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ऐसे बीट करें समर हीट को (24 Ways To Beat The Summer Heat)

Ways To Beat The Heat

ऐसे बीट करें समर हीट को (Best Ways To Beat The Summer Heat)

गर्मी का मौसम (Summer Season) सुहाना तो नहीं लगता, लेकिन आप समर हीट (Summer Heat) को बीट करने के कुछ ट्रिक्स (Tricks) यूज़ कर सकते हैं, जिससे आप इस मौसम को भी ख़ुशगवार बना सकते हैं.

1. अपना दिन प्लान करें: कितने बजे उठना है और सुबह-सुबह क्या-क्या करना है, इसकी प्लानिंग करें, कुछ काम जो सुबह हो सकते हैं और कुछ काम जो सूरज छिपने के बाद किए जा सकते हैं, उनकी लिस्ट तैयार कर लें, क्योंकि इन दोनों ही समय पर गर्मी कम होती है.

2. जल्दी उठें और वॉक के लिए जाएं: गर्मियों में जल्दी उठने का नियम बना लें, क्योंकि उस व़क्त मौसम सच में सुहाना और ठंडा होता है. मंद-मंद हवा चलती है, जो आपको रिफ्रेश कर देती है. जॉगिंग या वॉक के लिए निकल जाएं. इससे आप दिनभर तरो-ताज़ा महसूस करेंगे.

3. वॉक के बाद ब्रेकफास्ट करें किसी कैफे में: यह आपको दिनभर की ऊर्जा देगा. किसी दिन या छुट्टी के दिन आप किसी कैफे में सुबह की ताज़गी का मज़ा ले सकते हैं. कॉफी या फ्रूट जूस और हेल्दी ब्रेकफास्ट करें. वहां बैठकर दोस्तों से फोन पर बात भी कर सकते हैं या फिर ऑफिस में क्या-क्या करना है, उसकी लिस्ट भी तैयार कर सकते हैं.

4. हाइड्रेट रहें: इस मौसम में शरीर में पानी की कमी हो सकती है. पसीना भी अधिक आता है. अपने साथ पानी की बोतल ज़रूर रखें. अपने डेस्क पर भी पानी की बोतल हमेशा भरी रखें, ताकि बीच-बीच में पानी पी सकें.

5. कूलिंग डायट लें: फ्रेश फ्रूट सलाद, फ्रेश वेजीटेबल जूस, नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ आदि लें. इससे आप लाइट और हेल्दी महसूस करेंगे. स्पाइसी, मसालेदार और जंक फूड अवॉइड करें. एरिएटेड ड्रिंक्स का भी अधिक सेवन न करें.

6. स्विमिंग करें: सुबह या शाम पूल में स्विम करके ख़ुद को रिफ्रेश करें. उसके बाद शावर लेंगे, तो और भी फ्रेश फील करेंगे.

7. कूलिंग स्पॉट्स की सहायता लें: कलाइयां, गर्दन के पीछे, पैरों में कई ऐसे स्पॉट्स होते हैं, जो आपको कूल रखते हैं. वहां वेट टिश्यू या टॉवेल को कुछ देर के लिए रखें और बॉडी हीट को बाहर आने दें.

8. फ्रेग्रेंस: पसीना दूर रखनेवाले कूल डीयो, बॉडी मिस्ट या टेल्कम पाउडर आसानी से उपलब्ध हैं आजकल. उनका इस्तेमाल करें.

9. हेयर स्टाइल: बालों को छोटा ही रखें. महिलाएं बालों का स्टाइल लूज़ और कंफर्टेबल रखें, ताकि पसीना अधिक न आए.

10. आउटफिट्स: लाइट कपड़े पहनें. कॉटन ही पहनें. बहुत अधिक टाइट या फिटेड कपड़े पहनने से बचें. सिल्क या हैवी फैब्रिक इस मौसम में अवॉइड करें. इसी तरह से व्हााइट या लाइट कलर के ही कपड़े पहनें, डार्क कलर्स अवॉइड करें.

11. मेडिटेशन करें: यह आपको बैलेंस करता है. ऊर्जा देता है. कोशिश करें कि रोज़ाना कुछ देर मेडिटेशन ज़रूर करें.

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12. शीतली प्राणायाम: यह बॉडी टेंप्रेचर को कंट्रोल करता है. गर्मी दूर करके शरीर को कूलिंग इफेक्ट देता है.
कैसे करें: आरामदायक स्थान पर बैठ जाएं. शरीर रिलैक्स रहे. जीभ को बाहर निकालकर दोनों किनारों से रोल करें, जैसे कोई ट्यूब हो. जीभ से सांस लें और अंत में जीभ को अंदर लेकर सांस को नाक के माध्यम से छोड़ें. आपको मुंह के भीतर काफ़ी ठंडक महसूस होगी. इस तरह यह प्रक्रिया 8-10 बार करें.

13. कूलिंग पैक्स का इस्तेमाल करें: सनटैन या सनबर्न होने पर एलोवीरा, ककड़ी, तरबूज़, चंदन पाउडर या मुल्तानी मिट्टी के पैक्स यूज़ करें. गुलाबजल को भी ठंडा करके फेस पर अप्लाई कर सकते हैं.

14. रूम को कूल रखें: ब्लाइंड कर्टेंस यूज़ करें, जिससे तेज़ धूप कमरे में न आ सके. इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स का प्रयोग कम करें, क्योंकि ये भी हीट प्रोड्यूस करते हैं. हालांकि एयरकंडिशन का ऑप्शन है, पर अगर आपको उससे एलर्जी है, तो पंखे का इस्तेमाल करें.

15. गुलाब की पत्तियों का प्रयोग करें: आयुर्वेदानुसार आपके मन, मस्तिष्क और भावनाओं पर गुलाब का कूलिंग और सूदिंग इफेक्ट होता है. गुलाब की पत्तियों को अपने सलाद, डेज़र्ट और ड्रिंक्स में डालें. गार्निश करें.

16. मून बाथ: फुल मून बाथ लें. मून की कूलिंग प्रॉपर्टीज़ आपको रिफ्रेश कर देंगी.

17. एरोमा थेरेपी: यह आपको समर में रिलैक्स करेगी और सुकून की नींद में भी मदद करेगी. एरोमा ऑयल्स, एसेंशियल ऑयल्स कूलिंग इफेक्ट देते हैं, क्योंकि इनमें मेंथॉल होता है. आप चाहें, तो अपने रूम में लाइट्स ऑफ करके एरोमैटिक कैंडल्स जलाएं.

18. वॉटर स्पोर्ट्स और वर्कआउट्स: समर में यहां टाइम ज़्यादा स्पेंड करें. आउटिंग के लिए भी जाएं, तो बीचेस या बोटिंग के लिए जाएं. अगर बाहर कहीं और जा रहे हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि तेज़ धूप में देर तक रहने की बजाय पेड़ या शेड्स की छांव में आकर कुछ देर आराम कर लें.

19. आइस कूल: बाहर जाने से पहले और बाहर से आने के बाद भी फेस व हाथ-पैरों पर आइस रब करें. इसके अलावा अपने पैरों को भी आइस वॉटर में कुछ देर तक रखें. इससे हीट का इफेक्ट कम हो जाएगा.

20. फैन को बनाएं कूलिंग एजेंट: यह काफ़ी पुराना, लेकिन कारगर तरीक़ा है कूलिंग का. याद कीजिए अपने आइस बॉक्स को आपने आख़िरी बार कब यूज़ किया था. अब समय आ गया है कि फ्रीज़र में पड़ी आइस ट्रेज़ का इस्तेमाल किया जाए. ढेर सारी आइस लेकर फैन के सामने रख दें. फिर फैन ऑन करके उसके सामने लेट जाएं. ठंडी-ताज़ा हवा मिलेगी और एसी का बिल भी नहीं बढ़ेगा.

21. बेड की बजाय फ्लोर पर जाएं: अगर आप बेड या सोफे पर सोते हैं, तो समर में अपना बिस्तर फ्लोर पर लगाएं और अगर आपका 2 मंज़िल या अधिक का अपार्टमेंट है, तो ग्राउंड फ्लोर पर जाकर ही सोएं. इससे हीट का असर कम होगा.

22. लाइट्स ऑफ रखें: समर में नेचुरल लाइट अधिक देर तक रहती है, उसका फ़ायदा उठाएं. सुबह भी बेवजह लाइट्स ऑन न करें और शाम को भी बहुत जल्दी लाइट्स ऑन न करें. डिम लाइट ही ऑन रखें, क्योंकि लाइट्स हीट बढ़ाती हैं.

23. स्टोव की हीट से बचें, रूम टेम्प्रेचर डिशेज़ लें: समर सीज़न हॉट चिकन या गर्मागर्म परांठे खाने का नहीं होता. इन्हें पकाने और पचाने में भी समय अधिक लगता है, जिससे आप ज़्यादा देर तक स्टोव के सामने एक्सपोस्ड रहते हो और हीट अधिक महसूस होती है. बेहतर होगा रूम टेम्प्रेचर डिशेज़ व लाइट फूड लें, जिन्हें पकाने में अधिक समय न लगे या फिर आप डेज़र्ट व सलाद अधिक लें. नेचुरल फ्रूट जूस लें.

24. सोने से पहले भरपूर पानी पीएं: बेड पर जाने से पहले पानी ज़रूर पीएं, क्योंकि सोने के बाद जब पसीना आता है, तो डीहाइड्रेशन का ख़तरा बढ़ जाता है.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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समर केयर टिप्स (Summer Care Tips)

Summer Care Tips

  • पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए प पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए अच्छी कंपनी का डियो या सुगंधित पाउडर लगाएं.
  • दिन में दो बार स्नान करें.प यदि आप कामकाजी हैं, तो शाम को घर लौटने पर 10-15 मिनट तक ठंडे पानी में पैरों को डुबोकर रखें. इससे पैरों को आराम मिलेगा और आपको गर्मी से राहत.
  • ज़्यादा से ज़्यादा पानी पीएं. ख़ासकर घर से बाहर निकलते समय पानी ज़रूर पीएं. इससे आपके शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाएंगे और त्वचा भी ग्लो करेगी.
  • सुबह जल्दी उठकर लॉन में हरी घास पर टहलें.प घर से बाहर हों, तो थोड़ी-थोड़ी देर में नींबू पानी या जूस पीएं. हो सके, तो अपने साथ एक बॉटल में नींबू का शर्बत कैरी करें. इससे इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.प दूध पोषक होने के साथ ठंडी तासीर का भी है, इसलिए रोज़ाना एक ग्लास दूध ज़रूर पीएं.
  • ज़्यादा ऑयली व गरिष्ठ भोजन करने से बचें.
  • अपने डायट में सलाद, जूस और फल शामिल करें. ढेर सारे फलों का सेवन करें, इससे त्वचा ग्लो करेंगी व गर्मी से भी राहत मिलेगी.
  • गर्मियों में अक्सर शरीर में पित्त की प्रॉब्लम हो जाती है, इसके लिएसुबह-सुबह ठंडा दूध पीएं.
  • छाछ को अपने भोजन का नियमित रूप से हिस्सा बनाएं. यह शरीर को ठंडक देता है.
  • लस्सी भी गर्मी से राहत दिलाती है.प गर्मी के कुछ महीनों में हो सके, तो चाय-कॉफी का सेवन बिल्कुल छोड़ दें, क्योंकि ये शरीर को गर्मी पहुंचाते हैं और सेंट्रल नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित करते हैं.
  • अगर बहुत ज़्यादा ज़रूरी न हो तो दिन में 11 बजे से 3 बजे तक धूप में न निकलें, क्योंकि इस समय सूरज की अल्ट्रा वॉयलेट किरणों का बहुत तेज़ और बुरा प्रभाव पड़ता है.
  • घर से बाहर जाएं या घर में रहें. अपनी त्वचा को सनस्क्रीन प्रोटेक्शन ज़रूर दें.
  • जिस तरह गर्मियों में शरीर डिहाइड्रेट होता है, उसी तरह स्किन भी डिहाइड्रेट होती है. ऐसे में स्किन का मॉइश्‍चर लेवल बनाए रखने के लिए ज़रूरी है उसे मॉइश्‍चराइज़ करना, ताकि स्किन को नरिशमेंट मिले. इसलिए गर्मियों में भी मॉइश्‍चराइज़र लगाना न भूलें.

