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भावभीनी श्रद्धांजलि: सुषमा स्वराज- दिलों में सदा अमर रहेंगी… (Sushma Swaraj Passes Away…)

सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) एक मज़बूत शख़्सियत, एक प्रखर नेता, पूर्व विदेश मंत्री, महान राजनीतिज्ञ अब हमारे बीच नहीं रही. 6 अगस्त मंगलवार की रात उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई. उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती किया गया और देर रात ह्रदयघात से उनका निधन हो गया.

Sushma Swaraj

वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं, इसी कारण वे साल 2019 के चुनाव में भी शामिल नहीं हुईं. साल 2016 में एम्स में ही उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था. हमसे जुदा होने से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाया जाने पर अपनी प्रतिक्रिया ट्विटर पर दी थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी को धन्यवाद दिया था.

उनके निधन पर मोदीजी भी ग़मगीन हो गए- भारतीय राजनीति में एक शानदार अध्याय का समापन हो गया. भारत ऐसे नेता के निधन पर शोक व्यक्त करता है, जिन्होंने अपना जीवन सार्वजनिक सेवा और गरीबों के जीवन को समर्पित किया..

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान- ईश्‍वर से दिवगंत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना करता हूं. आप अपने जनसहयोग और राष्ट्र उत्थान के कार्यों के माध्यम से देश और दुनिया के लोगों के दिलों में सदैव ज़िंदा रहेंगी. विनम्र श्रद्धांजलि..

महाराष्ट्र सरकार में महिला और बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे- फूल नहीं चिंगारी है ये भारत की नारी है.. इस नारे को बदलकर फूल भी है चिंगारी है ये भारत की नारी है.. करनेवाली हमारी फूल सी कोमल और चिंगारी सी तेजस्वी नेता आज हमें छोड़कर चली गई. तीव्र दुख और वेदना का भाव हैं शब्द नहीं मेरे पास…

उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने सुषमाजी के न रहने को देश के लिए एक बहुत बड़ा क्षति बताया. उन्होंने उन्हें याद करते हुए उनके बेहतरीन वक्ता, कर्मठ महिला नेता, अद्भुत महिला होने की सराहना की.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडवनीस को तो सदमा-सा लगा. उन्होंने सुषमाजी के देहांत को व्यक्तिगत क्षति बताई.

खेल मंत्री किरण रिजीजू की राय भी उनसे अलग न थी. उनके अनुसार, सुषमाजी सही मायने में भारत की मातृभूमि के लिए जीती रही हैं.

नितिन गडकरी- सुषमा स्वराजजी के दुखद निधन से मुझे गहरा आघात लगा है. उन्होंने हमेशा मुझे बड़ी बहन का स्नेह दिया और संगठनात्मक सलाह देकर राजनीतिक अभिभावक का फ़र्ज़ निभाया.

अभिनेता अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, परेश रावल, किरण खेर, गौतम गंभीर, विपक्ष के अन्य नेताओं के साथ-साथ देश-विदेश के जाने-माने राजनीतिज्ञ व शख़्सियतों ने भी अपनी संवेदनाएं और श्रद्धांजलि अर्पित की.

राजनीति में आने से पहले वे सुप्रीम कोर्ट में वकील के पद पर भी रहीं. साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद उन्हें विदेश मंत्री का पद सौंपा गया. उन्होंने कई बार विदेशों में फंसे भारतीयों को सकुशल घर वापसी कराई. विदेशों में रह रहे भारतीयों को जब कभी भी परेशानी हुई, फिर चाहे वो वीज़ा की समस्या हो, विदेश में मुश्किल में फंसे हो या फिर अन्य दुविधाएं, सुषमाजी हमेशा ही स्वदेशी व प्रवासी सभी की तहेदिल से मदद करती थीं.

Sushma Swaraj Sushma Swaraj

सुषमाजी की जीवन यात्रा…

* सुषमा स्वराज ने अपने उल्लेखनीय कार्य, चुनौतीपूर्ण फैसलों, बेबाक़ बयान से भारत की विदेश मंत्री के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई थीं.

