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डिप्रेशन के संकेत यदि वक़्त रहते समझ आ जाएं, तो इससे बहुत आसानी से बचा जा सकता है. यदि आपके घर में या आपके आसपास कोई व्यक्ति आपको डिप्रेस्ड दिखाई दे, तो खुद आगे बढ़कर उसकी मदद करें, उसके साथ वक़्त बिताएं, उसकी समस्या को समझने की कोशिश करें, उसे डिप्रेशन से बाहर निकलने में मदद करें. यदि इतना सब करने के बाद भी कोई सकारात्मक परिवर्तन न दिखाई दे, तो एक्सपर्ट की मदद लें. डिप्रेशन एक ऐसी नकारात्मक भावना है, जो व्यक्ति के जीवन से सारी खुशियां छीन लेती है. ऐसे व्यक्ति को जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं लगता, कई बार तो उसकी जीने की इच्छा भी ख़त्म हो जाती है. ट्रांसफॉर्मेशन कोच हित्ती रंगनानी बता रही हैं डिप्रेशन को खुद से दूर करने के आसान और असरदार उपाय.

Depression

क्या हैं डिप्रेशन के कारण?
यदि किसी व्यक्ति के परिवार में अचानक किसी की मृत्यु हो जाए, किसी को बिज़नेस में बहुत बड़ा लॉस हो जाए, किसी की शादी टूट जाए… ऐसी कोई भी बात या घटना, जिसे आप चाहकर भी भूल नहीं पाते या जिसे सहन करना आपके लिए मुश्किल हो जाए, छह महीने बाद भी आप उस चीज़ को भूल न पाएं और आपका किसी चीज़ में मन न लगे, तो समझ जाइए कि ये डिप्रेशन है.

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क्या हैं डिप्रेशन के लक्षण?
डिप्रेशन की शुरुआत में चीज़ों में रुचि कम होने लगती है, फिर आप लोगों से कटने लगते हैं, सामाजिक समारोहों में जाने से कतराते हैं, घर से बाहर नहीं निकलना चाहते, आपका किसी काम में मन नहीं लगता, आप बहुत ज़्यादा सोने लगते हैं, आपका खाने का मन नहीं करता. जब ये स्थिति छह महीने बाद भी नहीं बदलती, तो मन में आत्महत्या के ख़्याल आने लगते हैं, जीने की रूचि ख़त्म होने लगती है.

डिप्रेशन को खुद से दूर करने के आसान और असरदार उपाय जानने के लिए देखें लाइफ कोच हित्ती रंगनानी का ये वीडियो:

आसान है डिप्रेशन को हराना
डिप्रेशन से बाहर निकलने के लिए सबसे ज़रूरी है किसी अपने का साथ, जिससे आप अपने मन की हर बात शेयर कर सकें, इसलिए अपने करीबी दोस्त या घर के करीबी सदस्य से अपने मन की बात शेयर करें. साथ ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करें. नियमित एक्सरसाइज़, योग, ध्यान, सही आहार, पूरी नींद आदि से आप डिप्रेशन से बाहर निकल सकते हैं. यदि इतना सब करने के बाद भी कोई सकारात्मक परिवर्तन न दिखाई दे, तो एक्सपर्ट की मदद लें.

कल कभी नहीं आता ये बात सौफीसदी सच है, क्योंकि जो लोग कल के भरोसे बैठे रहते हैं वो ज़िंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाते. यदि आप भी आज का काम कल पर टालते हैं, तो आज ही ये आदत बदल दीजिए.

