lal bahadur shastri

Mahatma Gandhi And Lal Bahadur Shastri

2 अक्टूबर को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) की जयंती मनाता (Birth Anniversary) है. देशवासियों के लिए यह किसी त्योहार से कम नहीं. उनके जैसे आदर्शवादी पुरुष युगों में जन्म लेते हैं. उनके आदर्शों पर चलकर युवा देश को एक नई दिशा दे सकते हैं. आज देश के इन दो महापुरुषों की जयंती के ख़ास अवसर पर आप भी पढ़ें उनके अनमोल वचन.

महात्मा गांधी के अनमोल वचन

1. ख़ुद वो बदलाव बनिए, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं.

2. मौन सबसे सशक्त भाषण है. धीरे-धीरे दुनिया आपको सुनेगी.

3. क्रोध और असहिष्णुता सही समझ के दुश्मन हैं.

4. व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है.

5. जब तक गलती करने की स्वतंत्रता ना हो तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है.

6. अपनी गलती को स्वीकारना झाड़ू लगाने के समान है जो सतह को चमकदार और साफ़ कर देती है.

7. ऐसे जियो जैसे कि तुम कल मरनेवाले हो. ऐसे सीखो की तुम हमेशा के लिए जीनेवाले हो.

8. मेरी अनुमति के बिना कोई भी मुझे ठेस नहीं पहुंचा सकता.

9. अपने ज्ञान पर ज़रुरत से अधिक यकीन करना मूर्खता है. यह याद दिलाना ठीक होगा कि सबसे मजबूत कमजोर हो सकता है और सबसे बुद्धिमान गलती कर सकता है.

10. तभी बोलो जब वो मौन से बेहतर हो.

लाल बहादुर शास्त्री के आदर्श वचन

11. लोगों को सच्चा लोकतंत्र या स्वराज कभी भी असत्य और हिंसा से प्राप्त नहीं हो सकता है.

12. क़ानून का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि हमारे लोकतंत्र की बुनियादी संरचना बरकरार रहे और और भी मजबूत बने.

13. आज़ादी की रक्षा केवल सैनिकों का काम नही है . पूरे देश को मजबूत होना होगा.

14. हम सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि समस्त विश्व के लिए शांति और शांतिपूर्ण विकास में विश्वास रखते हैं.

15. हम अपने देश के लिए आज़ादी चाहते हैं, पर दूसरों का शोषण कर के नहीं , ना ही दूसरे देशों को नीचा दिखा कर….मैं अपने देश की आजादी ऐसे चाहता हूँ कि अन्य देश मेरे आजाद देश से कुछ सीख सकें , और मेरे देश के संसाधन मानवता के लाभ के लिए प्रयोग हो सकें.

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आज़ाद भारत के दूसरे और सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि के मौ़के पर आइए जानते हैं, उनसे जुड़ी कुछ ख़ास बातें.

* लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1901 को मुगलसराय (उत्तर प्रदेश) में हुआ था.

* उनका बचपन बहुत ग़रीबी में गुज़रा. वे कई मील नंगे पांव चलकर स्कूल जाते थे.

* मात्र सोलह साल की उम्र में उन्होंने गांधी जी के असहयोग आंदोलन में शामिल होने के लिए देशवासियों से आह्वान किया था.

* शास्त्री जी आज़ाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे. उनका सादा जीवन सबके लिए किसी मिसाल से कम नहीं था. एक समय ऐसा भी आया था जब  उन्होंने अपने नौकर को काम से हटा दिया और खुद घर का काम करने लगे थे.

* 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद जब देश आर्थिक तंगी से गुज़र रहा था, तब शास्त्री जी ने अपने ख़र्च कम कर दिए और देशवासियों से भी  ऐसा करने की अपील की थी.

* पैसे बचाने के लिए शास्त्री जी ने ख़ुद के लिए धोती खरीदने से भी मना कर दिया था और पत्नी को फटी हुई धोती सिलने को कहा था. इतना ही नहीं  उन्होंने सैलरी लेनी भी बंद कर दी थी.

* काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि मिलने के बाद उन्होंने अपना सरनेम श्रीवास्तव हमेशा के लिए हटा दिया और अपने नाम के आगे शास्त्री लगाने  लगे.

* शास्त्री जी ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने देश के बजट में से 25 प्रतिशत सेना के ऊपर ख़र्च करने का फैसला लिया था.

* शास्त्री जी हमेशा कहते थे कि देश का जवान और देश का किसान देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण इंसान हैं, इसलिए इन्हें कोई भी तकलीफ नहीं होनी  चाहिए और फिर उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दिया.

* 10 जनवरी 1966 को भारत-पाकिस्तान के बीच हुए ताशकंद समझौते के अगले ही दिन यानी 11 जनवरी को शास्त्री जी की संदिग्ध मौत हो गई.  उनकी मौत का राज़ आजतक राज़ ही बना हुआ है.