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इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

Thyroid Causes

इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

समय के साथ-साथ हमारी जीवनशैली बदल रही है, खानपान बदल रहा है, काम करने के तरी़के बदल रहे हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि इन बदलावों को हमारे मन के साथ-साथ हमारा तन भी स्वीकार करे. कई बार हमें इस बात का बिल्कुल एहसास नहीं होता है कि सामान्य से लगनेवाले ये छोटे-छोटेे बदलाव किसी गंभीर बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं. ऐसी ही एक हेल्थ प्रॉब्लम (Health Problem) है थायरॉइड (Thyroid), जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं.

क्या है थायरॉइड?

हम में से अधिकतर लोगों को यह बात मालूम नहीं होगी कि थायरॉइड किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह एक ग्रंथि का नाम है, जो गर्दन में सांस की नली के ऊपर और वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में तितली के आकार में बनी होती है. यह ग्रंथि थायरॉक्सिन नामक हार्मोन का उत्पादन करती है. हम जो भी खाते हैं, उसे यह हार्मोन ऊर्जा में बदलता है. जब यह ग्रंथि ठीक तरह से काम नहीं करती है, तो शरीर में अनेक समस्याएं होने लगती हैं.

पहचानें थायरॉइड के लक्षणों को?

एनर्जी का स्तर बदलना

थायरॉइड की समस्या होने पर शरीर में ऊर्जा का स्तर बदलता रहता है. ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) में मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है या फिर उसमें अनियमित बदलाव होता रहता है, जिसके कारण अधिक भूख लगना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसी समस्याएं होती हैं. इसी तरह से अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) में शरीर में ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है, जिसकी वजह से अधिक थकान, एकाग्रता में कमी, घबराहट और याद्दाश्त में कमी आने लगती है.

वज़न का घटना-बढ़ना

ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) ग्रंथि की समस्या होने पर मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है, जिसके कारण व्यक्ति की भूख बढ़ जाती है. वह ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाने लगता है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा खाने पर भी उसका वज़न घटने लगता है. वहीं दूसरी ओर अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) होने पर मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिसके कारण भूख कम लगती है और कम खाना खाने पर भी वज़न लगातार बढ़ता रहता है.

आंतों की समस्या

ओवरएक्टिव थायरॉइड और अंडरएक्टिव थायरॉइड दोनों के कारण आंतों में  भी गड़बड़ी की समस्या हो सकती है. ये दोनों ही भोजन पचाने और मल-मूत्र के विसर्जन करने की क्रियाओं में मुख्य भूमिका निभाते हैं. अंडरएक्टिव थायरॉइड होने पर व्यक्ति कब्ज़ और डायरिया से परेशान रहता है.

गले में सूजन

सर्दी-जुक़ाम के कारण गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन आने लगता है, लेकिन इन लक्षणों की अनदेखी बिल्कुल न करें. कई बार सिंपल से दिखनेवाले ये लक्षण थायरॉइड के भी हो सकते हैं, क्योंकि थायरॉइड होने पर भी गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन के साथ-साथ गले में सूजन आती है. अगर गले में सूजन हो, तो इसकी अनदेखी करने की बजाय थायरॉइड टेस्ट कराएं.

मांसपेशियों में दर्द

शारीरिक मेहनत और वर्कआउट करने के बाद बॉडी पेन होना आम बात है. लेकिन ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी मांसपेशियों में दर्द होता है. कई बार मांसपेशियों में दर्द के साथ-साथ कमज़ोरी, थकान, कमर व जोड़ों में दर्द और सूजन भी आती है.

अनिद्रा की समस्या

थायरॉइड के प्रमुख लक्षणों में अनिद्रा भी एक लक्षण है. थायरॉइड ग्रंथि का असर व्यक्ति की नींद पर भी पड़ता है, जैसे- रात को नींद नहीं आना, बेचैनी, सोते समय अधिक पसीना आना आदि. नींद न आने के कारण कई बार चक्कर भी आने लगते हैं.

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बालों का झड़ना और त्वचा का ड्राई होना  

हाइपरथायरॉइडिज़्म से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा धीरे-धीरे ड्राई होने लगती है. त्वचा के ऊपर की कोशिकाएं (सेल्स) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिसके कारण त्वचा में रूखापन आने लगता है. थायरॉइड के कारण त्वचा में रूखेपन के अलावा बालों की भी कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं, जैसे- बालों का झड़ना, रूखापन आदि.

तनाव में रहना

दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद थकान होना लाज़िमी है, लेकिन अगर आपको ज़रूरत से ज़्यादा ही थकान महसूस हो, तो इसकी वजह थायरॉइड भी हो सकती है. शुरुआत में इस बात का एहसास नहीं होता है कि थकान किस वजह से है, लेकिन जब थायरॉइड ग्रंथि ओवरएक्टिव हो जाती है, तो यह ग्रंथि शरीर में ज़रूरत से बहुत अधिक मात्रा में थायरॉइड हार्मोंस का निर्माण करने लगती है, जिसके कारण तनाव व बेचैनी होने लगती है.

पीरियड्स की अनियमितता

अधिकतर महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना आम बात है, लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं होता है कि अंडरएक्टिव और ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी पीरियड्स अनियमित होते हैं. इसके लक्षणों में लगातार बदलाव होने पर महिलाएं इस बात से परेशान रहती हैं. जब महिलाओं को हाइपरथायरॉइडिज़्म (ओवरएक्टिव थायरॉइड) की समस्या होती है, तो उन्हें सामान्य से अधिक रक्तस्राव होता है और जब महिलाएं हाइपोथायरॉइडिज़्म (अंडरएक्टिव थायरॉइड) से ग्रस्त होती हैं, तब उन्हें रक्तस्राव बहुत कम होता है या फिर होता ही नहीं है.

डिप्रेशन

अवसाद होने की एक वजह थायरॉइड भी हो सकती है, क्योंकि अवसाद में अधिक नींद आना या अनिद्रा की समस्या होती है. यदि व्यक्तिअंडरएक्टिव थायरॉइड से ग्रस्त है, तो मूड स्विंग होना, आलस, काम में मन न लगना जैसी समस्याएं होती हैं.

थायरॉइड को नियंत्रित करने के लिए क्या खाएं?

थायरॉइड के मरीज़ अगर उपचार के साथ-साथ अपने खानपान पर ध्यान दें, तो बहुत हद तक इसे नियंत्रित किया जा सकता है. उन्हें अपनी डायट में इन चीज़ों को शामिल करना चाहिए, जैसे-

मशरूम: इसमें सेलेनियम अधिक मात्रा में होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करता है.

अंडा: थायरॉइड के रोगियों को अपनी डायट में अंडा ज़रूर शामिल करना चाहिए. इसमें भी सेलेनियम होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करने के साथ कमज़ोरी को भी दूर करता है.

नट्स: वैसे तो नट्स सभी को खाने चाहिए, लेकिन थायरॉइड के मरीज़ों को नट्स ज़रूर खाना चाहिए. नट्स में ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो थायरॉइड के कारण होनेवाले हार्ट अटैक के ख़तरे को कम करते हैं.

दही: इसे खाने से इम्यूनिटी लेवल बढ़ता है और थायरॉइड भी नियंत्रित रहता है.

मेथी: इसमें ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो थायरॉक्सिन नामक हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.

   – पूनम शर्मा

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सुकूनभरी गहरी नींद के लिए अपनाएं ये स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks To Sleep Better At Night)

Tricks To Sleep Better At Night

सुकूनभरी गहरी नींद के लिए अपनाएं ये स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks To Sleep Better At Night)

अगर आप भी बिस्तर पर पहुंचकर देर रात तक करवटें बदलते रहते हैं या फिर रात को बार-बार आपकी नींद (Sleep) खुल जाती है, तो इन छोटे-छोटे स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks) से आपकी यह समस्या (Problem) दूर हो जाएगी.

–    सोने से एक घंटे पहले कमरे में मौजूद सभी ब्लू लाइट्स को बंद कर दें. दरअसल जब रात को हम सोने जाते हैं, तो हमारे शरीर से मेलाटोनिन नामक हार्मोन का स्राव होता है, जो हमें सुकूनभरी नींद देता है, लेकिन मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, आईपैड और वीडियोगेम से निकलनेवाली ब्लू लाइट के कारण मेलाटोनिन का स्राव तुरंत बंद हो जाता है.

–    दोपहर के बाद कैफीन न लें. कैफीन आपकी नींद को प्रभावित करता है, क्योंकि उसे पचने में चार से छह घंटे का समय लगता है. अगर गहरी नींद चाहते हैं, तो शाम को चाय या कॉफी पीना छोड़ दें.

–    दिन में आधे घंटे से ज़्यादा की नींद आपके रात की नींद को डिस्टर्ब करती है. दरअसल, दिन में ज़्यादा देर तक सोने से हमारा बॉडी क्लॉक डिस्टर्ब हो जाता है, इसलिए रात की नींद ख़राब होती है. अगर दिन में नींद लेने की आदत है, तो स़िर्फ आधे घंटे का पावर नैप लें.

–    आपका बिस्तर भी आपकी नींद में बाधा डाल सकता है. अगर बेडशीट, गद्दे और तकियों की क्वालिटी ख़राब हो गई हो, तो वो भी आपको ठीक से सोने नहीं देंगे.

–    स्टडी में यह बात साबित हो चुकी है कि जो लोग रोज़ाना एक्सरसाइज़ करते हैं, उन्हें बाकी लोगों के मुक़ाबले अच्छी नींद आती है. इसलिए कोशिश करें कि कम से कम हफ़्ते में पांच दिन फिज़िकल एक्टिविटीज़ करें.

–    आप चाहें, तो अच्छी नींद के लिए एरोमा थेरेपी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. तकिये पर लैवेंडर एसेंशियल ऑयल स्प्रे करें. इससे नींद काफ़ी अच्छी आती है.

–    दिनभर का तनाव भी आपके मस्तिष्क को अशांत किए रहता है, जिसके कारण आप चाहकर भी सुकून से सो नहीं पाते. इसके लिए सुबह-शाम जब भी समय मिले थोड़ी देर मेडिटेशन करें. ध्यान मस्तिष्क को शांत करता है, जिससे आप गहरी नींद सो पाते हैं.

–    सोने से एक घंटे पहले ही बेडरूम की लाइट मद्धिम कर दें. इससे बॉडी को सिग्नल मिलता है कि सोने का व़क्त करीब आ रहा है.

–   बेड पर जाने से पहले पार्क या खुले में वॉक करें. पेड़-पौधे और खुली हवा आपके शरीर को रिलैक्स कर देते हैं, जिससे आप अच्छी तरह सो पाते हैं.

–    सोने से दस मिनट पहले गुनगुने पानी में पैरों को डुबोकर रखें. पैर गर्म रहने पर नींद जल्दी और अच्छी आती है.

–    गुनगुने सरसों के तेल से पैरों के तलवों में मालिश करें.

–    सोने से पहले गुड़ खाना भी फ़ायदेमंद होता है.

–    गुनगुना मीठा दूध पीने से भी अच्छी नींद आती है.

–    सोते समय नाभि में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालें.

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सेहत पर भारी पड़ता वर्कलोड… (The Effects Of Workload On Your Health)

Effects Of Workload

सेहत पर भारी पड़ता वर्कलोड… (The Effects Of Workload On Your Health)

कैसे हैंडल करें वर्कप्रेशर (Work Pressure) का स्ट्रेस (Stress)? अक्सर हम लोगों के मुंह से यह सुनते हैं कि बहुत बिज़ी हूं, वर्कलोड बहुत ज़्यादा है… यही हाल हमारा ख़ुद का भी है. न नींद पूरी होती है, न समय पर खाना… प्रोफेशनल लाइफ में बढ़ता कॉम्पटीशन, सबसे बेहतर करने का दबाव इस कदर बढ़ता जा रहा है कि हमारी सेहत बिगड़ रही है.

–   कम उम्र में ही हाई ब्लड प्रेशर.

–    बढ़ती हार्ट डिसीज़.

–   टाइप 2 डायबिटीज़.

–   ओबेसिटी यानी मोटापा.

–   सिरदर्द, कमरदर्द, गर्दन में अकड़न.

–    तनाव, डिप्रेशन, अवसाद.

–    अल्कोहल, स्मोकिंग की लत.

–   मन व शरीर में भारीपन आदि… ये तमाम शिकायतें हमारे बढ़ते वर्कलोड की देन हैं.

ज़ाहिर है पैसे कमाना ज़रूरी है. ऑफिस में अपने काम को ईमानदारी से करना भी अच्छी बात है, लेकिन काम का प्रेशर इतना भी न बढ़ जाए कि आप ज़िंदगी जीना ही भूल जाएं.

