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लता जी पर मां सरस्वती की ख़ास कृपा है और लोग तो कहते हैं कि वो साक्षात मां सरस्वती का रूप हैं… उनके जैसा युगों युगों तक ना कोई था और ना होगा. उनके कंठ में देवी का वास है… ऐसी मधुर आवाज़ की धनी लताजी अपनी ज़िंदगी में भी बेहद सादगी से रहती हैं… इसका अंदाज़ा उनकी इन अनदेखी तस्वीरों से लगाया जा सकता है कि उम्र के हर दौर में वो बेहद शालीन और सादगी से परिपूर्ण थीं… उनके जन्मदिन के ख़ास अवसर पर आप भी देखें उनका रिवाइंड लुक… यंग एज से लेकर बचपन तक सिर्फ़ एक क्लिक में.

Birthday Special…

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कपिल देव भारतीय क्रिकेट की दुनिया में किसी देवदूत से कम नहीं थे. उन्होंने भारत को पहला आईसीसी वर्ल्ड कप के साथ-साथ कई यादगार व अविस्मरणीय जीत दिलाई है. वे बेहतरीन ऑलराउंडर रहे. उनके हरफनमौला खेल को देख हर कोई प्रभावित होता था. उस पर हमेशा मुस्कुराता चेहरा और हर परिस्थिति में सकारात्मक सोच के कारण उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग व ख़ास पहचान मिली. आज उनके जन्मदिन पर उनसे जुड़ी तमाम कही-अनकही बातों को जानने की कोशिश करते हैं. सबसे पहले कपिल देव को जन्मदिन बहुत-बहुत मुबारक हो!.. साथ ही ढेर सारी शुभकामनाएं!..

Kapil Dev

आज रणवीर सिंह ने 61 वर्षीय कपिल देव के संग अपनी कई मनमोहक तस्वीरें शेयर करते हुए उन्हें जन्मदिन की बधाई दी. दरअसल, रणवीर 83 फिल्म कर रहे हैं, जो भारत द्वारा साल 1983 में पहली बार विश्‍व कप जीतने पर आधारित है. इसमें रणवीर कपिल देव की भूमिका में हैं और उनकी पत्नी का क़िरदार दीपिका पादुकोण निभा रही हैं.

Kapil Dev

यादगार क्रिकेट जर्नी…

* कपिल देव राम लाल निखंज अपने फास्ट बोलिंग और अटैकिंग बैटिंग के लिए जाने जाते थे.

* कपिल के रूप में भारत को पहला बेहतरीन फास्ट बोलर मिला था. ग़ौर करनेवाली बात है कि अपने पहले ही मैच में उन्होंने पाकिस्तानी बल्लेबाज़ों की हालत ख़राब कर दी थी.

* इस ज़बर्दस्त ऑलराउंडर ने 687 विकेट लेने के साथ-साथ 9037 रन भी बनाए हैं. शिखर पर रहा भारत को अपनी कप्तानी में पहला वर्ल्ड कप जीतने के यादगार पल देना.

* 1983 के वर्ल्ड कप में ही उनके द्वारा जिम्बाब्वे के ख़िलाफ़ खेली गई 175 रन की नाबाद यादगार पारी भी है.

* इससे जुड़ा दिलचस्प वाकया भी है. इस मैच में जब भारत बैटिंग कर रहा था, तब कपिल पाजी स्नान कर रहे थे. लेकिन जल्द ही भारत के 17 रन पर 5 विकेट गिर गए. तब कपिलजी तुरंत छठे नंबर पर बैटिंग के लिए आए और ताबड़तोड़ 138 गेंद पर 175 रन की नाबाद पारी खेल डाली. यह मैच भारत 31 रन से जीता था. आज भी यह पारी भारतीय अविस्मरणीय पारियों में से एक है.

* यह भी रिकॉर्ड है कि टेस्ट करियर के 184 पारियों में कपिल देव कभी भी रनआउट नहीं हुए.

* वे दरियादिल भी ख़ूब थे. जब एक बार कटक टेस्ट में उन्हें मैन ऑफ द मैच दिया गया, तब दिलीप वेंगसरकर नाराज़ हो गए, क्योंकि उन्हें मैन ऑफ द सीरीज़ दिया गया, लेकिन उनका मानना था कि मुश्किल विकेट में उन्होंने 166 रन की पारी खेली थी, तो मैन ऑफ द मैच भी उन्हें ही मिलना चाहिए था. जबकि कपिल देव ने 4 विकेट लेकर अपना 300 विकेट पूरा किया था. ऐसे में उदारता दिखाते हुए देवजी ने अपना अवॉर्ड दिलीप वेंगसकर को दे दिया था.

