर्थिक लाभ होता है.
12) शाम को सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू या पोंछा न लगाएं. यह समृद्धि के लिए अशुभ माना जाता है.
13) घर की दीवारों या ज़मीन पर पेन, पेंसिल या चॉक के निशान न बनाएं. इससे कर्ज़ का बोझ बढ़ता है.
14) दिवाली के दिन किसी किन्नर को धन का दान करें और उससे अनुरोध करके कुछ पैसे वापस ले लें. उन पैसों को स़फेद कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रख दें. इससे धन की कभी कमी नहीं होगी.
15) दिवाली की रात लौंग और इलायची जलाकर उसका भस्म बना लें. इस भस्म से देवी-देवताओं को तिलक लगाएं. इस प्रयोग से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है.
16) दिवाली के दिन एक पीपल का पत्ता तोड़कर घर ले आएं. पत्ता कटा-फटा नहीं होना चाहिए. इस पत्ते पर ॐ महालक्ष्मै नम: लिखकर पूजा स्थल पर रख दें. इसे तिजोरी में स्थापित करने से धन आगमन और धनवृद्धि होती है.
17) दिवाली के दिन किसी गरीब, दुखी, असहाय, रोगी को आर्थिक सहायता दें. ऐसा करने से आपकी उन्नति अवश्य होगी.
18) श्रीयंत्र के सामने बैठकर श्री सुक्त के 21 पाठ करके उनके समक्ष 21 घी के दीये जलाएं. ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है.
19) दिवाली वाले दिन गणेश, लक्ष्मी और कुबेर इन सबकी पूजा अवश्य करें. साथ ही श्री सुक्त से हवन कराएं. ऐसा करने से धन की वृद्धि होती है.
20) लक्ष्मी यंत्र या श्री यंत्र पर 21 विष्णु कमल अवश्य चढ़ाएं. ऐसा करने से धन की समस्या दूर होती है.

 

फेस्टिव स्पेशल: रंगोली डिज़ाइन्स (Festive Special: Rangoli Designs)

दीपावली में सुख, समृद्धि और देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहे, इसके लिए इन पांच दिनों में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा, जैसे- पूजा की विधि, शुभ फल प्राप्ति के लिए क्या करें, किन बातों से बचें आदि. दीपावली के शुभ पर्व की शुरुआत होती है धनतेरस से, इस दिन किस तरह से पूजा-अर्चना करें और किन बातों का ख़्याल रखें, ताकि मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहे, सबसे पहले यही जानते हैं.

1

धनतेरस

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन देवता धन्वंतरि के अतिरिक्त देवी लक्ष्मी और धन के देव कुबेर की पूजा पूरी श्रद्धा के साथ की जाती है.

क्या करें?

– पूजा की तैयारी सूर्योदय से पहले नित्यकर्म और स्नान आदि से निपटकर शुरू कर देनी चाहिए.

– पूजा किसी पुजारी से करवाई जानी चाहिए या फिर उनके निर्देशों का पालन करते हुए पूजा करें.

– मुहूर्त के अनुसार पूजन की तैयारी करें. पूजा के लिए देव कुबेर की मूर्ति का उपयोग करें. मूर्ति नहीं होने की स्थिति में कुबेर की तस्वीर का उपयोग किया जा सकता है.

– पूजा के लिए तिजोरी या ज्वेलरी बॉक्स का भी उपयोग अच्छा होता है. यदि कुबेर यंत्र का प्रयोग पूजा और साधना के लिए किया जाए, तो यह बहुत ही शुभ प्रभाववाला साबित होता है.

– पूजा प्रारंभ करने से पहले तिजोरी या आभूषण के बक्से के ऊपर सिंदूर के
साथ स्वस्तिक का चिह्न बना दें. हाथ में कलेवा बांधें.

– कुबेर की पूजा में पीले वस्त्रों व पीली वस्तुओं का प्रयोग करें.. पीले आसन पर बैठकर पूजा करें.

– धनतेरस की शाम को मिट्टी के दीपक में तिल का तेल भरकर नई रूई की बाती जलाएं, जिसका मुख दक्षिण की ओर होना चाहिए.

– धनतेरस के मौ़के पर बर्तन, आभूषण आदि की ख़रीद अपनी राशि के अनुसार करें. इसके साथ दूसरी कोई उपयोग में आनेवाली वस्तु भी ख़रीदें. बर्तनों में आप पीतल, तांबे या चांदी के बर्तन ख़रीद सकते हैं. सोने या चांदी का सिक्का ख़रीदना भी शुभ होता है.