क्या आप पर भी है वर्कलोड?

यह जानने के लिए इन लक्षणों पर ध्यान दें…

रिलैक्सेशन के लिए आप अल्कोहल की शरण में ज़्यादा जाने लगे हैं: रिसर्च बताते हैं कि हफ़्ते में 40 घंटे से अधिक काम करने पर आपके शराब के सेवन की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. आप इतने थक जाते हैं कि रिस्की अमाउंट में अल्कोहल का सेवन करने लगते हैं. वीकेंड में आप बहुत ज़्यादा शराब पी लेते हैं या जिस दिन आपका मूड ख़राब होता है, तो भी आप शराब की शरण में जाते हैं.

यह ट्राई करें: घर लौटते समय लैपटॉप, कंप्यूटर या फोन को न देखें, बल्कि अपने फेवरेट गाने सुनें या ऑडियो बुक भी अच्छा आइडिया है.

आपके काम की क्वालिटी व प्रोडक्टिविटी कम हो रही है: अगर आपका काम समय पर नहीं हो पा रहा, तो इसका मतलब है कि आपकी प्रोडक्टिविटी कम हो रही है. आपने काम करने के घंटे बढ़ा दिए हैं, पर इसका यह अर्थ नहीं कि आप ज़्यादा काम कर रहे हैं. स्टैनफोर्ड रिसर्च पेपर में पाया गया है कि जो लोग 70 घंटे प्रति हफ़्ता काम करते हैं, वो अपने उन साथियों के मुक़ाबले अधिक काम नहीं कर रहे होते, जो 56 घंटे प्रति हफ़्ता काम करते हैं, क्योंकि हम हर रोज़, हर मिनट काम नहीं कर सकते. यह प्रकृति के ख़िलाफ़ है और असंभव भी है.

यह ट्राई करें: टु डू लिस्ट तैयार करें और मल्टी टास्किंग अवॉइड करें. बेहतर होगा कि काम में भी प्राथमिकताएं तय करें. जो काम सबसे ज़रूरी है, वह पहले करें. टाइम मैनेजमेंट करें, टाइम टेबल बनाएं. इससे आप व्यवस्थित रहेंगे और कम प्रेशर महसूस करेंगे.

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आपकी नींद पूरी नहीं हो रही और दिन में थकान महसूस होती है: काम के बढ़ते बोझ के चलते नींद डिस्टर्ब होने लगती है. मन-मस्तिष्क शांत नहीं रहता, जिससे नींद न आने की समस्या व मानसिक तनाव बढ़ता जाता है. नींद पूरी न होने से अगले दिन ऑफिस में भी थकान महसूस होती है और आप काम पर भी फोकस नहीं कर पाते. इन तमाम वजहों से आपको टाइप 2 डायबिटीज़ व हार्ट डिसीज़ होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं.

यह ट्राई करें: ख़ुद को ब्रेक दें. काम के बीच-बीच में उठकर वॉक पर जाएं. थोड़ा स्ट्रेचिंग करें. इससे नींद व थकान दूर होगी और स्ट्रेस नहीं होगा.

डिप्रेशन महसूस होने लगा है: ज़्यादा काम करने से आपकी मेंटल हेल्थ ख़राब हो सकती है. एक स्टडी में पाया गया है कि जो लोग रोज़ाना 11 घंटे काम करते हैं, वो डिप्रेशन से अधिक जूझ रहे होते हैं, बजाय उन लोगों के जो 7-8 घंटे काम करते हैं.

यह ट्राई करें: आप मेडिटेशन ट्राई करें. यह मानसिक तनाव को दूर करके रिफ्रेश करता है.

आप ही नहीं, आपका दिल भी अधिक काम कर रहा होता है: वर्कलोड स़िर्फ आप पर ही असर नहीं डालता, बल्कि आपके अंगों को भी प्रभावित करता है. आप भले ही यह नोटिस नहीं कर पाते, लेकिन वर्क स्ट्रेस कॉर्टिसोल नाम का हार्मोन रिलीज़ करता है, जो हृदय पर असर डालता है. यह स्ट्रोक, कोरोनरी आर्टरी डिसीज़, टाइप 2 डायबिटीज़ और कैंसर तक को जन्म दे सकता है.

यह ट्राई करें: ज़्यादा देर तक बैठे रहने की बजाय स्टैंड अप मीटिंग्स करें, कॉफी ब्रेक में, लंच में भी डेस्क की बजाय साथियों के साथ खड़े होकर खाना खाएं. टी ब्रेक लें और फोन पर भी खड़े-खड़े या घूमते हुए बात करें.

आपकी गर्दन व कमर में दर्द रहने लगा है: ऑक्यूपेशनल एंड एनवायर्नमेंटल मेडिसिन जरनल ने अपनी स्टडी में यह पाया है कि लोग जितना अधिक काम करते हैं, उनकी कमर में दर्द होने का रिस्क उतना ही बढ़ जाता है. महिलाओं में यह दर्द गर्दन में अधिक होता है, जबकि पुरुषों में लोअर बैक पेन होता है. यह स्ट्रेस का लक्षण है, जो मसल टेंशन की वजह से होता है.

यह ट्राई करें: बेहतर होगा आप थेरेपिस्ट की मदद लें, अपनी तकलीफ़ों व स्ट्रेस के बारे में बात करके आप बेहतर महसूस करेंगे.

आपके रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं: अगर आपके पास रिश्तों के लिए समय होता भी है, तो स्ट्रेस और थकान के कारण आप में वो ऊर्जा नहीं होती कि कुछ बेहतर समय अपनों के साथ बिता सकें. आप डिप्रेशन में या चिढ़े हुए रहते हैं.

यह ट्राई करें: अपने काम के बीच में ही नॉन वर्क एक्टिविटीज़ के लिए भी समय निकालें. टाइम टेबल बनाएं- फ्रेंड्स के साथ गेट-टुगेदर रखें, मूवी जाएं, म्यूज़िक सुनें, एक्सरसाइज़, लॉन्ग ड्राइव या जो भी आपको अच्छा लगे, उसके लिए टाइम निकालें.

– गीता शर्मा

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सर्दियों में यूं रखें सेहत का ख़्याल (Winter Health Care)

Winter Health Care

सर्दियों में यूं रखें सेहत का ख़्याल (Winter Health Care)

ठंड का मौसम अपने साथ सर्दी-ज़ुकाम और कई तरह की एलर्जी (Allergies) और इंफेक्शन्स (Infections) लेकर आता है. ऐसे में ज़रूरी है कि आप अपना और अपनों का ख़ास ख़्याल रखें, ताकि सर्दियों (Winter) के सुहाने मौसम का लुत्फ़ उठा सकें.

विंटर हेल्थ प्रॉब्लम्स

सर्दी के मौसम में गठिया और अस्थमा के मरीज़ों की द़िक्क़तें काफ़ी बढ़ जाती हैं. किसी को सालभर पुरानी चोट परेशान करने लगती है, तो किसी को मसल पेन. इनके अलावा और

कौन-कौन-सी बीमारियां हैं, जो सर्दियों के मौसम में आपको परेशान कर सकती हैं, आइए जानें.

सर्दी-खांसी

सर्दी-खांसी एक आम समस्या है, लेकिन सर्दी के मौसम में यह आपको काफ़ी परेशान कर सकती है. यह  रोग काफ़ी संक्रामक होता है, इसलिए अगर घर में किसी को सर्दी है, तो वह  छींकते-खांसते व़क्त रुमाल का इस्तेमाल करे. बहती नाक, सीने में जकड़न, छींकें आना, सिरदर्द, गले में खराश और हल्का बुख़ार इसके लक्षण हैं.

होम रेमेडीज़

–    जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है, वे बार-बार सर्दी-ज़ुकाम से परेशान रहते हैं. ऐसे लोगों को, ख़ासतौर से सर्दियों में, आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए.

–     आधा टीस्पून शहद में कुछ बूंदें नींबू का रस और चुटकीभर दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में दो बार लें.

–    गुनगुने नींबू पानी में शहद मिलाकर लेने से सर्दी-खांसी से राहत मिलती है.

–     सर्दी-खांसी से राहत पाने के लिए एक कप पानी में थोड़ी-सी अलसी मिलाकर उबालें. पांच मिनट बाद आंच से उतार लें. छानकर उसमें नींबू का रस और शहद मिलाकर पीएं.

–    घी में लहसुन की कुछ कलियां गरम करके खाएं. गरम-गरम लहसुन खाने से खांसी में काफ़ी राहत मिलती है.

–     रात को सोने पर खांसी की समस्या बढ़ जाती है, क्योंकि लेटने पर नाक में मौजूद कफ़ धीरे-धीरे गले तक जाने लगता है, जिससे खांसी बढ़ जाती है. इसके लिए बेहतरीन उपाय है कि आप सिर को थोड़ा ऊंचा रखें. इससे खांसी कम होगी और आप सो भी पाएंगे.

गले में इंफेक्शन

गले में खिचखिच और ड्राईनेस, जो धीरे-धीरे दर्द का कारण बनता है, यह गले के इंफेक्शन के कारण होता है. मौसम में आई ठंडक और इंफेक्शन्स के कारण ऐसा होता है.

होम रेमेडीज़

–    इसके लिए हमारी दादी-नानी का फेवरेट नुस्ख़ा है गरारा करना. गुनगुने पानी में चुटकीभर नमक डालकर गरारा करने से बैक्टीरिया निकल जाते हैं, जिससे गले की खराश से छुटकारा मिलता है. इसे दिन में दो-तीन बार करें.

–     हल्दीवाला दूध भी एक ऐसा ही रामबाण नुस्ख़ा है. यह गले की सूजन और दर्द से राहत दिलाता है. बार-बार होनेवाली खांसी में भी हल्दीवाला दूध काफ़ी राहत पहुंचाता है.

–     एप्पल साइडर विनेगर को आप हर्बल टी या गरारेवाले पानी में डालकर इस्तेमाल करें.

–     लहसुन की एक कली चूसने से भी गले के इंफेक्शन और दर्द से राहत मिलती है.

–     इसके अलावा हर्बल टी और गरमागरम सूप आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होगा.

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अस्थमा

यह फेफड़े की बीमारी है, जिसमें श्‍वासनली में जलन और दर्द होने लगता है. सीने में जकड़न, छींकें आना, खांसी और सांस फूलना इसके लक्षण हैं. यह दो तरह का होता है, एलर्जिक और नॉन एलर्जिक. एलर्जिक अस्थमा धूल, धुएं, पेंट आदि के कारण होता है, जबकि नॉन एलर्जिक अस्थमा कोल्ड, फ्लू, स्ट्रेस और ख़राब मौसम के कारण होता है.

होम रेमेडीज़

–    एक कप पानी में आधा टीस्पून मुलहठी पाउडर और आधा टीस्पून अदरक मिलाकर चाय बनाकर पीएं.

–     एक ग्लास दूध में आधा टीस्पून कद्दूकस अदरक और आधा टीस्पून हल्दी पाउडर डालकर दिन में दो बार लें.

–     एक कप उबलते पानी में एक टीस्पून दालचीनी पाउडर और 1/4 टीस्पून कालीमिर्च, पिप्पली और सोंठ का समान मात्रा में मिलाया हुआ चूर्ण मिलाकर 10 मिनट तक उबालें. पीने से पहले एक टीस्पून शहद मिलाएं. यह अस्थमा अटैक्स से काफ़ी राहत देता है.

–    एक बाउल गरम पानी में पांच-छह बूंदें लैवेंडर ऑयल डालकर भाप लें.

इन्फ्लूएंज़ा

सर्दियों के मौसम में सर्दी और फ्लू कभी भी किसी को भी अपनी गिरफ़्त में ले सकते हैं. यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें आपकी सारी एनर्जी ख़त्म हो जाती है. नाक बहना, सिरदर्द, बदनदर्द, बुख़ार और थकान फ्लू के आम लक्षण हैं.

–     आधा टीस्पून गिलोय को पीसकर एक कप पानी में उबालकर पीएं. इससे फ्लू के लक्षणों से काफ़ी राहत मिलती है.

–     समान मात्रा में शहद और प्याज़ का रस मिलाकर दिन में तीन बार फ्लू जाने तक लें.

–     एक टीस्पून शहद में 10-12 तुलसी की पत्तियों का रस मिलाकर दिन में एक बार लेने से भी राहत मिलती है.