* कपिल देव रोमांंटिक भी कुछ कम नहीं थे. अपनी पत्नी रोमी भाटिया को उन्होंने चलती ट्रेन में प्रपोज़ किया था. वो भी मज़ेदार अंदाज़ में यह कहते हुए कि क्या हम इस जगह की फोटो ले लें, ताकि भविष्य में अपने बच्चों को यह फोटो तुम दिखा सको.

* देश के इस बेहतरीन कामयाब ऑलराउंडर ने 16 साल के करियर में 131 टेस्ट मैच में 2.78 इकोनॉमी रेट से 434 विकेट लिए और 31.05 की औसत से 5248 रन भी बनाए.

* कपिल देव भारत के ही नहीं, बल्कि विश्‍वभर के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ने 400 विकेट लेने के साथ-साथ 5000 रन भी बनाए.

* 16 अक्टूबर, 1978 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ फैसलाबाद में अपना करियर शुरू करनेवाले 19 साल के कपिल 145 की रफ़्तार से गेंद डालते थे. तब पाकिस्तानी बल्लेबाज़ों को उनकी तूफ़ानी गेंदबाज़ी से बचने के लिए हेलमेट तक मंगवाना पड़ा. आख़िरकार अपने ट्रेडमार्क आउटस्विंग गेंद पर उन्होंने सादिक मोहम्मद के रूप में अपना पहला विकेट लिया.

* कपिल देव की फिटनेस लाजवाब थी. वे कभी भी अपने 16 साल के करियर में घायल या फिर किसी और कारणों से टीम से बाहर नहीं रहे. फिल्डर इतने अच्छे थे कि वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में मदनलाल की गेंद पर पीछे की तरफ़ भागकर बॉउंड्री पर विवियन रिचर्ड्स का कैच पकड़ा था. और वो मैच के टर्निंग पॉइंट में से एक था. तब विव 33 रन बनाकर अच्छा खेेल रहे थे.

* भारत के 1983 वर्ल्ड कप जीत पर बन रही फिल्म 83 में रणवीर सिंह की मेहनत व लगन को देख कपिल देव बेहद प्रभावित हुए. उन्होंने रणवीर की जमकर तारीफ़ की. कपिल के नटराज शॉट की तो रणवीर ने उम्दा कॉपी की है. साथ ही आज के नए कलाकारों की भी सराहना की, जो अपने रोल व अभिनय के लिए कितनी कड़ी मेहनत करते हैं.

* ध्यान दें कि 83 फिल्म केवल कपिल देव पर ही नहीं, बल्कि 1983 वर्ल्ड कप की विश्‍व विजेता भारतीय टीम के सभी खिलाड़ियों की कहानी है इसमें, जैसे- मोहिंदर अमरनाथ, श्रीकांत आदि.

* रणवीर सिंह फिल्म के लिए कपिल देव के क़िरदार की बारीक़ियों को जानने के लिए दिल्ली के उनके घर में कई दिन तक रहे और उनके साथ काफ़ी ख़ूबसूरत पल गुज़ारें.

* वैसे बहुत कम लोगों को मालूम है कि धर्मेंद्र व रति अग्निहोत्री की फिल्म दिल्लगी… यह दिल्लगी में भी कपिल देव ने काम किया था.

* आज भी वे क्रिकेट के अलावा गोल्फ, फुटबॉल खेलना पसंद करते हैं. अक्सर किसी टूर्नामेंट, समारोह, बच्चों आदि के साथ खेलते हुए उनकी तस्वीरें दिखाई देती हैं.

* कपिल देव की बेटी अमिया भी शायद फिल्मों में आए, लेकिन अभी कुछ तय नहीं है.

* उन्हें साल 1979-80 में अर्जुन अवॉर्ड, 1982 में पद्मश्री, 1983 में विसडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर, 1991 में पद्म भूषण, 2002 में विसडन इंडियन क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी से सम्मानित किया जा चुका है.

* कपिल देव के उपलब्धियों व क्रिकेट में बेहतरीन योगदान को देखते हुए उन्हें 24 सितंबर 2008 को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल का दर्जा भी दिया गया.

* आज भी अपनी बातों, भाषण, व्यवहार आदि से वे हर किसी के दिलों में जोश भर देते हैं. उनकी उपस्थिति ही लोगों को उत्साहित कर देती है. इस महान खिलाड़ी का जोश-उत्साह ताउम्र यूं ही बना रहे, यही दुआ करते हैं.