Tomorrow Never Comes

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में प्रलय होगी बहुरी करेगा कब.
– कबीर दास

आपने कबीरदास जी का ये दोहा तो ज़रूर सुना होगा, लेकिन क्या आप इस पर अमल करते हैं? हम में से ज़्यादातर लोग किसी भी काम या नई शरुआत को हमेशा कल पर टाल देते हैं, मसलन- मैं कल सुबह उठकर पढ़ाई कर लूंगी, मैं कल से एक्सरसाइज़ ज़रूर करूंगी, कल से मैं टाइम पर उठूंगा, कल से मैं कुछ बुरा नहीं बोलूंगा, कल से मैं अपनी बेटी के लिए टाइम ज़रूर निकालूंगी… लेकिन कल के भरोसे ख़ुद से किए ये वादे हम कभी पूरे नहीं कर पाते, क्योंकि जब कल आज में बदल जाता है तो हम फिर उस बात को आने वाले कल पर टाल देते हैं. इस तरह ये सिलसिला कभी महीनों तो कभी सालों तक चलता रहता है.

कभी भी जो काम आप कर सकते हैं उसे कल पर मत टालिए.
– बेंजामिन फ्रैंकलिन

मैं कल से ये काम करूंगी/करूंगा, वाला आपका रवैया आपके आलसी होने का सबूत है. आपने अंग्रेजी की वो कहावत तो सुनी होगी ‘फेलियर ऑलेवज़ मेक्स एक्सक्यूज़ेस’ यानी असफल लोग हमेशा बहाने बनाते हैं. कुछ ऐसा ही हाल आलसी लोगों का भी है, ये हर काम को कल के भरोसे छोड़ देते हैं, क्योंकि इनमें काम करने की इच्छाशक्ति ही नहीं होती. ‘अरे! यार क्या करूं आज तुम्हारा काम नहीं कर पाई, बहुत बिज़ी थी,’ इसके विपरीत यदि आप उस काम को पूरा करने का दृढ़ संकल्प कर लेतीं, तो किसी भी तरह अपने बिज़ी शेड्यूल से समय निकाल ही लेतीं.

कल के भरोसे मत बैठो, मनुष्य का कल कौन जानता है.
– शतपथ ब्राह्मण

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हर घड़ी हर पल जीवन में बदलाव होते रहते हैं ऐसे में कल क्या होगा किसी को नहीं पता, तो फिर आप अनजाने कल के भरोसे क्यों बैठे रहते हैं? आपने अपनी बेटी से वादा किया कि कल से आप उसके साथ ज़्यादा व़क्त बिताएंगी, लेकिन कल आपको अचानक किसी मीटिंग में जाना पड़ा और अपना वादा नहीं निभा पाई, ज़ाहिर है इससे आपकी बेटी का दिल टूट जाएगा. इसलिए कल के भरोसे कोई काम छोड़ने से बेहतर है कि आप उसकी शुरुआत आज से ही करने की कोशिश करें. यदि आप अपने लक्ष्य में क़ामयाब होना चाहते हैं, तो कल का इंतज़ार किए बिना ख़ुद से कहें, ‘मैं ये काम आज, अभी से शुरू कर रहा/रही हूं.’ यक़ीन मानिए, आपका ये दृढ़ संकल्प आपको अपने मकसद में सफलता ज़रूर दिलाएगा.

इंतज़ार करने वाले को उतना ही मिलता है जो कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं.
– अब्दुल कलाम

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कल जा चुका है, कल अभी आया नहीं है, हमारे पास केवल आज है, चलिए शुरुआत करते हैं.
– मदर टेरेसा

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ज़िंदगी रुकती नहीं, बदस्तूर चलती रहती है. हां, ज़िंदगी में कई बार ऐसे वाकये या हादसे हो जाते हैं जो ज़िंदगी की चाल ही बदल देते हैं, या यूं कहें कि आपको बेहद मायूस या हताश कर देते हैं, तोड़कर रख देते हैं, लेकिन ऐसे हालात से हार मानकर जीना छोड़ा नहीं जा सकता. ऐसे हालात में भी आगे बढ़कर ज़िंदगी को संवारना और नए सिरे से ज़िंदगी की शुरुआत करना ही ज़िंदादिली है. काम ज़रा मुश्किल है, मगर नामुमक़िन नहीं.

