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बेमिसाल… द्रविड़ जैसा कोई नहीं, बने सबके लिए मिसाल (BCCI Accepts Dravid’s Demand For Equal Pay In Cash Rewards)

BCCI, Dravid's Demand For Equal Pay In Cash Rewards

BCCI, Dravid's Demand For Equal Pay In Cash Rewards
राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) अपनी सादगी और टैलेंट के दम पर अपनी अलग पहचान तो कबके बना चुके हैं, पर हर बार वो एक नई मिसाल देकर कुछ ऐसा कर जाते हैं कि उनका सम्मान और बढ़ जाता है. हाल ही में बीसीसीआई (BCCI) ने अंडर-19 विश्व कप (Under 19 World Cup) जीतने के बाद मुख्य कोच (Coach), सहायक कोच और टीम के खिलाड़ियों के लिए इनामी रकम की घोषणा की थी, जिसमें राहुल द्रविड़ को सबसे ज़्यादा 50 लाख दिए जाने का ऐलान हुआ था. लेकिन इनामी रकम की असमानता को लेकर द्रविड़ ने नाखुशी जाहिर की. राहुल का कहना है कि सबने उतनी ही मेहनत की है तो इनाम में असामनता क्यों? राहुल ने अपनी इनामी राशि कम करके सपोर्टिंग स्टाफ के लिए भी समान रकम की मांग की और बीसीसीआई ने इस मांग को स्वीकार करते हुए विश्व कप ही नहीं, बल्कि अंडर-19 टीम से एक साल पहले तक जुड़े स्टॉफ के हर सदस्य को इनामी रकम देने का फैसला किया है. सभी को समान राशि दी जाएगी. यहाँ तक कि उस ट्रेनर के परिवार को भी उतनी ही रकम मिलेगी, जिसका पिछले साल टीम के साथ ऑन ड्यूटी निधन हो गया था.

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राहुल द्रविड़ के इस क़दम ने उनके फैंस के बीच उनका सम्मान और बढ़ा दिया और सभी ने ट्वीट्स करके अपने मन की बात कही. आप भी पढ़ें ये ट्वीट्स

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हैप्पी बर्थ डे आशा ताई, देखें उनके टॉप 10 गाने (Happy Birthday Asha Bhosle)

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मधुर आवाज़ की मलिका आशा भोसले हो गई हैं 84 साल की. 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा ताई ने गायकी का सफ़र शुरू किया साल 1943 में जब उन्होंने मराठी फिल्म माझा बाळ में पहला गीत गाया. आशा ताई ने अपना गायकी का सफ़र 10 साल की उम्र में शुरू किया था और उन्होंने कई भाषाओं में लगभग सोलह हज़ार फिल्मी और नॉन फिल्मी गाने गाए हैं.

मेरी सहेली की तरफ से आशा ताई को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

फिल्म- यादों की बारात

फिल्म- द ग्रेट गैम्बलर

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फिल्म- मेरे जीवन साथी

फिल्म- लव स्टोरी

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फिल्म- कश्मीर की कली

फिल्म- हम दोनों

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फिल्म- इजाज़त

फिल्म- दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे

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फिल्म- जीवा

फिल्म- उमराव जान

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बर्थडे स्पेशल: मुमताज़ पर फ़िदा थे शम्मी कपूर (Happy Birthday Mumtaz)

Happy Birthday Mumtaz

‘गोरे रंग पे न इतना गुमान कर… गाना गुज़रे ज़माने की जिस मशहूर अदाकारा पर फिल्माया गया था, वह हैं मुमताज़. मुमताज़ ने अपनी बड़ी-बड़ी आंखों, काले बाल, गोरे रंग और अभिनय की अनोखी अदा से सभी पर अपना जादू बिखेरा. उन्होंने 60-70 के दशक में अपने ख़ूबसूरत अंदाज़ से दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया था.
मुमताज़ का नाम बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्रियों में शुमार है. उन्होंने कई फिल्मों में अपने अभिनय के जलवे बिखेरे और एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं.
उनका जन्म 31 जुलाई, 1947 को मुस्लिम परिवार में हुआ. घर की माली हालत खस्ता थी, सो महज़ 12 वर्ष की उम्र में उन्हें फिल्मों में कदम रखना पड़ा. अपनी छोटी बहन मलिका के साथ वह रोज़ाना स्टूडियो के चक्कर लगाया करतीं और छोटी-मोटी भूमिका मांगती थीं.