– ऊषा गुप्ता

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सुरों के सरताज ए. आर. रहमान हो गए हैं 53 साल के. रहमान उन चंद म्यूज़िक डायरेक्टर और सिंगर्स में से हैं, जो म्यूज़िक के साथ एक्सीपेरिमेंट्स करके बेहतरीन संगीत बनाने का दम रखते हैं. इंडियन म्यूज़िक को इंटरनेशनल लेवल तक ले जाने का श्रेय काफ़ी हद तक रहमान को भी जाता है. फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर के लिए उन्होंने ऑस्कर जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया. 6 साल की छोटी-सी उम्र में ही रहमान को संगीत से प्यार हो गया था. सिंथेसाइजर और हारमोनियम पर उनकी नन्हीं-सी उंगलियां कमाल कर देती थीं. अपने पिता आर.के.शेखर की राह पर चलते हुए रहमान ने संगीत की विरासत को आगे बढ़ाया और आज टॉलीवुड, बॉलीवुड के साथ हॉलीवुड के भी पसंदीदा संगीतकार और गायक बन गए हैं. रहमान के संगीत का जादू ऐसा है कि वो हर उम्र के लोगों के फेवरेट हैं.

मेरी सहेली की ओर से ए. आर. रहमान को जन्मदिन की शुभकामनाएं.

आइए, उनके जन्मदिन पर देखते हैं उनके 10 बेहतरीन गाने…

फिल्म- दिल से (1998)

फिल्म- रंगीला (1995)

फिल्म- रोज़ा (1992)

https://www.youtube.com/watch?v=QIyQn_PlR38

फिल्म- ताल (1999)

https://www.youtube.com/watch?v=XpoNr0j4sms

फिल्म- रंग दे बसंती (2006)

फिल्म- ओके जानू (2017)

फिल्म- रॉकस्टार (2011)

फिल्म- बॉम्बे (1995)

https://www.youtube.com/watch?v=7uro3sLY-XY

फिल्म- स्लमडॉग मिलियनेयर (2009)

https://www.youtube.com/watch?v=5F2wvJr6WUA

एलबम- मां तुझे सलाम (1997)

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BCCI, Dravid's Demand For Equal Pay In Cash Rewards
राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) अपनी सादगी और टैलेंट के दम पर अपनी अलग पहचान तो कबके बना चुके हैं, पर हर बार वो एक नई मिसाल देकर कुछ ऐसा कर जाते हैं कि उनका सम्मान और बढ़ जाता है. हाल ही में बीसीसीआई (BCCI) ने अंडर-19 विश्व कप (Under 19 World Cup) जीतने के बाद मुख्य कोच (Coach), सहायक कोच और टीम के खिलाड़ियों के लिए इनामी रकम की घोषणा की थी, जिसमें राहुल द्रविड़ को सबसे ज़्यादा 50 लाख दिए जाने का ऐलान हुआ था. लेकिन इनामी रकम की असमानता को लेकर द्रविड़ ने नाखुशी जाहिर की. राहुल का कहना है कि सबने उतनी ही मेहनत की है तो इनाम में असामनता क्यों? राहुल ने अपनी इनामी राशि कम करके सपोर्टिंग स्टाफ के लिए भी समान रकम की मांग की और बीसीसीआई ने इस मांग को स्वीकार करते हुए विश्व कप ही नहीं, बल्कि अंडर-19 टीम से एक साल पहले तक जुड़े स्टॉफ के हर सदस्य को इनामी रकम देने का फैसला किया है. सभी को समान राशि दी जाएगी. यहाँ तक कि उस ट्रेनर के परिवार को भी उतनी ही रकम मिलेगी, जिसका पिछले साल टीम के साथ ऑन ड्यूटी निधन हो गया था.

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राहुल द्रविड़ के इस क़दम ने उनके फैंस के बीच उनका सम्मान और बढ़ा दिया और सभी ने ट्वीट्स करके अपने मन की बात कही. आप भी पढ़ें ये ट्वीट्स

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मधुर आवाज़ की मलिका आशा भोसले हो गई हैं 84 साल की. 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा ताई ने गायकी का सफ़र शुरू किया साल 1943 में जब उन्होंने मराठी फिल्म माझा बाळ में पहला गीत गाया. आशा ताई ने अपना गायकी का सफ़र 10 साल की उम्र में शुरू किया था और उन्होंने कई भाषाओं में लगभग सोलह हज़ार फिल्मी और नॉन फिल्मी गाने गाए हैं.