Life

चलना ही जीवन है
कितनी भी बड़ी आपदा या हादसा क्यों न हो जाए ज़िंदगी नहीं ठहरती. हां, कुछ समय के लिए इसकी रफ़्तार ज़रूरी धीमी पड़ जाती है, लेकिन फिर उसे अपने पुराने ढर्रे पर आना ही पड़ता है. चाहे जापान में आई सुनामी हो या उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा. इतने बड़े विनाश के बाद भी दोबारा ज़िंदगी धीरे-धीरे ही सही पटरी पर आने लगती है. क्योंकि जो हो गया हम उसे तो बदल नहीं सकते, जो अपना चला गया हम उसे वापस तो ला नहीं सकते, लेकिन अपने आने वाले कल को संवारने की कोशिश तो कर ही सकते हैं. हमें अपने और अपने आसपास के बाकी लोगों की ख़ातिर जो हो गया उसे भुलाकर जीवन में आगे बढ़ना ही पड़ता है.

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जब तक है आस
बात चाहे कुदरत के विनाश की हो या ज़िंदगी में किसी अन्य तरह की असफलता की, आगे बढ़ने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है उम्मीद. माना किसी प्रोजेक्ट पर कई हफ्तों तक दिन-रात मेहनत करने के बाद वो डेटा किसी कारणवश आपके कंप्यूटर से उड़ गया. ऐसे में निश्‍चय ही आपके पैरों तले से ज़मीन खिसक जाएगी, लेकिन उस वक़्त अपना मानसिक संतलुन खोकर ख़ुद पर या किसी और पर ग़ुस्सा करने या फिर उदास होकर बैठ जाने से समस्या हल नहीं होगी. यदि आपको ख़ुद को साबित करना है, करियर में आगे बढ़ना हैं, तो दोबारा मेहनत करनी ही पड़ेगी. माना इसमें वक़्त लगेगा, मगर आगे बढ़ने के लिए तो आपको ये करना ही होगा. यक़ीन मानिए, यदि आप सकारात्मक सोच के साथ नई शुरुआत करते हैं, तो देर से ही सही आपको सफलता ज़रूर मिलेगी.

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जो बीत गई सो बात गई
‘टूटे तारों पर कब अंबर शोक मनाता है, जो बीत गई सो बात गई’, हरिवंश राय बच्चन की कविता की इन पंक्तियों का सही अर्थ समझकर यदि आप जीवन में उतार लेंगे, तो मुश्किल से मुश्किल हालात से भी ख़ुद को उबारकर जीवन में आगे बढ़ सकेंगे. ज़िंदगी में बहुत से ऐसे लोग, चीज़ें, बातें और पल होते हैं, जिनके छिन जाने पर आपको बहुत दुख होता है या आपकी पूरी ज़िंदगी ही बदल जाती है. कई बार तो लगता है जैसे जीने का कोई मक़सद ही नहीं बचा, मगर जब तक आप ज़िंदा है आपको अतीत को भुलाकर आगे बढ़ना ही होगा, वरना आप ज़िंदा होकर भी ज़िंदगी जी नहीं पाएंगे.

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इतनी शिद्दत से मैंने तुम्हें पाने की कोशिश की है
कि हर ज़र्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की साजिश की है…

कहते हैं, अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो, तो पूरी क़ायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है…
शाहरुख़ ख़ान की फिल्म ओम शांति ओम के ये डायलॉग्स स़िर्फ डायलॉग नहीं हैं, इनका वास्ता असल ज़िंदगी से भी है. जी हां, ख़्वाब यकीन में बदल जाते हैं यदि आपकी कोशिश सच्ची है. यकीन न हो तो इन टेलीविज़न स्टार्स से जान लीजिए. इनके अनुभवों से आपको ये यकीन हो जाएगा कि नामुमकिन कुछ भी नहीं.

