Love Story

ये भीगता मौसम, ये बरसती फ़िज़ा… मन के किसी कोने में तुम्हारी यादों की सोंधी महक को फिर हवा दे जाते हैं… जब-जब ये बारिश होती है, तन के साथ-साथ मन को भी भिगो देती है… कैसी अजीब सी कशिश थी तुम्हारी उस सादगी में भी, कैसी रूमानियत थी तुम्हारी आंखों की उस सच्चाई में भी… मेरा पहला जॉब वो भी इतने बड़े बैंक में. थोड़ा डर लग रहा थालेकिन तुमने मुझे काफ़ी कम्फ़र्टेबल फील कराया था.

हर वक्त मेरी मदद की और न जाने कैसे धीरे-धीरे एक दिन अचानक मुझे ये एहसास हुआ कि कहीं मैं प्यार में तो नहीं? 

कुछ दिन अपने दिल को समझने और समझाने में ही बीत गए और उसके बाद मैंने निर्णय ले लिया कि तुमसे अपनीफ़ीलिंग्स का इज़हार कर दूंगी क्योंकि घर में भी मेरी शादी को लेकर बात चलने लगी थी. 

मैंने देर करना ठीक नहीं समझा और कहीं न कहीं मुझे भी ये लगने लगा था कि तुम्हारा भी खिंचाव और लगाव है मेरीतरफ़. मैंने लंच में तुमसे बिना झिझके साफ़-साफ़ अपने दिल की बात कह दी. तुमने भी बड़े सहज तरीक़े से मुझसे कहाकि तुम भी मुझसे प्यार करने लगे हो लेकिन एक सच है जो तुम मुझे बताना चाहते हो, लेकिन शाम को फ़ुर्सत में… 

‘निशांत, कहो क्या कहना चाहते हो?’

‘निधि मैंने तुमको अपने घर इसलिए बुलाया कि बात गंभीर है और मैं तुमको अंधेरे में नहीं रखना चाहता. निधि ये तस्वीर मेरी 3 साल की बेटी किट्टू की है.’ 

‘तुम शादीशुदा हो? तो तुमने मुझे अपने घर क्यों बुलाया? तुम्हारी पत्नी और बेटी कहां हैं?’

‘निधि, यही सब बताने के लिए तो बुलाया है तुम्हें! मेरी पत्नी और मैं अलग रहते हैं. हमने तलाक़ का फ़ैसला लिया है. किट्टू भी राधिका के साथ ही है. मेरी पत्नी राधिका को मेरी सादगी और सहजता पसंद नहीं थी. उसको शुरू से लगता था कि मैंऔरों की तरह स्मार्ट नहीं. उसकी ख्वाहिशें भी बहुत बड़ी थीं जो मैं पूरी न कर सका, इसलिए हमने अलग होने का फ़ैसला किया है.’

‘निशांत मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, मैं तुमसे बेहद प्यार करती हूं और तलाक़ तक तो क्या, ताउम्र तुम्हारा इंतज़ार कर सकती हूं!’ 

इसके बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, मेरी शामों में रूमानियत घुलने लगी थी, दिन रंगीन हो ही रहे थे कि निशांत ने बताया उसकी बेटी किट्टू बहुत बीमार है और राधिका वापस घर लौट आई है क्योंकि किट्टू अपने मम्मी-पापा दोनों के साथ रहना चाहती थी. किट्टू की रिपोर्ट्स से पता चला कि उसको ब्रेन ट्यूमर है और सर्जरी करनी पड़ेगी, जो काफ़ी रिस्की है! 

मैंने निशांत को कहा कि फ़िलहाल वो किट्टू पर ध्यान दे. 

‘क्या बात है निशांत, तुम इतने उलझे-उलझे क्यों रहते हैं इन दिनों? किट्टू ठीक हो जाएगी, ज़्यादा सोचो मत!’

‘निधि किट्टू की फ़िक्र तो है ही लेकिन एक और बात है, राधिका काफ़ी बदल गई है. उसका कहना है कि किट्टू हम दोनों केसाथ रहना चाहती है और उसकी ख़ातिर वो खुद को बदलना चाहती है, लेकिन मैंने उसे अपने और तुम्हारे रिश्ते के बारे मेंबता दिया है, राधिका को कोई आपत्ति नहीं, पर किट्टू की ज़िद का क्या करूं. वो बस यही कहती है कि उसको मम्मी-पापा दोनों के साथ रहना है!

‘निशांत, किट्टू की ज़िद ग़लत नहीं है, हर बच्चा यही चाहता है और जब राधिका भी बदलने को तैयार है तो तुम्हें भी अपने रिश्ते को एक और मौक़ा ज़रूर देना चाहिए!’

‘कैसी बातें कर रही हो तुम? क्या हमने सपने नहीं देखे अपने प्यार के लिए, उनको कैसे तोड़ दूं?’

‘एक 3 साल की बच्ची का दिल और अपनी शादी को तोड़ने से तो बेहतर है हम अपनी ख्वाहिशों को एक कदम पीछे कर लें! रही बात मेरी, तो मैं सारी ज़िंदगी तुम्हारा इंतज़ार करूंगी और अपने प्यार की वजह से ही मैं तुमसे कह रही हूं कि किट्टूकी ख़ातिर एक चान्स ज़रूर दो अपनी शादी को.’

‘पर निधि मैं तुम्हारे बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता.’

‘निशांत, इस वक़्त जो दो रास्ते हैं उनमें से एक को ही चुनना होगा और हमको सही रास्ता ही चुनना चाहिए वरना हमारा प्यार बदनाम होगा, वो प्यार नहीं स्वार्थ कहलाएगा!’

…बस ये आख़री मुलाक़ात थी हमारी, उस दिन खूब बारिश हुई थी बाहर भी और मन के भीतर भी. उसके बाद मैंने अपनी पोस्टिंग दूसरे शहर में करवा ली. ऐसा नहीं कि निशांत से संबंध ख़त्म कर लिए, हम फ़ोन और सोशल मीडिया के ज़रिए सम्पर्क में ज़रूर हैं लेकिन मैं रूबरू नहीं होना चाहती, क्योंकि सामने निशांत को देखूंगी तो अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाऊंगी! 

किट्टू अब ठीक है और अपने मम्मी-पापा के साथ खुश भी है. उसको खुश देख कर मैं और निशांत अपने प्यार पर गर्व महसूस करते हैं. उसकी इसी ख़ुशी में हमारे प्यार की जीत छिपी है! यही है मेरा पहला प्यार, अधूरा रहकर भी मुकम्मल हो गया जो!

  • गोल्डी शर्मा 

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टेलीविज़न, थिएटर, गाना, प्रॉडक्शन हाउस… मल्टी टैलेंटेड मानसी पारेख को ऑल राउंडर कहना ग़लत नहीं होगा, लेकिन मानसी की लव स्टोरी बहुत दिलचस्प है. आखिर मानसी ने पहली मुलाक़ात में अपने पति को अंकल क्यों कहा था? ये किस्सा बड़ा मज़ेदार है.

Manasi Parekh And Parthiv Gohil

हां, मैंने अपने पति पार्थिव को अंकल कहा था
मानसी पारेख ने अपनी लव स्टोरी के बारे में बताते हुए कहा, “पार्थिव से मेरी पहली मुलाक़ात बहुत दिलचस्प है. हुआ यूं कि पार्थिव सारेगामा गुजराती की एंकरिंग कर रहे थे (इससे पहले पार्थिव सारेगामाप हिंदी के विनर थे) और मैं कंटेस्टेंट थी. तब मैं सोलह साल की थी और दसवीं में पढ़ रही थी. अपने से बड़े व्यक्ति को अमूमन हम अंकल ही कहते हैं, इसलिए मैंने भी पार्थिव को अंकल कह दिया. शो के बाद पार्थिव मेरे पास आए और बोले, मैं इतना भी बड़ा नहीं हूं कि तुम मुझे अंकल बोलो. तब मुझे कहां पता था कि मुझे पार्थिव से ही प्यार हो जाएगा. उसके बाद पार्थिव और मैंने कई शो साथ में किए. साथ काम करते हुए कब प्यार हो गया, पता ही नहीं चला.”

Manasi Parekh And Parthiv Gohil

प्यार का इज़हार भी मैंने ही किया था
अपनी लव जर्नी के बारे में बताते हुए मानसी पारेख ने बताया, “साथ काम करते-करते मुझे पार्थिव इतने अच्छे लगने लगे कि मैं ये महसूस करने लगी कि उनके साथ मैं अपनी पूरी ज़िंदगी गुज़ार सकती हूं. बस, मैंने बिना लाग-लपेट के अपने दिल की बात उनसे कह दी. फिर प्यार का सिलसिला बढ़ा और हमने शादी कर ली. अब हमारी शादी को 15 साल हो गए हैं और हमारी बेटी भी अब बड़ी हो रही है. पता ही नहीं चला, व़क्त कितनी जल्दी गुज़र गया. मैं बहुत ख़ुशनसीब हूं कि मुझे पार्थिव जैसा जीवनसाथी मिला. आज मैं करियर में जिस भी मुकाम पर हूं, उसमें पार्थिव का बहुत बड़ा रोल है. पार्थिव बहुत सपोर्टिव हैं, हर काम में मेरा साथ देते हैं.”

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Manasi Parekh And Parthiv Gohil

कम उम्र में शादी के फ़ायदे हैं बहुत
अपनी शादी के बारे में बताते हुए मानसी ने बताया, “मेरी शादी 21 साल में हो गई थी. इसका फ़ायदा ये हुआ कि मैं परिस्थितियों के साथ आसानी से ढल गई. बड़ी उम्र में शादी होने पर ऐसा नहीं हो पाता, तब हम चीज़ों को अपने नज़रिए से देखने लगते हैं. मैंने कम उम्र में ही जीवन के बहुत सारे अनुभव ले लिए हैं इसलिए मेरी जिन सहेलियों की अभी-अभी शादी हुई है या जिन्होंने अब तक शादी नहीं की, उनसे मेरा अनुभव कहीं ज़्यादा है. आज मैं अपना घर और करियर दोनों बख़ूबी संभाल रही हूं. पार्थिव और मैं ख़ूब काम करते हैं, घर-बाहर की ज़िममेदारियां, सुख-दुख बांटते हैं… ज़िंदगी से और क्या चाहिए?”

