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कोई भी रिश्ता हो, वो कुछ न कुछ चाहता है, कुछ वादे, कुछ सपने, कुछ शर्तें, तो कुछ सामंजस्य व बदलाव भी… रिश्ते एक तरह से ख़ूबसूरत बंधन होते हैं… लेकिन ये बंधन तब तक ही अच्छे लगते हैं, जब तक आप इनमें बंधकर भी एक सुकून व ख़ुशी महसूस करते हैं, लेकिन जब यही बंधन बोझ लगने लगे, तो समझ जाएं कि आप कुछ ज़्यादा ही बंध गए हैं और अपने रिश्तों को पाने और जीने के लिए आप ख़ुद को खाते जा रहे हैं और ख़ुद के लिए जीना तक भूलते जा रहे हैं. जब कभी ऐसी नौबत आ जाए, तो एक बार रुक जाएं, ठहर जाएं और सोचें ज़रूर कि क्या इस तरह से रिश्ते आगे बढ़ पाएंगे और कब तक आप अपनी तरफ़ से इन्हें आगे बढ़ा पाएंगे?

– यह सच है कि रिश्तों में कभी अपनी पसंद पर, तो कभी अपनी ख़्वाहिशों से कॉम्प्रोमाइज़ करना पड़ता है, क्योंकि रिश्तों का दूसरा नाम ही एडजेस्टमेंट है. 
– रिश्तों को निभाने के लिए कॉम्प्रोमाइज़ भी ज़रूरी है और बदलाव भी. आपको बदलना पड़ता है और इसमें कोई बुराई भी नहीं, लेकिन ऐसा करते-करते कहीं ऐसा न हो कि आपके लिए ये बदलाव बोझिल साबित होने लगें?
– आप ही अगर अपनी तरफ़ से हर बात पर समझौता करते हैं, तो ज़ाहिर है आप सामने वाले की अपेक्षाएं बढ़ा रहे हैं. 
– माना रिश्तों की उम्र बढ़ाने के लिए कई बातों पर, कई चीज़ों पर समझौता करना पड़ता है, लेकिन हर बात पर आपको ही समझौता करना पड़े, तो हर किसी की अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं, उन्हें लगता है कि यह काम तो इसकी ज़िम्मेदारी है. 
– लेकिन एक व़क्त ऐसा आता ही है, जब आपके द्वारा किया गया यह एकतरफ़ा बदलाव भारी पड़ने लगता है और आप अपने ही फैसले पर पछताते हैं. 
– ज़ाहिर-सी बात है कि ये बदलाव अधिकांश मामलों में महिलाओं को ही करने पड़ते हैं, जिससे उन पर रिश्तों का बोझ, काम व ज़िम्मेदारियों का बोझ बढ़ता ही जाता है और उनसे उम्मीदें भी बढ़ती ही जाती हैं.
– लेकिन अक्सर महिलाएं अपने रिश्तों को पाने व बचाने के लिए ख़ुद को खो देती हैं.

Relationship Problems


– वो न स़िर्फ ज़िम्मेदारियों ओढ़ती चली जाती हैं, बल्कि अपनी हेल्थ, अपने निर्णय, अपने सपने और अपनी ख़ुशी तक को भूलती व कुर्बान करती चली जाती है. 
– अपने स्वास्थ्य को इतना नज़रअंदाज़ करने लगती है कि आगे चलकर उसे ही भारी पड़ता है.
– यहां तक कि ख़ुद बीमार भी हो जाए, तो उसे जल्दी ठीक स़िर्फ इसलिए होना होता है कि उसे अन्य घरवालों व घर के कामों की फिक्र होने लगती है. 
– वो बीमार होकर भी ख़ुद को अपराधबोध से ग्रस्त कर लेती है कि उसके स्वास्थ्य के चलते घरवालों को इतनी परेशानी झेलती पड़ रही है. 
– ये सब आख़िर कहां तक जायज़ है? आप रिश्तों को नहीं पा रही होती हैं, बल्कि ख़ुद को खो रही होती हैं, क्योंकि रिश्ते तो दोनों तरफ़ से बराबरी से निभाए जाएं और ज़िम्मेदारियों को बंटवारा भी बराबरी से हो, तभी रिश्तों का मतलब है, वरना वो बेमानी हैं. 
ऐसे में सवाल यह उठता है कि किया क्या जाए?
– शुरू से ही अपने काम व ज़िम्मेदारियों के प्रति क्लीयर रहें. 
– आप यह ज़रूर जताएं कि हां, आप बदलेंगी, लेकिन उतना ही सामनेवाले को भी बदलना होगा.

Relationship Problems


– हर बार और हर परिस्थिति में स़िर्फ आपसे ही बदलाव की उम्मीद न की जाए. 
– रिश्तों में संतुलन ज़रूरी है. स़िर्फ आप ही न बदलें, अपने पार्टनर व अन्य सदस्यों को भी कहें कि वो भी सहयोगपूर्ण रवैया अपनाकर आपका साथ दें. 
– रिश्ते व घर से जुड़ी सभी ज़िम्मेदारी ख़ुद न ओढ़ें. 
– अन्य लोगों को भी उनके ज़िम्मेदारियों का एहसास कराएं. ज़िम्मेदारियों को बांट दें. इसके लिए एक सभी घरवाले एक टाइम टेबल बना लें और फॉलो करें. 
– हर काम व हर बात प्यार से करें, ताकि किसी को बुरा भी न लगे, क्योंकि प्यार से भी बहुत कुछ किया और करवाया जा सकता है. 
– बेहतर होगा कि आप सबसे पहले पार्टनर से पहले बात करें, उन्हें विश्‍वास में लें, उनका सहयोग होगा और वो आपके लिए बदलेंगे, तो आसान होगा.