उनकी मां नाज़ और चाची नीलोफर पहले से फिल्मी दुनिया में मौजूद थीं, लेकिन दोनों जूनियर आर्टिस्ट होने के नाते अपनी बेटियों की सिफारिश करने के योग्य नहीं थीं. मुमताज़ ने जूनियर आर्टिस्ट से स्टार बनने का सपना अपने मन में संजोया था और उन्होंने यह सच कर दिखाया.
अपनी लगन और मेहनत से 70 के दशक में उन्होंने स्टार की हैसियत हासिल कर ली. उस दौर के कई नामी सितारे, जो कभी मुमताज़ का नाम सुनकर मुंह बनाते थे, वे भी उनके साथ काम करने को बेताब रहने लगे.
मुमताज़ ने दारा सिंह से लेकर दिलीप कुमार जैसे महान कलाकारों के साथ अभिनय किया. उन्होंने शम्मी कपूर, देवानंद, संजीव कुमार, जितेंद्र और शशि कपूर जैसे सितारों के साथ काम किया, मगर राजेश खन्ना के साथ उनके काम को सबसे ज़्यादा सराहा गया. मुमताज़ और राजेश की फिल्में देखने के लिए सिनेमाघरों में भीड़ उमड़ती थी.

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मुमताज़ ने लगभग दस साल तक बॉलीवुड पर राज किया है. वह शर्मिला टैगोर के समकक्ष मानी गईं और उन्हें मेहनताना भी उन्हीं के बराबर मिलता था.
सत्तर के दशक तक मुमताज़ का भी स्टार बनने का सपना सच हो गया था. उन्होंने गुजराती मूल के लंदनवासी मयूर वाधवानी नामक व्यवसायी से 1974 में शादी की और ब्रिटेन में जा बसीं. शादी के पहले उनका नाम संजय खान, फिरोज़ खान, देव आनंद जैसे कुछ सितारों के साथ जोड़ा गया था.
मुमताज़ जब 18 साल की थीं, तभी शम्मी कपूर ने उन्हें शादी के लिए प्रपोज़ किया था. उस समय मुमताज़ भी शम्मी से प्यार करती थीं. शम्मी चाहते थे कि मुमताज़ अपना फिल्मी करियर छोड़कर उनसे शादी कर लें, लेकिन उनके लिए उस समय अपने परिवार को संभालना ज़रूरी थी, इसलिए मुमताज़ ने इनकार कर दिया.शादी के बाद भी मुमताज़ की तीन फिल्में रिलीज़ हुईं, जिनकी शूटिंग उन्होंने शादी से पहले ही पूरी कर ली थी. फिल्मों के प्रस्ताव हालांकि उन्हें शादी के बाद भी मिलते रहे. उन्हें 53 साल की उम्र में ब्रेस्ट कैंसर हो गया था, जिसे उन्होंने मात दी.
साल 1967 की फिल्म राम और श्याम व 1969 की फिल्म आदमी और इंसान के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिग एक्ट्रेस का अवार्ड जीता. साल 1971 में उन्हें खिलौना के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला था.

मेरी सहेली की ओर से मुमताज़ को उनके जन्मदिन पर ढेरों शुभकामनाएं. 

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बर्थ एनीवर्सरी: सुरीले अंदाज़ में दर्द को बयां करने वाले बेमिसाल गायक थे मुकेश (Remembering Legendary Singer Mukesh on his 94th Birthday)

बॉलीवुड के बेहतरीन गायक मुकेश का आज जन्मदिन है. आवाज़ के इस जादूगर का जन्म 22 जुलाई, 1923 को हुआ था. उनका पूरा नाम मुकेश चंद माथुर है. कम ही लोग जानते हैं कि मुकेश गायक नहीं, बल्कि ऐक्टर बनना चाहते थे. उन्होंने अपना सफ़र 1941 में फिल्म निर्दोष से शुरू किया, जिसमें ऐक्टिंग करने के साथ उन्होंने गाना भी गाया. बॉलीवुड में उन्हें तब तक स्ट्रगल करना पड़ा, जब तक के. एल शायगल की नज़र उन पर नहीं पड़ी थी. यूं तो शोमैन राज कपूर के जिगरी दोस्त मुकेश को राज कपूर की आवाज़ कहा जाता है, लेकिन 40 के दशक में उन्होंने सबसे ज़्यादा गाने दिलीप कुमार के लिए गाए थे.