Manasi Parekh

बॉलीवुड क्वीन कंगना रनौत की ज़िंदगी खुली किताब है. कंगना अपनी ज़िंदगी की हर बात बिंदास कह देती है, जिसके चलते वो अक्सर विवादों में भी रहती हैं. इस बार कंगना रनौत ने अपने माता-पिता की एनीवर्सरी पर उनकी शादी का ये राज ऐसे खोला…

Kangana Ranaut

बॉलीवुड क्वीन कंगना रनौत अपने बिंदास अंदाज़ के लिए जानी जाती हैं. कंगना को जो बात सही लगती है, उसे वो बेबाक होकर सबके सामने कह देती हैं, जिसके चलते कंगना अक्सर विवादों में भी रहती हैं. कंगना रनौत अपने परिवार की बातें भी अक्सर सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं. आज अपने पैरेंट्स की एनीवर्सरी पर कंगना ने उनकी शादी का एक ऐसा राज़ खोला, जिसे सुनकर आपको भी हंसी आ जायेगी. कंगना ने कहा कि उनके माता-पिता ने अपनी शादी के बारे में बच्चों से ये झूठ बोला था, फिर बाद में नानी ने उन्हें ये सच बताया.

Kangana Ranaut

आज कंगना रनौत के माता-पिता की वेडिंग एनीवर्सरी है और ख़ास मौके पर कंगना ने सोशल मीडिया पर अपने माता-पिता की तस्वीर शेयर करते हुए उनकी शादी से जुड़ा एक राज़ भी खोला है.

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कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर अपने पैरेंट्स की थ्रोबैक फोटो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, ‘आज मेरे पैरेंट्स की वेडिंग एनीवर्सरी है. जब हम बड़े हो रहे थे तो, उन्होंने हमसे झूठ बोला कि उनकी पारंपरिक अरेंज मैरिज है. बाद में हमें नानी ने बताया था कि उनका जबरदस्त अफेयर था. पापा ने मम्मी को एक बस स्टैंड पर देखा था, जब वह कॉलेज से लौट रही थीं. तब से वो भी रोज उसी बस से आने लगे थे, जब तक मम्मी ने उन्हें नोटिस नहीं कर लिया. जब पापा ने प्रपोजल भेजा तो नानाजी ने उसे बुरी तरह रिजेक्ट कर दिया, क्योंकि पापा की छवि अच्छी नहीं थी.’ कंगना के पैरेंट्स की ये लव स्टोरी उनके फैन्स को बहुत क्यूट लगी और कंगना के इस ट्वीट पर उनके फैन्स ने जमकर कमेंट्स किए.

कंगना रनौत ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, ‘नाना ने मां के लिए सरकारी नौकरी वाला एक लड़का ढूंढ़ दिया था. मां नानाजी की फेवरिट थीं और वो प्यार से उन्हें गुड्डी बुलाते थे, लेकिन मां ने सभी मुश्किलों का सामना किया और नाना को मना लिया. इसके लिए शुक्रिया, शादी की सालगिरह की बधाई.’।कंगना रनौत का ये ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. एक बार फिर से कंगना ने अपनी फैमिली का ये राज़ बताकर सबको चौंका दिया है. कंगना रनौत के फैन्स उनके पैरेंट्स की लव स्टोरी दिल से पढ़ रहे हैं और उन्हें बधाइयां दे रहे हैं.

आपको कंगना रनौत के माता-पिता की लव स्टोरी कैसी लगी, हमें कमेंट करके जरूर बताएं.

कहता है दिल जी ले ज़रा, बालिका वधु, ये रिश्ते हैं प्यार के जैसे हिट टीवी शोज़ और कई फिल्मों में काम कर चुके चॉकलेटी हीरो रुसलान मुमताज़ और वेल्थ एडवाइज़र निराली मेहता की लव स्टोरी इस जोड़ी की तरह ही बहुत प्यारी है. कैसे शुरू हुई रुसलान मुमताज़ और निराली मेहता की लव स्टोरी, ये जानने के लिए हमने इस क्यूट कपल से बातचीत की.

Ruslaan Mumtaz And Nirali Mehta

1) रुसलान, आपका टेलीविज़न पर कमबैक का अनुभव कैसा रहा?
रुसलानः
जब मैं ‘कहता है दिल जी ले ज़रा’ सीरियल कर रहा था, तब मुझे टेलीविज़न के पावर का एहसास हुआ. टेलीविज़न इंडस्ट्री की पहुंच बहुत ज़्यादा है. फिल्मों का भी अपना मज़ा है, लेकिन टेलीविज़न पर आप रोज़ अपने फैन्स के सामने होते हैं और शो की टीआरपी तथा दर्शकों की पसंद के अनुसार ख़ुद को रोज़ इंप्रूव कर सकते हैं. ‘कहता है दिल जी ले ज़रा’ सीरियल के दो साल बाद मुझे ‘बालिका वधु’ का ऑफर मिला और उसके बाद ‘ये रिश्ते हैं प्यार के’ शो का ऑफर पाकर मैं बहुत ख़ुश हूं. मैं आपको बता दूं कि मुझे ‘बालिका वधू’ में काम करने का मौक़ा पहले भी मिला था, लेकिन मैंने मना कर दिया. फिर जब मैंने शो में सिद्धार्थ शुक्ला की पॉप्युलैरिटी देखी, तो मुझे बहुत अफसोस हुआ कि मैंने शो के लिए मना क्यों किया. देर से ही सही मुझे फिर से इस शो में काम करने का मौक़ा मिला, जिसके लिए मैं बहुत ख़ुश हुआ था.
निरालीः रुसलान का टेलीविज़न पर कमबैक देखकर बहुत ख़ुशी हुई. कई लोग पूछते थे कि रुसलान टीवी पर फिर कब काम करेंगे, ये सुनकर बहुत अच्छा लगता है.

Ruslaan Mumtaz And Nirali Mehta

2) शादी के बाद आप दोनों की ज़िंदगी में क्या बदलाव आए हैं?
रुसलानः
हमारे फील्ड में काम का फिक्स टाइम नहीं होता इसलिए शादी से पहले मेरा रुटीन भी फिक्स नहीं होता था. शादी के बाद निराली सुबह जल्दी उठकर ऑफिस चली जाती थी और रात में भी दस बजे सो जाती थी, जबकि मैं लेट उठता था और सोता भी लेट था. ऐसे में हम दोनों को साथ टाइम बिताने का मौक़ा बहुत कम मिलता था. निराली के साथ व़क्त बिताने के लिए मैंने उसका रुटीन अपना लिया और मैंने पाया कि इससे मेरी लाइफ बहुत ईज़ी हो गई है. अब मुझे भी सुबह जल्दी उठने की आदत हो गई है और इसका पूरा क्रेडिट निराली को जाता है. जब आपको ऐसा लाइफ पार्टनर मिले तो बेशक ज़िंदगी बहुत अच्छी हो जाती है. अब हमारी ज़िंदगी में हमारा क्यूट बेबी भी आ गया है, तो अब हमारी हर चीज़ उसके हिसाब से ही तय होती है. उसके आने से घर में हर पल रौनक रहती है.
निरालीः बेशक, ज़िंदगी में बहुत बदलाव आए हैं और ख़ास बात ये है कि हमें इसका एहसास भी नहीं हुआ. व़क्त के साथ रुसलान और मैं काफ़ी मैच्योर हुए हैं. हमने अपनी और दूसरों की ग़लतियों से बहुत कुछ सीखा है. अब हमारा बेटा हमें और ज्यादा मैच्योर बना रहा है.

Ruslaan Mumtaz And Nirali Mehta

3) क़ामयाबी क्या है आपकी नज़र में?
रुसलानः
अगर आपकी फैमिली लाइफ अच्छी है, आप इतना कमा लेते हैं कि आप फायनांशियली सिक्योर हैं, आपके दोस्त अच्छे हैं और सुख-दुख में आपका साथ देते हैं, तो आप सक्सेसफुल हैं.
निरालीः जब आप अपने लिए कोई लक्ष्य तय करते हैं और उसे हासिल कर लेते हैं, मेरी नज़र में वही सक्सेस है. दुनिया हमें कितना सक्सेसफुल मानती है इससे ज़्यादा ज़रूरी ये है कि हम अपनी सक्सेस किस चीज़ में देखते हैं और उससे हमें कितनी ख़ुशी मिलती है.

Ruslaan Mumtaz And Nirali Mehta

4) क़ामयाबी के लिए परिवार का सपोर्ट कितना मायने रखता है?
रुसलानः
हम एक्टर्स प्यार के भूखे होते हैं. जब हम अच्छा काम करते हैं तो हमें दर्शकों का बहुत प्यार मिलता है, लेकिन करियर के उतार-चढ़ाव में दर्शकों का प्यार भी कम-ज़्यादा होता रहता है. ऐसे समय में फैमिली का सपोर्ट बहुत मायने रखता है. यदि आपकी फैमिली लाइफ अच्छी है तो आप करियर के लो फेज़ को भी आसानी से झेल जाते हैं, लेकिन फैमिली लाइफ सही नहीं है तो आप टूट जाते हैं.
निरालीः परिवार के सपोर्ट के बिना हम कुछ भी नहीं कर सकते. आप ज़िंदगी में चाहे कोई भी फैसला लें, यदि आपका परिवार आपके साथ है तो आप क़ामयाब हों या ना हों इससे बहुत ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ता. हमारे घर में सभी सदस्य कोई भी ़फैसला लेने से पहले एक-दूसरे की राय लेते हैं, इससे परिवार की बॉन्डिंग और मज़बूत होती है.