Relationship Warning


– कुछ बातों पर ना कहना भी सीखें. आप अगर शुरू से ही सभी को आदत डाल देंगी कि आप हर बात पर समझौता करने को तैयार हैं, तो हर बार आपसे ही उम्मीद की जाएगी.
– बेहतर होगा ख़ुद के लिए भी समय निकालें. अपने सपनों को भी उड़ान दें. आप ख़ुश रहेंगी, तभी तो बेहतर तरी़के से काम कर सकेंगी. हर बात पर अगर आप झुकती चली जाएंगी, तो ख़ुद को मुसीबत में ही डालेंगी.
– ख़ुद को पैंपर करें. सहेलियों के साथ मूवी या डिनर पर जाएं. ज़रूरी नहीं कि हर बार पति या बच्चों के साथ ही आप बाहर जाएं. 
– कभी खाना न बनाकर बाहर से मंगवाएं. 
– अपनी फिटनेस और ब्यूटी का भी पूरा ख़्याल रखें. 
– अगर आपसे हर बात की उम्मीद की जाती है, तो कभी-कभी उम्मीदें तोड़ना भी ज़रूरी है. 
– यह आपको तय करना है कि आपको कोई कैज़ुअली न ले. ख़ुद से प्यार करना सीखें. 
– आप भी दिनभर काम करती हैं, तो आपको भी आराम करने का पूरा हक है. अपने लिए वीकली ऑफ डिसाइड करें और घरवालों को भी बता दें. उस दिन खाना या तो कोई और बनाए या बाहर से मंगवाए इस पर चर्चा करके हर कोई अपने लिए ऑफ और काम करने की ज़िम्मेदारी बांट ले. 
– ज़रूरी नहीं सबकी फरमाइशें हर बार पूरी की जाएं. क्या कभी ऐसा भी हुआ है कि आपकी फरमाइशों पर किसी का ध्यान गया हो?
– आपने जितना भी रिश्तों को दिया है, क्या घरवालों को उसका एहसास भी है? अगर नहीं, तो एहसास आपको कराना होगा. 
– रिश्तों को बनाए व बचाए रखने की ज़िम्मेदारी सभी की होती है, तो ज़िम्मेदारी भी सभी को लेनी होगी. आप ही अपने सपनों को छोड़कर सब कुछ क्यों करती या करते चले जाएं?
– ये तमाम बातें स़िर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस सदस्य के लिए हैं, जो अपना सब कुछ रिश्तों को दे देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें सराहा तक नहीं जाता और जाने-अंजाने उनका फ़ायदा उठाया जाने लगता है और उन्हीं से उम्मीद की जाती है.

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– जहां तक आप सहज महसूस करें और बात रिश्ते टूटने पर आ जाए, वहां कॉम्प्रोमाइज़ करने या दो क़दम पीछे हटने में भी बुराई नहीं, लेकिन अगर आपको निराशा और घुटन लगने लगे, तो अपने लिए ज़रूर सोचें, इसमें कोई बुराई नही. 
– अक्सर ऐसा भी होता है कि जो शख़्स उम्मीदें पूरी करता चला जाता है और एक व़क्त के बाद वो अपने लिए कुछ कहना या करना चाहता है, तो उसे स्वार्थी करार दिया जाता है, क्योंकि सबको यह लगने लगता है कि इसे तो हमारे लिए ही सब करना चाहिए, यही इसकी ज़िम्मेदारी है, तो ये अपने लिए कैसे सोच सकता है? 
– बेहतर होगा ऐसी सोच पनपने से पहले ही आप लोगों की उम्मीदें इतनी न बढ़ा दें और ख़ुद को इतना न खो दें कि दूसरे तो दूसरे ख़ुद आप भी ख़द को ढूंढ़ न पाएं. 
– दूसरों के स्वास्थ्य से पहले अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें, दूसरों के सपने ज़रूर पूरे करें, लेकिन अपने सपनों को पूरी तरह से दबा न दें. जीना न भूल जाएं, अपने लिए, ख़ुद को ख़ुश करने के लिए भी कुछ करें, ये स्वार्थ नहीं, बल्कि रिश्तों को पाने और ख़ुद को न खाने के लिए संजीवनी का काम करेगी. आगे आपकी मर्ज़ी.


– बिट्टु शर्मा

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अपने पैरों पर खड़े होने तक तो ठीक है, लेकिन औरत यदि पुरुष से दो क़दम आगे निकल जाए तो उन्हें ये बर्दाश्त नहीं होता. क्या आज भी इस सोच में बदलाव नहीं आया है? क्या अब भी बीवी की क़ामयाबी से जलते हैं पुरुष?

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हम स्त्री-पुरुष की समानता की चाहे कितनी ही दुहाई दे दें, लेकिन आज भी यदि कोई महिला अपने पति से ज़्यादा कमाती है, तो उनके रिश्ते में खटास आनी शुरू हो जाती है. कई केसेस में ऐसा भी होता है कि पति-पत्नी को इस बात से कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन परिवार के लोग बात-बात में उन्हें इस बात का एहसास कराते रहते हैं.

बदलाव आया है, लेकिन…
सपना कहती हैं, स्वाति मैंने और मेरे पति सुयश ने एक साथ पढ़ाई की और एक साथ करियर की शुरुआत भी की. साथ पढ़ते दोनों में प्यार हुआ और करियर में सेटल होते ही हमने शादी कर ली. शादी के बाद मुझे करियर में अच्छी अपॉर्चुनिटीज़ और प्रमोशन मिलते गए, जिससे शादी के दो साल बाद ही मेरी सैलरी सुयश से ज़्यादा हो गई. इससे हम दानों को तो कोई फर्क नहीं पड़ रहा था, लेकिन मेरे सास-ससुर को लगने लगा कि बहू यदि ज़्यादा कमाएगी तो कहीं बेटे और परिवार पर हुकुम न चलाने लगे, इसलिए पहले उन्होंने मुझ पर फैमिली प्लान करने का प्रेशर डाला और मां बनते ही जॉब छोड़ देने की ज़िद करने लगे. कई बार उन्होंने सुयश के भी कान भरने की कोशिश की, लेकिन सुयश समझदार हैं, उन्होंने मेरा साथ दिया इसलिए मैं आसानी से जॉब कर पा रही हूं. ज़रूरी नहीं कि मेरे जैसी सभी महिलाओं को पति का सपोर्ट मिलता होगा, कई पुरुषों को बीवी का उनसे ज़्यादा कमाना पसंद नहीं होता, ऐसे में औरत की काबिलियत ही उसकी कमज़ोरी बन जाती है. समाज में अभी भी बहुत बदलाव की ज़रूरत है.

अभी दिल्ली दूर है…
साइकोलॉजिस्ट माधवी सेठ के अनुसार, महिलाओं की कमाई हमारे देश में आज भी एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर बहस ख़त्म होने का नाम नहीं लेती. महिलाओं की कमाई यदि पुरुष से ज़्यादा हो, तो इसका असर उनके रिश्ते पर पड़ने लगता है. पुरुषों को कमाऊ पत्नी तो चाहिए, लेकिन उसे वे ख़ुद से ऊपर उठता नहीं देख सकते. पत्नी के सामने अपना रुतबा कम होता देख पुरुषों के अहम् को ठेस पहुंचती है और यही ठेस उनकी शादीशुदा ज़िंदगी में दरार डाल देती है. कई महिलाएं तो परिवार में क्लेश होने से बचने के लिए घर में अपनी सैलरी कम बताती हैं. ऑफिस में जब उन्हें अच्छे परफॉर्मेंस के लिए प्रमोशन या पुरस्कार मिलता है, तो वो अपनी ख़ुशी जाहिर करने के बजाय ये कहकर बात को टाल देती हैं कि ये प्रमोशन अकेले मुझे ही नहीं मिला है, बहुत लोगों को मिला है, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है.