राज कपूर और मुकेश की दोस्ती मुश्किल दौर में भी पक्की थी. मुकेश ने मल्हार और अनुराग जैसी फिल्मों को प्रोड्यूस भी किया, लेकिन सफल नहीं हुए. उन्होंने फिर से गायकी का रुख किया और फिल्मफेयर अवॉर्ड पाने वाले पहले मेल सिंगर बने.

अपने 40 साल के करियर में उन्होंने उस दौर के लगभग हर ऐक्टर के लिए अपनी आवाज़ दी. 200 से भी ज़्यादा फिल्मों में अपनी आवाज देने वाले मुकेश ने लगभग 1300 गाने गाए हैं. लेकिन उनके दर्द भरे गीतों को ज़्यादा पसंद किया गया. मुकेश केवल एक बेहतरीन गायक ही नहीं थे, बल्कि एक अच्छे इंसान भी थे.

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उनकी बर्थ एनीवर्सरी पर आइए, देखते हैं उनके टॉप 10 गाने.

फिल्म- धरम करम

फिल्म- सिलसिला

फिल्म- रजनीगंधा

फिल्म- मेरा नाम जोकर

फिल्म- अनाड़ी

फिल्म- यहूदी

फिल्म- संगम

फिल्म- मेरा नाम जोकर

फिल्म- धर्मात्मा

फिल्म- कटी पतंग

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एक युग का अंत: देखें बॉलीवुड के ओरिजनल हार्टथ्रॉब विनोद खन्ना के टॉप 10 गाने (Top 10 Songs: Remembering Vinod Khanna)

विनोद खन्ना

विनोद खन्ना70 और 80 के दशक के हार्टथ्रॉब विनोद खन्ना नहीं रहे. जैसे ही ये ख़बर सामने आई, बॉलीवुड से लेकर उनके फैन्स तक, हर कोई सन्न रह गया. 70 साल के नेता और अभिनेता विनोद खन्ना 70 साल के थे. का़फ़ी वक़्त से कैंसर से जूझ रहे विनोद की कुछ दिनों पहले एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें साफ़ नज़र आ रहा था कि वो बेहद बीमार हैं. एक साल पहले तक वो फिल्मों और राजनीति दोनों में सक्रिय थे. बीजेपी सांसद रह चुके विनोद खन्ना की आख़िरी फिल्म दिलवाले थी. इस बेहतरीन ऐक्टर ने भले ही अपने करियर की शुरुआत विलन के तौर पर की थी, लेकिन उनके रोमांटिक अंदाज़ को भी दर्शकों ने ख़ूब पसंद किया. 1987-1994 में विनोद खन्ना बॉलीवुड के सबसे महंगे स्टार बन गए थे. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उनके पिता बिल्कुल नहीं चाहते थे कि विनोद फिल्मों में अभिनय करें. उनके पिता ने उन्हें केवल दो महिनों का समय दिया था, इन दो महिनों में विनोद खन्ना ने ख़ुद को साबित किया और बॉलीवुड में अपनी जगह बना ली. उन्होंने आन मिलो सजना, मेरा गांव मेरा देश, सच्चा झूठा, मुकद्दर का सिकंदर, परवरिश, अमर अकबर एंथोनी, कुर्बानी, इम्तिहान, दयावान, दबंग, दिलवाले जैसी कई सुपरहिट फिल्में बॉलीवुड को दी हैं.

भले ही विनोद खन्ना आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनके द्वारा निभाए गए यादगार किरदार और फिल्मों के गाने उनकी याद हमेशा दिलाते रहेंगे.

आइए, उन्हें याद करते हैं उनके टॉप 10 गानों के साथ.

फिल्म- जुर्म (1990)

फिल्म- चांदनी (1989)

फिल्म- कुर्बानी (1980)

फिल्म- इम्तिहान (1974)

फिल्म- मेरे अपने (1971)

फिल्म- लहु के दो रंग (1979)

फिल्म- हाथ की सफ़ाई (1974)

फिल्म- सत्यमेव जयते (1987)

फिल्म- अमर अकबर एंथोनी (1977)

फिल्म- दौलत (1982)

 

70 के दशक के सबसे बिज़ी ऐक्टर रहे शशि कपूर हुए 79 के, देखें उनके टॉप 10 गाने (Happy Birthday Shashi Kapoor)

