Love Story

टीवी के फेमस कपल गुरमीत चौधरी और देबिना की लव स्टोरी उनकी तरह ही बहुत ख़ास है. नाम, पैसा, प्यार, ख़ुशियां… बहुत कम लोगों को ये तमाम चीज़ें एक साथ मिल पाती हैं, लेकिन देबिना बनर्जी और गुरमीत चौधरी उन ख़ुशनसीब लोगों में से हैं, जिन्हें ज़िंदगी ने दिल खोलकर ख़ुशियां और प्यार दिया. हां, उनकी क़ामयाबी का ज़िक्र करते समय ये बताना ज़रूरी है कि ये सब तभी मुमकिन हुआ, जब देबिना और गुरमीत ने न स़िर्फ एक-दूसरे का हाथ थामा, बल्कि एक-दूसरे के सपोर्ट सिस्टम भी बने. देबिना और गुरमीत चौधरी टीवी के उन रोमांटिक कपल्स में से एक हैं, जो ये अच्छी तरह जानते हैं कि बिज़ी लाइफ में भी रोमांटिक कैसे रहा जा सकता है.

Gurmeet Chaudhary And Debina Banerjee

ऐसे शुरू हुई गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी की लव स्टोरी
देबिनाः गुरमीत मेरी फ्रेंड के बॉयफ्रेंड के दोस्त थे और अपने दोस्त के साथ अक्सर हमारे घर आया करते थे. फिर मेरी फ्रेंड और उसका बॉयफ्रेंड अपनी रोमांटिक बातों में बिज़ी हो जाते थे और हम दोनों अकेले पड़ जाते थे. ऐसे में हमारे पास एक-दूसरे से बातें करने के अलावा और कोई चारा नहीं होता था. धीरे-धीरे हमारी दोस्ती बढ़ी और पता ही नहीं चला कब प्यार हो गया. (हंसते हुए) मज़े की बात ये है कि उन दोनों का ब्रेकअप हो गया और हमारी शादी हो गई.

गुरमीतः देबिना के आने से मेरी लाइफ में एक अच्छा दोस्त आया, जिससे मैं अपने मन की हर बात कह सकता हूं. देबिना से मुलाक़ात के एक महीने बाद ही मैं उसे दिल दे बैठा. मैं देबिना के बिना जी नहीं सकता, इस बात का एहसास मुझे उसी व़क्त हो गया था. फिर बहुत जल्दी ही हमने शादी का फैसला कर लिया.

बहुत अच्छी अंडरस्टैंडिंग है गुरमीत और देबिना के बीच
देबिनाः न मैं गुरमीत के बिना एक क़दम चल सकती हूं और न ही गुरमीत. हम हर काम में एक-दूसरे की सलाह लेते हैं. एक्टिंग के मामले में भी हम एक-दूसरे के काम को एक क्रिटिक की तरह देखते हैं और बेबाक राय देते हैं. इससे हमें अपने काम को सुधारने का मौक़ा मिलता है.

गुरमीतः देबिना बहुत समझदार है, हर सिच्युएशन को बड़ी आसानी से हैंडल कर लेती है. सफल शादीशुदा ज़िंदगी के लिए पति-पत्नी के बीच अच्छी अंडरस्टैंडिंग होनी ज़रूरी है. हम लकी हैं कि हमारे बीच बहुत अच्छी अंडरस्टैंडिंग है.

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Gurmeet Chaudhary And Debina Banerjee

एक्स्ट्रीम कपल हैं गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी
देबिनाः गुरमीत का हर काम एक्स्ट्रीम होता है. पहले मुझे ये सही नहीं लगता था, लेकिन आज उनकी क़ामयाबी देखकर लगता है कि एक्स्ट्रीम के बिना ये मुमकिन नहीं था. बैलेंस करने के लिए मैं हूं ना, लेकिन बिना एक्स्ट्रीम के सक्सेस नहीं मिल सकती. गुरमीत जब झलक दिख ला जा कर रहे थे, तो कई बार सुबह पांच बजे तक रिहर्सल करते थे, घर आकर स़िर्फ 10 मिनट लेटते थे और फिर नहा-धोकर पुनर्विवाह सीरियल की शूटिंग के लिए चले जाते थे. अगर उनमें एक्स्ट्रीम करने का वो जुनून न होता, तो वो इतनी मेहनत कभी न कर पाते. मैं कभी इतनी मेहनत नहीं कर सकती.

गुरमीतः मैं जो भी काम करता हूं उसमें जान लगा देता हूं, फिर चाहे वो एक्टिंग हो या डे टु डे के अन्य काम. मैं पूरी ईमानदारी से वर्कआउट करता हूं, डायट फॉलो करता हूं, (हंसते हुए) और जिस दिन आलस करता हूं, उस दिन उसे भी पूरी शिद्दत के साथ करता हूं. उस दिन मैं कोई काम नहीं करता, वर्कआउट नहीं करता, जमकर खाता हूं. मेरा हर काम ऐसा ही होता है.

ऐसा है गुरमीत और देबिना का टाइम मैनेजमेंट
देबिनाः हम दोनों का शेड्यूल बिज़ी रहता है इसलिए हम एक-दूसरे के साथ समय बिताने का कोई मौक़ा नहीं गवांते, जैसे फ्री टाइम में मुझे यदि पार्लर जाना है, लेकिन गुरमीत घर में हैं, तो मैं पार्लर नहीं जाती. वो टाइम मैं गुरमीत को देती हूं.

गुरमीतः कई बार ऐसा भी होता है कि हम दोनों शिफ्ट्स में काम करते हैं और कई दिनों तक साथ समय नहीं बिता पाते. काम की वजह से लंबी छुट्टी भी नहीं मिल पाती. ऐसे में 2-3 दिन का व़क्त मिलने पर उसे ट्रैवलिंग में बर्बाद करने की बजाय हम शहर के ही किसी अच्छे होटल में रूम बुक करके वहां अपने हॉलिडेज़ एंजॉय करते हैं.

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Gurmeet Chaudhary And Debina Banerjee

ऐसा है गुरमीत और देबिना का घर
देबिनाः हम दोनों ने अपने घर को बहुत प्यार से सजाया है. घर की हर एक चीज़ हमने बड़े शौक़ से ख़रीदी है. हमारे पास एक डॉग भी है इसलिए घर का इंटीरियर करवाते समय हमने उसकी सहूलियत का भी ध्यान रखा. हमें व्हाइट कलर और ज्योमैट्रिक डिज़ाइन का मॉडर्न डेकोर पसंद है, बहुत डार्क, हैवी, फंकी डेकोर हमें अच्छा नहीं लगता.

गुरमीतः हम दोनों को घर में व्हाइट कलर बहुत पसंद है. इससे घर साफ़ और बड़ा नज़र आता है. घर आने पर एक अलग-सा सुकून मिलता है इसलिए आपको हमारे घर में ज़्यादातर व्हाइट कलर ही नज़र आएगा.

ऐसे मनाते हैं गुरमीत और देबिना हर त्योहार
देबिनाः हम हर त्योहार साथ मनाते हैं. अभी गणपति फेस्टिवल भी हमने साथ ही मनाया. हम हर साल डेढ़ दिन के लिए गणपति घर लाते हैं. इसके लिए हम पहले से ही छुट्टी ले लेते हैं और अच्छी तरह तैयार होकर दोस्तों को घर बुलाते हैं. ये सब करना हमें अच्छा लगता है.

गुरमीतः मैं आर्मी बैकग्राउंड से हूं और आर्मी में हर त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, इसलिए मैं भी हर त्योहार धूमधाम से मनाता हूं. मेरा असर अब देबिना पर भी पड़ गया है, वो भी ऐसा ही करती है. देबिना और मेरी कोशिश होती है कि त्योहार के समय हम शहर में ही रहें. त्योहार के समय हम दोस्तों को घर बुलाते हैं, यही मौक़ा होता है जब हम अपनी फैमिली और फ्रेंड्स के साथ व़क्त गुज़ार पाते हैं. त्योहारों की ख़ुशी हमारे चेहरे पर साफ़ नज़र आती है.

हमेशा एक दूजे के साथ रहना चाहते हैं गुरमीत और देबिना
देबिनाः हमने करियर में कितनी सफलता हासिल की, अपनी लाइफ स्टाइल में कितनी लग्ज़री जुटा ली, ये सब हमारे लिए सेकेंडरी चीज़े हैं. प्रोफेशनल अचीवमेंट्स से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हमारा साथ है. हम साथ हैं और ख़ुश हैं, ये हमारे लिए सबसे बड़ा अचीवमेंट है.

गुरमीतः मेरा परिवार ही मेरे लिए सबकुछ है इसलिए परिवार में किसी को कुछ भी हो जाए तो मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता. मेरा परिवार ही मेरी ताक़त भी है और मेरी एनर्जी भी.

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Gurmeet Chaudhary And Debina Banerjee

ये है गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी का स्टाइल मंत्र
देबिनाः मैं अपने मूड और मौ़के के हिसाब से कपड़े पहनती हूं. त्योहार या किसी ख़ास मौ़के पर सजना-सवंरना मुझे अच्छा लगता है.

गुरमीतः मैं हर 2-3 महीने में अपना लुक बदलता रहता हूं. मुझे एक ही तरह का बोरिंग लुक पसंद नहीं. मेरे पास वॉचेज़, परफ्यूम और सनग्लासेस का अच्छा-खासा कलेक्शन है और ये सब मुझे मेरे फैन्स ने दिए हैं. मैं बहुत ख़ुशनसीब हूं कि मुझे दर्शकों का इतना प्यार मिला.

ये है गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी का करियर ग्राफ
गुरमीत चौधरी: रामायण, गीत- हुई सबसे पराई, पुनर्विवाह, झलक दिखला जा- सीज़न 5, नच बलिए- सीज़न 6, फियर फैक्टर- खतरों के खिलाड़ी- सीज़न 5,
फिल्म- वजह तुम हो, ख़ामोशियां, मि. एक्स, हेट स्टोरी 3, कोई आप सा, हेट स्टोरी 4, लाली की शादी में लड्डू दीवाना

देबिना बनर्जी: रामायण, पति, पत्नी और वो, चिड़िया घर, नच बलिए- सीज़न 6, फियर फैक्टर- खतरों के खिलाड़ी- सीज़न 5, यम हैं हम, ख़ामोशियां (फिल्म)

– कमला बडोनी

बॉलीवुड एक्ट्रेस रेखा (Rekha) की खूबसूरती के लाखों दीवाने हैं. रेखा का साड़ी पहनने का अंदाज़, उनकी मखमली आवाज़, उनका मेकअप सबकुछ ख़ास होता है. रेखा की एक झलक पाने के लिए उनके फैन्स बेकरार रहते हैं. ‘गुम है किसी के प्यारे में’ (Ghum Hain Kisi Ke Pyar Mein) सीरियल के प्रोमो वीडियो में रेखा का दिलकश अंदाज़ लाजवाब है. ये वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है. ‘गुम है किसी के प्यारे में’ का प्रोमो वीडियो देखकर सबके मन में एक ही सवाल है कि क्या रेखा अब टीवी डेब्यू करने जा रही हैं?