मेरी सहेली की तरफ से आशा ताई को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

फिल्म- यादों की बारात

https://www.youtube.com/watch?v=IEwrLaCYQkg

फिल्म- द ग्रेट गैम्बलर

https://www.youtube.com/watch?v=waeAGdCvJd8

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फिल्म- मेरे जीवन साथी

फिल्म- लव स्टोरी

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फिल्म- कश्मीर की कली

फिल्म- हम दोनों

https://www.youtube.com/watch?v=9VlDX_U2PkI

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फिल्म- इजाज़त

फिल्म- दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे

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फिल्म- जीवा

https://www.youtube.com/watch?v=froB7rIAics

फिल्म- उमराव जान

https://www.youtube.com/watch?v=60O11sF9_-o

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‘गोरे रंग पे न इतना गुमान कर… गाना गुज़रे ज़माने की जिस मशहूर अदाकारा पर फिल्माया गया था, वह हैं मुमताज़. मुमताज़ ने अपनी बड़ी-बड़ी आंखों, काले बाल, गोरे रंग और अभिनय की अनोखी अदा से सभी पर अपना जादू बिखेरा. उन्होंने 60-70 के दशक में अपने ख़ूबसूरत अंदाज़ से दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया था.
मुमताज़ का नाम बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्रियों में शुमार है. उन्होंने कई फिल्मों में अपने अभिनय के जलवे बिखेरे और एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं.
उनका जन्म 31 जुलाई, 1947 को मुस्लिम परिवार में हुआ. घर की माली हालत खस्ता थी, सो महज़ 12 वर्ष की उम्र में उन्हें फिल्मों में कदम रखना पड़ा. अपनी छोटी बहन मलिका के साथ वह रोज़ाना स्टूडियो के चक्कर लगाया करतीं और छोटी-मोटी भूमिका मांगती थीं.

उनकी मां नाज़ और चाची नीलोफर पहले से फिल्मी दुनिया में मौजूद थीं, लेकिन दोनों जूनियर आर्टिस्ट होने के नाते अपनी बेटियों की सिफारिश करने के योग्य नहीं थीं. मुमताज़ ने जूनियर आर्टिस्ट से स्टार बनने का सपना अपने मन में संजोया था और उन्होंने यह सच कर दिखाया.
अपनी लगन और मेहनत से 70 के दशक में उन्होंने स्टार की हैसियत हासिल कर ली. उस दौर के कई नामी सितारे, जो कभी मुमताज़ का नाम सुनकर मुंह बनाते थे, वे भी उनके साथ काम करने को बेताब रहने लगे.
मुमताज़ ने दारा सिंह से लेकर दिलीप कुमार जैसे महान कलाकारों के साथ अभिनय किया. उन्होंने शम्मी कपूर, देवानंद, संजीव कुमार, जितेंद्र और शशि कपूर जैसे सितारों के साथ काम किया, मगर राजेश खन्ना के साथ उनके काम को सबसे ज़्यादा सराहा गया. मुमताज़ और राजेश की फिल्में देखने के लिए सिनेमाघरों में भीड़ उमड़ती थी.

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मुमताज़ ने लगभग दस साल तक बॉलीवुड पर राज किया है. वह शर्मिला टैगोर के समकक्ष मानी गईं और उन्हें मेहनताना भी उन्हीं के बराबर मिलता था.
सत्तर के दशक तक मुमताज़ का भी स्टार बनने का सपना सच हो गया था. उन्होंने गुजराती मूल के लंदनवासी मयूर वाधवानी नामक व्यवसायी से 1974 में शादी की और ब्रिटेन में जा बसीं. शादी के पहले उनका नाम संजय खान, फिरोज़ खान, देव आनंद जैसे कुछ सितारों के साथ जोड़ा गया था.
मुमताज़ जब 18 साल की थीं, तभी शम्मी कपूर ने उन्हें शादी के लिए प्रपोज़ किया था. उस समय मुमताज़ भी शम्मी से प्यार करती थीं. शम्मी चाहते थे कि मुमताज़ अपना फिल्मी करियर छोड़कर उनसे शादी कर लें, लेकिन उनके लिए उस समय अपने परिवार को संभालना ज़रूरी थी, इसलिए मुमताज़ ने इनकार कर दिया.शादी के बाद भी मुमताज़ की तीन फिल्में रिलीज़ हुईं, जिनकी शूटिंग उन्होंने शादी से पहले ही पूरी कर ली थी. फिल्मों के प्रस्ताव हालांकि उन्हें शादी के बाद भी मिलते रहे. उन्हें 53 साल की उम्र में ब्रेस्ट कैंसर हो गया था, जिसे उन्होंने मात दी.
साल 1967 की फिल्म राम और श्याम व 1969 की फिल्म आदमी और इंसान के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिग एक्ट्रेस का अवार्ड जीता. साल 1971 में उन्हें खिलौना के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला था.