–     गरम पानी में कुछ बूंदें नीलगिरी तेल की डालकर भाप लेने से काफ़ी राहत मिलेगी.

–    एक कप पानी में कालीमिर्च पाउडर, जीरा और गुड़ डालकर उबालें. यह चाय फ्लू के लक्षणों से राहत दिलाती है. आप चाहें, तो गुड़ में तिल मिलाकर उसके लड्डू बनाकर खाएं.

जोड़ों में दर्द

ठंड के कारण मसल्स और हड्डियों में अकड़न-सूजन के कारण यह मौसम कुछ लोगों के लिए कष्टदायक बन जाता है. इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है कि सोकर उठने पर आप स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें.

हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ आपको जोड़ों के दर्द से छुटकारा दिला सकती है.

–     आधी बाल्टी गरम पानी में दो कप सेंधा नमक मिलाकर उसमें टॉवेल डुबोकर प्रभावित जोड़ की सिंकाई करें.

–    रोज़ाना सुबह एक टीस्पून मेथी पाउडर फांककर एक ग्लास गुनगुना पानी पीएं.

–     नीलगिरी के तेल से जोड़ों पर मालिश करें. इससे दर्द और जलन दोनों में आराम मिलता है.

–    रात को सोने से पहले गुनगुने सरसों के तेल से जोड़ों पर मसाज करें. यह प्रभावित जोड़ों में रक्तसंचार बढ़ाता है, जिससे दर्द और अकड़न से राहत मिलती है.

–     एक कप गुनगुने पानी में एक टीस्पून एप्पल साइडर विनेगर और थोड़ा-सा शहद मिलाकर दिन में दो बार खाने से पहले लें.

हार्ट प्रॉब्लम्स

आपको जानकर हैरानी होगी कि ठंड में हार्ट अटैक्स के मामले बढ़ जाते हैं, क्योंकि ठंड के कारण हार्ट की कोरोनरी आर्टरीज़ सिकुड़ने लगती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर कम हो जाता है.

–     जिन्हें हार्ट प्रॉब्लम्स हैं, उन्हें ख़ासतौर से सर्दियों में रोज़ाना चार-पांच लहसुन की कलियां खानी चाहिए. यह खून को पतला करने का काम करता है, जिससे ब्लड फ्लो सही तरी़के से होता है.

–     एक ग्लास गुनगुने पानी में आधा टीस्पून अर्जुन की छाल का पाउडर और शहद मिलाकर लें. इससे आपको काफ़ी राहत मिलेगी.

–     अदरक-लहसुन के रस में शहद या गुड़ मिलाकर खाने से भी हार्ट प्रॉब्लम्स में राहत मिलती है.

–     इसके अलावा खानपान का ध्यान रखें. दो बार में हैवी खाने की बजाय चार-पांच बार में थोड़ा-थोड़ा खाएं. अपने वज़न को नियंत्रित रखें. अगर वज़न अचानक से बढ़ने लगे, तो डॉक्टर को बताएं.

– सुनीता सिंह

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किस हेल्थ प्रॉब्लम में क्या खाएं, क्या न खाएं? (Health Problems Associated With Foods)

Health Problems

किस हेल्थ प्रॉब्लम में क्या खाएं, क्या न खाएं? (Health Problems Associated With Foods)

रोज़मर्रा की व्यस्त जीवनशैली में हम अक्सर कुछ न कुछ ऐसा खा लेते हैं, जो संतुलित तो बिल्कुल नहीं होता, लेकिन उसे खाने से कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या (Health Problems) ज़रूर खड़ी हो जाती है. न चाहते हुए डॉक्टर के पास जाना ही पड़ता है. यदि आप डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि किस बीमारी में क्या खाएं और क्या न खाएं?

डायबिटीज़

क्या खाएं?

–    हरी सब्ज़ियां, सोया, मूंग, काला चना, ब्राउन राइस, राजमा और अंडे का  स़फेदवाला भाग- ये लो ग्लाइसेमिक इंडेक्सवाली चीज़ें होती हैं, जो शरीर में जाकर धीरे-धीरे ग्लूकोज़ में बदलती हैं.

–    प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीज़ें खाएं, जैसे- लोबिया और स्प्राउट्स आदि.

–    फलों में चेरी, स्ट्रॉबेरी, सेब, संतरा, अनार, पपीता आदि और सब्ज़ियों में करेला, लौकी, तोरई, कद्दू, खीरा, टमाटर आदि खाएं.

–    रोज़ाना एक मुट्ठी मिक्स ड्रायफ्रूट्स ज़रूर खाएं.

–    करेला, लौकी, टमाटर, ऐलोवीरा का जूस डायबिटीज़ में बहुत फ़ायदेमंद होता है.

क्या न खाएं?

–    गुड़, शक्कर, शहद, चॉकलेट, केक, पेस्ट्री आदि मीठी चीज़ें न खाएं.

–    मैदा, सूजी, स़फेद चावल, स़फेद ब्रेड, नूडल्स, पिज़्ज़ा, बिस्किट्स न खाएं. ये हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्सवाली चीज़ें होती हैं, जो शरीर में जाकर जल्दी-जल्दी ग्लूकोज़ में परिवर्तित होती हैं.

–    तली हुई चीज़ें, मक्के का आटा, पैक्ड फूड बिल्कुल न लें.

–    आम, चीकू, केला, अंगूर, अनन्नास में ज़्यादा शक्कर होता है, इसलिए इन्हें न खाएं.

–    स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर सब्ज़ियां- आलू, अरवी, जिमीकंद, कटहल, शकरकंद, चुकंदर न खाएं, क्योंकि इनमें ग्लूकोज़ अधिक होता है.

हार्ट अटैक

क्या खाएं?

–    हरी सब्ज़ियां, दालें, स्ट्रॉबेरी, संतरा, केला, सीताफल- इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम होता है.

–    सूप, सलाद, खट्टे फल, आड़ू, सोया, नींबू पानी, काला चना, लोबिया खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है.

–    ओमेगा3 से भरपूर- बादाम, अलसी, फिश ऑयल और अखरोट ज़रूर लें.

क्या न खाएं?

–    हाई फैट डायट (मक्खन, घी, मलाई आदि) में सैचुरेटेड फैट होता है, इसलिए इनका सेवन कम करें.

–    खाने में नमक की मात्रा कम रखें. टेबल सॉल्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें.

–    अजीनोमोटो, बेकिंग पाउडर, सॉस, अचार, पैक्ड फूड, बेकरी फूड न खाएं.

अस्थमा

क्या खाएं?

–    नींबू, कीवी, आंवला, ब्रोकोली, टमाटर, शिमला मिर्च में विटामिन सी अधिक होता है.

–    डायट में जौ और चोकर सहित गेहूं के आटे की रोटियां, दलिया, मूंग दाल ज़रूर लें.

–    चेरी, खुबानी, शकरकंद, हरी मिर्च, गाजर में बीटा कैरोटिन होता है, इन्हें ज़रूर खाएं.

–    प्रोटीन, विटामिन बी और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे- दाल, सोयाबीन, अंडा, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां आदि खाएं.

–    भिगोई हुई मूंगफली अस्थमा में बहुत फ़ायदेमंद होती है.

क्या न खाएं?

–    तला हुआ भोजन, जंक फूड, पैक्ड फूड, बासी खाना, मक्खन न लें.

–    तली हुई मूंंगफली बिल्कुल न खाएं.

–    डेयरी प्रोडक्ट्स, खट्टी व ठंडी चीज़ें न खाएं.

–    केला, पका हुआ चुकंदर, कटहल, लोबिया आदि न लें.

कब्ज़

क्या खाएं?

–    कब्ज़ होने पर बिना नमक और बटरवाले पॉपकॉर्न खाएं. कम कैलोरीवाले इस फूड आइटम में फाइबर बहुत अधिक होता है.

–    आलूबुखारे में फाइबर के साथ-साथ सोर्बिटोल (विशेष तरह का कार्बोहाइड्रेट) होता है, जो कब्ज़ से राहत दिलाता है.

–    सब्ज़ियों की तुलना में बीन्स में दोगुना फाइबर होता है. बीन्स को सब्ज़ी के तौर पर ही नहीं, सूप, पास्ता और पुलाव में भी डालकर खा सकते हैं.

–    खुबानी, अंजीर, खजूर और किशमिश में फाइबर अधिक मात्रा में होते हैं, जो कब्ज़ दूर करते हैं.

–    ब्रोकोली, साबूत अनाज, होल गे्रन ब्रेड, पका हुआ केला, फल और फाइबरयुक्त चीज़ें विशेष रूप से खानी चाहिए.

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क्या न खाएं?

–    पनीर, आइस्क्रीम आदि डेयरी प्रोडक्ट्स दूध से बने होते हैं और दूध कब्ज़ बढ़ाता है.

–    फैट बढ़ानेवाले स्नैक्स, विशेष रूप से पोटैटो वेफर्स, फे्रंचफ्राइज कब्ज़ की समस्या और बढ़ा सकते हैं.

–    बेकरी प्रोडक्ट्स, जैसे- कुकीज़, पेस्ट्री और केक न खाएं, क्योंकि इनमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं.

–    कच्चा केला, प्याज़, मूली, रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड (व्हाइट राइस, व्हाइट ब्रेड, व्हाइट पास्ता आदि) से कब्ज़ बढ़ता है.

–    उड़द दाल, अरवी, बैंगन, मसूर, मैदा से बनी चीज़ें, ठंडा व बासी खाना न खाएं.

डायरिया

क्या खाएं?

–    केला, दही-चावल, मूंग दाल खिचड़ी, धुली मसूर या मूंग दाल का सूप, लौकी का रायता जैसी हल्की चीज़ें खाएं.

–    ककड़ी, खीरा, तरबूज़, खरबूजा आदि वॉटरी फ्रूट्स ज़्यादा लें.

–    पपीता, बेल का मुरब्बा, मीठा सेब, अनार आदि फलों का सेवन करें.

–    नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, लस्सी, गन्ने का रस या फलों का जूस पीएं.

–    दही में केला मिलाकर नाश्ते, दोपहर और शाम को खाने से डायरिया में आराम मिलता है.

क्या न खाएं?

–    आलू, इमली, बैंगन, अरवी, ब्रोकोली, प्याज़, बीन्स, पत्तागोभी, अचार न खाएं.

–    तला, मसालेदार, बासी और गरिष्ठ भोजन खाने से बचें.

–    बिना ढकी हुई या बहुत देर से काटकर रखी हुई चीज़ें न खाएं.

–   सड़क के किनारे खड़े हॉकर्स या

शादी-पार्टी में पहले से कटा हुआ फ्रूट चाट-सलाद न खाएं.

सर्दी-ज़ुकाम

क्या खाएं?

–    सेब, चीकू, पपीता, अंजीर, शहतूत, अनार, कीवी, अंगूर आदि विटामिन सी से भरपूर फल व सब्ज़ियां खाएं.

–    सब्ज़ियों में पालक, चुकंदर, ब्रोकोली, लाल शिमला मिर्च, मशरूम, शलगम और गाजर ज़रूर खाएं.

–    गुड़ की तासीर गरम होती है, इसलिए गुड़ से बनी हुई चीज़ें खाएं.

क्या न खाएं?

–    यदि आपको सर्दी-ज़ुकाम जल्दी-जल्दी होता है, तो दही, पनीर, चीज़ कम खाएं. ये चीज़ें कफ़बढ़ाती हैं. सर्दी-ज़ुकाम सीज़नल प्रॉब्लम है, तो रात को दही न खाएं.

–    फ्राइड फूड, मसालेदार खाना, ठंडी चीज़ें, व्हाइट ब्रेड, पास्ता, नूडल्स न खाएं.

कफ़

क्या खाएं?

–    जिन चीज़ों की तासीर गरम हो, वे अधिक खाएं, जैसे- गरम सूप, गरम चाय आदि.

–    सिट्रस फल, अनन्नास, अनार, सेब, मौसंबी, बेरीज़, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, सोयाबीन, फलियां ज़्यादा से ज़्यादा खाएं.

–    तुलसी, सोंठ, शहद और अदरक का सेवन अधिक करना चाहिए.

क्या न खाएं?

–    दूध, बटर, पनीर, फैट बढ़ानेवाले फूड और नॉनवेेज फूड कम खाएं.

–    ठंडी चीज़ें खाने से कफ़ बढ़ता है, इसलिए उन्हें अवॉइड करें.