क्या अब टीवी पर नज़र आएंगी रेखा?
बॉलीवुड फिल्मों में अपने शानदार अभिनय से लाखों दिलों को जीतने वाली बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस रेखा अब टीवी पर नज़र आएंगी. जी हां, अब आप रेखा को सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ देख सकेंगे. इस शो का प्रोमो जारी हो चुका है और ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. प्रोमो की शुरुआत में रेखा अपना पॉपुलर गाना- ‘गुम है किसी के प्यार में दिल सुबह-शाम’ गुनगुनाते नजर आ रही हैं. इसके बाद रेखा कहती हैं- ‘आप लोग सोच रहे होंगे न कि मैं ये गाना स्टार प्लस पर क्यों गुनगुना रही हूं.” फिर रेखा कहती हैं, दरअसल, ये गीत मेरे दिल के बहुत करीब है, इसमें कही एक कसक छुपी हुई है, जहां प्यार का इज़हार तो है, लेकिन उसका नाम लेने की इजाज़त नहीं है. जब दिल किसी के प्यार में गम रहे, तो मोहब्बत इबादत बन जाती है. इस गीत ने विराट की प्रेम कहानी को जन्म दिया है, जहां फ़र्ज़ की राह पर चलते-चलते उसने अपने प्यार की कुर्बानी दे दी. विराट आज भी तड़प रहा है इंतज़ार में. आखिर उसका दिल गुम है किसी के प्यार में.”

(वीडियो क्रेडिट- विरल भयानी इंस्टाग्राम)

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रेखा के इस प्रोमो वीडियो को देखकर उनके फैन्स काफी उत्साहित हैं. ‘गुम हैं किसी के प्यार में’ के प्रोमो वीडियो में रेखा हमेशा की तरह गॉर्जियस नज़र आ रही हैं. वीडियो में रेखा की कांजीवरम साड़ी, हैवी ज्वेलरी और खूबसूरत मेकअप लाजवाब लग रहा है. बता दें कि अभी तक यह पता नहीं चला है कि रेखा शो में किस तरह का रोल प्ले करेंगी. स्टार प्लस पर आने वाला सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ एक पुलिस अफसर की प्रेम कहानी पर आधारित है. प्रोमो वीडियो को देखकर यह अंदाजाय लगाया जा रहा है कि इसकी कहानी लव ट्राइएंगल पर आधारित है. इस सीरियल में नील भट्ट, आयशा सिंह और ऐश्वर्या शर्मा मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे.

शादी से लेकर हनीमून तक के सफ़र में वे हर पल मेरे संग बने रहने का प्रयास करते रहे और मैं किसी-न-किसी बहाने दूर छिटकने का. ख़ासकर हनीमून के वक़्त, तो मैं इस बात को लेकर काफ़ी काॅन्शियस हो गई थी कि लोग हमें साथ-साथ देखकर उल्टे-सीधे ताने न कसने लगें.

कहते हैं, शादी और हनीमून एक लड़की की ज़िंदगी के सबसे हसीन पल होते हैं. जिनका वह तरूणाई से यौवनावस्था तक बेसब्री से इंतज़ार करती है. मेरी ज़िंदगी में भी ये पल आए, लेकिन अफ़सोस मन में इन्हें लेकर मुझे कोई खु़शी या उत्साह नहीं था. दरअसल, परिस्थितियां कुुछ ऐसी बन पड़ी थीं कि जिस लड़के से मेरी शादी तय हुई थी, वह किसी मायने में मेरे सपनों के राजकुमार से मेल नहीं खा रहा था. छोटा कद, सांवला रंग, दुबली काया, चेहरे पर दाग़, जबकि अपने सौन्दर्य को लेकर मैंने हमेशा राजकुमारी और चंदा जैसी उपमाएं ही सुनी थीं.
शादी से लेकर हनीमून तक के सफ़र में वे हर पल मेरे संग बने रहने का प्रयास करते रहे और मैं किसी-न-किसी बहाने दूर छिटकने का. ख़ासकर हनीमून के वक़्त, तो मैं इस बात को लेकर काफ़ी काॅन्शियस हो गई थी कि लोग हमें साथ-साथ देखकर उल्टे-सीधे ताने न कसने लगें. इसलिए जैसे ही हम अपने गंतव्य मनाली पहुंचे, तो होटल में पहुंचते ही मैं रिसेप्शन से अपने सुइट की चाबियां लेकर सीढ़ियां चढ़ने लगी. जबकि मेरे पति बैरे को सामान उठाने में मदद करने लगे.
सुइट में पहुंचकर मैं राहत की सांस ले ही रही थी कि नीचे से हो-हल्ला सुनाई पड़ा. मैंने खिड़की से नीचे झांका, तो देखा एक लड़की अपनी साड़ी संभालती तेजी से भाग रही है, उसके पीछे-पीछे मेरे पति और उनके पीछे चार-पांच लोगों की भीड़. मेरी तो रूह कांप उठी.
‘हे भगवान! सूरत के साथ-साथ क्या यह इंसान चरित्र से भी..?’ मुझे चक्कर-सा आने लगा और मैं बिस्तर पर बेसुध गिर गई. जोर-जोर से दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ से मेरी तंद्रा टूटी. बाहर एक गार्ड को खड़ा देखा. उसने मुझसे पूछा कि सुनिल कुमार आपके पति हैं? तो मेरा संदेह यकीन में बदल गया. ‘अब क्या होगा? मुझे थाने जाकर अपने पति के बेकसूर होने की दुहाई देनी होगी?’
कांपते कदमों से मैं उसके संग नीचे आई. तो वही लड़की लपककर भीड़ चीरती मेरे एकदम पास आ गई.
‘आपके पति ने मेरा सब कुछ लुटने से बचा लिया.’ वह भावविह्ल हो रही थी. उसके पति ने उसे संभाला. पता चला वह भी हनीमून कपल था. विदा होते वक़्त रिवाज़ के अनुसार लड़की ने भारी साड़ी और सारे गहने पहन रखे थे, जो उसके पति ने उतरवाकर उसके पर्स में रखवा दिए थे. वह जब रिसेप्शन पर चाबी ले रहा था, तभी एक बदमाश, जो जाने कब से उन पर नज़र रखे हुए था, लड़की का पर्स झपट्टा मारकर ले उड़ा.
साड़ी संभालते वह उसके पीछे लपकी. मेरे पति तुरंत उसकी मदद को दौड़े. और मैं बेवकूफ़ बिना पूरी बात जाने ही न जाने क्या समझ बैठी? अपनी सोच पर मैं बेहद लज्जित हो उठी. तभी सामने से लोग हटे, तो एक बैंच पर मुझे अपने पति बैठे दिखे. उनके पैर में चोट आई थी और एक आदमी मरहमपट्टी कर रहा था. मैं दौड़कर उनसे लिपट गई और फूट फूटकर रोने लगी. वे मुझे प्यार से सहलाने लगे, “कुछ भी तो नहीं हुआ, मैं बिल्कुल ठीक हूं.”
मैं कहना तो चाहती थी कि ये पश्चाताप और खु़शी के मिलेजुले आंसू हैं, जिन्होंने मेरे मन का सारा मैल धो दिया है. पर निःशब्द मंत्रमुग्ध उन्हें निहारती ही रह गई, क्योंकि मेरे सामने बेहद ख़ूबसूरत, उज्ज्वल, मज़बूत कद-काठीवाला मेरे सपनों का राजकुमार जो खड़ा था… जो मेरा पहला प्यार ही नहीं जन्मभर का साथ भी बन गया था…

संगीता माथुर

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वक़्त के साथ बहुत कुछ बदला है, प्यार करने अंदाज़ भी अब पहले जैसा नहीं रहा. पहले जहां मोहब्बत के नाम से ही एक सिहरन-सी होने लगती थी, अब वो सिहरन सीधे सेक्स तक पहुंच गई है. लव से लेकर लस्ट तक, प्यार से लेकर सेक्स तक… आज की पीढ़ी को सबकुछ फटाफट चाहिए. इनकी इंस्टेंट लव स्टोरी में सब्र जैसे शब्द के लिए कोई जगह नहीं. आज की युवा पीढ़ी के लिए सेक्स अब बंद कमरे में ढंके-छुपे तौर पर डिस्कस की जाने वाली चीज़ नहीं रही, अब लोग खुलकर अपनी सेक्स डिज़ायर को जाहिर करते हैं और इसे पाने के लिए उन्हें रिश्ते में बंधने का सब्र भी नहीं है. भूख-प्यास की तरह जब सेक्स की चाह होती है, तो लोग इसे फटाफट पा लेना चाहते हैं, इसके लिए उन्हें इंतज़ार करना मंज़ूर नहीं. सेक्स में नैतिकता जैसी बातें अब बहुत पुरानी हो गई हैं, आज की पीढ़ी इसे फिज़िकल हंगर से जोड़कर देखती है. बदलाव की ये लहर आख़िर हमें कहां ले जा रही है?

Meaning Of Love For Today's Youth

सेक्स चाहिए, पर बंधन नहीं
साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं, आज के कई युवाओं को लगता है कि जब सेक्स आसानी से उपलब्ध है तो शादी के बंधन में में क्यों बंधें? आज की पाढ़ी की शहनशक्ति कम हो गई है, वो किसी भी मामले में एडजस्ट करने को तैयार नहीं, इसीलिए तलाक़ के केसेस बढ़ने लगे हैं. फिर पैरेंट्स भी बच्चों के तलाक़ पर बहुत ज़्यादा हो-हल्ला नहीं मचाते. पहले तलाक़ सोशल स्टिगमा समझा जाता था, लेकिन अब तलाक़ होना बड़ी बात नहीं समझी जाती. तलाक के प्रति लोगों की एक्सेप्टेबिलिटी बढ़ गई है. अब ये नहीं समझा जाता कि तलाक़ के बाद ज़िंदगी खराब हो गई. इसी तरह आज से 10 साल पहले शादी करना ज़रूरी समझा जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब कोई शादी नहीं करना चाहता तो लोगों को इसमें कोई आश्चर्य नहीं होता.

पार्टनर नहीं, पैकेज चाहिए
आजकल प्यार, शादी, बच्चे सबकुछ नाप-तौल कर होता है. लोगों को लाइफ पार्टनर नहीं, कंप्लीट पैकेज चाहिए, जो उनकी शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक हर ज़रूरत पूरी करे. जब दिल का रिश्ता ही शर्तों पर हो, तो उसके टिकने की उम्मीद कितनी की जा सकती है. यही वजह है कि आजकल के रिश्ते टिकाऊ नहीं हैं. इन रिश्तों में प्यार के अलावा बाकी सबकुछ होता है इसीलिए प्यार की तलाश बाकी रह जाती है और एक्स्ट्रा मैरिटल रिश्ते बन जाते हैं.

बदल गई है शादी की परिभाषा
साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं, पहले शादी के बाद एक-दो साल पति-पत्नी एक-दूसरे को समझने में गुजार देते थे. सेक्स का नया-नया अनुभव उनके रिश्ते में रोमांच बनाए रखता था. फिर बच्चे, उनकी परवरिश, नाते-रिश्तेदार… लंबा समय गुजर जाता था इन सब में. आज के कई युवा शादी के पहले ही सेक्स का अनुभव ले चुके होते हैं, उस पर करियर बनाने के चलते शादियां देर से हो रही हैं, ऐसे में शादी में उन्हें कोई रोमांच नज़र नहीं आता. उन्हें शादी स़िर्फ ज़िम्मेदारी लगती है इसलिए वो शादी से कतराने लगते हैं.

