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रोज़ाना चेक करें अपनी लाइफ का हैप्पीनेस मीटर (Check Your Daily Happiness Meter)

ज़िंदगी में हर रोज़ हम कुछ न कुछ नया सीखते या अनुभव करते हैं. कुछ चीज़ें हमें ख़ुशी देती हैं, तो कुछ तकलीफ़, पर ज़्यादातर लोग उन तकलीफ़ों के बोझ को ही रोज़ाना ढोते रहते हैं, जबकि हम सबको पता है कि जो व़क्त बीत रहा है, वो लौटकर कभी नहीं आएगा, तो क्यों न रोने की बजाय उसे हंसकर बिताएं. आज से ही एक नई शुरुआत करें, रोज़ाना कुछ अलग करें और देखें कि आज का आपका हैप्पीनेस मीटर कितना है.

Happiness

दिमाग़ी कचरा साफ़ करें

हम रोज़ अपने सबकॉन्शियस माइंड में न जाने कितने निगेटिव ख़्याल भर देते हैं और जब वो हमें परेशान करने लगते हैं, तो हम बेवजह दुखी रहने लगते हैं. आज ही ये सारा दिमाग़ी कचरा साफ़ करें.

–    आपके बारे में कौन क्या सोचता है, इस सोच को अपने दिमाग़ से निकाल दें, बल्कि ये सोचकर ख़ुश हो जाएं कि कोई आपके बारे में सोचता तो है.

–     अगर बातचीत के दौरान कोई ग़लतफ़हमी हो गई है, तो उसे तुरंत क्लीयर कर लें. जितनी जल्दी निगेटिव ख़्याल निकलेगा, उतनी जल्दी आपको ख़ुशी का एहसास होगा.

–     माफ़ कर देना और माफ़ी मांग लेना उतना भी कठिन नहीं है, जितना लोगों ने बना रखा है, इसलिए सॉरी कहने में बिल्कुल भी देर न करें. ख़ुद भी ख़ुश रहें और दूसरों को भी ख़ुश रखें.

मैजिकल वर्ड्स का करें इस्तेमाल

हमारे पास मैजिकल वर्ड्स का ख़ज़ाना है, पर अफ़सोस कि हम उनका इस्तेमाल ही नहीं करते, तभी तो दुखी रहते हैं.

–     थैंक यू एक ऐसा जादुई शब्द है, जो न स़िर्फ बोलनेवाले के चेहरे पर मुस्कान लाता है, बल्कि सुननेवाला भी ख़ुश हो जाता है. तो फिर इसे कहने में कंजूसी क्यों करें. सुबह की शुरुआत ही भगवान को थैंक यू कहने से करें, यकीन मानें आपका दिन ख़ुशियों भरा होगा.

–     हर कोई चाहता है कि लोग उसे प्यार करें. पार्टनर, मम्मी-पापा, भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी या बच्चे सभी को रोज़ाना वो थ्री मैजिकल वर्ड्स ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें. उनके चेहरे की मुस्कान आपके हैप्पीनेस मीटर को बढ़ा देगी.

–     ‘आप अच्छी लग रही हो’ या ‘अच्छे लग रहे हो,’ जैसे जादुई शब्द किसी का भी दिन बना सकते हैं. तो दिल खोलकर लोगों की तारीफ़ करें और ख़ुशियां फैलाते रहें.

चुनें अनजानी राहें

जान-पहचान के लोगों से तो हम हमेशा बोलते-बतियाते हैं, कभी अनजानों से भी दोस्ती करके देखें. बस, यूं ही किसी अजनबी से बातें करें, बहुत अच्छा लगेगा.

–     वर्किंग लोग बस, ट्रेन, ऑटो में रोज़ाना न जाने कितने लोगों से टकराते हैं, तो क्यों न उनसे दोस्ती करें और अपने दोस्तों का दायरा बढ़ाएं.

–     एक-दो बार जिन्हें मिले हैं, उन्हें देखकर स्माइल ज़रूर दें, उनकी स्माइल आपका हैप्पीनेस मीटर बढ़ा देगी.

–     रास्ते में चलते हुए कभी किसी अजनबी को देखकर स्माइल करें, वो जब तक सोचेगा कि आपको कहां मिला था, आप हंसते-हंसते आगे बढ़ जाओगे.

–     कोई उम्रदराज़ महिला अगर भारी सामान लेकर जा रही है, तो निस्वार्थ भाव से उनकी मदद करें. उन्हें तो ख़ुशी मिलेगी ही, पर आपको भी कुछ कम सुकून नहीं मिलेगा.

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Happy
कुछ रिफ्रेशिंग हो जाएं

–     क्यों न आज थोड़ी मटरगश्ती कर लें. किसी पुराने दोस्त को उसके ऑफिस में या घर पर जाकर सरप्राइज़ दें. यक़ीन मानिए, एक ही दिन में आपके पूरे हफ़्ते का हैप्पीनेस मीटर रीचार्ज हो जाएगा.

–     गाने सुनने के शौक़ीन हैं, तो अपना मनपसंद गाना स़िर्फ सुनें नहीं, बल्कि गुनगुनाएं भी और अगर घर पर हैं, तो गाने पर थिरकें भी. मूड फ्रेश रखने के लिए म्यूज़िक से बेहतर थेरेपी कुछ नहीं.

–     खाने के शौक़ीन हैं, तो कुछ ऐसा चटपटा खाएं, जो बहुत दिनों से खाया न हो. मनपसंद डिश न स़िर्फ आपका मूड अच्छा करेगी, बल्कि एक ख़ुशी भी देगी.

–     हमेशा दूसरों को ही एंटरटेन न करें. कभी ख़ुद को भी एंटरटेन कर लें. आपके साथ-साथ आपकी फैमिली भी ख़ुश रहेगी.

–     मॉनसून तो वैसे ही बहुत रोमांटिक मौसम है, तो आज अपने पार्टनर के लिए कुछ ख़ास करें. उन्हें चॉकलेट, फूल या टेडी दें. इस रोमांटिक मौसम में आपका रोमांटिक अंदाज़ आपके पार्टनर के हैप्पीनेस मीटर को फुल चार्ज कर देगा.

–     हमेशा दूसरों के बारे में ही न सोचें. कभी-कभी ख़ुद के बारे में भी सोचें. ख़ुद की ख़ुशी के लिए भी कुछ चीज़ें करें. थोड़ा स्वार्थी होने में कोई हर्ज़ नहीं.

फैलाएं पॉज़िटिविटी

आजकल ज़्यादातर लोग सोशल मीडिया के ज़रिए आप तक बहुत-सी निगेटिव चीज़ें पहुंचाते रहते हैं, जिससे जाने-अनजाने आप लगातार निगेटिव ख़्यालों  से घिरे रहते हैं. इसे बदलना चाहते हैं, तो शुरुआत ख़ुद से करें.

–     व्हाट्सऐप पर किसी को ऐसी फोटोज़ या वीडियोज़ न भेजें, जिसे देखकर बुरा लगे. जोक्स, मोटिवेशनल बातें या कोट्स आपके साथ-साथ उनको भी ख़ुश करेंगे.

–     अगर आपके आसपास कोई निगेटिव बातें कर रहा है, तो उसे निगेटिव में भी पॉज़िटिव देखना सिखाएं.

–     सकारात्मक सोच आपके चेहरे पर एक मुस्कान की तरह है, जो हर व़क्त आपकी ख़ूबसूरती को निखारती रहती है. तो सुंदर दिखना चाहते हैं, तो मुस्कुराइए, खिलखिलाइए और दूसरों को भी ख़ुश रखिए.

–     निगेविट बात करनेवालों को बताएं कि कैसे सकारात्मक सोच आपके शरीर में अच्छी फीलिंग वाले हार्मोंस का स्राव करती है और आप अच्छा फील करते हैं.

चेक करें हैप्पीनेस मीटर

–     ऐसी कई बातें होती हैं, जो हमारे चेहरे पर मुस्कान लाती हैं. ध्यान दें कि किससे बातें करते समय आप सबसे ज़्यादा ख़ुश रहते हैं और जैसे ही आपको वो शख़्स मिले, जी भरकर उससे बातें करें.

–     कोई न कोई तो ऐसा होता है, जिसके बारे में सोचते ही आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. कोशिश करें कि उससे ज़्यादा से ज़्यादा मिलें. उसके साथ ज़्यादा समय बिताने की कोशिश करें.

–     दोस्तों-यारों के संग बिताई कौन-सी पुरानी यादें आपको गुदगुदाती हैं. उन यादों को दोबारा जीने की कोशिश करें.

–     घर से निकलते व़क्त अगर ‘अपना ख़्याल रखना’ कहने भर से आपके चेहरे पर स्माइल आती है, तो इसे अपनी आदत में शुमार करें.