– बर्तनों के अतिरिक्त दूसरी वस्तुओं में कपड़े, स्टेशनरी, सुगंध, हल्दी, तेजपत्ता, पत्थर की निर्मित वस्तु या मूर्ति, मेवे-मिठाई आदि हो सकते हैं.

क्या न करें?

– कुबेर देव की पूजा के लिए अपनी सुविधा को ध्यान में रखते हुए शुभ मुहूर्त की अनदेखी न करें.

– दीपदान के लिए मिट्टी का दीपक ही जलाएं और उसमें तिल के तेल का इस्तेमाल करें. जलते दीपक का मुख उत्तर, पूरब या पश्‍चिम की दिशा में न रखें.

– सात्विक भोजन करें. मांसाहार या शराब का सेवन न करें.

– घर या आसपास के किसी भी कोने में गंदगी न रहने दें.

– उपहार में चाकू या चमड़े आदि के सामान न बांटें.

वास्तु टिप्स

– नकारात्मक ऊर्जा देनेवाले सामानों को घर से निकाल बाहर करें. ऐसी वस्तुओं के रूप में पुराने टूटे बर्तन, अख़बार, पत्र-पत्रिकाएं, टूटे खिलौने, बंद घड़ियां, ख़राब फोन, कंप्यूटर आदि के सामान या दूसरी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स आदि हो सकते हैं.

– धनागमन के लिए घर के प्रवेशद्वार पर की जानेवाली सजावट के लिए चावल के आटे, रंगीन पाउडर, चॉक, फूल, आम के पत्ते का प्रयोग करें.

– वास्तु के अनुसार कोई भी पूजा घर के उत्तरी हिस्से में शुभ मानी गई है. पूजा के समय घर में गुलाब या चंदन की ख़ुशबूवाली अगरबत्ती का ही प्रयोग करें.

– घर में मिट्टी के चार दीये एक साथ रखें. इसका अर्थ लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और इंद्र से है.

नरक चतुर्दशी

यह दूसरे दिन मनाया जानेवाला पर्व है, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है. इस दिन की शाम को दीपदान करने की मान्यता है, जो यमराज के लिए किया जाता है.

– इस दिन स्नानादि के बाद मंदिर में भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण की पूजा करें.

– रात को घर के सबसे बुज़ुर्ग सदस्य द्वारा एक दीपक जलाकर पूरे घर में घुमाने के बाद उस दीप को घर से बाहर कहीं दूर इस मान्यता और विश्‍वास के साथ रखें कि सभी बुराइयां और हानिकारक शक्तियां घर से बाहर चली जाएं.

– मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में चावल की ढेरी बनाकर उस पर दीया जलाएं.

– यमराज को अकाल मृत्यु से दूर रखने की प्रार्थनाकरें.

1

दीपावली

धार्मिक व सामाजिक मान्यता के अनुसार पांच दिनों तक हिंदू रीति से उत्सव की तरह मनाया जानेवाला त्योहार है दिवाली.

पूजन सामग्री और विधि

सामग्री: दीपक, कमल के फूल, जावित्री, केसर, रोली, चावल, पान के पांच पत्ते, सुपारी, एक थाली में फल, दूसरी थाली में गुलाब और गेंदा आदि के फूल, दूध, खील-बताशे, नारियल, सिंदूर, सूखे मेवे, मिठाई की भरी थाल, दही, गंगाजल, दूब, अगरबत्ती, आंगन आदि में जलाने के लिए 11 या 21 की संख्या में मिट्टी के दीपक, रूई, कलावा, तांबे का कलश और तांबे के अन्य पात्र, सिक्के तथा रुपए.

विधि: सबसे पहले थाली में या भूमि को शुद्ध करके नवग्रह बनाएं या नवग्रह का यंत्र स्थापित करें. इसके साथ ही एक तांबे या मिट्टी का कलश रखें, जिसमें गंगाजल, दूध, शहद, सुपारी, सिक्के और लौंग वग़ैरह डालें तथा उसे लाल कपड़े से ढंककर एक कच्चे नारियल और कलावे से बांध दें.

– बनाए गए नवग्रह यंत्र के स्थान पर रुपया, सोना या चांदी का सिक्का, देवी लक्ष्मी की मूर्ति और मिट्टी के बने हुए लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती, ब्रह्मा, विष्णु, महेश आदि देवी-देवताओं की मूर्तियां या चित्रों से सजाएं.