इसका एक बड़ा नुक़सान ये भी है कि युवा जब सेक्स पर जल्दी एक्सपेरिमेंट करते हैं तो इससे जल्दी ऊब भी जाते हैं और 40 की उम्र तक उनकी सेक्स लाइफ बोरिंग हो जाती है. उनका ज़िंदगी से लगाव कम हो जाता है. कोई थ्रिल नहीं रहता. अब शादी की परिभाषा बदल गई है. लेट मेरिज, लेट चिल्ड्रेन (कई कपल तो बच्चे भी नहीं चाहते), वर्किंग कपल, न्यूक्लियर फैमिलीज़… समय के साथ परिवार का ढांचा और उसकी ज़रूरतें बदल गई हैं. बदलाव की ये लहर बहुत कुछ बदल रही है. 10 साल पहले जहां लोग इंटर कास्ट मैरिज को पचा नहीं पाते थे, अब सहजता से लेने लगे हैं. इसी तरह अब एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, लिव इन रिलेशन जैसी बातें भी लोगों को चौंकाती नहीं हैं.

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Meaning Of Love For Youth

बढ़ रहे हैं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स
काम के बढ़ते घंटे, ऑफिस में महिला-पुरुष का घंटों साथ काम करना, पति-पत्नी की असंतुष्ट सेक्स लाइफ आदि के कारण एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स की तादाद बढ़ रही है. कई पति-पत्नी सेक्स का पूरा आनंद नहीं ले पाते (ख़ासकर महिलाएं), फिर भी पार्टनर को ख़ुश करने के लिए झूठ बोलते हैं. ऐसे में जब आप अपनी सेक्स लाइफ़ से संतुष्ट ही नहीं हैं, तो आपका ध्यान यहां-वहां भटकेगा ही. अंतरंग रिश्ते में भी हम मुखौटा ओढ़ लेते हैं, तो संतुष्टि मिलेगी कैसे? ऐसे असंतुष्ट कपल्स जहां भी भावनात्मक सहारा पाते हैं, वहीं शारीरिक रूप से भी जुड़ जाते हैं. पति, बच्चे, घर-परिवार, ऑफिस सभी जगह मैकेनिक लाइफ जी रही महिलाएं जाने-अनजाने घर के बाहर सुकून तलाशने की चाह में मन के साथ-साथ तक का रिश्ता भी जोड़ लेती हैं.

सेक्स का विकृत रूप सामने आया है
मीडिया प्रोफेशनल अरुण कुमार कहते हैं, हमारे देश में आज भी लोग सेक्स पर बात करने से तो कतराते हैं, लेकिन हर पहलू को घोलकर पी जाना चाहते हैं. पहले भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होते थे, पति नपुंसक हो तो परिवार के किसी और सदस्य के साथ सेक्स करके बच्चा पैदा किया जाता था, लेकिन तब इन बातों पर इतना हो-हल्ला नहीं मचाया जाता था. अब सेक्स को एक प्रोडक्ट के रूप में देखा जाने लगा है. सेक्स टॉनिक, कंडोम आदि बेचने वाली कंपनियां अपने विज्ञापनों में स्त्री के शरीर को अश्लील रूप में पेश करके सेक्स को भुनाती हैं, ऐसे विज्ञापान युवाओं को सेक्स पर एक्सपेरिमेंट करने के लिए उकसाते हैं. बदलते परिवेश में सेक्स विकृत रूप में सामने आ रहा है, तभी तो बाप ने बेटी का रेप कर दिया, भाई-बहन के शारीरिक संबंध बन गए जैसी ख़बरें देखने-सुनने को मिलती हैं. हम लोग सेक्स पर खुलकर बात करने से जितना ज़्यादा कतराते हैं, इसका उतना ही विभत्स रूप हमारे सामने आता है. हर कोई जैसे इसी में उलझ कर रह जाता है, सेक्स पर हर तरह की रिसर्च कर लेना चाहता है.

सेक्स में संतुष्टि ज़रूरी है
बैंक कर्मचारी रोहित सिंह कहते हैं, सेक्स अब इतनी छोटी चीज़ हो गई है कि किसी को नीचा दिखाने, बदला लेने, अपना कोई काम निकालने, झूठी शान बघारने, प्रमोशन पाने तक के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. सेक्स को साधना के रूप में किया जाए तो इसके आनंद को समझा जा सकता है. जो मिला उसी से शारीरिक संबंध बना लिया, नोच-खंसोटकर, बलात्कार करके शारीरिक भूख मिटा ली, ऐसा करके कभी तृप्ति नहीं मिलती, बल्कि लालसा बढ़ती जाती है और व्यक्ति इसी में उलझकर रह जाता है.

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Meaning Of Love

ये है सेक्स का सच
* 33 प्रतिशत महिलाएं मानती हैं कि शादी के कुछ सालों बाद उनकी सेक्स लाइफ बोरिंग हो गई है.
* 60% पुरुष चाहते हैं कि सेक्स के लिए महिला पहल करे.
* हर पुरुष हर सात मिनट में कम से कम एक बार सेक्स के बारे में ज़रूर सोचता है.
* पुरुष तथा महिलाएं दोनों ही एक दिन में कई बार ऑर्गेज़्म का अनुभव कर सकते हैं.
* जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन में छपी रिपोर्ट के अनुसार, बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा कम हो जाती है.
* एक रिसर्च के अनुसार, कॉलेज के दौरान जो लड़के सेक्स में लिप्त रहते हैं, वे अक्सर डिप्रेशन में चले जाते हैं. जबकि सेक्स न करने वाले विद्यार्थी नॉर्मल रहते हैं.
* ऐसे पुरुष जिनके अनेक स्त्रियों से संबंध होते हैं, वे सेक्स को बहुत महत्वपूर्ण तो समझते हैं, लेकिन अपने रिलेशनशिप से पूरी तरह संतुष्ट नहीं रहते.
* जो पुरुष ज़्यादातर सेक्सुअल फैंटेसी में रहते हैं, वे अपने रोमांटिक रिलेशनशिप से कम संतुष्ट रहते हैं.
– कमला बडोनी

ढलती शाम के आसमान में छाया केसरिया रंग मुझे बेहद प्रिय है. किस उम्र में मन उस केसरिया रंग में रंगना शुरू हुआ वह तो याद नहीं, लेकिन जिस उम्र में मन स्मृतियों को संजोने लगा तभी से मैंने हर ढलती सांझ में ख़ुद को छत पर खड़े होकर आसमान को निहारते पाया. जाने क्या कशिश है इस संधि काल में कि मैं कहीं भी होती, कुछ भी काम कर रही होती, पैर अपने आप सीढ़ियां चढ़कर मुझे छत पर ले आते और मैं उस जादूगर की करिश्माई चित्रकारी में अचंभित मोहित-सी घंटों उस रंग में डूबी छत पर खड़ी रहती, जब तक कि वह केसरिया रंग गहरा लाल, फिर नीला, फिर बैंगनी होते हुए रात के काले आंचल में ना समा जाता.
उस दिन भी मैं छत पर खड़ी सांझ के आसमान को पल-पल रंग बदलते देख रही थी. सामने सड़क के उस पार लगे अमलतास और कचनार के घने पेड़ों पर पंछी कलरव कर रहे थे. नीलगिरी पर बने घोसलों में पंछियों की आवाजाही चल रही थी. गुलमोहर की शाखाओं में पंछियों का झुंड आ बैठता और एक साथ उड़ जाता. आसमान में भी झुंड के झुंड पंछी उड़कर अपने-अपने घरों को लौट रहे थे. मैं मुग्ध-सी इस दृश्य में खोई हुई थी कि अचानक ऐसा लगा कि मैं छत पर अकेली नहीं हूं कोई और भी है जो इस सांझ के जादू में खोया हुआ है. मैंने चौंककर इधर-उधर देखा, पड़ोसवाली छत पर कोने में मुंडेर पर हाथ रखे 20-22 साल का एक लड़का खड़ा था. पड़ोस में एक वृद्ध चाचा-चाची रहते थे, जिनके दोनों बेटे बाहर थे. यह शायद कोई मेहमान आया होगा. मैंने सरसरी निगाह से उसे देखा, ऊंचा-पूरा, साफ रंग, करीने से संवरे बाल. आसमान में उड़ते पंछियों को देखती उसकी नज़र अचानक मुझसे टकरा गई और मुझे अपनी और देखता पाकर वह मुस्कुरा दिया और मैं झेंपकर फिर आकाश को देखने लगी. लेकिन बरबस रोकने पर भी नज़र उसकी तरफ़ उठ जाती और उसे भी अपनी तरफ़ देखते पाकर दिल धड़क जाता. घिरती रात में जब मैं नीचे जाने लगी, तब मन आसमान के केसरिया रंग के साथ ही उसके चेहरे पर छिटके गुलाल में भीग चुका था. उस रोज़ अनायास ही कमरे में कदम रखते ही पांव आईने के सामने ठिठक गए और रातभर पूर्णिमा के चांद की चांदनी केसरिया रंग में लिपटी रही.
दूसरे दिन शाम बड़ी देर बाद आई और दोपहर बड़ी लंबी लगी. थोड़ा जल्दी ही छत पर पहुंच गई. आंखें सीधे सामनेवाली छत पर टिक गई, वह भी वही खड़ा इधर ही देख रहा था. मेरे पैर क्षणभर को कांप गए, धड़कने अनियंत्रित हो गई. मैंने दृष्टि सामनेवाले पेड़ों पर गड़ा दी, लेकिन मन उसकी ओर ही लगा रहा और तन उसकी नज़रों को अपने पर टिकी महसूस कर रोमांचित होता रहा. मैं जानने को व्याकुल हो रही थी कि वह कौन है.
दूसरे ही दिन मां से पता चला वह चाची के भाई का बेटा है और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए यहां आया है. उस दिन रसोईघर का बल्ब फ्यूज हो गया, तो मां ने खिड़की से आवाज़ देकर उसे ही बुलाया. शेखर, हां यही नाम था उसका और उस दिन वह छत से सीधे मेरे घर ही नहीं चुपके से मेरे दिल में भी भीतर चला आया. मैं टेबल पर बैठी पढ़ने का ढोंग किए किताब पर आंखें गड़ाए बैठी थी, लेकिन ध्यान सारा उस पर ही था. बल्ब बदलने के बाद वह कमरे के दरवाज़े पर क्षणभर को ठिठक गया, “क्या पढ़ती हो, किस ईयर में हो?”
मेरे हाथ-पैर ठंडे पड़ गए, दिल इतनी तेज़ी से धड़कने लगा कि मुंह से बोल ही नहीं निकल पाए. मां ने ही जवाब दिया, “फर्स्ट ईयर में है तुम भी तो साइंस पढ़े हो, इसे केमिस्ट्री पढ़ा दिया करना अगर समय हो एक घंटा.”
मेरे मन की तो बिना मांगे मुराद पूरी हो गई और दूसरे ही दिन से वह रोज़ शाम को मुझे पढ़ाने आने लगा. दिनभर अपनी पढ़ाई करता, शाम के सिंदूरी एहसास को हम दोनों साथ में जीते और धुंधलका छाते ही नीचे आकर पढ़ाई में लग जाते. कभी ज़िद करके मां उसे खाना खिलाकर ही मानती. यूं भी जब दोनों घरों के बीच पारिवारिक आत्मीयता थी, तो वह घर के सदस्य जैसे ही था. वह पढ़ाता तो मुझे आधा समझ आता आधा ध्यान उसमें रहता. कितना सौम्य, शांत, सुंदर था वह. आवाज़ विनम्र होकर भी गहरी थी. आंखें नीचे झुकी रहती मेरी, लेकिन उनके भाव कैसे कहां छुपाती. समझ तो शेखर को भी सब आ रहा होगा, लेकिन उसने कभी मर्यादा की सीमा का उल्लंघन नहीं किया.