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Partner Jealous

महिलाएं भी हैं ज़िम्मेदार
हमारे देश में महिलाओं की कमाई को हमेशा दूसरे पायदान पर रखा जाता है और ज़्यादातर महिलाएं भी ऐसा ही सोचती है. कई महिलाएं अपनी कमाई को स़िर्फ अपने जेबख़र्च और ऐशो-आराम तक ही सीमित रखती हैं. उन्हें लगता है कि घर की आर्थिक ज़िम्मेदारी स़िर्फ पति की है, उनकी नहीं. ऐसे में जब कभी उन्हें घर के लिए ख़र्च करना पड़ता है, तो उन्हें ये अच्छा नहीं लगता. जब महिलाएं ही अपनी कमाई को ज़रूरी नहीं समझती, तो परिवार में उनकी कमाई को कैसे महत्व मिल सकता है. महिलाओं को स़िर्फ अपने शौक के लिए नहीं, बल्कि परिवार का आर्थिक स्तर मज़बूत करने के लिए कमाना चाहिए, तभी उनकी कमाई को महत्व दिया जाएगा.

पुरुषों को सोच बदलनी चाहिए
आज भी युवाओं को पत्नी वर्किंग तो चाहिए, लेकिन अपनी शर्तों पर, यानी पत्नी की सैलरी और ओहदा उनसे ऊंचा न हो, यदि ऐसा हो जाए तो उनके अहम् को ठेस पहुंच जाती है. पत्नी यदि ज़्यादा कमाती है, तो पति उसकी हर बात को उसका अहंकार समझने लगता है, पत्नी का ज़्यादा कमाना वो सहन नहीं कर पाता. ऐसे में पत्नी को बात-बात पर ताने देना, बिना बात के झगड़ा बढ़ाकर उसे दोषी ठहराना जैसी बातें पति की फितरत बन जाती है और धीरे-धीरे उनके रिश्ते में खटास बढ़ने लगती है. ऐसे में अपनी क़ामयाबी ही महिलाओं को कुंठित कर देती है.

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औरत की कमाई पर सवाल
आज भी कई घरों में औरत की कमाई को सही नहीं माना जाता, उन्हें लगता है कि औरतों को तभी कमाना चाहिए जब घर में पैसे की कमी हो. यदि परिवार संपन्न है, तो महिला चाहे कितनी ही पढ़ी-लिखी और क़ाबिल क्यों न हो, उसे काम नहीं करना चाहिए. सपना कहती हैं, मैं शादी से पहले जॉब करती थी, लेकिन शादी के बाद मेरे ससुराल वालों ने ये कहकर मुझे जॉब करने से मना कर दिया कि हमारे घर की बहू-बेटियां नौकरी नहीं करती. उनके कहने पर मैंने जॉब छोड़ दी और अपना पूरा ध्यान घर-गृहस्थी पर लगा दिया. फिर मेरे बेटे के जन्म के कुछ समय बाद मेरे पति की नौकरी छूट गई. काफी समय तक जब उन्हें नौकरी नहीं मिली और घर में पैसों की किल्लत होने लगी, तो मेरे ससुराल वालों ने मुझे फिर से नौकरी करने को कहा. उस व़क्त मैं बच्चे को छोड़कर जॉब नहीं करना चाहती थी, लेकिन घर वालों ने मुझ पर इतना दबाव डाला कि मजबूरन मुझे नौकरी करनी पड़ी. कुछ समय बाद मेरे पति को भी जॉब मिल गई. अब हम दोनों जॉब गर रहे थे, घर में किसी को कोई शिकायत नहीं थी. समस्या तब शुरू हुई जब मेरी सैलरी पति से ज़्यादा हो गई. परिवार वालों ने एक बार फिर मुझ पर जॉब छोड़ने का दबाव डालना शुरू कर दिया, लेकिन इस बार मैंने उनकी बात नहीं मानी और अपना जॉब जारी रखा. जब मैं अपने दूध पीते बच्चे के साथ घर में रहना चाहती थी, तब परिवार में किसी ने मेरी नहीं सुनी और आज जब मैं अपने जॉब में अच्छी तरह सेटल हो गई हूं तो मुझ पर स़िर्फ इसलिए जॉब छोड़ने का दबाव डाला जा रहा है, क्योंकि मैं अपने पति से ज़्यादा कमाने लगी हूं. सिचुएशन देखकर इन लोगों के नियम-कायदे बदल जाते हैं, ऐसे में कब तक मैं अपने करियर के साथ खिलवाड़ करती रहूं. न मैंने कभी परिवार को अपनी कमाई का रौब दिखाया, न ही कभी अपनी ज़िम्मेदारियों से पीछे हटी, फिर बार-बार मुझे ही त्याग करने को क्यों कहा जाता है?

ये तस्वीर बदलनी चाहिए
कुछ समय पहले करीना कपूर और अर्जुन कपूर अभिनित एक फिल्म की और का काफ़ी चर्चा में रही. इसकी वजह थी फिल्म की कहानी, जिसमें पति-पत्नी दोनों अपनी मर्ज़ी से अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियां निर्धारित करते हैं. पत्नी घर की आर्थिक ज़िम्मेदारी संभालती है यानी नौकरी करती है और पति घर संभालता है. हमारे देश में ऐसी कहानी चौंका देने वाली हो सकती है, लेकिन यूरोपीय देशों में हाउस हसबैंड का कॉन्सेप्ट बहुत पहले से मान्य है. वहां पर कई पुरुष घर पर रहकर परिवार व बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी उठाते हैं और महिलाएं आर्थिक मोर्चा संभालती हैं, लेकिन हमारे देश में इस तरह के कॉन्सेप्ट को समाज पचा नहीं पाता.

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भारतीय महिलाएं हैं अवसाद की शिकार
शिकागों की एक शोधकर्ता ने 10 साल तक भारतीय महिलाओं पर शोध के बाद ये नतीजा निकाला कि लगभग 72 फीसदी भारतीय महिलाएं गहरे अवसाद की शिकार हो रही हैं. शोधकर्ता के मुुताबिक, महिलाओं के तनाव का सबसे बड़ा कारण ख़ुद उनका परिवार है.

– कमला बडोनी

विवाह जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होता है. अगर आप चाहते हैं कि आपका अपने पार्टनर के साथ परफेक्ट मैच बने और आप दोनों के रिश्ते में कोई तक़रार न आए, तो अन्य चीज़ों के साथ आपको अपने भावी पार्टनर की राशि भी ज़रूर देखनी चाहिए. एस्ट्रो कंसल्टेंट डॉ. माधवी सेठ बता रही हैं कि आपकी राशि की बेहतर जोड़ी किस राशि के साथ बनेगी?

Life Partner Based On Your Zodiac Sign
मेष राशि ( Aries)

मेष अग्नि तत्व की राशि है. इस राशि के लोग स्वतंत्र मिज़ाज के होते हैं और इन्हें अपनी आज़ादी बहुत प्यारी होती है. इनको अपना पर्सनल स्पेस चाहिए होता है. ये ख़ुद को बहुत इंपॉर्टेंस देते हैं और अपने पार्टनर से भी यही उम्मीद रखते हैं. मेष राशिवालों को किसी के साथ तुलना बिल्कुल भी पसंद नहीं आती. इस राशि के लोग यदि जीवनसाथी के रूप में सिंह और धनु राशिवालों को चुनते हैं, तो इनका वैवाहिक जीवन सफल रहता है. इनके लिए वृश्‍चिक राशि भी अनुकूल है.