* हर कोई उनकी तेजस्विता, दमदार आवाज़, गरिमापूर्ण व्यक्तित्व से प्रभावित रहा है.
* उन्हें देश की पहली महिला विदेश मंत्री होने का गौरव हासिल है.
* सुषमाजी का जन्म अंबाला कैंट (हरियाणा) में 14 फरवरी, 1953 में हुआ था.
* यहीं के एसडी कॉलेज से उन्होंने बीए व चंडीगढ़ से लॉ की डिग्री हासिल की.
* वे लगातार तीन साल तक एनसीसी की बेस्ट कैडेट व राज्य की श्रेष्ठ वक्ता रहीं.
* साथ ही पंजाब विश्‍वविद्यालय द्वारा उन्हें सर्वोच्च वक्ता के रूप में भी सम्मानित किया गया.
* पढ़ाई के बाद उन्होंने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में ज़ोर-शोर से हिस्सा लिया.
* साल 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से उन्होंने अपना राजनीतिक करियर शुरू किया.
* सुषमाजी सात बार सांसद, तीन बार विधायक रहीं.
* वे पूर्व केंद्रिय मंत्री व साल 1988 में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं.
* उन्होंने साल 1977 में चौधरी देवीलाल की कैबिनेट में 25 वर्ष की उम्र में ही राज्य की कैबिनेट मंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया.
* साथ ही 27 साल की उम्र में वे जनता पार्टी (हरियाणा) की प्रमुख भी बनी थीं.
* वे भारतीय संसद की एकमात्र महिला सांसद हैं, जिन्हें ‘असाधारण सांसद’ के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.
* वे भाजपा की पहली महिला राष्ट्रीय प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री रही हैं.
* 1975 में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट स्वराज कौशल से उनका विवाह हुआ.
* सुषमा स्वराज और उनके पति स्वराज को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने विशेष कपल के रूप अपने बुक में स्थान दिया है.
* उनकी बेटी बांसुरी ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डिग्री व इनर टैम्पल में वकालत की डिग्री ली है. फ़िलहाल वे दिल्ली हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रही हैं.
* उनकी जीजिविषा व अदम्य साहस का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि अपनी किडनी फेल होने की सूचना उन्होंने ख़ुद ट्विटर पर दी थी.
* उनमें आक्रामकता व सौम्यता का बेज़ोड़ संगम देखने को मिलता है.
* ये सुषमाजी के प्रभावशाली भाषण का ही कमाल है कि अक्सर संसद में विपक्ष भी उनकी तारीफ़ करने के लिए बाध्य हो जाते हैं.
* वे एक बेहतरीन वक्ता हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है. तभी तो पाकिस्तान से भारतीय महिला गीता को लाने की मुहिम हो… ट्विटर पर गुहार लगानेवाले ज़रूरतमंदों की मदद करनी हो या फिर पाकिस्तान को लेकर साहसपूर्ण विवादास्पद बयान ही क्यों न हो… वे हर बार अपने एक्शन-रिएक्शन से हर किसी को चौंका देती थीं. साथ ही अपनी मधुर मुस्कान से सभी का दिल भी जीत लेती थीं.
* सुषमाजी हमेशा हर देशी-विदेशी को उचित मदद मुहैया करवाने के लिए तत्पर रही थीं. उनका यही सहयोगपूर्ण रवैया उन्हें ख़ास व आदरणीय बनाता है.

अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर प्रतिक्रिया, आख़री उद्गार-

प्रधानमंत्रीजी- आपका हार्दिक अभिनंदन. मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी..

Thank you Prime Minister. Thank you very much. I was waiting to see this day in my lifetime…

भारतीय राजनीति में सुषमा स्वराजजी का योगदान अमर रहेगा. मेरी सहेली की तरफ़ से भावभीनी श्रद्धांजलि!…

– ऊषा गुप्ता

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जन्मदिन पर विशेष: जानिए नरेंद्र मोदी से जुड़ी ये दिलचस्प बातें! (Happy Birthday: Interesting Facts About Narendra Modi)

जन्मदिन पर विशेष: जानिए नरेंद्र मोदी

 

जन्मदिन पर विशेष: जानिए नरेंद्र मोदी

ख़्वाब तो हम सभी देखते हैं, लेकिन उन्हें शिद्दत के साथ पूरा करने का जज़्बा कम ही लोग दिखा पाते हैं. बेपरवाह होकर स़िर्फ अपने लक्ष्य पर नज़र बनाए रखने की कला भी सभी में नहीं होती, विरोधियों की बातों का जवाब अपने काम से देने में भी हर कोई माहिर नहीं होता… जिस शख़्स में ये तमाम ख़ूबियां होती हैं, फिर वो साधारण कहां रह जाता है? ऐसे ही असाधारण व्यक्तित्व के धनी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हैं, जिनके जन्मदिन पर हम उन्हें सलाम कर रहे हैं.