–     पर्सनल लाइफ के अलावा प्रोफेशनल लाइफ में भी रोज़ कुछ अलग व क्रिएटिव करें, कभी काम में, कभी लुक्स में, तो कभी अपने कलीग्स की ख़ुशी के लिए.

–     अपने भीतर के छोटे मासूम बच्चे को कभी सीरियस न होने दें. वह हंसी-मज़ाक और शरारतों से आपको हमेशा ख़ुशहाल बनाए रखेगा.

– सुनीता सिंह

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दूसरों का भला करें (Do Good Things For Others)

Do Good Things For Othersकहते हैं कि जो लोग दूसरों के लिए गड्ढा खोदते हैं, एक दिन वो ख़ुद उसी गड्ढे में गिर जाते हैं. ठीक वैसे ही जो व्यक्ति दूसरों का भला करता है, उसका भला स्वयं भगवान करते हैं, इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपका भला हो, तो अब से दूसरों का भला करने की कोशिश करें.

जो बोएंगे, वही पाएंगे ये बात हम सदियों से सुनते आ रहे हैं, फिर भी न जाने क्यों? हम बबूल का पेड़ उगाकर उससे मीठा फल पाने की इच्छा रखते हैं. तो आइए, इस बार अपने मन-आंगन में भलाई के बीज बोने का प्रयास करते हैं, ताकि स्वादिष्ट फल का सुख भोग सकें.

सज्जन व्यक्ति करते हैं दूसरों का भला

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहि न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहि सुजान॥

संत रहीम दास जी कहते हैं कि पेड़ पर फलने वाले फल का सेवन स्वयं पेड़ नहीं करते और न ही नदी में बहता पानी ख़ुद नदी पीती है. ठीक उसी तरह जो संत पुरुष होते हैं, वो ख़ुद के लिए नहीं बल्कि दूसरों के हित के लिए धन संचय करते हैं. अतः अगर आप चाहते हैं कि आपकी गिनती भी सज्जन व्यक्ति में की जाए, तो दूसरों का हित करने की कोशिश करें.

दूसरों का भला करने से होता है ख़ुद का भला
यह बात सोलह आने सच है कि दूसरों का भला करने से ख़ुद का भला होता है. इस बात को परिभाषित करने के लिए प्रस्तुत है संत रहीम दास जी की निम्न पंक्ति,

वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बांटनवारे को लगै, ज्यौं मेहंदी को रंग॥

अर्थात जो व्यक्ति स्वयं अपने हाथों से दूसरों को मेहंदी बांटता है, उसके हाथ में ख़ुद-ब-ख़ुद मेंहदी का रंग चढ़ जाता है, ठीक इसी तरह जो नर दूसरों का भला करता है, उसका भी भला होता है.

ऐसे व्यक्ति किसी काम के नहीं…..

बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर॥

अपार धन-संपत्ति होने के बावजूद जो लोग कभी किसी की मदद नहीं करते और न ही दूसरों के हित के बारे में सोचते, ऐसे लोग बिल्कुल खजूर के उस पेड़ की तरह हैं, जो गगन चुंबी होते हुए भी न किसी को फल का सुख देता है और न ही राहगिरों को छाया दे पाता है.

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जीवन में ख़ुशियों के रंग भरें (Live With Full Of Love And Happiness)

Jeene Ki Kala

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ख़ुशी एक एहसास है, जो होंठों पर मुस्कान और दिल में उमंग भर देती है. ख़ुश होने पर हमें हर चीज़ ख़ूबसूरत व प्यारी लगने लगती है. जब ख़ुशी इतनी अनमोल है, तो भला इससे महरूम क्यों रहें!

मौक़ा तलाशें
ख़ुशी कोई चीज़ नहीं, जिसे ढूंढ़ा या ख़रीदा जाए. ये तो एक एहसास है, जिसे स़िर्फ महसूस किया जा सकता है. यदि आप ख़ुश रहना चाहते हैं, तो हर पल का आनंद लीजिए. ये मत सोचिए कि ये अच्छा है या बुरा. अपने लिए ख़ुशी तलाशने की बजाय दूसरों की ख़ुशियों में शामिल हो जाइए. फिर देखिए, ज़िंदगी कितनी हसीन लगने लगेगी. हर पल ख़ुशी के मौ़के तलाशिए, आपकी ज़िंदगी ख़ुशनुमा हो जाएगी.

खुलकर जीएं
हमें ज़िंदगी जीने के लिए मिली है, काटने के लिए नहीं. इसे खुलकर जीने के लिए छोटी-छोटी बातों व क़ामयाबियों को अहमियत देना व उनका जश्‍न मनाना सीखिए. ख़ुश रहने का एक और तरीक़ा है- अपना पसंदीदा काम करना. किसी और की देखादेखी में या किसी का दिल रखने के लिए वो काम कभी न करें जो आपको पसंद न हो. ऐसा करके न तो आप काम के साथ न्याय कर पाते हैं और न ही ख़ुद के साथ.

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ख़ुशी का सेहत से रिश्ता

ख़ुश रहने के लिए चुस्त-दुरुस्त रहना भी ज़रूरी है. बीमारियां हमें चिड़चिड़ा बना देती हैं इसलिए अच्छी सेहत के लिए सही खानपान के साथ ही अपनी जीवनशैली में भी बदलाव लाना ज़रूरी है. सही समय पर सोने से लेकर खाने तक हर चीज़ का ध्यान रखकर आप स्वस्थ व ख़ुश रह सकते हैं.

चिंता से दूर रहें
ये काम नहीं हुआ तो मैं क्या करूंगी? मैं समय पर नहीं पहुंची तो क्या होगा? ऐसी बेकार की बातें सोचकर तनावग्रस्त होने की ज़रूरत नहीं. जो चीज़ आपके वश में है उसे दुरुस्त कर लें और जो नहीं है उसके बारे में सोचकर परेशान होने की ज़रूरत नहीं. कल जो होगा देखा जाएगा, ऐसा सोचकर आप ख़ुद को बेकार की चिंताओं से मुक्त कर सकते हैं.

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सफलता ख़ुशी की चाबी नहीं है. ख़ुशी सफलता की चाबी है. आप जो कर रहे हैं अगर उससे प्यार करते हैं, तो आप सफल ज़रूर होंगे.
– हरमन केन

जब आसपास कोई न हो और आप मुस्कुराएं, तो आप वाक़ई में ख़ुश हैं.
– एंडी रूनी

ख़ुद को ख़ुश करने का बेहतरीन तरीक़ा है किसी और को ख़ुश करने की कोशिश करना.
– मार्क ट्वैन

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जीवन है जीने के लिए (Live Your Life Happily)

बुज़दिल होते हैं वो लोग जो ज़िंदगी को छोड़ मौत को गले लगाते हैं. ईश्‍वर ने हमें जो अनमोल जीवन दिया है, उसे यूं ही बस छोटी-सी परेशानी के दबाव में आते ही क्यों अक्सर लोग त्याग देते हैं. दुखों को सहने की क्षमता जिनमें नहीं होती अक्सर वही लोग सुंदर से जीवन को ख़त्म कर देते हैं. कभी समझदार तो कभी कोमल मन वाले बच्चे भी परीक्षा में कम नंबर मिलने के कारण आत्महत्या कर लेते हैं. आपका जीवन आपके अपनों और ख़ुद आपके लिए अनमोल है. इसे इस तरह ज़ाया न करें. छोटी-छोटी परेशानियों से तंग आकर इस पर फुलस्टॉप न लगाएं.

मज़बूत बनो
मज़बूत हो इरादा तो बड़े से बड़ा दुख भी आपके हौसले को पस्त नहीं कर सकता. इसका ताज़ा उदाहरण 2015 की आईएएस टॉपर इरा सिंहल हैं. शारीरिक रूप से कमज़ोर होने के बाद भी इरा ने हार नहीं मानी और अंत में जीतकर ही दम लिया. अक्सर कमज़ोर दिल के लोग झट से जीवन की आस छोड़ देते हैं. जीवन के उतार-चढ़ाव को झेलने में समर्थ नहीं होते और कमज़ोंरों की तरह अपने आपको ही ख़त्म कर लेते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि उनके इस क़दम से परेशानी ख़त्म हो जाएगी. वो ये नहीं जानते कि उनके इस तरह से दुनिया से जाने के बाद उनके अपनों के सामने मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है. किसी भी परेशानी के सामने जब आपको लगे कि अब आप दम तोड़ देंगे, तभी बस एक कोशिश और करें. यक़ीन मानिए आपके इस हौसले को देखकर ख़ुद परेशानी आपके सामने घुटने टेक देगी.