वृषभ राशि (Taurus)

वृषभ पृथ्वी तत्व की राशि है. इस राशि के जातक बहुत इमोशनल होने के साथ-साथ मेहनती भी होते हैं. इस राशिवालों को ऐसा पार्टनर चाहिए होता है, जो इन्हें हमेशा प्रेम करता रहे. इन्हें केयरिंग व लविंग पार्टनर पसंद आता है. वृषभ राशिवालों का वैवाहिक जीवन आमतौर पर सुखी होता है. इस राशिवालों का जल राशि के साथ बेहतर तालमेल बैठता है, क्योंकि पृथ्वी के ऊपर जल बहता है, इसलिए इस राशिवालों के लिए वृश्‍चिक, मीन, कर्क और कन्या राशि अनुकूल है.

मिथुन  (Gemini)

मिथुन वायु तत्व की राशि है.  मिथुन राशिवाले बेहद बुद्धिमान, बातूनी, कलात्मक व ज्ञानी होते हैं. इन्हें अपने पार्टनर में भी ऐसे ही गुण चाहिए होते हैं. यही वजह है कि इनको कलात्मक, ज्ञानी और बुद्धिमान पार्टनर की तलाश होती है. साथ ही इन्हें लचीले स्वभाववाला पार्टनर अट्रैक्ट करता है. इनकी तुला के साथ बेहतरीन जोड़ी बनती है, पर सिंह राशिवाले भी इनके लिए अनुकूल हैं.

कर्क (Cancer)

कर्क जल तत्व की राशि है. कर्क राशिवाले बेहद भावुक व ईमानदार होते हैं. कर्क राशिवाले बहुत मूडी होते हैं. ये कब रूठ जाते हैं, इसका अंदाज़ा लगाना बेहद मुश्किल होता है. इस राशि के लोग अपने पार्टनर पर भावनात्मक रूप से काफ़ी निर्भर होते हैं, जिसके कारण ये कभी-कभार उन पर बोझ बन जाते हैं. कर्क राशिवाले दूसरों से बहुत ज़्यादा आशा रखते हैं. यही वजह है कि इन्हें संतुष्टि कभी नहीं मिलती और इन्हें प्यार हमेशा कम लगता है,  इसलिए इनका शादीशुदा जीवन उतना अच्छा नहीं होता. इनकी उन्नति के द्वार शादी के बाद ही खुलते हैं. कर्क राशिवालों के लिए शादी सब कुछ नहीं होती, ये विवाह को स़िर्फ एक पड़ाव मानते हैं. इनके लिए ज़िंदगी यहां से शुरू होती है, क्योंकि इनका भाग्य भी शादी के बाद ही खुलता है. चूंकि कर्क जल राशि है, इसलिए इनकी दूसरी जल राशि वृश्‍चिक के साथ अच्छी जमती है. साथ ही पृथ्वी राशि, जैसे-कन्या और वृषभ के साथ भी इनकी जोड़ी सफल रहती है.

सिंह (Leo)

सिंह अग्नि तत्व की राशि है. इस राशिवालों को ऐसे पार्टनर की तलाश होती है, जो इनको अटेंशन दें और इनको लाड़ करें. इनको केयरिंग पार्टनर चाहिए होता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिंह राशि सूर्य की राशि है. यह एकमात्र राशि है, जो सूर्य की राशि है, इसलिए सिंह राशिवालों को इनकी पसंद व स्टैंडर्ड के हिसाब से पार्टनर चाहिए होता है.  इन्हें लगता है कि इनके स्टैंडर्ड के हिसाब से ही इनके साथ बर्ताव किया जाना चाहिए. कोई भी उनके साथ कैजुअल व्यवहार नहीं कर सकता.  सिंह राशि की मेष और धनु राशि के साथ बहुत बनती है. तुला भी इनके लिए अनुकूल है.

कन्या (Virgo)

कन्या पृथ्वी तत्व की राशि है. इस राशिवालों के लिए मकर, वृषभ जैसे पृथ्वी तत्व की राशिवाले पार्टनर चुनने चाहिए, लेकिन इनके लिए जलराशि कर्क व वृश्‍चिक भी अनुकूल है. इस राशिवाले परफेक्शनिस्ट होते हैं. इन्हें मैच्योर, सेंसिबल और सेंसिटिव पार्टनर चाहिए होता है. ये परिवारप्रेमी होते हैं. ये अपने परिवार का बहुत ध्यान रखते हैं. ये परिवार को बहुत ऊंचा मानते हैं, लेकिन इन्हें इनके हिसाब का ही पार्टनर चाहिए होता है.

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तुला (Libra)

तुला वायु तत्व की राशि है. वैसे तो वायु राशिवाले कभी-कभी बहुत अनियंत्रित हो जाते हैं, लेकिन तुला बहुत संतुलित राशि है.  ये बैलेंस तरी़के से काम भी करते हैं और साथ ही  पार्टी का भी मज़ा लेते हैं. कहने का अर्थ यह है कि ये स़िर्फ काम या स़िर्फ पार्टी करने में विश्‍वास नहीं रखते, बल्कि काम और पार्टी दोनों में संतुलन बनाकर चलते हैं. इस राशिवाले प्रेम को पवित्र बंधन मानते हैं. चूंकि यह शुक्र की राशि है, इसलिए इन्हें सुंदर चीज़ें पसंद आती हैं. ये ख़ुद भी बहुत अट्रैक्टिव होते हैं और इन्हें अट्रैक्टिव चीज़ें ही अच्छी लगती हैं. इस राशिवालों की जोड़ी सिंह, कुंभ व तुला से अच्छी जमती है.

वृश्‍चिक (Scorpio)

वृश्‍चिक जल तत्व की राशि है. इस राशि के लोग बहुत सेंशुअल व इंटेलिजेंट होते हैं. इन्हें अपने से बड़ी उम्रवाले लोग अच्छे लगते हैं. कर्क राशि से इनकी बहुत बनती है. अगर वृश्‍चिक और कर्क राशिवाले की शादी हो जाए तो वो पावरफुल कपल हो सकता है. चूंकि वृश्‍चिक व कर्क दोनों ही जल राशि हैं. ये दोनों राशियां प्यार जताने के लिए किसी भी हद तक जाती हैं, इसलिए अगर इनका मिलन हो जाए, तो इनका वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चलता है. इस राशि की मकर और वृश्‍चिक राशि से भी अच्छी बनती है.

धनु  (Sagittarius)

धनु अग्नि तत्व की राशि है.  इस राशि के लोग पार्टनर में दोस्त व गाइड की तलाश करते हैं. इन्हें स्वाभाविक व रियल पार्टनर पसंद होते हैं. इन्हें बनावटी पार्टनर अच्छे नहीं लगते. इन लोगों को ख़ुशमिज़ाज साथी की चाह होती है.  इनकी कर्क राशिवालों से नहीं बनती, क्योंकि कर्क राशिवाले बहुत भावुक होते हैं, इसी तरह कन्या राशिवाले इन्हें बहुत बातूनी लग सकते हैं. इस राशि के लिए कुंभ, सिंह और मेष उपयुक्त राशियां हैं.