Ruslaan Mumtaz And Nirali Mehta

5) आप दोनों डांसर हैं, क्या आप दोनों किसी डांस शो में नज़र आएंगे?
रुसलानः
रियालिटी शोज़ में जीतता वही एक्टर है जो ज़्यादा पॉप्युलर हो. आप कितने भी अच्छे डांसर हैं, जब तक लोग आपके लिए वोट नहीं करेंगे आप नहीं जीत सकते. (हंसते हुए) थोड़ा और पॉप्युलर हो जाऊं, फिर डांस शो भी ज़रूर करूंगा.
निरालीः मुझे डांस का बहुत शौक है, लेकिन मेरा करियर फुल डाइम डांस की इजाज़त नहीं देता. (हंसते हुए) फिलहाल मैं फ्रेंडस की शादियों में डांस करके अपना ये शौक़ पूरा कर लेती हूं. हां, मौक़ा मिला, तो रुसलान और मैं ज़रूर डांस शो का हिस्सा बनना चाहेंगे.

Ruslaan Mumtaz And Nirali Mehta

6) आप दोनों कितने फिटनेस कॉन्शियस हैं?
रुसलानः
मेरी लाइफ में फिटनेस बहुत बड़ी चीज़ है. मैं कितना भी बिज़ी रहूं फिटनेस के लिए टाइम निकाल ही लेता हूं. सेट पर जब भी टाइम मिलता है मैं अपने रूम में जाकर स्ट्रेचिंग, पुशअप्स वगैरह कर लेता हूं. मैं डायट पर भी बहुत ध्यान देता हूं. मैं बहुत ही क्लीन डायट लेता हूं. सेट पर मैं घर से ही खाना ले जाता हूं. दिनभर फ्रूट्स, नारियल पानी, ओट्स वगैरह खाता हूं. डेली सोप में काम करते हुए घर पहुंचने में अक्सर देर हो जाती है इसलिए मैं डिनर सेट पर ही खाकर निकलता हूं. डिनर में मैं 5-6 उबले अंडे और एक बाउल बेजीटेबल सूप लेता हूं. सेट पर डिनर करने के दो फायदे हैं, एक तो घर पहुंचने तक मेरा खाना पच जाता है, दूसरे घर जाकर मैं जल्दी सो पाता हूं. इसका फ़ायदा ये होता है कि पूरे शो के दौरान न तो मेरा वज़न बढ़ता है और न ही कम होता है.
निरालीः मैं फिटनेस को लेकर पहले से ही काफ़ी कॉन्शियस हूं और हमेशा हेल्दी डायट लेती हूं, लेकिन शादी के बाद मेरी डायट और ज़्यादा क्लीन हो गई है. मैं रुसलान को कंपनी देने के लिए ऐसा करती हूं ताकि उन्हें ऐसा न लगे कि घर में सिर्फ उन्हें ही डायटिंग करनी पड़ रही है.

Ruslaan Mumtaz And Nirali Mehta

7) आपका स्टाइल मंत्र क्या है?
रुसलानः
मुझे लगता है स्टाइलिश होने से ज़्यादा आपका फिट होना ज़रूरी है. यदि आप फिट हैं तो आप पर कोई भी आउटफिट अच्छा ही लगेगा. मैं आपको उदाहरण देकर समझाता हूं, सलमान ख़ान और गोविंदा दोनों ने अपनी कई फिल्मों में लाउड कपड़े पहने हैं. यलो शर्ट के साथ ऑरेंज पैंट तक पहनी है, लेकिन सलमान ख़ान के पहने कपड़े ट्रेंड बन जाते हैं और गोविंदा के पहने कपड़ों का मज़ाक उड़ाया जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह उनकी फिटनेस है. मैं भी फिट रहने की कोशिश करता हूं इसीलिए मुझ पर हर तरह के कपड़े सूट हो जाते हैं.
निरालीः मेरा पहनावा बचपन से टॉम बॉय जैसा रहा है इसलिए अभी भी मुझे वेस्टर्न आउटफिट ही ज़्यादा पसंद आते हैं. मुझे लूज़ ट्रैक पैंट, स्नीकर्स, टाइट फिटेड डैस वगैरह पहनना बहुत पसंद है. हां, अब इंडियन कपड़े भी पहनने लगी हूं.

Ruslaan Mumtaz And Nirali Mehta

8) अब तक मिला बेस्ट कॉम्प्लिमेंट कौन-सा था?
रुसलानः
बेस्ट कहूं या अजीब, पता नहीं, लेकिन जब मुझसे कई लड़के और मैरिड लोग आकर कहते हैं कि मेरी गर्लफ्रेंड/वाइफ आपकी बहुत बड़ी फैन है, उसके मोबाइल स्क्रीन पर आपकी फोटो होती है, तो मैं समझ नहीं पाता कि उन्हें क्या जवाब दूं.
निरालीः रुसलान का एक फ्रेंड जो हमें बचपन से जानता है, ने कहा कि तुमने एक औरत के रूप में ख़ुद को बहुत अच्छी तरह इवॉल्व किया है. जब तुम रुसलान की लाइफ में आई तब तुम बहुत छोटी थी, तुमने बहुत ही ख़ूबसूरती से रुसलान, उसकी फैमिली, उसके करियर के साथ ख़ुद को ढाल लिया. मेरे लिए ये कॉम्प्लिमेंट बहुत बड़ा है.

Ruslaan Mumtaz And Nirali Mehta

9) हॉलिडेज़ में कहां जाना पसंद करते हैं?
रुसलानः
हम दोनों को घूमने का बहुत शौक है. शादी के बाद हम बहुत घूमे हैं. मेरे लिए जगह से ज़्यादा निराली का साथ मायने रखता है. अब मैंने डेली सोप में काम करना शुरू कर दिया है, तो अब शायद टाइम कम मिले, फिर भी कुछ न कुछ तो प्लान कर ही लेंगे.
निरालीः (हंसते हुए) मुझे तो लगता है कि हम कमा ही इसलिए रहे हैं कि एक साथ पूरी दुनिया घूम सकें. हम हनीमून के लिए मालदीव गए थे, वो एक्सपीरियंस हमारे लिए बहुत ख़ास है.

Ruslaan Mumtaz And Nirali Mehta

10) किस बात से बहुत ख़ुशी मिलती है?
रुसलानः
मुझे कोई नया रोल मिलने पर जो ख़ुशी मेरे पैरेंट्स के चेहरे पर दिखाई देती है, वो मुझे बहुत ख़ुशी देती है. मेरे ख़्याल से हर पैरेंट्स अपने बच्चे को पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में सैटल होते देख ऐसे ही ख़ुश होते हैं.
निरालीः एक-दूसरे की तरक्की देखकर बहुत ख़ुशी होती है. रुसलान और मैं दस साल से साथ हैं. हमने एक-दूसरे के करियर की शुरुआत से लेकर तरक्की तक सबकुछ देखा है इसलिए हमारी बॉन्डिंग बहुत स्ट्रॉन्ग है.
– कमला बडोनी

कहते हैं प्यार में सब कुछ जायज़ है लेकिन सुमित की सोच कुछ अलग ही थी…  आज सुमित को एक अरसे बाद देखा वोभी अपने पति की ऑफ़िस पार्टी में. बालों में हल्की सफ़ेदी झलक रही थी पर व्यक्तित्व उतना ही आकर्षक और शालीन… दिल पुरानी यादों में डूब गया. मुझे याद है एक-एक लम्हा जो सुमित की बाहों में बीता था, कितना हसीन हुआ करता थातब सब कुछ. सुमित और मैं साथ ही पढ़ते थे और उसका घर हमारे घर से कुछ ही दूरी पर था. वो बस कुछ ही वक़्त पहलेयहां शिफ़्ट हुआ था. कॉलेज का आख़िरी साल था और सुमित ने भी मेरे ही कॉलेज में एडमिशन ले किया था. आते-जातेपहले आंखें मिलीं और फिर साथ पढ़ते-पढ़ते दोस्ती हो गई. 

Pahla Affair

सुमित काफ़ी समझदार था और मैं उसकी इसी समझदारी की क़ायल थी. मैंने उसे अपने दिल की बात कहने में देर नहींलगाई और उसने भी अपनी भावनाओं का इज़हार कर दिया. पढ़ाई पूरी हुई और घर में मेरी शादी की बातें भी होने लगीं. एक रोज़ पापा ने ऐलान कर दिया कि लड़केवाले आ रहे हैं देखने. मैं घबरा गई और भागकर सुमित के पास गई. उसेबताया तो उसने कहा कि मैं घरवालों को बता दूं और कल वो भी आकर पापा से बात करेगा. 

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मैंने हिम्मत जुटाकर मम्मी-पापा को अपने प्यार का सच बता दिया. पापा ने भी कहा ठीक है सुमित को आने दो कल, तभीबात करेंगे पर फ़िलहाल जो लोग देखने आ रहे हैं उस पर ध्यान दो.

लड़केवाले तो आकर चले गए पर मुझे कल का इंतज़ार था. सुमित आया और पापा ने मुझे भी बुलाया. पापा बोले- मुझेलव मैरिज से कोई प्रॉब्लम नहीं है, ये सुन मैं एक पल को खुश हो गई, पर पापा की आगे की बातें सुन मैंने उम्मीद छोड़ दी. 

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“सुमित अगर तुम हमारे समाज के होते तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होती क्योंकि तुम होनहार हो, समझदार हो लेकिन मैंअपने समाज के विरुद्ध जाकर रचना की शादी नहीं कर सकता. मुझे भी नाते-रिश्तेदारों को जवाब देना है. मैं तुम दोनों कोभ्रम में नहीं रखना चाहता इसलिए साफ़-साफ़ कह दिया.”

मेरे सारे सपने बिखरते नज़र आए मुझे… रात के एक बज रहे थे… “अरे रचना, इतनी रात तुम मेरे यहां? सब ठीक तो है?” 

“सुमित चलो भाग चलते हैं, हम अपने प्यार को ऐसे हारते देख नहीं सकते. शादी कर लेंगे तो पापा ज़रूर माफ़ कर देंगे.”