ख़ुद पर विश्वास रखो
12 अप्रैल 2012 में ट्रेन हादसे में अपना एक पैर गंवा देने वाली नेशनल लेवल की वॉलीवॉल प्लेयर अरुणिमा सिन्हा का वो अपने ऊपर विश्‍वास ही था, जो उन्हें एवरेस्ट पर फतह करने से नहीं रोक पाया और वो एवरेस्ट पर फतह करने वाली भारत की पहली विकलांग महिला बनीं. एक पैर गंवा देने के बाद भी अरुणिमा के हौसले को कोई हिला नहीं सका, तो सही सलामत होते हुए भी आप क्यों छोटी-सी मुश्किल के आते ही डर जाते हैं. परेशानियों से हारकर जीवन को ख़त्म कर देना तो बहुत आसान है, लेकिन उसे जीना उतना ही मुश्किल. कायरों की तरह आप भी इस तरह का क़दम उठाने से पहले अपने ऊपर एक बार फिर से विश्‍वास करके देखिए. क्या पता अगले दिन का उगता सूरज आपके लिए नई रोशनी के साथ आया हो.

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दुख बांटे

इस संसार में आए हैं, तो निश्‍चय ही ईश्‍वर ने आपके लिए कुछ स्पेशल करने को छोड़ा है. ऐसे में उसकी मर्ज़ी के बग़ैर बीच में ही जीवन को समाप्त करना उचित नहीं. इस बात को जान लें कि अगर दुख है, तो दुख का कोई न कोई हल भी है. इस बात को गांठ बांध लें. कुछ दिनों से अगर आप किसी बात से परेशान हैं और समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें, तो किसी अपने से उसे बांटकर देखें. हो सकता है कि जो परेशानी आपके लिए बहुत बड़ी हो, उसका हल आपके अपने के पास हो. दुखों से परेशान होकर झट से आत्महत्या करना किसी तरह का समाधान नहीं है.

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ख़ुद से प्यार करें
अपने आप से बहुत ज़्यादा अपेक्षाएं करना बंद कीजिए. अपनी क्षमता के अनुसार ही अपने ऊपर ज़िम्मेदारियों का बोझ डालिए. जब आप ख़ुश और सुखी रहेंगे तभी तो परिवार को ख़ुश रख पाएंगे. शायद आप ये बात नहीं जानते, लेकिन ये सच है. जिस तरह से आपको परिवार की चिंता लगी रहती है, ठीक उसी तरह से परिवार भी आपके बारे में सोचता है. ऐसे में अपने आपको दूसरों से अलग करके और अपना ख़्याल न रखकर आप अपने साथ-साथ परिवार को भी दुखी करते हैं. कुछ लोग ख़ुद ही अपने बारे में ये फैसला कर लेते हैं कि वो अपनी ज़िम्मेदारियों को सही तरह से नहीं निभा पा रहे हैं और अंत में एक दिन इन्हीं सब से परेशान होकर वो ग़लत क़दम उठाते हैं. जीवन का अंत करके आप अपने लोगों को कितनी बड़ी परेशानी में डालकर जा रहे हैं, ये आपको पता नहीं. जिन अपनों के लिए आप दिन-रात एक कर देते हैं, उन्हें एक दिन यूं अकेले छोड़कर जाना कितना उचित है?

जिन्होंने कभी नहीं मानी हारी
– क्लासिकल डांसर और अभिनेत्री सुधा चंद्रन
– म्यूज़िक डायरेक्टर रविंद्र जैन
– स्काई डाइवर साईं प्रसाद विश्‍वनाथन
– पेंटर एंड फोटोग्राफर साधना धंड

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40 Secrets शादी को सक्सेसफुल बनाने के (40 Secrets of Successful marriage)

Secrets of Successful marriage
शादी को सुपर सक्सेसफुल (Secrets of Successful marriage) बनाना चाहते हैं तो ज़रूरी है कुछ बातों का ख़याल रखना, ताकि आपके रिश्तों में प्यार की मिठास, ख़ुशियां बनी रहें.

Secrets of Successful marriage

1. बातचीत में हमेशा आदव व शिष्टाचार रखें. हर पति-पत्नी में मतभेद और तकरार होते ही हैं. लेकिन हर बात पर अड़ियल रवैया न अपनाएं. हर समस्या को बातचीत से सुलझाएं.
2.पति-पत्नी का रिश्ता विश्‍वास पर टिका होता है. इसलिए अपने रिश्ते में शक को कोई जगह न दें.
3. गृहस्थी में हर चीज़ की योजना बनाएं, बचत, निवेश ही नहीं, शिशु आगमन भी, वरना कई बार अनचाहा गर्भ भी तकरार बढा देता है.
4. पऱफेक्ट कोई भी नहीं होता और न ही इसकी उम्मीद करें. दूसरे को ग़लतियों के बावजूद प्यार करना ही सही मायने में प्यार है.
5. जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे. तुम दिन को अगर रात कहो रात कहेंगे वाला फार्मूला अपनाएं.
6. घर को ऑफ़िस न बनाएं. अपने साथी को समय दें.
7. यह ज़रूरी नहीं कि आप पति की जेब मेें गिनकर नोट डालें और पति भी पाई-पाई का हिसाब मांगे. दोनों को कुछ ख़र्चे अकेले करने का हक़ है और एक-दूसरे से सफ़ाई नहीं मांगनी चाहिए.
8. एक-दूसरे को सरप्राइज़ तो दें, पर झटके न दें. ऐसे ़फैसले जिसका असर दोनों पर पड़ता हो, उसे अकेले कभी न लें. पहले आप अपने फैसले अकेले लेते थे, पर अब पत्नी आपकी भागीदार है ये न भूलें.
9. आजकल की व्यस्त लाइफ़ में जब पति-पत्नी के काम के घंटे तय नहीं होते, ऐसे में मनो सेक्सम का माहौल बनता जा रहा है. लेकिन ये सही नहीं. सेक्स के लिए समय ज़रूर निकालें. मंडे न सही, संडे य सैटर्डे नाइट भी स्पेशल हो सकती है.
10. कुछ दिन दूर रहकर भी देखें. फिर लौटकर रिश्तों में पहले जैसी ताज़गी महसूस करें. एक-दूसरे की कमी दूर रहकर ही महसूस की जा सकती है.
11. घर-गृहस्थी में पति या पत्नी अपने दूसरे पारिवारिक रिश्तों की बुराई करते ही हैं, लेकिन इसे हर बार की लड़ाई का मुद्दा न बनाएं.
12. अधिकतर झगड़े पैसे को लेकर ही होते हैं. बेहतर होगा कि अपने ख़र्च, बचत व निवेश की योजना पहले से ही बना लें और फिज़ूल के झगड़ों से बचें.
13. सॉरी कहना बुरी बात नहीं और न ही माफ़ करना मुश्किल काम है. इससे कोई झगड़ा आगे बढ ही नहीं पाएगा.
14. रिश्तों में ईमानदारी बरतें. ईमानदारी रुपए-पैसे की ही नहीं, भावनाओं की भी ज़रूरी है. परस्पर विश्‍वास धीरे-धीरे ही पनपता है.
15. कोई भी फैसला अकेले न लें. याद रखें कि अब आप शादीशुदा हैं, इसलिए चाहे टीवी ख़रीदना हो या फ्रिज, साथी की राय अवश्य लें.
16. छोटी-छोटी बातों में ख़ुशियां ढूंढें. हर व़क़्त मतुम रूठी रहो मैं मनाता रहूंम के सहारे ज़िंदगी नहीं चलती.
17. छोटी-छोटी कुर्बानियां करें. भले ही कोई फ़िल्म पति या पत्नी की मज़ीं की ही देखनी पड़े. रिमोट ज़रा अपने साथी के हाथ में दे दें. तब न न्यूज़ का झगड़ा होगा न सीरियल का.
18. थैंक्यू शब्द भी जादू का काम करता है. इसे अपनी बातचीत में शामिल करें. चाहे खाना स्वादिष्ट बना हो या आपके पार्टनर ने कोई ग़िफ़्ट दिया हो, उन्हें धन्यवाद कहना न भूलें. हम यह सोचकर अपनों को अक्सर धन्यवाद करना भूल जाते हैं कि ये तो उनका फर्ज़ थो फिर थैंक्यू क्यों.
19. अपने साथी की ख़ूबियां तो दूसरों को सुनाएं, पर उनकी बुराई न करें.
20. सरप्राइज़ ग़िफ़्ट हमेशा ख़ूबसूरत ही होते हैं, ज़रूरी नहीं कि यह तोहफ़ा ज़रूरी महंगा हो.
21. हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहें. इससे रिश्तों में नई गर्माहट बनी रहती है.
22. अच्छाजी मैं हारी चलो मान जाआ न कहने में कोई हर्ज़ नहीं है. लड़ाई नहीं दिल जीतने या हारने का मजा ही कुछ और है.
23. कोई झगड़ा या निर्णय जिससे बात का बतंगड़ या तिल का ताड़ बनने की संभावना हो, उसे टाल दें.
24. जन्मदिन और सालगिरह तो सभी मनाते हैं, पर छोटे-छोटे मौकों पर भी जश्‍न मनाएं. छोटे अवसरों को भी यादगार बनाएं.
25. भले ही जन्मकुंडली में आपके बहुत से गुण न मिले हों, लेकिन कुछ चीज़ें तो दोनों को पसंद होंगी ही. थियेटर में नाटक देखना या कोई क्लासिकल मूवी या फिर कोई खेल. अपनी उस पसंद को दोनों मिलकर एन्जॉय ज़रूर करें.
26. पुराने झगड़ों को हर बार तकरार का हिस्सा न बनाएं. इससे झगड़ा और बढेगा और आज का झगड़ा उसमें गुम हो जाएगा.
27. शादी बंधन तो है पर प्यार का बंधन. अपने साथी के नाक की नकैल न बनें. पति अपने दोस्तों के साथ घूमने जाना चाहते हैं तो ख़ुशी से जाने दें. पत्नी को अपनी सहेली से फ़ोन पर घंटों बात करने में ऐतराज़ न जताएं. एक-दूसरे को स्पेस अवश्य दें.
28. सात फेरे में सात वचन तो ले चुके. अब एक वचन यह भी लें कि कोई भी झगड़ा अगले दिन का सवेरा नहीं देखेगा. झगड़ोंं को बिस्तर पर जाने से पहले ही निबटा लें.
29. किसी भी विषय पर तर्क-वितर्क करते समय अपना आपा न खोएं. ध्यान रखें किसी मुद्दे पर झगड़ा है न कि व्यक्ति से. एक-दूसरे के प्रति तिरस्कार पूर्ण शब्द न बोलें.
30. अपनी कोई रुचि या शौक ज़रूर बरकरार रखें. मशादी के बाद गाना तो छूट ही गया. मैं तो कहानी अब लिख ही नहीं पातीम जैसे वाक्यों का अर्थ है कि आप हर बात पर पति पर निर्भर होती जा रही हैं. अपना मनोरंजन करना ख़ुद सीखें तभी ख़ुश रह पाएंगी.
31. एक-दूसरे के शौक को पूरा करने में मददगार बनें न कि दीवार. आपकी इस मदद से आपके साथी की ख़ुशियां दुगुनी हो जाती हैं.
32. दिन भर थक-मांदकर साथी घर लौटे तो दिनभर का रोना लेकर न बैठ जाएं. दिनभर की सास-बहू की कहा-सुनी या फिर फ़रमाइशों की सूची को चाय के प्याले के साथ न परोसें.
33.सवालों के सीधे जवाब दें. जन्मदिन पर क्या चाहती हैं, सीधे बता दें. मउन्हें पता होना चाहिएम यह तकरार बेमानी है. आप कहां जाना चाहती हैं, स्पष्ट बताएं. मआप क्या इतना भी नहीं समझतेम ये बेकार की बात है.
34. डेटिंग केवल शादी के पहले नहीं होती. घर-गृहस्थी से थोड़ा समय निकालकर शादी के बाद भी डेटिंग का मजा लें.
35. मआई लव यूम कहना न भूलें. भले ही शब्दों से नहीं बातों से महसूस कराएं. यही नहीं आई लव यू का जवाब आई लव यू से ही दें. कितने बेशर्म हो या एक बच्चे का बाप को ये सब शोभा नहीं देता यह इसका जवाब नहीं.
36.कॉम्प्लीमेंट आपकी ज़िंदगी में तरोताज़गी भर देते हैं. कॉम्प्लीमेंट देने का कोई भी मौका न चूकें.
37. मैं के स्थान पर महमम लाने की कोशिश करें. निर्णय हमारे हों. ग़लतियां हमारी हों. हर ग़लत बात को पत्नी के मत्थे मढना छोड़ दें.
38. तलाक़ ले लूंगा या दे दूंगा या मायके चली जाऊंगी जैसी धमकियां देने से बचें.