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अठारहवें वर्ष में प्रवेश कर चुके मेरे मन के कुंवारे अनछुए भाव शेखर की आंखों में तैरते सिंदूरी डोरों से बंध गए थे. मन अजब-सी रूमानियत की ख़ुमारी में भीगा रहता. एकांत में मन करता कि उसके चौड़े सीने में अपना चेहरा छुपा लूं और वह मेरे बाल सहलाता रहे, लेकिन आंखों से सब कुछ स्पष्ट कर देने के बाद भी शेखर की ज़ुबान हमेशा ख़ामोश रही और व्यवहार सदा मर्यादित. चार महीने कब गुज़र गए पता नहीं चला. प्रतियोगी परीक्षा ख़त्म होने के दो ही दिन बाद उदास आंखों में तैरती नमी के बीच मुझे नज़र भर देख कर वह चला गया. फिर कभी नहीं लौटा. बहुत दिनों बाद पता चला उनकी शादी उनके पिता ने बचपन में ही अपने दोस्त की बेटी से पक्की कर दी थी. छत पर नितांत एकांत पलों में भी वह क्यों स्वयं पर इतना कठोर संयम रखते थे, तब समझ आया. मेरा कोमल मन टूट गया. अक्सर छत पर उनका मुस्कुराता चेहरा और बोलती आंखें याद कर रो देती. कैसे कहूं कि उन्हें भी मुझसे प्यार नहीं था, लेकिन पिता के वचन के विरुद्ध जाने के संस्कार नहीं थे उनके.
बरसों बीत गए, लेकिन आज भी मेरा पहला प्यार छत पर उसी कोने में मुस्कुराता खड़ा महसूस होता है. ढलती सांझ के आसमान के साथ ही मन का भी एक कोना शेखर के प्यार के केसरिया रंग में रंगा हुआ है. नीड़ों को लौटते पंछियों को देखकर एक कसक-सी उठती है मन में, काश! इन पंछियों की तरह मेरा शेखर भी कभी लौट पाता…

Dr. Vinita Rahurikar
डॉ. विनीता राहुरीकर
Love Story

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मनचाहा जीवनसाथी, मनचाहा प्रोफेशन, मनचाही ख़ुशियां… यदि ये सब हासिल हो जाएं तो ज़िंदगी से और क्या चाहिए? टेलीवुड के मेड फॉर ईच अदर कहलाए जाने वाले कपल रवि और सरगुन को भी ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं. वो पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ़ में स्टेप बाई स्टेप क़ामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते जा रहे हैं और ज़िंदगी का खुलकर लुत्फ़ उठा रहे हैं. एनर्जी से भरपूर इस सुपर स्टाइलिश कपल की प्रेम कहानी कैसे शुरू हुई? आइए, हम आपको बताते हैं.

Ravi Dubey And Sargun Mehta

एक-दूसरे के सपोर्ट सिस्टम बनकर एक-दूसरे की क़ामयाबी के हिस्सेदार कैसे बना जा सकता है, ये कोई रवि और सरगुन से सीखे. दोनों बहुत बिज़ी रहते हैं, फिर भी बहुत ख़ुश और एक-दूसरे से कनेक्टेड रहते हैं. दोनों ही बहुत आशावादी हैं और अपनी मंज़िल तक पहुंचना अच्छी तरह जानते हैं. आइए, रवि और सरगुन की ज़िंदगी को और क़रीब से जानें.

कैसी थी आप दोनों की पहली मुलाक़ात?
रवि दुबे: सरगुन से मैं पहली बार करोल बाग़ के सेट पर मिला. बहुत जल्दी हमारी दोस्ती हो गई और उतनी ही जल्दी मुझे ये एहसास हो गया मुझे सरगुन से प्यार हो गया है. फिर क्या था, मैंने सरगुन को प्रपोज़ किया और जल्दी ही हमने शादी कर ली.
सरगुन मेहता: पहली नज़र में तो हम इंसान का रूप-रंग ही देखते हैं. मैंने जब रवि को पहली बार देखा तो वो अपनी वैन से उतर रहे थे, वो करोल बाग़ की शूटिंग के लिए दिल्ली आए थे. ब्लैक कलर के जैकेट और ब्लू डेनिम में रवि को देखकर मैं सोचने लगी, ङ्गओह माय गॉड, ये हैंडसम लड़का कौन है!फ मेज़े की बात ये है कि जब मैंने रवि का लुक टेस्ट देखा था तो मेरा रिएक्शन था, ङ्गये चश्मिस लड़का कौन है?फ लुक टेस्ट में रवि एकदम ऑर्डिनरी लग रहे थे, क्योंकि वो फोटोग्राफ्स उनके कैरेक्टर की थी, लेकिन असल में उन्हें देखकर मैं देखती ही रह गई. फिर जल्दी ही हमारी दोस्ती हो गई. करोल बाग़ के बाद जब हम दिल्ली से मुंबई आए तो मैंने देखा कि रवि हमेशा मेरे आसपास रहते हैं, घर ढूंढ़ने से लेकर सेटल होने तक हर चीज़ में मेरी मदद कर रहे हैं, उनकी ये तमाम बातें मुझे अच्छी लगने लगीं. तब मेरे मन में भी मोहब्बत का एहसास जागने लगा था.

Ravi Dubey And Sargun Mehta

शादी के बाद कितनी बदली ज़िंदगी?
रवि दुबे: कुछ भी नहीं बदला है शादी के बाद, सिवाय इसके कि हम एक घर में रहने लगे हैं. हम दोनों शादी के पहले भी अपने पैरेंट्स से दूर अकेले रह रहे थे. घर और करियर दोनों संभाल रहे थे इसलिए शादी के बाद ज़िम्मेदारियां बढ़ी नहीं हैं, बल्कि बंटी हैं. अब हम साथ मिलकर अपनी तमाम ज़िम्मेदारियां पूरी कर रहे हैं. हां, इतना ज़रूर है कि शादी के बाद इंसान अपनी लाइफ को लेकर और ज़्यादा क्लियर हो जाता है, उसे पता होता है कि उसे अपनी फैमिली के लिए क्या करना है.
सरगुन मेहता: शादी के बाद ज़िंदगी में कोई बदलाव नहीं आया. शादी से पहले मैं मुंबई में अकेली रह रही थी इसलिए काम के साथ-साथ घर ढूंढ़ने से लेकर, फोन, लाइट के बिल भरना, खाने-पीने बंदोबस्त… सबकुछ मैं अकेले ही मैनेज कर रही थी. शादी के बाद भी मैं वही सारे काम कर रही हूं. अब रवि साथ है तो बल्कि ज़्यादा आसानी हो गई है.

आप दोनों के बीच नोकझोंक कितनी होती है?
रवि दुबे: नोकझोंक तो हर कपल के बीच होता है, लेकिन हमारे साथ ख़ास बात ये है कि हमें दूसरी चीज़ों पर भले ही ग़ुस्सा आ जाए, लेकिन एक-दूसरे पर कभी ग़ुस्सा नहीं आता.
सरगुन मेहता: डे टु डे लाइफ की नोंकझोक तो हर रिश्ते में होती है, उससे आप बच नहीं सकते. सोफे के कलर, एक्स्ट्रा टीवी या फिर किसी काम को लेकर नोंकझोंक हो ही जाती है, लेकिन वो उतनी ही जल्दी खत्म भी हो जाती है.

डेली सोप में काम करते हुए पर्सनल लाइफ के लिए कितना टाइम मिल पाता है?
रवि दुबे: हर इंसान के पास दिन में चौबीस घंटे ही होते हैं, ये आप पर है कि आप अपने काम को कितना और कैसे इस्तेमाल करते हैं. मेरी पत्नी मेरी प्राथमिकता है और मैं ये अच्छी तरह जातना हूं कि मैं उसके साथ क्वालिटी टाइम कैसे बिता सकता हूं. दरअसल, जो लोग ढीले होते हैं वो बहुत टाइम पास करते हैं और काम न कर पाने हज़ार एक्सक्यूज़ देते हैं, लेकिन जो लोग एक साथ कई काम करते हैं, वो अपने हर काम के लिए टाइम निकाल ही लेते हैं और टाइम मैनेज करना भी अच्छी तरह जानते हैं.
सरगुन मेहता: आप कितने घंटे काम करते हैं इससे ज़्यादा ज़रूरी है कि आप अपने काम से कितना प्यार करते हैं, उसे कितना एंजॉय करते हैं. हम लकी हैं कि हम वही काम कर रहे हैं जो हमें पसंद है. साथ ही मैं उस इंसान के साथ रह रही हूं जिसे मैं प्यार करती हूं इसलिए मैं ख़ुद को बहुत लकी मानती हूं. फिलहाल मेरे पास टाइम ज़्यादा है, क्योंकि मुझे मेरी फिल्म की डेट्स के हिसाब से काम करना पड़ता है, लेकिन रवि डेली सोप कर रहे हैं इसलिए उनके पास बिल्कुल भी टाइम नहीं है, हम दोनों एक छत के नीचे रह रहे हैं, हमारे लिए इतना ही काफ़ी है.

प्रोफेशनल लाइफ में एक-दूसरे को कितना सपोर्ट करते हैं?
रवि दुबे: हम दोनों एक ही प्रोफेशन में हैं इसलिए अपने काम और शेड्यल को अच्छी तरह समझते हैं. अब कुछ ही दिनों में सरगुन अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए बीस दिनों के लिए चली जाएगी और मैं इसके लिए मेंटली तैयार हूं, क्योंकि यही हमारे काम का पैटर्न है. मेरे शहर से बाहर जाने पर सरगुन भी सबकुछ संभाल लेती है.
सरगुन मेहता: रवि और मेरी बॉन्डिग इतनी मज़बूत है कि हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते हैं. आप हमें एक-दूसरे का बैक बोन कह सकते हैं. हम एक-दूसरे को उसकी ख़ासियत और कमी दोनों बताते रहते हैं, ताकि हम साथ मिलकर आगे बढ़ सकें. रवि जानते हैं कि मैं क्या कर सकती हूं और मैं जानती हूं कि रवि में कितना पोटेंशियल है.