शशि कपूर

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एक ज़माने में लाखों की दिलों की धड़कन कहे जाने वाले शशि कपूर हो गए हैं 79 साल के. कपूर परिवार से होने के नाते उन्हें फिल्मों में स्ट्रगल तो नहीं करना पड़ा, लेकिन ख़ुद को एक अच्छे ऐक्टर के तौर पर ख़ुद को साबित करने के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की. उनके करियर की शुरुआत कई फ्लॉप फिल्मों से हुई थी. लेकिन शशि कपूर ने हार नहीं मानी और 1965 में फिल्म जब जब फूल खिले से शुरू हुआ हिट फिल्मों का दौर. 70 के दशक के सबसे बिज़ी ऐक्टर्स में नाम शामिल था शशि कपूर का. एक दिन में वो 3 से 4 सेट पर चले जाते थे. शशि कपूर के डायलॉग डिलीवरी और उनके डांस करने का अंदाज़ ज़बरदस्त था, जो दर्शकों को बेहद पसंद आया.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की तरफ से बॉलीवुड के लेजेंड शशि कपूर को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

आइए, देखते हैं उनके टॉप 10 गाने.

फिल्म- हसीना मान जाएगी (1968)

फिल्म- स्वंयवर (1980)

फिल्म- कन्यादान (1968)

फिल्म- शर्मिली (1971)

फिल्म- जब जब फूल खिले (1965)

फिल्म- आमने सामने (1967)

फिल्म- दीवार (1975)

फिल्म- चोर मचाए शोर (1974)

फिल्म- काला पत्थर (1979)

फिल्म- प्यार का मौसम (1969)

Golden Jubilee! 50 के हुए ए आर रहमान (Top 10 songs: Happy birthday A R Rahman)

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सुरों के सरताज ए आर रहमान हो गए हैं 50 साल के. रहमान उन चंद म्यूज़िक डायरेक्टर और सिंगर्स में से हैं, जो म्यूज़िक के साथ एक्सीपेरिमेंट्स करके बेहतरीन संगीत बनाने का दम रखते हैं. इंडियन म्यूज़िक को इंटरनेशनल लेवल तक ले जाने का श्रेय काफ़ी हद तक रहमान को भी जाता है. फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर के लिए उन्होंने ऑस्कर जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया. 6 साल की छोटी-सी उम्र में ही रहमान को संगीत से प्यार हो गया था. सिंथेसाइजर और हारमोनियम पर उनकी नन्हीं-सी उंगलियां कमाल कर देती थीं. अपने पिता आर.के.शेखर की राह पर चलते हुए रहमान ने संगीत की विरासत को आगे बढ़ाया और आज टॉलीवुड, बॉलीवुड के साथ हॉलीवुड के भी पसंदीदा संगीतकार और गायक बन गए हैं. रहमान के संगीत का जादू ऐसा है कि वो हर उम्र के लोगों के फेवरेट हैं.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से ए आर रहमान को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

आइए, उनके जन्मदिन पर देखते हैं उनके 10 बेहतरीन गाने.

फिल्म- दिल से (1998)

फिल्म- रंगीला (1995)

फिल्म- रोज़ा (1992)

फिल्म- ताल (1999)

फिल्म- रंग दे बसंती (2006)

फिल्म- ओके जानू (2017)

फिल्म- रॉकस्टार (2011)

फिल्म- बॉम्बे (1995)

फिल्म- स्लमडॉग मिलियनेयर (2009)

एलबम- मां तुझे सलाम (1997)

 

Birthday Special: मोहम्मद रफ़ी साहब को यूं भुला ना पाओगे (Happy Birthday Rafi Sahab)