मेरी सहेली की ओर से मुमताज़ को उनके जन्मदिन पर ढेरों शुभकामनाएं. 

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बॉलीवुड के बेहतरीन गायक मुकेश का आज जन्मदिन है. आवाज़ के इस जादूगर का जन्म 22 जुलाई, 1923 को हुआ था. उनका पूरा नाम मुकेश चंद माथुर है. कम ही लोग जानते हैं कि मुकेश गायक नहीं, बल्कि ऐक्टर बनना चाहते थे. उन्होंने अपना सफ़र 1941 में फिल्म निर्दोष से शुरू किया, जिसमें ऐक्टिंग करने के साथ उन्होंने गाना भी गाया. बॉलीवुड में उन्हें तब तक स्ट्रगल करना पड़ा, जब तक के. एल शायगल की नज़र उन पर नहीं पड़ी थी. यूं तो शोमैन राज कपूर के जिगरी दोस्त मुकेश को राज कपूर की आवाज़ कहा जाता है, लेकिन 40 के दशक में उन्होंने सबसे ज़्यादा गाने दिलीप कुमार के लिए गाए थे.

राज कपूर और मुकेश की दोस्ती मुश्किल दौर में भी पक्की थी. मुकेश ने मल्हार और अनुराग जैसी फिल्मों को प्रोड्यूस भी किया, लेकिन सफल नहीं हुए. उन्होंने फिर से गायकी का रुख किया और फिल्मफेयर अवॉर्ड पाने वाले पहले मेल सिंगर बने.

अपने 40 साल के करियर में उन्होंने उस दौर के लगभग हर ऐक्टर के लिए अपनी आवाज़ दी. 200 से भी ज़्यादा फिल्मों में अपनी आवाज देने वाले मुकेश ने लगभग 1300 गाने गाए हैं. लेकिन उनके दर्द भरे गीतों को ज़्यादा पसंद किया गया. मुकेश केवल एक बेहतरीन गायक ही नहीं थे, बल्कि एक अच्छे इंसान भी थे.

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उनकी बर्थ एनीवर्सरी पर आइए, देखते हैं उनके टॉप 10 गाने.

फिल्म- धरम करम

https://www.youtube.com/watch?v=pGYjHQbV1KE

फिल्म- सिलसिला

फिल्म- रजनीगंधा

https://www.youtube.com/watch?v=CPwbi-hfenI

फिल्म- मेरा नाम जोकर

फिल्म- अनाड़ी

फिल्म- यहूदी

फिल्म- संगम

https://www.youtube.com/watch?v=OLnSZSSJp5M

फिल्म- मेरा नाम जोकर

https://www.youtube.com/watch?v=Q9ULWBTokzw

फिल्म- धर्मात्मा

फिल्म- कटी पतंग

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विनोद खन्ना70 और 80 के दशक के हार्टथ्रॉब विनोद खन्ना नहीं रहे. जैसे ही ये ख़बर सामने आई, बॉलीवुड से लेकर उनके फैन्स तक, हर कोई सन्न रह गया. 70 साल के नेता और अभिनेता विनोद खन्ना 70 साल के थे. का़फ़ी वक़्त से कैंसर से जूझ रहे विनोद की कुछ दिनों पहले एक तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें साफ़ नज़र आ रहा था कि वो बेहद बीमार हैं. एक साल पहले तक वो फिल्मों और राजनीति दोनों में सक्रिय थे. बीजेपी सांसद रह चुके विनोद खन्ना की आख़िरी फिल्म दिलवाले थी. इस बेहतरीन ऐक्टर ने भले ही अपने करियर की शुरुआत विलन के तौर पर की थी, लेकिन उनके रोमांटिक अंदाज़ को भी दर्शकों ने ख़ूब पसंद किया. 1987-1994 में विनोद खन्ना बॉलीवुड के सबसे महंगे स्टार बन गए थे. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उनके पिता बिल्कुल नहीं चाहते थे कि विनोद फिल्मों में अभिनय करें. उनके पिता ने उन्हें केवल दो महिनों का समय दिया था, इन दो महिनों में विनोद खन्ना ने ख़ुद को साबित किया और बॉलीवुड में अपनी जगह बना ली. उन्होंने आन मिलो सजना, मेरा गांव मेरा देश, सच्चा झूठा, मुकद्दर का सिकंदर, परवरिश, अमर अकबर एंथोनी, कुर्बानी, इम्तिहान, दयावान, दबंग, दिलवाले जैसी कई सुपरहिट फिल्में बॉलीवुड को दी हैं.