प्यार क्या है आपकी नज़र में?
रवि दुबे: मेरी नज़र में प्यार कंपैनियनशिप है. व़क्त के साथ आपके रिलेशनशिप के सारे पिलर्स टूटते जाते हैं, फिर चाहे वो लुक्स हो, फिज़िकैलिटी, लव-अफेयर का यूफोरिया… सबकुछ ध्वस्त हो जाता है. उसके बाद स़िर्फ एक-दूसरे की कंपनी बच जाती है. यदि आप दोनों को वाकई एक-दूसरे का साथ अच्छा लगता है, दुनिया में ऐसा कोई टॉपिक नहीं जो आप एक-दूसरे के साथ शेयर नहीं करते, तो आपका रिश्ता मज़बूत है और आप अपने रिश्ते में हमेशा ख़ुश रहते हैं. यदि आप के बीच कंपैनियनशिप नहीं है, तो जब आपके रिश्ते के सारे पिलर्स ढलते चले जाएंगे, तो आपको अपने रिश्ते को जस्टिफाई करने की वजहें ढूंढ़नी पड़ेंगी.
सरगुन मेहता: मेरी नज़र में प्यार वो है जो अपने आप होता चला जाए, जहां आपको सोच-समझकर या एफर्ट लगाकर कुछ करना न पड़े. आप अपने पार्टनर से दुनिया की हर बात शेयर कर सकें.

भाग्य या ईश्‍वर में विश्‍वास करते हैं?
रवि दुबे: आपकी लाइफ वैसे डिज़ाइन होती है जैसे आप सोचते हैं. यदि आपको लगता है कि ये इंडस्ट्री आपकी दोस्त नहीं दुश्मन है, तो आपको वैसे ही लोग मिलेंगे, लेकिन आप यदि पॉज़िटिव रहेंगे तो आपके साथ सबकुछ पॉज़िटिव होता चला जाएगा. मैं और सरगुन बहुत आशावादी हैं, हम हर चीज़ में पॉज़िटिविटी ही ढूंढ़ते हैं.
सरगुन मेहता: ईश्‍वर कह लीजिए या यूनिवर्स मेरा उसमें अटूट विश्‍वास है. ओपरा ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं मेहनत करती जा रही थी और मेरे लिए लक सही समय पर सही जगह रखा हुआ था. मैं भी यही मानती हूं, आपको मेहनत करते हुए ख़ुद को अपने लक के लिए तैयार रखना चाहिए, वो ज़रूर आपके पास आएगा. यदि आप सच्चे दिल से पूरी ताक़त लगाकर कोई काम करते हैं, तो यूनिवर्स आपको आपकी चीज़ उतनी ही शिद्दत से सौंप देता है.

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आपका स्टाइल स्टेटमेंट क्या है?
रवि दुबे: मेरा स्टाइल बहुत सिंपल है. मैं बहुत एक्सपेरिमेंट नहीं करता. कैजुअल वेयर में मुझे बसिक डेनिम और टी-शर्ट पहनना पसंद है. फॉर्मल वेयर में क्लासिक थ्री पीस सूट पहनना पसंद है. कपड़ों के मामले में मैं फिर भी समझौता कर लूंगा, लेकिन एक्सेसरीज़ मैं बेस्ट क्वालिटी की ही ख़रीदता हूं. मेरे पास वॉचेस और ग्लेयर्स का अच्छा-खासा कलेक्शन है.
सरगुन मेहता: रवि बहुत कॉन्शियस रहते हैं कि उन्होंने क्या पहना है, लेकिन मुझे सबकुछ चलता है. मैं शूटिंग के बीच में ही कोई ड्रेस ख़रीद लूंगी और उसे अगले अवॉर्ड फंक्शन के लिए रख दूंगी. मैं स्टाइल के लिए इतना एफर्ट नहीं लगाती कि डिज़ाइनर या स्टाइलिश के पास जाऊं.

पार्टनर की किस बात से चिढ़ जाते हैं?
रवि दुबे: सरगुन बहुत ही ऑर्गनाइज़्ड लड़की है और मैं बहुत ही कैजुअल हूं. अक्सर वो मेरे सामने सौ-दो सौ पेपर लाकर रख देती है और डेडलाइन दे देती है कि सुबह तक इन सब पर साइन हो जाना चाहिए. सच कह रहा हूं, उस व़क्त मुझे बहुत खीझ होती है. (हंसते हुए) सरगुन जानती है कि वो यदि मुझे डेडलाइन नहीं देगी तो वो काम 10-15 दिनों तक टल जाएगा. मुझे पेपर वर्क बिल्कुल भी पसंद नहीं. सरगुन ना हो तो मैं ये सब कर ही नहीं पाऊंगा.
सरगुन मेहता: रवि फोन एडिक्ट हैं, हर पल फोन से चिपके रहते हैं, उनकी इस आदत से मुझे बहुत चिढ़ होती है.

आपकी अपनी वीकनेस क्या है?
रवि दुबे: कई बार मैं बहुत ढीला हो जाता हूं. वैसे तो मैं बहुत एक्टिव हूं, मेरा दिन सुबह छह बजे शुरू हो जाता है और रात एक-डेढ़ बजे ही ख़त्म होता है और उस दौरान लगातार कुछ न कुछ चलता ही रहता है, कई बार तो बैठने की भी फुर्सत नहीं होती, लेकिन कई बार मैं बहुत आलसी हो जाता हूं, फिर मुझे ख़ुद को उस मूड से बाहर धकेलना पड़ता है.
सरगुन मेहता: मेरी भी यही वीकनेस है, कई बार मैं बहुत आलसी हो जाती हूं.

आपके पार्टनर की वो कौन-सी ख़ासियत है जिस पर आप गर्व महसूस करते हैं?
रवि दुबे: सरगुन मेरी स्ट्रेंथ है. मैं बहुत आशावादी हूं, लेकिन जब मैं लो फील करता हूं तो सरगुन ही मुझे समझा पाती है, क्योंकि वो भी मुझसे ज़्यादा आशावादी है.
सरगुनः रवि को आप गूगल मैन कह सकती हैं, वो बहुत अपडेटेड रहते हैं, उनके साथ आपको कुछ भी सर्च करने की ज़रूरत नहीं पड़ती.

घूमने के कितने शौकीन हैं और कहां घूमना पसंद करते हैं?
रवि दुबे: हम दोनों ही घूमने के बहुत शौकीन हैं और टाइम मिलने पर घूमने निकल जाते हैं. हमारे हनीमून का टूर बहुत यादगार था, हम हनीमून के लिए यूरोप गए थे जहां हमने एक साथ कई यादगार पर बिताए, बहुत सारे नए दोस्त बनाए, यूरोप को पूरी तरह से एक्सप्लोर किया. मैं सरगुन के साथ फिर से यूरोप टूर पर जाना चाहूंगा.
सरगुन मेहता: हमें नई-नई जगहों पर घूमने जाना बहुत पसंद है. हालांकि हमें बहुत ज़्यादा टाइम नहीं मिल पाता, फिर भी हम टाइम निकालकर शॉर्ट ट्रिप तो प्लान कर ही लेते हैं. हां, हमारा हनीमून ट्रिप बहुत ख़ास था.

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कितने फिटनेस कॉनिशयस हैं?
रवि दुबे: एक्टिंग के फील्ड में फिटनेस बहुत मायने रखती है. हमें फिटनेस के लिए अलग से टाइम निकालना ही पड़ता है. मैं सुबह लगभग दो घंटे रोज़ वर्कआउट करता हूं. मैं खाने का बहुत शौकीन हूं इसलिए खाने की क़ीमत वर्कआउट करके चुकाता हूं, क्योंकि मुझे इसके लिए ज़्यादा वर्कआउट करना पड़ता है. मुझे मीठा बहुत पसंद है, ख़ासकर चॉकलेट्स.
सरगुन मेहता: हम दोनों फूडी हैं इसलिए हमें रोज़ जिम में बहुत टाइम बिताना पड़ता है. बटर चिकन-बटर नान हम दोनों बहुत चाव से खाते हैं.

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जब मैंने ख़ुद को पहली बार स्क्रीन पर देखा: रवि दुबे
पहली बार मैंने ख़ुद को एक ऐड फिल्म में स्क्रीन पर देखा था और वो ख़ुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती. मुझसे पहले हमारे परिवार में कोई भी इस इंडस्ट्री में नहीं था इसलिए ऐसा लग रहा था कि मैंने कुछ स्पेशल अचीव किया है. इससे पहले ख़ुद को दूसरों की शादी के वीडियोज़ में देखा था.
जब से मैंने होश संभाला, तभी से मैं इस इंडस्ट्री में आना चाहता था, लेकिन कैसे आना है ये तब तय नहीं था. दिल्ली से ग्रैज्युएशन करने के बाद में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने मुंबई आया. पढ़ाई के दौरान एक ऐड फिल्म में काम करने का मौक़ा मिला और उसके बाद एक के बाद एक मौ़के मिलते गए और मैं आगे बढ़ता गया.

…और मैंने एक्टिंग को चुन लिया: सरगुन मेहता
मेरे पैरेंट्स बहुत मॉडर्न ख़यालात के हैं. उन्होंने हम पर कभी अपने ़फैसले नहीं थोपे. हां, ये ज़रूर बताया कि क्या सही है और क्या ग़लत. जब मुझे इस इंडस्ट्री में पहला ब्रेक मिला, तो मैं पोस्ट ग्रैज्युएशन की पढ़ाई के लिए विदेश जा रही थी. जब मैंने अपने पैरेंट्स से इस ब्रेक के बारे में बात की, तो उन्होंने कहा कि तुम करना चाहती हो तो ज़रूर करो. अगर इस इंडस्ट्री में तुम नहीं चली तो पोस्ट ग्रैज्युएशन एक साल बाद कर लेना, लेकिन ऐसा करने की ज़रूरत नहीं पड़ी. मेरा एक्टिंग करियर चल पड़ा.
– कमला बडोनी

पहली नज़र का प्यार बहुत कम लोगों की किस्मत में होता है. पहली ही नज़र में जिसे चाहो वो आपका हमसफ़र बन जाए, उससे ज़्यादा नसीबवाला भला कहां मिलेगा? स्वरूप संपत और परेश रावल यही वो ख़ुशनसीब जोड़ा है, जिन्होंने ज़िंदगी से जो चाहा उन्हें वो सब मिला. पहली नज़र का प्यार आज हमसफ़र बनकर ज़िंदगी की धूप छांव में पिछले 33 सालों से उनका साथ निभा रहा है और रंगमंच की यह जोड़ी असल ज़िंदगी में भी उतनी ही कामयाब है, जितनी रुपहले परदे पर. आज स्वरूप संपत के जन्मदिन पर आइए जानें कहां और कैसे मिले ये लव बर्ड्स और कैसी रही इनकी प्रेम कहानी?