 

39. लोगों के सामने प्यार से पेश आएं. भले ही किन्हीं मुद्दों पर परस्पर सहमति न हो, पर लोगों के सामने महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर अपनी असहमति न दर्शाएं.
40. तुम मुझे प्यार करते हो तो तुम्हें ऐसा करना चाहिए या ऐसा नहीं करना चाहिए, ऐसा कहकर उन्हें बदलने की कोशिश न करें. उसे उसी के व्यक्तित्व के साथ प्यार करें.

अदिति लांबा

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चलना ही ज़िंदगी है (It’s time to move on)

Life

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जीवन में कई बार ऐसे वाकये या हादसे हो जाते हैं जो ज़िंदगी की चाल ही बदल देते हैं या यूं कहें कि हमें तोड़कर रख देते हैं. ऐसी बातों को सीने से लगाए रखने की बजाय आगे बढ़ना और नई शुरुआत करना ही जीवन है. ये मुश्किल है, मगर नामुमक़िन नहीं.

ज़िंदगी रुकती नहीं
कितनी भी बड़ी आपदा या हादसा क्यों न हो जाए ज़िंदगी ठहरती नहीं. हां, कुछ समय के लिए इसकी रफ़्तार ज़रूर धीमी पड़ जाती है, लेकिन उसे फिर अपने पुराने ढर्रे पर आना ही पड़ता है. चाहे जापान में आई सुनामी हो या हाल ही में उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा, इतने बड़े विनाश के बाद भी धीरे-धीरे ही सही, ज़िंदगी फिर पटरी पर आने लगती है, क्योंकि जो हो गया उसे हम बदल नहीं सकते, जो अपना चला गया उसे हम वापस नहीं ला सकते, लेकिन आने वाले कल को संवारने की कोशिश तो कर ही सकते हैं. अपने और अपने आसपास के लोगों की ख़ातिर हमें जो हो गया उसे भुलाकर फिर से जीवन की नई शुरुआत करनी ही पड़ती है.

जब तक आस है…
बात चाहे कुदरत के कहर की हो या जीवन में किसी अन्य तरह की असफलता की, आगे बढ़ने के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है उम्मीद. चाहे किसी अपने का साथ छूट जाए या कोई मनचाही मुराद पूरी न हो पाए, हम जीने की उम्मीद नहीं छोड़ सकते. कई बार ज़िंदगी ऐसा मोड़ ले लेती है कि जीने की दिशा ही बदल जाती है. हम अपने आस-पास ऐसे कई उदाहरण देख सकते हैं जिन लोगों ने अपना सबकुछ गवांकर भी जीने की ललक नहीं छोड़ी और अपना जीवन दूसरों की सेवा में समर्पित कर दिया. इसी तरह कई बार आपके करियर की दिशा बदल जाती है. आप बनना कुछ चाहते हैं, लेकिन हालात आपको कुछ और ही बना देते हैं. ऐसी तमाम स्थितियों में जीत उसी की होती है जो हार नहीं मानता और हर स्थिति में ख़ुद को बेहतर साबित करने की भरसक कोशिश करता है.

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जो बीत गई सो बात गई

“टूटे तारों पर कब अंबर शोक मनाता है, जो बीत गई सो बात गई”, हरिवंश राय बच्चन की कविता की इन पंक्तियों का सही अर्थ समझकर यदि आप इन्हें जीवन में उतार लेंगे, तो मुश्किल से मुश्किल हालात से भी ख़ुद को उबारकर जीवन में आगे बढ़ सकेंगे. ज़िंदगी में बहुत से ऐसे लोग, चीज़ें, बातें और पल होते हैं जिनके छिन जाने पर आपको बहुत दुख होता है या आपकी पूरी ज़िंदगी ही बदल जाती है. कई बार तो लगता है जैसे जीने का कोई मक़सद ही नहीं बचा, मगर जब तक आप ज़िंदा हैं आपको अतीत को भुलाकर आगे बढ़ना ही होगा, वरना आप ज़िंदा होकर भी ज़िंदगी नहीं जी पाएंगे.