मकर  (Capricorn)

मकर पृथ्वी तत्व की राशि है. इस राशि के जातक सबसे ज़िद्दी होते हैं. इससे ज़िद्दी कोई राशि नहीं होती. इन्हें करियर माइंडेड, सफल और साहसी पार्टनर चाहिए होता है. ख़ुद थोड़े स्लो होते हैं, लेकिन उन्हें महत्वाकांक्षी पार्टनर ही पसंद आते हैं. वृषभ, कन्या व मीन के साथ इनका वैवाहिक जीवन बहुत सफल रहता है.

कुंभ  (Aquarius)

कुंभ वायु तत्व की राशि है, इनकी अग्नि तत्व की राशि से बनती है, इसलिए इनके लिए मेष और तुला राशि उपयुक्त है. इनकी धनु राशिवालों से भी कभी-कभी जम जाती है. ये बहुत सिंपल किस्म के, लेकिन इंडिपेंडेंट होते हैं. इन्हें वाइल्ड स्पिरिटेडेड पार्टनर पसंद आते हैं. इन्हें जजमेंटल लोग अच्छे नहीं लगते यानी बिना सोचे-समझे राय बनानेवाले लोग इन्हें पसंद नहीं आते.

मीन (Pisces)

मीन जल राशि है. इस राशिवालों को कर्क व वृश्‍चिक राशिवाले जीवनसाथी का चुनाव करना चाहिए. वृषभ से भी इनकी बनती है. ये बड़े शांत स्वभाव के व व्यवस्थित होते हैं. इस राशिवाले बहुत इमोशनल होते हैं. लाइफ पार्टनर के रूप में इन्हें थोड़ा संभालना पड़ता है. ये बहुत डिप्लोमैटिक होते हैं. इन्हें दूसरों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की आदत होती है यानी अपनी बात दूसरे से निकलवाने में माहिर होते हैं.

नोटः यह सामान्य विश्‍लेषण है. विशेषज्ञ से जीवनसाथी का चुनाव अपनी कुंडली का विश्‍लेषण करवा कर ही पार्टनर का चुनाव करना चाहिए, क्योंकि कुंडली में ग्रहस्थिति भी देखनी होती है.

– शिल्पी शर्मा

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42 वर्षीय टीवी क्वीन एकता कपूर (Ekta Kapoor) को आख़िरकार उनका हमसफर मिल ही गया है, इसका अंदाज़ा एकता के एक इंस्टाग्राम पोस्ट से लगाया जा सकता है. दरअसल, हाल ही में एकता ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक कपल की फोटो पोस्ट करते हुए कैप्शन लिखा है कि ‘कुछ चीज़े देर से भले आती हों, लेकिन उनका इंतज़ार करना अक्सर फ़ायदेमंद होता है’. एकता के इस पोस्ट से तो ऐसा ही लगता है कि ज़िंदगी भर साथ निभाने के लिए उन्हें जिस शख्स का इंतज़ार था वो उन्हें मिल गया है. हालांकि एकता ने अभी इस बारे में ऑफिशियली कुछ भी नहीं कहा है.

बता दें कि एक इंटरव्यू के दौरान एकता ने यह कहा था कि उनके घरवाले चाहते हैं कि वो शादी कर लें, लेकिन वो ख़ुद शादी के लिए तैयार नहीं हैं. इसके साथ ही एकता ने बताया था कि उनके ज़्यादातर दोस्तों ने शादी की थी, लेकिन तलाक लेकर वो अब सिंगल हो चुके हैं. एकता की मानें तो उन्हें बच्चा तो चाहिए, लेकिन शादी को लेकर फिलहाल वो कुछ नहीं कह सकतीं.

एक दफा एकता के पिता व एक्टर जितेंद्र ने भी कहा था कि उन्हें समझ नहीं आता कि आख़िर एकता शादी क्यों नहीं करना चाहती हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह उम्मीद भी जताई थी कि उनकी बेटी जल्द ही शादी करेंगी. बहरहाल, अब एकता के इस पोस्ट से तो यही लगता है कि उन्हें उनका मिस्टर राइट मिल गया है. बस अब इंतज़ार है एकता की ओर से इस ख़बर के पुख्ता होने की.

 

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विवाह शब्द सुनते ही दिलोदिमाग़ में कई तरह के सपने और समस्याएं उभरने लगती हैं, क्योंकि सबके अपनेअपने अनुभव हैं. फिर भी अधिकतर लोगों का यह निष्कर्ष है कि जोड़ियां तो ऊपर से बनकर आती हैं. ज्योतिष विज्ञान का भी यही शोध है कि विवाह सुनिश्‍चित व्यक्ति से ही होता हैपर इस सुनिश्‍चित को और अधिक प्रबल और सफल बनाने के लिए योग्य उम्मीदवार (Perfect Life Partner According To Your Zodiac Sign) की खोज करने के लिए ज्योतिष विज्ञान राशियों के आधार पर हमारा मार्गदर्शन इस तरह करता है कि अमुक राशिवाले को किस राशि से विवाह करना चाहिए, ताकि वैवाहिक जीवन आनंदपूर्वक व्यतीत हो सके. यदि आप भी यह जानना चाहते हैं कि राशियों का परस्पर संयोग क्या लाभ देेता है, तो आइए इसके बारे में संक्षेप में जानें.

Perfect Life Partner, According Zodiac Sign

मेष

गुण: मेष राशिवाले स्त्री/पुरुषों का स्वभाव चंचल और सोच सकारात्मक होती है. ये आकर्षक व प्रेरणादायक होते हैं और इनमें नेतृत्व के गुण होते हैं.

जीवनसाथी के रूप में मेष पुरुष और मीन स्त्री की जोड़ी सबसे अधिक सफल मानी जा सकती है.

– मेष पुरुष की जोड़ी वृष व मिथुन राशि की स्त्री के साथ भी अच्छी रहती है.

मेष राशि के पुरुष अगर जीवनसाथी के रूप में तुला, मकर या सिंह राशियों की स्त्रियों का चुनाव करते हैं, तो ऐसी जोड़ियों का वैवाहिक जीवन सामान्य रहता है.

इनके अतिरिक्त अन्य राशियों की स्त्रियों के साथ मेष पुरुषों का शादीशुदा जीवन ज़्यादा कामयाब नहीं होगा.

वृष

गुण: वृष राशि के स्त्री/पुरुष सुखसुविधाओं की चाह रखनेवाले, सौंदर्य व कला प्रेमी तथा रहस्यात्मक प्रकृति के होते हैं.

लाइफपार्टनर के रूप में मेष, मिथुन और मीन राशिवाली स्त्रियां वृष पुरुष के लिए बेहतर साबित होती हैं.

जबकि कर्क, सिंह, तुला राशि की स्त्रियों के साथ इनकी जोड़ी सामान्य कही जा सकती है.