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“रचना, मैं अपने प्यार को ऐसे कलंकित नहीं कर सकता, यूं चोरी-छिपे शादी करना ठीक नहीं, तुम्हारे घरवालों की औरतुम्हारी भी बदनामी होगी. मैं तुम्हें बदनाम कैसे कर सकता हूं, सिर्फ़ अपने स्वार्थ के लिए? प्यार का अर्थ पाना ही नहीं होताबल्कि खोना भी होता है. मुझे उम्मीद है तुम हमारे प्यार की लाज रखोगी और अपनी शादी को दिल से निभाओगी! मेरीख़ातिर… चलो तुम्हें घर छोड़ दूं.”

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मैं आंसुओं के सैलाब में डूब गई और चुपचाप शादी भी कर ली. पापा ने विदाई के समय कहा था, “मुझे माफ़ कर देनाबेटा, मैं कायर निकला!”

मेरे पति अरुण काफ़ी अच्छे और नेकदिल थे, लेकिन सुमित की कमी हमेशा ही खली! 

“अरे रचना, इनसे मिलो, ये सुमित हैं, कुछ ही दिन पहले इनका यहां ट्रांसफ़र हुआ है.”

मेरे पति ने सुमित से मिलवाया और मैं बीते वक्त से वर्तमान में लौट आई. 

मौक़ा पाते ही मैंने सुमित से उसका नंबर ले लिया. हिम्मत जुटाकर फ़ोन लगाया. हालचाल पूछा, पत्नी-परिवार के बारे मेंपूछा.

“रचना, मैंने शादी नहीं की. किसी और से शादी करके मैं उसके साथ अन्याय नहीं करना चाहता था. मेरा प्यार तो तुम होऔर हमेशा रहोगी.”

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मैं समय निकालकर सुमित के घर जा पहुंची… “रचना तुम्हें इस तरह नहीं आना चाहिए था, किसी को पता चलेगा तोतुम्हारे लिए परेशानी हो जाएगी”

“मैं खुद को रोक नहीं पाई और अब जब हम एक ही शहर में हैं तो मिल तो सकते ही हैं ना…”

ख़ैर कुछ देर रुककर मैं घर लौट आई. ऐसा लगा ज़िंदगी फिर मुझे सुमित के क़रीब रहने का मौक़ा देना चाहती है… 

पर एक दिन अरुण ने आकर बताया कि कल उनके ऑफ़िस में सुमित की फेयरवेल पार्टी है, उसने दूसरे शहर में दूसरी कंपनी जॉइन कर ली है. 

मैंने सुमित को ग़ुस्से में फ़ोन करके पूछा, तो उसने कहा, “जो वक़्त बीत गया उसको लौटाने की कोशिश मत करो वरनासब बर्बाद हो जाएगा. तुम्हारा घर-परिवार-शादी! मैं पहले की ही तरह अपने प्यार को कलंकित नहीं कर सकता, मैंने अपनेप्यार को हर पल जिया, तुमको हमेशा अपने क़रीब महसूस किया, मेरे लिए तो यही काफ़ी है, मैंने तुमको खोकर अपनेप्यार को मुकम्मल किया, भले ही हम साथ ना रह पाए हों, पर खोना भी प्यार का हिस्सा होता है, तुम ख़ुश रहना और हमारेप्यार को कलंकित मत होने देना कभी भी.”

Pahla Affair

मैंने फिर एक बार सुमित को खो दिया था पर इस बार भी वो मुझे प्यार करना और प्यार की इज़्ज़त बनाए रखना सिखागया था. प्यार में सब कुछ जायज़ नहीं होता, प्यार की भी हदें और सरहदें होती हैं और उन हदों में रहकर अपने प्यार कोनिभाना भी बहुत बड़ी बात है. यह आसान नहीं, लेकिन सुमित ने वाक़ई मुझे प्यार करना और निभाना सिखाया, थैंक यूसुमित!

  • पिंकी शर्मा 

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मशहूर बॉलीवुड सिंगर उदित नारायण के बेटे आदित्य नारायण ने अपनी गर्लफ्रेंड श्वेता अग्रवाल से हाल ही में शादी की है. कोरोना काल के चलते इनकी शादी बहुत धूमधाम से नहीं हो सकी, लेकिन सोशल मीडिया पर आदित्य नारायण और श्वेता अग्रवाल की शादी की खूब धूम रही और इनकी शादी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए. अब ये क्यूट कपल हनीमून के लिए निकल पड़ा है. आदित्य नारायण ने वाइफ श्वेता के साथ सेल्फी शेयर करके इस बात की खबर दी है कि वो हनीमून के लिए कश्मीर निकल चुके हैं. आदित्य नारायण ने सोशल मीडिया पर अपने हनीमून की पहली सेल्फी शेयर करते हुए लिखा ये…

Aditya Narayan

आदित्य नारायण ने शेयर की अपने हनीमून की पहली सेल्फी
बता दें कि आदित्य नारायण वाइफ श्वेता के साथ हनीमून के लिए कश्मीर निकल चुके हैं. आदित्य नारायण ने सोशल मीडिया पर अपने हनीमून की पहली सेल्फी शेयर करते हुए लिखा, “हनीमून शुरू! धरती के स्वर्ग की यात्रा पर, पहली बार कश्मीर, अतुल्य भारत!” आदित्य नारायण की इस पोस्ट पर उनके फैन्स जमकर कमेंट्स कर रहे हैं. इस सेल्फी में ये कपल बहुत क्यूट लग रहा है.

Aditya Narayan and Shweta Agarwal

एक नहीं तीन जगहों पर घूमने जाएंगे आदित्य और श्वेता
जहां तक आदित्य और श्वेता के हनीमून प्लान की बात है, तो बता दें कि ये कपल एक नहीं, तीन जगहों पर घूमने जाने वाला है. हाल ही में आदित्य ने एक इंटरव्यू में अपने हनीमून प्लान के बारे में बताते हुए कहा, “मैं और श्वेता हनीमून के लिए एक और दो जगह नहीं, बल्कि तीन जगहों पर घूमने के लिए जाएंगे.” आदित्य ने बताया कि वो दोनों तीन छोटे-छोटे वेकेशन पर जाएंगे. बता दें कि आदित्य और श्वेता श‍िलिम, सुला वाइनयार्ड्स और गुलमर्ग, इन तीन खूबसूरत जगहों पर घूमने जाएंगे.

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Aditya Narayan and Shweta Agarwal

बता दें कि आदित्‍य नारायण और श्‍वेता अग्रवाल एक-दूसरे को पिछले 10 सालों से जानते हैं. दोनों लंबे समय से डेट कर रहे थे, फिर परिवारों की रज़ामंदी से दोनों ने शादी कर ली. अब ये क्यूट कपल अपने हनीमून पर है.

Aditya Narayan and Shweta Agarwal
Aditya Narayan and Shweta Agarwal

बॉलीवुड की चुलबुली हसीना जूही चावला के लाखों फैन्स हैं, लेकिन बात जब पर्सनल लाइफ की आती है, तो जूही चावला अपनी निजी ज़िंदगी की बातें मीडिया में शेयर नहीं करतीं. यहां तक कि जूही चावला ने अपनी शादी की बात भी काफी समय तक छुपाकर रखी थी. आखिर जूही चावला ने अपनी शादी की बात क्यों छुपाई और कैसे खुला जूही की शादी का राज़. यहां पर हम आपको जूही चावला की ज़िंदगी के कुछ अनकहे राज़ बता रहे हैं.

मिस इंडिया से लेकर अभिनय, फिल्म निर्माण तक ऐसा रहा जूही चावला का सफर
1984 में ‘मिस इंडिया’ के खिताब से शोहरत पाने वाली जूही चावला एक सफल अभिनेत्री और फिल्म फिल्म निर्माता भी हैं. जूही चावला अपने करियर और पर्सनल लाइफ को बहुत अच्छी तरह मैनेज किया है. पंजाब के अंबाला में 13 नवंबर 1967 को चावला परिवार में जन्मीं जूही बचपन से ही बहुत होनहार थीं. जूही पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं और उनकी फिल्मों में आने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन उनकी किस्मत जूही को बॉलीवुड इंडस्ट्री में ले आई. कॉलेज में पढ़ाई के दौरान जूही ने यूं ही फेमिना मिस इंडिया के लिए फॉर्म भरा था और उनका सलेकशन हो गया. इतना ही नहीं, जूही ने ये कॉन्टेस्ट जीत भी लिया और इस तरह वो मिस इंडिया बन गईं. इसके बाद जूही मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता के लिए विदेश भी गईं और वहां पर मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में बेस्ट नेशनल कॉस्ट्यूम का पुरस्कार भी जीता.

जूही चावला का अभिनय का सफर
इसके बाद जूही की बॉलीवुड में एंट्री हुई. जूही ने अपने करियर की शुरुआत मल्टीस्टारर फिल्म ‘सल्तनत’ से की थी, लेकिन उन्हें सफलता 1988 में आमिर खान के साथ आई फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ से मिली. ये फिल्म इतनी बड़ी हिट साबित हुई कि जूही चावला रातोंरात स्टार बन गईं और उनकी गिनती गिनती उस समय हिंदी सिनेमा पर राज करने वाली अभिनेत्रियों में की जाने लगी. ‘कयामत से कयामत तक’ फिल्म को फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का खिताब मिला और जूही को फिल्म के लिए बेस्ट न्यूफेस का पुरस्कार मिला.

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इसके बाद जूही चावला को कभी पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी. जूही चावला ने ‘प्रतिबंध’, ‘स्वर्ग’, ‘बोल राधा बोल’, ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ ‘लुटेरे’, ‘आईना’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘डर’, ‘साजन का घर’, ‘यस बॉस’, ‘इश्क’, ‘अर्जुन पंडित’, ‘डुप्लीकेट’, ‘भूतनाथ’, ‘गुलाब गैंग’ जैसी कई बड़ी फिल्मों में काम किया. इसके बाद जूही ने निर्माता बनने की ओर कदम बढ़ाया और शाहरुख खान, अजीज मिर्जा के साथ ‘ड्रीम्ज अनलिमिटेड’ के बैनर तले ‘फिर भी दिल है हिंदुस्तानी’, ‘अशोका’, ‘चलते-चलते’ जैसी फिल्मों का निर्माण किया.