  • 17 सितंबर 1950 को गुजरात में जन्मे नरेंद्र मोदी आज पूरी दुनिया की आंखों का तारा बन चुके हैं. दुनिया का बड़े से बड़ा शख़्स उनके विचारों, उनकी कूटनीति और उनके काम करने के अंदाज़ का कायल हो चुका है.
  • 2014 के लोकसभा चुनाव में 282 सीटें जीतकर अभूतपूर्व सफलता हासिल करने का करिश्मा इस करिश्माई नेता ने ही किया और आज भारत की दुनिया में जो साख बनी है, उसका श्रेय भी इन्हीं को जाता है. बेबाक, बेधड़क और देशहित में बोल्ड निर्णय लेने का जिगर भी नरेंद्र मोदी के पास ही है यह उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी जैसे निर्णय लेकर साफ़ दिखा दिया है.
आइए उनके जन्मदिन पर उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं-
  • नरेंद्र मोदी हमेशा अपने हस्ताक्षर हिंदी में ही करते हैं, फिर चाहे वो सरकारी दस्तावेज़ हों या कोई और ईवेंट. हिंदी भाषा से उन्हें कितना प्रेम है, यह भी किसी से छिपा नहीं है और वो गर्व के साथ हिंदी का प्रयोग अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर करते हैं.
  • छोटी उम्र में ही नरेंद्र मोदी ने संन्यासी जीवन का अनुभव ले लिया था. कुछ वर्षों तक वो पहाड़ों और जंगलों में संन्यासी के तौर पर रहे.
  • अपने गांव में नदी के किनारे उन्होंने मगरमच्छ से भी लोहा ले लिया था और उससे लड़कर अपने बुलंद हौसले छोटी उम्र में ही दिखा दिए थे.
  • शायद कम ही लोग जानते हैं कि नरेंद्र मोदी पोलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रैजुएट हैं.
  • मोदीजी उन चार लोगों में से एक हैं, जिन्हें ट्विटर पर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे फॉलो करते हैं.

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  • मोदीजी टेक्नोलॉजी को बेहद अच्छी तरह समझते हैं और यही वजह है कि उसका इस्तेमाल भी ख़ूब करते हैं. सेल्फी का शौक उन्हें भी है और लोगों के इस क्रेज़ को अच्छे कामों के लिए किस तरह से इस्तेमाल करना है, यह भी वो बख़ूबी जानते हैं. सेल्फी विद डॉटर की सफलता इसी का एक उदाहरण है.
  • सख़्त निर्णय लेनेवाला यह व्यक्ति कवि की कोमल भावनाएं भी रखता है. जी हां, मोदीजी कविताएं भी लिखते हैं.
  • वो कभी छुट्टी नहीं लेते, यहां तक कि 13 वर्षों के गुजरात के मुख्यमंत्री के अपने कार्यकाल में भी उन्होंने कोई छुट्टी नहीं ली थी.

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  • उन्हें फैशन आयकॉन के तौर पर भी लोग फॉलो करते हैं, क्योंकि उनका व्यक्तित्व इतना आकर्षक है कि भले ही वो ख़ुद को फैशन फ्रीक न मानें, लेकिन मीडिया से लेकर आम जनता तक उनके पहनावे पर ख़ासा ध्यान देती है.
  • 2014 के चुनाव से पहले तक उनके मैरिटल स्टेटस के बारे में किसी को नहीं पता था, लेकिन उसके बाद यह बात सामने आई कि टीनएज में ही उनकी शादी हुई थी, लेकिन उन्होंने अपनी पत्नी को आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया और ख़ुद संन्यासी जीवन की ओर अग्रसर हो गए.
  • मेरी सहेली की ओर से उन्हें जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं!