जीवनसाथी के रूप में अन्य राशि की स्त्रियां वृष पुरुष के लिए उतनी बेहतर साबित नहीं हो पातीं, क्योंकि वैचारिक मतभेद के कारण इनके बीच वादविवाद होते रहते हैं.

मिथुन

गुण: इस राशि के लोग सकारात्मक सोच के, बातूनी, दोहरे स्वभाववाले और विचारवान होते हैं.

लाइफपार्टनर के रूप में मेष, वृष और तुला राशि की स्त्रियां बेहतर साबित होती हैं.

मिथुन राशि के पुरुष के साथ मिथुन, धनु और मीन स्त्री की जोड़ी का वैवाहिक जीवन आमतौर पर सामान्य रहता है.

मिथुन राशि के पुरुष को लाइफपार्टनर के रूप में कर्क, सिंह, कन्या, वृश्‍चिक, मकर, कुंभ राशि की स्त्रियों का चुनाव नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनके साथ शांत और सुखी वैवाहिक जीवन बिताना उनके लिए काफ़ी मुश्किल होगा.

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कर्क

गुण: इस राशि के लोग संवेदनशील, भावुक, महत्वाकांक्षी और नकारात्मक सोचवाले होते हैं.

लाइफपार्टनर के लिए मेष, वृष और वृश्‍चिक स्त्रियां इन्हें अच्छा सहयोग देती हैं. इस जोड़ी में अच्छी मित्रता रहती है.

कर्क राशि के पुरुष और सिंह, कन्या व तुला राशि की स्त्री की जोड़ी में प्रेम और तक़रार दोनों ही होते हैं. फिर भी इनकी शादी को सफल माना जा सकता है.

कर्क राशि के पुरुष और कर्क, मिथुन, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि की स्त्रियों की जोड़ी सफल नहीं हो सकती.

सिंह

गुण: सिंह राशिवाले स्त्री/पुरुष सकारात्मक सोच के, महत्वाकांक्षी, चंचल प्रवृत्ति और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं. इनकी नज़र में प्यार एक ज़रूरत है और प्रेमिका इनकी ज़िंदगी का अहम् हिस्सा.

इनके लिए मिथुन, सिंह, तुला राशि की स्त्रियां अच्छी लाइफपार्टनर सिद्ध हो सकती हैं.

जबकि वृष, वृश्‍चिक और कुंभ राशि की स्त्रियों के साथ सामान्य वैवाहिक जीवन बिताया जा सकता है.

अन्य राशि की स्त्रियों के साथ इनकी जोड़ी को सफल नहीं कहा जा सकता.

Perfect Life Partner, According Zodiac Sign

कन्या

गुण: इस राशि के लोग सुखसुविधाओं को पसंद करते हैं. दोहरे स्वभाव वाले, गोपनीय व रहस्यात्मक चरित्र वाले होते हैं. इनके लिए प्रेम एक पूर्णता है, जिसके बिना जीवन ही अधूरा है.

 कन्या राशिवालों को मिथुन, कर्क, कन्या, वृश्‍चिक, धनु और मीन राशिवाली स्त्रियों का चुनाव जीवनसाथी के रूप में करना चाहिए. इन राशि की स्त्रियों के साथ कन्या राशि के पुरुष का तालमेल अच्छा रहता है और ऐसी जोड़ी का वैवाहिक जीवन सुखमय होता है.

अन्य राशि की स्त्रियों को लाइफपार्टनर बनाने पर इनका वैवाहिक जीवन कष्टमय हो सकता है.

तुला

गुण: तुला राशिवाले व्यक्ति जीवन में न्याय और आदर्श को सबसे ज़्यादा महत्व देते हैं. ये विचारप्रधान, भौतिकवादी, महत्वाकांक्षी, आकर्षक और सौंदर्यप्रेमी होते हैं.

लाइफपार्टनर के रूप में इनकी जोड़ी मेष, सिंह और धनु राशि की स्त्रियों के साथ बहुत सफल कही जा सकती है तथा कर्क, तुला व मकर स्त्री के साथ इनकी जोड़ी सामान्य रहती है.

अन्य राशि की स्त्रियों के साथ शक और वैचारिक मतभेद की वजह से वादविवाद होते रहते हैं और कभीकभी तो रिश्ते टूटने की कगार तक पहुंच जाते हैं.

वृश्‍चिक

गुण: यह राशि जल तत्व प्रधान है. ये संवेदनशील, भावुक, प्रतिक्रियावादी, ईर्ष्यालु व झगड़ालू प्रकृति के होते हैं. इनमें बदला लेने की भावना भी होती है.

वृश्‍चिक राशिवालों की नज़र में प्रेम भावुकता है, जिसका अंत समर्पण से होता है.

वृश्‍चिक पुरुष का वैवाहिक जीवन वृष, कन्या, कुंभ राशि की स्त्रियों के साथ ख़ुशहाल रहता है, जबकि सिंह, वृश्‍चिक तथा मकर स्त्री के साथ छोटेमोटे वादविवादों को छोड़ दें तो इनका जीवन सामान्य ढंग से चलता है.

परंतु बाकी राशि की स्त्रियों को लाइफपार्टनर के रूप में चुनने पर जीवन में कुछ न कुछ विवाद होता ही रहता है.

धनु

गुण: धनु राशि के लोग हमेशा काम करने को तत्पर रहते हैं. ये फुर्तीले, चुस्त, कार्य कुशल और लगातार अपने लक्ष्य की ओर चलनेवाले होते हैं. इनकी नज़र में प्रेम ईमानदारीयुक्त स्वामिभक्ति है.

मिथुन, तुला, मीन राशि की स्त्रियां धनु पुरुष के लिए परफेक्ट लाइफपार्टनर साबित हो सकती हैं.

कन्या व कुंभ राशि की स्त्रियों और धनु पुरुष की जोड़ी को सामान्य कहा जा सकता है.

इनके अतिरिक्त अन्य राशियों की स्त्रियों के साथ इनके लिए जीवन बिताना मुश्किल होता है, क्योंकि ऐसी जोड़ियों के बीच स्वभाव और व्यवहार में ज़मीनआसमान का अंतर होता है.

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मकर

गुण: मकर राशिवाले व्यक्ति रहस्यमय होते हैं. गोपनीयता इन्हें पसंद होती है. ये सहानुभूति चाहते भी हैं और देते भी हैं. आत्मविश्‍वास इनमें ग़ज़ब का होता है. इनकी नज़र में प्रेम में स्वार्थ नहीं होना चाहिए और समझदारी से काम लेना चाहिए.

इनका जीवन मेष, तुला व मकर राशिवाली स्त्रियों के साथ सुखी और शांतिपूर्ण ढंग से बीत सकता है.

जबकि कर्क, वृश्‍चिक व मीन राशि की स्त्री और मकर राशि के पुरुष की जोड़ी में कभीकभार नोंकझोंक होती है.

मकर पुरुष और बाकी अन्य राशि की स्त्रियों की जोड़ी में वादविवाद ज़्यादा होते हैं, जिससे वैवाहिक जीवन उतना सुखमय नहीं होता.