– यदि कोई धातु की मूर्ति हो, तो उसे साक्षात रूप मानकर दूध, दही और गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत-चंदन का शृंगार करें और फल-फूल आदि से सजाएं. इसके दाहिनी ओर घी या तिल का एक पंचमुखी दीपक अवश्य जलाएं.

– घर के किसी मुख्य सदस्य या नित्य पूजा-पाठ करनेवाले व्यक्ति को महालक्ष्मी पूजन के समय तक उपवास रखना चाहिए.

– ध्यान रहे पूजन के लिए उत्तर या पूर्व दिशा में मुख करके बैठें.

– सबसे पहले गणेश और अंबिका का पूजन करें. फिर कलश स्थापन और नवग्रह पूजन के बाद लक्ष्मी समेत दूसरे देवी-देवताओं का पूजन करें.

– इस पूजन के बाद तिजोरी में गणेश तथा लक्ष्मी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजा करें. पूजन के स्थान पर चौमुखा दीपक जलाएं तथा पूजा के बाद घर के कोने-कोने में दीपक जलाकर रखें.

– कारोबारियों को अपने कार्यक्षेत्र पर बही-खातों की पूजा करना चाहिए. पूजा के बाद जितनी जैसी श्रद्धा हो, उसके अनुरूप घर के छोटे बच्चों, बहू-बेटियों को रुपया-पैसा या दूसरी वस्तुओं का दान देना चाहिए.

– रात के बारह बजे दुकान की गद्दी की भी विधिपूर्वक पूजा करें. परंपरा के अनुसार दीपावली पूजन के बाद चूने या गेरू में रूई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल-बट्टा तथा सूप पर तिलक करना चाहिए.

– देवी लक्ष्मी की पूजा के समय उनके मंत्र-ॐ श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: का लगातार उच्चारण करते रहें.

क्या करें?

दीपावली की पूजा किसी योग्य पुजारी से विधि-विधान से संपन्न करवाएं.

– पूजा की तैयारी सूर्योदय से पहले ही नित्यकर्म एवं स्नान आदि से निबटकर कर लें.

– पूजन से पहले घर की अच्छी तरह साफ़-सफ़ाई करें. घर को फूल, आम के पत्ते, रंगोली, रंगीन बल्ब आदि से सजाएं.

– पूजाघर सही तरह से सुसज्जित होना चाहिए. सजावट में विविध रंगों का
इस्तेमाल करें.

– पूजा के क्रम में अच्छी ख़ुशबूदार अगरबत्ती या धूप का इस्तेमाल करें. इनमें गुलाब या चंदन की धूप सबसे बेहतर रहती है.

– घर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर दीया जलाएं.

क्या न करें?

– घर में व प्रवेश द्वार पर कहीं भी गंदगी न रहने दें.

– रंगों, फूलों आदि से सजावट करते हुए या रंगोली बनाते समय ध्यान रहे कि काले या गाढ़े भूरे रंग का इस्तेमाल न के बराबर हो.

– पूजा का स्थान घर के दक्षिण, पश्‍चिम या उत्तर की ओर न बनाएं. किसी भी एक देवी या देवता की दो मूर्तियां या तस्वीरें न रखें.

– घर के कोने-कोने में नमक मिश्रित जल का छिड़काव करने के बाद अपना हाथ धोना नहीं भूलें.

– उपहार में चमड़े की बनी वस्तुएं किसी को भी न दें.

वास्तु टिप्स

– घर के आंगन, बड़े हॉल या फिर प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं. उसके बीच में दीपक जलाएं. दीये के मुख को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखकर जलाने से सुख-समॄिद्ध बढ़ती है. इसी के साथ मुख्य द्वार पर घर में प्रवेश करते हुए पैरों के
निशान बनाएं.

– घर का उत्तरी भाग धन का प्रतिनिधित्व करता है, अत: लक्ष्मी पूजा इसी हिस्से में की जानी चाहिए.

– पूजाघर में भगवान गणेश को देवी लक्ष्मी के बाईं ओर तथा देवी सरस्वती को लक्ष्मी के दाईं ओर रखना चाहिए. सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां या तस्वीरें बैठी हुई अवस्था में होनी चाहिए, जिन्हें उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख किए हुए
रखना चाहिए.

– पानी का कलश पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. पूजा स्थल या पूजा घर में मूर्तियां रखते समयइस बात का ध्यान रखें कि वे किसी भी दरवाज़े के सामने या रास्ते में न पड़ें.

– पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर की दिशा में एक चौड़े बर्तन के पानी में तैरती हुई ताज़ा गुलाब की पंखुड़ियां रखें.