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सरगुन मेहता (Sargun Mehta)
ईश्‍वर कह लीजिए या यूनिवर्स मेरा उसमें अटूट विश्‍वास है. मशहूर मीडिया प्रोफेशनल ओपरा विनफ्रे ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं मेहनत करती जा रही थी और मेरे लिए लक सही समय पर सही जगह रखा हुआ था. मैं भी यही मानती हूं, आपको मेहनत करते हुए ख़ुद को अपने लक के लिए तैयार रखना चाहिए, वो ज़रूर आपके पास आएगा. यदि आप सच्चे दिल से पूरी ताक़त लगाकर कोई काम करते हैं, तो यूनिवर्स आपको आपकी चीज़ उतनी ही शिद्दत से सौंप देता है.

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रवि दुबे (Ravi Dubey)
आपकी लाइफ वैसे डिज़ाइन होती है जैसे आप सोचते हैं. यदि मैं ग्लैमर इंडस्ट्री की बात करूं, तो यहां पर भी यही बात लागू होती है. यदि आपको लगता है कि ये इंडस्ट्री आपकी दोस्त नहीं दुश्मन है, तो आपको वैसे ही लोग मिलेंगे, लेकिन आप यदि पॉज़िटिव रहेंगे तो आपके साथ सबकुछ पॉज़िटिव होता चला जाएगा. मैं बहुत आशावादी हूं और हर चीज़ में पॉज़िटिविटी ढूंढ़ता हूं इसलिए मेरे साथ सबकुछ पॉज़िटिव ही होता है.

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दिशा वाकाणी (Disha Vakani)
आप किसी भी क्षेत्र में जाएं, मेहनत तो आपको करनी ही पड़ेगी और आप यदि मेहनती हैं तो आपको काम मिलेगा ही. हां, कभी-कभी समय अच्छा नहीं होता, तो दिक्कतें आती हैं, लेकिन देर-सवेर मेहनत का फल मिलता ही है. लक हमारा इंतज़ार कर रहा होता है, हमें बस चलते जाना होता है.

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अनूप सोनी (Anup Soni)
मेहनत तो कई लोग करते हैं, लेकिन उसका फल सभी को एक जैसा नहीं मिलता. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि मेहनत करना ही छोड़ दें. हमें अपनी तरफ़ से हमेशा मेहनत करते रहना चाहिए, एक न एक दिन हमें उसका फल ज़रूर मिलता है.

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आप भी पा सकते हैं मनचाही मुराद
आप पूरे विश्‍वास के साथ ईश्‍वर के सामने अपनी कोई मुराद रखते हैं और जल्दी ही आपकी वो ख़्वाहिश पूरी हो जाती है. आपका ईश्‍वर के प्रति विश्‍वास और बढ़ जाता है. आप फिर कोई ख़्वाहिश करते हैं और वो भी पूरी हो जाती है. ईश्‍वर के प्रति विश्‍वास के साथ-साथ अब आपका कॉन्फिडेंस भी बढ़ने लगता है. आप अपनी ख़्वाहिशों पर और ़ज़्यादा फोकस करने लगते हैं. आप दिनरात अपनी इच्छाओं को पूरा करने के बारे में ही सोचते रहते हैं और इसी दिशा में काम भी करते रहते हैं. जल्दी ही आप वो सबकुछ पा लेते हैं जिसकी कभी आपने कामना की थी. ये सब इसलिए हो पाता है, क्योंकि आप लगातार अपनी इच्छाओं के बारे में सोच-सोचकर अपनी फ्रीक्वेंसी ब्रह्मांड तक पहुंचा रहे होते हैं, जिससे आपके चारों तरफ पॉज़िटिव वातावरण तैयार हो जाता है और आपकी हर ख़्वाहिश पूरी होती चली जाती है.