ऐसे शुरू हुई जूही चावला और जय मेहता की लव स्टोरी
जूही चावला ने अपने एक इंटरव्यू में अपनी लव स्टोरी के बारे में बताया. जूही ने बताया कि बिजनेमैन जय मेहता से वो करियर की शुरुआत में मिली थीं, लेकिन इसके बाद कुछ समय तक दोनों में कोई बात नहीं हुई थी. फिर जब एक बार फिर से दोनों की मुलाकात हुई, तो जय मेहता चुलबुली जूही के दीवाने हो गए. जूही जहां भी जाती थीं जय वहां फूलों का गुलदस्ता और प्यार भरे नोट्स लेकर पहुंच जाते थे. जूही ने अपने इंटरव्यू में ये भी बताया कि उनके जन्मदिन के समय जय मेहता ने एक ट्रक भरकर लाल गुलाब भेजे थे और इसे देखकर वो हैरान रह गई थीं. इतना प्यार करने वाला जीवनसाथी मिले, तो कौन लड़की राजी नहीं होगी. जूही ने भी जय मेहता को अपना हमसफ़र बना लिया और 1995 में उनसे शादी कर ली. आज उनके दो बच्चे हैं और जूही अपनी गृहस्थी में बहुत ख़ुश हैं. हालांकि जूही चावला के पति जय मेहता उनकी खूबसूरती के सामने फीके नज़र आते हैं, लेकिन दोनों में प्यार इतना गहरा है कि ये जोड़ी क्यूट नज़र आती है. जूही चावला और उनके पति की गृहस्थी सालों से बहुत अच्छी तरह चल रही है, दोनों ने अपने रिश्ते को बहुत समझदारी से निभाया है.

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आखिर जूही चावला ने क्यों छुपाई थी अपनी शादी की बात?
जूही चावला ने अपनी शादी की बात काफी लंबे समय तक छुपाई थी और जब उनकी शादी की खबर मीडिया तक पहुंची, तो कई लोगों के दिल टूट गए थे. जूही चावला के लाखों फैन्स उनकी शादी के बारे में कुछ भी नहीं जान सके. आखिर जूही चावला ने क्यों छुपाई थी अपनी शादी की बात? जूही चावला ने अपने एक इंटरव्यू में इस राज़ पर से पर्दा उठाया था. जूही ने बताया कि जब उनकी शादी हुई थी, उस समय लोगों के पास इंटरनेट नहीं होता था, उस वक़्त फोन पर कैमरा भी नहीं होता था. शायद यही वजह रही होगी कि उस समय जूही चावला की शादी की खबर लीक नहीं हो पाई. जूही ने अपने इंटरव्यू में कहा, “मैंने उस दौरान अपनी पहचान बनानी शुरू की थी और मैं उस वक़्त अच्छा-खासा काम कर रही थी. ये वही समय था जब जय मेरी जिंदगी में आए. मुझे डर था कि शादी की खबर से मेरा करियर डूब सकता है. मैं अपना करियर जारी रखना चाहती थी और शादी की बात छुपाना मुझे बीच का रास्ता लगा इसलिए मैंने अपनी शादी की बात छुपाई.”

टीवी के फेमस कपल गुरमीत चौधरी और देबिना की लव स्टोरी उनकी तरह ही बहुत ख़ास है. नाम, पैसा, प्यार, ख़ुशियां… बहुत कम लोगों को ये तमाम चीज़ें एक साथ मिल पाती हैं, लेकिन देबिना बनर्जी और गुरमीत चौधरी उन ख़ुशनसीब लोगों में से हैं, जिन्हें ज़िंदगी ने दिल खोलकर ख़ुशियां और प्यार दिया. हां, उनकी क़ामयाबी का ज़िक्र करते समय ये बताना ज़रूरी है कि ये सब तभी मुमकिन हुआ, जब देबिना और गुरमीत ने न स़िर्फ एक-दूसरे का हाथ थामा, बल्कि एक-दूसरे के सपोर्ट सिस्टम भी बने. देबिना और गुरमीत चौधरी टीवी के उन रोमांटिक कपल्स में से एक हैं, जो ये अच्छी तरह जानते हैं कि बिज़ी लाइफ में भी रोमांटिक कैसे रहा जा सकता है.

Gurmeet Chaudhary And Debina Banerjee

ऐसे शुरू हुई गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी की लव स्टोरी
देबिनाः गुरमीत मेरी फ्रेंड के बॉयफ्रेंड के दोस्त थे और अपने दोस्त के साथ अक्सर हमारे घर आया करते थे. फिर मेरी फ्रेंड और उसका बॉयफ्रेंड अपनी रोमांटिक बातों में बिज़ी हो जाते थे और हम दोनों अकेले पड़ जाते थे. ऐसे में हमारे पास एक-दूसरे से बातें करने के अलावा और कोई चारा नहीं होता था. धीरे-धीरे हमारी दोस्ती बढ़ी और पता ही नहीं चला कब प्यार हो गया. (हंसते हुए) मज़े की बात ये है कि उन दोनों का ब्रेकअप हो गया और हमारी शादी हो गई.

गुरमीतः देबिना के आने से मेरी लाइफ में एक अच्छा दोस्त आया, जिससे मैं अपने मन की हर बात कह सकता हूं. देबिना से मुलाक़ात के एक महीने बाद ही मैं उसे दिल दे बैठा. मैं देबिना के बिना जी नहीं सकता, इस बात का एहसास मुझे उसी व़क्त हो गया था. फिर बहुत जल्दी ही हमने शादी का फैसला कर लिया.

बहुत अच्छी अंडरस्टैंडिंग है गुरमीत और देबिना के बीच
देबिनाः न मैं गुरमीत के बिना एक क़दम चल सकती हूं और न ही गुरमीत. हम हर काम में एक-दूसरे की सलाह लेते हैं. एक्टिंग के मामले में भी हम एक-दूसरे के काम को एक क्रिटिक की तरह देखते हैं और बेबाक राय देते हैं. इससे हमें अपने काम को सुधारने का मौक़ा मिलता है.

गुरमीतः देबिना बहुत समझदार है, हर सिच्युएशन को बड़ी आसानी से हैंडल कर लेती है. सफल शादीशुदा ज़िंदगी के लिए पति-पत्नी के बीच अच्छी अंडरस्टैंडिंग होनी ज़रूरी है. हम लकी हैं कि हमारे बीच बहुत अच्छी अंडरस्टैंडिंग है.

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Gurmeet Chaudhary And Debina Banerjee

एक्स्ट्रीम कपल हैं गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी
देबिनाः गुरमीत का हर काम एक्स्ट्रीम होता है. पहले मुझे ये सही नहीं लगता था, लेकिन आज उनकी क़ामयाबी देखकर लगता है कि एक्स्ट्रीम के बिना ये मुमकिन नहीं था. बैलेंस करने के लिए मैं हूं ना, लेकिन बिना एक्स्ट्रीम के सक्सेस नहीं मिल सकती. गुरमीत जब झलक दिख ला जा कर रहे थे, तो कई बार सुबह पांच बजे तक रिहर्सल करते थे, घर आकर स़िर्फ 10 मिनट लेटते थे और फिर नहा-धोकर पुनर्विवाह सीरियल की शूटिंग के लिए चले जाते थे. अगर उनमें एक्स्ट्रीम करने का वो जुनून न होता, तो वो इतनी मेहनत कभी न कर पाते. मैं कभी इतनी मेहनत नहीं कर सकती.

गुरमीतः मैं जो भी काम करता हूं उसमें जान लगा देता हूं, फिर चाहे वो एक्टिंग हो या डे टु डे के अन्य काम. मैं पूरी ईमानदारी से वर्कआउट करता हूं, डायट फॉलो करता हूं, (हंसते हुए) और जिस दिन आलस करता हूं, उस दिन उसे भी पूरी शिद्दत के साथ करता हूं. उस दिन मैं कोई काम नहीं करता, वर्कआउट नहीं करता, जमकर खाता हूं. मेरा हर काम ऐसा ही होता है.

ऐसा है गुरमीत और देबिना का टाइम मैनेजमेंट
देबिनाः हम दोनों का शेड्यूल बिज़ी रहता है इसलिए हम एक-दूसरे के साथ समय बिताने का कोई मौक़ा नहीं गवांते, जैसे फ्री टाइम में मुझे यदि पार्लर जाना है, लेकिन गुरमीत घर में हैं, तो मैं पार्लर नहीं जाती. वो टाइम मैं गुरमीत को देती हूं.

गुरमीतः कई बार ऐसा भी होता है कि हम दोनों शिफ्ट्स में काम करते हैं और कई दिनों तक साथ समय नहीं बिता पाते. काम की वजह से लंबी छुट्टी भी नहीं मिल पाती. ऐसे में 2-3 दिन का व़क्त मिलने पर उसे ट्रैवलिंग में बर्बाद करने की बजाय हम शहर के ही किसी अच्छे होटल में रूम बुक करके वहां अपने हॉलिडेज़ एंजॉय करते हैं.

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Gurmeet Chaudhary And Debina Banerjee

ऐसा है गुरमीत और देबिना का घर
देबिनाः हम दोनों ने अपने घर को बहुत प्यार से सजाया है. घर की हर एक चीज़ हमने बड़े शौक़ से ख़रीदी है. हमारे पास एक डॉग भी है इसलिए घर का इंटीरियर करवाते समय हमने उसकी सहूलियत का भी ध्यान रखा. हमें व्हाइट कलर और ज्योमैट्रिक डिज़ाइन का मॉडर्न डेकोर पसंद है, बहुत डार्क, हैवी, फंकी डेकोर हमें अच्छा नहीं लगता.

गुरमीतः हम दोनों को घर में व्हाइट कलर बहुत पसंद है. इससे घर साफ़ और बड़ा नज़र आता है. घर आने पर एक अलग-सा सुकून मिलता है इसलिए आपको हमारे घर में ज़्यादातर व्हाइट कलर ही नज़र आएगा.