भले ही विनोद खन्ना आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनके द्वारा निभाए गए यादगार किरदार और फिल्मों के गाने उनकी याद हमेशा दिलाते रहेंगे.

आइए, उन्हें याद करते हैं उनके टॉप 10 गानों के साथ.

फिल्म- जुर्म (1990)

https://www.youtube.com/watch?v=B-5zMnCD4_o

फिल्म- चांदनी (1989)

https://www.youtube.com/watch?v=_HXDFHK0dZw

फिल्म- कुर्बानी (1980)

फिल्म- इम्तिहान (1974)

https://www.youtube.com/watch?v=heZC52CKtLQ

फिल्म- मेरे अपने (1971)

https://www.youtube.com/watch?v=dPvoWyeSsxU

फिल्म- लहु के दो रंग (1979)

https://www.youtube.com/watch?v=srfhnpDqZWg

फिल्म- हाथ की सफ़ाई (1974)

फिल्म- सत्यमेव जयते (1987)

https://www.youtube.com/watch?v=98AKKz4dGz0

फिल्म- अमर अकबर एंथोनी (1977)

https://www.youtube.com/watch?v=sev0D5P8wRE

फिल्म- दौलत (1982)

 

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एक ज़माने में लाखों दिलों की धड़कन कहे जानेवाले शशि कपूर को कपूर परिवार से होने के नाते फिल्मों में स्ट्रगल तो नहीं करना पड़ा, लेकिन ख़ुद को एक अच्छे ऐक्टर के तौर पर साबित करने के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की. उनके करियर की शुरुआत कई फ्लॉप फिल्मों से हुई थी. लेकिन शशि कपूर ने हार नहीं मानी और 1965 में फिल्म जब जब फूल खिले से शुरू हुआ हिट फिल्मों का दौर. 70 के दशक के सबसे बिज़ी ऐक्टर्स में शामिल था शशि कपूर का नाम. एक दिन में वो 3 से 4 सेट पर चले जाते थे. शशि कपूर के डायलॉग डिलीवरी और उनके डांस करने का अंदाज़ ज़बरदस्त था, जो दर्शकों को बेहद पसंद आया.

आइए, देखते हैं उनके टॉप 10 गाने.

फिल्म- हसीना मान जाएगी (1968)

https://www.youtube.com/watch?v=W7Gi1mmomiw

फिल्म- स्वंयवर (1980)

फिल्म- कन्यादान (1968)

फिल्म- शर्मिली (1971)

फिल्म- जब जब फूल खिले (1965)

फिल्म- आमने सामने (1967)

https://www.youtube.com/watch?v=KoRJtZiBBuI

फिल्म- दीवार (1975)

फिल्म- चोर मचाए शोर (1974)

https://www.youtube.com/watch?v=K0_jpigjv1c

फिल्म- काला पत्थर (1979)

फिल्म- प्यार का मौसम (1969)