– देवांश शर्मा

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लाइफस्टाइल के नए फंडे (How Modern Lifestyle Has Changed Our Perception Of Life & Fitness)

Life & Fitness

लाइफस्टाइल के नए फंडे (How Modern Lifestyle Has Changed Our Perception Of Life & Fitness)

यह तो सच है कि ज़िंदगी और इसे जीने का अंदाज़ (Lifestyle) पहले से बहुत बदल (Changed) गया है और हम उन बदलावों के बीच ख़ुद को एडजस्ट करने में लगे हैं. कुछ बदलाव अच्छे होते हैं, तो कुछ ज़रूरी होते हैं, कुछ हमें तनाव दे जाते हैं, तो कुछ मजबूरी होते हैं… पर ज़िंदगी है, हर पल बदलती है… इसे ही तो लाइफ कहते हैं और इन बदलावों के बीच सामंजस्य बैठाने के तौर-तरीक़ों को हम लाइफस्टाइल का नाम दे देते हैं. क्या कुछ नया जुड़ता जा रहा है और क्या कुछ तेज़ी से बदलता जा रहा, इसी विषय को हम समझने का प्रयास करेंगे, ताकि इस बदलाव की प्रक्रिया को सहजता से ले सकें और अपनी लाइफस्टाइल को भी बेहतर बना सकें. क्या हैं ये लाइफस्टाइल के न्यू फंडे, आइए जानें.

स्वैग ज़रूरी है…
लोग, लोगों की ज़रूरतें, उनके तौर-तरी़के… सब कुछ हर पल में तेज़ी से बदल रहा है. इसी बदलाव का लेटेस्ट व हॉट ट्रेंड है स्वैग. जी हां, आज की लाइफस्टाइल में अगर आपके पास स्वैग नहीं है, तो आपकी ज़िंदगी बेकार है. यही वजह है कि लोग कभी अपने लुक्स के साथ, तो कभी अपने स्टाइल के साथ एक्सपेरिमेंट करने लगे हैं. हेयरस्टाइल और हेयरकलर्स में भी यह स्वैग उतर आया है, कभी देसी स्वैग, तो कभी स्वैगवाली टोपी, कभी चलने का स्टाइल, तो कभी आपका अंदाज़… हर चीज़ में स्वैग ज़रूरी हो गया है. यह बदलते लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा बदलाव है.

फिटनेस है न्यू हॉटनेस…
लाइफस्टाइल का सबसे ज़्यादा असर हमारी हेल्थ और फिटनेस पर पड़ता है. हमारी डायट बदलती है, रहने का ढंग भी बदलता है, साथ ही ढेर सारा स्ट्रेस भी होता है. ये सब हमें अनफिट और अनहेल्दी बनाता है. लेकिन अब नहीं, क्योंकि लोग अब फिट रहना पसंद करते हैं. चाहे कितना भी तनाव हो या कितना ही वर्कलोड हो, फिटनेस के लिए टाइम निकालते हैं. जिम जाते हैं, हेल्दी डायट भी लेते हैं और यह बहुत ही पॉज़ीटिव बदलाव है, क्योंकि फिटनेस ही अब हॉटनेस की नई परिभाषा.

सोशल साइट्स अब बन गई हैं शो ऑफ साइट्स…
लोगों का नया घर बन चुकी हैं ये सोशल साइट्स. क्या खा रहे हैं, क्या सोच रहे हैं, रिलेशनशिप स्टेटस क्या है, हॉलीडे प्लान्स, वीकेंड पार्टीज़… सब कुछ वो यहीं शेयर और पोस्ट करते हैं. घर के मेंमर्स अब फिज़िकली पास होकर भी वो सब नहीं जान पाते, जो सोशल साइट्स पर फ्रेंड बने दूर-दराज़ बसे लोग जान लेते हैं. लेकिन इसमें भी चौंकानेवाली बात यह है कि लोग यहां ईमानदार नहीं हैं, हर किसी का मक़सद स़िर्फ ‘दिखावा’ यानी ‘शो ऑफ’ ही होता है. भले ही निजी ज़िंदगी उतनी हैपनिंग न हो, लेकिन सोशल साट्स भी सबकी ज़िंदगी की एक अलग ही तस्वीर नज़र आती है. एक नक़लीपन होता है वहां, जिसे जानबूझकर हम हक़ीक़त समझकर ख़ुद को ख़ुश करने का बहाना बना लेते हैं. यह जितना रोमांचक है, उतना ही ख़तरनाक भी हो सकता है. लेकिन आज की लाइफस्टाइल का यह अभिन्न हिस्सा बन चुका है, जिससे फिल्हाल तो दूर-दूर तक निजात मिलना नामुमकिन ही लग रहा है.

इंस्टाग्राम पर फिटनेस का बोलबाला- इन सेलेब्स ने उड़ाए सबके होश…
जैसाकि हम पहले भी बता चुके हैं कि आज की लाइफस्टाइल में फिटनेस ही हॉटनेस की नई परिभाषा बन चुकी है, तो ऐसे में कई ऐसे सेलेब्स हैं, जो इन दिनों इंस्टाग्राम पर अपनी फिटनेस को लेकर ही काफ़ी हॉट टॉपिक बन चुके हैं. वो अक्सर अपने फिटनेस वीडियोज़ और डायट टिप्स व हेल्दी लाइफस्टाइल के पिक्चर्स शेयर करते रहते हैं. वो अपनी कॉन्टैक्ट डिटेल्स भी देते हैं यदि कोई उनसे पर्सनली फिटनेस ट्रेनिंग लेना चाहे तो. इनमें सेलेब्स में टॉप पर हैं- मंदिरा बेदी, भाग्यश्री, मिलिंद सोमन, विराट कोहली, शिल्पा शेट्टी, सुष्मिता सेन, जैकलिन फर्नांडिस, मलिका शेरावत, शीबा, करिश्मा तन्ना, जॉन अब्राहम, गौतम गुलाटी, प्रिंस नरुला आदि.

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इंडिया के टॉप फिटनेस इंस्टाग्रामर्स, जिन्हें ज़रूर करें फॉलो

आज के समय में अधिकतर लोग फिटनेस फ्रीक हैं, ऐसे में आप भी अगर फिटनेस में दिलचस्पी रखते हैं, तो इन इंस्टाग्रामर्स को ज़रूर फॉलो करें.

– रोहित खंडेलवाल: मिस्टर इंडिया 2016 रोहित को देखते ही आप उनकी फिटनेस लेवल को जान जाएंगे. फिट रहना न स़िर्फ उनके प्रोफेशन की डिमांड है, बल्कि उनका पैशन भी है.

– मिलिंद सोमन: इन्हें कौन नहीं जानता और फिटनेस के प्रति इनके पैशन से भी हम सभी वाक़िफ़ हैं. मिलिंद के लिए मानो उम्र रुक सी गई हो और वो आज हम सभी को इंस्पायर करते हैं.

– बानी: अपनी ख़ूबसूरती से लेकर बिंदास अंदाज़ के लिए बानी जानी जाती हैं, वहीं उनकी फिटनेस भी किसी से छिपी नहीं. बानी को उनके रफ-टफ अंदाज़ के लिए ही सभी पसंद करते हैं.

Fitness

– गौतम गुलाटी: बिग बॉस के विनर बनकर गौतम ने हर किसी का दिल जीत लिया था. शो के दौरान भी गौतम की फिटनेस और हॉट बॉडी सबकी चर्चा का विषय बनी रहती थी. मल्टी टैलेंटेड गौतम फिटनेस को लेकर काफ़ी गंभीर हैं और यही वजह है कि फिटनेस उनकी पहचान बन चुकी है.

Gautam Gulati

 

– नम्रता पुरोहित: नम्रता राष्ट्रीय स्तर की स्क्वैश प्लेयर थीं और स्टेट लेवल की फुटबॉल प्लेयर भी थीं, लेकिन एक बार घुड़सवारी के दौरान वो गिर गई थीं और उनके घुटने में गंभीर चोट आ गई थी, जिसके चलते उनकी सर्जरी तो हो गई, लेकिन उन्हें स्पोर्ट्स को करियर के तौर पर छोड़ना पड़ा. उनके पिता, जो एक सेलिब्रिटी फिटनेस एक्सपर्ट थे, उन्होंने नम्रता को पिलेट्स प्रैक्टिस करने की सलाह दी. उसके बाद नम्रता दुनिया की सबसे कम उम्र की सर्टिफाइड स्टॉट पिलेट्स इंस्ट्रक्टर बनीं. आज फिटनेस की दुनिया में वो एक जाना-माना नाम हैं.

– रेसलर संग्राम सिंह: कोई सोच भी नहीं सकता था कि आर्थराइटिस से पीड़ित कोई व्यक्ति अंतर्राष्ट्रीय स्तर का पहलवान बन सकता है, लेकिन संग्राम सिंह ने यह कर दिखाया. उन्होंने न स़िर्फ देश का नाम रौशन किया है, बल्कि वो मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं और फिटनेस के लिए लोगों को प्रेरित करते रहते हैं. बिग बॉस में भी संग्राम के देसी अंदाज़ को सभी ने पसंद किया था और रियल लाइफ में भी उनके फाइटिंग स्पिरिट के सभी कायल हैं.

Sangram Singh

– विनोद चन्ना: विनोद आज फिटनेस फील्ड का बहुत बड़ा नाम हैं. ये सेलिब्रिटी फिटनेस ट्रेनर हैं. बड़े-बड़े सेलेब्स इनके काम का लोहा मान चुके हैं. हालांकि विनोद के लिए यहां तक का सफ़र बेहद मुश्किलों भरा था. बचपन उन्होंने बेहद ग़रीबी देखी. शरीर से वो बहुत ही दुबले-पतले थे. उन्हें अक्सर लोग ‘सुकड़ा’ कहकर चिढ़ाते थे. इसी बात ने उन पर ऐसा असर डाला कि उन्होंने अपने शरीर पर ही काम करने का इरादा बना लिया, लेकिन पैसों की तंगी के कारण वो जिम नहीं जा सके. तब उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ ख़ुद काम करने की सोची. वो सैलेरी का छोटा-सा हिस्सा ही घर में देते थे, बाकी अपनी फिटनेस ट्रेनिंग पर ख़र्च करते थे. घरवाले उन पर तब नाराज़ होते थे, क्योंकि घर पर पैसों की ज़रूरत थी, लेकिन उनके अनुसार यदि मैं आज ख़ुद पर ध्यान देकर काबिल बन जाऊंगा, तब ही तो परिवार को भविष्य में बेहतर कुछ दे पाऊंगा… विनोद टॉप रेटेड फिटनेस ट्रेनर बनना चाहते थे और फिटनेस के प्रति उनके पैशन ने ही उन्हें वो सब कुछ दिया, जिसके सपने वो देखा करते थे. वो प्रोफेशनल बॉडी बिल्डर भी थे और कई प्रतियोगिताओं में विजेता भी बने.

– प्रशांत सावंत: इनकी इंस्टा आईडी से ही आपको इनके फिटनेस प्रेम का अंदाज़ा हो जाएगा. जी हां, प्रशांतसिक्सपैक नाम से है इनकी आईडी और ये भी बहुत बड़े सेलिब्रिटी फिटनेस ट्रेनर हैं. चाहे शाहरुख हों या आलिया, वरुण धवन, अजय देवगन और अभिषक बच्चन इनके क्लाइंट्स हैं. दहिसर के 10/10 के छोटे से कमरे में बड़े परिवार के साथ रहनेवाले प्रशांत इस मुक़ाम तक पहुंचेंगे यह किसी ने नहीं सोचा था. कॉलेज ड्रापआउट, जिन्हें परिवार के लोग भी गंभीरता से नहीं लेते थे, आज बादशाह ख़ान के फिटनेस ट्रेनर हैं. प्रशांत बचपन में बहुत मोटे थे, लेकिन वो हमेशा से अच्छा दिखना चाहते थे. जो चीज़ फैशन के लिए शुरू हुई, वो पैशन में बदल गई और उनके वर्क स्टाइल के बड़े-बड़े स्टार्स भी कायल हो गए.