कुंभ

गुण: कुंभ राशि के लोग स्नेही स्वभाव के होते हैं. वे काफ़ी शालीन और मधुर होते हैं. ऐसे व्यक्ति दार्शनिक क़िस्म के होते हैं. ये सकारात्मक सोचवाले, महत्वाकांक्षी, गंभीर और संवेदनशील होते हैं. इनके अनुसार प्रेम धैर्यपूर्वक होता है.

– वृष, सिंह, धनु राशि की स्त्री कुंभ राशि के पुरुष की लाइफपार्टनर बन उसके जीवन को ख़ुशियों से भर देती है.

 हालांकि मेष, वृश्‍चिक व कुंभ राशि की स्त्री भी जीवनसाथी के रूप में योग्य साबित होती है, पर कभीकभी इस जोड़ी के बीच तनाव उत्पन्न हो सकता है.

– जहां तक अन्य राशि की स्त्रियों को जीवनसाथी के रूप में चुनने का सवाल है, तो उसे सफल जोड़ी नहीं कहा जा सकता.

मीन

गुण: मीन राशिवाले व्यक्ति आकर्षक और अपने कार्य में निपुण होते हैं. ये दोहरे स्वभाव और गोपनीयता रखनेवाले होते हैं. इनकी नज़र में जीवन में प्रेम ही सब कुछ है.

– सफल और प्यार भरी ज़िंदगी के लिए इन्हें मिथुन, धनु या मीन राशि की स्त्री को अपना जीवनसाथी बनाना चाहिए.

– ये वृष, कन्या या मकर राशि की स्त्री को भी जीवनसाथी बना सकते हैं. लेकिन इनके साथ कभी ख़ुशी, कभी गम के साथ ज़िंदगी बितानी पड़ सकती है.

– अन्य राशि की स्त्रियों को जीवनसाथी बनाने से बचने में ही भलाई है.

डॉ. प्रेम गुप्ता

(वास्तु व हस्तरेखा विशेषज्ञ)

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ज़िंदगी इत्तेफ़ाक नहीं है… हमारे फैसले, हमारी राय, हमारी सोच और हमारे निर्णय हमारी ज़िंदगी को दिशा देते हैं. हो सकता है कुछ चीज़ें हमारे मन के हिसाब से न हों, लेकिन सवाल यह है कि हमने कितना प्रयास किया? अक्सर शादी के निर्णय में हम और ख़ासतौर से लड़कियां अपनी सारी सोच और तमाम ख़्वाहिशों को ताक पर रख देती हैं, जबकि यही वो व़क्त होता है, जब हमें सबसे ज़्यादा सोच-समझकर फैसला लेने की ज़रूरत होती है, क्योंकि एक ज़िम्मेदार व समझदार पति आपकी ज़िंदगी को सही दिशा दे सकता है, जबकि एक ग़लत निर्णय आपको उम्रभर का पछतावा भी दे सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या और किस तरह से सिलेक्ट करें आप अपना लाइफ पार्टनर, ताकि आपको परिवार व शादी के बाद अपने अच्छे-ख़ासे सफल करियर को यूं ही अलविदा न कहना पड़े.

क्या करें?

  • सबसे पहले आपको ख़ुद यह सोचना होगा कि आप क्या करना चाहती हैं? श्र अपनी प्राथमिकताएं तय करें.
  • डबल माइंड में न रहें.श्र आख़िर यह आपकी ज़िंदगी है, तो आपको ही यह निर्णय लेना होगा कि आपको क्या करना है.
  • अक्सर लड़कियां या तो ख़ुद यह सोच लेती हैं या फिर उनके परिवार की तरफ़ से उनको यह समझा दिया जाता है कि शादी के बाद देखा जाएगा, फ़िलहाल तो शादी हो जाए, यह ज़रूरी है.
  • ऐसे में लड़कियों पर भी दबाव होता है कि वो अपने होनेवाले पति से साफ़-साफ़ बात नहीं कर पातीं, क्योंकि उन्हें ससुरालपक्ष की नाराज़गी का डर रहता है.
  • अगर आप करियर ओरिएंटेड हैं और शादी के बाद भी करियर छोड़ना नहीं चाहतीं, तो सबसे बेहतर है कि अपने होनेवाले पति से इस बारे में खुलकर बात करें.
  • इससे आपको उनकी सोच व राय का भी अंदाज़ा हो जाएगा.श्र आपके लिए निर्णय लेना भी आसान हो जाएगा कि अब आपको किस चीज़ को प्राथमिकता देनी है.
  • आपकी राय भी महत्वपूर्ण है, आपका करियर भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना आपके पति का, इसलिए आपको अपनी बात बिना किसी संकोच के कहने की हिम्मत जुटानी ही होगी.

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क्या-क्या पूछें होनेवाले पार्टनर से?

  • आपके करियर को कितना महत्व देते हैं?
  • शादी के बाद आपके करियर को बढ़ावा देने के लिए उनकी तरफ़ से क्या मदद होगी?
  • क्या घरेलू ज़िम्मेदारियों में आपका हाथ बंटाएंगे?श्र घर के कामों में आपकी कितनी मदद करेंगे?
  • महिलाओं के प्रति और ख़ासतौर से कामकाजी महिलाओं के प्रति उनकी क्या राय है?
  • फैमिली बढ़ने के बाद भी क्या वो आपके करियर को उतना ही महत्वपूर्ण समझेंगे?
  • परिवार के लोग यदि नौकरी छोड़ने के लिए कहेंगे, तो वो आपको किस तरह से और किस हद तक सपोर्ट करेंगे?
  • बच्चे की ज़िम्मेदारी में किस तरह से आपको सपोर्ट करेंगे… आदि… इत्यादि… ये तमाम सवाल आपको बेझिझक पूछने होंगे, ताकि आगे चलकर आपको अपने करियर को लेकर किसी तरह का समझौता न करना पड़े.
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कितना कॉम्प्रोमाइज़ करें, कितना नहीं?

  • बातचीत के बाद आपको स्वयं यह अंदाज़ा हो जाएगा कि आपका होनेवाला पार्टनर आपकी बातों से कितना सहमत है.
  • आपको यह भी पता लग जाएगा कि शादी के बाद आपकी क्या चुनौतियां होंगी.
  • आपको कितना कॉम्प्रोमाइज़ करना पड़ेगा और आपकी कितनी बातों को समर्थन दिया जाएगा.
  • इसी के अनुसार आप अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकती हैं. आप प्लानिंग कर सकती हैं कि आपको कितना बदलना है और किस तरह से बदलना है, ताकि  आपको करियर से भी समझौता न करना पड़े और परिवार को भी व़क्त दे सकें.

क्या कहते हैं आंकड़े?