– कंचन सिंह

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6 स्मार्ट तरीक़ों से रखें डिजिटल वॉलेट को सेफ़? (6 smart tips for safe digital wallet)

digital wallet

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घर बैठे-बैठे सिनेमा हॉल की टिकट बुक करना, हॉस्टल में पढ़ रहे बेटे की फीस जमा करना, गांव में पैसे भिजवाना, बिना लाइन में खड़े हुए बिजली का बिल भर देना जैसी सहूलियत आपको ई वॉलेट से ही मिलती है. बिना झंझट और झल्लाहट के आप आराम से घर बैठे कई काम कर देते हैं. घर से बाहर निकलने पर अब आपके पैसे चोरी का डर भी नहीं रहता, क्योंकि अपना बहुत सारा काम आप ई वॉलेट के ज़रिए निपटा देते हैं. डिजिटल हो रहे इस मॉडर्न ज़माने के साथ क़दम से क़दम मिलाकर चलने के लिए आपका भी डिजिटल होना बहुत ज़रूरी है, लेकिन इन सबके बीच सुरक्षा यानी आपके ई वॉलेट की सेफ्टी का इश्यू वैसे ही रह जाता है. आपका हर काम आसान करनेवाले डिजिटल वॉलेट को सेफ़ कैसे रखें? आइए, हम बताते हैं.

फोन लॉक करें
आमतौर पर स़िर्फ एक उंगली की दूरी पर है आपका ई वॉलेट. ऐसे में उसकी सुरक्षा और भी अहम् हो जाती है, इसलिए अपने फोन में लॉक कोड रखें. इतने से ही काम नहीं चलेगा. आप चाहें, तो अपने फोन में फिंगर लॉक रखें. ऐसे में कोई दूसरा आपके फोन को एक्सेस नहीं कर पाएगा.

ऐप लॉक
स़िर्फ फोन लॉक करने से काम नहीं चलेगा. कहीं आपका फोन चोरी हो गया और ग़लती से सामने वाले ने फोन का लॉक खोल लिया, तो आसानी से आपके ई वॉलेट का मिसयूज़ कर सकता है, इसलिए ज़रूरी है कि ऐप पर लॉक कोड सेट करें.

स्ट्रॉन्ग पासवर्ड
ऐप का पासवर्ड रखते समय इस बात का ध्यान रखें कि वो सिंपल और छोटा न हो. इससे कोई भी आसानी से ब्रेक कर सकता है. बेहतर होगा कि 10 डिज़िट का पासवर्ड रखें. स्पेशल कैरेक्टर के साथ पासवर्ड रखें.

एंटी वायरस डालें
कंप्यूटर, लैपटॉप की तरह मोबाइल में भी एंटी वायरस डलवाएं. ऐसा इसलिए करें, क्योंकि आप अपने मोबाइल का यूज़ एक लैपटॉप की तरह करते हैं. सोशल साइट्स से लेकर कई साइट्स पर जाते हैं. ऐसे में वायरस आपके मोबाइल में एंटर कर सकते हैं.

मिनिमम बैलेंस
अगर आप चाहते हैं कि फ्यूचर में आपको रोना न पड़े, तो अपने ई वॉलेट में कम पैसा रखें. ऐसे में अगर आपका मोबाइल किसी और के हाथ में आ भी गया, तो वो बहुत ज़्यादा पैसे का यूज़ नहीं कर पाएगा.

कार्ड डिटेल सेव न करें
मानाकि कार्ड डिटेल सेव करने से आपको पेमेंट करने में आसानी होती है, लेकिन ये सही नहीं है. ऐसा करना भारी पड़ सकता है. किसी के हाथ मोबाइल लगने पर, वो आपका पूरा पैसा ख़त्म कर सकता है.

इन सेफ्टी ट्रिक्स को अपनाकर आप अपने ई वॉलेट को सेफ रख सकते हैं.

श्वेता सिंह

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फास्ट ट्रैक पर स्लो होती ज़िंदगी (The Fast Life And It’s Impact On Relationships)

Impact On Relationships

चलते-चलते हम दौड़ने लगे… दौड़ थोड़ी और तेज़ हुई… फिर और भी तेज़… बहुत-से लोग जब हमसे तेज़ दौड़ने लगे, तो हम भी उनसे आगे निकलने के लिए और तेज़ भागने लगे… इस दौड़-भाग में क्या कुछ पीछे छूटता जा रहा है, क्या कुछ खो रहा है, हमने न देखा, न समझा और न ही जानने की कोशिश की… लेकिन कहीं ऐसा न हो कि जब हम होश में आएं, तब तक बहुत देर हो जाए. बेहतर होगा कि समय रहते संभल जाएं, ताकि ज़िंदगी व रिश्तों में सामंजस्य बना रहे.

Impact On Relationships

क्या-क्या प्रभावित हो रहा है?
यह सच है कि बहुत कुछ पाने के लिए बहुत कुछ खोना भी पड़ता है, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं कि कुछ पाने के लिए आप सब कुछ ही खो दें. व्यस्त ज़िंदगी अब हमारी आदत में शुमार हो चुकी है, लेकिन इस व्यस्तता ने हमारे रिश्ते, हमारी सेहत, हमारे निजी क्षण व हमारे बच्चों को भी काफ़ी हद तक प्रभावित किया है. किस तरह, आइए जानें-

रिश्ते
– यहां हम स़िर्फ पति-पत्नी के ही नहीं, हर तरह के रिश्तों का ज़िक्र कर रहे हैं. कामयाब ज़िंदगी की चाह और अधिक से अधिक पैसा कमाने की ख़्वाहिश ने हमारी प्राथमिकताएं पूरी तरह से बदलकर रख दी हैं.
– हमारे पास अब समय की कमी रहती है. अगर इसके लिए हमें टोका जाता है, तो हमें खीज ही होती है.
– सुकून से बैठकर अपनों से बात करना अब हमें समय की बर्बादी लगती है. हमारे तर्क कुछ इस तरह के होते हैं- जो काम फोन पर या मैसेज से हो सकता है, उसके लिए पर्सनली मिलने की क्या ज़रूरत… सोशल नेटवर्किंग साइट्स के ज़रिए तो सबका हाल-चाल पता चल ही जाता है, तो वेकेशन पर उन्हीं के पास जाने की क्या ज़रूरत है… रिश्तेदार के यहां जाने का टाइम नहीं, थकान ही मिटानी है, तो अच्छा होगा दो दिन के लिए किसी रिसॉर्ट में जाकर चिल करें… तुम लोग सारा दिन घर पर आराम करते हो, तुम्हें क्या पता कितना स्ट्रेस होता है… मूवी या डिनर पर बाहर जाने से अच्छा है, घर पर ही कुछ मंगा लेते हैं… इस तरह की बातें हम और आप अक्सर हमारे अपनों से करते हैं, जो हमें तो तर्कपूर्ण लगती हैं, पर उन्हें तकलीफ़ देती हैं.
– चाहे भाई-बहन हों या पैरेंट्स हमारी फास्ट लाइफ का प्रभाव सभी पर पड़ रहा है. उनके साथ हमारी बॉन्डिंग ढीली पड़ रही है. उनका हालचाल पूछने तक के लिए हमें एक्स्ट्रा एफर्ट डालकर समय व ़फुर्सत निकालनी पड़ती है.
– हमारे क्लाइंट्स, कलीग्स और दोस्त हमारे रिश्तों से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं. अपनों को और ख़ासतौर से पैरेंट्स को हम बहुत ही कैज़ुअली लेने लगे हैं, जिससे रिश्तों में नीरसता पसरती जा रही है.

सेहत
– ऐसा नहीं है कि स़िर्फ हमारे रिश्ते ही स्लो ट्रैक पर आ गए हैं, हमारी सेहत भी इससे काफ़ी प्रभावित हो रही है.
– कम उम्र में ही थकान और तनाव हम पर हावी होने लगता है.
– लाइफस्टाइल डिसीज़, जैसे- हार्ट प्राब्लम्स, डायबिटीज़, ओबेसिटी, जोड़ों में दर्द आदि सामान्य सी बात हो गई है.
– अल्कोहल, अनहेल्दी फूड, नींद पूरी न होना- ये तमाम तरह की चीज़ें अब रोज़मर्रा की बात हो गई है.
– न स़िर्फ शारीरिक, मानसिक थकान भी हम पर हावी रहती है, जिसके परिणामस्वरूप कई मनोवैज्ञानिक व व्यावहारिक समस्याओं क दख़ल हमारे जीवन में अब आम होता जा रहा है.

पर्सनल लाइफ
– ख़ूबसूरत, निजी पलों को जीना हम लगभग भूल ही गए हैं.
– हल्के-फुल्के रूमानी क्षणों से लेकर सेक्स लाइफ तक हमारी फास्ट लाइफ की भेंट चढ़ती जा रही है.
– यही वजह है कि रिश्ते कमज़ोर पड़ते जा रहे हैं और उनके टूटने की संख्या भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है.
– अपने पार्टनर ही नहीं, ख़ुद अपने लिए भी समय न होने का रोना हम अक्सर रोते हैं, जिससे हमें पर्सनल स्पेस नहीं मिल पाती और इसका असर हमारी क्रिएटिविटी व काम करने की क्षमता पर भी पड़ता है.