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लाइफस्टाइल तो बदल रही है, पर क्या हम बदल रहे हैं… फिटनेस एथलीट श्‍वेता मेहता
रोडीज़ राइज़िंग 2017 की विनर श्‍वेता की स्टोरी आपको ज़रूर इंस्पायर करेगी. एक आईटी प्रोफेशनल से रोडीज़ तक का सफ़र आसान नहीं था श्‍वेता के लिए. वो फिटनेस और बिकनी एथलीट हैं. एशियन बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में भी वो भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. आज की बदलती लाइफस्टाइल और उसके इंपैक्ट के बारे में हमने ख़ुद श्‍वेता से बात की…

“आज से बस 3 साल पहले तक की बात है कि मुझे यह भी नहीं पता था कि जिम आख़िर होता क्या है. मैं पीठ दर्द से परेशान रहती थी. यह समस्या तब से थी, जब में 12वीं में पढ़ रही थी. स्पॉन्डिलाइटिस से जूझना वैसे भी आसान नहीं होता. पढ़ाई पूरी होने के बाद में जॉब करने लगी और मेरा 12 घंटे का डेस्क जॉब मेरे बैक पेन को और बढ़ा रहा था. मुझे एक्सरसाइज़ करने का समय ही नहीं मिलता था, लेकिन मेरे लिए यह ज़रूरी हो गया था कि सिक्योर फ्यूचर, जॉब, सैलरी के मायाजाल से बाहर निकलूं. मैंने हिम्मत की और आज रिज़ल्ट सबके सामने है. आज फिटनेस ही मेरी पहचान बन चुकी है. मैंने अपनी लाइफस्टाइल चेंज की और मुझे मेरे सपनों की लाइफ मिली. मैं फिटनेस एथलीट हूं, पिछले 3 सालों में 5-6 कॉम्पटीशन्स जीत चुकी हूं. मैं हरियाणा की हूं और मैंने कभी स्लीवलेस कपड़े तक नहीं पहने थे. मेरे पैरेंट्स को मेरी बिकनी की पिक्चर्स के लिए यहां तक सुनना पड़ता था कि क्या आपकी बेटी नाइट क्लब में काम करती है… लेकिन आज मैं कामयाब हूं, तो वही लोग मेरा सम्मान करते हैं. मेरा यही कहना है कि अपने सपनों को मत बदलो, कुछ ऐसा करो कि लोगों का नज़रिया बदले.  मेरी कामयाबी में बहुत बड़ा रोल मेरे पैरेंट्स के सपोर्ट का है और हेल्दी लाइफस्टाल का भी है और अब मैं इस लाइफस्टाइल को बदलना नहीं चाहती, जो भी चीज़ मेरी फिटनेस के आड़े आती है, मैं उसे करती ही नहीं. क्योंकि फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल से कोई समझौता नहीं करना है.

 

Woman Fitness

हमारे यहां प्रॉब्लम यह है कि हम समय और परिस्थितियों के अनुसार न ख़ुद को ढालते हैं और न ही अपना डायट बदलते हैं. उदाहरण के तौर पर कोई कहता है कि भई हम तो पंजाबी हैं, हम तो तगड़ा ही खाते हैं, कोई कहता है हम गुजराती हैं, मीठा तो छोड़ नहीं सकते… इसी तरह से हम ट्रेडिशन के नाम पर वही डायट फॉलो करते हैं, जो हमारे दादाजी के समय में खाया जाता था. लेकिन यह भी तो सोचो कि वो समय अलग था, उनका काम अलग था. आज हम सभी डेस्क जॉब करते हैं, कहां से पचेगा तगड़ा खाना…? बेहतर होगा कि मीठा कंट्रोल करें, ऑयली फूड अवॉइड करें, एक्सरसाइज़ करें. ख़ुद की बॉडी से प्यार करें. तब जाकर आप हेल्दी बनोगे. कुछ चीज़ें हम सभी को पता होती हैं, लेकिन हम फॉलो नही करते, जैसे- पानी भरपूर पीएं, ऑयली-फैटी फूड कम खाएं, मीठा ज़्यादा न खाएं, प्रोटीन अधिक लें… आदि… लेकिन हम जानते हुए भी फॉलो नहीं करते. मैं बस हेल्दी चीज़ें लेती हूं और अनहेल्दी चीज़ें अवॉइड करती हूं, यही है डायट. मैं अपना खाना ख़ुद बनाती हूं. दिन में 6 बार खाती हूं, 2 बार जिम जाती हूं… मैं अपना ये रूटीन नहीं बदलती और इसीलिए फिट रहती हूं.”

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वीकेंड्स के बदलते रूल्स…
एक व़क्त था, जब वीकेंड्स को आराम करने में ही बिताया जाता था. सभी लोग ज़्यादातर घर पर ही रहना पसंद करते थे, ताकि हफ़्तेभर की थकान मिट सके, लेकिन अब थकान व स्ट्रेस भगाने के तरी़के बदल गए हैं. लोग बाहर घूमने जाते हैं. पूरी प्लानिंग करते हैं कि कैसे हर वीकेंड को वो यादगार बना सकें.

वर्क मोर, पार्टी हार्ड…
वर्क लोड हर जगह, हर क्षेत्र में बढ़ा है. ऐसे में ज़्यादा काम करना ज़रूरी भी है और मजबूरी भी, लेकिन इस वर्क लोड के बदले लोग ख़ुद को ख़ुश करने के रास्ते भी ढूंढ़ लेते हैं. यह ख़ुशी उन्हें मिलती है पार्टी करके. फ्रेंड्स के साथ पार्टी करने का एक भी मौका आजकल कोई नहीं छोड़ता, बल्कि लोग तो बहाने ढूंढ़ते हैं कि कब पार्टी करके अपने वर्क लोड के स्ट्रेस को दूर कर सकें, क्योंकि बदलती लाइफस्टाइल में स्ट्रस बस्टर्स भी बदल गए हैं. एक समय था, जब परिवार के साथ बैठकर खाना खाने व अपनी तकली़फें शेयर करने से तनाव दूर होता था, वहीं अब फ्रेंड्स के साथ पार्टी करके, एंजॉय करके स्ट्रेस दूर किया जाने लगा है.

Life

महंगे गैजेट्स बन गए हैं सबकी ज़रूरत…
भले ही आपकी सैलरी या घर की कंडीशन ऐसी न हो कि आप लैग्ज़री को अपनी लाइफस्टाइल बना सकें, लेकिन यह भी सच है कि जैसे-तैसे महंगे गैजेट्स आप ज़रूरी अफोर्ड या मैनेज कर लेते हैं, क्योंकि वो इस लाइफस्टाइल की ज़रूरत बन चुके हैं. पर्सनल काम ही नहीं, ऑफिशियल काम के लिए भी यह ज़रूरी हो गया है. बेसिक फोन्स अब आउटडेटेड हो गए हैं, स्मार्ट फोन्स ने लाइफ में जगह बना ली है. वाईफाई अब घर-घर की ज़रूरत है, डेटा कार्ड से लेकर नोट पैड तक सभी कुछ एक ही घर में अब देखने को मिलता है, क्योंकि बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट्स से लेकर घरवालों की शॉपिंग तक इन्हीं से होती है.

क्या शो ऑफ बनकर रह गई है ज़िंदगी…?
आज लोग ज़िंदगी जीने से कहीं ज़्यादा दिखावे में यकीन करने लगे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है सोशल नेटवर्किंग साइट्स, जो एक तरह से तो बहुत बड़ा ज़रिया है लोगों से जुड़ने का, लेकिन हमने इन्हें शो ऑफ की जगह बना डाला. यहां लोग अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ से ख़ुद को बहुत अलग दिखाने की होड़ में लगे रहते हैं. अपनी लाइफस्टाइल को बहुत ही हैपनिंग दिखाते हैं. इसके पीछे एक वजह यह भी होती है कि यहां लोगों का स्ट्रेस कम हो जाता है, कुछ पल के लिए भ्रम में रहकर ख़ुद को हल्का और पॉज़ीटिव महसूस करते हैं, लेकिन यह सही है कि अपने नए जूते-कपड़ों से लेकर लेटेस्ट गैजेट्स व कार तक की पिक्चर्स लोग यहां सबसे पहले शेयर करते हैं. घरवालों को भी पता नहीं होता है, लेकिन आप कहां पार्टी कर रहे हो और किन के साथ, यह आपके चेकइन्स से सोशल साइट्स पर सभी को पता चल जाता है.

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रिलेशनशिप स्टेटस- इसमें छुपाने की क्या बात है…
अब लोग हिचकते नहीं है, भले ही वो लिव इन में हों या एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर कर रहे हों, उन्हें लगता है कि इसमें छिपाने की क्या बात है. आख़िर हमारी लाइफ है, हमें चाहे जैसे जीएं. लोग क्या कहेंगे का डर अब लोगों के मन से काफ़ी हद तक निकल चुका है और यह अच्छी बात भी है, क्योंकि कम से कम नकली ज़िंदगी तो नहीं जीते. जो हैं, जैसे हैं, सबके सामने हैं.

ऑउटस्पोकन, आउटगोइंग बन गई है कॉन्फिडेंस और स्मार्टनेस की नई पहचान…
शर्म-संकोच आज के समय में दब्बूपन की निशानी मानी जाती है. ज़्यादा बोलना, खुलकर बोलना यह जताता है कि आप कॉन्फिडेंट और स्मार्ट हो. पहले कम बोलनेवाले और संकोची इंसान को लोग संस्कारी मानते थे, लेकिन बदलती लाइफस्टाइल ने संस्कारों के मायने भी बदल दिए हैं. अगर आप कम बोलते हैं, ज़्यादा शर्माते हैं, तो आपको पर्सनैलिटी डेवलेपमेंट क्लासेस जॉइन करने की सलाह भी मिलते देर नहीं लगेगी, क्योंकि आज के समय की ज़रूरत है कि आप शर्म-संकोच हटाकर बिंदास बनें. चाहे पर्सनल लाइफ हो या प्रोफेशनल, सभी जगह यही डिमांड है.

सेक्स पर बात करना अब संकोच या शर्म की बात नहीं
जैसे खाना-पीना-सोना, वैसे ही सेक्स, इसमें शर्माने की क्या बात है… जी हां, आजकल अधिकांश लोग यही मानते हैं. सेक्स अब प्राइवेसी का विषय नहीं रहा. लोग उस पर खुलकर बात भी करते हैं और इसे बुरा भी नहीं समझते. एक तरह से हम कह सकते हैं कि सेक्स को लेकर थोड़ी मैच्योरिटी और खुलापन तो आया है समाज में. लड़कियां भी इसे सहजता से लेती हैं. अपनी मूल ज़रूरत पर शर्माने की क्या बात है, ऐसा लोग मानने लगे हैं. लोग अब सेक्स को गंदा या बेशर्मी न मानकर स्वाभाविक व नैसर्गिक चीज़ समझने लगे हैं, यही वजह है कि अब वो खुलकर उस पर बात करते हैं. इसकी ज़रूरत भी है, ताकि सेक्सुअल डिसीज़ व सेक्स संबंधी अन्य मानसिक व शारीरिक समस्याओं का निवारण आसानी से हो सके. बच्चों को भी सेक्स एजुकेशन मे महत्व पर ज़ोर दिया जाने लगा है, ताकि वो भी यौन शोषण से बच सकें.

पीरियड्स पर अब खुलकर बोलते हैं…
इसी तरह से पीरिड्स पर भी बात करना, खुलकर चर्चा करने को लोग सहजता से लेने लगे हैं. यह एक प्राकृतिक क्रिया है, तो इसमें शर्मिंदगी या झिझक क्यों? ख़ुद लड़कियां व कई संस्थाएं भी आगे आकर सोशल साइट्स के ज़रिए अपने कैंपेन को चला रही हैं और लोगों में जागरूकता ला रही हैं. ऐसे में लाइफस्टाइल में आए कुछ नए बदलाव वाक़ई काबिले तारीफ़ हैं, जिससे समाज पहले के मुकाबले अधिक परिपक्व व सहज हो सकेगा.

– गीता शर्मा

त्रिफला के 5 चमत्कारी हेल्थ बेनीफिट्स (5 Health Benefits Of Triphala)

Health Benefits Of Triphala
Health Benefits Of Triphala
त्रिफला के 5 चमत्कारी हेल्थ बेनीफिट्स (5 Health Benefits Of Triphala)

आज के दौर में हर उम्र के व्यक्ति को जीवनशैली यानी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां होना आम बात है. बदलते फास्ट लाइफ और बदलते समय के साथ-साथ, हमारे खाने-पीने की आदतों में एक बड़ा बदलाव आया है, जिसने हमारे स्वास्थ्य को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, ख़ासतौर से हमारे पाचन तंत्र पर इसका काफ़ी असर हुआ है. लेकिन अपने पाचन तंत्र को हेल्दी बनाए रखने का एक बेहद आसान तरीका है अपने डेली रुटीन में त्रिफला को शामिल करना.