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क्योंकि नामुमकिन कुछ भी नहीं
दुनिया के हर सफल व्यक्ति का इतिहास उठाकर देख लीजिए, आप पाएंगे कि उनके वहां तक पहुंचने में उनकी कोशिशों के साथ-साथ उनकी इच्छा और सपनों का भी उतना ही योगदान था. दरअसल, जब हमारे मन में कोई विचार आता है या हम किसी चीज़ को अपने नज़रिए से देखने लगते हैं तो सृजन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और घटनाएं, वातावरण हमारी सोच के मुताबिक बनने लगता है.

तरीक़ा आसान है
हमारा वर्तमान हमारे अतीत का आईना होता है, क्योंकि हम वही बनते हैं जो हम बनना चाहते हैं. आपने कभी न कभी इस बात को ज़रूर महसूस किया होगा कि आपने जिस चीज़ की ख़्वाहिश बड़ी शिद्दत से की थी, वो देर-सवेर आपको मिल ही गई. इसकी सबसे बड़ी वजह है आपकी उम्मीद, आपका विश्‍वास, जो अप्रत्यक्ष रूप से भी आपको अपनी ख़्वाहिश के और क़रीब लाने का काम लगातार करता रहता है.

यूं पाएं मनचाही मुराद
मनचाही मुराद पाने का सबसे आसान तरीक़ा यह है कि ख़ुद को चुंबक मानकर सोचें कि दूसरा चुंबक भी आपकी तरफ़ आकर्षित होगा. जब आप ऐसा सोचने लगेंगे तो आपकी ख़्वाहिश से मिलती-जुलती चीज़ें भी आपकी तरफ़ आकर्षित होने लगेंगी. इस तरह आपके चारों तरफ़ पॉज़िटिव वातावरण बनता चला जाएगा और आपकी उम्मीदों के साथ-साथ आपका आत्मविश्‍वास भी बढ़ता जाएगा और देर-सवेर आपको मनचाही मुराद मिल ही जाएगी. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हमारे आज के विचार ही हमारा भविष्य तय करते हैं. हम जिस चीज़ के बारे में सबसे ़ज़्यादा सोचते हैं, जिस चीज़ पर सबसे ़ज़्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं, वो आगे चलकर हमारे जीवन में शामिल हो ही जाती है. अतः आप भी यदि अपने जीवन में कोई ख़ास चीज़ पाना चाहते हैं, तो उसके बारे में अभी से सोचना शुरू कर दीजिए.

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* क़ामयाबी का मूल मंत्र: आप क्या चाहते हैं? इस बारे में आपकी सोच क्लियर होनी चाहिए.
* जीवन मंत्र: दूसरों को बदलने के बजाय ख़ुद को बदलें. यकीन मानिए, आपको हर चीज़ अच्छी लगने लगेगी.
* ईश्‍वर के प्रति आस्था: आज के हाई टेक युग में भी ईश्‍वर के प्रति आस्था इस बात का प्रतीक है कि हम अपनी चाहत को पूरा करने के लिए ईश्‍वर को माध्यम बनाकर मनचाही मुराद पा लेते हैं.

– कमला बडोनी

 

कंप्लीट ग्रोथ के लिए ऑल-राउंडर होना ज़रूरी है, लेकिन नंबर वन कहलाने के लिए एक्सपर्ट बनना ज़रूरी है और ये कोई नामुमकिन काम नहीं है. आप भी ऐसा कर सकते हैं.

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हम कई क़ामयाब लोगों से प्रभावित होते हैं और मन ही मन सोचते हैं काश, मैं भी ऐसा कर पाता/पाती, लेकिन सोचने भर से क्या होगा? क्या आपने कभी क़ामयाबी के शिखर तक पहुंचने का सपना देखा है, उस तक पहुंचने की कोशिश की है? नहीं..? तो अभी भी देर नहीं हुई है.

लक्ष्य निर्धारित करेंः सफलता पाने के लिए सबसे पहले लक्ष्य निर्धारित करें. आप किस क्षेत्र में क़ामयाबी पाना चाहते हैं, इस बारे में आपको एक प्रतिशत भी संदेह नहीं होना चाहिए. कोई आपसे नींद में भी पूछे कि आपको क्या हासिल करना है, तो आपको अपना लक्ष्य पता होना चाहिए.