बच्चे
– बच्चों को हम परफेक्ट बनाने की चाह रखते हैं, लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि बच्चे हमें ही फॉलो करते हैं. उन्हें परफेक्ट बनाने के लिए हमें भी अपने व्यवहार में परफेक्शन लाना होगा.
– उनके ही सामने हम मनमानी करते हैं. अपने पैरेंट्स को इग्नोर करते हैं, स्मोक-ड्रिंक करते हैं, ऑफिस का टेंशन घर पर लाते हैं, अपने पार्टनर पर उसका ग़ुस्सा निकालते हैं, देर रात तक टीवी देखते हैं और ये उम्मीद करते हैं कि बच्चे वही करें जो हम उन्हें कह दें.
– हम अनहेल्दी खाएंगे, अनहेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएंगे, तो बच्चों को हेल्दी हैबिट्स कैसे सिखाएंगे.

लाइफस्टाइल
– फास्ट लाइफ में सब कुछ फास्ट हो गया है और हमारी लाइफस्टाइल भी बहुत हद तक बदल गई है.
– गैजेट्स और तकनीक के आदी हो गए हैं.
– बिना मोबाइल और लैपटॉप के बेचैनी महसूस होने लगती है.
– सोशल नेटवर्किंग साइट्स ही भावनाओं के आदान-प्रदान का ज़रिया हो गई है.
– अंजानों के बारे में सब कुछ जानने लगे हैं और अपनों से अनजान होते जा रहे हैं.
– मोटापा व आलस्य बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते कई तरह की समस्याएं हो रही हैं.
– एक अध्ययन के मुताबिक लोग इतने आलसी हो गए हैं कि थोड़ी-सी दूरी तय करने के लिए भी वो चलने की बजाय ऑटो या प्राइवेट गाड़ी ही लेना पसंद करते हैं.
– सीढ़ियों की बजाय लिफ्ट ही लेते हैं, भले ही उन्हें पहली या दूसरी मंज़िल पर ही जाना हो.

क्या आप बहुत फास्ट जी रहे हैं?
फास्ट लाइफ किस तरह से और किन-किन स्तरों पर हमें प्रभावित कर रही है, यह जानने के लिए कई तरह के शोध भी किए गए. 25 वर्ष व इससे अधिक की आयु के 550 लोगों पर किए गए एक शोध के मुताबिक़ तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी ने हमारी द़िक्क़तें हर स्तर पर बढ़ाई हैं, जिसका परिणाम है कि शराब का सेवन कई गुना बढ़ा है, पेट व बदहज़मी की समस्या बढ़ गई है, चिड़चिड़ापन, सेक्स की इच्छा में कमी आदि समस्याएं उत्पन्न हुई हैं.
– लाइफ इन द फास्ट लेन नाम की इस रिपोर्ट में यह पाया गया कि 85% लोग बदहज़मी की समस्या से जूझ रहे थे और 62% लोग सेक्स की इच्छा में कमी महसूस कर रहे थे.
– पांच में से एक ने यह माना कि वीकेंड में वो ऑफिस का काम घर ले जाते हैं.
– जबकि आधे लोगों ने यह माना कि वीकेंड में महीने में एक बार वो काफ़ी ज़्यादा तनाव व थकान महसूस करते हैं.
– 61% लोग शाम के खाने के लिए स़िर्फ 15-30 मिनट का ही समय निकाल पाते हैं, जबकि 80% लोग तनाव के कारण अत्यधिक शराब का सेवन करते हैं.
– इसके अलावा धैर्य की कमी, ग़ुस्सा, चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण उनमें बढ़ रहे हैं.
– एक्सपर्ट्स के अनुसार डायट और फिज़िकल एक्टिविटी के बीच सामंजस्य बैठाकर हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी के बुरे प्रभावों से काफ़ी हद तक बचा जा सकता है. स्ट्रेस और टाइम मैनेजमेंट के ज़रिए भी तनाव से काफ़ी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है, जैसे- यदि आप ट्रैफिक में फंसे हैं, तो झल्लाने से बेहतर है कि कोई ज़रूरी फोन करके उस समय का सदुपयोग करें या घर, दोस्त या रिश्तेदार का हालचाल ही पूछ लें. इसी तरह से लंच टाइम में आप कुछ शॉपिंग कर सकते हैं या ज़रूरी सामान की लिस्ट तैयार कर सकते हैं.
– सब कुछ पाने के लिए हम अपनी भूख और नींद तक से कॉम्प्रोमाइज़ कर रहे हैं. समय पर न खाने के कारण जहां कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो रही हैं, वहीं एक तथ्य यह भी है कि अब लोगों को औसत नींद पहले के मुकाबले कम मिलने लगी है. इस वजह से काम और क्रिएटिविटी पर  तो असर होता ही है, लेकिन सड़क दुर्घटनाएं भी अधिक होती हैं. यहां तक कि अल्कोहल यानी शराब पीकर गाड़ी चलाने से जो दुर्घटनाएं होती हैं, उसके मुकाबले नींद पूरी न होने के कारण होनेवाली दुर्घटनाओं की संख्या कहीं अधिक है.

– ब्रह्मानंद शर्मा

 

कैसे सुलझाएं लाइफस्टाइल संबंधी सेक्स प्रॉब्लम्स? (How to Fix Lifestyle Related Sex Problems?)

बेहतर सेक्स लाइफ के लिए बदलें ये आदतें (Get Rid Of Bad Habits For A Better Sex Life)

Better Sex Life

वैवाहिक जीवन की सफलता बहुत हद तक आपकी सेक्स लाइफ (Better Sex Life) पर निर्भर करती है. सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के चक्कर में पार्टनर इस तरह की ग़लतियां कर बैठते हैं, जिनका उन्हें अनुमान ही नहीं होता. हालांकि ये ग़लतियां नहीं, कुछ बुरी आदतें होती हैं, जिनका सेक्स लाइफ पर बुरा प्रभाव पड़ता है. आइए जानें, ऐसी ही कुछ बुरी आदतें और उनके समाधान के बारे में, जो आपकी सेक्स लाइफ पर बुरा असर डालती हैं.

Better Sex Life

एक्सरसाइज़ न करना: एक्सरसाइज़ केवल कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को हेल्दी बनाए रखने के लिए ही नहीं, बल्कि इरेक्शन और कामेच्छा को बढ़ाने के लिए भी बहुत ज़रूरी है. फीमेल सेक्सुअल बीमारियों के एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक्सरसाइज़ करने से न केवल वे फिट रहती हैं, बल्कि सेक्स हार्मोन (एंडोर्फिन)  में वृद्धि होती है, जिसके कारण वे अच्छा महसूस करती हैं.

कैसे बदलें इस आदत को? अपनी व्यस्त दिनचर्या में से एक्सरसाइज़ के लिए कम-से-कम 30 मिनट का समय ज़रूर निकालें.

  • अच्छी सेक्स लाइफ के लिए ऐरोबिक्स भी बेस्ट एक्सरसाइज़ है. एक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि ऐरोबिक्स करने से इरेक्टाइल डिसफंक्शन होने की संभावना 30% कम हो जाती है.
  • चाहें तो योग की बजाय सप्ताह में कम-से-कम 3 बार 30 मिनट तक स्विमिंग या वॉकिंग भी कर सकते हैं.

अधिक तनाव लेना: शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्तर पर भी तनाव साइलेंट किलर का काम करता है. तनाव बढ़ने पर कार्टिसोल और एड्रेनालिन के स्तर में वृद्धि होती है, जिसका असर सेक्स हार्मोन पर पड़ता है.

कैसे बदलें इस आदत को? स्ट्रेस मैनेजमेंट टेकनीक्स, जैसे- योग, प्राणायाम-कपालभाति, अनुलोम-विलोम आदि करें.

  • लाफ्टर थेरेपी के द्वारा भी तनाव कम किया जा सकता है.
  • ख़ुद को व्यस्त रखने के लिए चाहें तो कोई हॉबी क्लासेस भी जॉइन कर सकते हैं.
  • घर और ऑफिस के कामों को निबटाने के लिए टाइम मैनेजमेंट टेकनीक अपनाएं.
  • यदि घर और ऑफिस की किसी समस्या के कारण तनाव बढ़ रहा है, तो पार्टनर के साथ शेयर करके समस्या का समाधान निकालें.
  • यदि तनाव का असर सेक्सुअल लाइफ पर हावी हो रहा हो, तो कपल तुरंत किसी मनोचिकित्सक से मिलें.