त्रिफला सबसे प्रसिद्ध आयुर्वेदिक हर्बल उपचारों में से एक है. यह तीन फलों- आंवला, बहेड़ा और हरितकी का मिश्रण है. डॉ. हरिप्रसाद, अनुसंधान वैज्ञानिक, हिमालय ड्रग कंपनी आपको ऐसे पांच कारण बता रहा है, जिन्हें पढ़कर आपको लगेगा कि अपने दैनिक आहार में त्रिफला को क्यों शामिल करना चाहिए.

कब्ज़ से राहत: आयुर्वेद ग्रंथों और समकालीन शोध अध्ययनों में कहा गया है कि त्रिफला पेट को खाली करने की प्रक्रिया को तेज़ करता है और लंबे समय से बनी कब्ज़ से राहत देतीा है. त्रिफला के तीन हर्बल अवयवों में से प्रत्येक हमारे शरीर की देखभाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसकी जड़ी-बूटियां हमारे शरीर से आंतरिक कचरे को बाहर निकालकर सफाई करने में मदद करती है. साथ ही साथ, इससे पाचन में भी सुधार होता है.

जठरांत्र या गैस्ट्रो-इंटेस्टानल टिश्यूज़ को शांत और जीवंत करना: त्रिफला में मिले आंवला में शामक और प्रदाह शांत करनेवाले गुण होते हैं, जो आंतों के अंदरूनी परत को फिर से जीवंत करने में मदद करता है. यह आंतों की दीवारों को ठंडा और
शांत करता है, इससे पेट फूलने और डकार-उबकाई से राहत मिलती है.

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धीरे-धीरे नियमितता बनाए रखता है: त्रिफला चयापचय को उत्तेजित करने में मदद करता है और हमारे शरीर के पाचनतंत्र को आराम देता है. हर रात सोने से पहले एक छोटी-सी खुराक मल त्याग को विनियमित करने में मदद करती है.

शरीर को विषमुक्त करता है: आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार त्रिफला का चूर्ण शरीर से चयापचय और पाचन के बाद बचे व्यर्थ पदार्थों से शरीर को शुद्ध करके पेट और बड़ी आंत के विषमुक्त करता है.

प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट: त्रिफला में कई एंटीऑक्सीडेंट तत्व शामिल हैं, जिनमें गैलिक एसिड, फ्लेवोनॉइड्स और टैनिन प्रमुख हैं, ये शरीर में स्वाभाविक रूप से ऐसे मुक्त कणों को निशाना बनाता है, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने में

सक्षम होते हैं. तीन फलों से प्राप्त हुए सक्रिय तत्व एंटीऑक्सीडेंट के प्रभाव को बढ़ाते हैं और मल त्याग के लिए प्रेरित करते हैं.
तो त्रिफला का प्रयोग अब नियमित रूप से करें और अपनी संपूर्ण सेहत का ध्यान रखें, ताकि आनेवाला कल सेहतमंद बने.

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इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

Sugar Tips

इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

खाने में मिठास घोलनेवाली शक्कर (Sugar) की सच्चाई कितनी कड़वी है, इस बारे में शायद ही आपने कभी ध्यान दिया हो. शक्कर न स़िर्फ हमारी ज़िंदगी में पूरी तरह घुल-मिल गई है, बल्कि इसके साइड इफेक्ट्स (Side Effects) से हमारा स्वास्थ्य (Health) भी धीरे-धीरे घुल रहा है. रिफाइंड शक्कर का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल कर अनजाने में ही आप कई बीमारियों को न्योता दे रहे हैं. कौन-सी हैं वो बीमारियां और कितनी हानिकारक है शक्कर, आइए देखते हैं.

मैं शक्कर हूं!

सबसे पहले तो आपको बता दें कि शक्कर एक कार्बोहाइड्रेट है. मार्केट में मिलनेवाली शक्कर गन्ने या स़फेद चुकंदर से बनी प्रोसेस्ड व रिफाइंड शक्कर होती है, जिसमें कोई भी पोषक तत्व नहीं होते. यह हमारे शरीर में स़िर्फ कैलोरीज़ जमा करती है.

क्यों हानिकारक है शक्कर?

प्रोसेसिंग के दौरान शक्कर की चमक बढ़ाने के लिए उसमें सल्फर डाइऑक्साइड, फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, एक्टिवेटेड कार्बन जैसे ख़तरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसके सारे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. यह पचने में भी इतनी हेवी होती है कि इसे पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है. यह हमारे शरीर में धीरे-धीरे फैट के रूप में जमा होती रहती है, जो किसी न किसी बीमारी के रूप में बाहर निकलती है. यही वजह है कि इसे ‘स्लो व्हाइट पॉयज़न’ भी कहते हैं.

कहां-कहां से मिलती है शक्कर?

मार्केट में मिलनेवाली रिफाइंड शक्कर के अलावा कई और प्राकृतिक स्रोतों से भी हमें शक्कर मिलती है.

ग्लूकोज़: यह फलों और पौधों में पाया जाता है, जो फोटोसिंथेसिस के कारण बनता है. ज़रूरत पड़ने पर हमारा शरीर भी ग्लूकोज़ बनाता है.

फ्रूक्टोज़: यह फ्रूट शुगर होता है, जो फलों से मिलता है. यह गन्ने और शहद में पाया जाता है.

सुक्रोज़: यह गन्ना, स़फेद चुकंदर और कुछ ग्लूकोज़ के साथ कुछ फलों व सब्ज़ियों में भी पाया जाता है.

लैक्टोज़: दूध से मिलनेवाली इस शक्कर को हम मिल्क शुगर भी कहते हैं.

क्या होता है जब हम खाते हैं शक्कर?

जब हम किसी भी फॉर्म में शक्कर खाते हैं, तो हमारे शरीर के पास उसके लिए दो ऑप्शन्स होते हैं-

  1. उन कैलोरीज़ को बर्न करके एनर्जी में कनवर्ट करना.
  2. कार्बोहाइड्रेट्स को फैट में बदलकर फैट सेल्स में जमा करना.

हमारी बॉडी की एक्टिविटी इस बात पर निर्भर करती है कि उस दिन हमारे शरीर में कितनी शक्कर गई है. अगर शक्कर सही मात्रा में है, तो वो एनर्जी में कन्वर्ट होगी, लेकिन अगर ज़रूरत से ज़्यादा है, तो बॉडी फैट में बदल जाएगी.

कितनी शक्कर की होती है ज़रूरत?

वैसे तो हमें फलों और सब्ज़ियों से ज़रूरत के मुताबिक़ शक्कर मिल जाती है, लेकिन अगर आप रोज़ाना फल, सब्ज़ी और दूध नहीं लेते, तो अपने खाने में निम्नलिखित मात्रा से ज़्यादा शक्कर न लें.

पुरुष: रोज़ाना 9 टीस्पून या लगभग

37.5 ग्राम (150 कैलोरीज़)

महिला: रोज़ाना 6 टीस्पून या लगभग

25 ग्राम (100 कैलोरीज़)

रोज़ाना हमारे शरीर को लगभग 2000 कैलोरीज़ की ज़रूरत होती है, जिनमें से शक्कर का हिस्सा इतना ही है, लेकिन अगर आप इससे ज़्यादा शक्कर लेंगे, तो वो एक्स्ट्रा कैलोरीज़ आपको ही नुक़सान पहुंचाएंगी.

किस तरह बना सकती है रोगी?

शक्कर हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित करती है. किसी विशेष अंग को प्रभावित करने के साथ-साथ यह कई शारीरिक क्रियाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है.

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Sugar Control

  1. वज़न बढ़ाकर दे सकती है मोटापा

आजकल हम जो भी पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड और शुगरी ड्रिंक्स ले रहे हैं, उनमें भारी मात्रा में शक्कर होती है. इन प्रोडक्ट्स में आमतौर पर फ्रूक्टोज़ का इस्तेमाल किया जाता है, जो शक्कर की क्रेविंग्स को और बढ़ा देता है. जो लोग सॉफ्ट ड्रिंक्स, सोडा और पैक्ड फ्रूट जूसेज़ पीते हैं, उनका वज़न बाकी लोगों के मुक़ाबले तेज़ी से बढ़ता है.

  1. प्रभावित करती है इंसुलिन की प्रक्रिया

ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए हमारा शरीर इंसुलिन रिलीज़ करता रहता है, लेकिन जब हम ज़रूरत से ज़्यादा शक्करवाली चीज़ें

खाने-पीने लगते हैं, तब शरीर को बहुत ज़्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है, जिससे इंसुलिन प्रोडक्शन का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है और शरीर इंसुलिन की ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाता. इससे टाइप 2 डायबिटीज़, हार्ट डिसीज़ और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं.

  1. बढ़ा सकती है हार्ट डिसीज़ का ख़तरा

शक्कर के ओवरडोज़ से कई बीमारियां हो सकती हैं, उन्हीं में से एक है, हार्ट प्रॉब्लम्स, जो पूरी दुनिया में इस समय मौत का सबसे बड़ा कारण बन गया है. रिसर्च में यह बात साबित हो गई है कि ज़्यादा शक्कर के सेवन से ओबेसिटी,

इंफ्लेमेशन, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर हो सकता है. ये सभी हार्ट प्रॉब्लम्स के रिस्क फैक्टर्स हैं.

  1. बढ़ाती है कैंसर के रिस्क फैक्टर्स

मोटापा और इंसुलिन की कमी दोनों ही फैक्टर्स कैंसर को ट्रिगर कर सकते हैं. एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो महिलाएं हफ़्ते में तीन बार या उससे ज़्यादा कुकीज़ और बिस्किट्स खाती हैं, उनमें इंडोमेट्रियल कैंसर का ख़तरा बाकी महिलाओं के मुक़ाबले डेढ़ गुना ज़्यादा बढ़ जाता है.

  1. फंसा सकती है एनर्जी ड्रेनिंग साइकल में

अगर कमज़ोरी महसूस कर रहे हों, तो कुछ मीठा खा लें, एनर्जी तुरंत बूस्ट हो जाती है, पर क्या आप जानते हैं कि अगर शक्कर के साथ प्रोटीन, फाइबर या फैट नहीं हो, तो वो एनर्जी टिक नहीं पाती और तुरंत नष्ट हो जाती है. जितनी तेज़ी से एनर्जी लेवल बढ़ता है, उसी तेज़ी से घट जाएगा, जिससे आप दोबारा विकनेस फील करेंगे. इस एनर्जी ड्रेनिंग साइकल से बचना चाहते हैं, तो स़िर्फ शक्करवाली चीज़ें लेना अवॉइड करें. आप लो फील कर रहे हैं, तो कोई शुगरी ड्रिंक पीने की बजाय सेब के साथ कुछ बादाम खा लें.

  1. दे सकती है आपको फैटी लिवर

लंबे समय तक हाई फ्रूक्टोज़ डायट के इस्तेमाल से फैटी लिवर का ख़तरा बढ़ जाता है. ग्लूकोज़ और अन्य तरह की शक्कर शरीर के अन्य सेल्स में घुल जाती हैं, पर फ्रूक्टोज़ स़िर्फ और स़िर्फ लिवर में घुलती है. लिवर उसे एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करता है, लेकिन जब ज़रूरत से ज़्यादा फ्रूक्टोज़ लिवर में आने लगता है, तो वह फैट में बदलने लगता है, जिससे धीरे-धीरे लिवर फैटी होने लगता है.

  1. बढ़ने लगती हैं दांतों की बीमारियां

पिछले कुछ सालों में दांतों की बीमारियां तेज़ी से बढ़ी हैं, क्योंकि हमारे

खान-पान में शक्कर की मात्रा तेज़ी से बढ़ी है. हमारे मुंह में बहुत से हेल्दी व अनहेल्दी बैक्टीरिया रहते हैं. शक्कर एक ऐसी चीज़ है, जिसके कारण अनहेल्दी बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ते हैं और हमें दांतों की समस्याएं होने लगती हैं. शक्कर के कारण दांतों पर एसिड अटैक्स ज़्यादा होते हैं, जो कैविटी का मुख्य कारण बनते हैं.

  1. बढ़ाती है यूरिक एसिड की मात्रा

यूरिक एसिड बनने का मुख्य कारण फ्रूक्टोज़ है. जब शरीर में फ्रूक्टोज़ का लेवल बढ़ जाता है, तो शरीर उसे यूरिक एसिड के रूप में बाहर निकालने लगता है, जिससे हार्ट और किडनी प्रॉब्लम्स शुरू हो जाती हैं.