Mohammed Rafi
Mohammed Rafi
वाकई, आज भी कोई नहीं भुला पाया है गायिकी के सम्राट मोहम्मद रफ़ी साहब को. रफ़ी साहब के गीत आज भी सभी के ज़ेहन में ताज़ा हैं. आज गायिकी के सरताज मोहम्मद रफ़ी साहब का जन्मदिन है. रफ़ी साहब के सुरीले गानों का नशा चार दशकों तक लोगों के दिलो-दिमाग पर छाया रहा है और आज भी वो सुरूर कायम है.  
Mohammed Rafi
२४ दिसंबर १९२४ को अमृतसर के नज़दीक, कोटला सुल्तान सिंह में जन्में रफ़ी साहब ने बंटवारे के वक़्त हिन्दुस्तान में रहना पसंद किया.  तेरह साल की उम्र में के. एल. सहगल के गानों के एक कॉन्सर्ट में उन्होंने पहली बार गाना गाया, जिसके बाद उनके करियर की पहली फिल्म रही पंजाबी फिल्म गुल बलोच.  इस फिल्म के बाद रफ़ी साहब को ‘ऑल इंडिया रेडियो – लाहोर’ की ओर से गाने का न्योता मिला और साल १९४४ में रफ़ी साहब मुंबई आ गए. मुंबई में  उनकी पहली मुलाक़ात हुई संगीतकार नौशाद से और आपको सुनकर ताज्जुब होगा कि नौशाद जी ने रफ़ी साहब को पहले कोरस में गवाया था,  गाना था हिन्दुस्तान के हैं हम…. बतौर गायक रफ़ी जी की पहली हिंदी फिल्म रही गाँव की गोरी… 
नौशाद के साथ रफ़ी जी की जोड़ी ख़ूब जमी और १९५२ में रिलीज़ हुई फिल्म बैजू बावरा ने रफ़ी साहब को एक अलग मुकाम दिया. तलत महमूद को   पसंद करने वाले नौशाद की पहली पसंद बन चुके थे रफ़ी साहब. सिर्फ नौशाद ही नहीं, बल्कि 50 और 60 के दशक में रफ़ी साहब – संगीतकार ओ.पी. नैय्यर, शंकर जयकिशन,  एस. डी. बर्मन जैसे म्यूज़िक डायरेक्टर के भी पसंदीदा गायक बन गए थे. ओ. पी. नैय्यर तो रफ़ी जी की आवाज़ से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने फिल्म रागिनी में किशोर कुमार पर फिल्माए गए गाने भी रफ़ी साहब से ही गवाए. इसके बाद रफ़ी जी ने किशोर कुमार के कई गाने गाए.  किशोर दा से पहले yodelling की शुरुआत रफ़ी साहब ने ही थी. 
Song : दिन ढल जाए… (गाइड)
एस. डी. बर्मन के साथ रफ़ी जी ने देव आनंद के लिए ढेरों गाने गाये…

Song : जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा…(ताजमहल)

शंकर जयकिशन के साथ रफ़ी जी ने शम्मी कपूर और राजेंद्र कुमार के लिए भी बेहतरीन गाने गाए. शम्मी कपूर की मानो आवाज़ ही बन गए थे रफ़ी साहब. रफ़ी जी के इंतकाल पर शम्मी जी ने कहा था कि उनकी आवाज़ आज उनका साथ छोड़ गयी.

Song : इस रंग बदलती दुनिया में… (राजकुमार)

रफ़ी साहब का आखरी गाना रिकॉर्ड करनेवाले लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने अपने करियर की शुरुआत भी उन्हीं के गाने से की थी…

Song : वो जब याद आए… (पारसमणि)

दिल के नेक रफ़ी साहब उन संगीतकारों के लिए भी मसीहा थे, जिनके पास रफ़ी साहब की फीस देने के लिए पैसे नहीं थे.  निसार बज्मी के लिए तो रफ़ी साहब ने सिर्फ एक रुपये में गाना गाया था. उन दिनों रफ़ी साहब के साथी रॉयल्टी की लड़ाई लड़ रहे थे. मगर उदार रफ़ी साहब का नज़रिया उन सब से जुदा था, इसी बात से नाराज़ होकर लताजी ने उनके साथ कुछ अरसे के लिए गाना ही बंद कर दिया था. नतीजा यह हुआ कि रफ़ी जी और आशा जी ने उन दिनों कई गाने साथ गाए.
Song: अच्छा जी मैं हारी पिया… (काला पानी)

 रफ़ी साहब की आवाज़ हर अभिनेता पर ख़ूब जंचती थी, चाहे वो  देव आनंद हों या   दिलीप कुमार.
 
Song: तेरे हुस्न की क्या तारीफ़ करूं… (लीडर)

धर्मेन्द्र, जीतेंद्र, संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, हर दौर के हीरो की आवाज़ बने रफ़ी साहब. राजेश खन्ना जिनके लिए आमतौर पर किशोर दा की आवाज़ इस्तेमाल की जाती थी, उनके लिए रफ़ी साहब ने कई गाने गाए.
 