बर्थ एनीवर्सरी: बाल गंगाधर तिलक… एक नेता से लोकनायक तक का सफ़र! (Remembering Bal Gangadhar Tilak: Unknown Facts About Him)

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  • Birth Anniversary: बाल गंगाधर तिलक… एक नेता से लोकनायक तक का सफ़र! (Remembering Bal Gangadhar Tilak: Unknown Facts About Him)
  • भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में पहले लोकप्रिय नेता बाल गंगाधर तिलक को मेरी सहेली की ओर से नमन!
  • 23 जुलाई 1856 में जन्मे केशव गंगाधर तिलक न स़िर्फ स्वतंत्रता सेनानी थे, वे एक बेहतरीन वकील, विचारक, शिक्षक, विद्वान व समाज सुधारक भी थे.
  • उनका जन्म महाराष्ट्र के रत्नागिरी के एक गांव में हुआ था. आधुनिक शिक्षा पाने के बाद इन्होंने लोगों को जगाने का काम किया.
  • शुरुआती दौर में ये शिक्षक के रूप में कार्य करते रहे, लेकिन समाज व देशक के प्रति इनके लगाव ने इन्हें जल्द ही जनता का सबसे बड़ा नायक बना दिया.
  • ये अंग्रेज़ी शिक्षा के विरोधी थे, क्योंकि इनका मानना था कि यह भारतीय संस्कृति के प्रति हमें अनादर सिखाती है और हम में अपने ही देश व लोगों के प्रति मन में घृणा व हीन भावना भरती है.
  • उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उन्हें लोकमान्य की उपाधि मिल गई, जिसका अर्थ है लोगों द्वारा नायक के रूप में स्वीकृत यानी लोकनायक के रूप में सभी ने उन्हें स्वीकारा.
  • उनके काम व व्यक्तित्व के क़द के आगे ब्रिटिश शासन भी उनसे घबराता था. उनका प्रसिद्ध नारा, जो मूल रूप से मराठी में दिया गया था, “स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे आणि तो मी मिळवणारच” यानी स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा, काफ़ी लोगों के दिलों को छू गया था और उनके मन में आज़ादी की लौ जगा गया था.
  • आज़ादी की लड़ाई में ये नरम दल के विरोधी थे, इसलिए लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल के साथ ये गरम दल का हिस्सा थे. इन तीनों को ही लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाता था.
  • अंग्रेज़ इन्हें ‘भारतीय अशांति के पिता’ कहा करते थे और इन्हें हिंदू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है.
  • जनजागृति के लिए इन्होंने कई अख़बार व पत्र-पत्रिकाएं भी प्रकाशित कीं और कई शिक्षण संस्थान भी खोले.
  • तिलक ने अनेक पुस्तकें लिखीं, लेकिन श्रीमद्भगवद्गीता की व्याख्या को लेकर मांडले जेल में लिखी गई गीता-रहस्य सर्वोत्कृष्ट है, जिसका कई भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है.
  • जनता को एकता के सूत्र में बांधनेवाले तिलक ने ही गणेशोत्सव और शिवाजी समारोह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों की शुरुआत की थी. तिलक ने अंग्रेज़ों की नींद हराम कर रखी थी और अपनी आख़िरी सांस तक वो देश की आज़ादी के लिए लड़ते रहे.
  • 1 अगस्त 1920 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.
  • ऐसे प्रखर नेता को उनकी बर्थ एनीवर्सरी पर हम याद व नमन करते हैं.

होनहार युवा, तेज़-तर्रार नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को जन्मदिन मुबारक हो! (Happy Birthday to yound, dynamic Jyotiraditya Scindia)

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  • 1 जनवरी 1971 में जन्मे तेज़-तर्रार और होनहार ज्योतिरादित्य सिंधिया ( Jyotiraditya Scindia) स़िर्फ एक राजनेता ही नहीं, बल्कि हर उस युवा वर्ग का प्रतीक हैं, जिनमें हुनर भी है और आगे बढ़ने का जौहर भी.
  • मध्य प्रदेश के सिंधिया राज घराने से ताल्लुक रखनेवाले ज्योतिरादित्य कांग्रेस पार्टी में हैं, उनके पिता स्वर्गीय माधव राव सिंधिया भी कांग्रेस में थे, जबकि उनकी दादी और उनकी बुआ वंसुधरा राजे सिंधिया ने भाजपा में अपने राजनीतिक करियर को संवारा.