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दो कामयाब हस्तियां

‘ये जो है ज़िंदगी’ में रेनू वर्मा का किरदार निभानेवाली स्वरूप संपत और बॉलीवुड के मशहूर कलाकार परेश रावल की लव स्टोरी हर युवा जोड़े के लिए एक प्रेरणा है. जहां एक ओर मिस इंडिया रह चुकी स्वरूप संपत बॉलीवुड एक्ट्रेस, टीवी एक्ट्रेस और एक बेहतरीन थियेटर पर्सनालिटी हैं. फ़िल्म नाखुदा से बॉलीवुड में डेब्यू करनेवाली स्वरूप संपत ने सवाल, लोरी, हिम्मतवाला जैसी कई फ़िल्में कीं. उन्होंने कई मराठी और गुजराती प्ले में एक्टिंग और और डायरेक्शन दोनों किया है. हाल ही में वो करीना कपूर की फ़िल्म की एंड का और फिर उरी द सर्जिकल स्ट्राइक में नज़र आई थीं. वहीं दूसरी ओर परेश रावल ने शुरुआती दौर में निगेटिव किरदार निभाने के बाद, जो कॉमेडी की बरसात शुरू की तो अंदाज़ अपना अपना का तेजा हो या हेरा फेरी के बाबू भइया की ज़बर्दस्त कॉमेडी के बाद हंगामा, गोलमाल और मालामाल वीकली जैसी फिल्मों में दर्शकों को हंसा हंसाकर लोट पोट कर दिया. परेश रावल ने अभिनय के साथ ही 2014 से लेकर 2019 तक राजनीतिक पारी भी खेली, वो गुजरात से बीजेपी के लोकसभा सांसद चुने गए थे. साल 2014 में ही उन्हें अभिनय के क्षेत्र में योगदान के लिए भारत सरकार की तरफ़ से पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया.

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जब परेश को हुआ पहली नज़र का प्यार

ये उन दिनों की बात है, जब परेश रावल और स्वरूप संपत कॉलेज में पढ़ा करते थे. कॉलेज के मस्तीभरे दिनों में से ही एक ख़ुशगवार दिन था, जब परेश रावल ने गुलाबी साड़ी पहने एक बेहद ख़ूबसूरत लड़की को कॉलेज में ब्रोशर बांटते हुए देखा. गुलाबी साड़ी में उस लड़की की गुलाबी रंगत ने परेश रावल को ऐसा दीवाना बनाया कि वो पहली ही नज़र में उसे अपना दिल दे बैठे. उसी समय उन्होंने अपने दोस्त को कहा कि मैं इसी लड़की से शादी करूंगा. यह लड़की कोई और नहीं स्वरूप संपत ही थीं. शादी के बाद दिए एक इंटरव्यू में स्वरूप संपत ने बताया था कि उस दिन जब परेश रावल ने पहली बार मुझे देखा और अपने दोस्त से ऐसा कहा, तो मैंने उनकी बात सुनकर भी अनसुनी की. वो ब्रोशर लेने के बहाने काउंटर पर आए और फिर थोड़ी देर में चले गए. लेकिन सबसे मजेदार बात यह रही कि करीब सालभर तक इन्होंने मुझसे दोस्ती करने की कोई कोशिश भी नहीं की.

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जब दिल दे बैठीं स्वरूप

भले ही ब्रोशर काउंटर पर स्वरूप संपत ने परेश रावल को कुछ ख़ास तवज्जो नहीं दी, पर जब उन्होंने परेश को स्टेज पर ऐक्टिंग करते हुए देखा, तो अपनी नज़रें उन पर से हटा नहीं पायीं. एक इंटर कॉलेज ड्रामा कॉम्प्टीशन के दौरान जब उन्होंने परेश रावल को स्टेज पर अभिनय करते देखा, तो देखती ही रह गयीं. उनकी बेहतरीन अदाकारी ने स्वरूप का मन मोह लिया था. बकौल स्वरूप संपत सिर्फ़ मैं ही नहीं हॉल में बैठे लगभग सभी लोगों का यही हाल था. ड्रामा थोड़ा हिंसक था, लेकिन परेश की अदाकारी ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया था. उस समय जब ड्रामा ख़त्म हुआ तो पूरे हॉल में सन्नाटा था. स्वरूप बैकस्टेज जाने से ख़ुद को रोक नहीं पायीं. परेश रावल को उन्होंने बेहतरीन अभिनय के लिए बधाई दी और उसके बाद इस कपल को किसी बहाने की ज़रूरत नहीं पड़ी.

मिस इंडिया का ताज

Swaroop Sampat

कॉलेज के साथ-साथ थियेटर भी चल रहा था, उसी दौरान स्वरूप संपत के पिता ने उन्हें मिस इंडिया ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया, पर स्वरूप का इस कोई इरादा नहीं था. उन्होंने यह बात अपने भाई और परेश रावल को बताई और दोनों ने ही उनकी बात का समर्थन किया और ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा लेने की सलाह दी. परेश रावल के सपोर्ट से उन्होंने कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया और नसीब देखिए, प्रतियोगिता जीतकर उन्होंने 1979 में मिस इंडिया का ताज अपने सर पर सजाया.

कहानी में आया एक अजीब मोड़

Swaroop Sampat

लेकिन कॉन्टेस्ट जीतने के ज़िंदगी ने अजीब मोड़ लिया. हमेशा से ही साथ खड़े रहनेवाले परेश रावल के मन में कहीं कुछ खटकने लगा. स्वरूप संपत ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके मन में न जाने कहां से यह बात आ गई कि अब पहले जैसा कुछ नहीं रहेगा, सब बदल जायेगा. उनके मन में यह डर समा गया था कि मैं बदल जाऊंगी. पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. मैंने उनका डर दूर किया और उन्हें पापा से अपना हाथ मांगने के लिए कहा. ज़िंदगी में किसी और चीज़ की बजाय यह मेरे लिए यह सबसे ज़्यादा मयबे रखता था, इसलिए जैसा मैंने चाहा था, वैसा ही हुआ. परेश ने पापा से शादी की बात की और हमारी शादी पक्की हो गयी.

पेड़ के नीचे लिए सात फेरे

Paresh Rawal And Swaroop Sampat

दोनों ही बेहद शानदार शादी चाहते थे, पर सिर्फ़ घरवालों और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में. वो सबको अपनी शादी के बारे में नहीं बताना चाहते थे. मुंबई के लक्ष्मी नारायण मंदिर में शादी का कार्यक्रम रखा गया. स्वरूप संपत ने बताया कि हमारे परिवार वाले 129 साल बाद बेटी की शादी देख रहे थे, इसलिए मैंने सबसे पहले ही कह दिया था कि कोई बहुत ज़्यादा इमोशनल मत होना. मैंने अपनी शादी ख़ूब एंजॉय की. हमने शादी की विधि के लिए 9 पंडित बुलाए थे, जो मंत्र जाप कर रहे थे. बाकी दुल्हनों की तरह बिना शरमाये मैंने अपनी शादी का खाना ख़ूब एंजॉय किया. शादी में बहुत ज़्यादा तामझाम नहीं था, बल्कि एक बहुत बड़ा पेड़ था, जिसके नीचे हमने सात फेरे लिए थे.

गृहस्थ जीवन

Paresh Rawal's Family

परेश रावल और स्वरूप संपत ने 1987 में शादी के बाद अपनी गृहस्थी को आगे बढ़ाया. उनके दो बेटे हैं, अनिरुद्ध और आदित्य रावल. अनिरुद्ध ने फ़िल्म सुल्तान में बतौर असिस्टेंट डायरेक्ट काम किया था, साथ ही वो अभिनेता नसरुद्दीन के साथ प्ले में मदद करते हैं. वहीं आदित्य न्यूयॉर्क में स्क्रीनप्ले की पढ़ाई कर रहा है.

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कॉलेज के ज़माने से देखें तो परेश रावल और स्वरूप संपत पिछले 40 से भी ज़्यादा सालों से एक साथ हैं. जीवन के हर मोड़ पर साथ निभानेवाले और हर सुख-दुख में सबकुछ साथ झेलनेवाले इन लव बर्ड्स का प्यार यूं ही बना रहे. आपको इनकी प्यारी सी लव स्टोरी कैसी लगी, हमें ज़रूर बताएं.

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रियालिटी शो में कहां मिलता है किसी को सच्चा प्यार, यही हम सब मानते थे लेकिन प्रिंस नरूला और युविका चौधरी ने इस सोच को ग़लत साबित कर दिखाया और अपने प्यार को शादी की मंज़िल तक पहुँचाया.

प्रिंस रोडीज़ और स्प्लिट विला जैसे शो के पप्रिंस थे और बहुत सी लड़कियाँ उनकी दिवानी थीं. लेकिन प्रिंस खुद युविका के इतने दीवाने हो गए कि उनसे शादी रचा डाली.

Prince Narula And Yuvika Chaudhary

दरअसल बिग बॉस 9 में दोनों की मुलाक़ात हुई. दोनों में नज़दीकियाँ बढ़ने लगी और प्रिंस ने युविका से प्यार का इज़हार भी अनोखे अंदाज़ में किया. उन्होंने दिल के शेप का पराँठा बनाकर अपने दिल की बात युविका से की वो भी नेशनल टीवी पर.

Prince Narula And Yuvika Chaudhary

युविका पंजाबी फ़िल्मों में काफ़ी काम कर चुकी हैं और यहां तक कि हिंदी फ़िल्म और टीवी में भी वो जाना माना नाम हैं. उन्हें देखते ही प्रिंस उन पर लट्टू हो गए लेकिन प्यार के इज़हार के बाद भी इनकी प्रेम कहानी में काफ़ी ट्विस्ट आए. प्रिंस के प्यार के इज़हार का वो कोई जवाब देतीं इससे पहले ही युविका शो से बाहर हो गईं और उसके बाद एंट्री हुई नोरा फतेही की.

नोरा और प्रिंस में भी नज़दीकियाँ बढ़ने लगी थीं, जिसे देख के यही लग रहा था कि युविका का जादू प्रिंस के सिर से उतर चुका है. लेकिन युविका को शो में वापस बुला लिया गया और उन्होंने प्रिंस से सवाल भी किए कि आख़िर वो क्या चाहते हैं.

Prince Narula And Yuvika Chaudhary

बहरहाल सबको यही लगा था कि यह सब शो की टीआरपी बढ़ाने के हथकंडे हैं. शो ख़त्म हुआ और प्रिंस जीत गए.

इसके बाद प्रिंस और युविका फिर से मिलने लगे और बीच बीच में प्रिंस और युविका के रिश्तों की चर्चा भी होती थी जिसे दोनों ही नकार देते थे. लेकिन कहते हैं ना इश्क़ और मुश्क छुपाए नहीं छुपता, एक समय के बाद प्रिंस ने युविका से अपने रिश्ते को क़बूला.

Prince Narula And Yuvika Chaudhary

लेकिन दोनों की मंगनी से पहले ही दोनों के बीच झगड़े व अनबन की खबर आई थी जिसका खुलासा युविका ने खुद किया. उन्होंने बताया कि मंगनी से कुछ समय पहले से ही प्रिंस का व्यवहार बदला हुआ सा था और वो बात बात में झगड़ने लगे थे. युविका को लगा कि प्रिंस बदल गए हैं और उन दोनों का रिश्ता आगे नहीं बढ़ सकता. लेकिन प्रिंस यह सब युविका को सरप्राइज़ देने के लिए कर रहे थे और उन्होंने अगले ही दिन युविका को शादी के लिए प्रपोज़ करके उनसे घरवालों के सामने सगाई कर ली.

Prince Narula And Yuvika Chaudhary

दोनों ने जल्द ही शादी का ऐलान भी कर दिया. दोनों अब खुश हैं और इनकी जोड़ी बेहद प्यारी भी लगती है.

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बॉलीवुड की चुलबुली हसीना जूही चावला के लाखों फैन्स हैं, लेकिन बात जब पर्सनल लाइफ की आती है, तो जूही चावला अपनी निजी ज़िंदगी की बातें मीडिया में शेयर नहीं करतीं. यहां तक कि जूही चावला ने अपनी शादी की बात भी काफी समय तक छुपाकर रखी थी. आखिर जूही चावला ने अपनी शादी की बात क्यों छुपाई और कैसे खुला जूही की शादी का राज़. यहां पर हम आपको जूही चावला की ज़िंदगी के कुछ अनकहे राज़ बता रहे हैं.