ऐसे मनाते हैं गुरमीत और देबिना हर त्योहार
देबिनाः हम हर त्योहार साथ मनाते हैं. अभी गणपति फेस्टिवल भी हमने साथ ही मनाया. हम हर साल डेढ़ दिन के लिए गणपति घर लाते हैं. इसके लिए हम पहले से ही छुट्टी ले लेते हैं और अच्छी तरह तैयार होकर दोस्तों को घर बुलाते हैं. ये सब करना हमें अच्छा लगता है.

गुरमीतः मैं आर्मी बैकग्राउंड से हूं और आर्मी में हर त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, इसलिए मैं भी हर त्योहार धूमधाम से मनाता हूं. मेरा असर अब देबिना पर भी पड़ गया है, वो भी ऐसा ही करती है. देबिना और मेरी कोशिश होती है कि त्योहार के समय हम शहर में ही रहें. त्योहार के समय हम दोस्तों को घर बुलाते हैं, यही मौक़ा होता है जब हम अपनी फैमिली और फ्रेंड्स के साथ व़क्त गुज़ार पाते हैं. त्योहारों की ख़ुशी हमारे चेहरे पर साफ़ नज़र आती है.

हमेशा एक दूजे के साथ रहना चाहते हैं गुरमीत और देबिना
देबिनाः हमने करियर में कितनी सफलता हासिल की, अपनी लाइफ स्टाइल में कितनी लग्ज़री जुटा ली, ये सब हमारे लिए सेकेंडरी चीज़े हैं. प्रोफेशनल अचीवमेंट्स से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हमारा साथ है. हम साथ हैं और ख़ुश हैं, ये हमारे लिए सबसे बड़ा अचीवमेंट है.

गुरमीतः मेरा परिवार ही मेरे लिए सबकुछ है इसलिए परिवार में किसी को कुछ भी हो जाए तो मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता. मेरा परिवार ही मेरी ताक़त भी है और मेरी एनर्जी भी.

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Gurmeet Chaudhary And Debina Banerjee

ये है गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी का स्टाइल मंत्र
देबिनाः मैं अपने मूड और मौ़के के हिसाब से कपड़े पहनती हूं. त्योहार या किसी ख़ास मौ़के पर सजना-सवंरना मुझे अच्छा लगता है.

गुरमीतः मैं हर 2-3 महीने में अपना लुक बदलता रहता हूं. मुझे एक ही तरह का बोरिंग लुक पसंद नहीं. मेरे पास वॉचेज़, परफ्यूम और सनग्लासेस का अच्छा-खासा कलेक्शन है और ये सब मुझे मेरे फैन्स ने दिए हैं. मैं बहुत ख़ुशनसीब हूं कि मुझे दर्शकों का इतना प्यार मिला.

ये है गुरमीत चौधरी और देबिना बनर्जी का करियर ग्राफ
गुरमीत चौधरी: रामायण, गीत- हुई सबसे पराई, पुनर्विवाह, झलक दिखला जा- सीज़न 5, नच बलिए- सीज़न 6, फियर फैक्टर- खतरों के खिलाड़ी- सीज़न 5,
फिल्म- वजह तुम हो, ख़ामोशियां, मि. एक्स, हेट स्टोरी 3, कोई आप सा, हेट स्टोरी 4, लाली की शादी में लड्डू दीवाना

देबिना बनर्जी: रामायण, पति, पत्नी और वो, चिड़िया घर, नच बलिए- सीज़न 6, फियर फैक्टर- खतरों के खिलाड़ी- सीज़न 5, यम हैं हम, ख़ामोशियां (फिल्म)

– कमला बडोनी

बॉलीवुड एक्ट्रेस रेखा (Rekha) की खूबसूरती के लाखों दीवाने हैं. रेखा का साड़ी पहनने का अंदाज़, उनकी मखमली आवाज़, उनका मेकअप सबकुछ ख़ास होता है. रेखा की एक झलक पाने के लिए उनके फैन्स बेकरार रहते हैं. ‘गुम है किसी के प्यारे में’ (Ghum Hain Kisi Ke Pyar Mein) सीरियल के प्रोमो वीडियो में रेखा का दिलकश अंदाज़ लाजवाब है. ये वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है. ‘गुम है किसी के प्यारे में’ का प्रोमो वीडियो देखकर सबके मन में एक ही सवाल है कि क्या रेखा अब टीवी डेब्यू करने जा रही हैं?

क्या अब टीवी पर नज़र आएंगी रेखा?
बॉलीवुड फिल्मों में अपने शानदार अभिनय से लाखों दिलों को जीतने वाली बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस रेखा अब टीवी पर नज़र आएंगी. जी हां, अब आप रेखा को सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ देख सकेंगे. इस शो का प्रोमो जारी हो चुका है और ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. प्रोमो की शुरुआत में रेखा अपना पॉपुलर गाना- ‘गुम है किसी के प्यार में दिल सुबह-शाम’ गुनगुनाते नजर आ रही हैं. इसके बाद रेखा कहती हैं- ‘आप लोग सोच रहे होंगे न कि मैं ये गाना स्टार प्लस पर क्यों गुनगुना रही हूं.” फिर रेखा कहती हैं, दरअसल, ये गीत मेरे दिल के बहुत करीब है, इसमें कही एक कसक छुपी हुई है, जहां प्यार का इज़हार तो है, लेकिन उसका नाम लेने की इजाज़त नहीं है. जब दिल किसी के प्यार में गम रहे, तो मोहब्बत इबादत बन जाती है. इस गीत ने विराट की प्रेम कहानी को जन्म दिया है, जहां फ़र्ज़ की राह पर चलते-चलते उसने अपने प्यार की कुर्बानी दे दी. विराट आज भी तड़प रहा है इंतज़ार में. आखिर उसका दिल गुम है किसी के प्यार में.”

(वीडियो क्रेडिट- विरल भयानी इंस्टाग्राम)

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रेखा के इस प्रोमो वीडियो को देखकर उनके फैन्स काफी उत्साहित हैं. ‘गुम हैं किसी के प्यार में’ के प्रोमो वीडियो में रेखा हमेशा की तरह गॉर्जियस नज़र आ रही हैं. वीडियो में रेखा की कांजीवरम साड़ी, हैवी ज्वेलरी और खूबसूरत मेकअप लाजवाब लग रहा है. बता दें कि अभी तक यह पता नहीं चला है कि रेखा शो में किस तरह का रोल प्ले करेंगी. स्टार प्लस पर आने वाला सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ एक पुलिस अफसर की प्रेम कहानी पर आधारित है. प्रोमो वीडियो को देखकर यह अंदाजाय लगाया जा रहा है कि इसकी कहानी लव ट्राइएंगल पर आधारित है. इस सीरियल में नील भट्ट, आयशा सिंह और ऐश्वर्या शर्मा मुख्य भूमिका में नज़र आएंगे.

शादी से लेकर हनीमून तक के सफ़र में वे हर पल मेरे संग बने रहने का प्रयास करते रहे और मैं किसी-न-किसी बहाने दूर छिटकने का. ख़ासकर हनीमून के वक़्त, तो मैं इस बात को लेकर काफ़ी काॅन्शियस हो गई थी कि लोग हमें साथ-साथ देखकर उल्टे-सीधे ताने न कसने लगें.

कहते हैं, शादी और हनीमून एक लड़की की ज़िंदगी के सबसे हसीन पल होते हैं. जिनका वह तरूणाई से यौवनावस्था तक बेसब्री से इंतज़ार करती है. मेरी ज़िंदगी में भी ये पल आए, लेकिन अफ़सोस मन में इन्हें लेकर मुझे कोई खु़शी या उत्साह नहीं था. दरअसल, परिस्थितियां कुुछ ऐसी बन पड़ी थीं कि जिस लड़के से मेरी शादी तय हुई थी, वह किसी मायने में मेरे सपनों के राजकुमार से मेल नहीं खा रहा था. छोटा कद, सांवला रंग, दुबली काया, चेहरे पर दाग़, जबकि अपने सौन्दर्य को लेकर मैंने हमेशा राजकुमारी और चंदा जैसी उपमाएं ही सुनी थीं.
शादी से लेकर हनीमून तक के सफ़र में वे हर पल मेरे संग बने रहने का प्रयास करते रहे और मैं किसी-न-किसी बहाने दूर छिटकने का. ख़ासकर हनीमून के वक़्त, तो मैं इस बात को लेकर काफ़ी काॅन्शियस हो गई थी कि लोग हमें साथ-साथ देखकर उल्टे-सीधे ताने न कसने लगें. इसलिए जैसे ही हम अपने गंतव्य मनाली पहुंचे, तो होटल में पहुंचते ही मैं रिसेप्शन से अपने सुइट की चाबियां लेकर सीढ़ियां चढ़ने लगी. जबकि मेरे पति बैरे को सामान उठाने में मदद करने लगे.
सुइट में पहुंचकर मैं राहत की सांस ले ही रही थी कि नीचे से हो-हल्ला सुनाई पड़ा. मैंने खिड़की से नीचे झांका, तो देखा एक लड़की अपनी साड़ी संभालती तेजी से भाग रही है, उसके पीछे-पीछे मेरे पति और उनके पीछे चार-पांच लोगों की भीड़. मेरी तो रूह कांप उठी.
‘हे भगवान! सूरत के साथ-साथ क्या यह इंसान चरित्र से भी..?’ मुझे चक्कर-सा आने लगा और मैं बिस्तर पर बेसुध गिर गई. जोर-जोर से दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ से मेरी तंद्रा टूटी. बाहर एक गार्ड को खड़ा देखा. उसने मुझसे पूछा कि सुनिल कुमार आपके पति हैं? तो मेरा संदेह यकीन में बदल गया. ‘अब क्या होगा? मुझे थाने जाकर अपने पति के बेकसूर होने की दुहाई देनी होगी?’
कांपते कदमों से मैं उसके संग नीचे आई. तो वही लड़की लपककर भीड़ चीरती मेरे एकदम पास आ गई.
‘आपके पति ने मेरा सब कुछ लुटने से बचा लिया.’ वह भावविह्ल हो रही थी. उसके पति ने उसे संभाला. पता चला वह भी हनीमून कपल था. विदा होते वक़्त रिवाज़ के अनुसार लड़की ने भारी साड़ी और सारे गहने पहन रखे थे, जो उसके पति ने उतरवाकर उसके पर्स में रखवा दिए थे. वह जब रिसेप्शन पर चाबी ले रहा था, तभी एक बदमाश, जो जाने कब से उन पर नज़र रखे हुए था, लड़की का पर्स झपट्टा मारकर ले उड़ा.
साड़ी संभालते वह उसके पीछे लपकी. मेरे पति तुरंत उसकी मदद को दौड़े. और मैं बेवकूफ़ बिना पूरी बात जाने ही न जाने क्या समझ बैठी? अपनी सोच पर मैं बेहद लज्जित हो उठी. तभी सामने से लोग हटे, तो एक बैंच पर मुझे अपने पति बैठे दिखे. उनके पैर में चोट आई थी और एक आदमी मरहमपट्टी कर रहा था. मैं दौड़कर उनसे लिपट गई और फूट फूटकर रोने लगी. वे मुझे प्यार से सहलाने लगे, “कुछ भी तो नहीं हुआ, मैं बिल्कुल ठीक हूं.”
मैं कहना तो चाहती थी कि ये पश्चाताप और खु़शी के मिलेजुले आंसू हैं, जिन्होंने मेरे मन का सारा मैल धो दिया है. पर निःशब्द मंत्रमुग्ध उन्हें निहारती ही रह गई, क्योंकि मेरे सामने बेहद ख़ूबसूरत, उज्ज्वल, मज़बूत कद-काठीवाला मेरे सपनों का राजकुमार जो खड़ा था… जो मेरा पहला प्यार ही नहीं जन्मभर का साथ भी बन गया था…