Song: बागों में बहार है… (आराधना)

 रफ़ी जी ने अपनी उम्र में आधे कलाकारों के लिए भी सुपरहिट गाने गाए. वो कई सालों तक ऋषि कपूर की आवाज़ भी बने रहे.
Song : दर्द-ऐ-दिल… (क़र्ज़)

रफ़ी साहब जैसा वर्सिटाइल गायक शायद कोई रहा हो. वो हर तरह का गाना बहुत ही सरलता से गा लेते थे. उन्होंने हिंदी के अलावा कई भाषाओं में गाने गाए हैं. ये रफ़ी साहब की गायिकी का ही जादू था कि उन्हें भारतीय सरकार की तरफ से पद्मश्री से सम्मानित किया गया. रफ़ी साहब को पांच बार नेशनल अवार्ड्स और ६ बार फिल्मफेयर अवार्ड से नवाज़ा गया. पहला नेशनल अवार्ड रफ़ी साहब को मिला था फिल्म नीलकमल के गाने के लिए. रफ़ी साहब बाबुल की दुआएं गाने को गाते वक़्त रो दिए थे, क्योंकि अगले दिन उनकी बेटी की शादी थी.
Song : बाबुल की दुआएं… (नीलकमल)

साल १९५०-१९७० तक रफ़ी जी का ही राज रहा. रमज़ान के मुबारक महीने में वो सभी को अलविदा कह गए और छोड़ गए अपनी दर्द भरी आवाज़ और अपने दिलकश गाने. रफ़ी साहब तो नहीं रहे, मगर उनकी पुर नूर आवाज़ उनके लाखों चाहने वालों को सुकून पहुंचाती रहेगी.

– प्रियंका सिंह

Birthday Special: ही मैन धर्मेंद्र हुए 81 साल के, जानें ये रोचक बातें और देखें उनके हिट गाने (Top 10 Songs: Happy birthday Dharmendra)

Dharmendra

बॉलीवुड के ऐक्शन किंग और ही मैन कहे जाने वाले धरम पाजी यानी कि धर्मेंद्र हो गए हैं 81 साल के. लेकिन उनकी फिटनेस देखकर कौन कहेगा कि वो 81 साल के हो गए हैं. धर्मेंद्र का एक आम इंसान से सुपर स्टार बनने का सफ़र बेहद ही रोचक रहा है. Dharmendraउनका जन्म 8 दिसंबर, 1935 को पंजाब में हुआ था. गांव में ही उन्होंने पढ़ाई गांव के ही स्कूल से की थी. उनका पूरा नाम धरम सिंह देयोल है. उनकी पहली शादी तब हो गई थी जब वो केवल 19 साल के थे. फिल्मों में काम करने से पहले धर्मेंद्र रेलवे में क्लर्क थे और उन्हें सवा सौ रुपए सैलरी मिलती थी.

फिल्मफेयर का टैलेंट अवॉर्ड जीतकर धर्मेंद्र मुंबई आ गए और फिल्मों में स्ट्रगल करने लगे. विवाहित होने की वजह से उन्हें फिल्में मिलने में काफ़ी दिक़्कते आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. धर्मेन्द्र की पहली फिल्म थी दिल भी तेरा हम भी तेरे, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि फिल्म के प्रीमियर पर धर्मेन्द्र को किसी ने नहीं पहचाना और ग़ुस्से में वो ट्रेन से घर चले गए थे. फिल्म अनपढ़ और बंदिनी से उन्हें पहचान मिली. फिल्मों में शुरुआत में उनकी छवि एक रोमांटिक हीरो की थी, लेकिन फूल और पत्थर, धरम वीर, चरस, आज़ाद और शोले ने उन्हें एक्शन हीरो बना दिया. आज भी धरम पाजी का अंदाज़ उनके फैन्स पसंद करते हैं. फिल्मों में उनकी दूसरी पारी को भी पसंद किया गया.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से धर्मेंद्र को ढेरों शुभकामनाएं.

गरम-धरम कहे जाने वाले धरम पाजी के डायलॉग्स बोलने का अंदाज़ दमदार और डांस की अदा अलग थी. आइए, उनके जन्मदिन के मौक़े पर देखते हैं उनके 10 फेमस गाने.

फिल्म- लोफर

फिल्म- ब्लैकमेल

फिल्म- बहारें फिर भी आएंगी

फिल्म- प्रतिजा

फिल्म- शालीमार

फिल्म- दोस्त

फिल्म- मेरा गांव मेरा देश

फिल्म- जुगनू

फिल्म- चरस

फिल्म- शोले