Mohammed Rafi
वाकई, आज भी कोई नहीं भुला पाया है गायिकी के सम्राट मोहम्मद रफ़ी साहब को. रफ़ी साहब के गीत आज भी सभी के ज़ेहन में ताज़ा हैं. आज गायिकी के सरताज मोहम्मद रफ़ी साहब का जन्मदिन है. रफ़ी साहब के सुरीले गानों का नशा चार दशकों तक लोगों के दिलो-दिमाग पर छाया रहा है और आज भी वो सुरूर कायम है.  
Mohammed Rafi
२४ दिसंबर १९२४ को अमृतसर के नज़दीक, कोटला सुल्तान सिंह में जन्में रफ़ी साहब ने बंटवारे के वक़्त हिन्दुस्तान में रहना पसंद किया.  तेरह साल की उम्र में के. एल. सहगल के गानों के एक कॉन्सर्ट में उन्होंने पहली बार गाना गाया, जिसके बाद उनके करियर की पहली फिल्म रही पंजाबी फिल्म गुल बलोच.  इस फिल्म के बाद रफ़ी साहब को ‘ऑल इंडिया रेडियो – लाहोर’ की ओर से गाने का न्योता मिला और साल १९४४ में रफ़ी साहब मुंबई आ गए. मुंबई में  उनकी पहली मुलाक़ात हुई संगीतकार नौशाद से और आपको सुनकर ताज्जुब होगा कि नौशाद जी ने रफ़ी साहब को पहले कोरस में गवाया था,  गाना था हिन्दुस्तान के हैं हम…. बतौर गायक रफ़ी जी की पहली हिंदी फिल्म रही गाँव की गोरी… 
नौशाद के साथ रफ़ी जी की जोड़ी ख़ूब जमी और १९५२ में रिलीज़ हुई फिल्म बैजू बावरा ने रफ़ी साहब को एक अलग मुकाम दिया. तलत महमूद को   पसंद करने वाले नौशाद की पहली पसंद बन चुके थे रफ़ी साहब. सिर्फ नौशाद ही नहीं, बल्कि 50 और 60 के दशक में रफ़ी साहब – संगीतकार ओ.पी. नैय्यर, शंकर जयकिशन,  एस. डी. बर्मन जैसे म्यूज़िक डायरेक्टर के भी पसंदीदा गायक बन गए थे. ओ. पी. नैय्यर तो रफ़ी जी की आवाज़ से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने फिल्म रागिनी में किशोर कुमार पर फिल्माए गए गाने भी रफ़ी साहब से ही गवाए. इसके बाद रफ़ी जी ने किशोर कुमार के कई गाने गाए.  किशोर दा से पहले yodelling की शुरुआत रफ़ी साहब ने ही थी. 
Song : दिन ढल जाए… (गाइड)
एस. डी. बर्मन के साथ रफ़ी जी ने देव आनंद के लिए ढेरों गाने गाये…

Song : जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा…(ताजमहल)

शंकर जयकिशन के साथ रफ़ी जी ने शम्मी कपूर और राजेंद्र कुमार के लिए भी बेहतरीन गाने गाए. शम्मी कपूर की मानो आवाज़ ही बन गए थे रफ़ी साहब. रफ़ी जी के इंतकाल पर शम्मी जी ने कहा था कि उनकी आवाज़ आज उनका साथ छोड़ गयी.

Song : इस रंग बदलती दुनिया में… (राजकुमार)

https://www.youtube.com/watch?v=TMbHY5S7WUs

रफ़ी साहब का आखरी गाना रिकॉर्ड करनेवाले लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने अपने करियर की शुरुआत भी उन्हीं के गाने से की थी…

Song : वो जब याद आए… (पारसमणि)

दिल के नेक रफ़ी साहब उन संगीतकारों के लिए भी मसीहा थे, जिनके पास रफ़ी साहब की फीस देने के लिए पैसे नहीं थे.  निसार बज्मी के लिए तो रफ़ी साहब ने सिर्फ एक रुपये में गाना गाया था. उन दिनों रफ़ी साहब के साथी रॉयल्टी की लड़ाई लड़ रहे थे. मगर उदार रफ़ी साहब का नज़रिया उन सब से जुदा था, इसी बात से नाराज़ होकर लताजी ने उनके साथ कुछ अरसे के लिए गाना ही बंद कर दिया था. नतीजा यह हुआ कि रफ़ी जी और आशा जी ने उन दिनों कई गाने साथ गाए.
Song: अच्छा जी मैं हारी पिया… (काला पानी)

https://www.youtube.com/watch?v=bv7z4FA3lqg

 रफ़ी साहब की आवाज़ हर अभिनेता पर ख़ूब जंचती थी, चाहे वो  देव आनंद हों या   दिलीप कुमार.
 
Song: तेरे हुस्न की क्या तारीफ़ करूं… (लीडर)

https://www.youtube.com/watch?v=SibBHZkNlOY

धर्मेन्द्र, जीतेंद्र, संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, हर दौर के हीरो की आवाज़ बने रफ़ी साहब. राजेश खन्ना जिनके लिए आमतौर पर किशोर दा की आवाज़ इस्तेमाल की जाती थी, उनके लिए रफ़ी साहब ने कई गाने गाए.
 