संगीता माथुर

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वक़्त के साथ बहुत कुछ बदला है, प्यार करने अंदाज़ भी अब पहले जैसा नहीं रहा. पहले जहां मोहब्बत के नाम से ही एक सिहरन-सी होने लगती थी, अब वो सिहरन सीधे सेक्स तक पहुंच गई है. लव से लेकर लस्ट तक, प्यार से लेकर सेक्स तक… आज की पीढ़ी को सबकुछ फटाफट चाहिए. इनकी इंस्टेंट लव स्टोरी में सब्र जैसे शब्द के लिए कोई जगह नहीं. आज की युवा पीढ़ी के लिए सेक्स अब बंद कमरे में ढंके-छुपे तौर पर डिस्कस की जाने वाली चीज़ नहीं रही, अब लोग खुलकर अपनी सेक्स डिज़ायर को जाहिर करते हैं और इसे पाने के लिए उन्हें रिश्ते में बंधने का सब्र भी नहीं है. भूख-प्यास की तरह जब सेक्स की चाह होती है, तो लोग इसे फटाफट पा लेना चाहते हैं, इसके लिए उन्हें इंतज़ार करना मंज़ूर नहीं. सेक्स में नैतिकता जैसी बातें अब बहुत पुरानी हो गई हैं, आज की पीढ़ी इसे फिज़िकल हंगर से जोड़कर देखती है. बदलाव की ये लहर आख़िर हमें कहां ले जा रही है?

Meaning Of Love For Today's Youth

सेक्स चाहिए, पर बंधन नहीं
साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं, आज के कई युवाओं को लगता है कि जब सेक्स आसानी से उपलब्ध है तो शादी के बंधन में में क्यों बंधें? आज की पाढ़ी की शहनशक्ति कम हो गई है, वो किसी भी मामले में एडजस्ट करने को तैयार नहीं, इसीलिए तलाक़ के केसेस बढ़ने लगे हैं. फिर पैरेंट्स भी बच्चों के तलाक़ पर बहुत ज़्यादा हो-हल्ला नहीं मचाते. पहले तलाक़ सोशल स्टिगमा समझा जाता था, लेकिन अब तलाक़ होना बड़ी बात नहीं समझी जाती. तलाक के प्रति लोगों की एक्सेप्टेबिलिटी बढ़ गई है. अब ये नहीं समझा जाता कि तलाक़ के बाद ज़िंदगी खराब हो गई. इसी तरह आज से 10 साल पहले शादी करना ज़रूरी समझा जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब कोई शादी नहीं करना चाहता तो लोगों को इसमें कोई आश्चर्य नहीं होता.

पार्टनर नहीं, पैकेज चाहिए
आजकल प्यार, शादी, बच्चे सबकुछ नाप-तौल कर होता है. लोगों को लाइफ पार्टनर नहीं, कंप्लीट पैकेज चाहिए, जो उनकी शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक हर ज़रूरत पूरी करे. जब दिल का रिश्ता ही शर्तों पर हो, तो उसके टिकने की उम्मीद कितनी की जा सकती है. यही वजह है कि आजकल के रिश्ते टिकाऊ नहीं हैं. इन रिश्तों में प्यार के अलावा बाकी सबकुछ होता है इसीलिए प्यार की तलाश बाकी रह जाती है और एक्स्ट्रा मैरिटल रिश्ते बन जाते हैं.

बदल गई है शादी की परिभाषा
साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं, पहले शादी के बाद एक-दो साल पति-पत्नी एक-दूसरे को समझने में गुजार देते थे. सेक्स का नया-नया अनुभव उनके रिश्ते में रोमांच बनाए रखता था. फिर बच्चे, उनकी परवरिश, नाते-रिश्तेदार… लंबा समय गुजर जाता था इन सब में. आज के कई युवा शादी के पहले ही सेक्स का अनुभव ले चुके होते हैं, उस पर करियर बनाने के चलते शादियां देर से हो रही हैं, ऐसे में शादी में उन्हें कोई रोमांच नज़र नहीं आता. उन्हें शादी स़िर्फ ज़िम्मेदारी लगती है इसलिए वो शादी से कतराने लगते हैं.

इसका एक बड़ा नुक़सान ये भी है कि युवा जब सेक्स पर जल्दी एक्सपेरिमेंट करते हैं तो इससे जल्दी ऊब भी जाते हैं और 40 की उम्र तक उनकी सेक्स लाइफ बोरिंग हो जाती है. उनका ज़िंदगी से लगाव कम हो जाता है. कोई थ्रिल नहीं रहता. अब शादी की परिभाषा बदल गई है. लेट मेरिज, लेट चिल्ड्रेन (कई कपल तो बच्चे भी नहीं चाहते), वर्किंग कपल, न्यूक्लियर फैमिलीज़… समय के साथ परिवार का ढांचा और उसकी ज़रूरतें बदल गई हैं. बदलाव की ये लहर बहुत कुछ बदल रही है. 10 साल पहले जहां लोग इंटर कास्ट मैरिज को पचा नहीं पाते थे, अब सहजता से लेने लगे हैं. इसी तरह अब एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, लिव इन रिलेशन जैसी बातें भी लोगों को चौंकाती नहीं हैं.

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Meaning Of Love For Youth

बढ़ रहे हैं एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स
काम के बढ़ते घंटे, ऑफिस में महिला-पुरुष का घंटों साथ काम करना, पति-पत्नी की असंतुष्ट सेक्स लाइफ आदि के कारण एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स की तादाद बढ़ रही है. कई पति-पत्नी सेक्स का पूरा आनंद नहीं ले पाते (ख़ासकर महिलाएं), फिर भी पार्टनर को ख़ुश करने के लिए झूठ बोलते हैं. ऐसे में जब आप अपनी सेक्स लाइफ़ से संतुष्ट ही नहीं हैं, तो आपका ध्यान यहां-वहां भटकेगा ही. अंतरंग रिश्ते में भी हम मुखौटा ओढ़ लेते हैं, तो संतुष्टि मिलेगी कैसे? ऐसे असंतुष्ट कपल्स जहां भी भावनात्मक सहारा पाते हैं, वहीं शारीरिक रूप से भी जुड़ जाते हैं. पति, बच्चे, घर-परिवार, ऑफिस सभी जगह मैकेनिक लाइफ जी रही महिलाएं जाने-अनजाने घर के बाहर सुकून तलाशने की चाह में मन के साथ-साथ तक का रिश्ता भी जोड़ लेती हैं.

सेक्स का विकृत रूप सामने आया है
मीडिया प्रोफेशनल अरुण कुमार कहते हैं, हमारे देश में आज भी लोग सेक्स पर बात करने से तो कतराते हैं, लेकिन हर पहलू को घोलकर पी जाना चाहते हैं. पहले भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होते थे, पति नपुंसक हो तो परिवार के किसी और सदस्य के साथ सेक्स करके बच्चा पैदा किया जाता था, लेकिन तब इन बातों पर इतना हो-हल्ला नहीं मचाया जाता था. अब सेक्स को एक प्रोडक्ट के रूप में देखा जाने लगा है. सेक्स टॉनिक, कंडोम आदि बेचने वाली कंपनियां अपने विज्ञापनों में स्त्री के शरीर को अश्लील रूप में पेश करके सेक्स को भुनाती हैं, ऐसे विज्ञापान युवाओं को सेक्स पर एक्सपेरिमेंट करने के लिए उकसाते हैं. बदलते परिवेश में सेक्स विकृत रूप में सामने आ रहा है, तभी तो बाप ने बेटी का रेप कर दिया, भाई-बहन के शारीरिक संबंध बन गए जैसी ख़बरें देखने-सुनने को मिलती हैं. हम लोग सेक्स पर खुलकर बात करने से जितना ज़्यादा कतराते हैं, इसका उतना ही विभत्स रूप हमारे सामने आता है. हर कोई जैसे इसी में उलझ कर रह जाता है, सेक्स पर हर तरह की रिसर्च कर लेना चाहता है.