Juhi Chawla

मिस इंडिया से लेकर अभिनय, फिल्म निर्माण तक ऐसा रहा जूही चावला का सफर
1984 में ‘मिस इंडिया’ के खिताब से शोहरत पाने वाली जूही चावला एक सफल अभिनेत्री और फिल्म फिल्म निर्माता भी हैं. जूही चावला अपने करियर और पर्सनल लाइफ को बहुत अच्छी तरह मैनेज किया है. पंजाब के अंबाला में 13 नवंबर 1967 को चावला परिवार में जन्मीं जूही बचपन से ही बहुत होनहार थीं. जूही पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं और उनकी फिल्मों में आने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन उनकी किस्मत जूही को बॉलीवुड इंडस्ट्री में ले आई. कॉलेज में पढ़ाई के दौरान जूही ने यूं ही फेमिना मिस इंडिया के लिए फॉर्म भरा था और उनका सलेकशन हो गया. इतना ही नहीं, जूही ने ये कॉन्टेस्ट जीत भी लिया और इस तरह वो मिस इंडिया बन गईं. इसके बाद जूही मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के लिए विदेश भी गईं और वहां पर मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में बेस्ट नेशनल कॉस्ट्यूम का पुरस्कार भी जीता.

Juhi Chawla

जूही चावला का अभिनय का सफर
इसके बाद जूही की बॉलीवुड में एंट्री हुई. जूही ने अपने करियर की शुरुआत मल्टीस्टारर फिल्म ‘सल्तनत’ से की थी, लेकिन उन्हें सफलता 1988 में आमिर खान के साथ आई फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ से मिली. ये फिल्म इतनी बड़ी हिट साबित हुई कि जूही चावला रातोंरात स्टार बन गईं और उनकी गिनती गिनती उस समय हिंदी सिनेमा पर राज करने वाली अभिनेत्रियों में की जाने लगी. ‘कयामत से कयामत तक’ फिल्म को फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का खिताब मिला और जूही को फिल्म के लिए बेस्ट न्यूफेस का पुरस्कार मिला.

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Juhi Chawla

इसके बाद जूही चावला को कभी पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी. जूही चावला ने ‘प्रतिबंध’, ‘स्वर्ग’, ‘बोल राधा बोल’, ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ ‘लुटेरे’, ‘आईना’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘डर’, ‘साजन का घर’, ‘यस बॉस’, ‘इश्क’, ‘अर्जुन पंडित’, ‘डुप्लीकेट’, ‘भूतनाथ’, ‘गुलाब गैंग’ जैसी कई बड़ी फिल्मों में काम किया. इसके बाद जूही ने निर्माता बनने की ओर कदम बढ़ाया और शाहरुख खान, अजीज मिर्जा के साथ ‘ड्रीम्ज अनलिमिटेड’ के बैनर तले ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’, ‘अशोका’, ‘चलते-चलते’ जैसी फिल्मों का निर्माण किया.

Juhi Chawla

ऐसे शुरू हुई जूही चावला और जय मेहता की लव स्टोरी
जूही चावला ने अपने एक इंटरव्यू में अपनी लव स्टोरी के बारे में बताया. जूही ने बताया कि बिजनेमैन जय मेहता से वो करियर की शुरुआत में मिली थीं, लेकिन इसके बाद कुछ समय तक दोनों में कोई बात नहीं हुई थी. फिर जब एक बार फिर से दोनों की मुलाकात हुई, तो जय मेहता चुलबुली जूही के दीवाने हो गए. जूही जहां भी जाती थीं जय वहां फूलों का गुलदस्ता और प्यार भरे नोट्स लेकर पहुंच जाते थे. जूही ने अपने इंटरव्यू में ये भी बताया कि उनके जन्मदिन के समय जय मेहता ने एक ट्रक भरकर लाल गुलाब भेजे थे और इसे देखकर वो हैरान रह गई थीं. इतना प्यार करने वाला जीवनसाथी मिले, तो कौन लड़की राजी नहीं होगी. जूही ने भी जय मेहता को अपना हमसफ़र बना लिया और 1995 में उनसे शादी कर ली. आज उनके दो बच्चे हैं और जूही अपनी गृहस्थी में बहुत ख़ुश हैं. हालांकि जूही चावला के पति जय मेहता उनकी खूबसूरती के सामने फीके नज़र आते हैं, लेकिन दोनों में प्यार इतना गहरा है कि ये जोड़ी क्यूट नज़र आती है. जूही चावला और उनके पति की गृहस्थी सालों से बहुत अच्छी तरह चल रही है, दोनों ने अपने रिश्ते को बहुत समझदारी से निभाया है.

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Juhi Chawla

आखिर जूही चावला ने क्यों छुपाई थी अपनी शादी की बात?
जूही चावला ने अपनी शादी की बात काफी लंबे समय तक छुपाई थी और जब उनकी शादी की खबर मीडिया तक पहुंची, तो कई लोगों के दिल टूट गए थे. जूही चावला के लाखों फैन्स उनकी शादी के बारे में कुछ भी नहीं जान सके. आखिर जूही चावला ने क्यों छुपाई थी अपनी शादी की बात? जूही चावला ने अपने एक इंटरव्यू में इस राज़ पर से पर्दा उठाया था. जूही ने बताया कि जब उनकी शादी हुई थी, उस समय लोगों के पास इंटरनेट नहीं होता था, उस वक़्त फोन पर कैमरा भी नहीं होता था. शायद यही वजह रही होगी कि उस समय जूही चावला की शादी की खबर लीक नहीं हो पाई. जूही ने अपने इंटरव्यू में कहा, “मैंने उस दौरान अपनी पहचान बनानी शुरू की थी और मैं उस वक़्त अच्छा-खासा काम कर रही थी. ये वही समय था जब जय मेरी जिंदगी में आए. मुझे डर था कि शादी की खबर से मेरा करियर डूब सकता है. मैं अपना करियर जारी रखना चाहती थी और शादी की बात छुपाना मुझे बीच का रास्ता लगा इसलिए मैंने अपनी शादी की बात छुपाई.”

Juhi Chawla

बॉलीवुड में लव स्टोरी बनती-बिगड़ती रहती हैं, लेकिन आज हम एक ऐसे कपल की बात कर रहे हैं, जिनकी जोड़ी बॉलीवुड में बहुत मशहूर थी. जी हां, हम बात कर रहे हैं करीना कपूर और शाहिद कपूर की लव स्टोरी की. कभी ये कपल एक-दूसरे पर जान छिड़कता था, लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि करीना कपूर और शाहिद कपूर हमेशा के लिए अलग हो गए. ‘जब वी मेट’ फिल्म करीना कपूर और शाहिद कपूर की सुपरहिट फिल्म थी और इस फिल्म के दौरान ही इनका ब्रेकअप हो गया. ‘जब वी मेट’ फिल्म में करीना कपूर और शाहिद कपूर परदे पर रोमांस कर रहे थे, लेकिन असल ज़िंदगी में उसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनका रिश्ता टूटने लगा था. ‘जब वी मेट’ फिल्म में ऐसा क्या हुआ कि करीना कपूर और शाहिद कपूर हमेशा के लिए अलग हो गए.

Kareena Kapoor And Shahid Kapoor

ऐसे शुरू हुई करीना कपूर और शाहिद कपूर की लव स्टोरी
करीना और शाहिद पहली बार फिल्म फिदा के सेट पर मिले थे, जहां करीना कपूर अपना दिल शाहिद को दे बैठी. करीना कपूर ने ही शाहिद को प्रपोज किया और इस तरह इस दोनों की लव स्टोरी शुरू हुई. करीना कपूर और शाहिद कपूर की लव स्टोरी मीडिया में अक्सर सुर्ख़ियों में रहती थी. करीना और शाहिद एक-दूसरे के प्यार में पागल थे. ख़बरों के अनुसार, करीना कपूर ने शाहिद कपूर के लिए नॉन वेजीटेरियन खाना भी छोड़ दिया था. उस दौरान शाहिद और करीना ने कई फिल्में साथ में की. ये अलग बात है कि जब तक ये जोड़ी साथ थी, तब तक इनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कोई ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन ‘जब वी मेट’ फिल्म में फिल्म में जब ये दोनों अलग हुए, तो वो फिल्म सुपरहिट हुई. करीना कपूर और शाहिद कपूर ने अपने ब्रेकअप के बारे में कभी कुछ नहीं कहा, लेकिन करीना कपूर का अचानक सैफ अली खान को डेट करना उनके फैन्स को चकित कर गया.

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Kareena Kapoor And Shahid Kapoor

क्या सैफ अली खान थे करीना कपूर और शाहिद कपूर के ब्रेकअप की वजह?
करीना कपूर की ज़िंदगी में सैफ अली का आना और करीना-शाहिद का ब्रेकअप, इसे करीना भाग्य का लिखा मानती हैं. शाहिद कपूर से ब्रेकअप के बारे में करीना कपूर ने एक इंटरव्यू में कहा, “भाग्य के अपने कुछ प्लान होते हैं और ज़िंदगी उसके हिसाब से चलती है.” करीना कपूर ने कहा कि ‘जब भी मेट’ फिल्म ने जहां उनके करियर को बदलकर रख दिया, वहीं फिल्म ‘टशन’ के सेट पर करीना की सैफ अली खान से मुलाकात हुई और उस मुलाकात ने करीना की पूरी ज़िंदगी बदल दी. करीना ने कहा, “फिल्म ‘टशन’ के वक्त मैं अपने रोल और फिगर को लेकर बहुत उत्साहित थी. टशन फिल्म ने मेरी ज़िंदगी बदल दी, क्योंकि इस फिल्म के जरिए मैं अपने लाइफ पार्टनर से मिली.” अपने इंटरव्यू में करीना कपूर ने कहा, “फिल्म ‘जब वी मेट’ की शूटिंग के दौरान से लेकर फिल्म ‘टशन’ के बीच में बहुत कुछ ऐसा हुआ, जिसके बाद हमने अपने-अपने रास्ते अलग कर लिए. मेरे लिए उस वक़्त पर्सनली और प्रोफेशनली सबकुछ हैंडल करना बहुत मुश्किल हो रहा था. फिल्म में जिस तरह गीत की ज़िंदगी सेकेंड हाफ के बाद बदल जाती है, ‘जब वी मेट’ फिल्म के बनते वक्त मेरी जिंदगी में भी वैसा ही हो रहा था.”