– ॐ या स्वस्तिक के चिह्न को उत्तर या पूर्व दिशा की दीवारों पर ही लगाएं.

– जब घर के बाहर दीये जलाएं, तो इन्हें चार के गुणक के रूप में रखें. प्रत्येक दीया लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और इंद्र का प्रतिनिधित्व करता है.

– उपहार के लिए धातु के सामान या कपड़े आदि को उपयुक्त माना गया है. सजावटी वस्तुओं में पेंटिंग, क्रिस्टल बॉल आदि हो सकते हैं.

– घर की सजावट के क्रम में प्रकाश-व्यवस्था घर के मुख्य द्वार की दिशा के अनुरूप होनी चाहिए. यदि मुख्य द्वार उत्तर या उत्तर-पश्‍चिम की ओर हो, तो हरे या पीले रंग की रोशनी का इस्तेमाल करें.

– यदि मुख्य प्रवेश पूर्व की ओर हो, तो पीले रंग की रोशनी का इस्तेमाल करें.

– यदि मुख्य प्रवेश दक्षिण-पूर्व हो, तो लाल रंग की रोशनी का इस्तेमाल करें.

– यदि प्रवेश द्वार दक्षिण या दक्षिण-पश्‍चिम या पश्‍चिम की ओर हो, तो लाल और नीले रंग की रोशनी का उपयोग करना चाहिए. इसी तरह से उत्तर-पूर्व की दिशा में प्रवेश द्वार होने की स्थिति में नीला रंग सही होता है.

गोवर्धन पूजा

दिवाली की अगली सुबह गोवर्धन पूजा होती है. इस दिन गायों की पूजा की जाती है. मान्यता है कि गाय देवी लक्ष्मी का स्वरूप है. भगवान श्रीकृष्ण ने आज ही के दिन इंद्र का मान-मर्दन कर गिरिराज पूजन किया था.

– गायों को सुबह स्नान करवाकर फूल- माला, धूप, चंदन आदि से उनकी पूजा की जाती है. गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है.

– पूजा के बाद गोवर्धनजी की सात परिक्रमाएं उनकी जय-जयकार करते हुए की जाती है.

– गोवर्धनजी गोबर से लेटे हुए पुरुष के रूप में बनाए जाते हैं. इनकी नाभि के स्थान पर एक कटोरी या मिट्टी का दीपक रख दिया जाता है. फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद, बताशे आदि पूजा करते समय डाल दिए जाते हैं और बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है.

क्या करें?

– गोवर्धन पूजा पूरे विधि-विधान के साथ शुभ मुहूर्त में करें. बेहतर होगा किसी पंडित से पूजा करवाएं.

– पूजा से पहले प्रात:काल तेल मालिश कर स्नान करें.

– घर के बाहर गोवर्धन पर्वत बनाएं. फिर पूजा करें.

क्या न करें?

– गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन बंद कमरे में न करें.

– गायों की पूजा करते हुए ईष्टदेव या भगवान कृष्ण की पूजा करना न भूलें.

– इस दिन चंद्र का दर्शन न करें.

bhaiya-dooj

भैया दूज

दिवाली के अंतिम दिनों का पांचवां त्योहार भैया दूज है.

– भाई दूज के दिन विवाहित या अविवाहित बहनों को प्रात: स्नान आदि से निपटकर भाई के स्वागत की तैयारी करनी चाहिए.

– इस दिन यम की पूजा या भाई के आवभगत का तरीक़ा अलग होता है. इसके अनुसार बहनों को भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारनी चाहिए और कलावा बांधकर मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन-मिश्री खिलानी चाहिए. इस विधि के संपन्न होने तक दोनों को व्रती रहना चाहिए.

– बहनों को शाम के समय यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखना चाहिए. इस समय आसमान में चील उड़ती दिखाई देने पर बहुत ही शुभ माना जाता है. इस संदर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं, उसे यमराज ने क़बूल कर लिया है.

क्या करें?

– भाई को अपनी विवाहिता बहन के घर अवश्य जाना चाहिए.

– बहन को अपने भाई का आतिथ्य सत्कार करना चाहिए और तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य, जीवन, स्वास्थ्य आदि की कामना करनी चाहिए.
क्या न करें?

– भाई को अपने घर बहन के आने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे ही बहन के घर जाना चाहिए.

– बहन यमदेव की पूजा तक कुछ भी न खाए-पीए.

– मनीषा कौशिक
(वास्तु-फेंगशुई एक्सपर्ट)