  • सर्वे बताते हैं कि 48% महिलाएं अपने रियर को बीच में ही छोड़ देती हैं, ताकि वो अपने परिवार को समय दे सकें.
  • यदि ये महिलाएं काम करती रहें, तो भारत का जीडीपी 2% तक ऊपर जा सकता है.
  • जबकि पूरे एशिया की बात करें, तो 21% महिलाएं अपने करियर को बीच में छोड़ देती हैं.
  • इसी तरह से 43% उच्च शिक्षित महिलाएं बच्चों की परवरिश की ख़ातिर कुछ समय के लिए अपना करियर छोड़ देती हैं.
  • यही नहीं, विदेशों में भी यह आंकड़ा काफ़ी ज़्यादा है.

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कारण क्या है?

  • दरअसल, महिलाएं परिवार के प्रति अधिक ज़िम्मेदारी महसूस करती हैं.
  • न स़िर्फ ज़िम्मेदारी, विशेषज्ञ बताते हैं कि उनमें अपराधबोध की भावना भी पुरुषों के मुक़ाबले अधिक होती है.
  • उन्हें लगता है कि बच्चों और परिवार को उनकी अधिक ज़रूरत है.
  • परिवार को समय न दे पाने की चिंता व गिल्ट उन्हें अधिक होता है.
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बदलाव ही रास्ता है…

  • बदलाव हो रहा है. लड़कियों की सोच भी बदल रही है और वो भी अब अपने करियर को गंभीरता से लेने लगी हैं.
  • लेकिन ज़रूरत है समाज व लड़कियों के माइंडसेट को बदलने की, जहां उन्हें यह साफ़तौर पर निर्णय लेना होगा कि उन्हें परिवार और करियर दोनों ही चाहिए.
  • इस सकारात्मक सोच के साथ यदि वो आगे बढ़ेंगी, तो यक़ीनन दोनों के बीच सामंजस्य बेहतर तरी़के से बैठा पाएंगी.
  • अपने हक़ के लिए और सही बात के लिए उन्हें बोलना होगा और बोलने का सबसे सही व़क्त शादी से पहले ही है.
  • शादी से पहले ही उन्हें अपनी राय साफ़ करनी होगी और उन्हें ख़ुद भी यह तय करना होगा कि वो क्या चाहती हैं.
  • आख़िर उन्हें भी अपनी ज़िंदगी व अपने करियर से जुड़े फैसले लेने का पूरा-पूरा हक़ है, तो स़िर्फ त्याग या बलिदान जैसे शब्दों का बोझ वो अकेले ही क्यों ढोएं.
  • बेहतर होगा अपने होनेवाले लाइफ पार्टनर को जांचें, परखें और समझदारी से काम लें, क्योंकि एक समझदार लाइफ पार्टनर के साथ ही बेहतर ज़िंदगी और बेहतर करियर की संभावनाएं मौजूद होंगी.

 

– विजयलक्ष्मी

 

न्यूमरोलॉजी का रूलिंग नंबर 5 ऐडवेंचर का नंबर माना जाता है. जिन लोगों का जन्म 5, 14 और 23 तारीख़ को होता है, उन्हें नंबर 5 रूल करता है, जिसे हम उनका रूलिंग नंबर या बर्थ नंबर कह सकते हैं. इसका सीधा-सा कैल्कुलेशन है- आपकी डेट ऑफ बर्थ यानी जन्म तारीख़ के अंकों को जोड़ लें और उससे जो नंबर आता है, वो आपका रूलिंग नंबर कहलाता है. आज हम बात करेंगे नंबर 5 यानी पांच नंबरवालों की. यहां हम उनके स्वभाव, करियर, लव लाइव और पर्सनैलिटी के बारे में जानने की कोशिश करेंगे.

पर्सनालिटी

नेचुरल डिटेक्टिव्स

नंबर 5 वाले नेचुरल डिटेक्टिव्स होते हैं. ये आज़ादी पसंद लोग होते हैं. इनकी ज़िंदगी काफ़ी ऐडवेंचरस होती है. ये चीज़ों को बड़े आसानी से अपना लेते हैं. सफलता की ऊंचाइयों को छूना इनका शौक़ होता है. ये हर फंक्शन की जान होते हैं.

बदलाव पसंद

ये उत्साहित और सकारात्मक किस्म के लोग होते हैं. इनका ज़िंदगी जीने का सकारात्मक रवैया दूसरों को काफ़ी पसंद आता है और यही वजह है कि ये सभी के चहेते होते हैं. ये बदलाव पसंद होते हैं, इसलिए इन्हें रूटीन लाइफ पसंद नहीं, ज़िंदगी में आगे बढ़ते रहना ही इनका मोटो होता है.

फैशनेबल

ये काफ़ी फैशनेबल होते हैं और इन्हें ब्राइट कलर्स बहुत पसंद होते हैं.

सीखना पसंद है

इन्हें हर व़क्त कुछ न कुछ सीखना पसंद है और जिस चीज़ में इन्हें इंट्रेस्ट होता है, उस विषय के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानना और पढ़ना पसंद करते हैं.

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स्वभाव

फ्रेंडली व फन लविंग होते हैं, जिससे बहुत जल्दी लोगों से घुलमिल जाते हैं. इनके दोस्तों की फेहरिस्त काफ़ी बड़ी होती है. दोस्ती को दिल से निभाते हैं, पर ऐसे लोग बिल्कुल नापसंद हैं, जो लोग इन्हें फॉर ग्रांटेड लेते हैं. आज़ादी पसंद लोग होते हैं और किसी पर निर्भर रहना इन्हें पसंद नहीं.

करियर

नौकरी, बिज़नेस इनकी ज़िंदगी में हमेशा परिवार के बाद आते हैं. करियर इनके लिए ज़िंदगी जीने का महज़ ज़रिया है. हांलाकि अपने काम में काफ़ी ज़िम्मेदार होते हैं और अपनी ज़िम्मेदारियों को बख़ूबी निभाते हैं. नंबर 5 वाले अपनी हॉबी और पैशन को ही करियर के तौर पर चुनते हैं, ताकि उसे एंजॉय कर सकें. सेल्स, ऐडवर्टाइज़िंग, ट्रैवेल और आउटडोर फिल्ड में जुड़ना पसंद करते हैं.

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लव लाइफ

ये काफ़ी रोमांटिक और पैशनेट लवर्स माने जाते हैं. सेक्स में अपने पार्टनर को ऐडवेंचरस मूव्स से सरप्राइज़ करना इन्हें बहुत पसंद है. ये कमिटेड पार्टनर्स होते हैं. अपने पार्टनर की भावनाओं का बख़ूबी ख़्याल रखते हैं.

किस नंबरवाले होंगे आपके बेस्ट लाइफ पार्टनर- 1, 3, 5, 6, 7.
लकी डे-  बुधवार और शुक्रवार.
लकी नंबर– 5
लकी कलर- लाइट ग्रे, व्हाइट, ऑरेंज, लाइट ग्रीन.
लकी स्टोन- एमराल्ड और डायमंड.

सेलिब्रिटीज़- आमिर ख़ान, दीपिका पादुकोण, काजोल, आयुष्मान खुराना, राज बब्बर, सनी देओल, तनुजा और हिमेश रेशमिया.

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