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  • ज्योतिरादित्य ने देहरादून के दून स्कूल से शिक्षा लेने के बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से 1993 में इकोनॉमिक्स में ग्रैजुएशन किया. वर्ष 2001 में उन्होंने स्टैनफोर्ड ग्रैजुएट स्कूल ऑफ बिज़नेस से एमबीए की डिग्री हासिल की.
  • ज्योतिरादित्य ने गुना डिस्ट्रिक्ट से लगातार तीन बार लोकसभा के लिए चुनाव जीता और केंद्र में मंत्री भी बने.
  • इस बीच चुनावी जंग में कई बार वो अपने भाषणों और राजसी अंदाज़ को लेकर विवादों का हिस्सा भी बने, लेकिन वो एक पॉप्युलर नेता हैं और लोग उन्हें काफ़ी पसंद करते हैं.
  • उनके अंदाज़ और उनके व्यक्तित्व के सभी कायल हैं और उनमें भविष्य के एक होनहार नेता की छवि देखते हैं.

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हमारी तरफ़ से भी यंग-डायनैमिक लीडर ज्योतिरादित्य सिंधिया को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

– गीता शर्मा 

लौह पुरुष सरदार पटेल की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन! (Tribute to sardar patel on his punya tithi)

 

31-October-1875-15-December-1950

  • लौह पुरुष (iron man) के तौर पर जाने जानेवाले सरदार वल्लभ भाई पटेल (sardar patel) को उनकी पुण्य तिथि पर हम याद व नमन करते हैं.
  • सरदार पटेल का जन्म ३१ अक्टूबर १८७५ को हुआ था और १५ दिसम्बर १९५० को वो हमें अलविदा कह गए थे.
  • स्वतंत्रता संग्राम में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी और भारत की आज़ादी के बाद वो देश के प्रथम गृह मंत्री व उप प्रधानमंत्री बने थे.
  • बारदौली कस्बे में ज़ोरदार व सशक्त सत्याग्रह करने के बाद उन्हें सरदार कहा जाने लगा और इस तरह वो सरदार पटेल बनें.
  • आज़ादी के बाद विभिन्न रियासतों में बनते भारत को एक सूत्र में पिरोने का काम भी सरदार पटेल ने बखूबी किया और उसके बाद ही उन्हें लौह पुरुष भी कहा जाने लगा.
  • उनकी पुण्य तिथि पर हम उन्हें नमन करते हैं.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम बड़े लीडर्स ने उन्हें याद किया.

– गीता शर्मा

दुनिया के 10 पावरफुल लोगों में मोदी 9वें नंबर पर! (PM Modi among world’s 10 most powerful people in Forbes list)

Narendra Modi

Narendra Modi

  • फोर्ब्स पत्रिका ने दुनिया के 10 सबसे पावरफुल लोगों की लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 9वें स्थान पर हैं.
  • इस लिस्ट में पहले स्थान पर रूस के राष्ट्रपति पुतिन हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प दूसरे स्थान पर हैं.
  • ग़ौरतलब है कि पुतिन लगातार चौथी बार पहले स्थान पर काबिज़ होने में कामयाब रहे हैं.
  • फोर्ब्स के अनुसार मोदी काफ़ी पॉप्युलर हैं और वो ग्लोबल लीडर के तौर पर तेज़ी से उभरे हैं. फोर्ब्स ने मोदी के नोटबंदी के फैसले का भी ज़िक्र किया है.

Narendra Modi

  • पुतिन के विषय में फोर्ब्स का कहना है कि वो दुनिया पर अपना प्रभाव डालने में पूरी तरह से कामयाब रहे हैं और जो वो चाहते हैं, वही पाने में वो सफल भी रहे हैं.
  • इससे पहले टाइम पर्सन ऑफ द ईयर के रीडर्स पोल में भी नरेंद्र मोदी पहला स्थान हासिल करने में कामयाब रहे थे और उन्होंने ओबामा व ट्रम्प जैसी हस्तियों को भी पछाड़ दिया था.
  • यह अलग बात है कि जूरी ने रीडर्स पोल को तवज्जो न देते हुए ट्रम्प को टाइम पर्सन ऑफ द ईयर घोषित किया, लेकिन कहीं न कहीं यह बात सभी जानते हैं कि मोदी का दबदबा पूरी दुनिया में बना हुआ है.
ट्विटर पर आप पूरी लिस्ट देख सकते हैं 

– गीता शर्मा