Lisa Ray Becomes A Mother To Twi...

Lisa Ray
लिसा के पैर में लगी चोट

लिसा रे को पैरों में चोट लग गयी है.ना ही चोट लगी है बल्कि उन्हें तो वैसाखी का सहारा भी लेना पड़ रहा है.जी हां बॉलीवुड एक्ट्रेस लिसा रे ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं,जिसमे लिसा के पैरों में गंभीर चोट नज़र आ रही है. लिसा ने पोस्ट में लिखा है,’ बच्चें वाकई में आपकी सेहत के लिए हानिकारक होते हैं,बस यही मुझे कहना है’.इसका मतलब है की लिसा को चोट उनकी बेटियों की वजह से लगी है.

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कहा, बच्चों की वजह से लगी चोट
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बच्चे हैं सेहत के लिए हानिकारक !

लिसा रे की दो जुड़वाँ बेटियां हैं,जिनके नाम सूफी और सोलेल हैं.दोनों की तस्वीरें अक्सर लिसा अपने सोशल अकाउंट पर पोस्ट करती रहती हैं.46 की उम्र में लिसा सरोगसी से जुड़वाँ बेटियों की माँ बनी थीं.

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लिसा रे की दो जुड़वाँ बेटियां
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Lisa Ray Childrens
Lisa Ray Childrens

आपको बता दें लिसा एक कैंसर सर्वाइवर भी रह चुकी हैं.साल 2009 में लिसा इस दर्द से गुज़री थीं.साल 2010 में लिसा ने स्टेम सेल ट्रांसप्लांट करवाकर इससे मुक्ति तो पायी थी लेकिन उस बीमारी को लेकर लिसा आज भी सतर्क रहती हैं,और अपने खानपान का काफी ध्यान रखती हैं.लिसा की इस बीमारी पर एक किताब भी छप चुकी है.

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लिसा पर लिखी गयी किताब लोगों को काफी पसंद आयी थी .उनके फैंस ने उन्हें एक मज़बूत महिला कहकर सम्बोधित किया है.कुछ दिन पहले लिसा क्रिसमस की तैयारियों को लेकर काफी उत्साहित थी.घर में सजावट भी शुरू हो गयी थी,लेकिन अब लगता है इन वैसाखियों के साथ लिसा को क्रिसमस सेलिब्रेट करने में थोड़ी निराशा तो जरूर होगी।

मां बनना दुनिया का सबसे ख़ूबसूरत एहसास है और अपने बच्चे को गोद में खिलाना सबसे अनोखा अनुभव. लिज़ा रे (Lisa Ray) इन दिनों इसी ख़ूबसूरत एहसास का आनंद ले रही हैं. जी हां, हाल में ही लिज़ा रे सेरोगेसी (Surrogacy) के माध्यम से दो बच्चों की मां (Mother) बनी हैं. इस बारे में एक मशहूर अख़बार में दिए इंटरव्यू में लिज़ा ने कहा कि इन दिनों मैं एकदम अलग अनुभवों को महसूस कर रही हूं. बच्चों को दूध पिलाने से लेकर उन्हें सुलाने और घर व कामकाज में संतुलन बैठाने की पूरी कोशिश कर रही हूं. मुझे अपने पति, दोस्तों और परिवारवालों का पूरा सहयोग मिल रहा है. यह एकदम अलग किस्म का एहसास है. मैं जल्द ही अपनी बेटियों को लेकर मुंबई आनेवाली हूं.”

Lisa Ray

लिज़ा रे ने स्वीकार किया कि युवास्था में उन्हें मां बनने में कोई दिलचस्पी नहीं थी. उन्होंने कहा कि मेरी जीवन में बहुत सी चीज़ें अनप्लान्ड हैं. जेसन के साथ शादी करने के बाद मेरे मन में मां बनने की इच्छा पैदा हुई. शुरुआत में तो मुझे भी इस बात पर विश्वास नहीं हुआ. पर धीरे-धीरे मेरी इच्छा बढ़ती गई.
लिज़ा और उनके पति ने अपनी बेटियों का नाम  ‘सूफी’ और ‘सोलेल’ रखा है. इन दोनों बच्चों का जन्म इसी साल जून में सोरोगेसी के जरिए जॉर्जिया में हुआ.

Lisa Ray With Her Twin Babies

लीज़ा मानती हैं कि जब उन्हें साल 2009 में एक प्रकार के ब्लड कैंसर से डायग्नॉज़ किया गया था उस वक्त ही उन्हें यह अहसास हो गया था कि लम्बे वक्त तक चलने वाली इस बीमारी की दवाइयों के चलते वह खुद कभी मां नहीं बन पाएंगी. लीज़ा कहती हैं, ‘मेरी किस्मत अच्छी है कि आजकल की नई तकनीक ने मेरी उम्मीदों को बरकरार रखा और मां बनने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है. जिसके बाद मैं और मेरे पति ने यह निर्णय लिया कि हम सोरोगेसी का सहारा लेंगे. इस प्रक्रिया के लिए भारत ही हमारी पहली पसंद थी और हमने एक नामी डॉक्टर से इस बारे में सलाह भी ली.  लेकिन इस प्रक्रिया के शुरु होने से पहले ही भारत ने सोरोगेसी के नियमों में भारी दबलाव कर दिए जिसके कारण हमें गहरा झटका लगा.’
Lisa Ray With Her Twin Babies
भारत के बाद लीज़ा ने सोरोगेसी की प्रक्रिया के लिए मेक्सिको को चुना लेकिन वहां भी उन्हें निराशा हाथ लगी. फिर लीज़ा के कुछ दोस्तों ने उन्हें जॉर्जिया जाने की सलाह दी. जॉर्जिया में सोरोगेसी के लिए बाकायदे कानून हैं और वहां इस प्रक्रिया में धांधली नहीं होती. लिहाज़ा लीज़ा ने जॉर्जिया को चुना और कुछ महीनों के लिए वह वहां शिफ्ट हो गईं.
Lisa Ray With Her Husband
अपने पति जेसन के बारे में बात करते हुए लीज़ा ने बताया, ‘मैं और मेरे पति 40 की उम्र के बाद माता-पिता बने हैं जो अपने आप में अपरंपरागत है लेकिन हमारे लिए यह बिल्कुल सही समय है. मैं जेसन को पिता का किरदार निभाते हुए देखना चाहती हूं जिसमें वह बेटियों को पकड़ें, उनके डायपर्स बदलें.’ लीज़ा कहती हैं कि वह अपनी मां बनने की इस यात्रा को दुनिया के साथ इसलिए शेयर करना चाहती हैं क्योंकि वह सोरोगेसी को लेकर मौजूद मिथकों को मिटाना चाहती हैं.

Lisa Ray With Her Husband

अपनी बेटियों के भविष्य के बारे में लीज़ा कहती हैं, ‘मैं अपनी बेटियों को खुली सोच वाला मज़बूत इंसान बनाने की कोशिश करूंगी और उनको यह यकीन दिलाऊंगी कि जो भी उनका दिल चाहे उसे वह हर हाल में हासिल कर सकतीं हैं. इंसान के लिए कोई सीमा नहीं होती सिवाए उसकी सोच के और बच्चों को इसका कोई अंदाज़ा नहीं होता कि वह क्या पा सकते हैं और क्या नहीं. अगली पीढ़ी को अच्छा इंसान बनाना ही बेहतर भविष्य और दुनिया के लिए सबसे अहम् है. मैं अपनी बेटियों के कान में यह बात बोलने के लिए बेचैन हूं कि भविष्य महिलाओं का है.

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