महारत हासिल करेंः हर इंसान में कोई न कोई ख़ूबी ज़रूर होती है, हमें बस, उस ख़ूबी को पहचानना होता है. आप में वो कौन-सी बात है, जो दूसरों से ख़ास है, उसे अपनी ताक़त बनाइए. अपनी किसी एक ख़ूबी में इतनी महारत हासिल कर लीजिए कि आप उसके एक्सपर्ट बन जाएं. वो काम आप जैसा कोई न कर पाए, फिर आपको क़ामयाबी के शिखर तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकेगा.

समर्पित हो जाएंः अपने लक्ष्य के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हो जाएं और अपने काम से प्यार करें. जब आप ऐसा करेंगे तो आपको दिन-रात, सुबह-शाम का एहसास तक नहीं होगा और आप हर समय ख़ुशी-ख़ुशी अपना काम करते रहेंगे.

जी तोड़ मेहनत करेंः मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता. किसी भी क़ामयाब व्यक्ति के जीवन पर नज़र डालिए, उसने वहां तक पहुंचने के लिए आम लोगों से कई गुना ज़्यादा मेहनत की होती है. नंबर वन कहलाने के लिए आपको दूसरों से ज़्यादा मेहनत करनी ही होगी.

अपना कर्त्तव्य न भूलेंः हालात चाहे कितने ही विपरीत क्यों न हों, अपना कर्त्तव्य कभी न भूलें. लोग क्या कर रहे हैं इससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी है आप क्या सोचते हैं. लालच या असमंजस की स्थिति में लोगों की नहीं, अपने मन की सुनें. तभी आप दूसरों से अलग बन सकेंगे. आपकी राह में लालच के कई मौ़के आएंगे, लेकिन छोटे लालच पर नहीं, बड़े लक्ष्य पर नज़र रखें.

आत्मविश्‍वास बनाए रखेंः क़ामयाबी की राह में कई मोड़ ऐसे भी आएंगे जो आपको कमज़ोर बना सकते हैं, ऐसे में ख़ुद पर विश्‍वास ही आपको आगे बढ़ने में मदद करेगा. अतः परिस्थिति चाहे कितनी ही विपरीत क्यों न हो, अपना आत्मविश्‍वास कभी डगमगाने न दें.

सीखने की लगनः एकसपर्ट वही बनते हैं जो हमेशा सीखने के लिए तत्पर रहते हैं. हम सब जीवन के आख़िरी पड़ाव तक कुछ न कुछ सीखते रहते हैं इसलिए सीखने का कोई भी मौक़ा हाथ से जाने न दें. आप जितना सीखेंगे, उतने पारंगत होते चले जाएंगे.

दूसरों का सम्मान करेंः सम्मान उन्हें ही मिलता है जो दूसरों को सम्मान देना जानते हैं. आप चाहे कितने ही परेशान क्यों न हों, अपना ग़ुस्सा किसी और पर कभी न उतारें. छोटे-बड़े सभी का सम्मान करें, तभी आप सही मायने में क़ामयाब कहलाएंगे.

टीम स्पिरिट बनाए रखेंः आप अकेले बहुत दूर तक नहीं चल सकते. किसी भी काम को अंजाम देने के लिए आपको लोगों की ज़रूरत पड़ेगी ही. इसके लिए टीम स्पिरिट के साथ आगे बढ़ें.

मुस्कुराते रहेंः हंसते-मुस्कुराते सरल लोग सभी को पसंद आते हैं और क़ामयाबी उन्हें ही मिलती है जो लोकप्रिय होते हैं. लोग आपसे मिलकर अच्छा महसूस करें, इसके लिए अपना उत्साह कभी कम न होने दें और हमेशा मुस्कुराते रहें.

– कमला बडोनी