Kareena Kapoor And Shahid Kapoor

एक-दूसरे के लिए नहीं बनी थी करीना कपूर और शाहिद कपूर की जोड़ी
बता दें कि ‘जब वी मेट’ फिल्म की शूटिंग के दौरान ही करीना और शाहिद के रिश्ते खराब होने लगे थे और फिल्म ‘टशन’ की शूटिंग के दौरान सैफ अली खान और करीना कपूर एक-दूसरे के करीब आ गए थे. फिर सैफ और करीना ने साल 2012 में शादी कर ली. शाहिद कपूर ने भी 2015 में मीरा राजपूत से शादी कर ली. आज करीना कपूर और शाहिद कपूर दोनों अपनी-अपनी शादीशुदा ज़िंदगी में खुश हैं. करीना कपूर एक बेटे तैमूर की मां बन चुकी हैं और शाहिद कपूर भी दो बच्चों के पिता बन चुके हैं. बॉलीवुड की ये क्यूट जोड़ी शायद एक-दूसरे के लिए नहीं बनी थी. लेकिन आज भी जब इनके फैन्स ‘जब वी मेट’ फिल्म देखते हैं, तो उन्हें करीना कपूर और शाहिद कपूर की लव स्टोरी याद आ जाती है.

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Kareena Kapoor And Shahid Kapoor

संगीत जगत के लेजंड राहुल देव बर्मन यानी आर.डी. बर्मन ने बॉलीवुड को संगीत का ऐसा सुनहरा दौर दिया, जिस पर आज भी लोग झूम उठते हैं. 60 से लेकर 80 के दशक तक आर.डी. बर्मन ने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गानों के साथ दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया था. आर.डी. बर्मन की ज़िंदगी जितनी दिलचस्प थी, उतनी ही दिलचस्प थी उनकी लव स्टोरी. कैसे शुरू हुई आर.डी. बर्मन और आशा भोसले की म्यूज़िकल लव स्टोरी? आज (27 जून) आर.डी. बर्मन यानी पंचम दा का जन्मदिन है. आइए, हम आपको बताते हैं उनकी ज़िंदगी और उनकी लव स्टोरी से जुडी कुछ दिलचस्प बातें.

RD Burman

ऐसे शुरू हुई थी आर.डी. बर्मन और आशा भोसले की म्यूज़िकल लव स्टोरी
आर.डी. बर्मन और आशा भोसले की पहली मुलाकात एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में हुई थी, जहां आर.डी. बर्मन के पिता एस डी बर्मन ने दोनों को मिलवाया था. तब तक आशा भोसले ने इंडस्ट्री में अच्छी खासी पहचान बना ली थी, जबकि आरडी बर्मन मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन के टीएनज बेटे थे. करीब 10 साल बाद वो मौका आया जब आरडी बर्मन ने फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ के लिए आशा भोसले से गाने के लिए संपर्क किया. तब तक पंचम दा और आशा भोसले दोनों की ही पहली शादी टूट चुकी थी. पंचम दा अपनी पहली पत्नी रीता पटेल से अलग हो गए थे. उस वक्त पंचम दा अपनी पहली पत्नी रीता पटेल से इतना परेशान हो चुके थे कि घर छोड़कर होटल में रहने चले गए थे. आशा भोसले जी की भी पहली शादी सुखद नहीं थी. आशा जी अपने पति गणपतराव भोसले से बिल्कुल खुश नहीं थीं. और फिर एक दिन आशा जी ने अपने बच्चों के साथ अपनी बहन के घर की ओर रुख कर लिया. उसी दौरान आशा जी लगातार पंचम दा के लिए गाने गा रही थीं. पंचम दा का संगीत और आशा जी की सुरीली आवाज उन्हें एक-दूसरे के करीब ला रहे थे. कई सालों तक बिना कुछ कहे दोनों के एहसास संगीत में घुलते-मिलते रहे. उस वक़्त दोनों ने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने दिए थे. पंचम दा का आशा जी को प्रपोज़ करने का अंदाज़ भी बहुत निराला था. आशा जी ने एक खास बातचीत के दौरान बताया था कि शादी के लिए प्रपोज़ करते वक्त भी पंचम दा ने म्यूजिक का सहारा लिया था. उन्होंने आशा जी से कहा कि मेरे सुरों को तुम ही समझ सकती हो. पंचम दा की इस बात को आशा जी समझ गई थीं और उन्होंने शादी के लिए हां कर दी थी. लेकिन आरडी बर्मन और आशा भोसले की शादी का रास्ता इतना आसान नहीं था. आशा जी उम्र में पंचम दा से बड़ी थीं इसलिए पंचम दा की मां इस रिश्ते के खिलाफ थीं, उन्होंने इस शादी के लिए साफ मना कर दिया था. आशा जी से शादी के लिए आरडी बर्मन को लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन आखिरकार दो प्यार करने वाले एक हो ही गए. आर.डी. बर्मन और आशा भोसले की म्यूज़िकल लव स्टोरी बहुत लंबी नहीं थी. शादी के 14 साल बाद ही पंचम दा 54 साल की उम्र में इस दुनिया से चले गए. पंचम दा के चले जाने के बाद आशा जी बिल्कुल टूट गई थीं, कई सालों बाद वो सामान्य हो पाई थीं.

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RD Burman

उस वक्त आशा भोलसे सिर्फ पंचम दा के लिए ही रिकॉर्डिंग करती थीं
फिर एक समय ऐसा भी आया, जब आशा भोलसे सिर्फ पंचम दा के लिए ही रिकॉर्डिंग करती थीं. वर्ष 1981 में जब म्यूजिशियन कल्याण सेन ने फिल्म ‘मुन्नी बाई’ के एक गाने की रिकॉर्डिंग के लिए आशा भोलसे को अप्रोच किया और गाने की रिकॉर्डिंग के लिए उनके पीए बाबू भाई के जरिए आशा जी की रजामंदी भी मिल गई, साथ ही 5 हजार रुपए फीस तक तय हो चुकी थी, ऐसे में जब कल्याण सेन अपनी पूरी टीम के साथ रिकॉर्डिंग के लिए पहुंचे, तो बाबू भाई ने कहा कि आशा जी के दांत में दर्द है आप बाद में आना. बता दें कि आशा जी उसी दिन अपने पति आर डी बर्मन के लिए रिकॉर्डिंग कर रही थीं. जब इस बात की खबर कल्याण सेन को मिली, तो वो रोते हुए आर डी बर्मन के ऑफिस पहुंच गए. कल्याण सेन की बातें सुनते ही पंचम दा ने आशा जी को कसकर डांट लगाई और अपनी रिकॉर्डिंग कैंसिल करवा दी.

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RD Burman

ऐसा था पंचम दा का संगीत का सफर
बॉलीवुड में पहली बार फिल्म ‘छोटे नवाब’ में म्यूजिक की शुरूआत करने वाले आर डी बर्मन को राजेश खन्ना स्टारर फिल्म ‘अमर प्रेम’ के गानों से म्यूजिक इंडस्ट्री के साथ-साथ दुनियाभर में पहचान मिली. इस फिल्म में ‘चिंगारी कोई भड़के’, ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ जैसे गानों को दर्शक आज भी गुनगुनाते हैं. आर डी बर्मन को भले ही संगीत विरासत में मिला हो, मगर बहुत कम उम्र में ही उन्होंने अपनी खुद की स्टाइल इजाद कर ली और नए जमाने के संगीतकार बन गए. कई लोग उन्हें आने वाली पीढ़ी का संगीतकार भी कहते थे. आरडी बर्मन के म्यूजिक के लिए एक्सपेरिमेंट्स काफी चर्चित हैं. बताया जाता है कि वे बारिश की बूंदों के साउंड की रिकॉर्डिंग के लिए घंटों बाल्कनी में बैठे रहते थे, रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों जैसे सोडा बॉटल तक को इंस्ट्रूमेंट की तरह यूज करते थे. पंचम दा अलग तरह का खुद का म्यूजिक बना सकें इसके लिए वो अपने म्यूजिशंस की पीठ तक बजाकर देखते थे. जैज, कैबरे, डिस्को और ओपरा म्यूजिक से भारतीय सिनेमा को समृद्ध करने वाले आरडी बर्मन को उनके चाहने वाले कभी नहीं भूल सकते. उनके रोमांटिक गानों को आज भी कोई टक्कर नहीं दे सकता. तुम आ गये हो नूर आ गया है, मुसाफिर हूँ यारों, सर जो तेरा चकराए, मेरा कुछ सामान, चिंगारी जो भड़के, ओ मेरे दिल के चैन, ये जो मोहब्बत है, बड़े अच्छे लगते हैं, रोज़ रोज़ आखों तले, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा जैसे कई सुपरहिट गाने पंचम दा ने बॉलीवुड को दिए हैं और ये गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं.

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RD Burman

आप भी सुनिए आरडी बर्मन के ये सुपरहिट गाने:

तुम आ गये हो नूर आ गया है

ओ मेरे दिल के चैन

चिंगारी जो भड़के

बड़े अच्छे लगते हैं

एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा

टीवी का सबसे मशहूर शो और उसके लीड ऐक्टर व ऐक्ट्रेस सबसे फेमस कपल बन गए थे. पवित्र रिश्ता और मानव-अर्चना घर घर में सबके फेवरेट बन गए थे. अंकिता लोखंडे और सुशांत सिंह राजपूत ने इसी शो से ना सिर्फ़ दर्शकों का बल्कि एक- दूसरे का भी दिल जीता था. दोनों में प्यार हुआ और लगभग छः साल तक उनका ये रिश्ता टिका रहा. लेकिन जिस वक़्त सबको इंतज़ार था दोनों की शादी का उसी वक़्त दोनों ने अलग होने का फ़ैसला करके सबको चौंका दिया था और अब सुशांत की अचानक मौत ने भी सबको बेहद चौंका दिया.

sushant singh rajput and ankita lokhande

लेकिन अब जाकर यह बात सामने आई कि अंकिता से अलग होने के बाद सुशांत पूरी तरह टूट चुके थे. क्योंकि उन्हें अंकिता जितना प्यार करने वाली व समझनेवाली कोई नहीं मिली. यही वजह है कि दोनों के दोस्त इस बात को कह रहे हैं कि अगर अंकिता सुशांत के साथ होती तो वो जीवित होते. लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता है.

sushant singh rajput and ankita lokhande

ब्रेकअप के बाद सुशांत ने कहा था कि यह उनका निजी मामला है और वो वही करते हैं जो उन्हें पसंद है.

वहीं दूसरी ओर अंकिता में भी सुशांत से अलगाव के बाद काफ़ी बदलाव आया था. अलगाव के बाद वो बेहद दुखी थीं और उनके सोशल मीडिया पोस्ट इसकी गवाही देते थे. वो पवित्र रिश्ता के सेट को मिस करने की बात करती थीं और रिश्तों को लेकर भी उन्होंने काफ़ी कुछ लिखा था कि रिश्तों की मर्यादा बनाए रखने में वो यक़ीन करती हैं ना कि उसका प्रचार करने में.

sushant singh rajput and ankita lokhande

सुशांत की मौत की खबर ने अंकिता को काफ़ी झकझोर दिया है जिससे पता चलता है कि इस रिश्ते में सच में पवित्रता थी और दोनों साथ होते तो बेहतर होता.

sushant singh rajput and ankita lokhande

लेकिन फ़िलहाल तो सच कुछ और ही है. सुशांत से अलग होने के बाद भले ही अंकिता टूट चुकी थीं पर उन्होंने खुद को अच्छी तरह सम्भाल लिया था और उनमें आया था ग़ज़ब का बदलाव. उन्होंने ना सिर्फ़ अपना मेकओवर किया बल्कि अपने करियर पर भी फोकस करना शुरू कर दिया था.

देखते हैं अंकिता के मेकओवर की तस्वीरें.

Ankita Lokhande
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