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पार्टनर की इच्छाओं को अनदेखा करना: सेक्सोलॉजिस्ट के अनुसार, अधिकतर दंपतियों को यह शिकायत रहती है कि सेक्स (Better Sex Life) के दौरान पार्टनर यह जानने की कोशिश ही नहीं करते हैं कि दूसरा पार्टनर उनसे क्या चाहता है, क्या अपेक्षा रखता है, जिसके कारण न केवल सेक्स लाइफ में दूरियां बढ़ने लगती हैं, बल्कि वैवाहिक जीवन में समस्याएं आने लगती हैं.

कैसे बदलें इस आदत को? पार्टनर को चाहिए फोरप्ले के दौरान उनकी इच्छाएं पूछें.

  • पार्टनर का मज़ाक उड़ाने की बजाय उसकी भावनाओं का सम्मान करें.
  • सेक्स लाइफ को एंजॉय करने के लिए नए-नए एक्सपेरिमेंट करें.
  • रिलैक्स मूड व रिलैक्स बॉडी के साथ बेडरूम में जाएं. ख़राब मूड और अधिक थकान के कारण कपल्स सेक्स लाइफ को एंजॉय नहीं कर पाएंगे.
  • बेडरूम का माहौल रोमांटिक बनाएं.
  • छोटे-छोटे झगड़े को बेडरूम में लेकर न जाएं. इन छोटे-छोटे झगड़ों से भी सेक्स लाइफ पर बुरा असर पड़ता है.
  • सेक्सुअल प्रॉब्लम होने पर पार्टनर के साथ ज़बर्दस्ती करने की बजाय उसकी भावनाओं को समझें.

सेक्सुअल कम्युनिकेशन न करना: वैवाहिक जीवन की सफलता का एक अहम् पहलू है, सेक्सुअल कम्युनिकेशन. संकोची व शर्मीले स्वभाववाली महिलाएं और पुरुष अक्सर सेक्स कम्युनिकेशन करने से कतराते हैं या असहज महसूस करते हैं, जिसके कारण उनकी सेक्स लाइफ ख़राब हो सकती है.

कैसे बदलें इस आदत? सेक्सुअल कम्युनिकेशन करते समय सभ्य भाषा का इस्तेमाल करें.

  • बातचीत के दौरान अपनी भावनाओं को पार्टनर के साथ शेयर करें.
  • पार्टनर को बताएं कि उनके साथ सेक्सुअल कम्युनिकेशन करके आप कैसा फील करते हैं.
  • बिना रोक-टोक पार्टनर की बातों को सुनें.
  • सेक्सुअल कम्युनिकेशन करते समय पार्टनर न तो एक-दूसरे को कोई सलाह देने की कोशिश करें और न ही आलोचना करें.
  • एक-दूसरे के संपर्क में रहें. दिन में कम-से-कम एक बार तो फोन पर बातचीत ज़रूर करें.
  • आपसी मनमुटाव होने पर भी बातचीत करना न छोड़ें.
  • सेक्सुअल प्रॉब्लम होने पर संकोच या शर्माने की बजाय पार्टनर से बात करें.

पर्याप्त नींद न लेना: थकान, देर रात तक सोना और नींद पूरी न होना आदि ऐसी बुरी आदतें हैं, जिनका असर भी सेक्स लाइफ पर पड़ता है.

कैसे बदलें इस आदत को? रात के समय हैवी डिनर न करें.

  • सोने से 2 घंटे पहले डिनर करें.
  • डिनर में प्रोटीन बेस्ड फूड न खाएं, क्योंकि प्रोटीन बेस्ड फूड को डायजेस्ट होने में अधिक समय लगता है.
  • सोने से पहले कॉफी, धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन न करें.
  • मोबाइल, टीवी, लैपटॉप आदि को बेड से दूर रखें.
  • कमरे का तापमान मॉडरेट रखें, ताकि अच्छी नींद आए.
  • कमरे की सारी लाइट्स ऑफ करें और लाइट म्यूज़िक सुनें.
  • माहौल को रोमांटिक बनाने के लिए एरोमैटिक कैंडल्स और लाइट्स जलाएं.

कैफीन व रिफाइंडयुक्त चीज़ें खाना: अधिक मात्रा में कैफीन और रिफाइंडयुक्त खाद्य पदार्थों को खाने से कामेच्छा में कमी आती है और सेक्सुअल परफॉर्मेंस प्रभावित होती है.

कैसे बदलें इस आदत को? ऐसी डायट लें, जो माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और एंटी ऑक्सीडेंट्स लिबिडो (इमोशनल सेक्सुअल डिज़ायर्स) को बढ़ाती हों.

  • इसके अलावा अपने डायट में गाजर, पालक, ऑस्टर और मिल्क प्रोडक्ट्स को शामिल करें.
  • रात के समय कैफीन व रिफांइड फूड खाने से बचें.
  • अच्छी सेक्स लाइफ के लिए सेक्स बूस्टर फूड का सेवन करें.
  • अपने डायट में ज़िंक व आयोडीन अधिक मात्रा में लें.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

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GST- कितनी आसान होगी ज़िंदगी? (How much easier life would be GST-?)

easier life

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GST-Bill

सालों से अधर में लटका जीएसटी बिल आख़िरकार राज्यसभा में पास हो ही गया. संसद के मानसून सत्र में 197 वोटों के साथ जीएसटी बिल को पास कर दिया गया है. ऐसा अनुमान है कि अगले साल यानी 2017 में इसे लागू भी कर दिया जाएगा. इसके लागू होते ही आम आदमी को कई तरह से फ़ायदा होगा.

जानें क्या है जीएसटी ?
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर यानी इंडायरेक्ट टैक्स है. इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है, जहां जीएसटी लागू नहीं है, वहां वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लगाए जाते हैं.

जीएसटी के अनेक फ़ायदे
अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं, जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है. जीएसटी लागू होने से उत्पादों की कीमत कम होगी. जीएसटी लागू होने से देश की जीडीपी में एक से पौने दो फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है.

समान प्राइस रेट
जीएसटी लागू होने से सबसे बड़ा फ़ायदा आम आदमी को होगा. पूरे देश में किसी भी सामान को ख़रीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी. उदाहरण के लिए अगर आप मुंबई से कार ख़रीदते हैं, तो आपको अलग क़ीमत चुकानी पड़ती है और उसी कार को अगर आप अहमदाबाद से ख़रीदते हैं, तो अलग क़ीमत. अब ऐसा नहीं होगा. जीएसटी बिल लागू होने के बाद आपको कार की एक ही क़ीमत चुकानी पड़ेगी.

कम होगी महंगाई
जानकारों की मानें, तो जीएसटी बिल के लागू होने के बाद काफ़ी हद तक महंगाई पर लगाम लगाया जा सकता है. चीज़ों के रेट अपने आप कम हो जाएंगे, जिससे आम आदमी को इसका फ़ायदा मिलेगा. फिलहाल जो सामान ख़रीदते समय लोगों को उस पर 30-35 प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है, वो भी घटकर 20-25 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है. आम आदमी के साथ कंपनियों और व्यापारियों को भी फ़ायदा होगा.

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हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए इन ग़लतियों से बचें (Dos and donts for happy married life)

Dos and donts for happy married life

हैप्पी मैरिड लाइफ की चाह हर कपल की होती है. शादीशुदा ज़िंदगी में कई बार ऐसे पल आते हैं, जब रिश्तों में पहले जैसी ताज़गी नहीं आ पाती. रिश्तों में नयापन लाना मुश्किल नहीं है, लेकिन इसके लिए दोनों को अपनी ओर से भी ज़रूरी प्रयास करने पड़ते हैं. ऐसा न करने पर उनके बीच की दूरियां बढ़ने लगती हैं. (Dos and donts for happy married life) वैवाहिक जीवन तभी खुशहाल बना रह सकता है, जब पति-पत्नी के बीच प्यार सलामत रहे.

Dos and donts for happy married life

बदलते व़क्त के साथ प्रोफेशनल लाइफ के बीच लगभग हर कपल इस एहसास को अपने जीवन में कायम रखने के लिए संघर्ष करता है, लेकिन सभी के लिए ऐसा करना आसान नहीं होता है. तब रिश्ते में कम होता प्यार और बढ़ती समस्याओं की वजह से कई कपल डाइवोर्स का डिसीजन लेते हैं, लेकिन क्या वाकई यह सही रास्ता है. आमतौर पर देखा गया है कि संयम की कमी और अधूरी उम्मीदें ही तलाक़ के बढ़ते मामलों के लिए ज़ि़म्मेदार है, लेेकिन समय रहते अगर इन समस्याओं को हल कर लिया जाए, तो आपका रिश्ता हमेशा बना रह सकता है, खुशहाल.