Song: बागों में बहार है… (आराधना)

 रफ़ी जी ने अपनी उम्र में आधे कलाकारों के लिए भी सुपरहिट गाने गाए. वो कई सालों तक ऋषि कपूर की आवाज़ भी बने रहे.
Song : दर्द-ऐ-दिल… (क़र्ज़)

https://www.youtube.com/watch?v=hYNi_T848Y0

रफ़ी साहब जैसा वर्सिटाइल गायक शायद कोई रहा हो. वो हर तरह का गाना बहुत ही सरलता से गा लेते थे. उन्होंने हिंदी के अलावा कई भाषाओं में गाने गाए हैं. ये रफ़ी साहब की गायिकी का ही जादू था कि उन्हें भारतीय सरकार की तरफ से पद्मश्री से सम्मानित किया गया. रफ़ी साहब को पांच बार नेशनल अवार्ड्स और ६ बार फिल्मफेयर अवार्ड से नवाज़ा गया. पहला नेशनल अवार्ड रफ़ी साहब को मिला था फिल्म नीलकमल के गाने के लिए. रफ़ी साहब बाबुल की दुआएं गाने को गाते वक़्त रो दिए थे, क्योंकि अगले दिन उनकी बेटी की शादी थी.
Song : बाबुल की दुआएं… (नीलकमल)

https://www.youtube.com/watch?v=hbL9Gh7Ygj0

साल १९५०-१९७० तक रफ़ी जी का ही राज रहा. रमज़ान के मुबारक महीने में वो सभी को अलविदा कह गए और छोड़ गए अपनी दर्द भरी आवाज़ और अपने दिलकश गाने. रफ़ी साहब तो नहीं रहे, मगर उनकी पुर नूर आवाज़ उनके लाखों चाहने वालों को सुकून पहुंचाती रहेगी.

– प्रियंका सिंह

बॉलीवुड के ऐक्शन किंग और ही मैन कहे जाने वाले धरम पाजी यानी कि धर्मेंद्र हो गए हैं 81 साल के. लेकिन उनकी फिटनेस देखकर कौन कहेगा कि वो 81 साल के हो गए हैं. धर्मेंद्र का एक आम इंसान से सुपर स्टार बनने का सफ़र बेहद ही रोचक रहा है. Dharmendraउनका जन्म 8 दिसंबर, 1935 को पंजाब में हुआ था. गांव में ही उन्होंने पढ़ाई गांव के ही स्कूल से की थी. उनका पूरा नाम धरम सिंह देयोल है. उनकी पहली शादी तब हो गई थी जब वो केवल 19 साल के थे. फिल्मों में काम करने से पहले धर्मेंद्र रेलवे में क्लर्क थे और उन्हें सवा सौ रुपए सैलरी मिलती थी.

फिल्मफेयर का टैलेंट अवॉर्ड जीतकर धर्मेंद्र मुंबई आ गए और फिल्मों में स्ट्रगल करने लगे. विवाहित होने की वजह से उन्हें फिल्में मिलने में काफ़ी दिक़्कते आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. धर्मेन्द्र की पहली फिल्म थी दिल भी तेरा हम भी तेरे, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि फिल्म के प्रीमियर पर धर्मेन्द्र को किसी ने नहीं पहचाना और ग़ुस्से में वो ट्रेन से घर चले गए थे. फिल्म अनपढ़ और बंदिनी से उन्हें पहचान मिली. फिल्मों में शुरुआत में उनकी छवि एक रोमांटिक हीरो की थी, लेकिन फूल और पत्थर, धरम वीर, चरस, आज़ाद और शोले ने उन्हें एक्शन हीरो बना दिया. आज भी धरम पाजी का अंदाज़ उनके फैन्स पसंद करते हैं. फिल्मों में उनकी दूसरी पारी को भी पसंद किया गया.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से धर्मेंद्र को ढेरों शुभकामनाएं.

गरम-धरम कहे जाने वाले धरम पाजी के डायलॉग्स बोलने का अंदाज़ दमदार और डांस की अदा अलग थी. आइए, उनके जन्मदिन के मौक़े पर देखते हैं उनके 10 फेमस गाने.

फिल्म- लोफर

https://www.youtube.com/watch?v=8SXXGD1_rTU

फिल्म- ब्लैकमेल

फिल्म- बहारें फिर भी आएंगी

https://www.youtube.com/watch?v=GQblX2TmEZI

फिल्म- प्रतिजा

फिल्म- शालीमार

फिल्म- दोस्त

https://www.youtube.com/watch?v=tLaYQzGntdw

फिल्म- मेरा गांव मेरा देश

https://www.youtube.com/watch?v=oK3E-YXEIXE

फिल्म- जुगनू

https://www.youtube.com/watch?v=TPopE3_ycjM

फिल्म- चरस

फिल्म- शोले

https://www.youtube.com/watch?v=3hb_a0wmRxM