सेक्स में संतुष्टि ज़रूरी है
बैंक कर्मचारी रोहित सिंह कहते हैं, सेक्स अब इतनी छोटी चीज़ हो गई है कि किसी को नीचा दिखाने, बदला लेने, अपना कोई काम निकालने, झूठी शान बघारने, प्रमोशन पाने तक के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. सेक्स को साधना के रूप में किया जाए तो इसके आनंद को समझा जा सकता है. जो मिला उसी से शारीरिक संबंध बना लिया, नोच-खंसोटकर, बलात्कार करके शारीरिक भूख मिटा ली, ऐसा करके कभी तृप्ति नहीं मिलती, बल्कि लालसा बढ़ती जाती है और व्यक्ति इसी में उलझकर रह जाता है.

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Meaning Of Love

ये है सेक्स का सच
* 33 प्रतिशत महिलाएं मानती हैं कि शादी के कुछ सालों बाद उनकी सेक्स लाइफ बोरिंग हो गई है.
* 60% पुरुष चाहते हैं कि सेक्स के लिए महिला पहल करे.
* हर पुरुष हर सात मिनट में कम से कम एक बार सेक्स के बारे में ज़रूर सोचता है.
* पुरुष तथा महिलाएं दोनों ही एक दिन में कई बार ऑर्गेज़्म का अनुभव कर सकते हैं.
* जर्नल ऑफ सेक्सुअल मेडिसिन में छपी रिपोर्ट के अनुसार, बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा कम हो जाती है.
* एक रिसर्च के अनुसार, कॉलेज के दौरान जो लड़के सेक्स में लिप्त रहते हैं, वे अक्सर डिप्रेशन में चले जाते हैं. जबकि सेक्स न करने वाले विद्यार्थी नॉर्मल रहते हैं.
* ऐसे पुरुष जिनके अनेक स्त्रियों से संबंध होते हैं, वे सेक्स को बहुत महत्वपूर्ण तो समझते हैं, लेकिन अपने रिलेशनशिप से पूरी तरह संतुष्ट नहीं रहते.
* जो पुरुष ज़्यादातर सेक्सुअल फैंटेसी में रहते हैं, वे अपने रोमांटिक रिलेशनशिप से कम संतुष्ट रहते हैं.
– कमला बडोनी

ढलती शाम के आसमान में छाया केसरिया रंग मुझे बेहद प्रिय है. किस उम्र में मन उस केसरिया रंग में रंगना शुरू हुआ वह तो याद नहीं, लेकिन जिस उम्र में मन स्मृतियों को संजोने लगा तभी से मैंने हर ढलती सांझ में ख़ुद को छत पर खड़े होकर आसमान को निहारते पाया. जाने क्या कशिश है इस संधि काल में कि मैं कहीं भी होती, कुछ भी काम कर रही होती, पैर अपने आप सीढ़ियां चढ़कर मुझे छत पर ले आते और मैं उस जादूगर की करिश्माई चित्रकारी में अचंभित मोहित-सी घंटों उस रंग में डूबी छत पर खड़ी रहती, जब तक कि वह केसरिया रंग गहरा लाल, फिर नीला, फिर बैंगनी होते हुए रात के काले आंचल में ना समा जाता.
उस दिन भी मैं छत पर खड़ी सांझ के आसमान को पल-पल रंग बदलते देख रही थी. सामने सड़क के उस पार लगे अमलतास और कचनार के घने पेड़ों पर पंछी कलरव कर रहे थे. नीलगिरी पर बने घोसलों में पंछियों की आवाजाही चल रही थी. गुलमोहर की शाखाओं में पंछियों का झुंड आ बैठता और एक साथ उड़ जाता. आसमान में भी झुंड के झुंड पंछी उड़कर अपने-अपने घरों को लौट रहे थे. मैं मुग्ध-सी इस दृश्य में खोई हुई थी कि अचानक ऐसा लगा कि मैं छत पर अकेली नहीं हूं कोई और भी है जो इस सांझ के जादू में खोया हुआ है. मैंने चौंककर इधर-उधर देखा, पड़ोसवाली छत पर कोने में मुंडेर पर हाथ रखे 20-22 साल का एक लड़का खड़ा था. पड़ोस में एक वृद्ध चाचा-चाची रहते थे, जिनके दोनों बेटे बाहर थे. यह शायद कोई मेहमान आया होगा. मैंने सरसरी निगाह से उसे देखा, ऊंचा-पूरा, साफ रंग, करीने से संवरे बाल. आसमान में उड़ते पंछियों को देखती उसकी नज़र अचानक मुझसे टकरा गई और मुझे अपनी और देखता पाकर वह मुस्कुरा दिया और मैं झेंपकर फिर आकाश को देखने लगी. लेकिन बरबस रोकने पर भी नज़र उसकी तरफ़ उठ जाती और उसे भी अपनी तरफ़ देखते पाकर दिल धड़क जाता. घिरती रात में जब मैं नीचे जाने लगी, तब मन आसमान के केसरिया रंग के साथ ही उसके चेहरे पर छिटके गुलाल में भीग चुका था. उस रोज़ अनायास ही कमरे में कदम रखते ही पांव आईने के सामने ठिठक गए और रातभर पूर्णिमा के चांद की चांदनी केसरिया रंग में लिपटी रही.
दूसरे दिन शाम बड़ी देर बाद आई और दोपहर बड़ी लंबी लगी. थोड़ा जल्दी ही छत पर पहुंच गई. आंखें सीधे सामनेवाली छत पर टिक गई, वह भी वही खड़ा इधर ही देख रहा था. मेरे पैर क्षणभर को कांप गए, धड़कने अनियंत्रित हो गई. मैंने दृष्टि सामनेवाले पेड़ों पर गड़ा दी, लेकिन मन उसकी ओर ही लगा रहा और तन उसकी नज़रों को अपने पर टिकी महसूस कर रोमांचित होता रहा. मैं जानने को व्याकुल हो रही थी कि वह कौन है.
दूसरे ही दिन मां से पता चला वह चाची के भाई का बेटा है और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए यहां आया है. उस दिन रसोईघर का बल्ब फ्यूज हो गया, तो मां ने खिड़की से आवाज़ देकर उसे ही बुलाया. शेखर, हां यही नाम था उसका और उस दिन वह छत से सीधे मेरे घर ही नहीं चुपके से मेरे दिल में भी भीतर चला आया. मैं टेबल पर बैठी पढ़ने का ढोंग किए किताब पर आंखें गड़ाए बैठी थी, लेकिन ध्यान सारा उस पर ही था. बल्ब बदलने के बाद वह कमरे के दरवाज़े पर क्षणभर को ठिठक गया, “क्या पढ़ती हो, किस ईयर में हो?”
मेरे हाथ-पैर ठंडे पड़ गए, दिल इतनी तेज़ी से धड़कने लगा कि मुंह से बोल ही नहीं निकल पाए. मां ने ही जवाब दिया, “फर्स्ट ईयर में है तुम भी तो साइंस पढ़े हो, इसे केमिस्ट्री पढ़ा दिया करना अगर समय हो एक घंटा.”
मेरे मन की तो बिना मांगे मुराद पूरी हो गई और दूसरे ही दिन से वह रोज़ शाम को मुझे पढ़ाने आने लगा. दिनभर अपनी पढ़ाई करता, शाम के सिंदूरी एहसास को हम दोनों साथ में जीते और धुंधलका छाते ही नीचे आकर पढ़ाई में लग जाते. कभी ज़िद करके मां उसे खाना खिलाकर ही मानती. यूं भी जब दोनों घरों के बीच पारिवारिक आत्मीयता थी, तो वह घर के सदस्य जैसे ही था. वह पढ़ाता तो मुझे आधा समझ आता आधा ध्यान उसमें रहता. कितना सौम्य, शांत, सुंदर था वह. आवाज़ विनम्र होकर भी गहरी थी. आंखें नीचे झुकी रहती मेरी, लेकिन उनके भाव कैसे कहां छुपाती. समझ तो शेखर को भी सब आ रहा होगा, लेकिन उसने कभी मर्यादा की सीमा का उल्लंघन नहीं किया.

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अठारहवें वर्ष में प्रवेश कर चुके मेरे मन के कुंवारे अनछुए भाव शेखर की आंखों में तैरते सिंदूरी डोरों से बंध गए थे. मन अजब-सी रूमानियत की ख़ुमारी में भीगा रहता. एकांत में मन करता कि उसके चौड़े सीने में अपना चेहरा छुपा लूं और वह मेरे बाल सहलाता रहे, लेकिन आंखों से सब कुछ स्पष्ट कर देने के बाद भी शेखर की ज़ुबान हमेशा ख़ामोश रही और व्यवहार सदा मर्यादित. चार महीने कब गुज़र गए पता नहीं चला. प्रतियोगी परीक्षा ख़त्म होने के दो ही दिन बाद उदास आंखों में तैरती नमी के बीच मुझे नज़र भर देख कर वह चला गया. फिर कभी नहीं लौटा. बहुत दिनों बाद पता चला उनकी शादी उनके पिता ने बचपन में ही अपने दोस्त की बेटी से पक्की कर दी थी. छत पर नितांत एकांत पलों में भी वह क्यों स्वयं पर इतना कठोर संयम रखते थे, तब समझ आया. मेरा कोमल मन टूट गया. अक्सर छत पर उनका मुस्कुराता चेहरा और बोलती आंखें याद कर रो देती. कैसे कहूं कि उन्हें भी मुझसे प्यार नहीं था, लेकिन पिता के वचन के विरुद्ध जाने के संस्कार नहीं थे उनके.
बरसों बीत गए, लेकिन आज भी मेरा पहला प्यार छत पर उसी कोने में मुस्कुराता खड़ा महसूस होता है. ढलती सांझ के आसमान के साथ ही मन का भी एक कोना शेखर के प्यार के केसरिया रंग में रंगा हुआ है. नीड़ों को लौटते पंछियों को देखकर एक कसक-सी उठती है मन में, काश! इन पंछियों की तरह मेरा शेखर भी कभी लौट पाता…

Dr. Vinita Rahurikar
डॉ. विनीता राहुरीकर
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