  1. शुगर एडिक्शन को बढ़ाती है

क्या आप जानते हैं कि शक्कर किसी ड्रग एडिक्शन से कम नहीं है? जी हां, यह हम नहीं बल्कि रिसर्चर्स कहते हैं. उनके मुताबिक़, जब हम शक्करवाली चीज़ें खाते हैं, तो हमारे ब्रेन से डोपामाइन नामक हार्मोन रिलीज़ होता है, जो हमें और शक्कर खाने के लिए उकसाता है और न चाहते हुए भी हम शक्कर का ओवरडोज़ ले लेते हैं.

  1. कम उम्र में बना सकती है अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार

हमारा खानपान हमारे ब्रेन के स्ट्रक्चर और फंक्शनिंग को प्रभावित करता है. रिसर्चर्स के मुताबिक़, ज़रूरत से ज़्यादा शक्कर ब्रेन की उस फंक्शनिंग को प्रभावित करती है, जो हमारी मेमोरी को कंट्रोल करती है. लगातार शक्कर का ओवरडोज़ बहुत कम उम्र में आपको अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार बना सकता है.

क्या हैं शक्कर के हेल्दी विकल्प?

ऑर्गैनिक शहद: इसकी एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज़ के कारण यह बेस्ट स्वीटनर माना जाता है. यह शक्कर से ज़्यादा मीठा होता है, इसलिए कम क्वांटिटी में इस्तेमाल होता है.

गुड़: इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने, आयरन लेवल को बढ़ाने, लिवर को डिटॉक्सिफाई करने के साथ-साथ यह सर्दी-खांसी में भी आपको राहत दिलाता है. जहां भी आपको शक्कर की ज़रूरत पड़ती हो, वहां गुड़ का इस्तेमाल करें.

खजूर: खजूर का इस्तेमाल आप हलवा, खीर जैसे डेज़र्ट्स और मिठाइयां बनाने के लिए कर सकते हैं. शक्कर की बजाय खजूर और काजू पाउडर आदि इस्तेमाल कर सकते हैं. ब्राउन शुगर की बजाय आप डेट शुगर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

अनरिफाइंड शुगर: इसे रिफाइंड नहीं किया जाता, जिससे आयरन और मैग्नीशियम जैसे प्राकृतिक तत्व बने रहते हैं. देखने में यह भूरे रंग का होता है, जिसका स्वाद शहद जैसा होता है. रिफाइन्ड शक्कर की जगह इसका इस्तेमाल करें.

कोकोनट या पाम शुगर: यह एक बेहतरीन नेचुरल स्वीटनर है, क्योंकि इसे प्रोसेस करने के लिए किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. रोज़ाना की कुकिंग में इसे शामिल करें. चाय में डालकर आप रिफाइंड शक्कर से बच सकते हैं.

– अनीता सिंह

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रिश्तों को आजकल हुआ क्या है? (What Is Wrong With Relationship These Days?)

जिस्मों के रिश्ते हैं, आज की रूहों की यही हक़ीक़तें हैं… जज़्बात ग़ायब हैं, एहसास गुमसुम-से… हसरतें बेहिसाब हैं… वासनाओं पर मर्यादाओं का पहरा अब नहीं है, साथ जीने-मरने की क़समों का इरादा अब नहीं है… ख़ालिस मुहब्बत अब बंधन-सी लगती है, बेपनाह चाहत अब बेड़ियां बन गई हैं… अपने तरी़के से जीने का शग़ल, है हर कोई अपनी ही धुन में मगन… एक-दूसरे के साथ रहता तो है तन, पर न जाने कहां भटका हुआ है यह मन…

Relationships

–     इसे मॉडर्न होने की परिभाषा कहें या प्रैक्टिकल सोच, लेकिन सच है कि रिश्तों में अब वो पहले वाली गहराई नहीं रही.

–     ऐसा नहीं है कि लोग जुड़ते नहीं हैं, लेकिन ये जुड़ाव अब क्षणिक होता है.

–     रिश्तों में अब एडजेस्टमेंट करने की जगह न के बराबर बची है, क्योंकि दोनों पार्टनर्स में से किसी को भी कॉम्प्रोमाइज़ नहीं करना है.

–     शादी के रिश्ते में एक साथ होते हुए भी अलग-अलग हैं.

–     आज दोनों पार्टनर्स वर्किंग होते हैं, ज़ाहिर है लाइफस्टाइल इतनी बदल गई है कि रिश्तों में भी बदलाव आ गया है. लेकिन ये बदलाव इस कदर हावी हो रहा है कि हम ख़ुद भी सोचते हैं कि रिश्तों को आजकल हुआ क्या है?

–     डबल इन्कम नो किड्स से लेकर अब नौबत डबल इन्कम नो सेक्स तक पहुंच चुकी है. सेक्स के लिए न टाइम है, न एनर्जी.

–     जो बची-खुची एनर्जी है, वो सोशल मीडिया पर ज़ाया हो रही है.

–     डिनर के टेबल पर सब अपने मोबाइल फोन्स के साथ बैठते हैं. कहने को साथ खाना खा रहे हैं, पर कनेक्टेड कहीं और ही रहते हैं… बच्चे पिक्चर्स क्लिक करके फ्रेंड्स के साथ शेयर करते हैं और बड़े अपने-अपने क्रश या दोस्तों के साथ.

–     पति-पत्नी बेड पर अपने-अपने फोन्स के साथ ही होते हैं… दोनों को परवाह नहीं कि कौन, किससे बात कर रहा है, न ही इस बात की फ़िक्र है कि आपस में इतनी देर से कोई बातचीत उनके बीच नहीं हो रही.

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Relationship Problems

ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि रिश्तों को आजकल हुआ क्या है?

नो कमिटमेंट: लोग आकर्षित तो होते हैं, प्यार भी करते हैं, पर कमिटमेंट से डरते हैं. आजकल इतनी जल्दी रिश्ते बनते-बिगड़ते हैं कि लोग ख़ुद भी यह तय नहीं कर पाते हैं कि इस रिश्ते में उन्हें कब तक रहना है. उन्हें लगता है, जब तक चल रहा है, चलने देते हैं, कोई और मिल गया, तो वहां चले जाएंगे, क्योंकि कौन-सा हमको शादी करनी है. यही वजह है कि रिश्ते नॉन सीरियस होते जा रहे हैं.

कैल्कुलेटिव हो रहे हैं: आजकल रिश्ते ज़रूरी नहीं, बल्कि ज़रूरत के रिश्ते रह गए हैं, जिनसे हमारा स्वार्थ सिद्ध हो, वो उस समय के लिए हमारे लिए महत्वपूर्ण होते हैं. मतलब निकलने के बाद एक-दूसरे को पहचानते भी नहीं.

प्रैक्टिकल अप्रोच: हम अब प्रैक्टिकल हो गए हैं. हमारे अनुभव भी हमें यही सीख देते हैं कि इमोशनल होना स़िर्फ बेव़कूफ़ी है. बेहतर है, जितना प्रैक्टिकल रहें, उतना फ़ायदा होगा. शहरों में वर्क लाइफ के बाद स़िर्फ वीकेंड में अपने लिए समय मिलता है. उसमें हम अपनों के साथ समय बिताने की बजाय उन लोगों के साथ समय बिताना पसंद करते हैं, जिनसे हमें कोई न कोई फ़ायदा हो.

स्पेस के नाम पर बढ़ती दूरियां: ‘स्पेस…’ आजकल यह शब्द काफ़ी घर कर गया है हमारे रिश्तों में भी. हर किसी को स्पेस चाहिए यानी रिश्ते में बंधने के बाद भी कोई बंधन न हो. यह अजीब सोच है, क्योंकि प्यार के रिश्ते में एक-दूसरे से कुछ छिपाने की ज़रूरत ही नहीं होनी चाहिए. जब सब कुछ साझा है, तो छिपाना क्या है और क्यों है? पर अक्सर कपल्स को कहते सुना है कि हमें स्पेस चाहिए, वरना रिश्ते में दम घुटने लगता है. हां, यह सही है कि कोई सिर पर सवार न रहे हमेशा, न ही हर बात पर टोके, पर स्पेस के नाम पर हर बात को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता.

सेक्स, आज नहीं: काम का दबाव इतना ज़्यादा होता है कि सेक्स के लिए एनर्जी ही नहीं बचती. यहां तक कि अब तो सेक्स की इच्छा भी नहीं होती. ऑफिस में अधिकतर समय गुज़ारने के चलते कलीग्स से इतनी नज़दीकियां बढ़ जाती हैं कि पार्टनर से ज़्यादा आकर्षण उनमें नज़र आने लगता है. ऐसे में पति-पत्नी एक-दूसरे से दूरी बनाने लगते हैं. सेक्स के लिए कोई एक क़रीब आना भी चाहे, तो दूसरा बहाना बना देता है कि आज नहीं, बहुत थकान है या सुबह जल्दी उठना है… आदि.

डिजिटल रिश्ते रियल रिश्तों पर हावी: सोशल साइट्स के रिश्ते अब ज़्यादा भाने लगे हैं. उनमें अजीब-सा आकर्षण होता है. टेक्स्ट मैसेजेस, चैटिंग की लत ऐसी लग जाती है कि रियल रिश्ते बोझ लगने लगते हैं और डिजिटल वर्ल्ड की रंगीन दुनिया हसीन लगने लगती है. लेकिन यह कुछ समय का ही नशा होता है, क्योंकि ये रिश्ते हमें ठगते ज़्यादा हैं और संबल कम देते हैं.

कम्यूनिकेशन की कमी: आसपास होते हुए भी आपस में बातचीत का न तो समय है, न ही इच्छा. अपनी-अपनी दुनिया में सभी व्यस्त हैं. एक-दूसरे के सुख-दुख को जानने-समझने की फुर्सत ही नहीं रह गई. धीरे-धीरे रिश्तों में ख़ामोशी पसर जाती है और न जाने कब

एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं. हर रिश्ते की मज़बूती के लिए बेहद ज़रूरी है आपसी बातचीत यानी कम्यूनिकेशन, पर उसकी कमी के चलते रिश्ते दम तोड़ने लगते हैं और जब तक एहसास होता है, तब तक देर हो चुकी होती है.

– योगिनी भारद्वाज

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सीखें ख़ुश रहने के 10 मंत्र (10 Tips To Stay Happy)

Happy

सीखें ख़ुश रहने के 10 मंत्र

आज की लाइफस्टाइल में खुश रहना भी किसी चुनौती से कम नहीं, पर इन टिप्स को आज़माकर आप भी रह सकते हैं खुश और पॉज़िटिव

1 आप हैं तो सबकुछ है, इसलिए सबसे पहले ख़ुद से प्यार करना सीखें.

2 अगर आप ख़ुश हैं, तो आप दूसरों को भी ख़ुश रखते हैं. इसलिए अपनी ख़ुशियों को प्राथमिकता दें.

3 यदि आपको किसी से कुछ कहना है, तो कह दीजिए, क्योंकि कह देने से मन हल्का हो जाता है. यदि आप मन की बात कह नहीं सकते, तो उसे काग़ज़ पर लिख दीजिए, ऐसा करने से भी आप हल्का महसूस करेंगे.

4 रिश्ते अनमोल होते हैं, इसलिए अपने रिश्तों की क़द्र करें और उन्हें पर्याप्त समय दें.

5 दोस्तों के साथ हम सबसे ज़्यादा ख़ुश रहते हैं, इसलिए दोस्तों के साथ समय गुज़ारें.

6 किसी भी मनमुटाव को मन में रखने से मन भारी हो जाता है और तनाव बढ़ जाता है, ख़ुश रहने के लिए माफ़ करना सीखें.

7 आपकी उम्र चाहे जो होे, अपने भीतर के बच्चे को कभी बड़ा न होने दें. उसे शरारतें करने दें, तभी आप ज़िंदगी की असली ख़ुशी महसूस कर सकेंगे.

8 आप चाहे कितने ही बिज़ी क्यों न हों, अपने शौक़ के लिए समय ज़रूर निकालें. इससे आपको कभी बोरियत नहीं महसूस होगी और आप ज़िंदगी से हमेशा प्यार करेंगे.

9 ख़ुशी पाने से कहीं ज़्यादा ख़ुशी देने से संतुष्टि मिलती है, इसलिए जीवन में ऐसे काम ज़रूर करें जिनसे आप दूसरों के चेहरे पर ख़ुशी बिखेर सकें.

10 स्वस्थ और फिट रहें, क्योंकि बीमार शरीर कभी ख़ुश नहीं  रह सकता.

– वंशज विनय

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