मेच्योेरिटी लेवल
रिश्ते में पैदा होनेवाले तनाव और मनमुटाव का कारण बताते हुए मैरिज कांउसलर डॉ. ओवैस अकरम फारूखी कहते हैं कि आजकल कपल्स के बीच सब्र नहीं होता. वे अपने रिश्ते को मेच्योर होने का व़क्त देना ही नहीं चाहते. उन्हें हर चीज़ परफेक्ट चाहिए, जो कि व्यावहारिक स्तर पर संभव नहीं हो पाती, लेकिन यह कोई बड़ी समस्या नहीं है. रिश्ते में आनेवाली इस तरह की द़िक्क़तों को आसानी से हल किया जा सकता है. इसके लिए बस आपको अपने भीतर झांकना होगा और हर वह कोशिश करनी होगी, जिससे आपकी शादीशुदा ज़िंदगी खुशहाल बनी रहेे. इसलिए अपना मेच्योरिटी लेवल डेवलप करें. इससे छोटी-छोटी बातों पर आपके बीच मनमुटाव भी नहीं होगा.

ना हो कम्यूनिकेशन गैप
भागदौड़भरी ज़िंदगी में पति-पत्नी मुश्किल से एक-दूसरे के साथ व़क्त बिता पाते हैं, जो कि किसी भी नए रिश्ते के लिए बेहद ज़रूरी होता है. ऐसे हालात में रिश्ते में इश्यू बढ़ते हैं, जो बिना कम्यूनिकेशन के नामुमकिन है. अधिकतर वर्किग कपल घर से 8 से 10 घंटे दूर रहते हैं. ऐसे में किसी भी मसले पर एक-दूसरे की राय लेने का इन्हें व़क्त ही नहीं मिल पाता. कम्यूनिकेशन किसी भी रिश्ते का आधार है. शादी के लिए तो यह ख़ासतौर पर ज़्यादा महत्वपूर्ण है. अपनी प्राथमिकताएं समझें और एक-दूसरे से बात करें. इसलिए कहा जाता है कि नए कपल्स को एक दूसरे के साथ शादी से पहले भी कुछ व़क्त बिताना चाहिए. जब ऐसा नहीं होता, तो इनमें से ज़्यादातर के बीच रोमांस पनप ही नहीं पाता. इसलिए एक दूसरे को क्वालिटी टाइम दें.

सपोर्ट करें
कई बार पति-पत्नी के बीच बेमतलब की ग़लतफ़हमियां आ जाती हैं और न सुलझ पाने की सूरत में बढ़ने लगती हैं. ऐसे में ज़रूरी है कि अपने पार्टनर पर भरोसा करें.

Dos and donts for happy married life

एक-दूसरे को बदलने की कोशिश न करें
अगर पत्नी अपने पति की बेस्ट फ्रेंड बन सके, तो इससे अच्छा और कुछ नहीं होता. इसके लिए आपको अपने खोल से निकलना होगा. दोस्तों की चाहतें, ख्वाहिशें अलग होती हैं. ज़रा सोचिए, आप जब अपने दोस्तों  से मिलते हैं, तो वो पल कितने सुकून और मज़े से बिताते हैं. अपने जीवनसाथी के साथ भी आपको यही करना होेगा. दोस्त बनने की पहली शर्त है कि एक-दूसरे को बदलने की कोशिश ना करें, एक-दूसरे की बात शेयर करें, मदद करें और एक दूसरे के साथ की सराहना भी करें और कोेई किसी पर हावी ना हो.

ज़्यादा रोकटोक न करें
अगर आपको लग रहा है कि ज़िंदगी में कहीं स्थिरता आ गई है, तो कुछ ऐसा काम कीजिए, जो आपको पसंद हो या आपने पहले कभी नहीं किया हो, या आपने पहलेे कभी नहीं किया हो. दोस्तों के साथ कहीं घूम आइए. किसी हॉबी क्लास में दाख़िला लीजिए. अगर आपके पति अपने दोस्तों के साथ शाम बिताना चाहें, तो उन्हें रोकें नहीं. यह ज़रूरी नहीं कि आप हर जगह साथ जाएं. एक-दूसरे को स्पेस दीजिए और ब्रेक लीजिए. मनमुटाव अपने आप दूर होते जाएंगे.

अपने लुक्स को नज़रअंदाज़ करना
कहीं ऐसा तो नहीं कि आप भी शादी के बाद अपना उस तरह ख़्याल नहीं रखतीं, जैसे शादी के पहले रखती थीं. ना आप अपने पहनने का ख़्याल रखती हैं और ना ही बढ़ती हुई चर्बी का. याद कीजिए, शादी के बाद के दिनों में आप दोनों कैसे दिखते थे. अगर ज़िंदगी में रोमांस बनाए रखना है, तो मन के साथ-साथ शरीर को भी चुस्त रखना होगा.

Dos and donts for happy married life

हर व़क्त शिकायत करना
कहीं ऐसा तो नहीं है कि आप दिन-रात बस अपनी समस्याओं के बारे में ही बात करते रहते हैं और आपका पार्टनर बस सुनता रहता है. अब आप उनकी भी सुनना शुरू कीजिए. आपके पार्टनर के पास भी  बहुत कुछ होगा, आपसे कहने को. घर की समस्याओं और बच्चों के अलावा भी बहुत कुछ वे आपसे शेयर करना चाहते होंगे. अक्सर पत्नियों की हर व़क्त की शिकायत की आदत से पति परेशान रहते हैं, जिससे रिश्ते में दूरियां बढ़ सकती हैं.

एक-दूसरे की पसंद-नापसंद को तवज्जो न देना
‘आप अपने भाई को फाइनेंशियली सपोर्ट क्यों कर रहे हैं,’ ‘मेरे लिए यह साड़ी क्यों लेेकर आए’, ऐसी हज़ार बातें हैं, जिनसे आप दोनों सहमत नहीं होते. आपकी तरह उन्हें भी आपकी कुछ बातें पसंद नहीं आती होंगी. मनमुटाव की बजाय बीच का रास्ता निकालें. अगर कोई बात आपको अच्छी नहीं लग रही, तो मन में रखने की बजाय उनसे कहें और सुनें भी. हो सकता हैं उनकी पसंद और शौक़ अलग हों.,

डॉ. ओवैस अकरम फारूखी मैरिज कांउसलर एवं मनोचिकित्सक, मेट्रो हॉस्पीटल, दिल्ली के अनुसार, “कोई भी शादी परफेक्ट नहीं होती है और इसे सही तरी़के से चलाने के लिए पति-पत्नी दोनों को ही साथ चलना होता है. अगर एक पहिया डगमगाएगा, तो दूसरे पर भी इसका असर पड़ता है. ज़रूरी है कि दोनों ही एक मेच्योरिटी लेवल का परिचय दें, तभी कोई भी शादी चल पाती है. पति और पत्नी दोनों को ही इसमें प्रयास करने होंगे. स़िर्फ एक-दूसरे पर इल्ज़ाम देने से अच्छा है कि दोनों पुरानी बातों पर ना जाकर एक नई शुरुआत करें.”

 

 

रिश्तों में ज़रूरत से ज़्यादा स्पेस कहीं कर न दे अपनों को दूर…(Too much space in relationships can be dangerous)

सोनू निगम बने रोडसाइड उस्ताद…ख़ुशियां बांटने का नया तरीक़ा

खोजता क्या है? ख़ुशियां यहीं हैं. जी हां ख़ुशियां आपके आसपास ही हैं, जिसे बिज़ी लाइफस्टाइल के चलते हम और आप देख नहीं पाते हैं. इन ख़ुशियों का एहसास कराया गायक सोनू निगम ने. सोनू ने बदला अपना लुक और एक बूढ़े गायक का लुक और हाथों में हारमोनियम थामे पहुंच गए लोगों के बीच. सड़क के एक किनारे बैठकर सोनू ने अपने हिट गाने गाए. सोनू की सुरीली आवाज़ सुनकर लोग उनके आसपास इकठ्ठा होने लगे. हालांकि कोई भी सोनू को पहचान नहीं पाया, लेकिन उनकी आवाज़ ने लोगों को वहां खड़े रहने पर मजबूर कर दिया. एक लड़के ने तो सोनू के पास आकर न सिर्फ उनका गाना अपने मोबाइल पर रिकॉर्ड किया, बल्कि जाते-जाते चुपके से उनके हाथों में 12 रुपए पकड़ाकर ये भी पूछ लिया कि आपने नाश्ता किया है कि नहीं. सोनू अपने इस वीडियो के ज़रिए यही संदेश देना चाहते हैं ख़ुशियां आपके आसपास ही हैं, उसे पहचानें और भविष्य की चिंता में आज की ख़ुशियों को अनदेखा न करें.